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हजारों वर्ष पुराने मुड़िया बौद्ध मठ के रास्ते से अतिक्रमण हटाने के HC ने कलेक्टर को दिए निर्देश

जबलपुर जबलपुर के गोपालपुर के पास स्थित मौर्यकालीन प्राचीन बौद्ध मठ के पहुंच मार्ग से अतिक्रमण हटाने के लिए हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को अंतरिम आदेश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने यह आदेश उस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए, जिसमें मठ से जुड़े रास्ते पर अतिक्रमण कर आवाजाही बंद करने की शिकायत की गई थी। याचिका बौद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के रीजनल हेड सुखलाल वर्मा और अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दादा बैजनाथ कुशवाहा की ओर से दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि लम्हेटा घाट स्थित मुड़िया बौद्ध मठ हजारों वर्ष पुराना मौर्यकालीन बौद्ध स्थल है। इसके पास की 32 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित रूप से भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है और मठ तक पहुंचने का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है। याचिका में उल्लेख किया गया कि 27 जनवरी 2021 को तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने मप्र टूरिज्म बोर्ड को पत्र भेजकर मठ के विकास के लिए बजट स्वीकृति का अनुरोध किया था। इससे पहले 15 जून 2012 को म.प्र. शासन के पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग ने इस स्थल को प्राचीन स्मारक घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। 1 अप्रैल 2015 को इस स्थल को अंतिम रूप से संरक्षित स्मारक घोषित करने का अनुरोध भी संस्कृति विभाग को भेजा गया, लेकिन अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अतिक्रमण के खिलाफ स्थानीय स्तर पर पत्राचार और धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई, तो यह याचिका दाखिल की गई। याचिका में मप्र शासन के प्रमुख सचिव (राजस्व), प्रमुख सचिव (पुरातत्व), प्रमुख सचिव (धार्मिक न्यास), सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग), कलेक्टर जबलपुर, एसडीओ (राजस्व), तहसीलदार, नगर निगम अधिकारी भेड़ाघाट और निजी पक्षों रीता सेंगर, गुंजन नंदा, सोनिया नारंग व आरडीएम केयर इंडिया प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर अंगददीप सिंह नारंग को अनावेदक बनाया गया है।  

केंद्र सरकार मप्र को 44255.33 करोड़ रुपए देगी और 24263.71 करोड़ रुपए राज्य सरकार के अंश के शामिल होंगे

 भोपाल मध्यप्रदेश में केंद्रीय योजनाओं के संचालन के लिए बड़ी राशि मिलने वाली है। इसी कड़ी में केंद्रीय योजनाओं के संचालन के पीएम मोदी (PM MODI) ने एमपी (MP) के लिए पिटारा खोला है। पीएम ने कुल 68519.05 करोड़ रुपए खर्च का फैसला किया है। केंद्र सरकार 44255.33 करोड़ रुपए देगी और 24263.71 करोड़ रुपए राज्य सरकार के अंश के शामिल होंगे। मोदी सरकार ने डॉ मोहन सरकार को 28 अप्रैल तक की स्थिति में 283.46 करोड़ रुपए दे भी दिए है। मप्र कृषि और ग्रामीण विकास विभाग को पिछले बजट से अधिक राशि, पिछले वित्त वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग के लिए 8561.16 करोड़ रुपए मिले थे, इस साल 9819.34 करोड़ रुपए का प्रावधान है। कृषि विकास विभाग में पिछले साल 237.36 करोड़ रुपए का प्रावधान था, इस वित्त वर्ष में 1005.46 करोड़ रुपए देने का फैसला लिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को पिछले वित्त वर्ष में 1541 करोड़ रुपए का प्रावधान था। इस वित्त वर्ष में 4448.40 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। पिछले वित्त वर्ष में 4400 करोड़ के प्रावधान के बावजूद प्रदेश को जल जीवन मिशन में राशि आवंटित नहीं की गई, इस वित्त वर्ष में 8561.22 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पिछले एक महीने में केंद्र सरकार ने मोहन सरकार को 283 करोड़ रुपए दिए हैं , इसमें लोक निर्माण विभाग, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग को 39.14 करोड़ रुपए मिला है, जबकि वित्त विभाग को भी 217.07 करोड़ रुपए मिला है. जिसका खर्च किया जाना है. बता दें कि 2024-25 में मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में मोहन सरकार को 37652 करोड़ रुपए देने का प्रावधान किया था, लेकिन इसमें 16155 करोड़ कम मिले थे, प्रदेश को केवल 21497 करोड़ रुपए ही मिले थे. इन विभागों को मिलेगा सबसे ज्यादा फंड इस पैसे में सभी विभागों को फंड मिलेगा, लेकिन ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा फंड दिया जाएगा. इसके अलावा भी दूसरे सभी विभागों को फंड मिलेगा. लेकिन चार विभाग ऐसे हैं जिनके हिस्से में ज्यादा कुछ नहीं आने वाला है. इनमें पर्यटन संस्कृति विभाग, वित्त विभाग और भोपाल गैस त्रासदी विभाग शामिल है. 

बीजेपी के जाति जनगणना कराने का ऐलान, जिसका लक्ष्य सामाजिक समीकरणों को साधना और चुनावी रणनीति को मजबूत करना

नई दिल्ली  बीजेपी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने की घोषणा की है। यह फैसला सिर्फ आंकड़ें जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक इंजीनियरिंग, चुनावी रणनीति और वैचारिक संतुलन का भी समीकरण बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश की राजनीति में ‘मंडल-कमंडल’ की बहस को फिर से हवा देने की कोशिश हो रही थी। ऐसे में यह समझना चुनावी और राजनीतिक रणनीति को देखते हुए बहुत जरूरी है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने यह कदम अचानक किन 5 प्रमुख वजहों से लिया है और कैसे यह उसके लिए एक ‘गेमचेंजर’ साबित हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा 2014 में नरेंद्र मोदी के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक उनके कार्यकाल के दूसरे चुनाव तक बीजेपी ने ओबीसी (OBC),अति-पिछड़ी जातियों (EBC) और अनूसूचित जातियों (SC) को जोड़कर एक मजबूत सामाजिक समीकरण खड़ा किया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का यह वोट बैंक बिखर गया और इन वर्गों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की ओर झुक गया, जिससे बीजेपी के 400 पार वाला सपना चकनाचूर हो गया। बीजेपी और एनडीए को इसके चलते खासकर यूपी,राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में तगड़ा झटका लगा। ऐसे में जाति जनगणना वाला दांव इन जातियों की उन उपेक्षित भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास है। ओबीसी को सीधा संदेश देने का प्रयास बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी होने वाले तथ्य को अबतक विपक्ष के पिछड़े वाले दांव को कुंद करने के लिए इस्तेमाल करती रही है। जब बिहार में जातिगत सर्वे करवाया गया था, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी जेडीयू एनडीए में नहीं थे। अलबत्ता तब भी बीजेपी ने आधिकारिक रूप से उस जातिगत सर्वे का समर्थन किया था। अब मोदी सरकार देशभर में जाति जनगणना का दांव चलकर प्रधानमंत्री और बिहार के सीएम नीतीश के पिछड़ा पृष्टभूमि को और मजबूती से भुनाने की कोशिश कर रही है। वैसे भी मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के अपने फैसले का हमेशा जिक्र करती रही है। अब इस फैसले से उसका काम और आसान हो सकता है कि असल में पीएम मोदी खुद पिछड़े समाज से तो हैं ही, वह ओबीसी समाज के मसीहा के तौर पर भी काम कर रहे हैं। राज्यों की राजनीति पर भारी पड़ने की कोशिश बीजेपी को मालूम पड़ चुका था कि अगर केंद्र जाति जनगणना को लेकर सुस्त रहा, तो विपक्ष शासित राज्य सरकारें इसे अपने-अपने ढंग से लागू करके सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश सकती हैं। तेलंगाना पहले ही इस दिशा में सक्रिय हो चुका है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार भी अपने दांव लगाने की कोशिशों में जुटी है और झारखंड में भी ‘सरना कोड’ की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में केंद्र की ओर से इसे राष्ट्रीय स्तर पर करवाने का एलान करके, बीजेपी सरकार ने विपक्ष की राजनीति पर बढ़त बनाने वाली चाल चल दी है। नया प्रयोग करने की कोशिश 2014 में जब से मोदी सरकार आई है, उसकी अनेकों कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं। ईडब्ल्यूएस कोटा और विश्वकर्मा योजना इसका सबसे बेहतरी उदाहरण है। इसी तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी अनेकों योजनाएं चल रही हैं, जिनके माध्यम से इन वर्गों के उत्थान का भी काम हो रहा है, वहीं इसके माध्यम से सरकार इन वर्गों के बीच पहुंच भी पहुंची है। लेकिन, जाति जनगणना के माध्यम से पार्टी जातियों में बंटे भारतीय समाज को सीधे तौर पर साधने की कोशिश कर रही है, जिसे अब सहेज कर रखना उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी थी। क्योंकि, उज्जवला योजना, जनधन योजना जैसी अनेकों ऐसी योजनाएं हैं, जिनके माध्यम से भाजपा सरकार ने खुद को समाज के विशेष वर्गों के नजदीक पहुंचाया है, लेकिन अब उसमें भी जातियों के आधार पर दिक्कतें बढ़ने लगी थीं, जिसके लिए नया कार्ड चलना जरूरी लग रहा था। हिंदुत्व की सियासत पर जाति की चाशनी बीजेपी की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण अब पार्टी के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब पार्टी हिंदुत्व पर भी सामाजिक न्याय और पिछड़ों की चुनावी चाशनी लगाने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद एक ऐसे व्यापक सामाजिक समीकरण को तैयार करना है, जिसमें धार्मिक और जातिगत दोनों स्तरों पर समर्थन हासिल हो सके। हालांकि, बीजेपी की यह सोच समझी रणनीति चुनावी फ्रंट पर कितना काम करती है, यह इस समय का सबसे बड़ा सवाल है।

एम्स भोपाल मुंह के कैंसर की पहचान के लिए बना रहा ऐप, तंबाकू छोड़ने के लिए भी लोगों को प्रेरित करेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मुंह के कैंसर की पहचान अब आसान होगी। एम्स भोपाल एक मोबाइल ऐप बना रहा है। यह ऐप कुछ ही मिनटों में कैंसर की जांच कर लेगा। मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी यानि एमपीसीएसटी ने इस काम के लिए लाखों रुपए की सहायता भी दी है। यह ऐप लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए भी अपील करता हुआ नजर आएगा। एम्स भोपाल के डायरेक्टर डॉक्टर अजय सिंह का इसे लेकर कहना है कि यह ऐप तकनीक के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा। यह रिसर्च 24 महीनों तक चलेगी। एम्स भोपाल के डॉक्टर अंशुल राय इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं। वे ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में प्रोफेसर हैं। कई विभागों के डॉक्टर शामिल इस रिसर्च में कई और विभागों के डॉक्टर भी शामिल हैं। जैसे कि रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, पैथोलॉजी और सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ। यह ऐप कैंसर के लक्षणों को पहचानेगा। साथ ही, यह लोगों को तंबाकू, सुपारी और धूम्रपान के नुकसान बताएगा। इससे लोग इन्हें छोड़ने के लिए प्रेरित होंगे। प्रोजेक्ट के लिए लाखों की मदद एमपीसीएसटी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 7.4 लाख रुपए दिए हैं। पहली किस्त के रूप में 3.7 लाख रुपए मिल चुके हैं। इस ऐप से मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान जल्दी हो सकेगी। इससे लोगों को समय पर इलाज मिल पाएगा। और उनकी जान बच सकेगी। यह ऐप एक बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो गांवों में रहते हैं और जिनके पास डॉक्टर तक पहुंचने के लिए साधन नहीं हैं। शोध के लिए लिए मिली मंजूरी, 7.4 लाख स्वीकृत एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि “ओरल कैंसर और अन्य प्री-मेलिग्मेंट (पूर्व-कैंसर) स्थितियों की पहचान के लिए एक मोबाइल ऐप के माध्यम से स्क्रीनिंग के लिए एक अभिनव अनुसंधान परियोजना प्रारंभ की है. इसके लिए एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने दो साल के रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इस दो वर्षीय अनुसंधान परियोजना के लिए कुल 7.4 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से पहले साल के लिए 3.7 लाख रुपये की पहली किस्त जारी की जा चुकी है. जबकि बची हुई राशि दूसरी किश्त में प्रदान की जाएगी.” इस तरह मोबाइल एप से होगी कैंसर की स्क्रीनिंग एम्स के डाक्टरों ने बताया कि यह मोबाइल ऐप ओरल कैंसर, मुंह खोलने में रुकावट की बीमारी और अन्य गंभीर मुख स्थितियों की स्क्रीनिंग करने में मदद करेगा. यह एप कुछ ही मिनटों में परिणाम देगा और सभी रोगियों की जानकारी पूर्ण रूप से गोपनीय रखेगा. बता दें कि इस रिसर्च का नेतृत्व एम्स भोपाल के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ. अंशुल राय करेंगे. उनके साथ को-प्रोजेक्ट इन्वेस्टिगेटर के रूप में डॉ. सैकत दास (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी), प्रो. अभिनव सिंह, डॉ. दीप्ति जोशी (पैथोलॉजी) और डॉ. अंकुर जोशी (कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन) शामिल हैं. जूनियर रिसर्च फेला को मिलेंगे 4 लाख 70 हजार डॉ. अंशुल राय ने बताया कि “रिसर्च के लिए स्वीकृत राशि में से दो साल के लिए जूनियर रिसर्च फेलो की सैलरी 4 लाख 80 हजार रुपए तय की गई है. कंज्यूमेबल्स पर 60 हजार रुपए, यात्रा व्यय पर 1 लाख रुपए और पब्लिकेशन व प्रिंटिंग पर 1 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे. बता दें कि यह रिसर्च मोबाइल ऐप के जरिए बड़ी आबादी में मुंह से जुड़ी गंभीर बीमारियों की पहचान और इलाज की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. डॉ. अंशुल राय ने जानकारी दी कि इस मोबाइल ऐप पर वे गत एक वर्ष से कार्य कर रहे हैं.”  एक हजार मरीजों पर किया जाएगा शोध एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा कुल 7.5 लाख रुपये की धनराशि इस परियोजना के लिए प्रदान की गई है. आगामी दो वर्षों में यह अनुसंधान 1,000 व्यक्तियों पर किया जाएगा. एक व्यापक रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की जाएगी. जिससे ओरल कैंसर से संबंधित नीति निर्माण में सहायता मिल सके. यह ऐप उपयोगकर्ताओं को तंबाकू, सुपारी, सिगरेट और बीड़ी जैसे हानिकारक पदार्थों के प्रभावों के बारे में जागरूक करेगा और उन्हें इनका सेवन छोड़ने के लिए प्रेरित करेगा. यह ऐप अपनी तरह का पहला इनोवेशन है, जिसे सरकार ने फंडिंग दी है और यह स्पष्ट तरह से कैंसर होने के कितने चांसेस हैं उसका प्रमाण देगा.

MP कैडर के 53 IAS अफसरों को एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया, नए अफसरों की एंट्री सीएमओ

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के 53 आईएएस अफसरों को करीब एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया गया है। इन अफसरों को जून से जुलाई तक मिड करियर ट्रेनिंग के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी जाना होगा। खास बात यह है कि सूची में शामिल दो अफसर मुख्यमंत्री के सचिव सीबी चक्रवर्ती एम और डॉ. इलैया राजा टी हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में दो पद खाली हो जाएगा तो इसके बदले में नए अफसर आमद दे सकते हैं। चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल इसके अलावा 4 जिलों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं। यह सभी 53 अफसर सचिव, अपर सचिव स्तर के हैं। हालांकि कई अफसरों ने अपनी ट्रेनिंग रद्द करवाने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि वर्किंग एफिशिएंसी में सुधार के लिए यह ट्रेनिंग आवश्यक होती है। इन अधिकारियों को 16 जून से 11 जुलाई तक होने वाले एमसीटीपी के चौथे चरण की ट्रेनिंग के लिए सूचित किया गया है। इन अफसरों के नाम शामिल लोकेश कुमार जाटव, धनंजय सिंह भदोरिया, स्वतंत्र कुमार सिंह, शशांक मिश्रा, स्वाति मीणा नायक, आईरिन सिंथिया जेपी, विकास नरवाल, भरत यादव, सीबी चक्रवर्ती, वी. किरण गोपाल, नंदकुमारम, शिल्पा गुप्ता, सूफिया फारूकी वली, अजय गुप्ता, अविनाश लवानिया, प्रियंका दास, अभिषेक सिंह, प्रीति मैथिल, ईलैया राजा टी., तेजस्वी नायक, अमित तोमर, श्रीकांत बनोठ, मुजीर्बुर रहमान, अनय द्विवेदी, तन्वी सुंदरियाल बहुगुणा, तरुण राठी, गणेश शंकर मिश्रा, अभिजीत अग्रवाल, कर्मवीर शर्मा, कौशलेंद्र विक्रम सिंह, अनुराग चौधरी, भास्कर लक्षकार, आशीष सिंह, शण्मुगा प्रिय मिश्रा, वीरेंद्र कुमार, दिनेश जैन, गिरीश शर्मा, शिवराज सिंह वर्मा, उमाशंकर भार्गव, प्रीति जैन, उषा परमार, सरिता बाला, ओम प्रजापति, चंद्र मौली शुक्ला, मनोज पुष्य, वीएस चौधरी कोलसानी, रुचिका चौहान, सौरव कुमार सुमन, विजय कुमार जे., हरजिंदर सिंह, नेहा मराव्या, बी. विजय दत्ता, अनुगृह पी और मोहित बुंदस।

मुरैना में 5 फुटवेयर कंपनियां लगेंगी, होगा 301 करोड़ का निवेश, 1100 से अधिक श्रमिकों को मिलेगा रोजगार

मुरैना मध्य प्रदेश अब फुटवेयर इंडस्ट्री का नया हब बनने जा रहा है! मुरैना के सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में फुटवेयर एंड एक्सेसरीज क्लस्टर के लिए पांच कंपनियों को सरकार ने जमीन आवंटित की है। इन कंपनियों के 301 करोड़ रुपये के निवेश से न सिर्फ इलाके का कायाकल्प होगा, बल्कि 1120 से ज्यादा लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के मौके मिलेंगे। ये खबर स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। पांच कंपनियां, बड़ा निवेश, बंपर नौकरियां सीतापुर में जिन पांच कंपनियों को जमीन दी गई है, वे हैं- बू यांग स्काईकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड, कोलेन्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गुरुकृपा इंटरप्राइजेज, खुराना एंड कंपनी, और अशोका बूट फैक्ट्री। ये कंपनियां मिलकर 301 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। इससे न केवल फुटवेयर और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि हजारों युवाओं को नौकरी भी मिलेगी। सरकार का फोकस चंबल संभाग में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है, और ये कदम उसी दिशा में एक बड़ा धमाका है। 161 एकड़ में बनेगा इंडस्ट्रियल हब मप्र सरकार ने सीतापुर में फुटवेयर क्लस्टर के लिए लगभग 161.30 एकड़ जमीन आरक्षित की है, जिसमें से 75 एकड़ से ज्यादा पर इंडस्ट्रियल भूमि तैयार होगी । करीब 55 एकड़ जमीन पर उद्योग लगाने के लिए जमीनों के आवंटन का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा, 10 प्लग एंड प्ले यूनिट्स भी बनाई जा रही हैं, जहां उद्यमी सिर्फ अपनी मशीनें लगाकर तुरंत प्रोडक्शन शुरू कर सकेंगे। ये सुविधा छोटे और मझोले उद्योगपतियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का बड़ा निवेश , इंदौर में हुई थी शुरुआत  इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में कई कंपनियों ने चंबल संभाग में निवेश की इच्छा जताई थी। उसी का नतीजा है कि आज मुरैना में इतना बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। इसके अलावा, सीतापुर में अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स भी चल रहे हैं। मसलन, दिल्ली की जायक्स कंपनी 150 करोड़ की लागत से एथेनॉल प्लांट बना रही है, सात्विक एग्रो 210 करोड़ के निवेश से सोयाबीन और मक्का से प्रोटीन पाउडर का प्लांट तैयार कर रही है, और मयूर यूनिकोट्स 50 करोड़ के निवेश से वाहनों के सीट कवर्स के लिए केनवास बना रही है। सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले पुरुष और महिला कर्मचारियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल्स भी बनाए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों को रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि इलाके में काम करने की चाहत रखने वाले लोगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ये कदम मध्य प्रदेश को औद्योगिक नक्शे पर और मजबूत करेगा। इसे एमपी में औद्योगिक विस्तार के नजरिये से भी देखा जा सकता है। पांचों कंपनियों को मिली जमीन का विवरण     बू यांग स्काईकार्प प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 35.99 एकड़ क्षेत्रफल जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 225 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 300 लोगों को रोजगार मिलेगा।     कोलेन्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 5.44 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 43 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा इसमें 220 लोगों को रोजगार मिलेगा।     गुरु कृपा इंटरप्राइजेज कंपनी को 9.13 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इसमें 20 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 400 लोगों को रोजगार मिलेगा।     खुराना एण्ड कंपनी को 4-15 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 10 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 100 लोगों को रोजगार मिलेगा।     अशोका बूट फैक्ट्री को 0.72 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा तीन करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा इसमें 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। 75 एकड़ में लगेंगी कंपनियां राज्य की ओर से मुरैना जिला प्रशासन को पत्र लिखकर 75 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए जाने के आदेश दिए हैं। इस भूमि में अन्य कंपनियों की यूनिट भी लगाई जाएंगी। प्रदेश सरकार ने फुटवियर तथा ऐसेसिरीज क्लस्टर के विकास के लिए 161.30 एकड़ भूमि देना प्रस्तावित किया है। फिलहाल सरकार ने उपरोक्त में से 55 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल पर उद्योगों के लिए भू-खंण्डों के आवंटन के लिए पत्र जारी कर दिया है। सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र, मुरैना के एरिया मैनेजर अंकित शर्मा ने कहा कि सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में 10 प्लग एण्ड प्ले यूनिट्स लगाने का भी प्रस्ताव आया है। इनके लिए 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल का भी निर्माण किया जा सकता है। इसमें उद्योगपति सीधा अपनी मशीनें लगाकर कार्य प्रारंभ कर सकते हैं।  

उपभोक्ता की जीत: सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त 1 रुपये जीएसटी वसूलने पर रेस्तरां को ₹6,000 भुगतान का आदेश

Consumers win: Restaurant ordered to pay ₹6,000 for charging extra Rs 1 GST on soft drinks भोपाल, संवाददाता। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिवक्ता अर्चित दीक्षित द्वारा अनिरुद्ध वाधवानी Vs हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज केस में जीत हासिल की है। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक अहम निर्णय में रेस्तरां को आदेश दिया है कि वह सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी वसूलने के चलते उपभोक्ता को ₹6,000 का भुगतान करे। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने भोपाल में एम. पी. नगर जोन-2 स्थित हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज रेस्तरां में भोजन करते समय एक सॉफ्ट ड्रिंक का ऑर्डर दिया था। बिल में उत्पाद के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी के रूप में वसूला गया। आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद, रेस्तरां प्रबंधन ने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया, जिसके पश्चात द्वारा उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की। सुनवाई के दौरान फोरम ने स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद के MRP में कर सम्मिलित होते हैं और उपभोक्ता से MRP से अधिक राशि वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए रेस्तरां को आदेशित किया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक कष्ट और उत्पीड़न के मद में ₹5,000 तथा ₹1,000 मुकदमेबाजी व्यय के रूप में अदा करे।

Slot Deposit 5K, Rahasia Pemain Pro Bikin Kaget!

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