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‘कैलासा’ पर सुप्रीम कोर्ट का तंज! असली देश को लेकर उठे सवाल, जज ने ली मजेदार चुटकी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में एक जमानत याचिका के दौरान अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब जस्टिस संदीप मेहता ने वानुअतु देश के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए उसकी तुलना भगोड़े नित्यानंद के ‘कैलासा’ से कर दी। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों खारिज हुई आरोपी की जमानत। मंगलवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट में एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बेहद हैरान करने वाला वाकया सामने आया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक वास्तविक देश वानुअतु के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया। क्या है पूरा मामला? यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी) और 406 (विश्वासघात) के तहत आरोपी एक विदेशी नागरिक की जमानत याचिका से जुड़ा था। आरोपी खुद को वानुअतु का नागरिक बता रहा था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जब आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल वानुअतु का रहने वाला है, तो जस्टिस मेहता ने आश्चर्य जताते हुए उनसे पूछा कि क्या वह कभी वहां गए हैं? कैलासा से की गई तुलना जस्टिस मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा- क्या आप वहां कभी गए हैं? ऐसा कोई देश नहीं है… यह देश ‘कैलासा’ जैसा है। गौरतलब है कि ‘कैलासा’ एक स्वयंभू हिंदू राष्ट्र है जिसे भगोड़े भारतीय गुरु नित्यानंद ने 2019 में बसाने का दावा किया था। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। वहीं, इसके विपरीत वानुअतु एक वास्तविक संप्रभु राष्ट्र है, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) और कॉमनवेल्थ का सदस्य है। भौगोलिक भ्रम और कोर्ट की टिप्पणी बहस के दौरान जब वकील सिद्धार्थ दवे से पूछा गया कि यह देश कहां है, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह कैरिबियन में कहीं है। हालांकि, भौगोलिक रूप से यह जानकारी भी गलत थी, क्योंकि वानुअतु दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है, न कि कैरिबियन में। कोर्ट को जब यह जानकारी दी गई कि आरोपी ने अलग-अलग समय पर कई पहचानों का इस्तेमाल किया है, तो जस्टिस मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा- हमें इस व्यक्ति पर शोध करने पर विचार करना चाहिए। अंततः आरोपी की जमानत याचिका पर कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए इसे वापस ले लिया गया और कोर्ट ने भी इसे खारिज कर दिया।  

वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री देवांगन 72 लाख रूपए की राशि के विभिन्न निर्माण कार्यों का करेंगे भूमिपूजन

रायपुर. प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन 18 फरवरी दिन बुधवार को कोरबा में आयोजित श्रमिक सम्मेलन में शामिल होंगे एवं नगर निगम कोरबा के विभिन्न वार्डों में 72 लाख रूपए के विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे।  निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंत्री  देवांगन चारपारा कोहड़िया कोरबा से सुबह 10.45 बजे रवाना होकर 11 बजे टी.पी.नगर कोरबा में स्थित इंडोर ऑडिटोरियम में श्रम विभाग कोरबा द्वारा आयोजित श्रमिक सम्मेलन में शामिल होंगे। कार्यक्रम पश्चात अपरान्ह 3.30 बजे एम.पी.नगर कोरबा के दशहरा मैदान में आयोजित विभिन्न निर्माण कार्याे का भूमिपूजन करेंगे। इन कार्यो में वार्ड क्र. 27 में आर.सी.सी. नाली एवं कल्वर्ट निर्माण कार्य राशि 12.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 25 कुंआ भट्ठा बुधवारी बाई पास में स्थित विवेकानंद सेवा सदन के द्धितीय तल में हॉल व कक्ष निर्माण एवं अन्य विस्तार कार्य राशि 25.00 रूपए, वार्ड क्र. 25 अंतर्गत कोरबा के महिला महाविद्यालय के पीछे ब्रम्हवाटिका के पास किचन शेड निर्माण कार्य राशि 5.00 लाख रूपए, एवं वार्ड क्र. 28 अंतर्गत अहाता निर्माण एवं अन्य विस्तार कार्य राशि 30.00 लाख रूपए शामिल है।

रायपुर–दुर्ग स्टेशन विकास कार्य की सुस्त प्रगति पर उठे सवाल, जीएम तरुण प्रकाश से सांसदों की दो-टूक

रायपुर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के साथ आज रायपुर रेल मंडल में संसदीय क्षेत्रों के सांसदों की बैठक हुई. सांसदों ने रायपुर और दुर्ग स्टेशन के री-डेवलपमेंट कार्य की धीमी प्रगति को लेकर नाराजगी जाहिर की. डीआरएम दयानंद के इसके पीछे तकनीकी बताए जाने पर सांसदों ने रोष व्यक्त किया. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के साथ बैठक में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, महेश कश्यप, भोजराज नाग और रूपकुमारी चौधरी मौजूद रहे. बैठक में रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और रावघाट रेल लाइन सहित विभिन्न लंबित परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई. विशेष रूप से रायपुर और दुर्ग के अमृत रेलवे स्टेशन निर्माण कार्य को दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया. बैठक के दौरान रायपुर और दुर्ग स्टेशन के री-डेवलपमेंट कार्य की धीमी प्रगति को लेकर सांसदों ने नाराजगी जाहिर की. सांसदों ने स्पष्ट कहा कि प्रारंभिक चरण में कार्य की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, जिससे आम जनता में भी असंतोष है. इस पर डीआरएम दयानंद ने स्पष्ट किया कि परियोजना के शुरुआती चरण में ड्रॉइंग और डिजाइन से जुड़े कई तकनीकी मुद्दे सामने आए थे. जिस पर सांसदों ने रोष व्यक्त किया. इन तकनीकी कारणों से कार्य की गति प्रभावित हुई. उन्होंने बताया कि संशोधित ड्रॉइंग और डिजाइन की प्रक्रिया अब पूरी कर ली गई है और आगे कार्य तेजी से किया जाएगा. समय-समय पर कार्य की समीक्षा भी की जाएगी ताकि तय समयसीमा में परियोजना पूरी हो सके. यह वर्ष की पहली बैठक थी, जिसमें स्टेशन डेवलपमेंट, यात्री सुविधाएं, साफ-सफाई, ट्रेनों के संचालन और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. कुछ लंबित परियोजनाओं के प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को पुनः भेजने पर सहमति बनी है. रायपुर-दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर की मांग सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि रायपुर से दिल्ली के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने, रायपुर-जगन्नाथपुरी तथा दुर्ग-अंबिकापुर के लिए वंदे भारत सेवा प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा गया है. राजधानी एक्सप्रेस को सप्ताह में तीन दिन के बजाय प्रतिदिन चलाने और जोधपुर – जयपुर रूट की ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की भी मांग की गई. इसके अलावा भाटापारा और अन्य छोटे स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव, मंडी गेट, जोरा व पिरदा में अंडरपास निर्माण तथा कचना और जोरा में अंडरब्रिज निर्माण को लेकर भी चर्चा हुई. रायपुर – धमतरी रेल लाइन का कार्य शीघ्र पूर्ण करने पर जोर दिया गया.

संघर्ष से सफलता तक: कुनकुरी की नेहा खाखा बनीं नवगुरुकुल की प्रेरक पहचान

जशपुरनगर संघर्ष से सफलता तक: कुनकुरी की नेहा खाखा बनीं नवगुरुकुल की प्रेरक पहचान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन जशपुर द्वारा संचालित नवगुरुकुल संस्थान ग्रामीण एवं सामान्य पृष्ठभूमि के युवाओं को आधुनिक कौशल से सुसज्जित कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य कर रहा है। यह पहल न केवल रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है, बल्कि जिले के युवाओं को आत्मविश्वास के साथ भविष्य निर्माण की ओर अग्रसर कर रही है। इसी नवाचारपूर्ण पहल का सशक्त उदाहरण हैं कुनकुरी की नेहा खाखा। वर्तमान में नेहा नवगुरुकुल में फाइनेंस जूनियर एसोसिएट टीम में ग्रोथ रोल पर कार्यरत हैं, जहाँ उन्हें 2.52 लाख रुपये वार्षिक पैकेज प्राप्त हो रहा है। अपनी भूमिका में वे अन्य विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करती हैं, उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करती हैं और उनकी शैक्षणिक प्रगति में सहयोग प्रदान करती हैं। नेहा का कहना है कि नवगुरुकुल ने उन्हें केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया है। यहाँ का सहायक और प्रेरक वातावरण उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। आत्मविश्वास से भरी नई उड़ान नेहा बताती हैं कि उनके पिता के निधन पश्चात उनकी माता मती ललिता खाखा परिवार की जिम्मेदारियाँ संभाल रही हैं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक चुनौतियों के बीच नेहा ने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, कांसाबेल से उच्च माध्यमिक शिक्षा पूर्ण की। नवगुरुकुल के बारे में उन्हें अपनी माता से जानकारी मिली। तत्पश्चात उन्होंने स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय, मनोरा में आयोजित एक सेमिनार में भाग लेकर संस्थान के लर्निंग मॉडल को समझा। प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त कर उन्होंने नवगुरुकुल, जशपुर में अध्ययन प्रारंभ किया। नेहा ने नवगुरुकुल में स्कूल ऑफ फाइनेंस का चयन किया। एक वर्ष के अध्ययन के दौरान उन्होंने वित्तीय विवरण, मैनेजमेंट अकाउंटिंग, कॉस्ट अकाउंटिंग तथा टैली में दक्षता प्राप्त की। साथ ही संचार कौशल, टीम वर्क और समस्या समाधान जैसे सॉफ्ट स्किल्स में भी उल्लेखनीय सुधार किया। इसके परिणाम स्वरूप उन्हें नवगुरुकुल में ही जॉब मिल गया। जहाँ वे अपनी शिक्षा जारी रखते हुए रोजगार भी प्राप्त कर रही है। वे पंडित सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी, कुनकुरी से स्नातक शिक्षा भी पूर्ण कर रही हैं। नवगुरुकुल: कौशल विकास का सशक्त मंच जिला प्रशासन जशपुर द्वारा संचालित नवगुरुकुल संस्थान जिले के युवाओं एवं छात्राओं के लिए कौशल विकास और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। यहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन एवं अनुशासित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। संस्थान में प्रोग्रामिंग, बिजनेस एवं फाइनेंस जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों के साथ जीवन कौशल का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे विद्यार्थी रोजगारोन्मुखी बनते हैं। नेहा खाखा की यह कहानी दर्शाती है कि समर्पित प्रयास, उचित मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण अंचल की बेटियाँ भी आत्मनिर्भरता की नई ऊँचाइयाँ छू सकती हैं। नवगुरुकुल जैसी पहलें जशपुर जिले को कौशल संपन्न और सशक्त युवाओं की नई पहचान दे रही हैं।

इमरान खान को तुरंत मेडिकल सुविधा देने की अपील, कपिल देव और सुनील गावस्कर समेत 14 हस्तियों का खत

नई दिल्ली सुनील गावस्कर, कपिल देव, एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ समेत दुनियाभर के 14 पूर्व कप्तानों ने इमरान खान के लिए अपनी आवाज बुलंद की है। इन क्रिकेट दिग्गजों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खत लिखकर इमरान खान की जेल में उनके पसंद के डॉक्टरों से तत्काल इलाज कराने की मांग की है। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हिरासत में खराब होती सेहत और आंखों की रोशनी कमजोर पड़ने की रिपोर्ट के बीच क्रिकेट जगत ने गंभीर चिंता जताई है। महान सुनील गावस्कर, कपिल देव, एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ समेत दुनियाभर के 14 पूर्व कप्तानों ने इमरान खान के लिए अपनी आवाज बुलंद की है। इन क्रिकेट दिग्गजों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खत लिखकर इमरान खान की जेल में उनके पसंद के डॉक्टरों से तत्का इलाज कराने, परिवार से नियमित मुलाकात और बिना किसी देरी के निष्पक्ष और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया का अधिकार देने की मांग की है। इमरान खान अपने दौर के महान ऑलराउंडर रहे हैं और उनकी ही कप्तानी में पाकिस्तान ने 1992 में वनडे वर्ल्ड कप जीतने की ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की थी। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स डिजिटल ने क्रिकेट की दुनिया के दिग्गजों की पाकिस्तान सरकार को लिखे खत की कॉपी देखी है। खत में पूर्व कप्तानों ने ये भी साफ किया है कि उन्होंने ये अपील खेल भावना और मानवता के नाते किया है। किसी कानूनी कार्यवाही में दखल देने की मंशा नहीं है। इन 14 हस्तियों के हैं दस्तखत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खत पर दस्तखत करने वालों में सुनील गावस्कर, कपिल देव, ग्रेग चैपल, बेलिंडा क्लार्क, माइकल अथर्टन, नासिर हुसैन, इयान चैपल, एलन बॉर्डर, माइकल ब्रियर्ली, डेविड गॉवर, किम ह्यूज, क्लाइव लॉयड, स्टीव वॉ और जॉन राइट शामिल हैं। दिलचस्प बात ये है कि इस खत पर दस्तखत करने वाले पूर्व कप्तानों में पाकिस्तान का कोई भी पूर्व कप्तान शामिल नहीं है। वैसे पिछले हफ्ते वसीम अकरम, वकार यूनुस, शाहिद अफरीदी समेत पाकिस्तान के कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने सोशल मीडिया पर ये गुजारिश की थी कि इमरान खान को उचित डॉक्टरी देखभाल दी जाए। क्रिकेट की हस्तियों का पाकिस्तान पीएम को लिखा पूरा खत ‘हम अधोहस्ताक्षरी राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के पूर्व कप्तान हैं और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और विश्व क्रिकेट की महान हस्ती इमरान खान के साथ हो रहे व्यवहार और उनकी जेल की स्थितियों को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। क्रिकेट के खेल में इमरान खान के योगदान की पूरी दुनिया तारीफ करती है। एक कप्तान के रूप में उन्होंने 1992 में पाकिस्तान को ऐतिहासिक विश्व कप जीत दिलाई। यह एक ऐसी जीत थी जो उनके कौशल, अटूट साहस और नेतृत्व पर आधारित थी, जिसने सीमाओं के पार कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। हममें से कई लोग उनके खिलाफ खेले हैं, उनके साथ मैदान साझा किया है या उनके खेल और करिश्मे को देखते हुए बड़े हुए हैं। वे खेल के अब तक के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों और कप्तानों में से एक हैं, जिन्हें खिलाड़ियों और प्रशंसकों से समान सम्मान मिला है। क्रिकेट के अलावा इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में भी सेवा की। राजनीतिक विचारों से इतर उन्हें अपने देश के सर्वोच्च पद पर लोकतांत्रिक रूप से चुने जाने का सम्मान प्राप्त है। उनकी सेहत को लेकर आ रही हालिया खबरें, खासकर हिरासत के दौरान उनकी आंखों की रोशनी कम होने की चिंताजनक रिपोर्ट और पिछले ढाई साल से जेल की स्थितियों ने हमें बहुत परेशान किया है। हम साथी क्रिकेटर होने के नाते ‘फेयर प्ले’ और सम्मान के मूल्यों को समझते हैं। हमारा मानना है कि इमरान खान जैसे कद के व्यक्ति के साथ वह गरिमा और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, जो एक पूर्व राष्ट्रीय नेता और वैश्विक खेल रत्न के योग्य हो। हम सम्मानपूर्वक पाकिस्तान सरकार से आग्रह करते हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इमरान खान को- अपनी पसंद के विशेषज्ञों से तुरंत और उचित चिकित्सा सुविधा मिले। जेल में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मानवीय और सम्मानजनक स्थितियां दी जाएं, जिसमें परिवार से नियमित मुलाकात शामिल हो। बिना किसी देरी के निष्पक्ष और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया का अधिकार मिले। क्रिकेट हमेशा देशों के बीच एक पुल रहा है। मैदान पर हमारा साझा इतिहास हमें याद दिलाता है कि मुकाबला स्टंप उखड़ने के साथ खत्म हो जाता है, लेकिन सम्मान हमेशा बना रहता है। इमरान खान ने अपने पूरे करियर में इसी भावना को जिया है। हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शालीनता और न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए इसका सम्मान करें। यह अपील हम किसी कानूनी कार्रवाई में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि खेल भावना और मानवता के नाते कर रहे हैं।’  

जनदर्शन में मिली त्वरित राहत: लगनी बाई को मिला राशन कार्ड

रायपुर. शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जन समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में  कोंडागांव जिले  के केशकाल विकासखंड के ग्राम गौरगांव निवासी मती लगनी बाई को त्वरित राहत मिली। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक के उपरांत कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने जनदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान लगनी बाई ने राशन कार्ड बनवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने उनके आवेदन पर खाद्य विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। खाद्य विभाग द्वारा उसी दिन आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर लगनी बाई को राशन कार्ड बनाकर प्रदान किया गया। राशन कार्ड प्राप्त होने से लगनी बाई और उनका परिवार अब नियमित रूप से शासकीय योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाले राशन सामग्री के साथ साथ अन्य योजनाओं का भी लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने इस त्वरित सहायता के लिए शासन प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अविनाश भोई, खाद्य अधिकारी  नवीनचंद वास्तव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

एसडीएम की मारपीट का आरोप, आदिवासी ग्रामीण की मौत के बाद सड़क पर उतरी कांग्रेस

बलरामपुर बलरामपुर जिले के कुसमी में एसडीएम द्वारा की गई मारपीट से आदिवासी किसान की मौत के मामले को लेकर दूसरे दिन भी माहौल गरमाया रहा। कुसमी बस स्टैंड में ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना देते हुए मृतक परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। इस दौरान शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। इस धरना प्रदर्शन में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। यह है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी ब्लॉक स्थित हंसपुर गांव में बॉक्साइट के अवैध खनन की जांच के लिए कुसमी एसडीएम करुण डहरिया पहुंचे थे। आरोप है कि वे निजी वाहन से कुछ निजी लोगों को साथ लेकर आए थे। सरना के पास उन्होंने तीन ग्रामीणों को रोककर अवैध खनन का आरोप लगाया और रॉड, डंडे तथा लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई की। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों को बेहोश होने तक पीटा गया। मारपीट में घायल ग्रामीणों को कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 62 वर्षीय रामनरेश राम की मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल 60 वर्षीय अजीत उरांव और 20 वर्षीय आकाश अगरिया का इलाज जारी है। यह घटना रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बिना किसी पूछताछ या जांच के एसडीएम और उनके साथ गए प्राइवेट लोगों ने ग्रामीणों पर आरोप लगा लाठी डंडों से हमला कर दिया। वहीं सूत्र यह भी बताते हैं कि मारपीट में ग्रामीणों के घायल होने के बाद एसडीएम ने सामरी के नायब तहसीलदार पारस शर्मा को भी फोन कर बुलवाया ताकि यह दिखाया जा सके की पूरा राजस्व अमला अवैध खनन की जांच के लिए गया हुआ था। खेत में पानी की सिंचाई करने के लिए गए थे ग्रामीण मामले में घायल ग्रामीण आकाश अगरिया एवं अजीत उरांव ने बताया कि वे गेहूं के खेत में पानी की सिंचाई करने गए हुए थे। लौटने के दौरान बिना किसी पूछताछ या जांच अवैध खनन का आरोप लगा उनकी पिटाई की गई। मामला सामने आने के बाद एसडीएम और उनके तीनों साथियों को पुलिस ने हिरास्त में ले लिया था और पूछताछ कर रही थी। पहले भी विवादों में रहे हैं एसडीएम एसडीएम करुण डहरिया पूर्व में भी विवादों में रह चुके हैं। जांजगीर जिले के चांपा में पदस्थापना के दौरान उन्होंने एक छात्र को तमाचा मार दिया था जिसके बाद छात्रों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रशिक्षण के दौरान गरियाबंद जनपद सीईओ रहने के दौरान नवंबर 2022 में उन्हें नलकूप खनन का बिल पास करने बीस हजार रुपये रिश्वत लेते एसीबी ने भी गिरफ्तार किया था। मामले में अब तक क्या-क्या हुई कार्रवाई मामले में घायल दो ग्रामीणों के बयान के आधार पर कुसमी एसडीएम करुण डहरिया सहित उनके साथ गए विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजिल कुमार यादव और सुदीप यादव के खिलाफ राजपुर थाने में धारा 103, 115(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एसडीएम समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिसके बाद सभी से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।

दिव्यांगजनों के लिये तहसील स्तर पर शिविर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अंत्येष्टि सहायता राशि बढ़ाने का प्रस्ताव

सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक सम्पन्न भोपाल दिव्यांगजनों के चिन्हांकन के लिये तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अंत्येष्टि सहायता योजना की राशि बढ़ाये जाने का प्रस्ताव सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई परामर्शदात्री समिति की बैठक में पारित किया गया। बैठक में समिति सदस्य विधायक सर्वश्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह, प्रीतम लोधी और भैरो सिंह बापू उपस्थित रहे। मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामाजिक रूप से कमजोर और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। योजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिये विधायकगणों को परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है। इनके महत्वपूर्ण सुझाव और अनुभवों के माध्यम से सामाजिक न्याय विभाग जरूरतमंदों को योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचा सकेगा। उन्होंने कहा कि जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भागीदारी के लिये आमजन को प्रेरित किया जाना आसान होता है। उन्होंने समिति सदस्यों से अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों और जिलों में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के नये प्रावधानों अनुसार आयोजित कराने की अपेक्षा की। नये प्रावधानों के तहत सामूहिक विवाह/निकाह योजना में न्यूनतम 11 और अधिकतम 200 जोड़ों को शामिल कर आयोजन किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष में इस योजना के अंतर्गत 54 हजार से अधिक जोड़ों का विवाह/निकाह करावाएं जा चुके हैं। बैठक में सदस्यों ने दिव्यांगजनों के चिन्हांकन के लिये तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाने तथा अंत्येष्टि सहायता योजना की राशि बढ़ाए जाने का सुझाव दिया। समिति द्वारा उक्त प्रस्ताव राज्य शासन को भेजने का निर्णय लिया गया। बैठक में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की कार्य-प्रणाली और प्रगति के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह योजना के अंतर्गत 551 हितग्राहियों को 11 करोड़ 2 लाख रुपये, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना में 736 हितग्राहियों को 13 करोड़ 38 लाख रुपये, दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण वितरण में 17 हजार 503 हितग्राहियों को 8 करोड 75 लाख रुपये के उपकरण प्रदान किये गये हैं। विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 53 लाख से अधिक हितग्राहियों को 325 करोड़ रुपये की राशि प्रतिमाह उनके खातों में अंतरित की जा रही है। साथ ही विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये अनेक योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं।  

शैक्षणिक उत्थान से ही श्रमिक परिवारों का होगा विकास : मंत्री पटेल

भोपाल  मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री  प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त  संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है। मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं। खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई। अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।  

परंपरागत बीज संरक्षण के लिये बीज सखी का हुआ राज्य स्तरीय प्रशिक्षण

भोपाल . आजीविका मिशन की पहल मध्‍यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अभिनव पहल करते हुए 27 जिलों की बीज सखियों को परंपरागत बीज संरक्षण एवं बीज बैंक स्थापना के सम्बन्ध में दो दिवसीय राज्‍य स्‍तरीय प्रशिक्षण का आयोजन क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में 9 एवं 10 फरवरी को आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में पद्म,  बाबूलाल दहिया जिला सतना द्वारा बीज संरक्षण के अनुभव साझा किए गए एवं बीज बैंक स्थापना पर व्याख्यान भी दिया गया। कर्नाटक राज्य की बी.बी. जान जो विगत 9 वर्षों से परंपरागत बीज संरक्षण का कार्य कर रही है, उनके द्वारा भी प्रतिभागियों को बीज संरक्षण के लिये प्रशिक्षण दिया। विगत 16 वर्षों से देशी बीजों का संरक्षण कर रहीं जिला डिंडोरी की सु फुलझरिया बाई द्वारा भी प्रशिक्षण में अपने अनुभव साझा किए एवं बीज संरक्षण के तरीके भी बताए। इसके अलावा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधियों ने भी जानकारी दी। मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी आजीविका मिशन मती हर्षिका सिंह की पहल पर प्रदेश में महिला समूहों की सदस्‍यों को प्राकृतिक खेती को बढावा देने के उद्देश्‍य से परंपरागत बीज संरक्षण के लिये जिलों में बीज बैंक की स्‍थापना के लिये काम शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रारंभिक चरण में हितग्राहियों का चयन, प्रशिक्षण आदि किया जाना है। इसी क्रम में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में प्रशिक्षणों का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण में देशी बीजों को महत्‍व देते हुये उनके फायदे के संबंध में प्रतिभागियों को बताया गया। देशी बीज स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार ढले होने के कारण कम पानी, खाद व कीटनाशकों में भी बेहतर पैदावार देते हैं। इनकी अन्‍य विशेषतायें भी हैं जैसे यह अन्‍य की तुलना में अत्यधिक पौष्टिक होते हैं, सूखा-रोग प्रतिरोधी होते हैं जो किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को किफायती व टिकाऊ बनाते हैं। उद्यानिकी विभाग से  दीनानाथ धोटे द्वारा देशी सब्जी बीज संरक्षण पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। कृषि विभाग से  जितेंद्र सिंह परिहार द्वारा भी प्राकृतिक खेती एवं परंपरागत बीज संरक्षण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। आजीविका मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक कृषि,  मनीष सिंह एवं युवा सलाहकार सु पायल कुमारी द्वारा बीज बैंक की कार्ययोजना एवं आगामी 6 माह की कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में जानकारी दी गई। आगामी समय में जिला स्तर पर बीज सखी के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे और बीज बैंक की स्थापना की जावेगी। परंपरागत बीज की विशेषताएँ आत्मनिर्भरता: किसान हर साल बीज खरीदकर खर्च करने के बजाय अपनी पिछली फसल से ही बीज सुरक्षित कर सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत बहुत कम हो जाती है। जलवायु-प्रतिरोधी – ये स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, इसलिए सूखे, अत्यधिक बारिश या कीटों का सामना करने की इनमें बेहतर क्षमता होती है। उच्च पौष्टिकता – देसी फसलों में संकर बीजों की तुलना में प्राकृतिक रूप से अधिक विटामिन, खनिज और पोषक तत्व होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं। पर्यावरण संरक्षण – इन बीजों में कम रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जल स्रोत भी सुरक्षित रहते हैं। जैव विविधता का संरक्षण: विभिन्न प्रकार की देसी किस्में पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखती हैं।  

1800 करोड़ घोटाले में नया ट्विस्ट, अजित पवार के बेटे बेदाग, दो अफसरों पर गिरेगी गाज

मुंबई महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को 1800 करोड़ रुपये के जमीन सौदे के मामले में क्लीन चिट मिल गई है। अजित पवार का बीते महीने ही प्लेन क्रैश में निधन हो गया था। इसके बाद राज्य में हुए नगर परिषद और पंचायत समिति के चुनावों में एनसीपी को बड़ी जीत मिली है। इस बीच अजित पवार के बेटे के लिए भी राहत भरी खबर आई है। इस मामले की जांच के लिए आईएएस अधिकारी विकास शंकर खरागे के नेतृत्व में जांच समिति गठित हुई थी। इस पैनल ने 1000 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें पार्थ पवार को क्लीन चिट दी गई है, जबकि जमीन सौदे की प्रक्रिया में लापरवाही के लिए दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ ऐक्शन की सिफारिश की गई है। इस मामले में आरोप था कि पुणे के एक पॉश इलाके में करीब 1800 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन महज 300 करोड़ रुपये में खरीदी गई। इस जमीन सौदे में अजित पवार के बेटे का नाम भी आया था। इस केस की जांच करने वाले अधिकारी विकास शंकर खरागे फिलहाल राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस केस की जांच रिपोर्ट विभाग के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी। अब इस रिपोर्ट को सीएम देवेंद्र फडणवीस के समक्ष रखा जाना है। यह मामला कुल 41 एकड़ जमीन का है, जो पुणे के तेजी से विकसित इलाके मुंधवा की है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में सीधे तौर पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि पार्थ पवार ने लैंड डील में कोई आपराधिक गलती की थी। इसलिए उन्हें क्लीन चिट दी जाती है। हालांकि इस रिपोर्ट में कुछ प्रक्रिया से जुड़ी खामियां पाई गई हैं। इसके लिए दो सरकारी अधिकारियों सूर्यकांत येवाले और रविंद्र तारू के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। येवाले फिलहाल हवेली तहसील के तहसीलदार हैं। इसके अलावा रविंद्र असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं। दोनों ही अधिकारियों को इस लैंड डील पर सवाल उठने के बाद सस्पेंड कर दिया गया था और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। 1800 करोड़ की डील और 300 करोड़ का सौदा, किसके नाम पर इस मामले में विवाद यह था कि जमीन का मूल्य 1800 करोड़ रुपये बताया गया था, जबकि इसकी खरीद सिर्फ 300 करोड़ में हुई। यह डील Amedia Enterprises LLP के नाम से हुई थी। इस फर्म में मुख्य हिस्सेदारी पार्थ पवार की ही है, जबकि उनके साथ चचेरे भाई दिग्विजय भी इसमें हिस्सेदार हैं। यही नहीं आरोप यह भी लगे थे कि इस डील में स्टांप ड्यूटी भी नहीं वसूली गई, जो 21 करोड़ रुपये बनती थी। पार्थ पवार खुद राजनीति में बहुत दखल नहीं रखते हैं, लेकिन उनके पिता डिप्टी सीएम थे। इसके चलते वह भी आरोपों के घेरे में आए थे।  

कोर्ट का अहम निर्णय: बिरनपुर हिंसा मामले में सभी 17 आरोपी बरी, पूरी रिपोर्ट पढ़ें

बेमेतरा छत्तीसगढ़ में आज की सबसे बड़ी खबर बेमेतरा से निकलकर सामने आई. बेमेतरा जिले के बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में जिला न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है. जिला न्यायालय ने जिन आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है, उनमें चेचानमेटा बिरनपुर थाना निवासी डकेश्वर सिन्हा उर्फ हरिओम पिता गौतम सिन्हा (28 साल), ग्राम खैरी, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी मनीष वर्मा पिता नंदकुमार वर्मा (23 साल), कोरवाय थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी समारू नेताम पिता जेठूराम नेताम (43 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी पूरन पटेल पिता खेमकुमार पटेल (19 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी राजकुमार निषाद पिता संजय निषाद (19 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी भोला निषाद पिता श्रवण निषाद (23 साल), पेंण्डरवानी, थाना गण्डई जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई निवासी दूधनाथ साहू पिता कमल साहू (27 साल), पेण्डरवानी, थाना गण्डई जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई निवासी अरुण रजक पिता मनहरण रजक (18 साल), कोरवाय, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी चंदन साहू पिता देवकुमार साहू (20 साल), कोरवाय, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी होमेन्द्र नेताम पिता नीलकंठ नेताम (25 साल), कोगियाखुर्द, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा निवासी टाकेन्द्र साहू पिता परसराम साहू (22 साल), कोगियाखुर्द, थाना परपोडी, जिला बेमेतरा निवासी राम निषाद पिता हिरेश निषाद (19 साल) मासुलगोदी, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा निवासी संजय कुमार साहू पिता नेमराम साहू (25 साल), निवासी कोरवाय, थाना साजा, जिला बेमेतरा निवासी चिंताराम साहू पिता स्व. बिरझुराम साहू (68 साल), निवासी कोगियाखुर्द, थाना परपोडी, जिला बेमेतरा निवासी लोकेश साहू पिता चतुरराम साहू (23 साल) निवासी कोगियाखुर्द, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा वरूण साहू पिता रामकुमार साहू (18 साल 3 माह) और मासुलगोदी, थाना परपोडी जिला बेमेतरा निवासी राजेश साहू पिता बल्लु साहू (23 साल) शामिल हैं. बिरनपुर मामले में साजा थाना में कुल 173 लोगों के विरूद्ध दर्ज धारा 302, 147, 148, 149, 153 (3) भादवि तथा 201, 109, 34 भादवि के अपराध में अपर सत्र न्यायाधीश साक्षी दिक्षित की न्यायालय में विचारण किया गया है. 64 अभियोजन साक्षियों का कथन के बाद आज संदेह का लाभ देकर न्यायालय से सभी 17 लोगों को छोड़ दिया गया है. क्या था बिरनपुर हिंसा मामला? बिरनपुर हिंसा मामला शुरू हुआ था दो बच्चों की मामूली लड़ाई से, जो देखते-देखते हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसक झड़प में बदल गया. 8 अप्रैल 2023 को साजा विधायक ईश्वर साहू के 22 वर्षीय पुत्र भुनेश्वर साहू की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद तनाव इतना बढ़ा कि 10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया. गांव में आगजनी हुई और मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) व उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की भी हत्या हो गई. प्रशासन ने धारा 144 लागू किया, जो करीब दो सप्ताह तक जारी रहा. पुलिस ने शुरुआत में 12 लोगों को आरोपी बनाया था, लेकिन CBI ने अपनी जांच में 6 नए आरोपियों का उल्लेख किया है.

राम मंदिर उद्घाटन के बाद अयोध्या की आर्थिक स्थिति में ऐतिहासिक सुधा

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में आया ऐतिहासिक उछाल राम मंदिर पर आईआईएम लखनऊ की विस्तृत केस स्टडी ने साबित किया प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पर्यटन, निवेश, रोजगार और राजस्व में हुई व्यापक वृद्धि अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का किया गया तुलनात्मक विश्लेषण, मंदिर निर्माण से पूर्व पवित्र तीर्थस्थान तक सीमित थी अयोध्या की पहचान, प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में आया अभूतपूर्व उछाल पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000-25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान, आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में हुआ तीव्र विस्तार मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में हुआ ₹1 लाख करोड़ से अधिक का व्यापारिक कारोबार, महत्वपूर्ण रही अयोध्या की हिस्सेदारी, प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को मिली नई गति, 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे हुए स्थापित प्रतिष्ठित होटल चेन्स ने अयोध्या में विस्तार योजनाओं को बढ़ाया आगे, ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग में चार गुना तक दर्ज की गई वृद्धि, स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में तेज उछाल से कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला लगभग 6,000 एमएसएमई स्थापित हुए, अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का अनुमान, छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंची, रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तीव्र वृद्धि लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ पर भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) ने अपनी मुहर लगाई है। आईआईएम लखनऊ की ताजा अध्ययन रिपोर्ट “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) बताती है कि राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को मिला है। अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह दर्शाया गया है कि धार्मिक अवसंरचना, यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक बन सकती है। गौरतलब है कि 2017 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद सीएम योगी ने टेंपल इकॉनमी को तेज गति दी और अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ-साथ आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर देकर आर्थिक समृद्धता के रास्ते खोल दिए। मंदिर से पहले दायरे में सिमटी अयोध्या की अर्थव्यवस्था अध्ययन के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की पहचान मुख्यतः एक पवित्र तीर्थस्थान तक ही सीमित थी, जहां आगंतुकों की वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास ठहर जाती थी। स्थानीय बाजार छोटे पैमाने पर संचालित होते थे और अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400–₹500 के बीच सीमित थी, जिससे आर्थिक गतिविधि का दायरा संकुचित बना रहता था। राष्ट्रीय स्तर की होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति लगभग नगण्य थी, रेलवे स्टेशन बुनियादी सुविधाओं तक सीमित था और हवाई अड्डे का अभाव क्षेत्र की कनेक्टिविटी को प्रभावित करता था। रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन, एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुका था। पर्यटन से होने वाला राजस्व राज्य की व्यापक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान नहीं दे पा रहा था और अचल संपत्ति बाजार में भी ठहराव की स्थिति दिखाई देती थी। कुल मिलाकर, अयोध्या की आर्थिक संरचना पारंपरिक तीर्थ-आधारित गतिविधियों तक सीमित थी, जिसमें विस्तार और निवेश की संभावनाएं स्पष्ट रूप से अविकसित थीं। प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल अध्ययन के अनुसार, जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की आर्थिक तस्वीर ने तेजी से करवट ली। रिपोर्ट बताती है कि पहले ही छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन दर्ज किया गया, जिसने स्थानीय बाजार, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया। अब अयोध्या में वार्षिक स्तर पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है, जो अयोध्या को देश के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्रों की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा करती है। यहां लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं, जिनका प्रभाव केवल आधारभूत ढांचे तक सीमित नहीं, बल्कि निवेश और सेवा क्षेत्र तक फैला हुआ है। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी व्यापक निवेश हो रहा है। इसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण के कार्य प्रगति पर हैं। सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा जैसी पहलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे अयोध्या को “मॉडल सोलर सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में मिली नई पहचान आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000-25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में तीव्र विस्तार हुआ है। साथ ही, अयोध्या ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में नई पहचान प्राप्त की है, जहां प्रवासी भारतीय, शोधकर्ता और वैश्विक श्रद्धालु आकर्षित हो रहे हैं।  आतिथ्य क्षेत्र में निवेश का नया दौर अध्ययन बताता है कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही। प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को नई गति दी है। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए हैं, जबकि देश-विदेश की प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं ताज होटल्स, मैरियट इंटरनेशनल और विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स ने अयोध्या में अपने विस्तार की योजनाएं घोषित की हैं। ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर अयोध्या के लिए बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में तेज उछाल आया है, जिससे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। उद्यमिता और रोजगार पर भी पड़ा प्रभाव आईआईएम रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक सक्रियता का प्रभाव उद्यमिता और रोजगार सृजन में भी स्पष्ट है, विशेषकर युवाओं … Read more

कम कीमत में दमदार फीचर्स: ₹7499 में लॉन्च हुआ Lava Bold N2, फ्री सर्विस का फायदा

नई दिल्ली Lava Bold N2 को ग्राहकों के लिए भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया गया है. इस बजट स्मार्टफोन को IP64 रेटिंग (डस्ट और स्प्लैश रेजिस्टेंस) के साथ उतारा गया है. 5000 एमएएच की दमदार बैटरी से पैक्ड इस फोन के पिछले हिस्से में 13 मेगापिक्सल कैमरा सेंसर मिलता है. इस फोन को ब्लैक और व्हाइट दो रंगों में खरीदा जा सकता है, कंपनी की तरफ से इस फोन के साथ फ्री डोर स्टेप सर्विस भी ऑफर की जा रही है. कंपनी का दावा है कि ये हैंडसेट ब्लोटवेयर या ऐड्स के साथ नहीं आता है और यूजर्स को क्लीन Android एक्सपीरियंस मिलता है. सिक्योरिटी के लिए फोन के साइड में फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है जिसे पावर बटन में इंटीग्रेट (शामिल) किया गया है. Lava Bold N2 Price in India भारत में इस लेटेस्ट लावा स्मार्टफोन की कीमत 7,499 रुपए तय की गई है, इस दाम में आप लोगों को इस फोन का 4GB रैम और 64GB स्टोरेज मिलेगी. उपलब्धता की बात करें तो इस फोन की बिक्री 27 फरवरी से Amazon पर ग्राहकों के लिए शुरू होगी. इस प्राइस रेंज में ये फोन MOTOROLA g06 power, Samsung Galaxy F07, POCO C71 और Ai+ Pulse जैसे स्मार्टफोन्स को कांटे की टक्कर देगा. Lava Bold N2 Specifications     स्क्रीन: Android 15 Go पर काम करने वाले इस डुअल सिम स्मार्टफोन में 6.75 इंच एचडी+ रिजॉल्यूशन डिस्प्ले है जो 90Hz तक रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है.     चिपसेट: स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए इस हैंडसेट में Unisoc SC9863A प्रोसेसर दिया गया है.     रैम और स्टोरेज: इस फोन में 4 जीबी रैम के साथ 4 जीबी वर्चुअल रैम सपोर्ट भी है, इसका मतलब ये हुआ कि इस बजट फोन में आपको 8 जीबी रैम का फायदा मिलेगा. इसके अलावा ये फोन 64 जीबी की इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है.     कैमरा सेटअप: इस फोन के पिछले हिस्से में 13 मेगापिक्सल डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है, सेल्फी के लिए फोन के फ्रंट में 5 मेगापिक्सल कैमरा सेंसर मिलेगा.     बैटरी: 5000 एमएएच की बैटरी फोन में जान फूंकने का काम करती है.  

अजित पवार की मौत के बाद ताबड़तोड़ निर्णय? 75 स्कूलों के दर्जे पर फडणवीस का हस्तक्षेप

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को उन 75 विद्यालयों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने का आदेश दिया है, जिनके बारे में खबरें थीं कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद इन विद्यालयों को मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने में कथित अनियमितता की विस्तृत जांच करने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। अजित पवार की मौत के 9 मिनट बाद ही जारी हुआ पहला सर्टिफिकेट अधिकारियों के अनुसार, 28 जनवरी से दो फरवरी के बीच 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। बताया जाता है कि पहला प्रमाण पत्र 28 जनवरी को दोपहर तीन बजकर नौ मिनट पर जारी किया गया था, उसी दिन अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उस दिन सात संस्थानों को स्वीकृति मिली और अगले तीन दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 हो गई। जांच के आदेश उस समय अजित पवार अल्पसंख्यक विकास विभाग का कार्यभार संभाल रहे थे। यह विभाग अब सुनेत्रा पवार के अधीन है, जिन्होंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। सरकार में सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि इस अवधि के दौरान जारी की गई सभी स्वीकृतियों, अनुदानों और प्रमाणपत्रों को व्यापक समीक्षा लंबित रहने तक रोक दिया जाए। स्वीकृतियां कैसे दी गईं, उचित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं, और क्या अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने पर पहले लगाए गए किसी भी प्रतिबंध को औपचारिक रूप से हटाया गया था, यह पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने कहा कि शिक्षण संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है और उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इस घटना को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया और उच्च स्तरीय जांच और सीआईडी ​​जांच सहित जवाबदेही की मांग की। अजित पवार पर लिखे लेख पर बवाल एनसीपी (एसपी) और एनसीपी के नेताओं ने दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया के साथ-साथ अजित पवार पर लिखे गये एक लेख को लेकर एक-दूसरे पर शनिवार को निशाना साधा। एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने जहां एक ओर लेख के लिए माफी की मांग करते हुए दावा किया कि इसमें पवार की मृत्यु के बाद भी उन्हें बदनाम किया गया है, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) की राज्य इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे ने कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी ने विलय के मुद्दे को बंद कर दिया है। शशिकांत शिंदे ने पार्टी के मुखपत्र ‘राष्ट्रवादी’ में यह लेख लिखा था।

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