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20 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत

भोपाल रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। किसान 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन अवश्य करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 4084, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया है कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

नस्ल सुधार से पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ मजबूत आधार

अब तक 15 लाख 21 हजार से अधिक प्रजनन योग्‍य पशुओं में किया जा चुका है कृत्रिम गर्भाधान भोपाल मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य की प्राप्‍त‍ि के लिए पशुओं में नस्ल सुधार किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ संचालित किया जा रहा है। पशुओं के नस्ल सुधार का यह अभि‍यान पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार बना है। अभियान के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण, गोशालाओं में नस्ल सुधार सहित पशुपालकों को सेक्‍सड सॉर्टेंड सीमन के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्‍य उद़देश्‍य गोशालाओं को आत्‍मनिर्भर बनाना, कृत्रिम गर्भाधान और स्‍थानीय स्‍तर पर प्रत्‍येक ग्राम पंचायत के बेरोजगार युवा को स्‍वरोजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) की व्‍यवस्‍था करना है। कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस प्रदेश सरकार द्वारा कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस किया जा रहा है। वर्तमान में 15.21 लाख पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। वहीं सॉर्टेड सेक्स सीमन के उपयोग को बढ़ावा देते हुए अब तक 1.65 लाख पशुओं में इसका सफल उपयोग किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान की गुणवत्ता सुधारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। साथ ही जागरुकता के लिए राज्य, जिला और विकासखंड स्तर पर निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कॉल सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन किए गए कार्यों का टेलीफोनिक सत्यापन भी किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो रही है। पंचायतों में ‘मैत्री’ कार्यकर्ता की व्‍यवस्‍था पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अभी तक 12 हजार 988 से अधिक मैत्री प्रशिक्षित किए गए हैं। गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत प्रदेश की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। इसके लिए प्रजनन योग्‍य गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान एवं अनुपयोगी सांडों का बधियाकरण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश की विभिन्‍न गोशालाओं में उपलब्‍ध 11 हजार 551 गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान तथा 37 हजार 355 सांडों का बधियाकरण किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना के माध्‍यम से किया जाएगा पुरस्कृत विभाग द्वारा नस्ल सुधार कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों, मैत्री एवं अन्य कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए “कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना प्रारंभ की जाएगी। विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कॉल सेंटर के माध्‍यम से प्रतिदिन किया जा रहा सत्‍यापन हिरण्यगर्भा अभियान अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का राज्‍य स्‍तर पर प्रतिदिन कॉल सेंटर के माध्‍यम से सत्‍यापन किया जा रहा है। प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के कार्य की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है। प्रदेश में सेक्सड सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कराने की मांग बढ़ी है। साथ ही प्रदेश में दुग्ध संकलन में भी इजाफा हुआ है।  

उज्जैन बाइपास को मंजूरी, मध्य प्रदेश के रेल नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार

भोपाल मध्य प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने राज्य में कई महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन योजनाओं से न केवल ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि माल ढुलाई, क्षेत्रीय संपर्क और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। उज्जैन बाइपास रेलवे लाइन को मंजूरी भारतीय रेलवे के अंतर्गत पश्चिमी रेलवे ने नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किलोमीटर लंबी उज्जैन बाईपास रेलवे लाइन को 189.04 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी है। यह परियोजना विशेष रूप से उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों के रिवर्सल की समस्या को समाप्त करेगी। अभी कई ट्रेनों को दिशा बदलने के लिए उज्जैन स्टेशन पर रुककर रिवर्सल करना पड़ता है, जिससे समय और परिचालन क्षमता दोनों प्रभावित होते हैं। बाईपास लाइन बनने से यह प्रक्रिया खत्म होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा यह परियोजना वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान बेहतर रेल प्रबंधन और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होता है। बायपास लाइन बनने से तीर्थयात्रियों को सीधे और तेज रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच और सुगम होगी। पितृ पर्वत से उज्जैन बायपास तक नया फोरलेन, सिंहस्थ से पहले तैयार होगी इंदौर-उज्जैन की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। यात्रा समय में कमी, समयपालन में सुधार और भीड़भाड़ में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।  इन स्वीकृतियों को मध्य प्रदेश के रेल ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है  बेहतर संपर्क और विश्वसनीय सेवा से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।  

जनगणना से विकास की योजना बनती है, सीएम ने इस प्रक्रिया की अहमियत पर जोर दिया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में जनगणना – 2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा किआदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इसके क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के लिए आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा और भारत सरकार की अपेक्षाओं एवं उद्देश्यों की सफल पूर्ति करेगा।राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसके आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज जब भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है, तब यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिल फैसला लिया है। देश में आखिरी बार 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मंजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई।  जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही विकसित होते हैं। इसलिए जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समयसीमा में पूर्ति करने का आव्हान किया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्योहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन की अधिकारियों को दी बधाई  मुख्यमंत्री ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जी-रामजी की योजना क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री ने  खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। पहला चरण 1 मई से शुरू होगा  बता दें देश की जनगणना 2027 का पहला चरण, जिसे हाउसलिस्टिंग (मकान सूचीकरण) और आवास जनगणना कहा जाता है, 1 मई 2026 से शुरू होगी। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। इस चरण में 30 दिनों की अवधि में घरों की स्थिति और सुविधाओं की गणना की जाएगी। इसके बाद जगणना का दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा।  

सिविलियन ड्रोन क्षेत्र में भारत पिछड़ा, MP में क्रांति के बावजूद रुचि नहीं, ग्लोबल रैंक 13वीं

भोपाल  मध्यप्रदेश को ‘ड्रोन हब’ बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने ‘एमपी ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025’ लागू कर भारी-भरकम सब्सिडी के द्वार तो खोल दिए हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के शीर्ष राज्यों के मुकाबले मध्यप्रदेश में ड्रोन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बेहद सुस्त है। जहां महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ देश में टॉप पर है, वहीं मध्यप्रदेश में यह संख्या महज 480 पर सिमटी हुई है। नीति में ‘बम्पर ऑफर’, पर रुझान कम राज्य सरकार ने अपनी नई पॉलिसी में निवेशकों के लिए रेड कार्पेट बिछाया है। नीति के तहत ड्रोन निर्माण के लिए 40% तक की कैपिटल सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपए तक) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए 2 करोड़ रुपए तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देशभर में 13वें स्थान पर पिछड़ गया है। यहां तक कि हरियाणा (2,179) और आंध्र प्रदेश (1,876) जैसे राज्य भी हमसे कहीं आगे निकल चुके हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कोसों पीछे हम सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 38,475 ड्रोन रजिस्टर्ड हैं। इसमें मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 2% भी नहीं है। महाराष्ट्र: 8,210 (नंबर 1) तमिलनाडु: 5,878 (नंबर 2) तेलंगाना: 3,657 (नंबर 3) मध्य प्रदेश: 480 (नंबर 13) किसानों और युवाओं के लिए बड़े वादे, पर रजिस्ट्रेशन का ‘पेच’ सरकार का दावा है कि ड्रोन नीति से कृषि क्षेत्र में क्रांति आएगी और 8,000 नए रोजगार पैदा होंगे। ‘नमो ड्रोन दीदी’ और ‘सीखो-कमाओ योजना’ के जरिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और रिमोट पायलट लाइसेंस को लेकर जागरूकता की कमी के कारण लोग आधिकारिक पंजीकरण (UIN) कराने से कतरा रहे हैं। ड्रोन पॉलिसी 2025 की 3 बड़ी बातें: भारी सब्सिडी: नए निवेश पर 40% सब्सिडी और लीज रेंट पर 25% की छूट। पेटेंट में मदद: घरेलू पेटेंट के लिए 5 लाख और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता। ट्रेनिंग इंसेंटिव: ड्रोन ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को 8,000 रुपए प्रति माह का स्टाइपेंड। वजन के आधार पर होता है ड्रोन का रजिस्ट्रेशन ‘ड्रोन नियम 2021’ के तहत भारत में ड्रोन का वर्गीकरण और पंजीकरण उनके वजन (Weight) के आधार पर किया जाता है। क्या अन्य प्रकार के ड्रोन भी रजिस्टर्ड होते हैं? इसके संबंध में जानकारी नीचे दी गई है: सैन्य ड्रोन (Military Drones): ड्रोन नियम 2021 स्पष्ट रूप से उन ड्रोन पर लागू नहीं होते जो भारत की नौसेना, थल सेना या वायु सेना के स्वामित्व में हैं या उनके द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इनके लिए सैन्य प्रोटोकॉल के तहत अलग व्यवस्था होती है। शोध और विकास (R&D): अनुसंधान, विकास और परीक्षण के उद्देश्य से उपयोग किए जाने वाले ड्रोन को ‘टाइप सर्टिफिकेट’, ‘विशिष्ट पहचान संख्या’ (UIN) और ‘रिमोट पायलट लाइसेंस’ की आवश्यकता से छूट दी गई है, बशर्ते वे निर्धारित ग्रीन जोन में संचालित हों। प्रतिबंधित वस्तुएं: ड्रोन नियमों के तहत हथियारों, गोला-बारूद या किसी भी प्रकार के खतरनाक सामान की ढुलाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

स्थापना दिवस समारोह की तैयारियां पूरी, राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम में रावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे

राज्य निर्वाचन आयोग का स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  रावत होंगे मुख्य अतिथि भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का 32वां स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को सुबह 11 बजे से आयोजित किया जायेगा। समारोह के मुख्य अतिथि भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ओ.पी. रावत होंगे।  रावत “वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देंगे। पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त  आर परशुराम “स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौतियाँ” विषय पर उद्बोधन देंगे। दैनिक भास्कर, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष  नरेन्द्र कुमार सिंह “जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव” विषय पर और एडवोकेट  सिद्धार्थ सेठ स्थानीय निर्वाचन में न्यायालयीन सबक” विषय पर उद्बोधन देंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग  दीपक सिंह ने बताया है कि समारोह में आयोग के निर्वाचन साहित्य-ई बुक का विमोचन और प्रेक्षा मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया जायेगा। साथ ही स्थानीय निर्वाचन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किये जायेंगे।  

भोपाल में करोड़ों के विकास कार्यों की शुरुआत, राज्यमंत्री गौर ने किया शिलान्यास

भोपाल के विकास की नई उड़ान: राज्यमंत्री  गौर ने किया साढ़े 5 करोड़ से अधिक लागत के विकासकार्यों का भूमिपूजन साकेत नगर में 2 करोड़ 29 लाख, बाइपास से संपदा कॉलोनी तक 3 करोड़ 36 लाख की लागत से तक बनेगी सड़क भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शुक्रवार को गोविंदपुरा क्षेत्र में करीब साढ़े 5 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाली दो मुख्य सड़कों का भूमिपूजन किया। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि क्षेत्र के विकास में स्थानीय जनप्रतिनिधि महती भूमिका निभा रहे हैं। हर कार्य को उत्कृष्टता के साथ पूर्ण करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साकेत नगर में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं और ऐसे विकासकार्य निरंतर जारी रहेंगे। राज्यमंत्री गौर ने पंचवटी मार्केट से साकेत नगर एरिया में 1.7 किलोमीटर के रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया, इसकी अनुमानित लागत 2 करोड़ 29 लाख रुपए है। उन्होंने वार्ड 62 में पिरिया मोहल्ला संपदा कॉलोनी में 60 मीटर चौड़ाई वाली 1.3 किलोमीटर की सड़क का भी भूमिपूजन किया, जिसकी अनुमानित लागत 3 करोड़ 36 लाख रुपए है। कार्यक्रम में पार्षद ममता विश्वकर्मा,  अर्चना परमार,  छाया ठाकुर,  नीरज सिंह,  संतोष ग्वाला,  मनोज विश्वकर्मा,  नरेंद्र ठाकुर, समाजसेवी  करनेल सिंह,  लीलाधर मालवीय,  सुरेंद्र द्विवेदी,  अनिल गुप्ता सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और रहवासी मौजूद रहे।  

₹10 के पान मसाले का महंगा खुलासा, शाहरुख और अन्य स्टार्स कोर्ट में तलब, कानूनी मुसीबत बढ़ी

गुना  क्या 10 रुपए के गुटखे में 4 लाख रुपए किलो वाला असली केसर होना मुमकिन है? इसी सवाल ने अब बॉलीवुड के दिग्गज सुपरस्टार्स को कानूनी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक फेमस ‘पान मसाला’ के विज्ञापनों में ‘दाने-दाने में केसर का दम’ के दावे को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने गुटखा में ‘केसर’ के दावे को लेकर फिल्म स्टार अक्षय कुमार, अजय देवगन, शाहरूख खान और टाइगर श्रॉफ को तलब किया है। दरअसल ‘दाने-दाने में केसर का स्वाद’ के दावे को गुना के एक विट्ठल अहिरवार ने कोर्ट में चैलेंज किया है। उन्होंने आयोग में केस दाखिल किया है। गुना निवासी विट्ठल अहिरवार ने अपने मित्र के लिए एक फेमस पान मसाला का पाउच खरीदा था। विज्ञापन में बॉलीवुड स्टार्स अक्षय कुमार, शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को यह कहते सुना कि इसमें ‘केसर’ है, लेकिन जब विट्ठल ने पाउच के कंटेंट्स (सामग्री) की जांच की, तो उसमें केसर का कोई जिक्र नहीं मिला। उपभोक्ता विट्ठल ने अपने अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह यादव के माध्यम से पहले जिला उपभोक्ता फोरम, गुना में परिवाद पेश किया। हालांकि, वहां से अभिनेताओं के नाम हटाने का आदेश मिलने के बाद, विट्ठल ने अधिवक्ता अनुराग खासकलम के माध्यम से राज्य उपभोक्ता आयोग (Case No – FA/25/1678) में अपील दायर की थी। 5 मार्च को होना होगा पेश मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पान मसाला निर्माता कंपनी और इसके विज्ञापन करने वाले सितारों को यह साबित करना होगा कि उत्पाद में वाकई केसर है। बता दें कि पिछली तारीख 20 जनवरी 2026 को किसी भी पक्ष की ओर से जवाब नहीं आया। आयोग ने अब अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को रखी है। इसमें सभी ब्रांड एंबेसडर और गुना के पान मसाला विक्रेता को पेश होने का अंतिम आदेश दिया है। पान मसाला में ‘केसर के दावे’ को चैलेंज करने का तर्क पान मसाला के विज्ञापन और उसमें फिल्म स्टार द्वारा किए गए ‘दाने दाने में केसर का दम’ के दावे को चैलेंज करते हुए अपीलकर्ता विट्ठल अहिरवार ने कई तर्क दिए हैं। इसमें कहा गया है कि असली केसर की कीमत 4 लाख से 4.5 लाख रुपए प्रति किलो है। ऐसे में 10 रुपए के पाउच में केसर का दावा पूरी तरह भ्रामक है।     उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि युवा इन सितारों को अपना रोल मॉडल मानते हैं। उनके प्रभाव में आकर युवा गुटखे के आदी हो रहे हैं, जिससे 20 से 40 वर्ष की उम्र में ही वे कैंसर और शारीरिक कमजोरी जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।     अपीलकर्ता ने मांग की है कि ऐसे भ्रामक विज्ञापनों के जरिए जनता को गुमराह करने वाले सितारों से उनके ‘पद्मश्री’ पुरस्कार वापस लिए जाने चाहिए और इन विज्ञापनों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। यदि साबित नहीं कर सके तो, जुर्माना-प्रतिबंध लग सकता है उपभोक्ता मामलों के जानकार वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नन्हौरिया बताते हैं कि गुना के विटठ्ल अहिरवार द्वारा उठाया गया मुद्दा समाज हित में है। कंपनियां सितारों को मोटी रकम देकर कुछ भी भ्रामक और झूठे दावे कराती हैं। जबकि वे सत्यता से परे होते हैं। इस मामले में पान मसाला कंपनी, विक्रेता और सिने स्टार को यह सिद्ध करना होगा कि विज्ञापन में जो दावा किया जा रहा है, वह सत्य और सही है। उनके प्रोडक्ट में वे तत्व मौजूद हैं, जिनका दावा किया गया है। यदि वे ऐसा करने में विफल रहे तो कंपनी सहित उन पर जुर्माना लग सकता है। वहीं कंपनी के इस विज्ञापन पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

उज्जैन बायपास रेलवे लाइन को स्वीकृति, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेल मंत्री को कहा धन्यवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन बायपास रेलवे लाइन परियोजना की स्वीकृति के लिए रेल मंत्री  वैष्णव का माना आभार नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किमी लंबी बायपास रेलवे लाइन से निर्बाध रेल आवागमन होगा सुनिश्चित उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेल मंत्रालय द्वारा उज्जैन बायपास लाइन को स्वीकृति प्रदान करने के लिए रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का आभार माना है। कुल 8.60 किमी की नईखेड़ी-चिंतामन गणेश रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली इस लाइन के प्रारंभ होने से उज्जैन के समीप वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे उज्जैन से ट्रेनों को वापस मोड़ने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और ट्रेनों में विलंब नहीं होगा। यह व्यवस्था ‘सिंहस्थ-2028’ के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाएगी। उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल द्वारा 189.04 करोड़ रुपये की इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।  

प्रेम-व्यापार: महिला अधिकारी ने 1.5 करोड़ में प्रेमी को पत्नी से अलग कराया, जुदाई की कहानी सुर्खियों में

भोपाल  भोपाल के कुटुंब न्यायालय में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जुदाई’ की यादें ताजा कर दीं। भोपाल के एक परिवार में शांति बहाली के लिए रिश्तों का बाकायदा वित्तीय समझौता किया है। एक महिला ने अपनी गृहस्थी में जहर घोल रही ‘सौतन’ से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति और कैश लेकर अपने पति को हमेशा के लिए उसके नाम कर दिया। शहर के न्यायिक गलियारों में इस ‘महंगे तलाक’ की चर्चा हर तरफ है। सरकारी विभाग में हैं कार्यरत मामला केंद्रीय सरकारी विभाग का है। यहां तैनात एक 42 वर्षीय अधिकारी का प्रेम प्रसंग अपनी ही सहकर्मी के साथ शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि प्रेमिका की उम्र 54 वर्ष है, जो अधिकारी से उम्र में 12 साल बड़ी है। इस प्रेम के परवान चढ़ते ही अधिकारी ने अपने घर, पत्नी और दो मासूम बेटियों की अनदेखी शुरू कर दी। घर में आए दिन होने वाले विवादों ने वातावरण को बोझिल बना दिया था। बेटियों पर पड़ रहा था असर माता-पिता के बीच हर दिन होने वाली ‘महाभारत’ का सबसे बुरा असर 16 और 12 साल की दो बेटियों पर पड़ रहा था। मानसिक अवसाद से जूझ रही बड़ी बेटी ने हिम्मत दिखाई और मामले को कुटुंब न्यायालय तक ले गई। काउंसलिंग सत्र के दौरान पति ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं है और उसे अपनी सहकर्मी (प्रेमिका) के साथ ही मानसिक शांति मिलती है। जब रिश्ता जुड़ना नामुमकिन है, तो पत्नी ने एक व्यावहारिक रास्ता चुना। मान ली यह शर्त उसने मांग रखी कि बेटियों के भविष्य और गुजर-बसर के लिए उसे एक शानदार डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएं। हैरत की बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह शर्त मान ली। प्रेमिका का तर्क था कि वह अपने साथी के परिवार को बेसहारा नहीं देखना चाहती, इसलिए वह अपनी जीवन भर की जमापूंजी इस सौदे में लगाने को तैयार है। पारिवारिक मामलों के काउंसलर्स का मानना है कि जहां भावनाएं खत्म हो जाएं, वहां जबरन साथ रहने से बेहतर सम्मानजनक विदाई होती है। यह निर्णय भले ही समाज को अजीब लगे, लेकिन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा के नजरिए से यह एक तार्किक कदम है। जब रिश्ता केवल बोझ बन जाए तो शांति के लिए अलग होना ही अच्छा है।

भक्तों के लिए खास रात: बागेश्वर महाराज ने अन्नपूर्णा मंडप में स्वयं बनाई प्रसादी की पूरियां

छतरपुर बुंदेलखंड के प्रसिद्ध आस्था केंद्र बागेश्वर धाम में आयोजित होने जा रहे सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 13 और 14 फरवरी को हल्दी एवं मेहंदी की रस्में संपन्न होंगी, जबकि 15 फरवरी को 300 बेटियों की बारात धाम पहुंचेगी। पिछले एक महीने से दिन-रात चल रही तैयारियों के बीच 12-13 फरवरी की आधी रात को अचानक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की हकीकत परखी गई। रात 3:30 बजे अन्नपूर्णा मंडप में महाराज पहुंचे।  मध्य रात्रि के दरमियान बागेश्वर महाराज मोटरसाइकिल से अचानक अन्नपूर्णा मंडप पहुंचे। उस समय सैकड़ों महिला-पुरुष कार्यकर्ता और सेवादार आगामी मंडप के दिवस पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी और भंडारे की तैयारी में जुटे थे। महाराज के अचानक पहुंचने से वहां मौजूद सेवादार, कार्यकर्ता आश्चर्यचकित रह गए। इस दौरान महाराज श्री ने स्वयं भट्टी पर बैठकर पूड़ियां तलीं और भंडार गृह, प्रसाद वितरण, प्रसाद पाने आदि व्यवस्था को पैदल घूमकर देखा।  तदोपरांत अन्नपूर्णा मंडप के बाद महाराज सीधे उस मुख्य विवाह मंडप में पहुंचे, जहां 300 कन्याओं का पाणिग्रहण संस्कार होना है। मंडप की साज-सज्जा, बैठने की व्यवस्था, आवागमन मार्ग और सुरक्षा इंतजाम, सज सज्जा सहित आदि जगहों का बारीकी से अवलोकन किया गया। वहीं बगल में लगे 57 मायने वाले बेटियों के उपहार सामग्री कक्ष प्रांगण में जाकर विवाह हेतु तैयार किए गए सामान की जानकारी ली और वीडियो के माध्यम से व्यवस्थाओं को साझा किया। बागेश्वर महाराज हर वर्ष रात्रि निरीक्षण करते हैं। धाम में हर वर्ष आयोजित होने वाले सामूहिक कन्या विवाह से पूर्व एक-दो दिन पहले बागेश्वर महाराज स्वयं रात्रि निरीक्षण करते हैं। उद्देश्य यह रहता है कि आने वाले श्रद्धालुओं और बारातियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो चाहे वह प्रसाद, आवास, पेयजल या आवागमन से जुड़ी हो। निरीक्षण के दौरान समिति को आवश्यक निर्देश भी दिए गए, ताकि कार्यक्रम सुचारु और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। समिति द्वारा महाराज के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 300 जरूरतमंद बेटियों के विवाह को लेकर पूरे धाम में सेवा और समर्पण का वातावरण है। हल्दी, मेहंदी और विवाह समारोह के साथ यह आयोजन आस्था, सामाजिक समरसता और सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण बन रहा है। कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव हल्दी, मेहंदी कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शुक्रवार को दोपहर 3 बजे बागेश्वर धाम आएंगे। धाम के सेवादार नितेंद्र चौबे ने बताया कि दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री के आने की सूचना है। अधिकृत जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 3.45 पर हेलीकॉप्टर से बागेश्वर धाम पहुंचेंगे और बाद में खजुराहो एयरपोर्ट से शाम 5.20 बजे विमान से भोपाल रवाना हो जाएंगे। शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा देने के उद्देश्य से पूज्य संतों की उपस्थिति में शुक्रवार को गुरुकुलम का शुभारंभ हो रहा है। वैदिक शिक्षा के साथ यहां पढऩे वाले विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से भी अवगत कराया जाएगा। गुरुकुलम का शुभारंभ करने अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक रमेश भाई ओझा एवं प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले बागेश्वर धाम आ रहे हैं। दोनों प्रख्यात संत पहली बार बागेश्वर धाम आ रहे हैं। गुरुकुलम की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। गौशाला में इसकी शुरुआत होगी। पूरी तरह से प्राकृतिक परिवेश में 31 बच्चों को गुरुकुल परंपरा के तहत शिक्षा दी जाएगी। बनारस के प्रकांड विद्वान आचार्य द्वारा गुरुकुलम के बच्चों को शिक्षित किया जाएगा। 

बिजली बिल में चार गुना उछाल, स्मार्ट मीटर की वजह से हुआ विवाद; आयोग ने मांगी मुआवजे की कार्रवाई

 ग्वालियर  ग्वालियर में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दायर एक महत्वपूर्ण प्रकरण में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने स्मार्ट मीटर लगाने के बाद अचानक बढ़े बिजली बिल को सेवा में कमी मानते हुए बिजली कंपनी को संशोधित बिल जारी करने और क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं। स्मार्ट मीटर लगते ही बढ़ गया बिल प्रकरण में सामने आया कि स्मार्ट मीटर लगाने के दो दिन के भीतर ही उपभोक्ता का बिजली बिल चार गुना बढ़ गया। अप्रैल 2025 में 159 यूनिट खपत पर 437 रुपए का बिल जारी हुआ था, लेकिन दो दिन बाद ऑनलाइन पोर्टल पर 157 यूनिट खपत के साथ 1830 रुपए की राशि दर्शा दी गई। दो दिन में चार गुना बढ़ा बिल शशि वाजपेयी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि बिजली कंपनी ने बिना स्पष्ट सहमति के उनका पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित कर दिया। विरोध के बाद पुराना मीटर दोबारा लगाया गया, लेकिन इसका सही रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया। आयोग ने माना कि एक ही माह में दो अलग बिल जारी करना और शिकायत के बावजूद सुधार न करना सेवा में कमी है। आयोग ने मानी कमी आयोग ने कंपनी को 45 दिनों में वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करने के आदेश दिए। साथ ही 2,000 रुपए मानसिक क्षति और 2,000 रुपए वाद व्यय देने के निर्देश दिए। स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ता विवाद शहर में अब तक करीब 23 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि इनसे बिजली बिल बढ़ रहा है। विरोध के चलते फिलहाल स्मार्ट मीटर लगाने का काम रोक दिया गया है। ये स्थिति केवल ग्वालियर शहर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में बनी हुई है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद लगातार दो-तीन गुना बिल बढ़ने की शिकायतें बिजली विभाग तक पहुंच रही हैं।

सैलरी से ज्यादा कमाई वाले IPS अफसर, मध्य प्रदेश में करोड़ों की संपत्ति का पर्दाफाश

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के कई आईपीएस अधिकारी अपनी सैलरी से ज्यादा कमाई किराए और संपत्तियों से कर रहे हैं। यह खुलासा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को सौंपे गए वार्षिक संपत्ति विवरण (Annual Property Return) से हुआ है। नियम के मुताबिक सभी आईपीएस अधिकारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देना अनिवार्य होता है। ताजा आंकड़ों में सामने आया है कि प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और हर साल लाखों-करोड़ों रुपए किराए से कमा रहे हैं। अजय शर्मा के पास 11.65 करोड़ की संपत्ति पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष अजय शर्मा के पास करीब 11 करोड़ 65 लाख रुपए की संपत्ति दर्ज है। उन्हें हर महीने लगभग 3 लाख 80 हजार रुपए किराया प्राप्त होता है। भोपाल और दिल्ली सहित अन्य शहरों में भी उनकी अचल संपत्तियां बताई गई हैं। उपेंद्र जैन और वरुण कपूर भी करोड़पति आईपीएस उपेंद्र जैन के पास 8 करोड़ 39 लाख रुपए की संपत्ति है। इंदौर, बड़वाह और भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में उनकी संपत्तियां दर्ज हैं। जेल डीजी वरुण कपूर के पास 8 करोड़ 43 लाख रुपए की अचल संपत्ति है। उन्हें हर साल करीब 5 लाख 12 हजार रुपए किराए से आय होती है। जयदीप प्रसाद और अनिल कुमार की भी बड़ी संपत्ति एडीजी, एससीआरबी जयदीप प्रसाद के पास 5 करोड़ 32 लाख रुपए की चल संपत्ति दर्ज है। रांची, हजारीबाग, भोपाल, सीहोर और गुड़गांव में उनकी संपत्तियां हैं। उन्हें हर साल करीब 74 लाख रुपए की आय इन संपत्तियों से होती है। महिला शाखा के स्पेशल डीजी अनिल कुमार के पास 4 करोड़ 81 लाख रुपए की संपत्ति बताई गई है। नियम क्या कहते हैं? केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के नियमों के अनुसार हर आईपीएस अधिकारी को अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य है। इसी प्रक्रिया के तहत यह जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में आई है।मध्यप्रदेश में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और नियमित वेतन के अलावा किराए से भी बड़ी आय अर्जित कर रहे हैं। संपत्ति विवरण के खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।

नगर परिषद भरोसा के कर्मचारियों को भुगतान न मिलने से हो रही परेशानी

इंदौर नगर परिषद भोरासा जिला देवास मध्य प्रदेश यहां के कर्मचारी संघ के कर्मचारी गण ने बताया कि 6 महीने से अधिक समय हो गया है ! अभी तक हमारी तनख्वा आप प्राप्त है कर्मचारियों ने पूछा कि हमारी तनक अभी तक क्यों नहीं मिल पा रही है? तो जवाब में आया कि अभी तक ऊपर से तनख्वाह नहीं आई तो हम आपको कहां से दें ? यह भी प्राप्त हुआ कि उनमें से एक कर्मचारी बहुत ज्यादा परेशान होकर मुख्यमंत्री मोहन यादव जी से विनती कर रहा है कि हमारे बच्चों को स्कूल से निकाला जा रहा है और परीक्षा नजदीक आ रही है ऐसे में हमारे हमारे बच्चों का भविष्य भी अंधकार में होगा अगर हम लोगों ने स्कूल की फीस भरने में असमर्थ हैं? और इतना ही नहीं हमारे घर में किराने का सामान नहीं है कुछ कर्मचारी है बोल रहे कि इस स्थिति में हम जहर खा लेंगे उसके बाद भी तो हमें आप पैसा दोगे अगर हमें पैसा नहीं दिया तो अगला कदम वही होगा जो हमने बोला है? उसके बाद हम मरे या जिए इस से कोइ फरक नही पड़ रहा है !सुनील ठाकुर कर्मचारी नगर परिषद ने कहा कि समय रहते भुगतान करें ताकि हमारे साथ-साथ हमारे परिवार का भी भविष्य उज्जवल में हो सके कर्मचारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि नगर परिषद भरोसा के कर्मचारियों का भुगतान अति शीघ्र कराया जाए।

रेल का महाशिवरात्रि तोहफा, महाकाल मंदिर के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान, भीड़ कम होगी

उज्जैन  महाशिवरात्रि महापर्व पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और सीहोर (कुबेरेश्वर धाम) जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत दी है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए उज्जैन से भोपाल और संत हिरदाराम नगर के मध्य तीन जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें (Special Mela Trains) चलाने का निर्णय लिया है। मंडल रेल प्रवक्ता मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें 13 से 23 फरवरी तक संचालित की जाएंगी। ट्रेनों का शेड्यूल -1. उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09305/09306) संचालनः 13 से 22 फरवरी तक प्रतिदिन । समयः उज्जैन से सुबह 09:00 बजे चलकर दोपहर 13:30 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में वहां से दोपहर 14:30 बजे चलकर शाम 19:30 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर।     उज्जैन भोपाल उज्जैन (09307/09308) संचालनः 13 से 23 फरवरी तक प्रतिदिन। समयः उज्जैन से रात 21:00 बजे चलकर रात 02:10 बजे भोपाल पहुंचेगी। वापसी में भोपाल से सुबह 03:10 बजे चलकर सुबह 08:00 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः उपरोक्त स्टेशनों के साथ संत हिरदाराम नगर पर भी ठहराव।     उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09313/09314) – संचालनः 13-22 फरवरी तक रोज समयः उज्जैन से शाम 16:00 बजे चलकर रात 21:40 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में रात 22:30 बजे चलकर अगले दिन रात 2 बजे उज्जैन पहुंचेगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर। कोच और सुविधा रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन मेला स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए सामान्य और स्लीपर श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। इससे कम बजट में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी। 

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