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समावेशी न्याय की दिशा में बड़ा कदम: श्रवण बाधित पेशेवरों के लिए मध्यप्रदेश में अनोखा प्रशिक्षण कार्यक्रम

भोपाल  न्याय तक समावेशी पहुँच को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा श्रवण बाधित पेशेवरों तथा सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स के लिए भारत का प्रथम भौतिक 40-घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। पाँच दिवसीय यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदौर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर के सहयोग से तथा उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), नई दिल्ली के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह पहल न्यायमूर्ति  संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दूरदर्शी नेतृत्व में तथा न्यायमूर्ति  विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति  विजय कुमार शुक्ला, न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इंदौर द्वारा किया गया। न्यायमूर्ति  शुक्ला ने कहा कि मध्यस्थता न्याय की सबसे मानवीय और सहभागी विधाओं में से एक है, जहाँ टकराव के स्थान पर संवाद और आपसी समझ के माध्यम से स्थायी समाधान प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय वितरण प्रणाली को निरंतर विकसित होना चाहिए जिससे विवाद निवारण की व्यवस्थाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँच सके। श्रवण बाधित पेशेवरों और सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स को मध्यस्थता का प्रशिक्षण प्रदान करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र अधिक समावेशी और सुलभ बन सके। सु सुमन वास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि मध्यस्थता का मूल आधार समझ, सहानुभूति और संवाद है। उन्होंने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यस्थता में हमेशा शब्दों की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वास्तविक संवाद अक्सर धैर्य, विश्वास और संवेदनशीलता के माध्यम से विकसित होता है। सु वास्तव ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रवण बाधित प्रतिभागियों को विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिये आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), उच्चतम न्यायालय द्वारा नामित अनुभवी प्रशिक्षकों ‘मती अनुजा सक्सेना’ एवं ‘मती रीमा भंडारी’ द्वारा किया जा रहा है। चालीस घंटों के प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मध्यस्थता के दर्शन, संवाद तकनीक, वार्ता कौशल, विवाद विश्लेषण, मध्यस्थ की नैतिकता तथा व्यावहारिक मध्यस्थता अभ्यासों पर संरचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रभावी मध्यस्थता के लिए आवश्यक कौशल जैसे सक्रिय श्रवण, गैर-मौखिक संप्रेषण, संरचित संवाद, कॉकस तकनीक तथा सहमति आधारित समाधान को सुगम बनाने की विधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को भारत में मध्यस्थता के विधिक ढाँचे से भी परिचित कराया जा रहा है, जिसमें सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 के अंतर्गत निहित सिद्धांतों तथा मध्यस्थों से अपेक्षित व्यावसायिक मानकों की जानकारी शामिल है। इस पहल को आनंद सर्विस सोसायटी का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है तथा  ज्ञानेंद्र पुरोहित ने श्रवण बाधित समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करने और प्रतिभागियों की सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में  अनुप कुमार त्रिपाठी, प्रिंसिपल रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर,  शिवराज सिंह गवली, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर,  अनिरुद्ध जैन, उप सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और  दीपक शर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी उपस्थित रहे।  

पंचायत शिक्षकों के लिए वेतनमान में बड़ा बदलाव, अब मिलेगा सरकारी कर्मचारियों जैसा वेतन

इंदौर  इंदौर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। युगलपीठ ने सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों समान वेतनमान देने के फैसले को बरकरार रखा है। सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने पंचायत शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सरकार के 29 दिसंबर 2017 के आदेश को खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को भी छठे वेतन आयोग का लाभ 1 जनवरी 2006 से देने का आदेश दिया था और साथ ही बकाया राशि पर 6 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट की युगलपीठ में सरकार ने अपील दायर करते हुए चुनौती दी थी। तर्क दिया था कि एकलपीठ ने गलत तरीके से 1 जनवरी 2006 से लाभ देने का आदेश दिया। राज्य सरकार का कहना था कि छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से ही मिलना था। इसमें भी सरकार हार गई थी। इसके बाद पुनर्विचार याचिका दायर की थी। भेदभाव नहीं कर सकते हाई कोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने साफ किया कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का मामला पहले भी कई फैसलों में हल हो चुका है। जिनमें स्पष्ट किया है कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतन व सरकारी कर्मचारियों समान सभी लाभ मिलें। जब राज्य सरकार ने पंचायतकर्मियों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन देने का फैसला लिया है, तो उनसे भेदभाव नहीं किया जा सकता। क्या है मामला सरकार ने 7 जुलाई 2017 व 29 दिसंबर 2017 को आदेश जारी किया था कि पंचायत शिक्षकों को छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से दिया जाए, बजाय उनकी नियुक्ति तारीख के। फैसले के खिलाफ पंचायत शिक्षकों ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें छठे वेतन आयोग के लाभउनकी प्रारंभिक नियुक्ति तारीख से दिए जाएं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नेपानगर में जनजातीय सम्मेलन में रविवार को होंगे शामिल 363 करोड़ 82 लाख रूपये के 127 विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमिपूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 मार्च रविवार को बुरहानपुर जिले के नेपानगर में विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 363 करोड़ 82 लाख रूपये के 127 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। नेपानगर में ‘‘जनजातीय सम्मेलन एवं विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमि-पूजन कार्यक्रम’’ में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत कार्यशाला भी आयोजित होगी। जनजातीय बाहुल्य नेपानगर में जनजातीय समुदाय की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव संवाद भी करेंगे। जनजातीय सम्मेलन में कृषि, उद्यानिकी, पशु चिकित्सा, आजीविका मिशन, वन विभाग की ‘‘विकास प्रदर्शनी’’ भी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित करेंगे।  

अडाणी पावर प्लांट बना तनाव का केंद्र: सिंगरौली में आगजनी और भारी तोड़फोड़

सिंगरौली जिले के माढ़ा थाना क्षेत्र के बंधौरा क्षेत्र स्थित अडाणी पावर प्लांट में झारखंड निवासी श्रमिक की मौत के बाद शनिवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। गुस्साए मजदूरों ने सुबह जमकर हंगामा किया और ठेकेदार कंपनी के कार्यालय में आग लगा दी। पावर प्लांट की एक साइट में भी आगजनी की गई। परिसर में खड़ी 12 से अधिक गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की और उन्हें पलटा दिया। थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी के वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में करीब 200 पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। शव छिपाने का आरोप लगाया अडाणी ग्रुप से जुड़े बंधौरा पावर प्लांट में करीब 10 हजार श्रमिक काम करते हैं। ठेका कंपनी पावर मेक के तहत काम करने वाले झारखंड निवासी श्रमिक लल्लन सिंह (38) पुत्र रामदास चंद्रवंशी, निवासी गढ़वा, झारखंड की शुक्रवार रात आवास पर मौत हो गई। इस दौरान अफवाह फैली कि श्रमिक की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हुई है। मजदूरों का आरोप था कि श्रमिक की मौत के बाद कंपनी प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और शव को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। शीशे तोड़े, गाड़ियों में भी आग लगाई आक्रोशित मजदूरों ने ठेका कंपनी के कार्यालय परिसर में खड़े वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और कुछ वाहनों में आग भी लगा दी। आगजनी के कारण परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागते नजर आए। सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ काफी आक्रोशित थी। कंपनी के कर्मचारियों से भी मारपीट की गई, जिससे वे मौके से भाग खड़े हुए। कुछ श्रमिक भी सामान समेटकर चले गए हैं। मौके पर पहुंचे अधिकारी, भारी पुलिस बल तैनात पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया। पुलिस ने किसी तरह मजदूरों को समझाकर माहौल शांत कराया। मजदूरों का कहना था कि मृत श्रमिक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मृतक मजदूर का शव झारखंड रवाना कर दिया गया है। कंपनी का दावा, हृदयाघात से हुई मौत कंपनी प्रबंधन का कहना है कि श्रमिक की मौत उसके आवास पर हुई है। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रबंधन का कहना है कि नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच की बात कह रहा है। कंपनी के सिक्योरिटी इंचार्ज राकेश कुमार का कहना है कि तोड़फोड़ और आगजनी से करोड़ों का नुकसान हुआ है।  

सैटेलाइट, ड्रोन और एआई से हो रहा फसलों का वैज्ञानिक विश्लेषण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार की ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आंकलन को वैज्ञानिक आधार मिला है और किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म और ‘सारा’ एप्लिकेशन से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। डीप लर्निंग तकनीक से ‘सारा’ ऐप द्वारा प्राप्त लाखों तस्वीरों का विश्लेषण कर खेत स्तर पर बोई गई फसलों के प्रकार का सत्यापन किया जाता है, जिससे फसलों की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्मार्ट क्रॉप मैपिंग और पहचान के लिए उपग्रह चित्रों और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल का उपयोग कर भूमि खंड (खसरा) स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए ‘पटवारी हल्का’ स्तर पर उपज का पूर्वानुमान भी लगाया जा रहा है। इससे कृषि योजना निर्माण, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था और फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है। इस तकनीकी पहल से फसल पहचान और आकलन की सटीकता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। वर्ष-2022 में जहाँ सटीकता 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष-2025 तक यह बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत हो गई है। हाल के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली से 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है, जिससे रीयल-टाइम फसल पहचान संभव हुई है। इस प्रणाली से 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों का डिजिटल मैपिंग किया गया है। साथ ही प्रमुख फसलों की पहचान और डिजिटल फसल गिरदावरी का सत्यापन भी किया जा रहा है। वर्ष 2023 से ‘पटवारी हल्का’ स्तर के लगभग 22 हजार क्षेत्रों में फसल उत्पादन का आंकलन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भू-स्थानिक (जियो-स्पेशियल) तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। इससे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर आकलन संभव होगा, जिससे किसानों को मुआवजा सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्व विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से विकसित यह पहल मध्यप्रदेश की कृषि व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को आय सुरक्षा और बेहतर कृषि प्रबंधन का लाभ मिलेगा।  

सिलेंडर बुकिंग में नया नियम, 45 दिनों के भीतर होगा बुकिंग, नई टाइम लिमिट तय

भोपाल  देशभर में बढ़ती रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में नया LPG सिलेंडर 45 दिनों में ही बुक हो सकेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार गैस की जमाखोरी और काला बाजारी रोकने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। केंद्र के इस फैसले का असर मध्य प्रदेश के लाखों ग्रामीण गैस उपभोक्ताओं पर भी नजर आएगा। जहां उज्जवला योजना और सामान्य कनेक्शन मिलाकर बड़ी संख्या में परिवार LPG गैस पर निर्भर हैं। अब ग्रामीण परिवारों को एक सिलेंडर मिलने के बाद अगला सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 45 दिन का इंतजार करना होगा। क्यों लेना पड़ा ये फैसला? हाल के दिनों में LPG सिलेंडरों की अचानक ज्यादा बुकिंग और जमाखोरी देखने को मिली है। एमपी में भी कई गोदामों पर छापामारी की कार्रवाई की गई है। वहीं देशभर के कई राज्यों से जमाखोरी की खबरें आईं। कई जगह लोगों ने जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिए। जिससे वास्तविक जरूरत वाले उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई के कारण गैस की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।  10 दिन में तीसरी बार बदला नियम गैस बुकिंग के नियम कुछ दिनों से लगातार बदल रहे हैं। पहले दो सिलेंजर के बीच तय समय सीमा नहीं थी। 6 मार्च को पहली बार 21 दिन का गैप तय किया गया। इसके बाद इस गैप को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन लॉक-इन समय लागू कर दिया गया है। हालांकि शहरी उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल यह अवधि 25 दिन ही रखी गई है। एमपी में क्या दिखेगा असर? मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना और सामान्य LPG कनेक्शन से खाना बनाते हैं। ऐसे में इन नए नियमों के कारण ग्रामीण परिवारों को गैस का उपयोग अधिक सावधानी से करना होगा, ताकि गैस सिलेंडर ज्यादा समय तक चल सके। संयुक्त परिवारों में गैस की किल्लत देखी जा सकती है। कई उपभोक्ता, दूसरा सिलेंडर रखने की कोशिश कर सकते हैं। क्या कहते हैं जिम्मेदार मामले में जिम्मेदारों का कहना है कि यह कदम सप्लाई को संतुलित करने, उभोक्ताओं तक गैस पहुंचाने के लिए बेहद जरूरी है। सिलेंडर डिलीवरी के समय पर मोबाइल पर OTP आएगा। OTP देने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाएगी। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और गलत डिलीवरी पर रोक लगेगी। सरकार की अपील पैनिक बुकिंग या अनावश्यक सिलेंडर स्टॉक न करें। इससे असली जरूरतमंद परिवारों को मुश्किल हो सकती है। वहीं ऐसा करने से कालाबाजारी भी बढ़ती है।

अनूपपुर जिले के 91675 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि हुई जारी

अनूपपुर  कलेक्ट्रेट स्थित सोन सभागार में पीएम किसान उत्सव दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गुवाहाटी, असम में देश के प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संबोधन को वर्चुअल माध्यम से जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं किसानों द्वारा देखा एवं सुना गया। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा गुवाहाटी, असम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22 वीं किस्त सिंगल क्लिक के माध्यम से देशभर के किसानों के खातों में हस्तांतरित की गई। इसी क्रम में अनूपपुर जिले के 91,675 किसानों के बैंक खातों में भी सम्मान निधि की राशि सीधे अंतरित की गई। जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्‍यक्ष मती प्रीति सिंह, अपर कलेक्‍टर  दिलीप कुमार पाण्‍डेय, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर  कमलेश पुरी, अधीक्षक भू-अभिलेख  प्रदीप कुमार मोगरे सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

युद्ध का असर पन्ना के हीरों पर: कारोबार में भारी गिरावट, 24 मार्च की नीलामी रद्द

पन्ना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही युद्धजनित अस्थिरता का असर अब देश के प्रसिद्ध हीरा क्षेत्र पन्ना के कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वैश्विक बाजार में निवेशकों की अनिश्चितता और आर्थिक जोखिम के कारण हीरे के व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि 24 मार्च को प्रस्तावित पन्ना हीरा कार्यालय की नीलामी को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। हीरा व्यापारियों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में बड़े खरीदार निवेश करने से बच रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय बाजार में हीरे की कीमतें तेजी से गिर गई हैं। कारोबारियों का कहना है कि युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में हीरे की मांग कम हो गई है, जिसका सीधा असर पन्ना के हीरा व्यापार पर पड़ रहा है। कीमतों में भारी गिरावट, 1 कैरेट हीरे का दाम आधा पन्ना के हीरा व्यापारियों के मुताबिक पहले जो 1 कैरेट उज्ज्वल किस्म का तैयार हीरा 2 से 3 लाख रुपये तक बिक जाता था, वही आज केवल 80 हजार से 1 लाख रुपये तक ही खरीदार मिल रहे हैं। इस तरह बाजार में लगभग 60 प्रतिशत तक की मंदी देखी जा रही है। हीरा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान कीमतें लगभग 2005 से 2007 के दौर के बराबर पहुंच गई हैं। ऐसे में घाटे की स्थिति में नीलामी आयोजित करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। हीरा कार्यालय में 2 वर्षों से बिकने का इंतजार कर रहे तुआदरों के जाम किये हुए हीरे पन्ना हीरा कार्यालय में बड़ी संख्या में हीरे नीलामी के इंतजार में पड़े हुए हैं। जिसमे 5 कैरेट ,7 कैरेट एवं 10 कैरेट के बड़े उज्जवल किस्म के हीरे यहां पर जमा है । इनमें कई हीरे ऐसे हैं जिनके तुअदार (पट्टाधारक) कई वर्षों से इनके बिकने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि जब तक बाजार की स्थिति सुधरती नहीं है, तब तक नीलामी से अपेक्षित मूल्य मिलने की संभावना कम है। मझगव परियोजना में भी हजारों कैरेट हीरे अटके युद्ध के कारण बड़े अंतरराष्ट्रीय खरीदार निवेश से बच रहे हैं, जिसका असर सरकारी खनन परियोजनाओं पर भी पड़ा है। मध्यप्रदेश की एकमात्र यांत्रिक हीरा खनन परियोजना मझगव, जिसे एनएमडीसी संचालित करती है, वहां भी करीब 10 हजार कैरेट हीरे बिक्री के इंतजार में पड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक हीरा बाजार में तेजी लौटना मुश्किल है। प्रमुख आंकड़े 1 कैरेट उज्ज्वल हीरे की वर्तमान कीमत: ₹80 हजार – ₹1 लाख पहले की कीमत: ₹2 लाख – ₹3 लाख बाजार में मंदी: लगभग 60% गिरावट पन्ना हीरा कार्यालय में पुराने हीरे: 41 नग वर्ष 2025-26 में प्राप्त हीरे: 105 नग मझगव परियोजना में बिक्री के इंतजार में हीरे: लगभग 10,000 कैरेट प्रस्तावित नीलामी: 24 मार्च (स्थगित) अभी हीरा नीलामी को वर्तमान में स्थगित किया गया है । क्योंकि जो बाजार में हीरे के दामो को लेकर आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है ऐसे में नीलामी में अच्छे दाम मिल पाना सम्भव नही है । रवि पटेल (खनिज अधिकारी पन्ना) इनका कहना- हीरे के व्यापार की वर्तमान स्थिति इस लिए खराब है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो युद्ध के कारण उथलपुथल मची है जिस कारण से कोई भी अभी हीरे में निवेश नही करना चाहता है । जिस कारण से हीरे की कीमतें गिर रही है सतेंद्र जड़िया ( सचिव पन्ना डायमंड एसोसिएशन) इनका कहना- हीरे का व्यापार पहले रूस और यूक्रेन युद्ध की मार तो झेल ही रहा था कि अब यह इजरायल ओर ईरान का युद्ध इस व्यापार के लिए पूरी तरहः मंदी लेकर आया है । दाम कम होने के कारण अब जो लोग हीरे का उत्खनन करते है वह भी प्रभावित होंगे क्योंकि लागत ज्यादा होगी और बाजार में कीमत कम मिलेगी जिस कारण से अब कम संख्या में लोग हीरे की खदाने संचालित करेंगे।  गगन जड़िया ( सदस्य पन्ना डायमंड एसोसिएशन)  

सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा की ओर कदम: अनूपपुर जिले में एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान शुरू

अनूपपुर जिले में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) से बचाव के लिए जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 638 किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। कलेक्टर  हर्षल पंचोली एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी मती अर्चना कुमारी के निर्देशन में यह अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलका तिवारी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलेभर में टीकाकरण किया जा रहा है। अभियान के तहत 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी तथा 15 वर्ष 3 माह तक की बालिकाएं टीकाकरण के लिए पात्र हैं। इसके अलावा अभियान शुरू होने के 90 दिनों के भीतर 15 वर्ष की आयु पूरी करने वाली बालिकाओं को भी पात्र माना गया है। टीका 0.5 मिलीलीटर की एकल खुराक के रूप में इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन के माध्यम से दिया जा रहा है। यह टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक है तथा इसके लिए अभिभावकों की सहमति अनिवार्य है। यह सुविधा जिले के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क उपलब्ध है, जिनमें जिला चिकित्सालय अनूपपुर, सीएचसी कोतमा, जैतहरी, राजेंद्रग्राम, फुनगा, परासी, अमरकंटक तथा पीएचसी बिजुरी और बेनीबारी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक जिला चिकित्सालय अनूपपुर में 185, सीएचसी राजेंद्रग्राम में 106, सीएचसी कोतमा में 101, सीएचसी जैतहरी में 95, सीएचसी फुनगा में 77, पीएचसी बेनीबारी में 29, सीएचसी परासी में 26, पीएचसी बिजुरी में 16 तथा सीएचसी अमरकंटक में 3 किशोरियों का टीकाकरण किया जा चुका है। सीएमएचओ डॉ. अलका तिवारी ने बताया कि टीकाकरण के बाद प्रत्येक बालिका को 30 मिनट तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाता है, ताकि किसी भी संभावित प्रतिक्रिया पर तुरंत ध्यान दिया जा सके। कलेक्टर  हर्षल पंचोली ने कहा कि जिले की प्रत्येक पात्र किशोरी को इस अभियान से जोड़ना आवश्यक है, क्योंकि यह टीका भविष्य में होने वाले सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम करता है। जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए इस निःशुल्क टीकाकरण अभियान का लाभ उठाएं।

हाई कोर्ट में सरकार ने दी जानकारी, यूनियन कार्बाइड परिसर में बनेगा भोपाल गैस मेमोरियल

भोपाल  दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक दुर्घटनाओं में गिनी जाने वाली भोपाल गैस त्रासदी को चार दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इस हादसे से जुड़े कई मुद्दे आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल अब भी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे और प्रदूषण को लेकर है। इसी मामले में अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से फैक्ट्री परिसर की सफाई और पर्यावरण सुधार की पूरी योजना पेश करने को कहा है। अदालत ने पूछा है कि यूनियन कार्बाइड साइट पर मौजूद जहरीले कचरे को हटाने और जमीन-पानी को साफ करने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं। बता दें कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से दो व तीन दिसंबर 1984 की रात में जहरीली गैस का रिसाव होने से बड़ी त्रासदी हुई थी। मिथाइल आइसोसाइनेट नामक जहरीली गैस के रिसाव से बड़ी संख्या में हुई मौतों के कारण हुई इसे दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदा माना गया। इसका असर आज भी कैंसर, सांस और दिव्यांगता जैसी बीमारियों के रूप में जारी है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिया कि निर्धारित प्रक्रिया को जारी रखा जाए और कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए। जानें कब और किसने दायर की थी याचिका गौरतलब है कि वर्ष 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि न्यायालय के आदेश के अनुसार यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निस्तारण पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में सफलतापूर्वक कर दिया गया है। जहरीले कचरे से करीब 900 मीट्रिक टन राख और अवशेष एकत्रित हुए हैं। इस बीच हाईकोर्ट में दायर एक अन्य याचिका में कहा गया था कि जहरीले कचरे से निकली राख और अवशेषों में रेडियोएक्टिव तत्व सक्रिय हो सकते हैं, जो चिंता का विषय है। याचिका में यह भी कहा गया था कि राख में मरकरी मौजूद है, जिसे नष्ट करने की तकनीक फिलहाल केवल जापान और जर्मनी के पास है। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि आबादी वाले क्षेत्र से मात्र 500 मीटर की दूरी पर लैंडफिलिंग की जा रही है। हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में आबादी से मात्र 500 मीटर दूर लैंडफिलिंग के लिए तय स्थान पर रोक लगा दी थी। हालांकि बाद में सरकार के आवेदन पर अदालत ने यह आदेश वापस ले लिया था। पिछली सुनवाई में सरकार ने अदालत को बताया था कि जहरीले कचरे से निकली राख की लैंडफिलिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान भी सरकार की ओर से इसी संबंध में विस्तृत जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।  सरकार ने कोर्ट में पेश की एक्शन टेकन रिपोर्ट इस मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के सामने एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल की है। रिपोर्ट में बताया गया कि, 3 मार्च को अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) के पुराने प्लांट की स्थिति, वहां मौजूद टॉक्सिक वेस्ट और फैक्ट्री परिसर की सफाई को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सरकार ने अदालत को बताया कि, इस बैठक में अधिकारियों और विशेषज्ञों ने समयबद्ध रेमेडिएशन (Remediation) यानी प्रदूषित जमीन और पर्यावरण को साफ करने की योजना पर विचार किया। इसका उद्देश्य फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे को सुरक्षित तरीके से हटाना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है। जहरीले कचरे को हटाने की योजना पर चर्चा सरकारी रिपोर्ट के अनुसार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में कई जगहों पर अभी भी जहरीला औद्योगिक कचरा और प्रदूषित मिट्टी मौजूद है। यह कचरा लंबे समय से पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इसलिए बैठक में यह तय किया गया कि फैक्ट्री परिसर से जहरीले कचरे को हटाने और उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध योजना बनाई जाए। सरकार ने कोर्ट को बताया कि, इस दिशा में संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और जल्द ही पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। हाईकोर्ट ने मांगी स्पष्ट समयसीमा हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार से यह भी पूछा है कि, सफाई और पर्यावरण सुधार का काम कब तक पूरा किया जाएगा। अदालत का मानना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी अगर फैक्ट्री परिसर में जहरीला कचरा मौजूद है तो यह बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस काम को जल्द से जल्द पूरा करना जरूरी है, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को किसी तरह का स्वास्थ्य खतरा न रहे। 40 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ त्रासदी का असर दरअसल 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) नाम की जहरीली गैस का रिसाव हो गया था। इस गैस के फैलने से हजारों लोगों की तत्काल मौत हो गई थी और लाखों लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। यह हादसा दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक माना जाता है। गैस के प्रभाव से प्रभावित लोगों में कई को आज भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा फैक्ट्री परिसर में मौजूद रासायनिक कचरे को लेकर भी लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। पर्यावरण और भूजल प्रदूषण का खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में लंबे समय तक पड़े जहरीले रसायनों के कारण मिट्टी और भूजल प्रदूषण का खतरा बना रहता है। कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अगर इस कचरे का समय पर निपटान नहीं किया गया तो इसका असर आसपास … Read more

सदगुरु और बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री की मुलाकात, 40 देशों के सदस्य भी बागेश्वर धाम पहुंचे

छतरपुर देश व दुनिया के दो प्रख्यात संतों का मिलन हुआ. दक्षिण भारत के प्रसिद्ध धर्मगुरु सदगुरु वासुदेव जग्गी का छतरपुर आगमन हुआ. वे यहां बागेश्वर धाम पहुंचे जहां उन्होंने प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री से भेंट की इस दौरान सदगुरु के साथ 40 देशों के सदस्य भी आए, जिन्होंने बागेश्वर धाम में आशीर्वाद लिया और धाम की महिमा जानी. सदगुरु ने इस दौरान बाबा बागेश्वर सरकार में हनुमान जी के दर्शन किए तो वहीं पंडित धीरेंद्र शास्त्री की माता जी ने भी सद्गुरु जग्गी वासुदेव का स्वागत किया।  धर्म, आस्था, योग, ध्यान और जीवन दर्शन पर चर्चा दुनिया भर में सनातन और आध्यात्मिक एकता का केंद्र बने बागेश्वर धाम में उस समय लोगों का आनंद दोगुना हो गया जब उन्होंने बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ दक्षिण भारत के प्रख्यात आध्यात्मिक संत पद्म विभूषण सद्गुरु के दर्शन किए. इस दौरान धाम के पीठाधीश्वर ने उनका आत्मीय अभिनंदन किया. बागेश्वर महाराज की माता जी ने भी सद्गुरु का आत्मीय स्वागत किया. दोनों आध्यात्मिक गुरुओं के बीच धर्म, आस्था, योग, ध्यान और जीवन दर्शन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।  सदगुरु ने बागेश्वर बाबा को भेंट किए आदि योगी, बाबा ने भेंट किया राम दरबार बागेश्वर महाराज ने आध्यात्मिक गुरु वासुदेव जी को बालाजी के दर्शन कराए वहीं बागेश्वर महादेव भगवान और सन्यासी बाबा के भी दर्शन कराते हुए उनकी महिम और 300 साल पहले किए गए तप के बारे में बताया. इस दौरान सदगुरु के साथ 40 देशों के सदस्य भी मौजूद थे. सभी ने बाबा बागेश्वर से भेंट कर मंदिर के दर्शन किए. बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के सदस्य ऋषि शुक्ला ने बताया, ” ईशा फाउंडेशन कोयंबटूर के संस्थापक सद्गुरु ने बागेश्वर महाराज को आदि योगी की प्रतिमा भेंट की. तो वहीं बागेश्वर महाराज ने अपनी माता जी की उपस्थिति में श्री राम दरबार की प्रतिमा सदगुरु को भेंट की।  सदगुरु ने बताया इसे अद्भुत अनुभव बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के सदस्य ऋषि शुक्ला ने बताया, ” इस मुलाकात को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सद्गुरु और बागेश्वर महाराज ने इस अवसर पर लोगों को आध्यात्मिकता, आत्म-चिंतन और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया. सद्गुरु के साथ उनके साधक परिवारों के प्रतिनिधि भी पहुंचे, जिनमें लगभग 40 देशों से जुड़े अनुयायी शामिल थे।  इन साधकों ने भी बागेश्वर धाम में पहुंचकर श्रद्धा के साथ अर्जी लगाई और पूजा-अर्चना की. साधकों को एक थाली भेंट की गई, जिसमें हनुमान चालीसा, श्रीमद् भागवत गीता, लॉकेट सहित रुद्राक्ष माला, बालाजी का विग्रह और अंग्रेजी में लिखी ‘साधु जी सीताराम’ पुस्तक के साथ ही महा प्रसाद रखा गया. इस दौरान सदगुरु धाम की महिमा जानकर बेहद प्रसन्न नजर आए और उन्होंने इसे अद्भुत अनुभव बताया। ‘

CM यादव ने शुजालपुर में सामूहिक विवाह सम्मेलन में नव-दम्पत्तियों को VC से संबोधित कर दी बधाई और आशीर्वाद

शुजालपुर शुजालपुर में मुख्यमंत्री कन्यादान, निकाह सामूहिक सर्वधर्म विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें 162 जोड़ों का विवाह और 38 निकाह संपन्न हुए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअली जुड़कर कार्यक्रम को संबोधित किया। मंत्री इंदर सिंह परमार ने मुस्लिम दूल्हा-दुल्हन और हिंदू सनातन जोड़ों को उपहार भेंट किए। इस अवसर पर जनपद पंचायत शुजालपुर अध्यक्ष सीता देवी रामचंद्र पाटोदिया के बेटे के विवाह की भी मंच से सराहना की गई। जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसौदिया, भाजपा प्रदेश मंत्री बबीता परमार, भाजपा जिला महामंत्री विजय बेस और कलेक्टर रिजु बाफना सहित कई गणमान्य व्यक्ति मंच पर मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी और सांसद महेंद्र सोलंकी की अनुपस्थिति का उल्लेख किया, जो सदन में व्यस्त थे। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने संबोधन में कहा कि समरसता, समानता और शोषण मुक्त भारत का सपना मोदी और मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में साकार हो रहा है। मंच से अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। सम्मेलन से पहले दूल्हों की सामूहिक बारात पुलिस चौकी चौराहा से लगभग 1.5 किलोमीटर पैदल चलकर आयोजन स्थल कृषि उपज मंडी प्रांगण 3 तक पहुंची। बारात में मंत्री परमार के साथ भाजपा नेता और अधिकारी साफा बांधकर नाचते हुए दिखाई दिए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसडीएम राजकुमार हलदर, एसडीओपी निमिष देशमुख, पुलिस थाना प्रभारी एसके यादव और प्रवीण पाठक अपने अमले के साथ तैनात थे।

LPG संकट की संभावना, IRCTC ने ट्रेनों में इंडक्शन व रेडी-टू-ईट फूड की वैकल्पिक व्यवस्था की, WCR में 25 क्लस्टर किचन शुरू

भोपाल  इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब भारत में भी दिखने लगा है. देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी की आशंका के चलते गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं. इसी संकट को देखते हुए Indian Railway Catering and Tourism Corporation (आईआरसीटीसी) ने भी रेलवे स्टेशनों पर संचालित किचन के लिए नया निर्देश जारी किया है. आईआरसीटीसी ने कहा है कि रेल यात्रियों के लिए पकाए जाने वाले खाने को अब एलपीजी की जगह माइक्रोवेव ओवन और इंडक्शन चूल्हों पर तैयार किया जाए, ताकि गैस पर निर्भरता कम की जा सके. शहर में चल रही एलपीजी की किल्लत के बीच ट्रेनों में भोजन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर IRCTC ने स्थिति स्पष्ट की है। IRCTC के प्रवक्ता एके सिंह के मुताबिक पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) क्षेत्र में फिलहाल कैटरिंग व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है।  25 क्लस्टर किचन से हो रही सप्लाई एके सिंह ने बताया कि WCR क्षेत्र में IRCTC के करीब 25 क्लस्टर किचन संचालित हो रहे हैं। इन किचनों के माध्यम से क्षेत्र की सभी प्रमुख ट्रेनों में नियमित रूप से भोजन लोड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी ट्रेन में भोजन आपूर्ति बाधित होने की स्थिति सामने नहीं आई है और किचनों में एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। यात्रियों को सामान्य रूप से मिल रहा भोजन सिंह के अनुसार हाल ही में कुछ यात्रियों ने भोजन ठंडा मिलने की शिकायत की थी, लेकिन ट्रेन में माइक्रोवेव ओवन की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर भोजन को दोबारा गर्म कर यात्रियों को दिया जा सकता है। उनका कहना है कि कैटरिंग व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। एलपीजी संकट को देखते हुए वैकल्पिक योजना तैयार IRCTC के प्रवक्ता ने बताया कि मुंबई स्थित जोनल कार्यालय की ओर से एहतियात के तौर पर वैकल्पिक व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। क्लस्टर किचनों और ट्रेनों में इंडक्शन कुकर, माइक्रोवेव ओवन और रेडी टू ईट फूड की व्यवस्था तैयार रखने को कहा गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं का उपयोग करने की जरूरत नहीं पड़ी है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में प्रवक्ता के मुताबिक वर्तमान में गैस सप्लाई का सिस्टम सामान्य रूप से चल रहा है और ट्रेनों की कैटरिंग व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाएगी। फिलहाल WCR क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और ट्रेनों में भोजन की सप्लाई सुचारू रूप से जारी है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्णय, अधिक टोल वसूली पर होंगे टोल शुल्क निरस्त

गुना सुप्रीम कोर्ट ने लेबड़-जावरा, जावरा-नयागांव टोल रोड पर लागत से कई गुना वसूली संबंधी याचिका को इंदौर हाईकोर्ट के खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया। फिर सुनवाई कर 3 माह में निर्णय करने का आदेश दिया। सभी पक्षों को 18 मार्च को हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। सीजेआइ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या की खंडपीठ ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर ये निर्देश दिए। याचिकाकर्ता ने देवास-भोपाल टोल रोड को भी शामिल करने व जनवरी 2026 तक के टोल संग्रहण, दुर्घटना के आंकड़े, अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने की अनुमति का अनुरोध किया। नोएडा ब्रिज पर टोल वसूली रद्द करने के 20 दिसंबर 2024 के आदेश व मंदसौर ब्रिज पर टोल वसूली पर आदेश के प्रकाश में याचिका पर आदेश देने का अनुरोध किया गया। देवास-भोपाल रोड की लागत 345 करोड़, टोल वसूली 2056 करोड़ सकलेचा ने याचिका में कहा, स जनवरी 2026 तक जावरा नयागांव टोल रोड पर लागत 426 करोड़ के स्थान पर 2635 करोड़, लेबड़-जावरा पर 589 करोड़ के स्थान पर 2376 करोड़, देवास-भोपाल टोल पर 345 करोड के स्थान पर 2056 करोड़ टोल वसूला गया है। कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर ने रखरखाव खर्च और ब्याज को फिजिकल रिपोर्ट में खर्च से कई गुना बढ़ाकर बताया। तीनों रोड पर जनवरी 2026 तक 10691 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 8.314 घायल व 3821 लोगों की मौत हुई। वास्तविक वसूली के अनुसार 2016-17 तक तीनों कंपनियों को लागत रखरखाव ब्याज के बाद 140 करोड़ से 320 करोड़ तक लाभ हो रहा है। फिर भी लेबड़-जावरा रोड पर दिसंबर 2038 तक व जावरा-नयागांव, देवास-भोपाल रोड पर दिसंबर 2033 तक टोल और वसूला जाएगा। टोल रोड के निवेशकों को बनाएं पार्टी शीर्ष कोर्ट ने आदेश दिया, सकलेचा द्वारा इंदौर हाईकोर्ट में अप्रेल 2022 में दाखिल याचिका को फिर सुनकर 3 माह में निर्णय दें। याची से कहा कि वह हाईकोर्ट में 15 दिन में नया आवेदन दाखिल करें। टोल रोड के निवेशकों व जिनके हित प्रभावित हो रहे. उन्हें पार्टी बनाएं। सकलेचा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा आदि तो शासन से एजी प्रशांत सिंह व अन्य पेश हुए।

MP में तेज गर्मी, हीट स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा: नर्मदापुरम में 2 दिन लू, 15 से 17 तक बारिश की संभावना

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह में ही गर्मी का असर तेजी से बढ़ गया है। कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और कुछ जगहों पर लू जैसी स्थिति बन गई है। शुक्रवार को Narmadapuram प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लगातार दूसरे दिन यहां तीव्र गर्म हवाओं का असर देखा गया। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर फिलहाल बना रह सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में मौसम बदलने के संकेत भी हैं। तेज गर्मी की वजह से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। इसलिए मौसम विभाग ने अपनी एडवायजरी में इसे लेकर खासतौर पर सलाह दी है। कहा है कि लोग दोपहर में जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले। ठंडे पानी का सेवन करें। घर का तापमान कम रखने के लिए ओवन का उपयोग कम ही करें। बता दें कि मार्च के दूसरे हफ्ते में ही प्रदेश में तेज गर्मी पड़ रही है। पिछले 2 दिन से पारा 40 डिग्री के पार ही है। ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग में गर्मी का असर ज्यादा है। नर्मदापुरम प्रदेश में सबसे गर्म बना हुआ है। शुक्रवार को पचमढ़ी को छोड़ बाकी शहरों में तापमान 35 डिग्री से ज्यादा ही रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल में सबसे ज्यादा 37.8 डिग्री, इंदौर में 37.6 डिग्री, जबलपुर में 37.5 डिग्री, उज्जैन में 37.4 डिग्री और ग्वालियर में 36.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, नर्मदापुरम में 40.1 डिग्री, रतलाम में 39.2 डिग्री, मंडला में 39 डिग्री, धार-खजुराहो में 38.9 डिग्री, दमोह में 38.5 डिग्री, खरगोन में 38.4 डिग्री, सागर, टीकमगढ़-सिवनी में पारा 38 डिग्री पहुंच गया। एमपी के इन जिलों में भीषण गर्मी -नर्मदापुरम- 40.1 डिग्री -रतलाम- 39.2 डिग्री -मंडला- 39 डिग्री -धार और खजुराहो- 38.9 डिग्री -दमोह- 38.5 डिग्री -खरगोन- 38.4 डिग्री -सागर, टीकमगढ़ और सिवनी- 38 डिग्री कई संभागों में तेज गर्मी राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। Bhopal, Indore, Jabalpur, Ujjain और Gwalior जैसे प्रमुख शहरों में भी दिन का तापमान 36 से 38 डिग्री के बीच पहुंच गया है। गर्मी का असर खासतौर पर ग्वालियर-चंबल, उज्जैन, इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग में ज्यादा देखने को मिल रहा है। पचमढ़ी को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 35 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया। तीन दिन बारिश का अलर्ट मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के कुछ इलाकों में जल्द मौसम बदल सकता है। 15, 16 और 17 मार्च को Gwalior-चंबल, Jabalpur, Rewa और Shahdol संभाग के जिलों में हल्की बारिश या बादल छाने की संभावना जताई गई है। इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हीट स्ट्रोक से बचने की सलाह बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। एडवायजरी में कहा गया है कि दोपहर के समय बेवजह घर से बाहर निकलने से बचें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। लोगों को हल्के कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने और घर के अंदर तापमान कम रखने की सलाह दी गई है। साथ ही जरूरत पड़ने पर ही तेज धूप में बाहर निकलने की बात कही गई है।

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