Maa Baglamukhi Temple Nala Tragedy: Public outrage erupts following the deaths of 8 devotees; people take to the streets, raising slogans against the District Collector and SP, and a letter is sent to the Chief Minister demanding the suspension of the Tehsildar.
संवाददाता : चंदा कुशवाहा
नलखेड़ा (आगर मालवा)। विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के समीप 18-19 सितंबर 2026 की रात उफनते बरसाती नाले में कार बहने से ओडिशा के 7 श्रद्धालुओं सहित कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे से आक्रोशित स्थानीय नागरिकों ने शनिवार को मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। मौके पर स्थिति संभालने पहुंचे जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के सामने भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा और प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नागरिकों ने मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव सहित जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग उठाई है।


तेज बहाव में बही कार, 3 मासूमों समेत 8 ने तोड़ा दम
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ओडिशा निवासी श्रद्धालु उज्जैन से किराए की कार (क्रमांक MP 13 AF 7135) लेकर मां बगलामुखी के दर्शन हेतु नलखेड़ा पहुंचे थे। देर रात मूसलाधार बारिश के चलते मंदिर के समीप स्थित बरसाती नाला उफान पर था। पुलिया पार करते समय तेज बहाव की चपेट में आने से कार असंतुलित होकर नाले में समा गई।
हादसे में 3 बच्चे, 2 महिलाएं और 3 पुरुष (चालक सहित) की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद बचाव दल ने कड़ी मशक्कत कर सभी शवों और क्षतिग्रस्त कार को बाहर निकाला।
प्रशासनिक अनदेखी पर फूटा गुस्सा, लगे गंभीर आरोप
घटना के बाद स्थानीय रहवासियों और श्रद्धालुओं का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन व मंदिर प्रबंधन की घोर लापरवाही का परिणाम है। लोगों ने सीधे तौर पर आरोप लगाए कि:
तहसीलदार एवं मंदिर सचिव प्रियंक श्रीवास्तव: मंदिर प्रबंधन का दायित्व होने के बावजूद उफनते नाले पर समय रहते आवागमन रोकने, बैरिकेडिंग करने या चेतावनी संकेत लगाने की सुध नहीं ली गई।
थाना प्रभारी (TI) शशि उपाध्याय: बारिश के अलर्ट और तेज बहाव के बीच संवेदनशील पुलिया पर सुरक्षा बल या पुलिस जवान तैनात नहीं किए गए।

सीएमओ नलखेड़ा: नगर परिषद द्वारा जल निकासी और पुलिया पर सुरक्षात्मक रेलिंग के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
कस्बा पटवारी रामपाल तोमर: जलभराव की स्थिति और संवेदनशील मार्गों की प्रशासनिक निगरानी में शिथिलता बरती गई।
(नोट: प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए इन व्यक्तिगत आरोपों की जांच जारी है और इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।)
मुख्यमंत्री के नाम पत्र: उच्चस्तरीय जांच और निलंबन की मांग
“समस्त स्थानीय नागरिक एवं श्रद्धालु, नलखेड़ा” के हस्ताक्षर युक्त एक मांग पत्र मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के नाम भेजा गया है। पत्र में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:

पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच पूरी होने तक संबंधित तहसीलदार एवं अन्य प्रथम दृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
घटना से पूर्व प्रशासन को मिली सूचना और उस पर की गई मैदानी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो।
लापरवाही प्रमाणित होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय व वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मंदिर एवं बरसाती नाले के आसपास श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मौके पर तनाव, रास्ता खुलवाने के प्रयास जारी
स्थानीय नागरिकों द्वारा किए गए चक्काजाम के चलते मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। प्रशासनिक अमला और भारी पुलिस बल मौके पर डटा हुआ है और आक्रोशित भीड़ को समझाइश देकर चक्काजाम समाप्त करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इधर, सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया गया है तथा ओडिशा स्थित परिजनों को सूचित कर दिया गया है। मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के आधिकारिक बयान और अंतिम जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा है









