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टेस्ला ने लॉन्च से कुछ दिनों पहले किया बिना ड्राइवर के Tesla Robotaxi का टेस्ट ड्राइव

 टेक्सास  अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने घोषणा की है कि, टेस्ला 22 जून को टेक्सास के ऑस्टिन में अपनी लंबे समय से प्रतीक्षित रोबोटैक्सी सर्विस शुरू करने जा रही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए एलन मस्क ने इस बात की जानकारी दी. एलन मस्क ने कहा कि, इसे पहले ऑस्टिन में लॉन्च किया जाएगा. हालांकि अभी इसके लॉन्च की तारीख पूरी तरह से फाइनल नहीं है क्योंकि इसे ‘अस्थायी रूप से 22 जून’ बताया गया है. ऑस्टिन में हो रही है टेस्टिंग:  बता दें कि, हाल ही में Tesla RoboTaxi को टेस्टिंग के दौरान ऑस्टिन की सड़कों पर स्पॉट भी किया गया है. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस रोबो टैक्सी को बिना किसी परेशानी के भीड़-भाड़ वाले इलाके से गुजरते हुए देखा जा सकता है. हालांकि इस ड्राइवरलेस टेस्टिंग मॉडल के पीछे टेस्ला की और कार चल रही है. जो संभवत: सड़क पर इस कार के परफॉर्मेंस को मॉनिटर कर रही है.  एलन मस्क ने इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री के अलावा ऑटोनॉमस ड्राइविंग के क्षेत्र में एक बड़ा दांव लगाया है. इस नए रोबोटैक्सी के सड़क पर उतरने के बाद लोगों में सेफ्टी को लेकर काफी चिंता हो रही है. क्योंकि हाल के दिनों में टेस्ला के ऑटोनॉमस ड्राइविंग कारों के दुर्घटनाग्रस्त होने के कई मामले सामने आ चुके हैं.  लेकिन एलन मस्क ने ‘X’ पर एक पोस्ट में पब्लिक रोबोटैक्सी के सवारी के बारे में एक यूजर के सवाल के जवाब में कहा कि, “हम सुरक्षा को लेकर बहुत अधिक चिंतित हैं, इसलिए तारीख बदल सकती है.” शायद यही कारण है कि टेस्ला इस रोबोटैक्सी को जनता के बीच आधिकारिक तौर पर लॉन्च करने से पहले हर रोड कंडिशन में टेस्ट कर रही है. मस्क ने यह भी कहा कि 28 जून से टेस्ला की कारें फैक्ट्री लाइन से सीधे ग्राहक के घर तक स्वयं पहुंचेंगी. कैसी है Tesla Robotaxi: रोबोटैक्सी एक पर्पज-बिल्ट ऑटोनॉमस व्हीकल (स्वयं चलने वाली) व्हीकल है, जिसमें स्टीयरिंग व्हील या पैडल नहीं है. जिसका अर्थ है कि प्रोडक्शन में जाने से पहले इसे सरकारी नियामकों से मंजूरी लेनी होगी. इसका डिज़ाइन काफी फ्यूचरिस्टिक है. शुरुआती चरण में इसकी सर्विस ऑस्टिन में पेश किया जाएगा, जहां सफल होने के बाद इसे दूसरे शहरों में भी शुरू किया जा सकता है. ड्राइवरलेस कारों को लेकर आमतौर पर हमेशा से यही धारणा रही है कि, ये ड्राइविंग के लिए सुरक्षित नहीं है. टेल्सा के ऑटोनॉमस ड्राइविंग से लैस कारों में भी कइर्द बार खामियां देखने को मिली हैं. लेकिन बावजूद इसके एलन मस्क ने कहा कि ऑटोनॉमस कारें किसी भी आम कार (मौजूदा समय की ड्राइवर वाली कारें) की तुलना में 10-20 गुना अधिक सुरक्षित होंगी तथा इनकी लागत शहरी बसों के लिए 1 डॉलर प्रति मील की तुलना में मात्र 0.20 डॉलर प्रति मील हो सकती है.

गर्मी के तेवर से सोने-चांदी की निकली गर्मी, आज दोनों के भाव में गिरावट

मुंबई  सर्राफा बाजारों में लगातार कई दिनों तक गदर काटने के बाद आज चांदी की गर्मी थोड़ी कम हुई है। वहीं, सोने के तेवर भी नरम हुए है। चांदी 107000 के ऑल टाइम हाई से फिसलकर 106194 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। इसमें 806 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की जा रही है। जीएसटी के साथ इसकी कीमत 109389 रुपये पर पहुंच रही है। जबकि, 24 कैरेट सोने का भाव जीएसटी के साथ 98936 रुपये प्रति 10 ग्राम है। आज बिना जीएसटी यह 304 रुपये सस्ता होकर 96055 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट से खुला। सोने-चांदी के हाजिर भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA)ने जारी किए हैं। इनमें जीएसटी नहीं लगा है। हो सकता है आपके शहर में इससे 1000 से 2000 रुपये का अंतर आ रहा हो। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। 14 से 23 कैरेट गोल्ड के लेटेस्ट रेट आईबीजेए रेट्स के मुताबिक 23 कैरेट गोल्ड भी 303 रुपये सस्ता होकर 95670 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव से खुला। वहीं, 22 कैरेट गोल्ड का औसत हाजिर भाव दोपहर सवा 12 बजे के करीब 279 रुपये गिरकर 87986 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर खुला। 18 कैरेट गोल्ड का भाव भी 228 रुपये सस्ता होकर 72041 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। जबकि, 14 कैरेट गोल्ड की कीमत 178 रुपये टूटकर 56192 रुपये पर आ गई है। ऑल टाइम हाई से 3045 रुपये सस्ता है सोना सर्राफा बाजारों में सोना अपने ऑल टाइम हाई से 3045 रुपये सस्ता है। 22 अप्रैल 2025 को सोना 99100 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर था। इस साल सोना करीब 20315 रुपये और चांदी 20010 रुपये महंगी हो चुकी है। 31 दिसंबर 24 को सोना 76045 रुपये प्रति 10 के रेट से खुला था और चांदी 85680 रुपये प्रति किलो से। इस दिन सोना 75740 रुपये पर बंद हुआ। चांदी भी 86017 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।  

इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 21.66% गिरकर 19,013 करोड़ पर आया, यहां निवेशकों का भरोसा बरकरार

मुंबई इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के लिए एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) मई में करीब 4.85 प्रतिशत बढ़कर 72.2 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि अप्रैल में 70 लाख करोड़ रुपए पर था। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया (एम्फी) की ओर से मंगलवार को जारी किए गए डेटा में यह जानकारी दी गई।   इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के एयूएम बढ़ने की वजह मई में निफ्टी और सेंसेक्स के मजबूत प्रदर्शन को माना जा रहा है इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के एयूएम बढ़ने की वजह मई में निफ्टी और सेंसेक्स के मजबूत प्रदर्शन को माना जा रहा है। मई में निफ्टी ने 1.71 प्रतिशत और सेंसेक्स ने 1.51 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। सैपिएंट फिनसर्व के संस्थापक निदेशक अमित बिवलकर ने कहा कि आने वाले समय में भी बाजार की चाल और एसआईपी अनुशासन एयूएम वृद्धि को समर्थन देना जारी रखेगा। मई में एयूएम के आंकड़े अप्रैल की तुलना में मामूली रूप से बढ़े हैं, लेकिन मई 2024 की तुलना में इसमें 12 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि है मई में एयूएम के आंकड़े अप्रैल की तुलना में मामूली रूप से बढ़े हैं, लेकिन मई 2024 की तुलना में इसमें 12 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि है। स्मॉलकेस मैनेजर और ग्रोथ इन्वेस्टिंग के संस्थापक नरेंद्र सिंह ने कहा कि ओपन-एंडेड स्कीम का वार्चस्व लगातार बना हुआ है और मई 2024 के मुकाबले इसमें 12 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। SIP इन्फ्लो से AUM ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट सैपिएंट फिनसर्व के संस्थापक निदेशक अमित बिवलकर ने कहा कि आने वाले समय में भी बाजार की चाल और एसआईपी अनुशासन AUM वृद्धि को समर्थन देना जारी रखेगा. मई में AUM के आंकड़े अप्रैल की तुलना में मामूली रूप से बढ़े हैं, लेकिन मई 2024 की तुलना में इसमें 12 फीसदी की मजबूत वृद्धि है. स्मॉलकेस मैनेजर और ग्रोथ इन्वेस्टिंग के संस्थापक नरेंद्र सिंह ने कहा कि ओपन-एंडेड स्कीम का वर्चस्व लगातार बना हुआ है और मई 2024 के मुकाबले इसमें 12 फीसदी की मजबूत वृद्धि देखने को मिली है. मई में 11.3 लाख नए फोलियो जोड़े गए महीने के दौरान लगभग 11.3 लाख नए फोलियो जोड़े गए, जो म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है. वहीं, एसआईपी इनफ्लो मई में ऑल-टाइम हाई 26,688 करोड़ रुपए पर रहा है. अप्रैल में यह आंकड़ा 26,632 करोड़ रुपए था. मई में एसआईपी योगदान देने वाले खातों की संख्या बढ़कर 8.56 करोड़ हो गई है, जो कि पिछले महीने में 8.38 करोड़ पर थी. SIP की मदद से लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग पर फोकस एसआईपी का लगातार बढ़ता इनफ्लो दिखाता है कि लोग लंबी अवधि के नजरिए से म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं. वहीं, एसआईपी के तहत कुल असेट्स अंडर मैनेजमेंट(AUM) अप्रैल के 13.90 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 14.61 लाख करोड़ रुपए हो गया है. एसआईपी AUM म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल AUM का करीब 20.24 फीसदी रहा, जबकि अप्रैल में यह 19.9 फीसदी था. 59 लाख न्यू SIP शुरू और 43 लाख बंद हुई AMFI के डेटा के मुताबिक, मई में कई महीनों के बाद एसपीआई स्टोपेज रेश्यो में कमजोरी देखने को मिली है. मई में करीब 59 लाख एसआईपी खाते ओपन हुए हैं, जबकि 43 लाख खातों में एसआईपी बंद या मैच्योर हुई. मई में कुल एसआईपी खातों की संख्या 9.06 करोड़ थी.   महीने के दौरान लगभग 11.3 लाख नए फोलियो जोड़े गए, जो म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है महीने के दौरान लगभग 11.3 लाख नए फोलियो जोड़े गए, जो म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। वहीं, एसआईपी इनफ्लो मई में ऑल-टाइम हाई 26,688 करोड़ रुपए पर रहा है। अप्रैल में यह आंकड़ा 26,632 करोड़ रुपए था। मई में एसआईपी योगदान देने वाले खातों की संख्या बढ़कर 8.56 करोड़ हो गई है, जो कि पिछले महीने में 8.38 करोड़ पर थी मई में एसआईपी योगदान देने वाले खातों की संख्या बढ़कर 8.56 करोड़ हो गई है, जो कि पिछले महीने में 8.38 करोड़ पर थी। एसआईपी का लगातार बढ़ता इनफ्लो दिखाता है कि लोग लंबी अवधि के नजरिए से म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। एसआईपी के तहत कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट(एयूएम) अप्रैल के 13.90 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 14.61 लाख करोड़ रुपए हो गया है वहीं, एसआईपी के तहत कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट(एयूएम) अप्रैल के 13.90 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 14.61 लाख करोड़ रुपए हो गया है। एसआईपी एयूएम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एयूएम का करीब 20.24 प्रतिशत रहा, जबकि अप्रैल में यह 19.9 प्रतिशत था।  

छह साल में केबल ऑपरेटरों ने 1.95 लाख रोजगार की कटौती की

मुंबई एक समय था जब हर घर केबल लगा होता था। केबल के बिना टेलीविजन इंडस्ट्री अधूरा था, लेकिन वर्तमान में नई टेक्नोलॉजी ने इसकी जगह ले लीं और अब भारत में केबल का कारोबार संकट से जुझ रहा है। यह अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डीडी फ्री डिश जैसी मुफ्त, अनलिमिटेड सर्विसेज की बढ़ती लोकप्रियता के चलते केबल टेलीविजन उद्योग में भारी गिरावट देखी गई है। पे-टीवी ग्राहकों में गिरावट के चलते साल 2018 और 2025 के बीच अनुमानतः 577,000 कम्युलेटिव नौकरियां खत्म होने का अनुमान है। इसका खुलासा एक स्टडी रिपोर्ट में किया गया है। क्या है रिपोर्ट ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (एआईडीसीएफ) और ईवाई इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ केबल टीवी डिस्ट्रीब्यूशन इन इंडिया’ में कहा गया है कि पे-टीवी सब्सक्राइबर बेस 2018 में 151 मिलियन से घटकर 2024 में 111 मिलियन हो गया है और 2030 तक इसके और घटकर 71-81 मिलियन के बीच रहने की उम्मीद है। इसमें चैनलों की बढ़ती लागत, बढ़ते ओटीटी प्लेटफॉर्म और डीडी फ्री डिश जैसी मुफ्त, अनियमित सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता को इस गिरावट का कारण बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्लेयर्स और दस प्रमुख केबल टीवी प्रोवाइडर्स या मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) के कम्युलेटिव रेवेन्यू में 2018 से 16% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि उनके मार्जिन में 29% की कमी आई है। वित्त वर्ष 19 में, उनका संयुक्त राजस्व ₹25,700 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 24 में घटकर ₹21,500 करोड़ रह गया। वित्त वर्ष 24 में संयुक्त एबिटा घटकर ₹3,100 करोड़ रह गया, जो वित्त वर्ष 19 में ₹4,400 करोड़ था। बता दें कि स्टडी में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 28,181 स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) से इनपुट लिए गए थे। इस असर एलसीओ वर्कफोर्स पर पड़ा है। नौकरियों पर खतरा सर्वेक्षण किए गए ऑपरेटरों ने रोजगार में 31% की गिरावट की रिपोर्ट की है, जो 37,835 नौकरियों का नुकसान दर्शाता है। जब राष्ट्रीय स्तर पर इसका अनुमान लगाया जाता है, तो यह विभिन्न परिचालन स्तरों पर 114,000 से 195,000 तक की नौकरियों के नुकसान में तब्दील हो जाता है। इसके अलावा, 2018 से अब तक लगभग 900 एमएसओ और 72,000 एलसीओ के बंद होने से ओवरएज में योगदान मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 से लगभग 900 एमएसओ और 72,000 एलसीओ के बंद होने से कुल 577,000 लोगों की नौकरी चली गई है। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद उद्योग के लीडर सतर्क रूप से आशावादी बने हुए हैं।

रिपोर्ट में दावा- संकट में भारत का यह कारोबार! 577000 नौकरियां खत्म होने का है अनुमान, रोजगार में 31% की गिरावट

नई दिल्ली  एक समय था जब हर घर केबल लगा होता था। केबल के बिना टेलीविजन इंडस्ट्री अधूरा था, लेकिन वर्तमान में नई टेक्नोलॉजी ने इसकी जगह ले लीं और अब भारत में केबल का कारोबार संकट से जुझ रहा है। यह अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डीडी फ्री डिश जैसी मुफ्त, अनलिमिटेड सर्विसेज की बढ़ती लोकप्रियता के चलते केबल टेलीविजन उद्योग में भारी गिरावट देखी गई है। पे-टीवी ग्राहकों में गिरावट के चलते साल 2018 और 2025 के बीच अनुमानतः 577,000 कम्युलेटिव नौकरियां खत्म होने का अनुमान है। इसका खुलासा एक स्टडी रिपोर्ट में किया गया है। क्या है रिपोर्ट ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (एआईडीसीएफ) और ईवाई इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ केबल टीवी डिस्ट्रीब्यूशन इन इंडिया’ में कहा गया है कि पे-टीवी सब्सक्राइबर बेस 2018 में 151 मिलियन से घटकर 2024 में 111 मिलियन हो गया है और 2030 तक इसके और घटकर 71-81 मिलियन के बीच रहने की उम्मीद है। इसमें चैनलों की बढ़ती लागत, बढ़ते ओटीटी प्लेटफॉर्म और डीडी फ्री डिश जैसी मुफ्त, अनियमित सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता को इस गिरावट का कारण बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्लेयर्स और दस प्रमुख केबल टीवी प्रोवाइडर्स या मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) के कम्युलेटिव रेवेन्यू में 2018 से 16% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि उनके मार्जिन में 29% की कमी आई है। वित्त वर्ष 19 में, उनका संयुक्त राजस्व ₹25,700 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 24 में घटकर ₹21,500 करोड़ रह गया। वित्त वर्ष 24 में संयुक्त एबिटा घटकर ₹3,100 करोड़ रह गया, जो वित्त वर्ष 19 में ₹4,400 करोड़ था। बता दें कि स्टडी में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 28,181 स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) से इनपुट लिए गए थे। इस असर एलसीओ वर्कफोर्स पर पड़ा है। नौकरियों पर खतरा सर्वेक्षण किए गए ऑपरेटरों ने रोजगार में 31% की गिरावट की रिपोर्ट की है, जो 37,835 नौकरियों का नुकसान दर्शाता है। जब राष्ट्रीय स्तर पर इसका अनुमान लगाया जाता है, तो यह विभिन्न परिचालन स्तरों पर 114,000 से 195,000 तक की नौकरियों के नुकसान में तब्दील हो जाता है। इसके अलावा, 2018 से अब तक लगभग 900 एमएसओ और 72,000 एलसीओ के बंद होने से ओवरएज में योगदान मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 से लगभग 900 एमएसओ और 72,000 एलसीओ के बंद होने से कुल 577,000 लोगों की नौकरी चली गई है। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद उद्योग के लीडर सतर्क रूप से आशावादी बने हुए हैं।  

भारतीय शेयर बाजार आज कारोबारी सत्र में सपाट बंद हुआ, आईटी में हुई खरीदारी

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में सपाट बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 53.49 अंक की मामूली गिरावट के साथ 82,391.72 और निफ्टी एक अंक की बढ़त के साथ 25,104.25 पर था। कारोबारी सत्र में आईटी शेयरों में खरीदारी देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। फार्मा, एफएमसीजी, मेटल, मीडिया, एनर्जी और कमोडिटीज इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। ऑटो, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी और इन्फ्रा इंडेक्स लाल निशान में थे। सेंसेक्स पैक में टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, अल्ट्राटेक सीमेंट, टीसीएस, आईटीसी, एक्सिस बैंक, नेस्ले और अदाणी पोर्ट्स टॉप गेनर्स थे। मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व,आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप लूजर्स थे। लार्जकैप की तरह मिडकैप और स्मॉलकैप भी करीब सपाट बंद हुए। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 6.45 अंक बढ़कर 56,681.40 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 26 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 18,899.80 पर था। एलकेपी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार रूपक दे का कहना है कि निफ्टी डेली टाइमफ्रेम पर अपने पिछले कंसोलिडेशन जोन से ऊपर कारोबार कर रहा है। बाजार में फिलहाल सकारात्मक भावना बनी रहने की संभावना है, जब तक इंडेक्स 24,850 के प्रमुख समर्थन स्तर से ऊपर बना रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि तेजी की स्थिति में निफ्टी छोटी अवधि में 25,350 के स्तर तक जा सकता है और अगर यह इस स्तर को तोड़ता तो आगे रैली देखने को मिल सकती है। बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थी। सुबह 9.17 बजे, सेंसेक्स 28.49 अंक या 0.03 प्रतिशत बढ़कर 82,473.70 पर था, और निफ्टी 21.15 अंक या 0.08 प्रतिशत बढ़कर 25,124.35 पर था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने दूसरे दिन भी अपनी खरीदारी जारी रखी और सोमवार को 1,992 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 15वें दिन अपनी खरीदारी जारी रखी और उसी दिन 3,503 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

सोना आज एक झटके में 2800 रुपये हुआ सस्ता, चांदी भी हुई धड़ाम

नई दिल्ली  सोने की कीमत में आज गिरावट दिख रही है। एमसीएक्स पर गोल्ड के जून वायदा अनुबंध की शुरुआत थोड़ी कमजोरी के साथ हुई। यह 723 रुपये या 0.74% गिरकर 96,397 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। हालांकि, पिछले सत्र में यह थोड़ा ऊपर बंद हुआ था। सोने की कीमतों में अब 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। हाल ही में यह 99,214 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। चांदी के जुलाई वायदा अनुबंध की शुरुआत भी थोड़ी गिरावट के साथ हुई। यह 563 रुपये या 0.53% गिरकर 1,06,524 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला। हालांकि इसने 1,07,171 रुपये प्रति किलोग्राम का नया रिकॉर्ड बनाया था। सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी दोनों ही हरे निशान में बंद हुए थे। गोल्ड का अगस्त वायदा अनुबंध 0.14% की बढ़त के साथ 97,173 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। सुबह 11.30 बजे यह 460 अंक की गिरावट के साथ 96,713 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। शुरुआती कारोबार में यह 96,276 रुपये तक नीचे और 96,770 रुपये तक ऊपर गया। चांदी का जुलाई वायदा अनुबंध 1.54% की बढ़त के साथ 1,07,087 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। कीमतों में उतार-चढ़ाव नए हफ्ते की शुरुआत में सोना और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतें गिर गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच लंदन में व्यापार समझौते को लेकर फिर से बातचीत शुरू हो गई थी। लेकिन, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण कीमतें दिन के निचले स्तर से ऊपर उठ गईं। सोने की कीमतों में बदलाव का एक और कारण था। चीन का सेंट्रल बैंक मई में लगातार सातवें महीने सोने का शुद्ध खरीदार बना। जानकारों का कहना है कि निवेशक सतर्क हैं और अमेरिका-चीन के बीच अंतिम व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता के बीच सोने में सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे हैं।लोग सोने को एक सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं क्योंकि उन्हें अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते पर भरोसा नहीं है। कहां तक जाएगी कीमत जानकारों का कहना है कि सोने के लिए सपोर्ट लेवल 96,600-96,180 रुपये और रेजिस्टेंस लेवल 97,700-98,200 रुपये है। चांदी के लिए सपोर्ट लेवल 1,06,000-1,04,800 रुपये और रेजिस्टेंस लेवल 1,08,000-1,09,400 रुपये है। जैन का सुझाव है कि चांदी को 1,06,500-1,06,000 रुपये के आसपास खरीदें। इसके लिए स्टॉप लॉस 1,04,800 रुपये और टारगेट 1,07,700-1,08,500 रुपये रखें। स्टॉप लॉस एक ऐसा पॉइंट है जहां आप नुकसान को कम करने के लिए अपनी पोजीशन बेच देंगे।

माल्या का दावा है कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों से 14,131.6 करोड़ रुपये की वसूली कर ली, जो उनके कर्ज से अधिक

नई दिल्ली भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के कर्ज चुकाने वाले दावे पर सरकार और बैंकों ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। माल्या का दावा है कि उन्होंने बैंकों के सभी बकाया कर्ज चुका दिए हैं फिर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि माल्या पर अभी भी 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है और उसके पुनर्भुगतान के दावे ‘निराधार’ हैं। टइम्स ऑफ इंडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा कि माल्या का यह दावा पूरी तरह भ्रामक है, क्योंकि उन्होंने केवल मूलधन (प्रिंसिपल अमाउंट) को आधार बनाकर बयान दिया है, जबकि उन पर अब भी ब्याज और अन्य शुल्कों सहित कुल 6,997 करोड़ रुपये बकाया हैं। वर्ष 2013 में जब यह मामला ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) में दर्ज किया गया था, तब किंगफिशर एयरलाइंस का कुल एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) 6,848 करोड़ रुपये था। इसमें नॉन-क्यूम्युलेटिव रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स भी शामिल थे। अप्रैल 10 तक, DRT के आदेश के अनुसार, बकाया ब्याज और अन्य शुल्कों को मिलाकर कुल देनदारी बढ़कर 17,781 करोड़ रुपये हो गई थी। अब तक बैंकों ने माल्या से जुड़ी संपत्तियों को बेचकर 10,815 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, जिसमें गोवा स्थित मशहूर किंगफिशर विला की बिक्री भी शामिल है। इसके बाद भी बैंकों को अब भी 6,997 करोड़ रुपये की वसूली करनी है। 14,000 करोड़ रुपये चुका दिए? सरकारी सूत्रों के अनुसार, विजय माल्या का दावा कि उन्होंने 14,000 करोड़ रुपये चुका दिए हैं, वास्तविकता से परे है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “उन्होंने संभवतः केवल मूल कर्ज की राशि को ध्यान में रखते हुए यह दावा किया है, जबकि किसी भी ऋण पर तब तक ब्याज लगता है जब तक वह पूरी तरह चुकता न हो जाए। इसके अतिरिक्त, डिफॉल्ट करने वालों पर दंडात्मक ब्याज (पेनल इंटरेस्ट) भी लगाया जाता है।” माल्या पहले भी ऐसे दावे कर चुके हैं, जबकि वह खुद देश से फरार हैं और भारत लौटकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करने से बच रहे हैं। उनके दावों के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंकों की वसूली प्रक्रिया उनके बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों के अनुरूप ही की जा रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “बैंकों की वसूली की नीति हर कर्जदार के लिए समान है, चाहे वह किसी भी समुदाय, क्षेत्र या पृष्ठभूमि से आता हो। विजय माल्या द्वारा लगाए गए किसी भी भेदभाव या मीडिया दबाव के आरोप पूर्णतः निराधार और भ्रामक हैं।” गौरतलब है कि किंगफिशर को दिए गए कुछ ऋणों का पुनर्गठन भी हुआ था, जो अब जांच के दायरे में है। यहां तक कि आईडीबीआई बैंक के पूर्व प्रमुख योगेश अग्रवाल जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को भी सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार और बैंक अब माल्या की भारत वापसी के कानूनी रास्ते को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं ताकि लंबित वसूली को आगे बढ़ाया जा सके और देश की वित्तीय प्रणाली पर विश्वास कायम रखा जा सके। माल्या के दावों की कहानी विजय माल्या कभी ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ के नाम से मशहूर थे। वह 2016 में भारत से भागकर यूनाइटेड किंगडम में बस गए थे। उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर 17 भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया था। माल्या ने हाल ही में एक यूट्यूबर के पॉडकास्ट में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए दावा किया कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों की नीलामी के जरिए 14,100 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली कर ली है। उन्होंने यह भी कहा कि यह राशि डीआरटी के फैसले में निर्धारित 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज से दोगुनी से अधिक है। माल्या ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कभी भी कर्ज चुकाने से इनकार नहीं किया और उनकी मंशा हमेशा बैंकों को भुगतान करने की रही है। उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की, जिसमें बैंकों से वसूली गई राशि का हिसाब मांगा गया है। माल्या ने अपने दावों के समर्थन में वित्त मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी संपत्तियों से 14,131.6 करोड़ रुपये की वसूली की है। अब भारत सरकार और बैंकों ने माल्या के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विजय माल्या के दावे भ्रामक और निराधार हैं। उनकी कुल देनदारी 9,000 करोड़ रुपये से अधिक थी, जिसमें ब्याज और अन्य शुल्क शामिल हैं। सरकार का कहना है कि माल्या की संपत्तियों की नीलामी से प्राप्त राशि को विभिन्न बैंकों के बीच बांटा गया है, लेकिन यह पूरी तरह से उनके कर्ज को कवर नहीं करती। कानूनी लड़ाई और विवाद माल्या ने हाल ही में लंदन की एक अदालत में अपनी दिवालियापन याचिका को रद्द करने की अपील की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। उन्होंने दावा किया था कि बैंकों ने उनके कर्ज से अधिक राशि वसूल कर ली है, लेकिन यूके की अदालत ने उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया। माल्या के वकील ने कहा कि वे इस आदेश को चुनौती देना जारी रखेंगे। इस बीच, भारत में माल्या के समर्थन में कुछ लोग सामने आए हैं। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने हाल ही में एक एक्स पोस्ट में सवाल उठाया कि जब बैंकों ने माल्या से 14,100 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, तो उन्हें ‘राजनीतिक बलि का बकरा’ क्यों बनाया जा रहा है। किंगफिशर कर्मचारियों का दर्द माल्या के दावों के बीच, किंगफिशर एयरलाइंस के हजारों पूर्व कर्मचारियों का मुद्दा भी चर्चा में है। अनुमान है कि एयरलाइंस पर अपने कर्मचारियों का 300 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन बकाया है। माल्या ने पॉडकास्ट में कर्मचारियों से माफी मांगी, लेकिन यह भी कहा कि उन्होंने कंपनी में अपनी निजी पूंजी से 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

SBI ने सरकार को 8077 करोड़ रुपये का लाभांश सौंपा, जानिए डिटेल्स

मुंबई देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सोमवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए सरकार को 8,076.84 करोड़ रुपये का लाभांश दिया। एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू और वित्त सचिव अजय सेठ की मौजूदगी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लाभांश का चेक सौंपा। वित्त मंत्री के कार्यालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष सीएस शेट्टी की ओर से वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8076.84 करोड़ रुपये का लाभांश चेक सौंपा गया।” एसबीआई ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 15.90 रुपये प्रति शेयर का लाभांश घोषित किया। यह पिछले वर्ष वितरित 13.70 रुपये प्रति इक्विटी शेयर से अधिक है। एसबीआई ने पिछले साल सरकार को 6,959.29 करोड़ रुपये का लाभांश दिया था। 2024-25 के दौरान, बैंक ने 70,901 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ अर्जित किया। पिछले वर्ष यह राशि 61,077 करोड़ रुपये थी, यानी इसमें 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बैंक में किसकी हिस्सेदारी एसबीआई में सरकार सबसे बड़ी हिस्सेदार है। उसके पास बैंक के करीब 57.42 फीसदी इक्विटी शेयर हैं। सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी के पास बैंक के 9.02% शेयर हैं और वह बैंक में सबसे बड़ी नॉन-प्रमोटर शेयरहोल्डर है। बैंक के शेयर एनएसई और बीएसई दोनों पर लिस्टेड हैं। बीएसई पर बैंक का शेयर सोमवार को 820.05 रुपये पर बंद हुआ था। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 898.80 रुपये और न्यूनतम स्तर 679.65 रुपये है।

बड़े विवाद में फंसा HDFC बैंक, ट्रस्ट फंड घोटाले का लगा आरोप, CEO के खिलाफ दर्ज हुई FIR

नई दिल्ली  देश के सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक HDFC को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। बैंक के एमडी, सीईओ शशिधर जगदीशन और बैंक के अन्य अधिकारियों के खिलाफ फाइनेंश‍ियल फ्रॉड से जुड़े आरोपों में एफआईआर (FIR) दर्ज हुई है। हालांकि, बैंक ने इन आरोपों से साफ इनकार किया गया है।    लोन विवाद से जुड़ा है मामला बैंक के अनुसार कहा गया है कि HDFC समेत अन्य बैंकों ने 1995 में Splendour Gems Ltd. को लोन दिया था। Splendour Gems Ltd. कंपनी मेहता परिवार की है और 2001 से लोन चुकाने में असफल रही है। 2004 में Debt Recovery Tribunal (DRT) ने कंपनी से लोन वसूली का आदेश भी दिया था, लेकिन मेहता परिवार ने आज तक रकम नहीं चुकाई है। अब जब बैंक रिकवरी को लेकर सख्त हुआ, तो मेहता फैमिली ने बैंक अधिकारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। मेहता परिवार का क्या है पक्ष? मेहता परिवार के अधीन आने वाली लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि HDFC बैंक के CEO और अन्य आठ लोगों (जिनमें कुछ पूर्व बैंक कर्मचारी भी हैं) ने ट्रस्ट के फंड्स में गड़बड़ी की, घोटाला किया और पैसों का गलत इस्तेमाल किया। मेहता परिवार की तरफ से CEO को सस्पेंड करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

सेंसेक्स-निफ्टी उछले, वैश्विक तेजी और RBI की ओर से ब्याज दरों में भारी कटौती से तेजी

मुंबई वैश्विक बाजारों में तेजी और रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की भारी कटौती के बाद निवेशकों की सकारात्मक धारणा के चलते सोमवार को शेयर बाजार में तेजी आई। शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने रफ्तार पकड़ी। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 480.01 अंक बढ़कर 82,669 पर पहुंच गया। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 157.05 अंक बढ़कर 25,160.10 पर पहुंच गया। किसे फायदा-किसे नुकसान? सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा मोटर्स, एक्सिस बैंक, मारुति, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और बजाज फाइनेंस में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई। हालांकि, भारती एयरटेल, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, अडानी पोर्ट्स और टाटा स्टील में गिरावट दर्ज की गई। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 1,009.71 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सकारात्मक क्षेत्र में कारोबार कर रहे थे। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार तेजी के साथ बंद हुए थे। ‘मौद्रिक नीति भविष्य में बाजार के उत्साह को बनाए रखेगी’ जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि शुक्रवार को आरबीआई द्वारा की गई मौद्रिक नीति निकट भविष्य में बाजार के उत्साह को बनाए रखेगी। यह शुक्रवार को शुरू हुई तेजी को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। अधिक महत्वपूर्ण आय वृद्धि का रुझान है। चौथी तिमाही के नतीजे मिडकैप के लिए बेहतर आय वृद्धि का संकेत देते हैं।’ ‘निफ्टी के शेयर फिर से सक्रिय’ मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) प्रशांत तापसे ने कहा, ‘आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की कटौती से चौंका देने के बाद निफ्टी के शेयर फिर से सक्रिय हो गए हैं। इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने और आम आदमी के लिए ईएमआई कम होने की उम्मीद जगी है। इस कदम के साथ-साथ वॉल स्ट्रीट की 6,000 अंक से ऊपर की रैली और अमेरिका-चीन व्यापार को लेकर नए सिरे से आशावाद ने खरीदारी की लहर को बढ़ावा दिया है।’

मुकेश अंबानी ने अपने शिक्षण संस्थान रहे आईसीटी को 151 करोड़ रुपये का दान किया

मुंबई रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani, Chairman and Managing Director, Reliance Industries) ने आज मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (Institute of Chemical Technology (ICT) को 151 करोड़ रुपए बिना शर्त देने की घोषणा की। यहां से उन्होंने 1970 के दशक में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। अंबानी ने आज आईसीटी में तीन घंटे से अधिक समय बिताया। आईसीटी को उस समय यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (University Department of Chemical Technology (UDCT) कहा जाता था। मुकेश अंबानी प्रोफेसर एमएम शर्मा की जीवनी ‘डिवाइन साइंटिस्ट’ के प्रकाशन के लिए आयोजित समारोह में यहां आये थे। प्रोफेसर शर्मा को बताया आर्थिक सुधारों के शांत वास्तुकार मुकेश अंबानी ने इस समारोह में याद दिलाया कि कैसे प्रोफेसर शर्मा द्वारा UDCT में दिए गए पहले व्याख्यान ने उन्हें प्रेरित किया और कैसे प्रोफेसर शर्मा ने बाद में भारत के आर्थिक सुधारों के शांत वास्तुकार (quiet architect of India’s economic reforms) की भूमिका निभाई। प्रोफेसर शर्मा ने नीति निर्माताओं को प्रभावित किया कि भारत के विकास का एकमात्र तरीका भारतीय उद्योग को लाइसेंस-परमिट-राज से मुक्त करना है। इससे भारतीय कंपनियां नये आयाम बना सकेंगी, आयात पर निर्भरता कम कर सकेंगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी। अंबानी ने आगे कहा, “मेरे पिता धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) की तरह, उनमें भी भारतीय उद्योग को अभाव से ग्लोबल लीडरशिप में बदलने की तीव्र इच्छा थी।” उन्होंने आगे कहा, “इन दो साहसी दूरदर्शी लोगों का मानना ​​था कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, निजी उद्यमिता (private entrepreneurship) के साथ मिल कर समृद्धि के द्वार खोलेंगी।” अंबानी का भावुक अंदाज मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में मुकेश अंबानी ने अपने शिक्षक और आईसीटी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एम.एम. शर्मा को ‘राष्ट्र गुरु’ की डिग्री दी गई। उन्होंने कहा, “प्रोफेसर शर्मा के गाइडेंस में रिलाएंस ने मूल्य श्रृंखला में ज्यादातर बैकवर्ड और फॉरवर्ड एकीकरण हासिल किया, जिसने हमें वैश्विक स्तर पर रासायनिक उद्योग में अग्रणी बनाया।” अंबानी ने बताया कि यह अनुदान प्रोफेसर शर्मा से आग्रह किया गया है। “जब प्रोफेसर शर्मा कुछ कहते हैं, हम सिर्फ पढ़ते हैं, स्थिर नहीं। उन्होंने मुझसे कहा कि मुकेश, सुरक्षा आईसीटी के लिए कुछ बड़ा करना होगा,” अंबानी ने भावुक अंदाज में कहा। 1933 में हुई स्थापना आईसीटी, जिसे पहले यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (UDCT) के नाम से जाना जाता था, 1933 में स्थापित किया गया था। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित रासायनिक प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग कॉलेज में से एक है। इसकी स्थापना से लेकर अब तक, ICT ने रसायन उद्योग, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। युनिवर्सिटी के इस अनुदान संस्थान को और अधिक मजबूत करने, आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं को विकसित करने और छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने में मदद करने की इच्छा है। अनुदान का उद्देश्य 151 करोड़ रुपये का यह अनुदान बिना किसी शर्त के दिया गया है, इसका मतलब यह है कि आईसीटी इसे अपने अनुसार उपयोग कर सकता है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि यह संस्थान के सुपरमार्केट, नए शोध संस्थान, और प्रोग्राम प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। इसके अलावा, यह आईसीटी को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत करने में सहायता प्रदान करना प्रदान करता है। आईसीटी के फादर ने इस अवसर पर कहा, “मुकेश अंबानी का यह योगदान केवल हमारी वित्तीय क्षमता को बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे छात्रों और उपकरणों को नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए भी प्रेरित करता है। हम इस उद्यम के लिए उनके प्रति सहभागिता करते हैं।” मुकेश अंबानी और ICT का संबंध मुकेश अंबानी का ICT के साथ गहरा रिश्ता है। 1970 के दशक में यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता धीरूभाई अंबानी के साथ मिलकर रिलायंस इंडस्ट्रीज को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। रिलायंस आज भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी में से एक है, और इसके केमिकल और पेट्रोकेमिकल व्यवसाय के वैश्विक स्तर पर सहमति प्राप्त है। अंबानी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि आईसीटी में शिक्षा और प्रोफेसर शर्मा का मार्गदर्शन उनके साहस और रिश्तों की सफलता का आधार बन रहा है। प्रोफेसर शर्मा को कहा – ‘राष्ट्र गुरु – भारत का गुरु’ भारतीय रासायनिक उद्योग (Indian chemical industry) के उत्थान का श्रेय प्रोफेसर शर्मा के प्रयासों को देते हुए, अंबानी ने अपने भाषण में उन्हें ‘राष्ट्र गुरु – भारत का गुरु’ कहा। अपनी तरफ से गुरु दक्षिणा देने की बात करते हुए मुकेश अंबानी ने प्रोफेसर शर्मा के निर्देशानुसार आईसीटी को 151 करोड़ रुपए की बिना शर्त सहायता देने की घोषणा की। अनुदान का जिक्र करते हुए अंबानी ने कहा, “जब वे हमें कुछ बताते हैं, तो हम बस सुनते हैं। हम सोचते नहीं हैं। उन्होंने मुझसे कहा, ‘मुकेश, तुम्हें आईसीटी के लिए कुछ बड़ा करना है और मुझे प्रोफेसर शर्मा के लिए यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है।”

स्टारलिंक भारत में हाई स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट देगी, ₹840 में महीनेभर अनलिमिटेड डेटा

मुंबई Elon Musk की Starlink को भारत में सर्विस शुरू करने की दिशा में एक और कामयाबी मिल गई है. SpaceX की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink को भारत में जरूरी लाइसेंस मिल गया है. इस लाइसेंस के बाद कंपनी अपनी सर्विस को भारत में शुरू कर पाएगी. Starlink कब लॉन्च होगी, इसके बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है. मगर इसकी लॉन्चिंग में अब ज्यादा वक्त नहीं है. इसके बाद सवाल आता है कि भारत में Starlink के आने से क्या बदल जाएगा, जो अब तक नहीं हुआ है. इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में ऑपरेट करने के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट का लाइसेंस मिल गया है।अब उसे सिर्फ इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर यानी, IN-SPACe के अप्रूवल का इंतजार है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है।स्टारलिंक तीसरी कंपनी है जिसे भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ऑपरेट करने का लाइसेंस मिला है। इससे पहले वनवेब और रिलायंस जियो को मंजूरी मिली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टारलिंक भारत में 840 रुपए में महीनेभर अनलिमिटेड डेटा देगा। आधिकारिक तौर पर मस्क की कंपनी ने इसकी जानकारी नहीं दी है। क्या बदल देगा Starlink? बात सिर्फ स्टारलिंक की नहीं है, बल्कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की है. भारत में अभी सैटेलाइट इंटरनेट शुरू नहीं हुआ है. जियो और एयरटेल भी इस रेस में शामिल होंगे और स्टारलिंक की एंट्री से इस कंपटीशन में एक इंटरनेशनल प्लेयर आएगा. इससे कंज्यूमर्स को बेहतर सर्विस मिलेगी. हालांकि, स्टारलिंग या फिर दूसरे सैटेलाइट इंटरनेट के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. सवाल है कि Starlink का क्या फायदा होगा. ये एक सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है, जिसकी मदद से दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. ऐसी जगहे जहां टावर लगाना या ऑप्टिकल फाइबर बिछाना संभव नहीं है, वहां सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. हाल में Starlink पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था, ‘Starlink सैटेलाइट सर्विस टेलीकम्युनिकेशन के बुके में नए फूल की तरह है. पहले सिर्फ फिक्स्ड लाइन्स हुआ करती थी और उन्हें मैन्युअली लोगों तक पहुंचाना पड़ता था. आज हमारे पास ब्रॉडबैंड के साथ मोबाइल कनेक्टिविटी भी है.’ उन्होंने बताया, ‘ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी भी एस्टेब्लिश हो गई है. सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी बहुत जरूरी है. रिमोट एरिया में तार नहीं बिछाए जा सकते हैं या टावर नहीं लग सकते हैं. ऐसी जगहों पर कनेक्टिविटी को सैटेलाइट की मदद से बेहतर किया जा सकता है.’ कितने रुपये करने होंगे खर्च? रिपोर्ट्स की मानें, तो Starlink की शुरुआत अर्बन एरिया से होगी. यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर को आसानी से एस्टेब्लिश किया जा सकता है और टेस्टिंग भी आसानी से हो सकती है. कंपनी भारत में अपनी सर्विस को फेज मैनर में लॉन्च कर सकती है. शुरुआत में Starlink की सर्विस चुनिंदा यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी. वैसे Starlink की सर्विस कॉस्ट को लेकर कोई जानकारी नहीं है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स जरूर आई हैं, जिसमें दावा किया रहा है कि कंपनी प्रमोशनल ऑफर के साथ अपनी सर्विस को इंट्रोड्यूस कर सकती है. Starlink 10 डॉलर (लगभग 850 रुपये) का मंथली प्लान भारत में लॉन्च कर सकती है. संभव है कि Starlink का ये प्लान एक प्रमोशनल ऑफर हो. स्टारलिंक की सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए आपको हार्डवेयर किट भी खरीदनी होगी. इस सर्विस का रेजिडेंशियल लाइट प्लान अमेरिका में 80 डॉलर (लगभग 6862 रुपये) से शुरू होता है. भारत में स्टारलिंक का स्टैंडर्ड हार्डवेयर किट लगभग 30 हजार रुपये में लॉन्च हो सकता है. सैटेलाइट्स से आप तक कैसे पहुंचेगा इंटरनेट?     सैटेलाइट धरती के किसी भी हिस्से से बीम इंटरनेट कवरेज को संभव बनाती है। सैटेलाइट के नेटवर्क से यूजर्स को हाई-स्पीड, लो-लेटेंसी इंटरनेट कवरेज मिलता है। लेटेंसी का मतलब उस समय से होता है जो डेटा को एक पॉइंट से दूसरे तक पहुंचाने में लगता है।     स्टारलिंक किट में स्टारलिंक डिश, एक वाई-फाई राउटर, पॉवर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे रखना होगा। iOS और एंड्रॉइड पर स्टारलिंक का ऐप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर मॉनिटरिंग करता है। जून 2020 में सरकार ने IN-SPACe स्थापित किया था डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने जून 2020 में IN-SPACe को स्थापित किया था। यह स्पेस एक्टिविटीज में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को रेगुलेट करने और उसे सुविधाजनक बनाने के लिए सिंगल-विंडो एजेंसी के रूप में काम करती है। IN-SPACe नॉन-गवर्नमेंटल एंटिटीज के लिए लाइसेंसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और स्पेस बेस्ड स‌र्विसेज को बढ़ावा देने का काम भी करती है। कितने देशों में है स्‍टारलिंक कुछ वीडियोज और कुछ रिपोर्ट्स को देखने के बाद हमें कुछ आंकड़ें मिले हैं जिनसे अलग-अलग देशों में अलग-अलग डाटा प्‍लान की दरों का पता लगता है. स्‍टारलिंक की वेबसाइट के अनुसार कंपनी अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस, स्‍पेन, स्विट्जरलैंड समेत यूरोप के तमाम देशों में मौजूद है. मार्च 2025 तक स्टारलिंक ने 18 अफ्रीकी देशों में आधिकारिक तौर पर लोकल सर्विसेज शुरू कर दी है.    कहां पर कितने का प्‍लान   यूएसए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार यूके में स्‍टारलिंक रेजीडेंशियल प्‍लान पर अनलिमिटेड डेटा देता है.  वहीं वेबसाइट https://taun-tech.co.uk/ की रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक यूके में तीन मुख्य टैरिफ प्लान देता है जो इंटरनेट, बिजनेस (प्रीमियम) और आरवी (एंटरटेनमेंट कैरियर्स) हैं. इंटरनेट प्लान की लागत 75 पौंड प्रति माह है जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 460 पौंड है. जबकि बिजनेस (प्रीमियम) प्लान की लागत 150 पौंड प्रति माह है, जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 2410 पौंड है. आरवी प्लान  95 पौंड प्रति माह पर मिलता है जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 460 पौंड है. हार्डवेयर, शिपिंग और हैंडलिंग शुल्क और टैक्‍स के लिए एक्‍स्‍ट्रा 40 पौंड का भुगतान करना होता है. जबकि जो भी डिवाइस इंस्‍टॉल होती है, वह कनेक्‍शन कट करवाते समय यूजर वापस कर सकता है. अब अमेरिका की बात करते हैं तो यहां पर भी स्टारलिंक मुश्किल जोन में लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिये अनलिमिटेड सैटेलाइट इंटरनेट प्रोवाइड करने का दावा करता है. अपने घर, आरवी, कैंपर यहां तक कि वहां पर लोग नाव के लिए भी वाई-फाई की सुविधा ले सकते हैं. हाइकर्स और यात्रियों के लिए स्टारलिंक मिनी मौजूद है. यूएसए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक प्राइसिंग … Read more

PNB सहित इन बैंकों ने घटाई लोन दरें, अब होम लोन और वाहन लोन होंगे सस्ते

मुंबई 6 जून को भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट को 50 बेसिस पॉइंट कम कर दिया, जिसके बाद रेपो रेट घटकर अब 5.50 फीसदी पर आ चुका है. वहीं RBI के इस फैसले के बाद बैंकों ने भी लोन पर ब्‍याज करना शुरू कर दिया है. PNB और बैंक ऑफ इंडिया समेत कुछ बैंकों ने अपने ब्‍याज दर को कम कर दिया है. ऐसे में लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिलेगी और जिनका लोन पहले से चल रहा है, उनकी भी ईएमआई कम हो जाएगी. कल शेयर बाजार बंद होने के बाद पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने दरों में कटौती का एलान किया था. इससे पहले रिजर्व बैंक के एलान के कुछ देर बाद ही करूर वैश्य बैंक ने भी कर्ज दरों को सस्ता करने का एलान किया था. अगर आपने इन बैंकों से होम लोन लिया है तो आपके बैंक की ईएमआई कम हो जाएगी. पंजाब नेशनल बैंक ने घटाया ब्‍याज पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने कहा कि रिजर्व बैंक के द्वारा रेपो दरों में कटौती के बाद बैंक ने रेपो लिंक्ड लैंडिग रेट्स में कटौती की है और दरों को 8.85 फीसदी से घटाकर 8.35 फीसदी कर दिया है. बैंक के मुताबिक MCLR और बेस रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है. नई दरें 9 जून से लागू होंगी. शुक्रवार के कारोबार में स्टॉक एक फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 110.15 के स्तर पर बंद हुआ है. Bank Of India के तहत ब्‍याज वहीं बैंक ऑफ इंडिया ने शेयर बाजार को जानकारी दी है कि रेपो दरों में कटौती के साथ रेपो बेस्ड लैंडिंग रेट्स में 6 जून से बदलाव किए गए हैं. कटौती के बाद आरबीएलआर  8.85 फीसदी से घटकर 8.35 फीसदी कर दी गई है. शुक्रवार को स्टॉक में हल्की बढ़त देखने को मिली और स्टॉक 124.3 के स्तर पर बंद हुआ. करूर वैश्‍य बैंक ने भी घटाया ब्‍याज इससे पहले करूर वैश्‍य बैंक ने शुक्रवार को एमसीएलआर यानी मर्जिनल कॉस्‍ट ऑफ फंड बेस्‍ड लैंडिंग रेट्स में कटौती का ऐलान किया है. बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 6 महीने की MCLR और 12 महीने की MCLR में कटौती की गई है. जानकारी के मुताबिक, 6 महीने की MCLR को 9.9 फीसदी से घटाकर 9.8 फीसदी कर दिया गया है. जबकि 1 साल के एमसीएलआर को 10 फीसदी से घटाकर 9.8 फीसदी किया गया है. इंडियन बैंक ने भी घटाया ब्‍याज इंडियन बैंक ने बताया कि मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के द्वारा पॉलिसी रेपो रेट में आधा फीसदी की कटौती को देखते हुए बैंक ने रेपो बेंचमार्क रेट्स में संशोधन किया है. रेपो लिंक्ड बेंचमार्क लैंडिंग रेट्स 8.7 फीसदी से घटकर 8.2 फीसदी किए गए हैं. नई दरें 9 जून 2025 से लागू होंगी. अब घर और वाहन लोन होंगे सस्ते पीएनबी ने बताया कि इस कटौती के बाद होम लोन की ब्याज दरें 7.45% प्रति वर्ष से शुरू होंगी। वाहन लोन की दरें 7.8% प्रति वर्ष से शुरू होंगी। यह कदम ग्राहकों की ईएमआई को और सस्ता बना देगा। आरबीआई का बड़ा कदम: 50 बेसिस पॉइंट की कटौती इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 6.00% से घटाकर 5.50% कर दिया। साथ ही, कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में भी 100 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 3% कर दिया गया, जिससे बैंकों के पास ₹2.5 लाख करोड़ अतिरिक्त कैश उपलब्ध हो गई। मौद्रिक नीति समिति का फैसला गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5-1 के बहुमत से यह निर्णय लिया। समिति में तीन बाहरी सदस्य भी शामिल थे। अब तक 2025 में 100 बीपीएस की कटौती 2025 में आरबीआई अब तक कुल 100 आधार अंक की ब्याज दर कटौती कर चुका है।     फरवरी में 25 बीपीएस     अप्रैल में 25 बीपीएस     जून में 50 बीपीएस     यह मई 2020 के बाद पहली बार इतनी निरंतर कटौती हुई है। ‘तटस्थ’ बना मौद्रिक नीति रुख आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘अनुकूल’ (accommodative) से बदलकर ‘तटस्थ’ (neutral) कर दिया है। इसका मतलब है कि आगे चलकर ब्याज दरें बढ़ भी सकती हैं या और घट भी सकती हैं, यह सब आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। सीमित है आगे की कटौती की गुंजाइश गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि आगे दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित हो सकती है, क्योंकि अर्थव्यवस्था को सहारा देने के साथ-साथ महंगाई पर भी नियंत्रण जरूरी है। जल्द अन्य बैंक भी कर सकते हैं ऐलान पीएनबी की तरह अन्य सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के बैंक भी जल्द ही लोन दरों में कटौती की घोषणा कर सकते हैं, जिससे व्यापक स्तर पर उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।  

अब नमक से सड़कों पर दौड़ेंगे स्कूटर! चीन में शुरू हुई Sea Salt बैटरी टेक्नोलॉजी की नई क्रांति,भारत में कब होगा लॉन्च?

नई दिल्ली जिस देश में अब तक पेट्रोल और लिथियम-आयन बैटरी से चलने वाले स्कूटर आम थे, अब वहां जल्द ही समुद्री नमक (Sea Salt) से चलने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर्स सड़कों पर नजर आने लगे हैं। यह तकनीक न केवल पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद है, बल्कि इसकी लागत भी पारंपरिक स्कूटर्स की तुलना में काफी कम है। क्या है Sea Salt बैटरी वाली तकनीक? इन स्कूटर्स में सोडियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, जो सी-सॉल्ट यानी समुद्री नमक से प्राप्त सोडियम से बनाई जाती है। यह बैटरी लिथियम-आयन या लेड-एसिड बैटरियों का सस्ता और किफायती विकल्प है, जो तेजी से चार्ज होती है और अच्छी परफॉर्मेंस देती है। हांग्जो में हुई लाइव टेस्ट ड्राइव चीन के हांग्जो शहर में एक शॉपिंग मॉल के सामने इन स्कूटर्स की लाइव टेस्ट ड्राइव का आयोजन किया गया। इसके लिए विशेष चार्जिंग स्टेशन लगाए गए, जिनमें बैटरी को सिर्फ 15 मिनट में 0 से 80% तक चार्ज किया जा सकता है। कीमत और उपलब्धता इन स्कूटर्स की कीमत लगभग $400 से $660 (यानी करीब ₹35,000 से ₹51,000) के बीच रखी गई है, जिससे यह आम लोगों के लिए भी सुलभ विकल्प बनते हैं। याडिया (Yadea) कंपनी ने इस तकनीक पर आधारित तीन अलग-अलग मॉडल्स बाजार में पेश किए हैं। सॉल्ट आयन बैटरी से कैसे चलती है गाड़ी? पारंपरिक इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में आमतौर पर लिथियम-आयन या लेड-एसिड बैटरियों का उपयोग होता है, लेकिन नई तकनीक वाले स्कूटरों में सोडियम आयन बैटरी लगाई जा रही है, जिसे समुद्री नमक (सी-सॉल्ट) से तैयार किया जाता है. यह बैटरी तकनीक लिथियम के मुकाबले न केवल अधिक सुलभ है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है. सोडियम बैटरियों की लागत लिथियम बैटरियों से कम होती है और ये बहुत तेजी से चार्ज हो सकती हैं. उदाहरण के लिए, इन्हें केवल 15 मिनट में 0 से 80 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है. इस नई तकनीक के कारण स्कूटर्स की कीमत भी काफी कम है, जो चीन में 35,000 से 51,000 रुपये (लगभग 400 से 660 अमेरिकी डॉलर) के बीच बेचे जा रहे हैं. पहली बार कहां हुआ इसका लाइव प्रदर्शन? इन नमक से चलने वाले स्कूटरों का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन चीन के हांग्जो शहर में एक शॉपिंग मॉल के बाहर किया गया. इस मौके पर खासतौर से डिजाइन किए गए चार्जिंग स्टेशन भी लगाए गए, जहां इन स्कूटर्स की बैटरी को सिर्फ 15 मिनट में 80% तक चार्ज किया गया. यह लाइव डेमो इस बात का प्रमाण था कि सोडियम बैटरी तकनीक न केवल व्यवहारिक है, बल्कि सामान्य उपयोग में भी पूरी तरह सक्षम है. लिथियम के मुकाबले सस्ता और स्मार्ट विकल्प आज के समय में जब दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लिथियम की सीमित उपलब्धता और ऊंची लागत एक बड़ी चिंता बन चुकी है. इसके अलावा, लिथियम खनन से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है. इसके उलट, सोडियम एक सस्ता, व्यापक रूप से उपलब्ध और पर्यावरण-सुलभ विकल्प है, जिससे यह तकनीक अधिक टिकाऊ (Sustainable) बन जाती है. भारत में कब आएंगे नमक से चलने वाले स्कूटर? फिलहाल भारत में सोडियम बैटरी पर रिसर्च इनिशियल स्टेज में है. हालांकि, सरकार और निजी कंपनियां जैसे Ola, Ather और Hero Electric अब वैकल्पिक बैटरी तकनीकों की ओर गंभीरता से ध्यान दे रही हैं. जैसे ही यह तकनीक भारत में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होती है, इसके कई बड़े फायदे हो सकते हैं. सस्टेनेबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम समुद्री नमक से बनी ये बैटरियां सिर्फ सस्ती ही नहीं, बल्कि इको-फ्रेंडली भी हैं। सोडियम एक ऐसा तत्व है जो पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की निर्भरता कम होती है। यह तकनीक आने वाले समय में ईवी उद्योग की दिशा बदल सकती है। क्या भारत में भी आएंगे ऐसे स्कूटर? जहां चीन इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपना रहा है, वहीं भारत के लिए भी यह एक बड़ी प्रेरणा हो सकती है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में भारत में भी नमक से चलने वाले स्कूटर्स की एंट्री हो सकती है।

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