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मुरैना के डायल 112 हीरोज: संवेदनशीलता का उदाहरण, घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर मिला उपचार

भोपाल डायल-112 सेवा केवल आपराधिक या आपात पुलिस सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आमजन के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुरैना जिले में डायल-112 जवानों की संवेदनशील कार्यवाही से घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर उपचार मिल सका। 13 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल में सूचना प्राप्त हुई कि मुरैना जिले के थाना नूराबाद क्षेत्र के सीहोरा गाँव में एक मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया है। सूचना मिलते ही नूराबाद थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  रवि कुमार एवं पायलट  अंशुल शर्मा ने देखा कि वन क्षेत्र से भटककर आया एक मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया था। स्थिति को देखते हुए डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घायल मोर को सावधानीपूर्वक सुरक्षित किया और एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं संरक्षण के लिए वन केंद्र मुरैना पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया। वन विभाग द्वारा घायल मोर का उपचार किया जा रहा है। डायल-112 टीम की संवेदनशील और जिम्मेदार कार्रवाई से राष्ट्रीय पक्षी को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल 112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात स्थितियों में केवल नागरिकों ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति भी समान रूप से सजग और प्रतिबद्ध है।  

राजगढ़ में गैस एजेंसियों पर कलेक्टर का नया आदेश, ज्यादा पैसे लेने पर होगी सख्त कार्रवाई

 राजगढ़  कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा जिले में आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं, विशेष रूप से एलपीजी गैस की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोकने तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। गैस वितरकों के लिए स्टॉक और दरों का प्रदर्शन अनिवार्य जारी आदेश के अनुसार राजगढ़ जिले में संचालित सभी एलपीजी गैस वितरकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने गैस गोदाम/एजेंसी परिसर के बाहर प्रतिदिन उपलब्ध स्टॉक एवं दरों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करेंगे। इसके साथ ही गैस वितरण से संबंधित वाहनों पर भी स्टिकर एवं बैनर लगाकर सही जानकारी का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेंगे। शिकायत निवारण और मूल्य नियंत्रण के निर्देश आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक गैस वितरक अपने उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण हेतु टोल-फ्री नंबर जारी कर उसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करेंगे तथा प्राप्त शिकायतों की विधिवत पंजी संधारित करेंगे। साथ ही निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर गैस रिफिलिंग नहीं की जाएगी। साप्ताहिक रिपोर्ट और वैधानिक कार्रवाई कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि सभी गैस एजेंसियां प्रत्येक सप्ताह वितरण से संबंधित जानकारी संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उपलब्ध कराएंगी। नियमों का पालन नहीं करने पर “द्रवित पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश 2000” के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी पर रोक इसके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति, संस्था अथवा समूह द्वारा सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक अथवा गलत जानकारी पोस्ट अथवा शेयर नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 सहित अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

यात्रियों को मिलेगी राहत: भोपाल रेल रूट की सुरक्षा बढ़ाने और देरी रोकने के लिए करोड़ों का टेंडर

भोपाल नई रेलवे लाइन परियोजना के तहत पश्चिम मध्य रेलवे ने एक अहम कदम उठाते हुए करीब 4 करोड़ 24 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों का संचालन और अधिक सुरक्षित, तेज और सुचारु हो सकेगा। आधुनिक तकनीक वाले उपकरण लगने से बिजली आपूर्ति से जुड़ी खराबियों का तुरंत पता लगाया जा सकेगा, जिससे ट्रेनों की देरी कम होगी और यात्रियों को अधिक भरोसेमंद रेल सेवा मिल सकेगी। हाई-टेक निगरानी और आटोमेटिक फाल्ट लोकेटर सिस्टम पश्चिम मध्य रेलवे के निर्माण विभाग के अनुसार यह निविदा आरआरएम-बीपीएल नई ब्रॉडगेज लाइन परियोजना के तहत जारी की गई है। इसके अंतर्गत भोपाल और कोटा मंडल के आरआरएम-बीपीएल सेक्शन में रेलवे के 2×25 केवी एसी ट्रैक्शन सिस्टम से जुड़े उपकरण लगाए जाएंगे। परियोजना के तहत एसपी, एसएसपी और टीएसएस स्टेशनों पर आटोमेटिक फाल्ट लोकेटर की आपूर्ति, इंस्टालेशन, टेस्टिंग और उसे चालू करने का कार्य किया जाएगा। यह सिस्टम विद्युत आपूर्ति में आने वाली खराबी का तुरंत पता लगाने में मदद करेगा। 12 महीने में पूरा होगा काम, यात्रियों को मिलेगा लाभ इस काम की अनुमानित लागत करीब 4.24 करोड़ रुपये रखी गई है और इसे 12 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद रेलवे की विद्युत व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और ट्रेनों के संचालन में तकनीकी बाधाएं कम होंगी। इससे भोपाल सहित इस रूट से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को सुरक्षित, समयबद्ध और बेहतर रेल सेवा का लाभ मिलेगा। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल  

कटनी में गरजे सीएम मोहन यादव: बोले- देश संकट में था तो तिरंगा आगे था, कांग्रेस झूठ बोलती रही

कटनी  बरही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने करीब एक हजार करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए किसानों के लिए कृषि महोत्सव आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व की सरकारों ने प्रदेश के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। साथ ही उन्होंने बताया कि आवास योजनाओं के लिए फिर से सर्वे कराया जा रहा है और जल्द ही जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना भी की जाएगी। भव्य आभार रैली मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शनिवार को कटनी जिले के बरही में भव्य आभार रैली के माध्यम से स्वागत किया गया। बड़ा तालाब से विजयनाथ धाम मंदिर के मेला प्रांगण तक करीब एक किलोमीटर लंबी रैली निकाली गई। बरही के मुख्य बाजार मार्ग से रथ में निकली इस रैली के दौरान लोगों ने पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। रैली के दौरान मुख्यमंत्री के साथ रथ में खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा, विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक और जिला भाजपा अध्यक्ष दीपक टंडन सोनी भी मौजूद रहे। किसानों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्धजनों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।  

सामूहिक विवाह से सामाजिक सद्भाव बढ़ाने की ओर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आह्वान

सामाजिक सद्भाव बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं सामूहिक विवाह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले बेटियों के जन्म से ही विवाह की सताती थी चिंता, अब सरकार कर रही बेटियों का कन्यादान मुख्यमंत्री कन्या/विवाह योजना से जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का बस रहा है घर शुजालपुर में हुआ सर्व धर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन सम्मेलन में हुआ 162 बेटियों का विवाह और 38 बेटियों का निकाह भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति के मूल में सामाजिकता है, सद्भाव है और इस सद्भाव को बढ़ाने में सामूहिक विवाह सम्मेलन एक बड़ा ही मजबूत और कारगर माध्यम है। बेटियों के पाणिग्रहण संस्कार से बड़ा पुण्य का, कोई दूसरा काम हो ही नहीं सकता। पहले बेटी के जन्म होने के साथ ही उसके परिवार को बेटी की शादी की चिंता सताती थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार बेटियों का कन्यादान और विदाई कर रही है। इस योजना से प्रदेश के गरीब-वंचित और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का घर बस रहा है। जन्म से लेकर पढ़ाई, नौकरी, मातृत्व और विवाह तक हमारी सरकार हर कदम पर बहनों-बेटियों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि मितव्ययिता बेहद जरूरी है। इसलिए शादी-ब्याह में होने वाले फिजूलखर्चों से हमेशा बचें। अपने बेटे-बेटियों का विवाह/निकाह सामान्य समारोह या सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही करें। इससे जो धन बचे, वह अपने बच्चों के बेहतर जीवन के लिए बचाकर रखें। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने अपने पुत्र का विवाह भी सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही कराया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से शुजालपुर (जिला शाजापुर) में हुए सर्व धर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के सम्मान, इनके सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए सदैव ही प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवविवाहित जोड़ों को बधाई और सफल वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया। सम्मेलन में 200 बेटियों का सामूहिक विवाह/निकाह सम्पन्न हुआ। इसमें 162 बेटियों का विधि-विधान से विवाह और 38 बेटियों का कबूलियत निकाह कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नवविवाहित जोड़े को मंगलाशीष के तौर पर सरकार की ओर से गृहस्थी के लिए 49-49 हजार रूपए दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक विवाह सम्मेलन वर-वधु को जन्म-जन्मांतर तक साथ देने की अमरता की बेला का उत्सव है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह सामूहिक विवाह सम्मेलन आगे और भी अधिक विशाल बनेगा तथा सभी जरूरतमंद परिवारों के लिए सबसे बड़े मददगार के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने विवाह सम्मेलन में कहा कि हमारी सरकार ने समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं बनाई हैं। सामाजिक सुरक्षा और सद्भाव के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना ने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। आज के दौर में विवाह आयोजनों में फिजूलखर्ची बढ़ रही है। यह समाज के हित में नहीं है। इसलिए सभी को अपने पुत्र-पुत्रियों का विवाह सामूहिक विवाह और ऐसे आयोजनों में ही कराने की ओर बढ़ना होगा।  परमार ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सभी का जीवन प्रेम, विश्वास, सम्मान और संस्कारों से परिपूर्ण रहे। सर्व धर्म सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिंह सिसोदिया, जनपद पंचायत शुजालपुर की अध्यक्षा मती सीताबाई रामचन्दर पाटोदिया, उपाध्यक्ष मती मंजूबाई गोविन्दसिंह मेवाड़ा, नगर पालिकाध्यक्ष शुजालपुर मती बबीता परमार,  विजय सिंह बैस,  कृपाल सिंह मेवाड़ा,  अशोक नायक,  नरेन्द्र सिंह यादव,  देवेन्द्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं वर-वधु के परिजन उपस्थित थे।  

इंदौर में 2606 लोकेशन पर गाइडलाइन दरें बढ़ेंगी, 158 नई कॉलोनियों को भी मिलेगा शामिल

इंदौर  इंदौर जिले में वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन दरों को लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में पंजीयन विभाग ने नए वित्तीय वर्ष के लिए दरों में संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर के जरिए अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक हुई रजिस्ट्रियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि कई क्षेत्रों में जमीन-मकानों के बाजार भाव मौजूदा गाइडलाइन दरों से अधिक हैं, इसलिए दरों में वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिले की वर्तमान 4840 लोकेशनों में से 2606 लोकेशनों पर गाइडलाइन दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। बाकी स्थानों पर फिलहाल दरें यथावत रखने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दरों में वृद्धि होगी। जिले में 10 से 180 प्रतिशत तक दरें बढ़ेगी। लेकिन अधिकांश जगहों पर 21 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। 597 लोकेशन को आसपास की लोकेशन के साथ मर्ज करने का प्रस्ताव जिले की आगामी गाइडलाइन दरें तय करने के लिए शनिवार को कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक कलेक्टर कार्यालय में आयोजित हुई। इसमें 2606 लोकेशन पर बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया। इसके साथ ही नए वित्तीय वर्ष में 158 नई कॉलोनियों को भी गाइडलाइन में शामिल करने की तैयारी है। वहीं 597 लोकेशन को आसपास की लोकेशन के साथ मर्ज करने का प्रस्ताव है। इनमें सबसे अधिक 175 लोकेशन महू क्षेत्र की हैं, जबकि इंदौर-3 में 129 और इंदौर-2 व इंदौर-4 में 105-105 लोकेशन मर्ज की गई। जिला मूल्यांकन समिति में सभी प्रस्तावों पर चर्चा हुई। कलेक्टर शिवम वर्मा ने 230 प्रतिशत से अधिक दरो पर पंजीकृत हुए दस्तावेज वाले क्षेत्रों में दरें 150 से बढ़ाकर 200 प्रतिशत करने के निर्देश दिए। इसके आधार पर बदलाव किया जाएगा। मल्टियाओ में दरें कम करने का सुझाव वही आईडीए की तरफ से भी मल्टियाओ में दरें कम करने का सुझाव रखा। एसडीएम धनश्याम धनगर ने भी सड़क के अधिग्रण में आने वाले गांवों में बढ़ौतरी का सुझाव दिया। बैठक में विधायक महेंद्र हार्डिया, नगर निगम आयुक्त शिक्षित सिंघल, आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े, वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजुला पटेल, अमरेश नायडू मौजूद। शहरी क्षेत्र की लोकेशन अधिक प्रस्ताव के अनुसार शहर की 1351 और ग्रामीण क्षेत्र की 1255 लोकेशन पर 10 प्रतिशत से लेकर 185 प्रतिशत दरें बढ़ेगी। 158 नई लोकेशन भी गाइडलाइन में जोड़ी जाएगी। जिले में वर्तमान लोकेशन     कुल लोकेशन – 4840     शहरी लोकेशन – 3038     ग्रामीण लोकेशन – 1802 कितनी जगह बढ़ेगी गाइडलाइन     वृद्धि प्रस्तावित लोकेशन – 2606     जिनमें वृद्धि नहीं – 2774 वृद्धि का प्रतिशत     0–10% : शहरी 27, ग्रामीण 58     11–20% : शहरी 190, ग्रामीण 279     21–50% : शहरी 922, ग्रामीण 671     50–100% : शहरी 180, ग्रामीण 239     100% से अधिक : शहरी 32, ग्रामीण 8 597 लोकेशन होंगी मर्ज     इंदौर-1 : 55     इंदौर-2 : 105     इंदौर-3 : 129     इंदौर-4 : 105     महू : 175     सांवेर : 28     देपालपुर : 0     कुल : 597  

181 और 1098 से बढ़ी सुरक्षा और भरोसा

भोपाल  मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तकनीक आधारित सहायता तंत्र को मजबूत किया गया है। महिलाओं और बेटियों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तब संभव होती है जब महिलाओं और बेटियों को सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलें। राज्य सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, उनकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और तकनीक आधारित सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिससे उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर मिल सकें। महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, जागरूकता कार्यक्रम और त्वरित सहायता तंत्र इसी दिशा में किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयास हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासनिक तंत्र को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और तकनीकी से सशक्त बनाने में कई पहल की गई हैं। भारत सरकार की “वन नेशन, वन हेल्पलाइन” पहल के अनुरूप महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को आपातकालीन सेवा ERSS-112 (Emergency Response Support System) से एकीकृत करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम की स्थापना 31 अगस्त 2023 को की गई। इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से अब प्रदेश की कोई भी महिला, 18 वर्ष से कम आयु का बच्चा या उनकी ओर से कोई भी व्यक्ति सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे (24×7) 181, 1098 या 112 पर टोल-फ्री कॉल कर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकता है। तकनीक आधारित यह व्यवस्था संकट की घड़ी में त्वरित मदद उपलब्ध कराने के साथ महिला और बाल सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। महिला हेल्पलाइन 181: संकट में महिलाओं का भरोसेमंद सहारा हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला हेल्पलाइन 181 का संचालन किया जा रहा है। यह सेवा प्रदेश के सभी वन स्टॉप सेंटर से एकीकृत है, जिससे पीड़ित महिलाओं को एक ही मंच से पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संरक्षण अधिकारी और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है तथा प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। इस सेवा की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक लगभग 1.28 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से सहायता प्रदान की जा चुकी है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: बच्चों के संरक्षण की मजबूत कड़ी बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को भी ERSS-112 से जोड़ा गया है। हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉल्स को कॉल रेस्पॉन्डर द्वारा उनकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। आपातकालीन स्थिति में कॉल्स को तुरंत ERSS-112 तथा संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को भेजा जाता है, जबकि अन्य मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए सीधे जिला बाल संरक्षण इकाई को प्रेषित किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से 26 हजार 974 बच्चों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा चुकी है, जिसमें संकटग्रस्त बच्चों को संरक्षण, परामर्श, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।  

समावेशी न्याय की दिशा में बड़ा कदम: श्रवण बाधित पेशेवरों के लिए मध्यप्रदेश में अनोखा प्रशिक्षण कार्यक्रम

भोपाल  न्याय तक समावेशी पहुँच को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा श्रवण बाधित पेशेवरों तथा सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स के लिए भारत का प्रथम भौतिक 40-घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। पाँच दिवसीय यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदौर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर के सहयोग से तथा उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), नई दिल्ली के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह पहल न्यायमूर्ति  संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दूरदर्शी नेतृत्व में तथा न्यायमूर्ति  विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति  विजय कुमार शुक्ला, न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इंदौर द्वारा किया गया। न्यायमूर्ति  शुक्ला ने कहा कि मध्यस्थता न्याय की सबसे मानवीय और सहभागी विधाओं में से एक है, जहाँ टकराव के स्थान पर संवाद और आपसी समझ के माध्यम से स्थायी समाधान प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय वितरण प्रणाली को निरंतर विकसित होना चाहिए जिससे विवाद निवारण की व्यवस्थाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँच सके। श्रवण बाधित पेशेवरों और सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स को मध्यस्थता का प्रशिक्षण प्रदान करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र अधिक समावेशी और सुलभ बन सके। सु सुमन वास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि मध्यस्थता का मूल आधार समझ, सहानुभूति और संवाद है। उन्होंने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यस्थता में हमेशा शब्दों की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वास्तविक संवाद अक्सर धैर्य, विश्वास और संवेदनशीलता के माध्यम से विकसित होता है। सु वास्तव ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रवण बाधित प्रतिभागियों को विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिये आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), उच्चतम न्यायालय द्वारा नामित अनुभवी प्रशिक्षकों ‘मती अनुजा सक्सेना’ एवं ‘मती रीमा भंडारी’ द्वारा किया जा रहा है। चालीस घंटों के प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मध्यस्थता के दर्शन, संवाद तकनीक, वार्ता कौशल, विवाद विश्लेषण, मध्यस्थ की नैतिकता तथा व्यावहारिक मध्यस्थता अभ्यासों पर संरचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रभावी मध्यस्थता के लिए आवश्यक कौशल जैसे सक्रिय श्रवण, गैर-मौखिक संप्रेषण, संरचित संवाद, कॉकस तकनीक तथा सहमति आधारित समाधान को सुगम बनाने की विधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को भारत में मध्यस्थता के विधिक ढाँचे से भी परिचित कराया जा रहा है, जिसमें सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 के अंतर्गत निहित सिद्धांतों तथा मध्यस्थों से अपेक्षित व्यावसायिक मानकों की जानकारी शामिल है। इस पहल को आनंद सर्विस सोसायटी का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है तथा  ज्ञानेंद्र पुरोहित ने श्रवण बाधित समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करने और प्रतिभागियों की सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में  अनुप कुमार त्रिपाठी, प्रिंसिपल रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर,  शिवराज सिंह गवली, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर,  अनिरुद्ध जैन, उप सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और  दीपक शर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी उपस्थित रहे।  

पंचायत शिक्षकों के लिए वेतनमान में बड़ा बदलाव, अब मिलेगा सरकारी कर्मचारियों जैसा वेतन

इंदौर  इंदौर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। युगलपीठ ने सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों समान वेतनमान देने के फैसले को बरकरार रखा है। सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने पंचायत शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सरकार के 29 दिसंबर 2017 के आदेश को खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को भी छठे वेतन आयोग का लाभ 1 जनवरी 2006 से देने का आदेश दिया था और साथ ही बकाया राशि पर 6 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट की युगलपीठ में सरकार ने अपील दायर करते हुए चुनौती दी थी। तर्क दिया था कि एकलपीठ ने गलत तरीके से 1 जनवरी 2006 से लाभ देने का आदेश दिया। राज्य सरकार का कहना था कि छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से ही मिलना था। इसमें भी सरकार हार गई थी। इसके बाद पुनर्विचार याचिका दायर की थी। भेदभाव नहीं कर सकते हाई कोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने साफ किया कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का मामला पहले भी कई फैसलों में हल हो चुका है। जिनमें स्पष्ट किया है कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतन व सरकारी कर्मचारियों समान सभी लाभ मिलें। जब राज्य सरकार ने पंचायतकर्मियों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन देने का फैसला लिया है, तो उनसे भेदभाव नहीं किया जा सकता। क्या है मामला सरकार ने 7 जुलाई 2017 व 29 दिसंबर 2017 को आदेश जारी किया था कि पंचायत शिक्षकों को छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से दिया जाए, बजाय उनकी नियुक्ति तारीख के। फैसले के खिलाफ पंचायत शिक्षकों ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें छठे वेतन आयोग के लाभउनकी प्रारंभिक नियुक्ति तारीख से दिए जाएं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नेपानगर में जनजातीय सम्मेलन में रविवार को होंगे शामिल 363 करोड़ 82 लाख रूपये के 127 विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमिपूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 मार्च रविवार को बुरहानपुर जिले के नेपानगर में विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 363 करोड़ 82 लाख रूपये के 127 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। नेपानगर में ‘‘जनजातीय सम्मेलन एवं विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमि-पूजन कार्यक्रम’’ में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत कार्यशाला भी आयोजित होगी। जनजातीय बाहुल्य नेपानगर में जनजातीय समुदाय की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव संवाद भी करेंगे। जनजातीय सम्मेलन में कृषि, उद्यानिकी, पशु चिकित्सा, आजीविका मिशन, वन विभाग की ‘‘विकास प्रदर्शनी’’ भी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित करेंगे।  

अडाणी पावर प्लांट बना तनाव का केंद्र: सिंगरौली में आगजनी और भारी तोड़फोड़

सिंगरौली जिले के माढ़ा थाना क्षेत्र के बंधौरा क्षेत्र स्थित अडाणी पावर प्लांट में झारखंड निवासी श्रमिक की मौत के बाद शनिवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। गुस्साए मजदूरों ने सुबह जमकर हंगामा किया और ठेकेदार कंपनी के कार्यालय में आग लगा दी। पावर प्लांट की एक साइट में भी आगजनी की गई। परिसर में खड़ी 12 से अधिक गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की और उन्हें पलटा दिया। थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी के वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में करीब 200 पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। शव छिपाने का आरोप लगाया अडाणी ग्रुप से जुड़े बंधौरा पावर प्लांट में करीब 10 हजार श्रमिक काम करते हैं। ठेका कंपनी पावर मेक के तहत काम करने वाले झारखंड निवासी श्रमिक लल्लन सिंह (38) पुत्र रामदास चंद्रवंशी, निवासी गढ़वा, झारखंड की शुक्रवार रात आवास पर मौत हो गई। इस दौरान अफवाह फैली कि श्रमिक की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हुई है। मजदूरों का आरोप था कि श्रमिक की मौत के बाद कंपनी प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और शव को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। शीशे तोड़े, गाड़ियों में भी आग लगाई आक्रोशित मजदूरों ने ठेका कंपनी के कार्यालय परिसर में खड़े वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और कुछ वाहनों में आग भी लगा दी। आगजनी के कारण परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागते नजर आए। सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ काफी आक्रोशित थी। कंपनी के कर्मचारियों से भी मारपीट की गई, जिससे वे मौके से भाग खड़े हुए। कुछ श्रमिक भी सामान समेटकर चले गए हैं। मौके पर पहुंचे अधिकारी, भारी पुलिस बल तैनात पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया। पुलिस ने किसी तरह मजदूरों को समझाकर माहौल शांत कराया। मजदूरों का कहना था कि मृत श्रमिक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मृतक मजदूर का शव झारखंड रवाना कर दिया गया है। कंपनी का दावा, हृदयाघात से हुई मौत कंपनी प्रबंधन का कहना है कि श्रमिक की मौत उसके आवास पर हुई है। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रबंधन का कहना है कि नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच की बात कह रहा है। कंपनी के सिक्योरिटी इंचार्ज राकेश कुमार का कहना है कि तोड़फोड़ और आगजनी से करोड़ों का नुकसान हुआ है।  

सैटेलाइट, ड्रोन और एआई से हो रहा फसलों का वैज्ञानिक विश्लेषण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार की ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आंकलन को वैज्ञानिक आधार मिला है और किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म और ‘सारा’ एप्लिकेशन से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। डीप लर्निंग तकनीक से ‘सारा’ ऐप द्वारा प्राप्त लाखों तस्वीरों का विश्लेषण कर खेत स्तर पर बोई गई फसलों के प्रकार का सत्यापन किया जाता है, जिससे फसलों की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्मार्ट क्रॉप मैपिंग और पहचान के लिए उपग्रह चित्रों और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल का उपयोग कर भूमि खंड (खसरा) स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए ‘पटवारी हल्का’ स्तर पर उपज का पूर्वानुमान भी लगाया जा रहा है। इससे कृषि योजना निर्माण, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था और फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है। इस तकनीकी पहल से फसल पहचान और आकलन की सटीकता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। वर्ष-2022 में जहाँ सटीकता 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष-2025 तक यह बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत हो गई है। हाल के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली से 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है, जिससे रीयल-टाइम फसल पहचान संभव हुई है। इस प्रणाली से 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों का डिजिटल मैपिंग किया गया है। साथ ही प्रमुख फसलों की पहचान और डिजिटल फसल गिरदावरी का सत्यापन भी किया जा रहा है। वर्ष 2023 से ‘पटवारी हल्का’ स्तर के लगभग 22 हजार क्षेत्रों में फसल उत्पादन का आंकलन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भू-स्थानिक (जियो-स्पेशियल) तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। इससे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर आकलन संभव होगा, जिससे किसानों को मुआवजा सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्व विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से विकसित यह पहल मध्यप्रदेश की कृषि व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को आय सुरक्षा और बेहतर कृषि प्रबंधन का लाभ मिलेगा।  

सिलेंडर बुकिंग में नया नियम, 45 दिनों के भीतर होगा बुकिंग, नई टाइम लिमिट तय

भोपाल  देशभर में बढ़ती रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में नया LPG सिलेंडर 45 दिनों में ही बुक हो सकेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार गैस की जमाखोरी और काला बाजारी रोकने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। केंद्र के इस फैसले का असर मध्य प्रदेश के लाखों ग्रामीण गैस उपभोक्ताओं पर भी नजर आएगा। जहां उज्जवला योजना और सामान्य कनेक्शन मिलाकर बड़ी संख्या में परिवार LPG गैस पर निर्भर हैं। अब ग्रामीण परिवारों को एक सिलेंडर मिलने के बाद अगला सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 45 दिन का इंतजार करना होगा। क्यों लेना पड़ा ये फैसला? हाल के दिनों में LPG सिलेंडरों की अचानक ज्यादा बुकिंग और जमाखोरी देखने को मिली है। एमपी में भी कई गोदामों पर छापामारी की कार्रवाई की गई है। वहीं देशभर के कई राज्यों से जमाखोरी की खबरें आईं। कई जगह लोगों ने जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिए। जिससे वास्तविक जरूरत वाले उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई के कारण गैस की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।  10 दिन में तीसरी बार बदला नियम गैस बुकिंग के नियम कुछ दिनों से लगातार बदल रहे हैं। पहले दो सिलेंजर के बीच तय समय सीमा नहीं थी। 6 मार्च को पहली बार 21 दिन का गैप तय किया गया। इसके बाद इस गैप को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन लॉक-इन समय लागू कर दिया गया है। हालांकि शहरी उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल यह अवधि 25 दिन ही रखी गई है। एमपी में क्या दिखेगा असर? मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना और सामान्य LPG कनेक्शन से खाना बनाते हैं। ऐसे में इन नए नियमों के कारण ग्रामीण परिवारों को गैस का उपयोग अधिक सावधानी से करना होगा, ताकि गैस सिलेंडर ज्यादा समय तक चल सके। संयुक्त परिवारों में गैस की किल्लत देखी जा सकती है। कई उपभोक्ता, दूसरा सिलेंडर रखने की कोशिश कर सकते हैं। क्या कहते हैं जिम्मेदार मामले में जिम्मेदारों का कहना है कि यह कदम सप्लाई को संतुलित करने, उभोक्ताओं तक गैस पहुंचाने के लिए बेहद जरूरी है। सिलेंडर डिलीवरी के समय पर मोबाइल पर OTP आएगा। OTP देने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाएगी। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और गलत डिलीवरी पर रोक लगेगी। सरकार की अपील पैनिक बुकिंग या अनावश्यक सिलेंडर स्टॉक न करें। इससे असली जरूरतमंद परिवारों को मुश्किल हो सकती है। वहीं ऐसा करने से कालाबाजारी भी बढ़ती है।

अनूपपुर जिले के 91675 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि हुई जारी

अनूपपुर  कलेक्ट्रेट स्थित सोन सभागार में पीएम किसान उत्सव दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गुवाहाटी, असम में देश के प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संबोधन को वर्चुअल माध्यम से जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं किसानों द्वारा देखा एवं सुना गया। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा गुवाहाटी, असम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22 वीं किस्त सिंगल क्लिक के माध्यम से देशभर के किसानों के खातों में हस्तांतरित की गई। इसी क्रम में अनूपपुर जिले के 91,675 किसानों के बैंक खातों में भी सम्मान निधि की राशि सीधे अंतरित की गई। जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्‍यक्ष मती प्रीति सिंह, अपर कलेक्‍टर  दिलीप कुमार पाण्‍डेय, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर  कमलेश पुरी, अधीक्षक भू-अभिलेख  प्रदीप कुमार मोगरे सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

युद्ध का असर पन्ना के हीरों पर: कारोबार में भारी गिरावट, 24 मार्च की नीलामी रद्द

पन्ना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही युद्धजनित अस्थिरता का असर अब देश के प्रसिद्ध हीरा क्षेत्र पन्ना के कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वैश्विक बाजार में निवेशकों की अनिश्चितता और आर्थिक जोखिम के कारण हीरे के व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि 24 मार्च को प्रस्तावित पन्ना हीरा कार्यालय की नीलामी को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। हीरा व्यापारियों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में बड़े खरीदार निवेश करने से बच रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय बाजार में हीरे की कीमतें तेजी से गिर गई हैं। कारोबारियों का कहना है कि युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में हीरे की मांग कम हो गई है, जिसका सीधा असर पन्ना के हीरा व्यापार पर पड़ रहा है। कीमतों में भारी गिरावट, 1 कैरेट हीरे का दाम आधा पन्ना के हीरा व्यापारियों के मुताबिक पहले जो 1 कैरेट उज्ज्वल किस्म का तैयार हीरा 2 से 3 लाख रुपये तक बिक जाता था, वही आज केवल 80 हजार से 1 लाख रुपये तक ही खरीदार मिल रहे हैं। इस तरह बाजार में लगभग 60 प्रतिशत तक की मंदी देखी जा रही है। हीरा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान कीमतें लगभग 2005 से 2007 के दौर के बराबर पहुंच गई हैं। ऐसे में घाटे की स्थिति में नीलामी आयोजित करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। हीरा कार्यालय में 2 वर्षों से बिकने का इंतजार कर रहे तुआदरों के जाम किये हुए हीरे पन्ना हीरा कार्यालय में बड़ी संख्या में हीरे नीलामी के इंतजार में पड़े हुए हैं। जिसमे 5 कैरेट ,7 कैरेट एवं 10 कैरेट के बड़े उज्जवल किस्म के हीरे यहां पर जमा है । इनमें कई हीरे ऐसे हैं जिनके तुअदार (पट्टाधारक) कई वर्षों से इनके बिकने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि जब तक बाजार की स्थिति सुधरती नहीं है, तब तक नीलामी से अपेक्षित मूल्य मिलने की संभावना कम है। मझगव परियोजना में भी हजारों कैरेट हीरे अटके युद्ध के कारण बड़े अंतरराष्ट्रीय खरीदार निवेश से बच रहे हैं, जिसका असर सरकारी खनन परियोजनाओं पर भी पड़ा है। मध्यप्रदेश की एकमात्र यांत्रिक हीरा खनन परियोजना मझगव, जिसे एनएमडीसी संचालित करती है, वहां भी करीब 10 हजार कैरेट हीरे बिक्री के इंतजार में पड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक हीरा बाजार में तेजी लौटना मुश्किल है। प्रमुख आंकड़े 1 कैरेट उज्ज्वल हीरे की वर्तमान कीमत: ₹80 हजार – ₹1 लाख पहले की कीमत: ₹2 लाख – ₹3 लाख बाजार में मंदी: लगभग 60% गिरावट पन्ना हीरा कार्यालय में पुराने हीरे: 41 नग वर्ष 2025-26 में प्राप्त हीरे: 105 नग मझगव परियोजना में बिक्री के इंतजार में हीरे: लगभग 10,000 कैरेट प्रस्तावित नीलामी: 24 मार्च (स्थगित) अभी हीरा नीलामी को वर्तमान में स्थगित किया गया है । क्योंकि जो बाजार में हीरे के दामो को लेकर आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है ऐसे में नीलामी में अच्छे दाम मिल पाना सम्भव नही है । रवि पटेल (खनिज अधिकारी पन्ना) इनका कहना- हीरे के व्यापार की वर्तमान स्थिति इस लिए खराब है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो युद्ध के कारण उथलपुथल मची है जिस कारण से कोई भी अभी हीरे में निवेश नही करना चाहता है । जिस कारण से हीरे की कीमतें गिर रही है सतेंद्र जड़िया ( सचिव पन्ना डायमंड एसोसिएशन) इनका कहना- हीरे का व्यापार पहले रूस और यूक्रेन युद्ध की मार तो झेल ही रहा था कि अब यह इजरायल ओर ईरान का युद्ध इस व्यापार के लिए पूरी तरहः मंदी लेकर आया है । दाम कम होने के कारण अब जो लोग हीरे का उत्खनन करते है वह भी प्रभावित होंगे क्योंकि लागत ज्यादा होगी और बाजार में कीमत कम मिलेगी जिस कारण से अब कम संख्या में लोग हीरे की खदाने संचालित करेंगे।  गगन जड़िया ( सदस्य पन्ना डायमंड एसोसिएशन)  

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