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बाहर काम करने जाने की भी इजाजत, ब्रिटेन में जेल प्रहरियों-शिक्षकों से ज्यादा कैदियों का वेतन

लंदन. ब्रिटेन से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यहां के जेलों में बंद कैदियों को उनकी सुरक्षा करने वाले अधिकारियों के साथ-साथ माध्यमिक शिक्षकों, जैव रसायनज्ञों, मनोचिकित्सकों और दाइयों से अधिक वेतन मिल रहा है। यह दावा एक मीडिया रिपोर्ट में किया गया है। बता दें, कुछ कम सुरक्षा वाली खुली जेलों में कैदियों को काम के लिए बाहर निकलने की अनुमति है। मगर, दिन के अंत तक ये जेल में वापस आ जाते हैं। यह कदम कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज में जीवन वापस लाने के लिए तैयार करने के ठोस प्रयास का हिस्सा है। हालांकि, कैदियों और नागरिक समाज से संबंधित लोगों के बीच वेतन अंतर ने ब्रिटेन में आय असमानता के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटेन में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कैदी को पिछले साल 46,005 डॉलर यानी 38,84,491 रुपये मिले। इसका मतलब है कि उनका सकल वेतन लगभग 57,640 डॉलर (48,66,907 रुपये) था। गृह मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि नौ अन्य कैदियों की कमाई 28,694 डॉलर (24,22,814 रुपये) से ज्यादा थी, जिसका मतलब है कि औसत कामकाजी कैदी को प्रति वर्ष लगभग 25,061 डॉलर (21,16,057 रुपये) का भुगतान किया जा रहा था। इस बीच, एक जेल गार्ड का औसत वेतन 35,085 डॉलर (29,62,446 रुपये) है, जबकि नए भर्ती किए गए लोगों को प्रति वर्ष लगभग 30,073 डॉलर (25,39,252 रुपये) का भुगतान किया जाता है। कटौती के बाद भी सबसे ज्यादा कमाई की न्याय मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल कटौती के बाद दो अन्य कैदी थे, जिन्होंने सबसे ज्यादा 37,591 डॉलर (31,74,044 रुपये) की कमाई की और अन्य सात ने निजी बैंक खातों में 28,694 डॉलर (24,22,814 रुपये) और 37,591 डॉलर (31,74,044 रुपये) के बीच रखा। हालांकि कैदी कई तरह के काम करते हैं, लेकिन ज्यादा कमाई वाले व्यक्ति ट्रक चलाने का काम करते हैं। जेल सेवा के प्रवक्ता ने कहा, ‘कुछ अपराधियों को उनकी सजा के अंत में अस्थायी लाइसेंस पर रिहाई मिल जाती है। इससे उन्हें जेल लौटने से पहले अपना कुछ दिन समुदाय में बिताना पड़ता है, अक्सर काम करना पड़ता है। अगर वे काम कर रहे हैं, तो उनकी कमाई पर कर, अदालती जुर्माना और 40 प्रतिशत तक का शुल्क देना होगा, जिससे पीड़ितों के लिए चैरिटी को धन मुहैया कराया जाता है।’ इन लोगों की कमाई है कम कटौतियों के बावजूद, कैदी दाइयों से आगे थे, जिनका औसत वेतन 45,889 डॉलर (38,74,696 रुपये) था। जबकि बायोकेमिस्ट 45,844 डॉलर (38,74,274 रुपये), मनोचिकित्सक 45,864 डॉलर (38,72,585 रुपये) और चार्टर्ड सर्वेयर 43,908 डॉलर (37,07,428 रुपये) भी उनसे कम कमाते थे।

‘2025 में NDA को हर कीमत पर हराएंगे’, तेजस्वी यादव का बिहार उपचुनाव में हार के बाद पहला बयान

पटना. बिहार की चार सीटों पर हुए उपचुनाव में शनिवार (23 नवंबर) को जारी हुए नतीजों में इंडिया गठबंधन को भारी नुकसान हुआ है. सभी चार सीटों पर हार हुई है. इस हार के बाद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि बिहार उपचुनाव की जहां तक बात है तो लोकसभा में हम लोग जीते थे. अभी 2024 के विधानसभा उपचुनाव में हारे हैं. 2025 के चुनाव में हम लोग जीतेंगे. उधर दूसरी ओर तेजस्वी यादव ने झारखंड विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर प्रतिक्रिया दी. कहा कि जो जनसमर्थन बिहार और झारखंड के लोगों ने दिया उसके लिए हम आभारी हैं. पिछली बार झारखंड में मात्र एक सीट हम लोग जीत पाए थे. इस बार आरजेडी ने झारखंड में बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया है. लगातार हम लोगों का प्रयास रहा था कि जितनी सीट पर हम लोग लड़ें वो जीतें. चार सीट पर हम लोगों की जीत हुई है. एक-दो सीट पर बहुत ही कम मार्जिन से हम लोगों की हार हुई है. अगली बार और कोशिश होगी. तेजस्वी यादव ने कहा कि एक बात तो तय है कि झारखंड में हम लोग जीते हैं. बहुत ही प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं. उनको भी हम धन्यवाद देते हैं. बता दें कि बिहार में चार सीट रामगढ़, बेलागंज, तरारी और इमामगंज में उपचुनाव हुआ था. तरारी सीट को माले से छीनकर बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की है. रामगढ़ की बात करें तो आरजेडी से यह सीट छीनकर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. इसके अलावा इमामगंज सीट ‘हम’ के खाते में थी और उपचुनाव में भी ‘हम’ के पास ही है. बेलागंज सीट आरजेडी के पास थी लेकिन यहां से जेडीयू ने जीत दर्ज की है.

डायलिसिस कराने आए मरीजों में फैला HIV संक्रमण, पाकिस्तान-पंजाब के अस्पताल का स्टाफ निलंबित

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सीएम मरियम नवाज ने मुल्तान के निश्तार अस्पताल के मेडिकल स्टाफ को निलंबित करने का फैसला किया है। दरअसल इस अस्पताल के डायलिसिस विभाग से मरीजों में एचआईवी का संक्रमण फैला है। यही वजह है कि सीएम ने लापरवाही बरतने के आरोप में अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख समेत कई स्टाफ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। जांच में अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल में गंभीर किस्म की लापरवाही की गई, जिसकी वजह से अस्पताल में डायलिसिस कराने वाले कर्मचारियों में एचआईवी का संक्रमण फैला। मरियम नवाज ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट समेत विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जिन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उनमें मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर मुहम्मद काजिम, गुलाम अब्बास (नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख), पूनम खालिद (एसोसिएट प्रोफेसर), मोहम्मद कदीर (सीनियर रजिस्ट्रार), मलियाह जौहर, मोहम्मद आलमगीर (नेफ्रोलॉजी विभाग के मेडिकल ऑफिसर) और हेड नर्स नहीद परवीन शामिल हैं। जांच में पता चला है कि एचआईवी मामलों की पुष्टि के बाद भी अस्पताल के स्टाफ ने मामलों को दबाने की कोशिश की, जिसकी वजह से संक्रमण और फैला। सरकार के फैसले के विरोध में उतरे अस्पताल के अन्य कर्मचारी जांच में पता चला है कि डायलिसिस कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डिस्पोजेबल किट को कई मरीजों में इस्तेमाल किया जा रहा था, इसकी वजह से ही एचआईवी संक्रमण किडनी के मरीजों में फैला। दूसरी लापरवाही ये रही कि अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर और कर्मचारियों ने कई हफ्तों तक डायलिसिस विभाग का दौरा ही नहीं किया। मामला बढ़ने के बाद पंजाब की सीएम मरियम नवाज ने निश्तार अस्पताल का दौरा किया और गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य सचिव को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। हालांकि अस्पताल कर्मचारियों को निलंबित करने के बाद अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर की और सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया।

संजय राउत ने भारी मन से स्वीकारी हार, ‘हम बालासाहेब के शिवसैनिक हैं, निराश नहीं होते’

मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों से विपक्षी इंडिया गठबंधन सदमे में है। उसके घटक दल नतीजों को मानने को तैयार नहीं हैं। शिवसेना उद्धव गुट के संजय राउत ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि ये नतीजे न तो पार्टी और न ही महाराष्ट्र की जनता को स्वीकार हैं। वहीं, आज उन्होंने कहा है कि हम निराश नहीं हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम पर शिवसेना(UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि हम निराश नहीं हैं। हम लड़ने वाले लोग हैं। हम बाला साहेब ठाकरे के शिव सैनिक हैं। बाला साहेब ठाकरे साहब ने भी उनके जीवन में ऐसी बहुत हार-जीत देखी। हम चुनाव हारे या हमने सत्ता गवाई लेकिन उसको लेकर हमें कोई दुख नहीं है। हम लड़ते रहेंगे और महाराष्ट्र के खिलाफ जा काम हो रहे हैं, हम उसका विरोध करते रहेंगे। संजय राउत ने आगे कहा कि इन नतीजों से महाराष्ट्र की जनता भी दुखी है, वे खुश नहीं हैं, जश्न कहां है? भाजपा कार्यालय या एकनाथ शिंदे के आवास पर कुछ हुआ होगा, लेकिन जो नतीजे आए हैं, लोग अभी भी आश्चर्यचकित हैं कि यह कैसे हुआ। रुझान आ रहे थे तब भी राउत ने किया था विरोध इससे पहले संजय राउत ने रुझानों पर भी कहा था कि जय पराजय, हार जीत होती रहती है। लोकशाही में ये सब होता है लेकिन आज जो हो रहा है वह जनता का फैसला नहीं है। नतीजों में कुछ तो गड़बड़ है। संजय राउत ने जनादेश को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने गौतम अडाणी और उनके भतीजे पर अमेरिका में लगे आरोपों पर भी बयान दिए थे। उन्होंने कहा था, ‘दो दिन पहले गौतम अडाणी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में एक अरेस्ट वारंट निकला। दो हजार करोड़ के रिश्वत के केस से भाजपा की पोल खुल गई है और उसी को छिपाने के लिए अब चुनाव में खेल किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र अब गौतम अडानी की जेब में जा रहा है। हम इसे अडाणी राष्ट्र नहीं होने देंगे।’ एक नजर चुनावी नतीजों पर महाराष्ट्र चुनाव में महायुति गठबंधन ने 288 में से 230 सीटों पर जीत दर्ज की। जिसमें भाजपा ने 132, शिंदे की शिवसेना ने 57 और एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं। वहीं महाविकास आघाड़ी ने सिर्फ 46 सीटें जीतीं। जिसमें कांग्रेस ने 16 और शिवसेना ने 20 सीटें जीतीं। शिंदे की सेना ने 36 सीटों पर उद्धव गुट को दी मात अब इस बात को ऐसे समझिए कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने महाराष्ट्र चुनावों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 36 सीटों पर हराया। जिससे इस बात पर जनता का रूख सामने आता हुआ दिखा कि असली शिवसेना वही है जिसे दिवंगत बाल ठाकरे ने स्थापित किया था या नहीं। एक नजर जीत हार के समीकरण पर एक तरफ महायुति गठबंधन का हिस्सा एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 81 सीटों पर चुनाव लड़ी जिसमें 57 सीटों पर अपना कब्जा जमाया। दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 95 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे जिसमें केवल 20 सीटें ही जीती।  देखा जाए तो केवल 14 सीटों पर उसने शिंदे के उम्मीदवारों को हराया।

‘पंकज ने दहेज के चलते अपने परिवार को बताकर की हत्या’, पूर्वी लंदन में हर्षिता ब्रेला की बहन का दावा

लंदन. पूर्वी लंदन में कुछ दिन पहले एक कार की डिग्गी से भारतीय मूल की एक महिला का शव बरामद होने के बाद उसके परिजनों ने न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस 24 वर्षीय हर्षिता ब्रेला की हत्या के संदेह में उसके पति पंकज लांबा की तलाश कर रही है। वहीं, मृत महिला के परिवार ने इस मामले को दहेज से जोड़ा है। ब्रेला की बड़ी बहन सोनिया को संदेह है कि उसकी हत्या दहेज के लिए की गई थी। जबकि शादी के दौरान परिवार ने सोना और पैसा दिया था। उनका कहना है कि शादी के दौरान परिवार ने बहुत दहेज दिया था, लेकिन पंकज तब भी खुश नहीं था। वह हमसे लगातार दहेज मांग रहा था। 10 नवंबर को की गई हत्या नॉर्थम्पटनशायर पुलिस की जांच से पता चला है कि हर्षिता की हत्या 10 नवंबर को की गई थी। उसी रात, उन्हें अपने पति के साथ कॉर्बी में एक नौका विहार झील के किनारे टहलते हुए देखा गया, जहां वह रहती थीं। ब्रेला का शव कॉर्बी से पूर्वी लंदन (लगभग 145 किलोमीटर दूर) कार में लाया गया था। महिला का शव 14 नवंबर की सुबह इलफोर्ड में कार की डिग्गी में मिला था। कार कथित तौर पर उनके पति की थी। पिता का भी बड़ा आरोप इससे पहले, हर्षिता के पिता सबीर ब्रेला ने भी लांबा और उसके परिवार पर बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उनका कहना है, ‘पंकज मेरी बेटी को मारता था और पैसे लाने के लिए मजबूर करता था। आए दिन होने वाले झगड़ों के चलते वह अलग रहने लगी और गोदाम में काम करने लगी थी। अलग रहने के बावजूद लांबा उसके बैंक खातों को संभालता था। वह इस उम्मीद से पैसे देती रही कि किसी दिन सब सही हो जाएगा। उसे नहीं पता था कि अंत यह होगा।’ ‘हर्षिता की पिटाई की’ सोनिया ने कहा, ’29 अगस्त को जब पंकज ने हर्षिता की पिटाई की तो उसने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद भी  पंकज के परिवारवाले हमारे घर आए और फिर से दहेज की मांग करने लगे। मेरे पिता ने मांग को पूरा करने के लिए अपनी कुछ संपत्ति बेच दी और फरवरी तक मांग पूरी करने वाले थे। हाथ में पैसा आने के बाद हम उनकी मांगों को पूरा करने वाले थे।’ वह पंकज के आने का इंतजार कर रही थी: सोनिया हर्षिता ब्रेला के खिलाफ लांबा द्वारा 28 दिन का घरेलू हिंसा आदेश जारी किया गया था, जिसे उसकी हत्या के समय नवीनीकृत नहीं किया गया था। उनकी बड़ी बहन ने दावा किया कि हर्षिता हमें हर समय की जानकारी देती थी। यह मामला 30 अक्तूबर को बंद कर दिया गया था, जब पंकज ने जुर्माना भर दिया। मगर इस बारे में हर्षिता को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अपनी बहन का अंतिम वीडियो कॉल याद कर सोनिया ने कहा, ‘हमने आखिरी बार 10 नवंबर को हर्षिता से फोन पर बात की थी, जब उसने उन्हें बताया था कि पंकज रात के खाने के लिए आने वाला है। इसलिए वह खाना बना रही है। उसके बाद अगले दो दिनों तक हर्षिता का फोन बंद रहा। हमें लग रहा है कि पंकज ने ही उसे मारा है।’ सीसीटीवी फुटेज जारी किए पुलिस पंकज लांबा की तलाश कर रही है और उसने सीसीटीवी फुटेज भी जारी किए हैं। वहीं, महिला के परिवार का दावा है कि वह भारत भाग गया है। बड़ी बहन ने कहा, ‘हमारे पास उसके भारत लौटने के सबूत हैं, जो हमने लंदन पुलिस को बताया है। यहां कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है। हमने स्थानीय पुलिस से भी संपर्क किया है। पंकज और उसके माता-पिता के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है।’ ससुरालजनों पर भी संदेह उन्होंने कहा कि ब्रेला का पार्थिव शरीर एक या दो सप्ताह में भारत पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लांबा के परिवार को पंकज के ठिकाने के बारे में पता है और हत्या के बारे में पता है। सोनिया ने कहा, ‘जब मैंने पंकज की मां को फोन किया, तो उन्होंने शांत रूप से जवाब दिया कि कम से कम मेरी बहन वापस लौट रही थी। उन्होंने कहा कि उनके बेटे का कोई अता-पता नहीं है। लेकिन, दूसरी ओर वे उसके बारे में पता लगाने की कोशिश भी नहीं कर रहे हैं और शांत हैं। यह व्यवहार संदेह पैदा करता है।’

एक घर में चल रही थी पार्टी, पुलिस ने दी दबिश, 17 लड़कियों और 40 लड़कों को पकड़ा

देहरादून. पुलिस व आबकारी टीम ने कैंट स्थित गाजियावाला एक निजी आवास पर दबिश देकर युवक-युवतियों को गिरफ्तार कर लिया। यहां अवैध रूप से हाउस पार्टी का आयोजन किया जा रहा था। पुलिस को सूचना मिली कि गाजियावाला के निजी आवास पर हाउस पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें शामिल होने के लिए गोपनीय रूप से व्हाट्सएप के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सूचना के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून अजय सिंह व पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार के निर्देश पर सीओ सदर के नेतृत्व में देहरादून शहर के थाना प्रभारियों व एसओजी प्रभारी के साथ रेड टीम बनाकर आबकारी विभाग को शामिल करते हुए संयुक्त रूप से रेड की गई। रेड के दौरान गाजियावाला कैंट क्षेत्र के एक निजी आवास पर 40 लड़के व 17 लड़कियां अवैध रूप से पार्टी आयोजित करते हुए पाए गए। भवन में भारी मात्रा में इंपॉर्टेंट शराब की खाली बोतल व शराब बरामद हुई। मौके पर रेड टीम ने पूछताछ की। भवन स्वामी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है व पार्टी में सम्मिलित 40 लड़कों और 17 लड़कियों से पूछताछ कर उनके विरुद्ध पुलिस एक्ट में कार्रवाई की जा रही है। भवन स्वामी की पहचान रजनी निवासी गाजियावाला कैंट के रूप में हुई है।

अमेरिका का कर्ज रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जीडीपी का करीब 125% पहुंचा कर्ज

नई दिल्ली. डॉनल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से पहले ही देश का कर्ज रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका का कर्ज 36 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है। इस साल इसमें दो ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। पिछले 316 दिन में अमेरिका के कर्ज में रोजाना 6.3 अरब डॉलर यानी करीब 5,31,94,85,78,490 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि अमेरिका के हर नागरिक पर 108,000 डॉलर का कर्ज है। जीडीपी के परसेंटेज के रूप में डेफिसिट स्पेंडिंग दूसरे विश्व युद्ध के स्तर पर पहुंच चुका है। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से अमेरिका के कर्ज में करीब 16 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। अमेरिका के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सरकार को इतना कर्ज लेना पड़ा है। अमेरिका का कर्ज पिछले 24 साल में छह गुना बढ़ा है। साल 2000 में अमेरिका पर 5.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था। साल 2010 में यह 12.3 ट्रिलियन डॉलर और 2020 में 23.2 ट्रिलियन डॉलर था। यूएस कांग्रेस के बजट दस्तावेजों के मुताबिक अगले दशक तक देश का कर्ज 54 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। देश का कर्ज जीडीपी का करीब 125% है। स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका को रोज 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं। साफ है कि सरकार की कमाई कम हो रही है और खर्च बढ़ गया है। क्या होगा असर? जानकारों का कहना है कि यह देश की इकॉनमी और नेशनल सिक्योरिटी के लिए अच्छी बात नहीं है। माना जा रहा है कि अगले कुछ साल में अमेरिका का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 200% तक पहुंच सकता है। मतलब देश का कर्ज इकॉनमी से दोगुना पहुंच जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो कर्ज चुकाते-चुकाते ही अमेरिका की इकॉनमी का दम निकल जाएगा। इससे सरकार को रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च से ज्यादा पैसा ब्याज चुकाने में देना होगा। चिंता की बात यह है कि अमेरिका का कर्ज ऐसे समय बढ़ रहा है जब देश की इकॉनमी अच्छी स्थिति में है। अमूमन जब इकॉनमी में कमजोरी आती है तो सरकार खर्च बढ़ाती है ताकि ग्रोथ को हवा दी जा सके। बढ़ते कर्ज से देश में एक बार फिर शटडाउन की नौबत आ सकती है। कर्ज को लेकर अक्सर दोनों पक्षों यानी रिपलिकन्स और डेमोक्रेट्स में विवाद रहता है। मगर सच्चाई यह है कि दोनों दलों के कार्यकाल में देश का कर्ज बढ़ा है। देश की क्रेडिट रेटिंग पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है। पिछले साल अगस्त में फिच ने अमेरिका के सॉवरेन डेट की रेटिंग AA+ से घटाकर AAA कर दी थी। मूडीज ने भी चेतावनी दी थी कि वह अमेरिका की AAA में कटौती कर सकती है। पिछले साल जून में अमेरिका पहली बार डिफॉल्ट की दहलीज पर पहुंच गया था और एक बार फिर यह स्थिति बन रही है। कैसे घटेगा खर्च? ट्रंप ने सरकारी खर्चों में कटौती करने और सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए एक नया विभाग डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशिएंसी बनाने की घोषणा की है। इसकी कमान दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क और विवेक रामास्वामी को दी गई है। मस्क ने ट्रंप के लिए चुनाव प्रचार करते हुए कहा था कि वह सरकारी बजट में अरबों डॉलर की बचत कर सकते हैं। उन्होंने सरकारी खर्च में कटौती की बात कही है। इसमें पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग और गर्भपात अधिकार समूहों को दी जाने वाली राशि शामिल है।  

सदन में जोरदार हंगामे के आसार, संसद सत्र से पहले केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र की सोमवार से शुरुआत होने वाली है, उससे पहले केंद्र सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक का उद्देश्य संसद के शीतकालीन सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए पार्टियों के बीच सहमति बनाना है। गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं, लेकिन महाराष्ट्र चुनाव में जीत के बाद यकीनन सत्ताधारी भाजपा को थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है। सर्वदलीय बैठक का आयोजन संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया है। इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, शिवसेना, बीजद और अन्य पार्टियों के नेता शामिल हुए। शीतकालीन सत्र सोमवार यानी 25 नवंबर से शुरू होकर 20 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को वक्फ संशोधन विधेयक, मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर घेरने की कोशिश करेगा। वहीं उद्योगपति गौतम अदाणी पर अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर भी विपक्ष केंद्र पर हमलावर है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने गौतम अदाणी मामले पर संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) जांच की मांग की है। शीतकालीन सत्र के शुरुआती हफ्ते के अंत में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए बनी जेपीसी अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है। हालांकि जेपीसी में शामिल विपक्षी सांसद रिपोर्ट जमा करने के लिए और समय देने की मांग कर रहे हैं। बैठक में 26 नवंबर को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में संविधान अपनाने की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम पर भी चर्चा हुई। ये विधेयक शीतकालीन सत्र में किए जा सकते हैं पेश शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार पंजाब कोर्ट्स संशोधन विधेयक, मर्चेंट शिपिंग विधेयक, तटीय शिपिंग विधेयक और भारतीय बंदरगाह विधेयक पेश किए जा सकते हैं। इनके अलावा भारतीय वायुयान विधेयक, जो लोकसभा से पारित हो चुका है, वह राज्यसभा में लंबित है। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक और मुसलमान वक्फ विधेयक समेत आठ विधेयक लंबित हैं। साथ ही राज्यसभा में दो विधेयक लंबित हैं। एक देश एक चुनाव विधेयक इस संसद सत्र में पेश करने की उम्मीद कम ही है।

‘मॉन्ट्रीयाल जल रहा है और ट्रूडो नाच रहे’, कनाडाई पीएम का सोशल मीडिया पर विरोध

ओटावा. कनाडा के शहर मॉन्ट्रीयाल में हिंसा के बीच कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, इसमें वह टेलर स्विफ्ट के कॉन्सर्ट में नाचते-गाते दिखाया गया है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनका विरोध करना और ट्रोल करना शुरू कर दिया है। बता दें कि ट्रूडो मॉन्ट्रीयाल में पापिनौ जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कथित तौर पर शुक्रवार को अपने परिवार के साथ टोरंटो में टेलर स्विफ्ट के एराज़ टूर कॉन्सर्ट में भाग लिया था। जिसका वीडियो वायरल हो गया है। एक्स पर पोस्ट किये गये वायरल वीडियो  उन्हें दर्शकों के बीच नाचते और गाते हुए दिखाता है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद यूजर्स भड़क गए हैं। यूजर्स कर रहे ट्रोल रोमन सम्राट नीरो से तुलना करते हुए यूजर्स ने कहा कि ट्रूडो भी ऐसे ही कर रहे है। एक यूजर ने लिखा कि प्राचीन परंपरा के अनुसार, जब रोम जल रहा था, तब सम्राट नीरो मंच पर आए और कविता पढ़ी। इसी तरह यहां ट्रूडो कर्ज को दोगुना कर 1.2 ट्रिलियन डॉलर करने और कनाडा की सीमाएं खोलकर आवास संकट पैदा करने के बाद आज रात के टेलर स्विफ्ट कॉन्सर्ट में नाच रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि ट्रूडो टेलर स्विफ्ट कॉन्सर्ट में थे, जबकि मॉन्ट्रीयाल जल रहा है। वहीं, एक अन्य ने कहा कि जस्टिन ट्रूडो कल रात टेलर स्विफ्ट कॉन्सर्ट में दोस्ती का आदान-प्रदान कर रहे थे, जब हम सभी को पता चला कि मॉन्ट्रीयाल में आग लगी हुई है। मॉन्ट्रीयाल में हिंसक प्रदर्शन दरअसल, 22 नवंबर को मॉन्ट्रीयाल में इस्राइल विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे, तभी वहां हिंसा भड़क गई। खास तौर पर तब जबकि  वहां के क्यूबेक महानगर में नाटो प्रतिनिधि गठबंधन की वार्षिक सभा हो रही थी। उस समय प्रदर्शनकारियों ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन का विरोध कर रहे थे। ये हिंसा तब और बढ़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का पुतला जलाया। उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने करीबन 800 लोगों ने वाहनों में आग लगा दी। इतना ही नहीं आसपास की दुकानों की खिड़कियां तोड़ दीं और स्मॉग बम भी छोड़े। इसके बाद, पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज भी करना पड़ा। इस हिंसा के मामले में मॉन्ट्रियाल पुलिस ने कथित तौर पर अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। ट्रूडो ने की आलोचना इस हिंसा की जस्टिन ट्रूडो ने आलोचना भी की है। शनिवार को ट्रूडो ने कहा कि मॉन्ट्रियाल दंगाइयों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने कल रात मॉन्ट्रियाल की सड़कों पर जो देखा वह भयावह था। जहां भी हम यहूदी विरोधी भावना, धमकी और हिंसा के कृत्यों को देखते हैं, उनकी निंदा की जानी चाहिए।

स्वामी विवेकानंद जयंती धूमधाम से मनाएं, ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने युवाओं से की NCC से जुड़ने की अपील

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मोदी ने आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 116वें एपिसोड को संबोधित किया। इसमें पीएम मोदी ने युवाओं से एनसीसी से जुड़ने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एनसीसी दिवस है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं खुद एनसीसी का कैडेट रहा हूं और इसके अनुभव मेरे लिए अनमोल हैं। एनसीसी युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और सेवा की भावना पैदा करती है। देश में कहीं भी आपदा होने पर एनसीसी कैडेट आगे बढ़कर मदद करते हैं। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती पर देश युवा दिवस मनाता है। अगले साल स्वामी विवेकानंद की 162वीं जयंती है। इसे खास तरीके से मनाया जाएगा और 11-12 जनवरी को दिल्ली में भारत मंडपम में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग का आयोजन किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि ‘मैंने लाल किले की प्राचीर से ऐसे युवाओं से राजनीति में आने का आहवान किया है, जिनके परिवार का कोई भी व्यक्ति राजनीति में नहीं है, ऐसे एक लाख युवाओं को, नए युवाओं को, राजनीति से जोड़ने के लिए देश में कई तरह के विशेष अभियान चलेंगे।’ प्रधानमंत्री ने लखनऊ के रहने वाले वीरेंद्र की तारीफ की, जो बुजुर्गलों के लिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट में मदद कर रहे हैं। इससे बुजुर्गों को पेंशन लेने में मदद मिली है। इसी तरह भोपाल के महेश की तारीफ की, जो बुजुर्गों को मोबाइल के माध्यम से पेमेंट करना सिखा रहे हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने चेन्नई की प्रकृत अरिवगम और बिहार के गोपालगंज की प्रयोग लाइब्रेरी की चर्चा की, जो बच्चों में पढ़ने और सीखने की आदत विकसित कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कैरेबियाई देशों का दौरा किया था। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि कैरेबियाई देश गुयाना में भी मिनी भारत बसता है। भारत से सैंकड़ों वर्षों पहले लोगों को खेती, मजदूरी के लिए गुयाना ले जाया गया था और आज वहां भारतीय मूल के लोग राजनीति, व्यापार, शिक्षा और संस्कृति के हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रहे हैं। गुयाना की तरह ही दुनिया के कई देशों में भारतीय गए और उन्होंने वहां अपनी पहचान बनाई। ओमान में भी कई भारतीय शताब्दियों से रह रहे हैं और व्यापार जगत में अपनी जगह बनाई। आज वे ओमान के नागरिक हैं, लेकिन उनकी रग-रग में भारतीयता बसी है।

जवाबी कार्रवाई में हमलावर ढेर, जॉर्डन में इस्राइली दूतावास के बाहर गोलीबारी में तीन पुलिसकर्मी घायल

अम्मान. जॉर्डन में इस्राइली दूतावास के बाहर गोलीबारी की खबर सामने आई है। इस गोलीबारी में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। वहीं जवाबी कार्रवाई में हमलावर ढेर हो गया है। पुलिस ने बताया कि गोलीबारी की घटना राजधानी अम्मान के राबिया इलाके में हुई। पुलिस घटना की जांच में जुटी है। गोलीबारी की घटना के बाद पुलिस ने लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी है और इस बात की जांच कर रहे हैं कि इस घटना में कोई और लोग तो शामिल नहीं हैं। जॉर्डन पुलिस ने बताया हमलावर ने पुलिस के गश्ती दल पर गोलीबारी की थी, जिसमें तीन पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हो गए। जैसे ही गोली चलने की आवाजें सुनाईं दी, वैसे ही पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गोलीबारी के बाद पुलिस की गाड़ियां और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। जिस जगह गोलीबारी हुई, वहीं पर इस्राइली दूतावास स्थित है। इस इलाके में अक्सर इस्राइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी होते हैं। हाल के दिनों में कई बार यहां लोगों ने इस्राइल की हमास और हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में मार्च किया है। हालांकि यह पता नहीं चल सका कि गोलीबारी की घटना का इस्राइल से संबंध है या नहीं। जॉर्डन में एक करोड़ से ज्यादा फलस्तीनी मूल के लोग गौरतलब है कि जॉर्डन में बड़े पैमाने पर फलस्तीनी मूल के लोग रहते हैं। आंकड़ों के मुताबिक फलस्तीनी मूल के लोगों की जॉर्डन में संख्या एक करोड़ 20 लाख से ज्यादा हो सकती है। साल 1948 में जब बड़े पैमाने पर फलस्तीन से पलायन हुआ था, तो ये लोग जॉर्डन आकर बस गए। यही वजह है कि इस्राइल की गाजा और लेबनान में जारी कार्रवाई को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है। जॉर्डन की सरकार ने इस्राइल के साथ जो शांति समझौता किया था, उसे लेकर भी फलस्तीनी मूल के लोगों में गहरी नाराजगी है और उस शांति समझौते को फलस्तीनी मूल के लोग अपने अधिकारों के प्रति धोखा मानते हैं।

लगातार तीसरे चुनाव में शर्मनाक प्रदर्शन, यूपी उपचुनाव में वोटों के लिए तरसती रही BSP

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरे चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को वोटों के लिए तरसना पड़ गया। नतीजों से साफ है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार बसपा का करीब 60 फीसद से अधिक वोट बैंक दूसरे दलों में शिफ्ट हो गया। दलित वोट बैंक ने बसपा को नकार दिया तो पार्टी मुस्लिम वोटरों का भरोसा भी नहीं जीत सकी। बसपा का उपचुनाव लड़ने का दूसरा कदम भी उसे नई दिशा नहीं दिखा सका। इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान 5 सीटों पर हुए उपचुनाव में भी बसपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। फिलहाल बसपा का प्रदर्शन उसके अस्तित्व पर किसी बड़े खतरे का संकेत दे रहा है। चुनावी नतीजों पर गौर करें तो करहल, कुंदरकी, मीरापुर और सीसामऊ में बसपा धड़ाम हो गई। चारों सीटों पर बसपा का वोट पांच अंकों की सीमा तक भी नहीं पहुंच सका, जो प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने की वजह बन गया। मीरापुर और कुंदरकी में तो वोटरों ने बसपा से ज्यादा आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को तरजीह दी है। बसपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन कटेहरी सीट पर रहा, जहां पार्टी प्रत्याशी अमित वर्मा ने 41,647 वोट हासिल किए। वहीं मझवां के प्रत्याशी दीपक तिवारी उर्फ दीपू तिवारी ने 34,927 और फूलपुर के प्रत्याशी जितेंद्र कुमार सिंह को 20,342 वोट मिले। हालांकि तीनों सीटों पर 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम वोट मिले हैं। गाजियाबाद में टिकट बदलने का खेल बसपा को भारी पड़ गया और उसके प्रत्याशी परमानंद गर्ग 10,736 वोट ही हासिल कर पाए। बड़े नेता बनाए रहे दूरी — बसपा के इस खराब प्रदर्शन की वजह पार्टी के बड़े नेता हैं, जिन्होंने उपचुनाव में प्रचार करने की जहमत तक नहीं की। पार्टी नेता महाराष्ट्र और झारखंड में खुद को मजबूत करने के फेर में यूपी में अपनी जमीन को खो बैठे। प्रत्याशियों ने अपने दम पर प्रचार किया, जो जीत में तब्दील नहीं हो सका। बसपा सुप्रीमो की प्रत्याशियों से मुलाकात तो हुई, लेकिन उनके नाम की घोषणा पार्टी ने अंतिम समय पर की, जिससे वोटरों में ऊहापोह रहा। सोशल इंजीनियरिंग के बल पर चुनाव जीतने की उसकी कसरत किसी काम नहीं आई। टिकट वितरण में अंजान चेहरों पर दांव लगाने की कीमत पार्टी को चुकानी पड़ गई। बसपा प्रत्याशियों को मिले वोट –     सीट     –   प्रत्याशी      –     वोट     –  2022 में बसपा का प्रदर्शन     मीरापुर  – शाहनजर     –   3248     –        23797     मझवां  – दीपक तिवारी  –  34927     –      52990     कटेहरी  – अमित वर्मा  –    41647      –     58482     फूलपुर – जितेंद्र कुमार सिंह –  20342    –  33036     सीसामऊ – वीरेंद्र कुमार – 1410      –       2937     करहल – अवनीश शाक्य – 8409    –        15701     गाजियाबाद – परमानंद गर्ग – 10736    –   32691     कुंदरकी – रफतउल्ला – 1051     –         42742     खैर  –     पहल सिंह  –  13365    –         65302     कुल वोट                         1,35,135            3,27,678

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा- झारखंड में हार मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत दुखद है

गुवाहाटी. झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA की हार के बाद इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया सामने आई है। वो झारखंड चुनाव के लिए सह प्रभारी बनाए गए थे। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके JMM और उसके सहयोगी दलों को शानदार जीत पर बधाई दी है। इसके साथ ही झारखंड चुनाव में मिली हार को व्यक्तिगत रूप से दुखद बताया। मैंने लोगों का अथक प्रयास देखा असम सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘झारखंड में हार मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत दुखद है, भले ही हमने असम में सभी पांच उपचुनावों में जीत हासिल की हो। मैंने झारखंड में अपने कार्यकर्ताओं के अटूट समर्पण और अथक प्रयासों को देखा है, जिन्होंने इस चुनाव में अपना सब कुछ झोंक दिया। हमने राज्य को घुसपैठ से बचाने और छात्रों और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए इसे विकास के पथ पर ले जाने के दृष्टिकोण के साथ चुनाव लड़ा।’ शनिवार को खुद बनाए गए एक वीडियो में हिमंत ने कहा कि झारखंड में विफल होने का मतलब यह नहीं है कि वह हार मान लेंगे। हम अपने उद्देश्य में भले ही सफल नहीं हुए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपना काम छोड़ दें। घुसपैठ के मुद्दे पर बोले हिमंत बिस्वा सरमा असम सीएम ने कहा कि हमने झारखंड के लोगों से मुलाकात की है। मेरा अब भी मानना ​​है कि घुसपैठ की समस्या आने वाले दिनों में काफी नुकसान पहुंचा सकती है। मैं झारखंड सरकार से अनुरोध करूंगा कि घुसपैठियों को बाहर निकालना हमारी जिम्मेदारी है। मुझे विश्वास है कि राज्य सरकार इसका पालन करेगी। बांग्लादेशी घुसपैठ पर केंद्रित रहा प्रचार बता दें कि झारखंड चुनाव में बीजेपी और NDA के सहयोगी दलों ने चुनाव प्रचार को बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्रित रखा। असम सीएम ने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण देने सहित कई गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने झारखंड में बीजेपी की सरकार बनने पर इसे लेकर कानून बनाने की बात भी कही, लेकिन झारखंड की जनता ने इन सभी मुद्दों को नकार दिया। जनता ने एक बार फिर हेमंत सोरेन की सरकार को चुना। झारखंड की जनता ने सीएम सोरेन पर जताया विश्वास झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने 34 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दलों ने 22 सीटें जीतीं। JMM के सहयोगियों में, कांग्रेस ने 16 सीटें, राजद ने चार सीटें और CPI-ML ने दो सीटें जीतीं। वहीं भाजपा ने 21 सीटें जीतीं, और उसके सहयोगी AJSU, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और JD-U ने एक-एक सीट जीती।

जीत का जमकर मनाया नवनीत राणा ने जश्न, MVA की ली मौज

नई दिल्ली. महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन ने प्रचंड जीत हासिल की है। वहीं, भाजपा का भी प्रदर्शन जबरदस्त रहा। अमरावती की बडनेरा सीट से नवनीत राणा के पति ने जीत हासिल की। पति की जीत पर नवनीत राणा ने जमकर डांस किया। पति की जीत के बाद नवनीत राणा ने विजय जुलूस निकाला। बता दें कि चार महीने पहले हुई लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हार को भुलाते हुए उन्होंने अपनी पति की जीत पर जमकर जश्न मनाया। वहीं, उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में महाविकास अघाड़ी दल की जमकर मौज भी ली। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो कहते हुए दिख रहीं हैं, अरे भाई महाराष्ट्र में क्या खिला? उनके साथ मौजूद महिलाएं जवाब दे रहीं हैं, कमल खिला। 49 सीटों पर सिमटी एमवीए 288 सदस्यों वाली विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन को 236 सीटें मिलीं और विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (मविआ) 46 सीटों पर सिमट गया। महायुति को मिली सीटें महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी या गठबंधन को अब तक मिली सर्वाधिक सीटें हैं। इससे पहले 1972 में कांग्रेस को 222 सीटें मिली थीं। एकनाथ शिंदे ने किया कमाल इस बार एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 57 सीटें मिली हैं, जबकि 2019 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 56 सीटें ही मिल सकी थीं। शिवसेना का स्ट्राइक रेट इस बार 67.90 प्रतिशत रहा है। इसी प्रकार अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा को 41 सीटें मिलीं। उनका यह प्रदर्शन लोकसभा चुनाव की तुलना में काफी बेहतर रहा है। खुद अजीत पवार ने बारामती विधानसभा क्षेत्र में अपने सगे भतीजे एवं राकांपा (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार युगेंद्र पवार को 1,16,182 मतों से हराया है।

कोलकाता: 10 घरों में लगी भीषण आग, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक बड़ी खबर सामने आई है। कोलकाता के उल्टाडांगा इलाके में रविवार को भीषण आग लगने से कम से कम 10 घर जलकर खाक हो गए। घटनास्थल पर दमकल की कई गाड़ियां मौजूद हैं। दमकल विभाग के कर्मचारी आग पर काबू पाने की कोशिश में लगे हैं। बताया जा रहा है कि ये आग सुबह 7.30 बजे के करीब लगी। आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। इस घटना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाने के अभियान में जुट गए। मौके पर छह दमकल गाड़ियां मौजूद थीं। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारण और इससे हुए नुकसान का पता अभी नहीं चल पाया है। अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है। जानकारी के अनुसार जहां पर ये आग लगी उस इलाके में ढेर सारी झुग्गियां हैं। आग लगने के कारण 10 से 12 घर इसकी चपेट में आ गए हैं। अग्निशमन मंत्री सुजीत बसु भी मौके पर पहुंचे हैं। आज की घटना के ठीक दो दिन पहले ही दक्षिण कोलकाता के कांकुलिया रोड पर एक झुग्गी बस्ती में आग लगी थी। आग की घटना के बाद प्रभावित लोगों के साथ आसपास के घरों में रहने वाले लोगों के निकालने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि जब तक आग पर पूरी तरीके से काबू नहीं पा लिया जाता है, उस दौरान तक कूलिंग की प्रक्रिया जारी रहेगी। यहां पर आग किन कारणों से लगी, इसको लेकर जानकारी एकत्र करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, इस आग के कारण कितना नुकसान हुआ है, इसाकी भी कोई पर्याप्त जानकारी सामने नहीं आ सकी है।

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