Baglamukhi Temple Investigation: Will the role of the town Patwari also be under investigation?
संवाददाता: चंदा कुशवाहा
नलखेड़ा। मां बगलामुखी मंदिर में कथित दान अनियमितताओं की जांच के लिए कलेक्टर द्वारा तीन सदस्यीय समिति गठित किए जाने के बाद अब स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं। मंदिर की शासकीय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एसडीएम एवं सचिव तहसीलदार हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर वर्षों से यह व्यवस्था प्रचलित रही है कि कस्बा पटवारी मंदिर की व्यवस्थाओं के समन्वय और स्थानीय गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी निभाता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतों के अनुसार मंदिर परिसर में लंबे समय से समानांतर रूप से दान संग्रह, अलग रसीद पुस्तिकाओं का उपयोग तथा निजी स्तर पर गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो क्या इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन तक नहीं पहुंची? और यदि जानकारी थी, तो वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर अवगत क्यों नहीं कराया गया?

प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि यदि मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े अधिकारी नियमित रूप से वहां की गतिविधियों से अवगत रहते हैं, तो कथित अनियमितताओं का इतने लंबे समय तक सामने न आना जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। ऐसे में जांच केवल कथित समानांतर समिति तक सीमित न रहकर यह भी स्पष्ट करे कि स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि कलेक्टर के आदेश में किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या पटवारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। वर्तमान में केवल जांच के आदेश दिए गए हैं और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाएगा।
अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं की जानकारी किस स्तर तक थी, किसने क्या कार्रवाई की, और यदि कहीं प्रशासनिक लापरवाही हुई तो उसकी जवाबदेही किसकी तय होगी।









