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गन्ने से कमाई का नया मॉडल: चेतन वीर सिंह की मेहनत से लाखों की आमदनी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के युवा वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सरकार का लक्ष्य युवाओं को ‘रोजगार मांगने वाला नही, बल्कि ‘रोजगार देने वाला’ बनाना है। योगी सरकार के इसी लक्ष्य के साथ लखीमपुर खीरी के विकासखंड फूलबेहड़ के चेतन वीर सिंह ने गुड़ कोल्हू लगाकर उद्यम की शुरुआत की। चेतन वीर सिंह ने योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को जमीन पर उतारकर 15 लोगों को रोजगार देने का काम किया है। चेतन वीर सिंह ने बताया कि 2022 में गुड़ कोल्हू लगाकर अपने उद्यम की शुरुआत की थी। उनको प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पीएमईजीपी योजना के तहत 10 लाख रुपए के ऋण के लिए अप्लाई किया। सरकारी वित्तीय सहायता मिलने के बाद उन्होंने कोल्हू लगाकर काम शुरू किया। आज वे 15 लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और रोज 200 क्विंटल गन्ने की पिराई करते है। उन्होंने ड्रायर लगाकर गन्ने की खोई को सुखाने का नया तरीका निकाला है, जिससे लेबर के खर्च की पूरी बचत होती है। वे हर रोज 25 से 26 क्विंटल गुड़ बनाते हैं, इनको पूरे उत्तर प्रदेश समेत बंगाल और बिहार तक से ऑर्डर मिलते हैं। चेतन वीर सिंह अपने 6 एकड़ में गन्ने की खेती करते हैं, इसके अलावा अन्य किसानों से भी गन्ना खरीदते हैं। आज चेतन वीर सिंह लाखों की कमाई कर रहे हैं।  प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी (PMEGP) भारत सरकार की एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की स्थापना के लिए ऋण प्रदान करती है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग- अलग सब्सिडी का भी प्रावधान है, जो श्रेणी के आधार पर होता है। विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान करती है, जिसका उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार और नए उद्यम शुरू करने में सहायता करना है।  इस योजना के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह, या सहकारी समितियां आवेदन कर सकती हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा केवीआईसी, केवीआईबी और जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से संचालित की जाती है। योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग, कृषि उपकरण, कपड़े, या कागज के उत्पाद बनाने वाली छोटी इकाइयां लगाना, कंप्यूटर सेंटर, गैरेज, बुटीक या छोटी वर्कशॉप खोलना आदि शामिल है।

लाखों नौकरियों का रास्ता साफ! मोदी कैबिनेट ने 33,660 करोड़ की योजना को दी हरी झंडी

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य योजना) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपए की लागत से देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिससे देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी और भारत की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार मिलेगी। यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनआईसीडीपी) के तहत बने इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी मॉडल की सफलता पर आधारित है, जिसे राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से लागू किया जाएगा। ‘भव्य’ योजना में व्यापार करने में आसानी पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा, सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा और निवेशकों के लिए अनुकूल सुधार किए जाएंगे। इस योजना के तहत ऐसे इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे जहां उद्योगों को पहले से तैयार जमीन, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सभी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी, जिससे कंपनियां जल्दी काम शुरू कर सकेंगी। इन इंडस्ट्रियल पार्क का आकार 100 से 1,000 एकड़ तक होगा। सरकार इनके विकास के लिए प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता देगी। इसमें सड़कों, बिजली-पानी, ड्रेनेज, आईटी सिस्टम, फैक्ट्री शेड, वेयरहाउस और टेस्टिंग लैब जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा, योजना के तहत वर्कर्स के लिए आवास और अन्य सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक समर्थन दिया जाएगा, ताकि बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके। परियोजनाओं का चयन चैलेंज मोड के जरिए किया जाएगा, जिससे केवल बेहतर और निवेश के लिए तैयार प्रस्तावों को ही चुना जाएगा। इन इंडस्ट्रियल पार्क को भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाएगा और इन्हें पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुसार विकसित किया जाएगा ताकि मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिल सके। साथ ही, इन पार्कों में ग्रीन एनर्जी और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा। अंडरग्राउंड यूटिलिटी सिस्टम होने से बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी और उद्योगों का काम बिना रुकावट चलता रहेगा। सरकार का मानना है कि ‘भव्य’ योजना से बड़े स्तर पर रोजगार पैदा होंगे, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की नौकरियां शामिल होंगी। यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, जिससे लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। बयान में आगे कहा गया है कि क्लस्टर-आधारित विकास के जरिए यह योजना उद्योग, सप्लायर और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक साथ लाएगी, जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और क्षेत्रीय औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना का सीधा लाभ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप्स और ग्लोबल निवेशकों को मिलेगा, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा मजदूरों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, सर्विस सेक्टर और स्थानीय लोगों को भी होगा।  

सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को झटका, ED कार्रवाई में हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

कोलकाता पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों आई-पैक के दफ्तर पर हुई ईडी की छापेमारी के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई। राज्य सरकार ने ईडी की याचिका पर सुनवाई टालने की अपील की थी, जिसके बाद कोर्ट ने दो टूक जवाब दिया कि आप हुक्म नहीं चला सकते हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा, जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी। इसके अलावा, ईडी रेड के दौरान ममता बनर्जी के अचानक बीच में आने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आपने जो किया, वह गलत था। कोर्ट ने कहा, ”जो हुआ, वह कोई अच्छी स्थिति नहीं थी। यह असामान्य है।” दरअसल, इस साल की शुरुआत में ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव की रणनीति बनाने वाली आईपैक एजेंसी और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी की थी। इस दौरान, ममता बनर्जी मौके पर पहुंची थीं, जिसके बाद उनका जांच एजेंसी के अधिकारियों से आमना-सामना भी हुआ था। ममता ने आरोप लगाया था कि ईडी टीएमसी के संवेदनशील डेटा और हार्ड डिस्क ले जा रही थी। ईडी ने हवाला कारोबार और कोयला तस्करी से जुड़े एक मामले में आईपैक व उसके प्रमुख पर रेड डाला था। लाइव लॉ के अनुसार, सुनवाई की शुरुआत में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सुनवाई टालने के लिए कहा। उन्होंने ईडी द्वारा दाखिल किए गए जवाबी हलफनामे पर जवाब दायर करने के लिए समय मांगा। इस पर ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह सुनवाई में देरी करने की चाल है। हलफनामा तो चार हफ्ते पहले ही दायर कर दिया गया था और जवाब दाखिल करने के लिए उनके पास लंबा समय था। दीवान ने कहा कि अगर कोर्ट ईडी के जवाब को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ रही है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर इस पर विचार किया जाना है तो… इस पर जस्टिस मिश्रा ने तुरंत जवाब दिया, ”हम किसी भी चीज को नजरअंदाज क्यों करें। आप हम पर हुक्म नहीं चला सकते हैं। हम हर चीज पर विचार करेंगे।” उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार की स्थिति काफी कमजोर है, क्योंकि हमें ईडी के आरोपों का जवाब देने के लिए बिना किसी लिखित जवाब के ही बहस करनी पड़ रही है। यह एक संवेदनशील मामला है, जिसमें एक विस्तृत जवाब की जरूरत है। बंगाल सरकार ने बुधवार को I-PAC पर हुई छापेमारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ को मामला भेजने की मांग की। सरकार ने दलील दी कि यह मामला संवैधानिक व्याख्या से जुड़े अहम सवाल उठाता है, खासकर केंद्र-राज्य संबंधों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका की स्वीकार्यता को लेकर। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ के सामने कहा कि मौजूदा कार्यवाही पर दो जजों की पीठ फैसला नहीं दे सकती, क्योंकि इसमें संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े बुनियादी सवाल शामिल हैं। उन्होंने दलील दी कि यह विवाद केंद्र और किसी राज्य के बीच के मुद्दों को सुलझाने के लिए सही मंच और तरीके से जुड़ा है, जिसकी, उनके अनुसार, संविधान की संघीय संरचना के आधार पर जांच की जानी चाहिए। दीवान ने दलील दी, “यह संविधान की व्याख्या से जुड़ा मामला है। इस मुद्दे की जांच करने का एक ढांचा और तरीका है… अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जा सकता। यह संघीय संरचना को कमज़ोर करता है, जो संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।” दीवान ने आगे कहा कि ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी को किसी राज्य के खिलाफ सीधे अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल करने की अनुमति देना, केंद्र-राज्य विवादों को सुलझाने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किए गए संवैधानिक ढांचे को दरकिनार करना होगा  

योगी जी के नेतृत्व में हुए विकास पर जनता की मुहर, 2027 में बीजेपी हैट्रिक लगाएगी- पंकज चौधरी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विकास और समृद्धि के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ समाप्त करके ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसा बदलाव करने का प्रशंसनीय काम किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में पिछले 9 साल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए गए विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि योगी जी के नेतृत्व में हुए विकास का परिणाम है कि जनता ने 2017 के बाद 2022 में भी हमें जिताया और 2027 में बीजेपी हैट्रिक लगाने जा रही है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने वैश्विक स्तर से लेकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक का उत्थान करने का काम किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और सनातन संस्कृति में नौ को बहुत ही दिव्य माना जाता है। 9 साल पहले उत्तर प्रदेश की जनता ने मेवा वालों को हटाकर सेवा वालों को मौका देने का काम किया था। परिवारवाद वालों को हटाकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘सबका विश्वास, सबका प्रयास’ वालों को मौका दिया था। दंगा वालों को हटाकर गंगा वालों को आशीर्वाद दिया था। गुंडाराज और माफियाराज वालों को उत्तर प्रदेश की जनता दोबारा नहीं आने देगी। समाजवादी पार्टी भ्रम और अफवाह फैलाकर दोबारा सत्ता में आने का सपना देख रही है लेकिन जनता दोबारा माफियाराज नहीं आने देगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। किसी भी प्रदेश की तरक्की के लिए उद्योगों की बड़ी आवश्यकता होती है। योगी जी ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करके इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर ध्यान दिया है। आज देश में जितने भी एक्सप्रेसवे हैं उसका 55 फीसदी हिस्सा केवल उत्तर प्रदेश में है। हमारी सरकार गांवों में भी 18 से 20 घंटे बिजली दे रही है। गन्ना किसानों को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है। उन्होंने इस अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को योगी सरकार ने 9 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामना दी।

राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने और जागरूकता की दिशा में करेगी कार्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर में इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से हुई दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को व्यवस्थित जांच के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल से अधिकारियों और विशेषज्ञों को भी इंदौर रवाना किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल लॉक और इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से हुई दुर्घटना से बदलती तकनीक और उसके उपयोग के परिणामस्वरूप नई प्रकार की चुनौती सामने आयी है। ऐसी घटनाओं को रोकने और जागरूकता की दिशा में राज्य सरकार कार्य करेगी। हमारी कोशिश होगी कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल लॉक जैसी सुविधाओं का उपयोग हमारी आवश्यकता है, लेकिन ऐसी सुविधाओं से मानव जीवन भी कष्ट में आता है। इन उपकरणों के उपयोग में विशेष सतर्कता और सावधानी जरूरी है। इस संबंध में प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर भी सजग रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार होमगार्ड लाइन में आयोजित कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा में व्यक्त किए।  

चीन छोड़ भारत की तरफ बढ़ा रूसी तेल टैंकर, आखिर क्या है इस यू-टर्न की कहानी?

रूस दुनियाभर में ईंधन आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बीच रूसी तेल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक एक रूसी तेल से भरा टैंकर, जो चीन की तरफ बढ़ रहा था, दक्षिण चीन सागर में अपना रास्ता बदलकर अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है। ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ‘एक्वा टाइटन’ 21 मार्च को न्यू मैंगलोर तट पर पहुंचने वाला है। यह टैंकर अपने साथ ‘यूराल’ तेल का कार्गो ला रहा है, जिसे जनवरी के आखिर में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से लोड किया गया था। जानकारी के मुताबिक यह जहाज शुरुआत में चीन के रिझाओ पोर्ट की तरफ जा रहा था। लेकिन हाल ही में इसने अपनी मंजिल बदल ली। वहीं ‘वॉर्टेक्सा लिमिटेड’ के मुताबिक रूस से तेल ले जा रहे कम से कम सात टैंकर ने सफर के बीच में ही चीन की बजाय भारत की ओर मुड़ गए हैं। इसके अलावा ट्रैकिंग डेटा से यह भी पता चला है कि ‘स्वेज़मैक्स ज़ूज़ू एन.’ जहाज ने भारत के सिक्का बंदरगाह को अपनी अगली मंजिल बताया है और यह 25 मार्च को यहां पहुंच सकता है। यह टैंकर कजाखस्तान का कच्चा तेल ले जा रहा है। होर्मुज प्रभावी रूप से बंद यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद सबसे अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद हो गया है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान से इस रास्ते से जहाजों को ना गुजरने की धमकी दी है। बता दें कि इस रास्ते से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 से 25 फीसदी हिस्सा गुजरता है। रिफाइनर हुए सक्रिय जानकारी के मुताबिक यह मार्ग बाधित होने और अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने की ‘छूट’ मिलने के बाद भारत के सभी प्रमुख रिफाइनर रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए सक्रिय हो गए हैं। भारतीय रिफाइनरियों ने बीते कुछ दिनों में रूस से करीब 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा है। इससे पहले भारत ने स्पष्ट किया है कि वह ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अन्य स्रोतों के विकल्प भी तलाश रहा है और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।  

मुख्यमंत्री ने कहा, 2017 के बाद डबल इंजन सरकार ने राज्य को ‘बॉटलनेक’ स्थिति से निकाल कर ‘ब्रेकथ्रू’ में बदला

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था, लेकिन आज वही प्रदेश विकास, सुशासन और विश्वास का नया मॉडल बनकर उभरा है। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकारों की नीतियों ने युवाओं, किसानों और आम जनता को निराशा के सिवा कुछ नहीं दिया। पहले भर्तियों में पारदर्शिता का अभाव था और भ्रष्टाचार चरम पर था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “नौकरी निकलते ही महाभारत के सारे रिश्ते वसूली के लिए निकल पड़ते थे,” जिससे प्रतिभाशाली युवा हताश होकर या तो पलायन करते थे या खुद को कोसने पर मजबूर होते थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था के तहत लाखों युवाओं को रोजगार देने का काम किया है। सीएम ने विपक्ष पर समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने जाति और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया, जिससे प्रदेश का समग्र विकास बाधित हुआ। हमारी सरकार ने 25 करोड़ जनता को एक परिवार मानकर कार्य किया और दलितों, वंचितों, अति पिछड़ों व गरीबों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया। धार्मिक आस्था के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम और भारतीय परंपराओं को “अंधविश्वास” बताते थे, आज वही अयोध्या और काशी के विकास को देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आस्था का सम्मान ही उत्तर प्रदेश की पहचान है और सरकार ने इसे पुनर्स्थापित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने केवल समस्याओं को चिह्नित नहीं किया, बल्कि उन्हें समाप्त कर प्रदेश को “बॉटलनेक” की स्थिति से निकालकर “ब्रेकथ्रू” की दिशा में आगे बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी तरह के सामूहिक प्रयासों से उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में और मजबूत होकर उभरेगा।

जल गंगा संवर्धन के इस वर्ष होंगे करीब 2500 करोड़ रूपये के कार्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 19 मार्च, गुड़ी पड़वा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के दिन इंदौर के इस्कॉन मंदिर से तीसरे “जल गंगा संवर्धन अभियान” का शुभारंभ करेंगे। इंदौर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। इस दिन प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में भी जल स्रोतों या नदियों के समीप कार्यक्रम आयोजित कर अभियान की शुरुआत की जाएगी। साढ़े तीन माह तक चलने वाले इस प्रदेशव्यापी महाअभियान का समापन 30 जून को होगा। इसमें 18 विभाग शामिल होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का नोडल विभाग होगा, जबकि नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग सह-नोडल विभाग रहेगा। अभियान के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हर जिले में प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में होगा क्रियान्वयन जल गंगा संवर्धन अभियान का क्रियान्वयन संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में किया जाएगा। कलेक्टर जिलों में अभियान के नोडल अधिकारी होंगे। उनकी अध्यक्षता में जिला जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्य योजना तैयार कर मॉनिटरिंग करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत-समन्वयक और सभी सहभागी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों, कृषि-अभियांत्रिकी शिक्षण व शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, जिले के प्रतिष्ठित संत व महात्माओं और जिले के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को इस समिति में नामांकित किया जा सकेगा। विकास खंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नोडल अधिकारी होंगे। उनके नेतृत्व में विकास खंड जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्यों की निगरानी करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत-समन्वयक और सहभागी विभागों के विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। जल संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 4–5 सरपंच तथा विकास खण्ड के प्रतिष्ठित व्यक्ति इस समिति में आमंत्रित किए जा सकेंगे। ये विभाग अभियान में होंगे शामिल जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद और जनसंपर्क विभाग शामिल हैं। विभागवार होने वाले प्रमुख कार्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2025 में जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा अंतर्गत प्रारंभ किए गए 86,360 खेत तालाब, 553 अमृत सरोवर, 1.5 लाख डगवेल रिचार्ज में से प्रचलित कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। मनरेगा अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 1.0 की परियोजनाओं में निर्मित किए गए चेक डेम तथा स्टापडेम की मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य किया जाएगा। माँ नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना और एक बगिया मां के नाम परियोजना के अंतर्गतविगत वर्ष किए गए पौधरोपण के गैप फिलिंग के लिए आवश्यक तैयारी की जाएगी। पूर्व निर्मित जल संग्रहण संरचनाओं जैसे तालाब, चेकडेम और स्टॉपडेम से जनसहयोग से गाद निकालने का कार्य किया जाएगा। निकाली गई मिट्टी/गाद स्थानीय किसानों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण में इस वर्ष और भी व्यापक लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके लिए विस्तृत तैयारियां की जा रही हैं। सरकार ने इस वर्ष करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से जल संवर्धन और संचयन से जुड़े निर्माण एवं वर्तमान जल संरचनाओं के विकास-विस्तार कार्य कराने का संकल्प किया है। इस वर्ष जिन प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत, नहरों का निर्माण और सुधार, सूखी नदियों का पुनर्जीवन तथा भू-जल पुनर्भरण के लिए संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं। इन सभी कार्यों का उद्देश्य प्रदेश में वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और जल स्रोतों को स्थायी बनाना है। 10 हजार से अधिक चेक डैम्स और स्टॉप डैम्स के संधारण पर रहेगा जोर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम के समुचित संधारण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही कई छोटे-बड़े बांधों के गेटों की मरम्मत और जल संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण कार्य भी किया जाएगा। इन संरचनाओं से वर्षा जल के संचयन को रोककर जमीन में पुनर्भरण का प्रयास रहेगा, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होगी और सिंचाई के लिए अधिक पानी उपलब्ध हो सकेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग होगा नोडल जल गंगा संवर्धन अभियान के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। वहीं नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सह-नोडल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इनके मार्गदर्शन में राज्य शासन के 16 से अधिक विभाग मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे। सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से समय-सीमा में क्रियान्वित करेंगे। अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर विशिष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं। मनरेगा में करेंगे खेत तालाब और अमृत सरोवर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत शुरू किए गए खेत तालाब, अमृत सरोवर और डगवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इस दौरान नए काम भी प्रारंभ किए जाएंगे। अमृत 2.0 के तहत शहरों में होंगे जल संरक्षण के काम नगरीय विकास एवं आवास विभाग शहरों में अमृत 2.0 योजना के तहत जल संरक्षण संरचनाओं के जीर्णोद्धार और नए कार्यों को शुरू करेगा। वन विभाग करेगा भू-जल संवर्धन के कार्य वन विभाग द्वारा इस अभियान के दौरान लगभग 1.30 लाख हैक्टेयर भू-रकबे में भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इनमें बोल्डर चेक डैम, ब्रशवुड चेक डैम, परकोलेशन पिट्स और कंटूर ट्रेंच निर्माण जैसे कार्य किए जाएंगे। जल संसाधन विभाग की बड़ी भूमिका जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा लघु सिंचाई परियोजनाओं के तालाबों के पाल (बंड) की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य किया जाएगा। नहरों की साफ सफाई और टेल-एण्ड तक पानी पहुंचाने के लिए फील्ड स्टॉफ को और अधिक सक्रिय किया जाएगा। पेयजल गुणवत्ता परीक्षण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केन्द्रों के पेयजल स्रोतों … Read more

राष्ट्रपति मुर्मु के दौरे से पहले वृंदावन चमका, गोवर्धन हाई अलर्ट पर, अफसरों की बढ़ी हलचल

वृंदावन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तीन दिवसीय प्रवास पर गुरुवार की शाम वृंदावन आ रही हैं। राष्ट्रपति अपनी धार्मिक यात्रा की शुरुआत इस्कॉन मंदिर से करेंगी तो अंतिम दिन गिरिराजजी की सात कोसीय परिक्रमा करने के साथ दौरा संपन्न होगा। राष्ट्रपति वृंदावन के विभिन्न आश्रम, मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचेंगी। ऐसे में राष्ट्रपति जिस रूट से गुजरेंगी, वहां तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। स्वागत के लिए वृंदावन को सजाया जा रहा है। तीन दिन के प्रवास पर गुरुवार को वृंदावन आएंगी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु राष्ट्रपति 19 मार्च गुरुवार की शाम करीब पांच बजे वृंदावन पहुंचेंगी। यहां होटल रेडिशन में पहुंचने के बाद राष्ट्रपति सबसे पहले साढ़े छह बजे इस्कॉन मंदिर से अपनी धार्मिक यात्रा शुरू करेंगी। राष्ट्रपति का दौरा प्रेममंदिर, नीबकरौरी आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम का भी रहेगा। दीवारों पर रंग और रोगन के साथ चित्रकारी सभी कार्यक्रम स्थलों तक साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की कमान नगर निगम ने संभाली है। दीवारों पर रंग और रोगन करने के साथ चित्रकारी हो रही है। डिवाइडरों पर रंग लगाने के साथ जीर्ण-शीर्ण पड़े फुटपाथों पर नई टाइलें बिछाई जा रही हैं। तैयारियों का जायजा लेने पहुंच रहे अधिकारी राष्ट्रपति जहां भी कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगी। यहां की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंगलवार को मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ, डीआइजी शैलेष कुमार पांडेय, डीएम सीपी सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार ने वृंदावन का दौरा किया। जहां-जहां राष्ट्रपति जाएंगी, वहां व्यवस्थाएं देखीं। राष्ट्रपति आगमन से पहले गोवर्धन में हाई अलर्ट, अफसरों ने संभाली कमान गोवर्धन। गोवर्धन में राष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को मंडलायुक्त, एडीजी, डीएम समेत आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंडलायुक्त, एडीजी, डीआइजी व डीएम, एसएसपी ने दानघाटी मंदिर में तैयारी देखी। फिर गोल्फ कार्ट से परिक्रमा मार्ग का भ्रमण कर सफाई व्यवस्था देखी।

नक्सल मोर्चे पर नई चाल: 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा के घर पुलिस, ‘हिड़मा स्ट्रेटेजी’ से सरेंडर की उम्मीद

जगदलपुर कुख्यात नक्सली हिड़मा के सरेंडर के लिए अपनाई गई रणनीति को 1 करोड़ के बड़े इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के लिए भी झारखंड पुलिस इस्तेमाल कर रही है. झारखंड पुलिस ने पोलित ब्यूरो मेंबर बेसरा को मुख्यधारा में लाने के लिए उसके परिजनों से मुलाकात की. पुलिस ने परिजनों से अपील की कि वे मिसिर बेसरा को समझाएं और हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करें. दरअसल माओवादी संगठन अब अपने सबसे कमजोर दौर में बताया जा रहा है. जहां कभी कई पोलित ब्यूरो मेंबर सक्रिय थे, अब महज दो ही बड़े चेहरे बचे हैं. एक ओर तेलंगाना पुलिस गणपति के आत्मसमर्पण की कोशिशों में जुटी है, तो दूसरी तरफ झारखंड पुलिस मिसिर बेसरा को लेकर लगातार दबाव और संवाद दोनों रणनीतियों पर काम कर रही है. खास बात ये है कि सरकार द्वारा तय डेडलाइन अब करीब है. इसी के चलते छत्तीसगढ़, झारखंड और तेलंगाना तीनों राज्यों की पुलिस बड़े माओवादी कैडर को सरेंडर कराने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है. हिड़मा स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल बता दें कि छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कुख्यात नक्सली हिड़मा को मुख्याधारा में वापल लाने के लिए सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के अतिसंवेदनशील पूर्वर्ती गांव पहुंचे थे. जहां उन्होंने गांव में जनचौपाल का आयोजन किया. इस चौपाल में सभी ग्रामवासी और पूर्वर्ती से संबंध रखने वाले नक्सल नेता माड़वी हिड़मा और बारसे देवा के परिजन भी शामिल हुए. इसमें माड़वी हिड़मा की माता माड़वी पुंजी और बारसे देवा की माता बारसे सिंगे भी शामिल थीं. नक्सली हिडमा और देवा की मां से मुलाकात कर उन्होंने अपील करते हुए कहा कि अपने बेटों से कहो की दोनों हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं. क्या परिवार की भावुक अपील आएगी काम ? अब देखना होगा कि परिवार की यह अपील बंदूक की आवाज को कितना दबा पाती है. क्या जंगल से निकलकर मुख्यधारा की राह सच में आसान हो पाती है या फिर यह कोशिश भी एक लंबी लड़ाई का हिस्सा बनकर रह जाएगी.

मौसम ने ली करवट, दिल्ली-NCR में तेज हवाओं के साथ बारिश; रेवाड़ी में ओलावृष्टि

नई दिल्ली दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम सहित एनसीआर क्षेत्र में बुधवार शाम को अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आंधी और गरज के साथ बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया। जानकारी के मुताबिक, 50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा चल रही है और बिजली कड़क रही है। इससे सड़कों पर वाहनों के पहिए थम गए और मेट्रो भी लेट चल रही है।  इससे शाम को दफ्तर से घर जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।   रेवाड़ी शहर में तेज वर्षा के साथ ओलावृष्टि हुई।  पूर्वी दिल्ली की पटपड़गंज रोड पर लक्ष्मी मार्केट के पास होती वर्षा। गुरुग्राम में सुबह कोहरा, शाम को धूलभरी हवा के साथ हुई बूंदाबांदी साइबर सिटी में बुधवार को मौसम ने दिनभर कई रंग बदले। हवा में नमी के कारण सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता पर मामूली असर पड़ा और लोगों को ठंडक का अहसास हुआ। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, दोपहर तक आसमान में बादल छाने लगे, हालांकि बीच-बीच में धूप भी निकलती रही। बदलते मौसम के बीच अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 15.0 डिग्री सेल्सियस रहा। पूरे जिले में मौसम बदल गया। कहीं पर बूंदाबांदी तो कहीं पर तेज हवा चलने से किसानों की भी चिंता बढ़ गई। इन दिनों खेतों में फसल कटाई का सीजन है। शाम होते-होते मौसम ने अचानक करवट ली। शाम करीब 6:30 बजे तेज धूलभरी हवा चलने लगी, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे वातावरण में ठंडक और बढ़ गई। दिनभर की गर्माहट के बाद आई इस बूंदाबांदी ने मौसम को सुहावना बना दिया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में कल कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार और शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। सुबह और शाम के समय हल्की बारिश और बिजली कड़कने की संभावना है। साथ ही 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज झोंकेदार हवा की संभावना है।  इसके चलते तापमान में और गिरावट आ सकती है तथा मौसम ठंडा बना रह सकता है। मौसम के इस बदलाव ने एक ओर जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं तेज हवाओं और धूलभरी आंधी ने कुछ देर के लिए जनजीवन को प्रभावित भी किया। बूंदाबांदी के बाद मौसम सुहाना हो गया और लोगों ने राहत महसूस की।  

असम की राजनीति में बड़ा झटका: प्रद्युत बोरदोलोई BJP में शामिल, CM हिमंता ने भविष्य को लेकर दिए अहम इशारे

दिसपुर असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने एक दिन बाद यानी आज (बुधवार को) राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के आमंत्रण पर पार्टी में शामिल कराया गया है। बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राज्य इकाई केंद्रीय नेतृत्व से सिफारिश करेगी कि बोरदोलोई को आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाए। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आत्मसम्मान रखने वाला कोई भी व्यक्ति वहां नहीं रह सकता। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि भाजपा आगे भी कांग्रेस के नेताओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी। उन्होंने दूसरा बड़ा संकेत देते हुए कहा, “स्वाभिमान वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कांग्रेस पार्टी में बने रहने का कोई कारण नहीं है। हमारा लक्ष्य और भी कांग्रेस नेताओं को पार्टी में लाना है।”   कांग्रेस की प्रतिक्रिया दूसरी तरफ, कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को बोरदोलोई के इस्तीफे को “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि वह एक सीट पर टिकट को लेकर नाराज थे। प्रियंका ने कहा कि इस्तीफे से पहले उनसे बातचीत का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती थी कि इस्तीफ़ा देने से पहले उन्हें बोरदोलोई से बात करने का मौका मिलता। प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में इस बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है, मुझे लगता है कि वह एक टिकट आवंटन से नाराज थे, काश हमें इस बारे में बातचीत करने का मौका मिलता। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।” इस्तीफे के पीछे अंदरूनी कलह असम में विधानसभा चुनाव से महज 20 दिन पहले कांग्रेस को झटका देते हुए लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार की रात पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में बोरदोलोई ने पार्टी के भीतर आंतरिक समस्याओं और उपेक्षा का जिक्र किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे इस फैसले से खुश नहीं थे, लेकिन पार्टी के भीतर बार-बार अपमान और समर्थन की कमी के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। इस्तीफे की दी थी धमकी बोरदोलोई ने हाल में असम के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि यदि लाहौरीघाट के मौजूदा विधायक आसिफ मोहम्मद नजर को विधानसभा चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार बनाया गया, तो वह पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। सांसद ने पत्र में आरोप लगाया कि नजर के करीबी सहयोगी इमदादुल इस्लाम अप्रैल 2025 में बोरदोलोई और अन्य पार्टी नेताओं पर हुए हमले में शामिल थे और इस मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया है। चुनाव से पहले बढ़ी हलचल यह सियासी घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब असम में 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए चुनावों का ऐलान हो चुका है। राज्य में एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होने हैं। मतगणना 4 मई को होगी। इस चुनाव में भाजपा, मुख्यमंत्री हिमंता के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। भाजपा का कांग्रेस से सीधा मुकाबला है। बता दें कि बोरदोलोई का कांग्रेस छोड़ना हाल का पहला मामला नहीं है। इससे पहले असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिससे राज्य की राजनीतिक स्थिति और अधिक रोचक हो गई है।  

स्वास्थ्य, पर्यावरण व विकास की नई पहचान बना उत्तर प्रदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ की छवि से निकलकर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुका है। स्वास्थ्य व पर्यावरण के क्षेत्र में प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। ये बातें बुधवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास और सतत समृद्धि के 9 वर्ष पूर्ण होने पर “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक का विमोचन करते हुए कहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज गोरखपुर और रायबरेली में एम्स संचालित है और काशी के बीएचयू में वर्ल्ड क्लास कैंसर इंस्टीट्यूट बन चुका है। इससे लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश सरकार की प्रगति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग 06 करोड़ गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं और हर पीएचसी पर प्रत्येक रविवार को आरोग्य मेले आयोजित हो रहे हैं। इन्सेफेलाइटिस जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण सीएम योगी ने कहा कि आज इन्सेफेलाइटिस जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है और वेक्टर बॉर्न डिजीज के खिलाफ भी ठोस कार्रवाई की गई है। बीते वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मेडिकल ढांचे के विकास और योजनाओं की पहुंच ने उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।  व्यापक पौधरोपण अभियानों से पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ किया गया मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ग्रीन कवर बढ़ाने और व्यापक पौधरोपण अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ किया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पौधरोपण करने वाले राज्यों में शामिल हुआ है।

इन फ्री एप्स से अपने एंड्रायड स्मार्टफोन को बनाएं सुरक्षित

एप्लीकेशन वह सॉफ्टवेयर हैं, जो आपके स्मार्टफोन की स्मार्टनेस को और बढ़ा देता हैं। आपके एंड्रायड फोन में आपकी प्राइवेसी से संबंधित बहुत सा डाटा होता है, जो अगर गलत हाथ में चला जाएं, तो बैठे-बिठाएं लेने के देने पड़ सकते हैं, ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आप अपने एंड्रायड की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें। इस काम के लिए गूगल प्ले स्टोर पर बहुत से फ्री एप्स दिए गए हैं, इनकी हेल्प से आप अपनी एंड्रायड डिवाइस को प्रोटेक्ट कर सकते हैं, इनमें से तीन बेस्ट फ्री एंड्रायड प्रोटैक्शन ऐप्स के बारे में हम आज आपको बता रहे हैं.. परफेक्ट एप प्रोटैक्टर:- यह एप जैसा कि नाम से ही जाहिर है एप्लीकेशन्स को बहुत परफेक्ट तरीके से प्रोटेक्ट करता है। यह आपके सेलेक्टेड ऐप्स को एक पासवर्ड या पैटर्न के साथ लॉक करता है, स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम करता है और जिन एप्स का आप चयन करते हैं उनके स्क्रीन रोटेशन को कंट्रोल करता है। इसका साइज 3.7एमबी है। एप्लीकेशन प्रोटेक्शन:- इस एप की उपयोगिता यह है कि इसकी मदद से आप अपने स्मार्टफोन पर डाटा और एप्लीकेशन्स को आसानी से एक पासकोड के साथ प्रोटेक्ट कर सकते हैं, ताकि अनआॅथराईजड यूजेस से बचाया जा सकें। इसका साइज 328केबी है। एप लाॅक:- इस हैंडी एप से आप अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल्ड एप्स को एक नंबर या फिर पैटर्न लॉक से प्रोटेक्ट कर सकते हैं। यह एक बहुउपयोगी एप है। इसके साथ आप इंस्टॉल और अनइंस्टॉल फंक्शन्स, इनकमिंग कॉल्स, सेटिंग्स, एप लॉक आइकन को छिपाना और दोबारा अनलॉक किए बिना शार्ट एक्जिट कर सकते हैं। इसका साइज 638 केबी है।  

स्टार चेहरों को किनारा, 75 MLA आउट—ममता की ‘रिस्क वाली’ रणनीति क्या दिलाएगी जीत?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हुंकार भर दी है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के 291 सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। राज्य में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही पार्टी ने इस बार चर्चित हस्तियों की जगह संगठन पर पकड़ रखने वाले नेताओं को तरजीह दी है। बता दें कि राज्य में आगामी 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले कालीघाट स्थित अपने आवास से उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी दार्जिलिंग पहाड़ियों की तीन सीटें सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोडेगी, जिसका नेतृत्व अनित थापा कर रहे हैं। टीएमसी की लिस्ट जारी होते ही यह साफ हो गया है कि भवानीपुर में ममता बनर्जी-शुभेंदु अधिकारी की प्रतिद्वंद्विता नया चुनावी रंग लेने जा रही है, जहां मुख्यमंत्री अपनी सीट बचाने उतरेंगी, जबकि भाजपा ने यहां से नेता प्रतिपक्ष को मैदान में उतारा है। यह 2 प्रतिद्वंद्वियों के बीच सीधा आमना-सामना होगा, जो पहली बार 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में भिड़े थे। तब अधिकारी ने ममता को नजदीकी अंतर से हराया था। 226 सीटों पर जीत का दावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 226 सीट जीतने का दावा भी किया है। मुख्यमंत्री बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हुए कहा, ”हम 291 सीट पर चुनाव लड़ेंगे और 226 से अधिक सीट जीतेंगे।” किसे दिया मौका, किसका कटा पत्ता? तृणमूल ने 291 उम्मीदवारों में से 135 मौजूदा विधायकों को बरकरार रखा है। वहीं लगभग 75 विधायकों को हटा दिया है और 15 अन्य को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है, जिसे पार्टी सूत्रों ने “लक्षित सत्ता-विरोधी लहर से निपटने की कवायद” के रूप में वर्णित किया है। इस सूची में पेशेवर व्यक्तियों, खिलाड़ियों और विभिन्न क्षेत्र के चेहरों का मिश्रण भी शामिल है। हालांकि पूरा जोर मशहूर हस्तियों के बजाय संगठनात्मक चेहरों पर बना हुआ है, जो पहले के चुनावों से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पार्टी ने फरहाद हकीम, जावेद अहमद खान, अरूप बिस्वास, इंद्रनील सेन और चंद्रिमा भट्टाचार्य सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनके मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों से फिर से उतारा है। ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेता-नेता सोहम चक्रवर्ती इस बार तेहट्टा से चुनाव लड़ेंगे और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष को बेलियाघाटा से मैदान में उतारा गया है, जो उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। नामी चेहरों में, बरासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती, बेहला पश्चिम के विधायक पार्थ चटर्जी और बेलियाघाटा के विधायक परेश पाल को टिकट नहीं दिया गया है। पार्टी ने कई नए चेहरे भी पेश किए हैं, जिनमें मानिकतला से श्रेया पांडे और उत्तरपाड़ा से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बेटे सिर्सन बनर्जी शामिल हैं। पार्टी के आंकड़ों के अनुसार उम्मीदवारों में से 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और 47 अल्पसंख्यक हैं। किसे दी गई प्राथमिकता? तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने चर्चित हस्तियों की तुलना में जमीनी स्तर पर जुड़ाव रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, ”नेतृत्व ने जानबूझकर स्टार चेहरों से परहेज किया। जोर उन उम्मीदवारों पर है जो बूथ का प्रबंधन कर सकें, मतदाताओं को गोलबंद कर सकें और स्थानीय नेटवर्क बनाए रख सकें।” नंदीग्राम में तृणमूल ने पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े पंचायत नेता पबित्र कर को मैदान में उतारा है, जो हाल में पार्टी में वापस लौटे हैं। इसके अलावा पार्टी ने बीरभूम, उत्तर 24 परगना और दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों जैसे प्रमुख चुनावी क्षेत्रों में मजबूत जिला स्तरीय चेहरे बरकरार रखे हैं।  

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