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एयर इंडिया की सैन फ्रैंसिस्को से मुंबई आ रही विमान में गड़बड़ी की सूचना मिलने पर यात्रियों को कोलाकाता में ही उतार लिया गया

कोलकाता  सैन फ्रांसिस्को से मुंबई आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट में तकनीकी खराबी आने के कारण यात्रियों को कोलकाता एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा. यह घटना मंगलवार तड़के उस समय हुई जब फ्लाइट अपनी तय समय पर रात 12:45 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरी थी. एअर इंडिया की फ्लाइट AI180 के बाएं इंजन में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई, जिसके चलते विमान के टेकऑफ में देरी हो गई. करीब सुबह 5:20 बजे विमान के भीतर अनाउंसमेंट कर सभी यात्रियों को विमान से उतरने के लिए कहा गया.  उड़ान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया फैसला फ्लाइट के कैप्टन ने यात्रियों को बताया कि यह फैसला उड़ान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. फिलहाल विमान की तकनीकी जांच की जा रही है. अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए प्लेन के बाद हाल के दिनों में एअर इंडिया के कई विमानों में तकनीकी गड़बड़ी की सूचना मिली है. एअर इंडिया विमान का ब्लैक बॉक्स मिला बता दें कि एअर इंडिया विमान हादसे की जांच कर रही टीम को कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) यानी ब्लैक बॉक्स मिल गया है. रविवार को अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की. यह खोज इस भीषण हादसे के कारणों का पता लगाने में निर्णायक साबित होगी, जिसमें अब तक 270 लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों में विमान में सवार 241 यात्री और क्रू के अलावा 29 लोग जमीन पर भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, AAIB ने इस दुर्घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. साथ ही, विमान अमेरिकी निर्मित होने के कारण अमेरिकी राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) भी अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत समानांतर जांच कर रहा है. ईंजन में आई खराबी एयर इंडिया की फ्लाइट अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को से वाया कोलकाता मुंबई जाने वाली थी। सैन फ्रांसिस्को से उड़ान भरने के बाद फ्लाइट कोलकाता लैंड हुई। यहां ईंधन भरवाने और तकनीकी जांच के दौरान इंजन में गड़बड़ी पाई गई। टेक्निकल टीम ने कहा कि इंजन में ओवरहीटिंग की समस्या आ रही है। साथ ही, मैकनिकल खराबी है। इसके बाद पायलट ने कोलकाता से मुंबई के लिए उड़ान रद्द करने का फैसला लिया। फिर 240 यात्रियों समेट 14 क्रू मेंबर्स को प्लेन से बाहर निकाला गया। विमान को किया गया ग्राउंडेड कोलकाता एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कहा कि विमान में गड़बड़ी पाए जाने के बाद तकनीकी जांच के लिए ग्राउंडेड कर दिया गया है। एक्सपर्ट्स की टीम फ्लाइट की मरम्मत और जांच में जुटी हुई है। यात्रियों को जल्द उनके गंतव्य तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। एयर इंडिया ने कहा कि यात्रियों को मुआवजा और रिफंड की प्रक्रिया के लिए भी संपर्क किया जाएगा। बीते सोमवार को भी आई थी तकनीकी खराबी की खबर सोमवार को तकनीकी खराबी के कारण एयर इंडिया की दो उड़ानों को लौटना पड़ा। दिल्ली से रांची जाने वाली फ्लाइट AI9695 को शाम 6.20 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे वापस दिल्ली के लिए मोड़ दिया गया। इससे पहले हांगकांग से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI315 तकनीकी खराबी के कारण वापस हांगकांड में लैंड हुई। रविवार को भी दो उड़ानों में तकनीकी खराबी देखी गई रविवार को भी दो उड़ानों में तकनीकी गड़बड़ी देखी गई। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से चेन्नई के लिए रवाना हुई ब्रिटिश एयरवेज के विमान को कुछ ही मिनटों बाद हीथ्रो पर लाया गया। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर जब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर था, तब फ्लैप सिस्टम में गड़बड़ी के संकेत मिले थे। वहीं, जेद्दा से लखनऊ एयरपोर्ट पर उतरे सऊदी अरब के एक विमान के पहियों से धुआं निकलता हुआ देखा गया। विमान बचाव और अग्निशमन (एआरएफएफ) की टीम मौके पर पहुंची और सऊदी अरब की टीम के साथ मिलकर धुएं को नियंत्रित किया। सभी यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का हेलीकॉप्टर खराब भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र को संबोधित करने मध्यप्रदेश के पचमढ़ी आए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का हेलीकॉप्टर जेडएम 2967 खराब हो गया। सिंह को दूसरे हेलीकॉप्टर से रवाना किया गया। बाद में खराब हुए हेलीकॉप्टर को ठीक कर शाम साढ़े पांच बजे भेजा गया।  

इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने जारी की एडवाइजरी, सतर्क रहने और दूतावास के संपर्क में रहने की दी सलाह

तेहरान   ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बाद दोनों देशों में फंसे भारतीयों को वापस स्वदेश लाने के लिए अभियान तेज हो गया है। सबसे पहले ईरान से सभी भारतीय छात्रों को सुरक्षित लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत ने सोमवार (16 जून) से ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालना शुरू किया। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 100 भारतीयों का पहला जत्था ईरान से निकाल लिया गया है। बताया जा रहा है कि वे आर्मेनिया सीमा पर पहुंच गए हैं। सोमवार को केंद्र ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति की निगरानी कर रहा है। ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है। साथ ही कुछ मामलों में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारतीय छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते निकाला जा रहा है। आर्मेनिया से उनको जॉर्जिया और फिर पश्चिम एशिया के रास्ते भारत लाया जा सकता है। 110 छात्रों का पहला दल आर्मेनिया सीमा पर पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि तीन यूनिवर्सिटी के छात्रों को फिलहाल सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है। अन्य छात्रों को भी शिफ्ट किया जा रहा है। ईरान में करीब डेढ़ हजार कश्मीरियों समेत 10,000 भारतीय छात्र हैं। अधिकतर छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए ईरान गए हैं। भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी इस बीच, ईरान में भारत के दूतावास की एक ताजा एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि जो भी भारतीय या भारतीय मूल के लोग अपने संसाधनों के जरिए तेहरान से बाहर निकल सकते हैं वो शहर के बाहर सुरक्षित ठिकानों पर चले जाएं। ईरान में भारतीय दूतावास ने कहा, “सभी भारतीय नागरिक और पीआईओ (भारतीय मूल के व्यक्ति) जो अपने संसाधनों का उपयोग करके तेहरान से बाहर जा सकते हैं, उन्हें शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।” भारतीय छात्रों को लेकर सरकार अलर्ट विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति पर नजर रखे हुए है और ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है।” बयान में कहा गया है, “कुछ मामलों में छात्रों को दूतावास की मदद से ईरान में ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। अन्य व्यवहार्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। और जानकारी बाद में दी जाएगी।” इस बयान के अनुसार, दूतावास समुदाय के नेताओं से भी सतत संपर्क बनाए हुए है। इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने X हैंडल पर एडवाइजरी जारी किए हैं। ईरान में भारतीय दूतावास की ओर से X पर एक पोस्ट में कहा गया है, “ईरान में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, परामर्श के तहत यहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें, किसी भी तरह की अनावश्यक गतिविधियों से बचें, दूतावास के सोशल मीडिया अकाउंट पर दी जा रही सूचना को ध्यान में रखें। स्थानीय अधिकारियों द्वारा बताए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।”

FATF ने पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में नहीं डाला, भारत की कोशिश हुई नाकाम !

इस्लामाबाद  मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में नहीं डाला है। इस फैसले पर पाकिस्तान में जश्न का माहौल है। पाकिस्तान का दावा है कि एफएटीएफ ने उसे ग्रे लिस्ट में डालने के भारत के प्रयासों को नजरअंदाज किया है। ऐसे में पाकिस्तान इसे खुद की जीत के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो सार्वजनिक तौर पर इसे पाकिस्तान की जीत और भारत की हाल के रूप में प्रस्तुत किया है। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है। मई के शुरुआती हफ्तों में दोनों देशों के बीच सीमित संघर्ष भी देखने को मिला था। पाकिस्तान ने क्या दावा किया था पाकिस्तान ने दावा किया है कि भारत ने जून में हुए एफएटीएफ की बैठक के दौरान पाकिस्तान को फिर से अपनी ग्रे लिस्ट में डालने के लिए काफी दबाव डाला था। FATF की ग्रे लिस्ट में किसी देश को तब तक निगरानी में रखा जाता है, जब तक कि वह अपनी वित्तीय प्रणाली में पहचानी गई खामियों को ठीक नहीं कर लेता। पाकिस्तान को 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से हटा दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद पाकिस्तान ने कोई सुधार नहीं किया है और आतंकवादियों को न सिर्फ सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध करा रहा है,बल्कि टेरर फाइनेंसिंग जैसे आपराधिक कामों में भी शामिल है। रेडियो पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ उगला जहर पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक रेडियो पाकिस्तान ने शनिवार को बताया, “वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने शनिवार को हुई अपनी बैठक में पाकिस्तान को ग्रे सूची में नहीं डालने का फैसला किया है।” उसने आगे यह भी कहा, “एफएटीएफ के फैसले के बाद, भारत अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रहा है, क्योंकि भारतीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल ने एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को एक बार फिर ग्रे सूची में शामिल कराने के लिए पुरजोर प्रयास किया।” भारत और एफएटीएफ ने नहीं दी प्रतिक्रिया एफएटीएफ या भारत सरकार ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह निगरानी संस्था आमतौर पर प्रत्येक वर्ष अक्टूबर, फरवरी और जून में अपनी पूर्ण बैठकें आयोजित करती है। रेडियो पाकिस्तान ने बताया कि चीन ने एफएटीएफ की बैठक में इस्लामाबाद के पक्ष में “स्पष्ट रुख” अपनाया, जबकि तुर्की और जापान ने भी पाकिस्तान को ग्रे सूची में नहीं डालने के लिए “पूरी तरह से समर्थन” दिया। सरकारी प्रसारक ने इसे पाकिस्तान के राजनयिक मिशन की जीत बताते हुए कहा, “भारत इजरायल की मदद से पाकिस्तान के खिलाफ एफएटीएफ का इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश कर रहा था।” ख्वाजा आसिफ ने बताया पाकिस्तान की जीत पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत और इजरायल के ठोस प्रयासों के बावजूद वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा पाकिस्तान को फिर से अपनी “ग्रे लिस्ट” में न डालने का फैसला एक बड़ी जीत है। रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में, आसिफ ने कहा कि एफएटीएफ ने एक दिन पहले अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह की बैठक के बाद पाकिस्तान को फिर से सूचीबद्ध न करने का फैसला किया है। उन्होंने लिखा, “यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी जीत है कि भारत और इजरायल की तमाम साजिशों के बावजूद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।” उन्होंने इस फैसले का श्रेय प्रमुख सहयोगियों के मजबूत समर्थन को दिया। आसिफ ने कहा, “चीन ने स्पष्ट रुख अपनाया और पाकिस्तान को राहत देने का समर्थन किया, जबकि तुर्की ने चीन के रुख का समर्थन किया।” “जापान ने भी पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया क्योंकि वह एशिया प्रशांत समूह (एपीजी) का सह-अध्यक्ष है।”

पंजाब,हरियाणा, राजस्थान तक पहुंचेगा सिंधु का पानी, बदलते वर्षा पैटर्न के संकट पर कंट्रोल

नई दिल्ली  सिंधु नदी के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए भारत एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। यह योजना नदियों को आपस में जोड़ने की है। TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू और कश्मीर से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पानी ले जाने के लिए 113 किलोमीटर लंबी नहर बनाने की तैयारी चल रही है। यह नहर चिनाब नदी को रावी-ब्यास-सतलुज नदी प्रणाली से जोड़ेगी। इस योजना का लक्ष्य सिंधु जल समझौते के तहत भारत के हिस्से का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे पूर्वी (रावी, ब्यास, सतलुज) और पश्चिमी (सिंधु, झेलम, चिनाब) नदियों के पानी का सही उपयोग हो सकेगा और पाकिस्तान में बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोका जा सकेगा। पंजाब,हरियाणा, राजस्थान तक पहुंचेगा सिंधु का पानी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पचमढ़ी में बीजेपी के एक प्रशिक्षण सत्र के दौरान इस बड़ी योजना का संकेत दिया था। उन्होंने कहा, ‘सिंधु का पानी तीन साल के भीतर नहरों के माध्यम से राजस्थान के श्री गंगानगर तक पहुंचाया जाएगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ‘पानी की हर बूंद के लिए तरस जाएगा।’ रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित नहर नेटवर्क जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 13 मौजूदा नहरों से जुड़ेगा और आखिरकार यह इंदिरा गांधी नहर प्रणाली में मिल जाएगा। जलवायु परिपर्तन और बदलते वर्षा पैटर्न के संकट पर कंट्रोल मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ फेलो उत्तम सिन्हा ने कहा, ‘जम्मू और कश्मीर से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अतिरिक्त पानी भेजने से इलाके में पानी की उपलब्धता को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘आंतरिक स्तर पर पानी के वितरण में इस बदलाव से जलवायु परिवर्तन और बदलते वर्षा पैटर्न का सामना करना भारत के लिए ज्यादा आसान हो सकेगा।’ इस काम को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार रणबीर नहर की लंबाई 60 किलोमीटर से बढ़ाकर 120 किलोमीटर करने पर भी विचार कर रही है। साथ ही, प्रताप नहर का भी पूरी तरह से इस्तेमाल करने की तैयारी में है। इसके लिए फिजिबिलिटी असेसमेंट किए जा रहे हैं। उझ बहुउद्देशीय परियोजना को भी नई गति देने की तैयारी यही नहीं, कई सालों से रुका हुआ कठुआ जिले का उझ बहुउद्देशीय परियोजना भी फिर से शुरू किया जा रहा है। उझ, रावी नदी की एक सहायक नदी है। पहले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने के लिए उझ के नीचे एक अलग रावी-ब्यास लिंक बनाने की योजना थी। अब यह बड़ी नहर योजना का हिस्सा होगी। इसमें ब्यास बेसिन में पानी स्थानांतरित करने के लिए एक बैराज और सुरंग शामिल होगी। पनबिजली परियोजनाओं परियोजनाओं पर तेजी से काम इन योजनाओं के अलावा, चिनाब नदी पर बने बागलीहार और सलाल हाइड्रो परियोजनाओं के जलाशयों से गाद निकालने जैसे छोटे समय के उपायों पर भी काम चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत अपनी सिंधु प्रणाली के पानी का बेहतर उपयोग करने के लिए कई पनबिजली परियोजनाओं, जैसे- पाकल दुल (1,000 मेगावाट), रतले (850 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट), और क्वार (540 मेगावाट) पर भी तेजी से काम कर रहा है। दरअसल, मोदी सरकार की कोशिश है कि इन सारी परियोजनाओं के काम जल्द से जल्द पूरे हों,ताकि सिंधु नदी घाटी के पानी का इस्तेमाल भारतीय राज्यों के लिए हो सके। यही वजह है कि पर्यावरण मंत्रालय भी इस बात का पुख्ता इंतजाम कर चुका है कि इन परियोजनाओं को ग्रीन क्लियरेंस मिलने में जरा भी दे रही नहीं हो।

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और राष्ट्रपति ट्रंप से से मुलाकात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनानास्किस में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सोमवार को साइप्रस से कनाडा रवाना हुए . भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पीएम मोदी का पहला विदेशी दौरा है, जहां वह वैश्विक नेताओं के साथ बातचीत करेंगे. इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कनाडा पहुंच चुके हैं.    एक मंच पर होंगे मोदी-ट्रंप  कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के न्योते पर पीएम मोदी 16-17 जून को G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इस शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से उनकी मुलाकात भी हो सकती है. हालांकि फिलहाल विदेश मंत्रालय की तरफ से इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन फिर भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और अमरेका के बीच बदले हुए घटनाक्रम में दोनों नेताओं की मुलाकात काफी अहम हो सकती है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा करते हुए खुद को सीजफायर कराने का श्रेय दिया था. पाकिस्तान ने ट्रंप के इस कदम का स्वागत भी किया. लेकिन भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष की दखल को खारिज कर दिया था. भारत का कहना है कि पाकिस्तान की गुहार के बाद भारत सीजफायर के लिए सहमत हुआ. खास बात यह है कि ट्रंप ने भारत के किसी भी आधिकारिक बयान से पहले ही सोशल मीडिया पर दोनों देशों के बीच सीजफायर का ऐलान कर दिया था. सीजफायर पर ट्रंप की बयानबाजी भारत-पाकिस्तान सीजफायर का लेकर ट्रंप की बयानबाजी अब भी जारी है. उन्होंने इजरायल और ईरान तनाव के बीच भी इस बयान को दोहराया और कहा कि जिस तरह भारत-पाक के बीच सीजफायर कराया, उसी तरह इजरायल-ईरान के बीच भी सीजफायर कराऊंगा. उनका दावा है कि कारोबार का दबाव डालकर उन्होंने भारत और पाकिस्तान को सीजफायर के लिए राजी किया था. ऐसे में G-7 जैसे वैश्विक मंच पर पीएम मोदी दुनिया के सामने सीजफायर को लेकर भारत का पक्ष रख सकते हैं. साथ ही उनकी बातचीत में आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी और पाकिस्तान के प्रॉक्सी वॉर का भी जिक्र हो सकता है. भारत ने साफ कर दिया है कि अगर भविष्य में कोई आतंकी हमला होता है तो उसके लिए सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना को जिम्मेदार माना जाएगा. साथ ही भारत अब इसे प्रॉक्सी वॉर नहीं बल्कि जंग मानेगा और इसका जवाब भी उसी तरह दिया जाएगा. किसी तीसरे की मध्यस्थता मंजूर नहीं कनाडा में मुलाकात के दौरान पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सामने भारत का रुख साफ कर सकते हैं. क्योंकि भारत कश्मीर के मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता कभी स्वीकार नहीं करता है. साथ ही इस बार भारत ने साफ कर दिया है कि कश्मीर बातचीत का मुद्दा ही नहीं है और अब पाकिस्तान से सिर्फ पीओके वापस लौटाने के मुद्दे पर बातचीत होगी.  दोनों नेताओं की मुलाकात भारत की संप्रभुता और विदेश नीति को हाईलाइट करने का एक मौका हो सकती है. खासकर तब, जब ट्रंप ने कश्मीर और सीजफायर के मुद्दे पर बिना मांगे मध्यस्थता की पेशकश दोहराई है. भारत यह बता सकता है कि सीजफायर पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी और भारत की जवाबी कार्रवाई का नतीजा था और इसमें अमेरिकी का कोई रोल नहीं है.  हथियार और टैरिफ का मुद्दा जी-7 समिट का मंच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की तकनीकी और सैन्य क्षमता के बारे में दुनिया को बताने का भी मौका होगा, ताकि भीतर से पाकिस्तान को समर्थन देने वाले देशों को आईना दिखाया जा सके. इसके अलावा भविष्य में हथियारों और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मुद्दे पर भी वैश्विक नेताओं के साथ पीएम मोदी की बातचीत संभव है. अमेरिका के साथ खास तौर पर टैरिफ विवाद बातचीत का एक अहम बिंदु हो सकता है, क्योंकि ट्रंप ने भारत के हाई टैरिफ की आलोचना करते हुए रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी का ऐलान किया है. इसके बाद भारत ने जवाब में कुछ अमेरिकी प्रोडक्ट पर टैरिफ घटाए हैं. लेकिन फिर भी इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है.  

इजरायली हमले का असर ईरान सरकार ने खोले अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन

 तेहरान  ईरान की राजधानी तेहरान से निकलने वाली सड़कें कारों से भरी हैं. रास्तों पर भारी ट्रैफिक जाम है और जिसे देखो उसे शहर से निकल जाने की जल्दी है. ग्रामीण ईरान की ओर जा रही सड़कों पर कारें फर्राटा भर रही है. दरअसल तेहरान पर इजरायली बमबारी, मिसाइलों से हमला, लगातार हो रही मौतें और जख्मी लोगों की कराह ने शहर का माहौल डरावना बना दिया है. इजरायली हमले के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में बदहवासी का आलम है. लगातार मिसाइलों के हमले और बमबाजी से जनता खौफ में है.  अब आम तेहरानी शहरी इस शहर को जल्द से जल्द छोड़ना चाहता है. इजरायल लगातार तेहरान पर हमला कर रहा है.  CNN ने कुछ लोगों से बात करके कहा कि कुछ लोग ईरान के उत्तर दिशा में देहाती इलाकों में भागने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन लोगों की भारी भीड़ की वजह से सड़कें ठप हो गई हैं. लोग रास्ते में फंसे हैं.  जर्मन प्रेस एजेंसी डीपीए के एक रिपोर्टर ने कहा कि तेहरान में गैस के लिए कई किलोमीटर लंबी लाइनें देखी गईं.  दो बच्चों के पिता ने नाम न बताने की शर्त पर CNN से कहा, “मैं अपना घर नहीं छोड़ना चाहता, लेकिन मैं अपने छोटे बच्चों को इस स्थिति में नहीं डालने जा रहा हूं.” “मुझे उम्मीद है कि अमेरिका दोनों देशों के बीच हमलों को रोकने के लिए कदम उठाएगा.” इस व्यक्ति ने कहा कि उसका परिवार चिंतित है क्योंकि शासन के अधिकारी घनी आबादी के बीच उच्च-मध्यम वर्ग के इलाकों में रहते हैं, जिससे नागरिकों को खतरा है. शुक्रवार की सुबह ईरान पर अचानक हमला करते हुए इजरायली वायु सेना ने शीर्ष ईरानी सैन्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों के घरों पर टारगेटेड हमले किए, कुछ तस्वीरों में आवासीय भवनों पर सटीक हमले दिखाए गए हैं. ईरान की सरकार लोगों की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश कर रही है. ईरानी सरकार की प्रवक्ता फतेमेह मोहजेरानी ने सरकारी टीवी से कहा कि ईरानी लोग इजरायली हमलों के दौरान मस्जिदों और स्कूलों में शरण ले सकते हैं, साथ ही मेट्रो सिस्टम में भी शरण ले सकते हैं, जो रविवार रात से हमेशा खुला रहेगा. उन्होंने कहा, “खाद्य, दवा, ईंधन की उपलब्धि में कोई समस्या नहीं है.” तेहरान के नगर परिषद के अध्यक्ष मेहदी चमरन ने कहा कि शहर में बम आश्रयों की कमी के कारण विकल्प तलाशे जा रहे हैं. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “दुर्भाग्य से, तेहरान और हमारे अन्य शहरों में आश्रय नहीं हैं.” उन्होंने कहा कि इजरायल में मरने वालों की संख्या कम है क्योंकि देश में बम आश्रय हैं और हमलों के लिए नियमित अभ्यास आयोजित किए जाते हैं. चरमन ने कहा कि बेसमेंट एक विकल्प है और “चरम” स्थिति में, भूमिगत मेट्रो का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसे बंद करना होगा.  चमरन ने 1980 के दशक में इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन के साथ हुए ईरानी युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि हम भूमिगत पार्किंग स्थल भी तैयार कर सकते हैं, जैसा कि सद्दाम ने हम पर बमबारी के समय किया था.” सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कुछ तस्वीरों में कारों से भरी सड़के दिख रही हैं. कुछ लोग ईरान से तुर्किए की ओर भागने की कोशिश कर रहे हैं. यहां भी बॉर्डर लोगों से भरा हुआ है. एक स्थानीय पत्रकार ने आज एक्स पर एक पोस्ट और वीडियो डालकर लिखा कि सुबह से ही तेहरान से बड़ी संख्या में कार जा रहे हैं. हजारों लोग शहर छोड़कर उत्तरी एग्जिट मार्ग पर हैं. इस शख्स ने लिखा, “तेहरान से नाटकीय तरीके से पलायन जारी है, प्रमुख राजमार्गों और शहर की सड़कों पर जाम लगा हुआ है, क्योंकि तेहरानी लोग संभावित इजरायली हवाई हमलों से बचने के लिए भागने की कोशिश कर रहे हैं. तेहरान से बाहर जाने के लिए पैदा हुई भगदड़ की स्थिति के बीच एक और शख्स ने लिखा है, “तेहरान में अराजकता की स्थिति है. ईरान में बढ़ती आशंकाओं के बीच लोग शहर छोड़कर भाग रहे हैं. एक यूजर ने लिखा है कि ईरानियों के देश छोड़कर भागने के कारण ईरान-तुर्किये सीमा पर बज़ारगान सीमा पर भारी भीड़ जमा हो गई है. इधर ईरान-अज़रबैजान सीमा पर जेट उड़ान भर रहे हैं. सीमा पर संभावित शरणार्थियों की आमद की स्थिति में हालात से निपटने के लिए अजरबैजान भी तैयारी कर रहा है. इस बीच ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस को चेतावनी दी है कि यदि वे तेहरान के इजरायल पर हमलों को रोकने में मदद करते हैं, तो क्षेत्र में उनके ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाया जाएगा.  ईरान पिछले शुक्रवार से इजरायल पर मिसाइलों और ड्रोनों की भारी बौछारें कर रहा है, अधिकांश ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को इजरायल की वायु रक्षा द्वारा रोक दिया गया है, हालांकि कुछ बच गए हैं, जिससे कम से कम 16 लोग मारे गए और शहरी क्षेत्रों में सैकड़ों लोग घायल हो गए.  गौरतलब है कि अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सेना पहले से ही ड्रोन और मिसाइलों को मार गिरा रही है. हालांकि अभी तक न तो फ्रांस और न ही ब्रिटेन ने इन हमलों को रोकने में मदद की है, हालांकि पेरिस ने कहा है कि वह ऐसा कर सकता है, और लंदन ने भी इस संभावना से इनकार नहीं किया है.   

नकली डिजिटल कोर्ट में 81 साल के बुजुर्ग से हड़पे 2.27 करोड़

नई दिल्ली साइबर धोखाधड़ी के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे। डिजिटल धोखेबाज बड़ी संख्‍या में बुजुर्गों को टार्गेट कर रहे हैं। उन्‍हें तकनीकी जाल में फंसाया जा रहा है। भरोसे में लिया जा रहा है और फ‍िर जितना हो सके, रकम ट्रांसफर कराई जा रही है। लगभग एक ही पैटर्न के तमाम मामले आ रहे हैं, लेकिन घटनाओं पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है। इस दफा चेन्‍नई के रहने वाले 81 वर्षीय साल के बुजुर्ग के साथ 2.27 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है। उन्‍हें डिजिटल अरेस्‍ट बनाकर पैसे हड़प लिए गए। ऐसा करने के लिए आरोपियों ने बुजुर्ग को वर्चुअल कोर्ट में पेश किया है। उस नकली कोर्ट में सबकुछ फ्राॅड था। बुजुर्ग के साथ उनकी पत्‍नी भी शिकार हुईं। दोनों करीब डेढ़ महीने तक साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसे रहे। डीटीनेक्‍स्‍ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला मार्च के मध्‍य से अप्रैल के आखिरी सप्‍ताह तक अंजाम दिया गया। बुजुर्ग ने अपने जीवनभर की कमाई गंवा दी। पीड़‍ित को 15 मार्च को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताया। दावा किया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में अकाउंट खोला गया है। शुरुआत में बुजुर्ग आरोपियों की भाषा नहीं समझ पा रहे थे, क्‍योंकि आरोपी हिंदी में बात कर रहे थे। तमिल बोलने वाले ने लिया भरोसे में उसके बाद तमिल बोलने वाला एक शख्‍स कॉल पर जुड़ा और बुजुर्ग को इस भरोसे में लिया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में अकाउंट खोला गया है। बुजुर्ग से कहा कि उनका केस राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए किसी को भी इस बारे में ना बताएं। आरोपियों ने बुजुर्ग को यह यकीन दिला दिया कि गलती बुजुर्ग की तरफ से हुई है। मांगी पैसों की जानकारी आरोपियों ने बुजुर्ग से जानकारी मांगी कि उनके पास सभी बैंक अकाउंट्स में कितना पैसा है। बुजुर्ग को यह कहकर डराया गया कि वह और उनकी पत्‍नी निगरानी में हैं। उन्‍हें घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं है और किसी से भी इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए। इसके बाद आरोपियों ने उनसे 59 लाख रुपये एक अकाउंट में ट्रांसफर करवाए। फ‍िर ऑनलाइन एक अदालत में शामिल होने का आदेश दिया गया। बुजुर्ग और उनकी पत्‍नी डिजिटल कोर्ट में पेश हुए। उस कोर्ट में नकली जज की एंट्री कराई गई। बुजुर्ग से कहा कि उन्‍हें उनकी पत्‍नी के साथ 7 दिनों की सीबीआई हिरासत में डिजिटल अरेस्‍ट रखा जाएगा। इस पूरे मामले पर चुप रहने के लिए कहा गया। एफडी तक तुड़वा दीं इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से बुजुर्ग से पैसे हड़पे गए। उनकी एफडी तक तुड़वा दी गईं और सारी रकम कुछ-कुछ हिस्‍सों में ट्रांसफर करवाई गई। कुल मिलाकर बुजुर्ग ने 2.27 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी उन्‍हें परेशान करने की कोशिश हुई। बुजुर्ग से कहा गया कि वह अपनी बेटी और बेटों से पैसों का इंतजाम करवाएं। यहां तक कि बुजुर्ग से उनकी प्रॉपर्टी तक बेचने के लिए कह दिया गया। एक दिन बुजुर्ग ने अपने दामाद को कॉल करके बुलाया और उसके बाद मामले का खुलासा हुआ। अब इस मामले की जांच की जा रही है।

थोक महंगाई दर में गिरावट, 14-महीने के निचले स्तर पर फिसला, प्याज-फ्यूल-सब्जियों का थोक भाव सबसे ज्यादा घटा

नई दिल्ली खुदरा महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को राहत मिलने के बाद राहत की एक और बड़ी खबर आई है. आज, 16 जून थोक महंगाई दर के भी आंकड़े जारी हो गए हैं. मई महीने के दौरान थोक महंगाई दर में भी कमी आई है और यह 0.39% रही. मई महीने में थोक महंगाई दर माह-दर-माह आधार पर 0.85% से घटकर 0.39% पर आ चुकी है. एक्सपर्ट्स ने इसे 0.80% रहने का अनुमान जताया था. थोक महंगाई दर में गिरावट के साथ अब यह 14 महीने के निचले स्तर पर फिसल चुका है. भारत में मई महीने के लिए यह थोक महंगाई दर मार्च 2024 के निचले स्तर पर आ गया है. मई 2025 के लिए आंकड़ों पर डिटेल में नजर डालें तो प्राइमरी आर्टिकल्स का WPI -1.44% से घटकर -2.02% पर आ चुकी है. इस दौरान खाद्य महंगाई दर मासिक आधार पर 2.55% से 1.72% पर आ चुकी है. मैन्युफैक्चरिंग WPI 2.62% से घटकर 2.04% पर आ चुका है. फ्यूल एंड पावर WPI -2.18% से घटकर 2.27% पर आ चुका है. प्याज की थोक महंगाई दर 0.20% से घटकर -21.62% फिसल चुका है. वहीं, सब्जियों की महंगाई दर भी -18.26% से घटकर -21.62% पर फिसला है. अंडे, मांस और मछली की WPI -0.29% से घटकर -1.01% पर आ चुकी है. ये चीजें हुईं सस्ती खाने पीने के सामानों में कटौती करने का असर थोक महंगाई के आंकड़ों के तौर पर साफ देखा जा सकता है. खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 2.55% से घटकर 1.72% हो गई है. फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर -2.18% से घटकर -2.27 रही है. वहीं, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 2.62% से घटकर 2.04 रही है. रिटेल महंगाई में भी कमी थोक महंगाई के आंकड़ों से पहले सरकार की ओर से रिटेल महंगाई के आंकड़ें जारी किए गए थे. 12 जून को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2025 में भारत की रिटेल महंगाई घटकर 2.82% पर पहुंच गई, जो छह साल का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले मार्च 2019 में यह 2.86% थी. खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार कमी के कारण रिटेल महंगाई में नरमी आई है. अप्रैल 2025 में रिटेल महंगाई 3.16% थी, जबकि मार्च में यह 3.34% रही, जो 67 महीने का सबसे निचला स्तर था. फरवरी से रिटेल महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है. कैसे मापी जाती है महंगाई? रिटेल और थोक महंगाई को मापने के लिए अलग-अलग उत्पादों को आधार बनाया जाता है. महंगाई मापने हेतु विभिन्न आइटम्स को शामिल किया जाता है. उदाहरण के लिए, थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे खाद्य पदार्थों की 22.62%, और फ्यूल व ऊर्जा की 13.15% होती है. दूसरी ओर, रिटेल महंगाई में खाद्य पदार्थों और उत्पादों की हिस्सेदारी 45.86%, आवास की 10.07%, और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी शामिल होती है. खुदरा महंगाई दर के आंकड़े कैसे रहे? मई 2025 में खुदरा महंगाई दर 6 साल के निचले स्तर पर आ चुका है. मई में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) घटकर 2.82% पर रहा, जो अप्रैल में 3.16% पर था. हालांकि मई में रिटेल महगाई के 2.95% पर रहने का अनुमान लगाया गया था. यह लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मिड प्वाइंट से नीचे रही है. खाद्य महंगाई, जिसका कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में महत्वपूर्ण योगदान है, लगातार तीन महीनों से 3% से नीचे बनी हुई है. फरवरी 2019 के बाद यह साल-दर-साल सबसे कम महंगाई है. अक्टूबर में CPI 14 महीने के उच्च स्तर 6.21% पर पहुंच गई थी. मई में खाद्य महंगाई महीने दर महीने 1.78% से घटकर 0.99% पर आ गई है. आरबीआई ने 6 जून को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी समीक्षा में वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई के अपने पूर्वानुमान को पहले के 4% से घटाकर 3.7% कर दिया है. बीते महीने खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई दर कम होकर 1.72 प्रतिशत हो गई है, जो कि अप्रैल में 2.55 प्रतिशत थी। यह ट्रेंड दिखाता है कि देश में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आ रही है.  खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में सब्जियों की महंगाई दर मई में घटकर -21.62 प्रतिशत रह गई, जो अप्रैल में -18.26 प्रतिशत थी.  मई महीने में दालों में महंगाई दर -10.41 प्रतिशत रही, जबकि गेहूं की महंगाई दर 5.75 प्रतिशत रही. अंडे, मांस और मछली की महंगाई दर अप्रैल में -0.29 प्रतिशत से घटकर मई में -1.01 प्रतिशत रह गई. आलू और प्याज की महंगाई दर क्रमशः -29.42 प्रतिशत और -14.41 प्रतिशत रही.  मई में ईंधन और ऊर्जा पर महंगाई दर (-)2.27 प्रतिशत रही है, जो कि अप्रैल में (-) 2.18 प्रतिशत थी.   प्राथमिक वस्तुओं के लिए महंगाई दर मई में कम होकर (-) 2.02 प्रतिशत रह गई है, जो कि अप्रैल में (-) 1.44 प्रतिशत थी. डब्ल्यूपीआई मुख्य महंगाई दर, जिसमें फूड और फ्यूल नहीं शामिल होता है, घटकर 0.9 प्रतिशत हो गई है, जो कि अप्रैल में 1.5 प्रतिशत थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स पर महंगाई दर मई में 2.04 प्रतिशत रही है, जो कि अप्रैल में 2.62 प्रतिशत थी.   

हांगकांग से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट तकनीकी समस्या की वजह से वापस लौटी

नई दिल्ली हांगकांग से दिल्ली जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI315 को बीच उड़ान में ही तकनीकी समस्या का संदेह होने के बाद वापस अपने मूल स्थान पर लौटना पड़ा। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर की ओर से संचालित यह फ्लाइट AI315 हांगकांग से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान का इस्तेमाल भारत में एअर इंडिया की तरफ से किया जा रहा है। 12 जून को गुजरात के अहमदाबाद में ऐसा ही एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दौरान विमान में सवार 242 लोगों में 241 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले रविवार को लंदन के हीथ्रो हवाइ अड्डे से चेन्नई (भारत) के लिए रवाना हुई ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान बीए35 ने उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद तकनीकी दिक्कत महसूस की। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर दोपहर 1:16 बजे (ब्रिटिश समयानुसार) पर 36 मिनट की देरी से उड़ा, लेकिन लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर पायलटों ने फ्लैप सिस्टम में गड़बड़ी के संकेत पाए। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान को डोवर की खाड़ी के ऊपर होल्डिंग पैटर्न में घुमते हुए कई चक्कर लगाए। इसी दौरान विमान लगभग 30 मिनट तक 12,000 फीट पर रहा और सुरक्षित लैंडिंग के लिए अतिरिक्त ईंधन हवा में ही गिराया गया, ताकि वजन कम हो सके। कुल लगभग एक घंटा 45 मिनट बाद विमान ने हीथ्रो के रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग की। सभी यात्रियों और क्रू को सकुशल उतार लिया गया। लुफ्थांसा की फ्लाइट को यू-टर्न लेकर फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट वापस जाना पड़ा था बीते दिन हैदराबाद आ रही लुफ्थांसा की एक फ्लाइट को रविवार शाम को यू-टर्न लेकर फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर वापस उतरना पड़ा था। फ्लाइट LH752 जर्मनी से रवाना हुई थी। उसे सोमवार सुबह हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना था। लुफ्थांसा एयरलाइंस ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया था कि हमें हैदराबाद में उतरने की अनुमति नहीं मिली। इसीलिए विमान ने यू-टर्न लिया और वापस लौट आया। बम की धमकी वाला ईमेल मिला था आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, 15 जून 2025 को शाम 18:01 बजे हैदराबाद हवाई अड्डे पर लुफ्थांसा फ्लाइट एलएच 752 को बम की धमकी वाला ईमेल मिला। बम की धमकी के बाद आकलन समिति का गठन किया गया और एसओपी के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर एयरलाइन को मूल स्थान या निकटतम उपयुक्त हवाई अड्डे पर वापस जाने की सलाह दी गई। लखनऊ में सऊदी के विमान के पहियों से धुआं निकलता देखा गया इससे पहले 15 जून की सुबह जेद्दा से लखनऊ एयरपोर्ट पर उतरे सऊदी अरब के एक विमान के पहियों से धुआं निकलता हुआ देखा गया। विमान बचाव और अग्निशमन (ARFF) की टीम मौके पर पहुंची। सऊदी अरब की टीम के साथ मिलकर धुएं को नियंत्रित किया गया और विमान को किसी भी अनहोनी से बचाया गया। एयरपोर्ट अधिकारी ने बताया कि यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया और एयरपोर्ट संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी को साइप्रस में मिला सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय साइप्रस के दौरे पर हैं, जहां साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने सोमवार को पीएम मोदी को साइप्रस ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है. पीएम ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर खुशी जताई है. इस मौके पर बोलते हुए पीएम ने कहा, ‘ये अवॉर्ड 140 करोड़ भारतवासियों का सम्मान है. ये हमारे देश के भाईचारे और वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा का सम्मान है.’ साइप्रस का सर्वोच्च सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने खुशी जताई है. पीएम ने एक्स पर लिखा, साइप्रस के ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III’ का सम्मान पाकर मैं बहुत खुश हूं. मैं इसे हमारे देशों के बीच मित्रता को समर्पित करता हूं. इस मौके पर बोलते हुए पीएम ने कहा, ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III से सम्मान के लिए आपका, साइप्रस सरकार और लोगों का आभार व्यक्त करता हूं. ये सम्मान मेरा अकेले नहीं है, बल्कि ये 140 करोड़ भारतवासियों का सम्मान है. ये हमारे देश के भाईचारे और वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा का सम्मान है.’ PM ने आगे कहा,  ‘मैं ये अवॉर्ड भारत और साइप्रस के मैत्रीपूर्ण संबंधों, हमारे साझा मूल्यों और हमारी पारंपरिक समझ को समर्पित करता हूं. मैं सभी भारतीयों की ओर से इस सम्मान को कृज्ञता से स्वीकार करता हूं. ये अवॉर्ड शांति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता, और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है.’  इससे पहले पीएम मोदी ने भारत-साइप्रस व्यापार गोलमेज बैठक को संबोधित किया और साइप्रस के राष्ट्रपति का आभार जताया. पीआईबी के अनुसार पीएम ने अपने संबोधन में कहा, ‘सबसे पहले मैं राष्ट्रपति जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि आज वो स्वयं एयरपोर्ट पर मुझे रिसीव करने के लिए आए थे. बिजनेस लीडर के साथ इतना बड़ा राउंड टेबल उन्होंने ऑर्गेनाइज किया, मैं इसके लिए बहुत आभारी हूं. उन्होंने मेरे लिए और हमारी पार्टनरशिप के लिए जो सकारात्मक विचार रखे हैं, मैं इसके लिए भी आपका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं.’ 23 सालों बाद भारत के PM का साइप्रस दौरा PM ने कहा कि 23 वर्षों के बाद भारत के प्रधानमंत्री का साइप्रस में आना हुआ है और सबसे पहला कार्यक्रम बिज़नेस राउंड टेबल का हो रहा है. ये एक संकेत है कि भारत और साइप्रस के संबंधों में आर्थिक जगत से जुड़े लोगों का कितना महत्व है. आपके विचारों को मैंने बहुत गौर से सुना है. भारत साइप्रस आर्थिक संबंधों के लिए आपके प्रतिबद्धता को मैंने महसूस किया है. आपके विचारों में सिर्फ संभावना ही नहीं, संकल्प को भी मैं महसूस कर रहा हूं. यह स्पष्ट है कि हमारे संबंधों में आगे बढ़ने की अपार-अपार संभावनाएं हैं.  

ईरान और इजरायल की जंग तेज,11 बजते ही जान बचाने के लिए बंकर में छिपे खामेनेई!

तेहरान  इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ युद्ध अभी तक थम नहीं सका है. इजरायल के हमले के बाद ईरान ने भी उस पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है. इस बीच एक और अहम खबर सामने आयी है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई इजरायल के खौफ से बंकर में जाकर छिप गए हैं. खामेनेई के साथ उनका पूरा परिवार भी है. इजरायल ने ईरान पर अटैक करके उसके कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था. इसके जवाब में ईरान ने भी भयंकर नुकसान पहुंचाया है. ‘ईरान इंटरनेशनल’ की एक खबर के मुताबिक खामेनेई के बेटे मोजतबा सहित उनके परिवार के सभी सदस्य उनके साथ हैं. वे सभी बंकर में छिपे हैं. इजरायल के खिलाफ पिछले ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 1 और ट्रू प्रॉमिस 2 के दौरान खामेनेई के परिवार को भी बंकर में ले जाया गया था. उस समय मोजतबा उनके साथ थे, लेकिन उनके दो बेटे मसूद और मुस्तफा उनके साथ नहीं थे.  खामेनेई को मारने की योजना इससे पहले रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को मारने के संबंध में इजरायल की योजना को वीटो कर दिया। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजरायल हाल ही में अमेरिका के पास यह प्रस्ताव लेकर गया था कि उन्होंने खामेनेई को मारने की एक विश्वसनीय योजना बनाई है। हालांकि ट्रंप ने इस योजना की अनुमति नहीं दी। जानकारी के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह कदम संघर्ष को और भड़का सकता है। ईरान के 224 नागरिकों की मौत इससे पहले ईरान ने सोमवार को बताया है कि बीते शुक्रवार इजरायल द्वारा शुरू किए गए ताजा हमलों में अब तक 224 ईरानियों की मौत हो चुकी है। इनमें ईरान के सैन्य प्रमुख और कई परमाणु अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने कहा है कि ईरान की ओर से किए गए हमलों में उसके यहां 14 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 300 से अधिक लोग घायल हैं। गौरतलब है कि इजरायल ने शुकवार सुबह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन राइजिंग लॉयन शुरू किया था। इस दौरान इजरायल ने ईरान के कई परमाणु, मिसाइल और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया। वहीं ईरान ने भी इजरायल पर कई जवाबी हमले किए हैं। खामनेई को क्यों नहीं निशाना बनाया? रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने ऑपरेशन की पहली रात को खामनेई को निशाना नहीं बनाया, ताकि उन्हें अपनी यूरेनियम संवर्धन योजना को पूरी तरह छोड़ने का आखिरी मौका दिया जा सके। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इजरायल ने अपने सूत्रों के हवाले से दी है। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने बताया कि उसने ईरान में हथियार बनाने की ताकत को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में IRGC, उसकी कुद्स फोर्स और ईरानी फौज के ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया। IDF ने कहा, “ईरान में हथियार बनाने वाली कई फैक्ट्रियां निशाना बनीं।” ईरान ने सीजफायर पर बातचीत से किया इनकार इस बीच यह खबरें भी सामने आई हैं कि ईरान ने सीजफायर पर बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने मध्यस्थ देश कतर और ओमान के जरिए यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह इजरायल के हमलों का जवाब देने के बाद ही सीजफायर पर विचार करेगा। ईरान ने साफ कह दिया है कि ईरान इजरायली हमले के बीच समझौता नहीं करेगा। क्या खामेनेई पर अटैक का प्लान बना रहा है इजरायल इजरायल ने अभी तक ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वह अब खामेनेई को भी निशाने पर ले सकता है. अमेरिका इस मामले में इजरायल का साथ दे सकता है. एक अमेरिकी अधिकारी ने हाल ही में यह कहा कि इजरायल ने खामेनेई को मारने का प्लान बनाया है और वह इसको लेकर डोनाल्ड ट्रंप के पास भी गया था, लेकिन ट्रंप ने इसकी इजाजत नहीं दी. ईरान-इजरायल के युद्ध को शांत करवाएंगे ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बार फिर अपने कार्यकाल की विदेश नीति से जुड़ी उपलब्धियों को गिनाते हुए दावा किया कि उनके प्रयासों से इजरायल और ईरान के बीच भी जल्द शांति स्थापित हो सकती है. सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में ट्रंप ने कहा कि जिस तरह उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार के जरिए तनाव कम किया था, उसी तरह वह इजरायल और ईरान को भी बातचीत की मेज पर ला सकते हैं.

पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना , अधिसूचना जारी, 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा एप

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि भारत की जनसंख्या की जनगणना वर्ष 2027 के दौरान की जाएगी। इसके लिए राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनगणना 1 अक्तूबर 2026 से शुरू होगी। देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया 1 मार्च 2027 से शुरू होगी। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को जनगणना कराने की तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, महापंजियन एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की थी। सरकारी बयान के अनुसार, यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। इसके लिए मोबाइल एप तैयार किए जाएंगे और उसी में जनगणना से जुड़ी सभी जानकारी एकत्र की जाएगी। एप 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे। गृह मंत्री शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, ’16वीं जनगणना में पहली बार जाति गणना शामिल होगी। 34 लाख गणक और सुपरवाइजर, 1.3 लाख जनगणना पदाधिकारी आधुनिक मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के साथ यह कार्य करेंगे। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में 1 अक्तूबर, 2026 से और देश के बाकी हिस्से में 1 मार्च, 2027 से जातियों की गणना और जनगणना का कार्य शुरू होगा।’ दो चरणों में की जाएगी जनगणना जनगणना दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण यानी मकान सूचीकरण और मकानों की गणना (एचएलओ) में प्रत्येक परिवार की आवासीय स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं का विवरण एकत्र किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण (जनसंख्या गणना) में प्रत्येक घर के हर व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण एकत्र किए जाएंगे। आजादी के बाद 8वीं जनगणना यह जनगणना भारत की16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। इस बार जनगणना डिजिटल माध्यम से मोबाइल एप्लिकेशन के जरिये की जाएगी। नागरिकों के लिए स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) की सुविधा भी उपलब्ध होगी। डाटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संग्रह, संचरण और भंडारण के दौरान कड़े सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी और यह जनगणना 16 वर्षों के अंतराल के बाद होगी।

लुफ्तांसा की फ्लाइट को बम की धमकी के चलते हैदराबाद में उतरने की अनुमति नहीं मिली

हैदराबाद  बम की धमकी मिलने के बाद भारत आ रहे विमान को हवा में ही यू-टर्न लेकर वापस लौटना पड़ा। लुफ्तांसा एयरलाइंस की यह फ्लाइट जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही थी। लेकिन बम की धमकी के चलते इस विमान को हैदराबाद में उतरने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद विमान बीच रास्ते से ही 4000 किमी वापस वहीं पहुंच गया जहां से इसने उड़ान भरी थी। इसे जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर लैंड कराया गया। बता दें कि हैदराबाद से फ्रैंकफर्ट की दूरी 4000 किमी है। एयरलाइंस ने बयान में क्या कहा लुफ्तांसा एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या एलएच752 राजीव गांधी एयरपोर्ट पर उतरने वाली थी। लेकिन बम की धमकी के चलते इसे अनुमति नहीं मिली। इसके बाद विमान बीच रास्ते से ही वापस लौट गया। लुफ्तांसा एयरलाइंस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हमें हैदराबाद में लैंडिंग की परमिशन नहीं मिली। इसके चलते हमारे विमान ने यू-टर्न ले लिया और वापस चला आया। भारतीय वायु सीमा में घुसने ही नहीं दिया हैदराबाद एयरपोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी का भी इस संबंध में बयान आया है। इस अधिकारी ने भी विमान के वापस लौटने की पुष्टि की है। उन्होंने कहाकि लुफ्तांसा एयरलाइंस के विमान के भारतीय वायुक्षेत्र में पहुंचने से पहले ही बम की धमकी मिल चुकी थी। इस वजह से इसे भारतीय क्षेत्र में घुसने ही नहीं दिया गया और वहीं लौटा दिया गया जहां से यह आ रहा था। उठ रहे हैं सवाल विमान को अप्रत्याशित ढंग से वापस करने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। एयरलाइंस का कहना है कि उसे लैंडिंग की परमिशन नहीं मिली। वहीं, दूसरी तरफ एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि मामला बम की धमकी से जुड़ा हुआ है। हालांकि अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि विमान को किस तरह की धमकी मिली थी। 13 जून को भी ऐसा ही ऐसा गौरतलब है कि ऐसी ही एक घटना 13 जून को एयर इंडिया की फ्लाइट के साथ हुई थी। फ्लाइट एआई 379 फुकेत से नई दिल्ली आ रही थी। इस विमान को भी उड़ान के कुछ ही देर बाद वापस फुकेत में ही लैंडिंग करनी पड़ी थी। अधिकारियों ने कहा है कि इन दोनों ही घटनाओं की जांच की जा रही है।

इजरायल का करारा पलटवार, ईरान पर कर दिया बड़ा हमला, 400 से अधिक मरे

तेहरान  ईरान और इजराइल के बीच चौथे दिन भी लड़ाई जारी है। इजराइल ने रविवार रात ईरान के विदेश मंत्रालय पर हमला किया। इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इससे एक दिन पहले इजराइली सेना ने ईरानी रक्षा मंत्रालय पर भी हमला किया था। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइली हमलों में अब तक 224 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 से ज्यादा घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिका में स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ग्रुप ने ईरान में 406 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। ईरान ने भी इजराइल पर पलटवार किया है। ईरान ने सोमवार सुबह सेंट्रल इजराइल में 4 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 67 घायल हुए। अब तक इजराइल में ईरानी हमलों में 20 लोग मारे गए हैं, जबकि 450 से ज्यादा घायल हुए हैं। ईरान पर इजरायली हमले के 72 घंटे हो चुके हैं. इस हमले में अब 406 ईरानियों की मौत हो चुकी है, जबकि 654 लोग घायल हैं. वहीं ईरानी हमले में अबतक 16 इजरायलियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं. पिछले 72 घंटों में इजरायल ने ईरान के हर मुमकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और टारगेट पर हमला किया है. हालांकि तेहरान का कहना है कि इजरायली हमले में अबतक 224 मौतें हुई हैं. इनमें ज्यादातार नागरिक हैं. इजरायल ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटे में उसने अपने देश से तेहरान के बीच ‘एयर कॉरिडोर’ बना लिया है. यानी कि इजरायली दावे के मुताबिक अब इजरायल की वायु सेना अपने देश से तेहरान तक बिना बाधा के उड़ान भर सकती है और हमले कर सकती है. इस बीच इजरायल ने ईरान पर सबसे ज्यादा दूरी से हमला किया है. इजरायल की वायु सेना ने पूर्वी ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर एक ईरानी ईंधन भरने वाले विमान पर हमला किया, जो इजराइल से लगभग 2,300 किलोमीटर दूर है. हमले के बाद ये विमान आग की लपटों में आ गया और तबाह हो गया. यह ऑपरेशन राइजिंग लॉयन की शुरुआत के बाद से किया गया सबसे लंबी दूरी का हमला है. इजरायल सैनिक अड्डों को निशाना बनाने के बाद अब मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है. इजरायल ने तेहरान में मौजूद जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर को ही उड़ा दिया है. IDF  ने इस हमले का वीडियो जारी किया है.  आइए बताते हैं कि इजरायल ने पिछले 72 घंटों में ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया है.  परमाणु ठिकाने: जंग की शुरुआत के साथ ही इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था. इजरायली हमले का पहला टारगेट थे नंताज परमाणु साइट. इजरायल का दावा है कि उसके हमले में नंताज में यूरेनियम संवर्धन की मशीनरी को भारी नुकसान पहुंचा है. इजरायल ने इस्फहान और फोर्डो में भी परमाणु साइट पर हमला किया है. यहां पर हुए नुकसान की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है. हालांकि  सैन्य ठिकाने: इजरायल ने न्यूक्लियर साइट के अलावा ईरान के मिलिट्री साइट पर भी हमला किया है और इसे जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है. तेहरान और अन्य शहरों में सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं. जिसमें मिसाइल उत्पादन सुविधाएं शामिल हैं. दक्षिणी ईरान में एक रिफाइनरी में भारी विस्फोट हुआ है. तबरेज और करमानशाह में दो मिसाइल बेस पूरी तरह तबाह हो गए हैं.  इजरायली हमले में राजधानी तेहरान में भारी नुकसान की खबर है. कई रिहायशी इलाकों और सरकारी इमारतों को भारी नुकसान हुआ है. मेहराबाद एयरपोर्ट प्रभावित हुआ है.  ईरान ने तेहरान एयरपोर्ट को बंद कर दिया है.  13-15 जून 2025 को इजरायली हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने की है.  टॉप मिलिट्री लीडरशिप साफ इनमें आर्मी चीफ मेजर जनरल मोहम्मद बघेरी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी, IRGC के खातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रमुख मेजर जनरल गुलाम अली रशीद, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर जनरल अमीर अली हाजीज़ादेह, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी इंटेलिजेंस चीफ जनरल गुलामरेज़ा मेहराबी, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी कमांडर ऑफ ऑपरेशंस जनरल मेहदी रब्बानी मारे गए हैं.  वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में पुष्टि की है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद काज़मी और उनके डिप्टी जनरल हसन मोहाकिक तेहरान पर इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं. इसके अलावा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली शमखानी भी मारे गए हैं. इजरायली हमले में ईरान का टॉप मिलिट्री लीडरशिप खत्म हो गया है. न्यूक्लियर साइंटिस्ट का एक जेनेरेशन ही खत्म इसके अलावा इजरायल ने ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों को भी मार डाला है. इनमें भौतिक विज्ञानी मोहम्मद मेहदी तेहरांची, ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख फेरेयदौन अब्बासी-दवानी,  शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रमुख अब्दुलहामिद मिनोचेहर, शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अहमदरेज़ा जोलफगारी, अमीरहोसैन फकी, परमाणु वैज्ञानिक अली बकाई करीमी, परमाणु वैज्ञानिक मंसूर असगरी, परमाणु वैज्ञानिक सईद बोरजी शामिल है.  इतने बड़े पैमाने पर परमाणु वैज्ञानिकों को मारकर इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है.  इजरायल को नुकसान इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने  100-200 बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे. जिनमें से कुछ ने आयरन डोम रक्षा प्रणाली को भेद दिया. इससे तेल अवीव में कई इमारतें और वाहन नष्ट हो गए. ईरानी हमले में तेल अवीव में तबाही की भयानक तस्वीरें सामने आई है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में अबतक इजरायल में 16 लोगों की मौत हुई है. ईरान ने मुख्य रूप से तेल अवीव, रमात गान, बैट यम और रेहोवोट में हमला किया है.  तेहरान टाइम्स के अनुसार सोमवार की सुबह-सुबह ईरान ने इजरायल के कब्जे वाले इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलों की दूसरी खेप दागी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद से दसवीं बमबारी थी.  तेहरान टाइम्स का दावा है इससे पहले आधी रात को ईरान ने नेगेव रेगिस्तान और किरयात गत के साथ-साथ हाइफ़ा के अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाया, जिससे सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा.  हाइफा में ईरानी मिसाइल गिरने … Read more

देश में 24 घंटे में कोविड-19 से 11 मौतें, सक्रिय मामले घटकर 7,264 रह गई

नई दिल्ली/मुंबई/बेंगलुरु/तिरुवनंतपुरम भारत में कोविड-19 संक्रमण को लेकर फिलहाल राहत की खबर है। देश में लगातार दूसरे दिन कोरोना के सक्रिय मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 जून को सुबह 8 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 7,264 रह गई है। बीते 24 घंटों में 119 एक्टिव केस कम हुए हैं, जो संक्रमण की स्थिति में सुधार का संकेत है। केरल में सबसे ज्यादा संक्रमण मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, केरल, जो संक्रमण के मामलों में सबसे आगे रहा है, वहां एक्टिव केस घटकर 1,920 रह गए हैं। अकेले केरल में 87 सक्रिय मामले कम हुए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में 38, दिल्ली में 33, तमिलनाडु में 23, गुजरात और हरियाणा में 8-8, पंजाब में 7, आंध्र प्रदेश में 6, असम में 4, उत्तराखंड में 3, जम्मू-कश्मीर में 2, और पुडुचेरी में 1 एक्टिव केस में गिरावट आई है। इन राज्यों में संकमण के नए केस हालांकि कुछ राज्यों में संक्रमण के नए मामले भी सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश में 37, राजस्थान में 30, कर्नाटक में 18, मणिपुर में 5, झारखंड और मध्य प्रदेश में 4-4, छत्तीसगढ़ और सिक्किम में एक-एक नए मरीज मिले हैं। उत्तर प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या अब 275 तक पहुंच गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, केरल में संक्रमण के 87 केस घटे हैं। उसके अलावा महाराष्ट्र में 38, दिल्ली में 33, तमिलनाडु में 23, गुजरात-हरियाणा में 8-8, पंजाब में 7, आंध्र प्रदेश में 6, असम में 4, उत्तराखंड में 3, जम्मू-कश्मीर में 2, पुडुचेरी में एक की गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि बीते 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान में कोविड संक्रमण के 30, कर्नाटक में 18, मणिपुर में 5, झारखंड और मध्य प्रदेश में 4-4, छत्तीसगढ़ और सिक्किम में एक-एक मरीज मिले हैं। नए आंकड़ों के बाद केरल में सबसे ज्यादा कुल एक्टिव केस 1920 हैं, जबकि गुजरात में 1433, दिल्ली में 649, महाराष्ट्र में 540 हैं। इसके अलावा देशभर में एक दिन में ही कोविड संक्रमण से 11 लोगों की जान गई है। लगातार दूसरा दिन है, जब नए वैरिएंट से मरने वालों की संख्या 10 से ज्यादा रही है। 15 जून को भी देशभर में कोविड से संक्रमित 10 लोगों की जान गई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि पिछले 24 घंटों में पूरे देश में सबसे ज्यादा 7 मौतें केरल में हुई हैं। बाकी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में एक-एक मरीज की जान गई है। 24 घंटे में 11 मरीजों की मौत गंभीर चिंता का विषय यह है कि बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण से 11 मरीजों की मौत हुई है। यह लगातार दूसरा दिन है, जब कोविड से 10 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। इससे पहले 15 जून को 10 मरीजों की मृत्यु हुई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन 11 मौतों में से सबसे अधिक 7 मौतें केरल में हुई हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में एक-एक मरीज की मृत्यु हुई है। देश में संक्रमण की स्थिति अभी नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नई वैरिएंट्स और मौसम में बदलाव को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और टीकाकरण को अपडेट रखना जरूरी है, ताकि संक्रमण पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके। राज्यों से कोरोना अपडेट…     उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए सावधानी बरतने का निर्देश जारी किया है। प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी अस्पतालों को जरूरी दवाएं, पीपीई किट, जांच सुविधाएं, आइसोलेशन बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर, आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं को तैयार रखने को कहा है।     महाराष्ट्र: राज्य में शनिवार को कोरोना के 53 नए केस मिले। वहीं, 2 मरीजों की मौत हो गई। 1 जनवरी से अब तक 21067 कोविड-19 टेस्ट किए गए हैं। इस दौरान 1967 पॉजिटिव केस सामने आए।     केरल: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा के लक्षणों वाले मरीजों का इलाज करते समय जून 2023 में जारी की गई कोविड गाइडलाइन पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में सभी को मास्क लगाना अनिवार्य है। साथ ही ​​​​​​जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षण वाले मरीजों का कोविड टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है।     कर्नाटक: गुलबर्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने में 25 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया है। इनमें से पांच-पांच बेड ICU (वेंटिलेटर समेत), हाई डिपेंडेंसी यूनिट और पांच प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए हैं। बाकी 10 नॉर्मल बेड हैं। भारत में मिले कोविड-19 के 4 नए वैरिएंट भारत के कई राज्यों में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच देश में चार नए वैरिएंट मिले हैं। ICMR के डायरेक्टर डॉ. राजीव बहल ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत से जिन वैरिएंट की सीक्वेंसिंग की गई है, वे LF.7, XFG , JN.1 और NB.1.8.1 सीरीज के हैं। बाकी जगहों से नमूने लेकर सीक्वेंसिंग की जा रही है, ताकि नए वैरिएंट की जांच की जा सके। मामले बहुत गंभीर नहीं हैं, लोगों को चिंता नहीं, बस सतर्क रहना चाहिए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी इन्हें चिंताजनक नहीं माना है। हालांकि, निगरानी में रखे गए वैरिएंट के रूप में कैटेगराइज किया है। चीन सहित एशिया के दूसरे देशों में कोविड के बढ़ते मामलों में यही वैरिएंट दिख रहा है। NB.1.8.1 के A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन अन्य वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैलते हैं। इन पर कोविड के खिलाफ बनी इम्यूनिटी का भी असर नहीं होता। भारत में कोविड का JN.1 वैरिएंट सबसे आम है। टेस्टिंग में आधे से ज्यादा सैंपल में यह वैरिएंट मिलता है। इसके बाद BA.2 (26 प्रतिशत) और ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20 प्रतिशत) वैरिएंट के मामले भी मिलते हैं। JN.1 वैरिएंट इम्यूनिटी कमजोर करता है​​​​​ JN.1, ओमिक्रॉन के BA2.86 का एक स्ट्रेन है। इसे अगस्त 2023 में पहली बार देखा गया था। दिसंबर 2023 में WHO ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया। इसमें करीब 30 म्यूटेशन्स हैं, जो इम्यूनिटी कमजोर करते हैं। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी … Read more

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