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RBI का बड़ा फैसला: 30 लाख के होम लोन पर मिलेगी भारी राहत, हर महीने EMI में बचत: ₹949

नई दिल्ली अगर आप होम लोन चुका रहे हैं या नया लोन लेने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए यह अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून की मौद्रिक नीति बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट को 0.50% घटाकर 5.50% कर दिया है। इस बदलाव से बैंकों की लोन देने की लागत घटेगी, और इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलने वाला है। क्या असर होगा EMI पर? RBI के इस फैसले के बाद अगर बैंक भी ब्याज दर में 0.50% की कटौती करते हैं, तो होम लोन की EMI में अच्छी खासी राहत मिल सकती है। समझते हैं इसे एक उदाहरण से:     लोन अमाउंट: ₹30 लाख      लोन अवधि: 20 साल     पुरानी ब्याज दर: 8.75%     नई संभावित ब्याज दर: 8.25%   हर महीने EMI में बचत: ₹949  20 साल में कुल बचत: ₹2,27,844 EMI कम करें या लोन जल्दी निपटाएं? बैंक आमतौर पर ब्याज दर घटने के बाद दो विकल्प देते हैं:     EMI घटाएं: आपकी जेब पर हर महीने कम बोझ पड़ेगा     लोन अवधि घटाएं: EMI वही रहेगी, लेकिन लोन जल्दी खत्म हो जाएगा उदाहरण के लिए, अगर आप EMI को ₹26,511 पर ही बनाए रखते हैं, तो आपकी लोन अवधि 240 महीनों से घटकर 230 महीनों की रह जाएगी। यानी आप 10 महीने जल्दी कर्ज मुक्त हो सकते हैं। बैंकों पर रेपो रेट का असर कैसे होता है? रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को फंड उधार देता है। जब यह दर घटती है, तो बैंकों की फंडिंग लागत भी कम हो जाती है। इससे उन्हें ग्राहकों को सस्ता लोन देना आसान हो जाता है। अक्टूबर 2019 से लागू नियमों के अनुसार, बैंकों को अपने फ्लोटिंग रेट लोन को बाहरी बेंचमार्क (जैसे रेपो रेट) से जोड़ना होता है। इसलिए रेपो रेट में बदलाव का असर सीधे होम लोन की दरों पर पड़ता है।  

सोने की कीमत में आज 1,000 रुपए से अधिक की गिरावट देखने को मिली

नई दिल्ली सोना खरीदारों के लिए खुशखबरी है। पीली धातु की कीमत में शुक्रवार को 1,000 रुपए से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम 1,018 रुपए कम होकर 97,145 रुपए हो गया है, जो कि पहले 98,163 रुपए था। 22 कैरेट सोने का दाम कम होकर 88,985 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 89,917 रुपए था। वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत 73,662 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 72,859 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। सोने के विपरीत चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। चांदी का दाम 610 रुपए बढ़कर 1,05,285 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 1,04,675 रुपए प्रति किलो था। वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 अगस्त 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 0.08 प्रतिशत बढ़कर 97,957 रुपए और चांदी के 4 जुलाई 2025 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 1.03 प्रतिशत बढ़कर 1,05,522 रुपए हो गई है। कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह ने कहा कि वैश्विक कारणों के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इस महीने के मध्य में होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक पर निवेशकों की निगाहें बनी हुई हैं और इसके बाद ही वैश्विक स्तर पर सोने की चाल की दिशा तय होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। खबर लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना करीब 0.24 प्रतिशत बढ़कर 3,383.61 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.40 प्रतिशत बढ़कर 36.298 डॉलर प्रति औंस पर थी। 1 जनवरी से अब तक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 76,162 रुपए से 20,983 रुपए या 27.55 प्रतिशत बढ़कर 97,145 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भाव भी 86,017 रुपए प्रति किलो से 19,268 रुपए या 22.40 प्रतिशत बढ़कर 1,05,285 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है।

विजय माल्या बोले मेरा इरादा हमेशा कर्ज चुकाने का था, ‘तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से संपर्क भी किया था …..

मुंबई बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख विजय माल्या , जो 9,000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं , पॉडकास्टर राज शमनी के साथ खुलकर बातचीत की। गुरुवार को जारी किए गए इस एपिसोड में माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के पतन के बारे में खुलकर बात की और इसके पतन के लिए मुख्य रूप से 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट को जिम्मेदार ठहराया। माल्या ने 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “तो मान लीजिए कि 2008 तक यह आपके पक्ष में काम करता रहा। फिर क्या हुआ? आसान। क्या आपने कभी लेहमैन ब्रदर्स के बारे में सुना है? क्या आपने कभी वैश्विक वित्तीय संकट के बारे में सुना है, है न? क्या इसका भारत पर कोई असर नहीं पड़ा? बेशक, इसका असर हुआ।” किंगफिशर को बचाने के अपने प्रयासों को याद करते हुए माल्या ने बताया कि उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, “मैं श्री प्रणब मुखर्जी के पास गया… और कहा कि मुझे एक समस्या है। किंगफिशर एयरलाइंस को आकार घटाने, विमानों की संख्या में कटौती करने और कर्मचारियों की छंटनी करने की जरूरत है, क्योंकि मैं इन उदास आर्थिक परिस्थितियों में परिचालन नहीं कर सकता।” भगोड़े शराब कारोबारी ने कहा, “मुझे कहा गया था कि आकार न घटाएं। आप जारी रखें, बैंक आपका समर्थन करेंगे। इस तरह से यह सब शुरू हुआ। किंग फिशर एयरलाइंस को अपनी सभी उड़ानें निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। किंग फिशर एयरलाइंस संघर्ष कर रही है। जिस समय आपने ऋण मांगा, उस समय कंपनी का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं था।”   ‘छोरी’ कहाँ है? पॉडकास्ट पर बोलते हुए विजय माल्या ने कहा कि मार्च 2016 के बाद भारत नहीं लौटने के कारण उन्हें “भगोड़ा” कहना “उचित” है। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि लोग उन्हें “चोर” क्यों कह रहे हैं और पूछा कि “चोरी” कहां है। उन्होंने कहा, “मार्च (2016) के बाद भारत न जाने के कारण मुझे भगोड़ा कहिए। मैं भागा नहीं, मैं पहले से तय यात्रा पर भारत से बाहर गया। ठीक है, मैं उन कारणों से वापस नहीं लौटा, जिन्हें मैं उचित मानता हूं, इसलिए यदि आप मुझे भगोड़ा कहना चाहते हैं, तो कहिए, लेकिन ‘चोर’ कहां से आ रहा है… ‘चोरी’ कहां से आ रही है?” भारत सरकार ने अभी तक पॉडकास्ट में माल्या की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विजय माल्या पर भारतीय बैंकों के एक संघ को ₹ 9,000 करोड़ (लगभग $1.2 बिलियन) से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है, मुख्य रूप से उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए ऋणों के माध्यम से। इस साल फरवरी में, माल्या ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को सूचित किया कि बैंकों को उनके द्वारा दिया गया ₹ 6,200 करोड़ का ऋण “कई गुना” वसूल किया गया है, और उनसे, यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (UBHL, जो अब परिसमापन में है) और अन्य प्रमाणपत्र देनदारों से वसूल की गई राशि को दर्शाने वाले खातों का विस्तृत विवरण मांगा। धोखाधड़ी और धन शोधन के आरोपों का सामना कर रहे माल्या ने 2016 में भारत छोड़ दिया था और तब से वह यूनाइटेड किंगडम में रह रहे हैं।

शेयर बाजार में आज धीमी शुरुआत, RBI के फैसले पर सेंसेक्स और Nifty सरपट दौड़े

मुंबई भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) की शुरुआत सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को गिरावट के साथ सुस्त शुरुआत की थी, लेकिन जैसे ही भारतीय रिजर्व बैंक ने MPC Meeting ने नतीजे बताते हुए रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बंपर कटौती (RBI Cut Repo Rate) का ऐलान किया, तो उसके बाद बाजार को जोश हाई हो गया और अचानक रेड जोन में कारोबार कर रहे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स (Sensex) ने करीब 700 अंकों से ज्यादा की छलांग लगा दी. RBI के फैसले से बाजार में बमबम शेयर मार्केट (Share Market) में शुक्रवार को दोनों इंडेक्स रेड जोन में ओपन हुए थे. एक ओर बीएसई के सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद 81,442.04 की तुलना में मामूली गिरावट के साथ 81,434.24 पर कारोबार की शुरुआत की और सुबह 10 बजे जैसे ही RBI Governor ने रेपो रेट में 50 बीपीएस की कटौती का ऐलान किया. Sensex 710 अंक की तेजी लेकर 82,165 पर पहुंच गया. निफ्टी ने भी सेंसेक्स की तरह लगाई दौड़   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने भी आरबीआई के ऐलान के बाद सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए तूफानी रफ्तार पकड़ी ली. अपने पिछले बंद 24,750.90 की तुलना में Nifty 24,748.70 पर ओपन हुआ और रेपो रेट कट के ऐलान के बाद ये भी करीब 230 अंकों की तेजी लेकर 24,982 पर कारोबार करता नजर आया. Repo Rate बंपर कटौती यहां बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में बड़ी कटौती (RBI Repo Rate Cut) कर दी है. RBI की मौद्र‍िक नीति समिति की बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा (Sanjay Malhotra) ने बताया कि रेपो रेट 50 बेसिस पॉइंट घटाया गया है, जिसके बाद ये कम होकर अब 5.50 फीसदी हो गया है. ब्याज दर में इस बदलाव का असर तमाम बैंकों से Home और Auto Loan लेने वाले ग्राहकों पर देखने को मिलेगी और उनकी EMI कम हो जाएगी. ये इस साल की तीसरी कटौती है. इससे पहले फरवरी और अप्रैल में आरबीआई ने रेपो रेट 25-25 बेसिस पॉइंट घटाया था. CRR में कटौती, इकोनॉमी पर ये बोले गवर्नर शेयर बाजार में आरबीआई की एमपीसी बैठक में रेपो रेट कट के अलावा लिए गए कुछ और बड़े फैसलों का भी असर देखने को मिला है. दरअसल, Repo Rate Cut के साथ ही केंद्रीय बैंक ने कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को 4 फीसदी से 100 बेसिस पॉइंट घटाकर 3 फीसदी कर दिया है. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट कट के फैसले को इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने वाला कदम बताया है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आगे कहा कि भारत लगातार निवेश के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन बन रहा है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार बढ़ रहा है और ये फिलहाल 691.5 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है. इसके अलावा आरबीआई ने FY26 में महंगाई दर के अनुमान को 4 फीसदी से घटाकर 3.7 फीसदी किया है.  

सब्जियों की कीमतों में गिरावट से वेज थाली सस्ती हुई, जानें मांसाहारी थाली का क्या रहा हाल

नई दिल्ली इस साल मानसून कुछ जल्दी ही आ गया। मानसून आने की वजह से लोगों को तपती गरमी से राहत मिली। साथ ही सब्जियों और फल की भी पैदावार में इजाफा हुआ। यही वजह है कि बीते मई महीने में खाने-पीने की वस्तुएं सस्ती हुईं। तभी तो इस महीने वेज और नॉन-वेज, दोनों तरह की थाली की कीमत में कमी हुई है। कहां से आई यह रिपोर्ट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट का नाम है ‘रोटी राइस रेट’। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 में घर पर बनने वाली वेज और नॉन-वेज थाली की कीमत लगभग 6% तक कम हुई है। यह कमी सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण हुई है। पिछले साल सब्जियों के दाम बहुत ज्यादा थे, इसलिए इस साल कीमतें कम लग रही हैं। टमाटर की कीमतें खूब घटीं रिपोर्ट में कहा गया है, “टमाटर की कीमतें लगभग 29% गिरकर 23 रुपये/किलो हो गईं, जो मई 2025 में 33 रुपये/किलो थीं। पिछले साल उपज को लेकर चिंता थी, जिसके कारण कीमतें बढ़ गई थीं।” इसका मतलब है कि पिछले साल टमाटर कम होने की आशंका थी, इसलिए दाम बढ़ गए थे। इस साल टमाटर ज्यादा हैं, इसलिए दाम कम हो गए हैं। प्याज और आलू की कीमतों में भी 15% और 16% की गिरावट आई है। पिछले साल आलू की फसल को नुकसान हुआ था। पश्चिम बंगाल में blight infestation और बेमौसम बारिश के कारण आलू की फसल खराब हो गई थी। वहीं, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में पानी की कमी के कारण प्याज की पैदावार कम हुई थी। इसलिए पिछले साल प्याज के दाम बढ़ गए थे। थाली की कीमतों में थोड़ा बदलाव क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशान शर्मा ने बताया कि मई 2025 में थाली की कीमतों में थोड़ा बदलाव हुआ है। वेज थाली की कीमत स्थिर रही, लेकिन नॉन-वेज थाली लगभग 2% सस्ती हो गई। टमाटर और आलू के दाम बढ़ गए, लेकिन प्याज के दाम कम होने से वेज थाली की कीमत स्थिर रही। नॉन-वेज थाली की कीमत में कमी ब्रॉयलर (मुर्गी) की कीमतों में गिरावट के कारण आई है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं। ऐसा मौसम में बदलाव के कारण होगा। गेहूं और दालों की कीमतों में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि इस बार देश में इनका उत्पादन अच्छा हुआ है। चावल की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि वैश्विक बाजार में कीमतें अच्छी होने के कारण निर्यात 20-25% तक बढ़ सकता है। खाद्य तेल हुए महंगे क्रिसिल ने यह भी बताया कि वनस्पति तेल की कीमतों में 19% की वृद्धि हुई है। ऐसा आयात शुल्क बढ़ने के कारण हुआ है। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी 6% की वृद्धि हुई है। इन कारणों से थाली की कीमत में ज्यादा कमी नहीं आई। मुर्गी भी हुई सस्ती सब्जियों की कीमतों में कमी के साथ-साथ ब्रॉयलर की कीमत में भी लगभग 6% की गिरावट आई है। इस वजह से नॉन-वेज थाली सस्ती हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रॉयलर की कीमतों में गिरावट का कारण इनकी ज्यादा सप्लाई और कम मांग है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बर्ड फ्लू की खबरें आई थीं, जिसके कारण लोगों ने चिकन खाना कम कर दिया था। ब्रॉयलर की कीमत नॉन-वेज थाली की कीमत का लगभग 50% होती है। थाली में क्या एक वेज थाली में रोटी, सब्जियां (प्याज, टमाटर और आलू), चावल, दाल, दही और सलाद शामिल होते हैं। एक नॉन-वेज थाली में भी यही चीजें होती हैं, लेकिन दाल की जगह चिकन (ब्रॉयलर) होता है। मई 2025 के लिए ब्रॉयलर की कीमतें अनुमानित हैं। सामग्री का weightage कमोडिटी की कीमत में उतार-चढ़ाव के आधार पर नहीं बदलता है। इसका मतलब है कि अगर किसी चीज की कीमत बढ़ जाती है, तो भी थाली में उसकी मात्रा कम नहीं की जाती है।

अडाणी ग्रुप ने 2024-25 में चुकाया 74,945 करोड़ रुपये का टैक्स,पूरी मुंबई में बन जाए मेट्रो नेटवर्क

मुंबई देश के तीसरे बड़े औद्योगिक घराने अडानी ग्रुप ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 74,945 करोड़ रुपये का टैक्स दिया जो पिछले साल के मुकाबले 29% ज्यादा है। इसमें डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स दोनों शामिल हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा के लिए किए गए भुगतान भी इसमें शामिल हैं। पिछले साल यानी फाइनेंशियल ईयर 2023-24 गौतम अडानी की अगुवाई वाले ग्रुप ने 58,104 करोड़ रुपये का टैक्स दिया था। ग्रुप ने एक बयान में कहा कि सरकारी खजाने में यह योगदान लिस्टेड कंपनियों के माध्यम से दिया गया है। इसमें से 28,720 करोड़ रुपये डायरेक्ट टैक्स के रूप में दिए गए। 45,407 करोड़ रुपये इनडायरेक्ट टैक्स के रूप में दिए गए। बाकी 818 करोड़ रुपये अन्य योगदानों में शामिल हैं। ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन, अडानी टोटल गैस, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अंबूजा सीमेंट शामिल हैं। ओलंपिक से ज्यादा बजट इन सात कंपनियों के अलावा ग्रुप की तीन अन्य लिस्टेड कंपनियों एनडीटीवी, एसीसी और सांघी इंडस्ट्रीज द्वारा दिए गए टैक्स को भी इस आंकड़े में शामिल किया गया है। अडानी ग्रुप ने साथ ही ‘Basis of Preparation and Approach to Tax’ नाम का एक डॉक्यूमेंट भी प्रकाशित किया है। यह डॉक्यूमेंट ग्रुप की सात कंपनियों की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसमें अडानी ग्रुप के ग्लोबल टैक्स और अन्य योगदानों का पूरा विवरण दिया गया है। 74,945 करोड़ रुपये की यह रकम बहुत बड़ी है। इतने पैसे में पूरा मुंबई मेट्रो नेटवर्क बनाया जा सकता है। यह नेटवर्क लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है। साथ ही इतने पैसे में देश में आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन भी किया जा सकता है। भारत 2036 में होने वाले ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए बोली लगाने की तैयारी कर रही है। इस आयोजन पर 34,700 करोड़ से 64,000 करोड़ रुपये तक खर्च आने का अनुमान है। पूरे मुंबई में मेट्रो नेटवर्क की लागत के बराबर टैक्स इस पैसे का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि 74,945 करोड़ रुपये लगभग पूरे मुंबई मेट्रो नेटवर्क को बनाने में लगने वाली लागत के बराबर है। यह रकम आधुनिक ओलंपिक खेलों के आयोजन में लगने वाले खर्च के लगभग बराबर भी है। इस कुल रकम में से 28,720 करोड़ रुपये डायरेक्ट टैक्स, 45,407 करोड़ रुपये इनडायरेक्ट टैक्स, और 818 करोड़ रुपये दूसरे योगदान (जैसे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा) के हैं। सबसे ज्यादा टैक्स किसने दिया अडानी ग्रुप की जिन मुख्य सूचीबद्ध कंपनियों (लिस्टेड कंपनियों) ने सबसे ज्यादा टैक्स दिया है, उनमें अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL), अडानी सीमेंट लिमिटेड (ACL), अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ), और अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) शामिल हैं। ग्रुप ने अपनी सात लिस्टेड कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी है। इनमें NDTV, ACC और सांघी इंडस्ट्रीज जैसी तीन और कंपनियों के टैक्स भी शामिल हैं, जिन पर ग्रुप की ये सात कंपनियां नियंत्रण रखती हैं। कंपनियों की वेबसाइट पर जारी हुई डिटेल अडानी ग्रुप ने टैक्स भुगतान की पूरी जानकारी देने के लिए एक दस्तावेज (‘बेसिस ऑफ प्रिपरेशन एंड अप्रोच टू टैक्स’) भी अपनी कंपनियों की वेबसाइट पर जारी किया है। इसमें बताया गया है कि दुनियाभर में उसकी कंपनियों ने कितना टैक्स दिया, दूसरों से वसूला हुआ टैक्स कितना सरकार को जमा कराया, और कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा में कितना योगदान दिया। अडानी ग्रुप ने कहा कि वह टैक्स में पारदर्शिता को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी (ESG) का हिस्सा मानता है। इस जानकारी को खुद से सार्वजनिक करके ग्रुप अपनी पारदर्शिता और भरोसेमंदी दिखाना चाहता है। ग्रुप का कहना है कि वह भारत के बुनियादी ढांचे को बदलने के साथ-साथ नवाचार को बढ़ावा देना और अपने सभी हितधारकों के लिए लॉन्ग टर्म वैल्यू पैदा करना चाहता है।

घर लेना होगा आसान होम लोन की ब्याज दरें 7.75% तक आ सकती हैं!

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा 6 जून को मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करेंगे. यह फैसला तीन दिनों तक चलने वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद लिया जाएगा. इस साल फरवरी और अप्रैल में RBI ने पहले ही दो बार 25 बेसिस प्वाइंट (bps) की कटौती की है, जिससे रेपो रेट अब 6 प्रतिशत पर आ गया है. आर्थिक जानकारों का मानना है कि जून में RBI एक और 25 बिप्स की कटौती कर सकता है, क्योंकि खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है. गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. जब रेपो रेट कम होता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन दे पाते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आती है. जंबो कटौती होगी या कम? मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ज़्यादातर अर्थशास्त्री और बैंकिंग जानकार यह उम्मीद कर रहे हैं कि 6 जून को RBI की मौद्रिक नीति समिति फिर से रेपो रेट में 25 bps की कटौती कर सकती है. वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के इकोनॉमिक रिसर्च डिपार्टमेंट का मानना है कि इस बार 50 bps की “जंबो” कटौती भी हो सकती है. यह अंतर इस बात को दिखाता है कि विशेषज्ञों के बीच इस बात पर अलग-अलग राय है कि अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए मौद्रिक नीति में कितनी नरमी लाई जाए. अगर RBI 6 जून को रेपो रेट घटाता है, तो होम लोन की ब्याज दरें भी घट सकती हैं. फिलहाल UCO बैंक, यूनियन बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंक 7.75% से 7.9% के बीच ब्याज दर पर होम लोन दे रहे हैं. ऐसे में रेपो रेट में कटौती से होम लोन की दरें 7.75% से नीचे आ सकती हैं. हालांकि, फरवरी और अप्रैल में रेपो रेट में जो 25-25 bps की कटौती हुई थी, उसका पूरा फायदा सभी बैंकों ने ग्राहकों को नहीं दिया. कुछ बैंकों ने केवल आंशिक फायदा दिया और अपनी “स्प्रेड” यानी मुनाफे की दर को समायोजित कर लिया. उदाहरण के लिए, Axis Bank और ICICI Bank जैसे निजी बैंकों ने रेपो रेट कटौती का पूरा फायदा नए ग्राहकों को नहीं दिया, बल्कि उन्होंने अपने मार्जिन को समायोजित कर 8.75% ब्याज दर बनाए रखी. दूसरी ओर, Kotak Mahindra Bank और HDFC Bank ने 10-30 bps की कटौती के साथ होम लोन की दरों में थोड़ी राहत दी है. 2019 के बाद बदले थे नियम 1 अक्टूबर 2019 के बाद सभी नए फ्लोटिंग रेट लोन एक बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, जो अधिकतर बैंकों के लिए रेपो रेट है. इसका मतलब यह है कि लोन की ब्याज दर तीन हिस्सों से मिलकर बनती है- रेपो रेट, बैंक का मार्जिन (स्प्रेड), और क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, जो आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करता है. BankBazaar.com के अनुसार, 1 करोड़ रुपये के होम लोन (20 साल की अवधि) पर बैंकों की ब्याज दरें 7.75% से 9.35% के बीच हैं. ये दरें व्यक्ति की आय, क्रेडिट स्कोर और अन्य शर्तों पर निर्भर करती हैं. उदाहरण के तौर पर, UCO Bank की दर 7.75 फीसदी से शुरू होती है, जो सबसे कम है और इस बैंक ने रेपो रेट में आई 50 bps की पूरी कटौती का फायदा पुराने और नए ग्राहकों को दिया है. ऐसे लोन पर EMI लगभग 82,095 रुपये आती है. केनरा बैंक की ब्याज दर 7.80 फीसदी से शुरू होती है और EMI लगभग 82,404 रुपये बनती है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक और यूनियन बैंक की शुरुआती दर 7.85 फीसदी है, और EMI 82,713 रुपये आती है. इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक की दरें 7.90% से शुरू होती हैं और EMI लगभग ₹83,023 बनती है. बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की दरें 8% से शुरू होती हैं, जहां EMI ₹83,644 तक जाती है.

8वें वेतन आयोग में बड़ा धमाका, Basic Salary में जबरदस्त उछाल, जाने 8वें वेतन आयोग की भूमिका और महत्व

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की तरफ से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। इस बार सैलरी स्ट्रक्चर में लेवल-1 से लेकर लेवल-6 तक के वेतन स्तरों को मर्ज करने का प्रस्ताव सामने आया है। इसका मतलब है कि आपके वेतन और प्रमोशन के मौके दोनों में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी के साथ-साथ करियर ग्रोथ भी तेजी से होगी। यह नई व्यवस्था संभवतः 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती है, जिससे लाखों सरकारी कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। 8वें वेतन आयोग की भूमिका और महत्व केंद्र सरकार हर दस साल में वेतन आयोग बनाती है, जो सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतनमान, भत्ते और पेंशन में संशोधन की सिफारिशें करती है। 8वें वेतन आयोग को जनवरी 2025 में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली है और इसके सुझाव 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। इससे देश भर के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। लेवल मर्जर: क्या है ये क्रांतिकारी प्रस्ताव?   सरकार के समक्ष एक अहम सुझाव आया है जिसमें वेतन संरचना के शुरुआती छह स्तरों (लेवल 1 से लेवल 6) को घटाकर केवल तीन स्तर (A, B, C) बनाए जाने की बात कही गई है। इसका मकसद है कर्मचारियों के वेतनमान में बढ़ोतरी के साथ ही उनके करियर ग्रोथ को तेज करना। प्रस्ताव के अनुसार: नया लेवल A: लेवल 1 और लेवल 2 को मिलाकर बनाया जाएगा। नया लेवल B: लेवल 3 और लेवल 4 को मर्ज किया जाएगा। नया लेवल C: लेवल 5 और लेवल 6 को एक साथ लाया जाएगा। इससे कर्मचारियों को क्या लाभ होगा? बेसिक सैलरी में उछाल: मर्जर के बाद नए स्तर का बेसिक वेतन आमतौर पर मर्ज किए गए दो स्तरों में से उच्चतम स्तर के बराबर या उससे अधिक होगा। उदाहरण के तौर पर, लेवल 1 की बेसिक सैलरी करीब ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹34,000 तक पहुंच सकती है। प्रमोशन की प्रक्रिया में तेजी: चूंकि लेवल्स की संख्या कम होगी, कर्मचारी तेजी से अगले स्तर तक पहुंच सकेंगे, जिससे उनका करियर ग्रोथ और वेतन वृद्धि भी तेज होगी। वेतन असमानताओं में कमी: अलग-अलग लेकिन समीपवर्ती स्तरों के वेतन में विसंगतियों को खत्म करके सैलरी संरचना को और ज्यादा तार्किक बनाया जाएगा। प्रशासनिक सादगी: कम स्तर होने से पे-रोल मैनेजमेंट और प्रशासनिक प्रक्रियाएं आसान होंगी। किन कर्मचारियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? सबसे अधिक लाभ उन कर्मचारियों को होगा जो वर्तमान में लेवल-1, लेवल-3 और लेवल-5 पर हैं क्योंकि उनका वेतन सीधे उच्च स्तर के साथ मर्ज होगा और वेतनमान में तुरंत सुधार आएगा। वहीं, लेवल-2, 4 और 6 के कर्मचारियों को भी बेहतर प्रमोशन अवसर मिलेंगे। चुनौतियां और आगे का रास्ता हालांकि यह प्रस्ताव कर्मचारियों के लिए बेहद सकारात्मक है, इसे लागू करने में वित्तीय बोझ, वरिष्ठता निर्धारण और जिम्मेदारियों के आवंटन जैसी चुनौतियां भी हैं। सरकार और वेतन आयोग इन पहलुओं पर गंभीर चर्चा कर रहे हैं, और अंतिम सिफारिशें जल्द ही सामने आएंगी।

UPI सिस्टम में नए API नियम लागू करने जा रहा, जिनका सीधा असर ट्रांजैक्शन पर पड़ेगा, 31 जुलाई से बदलने जा रहे हैं ये नियम

नई दिल्ली अगर आप भी रोज़ाना यूपीआई ऐप्स जैसे Google Pay, PhonePe या Paytm से पेमेंट करते हैं, तो अब सतर्क हो जाइए। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) UPI सिस्टम में नए API नियम लागू करने जा रहा है, जिनका सीधा असर आपके रोज़मर्रा के ट्रांजैक्शन पर पड़ेगा। ये बदलाव न केवल आपकी सुविधा को सीमित करेंगे, बल्कि आपके बैलेंस चेक, ऑटोपे और ट्रांजैक्शन स्टेटस जैसे फीचर्स पर भी सीधी रोक लगाएंगे। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का कहना है कि यह कदम सिस्टम पर बढ़ते लोड को कम करने और सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जरूरी है। क्यों लाया गया ये नियम? NPCI का कहना है कि तेजी से बढ़ते डिजिटल ट्रांजैक्शन के कारण UPI सिस्टम पर जबरदस्त लोड पड़ रहा है, खासकर ‘पीक ऑवर्स’ यानी सबसे व्यस्त समय के दौरान। इस लोड को संतुलित करने और बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कुछ सामान्य फीचर्स जैसे बैलेंस चेक, ऑटोपे और ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक को सीमित किया जाएगा। जानिए क्या-क्या बदलेगा बैलेंस चेक पर लिमिट 31 जुलाई 2025 से कोई भी यूज़र एक दिन में एक ऐप के जरिए अधिकतम 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकेगा। इसके अलावा, पीक ऑवर्स (सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे और शाम 5 बजे से रात 9:30 बजे तक) में बैलेंस चेक की सुविधा सीमित या बंद की जा सकती है।  ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक पर कंट्रोल यदि कोई ट्रांजैक्शन पेंडिंग या फेल हो जाता है, तो उसकी स्थिति को बार-बार जांचने पर भी रोक होगी। एक ट्रांजैक्शन के स्टेटस को दो घंटे में अधिकतम तीन बार ही चेक किया जा सकेगा।  ऑटोपे फीचर भी नॉन-पीक समय में ही जो यूज़र OTT सब्सक्रिप्शन, SIP या किसी अन्य सर्विस के लिए UPI ऑटोपे का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि ऑटोपे का ऑथराइजेशन और डेबिट प्रोसेसिंग केवल नॉन-पीक टाइम में ही होगी। हर ऑटोपे मैन्डेट के लिए अधिकतम तीन प्रयास (3 retries) की इजाजत होगी।  बैंक की जिम्मेदारी भी बढ़ी NPCI ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि हर सफल लेनदेन के बाद ग्राहकों को बैलेंस अलर्ट भेजा जाए, जिससे ग्राहक बार-बार बैलेंस चेक न करें। इसके अलावा, कुछ खास प्रकार की एरर की स्थिति में बैंक को ट्रांजैक्शन फेल मानकर सिस्टम से क्लियर करना होगा। क्यों जरूरी है ये बदलाव? इन नए निर्देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि UPI जैसी अहम डिजिटल सुविधा सभी को फास्ट और भरोसेमंद ढंग से मिल सके। लगातार बढ़ती डिजिटल भीड़ और ट्रांजैक्शन की संख्या को ध्यान में रखते हुए, NPCI इस तरह की टेक्निकल सफाई ला रहा है ताकि नेटवर्क स्लोडाउन या फेल्योर जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया- BSNL ने वित्त वर्ष 2025 में पहली बार लगातार दो तिमाही में कमाया मुनाफा

नई दिल्ली भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने मंगलवार को जनवरी-मार्च तिमाही के लिए 280 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया। दूरसंचार कंपनी 2024-25 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में पहली बार घाटे से बाहर निकली है। यह कंपनी के मुनाफे की लगातार दूसरी तिमाही रही।केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया से बात करते हुए भारत की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के लिए इसे एक बहुत बड़ा दिन बताया। उन्होंने कहा, “बीएसएनएल ने पहली बार 18 वर्षों में दो तिमाहियों में नेट प्रॉफिट दर्ज किया है । कंपनी ने अक्टूबर-दिसंबर 2024 में 262 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट बनाया और जनवरी-मार्च में 280 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट बनाया।” बीएसएनएल को पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 849 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। पूरे वित्त वर्ष 2025 के लिए कंपनी का घाटा अब 58 प्रतिशत घटकर 2,247 करोड़ रुपए रह गया है, जो वित्त वर्ष 2024 में 5,370 करोड़ रुपए था। सरकारी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी की कुल आय 2024-25 के दौरान 10 प्रतिशत बढ़कर 23,427 करोड़ रुपए हो गई, जो 2023-24 में 21,302 करोड़ रुपए थी। स्पेक्ट्रम आवंटन और पूंजी निवेश सहित रणनीतिक पहलों के माध्यम से सरकार के समर्थन ने कंपनी के संचालन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कंपनी ने 2024-25 में 5,396 करोड़ रुपये का ईबीआईटीडीए दर्ज किया, जो 2023-24 में 2,164 करोड़ रुपए था। कंपनी का मार्जिन वित्त वर्ष 2024 में 10.15 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 23.01 प्रतिशत हो गया। बीएसएनएल ने वित्त वर्ष के दौरान व्यय लागत में 3 प्रतिशत की कटौती की है, जो कि 2023-24 में 26,673 करोड़ रुपए से घटकर 25,841 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी 4जी रोलआउट और फाइबर-ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के साथ अपने नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। बीएसएनएल ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत किया है और नेटवर्क में निर्बाध इंटरनेट एक्सेस के लिए राष्ट्रीय वाईफाई रोमिंग के साथ ग्राहक-केंद्रित डिजिटल इनोवेशन की शुरुआत की है। बीएसएनएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ए. रॉबर्ट जे. रवि ने कहा, “यह शानदार तेजी पेशेवर प्रबंधन, सरकारी समर्थन और शीर्ष और निचले स्तर पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का प्रमाण है। बीएसएनएल को न केवल पुनर्जीवित किया जा रहा है, बल्कि इसे फिर से परिभाषित किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “अनुशासित लागत नियंत्रण और 4जी/5जी की स्थापना के साथ हम विकास की इस गति को बनाए रखेंगे। साथ ही हर भारतीय को सस्ती, उच्च गुणवत्ता वाली कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा अंतिम लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना तक सीमित नहीं रहेगा। हम सार्वजनिक सेवा में दूरसंचार उत्कृष्टता को फिर से परिभाषित करेंगे। जब हम लगातार सही चीजें करते हैं, उत्कृष्ट सेवा प्रदान करते हैं, वंचितों तक पहुंचते हैं, समावेशिता के लिए इनोवेशन करते हैं तो मुनाफा स्वाभाविक रूप से आएगा।”

फ्रेंच कंपनी Alcatel की भारत में दमदार वापसी, 12000 रुपये से कम में लॉन्च किए तीन तगड़े 5G फोन

मुंबई Alcatel ने भारतीय बाजार में वापसी करते हुए तीन नए स्मार्टफोन्स को लॉन्च किया है. तीनों ही फोन्स Alcatel V3 सीरीज का हिस्सा हैं और दमदार फीचर्स के साथ आते हैं. कंपनी ने Alcatel V3 Classic, V3 Pro और V3 Ultra को लॉन्च किया है. V3 Ultra में स्टायलस सपोर्ट और NXTPAPER 4-in-1 जैसे फीचर दिए गए हैं. NXTPAPER पेटेंटेड टेक्नोलॉजी है, जो फोन इस्तेमाल के दौरान आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करती है. इसका इस्तेमाल करके आप स्क्रीन को अलग-अलग मोड में चेंज कर पाएंगे. आइए जानते हैं इन फोन्स की कीमत और फीचर्स. कितनी है कीमत? Alcatel V3 Classic को कंपनी ने 12,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. ये कीमत फोन के 4GB RAM + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की है. वहीं 6GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट का दाम 14,999 रुपये है. ये फोन कॉज्मिक ग्रे और हॉलो वॉइट कलर में आता है. वहीं प्रो वेरिएंट को कंपनी ने माचा ग्रीन और मेटैलिक ग्रे कलर में लॉन्च किया है. प्रो वेरिएंट सिर्फ एक कॉन्फिग्रेशन 8GB RAM + 256GB स्टोरेज में आता है, जिसकी कीमत 17,999 रुपये है. Alcatel V3 Ultra की कीमत 19,999 रुपये से शुरू होती है. ये कीमत फोन के 6GB RAM + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की है. 8GB RAM + 128GB स्टोरेज वेरिएंट 21,999 रुपये का है. Alcatel V3 सीरीज की सेल 2 जून से शुरू हो रही है. इन फोन्स को आप Flipkart से खरीद पाएंगे. वहीं इन स्मार्टफोन्स पर 2000 रुपये का बैंक डिस्काउंट या एक्सचेंज बोनस भी मिलेगा. क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स? Alcatel V3 Classic में  6.67-inch का HD+ डिस्प्ले मिलता है. फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर मिलता है. फोन के स्टोरेज को माइक्रो SD कार्ड की मदद से आप 2TB तक बढ़ा सकते हैं. हैंडसेट Android 15 OS के साथ आता है. इसमें 50MP + 0.08MP QVGA का डुअल रियर कैमरा मिलता है. वहीं फ्रंट में कंपनी ने 8MP का कैमरा दिया है. फोन 5200mAh की बैटरी और 10W की चार्जिंग के साथ आता है. इसमें टाइप-सी चार्जिंग और डुअल स्पीकर जैसे फीचर मिलते हैं. Alcatel V3 Pro में 6.67-inch का HD+ NXTPAPER डिस्प्ले मिलता है. फोन MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर के साथ आता है. इसमें 50MP + 5MP का रियर और 8MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. हैंडसेट 5010mAh की बैटरी और 18W की चार्जिंग के साथ आता है. सिक्योरिटी के लिए फोन में साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर मिलेगा. वहीं Alcatel V3 Ultra में 6.78-inch का FHD+ NXTPAPER डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आता है. फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है. इसमें भी आपको स्टोरेज एक्सपैंड का विकल्प मिलता है. फोन में eSIM का सपोर्ट भी दिया गया है. हैंडसेट Android 15 के साथ आता है. इसमें 108MP + 8MP + 2MP का ट्रिपल रियर कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. फोन 5010mAh की बैटरी और 33W की चार्जिंग सपोर्ट करता है. इसमें भी आपको साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर मिलेगा.  

स्टॉक मार्केट में गिरावट, सेंसेक्स 800 अंक गिरा, क्‍या Covid-19 है वजह?

मुंबई देश में कोराना (Corona) का साया एक बार फिर मंडराने लगा है और लगातार इसके मामलों में इजाफा हो रहा है. इसका डर शेयर बाजार (Corona Fear On Share Market) पर भी दिखने लगा है. बीते कारोबारी दिन सोमवार को जहां Sensex-Nifty दिनभर जोरदार तेजी के साथ भागते हुए नजर आए थे, तो वहीं मंगलवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलते ही 800 अंक से ज्यादा फिसलकर 81500 के नीचे कारोबार करता नजर आया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी अपने पिछले बंद की तुलना में 200 अंक से ज्यादा टूटकर रेड जोन में ट्रेड करता दिखा. शुरुआती कारोबार में टाटा मोटर्स से लेकर महिंद्रा एंड महिंद्रा और टीसीएस जैसे शेयरों में तगड़ी गिरावट देखने को मिली. धराशायी हुई सेंसेक्स और निफ्टी बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स (Sensex) अपने पिछले बंद 82,176.45 की तुलना में गिरावट लेकर 82,038.20 पर ओपन हुआ और महज कुछ मिनटों में ही ये इंडेक्स करीब 800 अंकों की गिरावट लेकर 81,303 पर कारोबार करता नजर आने लगा. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई के निफ्टी ने भी शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट देखी और अपने पिछले बंद 25,001.15 की तुलना में फिसलकर 24,956.65 पर कारोबार की ओपनिंग की, लेकिन मिनटों में ये 200 अंक से ज्यादा टूटकर 24,769 पर कारोबार करता दिखा. सबसे ज्यादा गिरावट वाले 10 स्टॉक बात करें शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों के बारे में, तो लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Tata Motors Share (1.50%), NTPC Share (1.54%), M&M Share (1.40%) और TCS Share (1.20%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में FirstCry Share (4%), GICRE Share (2.70%), Emcure Share (2.40%) फिसलकर कारोबार कर रहा था. बात स्मॉलकैप शेयरों की करें, तो RatGain Share (7.40%), Sagility Share (5%) और Infobean Share (4.90%) की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था. एशियाई बाजारों में मिले थे सुस्ती के संकेत बाजार खुलने से पहले सप्ताह के दूसरे दिन मिले जुले ग्लोबल संकेत मिल रहे थे. जहां कुछ अमेरिकी इंडेक्स में ग्रीन बंद हुए थे, तो वहीं एशियाई बाजार में गिरावट देखने को मिल रही थी. जी हां, गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) जहां मामूली गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. तो वहीं जापान का निक्केई (Japan Nikkei) करीब 100 अंक फिसलकर 37,440 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. हांगकांग के हैंगसेंग (Hang Seng) की बात करें, तो ये भी शुरुआती कारोबारी में 90 अंक की गिरावट लेकर 23,199 पर कारोबार कर रहा था. साउथ कोरिया का कोस्पी (KOSPI) में भी मामूली गिरावट देखने को मिली थी. कल दिनभर रही थी बाजार में तेजी बीते कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार में दिनभर जोरदार तेजी देखने को मिली थी. बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 81,721.08 की तुलना में तेज उछाल के साथ 91,928.95 पर खुला था और 700 अंक से ज्यादा चढ़ गया था. हालांकि, कारोबार खत्म होते-होते BSE Sensex की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी, फिर भी ये 455.38 अंक की तेजी लेकर 82,176.45 के लेवल पर क्लोज हुआ था. तो वहीं NSE Nifty 24,853.15 की तुलना में सोमवार को 24,919.35 के स्तर पर खुला और फिर 25,079 तक उछला, लेकिन अंत में निफ्टी इंडेक्स 148 अंकों की बढ़त के साथ 25,001.15 के लेवल पर बंद हुआ था. कोरोना फिर से डराने लगा सिंगापुर, हांगकांग के बाद अब भारत में भी पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के मामले बढ़ (Covid-19 Cases In India) हैं और देश की तमाम स्वास्थ्य एजेंसीज कोरोना के मामलों पर नजर रखी हुई हैं और कई राज्यों ने एडवाइजरी भी जारी कर दी है. चीन में कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़तों का प्रतिशत पिछले महीने 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 6.3 प्रतिशत हो गया है और वहां के अस्पतालों में वायरस के लिए A&E रोगियों की दर 7.5 प्रतिशत से बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गई है. इसके अलावा ताइवान ने कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होने वालों में 78 प्रतिशत की वृद्धि देखी है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है. स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान में कोरोना के 104 एक्टिव केस (मामले) हैं. बीते एक हफ्ते में 99 नए मामले सामने आए हैं.वहीं, अब पूरे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या एक हजार के पार पहुंच गई है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सबसे ज्यादा मामले केरल में 430 में है.  

अमेरिकी अधिकारियों का एक दल आएगा भारत , अंतरिम व्यापार समझौते पर होगी बातचीत

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर अगले दौर की चर्चा के लिए अमेरिकी अधिकारियों का एक दल आने वाले हफ्तों में भारत का दौरा कर सकता है। एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों की यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका 9 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बना सकते हैं। इस बातचीत में नई दिल्ली घरेलू वस्तुओं पर 26 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ से पूर्ण छूट की मांग कर रहा है। एक सूत्र ने बताया, “व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी टीम के भारत आने की उम्मीद है। वार्ता तेज गति से आगे बढ़ रही है।” भारत के मुख्य वार्ताकार, वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह अपनी चार दिवसीय वाशिंगटन यात्रा पूरी की। उन्होंने प्रस्तावित समझौते पर अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ बातचीत की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी व्यापार वार्ता को गति देने के लिए पिछले सप्ताह वाशिंगटन में थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से दो बार मुलाकात की। अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का अतिरिक्त पारस्परिक शुल्क लगाया था, लेकिन बाद में इसे 90 दिनों के लिए 9 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया। हालांकि, भारतीय वस्तुओं पर अभी भी अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत बेसलाइन शुल्क लागू है।

दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद शेयर बाजार बना रॉकेट, सेंसेक्स 700 और निफ्टी 25074 के ऊपर पहुंचा

मुंबई सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने दमदार शुरुआत की। BSE सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 734 अंकों की बढ़त के साथ 82,488 पर पहुंच गया, जबकि NSE निफ्टी 208 अंकों की छलांग के साथ 25,060 पर कारोबार करता दिखा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी रही, जिससे डलाल स्ट्रीट पर बुलिश सेंटिमेंट का साफ संकेत मिला। Geojit Financial Services के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का रिकॉर्ड डिविडेंड और भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना, बाजार की भावनाओं के लिए बड़ा समर्थन है। उन्होंने कहा, “RBI की ओर से बजट अनुमान से अधिक सरप्लस ट्रांसफर से FY26 का राजकोषीय घाटा 4.4% तक सीमित रह सकता है। इससे महंगाई पर नियंत्रण और ब्याज दरों में गिरावट की उम्मीद को बल मिला है।” डॉ. विजयकुमार ने यह भी चेताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूरोपीय संघ पर टैरिफ टालना फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन यह अस्थायी कदम हो सकता है। “अगर ट्रम्प ने Apple पर 25% टैरिफ लगाने जैसा कोई कदम उठाया, तो वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। तूफानी तेजी के साथ खुले सेंसेक्स-निफ्टी सोमवार को शेयर मार्केट खुलने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स (Sensex) अपने पिछले बंद 81,721 की तुलना में जोरदार तेजी लेते हुए 81,928.95 पर ओपन हुआ और महज कुछ मिनटों में ही 780 अंकों की छलांग लगाते हुए 82,492 पर कारोबार करता नजर आया. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई के निफ्टी ने भी शुरुआती कारोबार में अपना दम दिखाते हुए पिछले बंद 24,853.15 की तुलना में उछलकर 24,919.35 पर कारोबार की ओपनिंग की और फिर अचानक 25000 के आंकड़े को पार कर गया. पहले ही मिल रहे थे तेजी के संकेत   भारतीय शेयर बाजार (Stock Market India) के लिए पहले से ही ग्लोबल पॉजिटिव संकेत मिल रहे थे. एशियाई शेयर बाजारों की बात करें, तो जापान का निक्केई इंडेक्स (Japan Nikkei) से लेकर साउथ कोरिया को कोस्पी (Kospi) तक करीब एक फीसदी की शुरुआती तेजी लेकर कारोबार करता नजर आया था, तो वहीं दूसरी ओर गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) शुरुआती कारोबार में 105 अंक की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था. ये 10 शेयर सबसे तेज भागे शेयर बाजार में तेजी के बीच खबरे लिखे जाने तक बीएसई सेंसेक्स की 30 लार्जकैप स्टॉक्स में से 29 में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था. इस बीच 10 सबसे ज्यादा भागने वाले शेयरों पर नजर डालें, तो M&M Share (2.74%), Tata Motors Share (2.10%), Titan Share (1.50%), NTPC Share (1.30%), ICICI Bank Share (1.29%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में Suzlon Share (5.11%) और RVNL Share (3.50%) चढ़कर ट्रेड कर रहा था. स्मॉलकैप कैटेगरी में Godavari Biorefineries Share (12.20%), Control Print Share (12%) और Tarsons Share (9%) की छलांग लगाकर कारोबार कर रहा था. शुक्रवार को आया था जोरदार उछाल बीते सप्ताह शेयर बाजार में जोरदार उथल-पुथल मची थी, लेकिन आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को Share Market के दोनों इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी तूफानी तेजी के साथ ग्रीन जोन में बंद हुए थे. एक ओर जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) 769.09 अंक की तेजी के साथ 81,721.08 के लेवल पर क्लोज हुआ था, तो दिनभर तेजी में कारोबार करने के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स (NSE Nifty) 243.45 अंक उछलकर 24,853.15 के लेवल पर बंद हुआ था. भारत का बजा दुनिया में डंका गौरतलब है कि भारत अब जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (World 4th Largest Economy India) बन गया है. शनिवार को नीति आयोग के सीईओ (CEO) बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने यह जानकारी शेयर की थी. उन्होंने नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के बाद कहा कि, ‘ग्लोबल और इकोनॉमिक माहौल भारत के अनुकूल बना हुआ है और मैं मैं जब बोल रहा हूं, तब हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी हैं. आज हम 4,000 अरब डॉलर (4 Trillion Dollar Economy) की अर्थव्यवस्था बन चुके हैं. मिडकैप शेयरों की चमक बरकरार, निवेशकों को राहत बीते कुछ हफ्तों में मिडकैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। इससे वैल्यूएशन को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हुई है और बाजार में सकारात्मकता बनी हुई है। Geojit के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने बताया कि टेक्निकल चार्ट पर “मॉर्निंग स्टार” पैटर्न बन रहा है, जो तेजी का संकेत है। “यदि निफ्टी हालिया पीक 25,235 को पार करता है, तो अगला लक्ष्य 25,460 और तेजी की स्थिति में 26,250 तक हो सकता है,” उन्होंने कहा। हालांकि, उन्होंने चेताया कि यदि निफ्टी 24,950 पार नहीं कर पाता, तो बाजार में मंदी का रुख आ सकता है। डाउनसाइड के लिए 24,755 और मजबूत सपोर्ट 24,500 पर है, जिसके नीचे गिरावट 24,060 तक जा सकती है।

भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा किया हासिल

नई दिल्ली भारत ने वैश्विक आर्थिक मंच पर एक और बड़ी छलांग लगाई है। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बीवी आर सुब्रह्मण्यम ने शनिवार को इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। यह आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के लेटेस्ट आंकड़ों पर आधारित है। सुब्रह्मण्यम ने यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित 10वीं नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल बैठक के बाद एक प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा, “जैसा कि मैं बोल रहा हूं, भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। हमारी अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गई है। यह मेरा नहीं बल्कि IMF का डेटा है। भारत अब जापान से आगे निकल गया है।” उन्होंने आगे कहा कि अब केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही भारत से आगे हैं। यदि भारत की आर्थिक प्रगति इसी रफ्तार से चलती रही तो आने वाले 2 से 3 वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। IMF की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (अप्रैल 2025) रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत की GDP करीब 4,187 अरब डॉलर होगी। वहीं, जापान की GDP अनुमानित रूप से 4,186 अरब डॉलर रहने की संभावना है। भारत 2024 तक दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। IMF का कहना है कि भारत 2025 और 2026 में क्रमश: 6.2% और 6.3% की दर से विकास करेगा। इसके विपरीत वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 2025 में 2.8% और 2026 में 3% रहने की संभावना है। यह आंकड़े भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को रेखांकित करते हैं। ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में मजबूत कदम बैठक के दौरान ‘विकसित राज्य से विकसित भारत 2047’ विषय पर केंद्र और राज्यों के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ। नीति आयोग के सीईओ ने बताया कि इस बैठक में मैन्युफैक्चरिंग, सेवाएं, ग्रामीण और शहरी गैर-कृषि क्षेत्र, अनौपचारिक क्षेत्र, ग्रीन और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सुब्रह्मण्यम ने कहा, “भारत अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां से उसकी अर्थव्यवस्था बहुत तेज गति से आगे बढ़ सकती है। हम टेक-ऑफ स्टेज पर हैं।”  

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