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मध्यप्रदेश के जिलों में रोटेशन: कलेक्टर और SP बदलने की तैयारी, अधिकारी आदेश का इंतजार

भोपाल  मध्यप्रदेश में बजट सत्र खत्म होते ही बड़े प्रशासनिक बदलाव की तैयारी है। सरकार कई जिलों में कलेक्टर और कमिश्नर बदलने की योजना बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य 21 फरवरी को अंतिम प्रकाशन के साथ पूरा हो जाएगा, लेकिन तबादलों की कार्रवाई अब विधानसभा के बजट सत्र के बाद ही की जाएगी। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। परंपरागत रूप से इस दौरान तबादले नहीं किए जाते, इसलिए सत्र समाप्त होते ही मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। कामकाज के आधार पर होगी छंटनी जानकारी के अनुसार, जिन कलेक्टरों की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं पाई गई है, उन्हें बदला जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों के पालन की समीक्षा की गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन दो बार अधिकारियों के कामकाज का विस्तृत आकलन करा चुके हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। अब अंतिम निर्णय बजट सत्र के बाद लिया जाएगा। सचिव और अपर कलेक्टर भी होंगे प्रभावित फेरबदल सिर्फ कलेक्टर-कमिश्नर तक सीमित नहीं रहेगा। सचिव स्तर के कई अधिकारियों को नए दायित्व दिए जाएंगे। मैदानी स्तर पर अपर कलेक्टरों को भी बदला जा सकता है, खासकर वे अधिकारी जो ढाई साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी नरहरि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के इच्छुक हैं और उन्हें हरी झंडी भी मिल चुकी है। इसके अलावा सचिव स्तर के अधिकारी श्रीमन शुक्ला और स्वतंत्र कुमार सिंह भी प्रतिनियुक्ति की कतार में बताए जा रहे हैं। अधिकारियों की कमी से बढ़ा दबाव वर्तमान में प्रदेश के 44 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिनमें 14 अधिकारी 2024-25 में ही गए हैं। इससे प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है। प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर पर कमी के कारण कई अधिकारियों के पास दो से तीन विभागों का अतिरिक्त प्रभार है। इस वर्ष केवल एम. सेलवेंद्रन को ही प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति मिली है। स्पष्ट है कि बजट सत्र समाप्त होते ही प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर मंत्रालय से लेकर जिलों तक पड़ेगा।

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की दो ताप विद्युत यूनिट ने विद्युत उत्पादन करने का नया रिकार्ड बनाया

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की दो ताप विद्युत यूनिट ने शुक्रवार को बिना रूके लगातार विद्युत उत्पादन करने का नया रिकार्ड बनाया। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS)की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने 500 दिन और सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी (STPS) की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने 100 दिन बिना रूके लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 देश के सार्वजनिक क्षेत्र की तीसरी व स्टेट सेक्टर की प्रथम विद्युत यूनिट है जिसने लगातार 500 दिन विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से सतत् विद्युत उत्पादन कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र में एनटीपीसी की दो यूनिट क्रमश: 644 व 559 दिन तक संचालित रही हैं। पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता और तकनीकी काबिलियत का उदाहरण है चचाई यूनिट ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह गर्व की बात है कि पावर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास में किसी भी बिजली बनाने वाली यूनिट द्वारा हासिल किया गया लगातार चलने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े आउटेज के इतने लंबे समय (500 दिन) तक बिना रुके विद्युत ऑपरेशन जारी रखना अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के पेशेवर रूख, प्रतिबद्धता व तकनीकी काबिलियत का उदाहरण है। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 हासिल किए उच्च मापदंड अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 ने 500 दिन बिना रूके शानदार प्रदर्शन में इंडेक्स प्लांट टीम द्वारा लगातार बनाई गई क्षमता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता के उच्च मापदंड स्पष्ट रूप से दिखते हैं। यूनिट नंबर 5 ने 98.64 फीसदी प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ), 95.30 फीसदी प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) व 9.28 प्रतिशत ऑक्जलरी कंजम्पशन हासिल किया है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट नंबर 10 ने किया 100 दिन सतत् विद्युत उत्पादन सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने 100 दिन लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। यह यूनिट 5 नवम्बर 2025 से लगातार विद्युत उत्पादन कर रही है। यूनिट ने इस दौरान 100.16 फीसदी प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ), 92.85 फीसदी प्लांट यूटिलाइजेशन फेक्टर (पीएलएफ) व 8.23 प्रतिशत ऑक्जलरी खपत को हासिल कर ऑपरेशनल विश्वसनीयता व दक्षता का प्रदर्शन किया। सारनी की यूनिट नंबर 10 इससे पूर्व इसी वित्तीय वर्ष में 200 दिन से अधिक तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बना चुकी है।  

खुद को IAS बताकर मंत्रालय पहुंचा युवक, पूछताछ में फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा

भोपाल मंत्रालय में शुक्रवार को एक व्यक्ति स्वयं को 2019 बैच का अधिकारी बताकर पहुंच गया। योगेंद्र सिंह चौहान नाम का यह व्यक्ति मूल रूप से इंदौर का रहने वाला है और स्वयं को अपर कलेक्टर बताकर कर सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव अजय कटेसरिया के पास स्वयं का तबादला कराने के लिए पहुंचा था। बातचीत में संदेह हुआ तो उन्होंने सुरक्षाकर्मी बुला लिए। पूछताछ में यह बात सामने आई कि वह कोई आईएएस अधिकारी नहीं है। हालांकि, युवक की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई स्वजन को सौंप दिया। योगेंद्र सिंह चौहान स्वयं को आइएएस अधिकारी बताकर सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव के पास पहुंचा था। वह अपना तबादला करने की बात कर रहा था। इससे अजय कटेसरिया को संदेह हुआ। उन्होंने सिलेक्शन बैच पूछा तो वह 2019 बताने लगा। सिलेक्शन बैच वह होता है जिसमें व्यक्ति परीक्षा देता है। संवर्ग का बैच उसके एक साल बाद का होता है। उसे जब और पूछा गया तो बताया कि इंदौर में अपर कलेक्टर पदस्थ हूं लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग मुझे भूल गया है। जब पूछा कि आपका सुरक्षा कर्मी कहां है, तो कहने लगा कि कलेक्टर ने ले लिया है। इस पर संदेह पुख्ता हो गया और फिर उन्होंने मंत्रालय के सुरक्षाकर्मी बुलाकर उन्हें सौंप दिया। मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारी अविनाश शर्मा ने पूछताछ की। उसे 2019 बैच की सूची दिखाई, जिसमें उसका नाम नहीं था। यह भी पढ़ें- बीएनएस में बदली धारा से खुला रास्ता, कोर्ट ने सुधरने के वादे पर लूट के आरोपियों का राजीनामा किया स्वीकार मानसिक अस्थिर है, हिदायत देकर छोड़ा सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि पूछताछ में ही यह लगा कि वह मानसिक तौर पर अस्थिर लगा। एकटक सुरक्षाकर्मियों को देखता रहा। चेहरे पर कोई चिंता नहीं। उसके पास फर्जी आईडी या अन्य कोई चीज नहीं मिली। स्वजन का नंबर लिया और फिर उन्हें मंत्रालय बुलाया। उन्होंने बताया कि इसका उपचार चल रहा है, जिसके बाद बिना कोई कार्रवाई किए स्वजन के हवाले इस हिदायत के साथ कर दिया कि जब तक उपचार चल रहा है, तब तक ऐसे कहीं जाने न दें।  

मानवीय आधार पर ऐतिहासिक आदेश: 13 साल की रेप पीड़िता को 28 हफ्ते में भी गर्भपात की अनुमति

भोपाल Madhya Pradesh High Court ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 28 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है।   अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की शारीरिक व मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने माना कि इतनी कम उम्र में गर्भावस्था जारी रखना नाबालिग के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भ जारी रहने से बच्ची पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद अदालत ने मानवीय आधार पर गर्भ समापन की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय राज्य में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदम, कृषि रथ ने किसानों को किया जागरूक

भोपाल कृषक कल्याण वर्ष 2026 राज्य शासन द्वारा घोषित कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसानों को खेती की नई पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। इसी क्रम में हरदा जिले की ग्राम पंचायतों में कृषि रथ का संचालन किया गया। कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा कृषकों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने के लिये जागरूक किया गया। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उडद, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन के साथ प्राकृतिक और जैविक कृषि करने के लिए प्रेरित किया गया। मृदा स्वास्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने सहित समसामयिक सलाह भी प्रदान की गई। किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करते हुए बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से अनेक जानलेवा बीमारियां बढ़ रही हैं। प्राकृतिक और जैविक खेती से बीमारियां होने का खतरा नहीं रहता है। प्राकृतिक और जैविक खेती एक ऐसी खेती है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैविक पदार्थों का उपयोग करके फसलें उगाई जाती हैं। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण होता है, जैव विविधता बढ़ने के साथ किसानों की आय बढ़ती है और फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। किसानों को मिल रही सोलर पम्प की सौगात प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत हरदा जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा योजना के तहत हरदा जिले में 361 किसानों का ऑफ ग्रिड सोलर पम्प प्रदाय करने के लिए चयन किया गया है। इस योजना से किसानों को दिन के समय निर्बाध सिंचाई, कम लागत में खेती तथा पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता का लाभ मिल रहा है।  

धरती का चलता फिरता कल्प वृक्ष है गौमाता: जगदगुरू राजेन्द्रदास महाराज

भोपाल. बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में  रेवासा धाम एवं  वृंदावन धाम के पावन सानिध्य में मलूक पीठाधीश्वर  राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा आयोजित गौकथा एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती विषयक दिव्य कथा का आज द्वितीय दिवस अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि महाराज जी के प्रवचनों से क्षेत्र में गौसेवा की भावना निश्चित रूप से सुदृढ़ होगी। गौमाता के आशीर्वाद से यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से समृद्धि की ओर अग्रसर होगा। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में चल रही दिव्य कथा का देश के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी श्रवण किया। उन्होंने महाराज  से आशीर्वाद प्राप्त किया। जगदगुरू  राजेंद्रदास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज की दुर्दशा का मूल कारण गौवंश की उपेक्षा है। उन्होंने कहा कि भौतिक संपत्ति असुरों के पास भी थी, किंतु वह आसुरी संपत्ति थी, दैवीय संपत्ति नहीं। आसुरी संपत्ति मनुष्य को संसार के मोहजाल में फँसाती है, जबकि दैवीय संपत्ति उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है। महाराज जी ने गौ सेवा को सच्ची समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि गौ माता की सेवा से बुद्धि निर्मल होती है, जीवन में सुख-शांति आती है और व्यक्ति के समस्त अशुभ कर्म सहज ही क्षीण हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धरती का कल्याण गौ संरक्षण से ही संभव है तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती ही आने वाले समय का सतत और सात्विक समाधान है। गौमाता धरती का चलता फिरता कल्पवृक्ष है जो सबकी कामनाओं की पूर्ति करती हैं।  राजेंद्रदास जी महाराज ने कहा कि ऋग्वेद में वर्णित है जिस मनुष्य के पास कम से कम एक भी गौ होती है, वह धरती पर इंद्र के समान सौभाग्यशाली माना गया है। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में हजारों गायों का संरक्षण हो रहा है जिससे इसकी कीर्ति बढ़ रही है। रीवा जिले के ही हिनौती गौधाम में 25 हजार गायों के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। यह गौधाम मध्यप्रदेश का प्रथम गौधाम होगा और मेरा सौभाग्य होगा कि मैं वहां गौमाता की कीर्ति यश का बखान कर सकूं। उन्होंने कहा कि गाय के दर्शन से राधा-कृष्ण का एक साथ दर्शन होता है। गाय संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का पोषण करती हैं। महाराज  ने कहा कि देवी भागवत में कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को सुरभि माता के प्राकट की कथा है। आज के परिवेश में मनुष्यता खो गई है। मनुष्य के क्षमा, दया, करूणा एवं सेवा आदि के पवित्र गुण विलुप्त हो गये हैं। आदर पूर्वक गौमाता के संरक्षण, संवर्धन व सेवा से ही मानवता आयेगी। महाराज  ने कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में 9 हजार से अधिक गौवंश संरक्षित किये गये हैं जो सुखपूर्वक निवास करते हैं और पास के जंगल में विचरण करते हैं। उनकी गौशाला में पूरे मनोभाव से सेवा की जाती है। गौवंश वन्य विहार में प्राकृतिक खेती का कार्य किसानों के लिए प्रेरणादायी होगा। शुद्ध, सात्विक, कीटाणु रहित आहार प्राकृतिक खेती से ही प्राप्त हो सकता है। यह क्षेत्र गौसेवा से अपनी दिव्यता को प्रकट कर रहा है। उन्होंने गौसेवा में लगे सेवकों को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही और वातावरण गौमय भक्ति, सेवा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।  

महिला के लिवइन पार्टनर ने की थी गला घोंटकर हत्या

भोपाल निशातपुरा इलाके में हुए महिला के अंधे कत्ल का पुलिस ने चौबीस घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में मृतका के लिविंग पार्टनर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने महिला से पीछा छुड़ाने के लिए उसका गला घोटकर हत्या कर दी और भाई-बहन तथा मां के साथ मिलकर लाश को ठिकाने लगाने के लिए लोहे की पेटी के अंदर भरकर सैप्टिक टैंक में फेंक दिया था। दोनों की पहचान डेटिंग एप के जरिए हुई थी। जानकारी के अनुसार निशातपुरा पुलिस ने गुरुवार को कमल नगर स्थित सेप्टिक टैंक से एक महिला की लाश बरामद की थी, जिसे लोहे की पेटी में भरकर फेंका गया था। शव का पोस्टमार्टम कराने और जांच के दौरान आए साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था। आसपास के इलाके में पूछताछ पर शव की पहचान मिसबाह (22) निवासी गोंदिया महाराष्ट्र के रूप में हुई, जो पिछले कुछ समय से कमल नगर में रहने वाले समीर के साथ लिवइन में रह रही थी। पुलिस ने समीर को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने महिला की गला घोटंकर हत्या करने और एक दिन बाद भाई-बहन और मां के साथ मिलकर उसके शव को ठिकाने लगाने की बात स्वीकार कर ली।  डेंटिंग ऐप से हुई थी दोनों की पहचान  आरोपी समीर ने पुलिस को बताया कि डेटिंग ऐप की माध्यम से उसकी पहचान मिसबाह से हुई थी। उसके बाद अक्टूबर 2025 से वह उसके साथ लिवइन में रह रही थी। दोनों के बीच विवाद होने लगे तो समीर उससे पीछा छुड़ाना चाहता था, लेकिन मिसबाह उससे अलग होने के लिए पैसों की मांग कर रही थी। इसी बात को लेकर बीती सात-आठ फरवरी की रात उनके बीच विवाद हुआ तो समीर ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। घटना के बाद उसने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। एक दिन लाश को घर में रखने के बाद अगले दिन घरवालों के साथ मिलकर उसे ठिकाने लगा दिया।  चारों आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी समीर, उसके भआई साहिल, बहन सायमा और मां शहनाज को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपी कमल नगर के रहने वाले हैं। इस अंधे कत्ल का खुलासा करने में थाना प्रभारी मनोज पटवा, एसआई श्रीकांत द्विवेदी, अशोक शर्मा, सलीम खान, एएसआई गोपाल सिंह, हेड कांस्टेबल अभिषेक सिंह, राजेन्द्र, रवीश रावत, आरक्षक जितेन्द्र सिकरवार, मधुसूदन, धारा सिंह, शिवराज, राजकुमार, महिला आरक्षक हेमंतिका एवं सपना की सराहनीय भूमिका रही है। पहले पति से हो चुका है तलाक पुलिस ने बताया कि महिला मिसबाह का अपने पति से तलाक हो चुका है। उसका पहला पति गुजरात में रहता है। इधर समीर का अपनी पहली पत्नी से तलाक हो चुका है, जबकि दूसरी पत्नी जबलपुर में रह रही है। वह ऑटो चलाने का काम करता है।घटनास्थल से करीब 200 मीटर पर ही लाश के फेंक गया था, इसलिए मामले को सुलझाने में पुलिस को मदद मिली।

मेडिकल छात्रा की मौत को लेकर परिजनों ने किया थाने पर प्रदर्शन

भोपाल एमबीबीएस फस्ट ईयर की छात्रा रोशनी कलैश की मौत के मामले में धीमी कार्रवाई से नाराज छात्रा के परिजन और ग्रामीण आज अलीराजपुर से भोपाल पहुंचे और कोहेफिजा थाने के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अलीराजपुर के अलावा भोपाल में पढ़ने वाले समाज के कई अन्य छात्र-छात्राएं एवं नाते-रिश्तेदार भी शामिल हुए। थाने के अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह बड़े अधिकारी को बुलाने पर अड़े रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बात की उनके समझाने के बाद परिजन और ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।प्रदर्शन करने वालों का कहना था कि छात्रा खुदकुशी नहीं कर सकती है, इसलिए हर एंगल पर जांच की जानी चाहिए। अधिकारियों ने परिजनों को ठोस जांच का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही छात्रा के परिजनों और गांव से आए लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार बीती 10 फरवरी को गांधी मेडिकल कॉलेज की मेडिकल छात्रा रोशनी का शव हॉस्टल में संदिग्ध हालत में मिला था। इस मामले में कहा जा रहा था कि छात्रा ने टॉयलेट क्लीनर पी लिया था। रोशनी के शव के पास ही एसिड की बॉटल भी मिली थी। जब वह सुबह कॉलेज के लिए अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, तो साथ में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स उसे बुलाने के लिए पहुंचे थे, तब मामले का खुलाास हुआ था। परिजनों ने हॉस्टल पर लगाए गंभीर आरोप। छात्रा के परिजनों का कहना है कि वह हॉस्टल में नीचे रहती थी, जबकि उसका शव ऊपरी मंजिल वाले बाथरूम में मिला था। परिजनों ने जब सीसीटीवी कैमरे चैक किए तो छात्रा ऊपर-नीचे आते-जाते नहीं दिखाई दी। इसके अलावा परिजनों का यह भी आरोप है कि छात्रा की मौत के बाद न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही परिजनों को बताया गया। बल्कि उसे उठाकर सीधे अस्पताल पहुंचा दिया गया।हॉस्टल  द्वारा दिखाए गए फुटेज से परिजन संतुष्ट नहीं हैं, वह छात्रा की मौत को लेकर साजिश बता रहे हैं।परिजनों का कहना है कि पुलिस उनके बयान दर्ज कर रही है, लेकिन जब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, वह वापस गांव नहीं लौटेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बागेश्वर धाम में सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन में नव दम्पतियों को दिया आशीष

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बेटे-बेटियों का विवाह करने के लिए सामूहिक विवाह सबसे उत्तम माध्यम है। समाज में ख़र्चीले विवाहों का प्रचलन चिंतनीय है। मितव्ययिता जरूरी है। हमारा समाज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बदलते वक्त के साथ हमें अपनी सोच भी बदलने की जरूरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने स्वयं अपने पुत्र का विवाह उज्जैन में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में किया हैं। शादियों में अनावश्यक खर्च से हमें बचना ही चाहिए। सामूहिक विवाहों से हुई बचत परिवार के लिए अन्य सुविधा जुटाने के लिए उपयोगी हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि विवाह और मृत्यु भोज जैसे कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची और दिखावे को बंद करने की आवश्यकता है। बागेश्वर धाम में हो रहे सामूहिक विवाह एक यज्ञ के समान हैं। अच्छाइयां ही हमेशा याद रहती हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भारतीय संस्कृति की भावना को मजबूत करने के लिए छतरपुर को कैंसर अस्पताल की सौगात दी है। हमारे देवस्थान चमत्कारिक होते हैं। मंदिर के आसपास अस्पताल भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को बागेश्वर धाम सरकार में आयोजित सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जितने भी बेटे-बेटियों का विवाह हुआ है, इन्हें किसी भी रोजगार या काम-धंधे की आवश्यकता है, तो सरकार सभी को हर जरूरी सहायता उपलब्ध करायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे जीवनकाल के 16 संस्कारों में विवाह सबसे बड़ा संस्कार है। यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की राह दिखाता है। उन्होंने सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल हुए 300 नव दंपतियों को शुभकामनाएं दी। भारतीय सनातन संस्कृति को आघात पहुंचाने के लिए दुनियाभर के आक्रांताओं ने भारत भूमि पर आक्रमण किए। गुजरात के देवधाम सोमनाथ मंदिर पर भी आक्रमण किया, लेकिन पिछले 75 साल से सोमनाथ मंदिर की भव्यता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भी रामलला भव्य मंदिर में विराजे हैं। उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम ने सनातन संस्कृति को नई दिशा दी है। राज्य सरकार बेटियों के विवाह के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के जरिए 51 हजार रुपए की राशि प्रदान कर रही है। सनातन संस्कृति में हर साल तीन ऐसी तिथियां हैं, जब बगैर मुहूर्त के विवाह किए जा सकते हैं। देवउठनी एकादशी, बसंत पंचमी और अक्षय तृतीया। इन तीनों तिथियों पर पर कन्याओं के सामूहिक विवाह आयोजित किए जाएं। सामूहिक विवाह से शादियों में होने वाले बेहिसाब खर्चों में कमी आ रही है। समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों को सभी को अपनाना चाहिए। बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृष्ण के वंशज हैं। वे गौशाला, गौ-मंदिर और गौमाता के लिए न्यास बनाने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में उज्जैन में बाबा महाकाल का भव्य महाकाल लोक निर्मित हुआ है। स्थानीय विधायक  अरविंद पटेरिया ने कहा कि बागेश्वर धाम में आयोजित यह 7वां सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन है। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बागेश्वर धाम सहित संपूर्ण बुंदेलखंड के विकास का संकल्प लिया है। वे क्षेत्र के गरीब परिवारों की बेटियों के पिता बनकर शिक्षा, चिकित्सा एवं विवाह में हर संभव सहायता कर रहे हैं। सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक  भगवानदास सबनानी, विधायक मती ललिता यादव, पूर्व विधायक  प्रद्युम्न सिंह, मती अर्चना सिंह सहित जनप्रतिनिधि, साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 14 फरवरी को बुरहानपुर को देंगे 696.37 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 फरवरी को बुरहानपुर जिले को 696 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत के विकास कार्यों की सौगात देंगे। नेहरू स्टेडियम, बुरहानपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न शासकीय योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरण भी करेंगे। कार्यक्रम स्थल पर कृषि, उद्यानिकी एवं अन्य विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें शासन की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 334 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए 32 विकास कार्यों का लोकार्पण और 362 करोड़ 15 लाख रुपये की लागत के 48 नवीन कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इन विकास कार्यों में अधोसंरचना, जनसुविधा, कृषि एवं अन्य विभागों से संबंधित परियोजनाएँ शामिल हैं, जो जिले के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेंगी। कार्यक्रम के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव रोड-शो में भी शामिल होंगे। यह रोड-शो शिकारपुरा थाना क्षेत्र के जीजामाता चौराहा से प्रारंभ होकर नेहरू स्टेडियम तक जाएगा। इस दौरान जिलेवासियों द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया जाएगा।  

उद्यानिकी को बढ़ावा देने पर जोर, मंत्री कुशवाह ने अधिकारियों को दिए अहम निर्देश

भोपाल. उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह ने शुक्रवार को सतना जिले में विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने किसानों को अधिकारी नहीं, बल्कि उनके मित्र बनकर प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जिले में उत्पादित प्रमुख उद्यानिकी फसलों के किसानों को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करायी जा सकती है। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि कृषि वर्ष 2026 में उद्यानिकी विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को उद्यानिकी की योजनाओं से जोड़कर उद्यानिकी के रकबे का विस्तार करना है। उद्यानिकी अमला किसानों को फूड प्रोसेसिंग, मसालों की खेती और औषधीय खेती की ओर प्रोत्साहित करे। उन्होंने निर्देश दिये कि कृषि आदानों की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि सतना जिले में प्याज और टमाटर के बहुतायत में उत्पादन को देखते हुए टमाटर, प्याज के शैम्पू, पेस्ट, पावडर एवं अन्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने जिला स्तर पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित करें। सतना और मैहर जिले में लगभग 2 लाख हितग्राहियों को मिल रही है सामाजिक सुरक्षा पेंशन सामाजिक न्याय मंत्री  कुशवाह ने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन उपलब्ध कराई जाये। वर्तमान में सतना जिले में एक लाख 23 हजार और मैहर जिले में 69 हजार से अधिक हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को समय-सीमा में और उनकी आवश्यकता के अनुसार सुविधाएँ मुहैया कराना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड अभियान चलाकर बनाये जायें तथा कृत्रिम अंग और सहायक उपकरणों का वितरण शिविर लगाकर किया जाये। बैठक में सीईओ जिला पंचायत  शैलेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर  विकास सिंह सहित उद्यानिकी एवं सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। स्व. दयानंद कुशवाह की विचारधारा को आगे बढ़ाने की जरूरत : मंत्री  कुशवाह सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण मंत्री  कुशवाह ने सतना प्रवास के दौरान पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य तथा समाज सेवी स्व. दयानंद कुशवाह की प्रथम पुण्य तिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने कहा कि स्व. दयानंद कुशवाह ने शोषित, दलित और पीड़ित वर्ग के लिये संघर्ष किया। उनके द्वारा किये गये कार्यों को सदैव याद रखा जायेगा। श्रद्धांजलि सभा में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी, सांसद  गणेश सिंह, विधायक  सिद्धार्थ कुशवाह,  सुरेन्द्र सिंह गहरवार, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। उन्होंने भी स्व. दयानंद कुशवाह के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।  

सेवा, समर्पण और संकल्प के साथ करें कार्य : राज्यपाल पटेल

भोपाल. राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार को लोकभवन के जवाहर खण्ड में रेडक्रॉस के मध्यप्रदेश शाखा की नवगठित प्रबंधन समिति के साथ चर्चा की। उन्होंने नवागत सदस्यों को सेवा, समर्पण और संकल्प के साथ कार्य के लिए शुभकामनाएं दी। बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विधि अधिकारी  उमेश वास्तव, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी  अरविन्द पुरोहित और रेडक्रॉस प्रबंधन समिति के सदस्य मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल को रेडक्रॉस चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे से रेडक्रॉस अस्पताल के प्रबंधन, ओ.पी.डी. संचालन, माहवार मरीजों की संख्या, जाँच, विभिन्न मदों से प्राप्त आय और व्यय के संबंध में अवगत कराया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि मरीजों के इलाज, जरूरी जाँच और व्यवस्थाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाये। मरीजों की देखभाल से जुड़ी सभी व्यवस्थाएँ हमेशा पुख्ता रखें। बैठक में रेडक्रॉस के जनरल सेक्रेटरी  रामेन्द्र सिंह ने समिति की गतिविधियों का विवरण दिया।  

कृषि रथ के माध्यम से किसानों को बताया प्राकृतिक और जैविक खेती का महत्व

भोपाल. कृषक कल्याण वर्ष 2026 राज्य शासन द्वारा घोषित कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसानों को खेती की नई पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। इसी क्रम में हरदा जिले की ग्राम पंचायतों में कृषि रथ का संचालन किया गया। कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा कृषकों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने के लिये जागरूक किया गया। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उडद, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन के साथ प्राकृतिक और जैविक कृषि करने के लिए प्रेरित किया गया। मृदा स्वास्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने सहित समसामयिक सलाह भी प्रदान की गई। किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करते हुए बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से अनेक जानलेवा बीमारियां बढ़ रही हैं। प्राकृतिक और जैविक खेती से बीमारियां होने का खतरा नहीं रहता है। प्राकृतिक और जैविक खेती एक ऐसी खेती है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैविक पदार्थों का उपयोग करके फसलें उगाई जाती हैं। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण होता है, जैव विविधता बढ़ने के साथ किसानों की आय बढ़ती है और फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। किसानों को मिल रही सोलर पम्प की सौगात प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत हरदा जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा योजना के तहत हरदा जिले में 361 किसानों का ऑफ ग्रिड सोलर पम्प प्रदाय करने के लिए चयन किया गया है। इस योजना से किसानों को दिन के समय निर्बाध सिंचाई, कम लागत में खेती तथा पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता का लाभ मिल रहा है।  

मध्‍यप्रदेश पुलिस की त्वरित कार्रवाई

भोपाल . मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में सतत रूप से की जा रही जनसुरक्षा एवं बाल संरक्षण से जुड़ी कार्यवाहियों के क्रम में नरसिंहपुर एवं शिवपुरी जिलों में नाबालिग बच्चों की सकुशल दस्तयाबी की दो प्रमुख कार्यवाहियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय रहीं, जिन्होंने पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता एवं पेशेवर दक्षता को सशक्त रूप से रेखांकित किया है। नरसिंहपुर: चंद घंटों में दो नाबालिग बालिकाओं की सकुशल दस्तयाबी दिनांक 10 फरवरी को थाना गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर में 9 वर्षीय एवं 8 वर्षीय बालिका के गुम होने की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस ने तत्काल सघन तलाश प्रारंभ की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश के नेतृत्व में चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। टीमों द्वारा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों एवं सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से व्यापक खोजबीन की गई। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप दोनों बालिकाएं ग्राम कमती के सेमरावारी खेत स्थित कोहा के पेड़ के पास झाड़ियों में सुरक्षित अवस्था में मिलीं। पूछताछ में ज्ञात हुआ कि कुरकुरे खाने के बाद परिजनों की डांट के भय से वे स्वयं छिप गई थीं। दोनों बालिकाओं को सकुशल परिजनों के सुपुर्द किया गया। शिवपुरी: हॉस्टल से लापता तीन नाबालिग बालकों को गुना से सुरक्षित दस्तयाबकिया दिनांक 12 फरवरी को थाना कोतवाली, जिला शिवपुरी में हॉस्टल से तीन नाबालिग बालकों (उम्र 14, 15 एवं 17 वर्ष) के लापता होने की रिपोर्ट पर तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक श्री अमन सिंह राठौड़ के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। टीम द्वारा शिवपुरी एवं गुना में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों में 80 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की गहन जांच करते हुए सघन तलाश की गई, जिसके परिणामस्वरूप तीनों बालकों को गुना रेलवे स्टेशन से सकुशल दस्तयाबकर परिजनों के सुपुर्द किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा जनसहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रतिदिन अनेक प्रभावी कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। इन प्रयासों के माध्यम से पुलिस न केवल सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि समाज में विश्वास, सहयोग और सकारात्मक संवाद की मजबूत नींव भी रख रही है।  

जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने के लिए मध्यप्रदेश की हुई सराहना

जनगणना प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का है अभियान प्रधानमंत्री मोदी ने लिया डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला कलेक्टर-कमिश्नर्स समय-सीमा में पूर्ण करें जनगणना कार्य जनगणना में मजरों-टोलों का भी किया जाए आंकलन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। जनगणना के आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है। यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनगणना-2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सत्र में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, रजिस्ट्रॉर जनरल तथा जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे। सम्मेलन में प्रदेश के सभी संभागायुक्त, कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। देश में आखिरी बार वर्ष 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल एवं अन्य कार्यों की योजनाएं जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनाई जाती हैं। जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समय सीमा में पूर्ति करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्यौहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने में जन भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। नागरिकों के स्वास्थ्य की दृष्टि से मिलावटी मिठाई, रंगों में मिलावट एवं अन्य खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं। होली के त्यौहार में सामाजिक समरसता सुनिश्चित हो। प्रदेश में जल संरचनाओं के निर्माण में मुआवजे के प्रकरणों का निराकरण संवेदनशीलता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें विकास के साथ-साथ जनभावनाओं का ध्यान भी रखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी-रामजी योजना के क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना को प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे कठिन कार्य माना जाता है। देश में हर 10 साल में जनगणना होती है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए जनगणना, अपनी प्रबंधन दक्षता को सिद्ध करने और अपने अनुभवों का समृद्ध करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस बार तकनीक के बेहतर उपयोग से जनगणना के आंकड़े डिजिटल व्यवस्था के परिणामस्वरूप जल्दी आएंगे। मध्यप्रदेश विविधता से समृद्ध राज्य है। यहां करीब 1 लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं, अगर मकानों की गणना के पत्रक में एक कॉलम मजरे टोले का रखा जाए, तो इससे राज्य सरकार को भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। अगर आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तो जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। यह नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी सही जानकारियां फील्ड अधिकारियों को उपलब्ध कराएं। 

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