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सिलेंडर सप्लाई को लेकर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

भोपाल  युद्ध के बाद खाड़ी देशों में बिगड़े हालातों का असर अब अन्य देशों में भी दिखने को मिल रहा है. इस कारण भारत में भी एलपीजी गैस की सप्लाई बाधित (LPG Supply Shortage) हो रही है. इसको देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने गुरुवार को गैस सिलेंडर आपूर्ति को लेकर कलेक्टरों की महत्वपूर्ण बैठक ली. इसके बाद मुख्य सचिव ने भोपाल कलेक्टर के लिए आदेश जारी किया है. ईंधन के आयात में हुई रुकावट को देखते हुए पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के निर्देश पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों की बैठक ली।  फिलहाल एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही करने का निर्देश दिया है. उपभोक्ताओं के लिए गैस एजेंसियों ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जहां भारत गैस उपभोक्ताओं के लिए हेल्पलाइन नंबर-1800-22-4344, इंडेडेन ऑयल गैस- 1800-2333-555, एचपी गैस- 1800-2333-555 नंबर है. इसके साथ ही मुख्य सचिव ने गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध गैस रिफलिंग की जांच करने का भी आदेश दिया है।  मुख्य सचिव ने गैस सिलेंडर आपूर्ति को लेकर कलेक्टरों की महत्वपूर्ण बैठक ली मुख्य सचिव की बैठक लेने के बाद भोपाल कलेक्टर ने आदेश जारी किया एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को करने के संबंध में आदेश दिया आयात में हुई रूकावट को देखते हुये पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के निर्देश पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों की बैठक ली   भारत गैस हेल्पलाईन नंबर-1800-22-4344, इण्डेन ऑयल गैस हेल्पलाईन नंबर 1800-2333-555, एचपी गैस हेल्पलाईन नंबर 1800-2333-555 गैस सिलेण्डरों की कालाबाजारी एवं अवैध गैस रिफलिंग की सतत जांच करने मुख्य सचिव ने दिया आदेश होटल-रेस्तरां में नहीं होगी सप्लाई भोपाल कलेक्टर ने भी आदेश जारी करते हुए कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की होटल, रेस्तरां और मॉल में सप्लाई नहीं होगी. इसके अलावा एलपीजी का उपयोग करने वाले औद्योगिक क्षेत्र और फैक्ट्री में भी गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जाएगी. फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है. कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सिर्फ चिकित्सालय और शैक्षणिक संस्थाओं में की जाएगी। इसके साथ ही निर्देश दिए हैं कि सिलेंडर की जमाखोरी करने वालों पर जिला प्रशासन निगरानी रखेगा. अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. SDM, ACP और आपूर्ति अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है। 

मध्य प्रदेश में दूध उत्पादकों को लाइसेंस की अनिवार्यता, शुद्धता की निगरानी होगी सख्त

भोपाल मध्य प्रदेश में घर-घर दूध बेचने वाले दुग्ध उत्पादकों को अब दूसरे दुकानदारों की तरह लाइसेंस लेना होगा. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए भी लाइसेंस का अनिवार्य कर दिया है. इसके चलते प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों को अब खाद्य विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. प्राधिकरण ने दुग्ध उत्पादकों के पंजीयन और लाइसेंस के संबंध में एडवाइजरी जारी कर दी है. यह निर्णय दूध में की जा रही मिलावट पर लगाम लगाने के लिए लिया गया है। हर माह तैयार होगी रिपोर्ट मध्य प्रदेश देश में तीसरा सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य है. प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 707 ग्राम प्रतिदिन है. प्रदेश में 225.95 लाख टन का दूध उत्पादन हो रहा है. प्रदेश में लोगों तक सहकारी समितियों के माध्यम से तो दूध पहुंच ही रहा है, साथ ही बड़ी मात्रा में दूध की सप्लाई डेयरी संचालकों द्वारा घर-घर की जा रही है. सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध सप्लाई की गुणवत्ता की जांच तो लगातार हो रही है, लेकिन डेयरी संचालकों द्वारा सप्लाई होने वाले दुग्ध और उनके उत्पाद की जांच के लिए ऐसे सभी संचालकों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान हो सकेगी. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध से जुड़ी गतिविधियों की नियमित मासिक रिपोर्ट तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं. यह रिपोर्ट हर माह 31 तारीख तक भेजनी होगी। दुध में मिलावट के लिए बनाई जा रही प्रयोगशाला प्रदेश सरकार द्वारा लोगों को शुद्ध दूध की सप्लाई के लिए राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भी स्थापित की जा रही है. यह प्रयोगशाला भोपाल के मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन में स्थापित की जाएगी. इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता से लेकर प्रदेश भर की संस्थाएं दूध और इससे बनने वाले उत्पादों की जांच करा सकेंगे।  यह प्रदेश की पहली राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला होगी. इसमें 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी. इस प्रयोगशाला को एनएबीएल और एफएसएसएआई की मान्यता प्राप्त होगी. इससे प्रदेश में शुद्ध दूध की सप्लाई सुनिश्चित हो सकेगी।

MP में प्रशासनिक सर्जरी की गूंज, नए चेहरों को दी जाएगी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

भोपाल कुछ समय से मध्य प्रदेश में प्रशासनिक बदलाव की तैयारी की बात हो रही है। अब इसकी तैयारी और तेज हो गई है। होली के बाद रंगपंचमी का त्योहार भी बीत चुका है। मंत्रालय के गलियारों में प्रशासनिक सर्जरी की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। अगले सप्ताह लिस्ट जारी होने की उम्मीद है। इसमें दर्जन भर जिलों के कलेक्टर यहां से  वहां होने की उम्मीद है। भोपाल कलेक्टर से  भोपाल संभाग के आयुक्त पर सबकी नजर है।  निगम-मंडल और प्राधिकरण के एमडी तथा सीईओ के साथ मंत्रालय स्तर पर प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव के प्रभारों में बदलाव होना संभव है। वैसे भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह का प्रमोशन हो चुका है।  लिहाजा उनका बदला जाना तय है। वर्ष 2010 बैच के कलेक्टर सिंह को किसी संभाग का आयुक्त बनाया जा सकता है। नई तबादला सूची जल्द ही जारी होने की संभावना है। इस फेरबदल में कुछ कलेक्टरों को मंत्रालय में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों की कमान सौंपी जा सकती है। धार जिले में बसंत पंचमी के दौरान भोजशाला विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने वाले युवा आईएएस अधिकारी Priyank Mishra का भोपाल कलेक्टर बनने का नाम चर्चा में है। धार के कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को जिले की कमान संभाले तीन साल से ज्यादा समय हो गया है। उनके परफॉर्मेंस को देखते हुए बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं ग्वालियर और जबलपुर जिलों की कमान महिला आईएएस संभाल चुकी हैं। अब इंदौर और भोपाल जिलों को लेकर संभावनाएं बन रही हैं। वहीं  मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी प्रशासनिक बदलाव की संभावना है। अभी CMO में Alok Kumar Singh और Ilaiyaraaja T सचिव के रूप में जिम्मेवारी संभाल रहे हैं।  बताया जा रहा है कि CMO को एक और सचिव मिल सकता है, जबकि कुछ अतिरिक्त सचिवों में भी फेरबदल किया जा सकता है। लिहाजा रंगपंचमी के बीतने के साथ ही प्रशासनिक बदलाव का काउंटडाउन शुरु हो चुका है।

भोपाल में 6 प्राइवेट हॉस्पिटल पर खतरा, 1 अप्रैल से बंद होने का अलर्ट, सीएमएचओ ने नोटिस भेजा

भोपाल   राजधानी में लाइसेंस और पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराने वाले आधा दर्जन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने ऐसे 6 अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 के बाद बिना नवीनीकरण के उनका संचालन नहीं किया जा सकेगा. वहीं तय समय में आवेदन नहीं करने पर अब इन अस्पतालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. अस्पतालों के संचालन के लिए यह नियम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा शहर के 6 निजी अस्पतालों को लाइसेंस नवीनीकरण का आवेदन नहीं करने पर नोटिस जारी किया गया है. इन अस्पतालों ने निर्धारित समय सीमा के अंदर अपने अस्पताल के लाइसेंस और पंजीयन के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. मध्यप्रदेश उपचारगृह व रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (पंजीयन व अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 व नियम 1997 (संशोधित 2021) के तहत निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीयन अनिवार्य है. इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार बिना पंजीयन के किसी भी निजी स्वास्थ्य संस्था का संचालन नहीं किया जा सकता. इन अस्पतालों को जारी किया गया नोटिस सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार लालघाटी चौराहा स्थित जहरा अस्पताल, मोतिया तालाब रोड स्थित सरदार पटेल अस्पताल, कैपिटल पेट्रोल पंप के पास राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बीडीए कॉलोनी गोदरमऊ गांधीनगर स्थित हेल्थ केयर हॉस्पिटल, दानिश कुंज कोलार रोड स्थित भगवती गौतम अस्पताल व सोनागिरी पिपलानी पेट्रोल पंप के पास स्थित सचिन ममता अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है. ढाई महीने का समय देने के बाद भी नहीं कराया रिन्यू सीएमएचओ कार्यालय से अस्पताल संचालन के लिए पंजीयन और लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, जो हर तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है. इस वर्ष निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को एनएचएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने के लिए करीब ढाई महीने का समय दिया गया था, लेकिन इन छह अस्पतालों ने निर्धारित अवधि में नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया. 31 मार्च के बाद होगी कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया, ” नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत रिन्यूअल आवेदन जमा नहीं करने पर इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है. यदि 31 मार्च के बाद भी ये अस्पताल संचालित पाए गए तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.” डॉ. शर्मा ने बताया कि इसके साथ अन्या अस्पतालों का अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है. यदि कोई कमी सामने आती है, तो ऐसे अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

सेक्स रैकेट चलाने वाली दो बहनों का खुलासा, भोपाल सिंडिकेट की सच्चाई सामने आई

 भोपाल भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में सामने आए चर्चित धर्मांतरण और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार सगी बहनें अमरीन और आफरीन इस समय जेल में हैं. इस मामले में जांच के दौरान लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं. पुलिस पूरे प्रकरण की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि दोनों बहनों के परिवार का संबंध भोपाल के ईरानी डेरे से जुड़ा बताया जा रहा है. यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इस दिशा में भी पड़ताल शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार, जब दोनों बहनें अपने परिवार के साथ अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थीं, उसी दौरान उनके परिवार की ईरानी डेरे से नजदीकियां बढ़ी थीं. अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वहां के आपराधिक छवि वाले लोगों से उनका कोई संपर्क था या नहीं। ब्यूटी पार्लर की आड़ में सेक्स रैकेट पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि दोनों बहनों ने ब्यूटी पार्लर की आड़ में अपना नेटवर्क तैयार किया था. अधिकारियों को शक है कि इसी माध्यम से कई युवतियों को जाल में फंसाया गया हो सकता है. इसलिए पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितनी लड़कियां इस पूरे मामले से प्रभावित हुई हैं। एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी के मुताबिक पुलिस इस मामले की हर दिशा से जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरानी डेरे से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है, हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है. पुलिस का कहना है कि जो भी तथ्य और सबूत सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और जांच जारी रहेगी। परिवार में चार बहनें और दो भाई अमरीन और आफरीन के परिवार में कुल चार बहनें और दो भाई हैं. इनमें से दो बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि भाइयों में से एक मानसिक रूप से बीमार बताया जाता है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बिलाल नाम का युवक, जो उनका मौसेरा भाई है, इस पूरे मामले में उनका सहयोगी माना जा रहा है. बिलाल मूल रूप से मुंबई का रहने वाला है, लेकिन वह भोपाल आकर अब्बास नगर स्थित घर में दोनों बहनों के साथ रहने लगा था. फिलहाल पुलिस को जानकारी मिली है कि वह मुंबई में मौजूद है। पीड़िताओं ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि अमरीन और आफरीन का गिरोह एमडी ड्रग्स की तस्करी से भी जुड़ा हुआ है। चंदन यादव अमरीन और आफरीन के साथ रहता था एफआईआर के अनुसार, चंदन यादव नाम का युवक सागर रॉयल विला में अमरीन और आफरीन के साथ रहता था. बताया गया है कि दोनों बहनों के संपर्क में आने के बाद उसने इस्लाम धर्म अपना लिया था. पीड़िताओं का कहना है कि अमरीन और आफरीन उन्हें गुजरात और मुंबई भी लेकर गई थीं, जहां उन्हें अनजान लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया. इतना ही नहीं, दोनों बहनें उन्हें शराब पीने और एमडी ड्रग्स लेने के लिए भी दबाव डालती थीं। कई लड़कियों को देह व्यापार में धकेला एफआईआर दर्ज कराने वाली दोनों पीड़िताओं का आरोप है कि आरोपी बहनें अब तक करीब पांच से सात लड़कियों को देह व्यापार में धकेल चुकी हैं. उनका तरीका भी लगभग एक जैसा होता था. सबसे पहले वे लड़कियों को बच्चे की देखभाल के नाम पर अपने घर में नौकरी पर रखती थीं. इसके बाद उन्हें अपने साथ घुमाने-फिराने ले जातीं और महंगी पार्टियों में भी शामिल कराती थीं. मौका मिलने पर चंदन, बिलाल और चानू उर्फ हाशिम रजा उनके साथ दुष्कर्म करते थे। पीड़िताओं का कहना है कि जब लड़कियां विरोध करतीं या शिकायत की बात करतीं तो उन्हें बदनामी का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता था. बाद में काम दिलाने के बहाने उन्हें अहमदाबाद भेज दिया जाता था, जहां यासिर नाम का व्यक्ति उन्हें स्पा सेंटर में नौकरी का झांसा देकर देह व्यापार के लिए मजबूर करता था। आफरीन फोन को लेकर भटका रही मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अमरीन, आफरीन और चंदन यादव उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया है. तीनों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. जांच के दौरान पुलिस ने अमरीन और चंदन के मोबाइल फोन जब्त कर लिए, लेकिन आफरीन का फोन बरामद नहीं हो सका. वह फोन के बारे में पुलिस को लगातार भटकाती रही. आखिरकार रिमांड अवधि खत्म होने के बाद 26 फरवरी को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे भी जेल भेज दिया गया. पुलिस की दो अलग-अलग टीमें फरार आरोपी यासिर, बिलाल और चानू की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।  

सीजन की पहली हीट वेव: MP में रतलाम, नर्मदापुरम और धार में लू, 14-15 मार्च को बारिश का अलर्ट

भोपाल  र्मी के इस सीजन में पहली बार मध्य प्रदेश में  हीट वेव यानी लू का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने रतलाम, धार और नर्मदापुरम में हीट वेव चलने की बात कही है। शुक्रवार को भी इन्हीं जिलों में लू चलेगी। बुधवार को सीजन में पहली बार पारा 40 डिग्री पर पहुंचा। रतलाम सबसे गर्म रहा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्मी ने तेवर दिखाए। तेज गर्मी के बीच 14 और 15 मार्च को प्रदेश में बारिश, बादल और गरज-चमक वाला मौसम भी रह सकता है। मौसम विभाग ने वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से दो दिन तक अलर्ट जारी किया है। इससे पहले बुधवार को पूरे प्रदेश में तेज गर्मी पड़ी। 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं, ग्वालियर-उज्जैन में 37.7 डिग्री, भोपाल में 36.4 डिग्री और जबलपुर में 36.5 डिग्री रहा। वहीं, रतलाम में पारा 40 डिग्री रहा। नर्मदापुरम में 39.9 डिग्री, धार में 39.4 डिग्री, टीकमगढ़ में 38.4 डिग्री, खजुराहो में 38.2 डिग्री, गुना में 38.1 डिग्री दर्ज किया गया। दमोह, मंडला, उमरिया, सागर, खरगोन, खंडवा और श्योपुर में तापमान 37 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। इस मार्च में पहली बार अधिकतम तापमान रहा। दूसरे सप्ताह से गर्मी के तेवर तीखे प्रदेश में मार्च के दूसरे हफ्ते से ही गर्मी के तेवर तीखे हैं। सबसे गर्म ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और इंदौर संभाग के शहर है। आने वाले दिनों में यही पर गर्मी का असर ज्यादा रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में हवा की दिशा उत्तर-पूर्व से अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम है। वहीं, हवा में नमी बहुत कम है। साथ ही रेगिस्तानी इलाकों से मप्र पहुंचती है। यह अपने साथ गर्मी भी लाती है। 2 दिन इन जिलों में बदलेगा मौसम     14 मार्च– ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, मुरैना, श्योपुर और भिंड।     15 मार्च– ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल। मार्च में सर्दी-जुकाम, एलर्जी का खतरा डॉक्टरों‎ की मानें तो मार्च का यही मौसम ‎सबसे ज्यादा बीमारियां फैलाता है। दरअसल, इस महीने दिन में तो गर्मी बढ़ जाती है, लेकिन रात और सुबह हल्की ठंड रहती है। कई बार लोग दिन की गर्मी से बचने के लिए हल्के कपड़े पहन लेते हैं। वहीं, कोल्ड्रिंक्स समेत शीतल पेय पदार्थों का भी सेवन करते हैं। इससे सर्दी-जुकाम एलर्जी‎ और अस्थमा के मरीज बढ़ते हैं। ‎सुबह और देर रात ठंडी हवा से ‎बचना जरूरी है। खासकर बच्चों और ‎बुजुर्गों को।‎ मार्च के दूसरे सप्ताह में पड़ती है गर्मी प्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में तेज गर्मी का ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 मार्च के बाद ही तेज गर्मी पड़ी है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है। दूसरे पखवाड़े की बजाय शुरुआत में ही पारे में उछाल आया है।

सेमीकंडक्टर मिशन को नई दिशा देगी आइसर की स्वदेशी तकनीक, फोटोमास्क और हार्ड मास्क का निर्माण होगा आसान

भोपाल भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) भोपाल के वैज्ञानिकों ने कम लागत और कम कार्बन उत्सर्जन वाली स्वदेशी माइक्रोफैब्रिकेशन तकनीक विकसित की है। यह तकनीक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण की जटिल और महंगी प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नवाचार से भारत में सेमीकंडक्टर अनुसंधान और उत्पादन को नई गति मिल सकती है। साथ ही यह तकनीक बड़े उद्योगों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए भी चिप निर्माण अनुसंधान को सुलभ बनाएगी। आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि     आइसर भोपाल के विद्युत अभियांत्रिकी और कंप्यूटर विज्ञान विभाग के डॉ. शांतनु तालुकदार और उनकी टीम ने कई वर्षों के शोध के बाद यह स्वदेशी तकनीक विकसित की है। उनकी टीम में डॉ. स्वप्नेंदु घोष और देबजीत डे सरकार भी शामिल रहे।     वैज्ञानिकों ने माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले फोटोमास्क और हार्ड मास्क के निर्माण के लिए नई विधि विकसित की है। इस शोध का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय जर्नल “माइक्रो एंड नैनो इंजीनियरिंग” में भी किया गया है, जिससे इसकी वैश्विक स्तर पर भी सराहना हो रही है। माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया होगी आसान     आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में फोटोमास्क और हार्ड मास्क की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनकी सहायता से नैनोमीटर से लेकर माइक्रोन स्तर तक के सूक्ष्म पैटर्न चिप के सब्सट्रेट पर स्थानांतरित किए जाते हैं।     पारंपरिक तकनीक में इन मास्क को तैयार करने के लिए अत्यंत महंगे उपकरण, अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनें, विशेष क्लीनरूम और कई प्रकार के खतरनाक रसायनों की आवश्यकता होती है।     यही कारण है कि भारत के कई शैक्षणिक और शोध संस्थानों के लिए इस क्षेत्र में कार्य करना चुनौतीपूर्ण रहा है। नई स्वदेशी तकनीक इन जटिलताओं को कम करते हुए कम संसाधनों में माइक्रोफैब्रिकेशन को संभव बना सकती है। क्रोमियम परत से बनाए जाते हैं सूक्ष्म पैटर्न     नई तकनीक में नैनोमीटर मोटाई की क्रोमियम धातु की परत का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों ने एक अत्यंत नुकीले धातु प्रोब की सहायता से इलेक्ट्रोकेमिकल ऑक्सीकरण अभिक्रिया को बेहद सीमित क्षेत्र में नियंत्रित करने की विधि विकसित की है। इस प्रक्रिया में क्रोमियम की सतह पर सीधे पैटर्न बनाए जाते हैं।     वैज्ञानिक इसे इस तरह समझाते हैं जैसे कागज पर पेन से लिखकर आकृति बनाई जाती है। इसी सिद्धांत पर अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर चिप के लिए जरूरी डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। इस नवाचार से फोटोमास्क और हार्ड मास्क का निर्माण अपेक्षाकृत सरल और सस्ता हो जाता है। पर्यावरण के लिए भी लाभकारी तकनीक     इस नई विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अतिरिक्त रेजिस्ट परत, महंगे लिथोग्राफी उपकरण या खतरनाक रसायनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय जोखिम भी कम हो जाते हैं।     इसके अलावा यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन की दो प्रमुख प्रक्रियाओं—लिथोग्राफी और एचिंग—का एक साथ समाधान प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मौजूदा सेमीकंडक्टर निर्माण प्रणालियों के साथ भी आसानी से एकीकृत की जा सकती है। स्टार्टअप और संस्थानों के लिए नए अवसर     विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन अनुसंधान को बड़े उद्योगों और सीमित प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स तक पहुंचाने में सहायक होगी। इससे नवाचार की गति तेज होगी और भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत आधार मिलेगा। आइसर भोपाल के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास के अनुसार यह तकनीक उद्योगों के साथ साझा की जाएगी, ताकि बड़े पैमाने पर कम लागत में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। क्या होते हैं फोटोमास्क और हार्ड मास्क     फोटोमास्क एक पारदर्शी प्लेट होती है, जो आमतौर पर कांच या क्वार्ट्ज से बनाई जाती है। इसमें बहुत छोटे-छोटे पैटर्न बनाए जाते हैं, जिनकी मदद से फोटोलिथोग्राफी प्रक्रिया के दौरान चिप पर डिजाइन तैयार किया जाता है।     वहीं हार्ड मास्क एक मजबूत परत होती है, जो सिलिकॉन, ऑक्साइड या नाइट्राइड जैसे पदार्थों से बनाई जाती है। इसका उपयोग माइक्रोफैब्रिकेशन में संरचना को सुरक्षित रखते हुए पैटर्न ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। दोनों तकनीकों का उपयोग सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है। सेमीकंडक्टर का बढ़ता महत्व     सेमीकंडक्टर ऐसी सामग्री होती है जिसकी विद्युत चालकता धातुओं और इंसुलेटर के बीच होती है। यही विशेषता इसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर प्रोसेसर, मेमोरी चिप, ट्रांजिस्टर, डायोड, एलईडी और सोलर सेल जैसे उपकरणों में इसका व्यापक उपयोग होता है।     इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों, सेंसर, एयरबैग सिस्टम, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक में भी सेमीकंडक्टर का महत्वपूर्ण योगदान है। 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे आधुनिक प्रौद्योगिकी प्रकल्प भी इसी पर निर्भर हैं। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम     विशेषज्ञों के अनुसार आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू होता है तो देश में चिप निर्माण की लागत कम हो सकती है और अनुसंधान संस्थानों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। इससे न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज करा सकेगा।  

मध्य प्रदेश में लौह अयस्क का बड़ा भंडार मिला, नीलामी शुरू, सरकार का खजाना होगा भरपूर

जबलपुर   मध्य प्रदेश के करीब 15 जिलों में छोटे-बड़े स्तर पर आरयन ओर (लौह अयस्क) के ब्लॉक के बीच जबलपुर से अच्छी खबर है। यहां तीन तहसील मझौली, सिहोरा और पनागर में चार जगह आयरन ओर का बड़ा ब्लॉक मिला है। इसका रकबा 1081 हेक्टेयर है। सबसे बड़ा 936 हेक्टेयर का ब्लॉक मझौली के दर्शनी में मिला है। यह पहला मौका है, जब इतने बड़े क्षेत्र में लौह अयस्क मिला है। जबलपुर व कटनी की वर्तमान खदानें 20 से 35 हेक्टेयर की हैं। यहां से चीन तक लौह अयस्क भेजा जा चुका है। अब नए ब्लॉक मिलने के बाद प्रदेश का राजकोष और मजबूत होगा। संचालक को भेजी गई रिपोर्ट आयरन ओर व मैग्नीज का रकबा मझौली, सिहोरा, पनागर तहसील के 14 गांवों में है। सिहोरा के झीटी और कोड़ामुकुर में 86 हेक्टेयर का ब्लॉक है। मझौली के खुड़ावल में आयरन ओर, लैटराइट व मैग्नीज का रकबा 11, पनागर के कटैया में दोनों खनिज 49 हेक्टेयर में फैले हैं। तीनों का रकबा 1000 हेक्टेयर है। नीलामी प्रक्रिया प्रशासन ने शुरू की है। फैक्ट फाइल – प्रदेश में जबलपुर आयरन ओर का सबसे बड़ा उत्पादक। – 03 साल पहले भी सिहोरा और पनागर में कुछ ब्लॉक मिले थे।  – इनमें 10 लाख टन से अधिक आयरन ओर होने का अनुमान। – अभी 42 छोटी-बड़ी खदानें, इनमें 35 आयरन ओर की हैं। मुख्यालय भेजी है रिपोर्ट जिले में 4 जगह आयरन ओर, मैग्नीज, लैटराइट का ब्लॉक मिला है। रकबा 1081 हेक्टेयर है। ब्लॉक क्षेत्र की भूमि सीमांकन किया जा रहा है। रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है। -एके राय, खनिज अधिकारी जबलपुर

80 किमी लंबी हाईस्पीड सड़क से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा MP का शहर, योजना को मिली मंजूरी

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन को जल्द ही देश के सबसे बड़े हाईस्पीड रोड नेटवर्क से सीधा कनेक्शन मिलने वाला है। केंद्र सरकार ने उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे जोड़ने के लिए नई सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 80.45 किमी लंबी सड़क बनने से महाकाल की नगरी तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3839 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ मेले से पहले इस कनेक्टिविटी को तैयार कर लिया जाए, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके। 2025 में बना नेशनल हाईवे, अब तेजी से आगे बढ़ेगा काम इस मार्ग को मई 2025 में राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। इसके बाद 6 महीने में ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। अब भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक 17 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। जबकि अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। परियोजना को 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी संकरी सड़क, एक्सप्रेस वे बनने पर होगी तेज रफ्तार फिलहाल जिस मार्ग से यह कनेक्टिविटी बनेगी, वहां कई हिस्सों में मार्ग की चौड़ाई करीब 5.5 मीटर है। यहां वाहन की रफ्तार 20-25 किमी प्रतिघंटा ही है। लेकिन नई सड़क 4 लेन होगी, इसके बनने के बाद वाहनों की रफ्तार 80-100 किमी प्रतिघंटा होगी। गुजरात, महाराष्ट्र से उज्जैन का सफर होगा आसान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से जुड़ने के बाद गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने का रास्ता काफी छोटा हो जाएगा। वर्तमान में यहां के यात्रियों को उज्जैन आने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ता है। नई सड़क बनने के बाद श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा होगा। उद्योगों को भी मिलेगा लाभ इस परियोजना से इंदौर, देवास, उज्जैन के साथ ही पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी फायदा होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से माल परिवहन तेज होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होने की उम्मीद भी नजर आ रही है।

ग्वालियर के शबरी माता मंदिर घाटीगाँव में होगा लाड़ली बहना सम्मेलन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को ग्वालियर जिले के शबरी माता मंदिर घाटीगाँव में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक बहनों के बैंक खातों में 1836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण करेंगे। यह राशि योजना की 34वीं किश्त के रूप में बहनों को प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में योजना के अंतर्गत नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे अब पात्र हितग्राही बहनों को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। प्रदेश में जून 2023 से प्रारंभ हुई यह योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान का नया आधार बनी है। जून 2023 से फरवरी 2026 तक योजना के तहत 33 किश्तों का नियमित अंतरण किया जा चुका है। इस अवधि में 54,140 करोड़ रुपये की राशि बहनों के खातों में सीधे अंतरित की गई है। प्रदेश सरकार अब योजना से जुड़ी महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें कौशल उन्नयन, रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों से भी जोड़ा जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। इन कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन व लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव लाड़ली बहना सम्मेलन में ग्वालियर जिले के अंतर्गत लगभग 122 करोड़ लागत के 54 कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। इनमें लगभग 62 करोड़ के 19 कार्यों का लोकार्पण और लगभग 60 करोड़ रुपये लागत के 35 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा जिन कार्यों का लोकार्पण किया जायेगा उनमें लगभग 40 करोड़ की लागत से सांदिपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुलैथ का भवन और 9.11 करोड़ की लागत से डाडा खिरक तिघरा मार्ग पर सांक नदी पर नव निर्मित उच्च स्तरीय पुल शामिल हैं। इसके अलावा उप स्वास्थ्य केंद्र बन्हेरी तथा ग्वालियर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में नव निर्मित सड़कें शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा जिन कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे उनमें आईएसबीटी के समीप 6.17 करोड़ की लागत से बनने जा रहे 100 सीटर श्रमिक विश्रामगृह एवं 12.16 करोड़ की लागत से अंबेडकर धाम के द्वितीय चरण में बाबा साहब के जीवन पर आधारित संग्रहालय का निर्माण प्रमुख है। इसके अलावा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में विभिन्न सड़कें, आयुर्वेदिक महाविद्यालय में एनाटॉमी विभाग के लिए बनने जा रहे हॉल, छात्रावास व भितरवार में लगभग 4 करोड़ की लागत से बनने जा रहे नवीन शॉपिंग कांप्लेक्स का निर्माण शामिल है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान से की मुलाकात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत् प्रयासों का परिणाम है कि मध्यप्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार से बड़ी राहत और कई महत्वपूर्ण मंजूरियां मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस उच्च स्तरीय चर्चा में ग्रामीण सड़कों सहित अनेक विषयों पर मध्यप्रदेश को बड़ी राहत देने वाले निर्णय लिये गये। सरसों किसानों को मिलेगा भावांतर भुगतान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर सरसों की खरीद से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्यप्रदेश के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इससे राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। तुअर की शत-प्रतिशत खरीद का मार्ग प्रशस्त केंद्रीय मंत्री  चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा। इस निर्णय से मध्यप्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की उपज का पूर्ण सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे उन्हें बाजार में भाव गिरने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आय में स्थिरता आयेगी। दलहन–तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम ऑयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी। फसल बीमा में किसानों के हितों की सुरक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने निर्देश दिए कि सोयाबीन जैसी फसलों के आंकलन में केवल सैटेलाइट डेटा के बजाय क्रॉप कटिंग और रिमोट सेंसिंग तरीकों का उपयोग किया जाए, जिससे किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिल सके। कृषि से जुड़े मुद्दों और योजनाओं की हुई समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश के लिए सरसों और सोयाबीन के भावांतर भुगतान, दलहन मिशन के तहत मूंग-उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम, मनरेगा मजदूरी और सामग्री भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री  चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्यप्रदेश से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए, जिससे राज्य के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को शीघ्र राहत मिल सके। ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश मेरा अपना घर है। किसान कल्याण वर्ष में यह सुनिश्चित किया जायेगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हर संभव सहायता मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बने।  

आधुनिक तकनीक से कृषि में बदलाव, प्रदेश ने दर्ज की महत्वपूर्ण उपलब्धि: मंत्री वर्मा 🌾

भोपाल राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाते हुए किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार और पारदर्शी कृषि प्रबंधन की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को अपनाते हुए डिजिटल फसल सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।डीसीएस के सटीक, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को 130 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। राजस्व मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फसल सर्वेक्षण प्रणाली (गिरदावरी) को आधुनिक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए जियो-फेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई/एमएल) और सैटेलाइट डेटा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।डिजिटल फसल सर्वेक्षण में जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया गया है। इसके तहत सर्वेयर की खेत पर प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य की गई है, जिससे बिना स्थल निरीक्षण के डेटा दर्ज नहीं किया जा सकेगा। राजस्व मंत्री  वर्मा ने कहा कि जमीनी स्तर पर एकत्रित डेटा का मिलान एआई/एमएल तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी से किया जा रहा है। इससे सर्वेक्षण की सटीकता और विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है और मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हुई है।किसानों को सर्वेक्षण और विभिन्न योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के लिए एसएमएस और एआई आधारित वॉइस कॉल की सुविधा शुरू की गई है। इससे किसानों को उनकी अपनी भाषा में सीधे मोबाइल पर आवश्यक सूचनाएं दी जा रही हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रमुख विशेषताएँ डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) में खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी दर्ज की जाती है। सर्वे डेटा का एआई एल्गोरिदम से क्रॉस-वेरिफिकेशन कर डेटा की शुद्धता सुनिश्चित की जा रही है।सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन किया जा रहा है, जिसमें पटवारी स्तर पर जांच और विभिन्न विभागों द्वारा डेटा का उपयोग शामिल है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थान पर पहुंचकर ही प्रारंभ हो।इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी सर्वे के दौरान ली गई तस्वीरों की प्रामाणिकता और सही लोकेशन का सत्यापन प्रणाली द्वारा किया जाता है। साथ ही सर्वे को निर्धारित समयावधि से जोड़ा गया है, जिससे मोबाइल समय में छेड़छाड़ होने पर प्रणाली स्वतः सर्वे को रोक देती है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा आधारित निर्णय लेने में भी यह प्रणाली सहायक सिद्ध हो रही है। डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग से मध्यप्रदेश में कृषि प्रबंधन अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और किसान हितैषी बन रहा है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। 

मजबूत कर-संग्रह और बढ़ते पूंजीगत निवेश से सुदृढ़ हुई राज्य की वित्तीय स्थिति

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक आकलन राज्य की वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई गति मिली है और निवेश का माहौल लगातार बेहतर हुआ है। मध्यप्रदेश की राजकोषीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। नीति आयोग द्वारा जारी दूसरी वार्षिक “Fiscal Health Index 2026” रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रबंधन और राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश ने वर्ष 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, जो मजबूत कर-संग्रह और राज्य के अपने राजस्व स्रोतों में वृद्धि का परिणाम है। दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की राजस्व प्राप्तियाँ सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी हैं। यह वृद्धि मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों की प्रभावी वसूली के कारण संभव हुई है। फिस्कल हेल्थ इंडेक्स राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का व्यापक और तुलनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहित करता है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि राज्य सरकार विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जो एक नया कीर्तिमान होगा। वर्तमान में पूंजीगत व्यय राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4.8 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि राज्य में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं जैसी अधोसंरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय 57,348 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान में 74,662 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह वृद्धि 30 प्रतिशत से अधिक है और दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव तैयार करती है। दूसरी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों में 58.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में राज्य के कर राजस्व में 62.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें स्टेट जीएसटी, व्यापार एवं बिक्री कर तथा राज्य आबकारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही पेंशन और ब्याज देनदारियों में वृद्धि के कारण प्रतिबद्ध व्यय कुल राजस्व व्यय का 43 प्रतिशत से अधिक हो गया है। राज्य सरकार ने पूंजीगत व्यय पर लगातार ध्यान बनाए रखा है, जो पिछले 5 वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे के निर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्राथमिकता दे रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य का ऋण स्तर अभी भी वैधानिक सीमाओं में है, जो वित्तीय अनुशासन और संतुलित राजकोषीय प्रबंधन को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत राजस्व आधार और अधोसंरचना में बढ़ते निवेश से मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि को दीर्घकालिक गति मिल सकती है और राज्य निवेश तथा औद्योगिक विकास के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है। 

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी चलाएं अभियान की गतिविधियां 19 मार्च से प्रारंभ होगा प्रदेश व्यापी अभियान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ के माध्यम से प्रदेश की जल-संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की वह महती आवश्यकता है जिसे हमें भावी पीढ़ियों को उपलब्ध कराने के लिये सहेजकर रखना है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों के साथ नवीन तकनीकी नवाचारों को अपनाया जाए और प्रदेश के प्रत्येक जल स्रोत की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस वर्ष “वर्षा जल की एक-एक बूंद का संचयन और संरक्षण” ही हमारा परम ध्येय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 19 मार्च से पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत होगी। भविष्य की चुनौतियों का समाधान: जल-समृद्ध मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच जल-सुरक्षा ही विकास का मूल मंत्र है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में प्रदेश जल संरचनाओं की नदियों, तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनरुद्धार एक मिशन मोड में किया जायेगा। जन-भागीदारी से बनेगा जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की है कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर एक ‘जन-आंदोलन’ का रूप दिया जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं से इस पुनीत कार्य में आगे बढ़कर श्रमदान करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब समाज का हर व्यक्ति जल संरचनाओं की सुरक्षा का प्रहरी बनेगा, तभी हम “परम वैभवशाली और जल-समृद्ध मध्यप्रदेश” के स्वप्न को साकार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अभियान में प्रत्येक जिले में जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए और जल गुणवत्ता परीक्षण के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अभियान की प्रमुख गतिविधियां              जल संरचनाओं का कायाकल्प।              नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण।              भू-जल स्तर बढ़ाने भवनों पर रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग।              पुराने जल स्त्रोतों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास साफ-सफाई।              सोक पिट का निर्माण।              पेयजल की टेस्टिंग और टंकियों की सफाई।              पुराने तालाबों का गहरीकरण।              स्टॉप डेम का संधारण एवं नवीन निर्माण।              पेयजल पाइप लाइनों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास वृहद पौध-रोपण।              जल संरक्षण के लिए जन-भागीदारी बढ़ाना।  

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं घरेलू एलपीजी सिलेंडर : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी की सुचारू रूप से वितरण हो रहा है। इनकी पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है एवं लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। आयुक्त खाद्य  कर्मवीर शर्मा ने बताया है कि वाणिज्यिक एलपीजी गैस उपयोग के लिए शैक्षणिक संस्थान एवं चिकित्सकीय संस्थान को छूट दी गई है, जो जारी रहेगी, जिससे शैक्षणिक गतिविधि एवं चिकित्सकीय व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रह सके। एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी रोकने के लिए जिलों को निर्देश दिये गये हैं। जिलों द्वारा इस क्षेत्र में लगातार कार्यवाही की जा रही है। एलपीजी के वैकल्पिक साधनों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही ऐसी गतिविधियों, जिनमें एलपीजी का अधिक उपयोग होता है, उन्हें नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है। 

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