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निज्जर हत्याकांड के आरोपियों पर SC में कनाडा चलाएगा केस, गिरफ्त में हैं 4 भारतीय

ओटावा खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा सरकार ने चार भारतीय नागरिकों के खिलाफ “सीधा अभियोग” (Direct Indictment) दायर करने का फैसला लिया है। इस फैसले के कारण सुरे प्रांतीय अदालत में चल रही प्रारंभिक सुनवाई को रोक दिया गया है, और अब यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा। द इंडियन एक्सप्रेस ने बीसी प्रॉसिक्यूशन सर्विस के प्रवक्ता के हवाले से ये जानकारी दी। सीधा अभियोग दायर होने का मतलब है कि मामले में प्रारंभिक सुनवाई नहीं होगी और मामला सीधे ट्रायल के लिए सुप्रीम कोर्ट में जाएगा। इस प्रक्रिया में अभियुक्तों के वकीलों को अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह करने और मामले के खिलाफ साक्ष्य एकत्र करने का मौका नहीं मिलता। सीधे शब्दों में कहें तो निज्जर की कथित हत्या के आरोपियों के वकीलों को सरकारी गवाहों से जिरह करने का मौका नहीं मिल पाएगा। क्यों लिया गया यह कदम? कनाडा के आपराधिक संहिता के तहत, सीधा अभियोग एक विशेष अधिकार है जिसे बहुत कम मामलों में लागू किया जाता है। यह तब इस्तेमाल में लाया जाता है जब जनता के हित में ऐसा करना आवश्यक हो, जैसे कि गवाहों, उनके परिवारों, या मुखबिरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं हों। कौन हैं आरोपी? चारों आरोपी भारतीय नागरिक हैं। इनके नाम —करन बराड़, अमनदीप सिंह, कमलप्रीत सिंह, और करनप्रीत सिंह हैं। इनको मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों पर 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सुरे में स्थित एक गुरुद्वारे के परिसर में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करने का आरोप है। चारों अभियुक्तों पर फर्स्ट-डिग्री हत्या और हत्या की साजिश का आरोप लगाया गया है। ये पुलिस हिरासत में हैं और अब तक किसी को जमानत नहीं मिली है। अगली सुनवाई और प्रक्रिया पहले यह सुनवाई 21 नवंबर 2024 को सुरे प्रांतीय अदालत में होनी थी, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मुकदमा कब शुरू होने की उम्मीद है, इसके लिए कोई अस्थायी तारीख या समयसीमा नहीं है। ब्रिटिश कोलंबिया (बीसी) के सरे में एक गुरुद्वारे के परिसर में 18 जून, 2023 को निज्जर की हत्या के लिए इस साल मई में गिरफ्तार किए गए चार लोगों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद से मामले की सुनवाई पांच बार स्थगित की जा चुकी है। अब यह मामला 11 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट में एक केस मैनेजमेंट कॉन्फ्रेंस के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, बीसी प्रॉसिक्यूशन सर्विस के प्रवक्ता डेमिएन डार्बी ने बताया, “18 नवंबर 2024 को अभियोजन पक्ष ने सुरे प्रांतीय अदालत की फाइल को रोक दिया और अब सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से सीधा अभियोग चलाने का फैसला किया है।” सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर को हुई पहली सुनवाई में चारों अभियुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए, जबकि अमनदीप सिंह अपने वकील के माध्यम से उपस्थित रहे। अदालत ने अभियोजन पक्ष के आवेदन पर, और बचाव पक्ष की सहमति से, सुनवाई से संबंधित जानकारी के प्रकाशन पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। ट्रायल के समय पर अनिश्चितता अधिकारियों के अनुसार, अभी तक ट्रायल की तारीख या समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है। परीक्षण से पहले कई आवेदन दाखिल किए जाएंगे, लेकिन यह बताना मुश्किल है कि इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और अन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि निज्जर की हत्या में भारत सरकार का हाथ है। भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि कनाडा ने इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया है। गवाहों और सबूतों की स्थिति अभियोजन पक्ष का कहना है कि चार अभियुक्तों के अलावा अभी किसी और पर आरोप नहीं लगाया गया है। हालांकि, जिन गवाहों के पास प्रासंगिक और स्वीकार्य साक्ष्य हैं, उन्हें अदालत में बुलाया जाएगा। गवाहों की सूची अभी दाखिल नहीं की गई है। प्रवक्ता ने बताया कि यह सूची आमतौर पर ट्रायल शुरू होने से पहले दायर की जाती है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या की साजिश 1 मई 2023 से 18 जून 2023 तक एडमंटन (अल्बर्टा) और सुरे (बीसी) में रची गई थी। हत्या 18 जून 2023 को सुरे में की गई थी। क्या है डायरेक्ट इंडिक्टमेंट? भारतीय कानून में “डायरेक्ट इंडिक्टमेंट” (Direct Indictment) जैसी कोई विशिष्ट अवधारणा नहीं है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से कनाडा और अन्य देशों के कानूनी तंत्र में प्रचलित है, जहां अभियोजन पक्ष प्रारंभिक सुनवाई (preliminary hearing) को बायपास करते हुए सीधे मुख्य परीक्षण (trial) के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट या उच्चतर न्यायालय में ले जाता है। कुछ हद तक ये दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 209 से मेल खाती है। इसके तहत अगर किसी मामले में अभियुक्त पर सत्र न्यायालय में विचारणीय अपराध का आरोप है, तो निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) मामले को सत्र न्यायालय में ट्रांसफर कर देती है।

केंद्र ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए, 40 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एकरूपता सुनिश्चित हो

नई दिल्ली केंद्र ने कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण और पदों की पहचान सुव्यवस्थित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें ऐसे पदों की समय-समय पर पहचान और उनका मूल्यांकन करने के लिए समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है। दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि कोई पद दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उपयुक्त समझा जाता है, तो उसके बाद के सभी पदोन्नति वाले पद भी दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित रहेंगे। ये दिशानिर्देश दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप हैं। यह कदम दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम, 2016 के कार्यान्वयन में विसंगतियों को चिन्हित करने तथा पदों की पहचान करने में अनधिकृत कार्यों के लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) जैसी संस्थाओं की आलोचना करने के बाद उठाया गया है। उच्च न्यायालय ने इस महीने की शुरुआत में टिप्पणी की थी कि केवीएस ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए स्वतंत्र रूप से पदों की पहचान करके अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है और विभिन्न विभागों के बीच अधिनियम की समझ में विसंगतियों को उजागर किया है। अदालत ने इसके साथ दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) को एक समान दिशानिर्देश स्थापित करने का आदेश दिया। अद्यतन दिशानिर्देशों का उद्देश्य केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों में दिव्यांग व्यक्तियों के रोजगार में समावेशिता, निष्पक्षता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। नये दिशा-निर्देशों में मंत्रालयों और विभागों से दिव्यांग के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए समितियां गठित करने को कहा गया है, ताकि सभी पदों की उपयुक्तता का आकलन किया जा सके। दिशानिर्देश के मुताबिक प्रौद्योगिकीय प्रगति और उभरती नौकरी आवश्यकताओं को शामिल करने के लिए चिह्नित पदों की हर तीन साल में व्यापक समीक्षा आवश्यक है। दिशा-निर्देशों में दृष्टि बाधित, चलने-फिरने में अक्षमता, श्रवण बाधिता और बौद्धिक अक्षमता सहित विभिन्न श्रेणियों में सीधी भर्ती और पदोन्नति में चार प्रतिशत आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त दिशानिर्देश लंबित रिक्तियों को समय पर भरने, पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार तथा आरक्षण नीतियों से छूट के लिए तीन वर्ष की वैधता अवधि पर भी जोर देते हैं। राष्ट्रीय दिव्यांगजन रोजगार संवर्धन केन्द्र (एनसीपीईडीपी) के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि मानक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त पदों की पहचान करना केवल आरक्षण संबंधी अनिवार्यताओं को पूरा करना नहीं है; यह करियर विकास को सक्षम करने की दिशा में एक कदम है।  

मंकीपॉक्स संक्रमण कई तरह से स्वास्थ्य को गंभीर रूप से क्षति पहुंचाने वाला हो सकता है, कई देशों में फिर बढ़ने लगे उसके मामले

नई दिल्ली पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई देशों में संक्रामक बीमारियों के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। साल 2019 के अंत में शुरू हुई कोरोना महामारी के बाद मंकीपॉक्स संक्रमण ने भी लोगों को खूब परेशान किया। मंकीपॉक्स (एमपॉक्स) संक्रमण कई तरह से स्वास्थ्य को गंभीर रूप से क्षति पहुंचाने वाला हो सकता है। न सिर्फ इसका संक्रमण दर ज्यादा है, बल्कि संक्रमण की स्थिति में गंभीर जटिलताओं का जोखिम भी अधिक हो सकता है। मंकीपॉक्स के वैश्विक खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसे दो बार ‘स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित कर चुका है। हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कई देशों में एक बार फिर से मंकीपॉक्स के मामले रिपोर्ट होने शुरू हो गए हैं। पब्लिक हेल्थ एजेंसी ऑफ कनाडा (पीएचएसी) ने जानकारी दी है कि देश में पहली बार क्लेड-1बी स्ट्रेन के मामले की पुष्टि की गई है। क्लेड-1 संक्रमण के कारण मृत्युदर और संक्रमण दोनों का खतरा अधिक माना जाता रहा है। इससे संक्रमित लोगों में एन्सेफलाइटिस और निमोनिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। पीएचएसी ने एक रिपोर्ट में बताया कि संक्रमित व्यक्ति ने हाल ही में एमपॉक्स प्रभावित देश की यात्रा की थी। वहां से लौटते ही उसमें संक्रमण के लक्षण देखे गए। मंकीपॉक्स की पुष्टि के बाद संक्रमित को आइसोलेट किया गया है। इसके साथ संक्रमित के संपर्क में आए लोगों की भी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। वैसे तो क्लेड II मंकीपॉक्स के मामले 2022 से कनाडा में देखे जाते रहे थे, लेकिन यह देश में क्लेड I मंकीपॉक्स का पहला पुष्ट मामला है। इससे पहले 15 नवंबर कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ ने अमेरिका में भी क्लेड 1 मंकीपॉक्स के पहले की पुष्टि की। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमण के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए फिर से सभी देशों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। मंकीपॉक्स और इसका जोखिम स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को मंकीपॉक्स के जोखिमों को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है, विशेषतौर पर जिन देशों में इसके मामले इन दिनों रिपोर्ट किए जा रहे हैं। एमपॉक्स (मंकीपॉक्स), मंकीपॉक्स वायरस से होने वाला एक संक्रामक रोग है। इससे दर्दनाक दाने, बढ़े हुए लिम्फ नोड्स के साथ तेज बुखार हो सकता है। इसका प्रकोप मुख्यरूप से समलैंगिक, बाइसेक्सुअल लोगों में अधिक देखा जाता रहा है। इसके नए स्ट्रेन क्लेड 1 के कारण अपेक्षाकृत अधिक स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को इसके कारण मस्तिष्क में सूजन होने का जोखिम हो सकता है।

शोपियां के हीर पोरा जंगल में मिली चट्टानों पर पाई गई ये नक्काशी हिंदू देवताओं और प्रतीकों को दर्शाती प्रतीत होती है

शोपियां जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में स्थित हीर पोरा के घने जंगल में प्राचीन नक्काशी और संरचनाएं खोजी गई हैं, जिससे क्षेत्र के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास की झलक मिलती है। पहाड़ की चट्टानों पर पाई गई ये नक्काशी हिंदू देवताओं और प्रतीकों को दर्शाती प्रतीत होती है, हालांकि इस मामले में सटीक जानकारी अभी भी अपेक्षित है। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर उकेरी गई नक्काशियों में हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियां और प्रतीक चिह्न दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन देवी-देवताओं की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। नक्काशियों में देवी-देवताओं के प्रतीक चिह्न इस बात का संकेत हैं कि यह स्थान प्राचीन समय में धार्मिक गतिविधियों और पूजा-अर्चना का केंद्र रहा होगा। ये नक्काशियां स्थानीय ग्रामीणों और वन पथों की खोज करने वाले पर्वतारोहियों को मिली। उनमें देवताओं की छवियां, प्रतीक और प्राचीन लेखन के धुंधले निशान शामिल हैं। यह स्थल हीर पोरा में मुगल रोड से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। इस खोज तक पहुंचने के लिए कठिन रास्ता तय करना पड़ता है। आगे की खोज से इन प्राचीन नक्काशियों के बारे में अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है। ऐसी खोज न केवल स्थानीय इतिहास को समझने में मदद करती हैं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होती हैं। स्थानीय इतिहासकारों और पुरातत्वविदों को साइट की जांच करने और इसकी महत्व की पुष्टि करने के लिए कहा गया है। एक स्थानीय प्रबुद्ध ने कहा, “यह खोज हमें क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद कर सकती है।” ग्रामीणों को इस खोज पर गर्व है और उम्मीद है कि यह शोपियां के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करेगी। उन्होंने नक्काशी को क्षति और क्षरण से बचाने की भी अपील की। इस खोज ने इतिहासकारों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच रुचि जगा दी है, जो इस स्थल को संरक्षित करने के लिए तत्काल प्रयास करने का आग्रह कर रहे हैं। यह खोज हमें कश्मीर में छिपे समृद्ध इतिहास की याद दिलाती है, जिसे तलाशने और समझने की जरूरत है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेपाली सेना के साथ रणनीतिक चर्चा की, हुई सार्थक बातचीत

नई दिल्ली भारतीय थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी नेपाल की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा के बाद रविवार को भारत लौट आए। इस दौरान उन्होंने नेपाली सेना के साथ रणनीतिक चर्चा की। सेनाध्यक्ष ने यहां गोरखा दिग्गजों के साथ बातचीत की। उन्होंने नेपाली सेना प्रमुख को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि सेनाध्यक्ष की यह नेपाल यात्रा काफी सफल रही। इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग, सांस्कृतिक संबंधों और आपसी सम्मान को मजबूत किया है। दोनों सेनाओं के बीच दोस्ती के संकेत के रूप में, भारतीय सेना ने नेपाली सेना को वेलोर माउंट घोड़े और सेंटिनल डॉग भेंट किए हैं। जनरल उपेन्द्र द्विवेदी को नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल द्वारा शीतल निवास, काठमांडू में नेपाली सेना के जनरल के मानद रैंक से सम्मानित किया गया। यह अनूठी परंपरा भारतीय और नेपाली सेनाओं के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करती है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये चर्चाएं वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करने, सैन्य संबंधों, संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण सहयोग और क्षमता विकास को बढ़ाने पर केंद्रित थीं। अपनी यात्रा के दौरान, सीओएएस ने नेपाल के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की। उन्होंने नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की। इसके साथ ही सेनाध्यक्ष ने नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के साथ भी महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस यात्रा में उन्होंने नेपाल के रक्षा मंत्री मनबीर राय से भी बातचीत की। इंडियन आर्मी के चीफ व नेपाली सेना के सीओएएस जनरल अशोक राज सिगडेल और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ भी सार्थक चर्चा हुई। ये बातचीत आपसी सम्मान व द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सीओएएस ने नेपाल में आयोजित एक समारोह में वीर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर नेपाल के बहादुरों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। बाद में, उन्होंने नेपाली सेना मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर की समीक्षा की। भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करना यात्रा का केंद्रीय विषय था। जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने नेपाली सेना के सीओएएस जनरल अशोक राज सिगडेल से मुलाकात की और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए आपसी हित और इससे संबंधित पहलुओं पर चर्चा की। सीओएएस ने दोनों देशों और उनकी सेनाओं के बीच अद्वितीय सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों का प्रत्यक्ष अनुभव किया। द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके महत्व को पहचानते हुए, भारतीय और नेपाली सेनाओं के बीच बढ़ते सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी चर्चा की गई। शिवपुरी में नेपाल आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में सीओएएस ने “युद्ध के बदलते चरित्र” पर एक व्याख्यान दिया। उन्होंने दोनों सेनाओं की दक्षताओं और क्षमताओं के पारस्परिक निर्माण के लिए प्रतिबद्धताओं को मजबूत और गहरा करने पर जोर दिया। सीओएएस ने पोखरा में पूर्व सैनिक रैली में भाग लिया, और गोरखा दिग्गजों के साथ बातचीत की। सीओएएस ने विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को स्वीकार करते हुए उनकी भूमिका की सराहना की। रैली के दौरान एक भावुक क्षण 18वीं बटालियन, जम्मू और कश्मीर राइफल्स के सूबेदार मेजर और मानद कैप्टन गोपाल बहादुर थापा (सेवानिवृत्त) के साथ उनकी बातचीत थी, जो उनकी अपनी इकाई के सूबेदार मेजर थे। उन्होंने उनके कल्याण के लिए भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को भी दोहराया, जिसमें बुटाला और डुंगाधी में एक-एक ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक के अलावा ईसीएचएस पैनल में शामिल अस्पतालों की संख्या में वृद्धि की घोषणा भी शामिल है। ये पहल पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति भारत सरकार और भारतीय सेना के संकल्प को दर्शाती है।  

उत्तर कोरिया पर यूक्रेन ने किया सबसे बड़ा मिसाइल हमला, इस हमले में 500 सैनिकों की मौत, दहल उठा रूस

सियोल रूस के पश्चिमी कु‌र्स्क क्षेत्र में कीव की ओर से किए गए मिसाइल हमले में 500 उत्तर कोरियाई सैनिक मारे गए। ग्लोबल डिफेंस कार्प का हवाला देते हुए योनहाप समाचार एजेंसी ने दावा किया कि कु‌र्स्क क्षेत्र पर स्टार्म शैडो मिसाइल से यूक्रेन ने हमला बोला था। उत्तर कोरिया ने रूस में 10,000 से अधिक सैनिक भेजे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि कु‌र्स्क में युद्ध में शामिल उत्तर कोरियाई सैनिक हताहत हुए हैं। रॉयटर्स के अनुसार, रूस ने कु‌र्स्क क्षेत्र में सैन्य अभियान तेज कर दिया है। वह यूक्रेनी सेना को पीछे धकेलने में कामयाब भी हो रही है। इस अभियान के कारण यूक्रेन ने कु‌र्स्क में कब्जा किए गए क्षेत्र का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खो दिया है। अगस्त में हमले के बाद लगभग 1,376 वर्ग किलोमीटर पर यूक्रेनी सेना ने नियंत्रण कर लिया था। अब यह लगभग 800 वर्ग किलोमीटर बचा है।   आगे बढ़ रही है रूसी सेना कु‌र्स्क में हमले का कीव का उद्देश्य पूर्वी और उत्तर पूर्वी यूक्रेन में रूसी हमलों को रोकना था। इसका शुरुआत में लाभ भी दिखा, लेकिन अब रूसी सेना यूक्रेन के पूर्वी डोनेट्स्क में आगे बढ़ रही हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनका मानना है कि रूसी राष्ट्रपति का मुख्य उद्देश्य पूरे डोनबास पर कब्जा करना था, जिसमें डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्र शामिल हैं। पुतिन के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात हमें कु‌र्स्क क्षेत्र से बाहर धकेलना है। वह हमें 20 जनवरी तक क्षेत्र से बाहर धकेलना चाहते हैं, जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। रूस ने कीव पर ड्रोन से बोला हमला यूक्रेन ने कीव पर ड्रोन से हमला बोला। यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली की ओर से कीव क्षेत्र को निशाना बनाने का प्रयास करने वाले 10 ड्रोनों को नष्ट कर दिया गया। रात भर के दौरान यूक्रेन ने 73 ड्रोन गिराने का दावा किया है। किसी तरह के नुकसान की अब तक सूचना नहीं है। वहीं यूक्रेन ने भी कु‌र्स्क क्षेत्र में ड्रोन से हमला बोला है। रूस ने इनमें से 27 ड्रोन को मार गिराया है। बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पिछले एक हजार दिनों से जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि वह सत्ता में आने के बाद यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध को रुकवा देंगे। अब पूरी दुनिया की निगाहें इसी पर टिकीं हैं।

रूस अपनी नई हाइपरसोनिक मिसाइल ओरेश्निक को तैनात कर चुका है, 24 घंटे में कर सकते है उपयोग

रूस यूक्रेन ने अमेरिकी लॉन्ग-रेंज मिसाइल ATACMS से रूस के कुर्स्क इलाके में हमला किया है। इसके जवाब में, रूस अपनी नई हाइपरसोनिक मिसाइल  “ओरेश्निक” को तैनात कर चुका है। अब यह मिसाइल राष्ट्रपति पुतिन के आदेश का इंतजार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 24 घंटे में रूस इसका इस्तेमाल कर सकता है।  रूस की “ओरेश्निक” मिसाइल न केवल उसकी सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि पश्चिमी देशों और नाटो को एक सीधी चेतावनी भी है। इस कदम से यूरोप में तनाव और बढ़ने की आशंका है। अब दुनिया पुतिन के अगले कदम का इंतजार कर रही है।   यूरोप के 16 और 44 नाटो बेस रूस की रेंज में “ओरेश्निक” मिसाइल की ताकत इतनी है कि यह न केवल यूक्रेन बल्कि यूरोप के 16 देशों में फैले  44 नाटो देशों को भी निशाना बना सकती है। इनमें पोलैंड, जर्मनी, रोमानिया, इटली, बेल्जियम और इंग्लैंड जैसे महत्वपूर्ण नाटो बेस शामिल हैं।  पुतिन पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि रूस की सीमा पर किसी भी देश ने लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया, तो वह जवाबी हमले में देर नहीं करेगा। अब “ओरेश्निक” का तैनात होना पश्चिमी देशों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।   मिसाइल की अद्वितीय क्षमताएं   12,300 किमी/घंटा, जिससे यह रडार की पकड़ से बाहर रहती है।   5,500 किमी, एक बार लॉन्च होने पर कई देशों तक पहुंचने में सक्षम।   एक साथ 6-8 टारगेट पर हमला करने की क्षमता।   पारंपरिक और न्यूक्लियर दोनों तरह के हथियारों से लैस।   यह दिशा और एंगल बदलकर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देती है।   नाटो बेस पर संभावित निशाने पोलैंड : अमेरिकी एयरफोर्स और फॉरवर्ड ऑपरेटिंग साइट्स।  जर्मनी : रामस्टीन एयर बेस, जहां अमेरिकी और नाटो का मुख्यालय है।   रोमानिया : नाटो के पूर्वोत्तर बेस और एजीस एशोर मिसाइल सिस्टम।   इंग्लैंड : रॉयल एयर फोर्स बेस, जहां अमेरिका और नाटो के बड़े ऑपरेशन्स चलते हैं।   बेल्जियम और इटली : अमेरिकी परमाणु हथियारों के ठिकाने।   पश्चिमी देशों के लिए चुनौती   रूसी सैन्य विशेषज्ञों का दावा है कि अमेरिका और नाटो के पास “ओरेश्निक” का जवाब नहीं है। इसकी गति और तकनीक इसे रोकने के लिए लगभग असंभव बनाती है। पश्चिमी देशों की मिसाइलें, जैसे “डार्क ईगल,” स्पीड और रेंज में इससे काफी पीछे हैं।   कितनी घातक है “ओरेश्निक”? अगर यह मिसाइल रूस के अस्त्राखान से दागी जाती है, तो:   पोलैंड : 8 मिनट में   जर्मनी : 11 मिनट में   बेल्जियम : 14 मिनट में   इंग्लैंड : 19 मिनट में पहुंच सकती है। 

महाराष्ट्र में शपथ ग्रहण समारोह कल आयोजित होने की संभावना, मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकरार: दीपक केसरकर

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज करने के बाद, भाजपा-नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी कर ली है। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ मंत्री दीपक केसरकर ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह कल यानी सोमवार को आयोजित होने की संभावना है। शपथ से पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच कड़ी टक्कर है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह में केवल मुख्यमंत्री और उनके संभावित डिप्टी शपथ लेंगे। कैबिनेट में शामिल अन्य मंत्रियों के नामों पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसके अलावा, सीएम पद को लेकर अंतिम फैसला गठबंधन के सहयोगियों के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। फडणवीस ने कहा, “मुख्यमंत्री को लेकर कोई विवाद नहीं होगा। यह पहले दिन से तय है कि चुनाव के बाद तीनों दलों के नेता मिलकर फैसला करेंगे।” महायुति ने 288 में से 235 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है। भाजपा ने 132 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। वहीं विपक्ष ने मुख्यमंत्री पद को लेकर शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें फडणवीस के नेतृत्व में काम करना पड़ सकता है। पुरानी खींचतान की कहानी मुख्यमंत्री पद को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से खींचतान होती रही है। 2019 में, उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच सत्ता साझा करने को लेकर मतभेद के चलते भाजपा और शिवसेना का गठबंधन टूट गया था। इसके बाद कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर उद्धव ठाकरे ने महा विकास अघाड़ी सरकार बनाई। हालांकि, 2022 में एकनाथ शिंदे ने ठाकरे के खिलाफ विद्रोह कर दिया और अपने साथ कई विधायकों को लेकर भाजपा के साथ सरकार बना ली। शिंदे तब मुख्यमंत्री बने। बाद में एनसीपी के अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत करते हुए शिंदे सरकार को समर्थन दिया। “लड़की-बहन योजना” का असर भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति की बड़ी जीत में “लड़की-बहन योजना” जैसी कल्याणकारी योजनाओं का बड़ा योगदान माना जा रहा है। इस योजना ने महिलाओं और युवाओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत की है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री पद किसे मिलेगा—देवेंद्र फडणवीस या एकनाथ शिंदे। गठबंधन के भीतर एकता बनाए रखना इस नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

एनएसीटीए ने पीटीआई विरोध मार्च पर संभावित आतंकवादी हमले की चेतावनी दी

इस्लामाबाद राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण (एनएसीटीए) ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के विरोध मार्च को निशाना बनाकर संभावित आतंकवादी हमले की चेतावनी दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को जारी किया गया एक अलर्ट, जो शनिवार को मीडिया में सामने आया, में कई स्रोतों से मिली जानकारी का हवाला दिया गया है। इसमें बताया गया कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादी अफगानिस्तान से पाकिस्तान में प्रवेश कर चुके हैं और प्रमुख शहरों में घुसपैठ कर चुके हैं। एनएसीटीए ने समूह की पहचान फितना अल-खवारिज के रूप में की है, जिसे पहले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के नाम से जाना जाता था। यह आतंकवादी कथित तौर पर 19-20 नवंबर की रात को पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के जरिए पाकिस्तान में घुसे थे। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि आतंकवादी पीटीआई की सार्वजनिक सभा को हमले के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। जवाब में, राजधानी भर में सुरक्षा उपायों को काफी मजबूत किया गया है, अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रहने के निर्देश दिए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले शनिवार को गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पीटीआई के अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर से संपर्क किया था। इस दौरान उन्होंने यह सूचित किया था कि सरकार उच्च-स्तरीय बेलारूसी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान इस्लामाबाद में किसी भी तरह के धरना या रैलियों की अनुमति नहीं देगी। नकवी ने सुरक्षा चिंताओं को इस निर्णय का कारण बताया। बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल 24 से 27 नवंबर तक दौरा करने वाले हैं। 24 नवंबर को पीटीआई के विरोध-प्रदर्शन से पहले सरकार ने तीन दिनों के लिए पंजाब भर में धारा 144 लागू करते हुए इस्लामाबाद में हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया। अधिकारियों ने श्रीनगर हाईवे, जीटी रोड और इस्लामाबाद एयरपोर्ट से जुड़ने वाले रेड जोन की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों को सील कर दिया है। कई प्रवेश बिंदुओं पर कंटेनर रखे गए हैं, जबकि रेंजर्स, पुलिस और फ्रंटियर कोर के कर्मियों को संवेदनशील स्थानों, खासकर डी-चौक के आसपास तैनात किया गया है। अन्य एहतियाती उपायों में इस्लामाबाद, खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं का आंशिक निलंबन शामिल है। इस्लामाबाद और रावलपिंडी में मेट्रो बस सेवाओं जैसे सार्वजनिक परिवहन को रोक दिया गया है। इसके अलावा, विरोध-प्रदर्शन और हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान सुरक्षा भंग होने से बचाने के लिए फैजाबाद के सभी बस टर्मिनलों पर बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा बढ़ाए जाने से सरकार की चिंता स्पष्ट होती है, जैसे कि संभावित आतंकवादी खतरा और राजधानी में बढ़ते तनाव के बीच सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।

शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की मांग, ‘संसद के शीतकालीन सत्र में हो अडानी-मणिपुर मुद्दे पर चर्चा’

नई दिल्ली संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई. बैठक में कांग्रेस ने अडानी और मणिपुर मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की. इसके अलावा विपक्षी दलों ने उत्तर भारत में प्रदूषण और रेल दुर्घटनाओं पर भी चर्चा की मांग की. कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने बताया कि उनकी पार्टी ने अडानी ग्रुप पर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों पर संसद में चर्चा की अनुमति देने का सरकार से अपील की.  उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि सोमवार को संसद की बैठक में सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया जाए. राज्यसभा सदस्य तिवारी ने कहा कि यह देश के आर्थिक और सुरक्षा हितों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि कंपनी ने अपनी सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल सौदा पाने के वास्ते नेताओं और नौकरशाहों को 2,300 करोड़ रुपये से अधिक का कथित तौर पर भुगतान किया. 20 दिसंबर तक चलेगा सत्र संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होकर 20 दिसंबर तक चलेगा. इस सत्र के लिए वक्फ संशोधन विधेयक समेत 16 विधेयक सूचीबद्ध किए गए हैं. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा, कांग्रेस नेता जयराम रमेश और गौरव गोगोई के अलावा टी शिवा, हरसिमरत कौर बादल और अनुप्रिया पटेल शामिल हुए. वक्फ (संशोधन) विधेयक भी सूचीबद्ध लंबित विधेयकों में वक्फ (संशोधन) विधेयक भी शामिल है जिसे दोनों सदनों की संयुक्त समिति द्वारा लोकसभा में अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. समिति को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है. समिति के विपक्षी सदस्य समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जगदंबिका पाल समिति की बैठकों में बाधा डाल रहे हैं और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप करने की मांग की है.  

ब्रिटेन में आयुर्वेद को एक प्रभावी और बेहतर चिकित्सा पद्धति बताते हुए 10 हजार आयुर्वेदिक डॉक्टरों की होगी भर्ती

ब्रिटेन ब्रिटेन में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। अब ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना (एनएचएस) में आयुर्वेद को औपचारिक रूप से शामिल करने की तैयारी शुरू हो गई है। एक सर्वदलीय कमेटी ने आयुर्वेद को एक प्रभावी और बेहतर चिकित्सा पद्धति बताते हुए इसकी सिफारिश की है। यह भारतीय आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए एक बड़ी खुशखबरी साबित हो सकती है। ब्रिटेन में अगले पांच साल में 10 हजार आयुर्वेदिक डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी। साथ ही, ब्रिटेन में आयुर्वेद से संबंधित सौंदर्य, स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थानों की संख्या भी पांच साल में 500 तक पहुंचने का अनुमान है। आयुर्वेद को लेकर ब्रिटेन में बढ़ता रुझान ब्रिटेन में आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में ब्रिटेन में आयुर्वेद से जुड़ी लगभग 100 संस्थान हैं, लेकिन अगले कुछ सालों में इनकी संख्या बढ़कर 500 हो सकती है। यह बदलाव खासकर सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है। भारतीय आयुर्वेदिक डिग्री को मान्यता ब्रिटेन के आयुर्वेद सेंटर फॉर एक्सीलेंस (ACE) के प्रमुख अमरजीत सिंह ब्रह्मा ने बताया कि एनएचएस में आयुर्वेद को शामिल करने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो सकती है। इसके बाद भारत से भी आयुर्वेद के डॉक्टरों के लिए आवेदन किए जा सकते हैं, बशर्ते वे सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थानों से आयुर्वेद में डिग्री प्राप्त करें। इससे भारत के आयुर्वेदिक डॉक्टरों को लाभ होगा, क्योंकि वे ब्रिटेन में नौकरी के लिए आवेदन कर सकेंगे। आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता ब्रिटेन में हर 10 में से 6 लोग जीवन में कम से कम एक बार आयुर्वेद का इस्तेमाल कर चुके हैं। एसीई की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के दौरान गूगल पर आयुर्वेद से जुड़ी खोजों में 380% की वृद्धि हुई है। ब्रिटेन में सबसे ज्यादा लोग स्किन और हेयर केयर के लिए आयुर्वेद को ढूंढ रहे हैं। इसके बाद पेट संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए आयुर्वेद का उपयोग सबसे ज्यादा देखा गया। ब्रिटिश आयुर्वेदिक कॉलेज में छात्रों की संख्या में इजाफा ब्रिटेन में आयुर्वेदिक शिक्षा लेने वाले छात्रों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। ब्रिटिश कॉलेज फॉर आयुर्वेद में इस साल दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में 70% का इजाफा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि इन छात्रों में ब्रिटिश छात्रों के बाद दूसरे नंबर पर फ्रेंच और तीसरे नंबर पर जर्मन छात्र हैं, जो आयुर्वेदिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए ब्रिटेन आ रहे हैं। अंत में बता दें कि ब्रिटेन में आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता और सरकार की ओर से इस पद्धति को औपचारिक मान्यता मिलने से भारतीय आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं। अगले पांच साल में 10,000 आयुर्वेदिक डॉक्टरों की भर्ती होने की संभावना है साथ ही आयुर्वेद से जुड़ी संस्थानों की संख्या में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। यह भारतीय आयुर्वेद के लिए एक सकारात्मक कदम है और इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलने का संकेत भी है।  

पुलिस ने अब तक 41 आरोपी किए गिरफ्तार, मणिपुर में विधायकों के घर को नुकसान पहुंचाने वाले सात और लोगों पर सख्ती

इंफाल. मणिपुर में पिछले साल मई में भड़की हिंसा अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में कई मंत्रियों और विधायकों के घर फूंक दिए गए, जिसके चलते यहां के लोग डर के साय में जी रहे हैं। हालांकि, पुलिस लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। उसने इंफाल घाटी में 16 नवंबर को विधायकों के आवासों को नुकसान पहुंचाने के आरोप में सात और लोगों को गिरफ्तार किया है। बता दें, ये गिरफ्तारियां पिछले दो दिनों में की गई हैं। पुलिस ने बताया कि काकचिंग जिले से शुक्रवार को तीन लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं, इंफाल पश्चिम जिला पुलिस ने शनिवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया। इन गिरफ्तारियों के साथ निर्वाचित सदस्यों के आवासों पर आगजनी के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। संपत्ति लूटने वालों की हुई पहचान: सीएम मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि 16 नवंबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान मंत्रियों और विधायकों की संपत्ति लूटने में शामिल संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने आगे कहा, ‘लोकतांत्रिक आंदोलन के नाम पर कुछ गिरोहों ने मंत्रियों और विधायकों के आवास लूट लिए और जला दिए। सीसीटीवी के माध्यम से संदिग्धों की पहचान की गई है और उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। मुझे सार्वजनिक रूप से यह कहते हुए शर्म आती है कि मणिपुर में ऐसी चीजें हो रही हैं।’

कोई उपचुनाव नहीं लड़ेगी बसपा, मायावती की करारी हार के बाद बड़ा एलान

लखनऊ. यूपी में नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अब कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग फर्जी मतदान रोकने के लिए कोई सख्त निर्णय नहीं उठाता है तब तक बसपा किसी भी उपचुनाव में भाग नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि पहले बैलेट से फर्जी मतदान होते थे अब यह ईवीएम से भी होने लगा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर्फ उपचुनाव ही नहीं लड़ेंगे। बाकी चुनाव में भाग लेंगे। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती के इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अब यूपी में उपचुनाव होने भी नहीं हैं। हालांकि, अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर कोर्ट का फैसला होने के बाद उपचुनाव हो सकते हैं।

दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश हो रही है, IMD ने 7 राज्यों के लिए जारी किया रेड और ऑरेंज अलर्ट

नई दिल्ली इस समय देश में मौसम में बड़ा बदलाव हो रहा है। जहां एक ओर उत्तर भारत में घना कोहरा छाया हुआ है, वहीं दूसरी ओर दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश हो रही है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी भी हो रही है, जिससे मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ने लगी है। मौसम विभाग ने दो चक्रवाती तूफान आने की चेतावनी दी है, जिससे कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना है। दो चक्रवाती तूफान आने का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि इस समय पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर, दक्षिण अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हो गया है। इस कारण एक लो प्रेशर एरिया बन गया है, जो धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और 25 नवंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक डिप्रेशन के रूप में तेज हो सकता है। इसके बाद यह तूफान तमिलनाडु और श्रीलंका के तट की ओर बढ़ेगा। इसके अलावा, एक पश्चिमी विक्षोभ भी अफगानिस्तान के पास सक्रिय हो गया है, जिसके प्रभाव से भी मौसम में बदलाव हो सकता है। इन राज्यों में होगी भारी बारिश मौसम विभाग ने 25-29 नवंबर तक भारी बारिश के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। यह भारी बारिश मुख्य रूप से दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में देखने को मिल सकती है। ठंड बढ़ने की संभावना उत्तर भारत में ठंड बढ़ने लगी है। उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान गिर रहा है, जिससे ठंड का असर बढ़ने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 24 और 28-30 नवंबर के दौरान सुबह और रात के समय घना कोहरा छा सकता है। हिमाचल प्रदेश में 27-29 नवंबर तक ठंड बढ़ने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में भी 28-30 नवंबर के बीच घना कोहरा छा सकता है। दिल्ली, राजस्थान, बिहार, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी धुंध छाने की संभावना है। न्यूनतम तापमान में गिरावट मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, जैसे हरियाणा के हिसार और राजस्थान के सीकर में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। समग्र प्रभाव इस समय का मौसम बहुत ही बदलाव से भरा हुआ है, जिसमें ठंडी और बारिश दोनों का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर जब तूफान और भारी बारिश के कारण परिस्थितियां बदल सकती हैं।

विधायक के स्वागत में गुलाल उड़ाया जा रहा था और इसी दौरान लगी आग, आसपास अफरा-तफरी मची, महिला और पाटिल घायल

कोल्हापुर महाराष्ट्र के पश्चिमी क्षेत्र के चांदगढ़ तालुक के महागांव में नवनिर्वाचित निर्दलीय विधायक शिवाजी पाटिल के स्वागत के दौरान एक दुर्घटना हो गई। दरअसल, विधायक के स्वागत में गुलाल उड़ाया जा रहा था और इसी दौरान आग लग गई। यह घटना तब हुई जब महिलाएं विधायक की आरती उतार रही थीं और उसी दौरान जेसीबी से गुलाल गिराया जा रहा था। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब विधायक शिवाजी पाटिल की आरती उतारी जा रही थी, तभी एक जेसीबी मशीन से गुलाल को हवा में उड़ाया गया। लेकिन अचानक, गुलाल और आग के संपर्क में आने से आग लग गई, जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आकर कुछ महिलाएं और विधायक शिवाजी पाटिल घायल हो गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि घायलों को गंभीर चोट नहीं आई। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का रिजल्ट शनिवार को घोषित किया जा चुका है। जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत मिला है। वहीं, प्रदेश की चांदगढ़ सीट से निर्दलीय उम्मीदवार शिवाजी पाटिल ने जीत दर्ज की है। शिवाजी पाटिल ने अपनी प्रतिद्वंदी एनसीपी के राजेश पाटिल को 24,134 वोटों से हराया था। इस जीत के बाद उनका स्वागत धूमधाम से किया जा रहा था, इसी दौरान यह हादसा हुआ। राज्य की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को एक चरण में वोटिंग हुई थी। 23 नवंबर को वोटों की गिनती हुई। इस विधानसभा चुनाव में महायुति को बंपर जीत हासिल हुई। वहीं महाअघाड़ी को हार मिली। महायुति को कुल 236 सीटें मिलीं तो महाअघाड़ी के खाते में 48 गईं तो अन्य को महज 4 से संतोष करना पड़ा।

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