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ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, और यह सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है, राजनाथ सिंह ने पाक को फिर चेताया

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और बाद में पाकिस्तान को जिस आक्रामकता से जवाब दिया, उसने न केवल उनकी ताकतवर रणनीतिक सोच को प्रदर्शित किया, बल्कि पाकिस्तान तक को एक कड़ा संदेश दिया। आइए, जानते हैं ऑपरेशन सिंदूर और इसके दौरान किए गए उनके बयानों पर विस्तार से। पहली चेतावनी: 23 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद का बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों के हमले के एक दिन बाद पाकिस्तान को चेतावनी दी थी। अर्जन सिंह मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने कहा था, “हम सिर्फ उन तक ही नहीं पहुंचेंगे जिन्होंने इस हमले को अंजाम दिया, हम उन तक भी पहुंचेंगे जिन्होंने पर्दे के पीछे बैठकर इसे अंजाम देने की साजिश रची है।” प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कड़ा संदेश 4 मई को दिल्ली में दिए गए अपने बयान में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को दोबारा चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम जो चाहते हैं, वह अवश्य होगा। देश पर बुरी नजर डालने वालों को हमारी सेना मुंहतोड़ जवाब देगी।” यह बयान ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत का संकेत था। ऑपरेशन सिंदूर: एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के साथ राजनाथ सिंह ने यह बयान दिया कि भारत ने अपनी वीरता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, “हमने केवल उन लोगों को मारा जिन्होंने हमारे निर्दोष नागरिकों को मारा।” इसके बाद 8 मई को राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में 100 आतंकवादी मारे गए थे, और उन्होंने सर्वदलीय बैठक में इस कार्रवाई को लेकर जानकारी दी। ब्रहमोस मिसाइल की ताकत का प्रदर्शन 11 मई को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली का उद्घाटन करते हुए राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि भारत की सेना सीमा पार की कार्रवाई से पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना की धमक रावलपिंडी तक महसूस की गई, जहां पाकिस्तान का मुख्यालय स्थित है। कश्मीर और गुजरात में सख्त संदेश राजनाथ सिंह ने श्रीनगर के बादामी बाग छावनी और भुज एयरबेस का दौरा किया। उन्होंने कश्मीर के सशस्त्र बलों की तारीफ करते हुए कहा, “आपकी वीरता ने सीमा पार पाकिस्तानी चौकियों और बंकरों को ध्वस्त कर दिया है।” भुज एयरबेस पर उन्होंने भारत के लड़ाकू विमानों की ताकत का हवाला दिया और पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अब भारत के विमान बिना सीमा पार किए पाकिस्तानी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को फिर से चेतावनी देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, और यह “सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।” उनका यह बयान पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश था कि भारत जब चाहें, तब अपनी ताकत का पूरा प्रदर्शन कर सकता है।

मौसम विभाग ने आज बारिश और तूफान की आशंका भी जताई थी, कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई शुरू

नई दिल्ली दिल्ली में एक बार फिर मौसम बदल गया है। कई इलाकों में धूलभरी आंधी के बाद झमाझम बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग ने आज बारिश और तूफान की आशंका भी जताई थी। ऐसे में मौसम में आए बदलाव के चलते लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी करते हुए आज आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है। इसकी के साथ बारिश की आशंका भी जताई गई थी। मौसम विभाग ने एक हफ्ते का पूर्वानुमान जारी किया है जिसमें पांच दिन आंधी तूफान और बारिश की आशंका जताई है। मौसम विभाग के मुताबिक 17 मई कोि बिजली चमकने के साथ तूफान, धूल उड़ाने वाली हवाएं, तेज सतही हवाएं चल सकती हैं। इस दौरान अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री दर्ज किया जा सकता है। आने वाले दिनों में बारिश की आशंका, गिरेगा तापमान मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों मेंं तापमान 3 डिग्री गिर सकता है। इसी के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है। 18 मई को तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। वहीं 19 मई को फिर एक बार आंधी तूफान और बारिश आ सकती है।

संविदाकर्मी की मौत पर मुआवजे का दिया था आदेश, इस आदेश को चुनौती देना पावर कारपोरेशन को पड़ा महंगा

लखनऊ ट्रांसफार्मर बनाते समय एक संविदाकर्मी की मौत पर मुआवजे को लेकर यूपी पावर कारपोरेशन गाढ़े में पड़ गया। संविदाकर्मी की मौत पर स्थाई लोक अदालत ने मुआवजे का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देना यूपी पावर कॉरपोरेशन को महंगा पड़ गया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने न सिर्फ याचिका खारिज की बल्कि लोक अदालत द्वारा दिए गए 13 लाख 15 हजार रुपये के मुआवजे के आदेश को बढ़ाकर 23 लाख 78 हजार रुपये कर दिया। साथ ही मुआवजे से इंकार कर, मुकदमा दाखिल करने पर 50 हजार रुपये का अतिरिक्त हर्जाना भी लगाया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से संविदाकर्मी के परिवार ने बड़ी राहत महसूस की है। यह निर्णय न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन की याचिका पर पारित किया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह एक दुखद मामला है, जिसमें एक पब्लिक यूटिलिटी सर्विस ने यह याचिका दाखिल की है और ऐसे तर्क प्रस्तुत कर रही है जो उस जनकल्याण के उद्देश्य के अनुकूल नहीं हैं जिसके लिए उसकी स्थापना की गई है। कॉर्पोरेशन ने यह स्वीकार किया था कि मृतक उसका संविदाकर्मी था जिसकी मृत्यु एक ट्रांसफार्मर ठीक करते हुए हो गई थी। हालांकि कॉर्पोरेशन की ओर से लोक अदालत द्वारा मुआवजे का आदेश देने की शक्ति पर सवाल उठाया गया। वहीं न्यायालय ने पाया कि मृतक संविदाकर्मी के परिवार को मुआवजे की जो धनराशि निर्धारित की गई है, वह तय मानकों से कम है। न्यायालय ने इस सम्बंध में विस्तृत आदेश और गणना करते हुए, 24 लाख 78 हजार रुपये की धनराशि को उपयुक्त माना जिसमें से एक लाख रुपये कॉर्पोरेशन द्वारा पूर्व में ही दिए गए। न्यायालय ने कहा कि बाकी की 23 लाख 78 हजार रुपये की रकम तीन माह में लोक अदालत के समक्ष जमा करायी जाय जो संविदाकर्मी की परिवार को दी जाएगी।

मई में एक साथ मिलेगा तीन महीने का राशन,अगर आपने एक जरूरी काम नहीं क‍िया तो आप इससे हाथ धो सकते हैं

भोपाल शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से हर महीने राशन लेने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए ये महत्वपूर्ण खबर है, राज्य शासन ने आदेश दिया है कि उन्हें तीन महीनों का राशन एकमुश्त दिया जायेगा, यानि जून, जुलाई और अगस्त का राशन हितग्राहियों को एक साथ दिया जायेगा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय भोपाल ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। संचालनालय ने सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु NFSA/PMGKAY अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री के आवंटन, उठाव एवं वितरण किया जाए। 20 तारीख तक मई का और 21 से जून, जुलाई, आगस्त का राशन मिलेगा निर्देश में कहा गया कि मई हेतु आवंटित राशन सामग्री का वितरण हर हाल में 20 मई तक समस्त पात्र परिवारों को कराया जाए, उसके बाद अगले दिन 21 मई से जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री (PMGKAY, MDM, ICDS, KKY का खा‌द्यान्न, शक्कर एवं नमक) का पात्रतानुसार वितरण कराया जाए। POS मशीन पर तीन महीने के राशन वितरण की सुविधा आदेश में कहा गया है कि जून से अगस्त तक का एकमुश्त आवंटन जारी किया गया है जिसे 31 मई, 2025 तक प्रदाय केन्द्रों पर उठाव कराकर उचित मूल्य दुकानों पर भंडारण सुनिश्चित कराया जाए, पीओएस मशीन में माह जून से अगस्त, 2025 तक की राशन सामग्री माहवार वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है अर्थात् पात्र हितग्राही को राशन प्राप्त करने हेतु माहवार क्रमानुसार पीओएस मशीन पर एथेंटिकेशन किया जाकर राशन का वितरण कराया जाए। मानसून को देखते हुए सरकार का फैसला तीन महीने का राशन एक साथ वितरित कराने का कारण मानसून सीजन बताया गया है, आदेश में कहा गया है की मानसून सीजन में संभावित बाढ़ के कारण राशन सामग्री के परिवहन, भंडारण एवं वितरण में आने वाली समस्याओं के निराकरण एवं पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु ये व्यवस्था की गई है। 3 महीने के राशन से धो बैठेंगे हाथ! अगर 31 मई से पहले नहीं क‍िया ये काम अगर अब भी आप राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराने में आलस दिखाएंगे तो एक नहीं लगातार तीन महीने का गेहूं-चावल और चीनी का नुकसान करा लेंगे। देशभर में तमाम राज्यों में जून-जुलाई और अगस्त का राशन एक साथ देने का फैसला किया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) के तहत यूपी, मध्य प्रदेश, झारखंड समेत कई राज्यों में तीन महीने का एडवांस राशन दिया जाएगा। 21 मई से राशन मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि अगर आपके राशन कार्ड का ई-केवाईसी नहीं हुआ है तो आपको तगड़ा झटका लग सकता है। इसके बाद राशन सीधे सितंबर में मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ियों को रोकने और सही लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के लिए सभी राशन कार्ड धारकों का ई-केवाईसी कराया जाए। सरकारें लगातार इसे लेकर मौके दे रही हैं। बावजूद इसके अभी भी बहुत से लोगों ने ई-केवाईसी नहीं कराया है। यूपी में मई-जून में ही मिलेगा 3 महीने का राशन यूपी सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग की बैठक में तय हुआ है कि मई का राशन 20 मई तक वितरित कर दिया जाएगा। इसके बाद 21 मई से 31 मई तक जून का राशन बांटा जाएगा। फिर 5 जून से 16 जून तक जुलाई का राशन मिलेगा। जून में ही 19 से 30 जून तक अगस्त का राशन भी मिल जाएगा। इसके बाद फिर सीधे सितंबर में राशन मिलेगा। झारखंड में 1 जून से 30 जून के बीच जून, जुलाई और अगस्त का एडवांस राशन मिलेगा। अनुमान के मुताबिक झारखंड में करीब 2.88 करोड़ लाभार्थी हैं, जो सरकार द्वारा सब्सिडी पर मिलने वाला राशन लेते हैं। मध्य प्रदेश में भी 21 मई से तीन महीने का राशन एक साथ मिलना शुरू हो जाएगा। अन्य राज्यों में भी एडवांस राशन बांटने की तैयारी हो गई है। ऐसे करें ई-केवाईसी राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराना बहुत ही आसान है। आप मोबाइल से बस 2 मिनट में इस काम को कर सकते हैं। मोबाइल में 2 एप डाउनलोड करें- ‘मेरा KYC’ और AadhaarFaceRD मोबाइल एप। बस आपको अपना आधार नंबर डालकर लोकेशन के साथ वेरिफाई करना है और फिर मोबाइल कैमरे से अपनी वेरिफिकेशन को पूरा करना है। बस हो गया ई-केवाईसी। आप चाहें तो पास की राशन कार्ड की दुकान पर आधार कार्ड ले जाकर भी यह काम करा सकते हैं। क्यों मिल रहा 3 महीने का एडवांस राशन सरकार द्वारा तीन महीने का एडवांस राशन मिलने को कुछ लोग पाकिस्तान के साथ तनाव के साथ जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है। दरअसल मानसून में कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं। राशन का ट्रांसपोर्टेशन, उसका वितरण, स्टोरेज जैसी बहुत सी समस्याएं आती हैं। ऐसे में कोई परिवार इस वजह से भूखा न सोए, इसलिए सरकार मानसून खत्म होने तक का राशन एडवांस में दे रही है। कई बार सरकार ऐसा कदम जरूरत से ज्यादा अनाज उत्पादन की वजह से भी करती है। अंत्योदय अन्न योजना (AAY) राशन कार्ड धारकों को प्रति परिवार 35 किलो राशन दिया जाता है। जबकि पीएचएच कार्ड पर परिवार में प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज दिया जाता है।

UPSC ने DGP के चयन के लिए तीन IPS के नामों का किया चयन, अरुण देव सहित तीनों के नाम शामिल…

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति होने वाली है। इसको लेकर आज यूपीएससी (UPSC) की सलेक्शन कमेटी की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने भाग लिया।छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के लिए UPSC से 3 अधिकारियों के नाम काे क्लीयरेंस मिल गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ के स्थायी डीजीपी बनने की रेस में IPS अरुण देव गौतम के अलावा, IPS पवन देव और IPS जीपी सिंह का नाम शामिल है। वर्तमान में DGP की जिम्मेदारी IPS अरुण देव गौतम के पास है। सरकार ने गौतम को डीजीपी पद की अस्थायी जिम्मेदारी दी है। बताया जा रहा है कि IPS अरुण देव गौतम के लिए प्रदेश के नेताओं की लॉबी लगी हुई है। वहीं IPS पवन देव के लिए बिहार के राजनेता लॉबी कर रहे हैं। इसी तरह से IPS जीपी सिंह के लिए प्रदेश के राजनेताओं के अलावा दिल्ली के राजनेता और अफसर लॉबी कर रहे हैं। इन तीनों में से कोई एक छत्तीसगढ़ पुलिस का स्थायी मुखिया होगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अरुण देव का नाम सबसे टॉप पर है। UPSC से छत्तीसगढ़ वापस आ गई फाइल गृह विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यूपीएससी से सीएम सचिवालय फाइल और लेटर आ चुका है। राज्य सरकार के जिम्मेदारों ने यूपीएससी से आए पत्र पर अंतिम निर्णय लेने की कवायद शुरू कर दी है।जून माह तक नए डीजीपी का नाम सार्वजनिक किया जाएगा। 4 फरवरी को IPS गौतम को मिली थी डीजीपी की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने 4 फरवरी को आईपीएस अरुण देव गौतम को डीजीपी की अस्थायी जिम्मेदारी दी थी। इस संबंध में गृह विभाग के विशेष सचिव ने निर्देश जारी किया था। जिस समय आईपीएस गौतम को डीजीपी बनाया गया था, उस समय उनके पास नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक की भी जिम्मेदारी थी। स्थायी DGP की रेस में शामिल IPS वर्तमान में यहां हैं पदस्थ     IPS अरुण देव गौतम: अस्थायी डीजीपी, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक     IPS पवन देव: चेयरमेन पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन     IPS जीपी सिंह: डीजी पीएचक्यू पहले मुख्यमंत्री सीधे करते थे डीजीपी की नियुक्ति छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री खुद ही डीजीपी की नियुक्ति करते थे। इस प्रक्रिया को लेकर कोई निर्धारित नियम नहीं था। 2011 में एएन उपध्याय की नियुक्ति के बाद तक यूपीएससी को नाम भेजने का नियम लागू नहीं हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें कहा गया था कि डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए की जानी चाहिए। साथ ही अगर नियुक्ति के बाद छह महीने से कम समय में रिटायरमेंट का समय बचा हो, तो भी उन्हें दो साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। छत्तीसगढ़ में इस गाइडलाइन का पालन करते हुए, अशोक जुनेजा को इसका लाभ मिला था। अब इस नियम के तहत छत्तीसगढ़ को जल्द ही अपना नया और पूर्णकालिक डीजीपी मिलेगा, जो राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूती से संभालेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल: यूपीएससी सलेक्शन कमेटी केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल तैयार कर भेजेगा। वहां से छत्तीसगढ़ सरकार को फिर पेनल आएगा। जिस पर मुख्यमंत्री को अधिकार होगा कि वह इन तीन नामों के पेनल में से किसी एक नाम पर वे टिक लाएंगे, हालांकि, पहले डीजीपी की नियुक्ति मुख्यमंत्री सीधे करते थे। और एएन उपध्याय की नियुक्ति होने तक यूपीएससी को नाम भेजने का कोई नियम नहीं बना था। मुख्यमंत्री उस समय सीधे डीजीपी अपाइंट करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसके बाद गाइडलाइन आ गया, जिसके अब कम-से-कम दो साल के लिए डीजीपी की नियुक्ति होगी। अशोक जुनेजा को इसका लाभ : इसके साथ ही अगर उनकी नियुक्ति के बाद रिटायरमेंट में छह महीने भी टाईम बचा हो तो भी उन्हें दो साल का नियुक्ति के बाद अवसर दिया जाएगा। इसका लाभ छत्तीसगढ़ में अशोक जुनेजा को मिला है।छह महीने से छत्तीसगढ़ के डीजीपी के लिए मामला यूपीएससी में लटका था। वहीं इससे पहले डीपीसी हुई भी मगर जीपी सिंह की इंट्री के बाद एक बार फिर से कई तरह की जानकारियां राज्य सरकार से  यूपीएससी ने मंगवाई थी। ज्ञात हो कि डीजीपी सलेक्शन के लिए  सरकार ने दिसंबर 2024 में प्रस्ताव भेज दिया था। लेकिन अब यह समझा जाता है कि भारत सरकार को यूपीएससी जल्द अब पेनल बनाकर भेज सकती है।

उत्तर प्रदेश में अवैध शराब माफियाओं पर एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ  उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतर्राज्यीय स्तर पर अपमिश्रित ज़हरीली शराब का धंधा करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह का सरगना सुखविंद्र सिंह उर्फ सेठी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह ENA/Rectified Spirit की अवैध आपूर्ति कर ज़हरीली शराब बनाने में लिप्त था। गिरफ्तार आरोपियों में सरगना सुखविंद्र सिंह उर्फ सेठी को उधमसिंह नगर, उत्तराखंड से पकड़ा गया, जबकि उसके साथी गुड्डू, रामसिंह और सुनील कुमार को बिजनौर से दबोचा गया। शराब बनाने के लिए स्प्रिट का करते थे प्रयोग एसटीएफ ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में रेक्टिफाइड स्प्रिट, अपमिश्रित शराब से भरे केन, खाली कांच की बोतलें, तीन चारपहिया वाहन और अन्य सामान बरामद किया है। एसटीएफ को यह सफलता गुप्त सूचना के आधार पर मिली, जब टीम को जानकारी मिली कि काशीपुर-हरिद्वार रोड स्थित मां जगदम्बा ढाबे पर रेक्टिफाइड स्प्रिट कंटेनरों से निकाली जा रही है। यह स्प्रिट दवा कंपनियों को भेजी जानी थी, लेकिन मिलभगत से इसे अवैध शराब निर्माण में प्रयोग किया जा रहा था। पूछताछ में खुले ये राज STF की पूछताछ में सरगना सुखविंद्र ने बताया कि वह मूल रूप से बस चालक था और अपने परिचित सतनाम सिंह से इस अवैध धंधे में जुड़ा। सतनाम की मृत्यु के बाद उसने खुद इसका संचालन शुरू किया। ट्रैकर चालक गुड्डू, जो IGL केमिकल फैक्ट्री से स्प्रिट लाता था, इस धंधे में उसका सहयोगी बन गया। स्प्रिट को अवैध तरीके से निकालकर ढाबे के पास उतारा जाता था, जहां से रामसिंह और अन्य सहयोगी इसे फैला देते थे। रामसिंह ने कबूल किया कि वह पहले भी कच्ची शराब बनाने के मामलों में जेल जा चुका है और अब सेठी से स्प्रिट लेकर स्वयं शराब बनाता और बेचता था। वहीं, गुड्डू ने बताया कि वह कंपनी कर्मचारी भूप सिंह से मिलीभगत कर स्प्रिट की निर्धारित मात्रा से अधिक लोड करवाता था और इसे ढाबे पर बेचता था।

जीवन में खुशहाली लाती है अपरा एकादशी, जानिए इसका महत्व और कथा

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। हर माह में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है, एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में। प्रत्येक महीने में आने वाली एकादशी व्रत को अलग-अलग नामों के जाना जाता है। ऐसे ही ज्येष्ठ माह में आने वाली एकादशी को अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। अपरा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अपार धन की प्राप्ति होती है। साथ ही उसे हर कार्य में अपार सफलता मिलती है। तो आइए जानते हैं कि इस बार अपरा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। अपरा एकादशी व्रत 2025 डेट और और मुहूर्त पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 23 मई को रात 1 बजकर 12 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि समाप्त 23 मई को रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगा। अपरा एकादशी का व्रत 23 मई 2025 को रखा जाएगा।  एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह सुबह 4 बजकर 4 मिनट सुबह 4 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। अपरा एकादशी 2025 पारण का समय अपरा एकादशी का पारण 24 मई को किया जाएगा। बता दें कि पारण का अर्थ है कि व्रत खोलना। अपरा एकादशी का पारण करने का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 1 मिनट से सुबह 8 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय शाम 7 बजकर 20 मिनट रहेगा। बता दें कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना होता है। अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गई है तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के में पारण न करना पाप करने के समान माना जाता है। अपरा एकादशी व्रत का महत्व अपरा एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। अपरा एकादशी दिन प्रभु नारायण के साथ मां लक्ष्मी की भी पूजा करें। ऐसा करने से व्यक्ति धन-धान्य में भी वृद्धि होती है और उसे कभी किसी भी चीज की कमी नहीं होती है।

रश्मिका संग विवाह रचाएंगे विजय देवरकोंडा, हो चुकी है दोनों की सगाई? एक्टर ने बताया सच

साउथ अभिनेता विजय देवरकोंडा( Vijay Devrakonda) और अभिनेत्री रश्मिका मंदाना( Rashmika Mandanna) अक्सर डेटिंग रुमर्स को लेकर चर्चा में होते हैं। कपल जब भी साथ नजर आते हैं इनके रिश्ते की अफवाह आग की तरह फैल जाती है। हालांकि इस मामले में रश्मिका और विजय कभी कोई सफाई नहीं देते हैं, लेकिन अब जब विजय की सगाई तक की बात सामने आई तो एक्टर ने इसपर चुप्पी तोड़ी है। अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि उनकी शादी के बारे में क्या राय है। फिल्मफेयर के साथ लेटेस्ट टॉक में जब विजय देवरकोंडा( Vijay Devrakonda) से रश्मिका संग उनके रिश्ते पर सवाल किया गया तब एक्टर ने इसे इग्नोर किया। एक्टर ने जवाब दिया कि इंडस्ट्री के इन्साइडर से ही पूछ लीजिए। रश्मिका मंदाना और उनके रिश्ते पर एक्टर ने बेहद उलझाने वाला जवाब देते हुए कहा कि मैं अभी शादी नहीं कर रहा हूँ। हाँ मैं शादी करूंगा लेकिन जब मुझे कोई अच्छा लाइफ पार्टनर मिल जाएगा तभी। एक्टर ने रश्मिका मंदाना की तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहतरीन स्टार हैं बहुत मेहनती हैं। जब होस्ट ने पूछा कि क्या रश्मिका आपकी पार्टनर की लिस्ट में फिट बैठती हैं, तो अभिनेता ने जवाब दिया, “कोई भी अच्छी महिला जिसका दिल अच्छा हो, इसमें फिट बैठती है।” हालांकि, विजय ने रश्मिका के साथ काम करने के बारे में बात की और स्वीकार किया कि उन्हें एक साथ और फिल्में करनी चाहिए। मैंने रश्मिका के साथ बहुत ज्यादा फिल्में नहीं की हैं। मुझे और काम करना चाहिए। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं। वह एक खूबसूरत महिला हैं। इसलिए केमिस्ट्री में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। बता दें कि कुछ समय पहले रुमर्स सामने आए थे कि विजय देवरकोंडा फरवरी में सगाई करने वाले हैं। इन रुमर्स पर विजय ने रिएक्ट करते हुए साफ मना कर दिया है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। मीडिया हर दो साल में मेरी शादी का ऐलान कर देता है।

उषा ठाकुर ने कहा कांग्रेस अपना काम करें इससे साफ तौर पर समझा जा सकता है

इंदौर  मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह के विवादित बयान के दौरान महू से विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर मंच पर मौजूद थीं और मुस्कुराती हुई नजर आईं। उक्त बयान को लेकर जब उषा ठाकुर से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि “जो होना था, वह हो चुका है। सभी लोग भली-भांति जानते हैं कि मंशा किसी की इस प्रकार की नहीं हो सकती। कई बार जुबान फिसल जाती है, जिससे भ्रांतियां पैदा हो जाती हैं।” उषा ठाकुर ने स्पष्ट किया कि ऐसे विषयों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। भाजपा संगठन के निर्णयों को लेकर कहा कि अच्छा वक्त बना है, ट्रेनिंग होनी चाहिए। हर साल एक ऐसी ट्रेनिंग आयोजित की जानी चाहिए, ताकि सभी नेता और कार्यकर्ता सही मार्गदर्शन पा सकें। जब इस पूरे मामले में उषा ठाकुर से पूछा गया कि कांग्रेस कैबिनेट मंत्री विजय शाह के इस्तीफा की मांग कर रही है तो उषा ठाकुर ने कहा कांग्रेस अपना काम करें इससे साफ तौर पर समझा जा सकता है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर कैबिनेट मंत्री विजय शाह के पक्ष में ही बयान देती नजर आ रही है।

सेना किसी नेता के चरणों में नतमस्तक नहीं होती, बल्कि वह सिर्फ भारत माता के प्रति समर्पित रहती है – कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बयान को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध दर्ज कर रही है। इसी कड़ी में अब भूतपूर्व सैनिक भी उतर आए हैं। पीसीसी में शनिवार को कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ ने मंत्री विजय शाह और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बयानों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय सेना किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि संविधान और राष्ट्र की सेवा करती है। सेना किसी नेता के चरणों में नतमस्तक नहीं होती, बल्कि वह सिर्फ भारत माता के प्रति समर्पित रहती है। बतौर पूर्व सैनिक हमें सेना के अपमान ने बहुत आघात पहुंचाया है। अगर नेताओं के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं होगी, तो देशभर के पूर्व सैनिक सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की तोड़ मरोड़कर बयान पेश करने की दलील गलत है। सरकार ने नहीं की कोई ठोस कार्रवाई मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि इस विवादित बयान पर अभी तक सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि जब हमारी सेना देश की रक्षा में जान तक देने को तैयार है, तो फिर उसके सम्मान पर चोट करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? अगर सरकार ने समय पर कार्रवाई की होती, तो सैनिकों का मनोबल बना रहता। लेकिन इस चुप्पी से जवानों में दुख और आक्रोश है। वोट बैंक की राजनीति में अब सेना को खींचा जा रहा मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं रहा, बल्कि यह साफ दर्शाता है कि वोट बैंक की राजनीति में अब सेना को भी खींचा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सेना देश के लिए नतमस्तक होती है, न कि किसी पार्टी के लिए। राजनीति में सीमा का ध्यान रखना चाहिए। जो देश के जवान के मनोबल को तोड़ने का काम करेगा, वह देशद्रोही के समान होगा। सैनिकों को पहले दिन से सिखाया जाता है देश सबसे ऊपर समाजवादी पार्टी द्वारा दिए गए बयान पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि सेना के पहले दिन से ही सैनिकों को सिखाया जाता है कि देश सबसे ऊपर है। ऐसे में कोई भी नेता या दल यदि व्यक्तिगत या सांप्रदायिक टिप्पणी करता है, तो वह भारत के सशस्त्र बलों का अपमान करता है। सरकार को खुल कर देनी चाहिए प्रतिक्रिया उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर कोर्ट ने संज्ञान लिया है, लेकिन यह विषय इतना गंभीर है कि सरकार को भी खुलकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए। हमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार जरूर है, लेकिन सरकार की चुप्पी बहुत खलती है। यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता और सैनिकों का आक्रोश सड़कों पर दिखेगा।मेजर श्याम सुंदर ने कहा कि ट्रुप्स का धर्म ही अफसर का धर्म होता है। मैं एक ऐसे अफसर को जानता हूं, जो अपने जवानों के रोजा रखने पर स्वयं भी रोजा रखते थे। यही समर्पण हमारी सेना को दुनिया में सबसे अलग बनाता है। हमारी सेना अनुशासन में विश्वास रखती है, और नेतृत्व की भावना उसमें बचपन से ही सिखाई जाती है। अगर करनाल सोफिया कुरैशी का चयन हुआ है, तो वह निश्चित रूप से एक उत्कृष्ट अधिकारी रही होंगी। उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयान देना सेना का अपमान है और इससे गलत संदेश फैलता है।

सिवनी में डबल मर्डर के बाद तनाव,गुस्साई भीड़ शराब दुकान को फूंका, चक्काजाम किया

सिवनी सिवनी में दो युवकों की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। इस घटना से गुस्साए परिजन और ग्रामीणों ने हमलावरों को पकड़कर शराब दुकान में आग लगा दी और मंडला रोड पर चक्काजाम कर दिया। मौके पर पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता, एसडीओपी, टीआई, एसडीएम और तहसीलदार मौजूद हैं. घटना केवलारी के परासपानी गांव में शुक्रवार रात करीब 12 बजे की है। परिजन ने बताया कि अमन बघेल (20) और रूपक बघेल (25) केवलारी आए थे। इसी दौरान गांव के ठाकुर परिवार ने दोनों को खेरमाई मंदिर के पास खिरका मोहल्ले में बुलाया। यहां दोनों पर चाकू से हमला कर दिया। आरोपियों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं। घायल युवकों को पहले केवलारी अस्पताल ले जाया गया। यहां से डॉक्टरों ने उन्हें जिला चिकित्सालय सिवनी रेफर कर दिया, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। दोनों का पोस्टमॉर्टम शनिवार को सिवनी में किया जाएगा।केवलारी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पर आरोपियों को शहर से बाहर भेजने के आरोप मृतकों के मामा संजय बघेल का आरोप है कि कमल ठाकुर और उसके परिवार ने भांजे रूपेश और अमन पर चाकू से हमला किया था। अमन की मौके पर मौत हो गई थी। रूपेश ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। टीआई को इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। टीआई ने आरोपियों को केवलारी के बाहर भेज दिया है। हम सड़क पर बैठे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। थाना प्रभारी को हटाने की मांग कर रहे ग्रामीण सिवनी एसपी सुनील कुमार मेहता का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। मृतकों के परिजनों को समझा रहे हैं। शवों का पोस्टमॉर्टम कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे लोगों द्वारा हत्या के आरोपियों को तत्काल पकड़ने और केवलारी थाना प्रभारी को हटाने की मांग की जा रही है। तीन बहनों का इकलौता भाई था रूपक मृतक रूपक बघेल माता-पिता का इकलौता बेटा था। वह पेशे से किसान था। शादी नहीं हुई थी। उसकी तीन बहन हैं। वहीं मृतक अमन दो भाई और एक बहन हैं। उसकी भी शादी नहीं हुई थी। वह पेशे से किसान था।

सुरेश रैना ने की बड़ी भविष्यवाणी- विराट कोहली के पास सबकुछ है, बस IPL ट्रॉफी बाकी

नई दिल्ली विराट कोहली ने अपने करियर में आपार सफलता हासिल की है। उन्होंने वनडे वर्ल्ड कप, 2 चैंपियंस ट्रॉफी, टी20 वर्ल्ड कप और ना जाने आईसीसी के कितने अवॉर्ड जीते हैं, मगर अभी भी IPL ट्रॉफी जीतने की कसक है। विराट कोहली आरसीबी को ट्रॉफी जिताने के लिए पीछले 17 सालों से पसीना बहा रहे हैं, मगर अभी तक उनके हाथ सफलता नहीं लगी है। मगर इस सीजन वह और उनकी टीम जिस तरह खेल रही है उसे देखकर लगता है कि आरसीबी का ट्रॉफी का सूखा इस सीजन खत्म हो जाएगा। ऐसा ही मानना टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेट सुरेश रैना का भी है। उन्होंने कहा है कि अगर विराट कोहली ‘विराट’ पारी खेलते हैं तो आरसीबी इस साल ट्रॉफी उठा सकती है। स्टार स्पोर्ट्स के शो पर बात करते हुए सुरेश रैना ने कहा, “बिल्कुल, उन्होंने अभी-अभी टेस्ट से संन्यास लिया है और अगर वह आरसीबी को ट्रॉफी जिताते हैं तो उन्हें अलग ही खुशी मिलेगी। वह आरसीबी की अपराजेय ताकत हैं। उनके पास जीवन में सब कुछ है, बस आरसीबी की ट्रॉफी नहीं आई है। वह निश्चित रूप से इसके लिए कड़ी मेहनत करेंगे। मुझे लगता है कि अगर विराट कोहली ‘विराट’ पारी खेलते हैं तो आरसीबी इस साल ट्रॉफी उठा सकती है।” रैना ने कहा, “बाकी 10 खिलाड़ियों को उनका साथ देना होगा और उनके साथ बने रहना होगा। वह स्थिति को पढ़ना जानते हैं। हमने उनके क्रिकेटिंग शॉट्स के साथ-साथ विकेटों के बीच दौड़ते हुए भी देखा है। अब एक अलग ऊर्जा देखने को मिलेगी। उन्हें पहले ही ब्रेक मिल चुका है। उनका एक अलग रूप देखने को मिलेगा। उन्होंने पहले भी ऐसा किया है, तो अब क्यों नहीं? अब वह ऐसा करने के लिए और भी अधिक उत्सुक होंगे।” आज बेंगलुरु को मिल सकता है प्लेऑफ का टिकट रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का सामना आज कोलकाता नाइट राइडर्स से है। आरसीबी 11 में से 8 मैच जीतकर पॉइंट्स टेबल में दूसरे पायदान पर है। अगर आज बेंगलुरु कोलकाता को चित करने में कामयाब रहती है तो वह प्लेऑफ का टिकट हासिल करने वाली पहली टीम बन जाएगी। इसके बाद उनकी नजरें बचे दो मुकाबलों में टॉप-2 में जगह पक्की करने पर होगी। कोहली भी इस सीजन पूरे रंग में नजर आ रहे हैं। वह 11 मैचों में 505 रनों के ऑरेंज कैप की रेस में चौथे पायदान पर हैं।

भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश,भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी : मोहन भागवत

जयपुर जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि शक्ति हो तो दुनिया प्रेम की भाषा भी सुनती है. उन्होंने अपने भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति और त्याग की परंपरा को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि भारत के इतिहास में भगवान श्री राम से लेकर भामाशाह जैसे महान व्यक्तित्वों ने त्याग और सेवा की मिसाल पेश की है. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व को धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है. धर्म के माध्यम से ही मानवता की उन्नति संभव है. उन्होंने विशेष रूप से हिंदू धर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण माना और कहा कि विश्व कल्याण हमारा प्रमुख धर्म है.  उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश बताते हुए कहा कि भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी है. विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में प्रायसरत! मोहन भागवत का कहना है कि भारत विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत किसी से द्वेष नहीं रखता लेकिन जब तक आपके पास शक्ति नहीं होगी, तब तक विश्व प्रेम और मंगल की भाषा नहीं समझेगा. इसलिए उनके मुताबिक, विश्व कल्याण के लिए शक्ति का होना आवश्यक है, और ये कि हमारी ताकत विश्व ने देखी है. शक्ति ही एक माध्यम है! मोहन भागवत ने यह भी बताया कि शक्ति ही वह माध्यम है जिससे विश्व में भारत अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है और वह पहले भी कह चुके हैं कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रसार भी तभी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्वभाव विश्व का है, इसे बदला नहीं जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने संत समाज की भूमिका की भी प्रशंसा की, और कहा कि ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए संस्कृति और धर्म की रक्षा कर रहे हैं.  

राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या

नई दिल्ली भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट की सलाह मांगी है कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए निर्धारित समयसीमा देश की सर्वोच्च अदालत के द्वारा तय की जा सकती है। यह कदम तब उठाया गया जब 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों को राष्ट्रपति को तीन माह में निपटाना होगा। क्या है अनुच्छेद 143(1)? संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत राष्ट्रपति किसी कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकते हैं। यह राय बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसका संवैधानिक महत्व काफी अधिक होता है। सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी जाती है। राष्ट्रपति ने यह संदर्भ 13 मई को भेजा और इसमें कुल 14 कानूनी प्रश्न शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट क्या पहले भी राय देने से मना कर चुका है? सुप्रीम कोर्ट ने दो बार राष्ट्रपति की राय मांगने पर जवाब देने से इनकार किया है। 1993 में जब राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद में मंदिर की पूर्वस्थिति पर राय मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने धार्मिक और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया। इससे पहले 1982 में पाकिस्तान से आए प्रवासियों के पुनर्वास संबंधी कानून पर राय मांगी गई थी, लेकिन बाद में वह कानून पारित हो गया और कोर्ट में याचिकाएं दायर हो गईं, जिससे राय अप्रासंगिक हो गई। कब-कब सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राय? संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सबसे पहले महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली लॉज एक्ट- 1951 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी. केरल शैक्षणिक बिल- 1957 पर संदर्भ को संवैधानिक तौर पर व्याख्या करने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर नरसिंह राव सरकार के समय भेजे गए संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था की ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों से जुड़े मामलों में राय देना अनुच्छेद 143 के दायरे में नहीं आता है. साल 1993 में कावेरी जल विवाद मामले के संदर्भ पर भी सुप्रीम कोर्ट ने राय देने से मना कर दिया था. साल 2002 में गुजरात चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपील या पुनर्विचार याचिका दायर करने के बजाय 143 के तहत संदर्भ भेजा जाना सांविधानिक तौर पर गलत विकल्प है. हालांकि, पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की तरह संदर्भ पर राय बाध्यकारी नहीं होना संविधानिक तौर पर विचित्र है. राज्यपाल मामले से जुड़े कुछ पहलू 2G मामले में यूपीए सरकार के संदर्भ से मेल खाते हैं, तब सुप्रीम कोर्ट ने 122 फर्म और कंपनियों के 2G लाइसेंस पर स्पेक्ट्रम आवंटन को रद्द कर दिया था. तब केंद्र ने उसे फैसले के खिलाफ संदर्भ भेजते हुए पूछा था कि क्या नीतिगत मामलों में सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी होनी चाहिए. दरअसल, केशवानंद भारती मामले में संविधान पीठ के फैसले के अनुसार नीतिगत मामलों में संसद और केंद्र के निर्णय पर अदालतों की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए. तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल मामले में क्या हुआ? राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो जजों ने दिया था. कानूनविदों की मानें तो इस मामले में कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई होनी चाहिए थी. दरअसल, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को उन विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की थी जिन्हें राज्यपाल ने राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित किया. आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए एक समय-सीमा निर्धारित कर दी थी. इस फैसले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से सुप्रीम कोर्ट से सवाल किए गए हैं कि जबकि संविधान में ऐसा जिक्र नहीं है, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे दी. कानूनविद दो जजों की पीठ के फैसले पर इसलिए भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि पूर्व में दिया गया सर्वोच्च अदालत की बड़ी पीठ का फैसले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की सीमा तय की गई है. दूसरी ओर संविधान में राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास विधायक कितने दिन लंबित रहेगा, इसका जिक्र नहीं है. संविधान में जो प्रावधान नहीं है उसकी व्याख्या करके सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रावधान बना दिए. जबकि केशवानंद भारती फैसले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट को कानून निर्माण या संविधान संशोधन की शक्ति नहीं है सरकार की खामियों, कानून के निर्वात को ठीक करने के लिए जजों को संरक्षक की भूमिका मिली है. लेकिन यह साफ है कि राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए संदर्भ पर अगर सुप्रीम कोर्ट आगे बढ़ता है यानी राय देता है तो वह बाध्यकारी नहीं होगी. वह महज एक राय, सलाह या मशविरा होगा. क्या राष्ट्रपति निर्णय को पलटना चाहती हैं? सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अनुच्छेद 143 का उपयोग किसी पहले से दिए गए निर्णय की समीक्षा या पलटने के लिए नहीं किया जा सकता है। 1991 में कावेरी जल विवाद पर कोर्ट ने कहा था कि निर्णय देने के बाद उसी विषय पर राष्ट्रपति की राय मांगना न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है। यदि सरकार चाहे तो वह पुनर्विचार याचिका या क्युरेटिव याचिका दायर कर सकती है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राष्ट्रपति ने पूछे कैसे प्रश्न? अधिकांश प्रश्न 8 अप्रैल के फैसले से जुड़े हैं, लेकिन अंतिम कुछ प्रश्नों में सुप्रीम कोर्ट की स्वयं की शक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रश्न 12 में पूछा गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को पहले यह तय करना चाहिए कि कोई मामला संविधान की व्याख्या से जुड़ा है या नहीं, ताकि उसे बड़ी पीठ को भेजा जा सके? इसी तरहा प्रश्न 13 में पूछा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के प्रयोग की सीमा क्या है। प्रश्न संख्या 14 में पूछा गया है कि केंद्र-राज्य विवादों की मूल सुनवाई का अधिकार किसके पास है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास या अन्य अदालतों के पास … Read more

विस्फोटकों का पता लगाने और गश्त करने में माहिर, सीआरपीएफ के डॉग की शहादत

बीजापुर  छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर नक्सलियों के खिलाफ एक बड़े अभियान में सीआरपीएफ का एक वीर डॉग शहीद हो गया। के9 रोलो नाम का यह डॉग जो विस्फोटक ढूंढने और हमले करने में माहिर था 200 मधुमक्खियों के हमले में मारा गया। यह घटना कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में हुई। रोलो सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के 21 दिन के ऑपरेशन का हिस्सा था। उसे मरणोपरांत सम्मान मिलेगा। यह दुखद घटना तब हुई जब सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में तलाशी अभियान चला रही थी। के9 रोलो भी इस टीम का हिस्सा था। अचानक, मधुमक्खियों के एक झुंड ने रोलो पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों ने उसके शरीर पर कई डंक मारे। रोलो को बचाने के लिए उसके हैंडलर ने तुरंत उसे एक प्लास्टिक शीट से ढक दिया। लेकिन मधुमक्खियां शीट के अंदर घुस गईं और उसे और भी ज्यादा काटने लगीं। दर्द और जलन से परेशान होकर रोलो बेकाबू हो गया। उसने शीट को हटा दिया, जिससे वह और भी ज्यादा मधुमक्खियों के हमले का शिकार हो गया। बेहोश हो गया था रोलो अंत में रोलो को लगभग 200 मधुमक्खियों ने काटा था। वह बेहोश हो गया। उसके साथियों ने उसे तुरंत मेडिकल सहायता देने की कोशिश की। लेकिन, रोलो ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वेटरनरी डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मरणोपरांत मिलेगा सम्मान के9 रोलो एक वफादार सिपाही था। उसने नक्सलियों के ठिकानों और विस्फोटक सामग्री को ढूंढने में सीआरपीएफ की मदद की। उसकी शहादत को सम्मान देने के लिए उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल उसे मरणोपरांत कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित करेंगे। पिछले साल मनाया था दूसरा जन्मदिन रोलो एक खूबसूरत बेल्जियन मेलिनोइस था। उसने पिछले महीने ही अपना दूसरा जन्मदिन मनाया था। उसे सीआरपीएफ के डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल डीबीटीएस बेंगलुरु में प्रशिक्षित किया गया था। अप्रैल 2024 में उसे सीआरपीएफ की 228वीं बटालियन में नक्सल विरोधी ड्यूटी के लिए भेजा गया था। सीआरपीएफ के जवान रोलो को बहुत प्यार करते थे। वे उसे अपना साथी मानते थे।

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