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कतर ओपन क्वार्टर फाइनल: कार्लोस अल्काराज और करेन खाचानोव के बीच रोमांचक मुकाबला तय

दोहा कार्लोस अल्काराज ने वैलेंटिन रॉयर पर सीधे सेटों में 6-2, 7-5 से जीत के साथ कतर ओपन के क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली है। दूसरे सेट में एक समय अल्काराज का स्कोर 2-5 था, लेकिन इसके बाद लगातार 5 गेम जीतते हुए उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की। जीत के बाद अल्काराज ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मैं फिर से अच्छी रिदम और अच्छा टेनिस खेल पाया। मैं टेनिस जानता हूं। यह सिर्फ एक अंक के बारे में है, और कभी-कभी सेट या मैच खत्म करना वाकई मुश्किल होता है। मैं झूठ नहीं बोलूंगा, कुछ पल ऐसे थे जब मैंने तीसरे सेट के बारे में सोचा। मुझे खुशी है कि मैंने इसे पलट दिया और सीधे सेटों में जीत हासिल की।” क्वार्टर फाइनल में अल्काराज का मुकाबला करेन खाचानोव से होगा। सातवीं सीड खाचानोव ने बुधवार को मार्टन फुकसोविक्स को 6-2, 4-6, 6-4 से हराया था। खाचानोव 2024 में कतर ओपन के चैंपियन रहे थे। अल्काराज अब आउटडोर हार्ड कोर्ट पर 27 मैचों की जीत की स्ट्रीक पर हैं। यह सिलसिला पिछले अगस्त में सिनसिनाटी ओपन में उनके टाइटल जीतने के बाद शुरू हुआ था। ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीतकर सबसे कम उम्र में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने की उपलब्धि हासिल करने वाले 22 साल के अल्काराज अपने पहले कतर ओपन खिताब की तलाश में हैं। वह एक साल पहले इवेंट डेब्यू पर क्वार्टर फाइनल स्टेज में जिरी लेहेका से हार गए थे। अल्काराज के ड्रॉ के हाफ में दूसरा क्वार्टर फाइनल पांचवें सीड और डिफेंडिंग चैंपियन एंड्री रुबलेव का मुकाबला स्टेफानोस सिटसिपास से होगा। रुबलेव ने फैबियन मारोजसन को 6-2, 6-4 से हराया, जबकि पूर्व विश्व नंबर 3 सिटसिपास चौथे सीड डेनियल मेदवेदेव को 6-3, 6-4 से हराकर 10 महीने में अपने पहले टूर-लेवल क्वार्टर-फाइनल में पहुंचे।

ई-कॉमर्स युग में उपभोक्ता संरक्षण: 21 से शुरू दो दिवसीय सम्मेलन में एआई पर मंथन

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की ओर से केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सहयोग से दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन 21 व 22 फरवरी को रायपुर में किया जा रहा है. दो दिनों तक आयोजित छह तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा. पहले दिन ई-जागृति, ई-फाइलिंग, ई – हियरिंग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, शिकायतों की स्वीकृति, क्षेत्राधिकार एवं प्रक्रिया संबंधी प्रावधान, डिजिटल एवं ई-कॉमर्स चुनौतियाँ, डार्क पैटर्न्स एवं भ्रामक विज्ञापन के साथ उपभोक्ता आयोग के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विधिक सुधार पर चर्चा होगी. अगले दिन 22 फरवरी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में आवश्यक संशोधन के साथ उपभोक्ता आयोगों में प्रक्रियात्मक एकरूपता की आवश्यकता पर चर्चा होगी. समापन सत्र में खुला संवाद होगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में वैलेडिक्टरी (विदाई) सत्र आयोजित होगा. दो दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, झारखण्ड, गोवा, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा एवं उनके जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, 8 राज्यों के सचिवगण तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि इस कार्यशाला में भाग लेंगे. छत्तीसगढ़ में निराकरण का प्रतिशत सौ से ज्यादा छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने यह बताया कि आगामी सप्ताह में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग में एक अतिरिक्त पीठ एवं बेमेतरा जिले में जिला उपभोक्ता आयोग का शुभारंभ होने जा रहा है. छत्तीसगढ़ राज्य के जिला उपभोक्ता आयोगों ने 2025 में 160 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण किया है, एवं राज्य उपभोक्ता आयोग के निराकरण का प्रतिशत 101.57 प्रतिशत रहा. प्रदेश के 16 जिला उपभोक्ता आयोगों में ई – हियरिंग की सुविधा भी प्रारंभ कर दी गई है.

प्रदेश में ऊर्जा विस्तार की व्यापक रूपरेखा और आगामी कार्ययोजना पर साझा की जानकारी

रायपुर. प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा प्रयास ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने आज नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकारों के साथ ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।               डॉ. यादव ने जानकारी दी कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी तथा निजी उत्पादकों को मिलाकर प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30 हजार 671.7 मेगावाट है। इसमें 28 हजार 824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत तथा सोलर, बायोमास आदि स्रोतों से 2,047 मेगावाट क्षमता शामिल है। ताप विद्युत क्षेत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की 2,840 मेगावाट, एनटीपीसी व निजी स्वामित्व के बिजलीघरों की 20 हजार 299 मेगावाट तथा कैप्टिव पॉवर प्लांट्स की 5 हजार 266 मेगावाट क्षमता है। प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा प्रयास डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार का फोकस ताप विद्युत पर निर्भरता कम कर कार्बन उत्सर्जन घटाने पर है। नेट जीरो कार्बन लक्ष्य के तहत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय स्रोतों से पूरी की जा सके। इस दिशा में जल विद्युत एवं पंप स्टोरेज परियोजनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगी। राज्य शासन द्वारा पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नीति 2023 लागू की गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों का चिन्हांकन किया गया है, जिनमें से पांच के फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और डीपीआर निर्माणाधीन है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।              ऊर्जा सचिव डॉ. यादव ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के तहत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड एवं राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम द्वारा लगभग 2 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें अटल बिहारी ताप विद्युत गृह के जलाशय में 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर, कोरबा पूर्व के बंद राखड़ बांध पर 32 मेगावाट सौर संयंत्र तथा 500 मेगावाट-ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना प्रस्तावित है। ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में 32 हजार 100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं हेतु विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं। इन परियोजनाओं में 12 हजार 100 मेगावाट ताप विद्युत, 4 हजार 200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2 हजार 500 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर तथा 13 हजार 300 मेगावाट पंप स्टोरेज क्षमता शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसमें कई प्रमुख संस्थाएं भागीदार हैं।                 डॉ. यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों एवं मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। पारेषण क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच उपकेन्द्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है। ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा 132 केवी लाइनों में पुराने कंडक्टरों को उच्च क्षमता वाले एचटीएलएस कंडक्टर से बदला जा रहा है। साथ ही 5 हजार 200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर का इंस्टॉलेशन पूर्ण कर 131 उपकेन्द्रों को डिजिटल संचार नेटवर्क से जोड़ा गया है।             वितरण क्षेत्र में प्रगति पर प्रकाश डालते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो गई है। विगत दो वर्षों में हजारों किमी नई लाइनें, उपकेन्द्र एवं ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम, डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना एवं बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विद्युतीकरण हेतु नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत सैकड़ों गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है।             क्रेडा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि विगत दो वर्षों में 26 हजार 794 सोलर सिंचाई पंप, 7 हजार 833 सोलर पेयजल पंप तथा 1 हजार 709 सोलर हाईमास्ट स्थापित किए गए हैं। आगामी वर्षों में ऑफग्रिड सोलर प्लांट्स एवं रूफटॉप सौर संयंत्रों के विस्तार की कार्ययोजना पर भी कार्य जारी है। डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में संतुलित मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण एवं नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान पत्रकारों के सवालों के भी विस्तृत उत्तर दिए और विभाग की आगामी 03 वर्षों की कार्य योजना साझा की।               इस दौरान सीएसपीडीसीएल के एमडी  भीम सिंह कंवर, सीएसपीजीसीएल के एमडी एस के कटियार, सीएसपीटीसीएल के एमडी  राजेश कुमार शुक्ला सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारीगण मौजूद रहे।

कुपोषण मुक्ति के लक्ष्य से न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक को लेकर विशेष बैठक आयोजित

रायपुर न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक को बढ़ावा देने विशेष बैठक आयोजित वन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक (NFT) के प्रभावी उपयोग और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का उद्देश्य नर्सरियों में पौधों के उत्पादन, प्रबंधन और वन रोपण कार्यों में आधुनिक तकनीक अपनाकर गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाना था।         बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक के माध्यम से पौधों को संतुलित पोषक तत्व नियंत्रित तरीके से दिए जा सकते हैं। इससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव होता है और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इस तकनीक से नियंत्रित वातावरण में स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने इसके तकनीकी पहलुओं, लाभ, व्यवहारिक उपयोग और संभावित चुनौतियों पर विस्तृत जानकारी दी।         अधिकारियों ने निर्णय लिया कि वन विकास निगम की नर्सरियों में इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए स्पष्ट कार्ययोजना और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया जाएगा। बैठक में यह भी सहमति बनी कि कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, उनकी तकनीकी क्षमता विकसित की जाएगी और पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।         छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की यह पहल वन क्षेत्र में  नवाचार, सतत विकास और आधुनिक कृषि-वानिकी तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

C-DAC फॉर्म भरने की आखिरी कॉल: कल बंद होंगे 805 पदों के आवेदन

नई दिल्ली भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट है। विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर चल रही 805 भर्तियों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया कल, 20 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है। इच्छुक उम्मीदवार जो अब तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट cdac.in पर जाकर रात 11:59 बजे तक अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा और किसी भी परिस्थिति में ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। किन पदों पर निकली है वैकेंसी? इस मेगा भर्ती अभियान के माध्यम से सीडैक (C-DAC) देश भर में स्थित अपने विभिन्न केंद्रों के लिए योग्य पेशेवरों की तलाश कर रहा है। कुल 805 रिक्तियों में मुख्य रूप से ये पद शामिल हैं: प्रोजेक्ट इंजीनियर प्रोजेक्ट तकनीशियन सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर और तकनीकी सहायता कर्मचारी ये पद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर विकास, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), एम्बेडेड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों के लिए हैं। अधिकांश पद प्रोजेक्ट-आधारित और कॉन्ट्रैक्ट पर हैं, जिनकी अवधि शुरुआत में 1 से 3 वर्ष तक हो सकती है। योग्यता और आयु सीमा विभिन्न पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है: प्रोजेक्ट इंजीनियर: उम्मीदवार के पास संबंधित क्षेत्र में बी.ई. (BE), बी.टेक (B.Tech), एम.ई. (ME), एम.टेक (MTech), एमसीए (MCA) या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। सामान्यतः 60% अंकों की अनिवार्यता रखी गई है। प्रोजेक्ट तकनीशियन: इनके लिए संबंधित विषय में डिप्लोमा या आईटीआई (ITI) प्रमाण पत्र आवश्यक है। आयु सीमा: आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 56 वर्ष तक हो सकती है, जो पद और अनुभव पर निर्भर करती है। आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/PwD) को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया चयन का तरीका: उम्मीदवारों का चयन केवल लिखित परीक्षा या सीधे वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन जमा करने के बाद, प्राप्त फॉर्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी और शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए ईमेल के जरिए सूचित किया जाएगा। आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट cdac.in पर जाएं और ‘Careers’ सेक्शन में ‘Current Job Opportunities’ पर क्लिक करें। 2. नोटिफिकेशन संख्या (जैसे BLK/HYD आदि) का चयन करें और अपनी पसंद के केंद्र (नोएडा, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद आदि) के लिए रजिस्टर करें। 3. अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण और कार्य अनुभव भरें। 4. अपना अपडेटेड रिज्यूमे (PDF), फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। 5. आवेदन शुल्क (यदि लागू हो) का भुगतान करें और फॉर्म सबमिट करें।  

वनाग्नि से सुरक्षा का संदेश, जागरूकता कार्यक्रम में लोगों ने लिया प्रकृति संरक्षण का प्रण

रायपुर वन अग्नि सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान, ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने ली संरक्षण की शपथ छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अंतर्गत बारनवापारा परियोजना मंडल की रायकेरा रेंज द्वारा ग्राम सुकुलबाय में वन अग्नि सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शासकीय विद्यालय परिसर एवं ग्राम में आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।      कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को जंगल में आग लगने के कारणों, उससे होने वाले नुकसान और बचाव के उपायों की सरल भाषा में जानकारी दी गई। विशेष रूप से महुआ बीनने के दौरान आग लगाने की परंपरा से होने वाले दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला गया और ग्रामीणों से इस आदत को छोड़ने की अपील की गई। निगम के अधिकारियों ने बताया कि फायर सीजन सामान्यतः फरवरी से जून तक रहता है। इस अवधि में तापमान अधिक होने और जंगल में सूखी पत्तियों की मात्रा बढ़ने के कारण आग लगने की संभावना अधिक रहती है। जंगल में आग लगने से होने वाले प्रमुख नुकसान        बहुमूल्य वन संपदा, पौधों और वृक्षों का नष्ट होना। वन्यजीवों के आवास को नुकसान और उनकी मृत्यु, मिट्टी की उर्वरता में कमी, पर्यावरण प्रदूषण और तापमान में वृद्धि और ग्रामीणों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि जानबूझकर जंगल में आग लगाना दंडनीय अपराध है। भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 एवं 33 के तहत वन क्षेत्र में आग लगाना या वनों को क्षति पहुँचाना अपराध है, जिसमें जुर्माना और कारावास का प्रावधान है। आग से बचाव के लिए दिए गए सुझाव     इस जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को आग से बचाव के लिए सुझाव दिए गए जैसे जंगल में बीड़ी, सिगरेट या जलती हुई वस्तु न फेंकें। महुआ या तेंदूपत्ता संग्रह के दौरान आग का प्रयोग न करें। सूखी पत्तियों को हटाने के लिए विभाग को सूचना दें। साथ ही साथ किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें। फायर लाइन निर्माण और साफ-सफाई में सहयोग करें  कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और निगम कर्मचारियों ने सभी ग्रामीणों को वन संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने अपील की कि वन हमारी साझा धरोहर है। यदि ग्रामवासी और निगम मिलकर समय पर सूचना दें, जागरूकता फैलाएं और फायर सीजन में सतर्क रहें, तो जंगल में आग की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

मिर्जापुर से हिरासत में 4 संदिग्ध, सराफा कारोबारी से लूट में पुलिस का बड़ा एक्शन

बिलासपुर. राजकिशोर नगर के सराफा कारोबारी संतोष तिवारी से 17 फरवरी की रात लूटी गई करीब 3.50 करोड़ रुपये की नकदी और जेवरात मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। सूत्रों की जानकारी के अनुसार, चार संदिग्ध आरोपियों को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र से हिरासत में लिया गया है। बिलासपुर पुलिस की टीम अब इन्हें लेकर लौट रही है। हथियारबंद लूटेरों ने वारदात को दिया था अंजाम बता दें कि राजकिशोर नगर निवासी संतोष तिवारी की वसंत विहार चौक स्थित महालक्ष्मी ज्वेलरी शॉप है। वे प्रतिदिन की तरह मंगलवार रात करीब 9 बजे दुकान बंद कर बिक्री के लिए रखे सोने के जेवर कार में लेकर घर लौट रहे थे। घर से कुछ ही दूरी पर, बीएसएनएल ऑफिस गली के तिराहे पर पहुंचते ही पहले से खड़ी सफेद रंग की कार (सीजी 10 बीजे 8147) ने उनकी कार को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद जैसे ही संतोष तिवारी कार से बाहर निकले, कार सवार हथियारबंद लूटेरों ने उन पर हमला कर दिया। सिर पर गंभीर चोट पहुंचाने के बाद बदमाश साढ़े तीन करोड़ रुपये के आभूषण, साढ़े तीन लाख रुपये नकद और उनकी कार लेकर फरार हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से तेजी से निकल गए। गाड़िया बदलकर यूपी की ओर भागे थे लूटेरे जानकारी के मुताबिक, लुटेरे वारदात के बाद अपनी वैन और बाइक मौके पर छोड़ कारोबारी की कार लेकर फरार हो गए थे। उन्होंने उर्तुम में गाड़ी छोड़ दी और फिर अलग-अलग वाहनों – स्कॉर्पियो और ह्युंडई आई20 – में बदलकर यूपी की ओर भागे। पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मोबाइल लोकेशन और पुराने मामलों के सुरागों ने मदद की। 6 महीने तक की रेकी, फिर वारदात को दिया अंजाम पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने पिछले छह माह से सीपत में किराये के मकान में रहकर इलाके की रेकी की थी। यह गिरोह पहले से योजना बनाकर कारोबारी पर वारदात करने आया था। उत्तर प्रदेश एटीएस की मदद से अहरौरा थाना क्षेत्र में आरोपियों को पकड़ लिया गया। आधिकारिक पुष्टि और घटनाक्रम का विस्तृत खुलासा तब होगा जब आरोपियों को बिलासपुर लाया जाएगा। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में व्यापारी वर्ग में थोड़ी राहत महसूस हो रही है, हालांकि सुरक्षा को लेकर सवाल अब भी बरकरार हैं। घायल कारोबारी आईसीयू में भर्ती संतोष तिवारी की गंभीर चोटों का इलाज अभी भी चल रहा है। घटना के बाद उन्हें ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर सिर की चोट की जांच की गई। उनके सिर में कई जगह गहरे घाव पाए गए हैं, जिनमें करीब 50 टांके लगे हैं। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया।

श्रमिकों का जीवन स्तर उठाना मंडल का मुख्य उद्देश्य – विधायक सिन्हा

रायपुर महासमुंद जिले में विशाल श्रमिक सम्मेलन आयोजित श्रमिकों के सम्मान एवं उनके सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह के मुख्य आतिथ्य में जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन का आयोजन आज महासमुंद के विशाल मेगा मार्ट परिसर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर विधायक महासमुंद  योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्य मंत्री  पूनम चंद्राकर, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  भीखम सिंह ठाकुर, जनपद अध्यक्ष मती दिशा दीवान, स्काउट एवं गाइड के राज्य आयुक्त  इन्द्रजीत सिंह गोल्डी एवं स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष  ऐतराम साहू प्रमुख रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान जिले के 3106 पंजीकृत श्रमिकों के खातों में 1 करोड़ 51 लाख 57 हजार 630 रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई। इस अवसर पर श्रमिकों में हर्ष एवं उत्साह का माहौल देखने को मिला।  इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. रामप्रताप सिंह ने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने बताया कि सभी जिले में श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है तथा आज महासमुंद जिले में 3 हजार से ज्यादा श्रमिकों को एक करोड़ 51 लाख रुपए से ज्यादा की राशि उनके खाते में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। निर्माण एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिक प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके सम्मान, सुरक्षा एवं कल्याण को सुनिश्चित करना शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया। डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार में योजनाओं के क्रियान्वयन में सुशासन और पारदर्शिता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई है। श्रमिकों को उनके हित की राशि अब सीधे उनके बैंक खातों में मिल रही है। उन्होंने श्रमिकों से अपने पंजीयन को अद्यतन रखने, श्रम कार्ड बनवाने और निरंतर नवीनीकरण पर जोर दिया। साथ ही बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने तथा स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि सरकार श्रमिक परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवास, छात्रवृत्ति, चिकित्सा सहायता, प्रसूति सहायता एवं कौशल विकास जैसी योजनाओं का विस्तार कर रही है।  विधायक  सिन्हा ने कहा कि श्रमिक समाज व राज्य की प्रगति की रीढ़ है और उनके उत्थान के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों एवं गरीब वर्ग के कल्याण हेतु अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा एवं आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की सरकार, केन्द्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे है।  पूर्व राज्य मंत्री  पूनम चंद्राकर एवं पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा,  येतराम साहू ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर नगरपालिका उपाध्यक्ष  देवीचंद राठी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष  पवन पटेल,  महेन्द्र सिक्का,  मनीष बंसल,  अमन वर्मा,  अरविन्द प्रहरे, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, बड़ी संख्या में श्रमिकगण एवं श्रम विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। श्रमिक सम्मेलन में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत महासमुंद नयापारा वार्ड की निवासी मती ललिता महानंद को ई-रिक्शा प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा उनके परिवार के आय का मुख्य स़्त्रोत है। उनके परिवार में 3 बेटियां है और पति भी मजदूरी करते हैं। अब इस योजना की सहायता से वे अपने परिवार को आर्थिक संबल दे पाएंगी। उन्होंने कहा कि इस योजना ने मेरी जिंदगी बदल दी है। योजना अंतर्गत एक लाख रुपए की सब्सिडी राशि मिलती है। ई-रिक्शा प्रदान करने के दौरान मुख्य अतिथि  डॉ. रामप्रताप सिंह, विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्य मंत्री  पूनम चंद्राकर, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने ई-रिक्शा की सवारी की और ललिता और उनके परिवार को शुभकामनाएं दी।

महिला आरक्षक का बड़ा खुलासा: डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके पर शोषण, गर्भपात और धोखाधड़ी के आरोप, कार्रवाई में सरकार

बालोद छत्तीसगढ़ शासन ने बीजापुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बालोद जिले की एक महिला आरक्षक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद की गई है। महिला ने यौन शोषण, तीन बार जबरन गर्भपात और लाखों रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने मुख्य सचिव को साक्ष्यों सहित 12 बिंदुओं वाली विस्तृत शिकायत भेजी थी। राज्य सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निलंबन का आदेश जारी किया। शिकायत के अनुसार, उइके और पीड़िता का परिचय वर्ष 2017 में बालोद के डौंडी में पढ़ाई के दौरान हुआ था। महिला का आरोप है कि उइके ने शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए। पीड़िता ने, जो स्वयं 2017 में पुलिस आरक्षक बनी थी, उइके की पढ़ाई और कोचिंग के लिए हर महीने चार से पांच हजार रुपये भेजे। वर्ष 2020 में उइके का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ, जिसके बाद कथित तौर पर उनका व्यवहार बदल गया। गंभीर आरोप और धोखाधड़ी महिला ने अपनी शिकायत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोप है कि शादी का आश्वासन देकर आरोपी ने पीड़िता का 2017 से 2025 के बीच तीन बार जबरन गर्भपात कराया। इसके अतिरिक्त, पीड़िता ने बैंक से कर्ज लेकर लगभग तीन लाख तीस हजार रुपये उइके के खाते में हस्तांतरित किए थे। बीजापुर में पदस्थापना के दौरान भी जनवरी से मई 2025 के बीच आरोपी ने महिला का शारीरिक शोषण जारी रखा। प्रशासनिक तंत्र पर सवाल और जांच पीड़िता ने केवल उइके पर ही नहीं, बल्कि बीजापुर जिला प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी को बचाने के लिए नियमों के विरुद्ध अवकाश दिया गया। साथ ही, फर्जी प्रमाण पत्र भी जारी किए गए। मुख्य सचिव के निर्देश पर उइके का निलंबन मुख्यालय संभागीय आयुक्त कार्यालय, बस्तर नियत किया गया है। बालोद के डौंडी थाने में मामला दर्ज होने के बाद अब विभागीय जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

शिवाजी जयंती पर राज्यपाल डेका का नमन, स्वाभिमान और शौर्य की विरासत को किया सलाम

रायपुर राज्यपाल  डेका ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर किया नमन राज्यपाल  रमेन डेका ने आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया। उन्होंने समस्त देशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल ने आज रायपुर के तात्यापारा में शिवाजी की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्जवलन और माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।       राज्यपाल  डेका ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने सीमित संसाधनों के बावजूद अदम्य साहस, दूरदृष्टि और संगठन क्षमता के बल पर एक सुदृढ़ एवं लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना की। उनका प्रशासनिक ढांचा न्याय, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व पर आधारित था। आयोजन समिति द्वारा इस अवसर पर राज्यपाल को मराठा योद्धा सम्मान स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा,  सुनील सोनी एवं आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित थे।

क्या छिड़ेगा नया युद्ध? ट्रंप के फैसले से ईरान-अमेरिका टकराव तेज, वैश्विक तेल बाजार सहमा

वॉशिंगटन  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है. CNN की खबर के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक (22 फरवरी तक) ईरान पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है, हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है. सूत्रों ने बताया कि व्हाइट हाउस को जानकारी दे दी गई है कि अगर आदेश मिलता है तो अमेरिकी सेना कुछ ही घंटों में कार्रवाई कर सकती है. पिछले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वायु और नौसैनिक ताकत में भारी बढ़ोतरी की गई है. दुनिया का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर फोर्ड क्षेत्र में पहुंच सकता है. ईरान और अमेरिका में नहीं हो सकी डील ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी फाइटर जेट और ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को मिडिल ईस्ट में भेजा जा रहा है. एक सूत्र ने कहा, ‘राष्ट्रपति इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. वह सैन्य कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष दोनों तर्क सुन रहे हैं.’ मंगलवार को जिनेवा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक अप्रत्यक्ष बातचीत हुई. ईरान ने कहा कि कुछ ‘मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अभी कई मुद्दों पर साफ बातचीत होनी बाकी है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि कूटनीति ट्रंप की पहली पसंद है, लेकिन सैन्य विकल्प भी मेज पर मौजूद है. उन्होंने किसी समयसीमा का ऐलान करने से इनकार किया. ईरान पर बढ़ा परमाणु दबाव अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 28 फरवरी को इजरायल जाएंगे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे. इजरायल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है. उधर सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को और मजबूत कर रहा है. कई महत्वपूर्ण स्थलों को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परत से ढका जा रहा है, ताकि संभावित हवाई हमलों से बचाव हो सके. एक और वॉर्निंग लेविट ने बताया है कि ट्रंप कई लोगों से इस संबंध में बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति कई लोगों से बात कर रहे हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम है। राष्ट्रपति इस मामले को बहुत गंभीरता से लेते हैं। वे हमेशा वही सोचते हैं जो अमेरिका, हमारी सेना और अमेरिकी जनता के हित में हो, और किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का निर्णय वे इसी आधार पर लेते हैं।’ ईरान से बातचीत लेविट का बयान ऐसे समय में आया है, जब जिनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता फिर से शुरू हुई है, जिसमें अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमानी मिल रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों ने बात कुछ आगे बढ़ने की बात कही है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि अभी भी काफी कमियां हैं। इधर, अमेरिका सेना लगातार ऐक्शन मोड में नजर आ रही है। ईरान ने भी धमकाया एजेंसी वार्ता के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की ओर से 2025 की शुरुआत में अपनाई गई अधिकतम दवाब की नीति ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है, जिससे अमेरिका के अधिकारी कूटनीति सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद ईरान प्रतिबंध में राहत की मांग कर रहा है और उसने चेतावनी दी है कि अमेरिका का कोई भी हमला इस इलाके में अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर देगा। बात फेल तो शुरू होगा वॉर हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के हालिया टिप्पणियों के अनुरूप है, जिन्होंने एक न्यूज चैनल को बताया था कि अमेरिकी प्रशासन को कूटनीति के जरिये समस्या का समाधान बहुत पसंद है, लेकिन अगर बातचीत विफल हो जाती है तो सैन्य कार्रवाई लेने का विकल्प भी उसके पास है। ट्रंप क्या करेंगे फैसला? फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर साफ टार्गेट नहीं बताया है कि हमला होने की स्थिति में उसका अंतिम उद्देश्य क्या होगा. उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे. अगर बातचीत में ठोस प्रगति नहीं होती, तो मिडिल ईस्ट एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकता है. वहीं, अगर कूटनीति सफल होती है तो आखिरी वक्त पर युद्ध टल भी सकता है. सैन्य जमावड़ा और ‘आर्मडा’ की तैनाती अमेरिका ने ईरान के तट के पास अपनी सैन्य शक्ति को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया है। नौसेना: ईरान के करीब इस समय दो एयरक्राफ्ट कैरियर (विमान वाहक पोत) और एक दर्जन युद्धपोत तैनात हैं। वायुसेना: सैकड़ों लड़ाकू विमान, जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं, क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। रसद और हथियार: पिछले 24 घंटों में 150 से अधिक सैन्य कार्गो उड़ानों के जरिए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद अमेरिकी ठिकानों पर पहुंचाया गया है। निगरानी: जापान, जर्मनी और हवाई से विशेष E-3 अर्ली वार्निंग विमानों को सऊदी अरब भेजा गया है, जो बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के समन्वय में मदद करेंगे। कूटनीतिक विफलता और कारण इस संभावित हमले का मुख्य कारण कूटनीतिक बातचीत का विफल होना बताया जा रहा है। परमाणु विवाद: जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में बातचीत का प्रयास विफल रहा क्योंकि ईरान ने परमाणु विकास रोकने की ट्रंप की मांग को खारिज कर दिया। शासन परिवर्तन: सूत्रों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों को तबाह करना नहीं, बल्कि ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ लाना भी हो सकता है। इसमें इजरायल और अमेरिका मिलकर ऑपरेशन चला सकते हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाई और वैश्विक प्रभाव हॉर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी: ईरान ने सैन्य अभ्यास के नाम पर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। धमकी: ईरानी नेतृत्व और अयातुल्ला ने अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर विनाशकारी असर पड़ सकता है। अमेरिकी घरेलू राजनीति पर असर रिपब्लिकन: आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले इस कदम को राष्ट्रपति की स्थिति मजबूत करने या जोखिम में … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त स्कीमों पर जताई नाराजगी, CJI ने सरकारों को दी सख्त चेतावनी

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने फ्रीबीज बांट रहे राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर करदाता के अलावा इन योजनाओं का खर्च और कौन उठाएगा। उन्होंने का कि भोजन और बिजली के बाद अब सीधा कैश ट्रांसफर होने लगा है। साथ ही अदालत ने कहा है कि सरकार को रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है। गुरुवार को सीजेआई ने कर्ज के बाद भी राज्यों की तरफ से मुफ्त में चीजें बांटने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने सवाल किया, ‘आखिर करदाता नहीं, तो इन योजनाओं के लिए भुगतान कौन करेगा?’ सुप्रीम कोर्ट ने नकद बांटने और मुफ्त की सुविधाएं देने को लेकर वित्तीय समझदारी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने का कोर्ट का कहना है कि राज्यों को मुफ्त की रेवड़ियां या ‘डोल्स’ बांटने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। सीजेआई ने चेताया है कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप मुफ्त खाना…, मुफ्त साइकिल…, मुफ्त बिजली देने लगेंगे… और अब तक सीधा कैश ट्रांसफर हो रहा है।’ सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा है कि कई राज्य राजस्व घाटे का सामना कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किए हुए हैं। कोर्ट का मानना है कि कर्मचारियों के वेतन और ‘मुफ्त की सुविधाओं’ का बोझ इतना बढ़ गया है कि वे विकास के लिए जरूरी फंड को खत्म कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक साल में जुटाए गए राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा…, इसे विकास में क्यों नहीं लगाया जा सकता? सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम भारत सरकार केस की सुनवाई कर रहा था। अदालत ने निगम को उपभोक्ता की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को मुफ्त बिजली देने का वादा करने के लिए फटकार लगाई। कोर्ट ने मुफ्त की सेवा के कल्चर की कड़ी आलोचना की। साथ ही कहा कि यह आर्थिक विकास में बाधा डालती है। क्या है फ्रीबीज वाला मामला? दरअसल, सुप्रीम कोर्ट आज तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2024 के रूल 23 को चुनौती दी गई थी. इस याचिका पर सुनवाई के दौरान ही सीजेआई सूर्यकांत फ्रीबीज पर भड़क गए. उन्होंने तमिलनाडु के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी इस मामले में अच्छे से सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की उस याचिका पर आई, जिसमें सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया था, चाहे उपभोक्ता की आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. चलिए सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले फ्रीबी कल्चर पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि अब ऐसे नीतियों पर फिर से विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि इससे देश का आर्थिक विकास रुक जाता है. तमिलनाडु सरकार द्वारा चुनाव से पहले ‘फ्रीबी’ बांटने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया, ‘आप किस तरह की संस्कृति विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं?’     सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, ‘देश के ज्यादातर राज्य राजस्व की कमी से जूझ रहे हैं, फिर भी वे विकास को नजरअंदाज कर इस तरह की मुफ्त चीजें बांट रहे हैं.’     पीठ ने कहा कि इस तरह की मुफ्त चीजों की बांटने से देश का आर्थिक विकास प्रभावित होता है और राज्यों को सभी को मुफ्त भोजन, साइकिल, बिजली देने के बजाय रोजगार के अवसर खोलने चाहिए.     हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके सरकार के नेतृत्व वाली पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है, जिसमें मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया है.     पीठ ने पूछा, “हम भारत में किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं? यह समझ में आता है कि आप कल्याणकारी योजना के तहत उन लोगों को मुफ्त बिजली देना चाहते हैं जो बिजली का बिल चुकाने में असमर्थ हैं. लेकिन बिना यह फर्क किए कि कौन भुगतान कर सकता है और कौन नहीं, आप सबको बांटने लगते हैं. क्या यह तुष्टिकरण नीति नहीं है?’     पीठ ने पूछा कि बिजली दरें घोषित होने के बाद तमिलनाडु कंपनी ने अचानक मुफ्त बांटने का फैसला क्यों किया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘राज्यों को रोजगार के अवसर खोलने चाहिए. अगर आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली देने लगेंगे तो कौन काम करेगा और फिर काम करने की संस्कृति का क्या होगा?’     पीठ ने कहा कि राज्य विकास परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय दो काम करते हैं- वेतन देना और इस तरह की मुफ्त चीजें बांटना.  

CBFC ने दी मंजूरी, केरला स्टोरी 2 का उद्देश्य है जागरूकता, निर्माता का बयान

मुंबई  ‘द केरला स्टोरी 2’ रिलीज से पहले सुर्खियों में हैं. फिल्म के ट्रेलर के बाद फिल्म को लेकर बवाल हो रहा है, लेकिन इस बवाल के बीच सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से यूए सर्टिफिकेट मिल गया है. इसका मतलब है कि 14 साल से ज्यादा उम्र के दर्शक यह फिल्म सिनेमाघरों में देख सकेंगे. आमतौर पर संवेदनशील विषयों वाली फिल्मों को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया जाता है, लेकिन इस फिल्म को यूए सर्टिफिकेट मिलना मेकर्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने सेंसर बोर्ड के इस फैसले पर खुशी जताई है. फिल्म 27 फरवरी 2026 को रिलीज होगी. फिल्म जबरन धर्मांतरण रैकेट्स में फंसी लड़कियों की कहानी बयां करती है. मेकर्स का दावा है कि यह भारतीय कानूनी प्रणाली से सच्ची घटनाओं पर आधारित है. इसके साथ ‘सनशाइन पिक्चर्स’ ने अब ये एलान कर दिया है कि ‘द केरल स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड’ को इसकी हिंदी भाषा के साथ-साथ तेलुगु और कन्नड़ में भी रिलीज किया जाएगा. मैं सेंसर बोर्ड का आभारी हूं:  प्रोड्यूसर  सूत्र के हवाले से बताया कि फिल्म अगले हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्म को सीबीएफसी ने यूए सर्टिफिकेट दिया है. प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘मैं सेंसर बोर्ड का आभारी हूं कि उन्होंने हमारी फिल्म को यूए सर्टिफिकेट दिया. यह उनके विश्वास को दर्शाता है कि हमने इस कहानी को ईमानदारी और इंटेंट के साथ बताया है. यह फैसला खास इसलिए है क्योंकि इससे हम पूरे देश की युवा लड़कियों और परिवारों तक पहुंच सकेंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि फिल्म का उद्देश्य हमेशा से जागरूकता फैलाना रहा है. निर्देशक बोले, ‘यह सच्चाई है’ फिल्म के निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने भी यूए सर्टिफिकेट मिलने पर खुशी जताई. इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हमने कट्स के बाद सर्टिफिकेट प्राप्त किया है. यह यूए सर्टिफिकेट है और मैं बोर्ड का आभारी हूं कि उन्होंने यह रेटिंग दी ताकि युवा बहनें और बेटियां सिनेमा हॉल में जाकर फिल्म देख सकें.’ फिल्म की कहानी पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘यह एक तथ्य-आधारित फिल्म है. देशभर में ऐसा हो रहा है जहां प्यार का इस्तेमाल लड़कियों को फंसाने के लिए किया जा रहा है. हमारा देश इस बारे में सच्चाई जाने, यही हमारा उद्देश्य है.’ तेलुगु और कन्नड़ में भी रिलीज होगी फिल्म हिंदी भाषा के साथ-साथ तेलुगु और कन्नड़ में भी रिलीज किया जाएगा. फिल्म को कन्नड़ और तेलुगु भाषाओं में रिलीज करने का फैसला इसके पहले पार्ट के उस तगड़े असर को देखते हुए लिया गया है, जिसने हर क्षेत्र और भाषा के लोगों के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी थी. दक्षिण भारतीय मार्केट्स में दर्शकों की बढ़ती मांग को पहचानते हुए, मेकर्स ने इसे कई भाषाओं में रिलीज करने का रास्ता चुना है ताकि फिल्म की यह दमदार कहानी ज्यादा से ज्यादा और अलग-अलग तरह के लोगों तक पहुंच सके.

मारवाड़ से पुष्कर तक 1.50 करोड़ से बनेगी सड़क, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने दिया बड़ा तोहफा

रामगढ़/बाबरा. बाबरा-रामगढ़-बिछियाबाळा-करनोस-पीसांगन से आगे तीर्थनगरी पुष्कर को सीधा जोड़ने वाला मार्ग अब पक्का बनेगा। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बाबरा-रामगढ़-बिछियाबाळा तक 3 किलोमीटर दूरी पर डामरीकरण के लिए 1 करोड़ 50 लाख रुपए की घोषणा की। बाबरा से आगे देवगढ़ पंचायत के रामगढ़-बिछियाबाळा तक कच्चा मार्ग हर मौसम में राहगीरों के लिए मुसीबत बना हुआ है। मामूली बरसात में भी इस कच्चे मार्ग पर जगह-जगह कीचड़ फैलने से राह में मुश्किल आती है। खास तौर पर कार्तिक मास में पुष्कर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ती रही है। बजट घोषणा में इस मार्ग को 3 किमी तक पक्का कराने की हुई घोषणा के बाद भविष्य में अब डामरीकरण से जुड़ने पर मारवाड़ क्षेत्र से तीर्थनगरी पुष्कर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इस सीधे मार्ग से होकर आगे पुष्कर पहुंचने में सुविधा होगी। गांवों में राह होगी सुगम तीर्थनगरी पुष्कर को सीधा जोड़ने वाले इस मार्ग के सरहदी अजमेर जिले की सीमा में पीसांगन उपखंड के करनोस-थोरिया तक डामरीकरण मार्ग ढाई साल पहले ही जुड़ चुका है। अब ब्यावर जिले के बाबरा से आगे रामगढ़-बिछियाबाळा सरहद में कुछ दूरी तक शेष पड़ा कच्चा मार्ग डामरीकृत होने के बाद बाबरा, रामगढ़, झालामंड, प्रतापगढ़, देवगढ़, बिछियाबाळा से आगे थोरिया, करनोस, पीसांगन होते हुए तीर्थनगरी पुष्कर व अजमेर से सीधा जुड़ने से राह आसान हो जाएगी। इन्होंने कहा बजट में सड़क बनाए जाने की घोषणा के बाद बाबरा से आगे पीसांगन, पुष्कर से जुड़े कई गांव सीधे जुड़ने से आवागमन में आसानी होगी। कच्चे मार्ग पर डामरीकरण की मांग पर राजस्थान पत्रिका ने भी खूब समाचार प्रकाशित किए। सभी के सम्मिलित प्रयासों की बदौलत अब यह मार्ग पक्का होने के बाद आवागमन और बेहतर होगा। देवेन्द्रसिंह गोपालपुरा, समाजसेवी, बाबरा बजट घोषणा के बाद मार्ग पर डामरीकरण होने से बाबरा, रामगढ़, बिछियाबाला, करनोस, पीसांगन व आसपास के कई गांव सीधे पुष्कर व अजमेर से जुड़ने से सुविधा मिलेगी। यह राहत भरी खबर है। हनुमानराम गुर्जर, रामगढ़, पूर्व सरपंच देवगढ़ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी का विशेष प्रयास है कि जिले के आखिरी छोर तक आवागमन की सुगम राह से वंचित रहे गांव-ढाणियां मार्ग से सुगमता के साथ जुड़ें। इसी प्रयास के चलते बाबरा से देवगढ़ पंचायत के रामगढ़-बिछियाबाला के बीच तीन किमी दूरी तक डामरीकरण के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की बजट में नई घोषणा की गई है। अविनाश गहलोत, कैबिनेट मंत्री

विक्रम भट्ट–श्वेतांबरी भट्ट को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दी नियमित जमानत

जयपुर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन जजों की पीठ ने बुधवार को फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को नियमित जमानत दे दी। यह जमानत राजस्थान के उदयपुर के भूपालपुरा थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 213/2025 के मामले में दी गई है। मामला एलएलपी कंपनियों के जरिए किए गए फिल्म निर्माण समझौतों से जुड़ा है। आरोप है कि प्रस्तावित फिल्म परियोजनाओं के नाम पर करीब 44.7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, जालसाजी और धन के दुरुपयोग किया गया। एसएलपी (क्रिमिनल) संख्या 2647/2026 की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया, जिसमें कहा गया कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद सुलझाना चाहते हैं। शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि समझौते की कोशिश के लिए आरोपियों को अंतरिम जमानत देने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद अदालत ने दोनों को नियमित जमानत दे दी। संविदात्मक काम पूरे करने की इच्छा जताई थी विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि दोनों पक्ष विवाद खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने ईमेल भेजकर फिल्म निर्माण से जुड़े संविदात्मक काम पूरे करने की इच्छा जताई थी। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने जमानत का विरोध किया। उनका कहना था कि जांच अभी जारी है और कई गवाह मुंबई में हैं। ऐसे में आरोपियों की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब दोनों पक्ष समझौते के इच्छुक हैं तो उन्हें इसका अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने मामले को सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र भेज दिया ताकि आपसी समाधान की कोशिश की जा सके। अदालत ने यह भी साफ किया कि जांच पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। जांच एजेंसी कानून के अनुसार अपनी कार्रवाई जारी रख सकती है। यानी जमानत मिलने के बावजूद आपराधिक जांच पहले की तरह चलती रहेगी।

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