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कई समस्याओं का एक ही समाधान विटामिन-ई

क्या आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रिजल्ट नहीं मिल रहा? या फिर आपकी स्किन बेजान और रूखी हो गई है? अगर हां, तो विटामिन-ई आपकी कई समस्याओं का एक ही समाधान हो सकता है! इसे सिर्फ एक विटामिन मत समझिए, यह एक सुपरफूड की तरह काम करता है- वजन घटाने से लेकर ग्लोइंग स्किन, मजबूत बालों और इम्युनिटी बढ़ाने तक, यह हर तरह से फायदेमंद है। बस जरूरत है इसे सही तरीके से अपने लाइफस्टाइल में शामिल करने की। तो चलिए, बिना देर किए जानते हैं कि Vitamin E आपके शरीर के लिए कितना जरूरी है और इसे किस तरह अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। वेट लॉस में कैसे मदद करता है Vitamin E? अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो विटामिन E आपकी जर्नी को आसान बना सकता है।     मेटाबॉलिज्म बूस्ट करता है: यह शरीर के फैट-बर्निंग प्रोसेस को तेज करता है।     एनर्जी लेवल बढ़ाता है: जिससे एक्सरसाइज के दौरान आप ज्यादा एक्टिव रहते हैं।     पाचन को बेहतर बनाता है: जिससे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और फैट लॉस आसान हो जाता है। त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए Vitamin E आपकी स्किन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह एक नेचुरल एंटी-एजिंग एजेंट है जो झुर्रियों और डलनेस को दूर करता है।     स्किन को हाइड्रेट करता है: ड्राई और रफ स्किन को मुलायम बनाता है।     फ्री रेडिकल्स से बचाव करता है: जिससे एजिंग के निशान जल्दी नहीं दिखते।     सन डैमेज से प्रोटेक्ट करता है: सूरज की हानिकारक किरणों से स्किन को बचाता है। मिलते हैं मजबूत और घने बाल अगर आपके बाल झड़ रहे हैं या रूखे-सूखे हो गए हैं, तो Vitamin E एक बेहतरीन उपाय हो सकता है।     बालों को जड़ों से मजबूत करता है     स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है     डैंड्रफ और स्कैल्प इन्फेक्शन से बचाता है इम्युनिटी को करे बूस्ट आज के समय में बीमारियों से बचने के लिए इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना बहुत जरूरी है। विटामिन E एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और हमें इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है। आंखों के लिए फायदेमंद क्या आपकी आंखें जल्दी थक जाती हैं या कमजोर हो रही हैं? Vitamin E आंखों की हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है। यह रेटिना को हेल्दी रखता है और मोतियाबिंद (Cataract) जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है। किन फूड्स से मिलता है Vitamin E? अगर आप नेचुरल तरीके से Vitamin E लेना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में यहां बताई 5 चीजें शामिल कर सकते हैं।     अवोकाडो: स्किन और हेल्थ दोनों के लिए फायदेमंद     बादाम और अखरोट: ब्रेन और हड्डियों के लिए जरूरी     सूरजमुखी के बीज: बालों और त्वचा के लिए बेस्ट     ब्रोकली और पालक: इम्युनिटी और हेल्थ को बूस्ट करने के लिए     ऑलिव ऑयल: हेल्दी फैट और ग्लोइंग स्किन के लिए  

30 मार्च से सर्वार्थसिद्धि योग में चैत्र नवरात्र की होगी शुरुआत, आठ दिन का रहेगा पर्वकाल

 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को देवी आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र का आरंभ होगा। तिथि मतांतर से इस बार नवरात्र आठ दिन के रहेंगे। खास बात यह है कि महापर्व के दौरान चार दिन रवियोग तथा तीन दिन सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा। साधना, आराधना की दृष्टि से यह योग बेहद महत्वपूर्ण है। इन योगों में की गई साधना साधक, आराधक को शुभ व मनोवांछित फल प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को रविवार के दिन वासंती नवरात्र का आरंभ होगा। सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और बढ़ी इस दिन रेवती नक्षत्र, बव करण तथा मनी राशि उपरांत मेष राशि का चंद्रमा रहेगा। पंचांग के इन पांच अंगों की मौजूदगी में घट स्थापना का अनुक्रम रहेगा। रेवती पंचक का नक्षत्र है, ऐसे में नवरात्र में की गई देवी की साधना, आराधना पांच गुना शुभफल प्रदान करेगी। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और भी बढ़ गई है। क्योंकि सर्वार्थसिद्धि योग सभी प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाला मना गया है। रेवती नक्षत्र से आरंभ साधना 5 गुना शुभ फल प्रदान करेगी इस बार नवरात्र का आरंभ और रेवती नक्षत्र में होने से यह विशेष फल प्रदान करेगी क्योंकि रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवां नक्षत्र माना जाता है। पांचवां नक्षत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होता है, तो विशेष कल्याणकारी माना गया है। अलग-अलग प्रकार के धर्म ग्रंथो में विशेष कर मुहूर्त चिंतामणि में इसका उल्लेख दिया गया है। इस दृष्टि से भी नवरात्र के दौरान की गई साधना विशेष फल प्रदान करेगी। तिथि का क्षय होने से 8 दिन की नवरात्रि इस बार नवरात्र आठ दिनों के रहेंगे। अलग-अलग पंचांगों में तिथि को लेकर के अलग-अलग प्रकार की गणना में बताया गया है। कुछ पंचांगों में तृतीया, कुछ पंचांग में द्वितीया तथा कुछ पंचांग में तृतीया व चतुर्थी संयुक्त दी गई है। इस दृष्टि से गणना का अलग-अलग प्रभाव दिया गया है। वर्षभर में चार नवरात्र विशेष पं.डब्बावाला ने बताया देवी की साधना, आराधना के लिए वर्षभर में चार नवरात्र विशेष माने गए हैं। इनमें दो प्राकट्य व दो गुप्त नवरात्र बताए हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र को प्राकट्य नवरात्र कहा जाता है। वहीं माद्य व आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहे गए हैं। लोकमान्यता में चैत्र नवरात्र बड़ी नवरात्र है, क्योंकि यह सृष्टि के आरंभ का दिन है। उज्जैन के लिए यह नवरात्र विशेष है, क्योंकि इसी दिन नगर दिवस भी मनाया जाता है। हरसिद्धि में प्रज्वलित होगी दीपमालिका देश के 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में चैत्र नवरात्र में देवी का नित नया श्रृंगार होगा। शाम को गोधूलि वेला में दीपमालिका प्रज्वलित की जाएगी। सिद्धपीठ गढ़कालिका माता मंदिर में भी दीपमालिका प्रज्वलित होगी। भक्त माता गढ़कालिका की कुमकुम पूजा करेंगे। शहर के अन्य देवी मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहेगा।

जेपी नड्डा के बाद किसे मिलेगी BJP की बागडोर ? कप्तान बनने की रेस में ये 7 नाम

  नईदिल्ली   भारतीय जनता पार्टी अपना अगला अध्यक्ष चुनने जा रही है। हालांकि, पार्टी शीर्ष पद के लिए किसे चुनेगी, कैसे चुनेगी और कब चुनेगी, यह अब तक साफ नहीं हो सका है। फिलहाल, भाजपा की कमान केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के हाथों में है। अटकलें हैं कि पार्टी इन 7 नेताओं में से किसी के नाम पर मुहर लगा सकती है। 4 आधार: पहला- क्षेत्र पार्टी तमिलनाडु और केरल में विस्तार की कोशिश में लंबे समय से जुटी हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा दक्षिण भारत से ही किसी नेता को यह पद सौंप सकती है। कर्नाटक में पार्टी दोबारा सरकार बनाने में असफल रही थी, लेकिन लोकसभा में केरल से खाता खोलने में सफल रही है। दूसरा- जेंडर भाजपा के इतिहास में हमेशा कप्तान पुरुष रहा है। अब हाल ही में रेखा गुप्ता के रूप में दिल्ली को महिला मुख्यमंत्री देने वाली पार्टी रुख में बदलाव कर सकती है और महिला प्रमुख का चुनाव कर सकती है। वहीं, पार्टी हाल के कई चुनावों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखती नजर आई है। तीसरा- वफादारी और अनुभव संगठन का तजुर्बा भी अध्यक्ष के चुनाव में बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है। ऐसे में पार्टी किसी युवा चेहरे के बजाए वरिष्ठ नेता का चुनाव कर सकती है। चौथा- संघ की मुहर महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव की बड़ी जीत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक की भूमिका अहम मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष पद पर नेता चुनने के लिए संघ की मुहर भी अहम साबित होगी। जी किशन रेड्डी 4 दशक से ज्यादा समय से भाजपा का हिस्सा केंद्रीय मंत्री रेड्डी को इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। दक्षिण भारत से भाजपा को आखिरी अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू के रूप में मिला था। वह तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष भी हैं। उनके साथ ही बंडी संजय कुमार का नाम भी चर्चा में है। वनथि श्रीनिवासन और डी पुरंदेश्वरी श्रीनिवासन तमिलनाडु से आती हैं और वह भाजपा की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने 2021 विधानसभा चुनाव में कोयंबटूर दक्षिण से कमल हासन को मात दी थी। खास बात है कि राज्य में 2026 में चुनाव होने हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भाजपा की चीफ और सांसद पुरंदेश्वरी को ‘दक्षिण की सुषमा स्वराज’ कहा जाता है। वह राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की रिश्तेदार हैं। धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव भाजपा के अहम रणनीतिकारों में शुमार प्रधान और यादव को इस रेस में गिना जा रहा है। 2024 में ही भाजपा ने ओडिशा में जीत हासिल की है और इससे पहले पूर्व से कभी कोई नेता संगठन के शीर्ष पद तक नहीं पहुंचा। महाराष्ट्र चुनाव के प्रभारी के तौर पर यादव ने भाजपा को बड़ी जीत दिलाई थी। साथ ही वह 2017 में उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे। मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान दोनों ही नेता पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और माना जाता है कि उन्हें आरएसएस का समर्थन भी हासिल है। एक ओर जहां हरियाणा के पूर्व सीएम खट्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। वहीं, मुख्यमंत्री के तौर पर कई बार मध्य प्रदेश की कमान संभाल चुके शिवराज सिंह चौहान का लंबा अनुभव है।

SIP निवेश वित्त वर्ष 25 में अब तक 32 प्रतिशत बढ़कर 2.63 लाख करोड़ रुपये रहा

नई दिल्ली भारत में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) निवेश वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 11 महीने (अप्रैल-फरवरी अवधि में) में 2,63,426 करोड़ रुपये रहा है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा  जारी डेटा से मिली।    एसआईपी निवेश वित्त वर्ष 25 में अब तक 32 प्रतिशत बढ़कर 2.63 लाख करोड़ रुपये रहा   यह आंकड़ा एसआईपी निवेश में सालाना आधार पर 32.23 प्रतिशत की बढ़त को दिखाता है। पूरे वित्त वर्ष 24 में एसआईपी के जरिए निवेश 1,99,219 करोड़ रुपये था। एसआईपी निवेश में बढ़ोतरी बाजार में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दिखाता है। फरवरी 2025 में एसआईपी निवेश 25,999 करोड़ रुपये रहा है, जो कि जनवरी 2025 में 26,400 करोड़ रुपये था। एम्फी के डेटा के मुताबिक, फरवरी में 44.56 लाख नई एसआईपी शुरू हुई हैं एम्फी के डेटा के मुताबिक, फरवरी में 44.56 लाख नई एसआईपी शुरू हुई हैं। हालांकि, इस दौरान 55 लाख के करीब एसआईपी बंद भी हुई हैं। लगातार बढ़ते निवेश के कारण एसआईपी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 12.38 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एसेट्स के 19.2 प्रतिशत के बराबर है।  शुद्ध निवेश लगातार 48वें महीने सकारात्मक रहा एम्फी द्वारा प्रस्तुत नए आंकड़ों से पता चला है कि फरवरी के दौरान 8.26 करोड़ एसआईपी खातों ने निवेश में सक्रिय योगदान दिया। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के नेहल मेश्राम के अनुसार, घरेलू निवेशकों ने फरवरी 2025 में इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में अपनी मजबूत भागीदारी जारी रखी है। इससे इस सेगमेंट में शुद्ध निवेश लगातार 48वें महीने सकारात्मक रहा है।  प्रतिकूल परिस्थितियों ने निवेश प्रवाह को कम कर दिया है बाजार में हालिया अस्थिरता के बावजूद, दीर्घकालिक निवेशक अपनी निवेश रणनीतियों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जो बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अनुशासित निवेश के महत्व को दर्शाता है। मेश्राम ने आगे कहा, “हालांकि, छोटी अवधि में प्रतिकूल परिस्थितियों ने निवेश प्रवाह को कम कर दिया है, लेकिन निरंतर निवेश से संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशकों का विश्वास मजबूत बना हुआ है।”

लड़कों की मोबाइल की वजह से नहीं हो रही शादी! MP के इस गांव में लोगों के सामने अजीबोगरीब समस्या

सिवनी मोबाइल की वजह से पति-पत्नी में अनबन की खबरें तो आपने खूब सुनी होंगी लेकिन एक ऐसा इलाका है जहां मोबाइल की वजह से ही लड़कों की शादी नहीं हो पा रही है. ये इलाका है सिवनी जिले के कुरई ब्लॉक में आने वाले नएगांव का. नयागांव एक वनग्राम है जो पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आता है. यहां कुंवारे लड़कों की तादाद बढ़ती जा रही है. कोई भी यहां अपनी लड़की की शादी करने के लिए तैयार नहीं होता. वजह है मोबाइल नेटवर्क का ना होना. नएगांव में किसी भी टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क नहीं मिलता. लोगों के पास मोबाइल तो हैं लेकिन बात करने के लिए गांव से तीन किमी दूर जाना पड़ता है, तब जाकर फोन पर बात हो पाती है. गांव के कुछ लड़के इसीलिए कमाने महाराष्ट्र के नागपुर चले गए हैं. नहीं हो रही गांव के युवकों की शादी गांव की रहने वाली श्यामा बाई अपने 29 साल के बेटे की शादी के लिए परेशान हैं. श्याम बाई बताती हैं कि बहुत परेशानी होती है. कोई भी लड़की नहीं दे रहे हैं. लड़की वाले बोलते हैं कि यहां नेटवर्क नहीं मिलता. फोन नहीं लगता. मेरे दो लड़कों की शादी तो हो गई लेकिन छोटा लड़का, जो 29 साल का है, उसकी शादी में परेशानी आ रही है. लड़की वाले बोलते हैं यहां नेटवर्क नहीं है. गांव के ही डुलम सिंह कुंजाम बताते हैं कि नेटवर्क नहीं आता है इसीलिए कोई लड़की देना नहीं चाहता. यह समस्या सभी के साथ है. लड़की मांग रहे हैं, सामने वाला लड़की नहीं दे रहा है. बोलते हैं हमारी लड़की से कैसे बात करेंगे. डिलीवरी के समय एम्बुलेंस को कॉल करने भी दूर जाना पड़ता है. ‘रिचार्ज कराते हैं लेकिन इस्तेमाल के लिए दो किमी दूर जाना पड़ता है’ गांव के युवा तो नेटवर्क ना होने की वजह से सबसे ज़्यादा नाराज भी हैं और परेशान भी. 29 साल के चैतलाल उइके बताते हैं यहां नेटवर्क नहीं होता है और आज के जमाने में मोबाइल के बिना जिंदगी नहीं चल पाती है. हर जगह नेटवर्क होना चाहिए. मोबाइल में रिचार्ज कराते हैं और इस्तेमाल करने दो किमी दूर जाना पड़ता है. बच्चे ऑनलाइन नहीं पढ़ पाते हैं. किसी को इमरजेंसी में हमसे बात करनी हो, कोई मर भी जाए तो भी यहां फोन नहीं आएगा. शिकायत करते हैं तो बोलते हैं फॉरेस्ट का गांव है तो नहीं बनेगा. हम तो यहां के निवासी हैं, क्यों नहीं बनेगा. बीएसएनएल लगा रहा है टावर करीब 650 लोगों की आबादी वाले इस गांव में मोबाइल नेटवर्क ना होने की वजह से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर स्कूल के शिक्षकों तक के काम अटक जाते हैं. पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि कवरेज विहीन गांवों के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत बीएसएनएल टावर लगा रहा है. कुछ दिन पहले चार गांवों में टावर लग चुके हैं. दूसरे चरण में इस गांव का नाम हो सकता है.  

जानें कब है पापमोचनी एकादशी

एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है. चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी व्रत का खास महत्व है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. तो आइए जान लेते हैं कि इस बार पापमोचनी एकादशी का व्रत कब किया जाएगा. पापमोचनी एकादशी कब है वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 25 मार्च को सुबह के 05 बजकर 05 मिनट शुरू हो रही है और तिथि का समापन 26 मार्च को सुबह में 03 बजकर 45 मिनट पर होने वाला है. उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत 25 मार्च को रखा जाएगा. पापमोचनी एकादशी पूजा विधि     पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत एवं पूजन करने के लिए सुबह उठकर पवित्र स्नान करें.     भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें.     इसके बाद अपने घर व पूजा घर को साफ करें.     एक चौकी पर भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें.     भगवान का पंचामृत से स्नान करवाएं.     पीले फूलों की माला अर्पित करें.     हल्दी या गोपी चंदन का तिलक लगाएं.     पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं.     विष्णु जी का ध्यान करें.     पूजा में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें.     आरती से पूजा को समाप्त करें.     पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे.     अगले दिन पूजा के बाद प्रसाद से अपना व्रत खोलें. पापमोचनी एकादशी व्रत पारण समय पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन 26 मार्च को द्वादशी तिथि पर दोपहर के 01 बजकर 41 मिनट पर किया जाएगा और शाम 04 बजकर 08 मिनट तक है. इस दौरान व्रती अपने व्रत का पारण कर सकते हैं. स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से पहले लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना कर. व्रत खोल सकते हैं.

अमृत स्टेशन योजना के तहत विदिशा एवं साँची रेलवे स्टेशनों का होगा कायाकल्प, बनेगें देश के आधुनिक स्टेशन

 विदिशा / साँची विदिशा एवं साँची रेलवे स्टेशनों का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। ये दोनों स्टेशन “अमृत स्टेशन योजना” के तहत पुनर्विकास के अंतर्गत हैं, और इस निरीक्षण का उद्देश्य निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेना था। विदिशा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण – यात्री सुविधाओं एवं पुनर्विकास कार्यों की समीक्षा निरीक्षण के दौरान डीआरएम एवं पीसीई ने विदिशा रेलवे स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्लेटफार्म विस्तार, यात्री प्रतीक्षालय, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट एवं एस्केलेटर की प्रगति का मूल्यांकन किया। इसके अलावा, स्टेशन पर यात्री सूचना प्रणाली, पेयजल सुविधाओं एवं स्वच्छता व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया गया। डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि अमृत स्टेशन योजना के तहत विदिशा स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। साँची रेलवे स्टेशन का निरीक्षण – ऐतिहासिक शहर में उन्नत रेलवे सुविधाओं की दिशा में कदम इसके बाद निरीक्षण दल साँची रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों का गहन निरीक्षण किया गया। साँची, जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, यहां स्टेशन को विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माणाधीन यात्री हॉल, स्वच्छता सुविधाएं, टिकट काउंटर, पार्किंग एरिया और स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रमुख मुख्य अभियंता अशुतोष ने कहा कि साँची रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के साथ-साथ इसकी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखते हुए सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कार्यों में पर्यावरणीय पहलुओं एवं यात्रियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। जल्द पूरा होगा काम विदिशा एवं साँची स्टेशन के पुनर्विकास कार्य प्रगति पर हैं और निर्धारित समयसीमा में इन्हें पूरा किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुसार संपन्न किया जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक रेल यात्रा का अनुभव मिल सके।

क्रिकेट इतिहास का सबसे लंबा मैच,5447 गेंद और 1981 रन… गणित लगाते थक गए अंपायर

डरबन क्रिकेट के इतिहास में एक से बढ़कर एक अजूबे रिकॉर्ड देखने को मिलते हैं. कोई छक्कों का किंग है तो कोई हैट्रिक लेने में मास्टर, लेकिन हम आपको क्रिकेट इतिहास के सबसे लंबे मैच का रिकॉर्ड बताने जा रहे हैं. आज के दौर में टेस्ट क्रिकेट 5 दिन का होता है, लेकिन ये मुकाबला 9 दिन तक चला था. मैच में अंपायर्स गणित लगाते लगाते थक गए थे. यह मुकाबला 85 साल पहले खेला गया था. 43 घंटे 16 मिनट चला था मुकाबला साल 1939 में डरबन के मैदान पर इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका की टीमें मुकाबला खेलने उतरी. 12 दिन के टेस्ट मैच में 2 दिन रेस्ट के थे जबकि एक दिन खराब मौसम के चलते मुकाबला नहीं हुआ. 9 दिन तक दोनों टीमें एक-दूसरे को टक्कर देती रहीं. मुकाबला 3 मार्च 1939 को शुरू हुआ और 14 मार्च को रुका, लेकिन रिजल्ट किसी के पक्ष में नहीं था. यह मुकाबला 43 घंटे 16 मिनट चला था. मैच में बने थे 1981 रन इस मुकाबले में कुल 1981 रन बने थे. उस दौर में एक ओवर 8 गेंदो का हुआ करता था. 6 गेंदो के हिसाब से जोड़ें तो इस मैच में कुल 907.5 ओवर फेंके गए थे. हालांकि, पुराने हिसाब से 680.7 ओवर का मैच था. आज के दौर में एक टेस्ट मुकाबले में ज्यादा से ज्यादा 450 ओवर फेंके जा सकते हैं. नहीं निकला था रिजल्ट इस मुकाबले में मेजबान साउथ अफ्रीका की टीम ने पहली पारी में 530 जबकि दूसरी पारी में 481 रन बनाए थे. जवाब में इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 316 के स्कोर पर ही सिमट गई थी. इंग्लिश टीम को इसके बाद 696 रन का टारगेट मिला था. इंग्लिश टीम ने शानदार बैटिंग करते हुए 654 रन बना लिए थे, लेकिन 9वें दिन मुकाबला ड्रॉ पर खत्म किया गया. इंग्लैंड की फ्लाइट छूटने के चलते मैच को ड्रॉ किया गया था.

RBI वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेपो रेट कम कर सकता है, 1 अप्रैल के बाद लोन लेने वालों के लिए मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली अगर आप नया लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से कर्ज चुका रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आने वाले वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेपो रेट (Repo Rate) को 50 से 75 बेसिस प्वाइंट (bps) तक कम कर सकता है। क्रिसिल (CRISIL) की ताजा रिपोर्ट में इस बात का अनुमान लगाया गया है। इसका मकसद आम लोगों को राहत देना, खपत बढ़ाना और देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाना है। रेपो रेट और ब्याज दर में कटौती से क्या होगा फायदा? रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है तो बैंक भी लोगों को कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज सस्ते हो जाते हैं। इससे लोगों का खर्च करने की क्षमता बढ़ती है जिससे बाजार में मांग बढ़ती है और अर्थव्यवस्था में तेजी आती है।   फरवरी में भी हुई थी कटौती फरवरी 2025 में RBI ने पांच साल बाद पहली बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी जिससे यह 6.5% से घटकर 6.25% पर आ गया। इससे पहले 2022-23 के दौरान महंगाई रोकने के लिए RBI ने रेपो रेट में 250 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की थी लेकिन अब महंगाई को काबू में रखने के बाद ब्याज दरों को कम करने की योजना बनाई जा रही है ताकि लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़े और निवेश में इजाफा हो। महंगाई को 4% के दायरे में लाने की कोशिश RBI लंबे समय से महंगाई दर को 4% के आसपास लाने की कोशिश कर रहा है। अप्रैल 2023 से रेपो रेट 6.5% पर स्थिर बना हुआ था लेकिन अब नई कटौती से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की योजना है। CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और RBI मिलकर 2025-26 में ब्याज दरों में कटौती करके अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। ब्याज दर में कटौती से होने वाले बड़े फायदे: ➤ लोन होगा सस्ता – घर, गाड़ी या बिजनेस के लिए कर्ज लेना सस्ता होगा। ➤ खपत और निवेश में बढ़ोतरी – लोग ज्यादा खर्च कर पाएंगे जिससे बाजार में तेजी आएगी। ➤ GDP को मिलेगा सपोर्ट – बाजार में पैसा बढ़ने से देश की जीडीपी ग्रोथ को फायदा होगा। ➤ इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं को बढ़ावा – सरकार ने FY26 के लिए पूंजीगत व्यय को 10.1% तक बढ़ाने की योजना बनाई है जिससे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ेगा। ➤ वित्तीय घाटे में कमी – सरकार वित्तीय घाटे को 4.8% से घटाकर 4.4% तक लाने की कोशिश कर रही है जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी। ग्लोबल रिस्क और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर हालांकि CRISIL की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताएं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता से निर्यात प्रभावित हो सकता है और विदेशी निवेशक जोखिम भरे बाजारों से दूर रह सकते हैं। हालांकि घरेलू मांग और सरकारी नीतियां अर्थव्यवस्था को मजबूती से बनाए रखेंगी।   महंगाई दर में कमी की उम्मीद रिपोर्ट के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में महंगाई दर में और गिरावट हो सकती है। रबी फसलों की बुवाई 1.5% बढ़ी है जिससे खाद्य आपूर्ति बेहतर होगी। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं। FY26 में तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल रह सकती हैं जो FY25 के 78-83 डॉलर प्रति बैरल से कम होगी। इससे महंगाई पर और नियंत्रण होगा। अगर CRISIL की रिपोर्ट सही साबित होती है और RBI 2025-26 में ब्याज दरों में कटौती करता है तो यह आम जनता के लिए बहुत फायदेमंद होगा। इससे लोन सस्ते होंगे बाजार में पैसा बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। हालांकि ग्लोबल परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और RBI को सतर्क रहना होगा ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।  

समय से 5 मिनट पहले बुलाया ऑफिस, ओवरटाइम के लिए कंपनी को देने पड़ गए करोड़ों

टोक्यो  जापान को समय के लिए सबसे ज्यादा पाबंद देश माना जाता है. यहां पर इन दिनों एक अनोखा मामला देखने को मिला है. यहां सरकारी कर्मचारियों को तय समय से 5 मिनट  पहले ऑफिस बुलाने पर उन्हें 5 करोड़ का मुआवजा दिया गया. अब यह घटना जापानी इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बन गई है. समय से पहले बुलाया ऑफिस ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के मुताबिक जापान के एक छोटे से शहर गिनान में सरकारी कर्मचारियों को नियमित निर्धारित समय से पांच मिनट पहले काम पर आने का आदेश दिया गया था. यह नियम शहर के पूर्व मेयर हिदियो कोजिमा की ओर से लागू किया गया था. मेयर को उनके स्ट्रिक्ट मैनेजमेंट स्टाइल और वर्कप्लेस में अनुचित व्यवहार के लिए जाना जाता था. उन्होंने ऑफिस के सभी कर्मचारियों को रोजाना सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर ऑफिस आने के लिए बोला. यह तय समय से 5 मिनट पहले था.    कर्मचारियों ने की शिकायत मेयर के इस आदेश से सभी 146 कर्मचारी काफी नाराज हुए. उन्होंने इस फैसले के खिलाफ शिकायत दर्ज की और सीधा जापान फेयर ट्रेड कमीशन से संपर्क साधा. वहीं कमीशन ने भी कर्मचारियों के पक्ष में ही फैसला सुनाया और शहर के मेयर को उन्हें मुआवजे के रूप में  5,852,481 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया. चर्चा का विषय बनी घटना जापान की यह घटना अब इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही है. वहीं जापानी लोगों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बन गई है. खासतौर पर उन लोगों के लिए जो अपनी कंपनी में ओवरटाइम वर्किंग कल्चर से परेशान हैं. लोग इसपर तरह तरह के रिएक्शंस दे रहे हैं. कुछ लोगों ने कर्मचारियों के इस फैसले की प्रशंसा की है और कहा कि यह फैसला जापान में ओवरटाइम वर्किंग कल्चर को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. 

72 घंटे तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल न करने से डेली लाइफ में दिखेंगे 7 बदलाव

नई दिल्ली अगर हम आपसे कहें कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल 3 दिनों तक न करें, तो आपका क्या रिएक्शन होगा? 72 घंटों तक बिना फोन का इस्तेमाल किए रहना आजकल की दुनिया में काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि हमारे लगभग सभी काम इसी पर होते हैं। मनोरंजन हो या सोशल नेटवर्किंग सबकुछ स्मार्टफोन से ही होता है। लेकिन इसके इस्तेमाल को कम करने से आपके दिमाग में कुछ हैरान करने वाले बदलाव हो सकते हैं। इस बारे में एक स्टडी भी हुई है। आइए जानें इस बारे में। क्या है यह स्टडी? इस स्टडी में युवाओं को 72 घंटे तक फोन का कम से कम इस्तेमाल करने को कहा गया। वे फोन का इस्तेमाल सिर्फ काम के सिलसिले में या अपने परिवार और दोस्तों के साथ कॉन्टेक्ट में रहने के लिए ही कर सकते थे। इस रिसर्च से पहले सभी प्रतिभागियों का ब्रेन स्कैन किया गया, जिसमें क्रेविंग और रिवॉर्ड वाले हिस्से पर फोकस किया गया है। 72 घंटे तक स्मार्टफोन के इस्तेमाल को रेस्ट्रिक्ट करने के बाद ब्रेन स्कैन में प्रतिभागियों के ब्रेन केमिस्ट्री में बदलाव देखने को मिले। स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम होने की वजह से प्रतिभागियों के दिमाग में एडिक्टिव सब्स्टांस के विड्रॉवल जैसे रिएक्शन देखने को मिले। इससे यह समझा जा सकता है कि स्मार्टफोन एडिक्शन कितना गंभीर है और इसके इस्तेमाल को कम करने की कितनी ज्यादा जरूरत है। तनाव में कमी फोन का लगातार इस्तेमाल करने से हमारा दिमाग हमेशा एक्टिव रहता है। नोटिफिकेशन, मैसेज और सोशल मीडिया अपडेट्स की भरमार हमें मानसिक रूप से थका देती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारा दिमाग शांत होता है और तनाव कम हो जाता है। इससे हम ज्यादा शांत और बैलेंस्ड महसूस करते हैं। फोकस करने की क्षमता में सुधार फोन के बार-बार इस्तेमाल से हमारा ध्यान भटकता रहता है। फोन आसपास होने से भी हमारा ध्यान बार-बार उसी ओर जाता रहता है। 3 दिन तक फोन का इस्तेमाल न करने से हमारा दिमाग फोकस्ड होता है और हम अपने काम पर बेहतर ढंग से फोकस कर पाते हैं। इससे प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है। नींद की गुणवत्ता में सुधार फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है। फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारी नींद का पैटर्न सुधरता है और हम ज्यादा गहरी और आरामदायक नींद ले पाते हैं। क्रिएटिविटी में बढ़ोतरी फोन के इस्तेमाल से हमारा दिमाग लगातार इनफॉर्मेशन से भरा रहता है, जिससे क्रिएटिव थिंकिंग कम हो जाती है। फोन से दूर रहने पर हमारा दिमाग खुलकर और ज्यादा बेहतर ढंग से सोच पाता है। इससे नई चीजें सीखने और क्रिएटिव थॉट्स विकसित करने की क्षमता बढ़ती है। सोशल कनेक्शन में सुधार फोन के ज्यादा इस्तेमाल से हम वास्तविक दुनिया से कटने लगते हैं। फोन का कम इस्तेमाल करने से हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिता पाते हैं। इससे रिश्तों में मजबूती आती है और हम ज्यादा खुश महसूस करते हैं। सेल्फ रिफ्लेक्शन के लिए समय फोन से दूर रहने पर हमें अपने विचारों और भावनाओं को समझने का मौका मिलता है। यह सेल्फ रिफ्लेक्शन हमें अपने जीवन के गोल्स और प्रायोरिटीज के बारे में बेहतर तरीके से सोचने और इन्हें तय करने में मदद करता है। इससे हमारा मानसिक संतुलन बेहतर होता है। डिजिटल डिटॉक्स तीन दिन तक फोन का इस्तेमाल न करना एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स है। यह हमें डिजिटल दुनिया के नेगेटिव प्रभावों से दूर रखता है और हमें असल जिंदगी के साथ जोड़ता है। इससे हमारी मेंटल और इमोशनल हेल्थ बेहतर होती है।

SSC CGL और MTS भर्ती परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित, कट-ऑफ भी जारी, ऐसे चेक करें स्कोर

 कर्मचारी चयन आयोग ने कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा 2024 और एसएससी एमटीएस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। कैटेगरी-वाइज़ कट-ऑफ भी जारी हो चुका है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर परिणाम और योग्यता अंक चेक कर सकते हैं। बता दें एसएससी एमटीएस भर्ती परीक्षा का आयोजन 30 सितंबर से लेकर 4 नवंबर के बीच किया देशभर के विभिन्न शहरों में आयोजित किया गया था। वहीं एसएससी सीजीएल टियर-1 भर्ती परीक्षा देशभर के विभिन्न शहरों में 5 दिसंबर 2024 को आयोजित हुई थी। टियर-2 एग्जाम 18, 19, 20 और 31 जनवरी को हुई थी।  कितने उम्मीदवारों का हुआ चयन? एसएससी सीजीएल परीक्षा में कुल 18, 174 उम्मीदवार सफल हुए हैं। विभिन्न कारणों को लेकर 1267 उम्मीदवारों के रिजल्ट को रोका गया है। टायर 2 में शामिल 253 उम्मीदवारों के रिजल्ट को रिजेक्ट कर दिया गया है। एसएससी एमटीएस भर्ती परीक्षा में कुल 3428 उम्मीदवार सफल हुए हैं। जिसमें से 500 उम्मीदवारों का रिजल्ट कैंसिल कर दिया गया है। कदाचार के लिए 179 उम्मीदवारों के रिजल्ट पर रोक लगाई गई है। वहीं 198 उम्मीदवार डिसेबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करने में विफल  रहे। बता दें 5 से 12 फरवरी के बीच सीबीआईसी द्वारा फिजिकल टेस्ट का आयोजन किया गया था।   एनटीएस और हवलदार पदों के लिए आयोजित पीईटी/पीएसटी में 20,959 उम्मीदवारों का चयन हुआ था। ऐसे चेक करें रिजल्ट     सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर “Result” के टैब पर क्लिक करें।     अब एसएससी एमटीएस/एसएससी सीजीएल 2024 फाइनल रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें।     स्क्रीन पर पीडीएफ़ पेज खुलेगा। इसमें अपना रोल नंबर चेक करें।     भविष्य के संदर्भ में उम्मीदवार रिजल्ट को डाउनलोड या प्रिन्ट करके अपने पास रख सकते हैं।

फ्लाइट में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर एक-एक कर कपड़े उतारने लगी महिला

ह्यूस्टन “इस तरह की घटनाएं पहले कभी-कभार ही सुनने को मिलती थी, पर आज कल तो यह आम ही हो गया है।” अमेरिका के एक विमान में एक महिला की हरकतों से परेशान हो कर लोग ऐसा ही कुछ कह रहे हैं। यहां ह्यूस्टन से फीनिक्स जा रही एक फ्लाइट यात्रियों के लिए यादगार बन गई। हालांकि यात्री इसे जल्द ही भुलाना चाहेंगे। दरअसल इस फ्लाइट में एक महिला ने कोहराम मचा दिया। महिला 30 हजार फीट की ऊंचाई पर जा कर अचानक विमान से उतरने की जिद करने लगी। मना करने पर उसने जो किया उसे देख कर सब दंग रह गए। इस महिला ने विमान में बैठे लोगों के सामने एक-एक कर सारे कपड़े उतार दिए। नग्न अवस्था में वह विमान में परेड भी करने लगी। महिला ने कथित तौर पर जोर-जोर से चिल्लाते हुए कॉकपिट में घुसने की भी कोशिश की। एक यात्री ने बताया, “उसने सब कुछ उतारना शुरू कर दिया, टोपी, उसके जूते, सब कुछ।” महिला की हरकतों से पूरे विमान में कोहराम मच गया। उस वक्त वहां कई बच्चे भी मौजूद थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि वह कॉकपिट के दरवाजे को पीट-पीट कर अंदर आने देने की जिद करने लगी। स्थिति बिगड़ने पर आखिरकार पायलट को विमान को वापसी की ओर मोड़ना पड़ा। यह पूरा ड्रामा लगभग 25 मिनट तक चला। एक कर्मचारी ने महिला को कंबल से ढकने की कोशिश भी की, लेकिन वह किसी के काबू में नहीं आई। ह्यूस्टन पुलिस ने बाद में उसे हिरासत में लिया है और उसकी मेडिकल जांच की जा रही है।

टी-72 टैंक को मिलेगा अधिक शक्तिशाली इंजन, भारत और रूस के बीच 248 मिलियन डॉलर की डील

नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के टी-72 टैंकों के लिए अधिक शक्तिशाली 1000 एचपी इंजन की खरीद के लिए रूस के  सोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 248 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस सौदे में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट से आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (हैवी व्हीकल फैक्ट्री), अवाडी, चेन्नई को ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल है। टी-72 भारतीय सेना के टैंक बेड़े का मुख्य आधार है। वर्तमान में इसमें 780 एचपी इंजन लगा हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को 1000 एचपी इंजन से लैस करने से भारतीय सेना की युद्धक्षेत्र गतिशीलता और आक्रामक क्षमता में वृद्धि होगी। रूस में निर्मित टी-72 भारतीय सेना के बेड़े का मुख्य टैंक है, जो अभी 780 हॉर्स पावर इंजन से संचालित है। भारत के पास टी-72 टैंक के कुल तीन वेरिएंट हैं। टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को अब 1000 एचपी इंजन से लैस किया जाएगा, जिससे भारतीय सेना की युद्धक गतिशीलता और आक्रामक क्षमता बढ़ेगी। इस टैंकको 1960 के दशक में सोवियत रूस ने विकसित और निर्मित करके रूसी सेना ने तमाम मोर्चों पर इसका इस्तेमाल शुरू किया। चीन के साथ 1962 में लड़ाई के बाद भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने की योजना बनी। इसी क्रम में 1970 के आसपास भारत ने रूस से टी-72 टैंक खरीदा। यह यूरोप से बाहर भारत का पहला टैंक सौदा था और तबसे यह भारतीय सेना का भरोसेमंद साथी है। वहीं मजबूत सरकारी समर्थन के दम पर, भारत का रक्षा उत्पादन 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174 प्रतिशत अधिक है। देश का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भारत का आत्मनिर्भर अभियान ‘वांछित परिणाम दे रहा है’ और देश 2029-30 तक रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता हासिल करने के सरकार के प्रयास बेहद सफल साबित हो रहे हैं। रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले सिर्फ 600 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2023-24 में 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया। उन्होंने भरोसा जताया कि यह प्रगति जारी रहेगी और 2029-30 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सरकारी समर्थन और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से भारत का रक्षा क्षेत्र का उत्पादन वित्त वर्ष 24-29 के दौरान लगभग 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने वाला है। भारत के रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के बीच सहयोग से हथियार और गोला-बारूद, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और नौसेना प्रौद्योगिकियों में प्रगति हुई है।  

होली के त्यौहार पर जानिए सतयुग की है सबसे पुरानी और प्रचलित कथा

होली मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई, इस प्रश्न पर ज्योतिषाचार्य कहते हैं, इस बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। किंतु, सबसे पुरानी और प्रचलित कथा सतयुग है। ऐसे में कह सकते हैं कि होली सतयुग से मनाई जाती रही है। वह आगे कहते हैं, चार युग होते हैं- सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग। हमारे शास्त्रों में 1 युग लाखों वर्षों का बताया गया है। सतयुग करीब 17 लाख 28 हजार वर्ष, त्रेतायुग 12 लाख 96 हजार वर्ष, द्वापर युग 8 लाख 64 हजार वर्ष, तो कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का होना है। इस हिसाब से ही गणना कहती है कि होली 39 लाख वर्ष पहले, सतयुग से मनाई जा रही है। तब, भगवान ने नृसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, त्रिदेव इस सृष्टि का संचालन करते हैं। ब्रह्मा सृजक हैं, विष्णु पालनहार, तो शिव संहारक। इसके साथ ही विष्णु संतुलन बनाए रखने के लिए भी समय-समय पर अवतार लेते रहते हैं। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु के 10 अवतारों का जिक्र है। सतयुग में उन्होंने मत्स्य, हयग्रीव, कूर्म, वाराह और नृसिंह अवतार लिया, तो त्रेता में वामन, परशुराम और श्रीराम का। द्वापर में वह श्रीकृष्ण रूप में भक्तों के बीच आए। कलियुग में वह कल्कि अवतार लेंगे। वह समय कलियुग और सतयुग के संधिकाल का होगा। अभी तो कलियुग की शुरुआत ही हुई है। प्रभु अपने सभी अवतारों में दुष्टों का संहार करते हैं, तो अपनी लीलाओं से जीवन जीने का तरीका भी सिखाते हैं। होली का त्योहार भी कुछ ऐसा ही है, जिसका आरंभ सतयुग में भगवान के नृसिंह अवतार के समय हुआ। क्या है सबसे प्रचलित कथा? ज्योतिषाचार्य कहते हैं, सतयुग में एक अति पराक्रमी दैत्य राजा था- हिरण्यकश्यप। हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष का भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर वध किया था। इस कारण हिरण्यकश्यप उन्हें दुश्मन मानता था। हिरण्यकश्यप का विवाह कयाधु से हुआ, जिससे उसे प्रह्लाद नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। हिरण्यकश्यप ने मनचाहे वरदान के लिए ब्रह्मा की तपस्या शुरू की। इस दौरान देवताओं ने उसकी नगरी पर आक्रमण कर दिया और वहां अपना शासन स्थापित कर लिया। उस समय देवर्षि नारद मुनि ने कयाधु की रक्षा की और अपने आश्रम में स्थान दिया। वहीं पर हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ। देवर्षि नारद मुनि की संगत में रहने के कारण प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त बन गया। उधर, कई वर्षों तक तपस्या के बाद हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा ने दर्शन दिए। हिरण्यकश्यप ने वरदान मांगा कि मेरी मृत्यु मनुष्य या पशु के हाथों न हो, न किसी अस्त्र-शस्त्र से, ना दिन व रात में, ना भवन के बाहर और ना ही अंदर, न भूमि ना आकाश में हो मेरी मृत्यु हो। कुल मिलाकर, अपनी समझ में उसने अमरता का वरदान मांगा। ब्रह्मा ने उसे यह वरदान दे दिया। किंतु, इसके बाद वह निरंकुश हो गया। वह ऋषि-मुनियों की हत्या करवाने लगा और स्वयं को भगवान घोषित कर दिया। किंतु, स्वयं उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्ति में लीन रहता। यह बात हिरण्यकश्यप को पता चली तो वह गुस्से से फट पड़ा। बार-बार समझाने के बाद भी प्रह्लाद ने जिद नहीं छोड़ी तो उसने उसे मारने का फ़ैसला कर लिया। अब शुरू होती है होलिका की कहानी हिरण्यकश्यप की एक बहन थी होलिका। होलिका को भी भगवान ब्रह्मा से एक वरदान मिला था। यह कि उसे अग्नि नहीं जला सकती। हिरण्यकश्यप ने होलिका को कहा कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, ताकि प्रह्लाद भाग न सके और वह उसी अग्नि में जलकर ख़ाक हो जाए। होलिका ने किया तो ऐसा ही, किंतु वह ख़ुद भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गया। कहा जाता है कि होलिका के एक वस्त्र में न जलने की शक्तियां समाहित थीं, किंतु भगवान विष्णु की कृपा से चली तेज आंधी से वह वस्त्र होलिका से हटकर, प्रह्लाद के शरीर से लिपट गया था। होलिका के जलने और प्रह्लाद के बच जाने पर नगरवासियों ने उत्सव मनाया, जिसे छोटी होली के रूप में भी जानते हैं। इसके बाद जब यह बात फैली तो विष्णु भक्तों ने अगले दिन और भी भव्य तरीके से उत्सव मनाया। होलिका से जुड़ा होने के कारण आगे इस उत्सव का नाम ही होली पड़ गया। उधर, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए उसे एक खंभे में बांध दिया। वह प्रह्लाद को मारने ही वाला था कि भगवान विष्णु खंभा फाड़कर नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को उसके भवन की चौखट पर ले जाकर, संध्या के समय, अपने गोद में रखकर नाखूनों की सहायता से उसका वध कर दिया। इस तरह ब्रह्मा का वरदान भी नहीं टूटा और आततायी का अंत हो गया। भगवान को भक्त प्रह्लाद को उसका उत्तराधिकारी बना दिया। भगवान शिव और कामदेव की कथा सबसे प्रचलित कथा सतयुग में होलिका दहन की ही है, लेकिन बाद के युगों में भी यह उत्सव अलग-अलग समय पर मनाया जाता रहा और इससे अन्य कथाएं भी जुड़ती गईं। होली की एक कहानी कामदेव की भी है। पार्वती शिव से विवाह करने के लिए उनकी तपस्या में लीन थीं लेकिन खुद ध्यानमग्न शिव ने काफी समय तक ध्यान नहीं दिया। ऐसे में कामदेव से रहा न गया और उन्होंने भगवान शिव पर पुष्प बाण चला दिया। ध्यान भंग होने से शिव को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और कामदेव भस्म हो गए। कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति रोने लगीं और कामदेव को जीवित करने की गुहार लगाई। इसके अगले दिन क्रोध शांत होने पर शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित कर किया। माना जाता है कि कामदेव के भस्म होने पर होलिका जलाई जाती है, तो उनके जीवित होने की खुशी में रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है। महाभारत काल की कथा जानते हैं? महाभारत काल, यानि द्वापर में युधिष्ठिर को प्रभु श्रीकृष्ण ने एक कहानी सुनाई। एक बार श्रीराम के पूर्वज रघु के शासन मे एक असुर महिला थी। उसे कोई नहीं मार सकता था, क्योंकि उसे एक वरदान था। एक दिन, गुरु वशिष्ठ ने बताया कि उसे मारा जा सकता है, यदि बच्चे अपने हाथों में लकड़ी के छोटे टुकड़े लेकर शहर के बाहरी इलाके के … Read more

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