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दिल्ली की 100 साल पुरानी ‘मेट्रो’, जिससे गई थी नेहरू की बारात, ट्राम की पढ़िए पूरी कहानी

नई दिल्ली दिल्ली की लाइफलाइन माने जाने वाली मेट्रो का सफर आपने जरूर किया होगा। आज दिल्ली मेट्रो की रफ्तार शहर की धड़कन है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से 100 साल पहले भी इसी शहर पर एक ‘मेट्रो’दौड़ती थी? जी हां हम बात कर रहे हैं ट्राम की। कभी दिल्ली की सड़कों पर ट्राम की खटखट सुनाई देती थी। सौ साल पहले, जब सड़कों पर कारें गिनती की थीं और मेट्रो का नामोनिशान नहीं था, तब दिल्ली में बिजली की ट्राम दौड़ती थी। यह न सिर्फ ट्रांसपोर्ट का साधन थी, बल्कि दिल्लीवालों की जिंदगी का हिस्सा थी। आज हम दिल्ली की इसी ट्राम की कहानी बता रहे हैं। दिल्ली में कब शुरू हुई ट्राम सेवा? ये बात है साल 1908 की जब दिल्ली ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक ट्राम का स्वागत किया। यह वो दौर था जब अंग्रेजी हुकूमत भारत में अपनी जड़ें जमा रही थी। ट्राम की शुरुआत ने दिल्ली की सैर को आसान बना दिया। चांदनी चौक से लेकर जामा मस्जिद, खारी बावली से अजमेरी गेट तक, 15 किलोमीटर के ट्रैक पर 24 खुली गाड़ियां चलती थीं। ये ट्रामें न सिर्फ लोगों को जोड़ती थीं, बल्कि दिल्ली की संस्कृति को भी एक धागे में पिरोती थीं। ट्राम से गई थी नेहरू की बारात 4 फरवरी 1916, वसंत पंचमी का दिन, पुरानी दिल्ली के बाजार सीताराम में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और कमला कौल की शादी हुई। उस दिन ट्राम ने इतिहास रचा। बारात में शामिल कई मेहमान ट्राम में सवार होकर विवाह स्थल पहुंचे। सोचिए, उस दौर में ट्राम की खटखट के बीच बारातियों का उत्साह और दिल्ली की गलियों का रंग। यह नजारा अपने आप में एक कहानी बन गया। उस समय दिल्ली के मशहूर हकीम अजमल खान भी अपने घर बल्लीमारान जाने के लिए ट्राम का सहारा लेते थे। कहां से कहां तक चलती थी ट्राम उस वक्त ट्राम दिल्ली के प्रमुख इलाकों तक पहुंचती थी। चांदनी चौक, जामा मस्जिद, फतेहपुरी, लाल कुआं, चावड़ी बाजार, सिविल लाइंस और सब्जी मंडी जैसे इलाकों को जोड़ने वाली ट्राम दिल्ली की लाइफलाइन थी। 1921 तक इसका विस्तार हुआ और यह 24 खुली गाड़ियों के साथ रोजाना हजारों लोगों को ढोती थी। उस समय दिल्ली की आबादी आज की तरह फैली नहीं थी और पुरानी दिल्ली ही शहर का केंद्र थी। ट्राम की धीमी रफ्तार और घंटियों की आवाज लोगों के लिए एक परिचित मेलोडी थी। ऐसे लगा ट्राम की रफ्तार पर ब्रेक आजादी के बाद, जब बसें और अन्य आधुनिक परिवहन साधन दिल्ली की सड़कों पर उतरे, ट्राम की चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी। 1960 में दिल्ली ने अपनी ट्राम को अलविदा कह दिया। लेकिन ट्राम की यादें आज भी दिल्ली के इतिहास में बसी हैं। लेखिका निर्मला जैन ने अपनी किताब दिल्ली शहर दर शहर में लिखा कि आजादी के कई साल बाद तक चांदनी चौक के दोनों सिरों को जोड़ने वाली ट्राम की आवाज गूंजती थी। ट्राम की विरासत अब दिल्ली की यादों का हिस्सा ट्राम भले ही दिल्ली की सड़कों से गायब हो गई, लेकिन इसकी कहानी आज भी जीवित है। प्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खान ने अपने बचपन की यादों में बताया कि 1957 में जब वे दिल्ली आए, तब ट्राम पुरानी दिल्ली की शान थी। आज भले ही मेट्रो ने ट्राम की जगह ले ली हो, लेकिन उस दौर की सादगी और ट्राम की खटखट आज भी पुरानी दिल्ली की गलियों में कहीं न कहीं गूंजती सी लगती है। दिल्ली की ट्राम सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं थी, यह एक दौर था, एक कहानी थी, जो नेहरू की बारात से लेकर चांदनी चौक की चहल-पहल तक, दिल्ली के इतिहास का हिस्सा बनी। क्या आपने कभी सोचा कि अगर आज ट्राम वापस लौटे, तो दिल्ली की गलियों में कैसी लगेगी?  

नेताम ने कहा कि धर्मांतरण को रोकने के लिए डीलिस्टिंग एक बड़ा हथियार हो सकता

रायपुर /नागपुर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे अरविंद नेताम ने कहा कि आदिवासी समुदाय के सामने धर्मांतरण सबसे बड़ी समस्या है। धर्मांतरण के खतरे को किसी भी राज्य की सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया है। बहरहाल, अब धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया जाना चाहिए। नागपुर में आयोजित संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग-2 के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि अरविंद नेताम ने राजनीतिक भाषण से परहेज करते हुए कहा कि देश में आदिवासी समुदाय के सामने कई चुनौतियां हैं। अक्सर जब वे सरकार और प्रशासन के सामने जाते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं होती। इसलिए मैं संघ की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा हूं। धर्मांतरण के साथ ही आदिवासियों का विस्थापन भी बड़ी समस्या है। केंद्र सरकार विकास के नाम पर उद्योगपतियों की मदद कर रही है। संघ को सभी की समान भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल करनी चाहिए। नेताम ने मांग करते हुए कहा कि आदिवासियों की जमीनों को स्थायी रूप से अधिग्रहित करने के बजाय लीज पर लिया जाना चाहिए। काम पूरा होने के बाद संबंधित जमीन आदिवासियों को वापस की जानी चाहिए। छत्तीसगढ़ में पिछले कई सालों से धन कानून का पालन नहीं हुआ है। संघ को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। नेताम ने कहा कि धर्मांतरण को रोकने के लिए डीलिस्टिंग एक बड़ा हथियार हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को कुचलने के लिए काम चल रहा है। हालांकि, नक्सलवाद की विचारधारा कई लोगों के बीच बनी हुई है। इस बात का खतरा है कि भविष्य में नक्सली फिर से सिर उठाएंगे। इसलिए, इस संबंध में एक नीति तैयार की जानी चाहिए। इसके अलावा, नेताम ने एक बड़ी मांग भी की। आदिवासियों की धर्म कोड पाने की मांग सामने आ रही है। हम कोई नई सामाजिक विचारधारा नहीं बनाना चाहते। हालांकि, आदिवासियों को भी पहचान मिलनी चाहिए। देश में आदिवासी समुदाय की पहचान धीरे-धीरे खत्म हो रही है। धर्म कोड होगा तो आने वाली पीढ़ी को अतीत और पहचान का पता चलेगा। वहीं संघ के कार्यक्रम मे शिरकत करने को लेकर नेताम ने बताया कि संघ भूमि पर आकर मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। संघ के शताब्दी वर्ष में यहां आना गौरव का क्षण है। नेताम ने अपने भाषण में रेखांकित किया कि देश में संघ के अलावा किसी भी संगठन ने देश की अखंडता और सामाजिक समरसता के लिए काम नहीं किया है।

IFS अभिषेक सिंह समय से पहले छत्तीसगढ़ वापस भेजे जा रहे

रायपुर भारतीय वन सेवा के 2009 बैच के आईएफएस अधिकारी अभिषेक सिंह की छत्तीसगढ़ वापसी का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र से रिलिव करने के बाद जल्दी ही वन विभाग मुख्यालय अरण्य भवन में उपस्थिति दर्ज कराएंगे। केंद्रीय प्रतिनियुक्त में वे डायरेक्टर फार्मास्युटिकल के पद पर कार्यरत थे लेकिन, प्रतिनियुक्त को समाप्त कर वापस भेजा जा रहा है।  वहीं दूसरी तरफ भारतीय वन सेवा 2006 बैच के अरुण प्रसाद पी ने अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया। इस समय वे छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं। भेजे गए इस्तीफे में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। हालांकि उनका इस्तीफा अभी स्वीकृत नहीं हुआ है। इसे जल्दी ही केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जाएगा। बता दें कि तमिलनाडु मूल के अरुण प्रसाद मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी हैं। छत्तीसगढ़ में पदस्थापना के दौरान दंतेवाड़ा और राजनांदगांव में वन मंडल में डीएफओ रहे। पिछले सरकार में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम और मंडी बोर्ड के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी दी गई थी।

रेलमार्ग से कैसे जुड़ा जम्मू-कश्मीर, आजादी से पहले का सपना, जाने महाराजा हरि सिंह से क्या कनेक्शन

कटरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को देश को एक ऐतिहासिक सौगात दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाला रेलमार्ग राष्ट्र को समर्पित किया। वैसे तो जम्मू -कश्मीर को रेलमार्ग से जोड़ने का सपना तो महाराजा हरि सिंह ने आजादी से पहले देखा था। उन्होंने अंग्रेजों के सहयोग से जम्मू-कश्मीर तक नैरो गेज टॉय ट्रेन चलाने के लिए सर्वेक्षण कराए थे। लेकिन दुरुह भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस पर आगे बढ़ना संभव नहीं हो पाया। बाद में इस सपने पर साल 1983 में काम शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जम्मू से ऊधमपुर तक 53 किलोमीटर के रेलमार्ग की आधारशिला रखी थी। उस लाइन पर 1800 करोड़ रुपए की लागत आई थी और 22 साल बाद 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्घाटन किया था। अटल सरकार में मिली प्रोजेक्ट को रफ्तार फिर साल 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कश्मीर घाटी को रेलवे लिंक से जोड़ने के फैसले पर मुहर लगाई थी। 2008-09 में ऊधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर काम शुरू हुआ। यह दिसंबर 2024 में पूरा हुआ और जनवरी में रेल संरक्षा आयुक्त ने संगलदान कटरा के करीब 67 किलोमीटर के आखिरी खंड को प्रमाणपत्र प्रदान किया। इस प्रकार से 272 किलोमीटर की जम्मू-कश्मीर रेल लिंक परियोजना का काम पूरा करने में चार दशक से अधिक समय लग गया। इस उद्घाटन के साथ शनिवार सात जून से इन दोनों वंदे भारत ट्रेनों की वाणिज्य की यात्राएं शुरू हो जाएंगी। हर मौसम में होगी आसानी श्रीनगर और श्री वैष्णो देवी कटरा के बीच का सभी शुल्कों सहित किराया चेयर कार श्रेणी में 715 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास में 1320 रुपए निर्धारित किया गया है। इन दोनों ट्रेनों के चलने से देश के विभिन्न हिस्सों से कटरा पहुंचने वाले पर्यटकों और रेलयात्रियों को कश्मीर पहुंचने में आसानी होगी। उनकी सात घंटे की सड़क मार्ग की यात्रा अब तीन घंटे में पूरी होगी। हर मौसम जम्मू से श्रीनगर और बारामूला तक की यात्रा कुछ घंटे में पूरी हो सकेगी। अभी तक कश्मीर की वादियों में बारामुला से संगलदान के बीच ही लोकल ट्रेनों का परिचालन हो रहा था। कटरा से संगलदान के बीच रेल निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब कटरा और श्रीनगर के बीच शनिवार से नियमित रूप से ट्रेन परिचालन शुरू हो रहा है। विकास में आए तेजी पर्यटकों, व्यापारियों, स्थानीय निवासियों, छात्रों आदि के साथ-साथ माल की कम समय में आवाजाही का सस्ता एवं सुविधाजनक माध्यम उपलब्ध हो गया है। इसी के साथ तीन ओर से शत्रुओं के घिरे दोनों केन्द्रशासित प्रदेशों में सैनिकों की आवाजाही के साथ रक्षा रसद का तीव्र, सुरक्षित एवं सतत प​रिवहन सुनिश्चित हो गया है। जम्मू के अलग रेलमंडल बन जाने से इन विकास परियोजनाओं में और तेजी आएगी।  

सोने की कीमत में आज 1,000 रुपए से अधिक की गिरावट देखने को मिली

नई दिल्ली सोना खरीदारों के लिए खुशखबरी है। पीली धातु की कीमत में शुक्रवार को 1,000 रुपए से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम 1,018 रुपए कम होकर 97,145 रुपए हो गया है, जो कि पहले 98,163 रुपए था। 22 कैरेट सोने का दाम कम होकर 88,985 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 89,917 रुपए था। वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत 73,662 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 72,859 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। सोने के विपरीत चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। चांदी का दाम 610 रुपए बढ़कर 1,05,285 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 1,04,675 रुपए प्रति किलो था। वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 अगस्त 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.08 प्रतिशत बढ़कर 97,957 रुपए और चांदी के 4 जुलाई 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 1.03 प्रतिशत बढ़कर 1,05,522 रुपए हो गई है। कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह ने कहा कि वैश्विक कारणों के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इस महीने के मध्य में होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक पर निवेशकों की निगाहें बनी हुई हैं और इसके बाद ही वैश्विक स्तर पर सोने की चाल की दिशा तय होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। खबर लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना करीब 0.24 प्रतिशत बढ़कर 3,383.61 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.40 प्रतिशत बढ़कर 36.298 डॉलर प्रति औंस पर थी। 1 जनवरी से अब तक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 76,162 रुपए से 20,983 रुपए या 27.55 प्रतिशत बढ़कर 97,145 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भाव भी 86,017 रुपए प्रति किलो से 19,268 रुपए या 22.40 प्रतिशत बढ़कर 1,05,285 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के लिए फाइनल हो गए 4BHK वाले 2 बंगले, ‘चमकाने’ पर खर्च होंगे 47 लाख रुपये

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के लिए आखिर बंगले की तलाश पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री बनने के करीब साढ़े तीन महीने बाद राज निवास मार्ग पर रेखा गुप्ता के लिए दो बंगले फाइनल किए गए हैं। बताया बंगले 4 BHK वाले हैं इन बंगलों की पहले मरम्मत और रंग-रोगन का काम भी किया जाएगा। गुप्ता पहले ही उस बंगले को ना कह चुकी थीं,जिसमें मुख्यमंत्री के तौर पर अरविंद केजरीवाल रहा करते थे। भाजपा इसे शीशमहल कहकर पुकारती थी। रेखा गुप्ता के नाम सिविल लाइंस में राज निवास मार्ग पर दो बंगले 1/8 और 2/8 आवंटित किए गए हैं। 4 एकड़ में फैले इन बंगलों में से एक का इस्तेमाल रेखा गुप्ता सरकारी आवास और दूसरे का कैंप ऑफिस के रूप में करेंगी। रेखा गुप्ता अभी तक शालीमार बाग स्थित अपने निजी आवास में ही रह रही थीं। सीएम रेखा गुप्ता ने इनके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के लिए लंबे समय से एक ऐसे बंगले की तलाश की जा रही थी जिसकी दूरी सचिवालय, आईटीओ और केंद्रीय सरकार के दफ्तरों से नजदीक हो। इससे पहले सामाजिक कल्याण मंत्री रवि इंद्रारज सिंह को राज निवास मार्ग पर बंगला नंबर 3/8 मिला था। सीएम का आवास उपराज्यपाल विनय सक्सेना के बंगले के नजदीक होगा। दिल्ली सरकार के पास राज निवास मार्ग पर कुछ बंगले हैं जो आमतौर पर मंत्रियों को दिए जाते हैं। इनमें 4 बेडरूम, फ्रंट लॉन, लिविंग और ड्रॉइंग एयरिया और स्टाफ क्वॉर्टर शामिल हैं। यहां रवि इंद्रराज सिंह और डिप्टी स्पीकर बिष्ट सीएम के पड़ोसी होंगे। रेखा गुप्ता के पहले सीएम रहीं आतिशी एबी-17 मथुरा रोड स्थित बंगले में रहती थीं। वहीं, अरविंद केजरीवाल सिविल लाइंस में 6 फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगले में रहते थे। भाजपा का आरोप है कि केजरीवाल ने गलत तरीके से इस बंगले में सुख सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए। अब यह बंगला जांच के दायरे में है। रेखा गुप्ता ने पहले ही कह दिया था कि वह इस बंगले में नहीं रहना चाहेंगी, बल्कि इसे म्यूजियम बनाने समेत कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। मरम्मत पर खर्च होंगे 47 लाख रुपये पीटीआई ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि आंवटन पत्र पीडब्ल्यूडी को दिया जा चुका है और इसके बाद बंगलों की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है। उन्होंने पीटीआई को बताया, ‘हम इसमें कुछ मरम्मत और रेनोवेशन का काम कर रहे हैं, जिसके बाद मुख्यमंत्री शिफ्ट होंगी।’ सीएम के लिए कैंप ऑफिस बनाने को पीडब्ल्यूडी ने टेंडर निकाला है। अधिकारी ने बताया कि बंगले की मरम्मत पर करीब 47 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है और 60 दिन में काम पूरा होगा।  

अंडे का ठेला लगाने वाले कैसे बने कुख्यात, सूदखोरी व अवैध वसूली करके करोड़ों की संपत्ति बनाई

रायपुर टिकरापारा इलाके में कभी मामूली सा अंडे का ठेला लगाने वाले हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर सूदखोरी के लिए कुख्यात है। कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने और सूदखोरी व अवैध वसूली करके करोड़ों की संपत्ति बना ली है। इसकी बड़ी वजह नेताओं और अफसरों से उनकी घनिष्ठता भी है। वर्ष 2019 में भी सूदखोर वीरेंद्र, उसके भाई रोहित और उसके अन्य साथियों के खिलाफ कोतवाली व पुरानीबस्ती थाने में बड़ी कार्रवाई हुई थी।  आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, लेकिन पुलिस की पूरी जांच 5 महंगी कारों पर आकर अटक गई। यूको बैंक से फाइनेंस हुई इन 5 महंगी कारों की जांच आज तक आगे नहीं बढ़ी। बताया जाता है कि इसमें तोमर भाइयों पर बड़ा अपराध दर्ज होना था, लेकिन पुलिस ने जांच की फाइल ही बंद कर दी। यही वजह है कि कुछ माह बाद दोनों भाई जेल से छूट गए और फिर बेखौफ होकर गुंडागर्दी और वसूली का कारोबार शुरू कर दिया। एक पीड़ित के थाने में दिए बयान के मुताबिक, इन लोगों ने उधार के एवज में भरा चेक, कोरा चेक, कोरे स्टाम्प पर साइन करवाया। पैसे की वसूली के लिए लगातार मारने की धमकी और जेल भेजने की धमकी दी। इसके साथ ही डरा धमकाकर औने पौने दाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। रोहित ने एक प्रॉपर्टी डीलर के साथ मारपीट भी की थी। इसके बाद से वह फरार है। पुलिस उसकी खोजबीन करते हुए भाठागांव स्थित सांई विला मकान पहुंची। सर्च वारंट के साथ पहुंची थी पुलिस की टीम दरअसल, रोहित तोमर पर आरोप है कि उसने पुराने रंजिश के चलते अपने बाउंसर के साथ मिलकर प्रॉपर्टी डीलर दशमीत चावला के साथ मारपीट की। दशमीत ने अपनी शिकायत में बताया कि 31 मई की रात में अपने दोस्त के साथ खाना खाने VIP रोड के क्लब गया था। वहां पर रोहित तोमर उसे गेट के पास पुरानी रंजिश की वजह से गालियां देने लगा। फिर मारपीट करने के बाद जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद से आरोपी फरार है। पुलिस ने बताया कि थाना तेलीबांधा रायपुर में दर्ज मामले में रोहित सिंह तोमर की खोजबीन की जा रही है, लेकिन आरोपी का अब तक कुछ पता नहीं चला है। इसके बाद पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी से सिर्फ आरोपी के भाटागांव स्थित मकान का सर्च वारंट प्राप्त किया। फिर तेलीबांधा पुरानी बस्ती थाना, क्राइम ब्रांच और रक्षा टीम के साथ 4 जून को मकान की तलाशी ली गई। मकान में 35 लाख कैश, 734 ग्राम सोने के जेवर, 125 ग्राम चांदी, बीएमडब्ल्यू, थार और ब्रेजा जैसी महंगी गाड़ियां मिली है। जिसे पुलिस ने जब्त किया है। धोखाधड़ी का बड़ा मामला बन सकता था सूत्रों के मुताबिक, यूको बैंक में फर्जी दस्तावेज लगाकर 5 महंगी कारें फाइनेंस कराई गई थी। दस्तावेजों में किसी में पता गलत बताया गया था, तो किसी में फजी आधार कार्ड लगाया गया। इस फर्जीवाड़ा का कनेक्शन वीरेंद्र और रोहित से भी था। वर्ष 2019 की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जब आरोपियों के घर में छापा मारा, तो उस समय बड़ी संख्या में स्टॉप पेपर और दस्तावेज मिले थे। इन्हीं में महंगी कारों से जुड़े दस्तावेज भी थे। इसके जरिए धोखाधड़ी का बड़ा मामला बन सकता था, लेकिन आगे की जांच पुलिस ने रोक दी थी। पुलिस की अपील: कर सकते हैं शिकायत आरोपियों के घर से मिले कर्जदारों के दस्तावेजों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। साथ ही पुलिस ने अपील भी की है कि आरोपियों से पीड़ित कोई भी व्यक्ति पुलिस में शिकायत कर सकता है। शिकायतों पर एक्शन लिया जाएगा। कर्जा देकर अधिक वसूली, पैसे नहीं देने पर जमीन हथियाने, जबरन रजिस्ट्री कराने का खेल हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी सिंह और रोहित तोमर तथा उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ पुलिस ने ब्लैकमेलिंग, कर्जा एक्ट सहित संगठित अपराध का मामला दर्ज किया है। दोनों भाई फरार हैं, पुलिस ने उसके भतीजा दिव्यांश तोमर को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के भाठागांव स्थित मकान में छापा मारकर पुलिस ने करोड़ों के जेवर-नकदी, महंगी कार, तलवार, पिस्टल-रिवाल्वर आदि के अलावा बड़ी संया में स्टाप पेपर, दूसरों के नाम के कोरा चेक आदि बरामद किए हैं। मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी डॉक्टर लाल उमेद सिंह ने बताया कि बरामद स्टॉप पेपर के आधार पर पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की। पूछताछ में कर्जा देकर अधिक वसूली, पैसे नहीं देने पर जमीन हथियाने, जबरदस्ती रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया। इसके बाद पुरानीबस्ती पुलिस ने सूदखोर वीरेंद्र, रोहित और दिव्यांश के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। दिव्यांश को गिरफ्तार कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि आरोपी वीरेंद्र सिंह राष्ट्रीय करणी सेना का प्रदेश अध्यक्ष भी है। आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या से लेकर धोखाधड़ी तक के कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। 18 लाख कर्ज दिया, अब तक 54 लाख वसूले आरोपी वीरेंद्र और रोहित का सूदखोरी का बड़ा कारोबार है। ब्याज के नाम पर डरा-धमका कर वसूली करते थे। खम्हारडीह इलाके के जयदीप बैनर्जी ने वर्ष 2021 में वीरेंद्र और रोहित से अलग-अलग दिन मिलाकर कुल 18 लाख कर्ज लिया था। मूल राशि उतना ही है, लेकिन दोनों भाइयों ने जयदीप से अब तक 54 लाख वसूल लिए। फिर जयदीप कर्जामुक्त नहीं हो पाया है। इसी तरह दुर्ग के नासीर बश से भी लाखों रुपए वसूल लिए। जमीन ही हड़प ली भाठागांव निवासी मनीष साहू की आरोपी वीरेंद्र के घर के आसपास ही करीब 1100 वर्गफीट जमीन है। उसे डरा-धमकाकर उसकी जमीन के पेपर रख लिया। उसे जमीन बेचने नहीं दे रहा था। जब भी कोई ग्राहक आता था, तो उसे भगा देता था। उसे धमकी भी दी गई थी। पुलिस ने जयदीप, मनीष और नासिर की शिकायत पर पुरानीबस्ती पुलिस ने आरोपी वीरेंद्र सिंह, रोहित सिंह और दिव्यांश व अन्य के खिलाफ वसूली, कर्जा एक्ट और संगठित अपराध का केस दर्ज किया गया है। इस मामले में आरोपियों के भतीजे दिव्यांश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सूदखोरी से ऐसे बने रईस आरोपी वीरेंद्र और रोहित सूदखोरी का धंधा भी करते हैं। जयदीप और नासिर को 8 फीसदी ब्याज पर पैसा दिया था। ब्याज की राशि तय समय पर … Read more

मस्क ने अमेरिका के राष्ट्रपति पर लगाया गंभीर आरोप, एपस्टीन की फाइलों में है ट्रंप का नाम

वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) के पूर्व प्रमुख एलन मस्क ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए एलन मस्क ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है, इसीलिए उन्हें जारी नहीं किया जा रहा है. मस्क ने लिखा “अब समय आ गया है कि बहुत बड़ा बम गिराया जाए: डोनाल्ड ट्रम्प एपस्टीन फाइलों में हैं. यही असली कारण है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, डीजेटी!” उन्होंने आगे कहा, “इस पोस्ट को भविष्य के लिए मार्क कर लें. सच्चाई सामने आ जाएगी.” वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया एलॉन मस्क ने एक्स पर पोस्ट किया, “अब वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया है, डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है.और यही असली वजह है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, DJT!” कौन है जेफरी एपस्टिन जिसकी चर्चा कर मस्क ने अमेरिका की राजनीति में हलचल ला दी है. अमेरिका जैसे देश में बड़ी हस्तियों का सेक्स स्कैंडल से नाम जुड़ना नई बात नहीं है. बिल क्लिंटन- मोनिसा लेवेंस्की की सनसनीखेज कहानी इसका प्रमाण है. जेफरी एपस्टिन: दौलत और सेक्स क्राइम की काली दुनिया जेफरी एपस्टिन अमेरिका का एक अरबपति फाइनेंसर था. अकूत दौलत के दम पर इस शख्स ने दुनिया के अमीरों के साथ रिश्ते बनाए. एपस्टिन के रिश्तों के इस सर्किल में डोनाल्ड ट्रंप का भी नाम शामिल है. इतनी दौलत के अलावा एपस्टिन ने सेक्स क्राइम की काली दुनिया में भी घुसपैठ की. उस पर सेक्स ट्रैफिकिंग के भी आरोप लगे. 1953 में न्यूयॉर्क में जन्मे एपस्टिन ने बिना कॉलेज डिग्री के बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में अपनी फर्म स्थापित की. एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स तस्करी के गंभीर आरोप लगे. 2005 में एक 14 वर्षीय लड़की के शोषण की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें 36 नाबालिग पीड़िताओं की पहचान हुई. 2008 में उन्हें वेश्यावृत्ति से संबंधित दो आरोपों में दोषी ठहराया गया और 13 महीने की जेल मिली. जैसा कि हमने बताया जेफरी एपस्टिन की हाई-प्रोफाइल हस्तियों जैसे बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप और प्रिंस एंड्रयू से दोस्ती थी. जेल में रहस्यमयी मौत 2019 में, उन्हें फिर से मानव तस्करी और यौन अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया, लेकिन सुनवाई से पहले उनकी जेल में मृत्यु हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस पर कई साजिश सिद्धांत मौजूद हैं. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन को यौन शोषण का आरोपी कहा जाता है. प्राइवेट आईलैंड और लोलिता एक्सप्रेस! जेफरी एपस्टिन अथाह दौलत का स्वामी था. उसने अमेरिका में प्राइवेट आईलैंड खरीद रखे थे. उसकी अपनी जेट थी. इस जेट पर अमेरिका के प्रभावशाली व्यक्ति सवार होकर उसके निजी द्वीप में पहुंचते थे और पार्टियां करते थे. एपस्टीन को यूएस वर्जिन आइलैंड्स में अपने द्वीप, लिटिल सेंट जेम्स पर मशहूर लोगों का मनोरंजन करने के लिए जाना जाता था. वह अक्सर लोगों को अपने निजी जेट से द्वीप पर ले जाता था और वहां यात्रा करने वालों का लिखित रिकॉर्ड छोड़ जाता था. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन के इस निजी जेट विमान को पार्टी सर्किल में ‘लोलिता एक्सप्रेस’ कहा जाता था. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस लोलिता एक्सप्रेस में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रम्प ने यात्राएं की है.  एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1993 से 1997 के बीच निजी विमान से कम से कम 7 यात्राएं कीं. ट्रम्प उस समय एकबिजनेस टायकून और रियल एस्टेट डेवलपर थे और उन्हें एपस्टीन के सहयोगी के रूप में जाना जाता था. हालांकि ट्रंप ने इससे इनकार किया था, लेकिन एपस्टीन की साथी और गर्लफ्रेंड गिस्लेन मैक्सवेल के मुकदमे के तहत 2021 में जारी फ्लाइट लॉग से पता चला कि अमेरिकी राष्ट्रपति एपस्टीन के विमान में 7 बार सवार हुए थे. ट्रंप ने 2024 ट्रुथ सोशल पोस्ट में दावा किया, “मैं कभी एपस्टीन के विमान या उसके बेवकूफ़ द्वीप पर नहीं था.” पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिटंन की भी इस जेट पर कई बार तस्वीरें आई है. बता दें कि किसी मामले से संबंधित फाइलों में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने का यह मतलब नहीं है कि उन पर किसी गलत काम का आरोप लगाया गया है. उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे हालांकि ट्रंप ने 6 जुलाई, 2019 को एपस्टीन की गिरफ्तारी के बाद से ही उनसे दूरी बना ली थी, लेकिन 1980 के दशक के अंत से लेकर 2000 के दशक की शुरुआत तक दोनों अच्छे दोस्त थे. हाल ही में एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें दोनों को मार-ए-लागो में एक पार्टी में एक-दूसरे से बात करते हुए दिखाया गया था. उन्हें विक्टोरिया सीक्रेट एंजेल्स पार्टी में भी साथ देखा गया था. ट्रंप ने अपने हमेशा की तरह ही जोरदार अंदाज में 2002 में न्यूयॉर्क पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में एपस्टीन की प्रशंसा की थी और उन्हें “शानदार व्यक्ति” कहा था जिन्हें वे 15 सालों से जानते हैं. तब ट्रंप ने जेफरी एपस्टिन के बारे में कहा था, “उनके साथ रहना बहुत मजेदार है. यह भी कहा जाता है कि उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे और उनमें से कई युवा हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है- जेफरी को अपना सोशल लाइफ पसंद है.” ट्रंप के साथ दोस्ती बिगड़ने के बाद मस्क ने इन्हीं मामलों का जिक्र किया है. ये मामले और कानूनी रिकॉर्ड जिन दस्तावेजों में जब्त हैं उन्हें एप्सटीन फाइल्स के नाम से जाना जाता है. इनमें से कुछ फाइलें सार्वजनिक की गई हैं, लेकिन कुछ अभी भी गोपनीय हैं, जिसके कारण कई साजिश सिद्धांत और अटकलें चल रही हैं. मस्क इन्हीं फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कर रहे हैं. एलन मस्क का दावा कि डोनाल्ड ट्रम्प का नाम इन फाइलों में है, एक गंभीर लेकिन अपुष्ट बयान है. ट्रंप और एप्सटीन की पुरानी दोस्ती के कुछ सबूत हैं (जैसे, ट्रंप का उनके जेट में यात्रा करना), लेकिन ट्रंप के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है जो उन्हें एप्सटीन के अपराधों से सीधा जोड़ सके.   क्या है एपस्टीन मामला     ये सारा मामला … Read more

भारत के साथ अकसर परमाणु जंग की धमकी देने वाला पाकिस्तान गरीबी से लड़ाई में हारता दिख रहा: वर्ल्ड बैंक

नई दिल्ली  भारत के साथ अकसर परमाणु जंग की धमकी देने वाला पाकिस्तान गरीबी से लड़ाई में हारता दिख रहा है। पाकिस्तान की करीब आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रही है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की 45 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजार रही है। वर्ल्ड बैंक के डेटा में यह जानकारी दी गई है। विश्व बैंक ने 2018-19 के सर्वे के अनुसार यह बात कही है। बैंक का कहना है कि गरीबी रेखा से जीवन स्तर ऊपर उठाने के मामले में पाकिस्तान की स्थिति लगातार खराब हो रही है। यही नहीं अति-निर्धनता में जीने वाले पाकिस्तानियों की संख्या बीते कुछ सालों में 4.9 फीसदी से बढ़कर 16.5 पर्सेंट हो गई है। विश्व बैंक ने वैश्विक गरीबी इंडेक्स को अपडेट किया है और उसमें पाकिस्तान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि बीते कुछ सालों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कोई ग्रोथ नहीं है। विश्व बैंक का कहना है कि इंटरनेशनल पॉवर्टी लाइन 3 डॉलर मासिक की कमाई पर आधारित है। पाकिस्तान में ऐसे लोग 45 फीसदी हैं, जिनकी कमाई महीने में तीन डॉलर भी नहीं है। इसके अलावा पाकिस्तान अति निर्धन परिवारों की संख्या में इजाफे की एक और वजह है। वह है इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स में बदलाव होना। पहले इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स का मानक 2.15 डॉलर था, जो अब बढ़कर 3 डॉलर हो गया है। इससे पहले कम आय वाले देशों यानी LIC के लिए प्रति व्यक्ति आय की दर वर्ल्ड बैंक ने 2.15 डॉलर निर्धारित की थी। तब पाकिस्तान के 4.9 फीसदी लोग अति निर्धन माने गए थे। अब यह मानक बढ़कर 3 डॉलर प्रतिदिन हो गया है। इसके साथ ही आंकड़ा भी अब 16.5 पहुंच गया है। बता दें कि पाकिस्तान गरीबी के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के मानकों में भी फिसड्डी है। यहां तक कि पाकिस्तान में बीते करीब डेढ़ सालों में पोलियो के ही 81 केस मिल चुके हैं। ऐसा तब है, जब दुनिया के तमाम देश पोलियो मुक्त हो चुके हैं। वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अब भी पोलियो के केस पाए जाते हैं।  

छत्तीसगढ़ में 24 घंटे में कोविड के 9 नए मरीज, रायपुर में सबसे अधिक एक्टिव मरीज

 रायपुर कोरोना के मरीजों की संख्या छत्तीसगढ़ में भी बढ़ रही है, पिछले 24 घंटे के दौरान छत्तीसगढ़ में कोरोना के 9 नए मरीज मिले हैं, जिनमें 5 मरीज राजधानी रायपुर और 4 मरीज बिलासपुर में मिले हैं. नए वैरिएंट के बाद यह छत्तीसगढ़ में एक दिन में मिलने वाले मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या है, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है, जबकि सभी को सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है. राजधानी रायपुर में फिलहाल कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज है, जबकि बिलासपुर दूसरे नंबर पर है. इसके अलावा दुर्ग और बस्तर में भी मरीज मिले हैं. छत्तीसगढ़ में फिलहाल 28 कोरोना मरीज छत्तीसगढ़ में अब तक कुल 30 कोरोना मरीज मिले हैं, जिनमें से 2 मरीज रिकवर हो गए हैं, जबकि 28 एक्टिव मरीज हैं. जिनमें सबसे ज्यादा 18 मरीज रायपुर में फिर बिलासपुर में 6 मरीज है. इसके अलावा दुर्ग में 3 और बस्तर में 1 कोरोना मरीज की पुष्टि हुई है, लगातार मिल रहे मरीजों को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर है और जेएन-1 वेरियंट को लेकर अलर्ट पर है. लगातार संदिग्ध मरीजों की टेस्टिंग भी हो रही है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना को लेकर लोगों से सावधानी बरतने की बात कही है. हालांकि अस्पताल में फिलहाल एक ही मरीज को भर्ती किया गया है, बाकि के मरीजों को क्वारंटाइन किया गया है. बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में फिलहाल कोरोना के जो मरीज मिले हैं, उनमें ज्यादातर की ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है, जबकि अधिकतर मरीजों में सामान्य ही लक्षण पाए गए हैं, ऐसे में ज्यादातर मरीजों को सावधानी बरतने के साथ-साथ घर पर ही इलाज लेने की बात कही गई है. फिलहाल सभी को सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है. वहीं सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई हैं, खास बात यह है कि ज्यादातर मरीजों में एक जैसे लक्षण मिले हैं, जिसमें सर्दी जुखाम, बुखार और खांसी शामिल है. सावधानी बरतने की सलाह छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने भी डॉक्टरों को अलर्ट रहने की सलाह दी है, जबकि ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग के हिसाब से तैयारियां की गई हैं, जरूरत के हिसाब से जीनोम सीक्वेंसिंग के सैंपल रायपुर एम्स भी भेजे जा रहे हैं. बता दें कि बीते 24 घंटे में कोरोना के 9 नए मरीज छत्तीसगढ़ में मिले थे. 

द्वारका जिला पुलिस ने मई में अवैध रूप से रह रहे 71 विदेशियों को पकड़कर डिपोर्टेशन के लिए भेजा

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ मई और जून में कड़ा एक्शन लिया। द्वारका जिला पुलिस ने मई में 71 विदेशियों को डिपोर्ट किया, जिनमें 47 बांग्लादेशी, 17 म्यांमार के रोहिंग्या और 7 नाइजीरियाई शामिल हैं। इसके अलावा, नॉर्थ-वेस्ट और शाहदरा जिला पुलिस ने भी बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। द्वारका पुलिस की बड़ी कार्रवाई द्वारका जिला पुलिस ने मई में अवैध रूप से रह रहे 71 विदेशियों को पकड़कर डिपोर्टेशन के लिए भेजा। डीसीपी द्वारका अंकित सिंह ने बताया कि इन विदेशियों के पास वैध वीजा नहीं था। पुलिस की स्पेशल स्टाफ, उत्तम नगर थाना, एंटी-नारकोटिक्स सेल, छावला थाना और AATS की टीमें इस ऑपरेशन में शामिल थीं। पकड़े गए विदेशियों को फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के सामने पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा गया। नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली में छापेमारी 2 जून को नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली पुलिस ने भारत नगर थाना क्षेत्र में 18 बांग्लादेशी नागरिकों को धर दबोचा। खुफिया सूचना के आधार पर शुरू किए गए इस ऑपरेशन में पुलिस ने वजीरपुर जेजे कॉलोनी में तलाशी ली। डीसीपी भीष्म सिंह ने बताया कि 36 फुटपाथों और 45 गलियों को खंगाला गया। एक संदिग्ध को पहले पकड़ा गया, जिसने पूछताछ में बांग्लादेशी होने की बात कबूल की। ये लोग हरियाणा से दिल्ली आए थे और पकड़े जाने से बचने के लिए बार-बार ठिकाने बदल रहे थे। शाहदरा में भी पुलिस की पैनी नजर इसी दिन शाहदरा जिला पुलिस ने सीमापुरी इलाके में 16 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा। खबर मिली थी कि उत्तर प्रदेश-दिल्ली बॉर्डर के पास शहीद नगर इलाके में अवैध प्रवासियों की आवाजाही हो रही है। पुलिस ने तुरंत सूचना की पुष्टि की और एक जॉइंट ऑपरेशन चलाया। मुखबिर की मदद से इन लोगों को सीमापुरी में घुसते समय पकड़ लिया गया। ये कार्रवाई क्यों है अहम? दिल्ली पुलिस की इन कार्रवाइयों से साफ है कि अवैध प्रवासियों पर नकेल कसने के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी जा रही। बांग्लादेशी नागरिकों की बड़ी संख्या ने पुलिस की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। लेकिन, दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी और खुफिया तंत्र की तारीफ करनी होगी, जो लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखे हुए है।  

दो बार रहे विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहने वाले लेग स्पिनर पीयूष चावला ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास

नई दिल्ली  भारत के दो बार के विश्व कप विजेता लेग स्पिनर पीयूष चावला ने शुक्रवार को पेशेवर क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी है। 36 वर्षीय चावला ने इंस्टाग्राम पोस्ट करके इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘मैदान पर दो दशक से अधिक समय बिताने के बाद इस खूबसूरत खेल को अलविदा कहने का समय आ गया है।’    चावला में 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जीत में भारतीय टीम का हिस्सा थे। चावला ने पेशेवर क्रिकेट में सभी प्रारूपों में 1000 से अधिक विकेट हासिल किए। 2012 में अपने अंतिम प्रदर्शन तक पांच वर्षों में भारत के लिए 3 टेस्ट, 25 वनडे और 7 टी20 मैच खेले जिसमें उन्होंने 43 विकेट लिए।  चावला ने कहा, ‘भारत का सर्वोच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व करने से लेकर 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनने तक, इस अविश्वसनीय यात्रा में हर पल किसी वरदान से कम नहीं रहा है। ये यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी। आईपीएल फ्रेंचाइजी पंजाब किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स, चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस को दिल से धन्यवाद जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। इंडियन प्रीमियर लीग मेरे करियर का एक खास अध्याय रहा है और मैंने इसमें खेलते हुए हर पल को संजोया है। मैं अपने कोचों श्री के.के. गौतम और स्वर्गीय श्री पंकज सारस्वत का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने मुझे एक क्रिकेटर के रूप में तैयार किया।’  उन्होंने आगे कहा, ‘आज मेरे लिए बेहद भावुक दिन है क्योंकि मैं आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट के सभी प्रारूपों से अपने संन्यास की घोषणा करता हूं। भले ही मैं क्रीज से दूर चला जाऊं, लेकिन क्रिकेट हमेशा मेरे भीतर रहेगा। अब मैं इस खूबसूरत खेल की भावना और सबक को अपने साथ लेकर एक नई यात्रा शुरू करने के लिए उत्सुक हूं।’ 

पाक को UNSC में अध्यक्ष और आतंकवाद विरोधी का उपाध्यक्ष बनने पर कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला: शशि थरूर

नई दिल्ली  कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत मित्रहीन नहीं है और पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद की तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष बनाया जाना तथा आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाए जाने का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला है। थरूर भारत द्वारा सामना किए जा रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खतरे और आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत संकल्प के बारे में प्रमुख वार्ताकारों को जानकारी देने के लिए अमेरिका में एक बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। थरूर ने गुरुवार को यहां भारतीय दूतावास में बातचीत के दौरान कहा, ‘ये सभी समितियां आम सहमति पर काम करती हैं और किसी अध्यक्ष के लिए अकेले दम पर कुछ ऐसा करवा पाना संभव नहीं है जिसका अन्य विरोध करते हैं या किसी विशेष विचारधारा को आगे बढ़ाते हैं जिसका अन्य देश समर्थन नहीं करते हैं।’ पाकिस्तान, 2025-26 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है और वह 2025 के लिए परिषद की तालिबान प्रतिबंध समिति की अध्यक्षता करेगा तथा 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष होगा। गुयाना और रूस ‘1988 तालिबान प्रतिबंध समिति’ के उपाध्यक्ष होंगे। अल्जीरिया ‘1373 आतंकवाद-रोधी समिति’ की अध्यक्षता करेगा जबकि फ्रांस और रूस अन्य उपाध्यक्ष होंगे। पाकिस्तान ‘दस्तावेजीकरण और अन्य प्रक्रियात्मक प्रश्नों एवं सामान्य यूएनएससी प्रतिबंध मुद्दों पर अनौपचारिक कार्य समूहों’ का सह-अध्यक्ष भी होगा। भारत ने लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित अधिकतर आतंकवादियों और संगठनों को पाकिस्तान में पनाह मिली है। अलकायदा नेता ओसामा बिन लादेन कई वर्षों तक पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा रहा और मई 2011 में अमेरिकी नौसेना के जवानों के एक अभियान में मारा गया। दूतावास में कई ‘थिंक टैंक’ समूहों और युवा पेशेवरों के साथ संसदीय प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के दौरान थरूर से पाकिस्तान द्वारा यूएनएससी की दो प्रतिबंध समितियों की अध्यक्षता करने के बारे में जब पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यूएनएससी की छह आतंकवाद निरोधक समितियां हैं। उन्होंने कहा कि परिषद के सदस्य बारी-बारी से ऐसी संस्थाओं की अध्यक्षता करते हैं। उन्होंने कहा, ‘इसलिए जब तक पाकिस्तान सुरक्षा परिषद में है, तब तक इस तरह का ‘विशेषाधिकार’ उसे मिल सकता है… सुरक्षा परिषद में हम बिल्कुल मित्रहीन नहीं हैं, इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि इस पद का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं निकलने वाला है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन इस पर सावधानीपूर्वक नजर रखेगा। बुधवार को दूतावास में प्रेस वार्ता के दौरान पाकिस्तान को दो समितियों का प्रभार दिए जाने के बारे में ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल का जवाब देते हुए थरूर ने कहा, ‘एक तो तालिबान समिति है जिसका जिम्मा उन्हें (पाकिस्तान को) मिला है। मुझे नहीं पता कि इस बारे में अफगानों की क्या भावनाएं हैं।’ थरूर ने कहा कि यूएनएससी सदस्यों को हर महीने बारी बारी से परिषद की अध्यक्षता मिलती है। उन्होंने कहा, ‘अन्य लोग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हम सुरक्षा परिषद में और इसकी समितियों में बिल्कुल मित्रहीन नहीं हैं।’ प्रतिनिधिमंडल 24 मई को भारत से न्यूयॉर्क पहुंचा। इससे पहले प्रतिनिधिमंडल गुयाना, पनामा, कोलंबिया और ब्राजील की यात्रा कर चुका है और मंगलवार दोपहर को दौरे के अंतिम चरण के लिए वाशिंगटन पहुंचा। थरूर ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय नहीं गया। थरूर के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में सरफराज अहमद (झारखंड मुक्ति मोर्चा), गंटी हरीश मधुर बालयोगी (तेलुगु देशम पार्टी), शशांक मणि त्रिपाठी (भारतीय जनता पार्टी), भुवनेश्वर कलिता (भारतीय जनता पार्टी), मिलिंद देवड़ा (शिवसेना), तेजस्वी सूर्या (भारतीय जनता पार्टी) और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत संधू शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। थरूर ने इस मुलाकात को ‘‘सार्थक’’ बताया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में पाकिस्तान का एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल भी उसी समय अमेरिका पहुंचा, जब थरूर के नेतृत्व में भारत का प्रतिनिधिमंडल अमेरिका पहुंचा था। भुट्टो ने भारत के साथ सैन्य संघर्ष और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाने के पाकिस्तान के प्रयास के तहत अपने प्रतिनिधिमंडल सहित सुरक्षा परिषद के राजदूतों के साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से मुलाकात की। त्रिपाठी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट को लेकर समर्थन व्यक्त किया।  

अरुण गोविल ने बॉलीवुड स्टार्स को नकारा, बोले – राम बनने के काबिल कोई एक्टर नहीं

मुंबई रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान राम का रोल करने वाले अरुण गोविल ने महाकाव्य को फिर से बनाने के कई आधुनिक प्रयासों पर खुलकर बात की है। NDTV के साथ एक इंटरव्यू में बोलते हुए अरुण ने बताया कि इस जेनरेशन में कौन सा एत्टर भगवान राम का रोल प्ले कर सकता है। अरुण गोविल ने कहा, ‘तीन-चार लोगों ने इसे फिर से बनाने की कोशिश की है, लेकिन वे सफल नहीं हुए। मुझे नहीं लगता कि हमारे जीवनकाल में किसी को रामायण का रीमेक बनाने का प्रयास करना चाहिए। जब राम की भूमिका निभाने की बात आती है, तो मेरी राय में आज हमारे पास मौजूद कोई भी स्टार इस रोल के लिए उपयुक्त नहीं है। शायद इंडस्ट्री से बाहर का कोई सही ऑप्शन हो।’ राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा उनकी टिप्पणी अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दूसरे चरण के दौरान आई है, जो एक आध्यात्मिक और राजनीतिक गाथा है और रामायण कथा के साथ लंबे समय से जुड़े भक्ति और धार्मिकता के विषयों को दिखाता है। 78 एपिसोड वाली पहली ‘रामायण’ 1987 से 1988 तक 78 एपिसोड में भगवान राम का किरदार निभाने वाले गोविल किसी महान किरदार से कम नहीं थे, जिसने रविवार की सुबह 9:30 बजे दूरदर्शन पर पूरे भारत के घरों में एक आध्यात्मिक अनुष्ठान में बदल दिया। इस शो ने इतना सांस्कृतिक प्रभाव छोड़ा कि दशकों बाद भी, इसके जादू को फिर से बनाने की सारी कोशिशें फेल हो गईं। ‘आदिपुरुष’ की भद पिटी बता दें कि साल 2023 की फिल्म ‘आदिपुरुष’ में प्रभास को राम के रोल में लिया गया था और इस फिल्म को कई कारणों से आलोचना का सामना करना पड़ा था। यह बॉक्स ऑफिस पर भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में रणबीर दिलचस्प बात यह है कि अरुण गोविल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रणबीर कपूर नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। दो पार्ट वाली यह फिल्म 2026 और 2027 में दिवाली पर रिलीज़ होने वाली है। जहां नितेश तिवारी के वर्जन को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है, वहीं अरुण गोविल की बात एक कटाक्ष की तरह सामने आई है।

बिहार विधानसभा चुनाव में सवर्ण राजनीति के लौटेंगे दिन! आयोग कर सकता है समुदाय के लिए ये तीन सिफारिशें

पटना बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने सवर्ण आयोग को मजबूत कर दिया है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार ने आयोग को नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मेंबर दिए हैं। यही नहीं आयोग ने बुधवार को ही एक मीटिंग भी की है, जिसमें सवर्ण समाज में आने वाली जातियों के हालात पर चिंता व्यक्त की गई। नीतीश कुमार सरकार को लगता है कि अति-पिछड़ा, दलित और पिछड़ा की गोलबंदी के बीच कहीं सवर्ण समुदाय न छिटक जाए। ऐसे में उसे साधने के लिए यह उपक्रम किया गया है। भाजपा के समर्थक कहे जाने वाले सवर्ण समुदाय की राजपूत और भूमिहार जैसी जातियां अकसर छिटकती रही हैं। हालांकि ब्राह्मण और कायस्थ भाजपा के पक्ष में एकजुट नजर आए हैं। ऐसी स्थिति में सवर्णों की पूरी गोलबंदी एनडीए के फेवर में हो, इसके लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। इसी की कड़ी सवर्ण आयोग है। अब यह आयोग आने वाले दिनों में कुछ सिफारिशें भी कर सकता है। इन सिफारिशों में एक यह भी होगा कि गरीब सवर्ण परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट दी जाए। इसके अलावा यूपीएससी, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फ्री कोचिंग की सिफारिश हो सकती है। गरीब सवर्णों के बच्चों को हॉस्टल की सुविधान देने की सिफारिश भी आयोग की तरफ से की जा सकती है। सवर्ण आयोग का कहना है कि 2011 में भले ही इसका गठन हुआ था, लेकिन अब यह ज्यादा कारगर होगा। सूत्रों के मुताबिक आयोग के सदस्यों का कहना है कि अब हमारे पास जातीय जनगणना का डेटा है। हम यह जानते हैं कि कितने सवर्ण परिवार गरीब हैं और उसके कारण क्या हैं। उन्हें क्या लाभ देकर आगे बढ़ाया जा सकता है। दरअसल ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ मिलकर बिहार में करीब 15 फीसदी हैं। भले ही यह बड़ा आंकड़ा नहीं है, लेकिन यदि एकमुश्त वोट किसी दल को मिलता है तो नतीजे पलटने का दम रखते हैं। खासतौर पर मिथिलांचल में ब्राह्मणों की अच्छी तादाद है। इसके अलावा कई जिलों में भूमिहार मजबूत हैं। सवर्ण आयोग ने बनाईं तीन समिति, किन मामलों में करेंगी सिफारिश फिलहाल सवर्ण आयोग ने अलग-अलग मसलों के लिए तीन उप-समितियों का गठन कर दिया है। इन समितियों की सिफारिश के आधार पर ही आगे फैसला होगा। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले सवर्ण आयोग की कुछ सिफारिशें सरकार को दी जा सकती है। यही नहीं चुनाव में उतरने से पहले कुछ सिफारिशों को लागू करने का ऐलान भी नीतीश कुमार की सरकार कर सकती है।  

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