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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संविधान दिवस, 26 नवम्बर के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संविधान दिवस, 26 नवम्बर के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने संविधान के सभी अनुच्छेदों के महत्व के दृष्टिगत नागरिकों में जागरूकता लाने की पहल की है। भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने जो संविधान हमें दिया है, उसे जनता तक पहुंचाने के लिए संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिये संविधान दिवस को इस वर्ष निमित्त बनाया गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने समाज में संविधान की महत्ता को स्थापित करने के लिए यह महत्वपूर्ण अभियान चलाने के लिए सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए। इसके परिपालन में मध्यप्रदेश में अनेक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के इस जन-जागरूकता अभियान का सम्मान करती है और इसके दृष्टिगत पूरे मध्यप्रदेश में संविधान की ताकत से सबको परिचित करवाने के लिए विविध प्रकार के आयोजन किए जा रहे हैं। विशेष रूप से मध्यप्रदेश में इन आयोजनों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष बाबा साहेब अम्बेडकर प्रदेश के महू में जन्मे हैं। संयोग से संविधान सभा के सदस्य शिक्षाविद और दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर जो सागर के रहने वाले थे, 26 नवम्बर को उनकी जयंती भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अनूठे संयोग पर सभी नागरिकों को संविधान दिवस की बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।  

29 नवंबर को रिलीज होगी दिल्ली बस

मुंबई, शरीक मिन्हाज के निर्देशन में बनी फिल्म दिल्ली बस , 29 नवंबर को रिलीज होगी। वर्ष 2012 की एक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। चलती बस में एक लड़की के साथ जिस तरीके से दरिंदगी की गई। उसने हमारे समाज को शर्मसार कर दिया। फिल्म ‘दिल्ली बस’ उसी घटना की याद दिलाती है। शरीक मिन्हाज के निर्देशन में बनी फिल्म दिल्ली बस में शाहिद कपूर की मां नीलिमा आजमी के अलावा ताहिर कमाल खान ,अंजन श्रीवास्तव, आज़ाद हुसैन, दिव्या सिंह ,जावेद हैदर ,शीश खान और विक्की आहूजा की प्रमुख भूमिका है। शरीक मिन्हाज ने कहा, यह फिल्म उस लड़की को श्रद्धांजलि है, जो 2012 में हुए बर्बर गैंगरेप के बाद पूरे देश में निर्भया के रूप में जानी गई। इस फिल्म हम निर्भया को समर्पित करना चाहेंगे। निर्भया ने अपनी जिंदगी और सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी। हम उसे इस फिल्म के जरिए श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इस फिल्म के जरिए हम समाज में बदलावा लाना चाहते हैं। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों और समस्याओं को उजागर करना चाहते हैं। फिल्म में खास किरदार निभा रहे ताहिर कमाल खान ने कहा, इस फिल्म के माध्यम से हमने सच्चाई दिखाने की कोशिश की है। फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी। हमने इसके लिए कड़ी लड़ाई लड़ी। अब फिल्म को छह साल के बाद सेंसर सर्टिफिकेट मिला है। फिल्म दिल्ली बस के निर्माता विपुल शाह, सह-निर्माता तारिक खान हैं। यह फिल्म 29 नवंबर को रिलीज होगी।  

रणबीर कपूर ने संजय लीला भंसाली को बताया ‘गॉडफादर’

मुंबई, बॉलीवुड के रॉकस्टार रणबीर कपूर ने फिल्मकार संजय लीला भंसाली को ‘गॉडफादर’बताया है। संजय लीला भंसाली अपनी अगली फिल्म लव एंड वॉर की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल लीड रोल्स में हैं।इस फिल्म के जरिए भंसाली और रणबीर कपूर 17 साल बाद फिर से साथ नजर आएंगे। फैंस को उनका यह नया सहयोग देखने का बेसब्री से इंतजार है। रणबीर कपूर ने भी भंसाली के साथ काम करने को लेकर अपनी राय जाहिर की है।  हाल ही में 55वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में रणबीर कपूर ने कहा है, “मैं बेहद उत्साहित हूं। वह मेरे गॉडफादर हैं। फिल्मों के बारे में मैं जो कुछ भी जानता हूं, अभिनय के बारे में जो कुछ भी जानता हूं, वह सब मैंने उनसे सीखा है।वह बिल्कुल नहीं बदले हैं। वह बेहद मेहनती हैं। वह सिर्फ अपनी फिल्मों के बारे में सोचते हैं। वह सिर्फ किरदार के बारे में बात करना चाहते हैं, वह चाहते हैं कि आप कुछ अलग बनाएं, कुछ अलग करें। लव एंड वॉर, में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल पहली बार साथ नजर आएंगे। यह फिल्म 20 मार्च, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।  

21 दिसंबर को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर धमाकेदार वापसी करने के लिए तैयार है सीआईडी

मुंबई, सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर लोकप्रिय शो सीआईडी 21 दिसंबर को धमाकेदार वापसी करने के लिए तैयार है। दो दशकों से दर्शकों के दिलों को उत्साह और उत्सुकता से भरने वाले दिग्गज कलाकारों – शिवाजी साटम (एसीपी प्रद्युमन), दयानंद शेट्टी (दया) और आदित्य श्रीवास्तव (अभिजीत) को वापस लाते हुए, प्रतिष्ठित सीआईडी ,21 दिसंबर को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर धमाकेदार वापसी करने के लिए तैयार है, और यह हर शनिवार और रविवार को रात 10 बजे प्रसारित होगा। फैंस इस रोमांचक वापसी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, अपने बचपन की यादों को ताज़ा कर रहे हैं, लेकिन वे अपने प्यारे दया को घातक गोली लगते देख चौंक गए।लेकिन एक हैरान करने वाला ट्विस्ट लाते हुए, दया अपनी सिग्नेचर स्टाइल से वीरतापूर्ण वापसी करते हैं और “दरवाज़ा तोड़कर” प्रवेश करते हैं, और एक ज़ोरदार डायलॉग होते हैं: “दुश्मन भी मुझे मिटा नहीं पाए, मैं वापस आ गया, अपने लिए लड़ने और जो भूल गया है, उसे याद दिलाने की लिए – ‘दया वापस आ गया है!’” दया का किरदार निभाने वाले दयानंद शेट्टी ने अपना उत्साह व्यक्त करते हुए कहा: “कुछ किरदार लोगों के दिलो-दिमाग में बस जाते हैं, और दया उनमें से एक है। इतने सालों बाद भी जो प्यार और तारीफ मिल रही है, मैं उससे बहुत खुश और भावुक हूं। मीम्स, जोक्स, रेफ़रेंस – यह सब इस बात का प्रमाण है कि दया का इस लोकप्रिय संस्कृति पर कितना असर पड़ा है। मैं सीआईडी के नए सीज़न में अपनी दया की भूमिका को दोहराते हुए आभारी और बेहद खुशी महसूस कर रहा हूं, और मैं उसी दमखम और जुनून को पेश करने का वादा करता हूं, जिसने दया को इतना लोकप्रिय किरदार बनाया है – अब कुछ और दरवाज़े तोड़ने, साथ ही कुछ और मामलों को सुलझाने का समय आ गया है!”  

भोपाल गैस त्रासदी को 40 साल हो गए, लेकिन इसका असर अब भी लोगों और उनकी अगली पीढ़ियों पर महसूस किया जा रहा

 भोपाल  भोपाल गैस त्रासदी को 40 साल हो गए, लेकिन इसका असर अब भी लोगों और उनकी अगली पीढ़ियों पर महसूस किया जा रहा है। दो और तीन दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड के कारखाने से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस लीक होने से 3787 लोगों की जान गई और पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के फारेंसिक विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सत्पथी का दावा है कि त्रासदी की रात से अगले पांच सालों में 18 हजार प्रभावितों की जान गई है। भोपाल में गैस त्रासदी की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. डीके सत्पथी ने कहा कि आपदा के पहले दिन उन्होंने 875 पोस्टमार्टम किए थे। गैस हादसे वाले दिन से लगातार बीमार थे लोग अगले पांच सालों में उन्होंने गैस प्रभावितों के 18 हजार शव परीक्षण देखे। इन शव परीक्षणों में जहर की पुष्टि तो नहीं हो पाई, लेकिन जिन लोगों की मौत हुई थी वे गैस हादसे वाले दिन से लगातार बीमार ही रहे थे। यह उस जहर का ही असर था, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए था। गर्भवती महिलाओं के बच्चों पर पड़ा असर डॉ सत्पथी ने कहा कि यूनियन कार्बाइड ने गर्भस्थ शिशुओं में जहर के असर को हमेशा खारिज किया, लेकिन इस त्रासदी में मरने वाली गर्भवती महिलाओं के रक्त परीक्षण में यह देखा गया कि उसमें पाए गए जहरीले पदार्थों में से 50 प्रतिशत गर्भस्थ बच्चे में भी पहुंचे हुए थे, जो गर्भवती महिलाएं बच गईं उनके गर्भस्थ शिशुओं में इसका प्रभाव निश्चित रूप से पड़ा है। केवल एंडरसन ही अपराधी नहीं, सिस्टम भी है डॉ. सत्पथी ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी के लिए केवल यूनियन कार्बाइड का संचालक एंडरसन ही अपराधी नहीं था। वे लोग भी अपराधी थे, जिन्होंने जानबूझकर या अंजाने में ऐसे खतरनाक उद्योग को बड़ी आबादी के इलाके में संचालन की अनुमति दी, उसे चलने दिया। उद्योग सुरक्षा विभाग के वे अफसर भी अपराधी हैं जो हर महीने कंपनी में सब कुछ ठीक की रिपोर्ट भेजते रहे। लोगों ने त्रासदी से जुड़े अनुभव साझा किए कार्यक्रम में हमीदिया अस्पताल के डॉ. एचएच त्रिवेदी ने कहा कि कंपनियों को ऐसे रसायन बनाने से बचना चाहिए, जिनके दूरगामी प्रभाव और उसके एंटी डोज की कोई जानकारी न हो। पूर्व पार्षद नाथूराम सोनी ने मोहल्लों से लोगों को निकालने की घटनाएं याद कीं। वहीं बबलू कुरैशी व मुईन ने मृतकों के अंतिम संस्कार का मंजर बताया। भोपाल ग्रुप फार इंफार्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा और रशीदा बी ने बताया कि गैस त्रासदी की बरसी पर पोस्टर प्रदर्शनी भी लगी है। इसे चार दिसंबर तक देखा जा सकेगा।

भारत का संविधान दिवस कल

हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। इस लोकतंत्र को कायम रखने का सबसे बड़ा कारण भारत का संविधान है। प्रतिवर्ष हमारे देश में 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 26 जनवरी को ही संविधान दिवस क्यों मनाया जाता है, अगर नहीं? तो यह पेज आपके लिए बेहद उपयोगी है। आप यहां से हमारे संविधान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकते हैं और इसके साथ ही आप यहां से भारत के संविधान के मौलिक अधिकारों की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। क्यों मनाया जाता है भारतीय संविधान दिवस जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था और इसके उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। लेकिन हम आपको बता दें कि संविधान के लागू होने से दो महीने पहले 26 नवंबर 1949 को संविधान बनाने वाली सभा ने कई दौर की चर्चाओं और संशोधनों के बाद इस दिन संविधान को स्वीकार किया था। इसी के चलते हर साल 26 जनवरी को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। संविधान दिवस को मनाने का फैसला इसके निर्माता डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के लिए लिया गया था। 2015 से हुई इस दिन को मनाने की शुरुआत पहले संविधान लागू होने के चलते 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में ही मनाया जाता था लेकिन सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 19 नवंबर 2015 को इसे प्रतिवर्ष 26 नवंबर को भी मनाये जाने का फैसला किया। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य देश में लोगों को संविधान संवैधानिक मूल्यों की जानकारी देना है।

यदि हमारे साधु संत हिंदू राष्ट्र की मांग करते हैं तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए बल्कि हर हिंदू को गर्व होना चाहिए: मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल

छतरपुर मध्य प्रदेश में चल रही बाबा बागेश्वर की हिंदू एकता पदयात्रा जहां हर दिन बड़ा रूप लेती जा रही है, वही अपार जनसमर्थन के बीच अब देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग भी तेज हो गई है. इस यात्रा के मुखिया पंडित धीरेंद्र शास्त्री इस मांग को खुद उठा रहे हैं तो उनकी इस मांग के समर्थन में भी लोग आ रहे हैं. इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में एमपी सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बाबा बागेश्वर की मांग के पक्ष में खड़े हो गए हैं. दमोह पहुंचे मंत्री प्रहलाद पटेल ने उनकी इस यात्रा को लेकर बड़ा बयान दिया है. बाबा बागेश्वर की यात्रा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने बड़ी यात्रा करार दिया है. उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री बड़े संत हैं. उनके अनुयायी भी बहुत हैं.  सनातनी होने के नाते वो यात्रा से खुश हैं. हिंदू राष्ट्र की मांग पर पटेल ने साफ कहा कि यदि हमारे साधु संत ऐसी मांग करते हैं तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए बल्कि हर हिंदू को गर्व होना चाहिए. ओरछा तक जाएगी बाबा की यात्रा दरअसल, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री पिछले कुछ दिनों से ‘हिंदू एकता यात्रा’  पर हैं. मध्य प्रदेश में चल रही इस यात्रा में भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं. यह यात्रा बागेश्वर धाम से ओरछा तक जाएगी. जगह-जगह यात्रा का स्वागत बाबा बागेश्वर की इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है. उनकी हिंदू एकता यात्रा जहां से भी गुजर रही है, वहां घरों के सामने लोग फूलों की वर्षा कर रहे हैं. धीरेंद्र शास्त्री की एक झलक पाने को लोग यात्रा मार्ग पर बेताब दिखाई देते हैं. इस यात्रा में जगह-जगह महिलाएं उनकी आरती कर रही हैं तो यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए खाने पीने की भी व्यवस्था की जा रही है. इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है.

बैकफुट पर आईं बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे, सदस्यता पर अगले सप्ताह फैसला

भोपाल   मध्य प्रदेश के बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी खतरे में हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी का समर्थन करने वाली कांग्रेस विधायक की विधानसभा सदस्यता को लेकर अगले सप्ताह निर्णय आ सकता है. उनकी सदस्यता को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने सप्रे को अपनी बात रखने का अंतिम अवसर दिया है. बैकफुट पर आईं बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे बीजेपी का समर्थन करके बैकफुट पर आईं कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे फिलहाल मुश्किल में हैं. निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता पर अगले सप्ताह फैसला आ सकता है. सप्रे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेगी. हालांकि कांग्रेस की मांग है कि 16 दिसबंर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आवेदन पर कार्रवाई हो सदस्यता जाती है तो बीना विधानसभा में होगा उपचुनाव उल्लेखनीय है अगर कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता जाती है तो बीना विधानसभा के उपचुनाव होगा. रामनिवास रावत को उपचुनाव में मिली हार को देखते हुए निर्मला सप्रे मुश्किल में आती दिख रही हैं. रामनिवास रावत विजयपुर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा से 7228 वोटों से हार गए और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

विदेशी निवेशकों को आमंत्रित करने मुख्यमंत्री यूके और जर्मनी की विदेश यात्रा पर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का लंदन पहुंचने पर यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त विक्रम के दोराईस्वामी और प्रवासी भारतीयों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव फरवरी में होने जा रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में विदेशी निवेशकों को मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए आमंत्रित करने के लिए इंग्लैंड और जर्मनी प्रवास पर हैं। अपने 6 दिवसीय विदेशी प्रवास के दौरान वे उद्योगपतियों से मुलाकात कर उन्हें मध्यप्रदेश आने का न्यौता देंगे। मुख्यमंत्री के साथ अधिकारियों का उच्च स्तरीय दल भी विदेश प्रवास पर है। वैश्विक निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यात्रा का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश को औद्योगिक हब बनाने के साथ ही हर प्रकार के उद्योग को आमंत्रण के साथ मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को नई ऊंचाईयां देने और वैश्विक निवेश को आकर्षित करना है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय निवेश के अवसरों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने का अभूतपूर्व प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगामी फरवरी माह में भोपाल में आयोजित हो जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से 6 दिवसीय विदेश यात्रा पर लंदन और बर्मिंघम तथा जर्मनी के म्यूनिख और स्टटगार्ट का दौरा करेंगे। इस दौरान वे उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को वेस्टमिंस्टर स्थित ब्रिटिश संसद और किंग्स क्रॉस तथा पुनर्विकास स्थलों का भ्रमण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लंदन में ‘फ्रेंड्स ऑफ मध्यप्रदेश’ प्रवासी भारतीयों द्वारा आयोजित रात्रि भोज कार्यक्रम में शामिल होंगे। लगभग 400 प्रवासी भारतीय इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। विश्व पटल पर होगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह निवेश यात्रा राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने तथा विश्व पटल पर उद्योग के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी। यह यात्रा निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है, जो प्रदेश में निवेशकों का विश्वास को मजबूती और औद्योगिक विकास को गति प्रदान करेगी। इससे प्रदेश में एक समृद्ध औद्योगिक वातावरण का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के महानगरों से औद्योगिक निवेश को आमंत्रित करने के लिए उन्होंने कलकत्ता, बेंगलोर, मुम्बई और कोयम्बटूर में रोड शो आयोजित कर उद्योगपतियों से मुलाकात की थी। विदेश यात्रा का उद्देश्य भारतीय निवेशकों के साथ ही विदेशी निवेशकों को आमंत्रित करना भी है। हर युवा के लिए होगा रोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा के अनुरूप प्रदेश के युवाओं को उनकी शिक्षा और काबिलियत के अनुसार काम देने के उद्देश्य से हर प्रकार के उद्योगों को स्थापित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विदेश यात्रा में विभिन्न क्षेत्रों यथा आई.टी, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, एजुकेशन, रिन्युएबल एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर्स में निवेश पर चर्चा और उद्योगपतियों से वन-टू-वन मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को ब्रेक-फास्ट पर उद्योगपतियों एवं भारत के उच्चायुक्त विक्रम के दोरईस्वामी से संवाद करेंगे। इसके बाद “इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश”, “इंटरैक्टिव सेशन” में लगभग 120 प्रतिभागियों से चर्चा करेंगे।  

अब MP के स्कूलों में पढ़ाया जायेगा यातायात का पाठ, बांटी जाएंगी 87 लाख पुस्तकें

भोपाल भोपाल। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार अब स्कूली विद्यार्थियों को यातायात का पाठ पढ़ाएगी। इसकी शुरुआत आगामी शिक्षा सत्र (2025-26) से कक्षा पांच के विद्यार्थियों से होगी। इसके लिए पुलिस मुख्यालय 87 लाख पुस्तकें छपवा रहा है। पांचवीं से 12वीं तक क्रमश: हर वर्ष नई कक्षा में नई पुस्तक पढ़ाई जाएंगी। कैसा रहेगा पाठ्यक्रम पाठ्यक्रम भी इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि इसमें दोहराव न हो। साथ ही उनकी सामग्री विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर के अनुकूल हो। पांचवीं की पुस्तक में आठ अध्याय हैं। इसमें वाहन सड़क में कैसे, किस दिशा में चलाएं, रोटरी क्या है। प्रदूषण के मापदंड के अनुसार वाहन कितने प्रकार के होते हैं। लाइसेंस कितने तरह के होते हैं, जैसी जानकारियों को शामिल किया गया है। सख्ती के साथ सोच बदलना भी जरूरी पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि सख्ती के साथ ही लोगों का सोच बदलना भी जरूरी है और इसकी शुरुआत के लिए विद्यार्थियों से अच्छा कोई समूह नहीं हो सकता। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) संजीव शमी ने बताया कि पाठ्यक्रम समिति ने इसे स्वीकृति दे दी है। पाठ्यक्रम में इन्हें अगले शैक्षणिक सत्र से शामिल किया जाएगा कि नहीं यह अभी तय होना है। पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाने के बाद भी विद्यार्थियों को यह पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी। इसलिए पड़ी आवश्यकता कोरोना संक्रमण काल का समय छोड़ दें तो प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और इसमें जान गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यातायात के नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्ती के बाद भी घटनाएं बढ़ रही हैं। चिंता की दूसरी बात यह भी है कि दुर्घटनाएं जिस अनुपात में बढ़ी हैं उससे कहीं ज्यादा मृतकों की संख्या बढ़ी है। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति वर्ष दुर्घटनाएं घायल मौत 2017 53,399 57,532 10,117 2018 51,397 54,662 10,706 2019 50,669 52,816 11,249 2020 45,266 46,456 11,141 2021 48,877 48,956 12,057 2022 54,432 55,168 13,427 2023 55,327 55,769 13,798 2024 – – –

Kuno National Park: कूनो में दिखेगी नन्हें शावकों की उछल-कूद, चीता ‘नीर्वा’ ने 4 को दिया जन्म

Kuno National Park: Little cubs will be seen jumping in Kuno, Cheetah ‘Nirva’ gives birth to 4 कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर से खुशखबरी आई है. यहां एक मादा चीता ने फिर से शावकों को जन्म दिया है. मध्य प्रदेश के वन विभाग ने सोशल मीडिया पोस्ट पर ये जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि 4 शावकों ने जन्म लिया है हालांकि आधिकारिक तौर पर नंबरों की पुष्टि नहीं की गई है. नामीबिया और साउथ अफ्रीका से लाए गए चीतों का परिवार धीरे-धीरे कूनो पार्क में बढ़ रहा है. वन विभाग ने अपने अधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है कि ‘कूनो से गुड न्यूज आई है, मादा चीता नीर्वा ने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में शाकों को जन्म दिया है.’ पिछले महीने मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने इस बात की ओर इशारा किया था कि मादा चीता नीर्वा गर्भवती है और जल्द ही शावकों को जन्म दे सकती है. सीएम मोहन यादव के इस इशारे के बाद से ही लोग कूनों खुशखबरी आने का इंतजार कर रहे थे. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अमीस श्रीवास्तम ने कहा है कि वह शावकों की संख्या पर फिलहाल कोई भी कमेंट नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पार्क की ओर से अभी शावकों के बारे में कोई कन्फर्मेसन नहीं है. कूनो नेशनल पार्क में इससे पहले कुल 17 शावक जन्म ले चुके हैं जिनमें से 12 शावक सर्वाइव कर पाए हैं. अब नीरवा के शावकों के जन्म लेने के बाद कुनबा और बढ़ गया है. जल्द ही शावकों के बारे में पार्क से ज्यादा जानकारी जारी की जाएगी. 2022 में शुरू हुआ चीता प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आए 8 चीतों को छोड़ा था. इसके बाद साउथ अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया था और पार्क में छोड़ा गया था. हालांकि अलग-अलग कारणों के चलते कई चीतों की मौत हो गई है. हालांकि कूनों से समय-समय पर नन्हें शावकों के जन्म की खुशखबरी भी सामने आती रही हैं. कूनों में फिलहाल चीतों की संख्या करीब 24 है.

औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन के पेड़ से संबंधित विस्तृत जानकारी,एवं फायदे

Detailed information and benefits related to Arjuna tree which is rich in medicinal properties. अर्जुन के पेड़ को औषधीय पेड़ माना जाता हैं क्यूंकि इसे बहुत सी दवाइयों के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पेड़ ज्यादातर नदी और नालों के किनारे पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ सदाहरित रहता हैं। अर्जुन के पेड़ को अन्य कई नामो से जाना जाता हैं जैसे ,घवल और नदीसर्ज। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 60 -80 फ़ीट ऊँची रहती हैं। अर्जुन का पेड़ ज्यादातर उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र ,बिहार और अन्य कई राज्यों नदियों के किनारे या सुखी नदियों के तल के पास पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ की लम्बाई काफी ऊँची रहती है। अर्जुन का पेड़ बहुत ही शुष्क इलाकों में पाया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। अर्जुन के पेड़ को अनुनारिष्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ का उपयोग बहुत सालों से आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए किया जा रहा है। अर्जुन के पेड़ का फल कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ का फल शुरुआत हल्के सफ़ेद और पीले रंग का होता हैं ,कुछ समय पश्चात जब फल में बढ़ोत्तरी होती हैं तो ये फल हरे और पीले रंग का दिखाई पड़ता हैं ,साथ ही इसमें से हल्की हल्की सुगंध भी आने लगती है। पकने के बाद ये फल लाल रंग का दिखाई पड़ने लगता है। अर्जुन के पेड़ के पत्ते हैं लाभकारी अर्जुन के पेड़ के पत्ते खाने से ये शरीर में जमा गंदे कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकलता हैं। इसका सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इन पत्तों का सेवन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता हैं। अर्जुन की छाल से मिलने वाले फायदे अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से खून पतला होता हैं जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित बनाये रखता है। इस छाल के काढ़े का उपयोग दो से तीन महीने लगातार करना चाहिए। इस काढ़े के उपयोग से रक्तश्राव कम होता है। यह ह्रदय के रक्तचाप जैसी गतिविधियों की क्षमता में सुधार लाता है। पाचन किर्या में सहायक अर्जुन का पेड़ पाचन किर्या में सहायक होता हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर लेने से ये पाचन तंत्र को संतुलित बनाये रखता है। यह बड़े हुए चर्बी को कम करने में मदद करता हैं ,अर्जुन की छाल का सेवन लिवर जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है। यह वजन घटाने में भी सहायता प्रदान करती है। सर्दी खांसी में है लाभकारी अर्जुन के पेड़ की छाल का कड़ा बनाकर पीने से या फिर अर्जुन के चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से सर्दी और खांसी दोनों में फायदा होता है। अर्जुन के पेड़ का रस औषिधि के रूप में सदियों से किया जा रहा हैं। हड्डियों के जोड़ने में मददगार अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग टूटी हुई हड्डियों या फिर मांसपेशियों में होने वाले दुखाव के लिए किया जाता हैं। इसमें छाल के चूर्ण को एक गिलास दूध में दो चम्मच चूर्ण मिलाकर पीने से हड्डियां मजबूत होती है। ये हड्डी में होने वाले दर्द से भी आराम दिलाता हैं। अल्सर बीमारी में है फायदेमंद अर्जुन का प्रयोग अल्सर जैसी बीमारी में भी किया जाता हैं। कई बार अल्सर का घाव जल्द ही नहीं भर पाता हैं। या फिर घाव सूखते ही दूसरे घाव निकल आते हैं ,इसमें अर्जुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर ,घाव को इससे धोये। ऐसा करने से घाव कम होने लगते हैं,साथ ही अल्सर जैसे रोग को भी नियंत्रित करता है। अर्जुन की छाल से होने वाले नुकसान अर्जुन के पेड़ को बहुत सी बीमारियों के लिए लाभकारी माना जाता हैं ,लेकिन इसके कुछ नुक्सान भी हैं जो शरीर पर गलत प्रभाव डालते है। सीने में जलन होना अर्जुन की छाल का सेवन बहुत से लोगो की सेहत के लिए ठीक नहीं रहता हैं, जिसकी वजह से उन्हें जी मचलना या घबराहट जैसी परेशानियां अक्सर हो जाती है। यदि आप छाल का सेवन कर रहे हैं और आपको ऐसा महसूस होता हैं की सीने में जलन या दर्द हो रहा हैं तो इसका उपयोग करना उसी वक्त छोड़ दे। पेट में दर्द या ऐठन का महसूस होना यदि छाल का उपयोग करने से आपको पेट में दर्द या और कोई परेशानी महसूस होती हैं तो छाल का सेवन करना बंद कर दे। हालाँकि अर्जुन एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी हैं लड़की कुछ लोगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। एलेर्जी जैसो रोगों को जन्म देता हैं अर्जुन के पेड़ की छाल का घोल बनाकर शरीर पर लगाया जाता हैं, यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं। लेकिन इसका लेप बहुत से लोगो के शरीर एलेर्जी से जुडी समस्याओं को भी खड़ा कर देता हैं। यदि इस लेप का उपयोग करने के बाद शरीर में खुजली जैसी परेशानिया हो तो इस लेप का उपयोग न करें। आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ को बहुत ही लाभकारी माना गया हैं। अर्जुन के पेड़ में सबसे ज्यादा उपयोग छाल का किया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ की छाल में मैग्नीशियम ,पोटेसियम और कैल्शियम पाया जाता है। इस पेड़ की छल का इस्तेमाल बहुत से रोगो में किया जाता हैं ,और ये लाभकारी भी है। अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग कैंसर सम्बंधित रोगो से निपटने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसके कुछ नुक्सान भी हैं। जो व्यक्ति पहले से किसी भी प्रकार की कोई दवाई ले रहा हैं ,उसे इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए।

मध्य प्रदेश सरकार ने 1988 बैच के आईपीएस अफसर कैलाश मकवाना को राज्य का नया डीजीपी नियुक्त किया

भोपाल आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना को मध्य प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया गया है। वे प्रदेश के 32वें डीजीपी होंगे। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना प्रदेश के 32वें डीजीपी होंगे। 1 दिसंबर 2024 को वह यह पद ग्रहण करेंगे, जब वर्तमान डीजीपी सुधीर सक्सेना अपने कार्यकाल के बाद रिटायर हो जाएंगे। रविवार को डीजीपी सुधीर सक्सेना कैलाश मकवाना को बधाई देने उनके निवास पहुंचे। सुधीर सक्सेना ने मार्च 2020 में डीजीपी के रूप में पदभार संभाला था। कैलाश मकवाना के पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रही हैं, जिनमें मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन का पद भी शामिल है। कैलाश मकवाना 30 नवंबर 2026 तक डीजीपी रहेंगे। ऐसे में साफ है कि अब 1990 बैच तक के अफसर डीजीपी नहीं बन पाएंगे।  1988 बैच के अरविंद कुमार मई 2025 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। वहीं, 1989 बैच के अधिकारी अजय कुमार शर्ता अगस्त 2026 और इसी बैच के जीपी सिंह जुलाई 2025 में रिटायर्ड होंगे।   लोकायुक्त में भ्रष्टाचार की कई फाइलें खोली कैलाश मकवाना को तेज़-तर्रार और मेहनती अफसर माना जाता है। उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। शिवराज सरकार के कार्यकाल में वह लोकायुक्त के डीजी के रूप में नियुक्त हुए थे, लेकिन महज छह महीने बाद उनका तबादला कर दिया गया। उनके कार्यकाल में लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलें खोलीं और महत्वपूर्ण जांचों को आगे बढ़ाया। इसके अलावा, महाकाल लोक कॉरिडोर के मामले में भी उन्होंने कार्रवाई की थी।     कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे मकवाना मकवाना का पुलिस विभाग में करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने साढ़े तीन साल के दौरान सात बार अपना स्थान बदला था, जिसमें कमलनाथ सरकार के दौरान तीन बार उनका ट्रांसफर हुआ था। उनके ट्रांसफर की सूची में एडीजी इंटेलिजेंस, एडीजी नारकोटिक्स, एडीजी सीआईडी, और एडीजी प्रशासन जैसी प्रमुख पदों पर कार्य करना शामिल है। 2021 में उन्हें पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन बनाया गया था, और फिर 2022 में उन्हें लोकायुक्त का महानिदेशक बनाया गया। हालांकि, लोकायुक्त में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण सरकार ने उन्हें हटाकर पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन में भेज दिया। एसीआर खराब करने पर उठाए सवाल हालांकि, 2022 में उनकी एसीआर (गोपनीय चरित्रावली) को लेकर विवाद उठा था, क्योंकि लोकायुक्त के डीजी रहते हुए उनकी एसीआर को खराब कर दिया गया था। उन्होंने शासन से अपनी एसीआर सुधारने की अपील की थी, और सरकार ने उनके पक्ष में निर्णय लिया। इस बार जब डीजीपी की नियुक्ति के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने तीन नामों का पैनल भेजा, तो कैलाश मकवाना का नाम पहले स्थान पर था। इसके बाद अरविंद कुमार, जो वर्तमान में डीजी होमगार्ड हैं, और अजय शर्मा, जो डीजी ईओडब्ल्यू हैं, के नाम पैनल में शामिल थे। कैलाश मकवाना की त्वरित निर्णय क्षमता, भ्रष्टाचार विरोधी कार्यवाही, और प्रशासन में दक्षता के चलते एक प्रभावशाली अफसर है। साफ सुथरी छवि का मिला फायदा कैलाश मकवाना को अपने करियर में साफ सुथरी छवि और उज्जैन का होने का फायदा मिला है। कैलाश मकवाना का अकादमिक बैकग्राउंड भी मजबूत है। उज्जैन के रहने वाले कैलाश मकवाना ने मैनिट भोपाल से बीई किया है और आईआईटी दिल्ली से एमटेक की डिग्री प्राप्त की है।  उन्होंने कई प्रमुख पोस्टों पर कार्य किया है, जिनमें अति संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने का अनुभव शामिल है। उन्होंने दुर्ग, मुरैना, जबलपुर, रायपुर, दंतेवाड़ा, मन्दसौर और सागर जैसे विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वह इंटेलिजेंस विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं।      एमपी के नए डीजीपी कैलाश मकवाना: तेज़-तर्रार अफसर, साढ़े तीन साल में हुए सात ट्रांसफर, 1 दिसंबर को संभालेंगे पद 1988 बैच के आईपीएस हैं मकवाना मकवाना 1988 बैच के आईपीएस अफसर हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के अध्यक्ष हैं.  2019 से लेकर 2022 तक उनका 7 बार ट्रांसफर हो चुका है. अब अगर आईपीएस अधिकारी मकवाना के सर्विस रिकॉर्ड की बात करें तो भोपाल से बीई और दिल्ली आईआईटी से एमटेक करने वाले मकवाना दुर्ग और मुरैना में एएसपी के पद पर काम कर चुके हैं.  दंतेवाड़ा, बस्तर जैसे जिलों के रहे हैं एसपी वो दंतेवाड़ा, बस्तर, मंदसौर और बैतूल जैसे जिलों के एसपी भी रहे हैं जिसके बाद उन्हें डीआईजी इंटेलिजेंस के पद पर नियुक्त किया गया था.  इसके बाद सीआईडी इंटेलीजेंस में एडीजी के पद पर भी काम कर चुके हैं जिसके बाद उन्हें स्पेशल डीजी सीआईडी बनाया गया था.

जिला बदर गुण्डा सतेन्द्र सिंह उर्फ लूरी को उल्लंघन करते हुए अनूपपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया

अनूपपुर जिला अनूपपुर के पुलिस अधीक्षक श्री मोती उर रहमान के निर्देशन में जिले के सूचीबद्ध निगरानी एवं जिला बदर अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में, रविवार की रात कोतवाली अनूपपुर पुलिस ने जिला बदर गुण्डा सतेन्द्र सिंह उर्फ लूरी को आदेश का उल्लंघन करते हुए गिरफ्तार किया। मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद जैन के नेतृत्व में पुलिस टीम, जिसमें सहायक उपनिरीक्षक आशीष सिंह, आरक्षक गुपाल यादव, राजेश बड़ोले एवं वाहन चालक प्रह्लाद शामिल थे, ने जिला चिकित्सालय अनूपपुर के पास गश्त के दौरान कार्रवाई की। टीम ने आरोपी सतेन्द्र सिंह उर्फ लूरी (30 वर्ष), निवासी खेड़िया पेट्रोल पंप के पास वार्ड नंबर 2, अनूपपुर को गिरफ्तार किया।  आरोपी का आपराधिक इतिहास:            सतेन्द्र सिंह उर्फ लूरी थाना कोतवाली अनूपपुर का सूचीबद्ध गुण्डा बदमाश है। वर्ष 2016 से अब तक उस पर घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और अवैध वसूली जैसे 07 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जो माननीय न्यायालय में विचाराधीन हैं।                पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के प्रतिवेदन पर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, अनूपपुर द्वारा म.प्र. राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3(1), 5(क)(ख )एवं धारा 7 के तहत आरोपी को एक वर्ष के लिए अनूपपुर जिले और उससे लगे शहडोल, उमरिया एवं डिंडौरी जिलों की राजस्व सीमाओं से निष्कासित करने का आदेश जारी किया गया था।  गिरफ्तारी एवं मामला पंजीकरण:          रविवार रात आदेश का उल्लंघन करते हुए सतेन्द्र सिंह उर्फ लूरी अनूपपुर शहर में घूमते पाया गया। इस पर थाना कोतवाली अनूपपुर में अपराध क्रमांक 499/24 धारा 223 बी.एन.एस. 14 म.प्र. राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनूपपुर पुलिस का यह सख्त रुख जारी रहेगा।

रेंज में बाघ के साथ हाथियों के मूवमेंट ने वन विभाग की मुश्किलें बढ़ाई, बंद कराने पड़े स्कूल और हाट बाजार

 डिंडौरी  सामान्य वनमंडल के एक ही रेंज में मादा बाघ के साथ हाथियों के मूवमेंट ने वन विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी है। मादा बाघ के रिहायशी क्षेत्र में मूवमेंट व हाथियों के द्वारा घरों व फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से ग्रामीण दहशत में है। वन्यजीवों के बढ़ते मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए आस-पास के विद्यालयों में 25 से 29 नवंबर तक पांच दिन का अवकाश घोषित कर दिया गया है। वहीं इन वन्यजीवों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इनकी निगरानी के लिए तीन रेंज का अमला तैनात किया गया है। घर से ना निकलने की सलाह खौफ के चलते ग्रामीण खेत, बाजार और स्कूलों से दूरी बना रहे हैं। वन अमला भी ग्रामीणों को घर से नहीं निकलने की समझाइश दे रहा है। बता दें, शुक्रवार से पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत ठाढ़ पथरा वन ग्राम में मादा बाघ का मूवमेंट बना हुआ है। शुक्रवार सुबह संभर पिता गुलौआ गौड़ के घर के सामने बछिया का शिकार किया था। इसके बाद वन विभाग ने ट्रैप कैमरा लगाया, जिसमें दूसरी बार यहां पहुंची मादा बाघ ट्रैप हुई। फोटो और वीडियो को देखने के बाद बताया गया कि बाघिन की उम्र तीन साल है। हाथियों का उत्पात एक सप्ताह से जारी ग्राम पंचायत पंडरी पानी व ढाढ़पथरा के गांवों अम्हादादर, झिरिया बहरा, इमली टोला व चकरार में हाथियों का उत्पात एक सप्ताह से जारी है। हाथी के दल ने अब ग्राम चकरार के किसानों के खेत की खड़ी फसल को खाकर चौपट करने के साथ शेष खड़ी फसलों को रौंद दिया। वहीं बाघिन की सतत मौजूदगी से ग्रामीण भय में हैं और सर्दी में भी रात जागरण कर रहे हैं। फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हाथी जंगली हाथियों का दल लगातार चकरार, उद्दौर, आम्हा, पंडरीपानी, ख्हारखुदरा, चकमी, ठाढपथरा, इमली टोला सहित दर्जनों गांव में फसलों के साथ घरों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। शनिवार रात हाथियों ने चकरार में प्रमिला गौंड, दिनेश पिता धनेश्वर और दिनेश पिता सुखदेव सिंह नामक किसानों की फसल को क्षति पहुंचाई है। कड़कड़ाती ठंड से दोगुनी मार वर्तमान में जिन क्षेत्रों में हाथियों के दल ने आतंक मचा रखा है वहां के ग्रामीणों चैन सुकून छिन गया हैं। वनांचल के लोगों की मानें तो वे दिन किसी तरह से तो गुजार लेते हैं लेकिन रात होते ही उनके घरों पर हाथियों के हमले का डर सताने लगता हैं। ऐसे में अपनी जान की सलामती के लिए कच्चे मकानों को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ मकानों की छतों पर कड़कड़ाती ठंड में तंबू तान रात काटने मजबूर हैं। शुक्रवार की रात में पंडरी पानी, कांदाटोला, केंद्रा बहरा व ठाढ़पथरा के लोगों ने हमले की आशंका से जहां छत में बैठकर जागरण किया वहीं कुछ युवाओं ने अपने घरों की निगरानी के लिए रतजगा किया। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का दल दिन भर जंगल के आसपास रुका रहता हैं, लेकिन शाम होते ही आबादी में घुस रहें हैं ऐसे स्थिति में ग्रामीण बहुत भयभीत हैं। बाजारों में कराई गई मुनादी हाथी और बाघिन के आतंक का वनांचल क्षेत्र ग्रामीणों के मन में फिलहाल डर बैठा हुआ है। फलस्वरूप अब लोग रात की बजाए दिन में भी सुरक्षा की दृष्टि से सूनसान इलाकों में जाने से बच रहें हैं। ग्रामीणों का मानना हैं कि जब तक इन वन्य प्राणियों का यहां से गमन नहीं हो जाता तब तक इस क्षेत्र में इनके हमले की आशंका बरकरार है। ऐसी स्थिति में वे किसी भी सूरत में जान जोखिम में डालकर कोई काम नहीं करना चाहते। इसी क्रम में रविवार को ग्राम पंडरी पानी के साप्ताहिक बाजार में पंचायत द्वारा खतरे को भांपते हुए दुकानदार व ग्राहकों को सतर्क और जागरूक करने के उद्देश्य से कोटवार के माध्यम से मुनादी कराकर सचेत किया गया। पंचायत सचिव दिलीप कुमार मरावी ने बताया कि दो सप्ताह से लगातार इसी प्रकार मुनादी कराई जा रही हैं। रविवार को एक बार फिर मुनादी के बाद जहां सूर्यास्त के पहले दुकानदारों व बाजार करने आए लोग बाजार बंद कर घर की ओर चले गए। रविवार का साप्ताहिक बाजार आम दिनों की अपेक्षा समय से पहले दिन डूबने के पूर्व ही बंद हो गया। मटके का पानी पी गई बाघिन बाघिन ने दो दिन पूर्व शिकार करने के बाद पुनः शनिवार की रात आबादी के अंदर पहुंचकर गौशाला में बंधे पशुओं का शिकार करने का प्रयास किया। इस दरमियान बाघिन ने मटके में रखे पानी को पीकर अपनी प्यास बुझाई है। ग्रामीणों ने बताया कि वह सभी पास के मकान की छत पर वह सुरक्षित होने के लिहाज से बैठ रहे। रात्रि में ज बाघिन ने गौशाला के नजदीक पहुंचकर पशुओं को ले जाने के चक्कर में झपट्टा मारी तो आहट और पशुओं द्वारा चिल्लाने की आवाज आने लगी। तब हमारे द्वारा टार्च के रोशनी और हल्ला मचाया गया। तब बाघिन वहां से हटकर अरहर के खेत में रात भर डेरा जमाएं रहीं और सुबह उजाला होने के पूर्व जंगल में चली गई।

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