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होली के त्योहार पर आउटफिट का चुनाव बेहद खास होता है, पहनें ये स्टाइलिश आउटफिट्स, लगेंगे खूबसूरत

नई दिल्ली होली के त्योहार पर आउटफिट का चुनाव बेहद खास होता है क्योंकि इस दिन रंगों के साथ मस्ती करने के साथ-साथ हमें ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो आरामदायक भी हों और लुक में भी आकर्षक लगें। क्योंकि हम होली सेलिब्रेशन में बहुत सारी फोटो भी खिंचवाते हैं, इसलिए जरूरी है कि हमारा ड्रेस भी परफेक्ट हो। आज हम आपको कुछ आउटफिट आइडियाज बताएंगे, जो आपको होली के दौरान परफेक्ट लुक दे सकते हैं। कॉटन कुर्ता और पलाज़ो गर्मी के मौसम में हल्का और आरामदायक आउटफिट सबसे अच्छा होता है। आप एक रंग-बिरंगे कॉटन कुर्ते के साथ पलाज़ो पहन सकती हैं, जो न केवल आरामदायक होगा बल्कि आपको स्टाइलिश भी दिखाएगा। साफा के साथ अनारकली सूट अगर आप ट्रेडिशनल लुक चाहती हैं तो अनारकली सूट के साथ साफा (पगड़ी) पहनें। यह आपको एक क्लासिक और एथनिक लुक देगा, और होली के रंगों के साथ यह परफेक्ट कॉम्बिनेशन होगा। चूड़ीदार और टॉप अगर आपको कुछ सिंपल और मॉडर्न चाहिए तो आप चूड़ीदार के साथ एक ब्राइट रंग का टॉप पहन सकती हैं। इस लुक में आप आराम से रंग खेल सकती हैं और हर जगह ट्रेंडी दिख सकती हैं। कुर्ती और स्कर्ट इस होली में अगर आप कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं तो स्कर्ट और कुर्ती का कॉम्बिनेशन एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यह लुक न सिर्फ स्टाइलिश है बल्कि इसमें मूवमेंट भी आरामदायक है। फ्लोरल साड़ी किसी भी त्योहार में साड़ी पहनने से अलग ही लुक आता है। होली पर भी आप वाइट साड़ी में फ्लोरल प्रिंट ट्राई कर सकती हैं। सफेद साड़ी में बड़े-बड़े रेड, पिंक, येलो कलर के फ्लावर वाला डिज़ाइन बहुत ही ज़्यादा अट्रैक्टिव लुक देगा। इसमें आप मल्टीकलर ब्लाउज़ पेयर कर सकती हैं। इसके अलावा, होली के दिन हल्के रंगों के कपड़े चुनें क्योंकि रंग जल्दी लग सकते हैं और कम से कम ज्वेलरी पहनें ताकि ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित महसूस करें।

अडानी ग्रुप ने हासिल किया एक और प्रोजेक्ट, जीती ₹36000Cr की बोली, मुंबई में पूरा करेगी ये काम

मुंबई दुनिया के टॉप अरबपतियों (World’s Top Billionaires) की लिस्ट में शामिल अडानी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) की कंपनी ने मुंबई में एक बड़ी परियोजना के लिए बोली जीती है और ये प्रोजेक्ट 36,000 करोड़ रुपये का है. ये Mumbai की सबसे बड़ी आवास-विकास परियोजनाओं में शामिल है और इसे अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड पूरा करेगी.  अडानी प्रॉपर्टीज ने लगाई सबसे ज्यादा बोली अडानी ग्रुप की कंपनी Adani Properties Pvt Ltd मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित मोतीलाल नगर I, II, III में 143 एकड़ में फैले आवास विकास प्रोजेक्ट में शामिल है. 36,000 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना के लिए अडानी प्रॉपर्टीज (APPL) सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी, जिसने 3.97 लाख वर्ग मीटर का बिल्टअप एरिया पेश किया. बोली जीतने के बाद अब आवंटन पत्र (LoA) जल्द जारी होने की उम्मीद है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी थी अनुमति बता दें कि बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने बीते सप्ताहा ही महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) को निर्माण एवं विकास एजेंसी (C&DA) के माध्यम से मोतीलाल नगर को डेवलप करने की अनुमति दे दी. इसके बाद राज्य सरकार की ओर से इसे एक स्पेशल प्रोजेक्ट घोषित किया है, जिस पर MHADA का नियंत्रण है, हालांकि ये एजेंसी के माध्यम से काम कर रही है. परियोजना के तहत म्हाडा के तहत 3,372 आवासीय इकाइयों, 328 पात्र वाणिज्यिक इकाइयों और 1,600 पात्र झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास किया जाएगा और अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा. अडानी ग्रुप की दूसरी बड़ी पुनर्विकास योजना मुंबई के मोतीलाल नगर में 36,000 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना के लिए अडानी समूह सबसे अधिक बोली लगाने वाला बनकर उभरा और ये धारावी पुनर्विकास परियोजना के बाद दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है. गौरतलब है कि भारतीय अरबपति Gautam Adani ने मुंबई के स्लम एरिया धारावी (Dharavi) का प्रोजेक्ट 610 मिलियन डॉलर की बोली लगाकर जीता था और उसी समय नई कंपनी अडानी प्रॉपर्टीज (Adani Properties) बनाई थी. अब इस कंपनी ने दूसरी बड़ी बोली जीती है. निवासी बोले- पारदर्शिता के साथ हो काम जब इंडिया टुडे ने मोतीलाल नगर साइट का दौरा किया, तो स्थानीय निवासियों ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि म्हाडा इस परियोजना के लिए निजी डेवलपर को शामिल कर रहा है और अगर इस परियोजना में पारदर्शिता नहीं होगी तो वे विरोध करेंगे. वहीं दूसरी ओर अडानी समूह को पुनर्विकास परियोजना मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना  (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी कहा कि परियोजना में पारदर्शिता होनी चाहिए, अगर कोई कमी है तो हम मुद्दे उठाएंगे.  

मिस्र के ऐतिहासिक कर्नाक मंदिर में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान ऐसा खजाना हाथ लगा, देवताओं की मूर्तियां भी मिलीं

काहिरा  आज मुस्लिम बहुल आबादी वाले मिस्र की पहचान एक ऐसे देश के रूप में रही है जो हजारों साल पुराने प्राचीन धरोहरों का केंद्र रहा है। इस देश की प्राचीन धरोहरों ने पूरी दुनिया से पुरातत्वविदों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित किया है। पुरातत्वविद यहां खुदाई में दशकों लगा देते हैं, ताकि कोई नायाब चीज खोज सकें। ऐसी ही एक खुदाई में पुरातत्वविदों ने कर्नाक मंदिर परिसर में 2600 साल पुराना खजाना खोज निकाला है। इसमें सोने के गहनों का एक शानदार भंडार और पारिवारिक देवताओं के समूह की मूर्तियां मिली हैं। प्राचीन मिस्र के बारे में नई जानकारी यह ताजा खोज 26वें राजवंश के दौरान प्राचीन मिस्र की धार्मिक और कलात्मक प्रथाओं के बारे में एक आकर्षक जानकारी देती है। इसके साथ ही यह एक हजार साल ईसा पूर्व में कर्नाक मंदिर परिसर के इतिहास और विकास पर नई रोशनी डालती है। कलाकृतियों के चल रहे शोध और जीर्णोद्धार से प्राचीन मिस्रवासियों की परंपरा और प्रथाओं के बारे में और जानकारी मिलती है। हाल ही में मिली कलाकृतियों को पूरी तरह से जीर्णोद्धार किए जाने के बाद लक्सर म्यूजियम में दिखाया जाएगा। इससे मिस्र की प्राचीन संस्कृति और धार्मिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी। कर्नाक में प्राचीन मिस्र का महत्वपूर्ण मंदिर कर्नाक मंदिर को मिस्र के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबे समय तक जीवंत रहने वाले धार्मिक परिसर के रूप में जाना जाता है। लक्सर के पास स्थित इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण लगभग 4000 साल पहले किया गया था और लगभग एक हजार साल तक इसका लगातार नवीनीकरण और संशोधन किया गया। यह परिसर सदियों से प्रमुख पुरातात्विक जांच का स्थल रहा है और इस दौरान सैकड़ों ऐतिहासिक खोजें हुई हैं। देवताओं की सोने की मूर्तियां नई खोजी गई वस्तुओं में सोने के बीज, ताबीज और मूर्तियां हैं। इन पर जटिल डिजाइन की कारीगरी की गई है। इन सभी चीजों को एक टूटे हुए बर्तन के अंदर पाया गया है, लेकिन संरक्षण विधि के चलते उनकी स्थिति हमेशा बरकरार रही। मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने बताया है कि पाए गए आभूषणों में सोने और धातु की अंगूठियां, साथ ही तीन-देवता की मूर्ति शामिल थीं। खुदाई के दौरान मिली तीन मूर्तियों में प्राचीन मिस्र के तीन प्रमुख देवता शामिल हैं। थेब्स के शासक देवता अमुन, उनकी पत्नी और मातृदेवी मुट और उनके बेटे खोंसू यानी चंद्र देवता। शुरू में माना जाता था कि इन मूर्तियों को ताबीज के रूप में पहना जाता थास क्योंकि मान्यता थी कि उन्हें गले में बांधने से वे रक्षा करते हैं।

दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी शुरू करेगी अच्छे पैरेंट्स बनने ट्रेनिंग

 नई दिल्ली एक बच्चे की परवरिश करना आसान नहीं होता है। प्यार-दुलार के साथ, उन्हें एक बेहतर इंसान बनने के लिए पैरेंट्स को सही गलत-फर्क में समझाना होता है। साथ ही, दुनिया की चुनौतियों से सामना करने के लिए भी तैयार करना होता है और इस दौरान कई बार अभिभावकों को चैलेंज का सामना करना भी सिखाना होता है। कई, बार सिचुएशन यह भी बन जाती है कि, कप्लस फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों की इसी मुश्किल को सॉल्व करने के लिए अब दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी की ओर से अच्छे पैरेंट्स बनने की बकायदा ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रशिक्षण में अभिभावकों को सिखाया जाएगा कि, वे बच्चों की मानसिक स्थिति को कैसे समझें। विपरीत परिस्थितियों में कैसे किड्स के साथ कैसे बिहेव करें और कैसे उन्हें अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित करें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (डीटीयू) के कुलपति प्रोफेसर प्रो. धनंजय जोशी ने बताया कि, यह एक डिप्लोमा कोर्स होगा। इसका नाम फेमिली वैल्यूज एंड पैरेंटिंग होगा, जिसे ट्रेंड टीचर्स पढ़ाएंगे। इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 महीने की होगी। यह इसी सत्र से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा, योग, ध्यान सहित अन्य कई कोर्सेज भी शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इसमें कब से एडमिशन दिए जाएंगे। साथ ही इसमें प्रवेश लेने के लिए योग्यता और अन्य पात्रता शर्तें क्या होंगी, फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इच्छुक कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि, वे डीटीयू की ऑफिशियल वेबसाइट्स पर विजिट करते रहें, जिससे उन्हें इस बारे में सही अपडेट मिल सके। इसके साथ ही, यहां संचालित होने वाले अन्य कोर्सेज की जानकारी भी मिल सकेगी। पैरेंटिंग स्किल्स को निखारने के लिए ऑनलाइन कई क्लासेज उपलब्ध हैं, जो देश और दुनिया में संचालित की जाती है। इनमें से कुछ में तो फ्री हैं, जिन पर रजिस्टर करके अभिभावक अपनी समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, बच्चों से जुड़ी प्रॉब्लम पर भी सॉल्यूशन पा सकते हैं। इन वेबसाइट्स पर वेबिनार और वीडियोज के रूप में पैरेंटिंग से संबंधित जानकारी मौजूद है। इसके अलावा, कई ऑनलाइन वीडियोज भी मौजूद हैं।

होली विशेष : श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक कथा

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन माह पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। होली की पौराणिक कथा चार घटनाओं से जुड़ी हुई है। पहली होलिका और भक्त प्रहलाद, दूसरी कामदेव और शिव, तीसरी राजा पृथु और राक्षसी ढुंढी और चौथी श्रीकृष्ण और पूतना। आओ इस बार जानते हैं श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक और प्रामाणिक कथा। वसुदेव का विवाह कंस की बहन देवकी से हुआ। कंस जब देवकी और वसुदेव को रथ पर बैठाकर उनके घर छोड़ने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। बस फिर क्या था कंस ने दोनों को मथुरा के कारागार में डाल दिया। देवकी के छ: पुत्रों को कंस ने मार दिया था और सातवें पुत्र जो कि शेष नाग के अवतार बलराम थे। उनके अंश को योगमाया ने जन्म से पूर्व ही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। फिर श्रीकृष्ण का अवतार आठवें पुत्र के रूप में हुआ। उसी समय वसुदेव ने रात में ही श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के यहां पहुंचा दिया और उनकी नवजात कन्या (योगमाया) को अपने साथ ले आए। परन्तु कंस उस कन्या का वध नहीं कर सका और फिर से आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाला तो गोकुल मैं पहुंच गया है। इसी कारण कंस ने उस दिन गोकुल में जन्में सभी बच्चों को मारने के आदेश दे दिया। परंतु कोई भी श्रीकृष्‍ण के पास तक नहीं पहुंच सका। तब बालकृष्ण की हत्या करने का काम राक्षसी पूतना को सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व जन्म में पूतना राजा बलि की पुत्री रत्नबाला थी। वह राजकन्या थी। राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगने के लिए भगवान वामन आए तो उनका रूप सौन्दर्य देखकर उस राजकन्या को हुआ कि ‘मेरी सगाई हो गई है। काश, मुझे ऐसा ही बेटा हो तो मैं गले लगाऊं और उसको अपना खूब दूध पिलाऊं।’ परंतु जब नन्हा मुन्ना वामन विराट हो गया और उसने बलि राजा का सर्वस्व छीन लिया तो वह क्रोधित हो गई “मैं इसको दूध पिलाऊं? नहीं इसको तो मैं जहर पिलाऊं, जहर!’… भगवान ने उसकी मंशा जान ली और कहा तथास्तु। बाद में वही राजकन्या पूतना बनी। पूतना सुंदर नारी का रूप बनाकर बालकृष्ण को विष का स्तनपान कराने गई लेकिन बालकृष्ण के द्वार उसका स्तनपान करने से उसको भयंकर पीड़ा उत्पन्न हुई और वह बालकृष्ण को अपने स्तन से छुड़ाने लगी परंतु यह संभव नहीं हो पाया। कराहते हुए उसने अपना असली रूप धारण किया और चीखती हुई श्रीकृष्ण को लेकर आकाश में पहुंच गई। यह दृश्य देखकर माता यशोदा और माता रोहिणी सहित नगर के सभी लोग घबरा गए और उसके पीछे दौड़े। पूतना कराहते हुए चीखती रहती है। अंतत: वह भूमि पर गिरकर मर जाती है। दूध पीने के बाद बालकृष्ण उसकी छाती पर बैठ जाते हैं। सभी लोग वहां पहुंचते हैं। यशोदा और रोहिणी कहती हैं कोई बचाओ मेरे लल्ला को। तब एक ग्रामीण पूतना की छाती पर चढ़कर जैसे-तैसे लल्ला को नीचे उतार लाता है। यशोदा लल्ला को गले लगा लेती है। बाद में नंद आते हैं तो उनको इस घटना का पता चलता है। फिर एक बूढ़ी महिला कहती है कि ऐसी राक्षसी के हाथों बच जाना तो कोई दैवीय चमत्कार है। ऋषि शांडिल्य से कहकर पूजा और दान करवाओ और उत्सव मनाओ। जिस दिन राक्षसी पूतना का वध हुआ था उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी। अत: बुराई का अंत हुआ और इस खुशी में समूचे नंदगांववासियो ने खूब जमकर रंग खेला, नृत्य किया और जमकर उत्सव मनाया। तभी से होली में रंग और भंग का समावेश होने लगा।

छत्‍तीसगढ़ की परंपरा : गांव में सुख-षांति स्थापित हो इसलिए गांव वाले होलीका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते है

सुकमा गांव में सुख-षांति स्थापित हो और सभी के दुख-दर्द दूर हो इसलिए गांव वाले होलीका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते है। और देवी कृपा मानते हुए उनके पैरों में कोई भी निषान नहीं होता है। उसके बाद दूसरे दिन उसी राख से होली खेलते है। ये परंपरा पिछले 800 सालों से निभाई जा रही है। साथ ही होली के तीन-चार दिन पहले से ही वहां के युवा और बुर्जुग घेर (डांडिया) खेलते हैं। 800 साल पुरानी है परंपरा     जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी. दूर स्थित पेंदलनार गांव जहां आदिवासी और यादव समाज के करीब 800 लोग निवासरत है।     कुछ साल पहले गांव में नक्सलियों का दखल था लेकिन वर्तमान में गांव तक पक्की सड़क बन गई है।     ये गांव अनोखी होली मनाने के नाम से प्रसिद्ध है यहां आज भी 800 साल पुरानी परंपराओं को निभाया जा रहा है।     गांव के युवा रमेश यादव ने बताया कि होली से ठीक तीन-चार दिन पहले से शाम होते ही युवा और बुजुर्ग घेर (डांडिया) आपस में खेलते हैं।     इसके पीछे बुजुर्गो का कहना है कि गांव के युवा और वरिष्ठजनों के बीच आपस में अच्छा तालमेल हो और नाराजगी दूर करने का मकसद है।     उसके बाद होली के दिन यहां दहन के बाद गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग लोग धधकती आग पर चलते हैं। दूसरे दिन राख की होली     पुरानी मान्यताओं के मुताबिक होलिका दहन के बाद दूसरे दिन राख के ढेर से लोग होली खेलते हैं।     ऐसा करने के पीछे भी मान्यताएं है कि होलिका दहन के बाद वो राख पवित्र हो जाती है।     पूरे शरीर में लगाने से चर्म रोग नहीं होता है। और भी इसके पीछे मान्यताऐं हैं।     हालांकि वर्तमान में गांव के युवा होली के दिन रंग-गुलाल जरूर लाते हैं लेकिन पंरपराओं को भी निभाया जा रहा है।  

मुंबई के थाणे इलाके में एक ऐसा रेलवे स्‍टेशन बनाया जा रहा है, जिसमें 11 मंजिल होगी, प्रोजेक्ट को 30 जून, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य.

मुंबई मुंबई के थाणे इलाके में एक ऐसा रेलवे स्‍टेशन बनाया जा रहा है, जिसमें 11 मंजिल होगी. यह रेलवे स्‍टेशन सिर्फ कनेक्टिविटी को ही नहीं, बल्कि लोगों के मनोरंजन को ध्‍यान में रखकर बनाया जा रहा है. रेलवे स्‍टेशन के ऊपर ही मॉल, ऑफिस स्‍पेस और रिटेल शॉप भी होंगी. यह प्रोजेक्‍ट रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ सरकार के लिए मोटा राजस्‍व भी पैदा करेगा. थाणे रेलवे स्‍टेशन के प्‍लेटफॉर्म 10ए के पास 9,000 वर्गमीटर एरिया में इस प्रोजेक्‍ट को डेवलप किया जाएगा. इसके साथ ही 24,280 वर्गमीटर का लीज स्‍पेस भी रहेगा. इस जगह को 60 साल की लीज पर दिया जा सकता है. प्रोजेक्‍ट को 30 जून, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रहेगा. इस रेलवे स्‍टेशन के पास कनेक्टिविटी का पूरा ख्‍याल रखा गया है, जिसे बस और मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा. क्‍या-क्‍या सुविधाएं होंगी रेलवे स्‍टेशन के बेसमेंट में पार्किंग की सुविधा दी जाएगी. इसके साथ ही रेलवे की सुविधाएं भी यहां दी जाएंगी. इससे जुड़ा ही बस का डेक बनाया जाएगा, जहां से लोकल बस पकड़ी जा सकेगी. नीचे के 2 फ्लोर पर यह सभी सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी. ऊपर के फ्लोर को कॉमर्शियल यूज के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा. इन फ्लोर पर शॉपिंग और रिटेल शॉप बनाई जाएंगी. यह रेलवे स्‍टेशन सिर्फ कनेक्टिविटी को ही बढ़ावा नहीं देगा, बल्कि लोगों को सुविधाएं भी उपलब्‍ध कराएगा. ऊपर के फ्लोर पर फूड कोर्ट और रेस्‍तरां भी बनाए जाएंगे. यहां बच्‍चों के लिए गेमिंग जोन होगा, जबकि ऑफिस के लिए भी बड़ा स्‍पेस तैयार किया जा रहा है. होटल और सर्विस अपार्टमेंट के अलावा इस पर कोचिंग इंस्‍टीट्यूट भी बनाया जाएगा. किन जगहों के लिए होगी कनेक्टिविटी इस स्‍टेशन पर ट्रेन के अलावा अन्‍य साधनों की कनेक्टिविटी भी उपलब्ध कराई जाएगी. इस पर 2.24 किलोमीटर का एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा, जो ईस्‍टर्न एक्‍सप्रेसवे को सीधे रेलवे स्‍टेशन से जोड़ेगा. प्‍लेटफॉर्म 10 के पास से बस मूवमेंट के लिए डेक बनाया जाएगा, ताकि यात्रियों को ट्रेन से उतरकर बस पकड़ने के लिए दूर न जाना पड़े. इस प्रोजेक्‍ट को रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी और थाणे म्‍यूनिसिपल कॉरपोरेशन मिलकर बना रहे हैं.

रान्या राव ने यूट्यूब से सीखा सोना छिपाना, तैनात कॉन्स्टेबल बसवराज ने खुलासा किया, जांच के आदेश जारी

बेंगलुरु गोल्ड स्मगलिंग केस में गिरफ्तार कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव (Ranya Rao) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. एयरपोर्ट पर रान्या राव की मदद करने वाले कॉन्स्टेबल ने दावा किया है कि वो ऐसा डीजीपी रामचंद्र राव के कहने पर करते थे. रान्या राव कर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव की सौतेली बेटी हैं. कॉन्स्टेबल बसवराज का दावा है कि डीजीपी रामचंद्र राव ने उन्हें एयरपोर्ट पर रान्या की मदद करने का निर्देश दिया था. रान्या के सौतेले पिता कर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव ने उनसे कहा था कि वह रान्या को बेंगलुरु के कैम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छोड़कर आए. कैम्पेगौड़ा एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन पर तैनात कॉन्स्टेबल बसवराज ने खुलासा किया कि वह सीधे रामचंद्र राव के आदेश का पालन कर रहे थे. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर रान्य राव को लाने-ले जाने की बंदोबस्त करने की जिम्मेदारी उन पर थी. बसवराज का कहना है कि जिस दिन रान्या को गिरफ्तार किया गया. उस दिन शाम 6.20 बजे रान्या ने उन्हें कॉल किया. रान्या कि बताया कि वह दुबई से आ रही है और मदद मांगी. जब एयरपोर्ट से रान्या रवाना हो रही थी तो उस समय बसवराज उनके साथ थे. इसके बाद ही डीआरआई ने रान्या को गिरफ्तार कर लिया था. रन्या राव का कैसे हुआ पर्दाफाश? एक्ट्रेस रन्या राव 3 मार्च को दुबई से बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची थी. रन्या ने 15 दिनों के भीतर दुबई की चार ट्रिप की, जिससे संदेह पैदा हुआ. बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उनकी मदद के लिए पहले से ही बसवराजू नाम का एक पुलिस कांस्टेबल तैयार था. उसी की मदद से एक्ट्रेस ने सिक्योरिटी चेक से बच निकलने की कोशिश की, लेकिन DRI की टीम उस पर पहले से ही नजर बनाए हुई थी. DRI ने रन्या को सोने की खेप के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया. जांच के दौरान अधिकारियों ने उसके जैकेट में छिपा विदेशी मूल का 14.2 किलोग्राम सोना बरामद किया, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 12.56 करोड़ रुपये है.  एक्ट्रेस रान्या का दोस्त भी अरेस्ट रान्या राव ने डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) को अपने बयान में बताया कि उसने यूट्यूब वीडियो देखकर सोना छिपाना सीखा था। रान्या को 14.2 करोड़ रुपए की गोल्ड तस्करी केस में गिरफ्तार किया गया है। 14 करोड़ रुपए के गोल्ड तस्करी केस में गिरफ्तार कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव के दोस्त तरुण राजू को पुलिस ने अरेस्ट किया है। राजू बेंगलुरु के एट्रिया होटल के मालिक का पोता है। रान्या ने ये भी बताया कि तस्करी (स्मगलिंग) के लिए उसे अनजान नंबरों से कॉल आते थे। ये पहली बार था, जब वह सोना दुबई से बेंगलुरु लेकर आई थी। रान्या के मुताबिक सोने को अपने शरीर से चिपकाने के लिए उसने एयरपोर्ट पर ही क्रेप बैंडेज और कैंची खरीदी था। सोना प्लास्टिक चढ़े दो पैकेटों में था। उसे छिपाने के लिए टॉयलेट में जाकर सोने के बिस्किट्स शरीर से चिपका लिए। अज्ञात व्यक्ति को सौंपना था सोना बेंगलुरु में तस्करी का सोना किसे देना था, ये पूछने पर रान्या ने बताया, ‘मुझे सोना एक अज्ञात व्यक्ति को देने के लिए एयरपोर्ट टोल गेट के बाद सर्विस रोड पर जाने के लिए कहा गया था। सिग्नल के पास एक ऑटो रिक्शा में सोना रखना था, लेकिन मेरे पास ऑटो रिक्शा का नंबर नहीं था।’ रान्या के फोन और लैपटॉप से ​​​​डेटा के आधार पर रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) तस्करी गिरोह को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, रान्या ने अनजान नंबर से कॉल करने वाले को पहचानने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरी तरह से यकीन नहीं है कि मुझे किसने कॉल किया। कॉल करने वाला अफ्रीकी-अमेरिकन लैंग्वेज में बात करता था। सोना सौंपने के बाद वह तुरंत चला गया। मैं उससे फिर कभी नहीं मिली। वह आदमी करीब 6 फीट लंबा और गोरा था।’ भाजपा बोली- स्मगलिंग में एक मंत्री का भी नाम भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस रान्या राव को जांच से बचा रही है। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा पर अभिनेत्री से जुड़ी एक कंपनी को संदिग्ध परिस्थितियों में जमीन देने का आरोप लगाया है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा, सबसे बड़ी गोल्ड स्मगलिंग में सिद्धारमैया सरकार के एक प्रमुख मंत्री के शामिल होने के बारे में मीडिया रिपोर्ट कोई आश्चर्य की बात नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 करोड़ रुपए से ज्यादा के सोने की तस्करी के लिए सरकारी प्रोटोकॉल का दुरुपयोग उच्चस्तरीय राजनीतिक समर्थन के बिना नहीं हो सकता। राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि जांच जारी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, हम कुछ नहीं कह सकते। भाजपा सरकार ने रान्या राव से जुड़ी एक कंपनी को 12 एकड़ जमीन आवंटित की थी।    

शिवपुरी : माधव टाइगर रिजर्व में जल्द आएगा एक और टाइगर, ‘मादा टाइगर के लिए यह जंगल नया’

शिवपुरी  मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के माधव टाइगर रिजर्व में मादा बाघ को छोड़ा गया है। जब से वह पिंजरे से छूटी है तभी से वह जंगल में घूम रही है। पार्क सूत्रों ने बताया है कि मादा टाइगर पिछले 24 घंटे में जंगल के 15 किमी के क्षेत्र में भूरा खो से लेकर अन्य स्थानों पर घूमती रही। पार्क प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी मादा टाइगर के लिए यह जंगल नया है। वह पहले पूरे क्षेत्र को देखेगी और परखेगी। पार्क प्रबंधन ने इस नई बाघिन को एमटी-4 नाम दिया है। इसे पन्ना रिजर्व से लाया गया है। जंगल को समझ रही है बाघिन पार्क के अधिकारियों का कहना है कि अभी मादा टाईगर को जिस क्षेत्र में छोड़ा गया था। वह अभी उसी क्षेत्र में विचरण कर रही रही है। धीरे-धीरे वह जंगल को समझने के बाद अपना स्थायी आशियाना बनाएगी। अधिकारियों के अनुसार बाघिन किसी पानी किनारे वाली जगह पर आशियाना बनाएगी। बताया जा रहा है कि मादा टाईगर को शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा गया। पहले तो वह कुछ देर तक टावर के आसपास रही। इसके बाद फिर उसने जंगल में इधर से उधर घूमना फिरना शुरू किया। सूत्रों की माने तो मादा टाइगर की लोकेशन मंगलवार सुबह भूरा खो के पास मिली। माधव टाईगर रिजर्व में जल्द आएगा एक और बाघ पार्क अधिकारियों का कहना है कि मादा टाइगर के बाद इसी सेलिंग क्लब वाले क्षेत्र में एक नर टाइगर भी छोड़ा जाना है। इसको लेकर पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बात चल रही है। जैसे ही वह नर टाइगर को पकड़ लेंगे तो जल्द ही उसे माधव टाइगर रिजर्व में सेलिंग क्लब के पास छोड़ दिया जाएगा। फिर पार्क में बाघों की संख्या 6 से बढ़कर 7 हो जाएगी। इसके बाद बाघों की संख्या समय के साथ बढ़ेगी। जल्द आएगा एक और बाघ पार्क अधिकारियों का कहना है कि मादा टाइगर के बाद इसी सैलिंग क्लब वाले क्षेत्र में एक नर टाइगर भी छोड़ा जाना है। इसको लेकर पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बात चल रही है। जैसे ही वह नर टाइगर को पकड़ लेंगे तो जल्द ही उसे माधव टाइगर रिजर्व में सैलिंग क्लब के पास छोड़ दिया जाएगा। फिर पार्क में बाघों की संख्या 6 से बढ़कर 7 हो जाएगी। इसके बाद बाघों की संख्या समय के साथ बढ़ेगी।  

भारत का बड़ा कदम, दवा बाजार में बड़ा बदलाव, विदेशी कंपनियों को भी घटाने होंगे दाम

नई दिल्‍ली डायबिटीज की दवा के बाजार में प्राइस वॉर छिड़ गई है। भारतीय दवा कंपनियां टाइप-2 डायबिटीज की दवा ‘एमपेग्लिफ्लोजिन’ के सस्ते विकल्प बाजार में उतार रही हैं। इससे मरीजों को यह जरूरी दवा कम दाम में मिल सकेगी। बोह्रिंगर इंगेलहाइम और एली लिली की इस दवा का पेटेंट खत्म होने के बाद भारतीय कंपनियों ने इसका फायदा उठाया है। इससे ‘जारडिएंस’ ब्रांड नाम से बिकने वाली इस दवा की कीमत में 80% तक की गिरावट आई है। मैनकाइंड फार्मा, ग्लेनमार्क और एल्केम जैसी कंपनियां इस दवा के अलग-अलग वर्जन और एफडीसी (फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन) बाजार में ला रही हैं। आईसीएमआर के अनुसार, भारत में 10.1 करोड़ से ज्‍यादा डायबिटीज के मरीज हैं। सस्ती दवा आने से ज्‍यादा लोग इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे दवा बाजार में बड़ा बदलाव आएगा। विदेशी कंपनियों को अपनी कीमतें कम करनी पड़ेंगी। ब‍िजनेस टुडे की र‍िपोर्ट के अनुसार, पहले ‘जारडिएंस’ के 10 mg टैबलेट की कीमत 58-60 रुपये और 25 mg की कीमत 65-70 रुपये थी। अब मैनकाइंड फार्मा ‘एमपेग्लाइड’ और ‘एमपेग्रेट’ 10 mg टैबलेट 5.49 रुपये और 25 mg टैबलेट 9.90 रुपये में बेच रही है। ग्लेनमार्क की ‘ग्लेम्पा’ 8.50-10 रुपये प्रति टैबलेट में मिल रही है। एल्केम की ‘एम्पेनॉर्म’ और भी सस्ती हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां डायबिटीज के बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। IQVIA के अनुसार, दो साल में जेनेरिक दवाओं की बिक्री 60% से ज्‍यादा हो सकती है। कंपन‍ियों ने लॉन्‍च किए कई ब्रांड ग्लेनमार्क ने ‘ग्लेम्पा’ ब्रांड के तहत 10 mg और 25 mg टैबलेट के साथ ‘ग्लेम्पा-L’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + लिनैग्लिप्टिन) और ‘ग्लेम्पा-M’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + मेटफॉर्मिन) जैसे FDC भी लॉन्च किए हैं। ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के प्रेसिडेंट और हेड (इंडिया फॉर्मलेशन्स बिजनेस) आलोक मलिक ने कहा, ‘ग्लेनमार्क का कार्डियोमेटाबोलिक केयर में एक मजबूत इतिहास रहा है। ‘ग्लेम्पा’ रेंज का लॉन्च हाई क्‍वालिटी, कम कीमत वाली दवाएं उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारी एडवांस्‍ड R&D यह सुनिश्चित करती है कि यह दवा, असली ब्रांडेड दवा जितनी ही असरदार हो, लेकिन उसकी कीमत के एक छोटे से हिस्से पर।’ मैनकाइंड फार्मा ने ‘एमपेग्लाइड’, ‘एमपेग्रेट’ और ‘डायनाडुओ’ जैसे कई ब्रांड लॉन्च किए हैं। कंपनी के वाइस चेयरमैन और एमडी राजीव जुनेजा ने कहा, ‘हमारा मानना है कि जरूरी दवाओं के लिए कीमत कभी रुकावट नहीं बननी चाहिए। इसीलिए हमने एमपेग्लिफ्लोजिन को सस्ती कीमत पर पेश किया है ताकि लाखों भारतीय डायबिटीज मरीज इसे ले सकें।’ कंपनी शहरों, छोटे शहरों और गांवों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए दो ब्रांड की रणनीति अपना रही है। साथ ही, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और अस्पतालों के साथ मिलकर एमपेग्लिफ्लोजिन के फायदों के बारे में जागरूकता फैला रही है। टैबलेट का छोटा क‍िया है आकार एल्केम लैबोरेटरीज ने ‘एम्पेनॉर्म’ को असली ब्रांडेड दवा से 80% तक सस्ता रखा है। नकली दवाओं की चिंता को दूर करने के लिए कंपनी ने एंटी-काउंटरफीट सिक्योरिटी बैंड और कई भाषाओं में मरीजों के लिए जानकारी वाली सामग्री पेश की है। एल्केम लैबोरेटरीज के सीईओ डॉ. विकास गुप्ता के मुताबिक,’हमारे क्रॉनिक पोर्टफोलियो के विस्तार के रूप में एमपेग्लिफ्लोजिन का लॉन्च खासकर दिल और किडनी की बीमारी के प्रबंधन में डायबिटीज केयर को बेहतर बनाने के हमारे मिशन के अनुरूप है।’ कंपनी ने बुजुर्ग मरीजों के लिए टैबलेट का आकार और कोटिंग भी बेहतर बनाई है। एल्केम के एमपेग्लिफ्लोजिन रेंज में ‘एम्पेनॉर्म’ के अलावा ‘एम्पेनॉर्म L’ (एमपेग्लिफ्लोज़िन + लिनैग्लिप्टिन), ‘एम्पेनॉर्म डुओ’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + सिटाग्लिप्टिन) और ‘एम्पेनॉर्म M’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + मेटफॉर्मिन) जैसे FDC भी शामिल हैं। डॉ.गुप्ता ने कहा, ‘डायबिटीज मैनेजमेंट में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है दवा नियमित रूप से लेना। टैबलेट का आकार छोटा करके और FDC देकर हम दवा नियमित रूप से लेने और मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार लाना चाहते हैं।’ फोर्टिस C-DOC हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड अलाइड साइंसेज के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा, ‘एमपेग्लिफ्लोजिन बहुत दी जाती है, लेकिन कम कीमत होने से गरीब लोग भी इसे ले सकेंगे। इससे इस बेहतरीन दवा का नियमित सेवन बढ़ेगा।’ क‍ितना बड़ा है डायब‍िटीज मार्केट? डायबिटीज के बढ़ते मामलों के कारण दुनिया भर में डायबिटीज दवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स के अनुसार, 2024 में इस बाजार का मूल्य लगभग 7,400,000 करोड़ रुपये (88.32 अरब डॉलर) था। 2032 तक इसके 19,600,000 करोड़ रुपये (233.84 अरब) तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान CAGR 12.7% रहेगा। मार्केट रिसर्च फ्यूचर के अनुसार, भारत में डायबिटीज केयर दवाओं का बाजार 2023 में 56,000 करोड़ रुपये (6.75 अरब डॉलर) का था। 2032 तक इसके 95,000 करोड़ रुपये (11.46 अरब डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान CAGR 6.54% रहेगा।

मिडिल ईस्ट के हथियार बाजार में चीन को बड़ा झटका, शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी की क्राउन प्रिंस ने निकाली हवा

रियाद  चीन की मिडिल ईस्ट स्ट्रैटजी को तगड़ा झटका देते हुए सऊदी अरब ने J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने से इनकार कर दिया है। शी जिनपिंग के लिए ये बहुत बड़ा झटका है। क्योंकि शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी के मुताबिक खाड़ी के ताकतवर देशों में चीनी हथियारों से अमेरिकी हथियारों को रिप्लेस करना था। शी जिनपिंग चाहते थे कि सऊदी अरब जैसे ताकतवर देश अगर J-35 स्टील्थ फाइटर खरीदते हैं, तो ना सिर्फ चीनी जेट्स की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि रणनीतिक तौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हथियारों के लिए भी वो दरवाजे बंद कर सकता है। लेकिन IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने चीन को उस वक्त झटका दिया है, जब पिछले साल नवंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था और चीनी अधिकारी झुहाई एयर शो के कामयाब होने का जश्न मना रहे थे। चीन ने बार बार दावा किया था कि सऊदी अरब चीनी स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने वाला है। लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन ने एक कहानी के एक नये अध्याय को ही खोलकर रख दिया है। नई रिपोर्ट में कहा गया है की सऊदी अरब अब छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए ब्रिटेन, इटली और जापान के साथ मिलकर काम करने वाला है और इन देशों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत एडवांस स्तर तक पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक ये सौदा पक्का हो जाएगा। इस दौरान प्रोजेक्ट की रूपरेखा तय कर ली जाएगी। चीन को सऊदी ने दिया बहुत बड़ा झटका चीन के लिए ये पैरों तले जमीन खिसकाने वाला झटका है। मिडिल ईस्ट में उसकी रणनीति पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कमजोर करने की थी। इसके अलावा वो J-35 स्टील्थ फाइटर के लिए बड़े बाजार की तलाश कर रहा है। अभी तक J-35 स्टील्थ फाइटर को खरीदने के लिए सिर्फ पाकिस्तान तैयार हुआ है। एक्सपर्ट्स लगातार J-35 स्टील्थ फाइटर की क्षमता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान भी चीनी प्रेशर की वजह से इस फाइटर को खरीदने के लिए तैयार हुआ है। लेकिन सऊदी अरब के सामने ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी। सऊदी अरब के इनकार के बाद कई और देश, जिनके साथ चीन J-35 स्टील्थ फाइटर की बिक्री को लेकर बातचीत कर रहा था, वो सौदे से पीछे हट सकते हैं। इसकी टेक्नोलॉजी पर अब शक के बादल और गहरे हो गये हैं। IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने ये फैसला अचानक नहीं लिया है। बल्कि चीन की तरफ से करीबी संबंध बनाने के बावजूद बीजिंग की मानसिकता को लेकर सतर्क रहा है। उसने चीनी सैन्य हार्डवेयर को लेकर संतुलित रवैया अपनाया है। उसने कुछ चीनी हथियार जरूर खरीदे हैं, लेकिन स्ट्रैटजिक हथियार अभी तक नहीं खरीदे हैं। लिहाजा एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ सऊदी अरब की हथियार खरीद में विविधिता के नजरिए से ही देख रहे हैं। IDRW ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी अरब और पश्चिमी देशों के अधिकारी पहले से ही गोपनीय स्तर पर इस नये प्रोजेक्ट पर बातचीत कर रहे हैं। पश्चिमी देशों के बीच फाइटर जेट निर्माण के लिए हाई टेक्नोलॉजी है, जो सऊदी और पश्चिमी देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है। जे-35 लड़ाकू विमान को नहीं मिल रहा खरीददार? पाकिस्तान के अलावा किसी भी और देश ने अभी तक जे-35 लड़ाकू विमान को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई है। चीनी फाइटर जेट हालांकि एफ-35 जैसे अमेरिकी फाइटर जेट्स की तुलना में काफी सस्ता है और इसका मेटिनेंस भी कम खर्चीला है, लेकिन ये प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा है। फरवरी 2024 में सऊदी अरब में आयोजित ग्लोबल एयरशो के दौरान चीन ने FC-31 को प्रदर्शन के लिए भेजा था। FC-31 लड़ाकू विमान, J-35 का पूर्व वैरिएंट है। लेकिन FC-31 भी डिफेंस एक्सपर्ट्स को प्रभावित नहीं कर पाया। चीन की डिफेंस इंडस्ट्री ने बहुत शानदार तरक्की की है और देश की रक्षा जरूरतों को पूरा किया है। लेकिन बावजूद इसके चीन को विदेशी ग्राहकों की तलाश के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मध्य-पूर्व से चीन को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वहां भी उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही है। इन बातों के अलावा भी साल 2019 से 2023 तक चीन के हथियार कंपोनेंट्स में 77% हिस्सा रूस से आयात किया गया था। वहीं चीन कई क्रिटिकल हथियारों के लिए फ्रांस और रूस पर भी निर्भर था, लिहाजा यह निर्भरता चीन के आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल के दावों पर सवाल उठाती है।

जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो जल्दी करें, एक अप्रैल से महंगी हो जाएगी जमीन रजिस्ट्री

रायपुर जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो इंतजार मत किजिए. एक अप्रैल से रजिस्ट्री दर में 10 प्रतिशत इजाफे के आसार हैं. ऐसी स्थिति में आपके साथ-साथ दूसरे पक्ष को भी कार्रवाई के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा. दरअसल, पिछले 6 साल से गाइडलाइन दरें नहीं बढ़ाई गई है. इसके साथ ही सालभर पहले रजिस्ट्री में मिलने वाली 30 फीसदी की छूट भी खत्म कर दी गई है. अबकी बार या करें इस साल इसे करीब 10 फीसदी बढ़ाने की तैयारी है. गाइडलाइन दरें बढ़ने से जमीनों का रेट बढ़ेगा. रजिस्ट्री कार्यालय में भीड़ गाइडलाइन दर बढ़ने की आशंका में अभी से रजिस्ट्री कार्यालय में पक्षकारों की भीड़ नजर आने लगी है. मार्च महीने के अंत तक तो कार्यालय में पैर रखने की भी जगह नहीं मिलेगी. हालांकि, भीड़ बढ़ने के चलते ही रजिस्ट्री का समय वो घंटे बढ़ा दिया गया है. बुकिंग स्लॉट भी बढ़ा दिया गया है. लेकिन प्रकरणों की संख्या ज्यादा होने से समय ज्यादा तो लगेगा ही लगेगा, साथ में गड़बड़ी की भी आशंका बढ़ जाएगी. इसलिए बेहतर है कि समय रहते कागजों की ठीक जांच-पड़ताल कर रजिस्ट्री करा लें. इन इलाकों में ज्यादा कारोबार राजधानी रायपुर के जिन इलाकों में जमीन का कारोार ज्यादा हो रहा है उनमें विधानसभा, कचना, रिंग रोड नंबर-3, धमतरी रोड, वीआईपी रोड, सेजबहार, माना, अभनपुर, खरोरा रोड शामिल. रियल इस्टेट कारोबारी और लोग में इन इलाकों में जमीन खरीदने की होड़ मची हुई ​है.

आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा, करीब साढ़े तीन घंटे तक चलेगा

उज्जैन खगोलीय गणना के अनुसार आज साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। इनमें दो चंद्र ग्रहण तथा दो सूर्य ग्रहण रहेंगे। इनमें से केवल 7 सितंबर को होने वाला चंद्र ग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया कि जो ग्रहण दिखाई नहीं देते हैं, उनका सूतक मान्य नहीं होता है। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक प्रो.राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा। यह ग्रहण सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगा। दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर ग्रहण का मध्य रहेगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह ग्रस्तोदित दिखाई देगा।   इन देशों में दिखाई देगा ग्रहण दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण अमेरिका, पश्चिम यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, अटलांटिक महासागर में रहेगी। इसी प्रकार 29 मार्च को आशंकि सूर्यग्रहण रहेगा। इसकी शुरुआत दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर होगी। यह ग्रहण अमेरिका, ग्रीनलैंड, आइस लैंड, यूरोप व उत्तर पश्चिम रसिया में दिखाई देगा। तीसरी खगोली घटना 7 सितंबर को पूर्ण चंद्रग्रहण के रूप में होगी। यह ग्रहण पूरे भारत सहित उज्जैन में भी दिखाई देगा। रात 9 बजकर 56 मिनट पर चंद्र ग्रहण की शुरुआत होगी। रात 11 बजकर 41 मिनट पर ग्रहण का मध्य तथा रात 1 बजकर 26 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण काफी लंबा है, इसकी अवधि 3 घंटा 30 मिनट की रहेगी। साल 2025 का आखिरी ग्रहण 21 सितंबर को आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में रहेगा।  

ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में, 5 साल सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया

 ग्वालियर  मध्यप्रदेश में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट Memorandum of understanding (MOU) पर वर्क शुरू हो गया है। इसी कड़ी में ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में चला गया। राज्य पुरातत्व अधीन हिस्सा निजी हाथों में सौंपा गया है। 5 साल के लिए सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया है। दरअसल कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत अब राज्य पुरातत्व की देखरेख में काम होगा। जनभागीदारी का MP में यह पहला कदम है। पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ MOU किया है। आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। समझौते के तहत फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। समझौते की शर्तें समझौते के अनुसार, किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पांच साल का करार किया गया है। यदि कार्य संतोषजनक रहा, तो इसे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है। फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और संरक्षण कार्य AKCSF संभालेगी। पहले से जारी संरक्षण कार्य ग्वालियर किले का संरक्षण पहले से चल रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में इस पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए थे। वर्तमान में भी 75 लाख रुपए से अधिक की लागत से नवीनीकरण कार्य जारी है। विरोध और विवाद कुछ इतिहासकार और स्थानीय लोग किले के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। वे इसे ऐतिहासिक धरोहर का व्यावसायीकरण मानते हैं। 2022-23 में भीमसिंह राणा की छत्री पर होटल बनाने की योजना को जनता के विरोध के कारण रद्द करना पड़ा था। ग्वालियर किले की आय ग्वालियर किला पर्यटन का बड़ा केंद्र है। हर महीने यहां से 50 लाख रुपए की आय होती है। विशेष अवसरों पर यह राशि और बढ़ जाती है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों को ऐतिहासिक धरोहरों की पूरी समझ नहीं होती। ऐसे में क्या वे सही तरीके से संरक्षण कार्य कर पाएंगी, यह सवाल बना हुआ है।

वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपये कमाए, प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी से मुक्त

श्रीनगर दुनिया में भारत मंदिरों का देश है, यहां मंदिरों की संख्या लाखों में है. लेकिन, क्या आप जानते हैं देश का सबसे अमीर मंदिर कौन-सा है? दरअसल, मंदिरों की कमाई और उस पर टैक्स को लेकर इन दिनों एक सियासी बहस छिड़ी हुई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार मंदिरों को जीएसटी बकाया का नोटिस भेज रही है. उधर, बीजेपी ने इस मामले में कांग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. आइये आपको बताते हैं देश के सबसे अमीर मंदिर की कमाई और टैक्स के बारे में… कहां है स्थित है सबसे दौलतमंद मंदिर मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में एक विश्लेषण के बाद पाया है कि भारत का सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTS) है, जो वित्त वर्ष 2025 में अपनी 4,774 करोड़ रुपये की वार्षिक आय पर 1.5 प्रतिशत से कम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान करेगा. नवंबर 2024 में, देश के सबसे धनी मंदिरों में से एक तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को बकाया टैक्स भुगतान के लिए नोटिस भेजा गया था. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि 7 साल की अवधि के लिए मांग केवल 1.57 करोड़ रुपये की थी, जबकि मंदिर ने अकेले 2014 में 700 करोड़ रुपये कमाए हैं. करोड़ों का चढ़ावा, ब्याज से भी कमाई जम्मू के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपए कमाए, जिसमें से 255 करोड़ रुपए चढ़ावे से आए, जो टैक्स-फ्री हैं और 133.3 करोड़ रुपए ब्याज से आए. टीटीडी के मामले में, 4,800 करोड़ रुपए की कमाई में से एक तिहाई से अधिक हुंडी संग्रह से आए. इस मामले में जीएसटी के तहत टैक्स लायबिलिटी वित्त वर्ष 21 से पांच वर्षों में लगभग 130 करोड़ रुपये रही है. हालांकि, इस मामले में मंदिरों के डिटेल विवरण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन भारत के दो सबसे बड़े मंदिर ट्रस्टों की आय पिछले सात वर्षों में दोगुनी हो गई है. साल दर साल बढ़ी मंदिरों की आय -तिरुपति ट्रस्ट का वित्त वर्ष 2017 में बजट 2,678 करोड़ रुपये था, जो इसकी वेबसाइट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 5,145 करोड़ रुपये हो गया. -वैष्णो देवी ट्रस्ट की आय वित्त वर्ष 2017 में 380 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 683 करोड़ रुपये हो गई है. जीएसटी भुगतान की रकम संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, तिरुपति मंदिर ने वित्त वर्ष 2017 में 14.7 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2022 में 15.58 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2023 में 32.15 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024 में 32.95 करोड़ रुपये का जीएसटी भुगतान किया. धार्मिक समारोह और प्रसाद होते हैं ‘टैक्स फ्री’ -प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी संग्रह से मुक्त हैं. टीटीडी और वैष्णो देवी के मामले में यह आय एक तिहाई से अधिक थी. -वित्त वर्ष 24 में वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट ने अपनी आय का 37 प्रतिशत दान से अर्जित किया. वहीं, वित्त वर्ष 25 में टीटीडी को दान से लगभग 4,800 करोड़ रुपये अर्जित करने की उम्मीद है. -यदि कमरे का शुल्क 1,000 रुपये से अधिक है और यदि सामुदायिक हॉल या खुले क्षेत्र का शुल्क 10,000 रुपये से अधिक है, तो परिसर के किराये पर जीएसटी लगाया जाता है. -व्यवसाय के लिए किराए पर दी गई दुकानों और अन्य स्थानों पर भी जीएसटी नहीं लगता है, यदि मासिक किराया 10,000 रुपये से कम है. -ट्रस्ट द्वारा संचालित स्मारिका दुकानों और अन्य वाणिज्यिक उपक्रमों पर जीएसटी लागू है. वैष्णो देवी ट्रस्ट एक हेलीकॉप्टर सेवा और स्मारिका दुकानें चलाता है. -ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 24 में बिक्री से 19 प्रतिशत या 129.6 करोड़ रुपये और किराये की आय से 84 करोड़ रुपये या 12 प्रतिशत कमाए.

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