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अयोध्या में बनेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, भूमि हस्तांतरण को योगी कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत बनाया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार अयोध्या के चक नंबर-4, मोहल्ला वशिष्ठ कुंड, परगना हवेली अवध, तहसील सदर में स्थित नजूल भूमि के सात गाटा नंबर (1026, 1027, 1029, 1030, 1031, 1033 मि. और 1035) कुल लगभग 2500 वर्गमीटर क्षेत्रफल को अयोध्या म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पक्ष में हस्तांतरित किया जाएगा। जिलाधिकारी अयोध्या द्वारा नगर आयुक्त के अनुरोध पर यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार यह भूमि कुछ शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन नगर निगम अयोध्या को निःशुल्क आवंटित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इस भूमि पर आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर खेल सुविधाओं को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं को बेहतर खेल अवसंरचना उपलब्ध कराना है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह भूमि हस्तांतरण अपवाद स्वरूप किया जा रहा है और इसे भविष्य में उदाहरण के रूप में नहीं माना जाएगा।

वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना से जुड़ेगी इको-टूरिज्म वैन सेवा, पर्यटकों को मिलेगा स्थानीय व्यंजनों का स्वाद

लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) जल्द ही पर्यटन को नई दिशा देने वाली अनूठी पहल शुरू करने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए इको टूरिज्म वैन सेवा शुरू की जाएगी। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस क्रम में पहले चरण में मथुरा, वाराणसी और लखनऊ में इस सेवा की शुरुआत होगी। इन शहरों के फीडबैक के आधार पर इको टूरिज्म वैन सेवा को राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा। यूपीएसटीडीसी की इको टूरिज्म वैन सेवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत पर्यटन की अवधारणा को साकार करेगी। इससे एक ओर पर्यटकों को अनोखा अनुभव मिलेगा, तो वहीं दूसरी ओर यह सेवा कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में भी सार्थक कदम साबित होगी। मिलेगा ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता का वर्चुअल अनुभव यूपीएसटीडीसी पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इको टूरिज्म वैन सेवा की शुरुआत कर रहा है। यह पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने के साथ पर्यटन यात्रा का अनोखा अनुभव भी प्रदान करेगी। इको वैन में आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनके माध्यम से पर्यटक यात्रा के दौरान ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता का वर्चुअल अनुभव ले सकेंगे। साथ ही इको टूरिज्म वैन में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। यह पर्यटकों की सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा। वहीं टिकट बुकिंग के लिए डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी दी जाएगी। वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना के साथ ग्रामीण पर्यटन स्थलों से भी जोड़ेगी यूपीएसटीडीसी इको-टूरिज्म वैन सेवा के साथ मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना को भी जोड़ेगा। इसके माध्यम से पर्यटकों को पर्यटन क्षेत्र के स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। साथ ही क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजन बनाने वाले रेस्टोरेंट्स और रसोइयों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह वैन पर्यटकों को इको फ्रेंडली तरीके से विभिन्न जिलों के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक ले जाएंगी। इससे रास्ते में पड़ने वाले ग्रामीण और कम ज्ञात पर्यटन स्थलों में भी पर्यटन गतिविधियों का विकास होगा। यूपीएसटीडीसी की यह पहल न केवल पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होगी। योगी सरकार की इस नई रणनीति से उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

टीआई मेडिकल्स 215 करोड़ रुपये का निवेश कर स्थापित करेगी चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाई

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस निर्माण इकाई स्थापित करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत टीआई मेडिकल्स प्रा लि को भूमि सब्सिडी प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। कंपनी द्वारा गौतमबुद्ध नगर स्थित यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) के मेडिकल डिवाइस पार्क क्षेत्र में 4.48 हेक्टेयर भूमि पर करीब 215.20 करोड़ रुपये के निवेश से चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की एफडीआई, एफसीआई और फॉर्च्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत प्रस्तावित है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार कंपनी को अनुमन्य सब्सिडी के तहत 14.77 करोड़ रुपये की राशि प्रतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाएगी। यह राशि केंद्र सरकार की मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अंतर्गत पहले से प्राप्त सब्सिडी को समायोजित करने के बाद दी जाएगी। इस निवेश से प्रदेश में मेडिकल डिवाइस निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह पहल राज्य को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगी। इस परियोजना से संबंधित प्रस्ताव पर पहले विभिन्न स्तरों पर विचार किया गया था। उत्तर प्रदेश की एफडीआई, एफसीआई एवं फॉर्च्यून ग्लोबल 500/फॉर्च्यून इंडिया 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत प्राधिकृत समिति की 5 जुलाई 2024 को हुई बैठक में परियोजना को मंजूरी दी गई थी और कंपनी को 22 जुलाई 2024 को पात्रता प्रमाणपत्र भी जारी किया गया। बाद में 15 मई 2025 को हुई इम्पावर्ड कमेटी की बैठक में सब्सिडी से जुड़े बिंदुओं पर विचार किया गया। मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अंतर्गत कंपनी को पहले से केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी प्राप्त हो चुकी है। इसी आधार पर एफडीआई नीति के तहत अनुमन्य कुल सब्सिडी ₹41.52 करोड़ में से पहले प्राप्त सब्सिडी घटाकर शेष ₹14.77 करोड़ की राशि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा कंपनी को प्रतिपूर्ति के रूप में देने का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे अब मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिल गई है।

झांसी प्लांट की क्षमता 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक बढ़ेगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव मंजूर किया गया। इसके तहत बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत जनपद बांदा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के नए डेयरी प्लांट की स्थापना और झांसी में पहले से स्थापित 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लांट का विस्तार कर उसे 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इन परियोजनाओं के सिविल और मैकेनिकल कार्य टर्न-की आधार पर कराने के लिए इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी लि. को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। कैबिनेट ने इस कंपनी को नियमानुसार सेंटेज चार्ज देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिसका व्यय राज्य सरकार अपने स्रोतों से वहन करेगी। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है और प्रदेश में दुग्ध उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बुंदेलखंड क्षेत्र में डेयरी प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने से दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का बेहतर और बाजार आधारित मूल्य मिल सकेगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र में दूध के खराब होने की समस्या कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और बुंदेलखंड में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही यह पहल प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में भी सहायक मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। माननीय उच्च न्यायालय की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की जाएगी। इसके तहत भर्ती, कोटा और चयन प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। संशोधन के अनुसार भर्ती के स्रोत से जुड़े नियम-5, कोटा से संबंधित नियम-6, चयन प्रक्रिया से जुड़े नियम-18, पदोन्नति से संबंधित नियम-20, नियुक्ति से जुड़े नियम-22 और परिशिष्ट-1 में बदलाव किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह पदोन्नति श्रेष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर तथा उपयुक्तता परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को दी जाएगी। वहीं सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें वही सिविल जज शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कम से कम सात साल की सेवा पूरी की हो। इसके अलावा अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।

सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश भर में बुनियादी सुविधाओं का हो रहा विस्तार, आम जनमानस की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा निस्तारण

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों को साकार करने में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। आईजीआरएस से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में आईजीआरएस की फरवरी की रिपोर्ट में प्रदेशभर में रामपुर ने शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि शाहजहांपुर और बाराबंकी ने बराबर अंक प्राप्त कर दूसरा तो जालौन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की हर माह की जाती है समीक्षा आईजीआरएस हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और जन शिकायत की सुनवाई की रिपोर्ट जारी करता है। आईजीआरएस प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा करता है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। आईजीआरएस की फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने मानक पूर्णांक 140 में पूरे 140 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है।  रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि आईजीआरएस की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि रामपुर ने आईजीआरएस और सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट में पहला स्थान प्राप्त किया है।   टॉप टेन जिलों में जालौन, बरेली, श्रावस्ती और हाथरस ने बनाई जगह शाहजहांपुर जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले में विकास परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और तय समय सीमा में पूरा करने के लिए हर हफ्ते अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाती है। साथ ही आम जनमानस की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। उनकी समस्या के निस्तारण के संतुष्टिपूर्ण फीडबैक पर ही आईजीआरएस की रिपोर्ट जारी की जाती है। ऐसे में आईजीआरएस की फरवरी की रिपोर्ट में शाहजहांपुर पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप आगे भी लगातार प्रयास रहेगा कि आम जनमानस की शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।  इसी तरह शाहजहांपुर ने 137 अंक और बाराबंकी ने भी 137 अंक हासिल कर दूसरा, जालौन ने 136 अंक प्राप्त कर तीसरा और बरेली के साथ श्रावस्ती और हाथरस ने बराबर-बराबर 135 अंक हासिल कर चौथा स्थान प्राप्त किया है। वहीं बलिया, आजमगढ़ और भदोही बराबर-बराबर 134 अंक हासिल कर पांचवें पायदान पर हैं। वहीं टॉप टेन जिलों में अंबेडकरनगर, प्रयागराज, कन्नौज, पीलीभीत और हमीरपुर ने जगह बनाई है।

परमिट व टैक्स से मुक्त रहेंगी ग्राम परिवहन योजना में अनुबंधित बसें: दयाशंकर सिंह

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट बैठक हुई। वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए, जिसमें से 30 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने स्वीकृति दी। योगी सरकार ने ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी। इस योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। पत्रकार वार्ता में मौजूद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए ये बसें सुबह 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी। इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। कई गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसें टर्न होने में परेशानी होती है। 12,200 में से 5000 ऐसे गांव हैं, जहां बड़ी बसें टर्न नहीं हो सकतीं। इसलिए ये छोटी बसें होंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी। परिवहन मंत्री ने बताया कि सुबह 10 से शाम चार बजे तक इन बसों को डायवर्ट करेंगे। इसके बाद ये बसें दूरी के हिसाब से अधिकतम शाम 8 बजे तक गांव में पहुंच जाएंगी। इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व क्लीनर आसपास गांव के लोग ही होंगे, जिससे रात में गांव में रुकने और सुबह आने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। इन बसों की औसत आयु 15 वर्ष रहेगी, लेकिन पहले 10 साल के लिए ही इन्हें परिचालन की इजाजत दी जाएगी।  परिवहन मंत्री ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी स्थानीय स्तर पर किराया निर्धारण करेगी। इसका टिकट भी सस्ता रहेगा। इन्हें परमिट व टैक्स की आवश्यक्ता नहीं होगी। इससे बस चलाने वालों को लाभ होगा। सरकार का उद्देश्य आमजन को बेहतर सुविधा मुहैया कराना है। इस योजना के तहत प्रत्येक आवेदक (जिस ब्लॉक के लिए उसने आवेदन किया है) को समस्त ग्राम पंचायत/रूट पर अपने विवेकानुसार वाहन संचालन करने तथा फेरों की संख्या का अधिकार होगा। बस संचालक ब्लॉक की प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन कम से कम दो बार वाहन की सेवा प्रदान करेगा।  इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवेदन की स्क्रीनिंग 15 दिन में हो जाएगी। आवेदक के सफल चयन के बाद वाहन उपलब्ध कराने के लिए 15 दिन होंगे तथा निर्धारित प्रक्रिया को 45 दिनों में पूर्ण कर लिया जाएगा। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं सफल आवेदन का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जायेगा। उक्त कमेटी द्वारा सेवा प्रदाताओं का चयन करते हुए मार्ग निर्धारण को अंतिम रूप दिया जाएगा। उक्त योजना के क्रियान्वयन एवं निगरानी का दायित्व सम्बन्धित क्षेत्रीय प्रबन्धकों का होगा, जो नियमित रूप से (न्यूनतम मासिक) आयुक्त को कार्य प्रगति से अवगत कराएंगे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर बड़ी उपलब्धि, एयरोड्रम लाइसेंस सीएम योगी को दिया गया

इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया बढ़ेगी आगे सुरक्षा मंजूरी के बाद जल्द तय होगी उद्घाटन तिथि, पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता लखनऊ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया । इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

आगरा के दंपती रोजाना कर रहे 5 KM परिक्रमा, कान्हा की भक्ति में लोटपोट होकर नाप रहे ब्रज

आगरा. ब्रज चौरासी कोस में कान्हा का माधुर्य और दिव्यता का आकर्षण भक्तों को ब्रज रज में लोटपोट के लिए मजबूर कर रहा है। कान्हा की भक्ति में वशीभूत आगरा के दंपती ब्रज चौरासी कोस की लोटपोट होकर परिक्रमा कर रहे हैं। आगरा जिले में गांव नगला परमाल (अकोला) में रहने वाले पूर्व शिक्षक अमरसिंह और उनकी पत्नी रामवती इन दिनों कान्हा की भक्ति में लीन हैं। जिसमें वह बृज चौरासी कोस की परिक्रमा लोटपोट होकर कर रहे हैं। इन्हें देख रास्ता में लोग नतमस्तक हो रहे हैं। पत्नी आगे झाड़ू लगाते हुए साथ चल रही हैं। पति के थकने पर वह भी लोटपोट होकर परिक्रमा करती है। दंपती ने कहा, जीवन कान्हा को समर्पित सोमवार को सुरीर होकर लोटपोट परिक्रमा देते जा रहे दंपती ने बताया कि उन्होंने अपना जीवन कान्हा को समर्पित कर रखा है। परिवार में तीन बहू और बेटा है, वो सभी सरकारी नौकरी में है। परिक्रमा मार्ग पर तमाम झंझावतों को झेलते जा रहे दंपती के चेहरे पर थकावट अथवा परेशानी नाम की कोई शिकन नहीं है। एक दिन में 5 किलोमीटर का सफर तय उन्होंने बताया कि लोटपोट होकर परिक्रमा में वह एक दिन में पांच किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। उन्होंने छह फरवरी को गोवर्धन के समीप से बृज चौरासी कोस परिक्रमा शुरू की है। अब तक वह सुरीर तक पहुंचे हैं।

पूर्व IPL खिलाड़ी अमित पर मॉडल पत्नी ने कराई FIR, ‘भूखा रखा, शराब पीकर पीटा’

कानपुर. अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में पूर्व आईपीएल खिलाड़ी अमित मिश्रा के खिलाफ उनकी पत्नी ने परिवाद दाखिल किया है। इसमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट व खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप लगाए हैं। मामले की सुनवाई 27 मार्च को होगी। फीलखाना निवासी गरिमा तिवारी ने पति अमित मिश्रा, सास बीना मिश्रा, ससुर शशिकांत मिश्रा, जेठ अमर, जेठानी रितु, ननद स्वाती के खिलाफ परिवाद दाखिल किया है। चार साल पहले हुई थी शादी इसमें कहा है कि 26 अप्रैल 2021 को अमित मिश्रा से शादी हुई थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन दहेज में एक होंडा सिटी कार व 10 लाख रुपये की मांग कर प्रताड़ित करते थे। मॉडलिंग से जो भी पैसे मिलते थे, अमित उसे छीन लेता था। आए दिन शराब पीकर गाली-गलौज व मारपीट करता। अमित मिश्रा पर मारपीट का आरोप भूखा रखता और तलाक की धमकी देता था। इस कारण वह अवसाद में रहने लगी और मॉडलिंग का काम भी छूट गया। ससुरालवालों के उकसाने पर उसने खुदकुशी की कोशिश भी की थी। दहेज की मांग पूरी न होने के कारण मार्च 2024 में ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया था। गरिमा के अधिवक्ता करीम सिद्दीकी ने बताया कि गरिमा ने फीलखाना थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया। कार्रवाई न होने पर कोर्ट में परिवाद दाखिल किया है।

घरेलू पर नए नियम लागू, कामर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी रुकी

लखनऊ. मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और युद्ध की परिस्थितियों ने एलपीजी (LPG) गैस की उपलब्धता पर संकट के बादल गहरा दिए हैं। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच पेट्रोलियम कंपनियों ने बड़े फैसले लिए हैं। ताजा निर्देशों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सामान्य आपूर्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किग्रा) के कोटे में भी 20 से 25 फीसदी तक की कटौती का निर्देश दिया गया है। कामर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक के कारण शादी विवाह वाले घरों में संकट गहरा गया है। सोमवार को पेट्रोलियम कंपनियों के राज्य स्तरीय अधिकारियों और गैस एजेंसी संचालकों के बीच हुई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में इन बंदिशों की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि युद्ध के चलते बिगड़ रहे वैश्विक हालातों को देखते हुए गैस की राशनिंग अनिवार्य हो गई है। अब होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और पटरी कारोबारियों को 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल सिलेंडर आसानी से नहीं मिल सकेगा। इसकी आपूर्ति पूरी तरह रोक दी गई है। हालांकि, मानवीय आधार पर केवल अस्पतालों और छात्रावासों (Hostels) को ही विशेष अनुमति के साथ कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से होटल और खान-पान के कारोबार से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ना तय है। घरेलू गैस के लिए ’12 सिलेंडर’ का सख्त नियम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी अब सिलेंडर पाना आसान नहीं होगा। पेट्रोलियम कंपनियों ने ‘एक वित्तीय वर्ष में 12 सिलेंडर’ के पुराने नियम को अब कड़ाई से लागू कर दिया है। जिन उपभोक्ताओं ने चालू वित्तीय वर्ष में अपने कोटे के 12 सिलेंडर ले लिए हैं, उनकी नई बुकिंग पर सिस्टम ने ऑटोमेटिक रोक लगा दी है। इसके अलावा, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब केवल टोल-फ्री नंबर और आधिकारिक मोबाइल ऐप के जरिए ही बुकिंग स्वीकार की जा रही है। सिलेंडर की डिलीवरी के समय ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाला ओटीपी (OTP) अनिवार्य कर दिया गया है। बिना ओटीपी वेरिफिकेशन के सिलेंडर की डिलीवरी नहीं की जाएगी। अधिकारियों का पक्ष और आगामी समीक्षा इस संकट पर स्थानीय अधिकारी फिलहाल संभलकर बयान दे रहे हैं। गोरखपुर के जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) रामेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कमर्शियल सिलेंडर पर रोक की लिखित पुष्ट सूचना अभी कंपनियों से प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मंगलवार को पेट्रोलियम कंपनियों और एजेंसी संचालकों की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में गैस के स्टॉक, राशनिंग और आपूर्ति की खामियों की समीक्षा की जाएगी ताकि आम जनता को कम से कम परेशानी हो।

होटल की तरह ऑनलाइन बुकिंग शुरू, यूपी के सर्किट हाउस में ठाठ से रहेगी जनता

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पर्यटन और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक होटल की तर्ज पर राज्य के 21 सर्किट हाउसों और 334 गेस्ट हाउसों (निरीक्षण भवनों) में ठहरने के लिए ऑनलाइन बुकिंग कर सकेगा। यह व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी बनाई गई है, जिससे बिचौलियों और सिफारिशी संस्कृति पर लगाम लगेगी। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी नई नियमावली के अनुसार, इन सरकारी आवासों में कुछ कमरों को वीआईपी दौरों और आपातकालीन सरकारी कार्यों के लिए आरक्षित रखा जाएगा। हालांकि, शेष कमरे आम नागरिकों के लिए ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come, First Served) के आधार पर खुले रहेंगे। इससे उन यात्रियों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी जो सुरक्षित और सरकारी मानकों वाली जगह पर ठहरना चाहते हैं। बुकिंग प्रक्रिया: एक क्लिक पर कमरा उपलब्ध इच्छुक आवेदक आधिकारिक वेबसाइट https://www.guesthouse.uppwd.gov.in पर जाकर अपनी बुकिंग सुनिश्चित कर सकते हैं। सरकार ने एक ‘एकीकृत वेब-आधारित सर्किट हाउस सूचना प्रणाली’ विकसित की है। यहाँ लोग रियल टाइम उपलब्धता डैशबोर्ड देख सकेंगे, जिससे उन्हें तुरंत पता चल जाएगा कि किस जिले के गेस्ट हाउस में कितने कमरे खाली हैं। विशेष परिस्थितियों में, प्रशासन की अनुमति से ‘ऑन-द-स्पॉट’ (तुरंत) बुकिंग भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा सकेगी। भुगतान और सुरक्षा मानक ऑनलाइन बुकिंग के समय आवेदक को अपना सरकारी पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी) अपलोड करना अनिवार्य होगा। बुकिंग प्रक्रिया पूरी होने और ऑनलाइन भुगतान के बाद आवेदक को उनके रजिस्टर्ड ई-मेल और मोबाइल नंबर पर एसएमएस (SMS) के जरिए रसीद प्राप्त होगी। राजस्व की निगरानी के लिए एक ‘डिजिटल लेजर’ बनाया गया है, जहाँ हर लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। जिलाधिकारी के पास होगा विशेष अधिकार चूंकि ये भवन मुख्य रूप से सरकारी कार्यों के लिए हैं, इसलिए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी जिले में अचानक वीआईपी दौरा या प्रशासनिक आवश्यकता पड़ती है, तो संबंधित जिलाधिकारी (DM) के पास पूर्व की बुकिंग रद्द करने का अधिकार होगा। हालांकि, सामान्य दिनों में यह सुविधा आम जनता के लिए सुचारू रूप से चलती रहेगी। इस पहल से सरकार को न केवल अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, बल्कि सरकारी संपत्तियों का बेहतर रखरखाव भी सुनिश्चित हो सकेगा।

सीएम योगी से MSP दरें तय करने पर की चर्चा, किसानों से ₹1500 प्रति क्विंटल होगी आलू खरीदी!

आगरा. जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर मंजू भदौरिया ने सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने आलू किसानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि आगरा में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। वर्तमान में बाजार में मूल्य लागत से भी कम है। मंजू भदौरिया ने आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने, बाजार में हस्तक्षेप योजना लागू करने, निर्यात और परिवहन पर सब्सिडी देने के अलावा कोल्ड स्टोरेज के बिजली बिल में राहत देने की मांग की। जिले की विभिन्न जनसमस्याओं, जल संकट, किसानों की परेशानियों और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों को लेकर डॉ. मंजू भदौरिया और पूर्व विधायक डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखते हुए जनहित में शीघ्र कार्रवाई करने का अनुरोध किया। जनसमस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन जिला पंचायत अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को बताया कि जल जीवन मिशन योजना अभी पूरी तरह संचालित नहीं हो पाई है, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। उन्होंने मांग की, जब तक योजना सुचारु रूप से लागू नहीं होती, तब तक जिला पंचायत को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ग्राम स्तर पर सबमर्सिबल पंप, टंकी और पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने तथा सोलर सिस्टम युक्त जल मीनार स्थापित करने की अनुमति दी जाए। बांध बनाए जाने की मांग भी उठाई डॉक्टर भदौरिया ने आगरा की प्रमुख उटंगन नदी में जल संचयन के लिए फतेहाबाद तहसील के रेहावली गांव के पास स्लूस गेट युक्त बांध बनाए जाने की मांग भी उठाई। उन्होंने बताया कि राजस्थान के करौली क्षेत्र से आने वाली इस नदी में पर्याप्त जलराशि रहती है, जिसे बांध बनाकर संचित किया जा सकता है। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा और बाह व फतेहाबाद क्षेत्र के गांवों को सिंचाई तथा पेयजल के लिए लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉक्टर मंजू भदौरिया द्वारा उठाए मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आश्वासन दिया। कहा कि प्रदेश सरकार जनहित से जुड़े विषयों पर संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

असम में सपा की एंट्री? विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में अखिलेश यादव

लखनऊ लोकसभा चुनाव 2024 में जबरदस्‍त सफलता हासिल करने के बाद समाजवादी पार्टी ने राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लक्ष्‍य पर नजर गड़ा दी है। इस रणनीति के तहत पार्टी पहली बार असम विधानसभा चुनाव में हिस्‍सा लेने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है सपा पांच से 10 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतार सकती है। जल्‍द ही इसका आधिकारिक ऐलान किया जाएगा। असम में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बताया जा रहा है कि सपा असम के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने प्रत्‍याशी उतारेगी। सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव भी वहां चुनाव प्रचार करने जा सकते हैं। महाराष्‍ट्र में दो और गुजरात में 1 सपा विधायक यूपी के बाहर की बात करें तो सपा के महाराष्‍ट्र में दो विधायक और गुजरात में एक विधायक हैं। यह राष्‍टीय पार्टी के मानक से काफी कम है। दरअसल, राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए लोकसभा या विधानसभा चुनावों में न्‍यूनतम चार राज्‍यों में कुल वैध वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत होना जरूरी है। साथ ही लोकसभा में कम से कम चार सीटें होना चाहिए या लोकसभा चुनावों में कम से कम तीन अलग राज्‍यों से कुल सीटों का 2 प्रतिशत यानी 11 सीटें जीती हों। देखा जाए तो सपा के पास लोकसभा में इससे कहीं ज्‍यादा सीटें हैं पर वह एक ही राज्‍य उत्‍तर प्रदेश में है। इसलिए वह राष्‍ट्रीय पार्टी के मानकों को पूरा नहीं करती। यूपी में सपा के 37 सांसद गौरतलब है कि 2024 में सपा ने लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। सीटों के लिहाज से सपा बीजेपी और कांग्रेस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास 37 सांसद हैं। सपा ने बीजेपी के गढ़ माने जाने वाली कई सीटों पर अपना परचम लहराया था। इसमें अयोध्‍या उल्‍लेखनीय है। असम में इसी साल होने हैं विधानसभा चुनाव राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्‍त करने के लिए समाजवादी पार्टी की नजर असम विधानसभा चुनावों पर है। असम में इसी साल तक चुनाव होने हैं। सपा अपने परंपरागत मुस्लिम वोटों पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसी रणनीति के तहत सपा असम के मुस्लिम बहुल इलाकों में ही प्रत्‍याशी खड़ा करने की योजना बनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सपा 5 से 10 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार खड़े कर सकती है।

श्रद्धालुओं के लिए सुविधा बढ़ाते हुए 19 मार्च से शुरू होगी भव्य गंगा आरती

वाराणसी श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद काशी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बन गई है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक वाराणसी पहुंच रहे हैं, जिसके चलते दशाश्वमेध, अस्सी और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती में भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी को देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 19 मार्च से ललिता घाट पर भव्य गंगा आरती शुरू करने का निर्णय लिया है। 45 मिनट तक होगी गंगा आरती हिंदू नववर्ष के प्रथम दिन इसका शुभारंभ किया जाएगा। मंदिर न्यास के अनुसार, ललिता घाट पर सात अर्चकों द्वारा प्रतिदिन शाम 6:45 बजे से लगभग 45 मिनट तक गंगा आरती की जाएगी। इस आरती के माध्यम से विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालु गंगा द्वार से ही गंगा आरती के दर्शन कर सकेंगे। इससे पहले सितंबर 2025 में नमो घाट पर भी सात अर्चकों द्वारा गंगा आरती की शुरुआत की गई थी। उसी तर्ज पर अब ललिता घाट पर भी भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को मिलेगी बेहतर सुविधा   काशी विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि यह पहल बाबा विश्वनाथ के भक्तों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से की जा रही है। श्रद्धालु गंगा द्वार की सीढि़यों पर बैठकर आराम से गंगा आरती का दर्शन कर सकेंगे। बाबा विश्वनाथ के दरबार और सामने मां गंगा की आरती का द्दश्य भक्तों को दिव्य आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि काशी में दशाश्वमेध, अस्सी, शीतला और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती में अक्सर भारी भीड़ और ट्रैफिक के कारण कई श्रद्धालु समय पर आरती स्थल तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में 19 मार्च से ललिता घाट पर शुरू होने वाली गंगा आरती श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दबाव को कम करने में सहायक साबित होगी। 

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