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तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड को लेकर चर्चा, हाथ लगा 454 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट, 1 साल में पैसा किया डबल

नई दिल्ली एक साल पहले शेयर बाजार में लिस्ट हुई कंपनी तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड को लेकर अच्छी खबर आई है। कंपनी के हाथ एक बड़ा प्रोजेक्ट लगा है। तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड ने इसकी जानकारी शेयर बाजार में 19 अप्रैल को साझा किया। गोपीकॉन लिमिटेड ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में कहा है कि इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। इस प्रोजेक्ट की कीमत 454 करोड़ रुपये है। कंपनी के पास 36 महीने का समय इस प्रोजेक्ट के लिए है। एक साल में कंपनी ने किया पैसा दोगुना गुरुवार को एनएसई में कंपनी के शेयर 2 प्रतिशत की तेजी के साथ 361.90 रुपये के लेवल पर था। बीते एक साल में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 150 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, एक महीने में कंपनी के शेयरों का भाव 13.90 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी का 52 वीक हाई 774 रुपये और 52 वीक लो लेवल 123 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 434.27 करोड़ रुपये का है। पिछले साल आया था कंपनी का आईपीओ तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड का आईपीओ 8 अप्रैल 2024 को ओपन हुआ था। कंपनी का आईपीओ 10 अप्रैल 2024 तक खुला था। कंपनी के आईपीओ का साइज 44.40 करोड़ रुपये का था। कंपनी ने आईपीओ के लिए 111 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड के शेयर इश्यू प्राइस से 3 गुना चढ़ चुका है। बता दें, तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड आईपीओ 75.54 गुना सब्सक्राइब किया गया था। इस कंपनी का हेडक्वार्टर इंदौर में है। कंपनी की स्थापना 2019 में हुई थी। यह कंपनी रोड कंस्ट्रक्शन, वाटर डिस्ट्रीब्यूशन वर्क, पार्किंग कंस्ट्रक्शन काम करती है। कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 64.61 प्रतिशत थी। वहीं, पब्लिक के पास 35.37 प्रतिशत हिस्सा है।

सेविंग अकाउंट पर इन बैंकों ने घटाई ब्याज दरें

नई दिल्ली भारत के प्रमुख निजी बैंकों, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और फेडरल बैंक, ने हाल ही में बचत खातों पर ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (0.25%) की कटौती की है. अब इन बैंकों में 50 लाख रुपए से कम बैलेंस पर ब्याज दर घटकर 2.75% हो गई है. वहीं, देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अक्टूबर 2022 से 10 करोड़ रुपए तक के बैलेंस पर मात्र 2.7% ब्याज दे रहा है. इन बैंकों ने न सिर्फ बचत खातों पर, बल्कि फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर भी ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की है. यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब बैंकिंग सिस्टम में CASA (चालू और बचत खाता) अनुपात पिछले एक साल में 39% से घटकर 22% तक आ गया है. आनंद राठी सिक्योरिटीज के विश्लेषक कैतव शाह के अनुसार, “यह कटौती हमारे कवरेज में शामिल बैंकों के लिए शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) में 5 से 8 आधार अंकों का सुधार ला सकती है.” बैंकों का CASA अनुपात लगातार घट रहा है. HDFC बैंक का CASA अनुपात पिछले वर्ष के 38% से घटकर दिसंबर 2024 में 34% रह गया. बैंक के बचत खाते में कुल राशि 6.05 लाख करोड़ रुपए और कुल जमा 24.52 लाख करोड़ रुपए रही. इसी तरह, SBI का CASA अनुपात 41.18% से घटकर 39.2% हो गया, जिसमें बचत खाता शेष 33.51 लाख करोड़ रुपए और कुल जमा 60.80 लाख करोड़ रुपए है. क्या ग्राहक बचत खातों से पैसा निकालेंगे? हालांकि बचत ब्याज दरों में गिरावट से ग्राहक एफडी की ओर रुख कर सकते हैं, लेकिन मैक्वेरी कैपिटल के शोध प्रमुख सुरेश गणपति का मानना है कि, “बचत खाते लेन-देन के लिए होते हैं और 25 आधार अंकों की कटौती से कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा.” अप्रैल के पहले सप्ताह में जमा में 2.4%, जबकि ऋण में 0.9% की वृद्धि देखी गई. बैंकों को होगा फायदा, ग्राहकों को करना होगा समझौता विशेषज्ञों का मानना है कि बचत ब्याज दरों में कटौती से ग्राहकों को कम रिटर्न जरूर मिलेगा, लेकिन यह बैंकों की दीर्घकालिक रणनीति और लाभ को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा. साथ ही यह संकेत है कि अन्य निजी बैंक भी इस राह पर आगे बढ़ सकते हैं.

भारत के स्मार्टफोन मार्केट का 8% हिस्सा ऐपल का, 10 लाख नौकरियां सेमीकंडक्टर से

नई दिल्ली  आईफोन निर्माता कंपनी ऐपल आपदा में अवसर का फायदा उठाने की तैयारी में है। अमेरिका से चीन के ट्रेड वॉर को देखते हुए ऐपल भारत में आईफोन का प्रोडॅक्शन तेजी से बढ़ा रही है। अनुमान है कि मार्च 2025 में बीते 12 महीनों में भारत में करीब 22 बिलियन डॉलर यानी तकरीबन 1.90 लाख रुपए के आईफोन बनाए जा चुके हैं। यह पिछले साल की तुलना में 60% ज्यादा है। यह तब है जब ऐपल चीन से अपनी सप्लाई चेन को दूर ले जा रहा है और प्रोडॅक्शन में यह बढ़ोतरी उसी का नतीजा बताया जा रहा है। इसे लेकर चीन भी टेंशन में है, क्योंकि ऐसे में उसकी इस मामले में बादशाहत खत्म हो सकती है। जानते हैं पूरी कहानी। दुनिया में हर पांचवां आईफोन भारत में बना ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया में बनने वाले हर पांच आईफोन में से एक भारत में बन रहा है। यह $22 बिलियन का आंकड़ा आईफोन की फैक्ट्री से निकलने वाली कीमत है। यह उसकी रिटेल बिक्री कीमत। इस उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा फॉक्सकॉन की दक्षिण भारत स्थित विशाल फैक्ट्री से आता है। टाटा ग्रुप जिसने विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के ऑपरेशन्स को अपने नियंत्रण में ले लिया है वह ऐपल की भारत बेस्ड सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन सबमें बड़ी भूमिका सेमीकंडक्टरों की है, जिसे लेकर अमेरिका और चीन के बीच बड़ी जंग छिड़ी हुई है। सेमीकंडक्टर क्या हैं, इसे समझते चलिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरूरी कंपानेंट्स में से एक अर्धचालक यानी सेमीकंडक्टर है, जिसे एकीकृत सर्किट (IC) भी कहा जाता है। सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, यातायात, स्वास्थ्य सेवा, सैन्य प्रणाली, संचार को सक्षम बनाते हैं। माइक्रोचिप्स इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक हैं: रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन, वाहन और मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरण। माइक्रोचिप्स इतने महत्वपूर्ण हैं कि कुछ लोग उन्हें 21वीं सदी का ‘नया तेल’ भी कहते हैं। ऐपल आईफोन के लिए ये जरूरी चीज है। बीते साल Apple ने भारत में भी सेमीकंडक्टर चिप्स के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए चर्चा की है, जिससे भारत में भी चिप्स का निर्माण शुरू हो सके। ऐपल आईफोन के लिए 2026 मील का पत्थर ऐपल आईफोन के लिए सेमीकंडक्टर बनाने वाली प्रमुख कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट के अनुसार, ऐपल को 2026 तक सेमीकंडक्टर चिप्स की बड़ी मात्रा में जरूरत होगी। तब तक आईफोन निर्माता अपनी वैश्विक विनिर्माण क्षमता का 26 प्रतिशत भारत में ट्रांसफर कर चुके होंगे। ऐपल की वर्तमान सेमीकंडक्टर खपत लगभग 72 बिलियन डॉलर है, क्योंकि इसके सभी हाई क्वालिटी प्रोडॅक्ट जैसे आईफोन, आईपैड, मैक, ऐपल वॉचेज और एयरपॉड्स सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भारत की संभावना इस मामले में काफी बड़ी है। ट्रंप के टैरिफ को देखते हुए ऐपल ने बढ़ाया एक्सपोर्ट ऐपल ने पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से 1.5 ट्रिलियन रुपए (लगभग $17.4 बिलियन) के आईफोन निर्यात किए। अमेरिका को होने वाले शिपमेंट में तब तेजी आई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ की घोषणा की। इसके बाद ऐपल ने भारत से निर्यात को तेजी से बढ़ाया। हालांकि, हाल ही में हुई घोषणा में स्मार्टफोन सहित इलेक्ट्रॉनिक्स को उन टैरिफ से छूट दी गई थी, लेकिन चीन पर लगने वाले बाकी टैक्स (कुल 245%) अभी भी लागू हैं। ट्रंप का चीन से आने वाले सामान पर 20% का अलग शुल्क, जिसका उद्देश्य फेंटानिल को लेकर बीजिंग पर दबाव डालना है, वह भी अभी जारी है। भारत में बने डिवाइस पर अमेरिका नहीं लगाता टैक्स ऐपल के लिए भारत एक अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह है। भारत में बने डिवाइस पर अभी अमेरिका में कोई टैक्स नहीं लगता है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी अमेरिकी ग्राहकों के लिए अपनी भारतीय उत्पादन लाइनों पर ज़्यादा निर्भर करेगी। चीन को लेकर यह पेंच अभी तक बरकरार हालांकि एप्पल ने भारत में उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन वह अभी भी चीन से काफ़ी जुड़ा हुआ है। कंपनी लगभग 200 सप्लायरों और दशकों से बने एक मजबूत सिस्टम पर निर्भर है। यहां तक कि ऐपल के CEO टिम कुक ने भी चीन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को माना है। चीन से भारत मार्केट शिफ्ट में लगेगा बहुत वक्त ट्रंप अरसे से अमेरिका में आईफोन के प्रोडॅक्शन पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, ऐपल के लिए निकट भविष्य में ऐसा करना मुश्किल है। क्योंकि अमेरिका में उपयुक्त सुविधाएं और कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के 2022 के एक आकलन में अनुमान लगाया गया था कि ऐपल के मैन्युफैक्चरिंग का सिर्फ 10% हिस्सा चीन से बाहर निकालने में आठ साल लगेंगे। इससे पता चलता है कि चीन का सप्लाई बेस कितना मजबूत है। क्या भारत बन पाएगा चीनी मार्केट का विकल्प भारत में लगातार ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है कि वह आईफोन जैसे प्रोडक्ट का शानदार उत्पादन कर सकता है। ऐपल अब भारत में अपने सभी आईफोन मॉडल बनाता है, जिसमें प्रीमियम टाइटेनियम प्रो मॉडल भी शामिल हैं। दरअसल, नरेंद्र मोदी सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए दिए जाने वाले $2.7 बिलियन के नए सब्सिडी का भी योगदान है। PLI स्कीम का मतलब है कि सरकार उत्पादन बढ़ाने पर कंपनियों को प्रोत्साहन देती है। भारत के स्मार्टफोन मार्केट का 8% हिस्सा ऐपल का पिछले वित्तीय वर्ष में भारत में ऐपल की बिक्री लगभग $8 बिलियन थी, जिसमें ज्यादातर आईफोन शामिल थे। हालांकि कंपनी के पास अभी भी भारत के स्मार्टफोन बाजार का सिर्फ 8% हिस्सा है। मगर, कंपनी अभी भारत को रिटेल डेस्टिनेशन के बजाय अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का बनाना चाहती है। माना जा सकता है कि कंपनी भारत में अपने बेहतर भविष्य की संभावनाओं की उम्मीद लगाए हुए है। ये उम्मीद है…10 लाख नौकरियां सेमीकंडक्टर से बीते साल नवंबर में आई एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2026 तक भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र 10 लाख नौकरियां पैदा करेगा। टैलेंट सॉल्यूशंस कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने वाला है, लिहाजा यह उद्योग 2026 तक अनेक क्षेत्रों में 10 लाख नौकरियां देने के लिए तैयार है।चिप सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में अनुमानित 3,00,000 नौकरियां, एटीएमपी में करीब 2,00,000 पद और चिप डिजाइन, … Read more

ट्रेड वॉर: US की कंपनियां चीन से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने के तैयारी में, भारत के लिए एक बड़ा अवसर

नई दिल्ली  दुनिया की दो सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देशों अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने चीनी माल पर 245% टैक्स लगा दिया है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन में सामान बनाना फायदे का सौदा नहीं रह गया है और वे चीन में अपना बोरिया बिस्तार समेटने की तैयारी में हैं। भारत सरकार इसे एक बड़े मौके के रूप में देख रही है। सरकार चाहती है कि ये कंपनियां भारत में आकर अपना कारोबार करें। इससे भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने और दवाइयों जैसे सेक्टरों में फायदा होगा। इकनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक सरकार भारतीय कंपनियों को भी अमरीका में कारोबार बढ़ाने में मदद करना चाहती है। हाल ही में सरकार ने इंडस्ट्री के लोगों के साथ मीटिंग की थी। इस मीटिंग में अमरीका में कारोबार बढ़ाने के तरीकों पर बात हुई। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत और अमरीका के बीच व्यापार समझौता होने की उम्मीद है। इस बारे में बातचीत जल्द ही शुरू होने वाली है। पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात होगी और फिर मई के मध्य से आमने-सामने मीटिंग होने की संभावना है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को इसमें एक बड़ा मौका दिख रहा है। अमरीका ने चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स सामान पर ज्यादा टैक्स लगाया है। लेकिन भारत और 75 से ज्यादा देशों से आने वाले सामान पर टैक्स नहीं लगाया है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक्स सामान पर नया टैक्स लगाएंगे। चीन में बने आईफोन जैसे स्मार्टफोन पर अमरीका में 20% टैक्स लगता है। वहीं, भारत में बने सामान पर कोई टैक्स नहीं है। किससे है सबसे बड़ी चुनौती इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि सरकार को सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी ताकि अमरीका-चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सके। उनका कहना है कि अगर सही से योजना नहीं बनाई गई, तो वियतनाम इस मौके का सबसे ज्यादा फायदा उठा सकता है। वियतनाम अमरीका को सैमसंग के स्मार्टफोन और गैजेट्स का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। उसके पास भारत से ज्यादा मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन है। वियतनाम का अमरीका के साथ व्यापार ज्यादा है। साथ ही वहां ज्यादातर चीनी कंपनियों ने निवेश किया है। इसलिए भारत के लिए भी मौके हो सकते हैं। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के कारण देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय के पास तीन पीएलआई स्कीम हैं। ये स्कीम स्मार्टफोन, लैपटॉप और सर्वर जैसे IT हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स के लिए हैं। अभी, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) इस बारे में बातचीत कर रहा है। जल्द ही दूसरे मंत्रालय भी इसमें शामिल होंगे। इंडस्ट्री के एक जानकार ने बताया कि सरकार ने 10-12 सेक्टरों की पहचान की है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिसिन, केमिकल, ऑटोमोबाइल, खिलौने, एयर कंडीशनर और अप्लायंसेज शामिल हैं। इन सेक्टरों में भारत को फायदा हो सकता है। इंडस्ट्री की दिक्कत एक और सूत्र ने बताया कि सरकार ने साफ कर दिया है कि जॉइंट वेंचर और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट को ज्यादा महत्व दिया जाएगा क्योंकि भारत में इस तरह का सिस्टम बनाने की जरूरत है। इंडस्ट्री को बताया गया है कि सरकार भारत को मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना चाहती है। साथ ही, दुनिया के व्यापार में ज्यादा हिस्सा हासिल करना चाहती है। इंडस्ट्री ने टैक्स, कस्टम और दूसरी दिक्कतों के बारे में बताया है। उसका कहना है कि इन दिक्कतों की वजह से लक्ष्य हासिल करने में परेशानी हो सकती है।  

ICICI ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वालों को निराश करते हुए ब्याज दरों में कटौती का किया एलान

नई दिल्ली अगर आप ICICI बैंक में सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसे जमा करके बेहतर ब्याज की उम्मीद कर रहे थे, तो यह खबर आपके लिए मायूसी भरी हो सकती है। देश के बड़े प्राइवेट बैंकों में शुमार ICICI बैंक ने FD और सेविंग अकाउंट दोनों पर ब्याज दरों में कटौती कर दी है।  ICICI ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वालों को निराश करते हुए ब्याज दरों में कटौती का एलान किया है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में कटौती की थी। इसके बाद पहले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और फिर HDFC बैंक ने भी जमा दरों में बदलाव किया और अब ICICI बैंक ने भी उसी दिशा में कदम बढ़ाया है।  ICICI Bank ने अपनी कई FD योजनाओं पर ब्याज दरों में 0.25% से लेकर 0.50% तक की कमी की है। बैंक की यह नई दरें 17 अप्रैल से लागू हो गई हैं। ब्याज दरों में यह कटौती उन ग्राहकों को ज्यादा प्रभावित करेगी जिन्होंने कुछ समय के लिए एफडी में निवेश कर रखा है या करने का विचार कर रहे हैं। नए बदलाव के बाद अब बैंक सामान्य ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट पर 3 प्रतिशत से लेकर अधिकतम 7.05 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरें 3.5 प्रतिशत से शुरू होकर 7.55 प्रतिशत तक जाती हैं। 7.25 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 7.85 प्रतिशत ब्याज मिलता था, जिसे अब घटा दिया गया है। सबसे ज्यादा असर 30 से 45 दिन की छोटी अवधि वाली एफडी योजनाओं पर पड़ा है। पहले इस अवधि के लिए ब्याज दर 3.50 प्रतिशत थी, जो अब घटकर सिर्फ 3.00 प्रतिशत रह गई है। इसी तरह, 61 से 90 दिनों की जमा योजना पर ब्याज दर 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.25 प्रतिशत कर दी गई है। बैंक ने 18 महीने से दो साल तक की एफडी के लिए भी ब्याज दर में 0.20 प्रतिशत की कमी की है, जो अब 7.05 प्रतिशत रह गई है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं और एफडी पारंपरिक रूप से भरोसेमंद निवेश साधन मानी जाती रही है। हालांकि अब कम ब्याज दरों के चलते लोग एफडी की जगह अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, खासकर वे जो बेहतर रिटर्न चाहते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को भले ही कुछ ज्यादा ब्याज मिल रहा हो, लेकिन पहले की तुलना में उनके लिए भी रिटर्न में कटौती महसूस की जा सकती है। ऐसे में नए निवेशकों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे बैंक दरों की तुलना करें और यह तय करें कि वर्तमान ब्याज दरों पर एफडी करना वाकई फायदेमंद है या नहीं।  

लाइसेंस रद्द कर बैंक को लगाया ताला, ग्राहकों के पैसे फंसे!, RBI की इस Bank पर बड़ी कार्रवाई

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अहमदाबाद स्थित कलर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब बैंक की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी थी और उसके पास न तो पर्याप्त पूंजी थी, न ही भविष्य में टिके रहने की कोई संभावनाएं। क्यों बंद किया गया बैंक? RBI के मुताबिक, बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के कई जरूरी प्रावधानों का पालन करने में नाकाम रहा। इसके अलावा, लगातार घाटे और कमजोर फाइनेंशियल हेल्थ के चलते यह संस्था अपने ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही थी। इन हालातों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने गुजरात को-ऑपरेटिव सोसायटी के रजिस्ट्रार को बैंक को बंद करने और उसके लिए एक लिक्विडेटर नियुक्त करने की सिफारिश भी कर दी है। ग्राहकों को कितना पैसा मिलेगा? घबराने की जरूरत नहीं है- RBI ने साफ किया है कि बैंक के 98.51% ग्राहक Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) के तहत अपनी जमा राशि पर बीमा दावे के पात्र हैं। DICGC के नियमों के अनुसार, प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि का भुगतान मिलेगा। 31 मार्च, 2024 तक, DICGC पहले ही लगभग ₹13.94 करोड़ की राशि का भुगतान ग्राहकों को कर चुका है। अब बैंकिंग सेवाएं बंद 16 अप्रैल, 2025 को लाइसेंस रद्द होने के साथ ही कलर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का बैंकिंग कारोबार पूरी तरह से बंद हो गया है। इसका मतलब है कि अब बैंक किसी भी तरह का डिपॉजिट स्वीकार नहीं करेगा और न ही पुराने डिपॉजिट्स की रीपेमेंट कर सकेगा। क्या है आगे का रास्ता? RBI का मानना है कि मौजूदा हालत में बैंक का संचालन जारी रखना ग्राहकों के हितों के खिलाफ होगा। इसलिए बैंक को बंद करना ही एकमात्र विकल्प था। अब आगे लिक्विडेटर की निगरानी में बैंक की संपत्तियों का निपटारा किया जाएगा और ग्राहकों को DICGC के जरिए राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।  

शेयर मार्केट ने भरी उड़ान, सेंसेक्स 1500 अंक उछलकर हुआ बंद, निवेशकों के लौट रहे अच्छे दिन

मुंबई शेयर मार्केट तेजी के ट्रैक पर सरपट दौड़ रहा है। ऐसा लग रहा मार्केट के अच्छे दिन लौट रहे हैं। सप्ताह के चौथे दिन गुरुवार को सेंसेक्स 1,508.91 अंक उछलकर 78,553.20 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 414.45 अंक चढ़कर 23,851.65 अंक पर ठहरा। शेयर मार्केट आज उड़ान भर रहा है। सुबह की गिरावट के बाद मार्केट में गजब की खरीदारी दिख रही है। सेंसेक्स में 1300 से अधिक अंकों की बंपर उछाल है। सेंसेक्स अब 78,349 पर है। जबकि, एनएसई का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 352 अंकों की उछाल के साथ 23789 पर पहुंच गया है। बैंकिंग स्टॉक्स उड़ान भर रहे हैं। शेयर मार्केट लगातार चौथे दिन भी बमबम बोल रहा है। सेंसेक्स में 78160 पर पहुंच गया है। इसमें अभी 1116 अंकों की बंपर उछाल है। जबकि, एनएसई का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 314 अंकों की उछाल के साथ 23751 पर पहुंच गया है। एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक, रिलायंस, एचडीएफसी बैंक के दम पर सेंसेक्स में 77,629.43 पर पहुंच गया है। इसमें अभी 585.14 अंकों की उछाल है। जबकि, एनएसई का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 161 अंकों की उछाल के साथ 23598 पर पहुंच गया है। एनएसई पर 48 स्टॉक्स 52 हफ्ते के हाई और 11 लो पर हैं। 1821 शेयरों में तेजी और 782 में मंदी है। जबकि, 73 स्टॉक्स में अपर सर्किट लगा है। शेयर मार्केट खराब शुरुआत के बाद तेजी के ट्रैक पर आ गया है। सेंसेक्स में 486 अंकों की उछाल है और बीएसई का यह प्रमुख सूचकांक 77530 पर पहुंच गया है। जबकि, एनएसई का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 166 अंकों की उछाल के साथ 23602 पर पहुंच गया है। शेयर मार्केट खराब शुरुआत के बाद कभी हरा तो की ला हो रहा है। सेंसेक्स अभी 10 अंकों फायदे के साथ 77054 पर है। जबकि, निफ्टी 13 अंक नीचे 23423 पर ट्रेड कर रहा है। सेंसेक्स टॉप गेनर्स में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, इटर्नल, बजाज फिनसर्व, स्टेट बैंक, एयरटेल, एनटीपीसी, एक्सिस बैंक और नेस्ले हैं। शेयर मार्केट की लगातार तीन कारोबारी दिनों की तेजी पर आज ब्रेक लगा है। सेंसेक्स आज गुरुवार 17 अप्रैल को 76 अंकों के नुकसान के साथ 76968 पर खुला। जबकि, निफ्टी ने बुधवार के बंद के मुकाबले 35 अंकों की गिरावट के साथ 23402 के लेवल से आज के दिन की शुरुआत की। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की चेतावनी के बाद एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हुआ, जबकि अमेरिकी शेयर मार्केट रातोंरात तेज गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं, गिफ्ट निफ्टी 23,343 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। यह निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद से लगभग 90 अंकों की छूट है, जो भारतीय शेयर बाजार सूचकांकों के लिए नकारात्मक शुरुआत का संकेत देता है। ऐसे में घरेलू शेयर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50, मिश्रित वैश्विक बाजार संकेतों के बाद गुरुवार को गिरावट के साथ खुलने के आसार हैं। बता दें बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन भी रैली रही। सेंसेक्स 309.40 अंक या 0.40 प्रतिशत बढ़कर 77,044.29 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 108.65 अंक या 0.47 प्रतिशत बढ़कर 23,437.20 पर बंद हुआ।

चांदी की कीमत 96,000 रुपये प्रति किलो पहुंची, सोना 1100 रुपये बढ़कर 98,983 रुपये प्रति 10 ग्राम

 इंदौर और दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना 1100  रुपये की बड़ी बढ़त के साथ 98,983 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोने की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में गोल्ड में ऐतिहासिक बढ़त चांदी 1,900 रुपये उछलकर 99,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का पिछला बंद भाव 96,450 रुपये था। इस साल की शुरुआत में यानी 1 जनवरी 2025 को सोने का भाव 79,390 रुपये था, जो अब तक 18,710 रुपये या करीब 23.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर चुका है। क्यों आ रही है सोने में तेजी यह तेजी अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध बढ़ने, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद के चलते आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 3,318 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। वहीं, हाजिर चांदी भी करीब दो प्रतिशत की बढ़त के साथ 32.86 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इंदौर में भी सोना मजबूत इंदौर के स्थानीय सर्राफा बाजार में भी बुधवार को सोने और चांदी की मांग में इजाफा देखने को मिला। व्यापारियों के अनुसार मंगलवार की तुलना में बुधवार को ग्राहकों की संख्या और खरीदारी दोनों में बढ़ोतरी हुई। इंदौर में सोने का औसत भाव 93,150 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं चांदी 97,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी के सिक्के का भाव 1,100 रुपये प्रति नग दर्ज किया गया। निवेशकों की नजर एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और आर्थिक आंकड़ों के कारण आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर आने वाले बयानों और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, डिजिटल माध्यमों जैसे ऑनलाइन गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड म्युचुअल फंड्स में भी निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा दौर में सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग और बढ़ सकती है। कुल मिलाकर वैश्विक हालात और निवेशकों की सोच में बदलाव के चलते सर्राफा बाजार में सोना और चांदी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं।

आज शेयर बाजार हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 309 अंक उछला

मुंबई भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। बाजार के करीब सभी सूचकांकों में तेजी थी। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 309 अंक या 0.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,044 और निफ्टी 108 अंक या 0.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,437 पर था। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 371 अंक या 0.71 प्रतिशत की तेजी के साथ 52,345 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 169.95 अंक या 1.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,349 पर बंद हुआ। सेंसेक्स पैक में इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, एसबीआई, आईटीसी, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, नेस्ले, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड और एचसीएल टेक टॉप गेनर्स थे। मारुति सुजुकी, इन्फोसिस, टाटा मोटर्स, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस और सन फार्मा टॉप लूजर्स थे। आशिका इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के तकनीकी और डेरिवेटिव विश्लेषक, सुंदर केवट ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार सपाट खुले थे। दिन के दौरान निफ्टी ने 23,273 का लो बनाया और कारोबार के अंतिम घंटे बाजार में तेजी देखी और निफ्टी 23,400 के ऊपर बंद होने में सफल रहा। सेक्टोरल आधार पर आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, एफएमसीजी, मेटल, रियल्टी, मीडिया, एनर्जी और प्राइवेट बैंक इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए और वहीं, ऑटो एवं फार्मा सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी शेयरों में से 2,638 हरे निशान में, 1,308 लाल निशान में और 132 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। एलकेपी सिक्योरिटी में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट, रूपक दे ने कहा कि सत्र की शुरुआत में कमजोरी के बाद निफ्टी में खरीदारी देखने को मिली और 100 दिन के मूविंग एवरेज के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। निफ्टी के लिए 23,300 अब एक मजबूत सपोर्ट है और 23,650 एक रुकावट का स्तर है।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी Meta के खिलाफ चल रहे केस में हुई सुनवाई, मुसीबत में जुकरबर्ग

वाशिंगटन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स- फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा को अपने दो प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम को बेचना पड़ सकता है। वजह है कंपनी के खिलाफ अमेरिका के वाशिंगटन में एंटीट्रस्ट मामले की सुनवाई। कंपनी पर US कॉम्पिटिशन एंड कंज्यूमर वॉच डॉग ने आरोप लगाया है कि उसने मार्केट के कॉम्पिटिशन खत्म करने और अपना एकाधिकार बनाने के लिए 2012 में इंस्टाग्राम (1 बिलियन डॉलर) और 2014 में व्हाट्सएप (22 बिलियन डॉलर) को खरीद लिया था। फेडरल ट्रेड कमिशन का आरोप है कि मेटा ने सालों पहले इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को खरीदकर अपने राइवल्स को खत्म कर दिया है. FTC के वकील का कहना है कि Meta ने अपने कंपटीटर से मुकाबला करने से बजाय, उन्हें खरीद लिया. ये कदम उन्होंने फेसबुक के दबदबे को बनाए रखने के लिए किया है. FTC केस जीतता है तो बेचने पड़ सकते हैं प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम को खरीदने के लिए फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने ही परमिशन दी थी। लेकिन नियमों के तहत FTC को डील के परिणाम को भी मॉनिटर करना होता है। इसलिए उसे मेटा के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ा। अगर (FTC) केस जीत जाता है तो वह मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप दोनों को बेचने के लिए मजबूर कर सकता है। जुकरबर्ग और पूर्व COO को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है रिपोर्ट के मुताबिक, जुकरबर्ग और कंपनी की पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) शेरिल सैंडबर्ग दोनों को इस मुकदमे में सुनवाई के दौरान पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। एंटी ट्रस्ट केस की सुनवाई 6 हफ्तों से ज्यादा चल सकती है। जुकरबर्ग के खिलाफ तर्क…     वेंडरबिल्ट लॉ स्कूल में एंटीट्रस्ट की प्रोफेसर रेबेका हॉ एलेंसवर्थ ने कहा कि जुकरबर्ग ने फेसबुक को इंस्टाग्राम से मिल रहे कॉम्पिटिशन को बेअसर करने के लिए उसे खरीद लिया था।     जुकरबर्ग के बातचीत और उनके ईमेल मुकदमे में सबसे ठोस सबूत पेश कर सकते हैं। जकरबर्ग ने कहा था मार्केट में कॉम्पिटिशन करने की जगह उस कंपनी को ही खरीद लेना ही बेहतर है। मार्क जुकरबर्ग का तर्क…     मेटा ने तर्क दिया कि वह केस जीत जाएगा, क्योंकि इंस्टाग्राम को खरीदने के बाद उसके यूजर्स का एक्सपीरियंस बढ़ा।     रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा यह तर्क दे सकता है कि किसी एंटीट्रस्ट मामले में इरादा ज्यादा प्रासंगिक नहीं है। मेटा के खिलाफ बड़ा सबूत FTC के ओर से डेनियल मैथेसन ने 2012 के एक इंटरनल मेमो का हवाला दिया, जो मेटा CEO मार्क जकरबर्ग की ओर से था. इस मेमो में इंस्टाग्राम को ‘न्यूट्रलाइज’ करने की बात कही गई है. वहीं मेटा ने इसके जवाब में कहा है कि ये केस गुमराह करने वाला है. मेटा ने बताया है कि दोनों ही अधिग्रहण के वक्त FTC ने खुद इन्हें रिव्यू किया था और अधिग्रहण को मंजूरी दी थी. कंपनी के अटॉर्नी ने कहा कि ये डील्स प्लेटफॉर्म को मजबूत करने और कंज्यूमर एक्सपीरियंस को बेहतर करने के लिए की गईं थी. अगर इस मामले में फैसला FTC के पक्ष में जाता है, तो Meta को वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम को बेचना पड़ेगा. FTC ने कहा है कि मेटा ने इन प्लेटफॉर्म्स को खरीदने के लिए ज्यादा पैसे दिए थे. कितने में खरीदा था? मेटा ने साल 2012 में इंस्टाग्राम को 1 अरब डॉलर में खरीदा था, जबकि वॉट्सऐप को कंपनी ने साल 2014 में 19 अरब डॉलर में खरीदा था. हालांकि, मेटा का कहना है कि उन्हें TikTok, X (पहले ट्विटर), YouTube और Apple iMessage से अभी भी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. इस सुनवाई के दौरान मार्क जकरबर्ग और पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर Sheryl Sandberg को भी बुलाया जा सकता है. कयास है कि इस मामले में सुनवाई कई हफ्तों तक चलेगी. बता दें कि इस मामले की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान हुई थी.

Stock Market: सेंसेक्स की बड़ी छलांग, मार्केट खुलते ही दौड़ा बाजार, सेंसेक्स 1600 और निफ्टी 500 के पार

मुंबई मंगलवार को शेयर मार्केट फिर से झूम उठी। तीन दिन बंद रहने के बाद मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों में तेजी आई। मंगलवार को सेंसेक्स 1600 से ज्यादा अंकों की तेजी के साथ 76,852.06 अंक पर खुला। वहीं निफ्टी ने भी ऊंची छलांग लगाई और यह 500 से ज्यादा अंकों की बढ़त के साथ 23,368.35 अंक पर खुला। इससे पहले शुक्रवार को भी मार्केट बढ़त के साथ बंद हुई थी। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,310 अंक की बढ़त के साथ 75,157 पर और निफ्टी 429 अंक की तेजी के साथ 22,828 पर बंद हुआ था। शेयर बाजार में तेजी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ यानी टैक्स को 90 दिनों के लिए टालने को माना जा रहा है। ट्रंप ने दो अप्रैल को अमेरिका को माल निर्यात करने वाले करीब 60 देशों पर टैरिफ लगाया था। शुक्रवार को बाजार में तेजी का नेतृत्व ऑटो और फार्मा शेयरों ने किया। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2.03 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था। इसके अलावा, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, मेटल, एनर्जी और मीडिया के साथ सभी इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए थे। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के कारण छुट्टी थी। क्यों आई तेजी? शेयर मार्केट में तेजी दुनिया भर के बाजारों में आई तेजी और व्यापार को लेकर तनाव कम होने की उम्मीद के कारण है। अमेरिका की सरकार ने कुछ ऐसे संकेत दिए हैं जिससे लग रहा है कि वे टैरिफ में कुछ राहत दे सकते हैं। खासकर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में। वहीं निवेशकों को लग रहा है कि यह चीन के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की ओर एक कदम हो सकता है। दुनिया के मार्केट में दिखा असर ट्रंप के इन फैसलों का असर दुनियाभर के शेयर बाजार में देखने को मिला। सोमवार को एशिया, यूरोप और अमेरिका के बाजार तेजी के साथ बंद हुए थे। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में प्री-मार्केट ट्रेडिंग में 6 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त देखी गई। एशियाई बाजारों की बात करें तो ज्यादातर में तेजी रही। ताइवान का वेटेड इंडेक्स 1.6 फीसदी से ज्यादा बढ़ा। दक्षिण कोरिया का KOSPI 0.79 फीसदी ऊपर गया, जापान का निक्केई 225 0.88 फीसदी ऊपर गया और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 0.07 फीसदी ऊपर गया। एसआईपी से भी मिला सहारा भारतीय निवेशकों का बाजार पर भरोसा बना हुआ है। मार्च में नकदी की कमी के बावजूद, भारतीय SIP निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। इससे बाजार को काफी सहारा मिला है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 11 अप्रैल को पिछले सत्र में 2,519 करोड़ रुपये निकाले। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) 3,759 करोड़ रुपये का निवेश करके नेट खरीदार बने रहे।

नए युग की तकनीक पर ₹10000 करोड़ का स्टार्टअप फंड होगा खर्च

 नई दिल्ली वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये की दूसरी फंड ऑफ फंड्स योजना (एफएफएस) से जुड़ा बड़ा एलान किया है। सरकार के अनुसार, इसका एक बड़ा हिस्सा नये युग की प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन निर्माण जैसे क्षेत्रों के उभरते उद्यमियों को आवंटित किया जा जाएगा। स्टार्टअप्स की मदद के लिए 2016 की तर्ज पर नई योजना बजट में सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ एक नई एफएफएस की घोषणा की है। 2016 में भी सरकार ने इसी तरह की योजना शुरू की थी। एक अधिकारी ने कहा, “हम 10,000 करोड़ रुपये के इस फंड का बड़ा हिस्सा नए युग की तकनीक, एआई और मशीन निर्माण के लिए समर्पित करने जा रहे हैं।” वर्ष 2016 की यह योजना घरेलू उद्यमों में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी। इसका संचालन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की ओर से किया जाता है। इसके तहत भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत एआईएफ (वैकल्पिक निवेश कोष) को पूंजी प्रदान की जाती है, जो बदले में स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं। 16 जनवरी 2016 को शुरू की गई थी स्टार्टअप इंडिया पहल अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि कि सिडबी ही दूसरी योजना का भी प्रबंधन करेगा। नवाचार को बढ़ावा देने और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए देश में एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के इरादे से सरकार ने 16 जनवरी, 2016 को स्टार्टअप इंडिया पहल शुरू की थी। सरकार की पात्रता शर्तों के अनुसार, स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत संस्थाओं को विभाग की ओर से ‘स्टार्टअप’ के रूप में मान्यता दी जाती है। अब तक 55 से अधिक उद्योगों में 1,50,000 से अधिक संस्थाओं को स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी गई है। ये इकाइयां स्टार्टअप इंडिया कार्य योजना के अंतर्गत कर और गैर-कर प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं।

निफ्टी के लॉन्‍ग टर्म EPS अनुमान 1,460 रुपये रखा, 27590 तक जाएगा Nifty… एक्‍सपर्ट ने कहा, ये शेयर कराएंगे दमदार कमाई!

मुंबई शेयर बाजार में शुक्रवार को शानदार तेजी आई है. जबकि मंडे को स्‍टॉक में हॉलिडे है. इस बीच, ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लिलाधर (PL Capital) ने अनुमान लगाया है कि निफ्टी में शानदार तेजी आ सकती है और यह 27590 तक जा सकता है. ब्रोकरेज फर्म ने लॉन्‍ग टर्म में भारतीय मार्केट को लेकर सकारात्‍मक रुख दिखाया है. निफ्टी के लॉन्‍ग टर्म EPS अनुमान 1,460 रुपये रखा है. पीएल कैपिटल ने इससे पहले निफ्टी को लेकर 27,041 का टारेगेट रखा था, जिसे अब बढ़ा दिया है. यह तेजी घरेलू स्‍तर पर बिजनेस बेहतर होने, सेक्‍टर्स में अच्‍छी ग्रोथ और पॉलिसी को लेकर लगातार सपोर्ट के कारण आ सकती है. पीएल कैपिटल ने अगले 12 महीने का टारगेट 25,521 कर दिया है, जो पहले 25,689 था. ब्रोकरेज ने कहा, ‘टारगेट में कटौती, ग्‍लोबल और घरेलू मैक्रोइकोनॉमिक चैलेंज के कारण है. इसके अलावा, US-China टैरिफ वॉर का भी इम्‍पैक्‍ट पड़ा है. डॉउनसाइड की ओर कहां जा सकता है निफ्टी? ब्रोकरेज ने कहा कि ज‍ियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर ग्‍लोबल इकोनॉमी के लिए टेंशन हैं. ऐसे में मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर संघर्ष कर सकते हैं. गिरावट के नजरिए को देखें तो लॉन्‍ग टर्म में डाउनसाइड की ओर निफ्टी 24,831 स्‍तर पर रह सकता है. ब्रोकरेज ने कहा कि भारतीय बाजारों में YTD में 3.8% की गिरावट देखी गई है, क्योंकि व्यापक आर्थिक अनिश्चितता भावना पर भारी पड़ रही है. FII की बिकवाली, उम्मीद से कम घरेलू मांग और आय में गिरावट के साथ मिलकर निराशा को और बढ़ा दिया है. पीएल कैपिटल ने बताया कि अक्टूबर 2024 से FY26 और FY27 के लिए निफ्टी ईपीएस अनुमानों में क्रमशः 6.2% और 5.6% की कटौती की गई है. जबकि महंगाई में गिरावट आई है. वहीं आरबीआई ने रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कमी की गई है. जीडीपी ग्रोथ में आएगी कमी इन कमजोर संकेतकों के जवाब में, RBI ने FY26 के GDP विकास अनुमान को 20 आधार अंकों से कम कर दिया है, जिससे आने वाले वर्ष के लिए सतर्क नजरिए को मजबूती मिली है. पीएल कैपिटल के विश्लेषकों का अनुमान है कि सभी सेक्‍टर्स को मिलाकर कुल बिक्री में 5% की ग्रोथ होगी, लेकिन EBITDA में मामूली 0.5% की गिरावट और टैक्‍स से पहले लाभ (PBT) में 2.2% की गिरावट मार्जिन दबाव और कमजोर मुनाफे को दर्शाती है. इन सेक्‍टर्स पर रखें फोकस दूरसंचार, AMC, ट्रैवेल, EMS, मेटल, हॉस्पिटल, फार्मा और टिकाऊ वस्तुओं के लाभ में ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि बैंक, निर्माण सामग्री, रसद और तेल और गैस में PBT में गिरावट की संभावना है. इस बीच, IT, कज्‍यूमर, सीमेंट और कैपिटल गूड्स सेक्‍टर्स में केवल मामूली बढ़ोतरी की उम्‍मीद है. इन शेयरों में होगी कमाई? लार्जकैप स्टॉक: ABB India, भारती एयरटेल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, Cipla, ICICI बैंक, इंटरग्लोब एविएशन, ITC, कोटक महिंद्रा बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, टाइटन कंपनी में तेजी आ सकती है. स्मॉल और मिडकैप स्टॉक: Aster DM healthcare, एस्ट्रल लिमिटेड, शैलेट होटल्स, क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स, एरिस लाइफसाइंसेज, इंगरसोल-रैंड (इंडिया), IRCTC, केनेस टेक्नोलॉजी इंडिया, KEI Industries, मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट, त्रिवेणी टर्बाइन जैसे शेयर भी अच्‍छे रिटर्न दे सकते हैं.

Repo Rate Cut: क्या आपको मिल रहा है इसका फायदा? – CA Aayush Garg की सलाह आपके लिए ज़रूरी है

नई दिल्ली CA Aayush Garg, एक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट, क्वालिफाइड CS और CMA हैं, और साथ ही एक Gold Medalist भी हैं। फाइनेंस और टैक्सेशन के क्षेत्र में उनका अनुभव और समझ, आम लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है—खासतौर पर ऐसे समय में जब RBI ने हाल ही में रेपो रेट में कटौती की है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 9 अप्रैल 2025 को 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है, जिससे रेपो रेट 6.25% से घटकर 6.00% हो गया है। यह लगातार दूसरी कटौती है, इससे पहले 7 फरवरी 2025 को भी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी की गई थी। यह कदम अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए उठाया गया है, लेकिन CA Ayush Garg कहते हैं कि “सवाल यह है कि क्या इस रेट कट का फायदा मौजूदा लोन लेने वालों को भी मिल रहा है?” मौजूदा लोन लेने वालों के लिए जरूरी जानकारी: अक्सर देखा गया है कि बैंक, खासकर प्राइवेट बैंक, नए ग्राहकों को तो कम ब्याज दर पर लोन दे देते हैं, लेकिन पुराने ग्राहकों को पुराने, ज्यादा रेट पर ही EMI भरनी पड़ती है। अगर आपका लोन repo rate linked नहीं है, तो हो सकता है कि आपको इसका फायदा ना मिल रहा हो। क्या करें मौजूदा लोन धारक? अपना लोन एग्रीमेंट चेक करें – देखें कि आपका लोन फिक्स्ड है, MCLR आधारित है या रेपो रेट से लिंक्ड है। अपने बैंक से संपर्क करें – पूछें कि क्या रेपो रेट कट का लाभ आपको मिला है या नहीं। ब्याज दर में संशोधन की मांग करें – अगर नहीं मिला, तो बैंक से दर कम करने की रिक्वेस्ट करें। रीफाइनेंस पर विचार करें – अगर आपका बैंक बदलाव नहीं कर रहा, तो किसी दूसरे बैंक से सस्ता लोन ट्रांसफर कर सकते हैं। बैंक ऐसा क्यों करते हैं? अक्सर बैंक नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए तुरंत नई दरें लागू करते हैं, लेकिन मौजूदा ग्राहकों को पुरानी दरों पर ही लोन चुकाने देते हैं—जब तक कि ग्राहक खुद पहल न करें। अंत में: CA Aaayush Garg का सुझाव है—”अगर आप लोन चुका रहे हैं, तो यह मानकर मत चलिए कि आपकी EMI अपने आप कम हो गई होगी। बैंक से बात करें, दरों की तुलना करें और पक्का करें कि आप ज़रूरत से ज़्यादा भुगतान नहीं कर रहे हैं।” ये मत मानिए कि आपको इसका फायदा मिल ही रहा है — पूछिए, पुष्टि कीजिए और ज़रूरी कदम उठाइए।”

US – चीन के ट्रेड वार और मंदी के डर से सोने का भाव 2025 के अंत में 1,36,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकता

मुंबई  बीते दिनों सोशल मीडिया पर इस बात की खूब चर्चा हो रही थी कि सोने का रेट 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। लेकिन इसके उलट पिछले हफ्ते गोल्ड की कीमतों में तूफानी तेजी देखने को मिली। अब इंवेस्टमेंट बैंकर Goldman Sachs की एक रिपोर्ट आई है। जिसमें कहा गया है कि सोने का भाव 4500 डॉलर प्रति आउंस (1,36,000 प्रतिशत 10 ग्राम) तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और चीन में चल रहे ट्रेड वार और मंदी के डर की वजह से सोने का भाव 2025 के अंत में 4500 डॉलर प्रति आउंस तक जा सकता है। तीसरी बार गोल्ड के टारगेट प्राइस में किया इजाफा Goldman Sachs ने एक बार फिर से गोल्ड के टारगेट प्राइस में इजाफा किया है। इंवेस्टमेंट बैंकर की रिपोर्ट के अनुसार गोल्ड का टारगेट प्राइस इस साल का 3700 डॉलर प्रति आउंस है। यह तीसरी बार है जब Goldman Sachs ने गोल्ड के टारगेट प्राइस में बढ़ोतरी की है। इससे मार्च की शुरुआत में गोल्ड के टारगेट प्राइस 3300 डॉलर प्रति आउंस सेट किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति चीन को लेकर काफी आक्रमक नजर आ रहे हैं। जिसकी वजह से दोनों देशों में ट्रेड वार शुरू हो गया है। यही कारण है कि निवेशकों को गोल्ड अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। Gold ETF का क्या है रेट? बीते सप्ताह गोल्ड ईटीएफ पहली बार 3200 डॉलर प्रति आउंस के स्तर को क्रॉस किया था। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव की वजह से गोल्ड ईटीएफ का रेट 3245.69 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गया था। सोने की मांग फिजिकल और एक्सचेंज ट्रेड पर काफी बढ़ी है। आज किस रेट पर बिक रहा है सोना? आज स्पॉट गोल्ड 0.4 प्रतिशत की गिरावट के बाद 3223.67 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रहा था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूएस गोल्ड फ्यूचर 0.1 प्रतिशत की गिरावट के बाद 3240.90 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रहा था। (यह निवेश की सलाह नहीं है। गोल्ड की कीमतों में उतार और चढ़ाव देखने को मिलता-रहता है। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी है।  हम इस आधार पर सोना खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।

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