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एनजीटी का आदेश: केरवा डेम में निजी भूमि नियमों से बाहर नहीं, 33 मीटर दायरे में हुआ भराव हटेगा

भोपाल  निजी जमीन का हवाला देकर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती. इसको लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. एनजीटी ने जलस्रोतों, हरित क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में हो रहे अवैध निर्माण और अन्य गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई स्थानों पर रोक लगा दी है. एनजीटी का कहना है कि पर्यावरण की कीमत पर विकास की मंजूरी नहीं दी जा सकती है. कैचमेंट एरिया में हो रहा हस्तक्षेप गंभीर एनजीटी के समक्ष आए मामलों में पाया गया कि कई जगहों पर निजी स्वामित्व की जमीन होने का तर्क देकर खनन, निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां की जा रही थीं. इस पर एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण कानून सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे निजी जमीन हो या सरकारी. एनजीटी ने खास तौर पर नदियों, तालाबों, जलाशयों और उनके कैचमेंट एरिया में हो रहे हस्तक्षेप को गंभीर माना है. इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गतिविधि से पहले पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य बताई गई है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केरवा डेम के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) की स्पष्ट मार्किंग करने, उसका जोन ऑफ इन्फ्लुएंस यानी प्रभाव क्षेत्र तय करने और अतिक्रमण रोकने के लिए महीने में दो बार नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए हैं।  ट्रिब्यूनल ने यह निर्देश पिछले साल केरवा डेम के एफटीएल क्षेत्र में 2000 डंपर मिट्टी व निर्माण सामग्री के भराव को लेकर आई खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर याचिका पर दिए हैं। एनजीटी ने साफ किया है कि बफर जोन में आने वाली निजी भूमि पर भी पर्यावरण से जुड़े सभी कानून-नियम पूरी तरह लागू होंगे। ऐसे में डेम के एफटीएल से 33 मीटर के दायरे में निजी जमीन पर किया गया भराव भी हटाना होगा। गौरतलब है कि पिछले साल एनजीटी के निर्देश पर कलेक्टर, सीपीसीबी, एमपीपीसीबी व स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित की गई थी। शेष | पेज 12 पर वेटलैंड अथॉरिटी तय करेगी प्रभाव क्षेत्र     एनजीटी ने स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को केरवा डेम का जोन ऑफ इन्फ्लुएंस तय करने के निर्देश दिए हैं, जबकि सीमांकन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई है। जोन ऑफ इन्फ्लुएंस में जलाशय के एफटीएल के साथ-साथ कैचमेंट एरिया में आने वाली नदियों और नालों का भी सीमांकन किया जाएगा। इन क्षेत्रों के आसपास निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी।     निजी भूमि का तर्क नहीं चलेगा… एनजीटी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि एफटीएल व बफर जोन के भीतर निजी स्वामित्व का दावा पर्यावरण कानूनों से छूट का आधार नहीं बन सकता। ट्रिब्यूनल ने संकेत दिए हैं कि यदि निर्धारित क्षेत्र में किया गया भराव नहीं हटाया गया तो संबंधित विभागों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। दोषियों से होगी पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई एनजीटी ने संबंधित जिलों के कलेक्टर, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों की जांच करें और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई करें. एनजीटी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है. साथ ही, पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई भी दोषियों से कराई जाएगी. वेटलैंड रुल्स 2017 का हो रहा उल्लंघन इस मामले में शिकायतकर्ता राशिद नूर खान ने बताया कि “भोपाल के ग्राम महुआखेड़ा स्थित केरवा डैम के फुल टैंक लेवल और आसपास के क्षेत्र में 2000 से अधिक डंपरों से कोपरा, मुर्रम और काली मिट्टी डाली गई है. इसका उद्देश्य जलाशय और उसके कैचमेंट क्षेत्र को समतल कर भविष्य में प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियां करना बताया गया है. जो वेटलैंड नियम 2017 और पर्यावरण कानूनों का सीधा उल्लंघन है.” संयुक्त समिति की रिपोर्ट से हुआ खुलासा एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति ने स्थल निरीक्षण में पाया कि फुल टैंक लेवल की चिन्हांकित सीमा के भीतर करीब 10 फीट तक कोपरा से अवैध भराव किया गया है. इससे डैम की जल भंडारण क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा और पारिस्थितिकी को गंभीर खतरा बताया गया. समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी भूमि पर किया गया भराव भी सीधे जल निकाय को प्रभावित कर रहा है. एनजीटी ने स्पष्ट कहा कि भूमि का निजी होना पर्यावरणीय उल्लंघन को वैध नहीं बनाता. 33 मीटर बफर जोन के उल्लंघन को स्वीकार करते हुए मिट्टी और कोपरा हटाने के नोटिस को सही ठहराया गया. सख्त निर्देश और निगरानी के आदेश एनजीटी ने जल संसाधन विभाग को एफटीएल क्षेत्र की नियमित निगरानी, जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को 2 माह में जोन आफ इंफ्लुएंस चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सतत निगरानी के आदेश दिए गए हैं. एनजीटी ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है. वेटलैंड प्राकृतिक स्पंज की तरह     वेटलैंड पाटना कितना खतरनाक है…. वेटलैंड प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करते हैं। बाढ़ रोकते हैं। भूजल रिचार्ज करते हैं। जैव विविधता बचाते हैं।     जोन ऑफ इन्फ्लुएंस क्यों तय होता है… इसमें वे इलाके आते हैं-जहां भूजल स्तर प्रभावित होता है, जहां बाढ़ या जलभराव का खतरा रहता है, जहां पर्यावरण व वेटलैंड सुरक्षित रखना जरूरी होता है। केरवा डेम महत्वपूर्ण क्यों? केरवा-कलियासोत का वन क्षेत्र आपस में जुड़ा है, जो जैव विविधता के लिहाज से संवेदनशील। केरवा से कोलार क्षेत्र में रोज करीब 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है।  

कर्नल सोफिया विवाद: मंत्री विजय शाह ने मीडिया से दूरी बनाई, 9 फरवरी को होगी मामले की सुनवाई

भोपाल  भाजपा प्रदेश मुख्यालय में  समस्याएं सुनने पहुंचे जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह उस वक्त असहज नजर आए, जब मीडिया ने उनसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण को लेकर सवाल पूछ लिया. सवाल सुनते ही मंत्री विजय शाह बिना कोई प्रतिक्रिया दिए सीधे वाहन में बैठकर रवाना हो गए. हालांकि, इसके बाद स्वास्थ्य राज्य मंत्री शिवाजी पटेल को अकेले प्रेस ब्रीफिंग की. मंत्री शाह और पटेल ने सुनी समस्या भाजपा संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेश मुख्यालय में मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है. प्रतिदिन दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रदेशभर से कार्यकर्ता अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं. जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव होता है, उनका मौके पर निराकरण किया जाता है, जबकि अन्य मामलों को संबंधित विभागों को भेजा जाता है. शुक्रवार को यह जिम्मेदारी मंत्री विजय शाह और मंत्री शिवाजी पटेल को सौंपी गई थी. मीडिया के सवालों से बचते दिखे विजय शाह कार्यकर्ताओं की सुनवाई के बाद जैसे ही दोनों मंत्री कार्यालय से बाहर निकले, मीडिया ने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर सवाल किया. सवाल सुनते ही मंत्री बिना कुछ कहे वाहन में बैठकर निकल गए. विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह के मामले में जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहती. इसलिए अभियोजन की मंजूरी को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में है. सरकार को 3 दिन में देना होगा जबाव 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुनवाई करते हुए एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है और मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई है. कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन का निर्णय लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. अब इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी को है, जबकि कार्यदिवसों के आधार पर सरकार के पास अभी लगभग तीन दिन का समय बचा है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार को देना है जवाब मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क यह दिया जाएगा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख शुरुआत से मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का भी रहा है। पार्टी और विधि विशेषज्ञों से राय-मशविरा सूत्रों के अनुसार, इस मसले पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अटार्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह ली गई है। लंबी चर्चा के बाद यह संकेत मिले हैं कि सरकार 9 फरवरी की सुनवाई में समय विस्तार की मांग कर सकती है, जिससे सुनवाई आगे बढ़ने की संभावना है। सरकार ने रिपोर्ट दिल्ली भेजी मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी मंशा से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। इस संबंध में एसीएस गृह शिवशेखर शुक्ला, सचिव गृह कृष्णा वेणी देशावतु और अतिरिक्त सचिव मनीषा सेंतिया दिल्ली गए थे। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदु पर सुनवाई संभावित है, जबकि 11 फरवरी को मामले के अन्य पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है। तीन सदस्यीय SIT कर रही जांच विजय शाह प्रकरण की जांच तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही है, जिसमें प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय मांग चुकी है। विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- ‘उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।’ शाह ने आगे कहा- ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।’ बजट सत्र के बाद हो सकती है कार्रवाई एसआईटी छह माह पहले ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें आरोपों की पुष्टि करते हुए मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है. अब अंतिम निर्णय सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा लिया जाएगा. माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद सरकार और पार्टी मंत्री विजय शाह के खिलाफ एकशन ले सकते हैं.

उमरिया में 7° तापमान, 10 जिलों में हल्का कोहरा, भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में पारा लुढ़केगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार रात तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे सर्दी का असर और गहरा हो गया है। उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। रीवा, खजुराहो, मंडला और सतना जैसे शहरों में भी पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत बड़े शहरों में भी सर्दी के इस नए दौर काअसर साफ नजर आ रहा है। करीब एक हफ्ते राहत नहीं मौसम विभाग के अनुसार- आने वाले दिनों में ठंड से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 8 फरवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है। इसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा। हालांकि, 10 फरवरी से पहले बारिश या ओलावृष्टि की संभावना कम है, लेकिन कोहरा और सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन और बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा, जहां पारा गिरकर 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 11 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि जबलपुर में 10.8 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार, उमरिया के बाद रीवा दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री दर्ज किया गया। खजुराहो में भी 7.4 डिग्री, मंडला में 7.9 डिग्री, नौगांव में 8.8 डिग्री, सतना में 8.9 डिग्री, राजगढ़ और शिवपुरी में 9 डिग्री, पचमढ़ी में 9.4 डिग्री तथा दमोह और मलाजखंड में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। इधर, प्रदेश में घने कोहरे का खास असर नहीं देखा गया। शनिवार सुबह भोपाल, उज्जैन, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, मंडला, सतना समेत करीब 10 जिलों में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया, जिससे सुबह के समय हल्की ठंड और दृश्यता में कमी महसूस की गई। कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। एक नजर प्रदेश में तापमान पर MP में 4 दिन कड़ाके की ठंड  ग्वालियर-चंबल में असर ज्यादा भोपाल-उज्जैन में भी पारा गिरेगा ग्वालियर, खजुराहो समेत 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे  कटनी, शहडोल और छतरपुर सबसे ठंडे  वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सकुर्लेशन की वजह से प्रदेश में ओले-बारिश शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री रहा

लाइफ केरियर स्कूल में पुरस्कार वितरण का हुआ आयोजन।

Prize distribution ceremony was organised at Life Career School. हरिप्रसाद गोहे आमला । नगर के पहले प्रायवेट लाइफ कॅरियर सीनियर सेकेण्डरी सी.बी.एस.ई. स्कूल में पुरस्कार वितरण का आयोजन किया गया।कार्यक्रम आमला तहसीलदार शत्रुघ्नसिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आमला पंकज दरोठिया एवं थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर के विशिष्ट आतिथ्य तथा हाईकोर्ट एडवोकेट शाहिद उल्ला बेग की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। गौरतलब हो कि विद्यालय के विद्यार्थियों ने विभिन्न खेलो में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जिसमें राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिता व्हॉंलीबाल में पीयूष पवार एवं रक्षा कोकाटे, क्रिकेट में – तनवी चौकीकर, बैडमिंटन में – रक्षा कोकाटे ने राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया। वहीं संभागस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं शतरंज में – तनय गुगनानी, मुदित गुगनानी एवं सिया कटरे, क्रिकेट में – बालिका वर्ग से खुशी खातरकर एवं भूमिका खातरकर, कबड्डी में – हर्षित गावंडे़, टेबल टेनिस में – पूर्वांश देशमुख ने बैतूल जिले का प्रतिनिधित्व किया। वार्षिक खेल महोत्सव में क्रिकेट में कक्षा 6 वी से 8वी के बेस्ट बेट्समेन- प्रिंस मीना, बेस्ट बॉलर- धर्मेश उईके, बेस्ट विकेट कीपर- इलेश कुमरे, बेस्ट फील्डर- आदित्य गिनारे, फ्यूचर स्टार- अंश कोकाटे ने पुरस्कार जीते। कक्षा 9वी से 12वी के बेस्ट बेट्समेन- अमूल्य रहडवे, बेस्ट बॉलर- अर्शिल मन्सूरी, बेस्ट विकेट कीपर- आयुश बनखेडे, बेस्ट फील्डर- शाकिर अंसारी, मेन ऑफ द सीरीज – अर्पित ने पुरस्कार जीते। व्हॉलीबाल 6वी से 12वी के बालक वर्ग से बेस्ट स्मैशर – यशवंत रावत एवं सैटर- मयंक पटवारी, तथा बालिका वर्ग से बेस्ट स्मैशर- कनक शरनागत एवं सैटर- त्रिशा घोटे ने पुरस्कार जीते। कबड्डी 6वी से 8वी में बेस्ट राईडर का पुरस्कार मोहित सूर्यवंशी ने जीता। बेस्‍ट स्‍टूडेंट का एवॉर्ड चैतन्‍य दामले को दिया गया। इस मौके पर तहसीलदार शत्रुघ्नसिंह चौहान ने अपने मुख्य आतिथ्य उदबोधन में कहा कि खेल शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक विकास और सामाजिक कौशल में वृद्धि करता है, यह शरीर को मजबूत बनाता है, तनाव कम करता है, एकाग्रता बढ़ाता है, टीम वर्क सिखाता है और नेतृत्व जैसे गुण विकसित करता है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंकज दरोठिया ने अपने विशिष्ट आतिथ्य उद्बोधन में कहा कि खेल जीवन की चुनौतियों का सामना करना और हार-जीत को सहजता से स्वीकार करना सिखातें है, जो व्यावहारिक जीवन में भी मददगार होते है। थाना प्रभारी मोहित ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि नियमों का पालन करना और धैर्य के साथ खेल में प्रदर्शन करना व्यक्ति को अनुशासित बनाता है। हाईकोर्ट एडवोकेट शाहिद उल्ला बेग ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि टीम गेम (जैसे क्रिकेट, फुटबॉल, व्हॉलीबाल, कबड्डी आदि) खेलने से आपसी तालमेल, सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व के गुण विकसित होते है। इसके अतिरिक्त खेल मानसिक तनाव को कम करते हैं और दिमाग को सक्रिय रखते हैं, जिससे एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृध्दि होती है। पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को एवाॅर्ड , मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन शिक्षिका सोनिका जोशी ने किया एवं शिक्षिका निशा यादव ने आभार व्यक्त किया।

IAS पुलकित गर्ग की बेटी का आंगनबाड़ी में एडमिशन, समाज में हो रही तारीफ

चित्रकूट  चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग इन दिनों एक खास फैसले को लेकर चर्चा में हैं. जहां आमतौर पर सक्षम परिवार अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट प्ले स्कूलों में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं, वहीं IAS अधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का एडमिशन सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर मिसाल पेश की है. उनके इस कदम को सरकारी शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. पुलकित गर्ग की बतौर जिलाधिकारी पहली तैनाती चित्रकूट में हुई है. पद संभालने के कुछ समय बाद जब उनकी बेटी के प्ले स्कूल में एडमिशन की बारी आई, तो उन्होंने इसे औपचारिकता की तरह नहीं लिया, बल्कि एक जागरूक अभिभावक की तरह विकल्पों की गंभीरता से पड़ताल की. उन्होंने और उनकी पत्नी ने जिले के कई निजी प्ले स्कूलों के साथ-साथ कई आंगनबाड़ी केंद्रों का भी दौरा किया. सुविधाएं, वातावरण, बच्चों की गतिविधियां और शिक्षण व्यवस्था देखने के बाद उन्होंने जिला मुख्यालय में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को सबसे उपयुक्त पाया. जिस आंगनबाड़ी केंद्र में बेटी सिया का दाखिला कराया गया है, वहां करीब 35 बच्चे पंजीकृत हैं. सिया भी अन्य बच्चों की तरह उनके साथ बैठकर एक्टिविटीज में भाग लेती है, पढ़ाई करती है और मध्याह्न भोजन के समय सबके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाती है. केंद्र में बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने का माहौल तैयार किया गया है. रंगीन दीवारें, तस्वीरें, खिलौने, एजुकेशन किट, एबीसी और नंबर चार्ट जैसे साधन हैं, जो प्राइमरी एजुकेशन को रोचक बनाते हैं. जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूती बड़ी बिल्डिंग्स या हाई फीस से नहीं, बल्कि सही माहौल, देखभाल और एक्टिविटी से आती है. उन्होंने कहा कि प्ले स्कूल या प्री-स्कूल स्तर की शिक्षा बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री पर लगातार काम किया जा रहा है. कार्यकर्ताओं को यह तय शेड्यूल दिया जाता है कि बच्चों को रोज क्या और कैसे सिखाना है- जैसे कहानियां, भावगीत, खेल गतिविधियां और बुनियादी सीख. आईएएस पुलकित गर्ग ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग भी कराई जा रही है, ताकि बच्चों को बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और पोषण मिल सके. छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक विकास पर यहां विशेष ध्यान दिया जाता है. उनका कहना है कि अभिभावकों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भरोसा करना चाहिए और छोटे बच्चों को वहां जरूर भेजना चाहिए. आईएएस अधिकारी के इस फैसले का एक प्रशासनिक संदेश भी माना जा रहा है. यदि व्यवस्थाएं मजबूत हों तो अधिकारी खुद भी उन पर भरोसा दिखा सकते हैं. पुलकित गर्ग ने कहा कि उनका लक्ष्य जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करना है. जहां जरूरत होगी वहां मरम्मत, नवीनीकरण और संसाधन बढ़ाने का काम किया जाएगा. स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने इस कदम की सराहना की है. उनका कहना है कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चे को आंगनबाड़ी भेजते हैं तो इससे व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है.

होली के लिए भोपाल-रीवा रूट पर 6 स्पेशल ट्रेनें, कंफर्म टिकट पाएं, देखें पूरा शेड्यूल

भोपाल   होली त्योहार के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे रानी कमलापति और भोपाल से रीवा के लिए कुल चार जोड़ी होली स्पेशल ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है। इसके अलावा रानी कमलापति दानापुर के बीच भी द्वि-साप्ताहिक होली स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इन ट्रेनों से सतना, कटनी, सागर, बीना सहित मध्यप्रदेश के कई जिलों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने बताया कि इस ट्रेन के स्टापेज की मांग लंबे समय से चल रही थी, जो अब मंजूर हो गई है। भोपाल–रीवा के बीच भी चलेगी स्पेशल ट्रेन गाड़ी संख्या 01704 गुरुवार 5 मार्च को सुबह 10:30 बजे भोपाल से चलकर रात 8:45 बजे रीवा पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01703 उसी दिन रात 10:20 बजे रीवा से रवाना होकर अगले दिन सुबह 9:05 बजे भोपाल पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव भी सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना और विदिशा में रहेगा। चलेंगी ये स्पेशल ट्रेनें रीवा–रानी कमलापति साप्ताहिक स्पेशल (01-01 ट्रिप) गाड़ी संख्या 02192 शनिवार 28 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे रीवा से रवाना होकर रात 9:15 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 02191 उसी दिन रात 10:15 बजे रानी कमलापति से चलकर अगले दिन सुबह 7:30 बजे रीवा पहुंचेगी। रीवा–रानी कमलापति द्वि-साप्ताहिक स्पेशल (02-02 ट्रिप) गाड़ी संख्या 02186, 2 और 3 मार्च को दोपहर 12:30 बजे रीवा से प्रस्थान करेगी और रात 9:15 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 02185 रात 10:15 बजे रानी कमलापति से चलकर सुबह 7:30 बजे रीवा पहुंचेगी। इन दोनों ट्रेनों का ठहराव सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना और विदिशा स्टेशनों पर रहेगा। इन स्टेशनों में मिलेगा स्टॉपेज नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बक्सर और आरा में रहेगा।

MP Board Exam: ड्यूटी से इनकार करने वाले शिक्षक और कर्मचारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

ग्वालियर  माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाई स्कूल और हायर सेकंडरी परीक्षा 10 फरवरी से शुरू होने वाली है। परीक्षा में जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है, यदि वे ड्यूटी से इनकार करते हैं या अपनी ड्यूटी वाली जगह पर उपस्थिति नहीं होते हैं तो वे कार्रवाई के दायरे में आएंगे। इस संबंध में बोर्ड ने परीक्षा गाइडलाइन जारी करते समय ही एक पत्र जारी कर परीक्षा ड्यूटी में शामिल सभी शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवा को आवश्यक सेवा के दायरे में ला दिया था। यानी ड्यूटी लगने के बाद इनकार करने या ड्यूटी वाली जगह न पहुंचने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। एक फरवरी से 30 अप्रैल तक अति आवश्यक सेवा घोषित राज्यपाल के गजट नोटिफिकेशन और बोर्ड के आदेशों के क्रम में जिले में भी परीक्षा कार्य में लगे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाओं को एक फरवरी से 30 अप्रैल तक अति आवश्यक सेवाओं के दायरे में लाया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस अवधि के दौरान परीक्षा कार्य से जुड़े किसी भी कर्मचारी की भूमिका को अनिवार्य माना जाएगा। बहानेबाजी नहीं चलेगी शिक्षक स्वास्थ्य या अन्य निजी कारणों का हवाला देकर परीक्षा ड्यूटी से नाम कटवाते हैं या मौके पर नहीं पहुंचते। लेकिन इस बार कोई बहाना नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें प्रमाण देना पड़ेगा। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।  

मध्य प्रदेश में सरकार का बड़ा कदम, ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा एमएसएमई

भोपाल  मध्य प्रदेश में बड़े शहरों व कस्बों के बाद अब राज्य सरकार ग्राम पंचायत स्तर तक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों का विस्तार करेगी। एमएसएमई विभाग इसकी विस्तृत कार्ययोजना बना रहा है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और ग्राम स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके लिए पहले जिलों का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयन कर प्रयोग किया जाएगा। ऐसी ग्राम पंचायतें चिह्नित की जाएंगी जहां सड़क, बिजली, पानी और उद्योग के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। रियायती दरों पर निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को किया जा रहा चिह्नित बता दें, इंदौर के आसपास की ग्राम पंचायतों में पहले से 308 उद्योग स्थापित हैं। यहां 90.41 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश हुआ है और इससे 1954 लोग रोजगार पा रहे हैं। भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को भी चिह्नित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इनमें क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास के लिए योजनाबद्ध हस्तक्षेप आवश्यक है। जिससे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच न्यायसंगत अवसर सुनिश्चित किया जा सके। इसमें छोटे उद्यमों के लिए वित्तीय क्रेडिट को सरल बनाया जाएगा। नए उद्यमों के लिए बाजार में प्रवेश की बाधाओं का सरलीकरण किया जाएगा। एमएसएमई ऋण मूल्यांकन -कैश फ्लो आधारित जोखिम मूल्यांकन को अपनाना, वित्तीय माड्यूल को प्रशिक्षण में एकीकृत करना, सूचना विषमता को दूर करना और श्रमिक अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में काम किया जाएगा।  

एमपी में क्यूआर कोड से ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से बचाव, जानें इसकी कार्यप्रणाली

भोपाल  मध्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश पुलिस एक नई और प्रभावी पहल करने जा रही है। ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से क्यूआर कोड आधारित जागरूकता व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही साइबर अपराध से बचाव से जुड़ी आवश्यक और प्रमाणिक जानकारी सीधे मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो जाएगी। मध्य प्रदेश पुलिस साइबर विशेषज्ञों के सहयोग से इस नवाचार को अंतिम रूप दे रही है। योजना के तहत भोपाल सहित पूरे प्रदेश के भीड़भाड़ वाले स्थानों, प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी एवं निजी कार्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर ये क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो मार्च 2026 से प्रदेशवासियों को यह सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी।  इस परियोजना पर साइबर पुलिस के नेतृत्व में तेजी से काम चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में अपराधी नये-नये हथकंडे अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। ऐसे में तकनीक के जरिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। यह क्यूआर कोड न सिर्फ जानकारी देगा, बल्कि सही समय पर सही कदम उठाने में भी मदद करेगा। सभी प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे क्यूआर कोड सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी संस्थानों में भी प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाने की तैयारी है। इसके साथ-साथ इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग कर सकें। पुलिस अधीक्षक (साइबर) प्रणय नागवंशी ने बताया कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। साइबर मुख्यालय समय-समय पर एडवाइजरी जारी करता है और अब क्यूआर कोड के माध्यम से यह जानकारी और अधिक सुलभ हो जाएगी। क्यूआर कोड से मिलने वाले प्रमुख लाभ क्यूआर कोड स्कैन करने पर यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि साइबर अपराध से बचने के लिए क्या करें और किन बातों से बचें। आमतौर पर पूछे जाने वाले सवालों के सरल उत्तर भी उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime-gov-in) का सीधा लिंक दिया जाएगा, जिससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे। ठगी के अलावा फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग से जुड़ी सावधानियों की जानकारी भी मिलेगी। साथ ही, फर्जी कॉल, नकली नोटिस और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी धोखाधड़ी से बचने के जरूरी उपाय भी बताए जाएंगे। 

एमपी में 15 जिलों को 1500 करोड़ की छूट, बिजली कंपनी घर-घर पहुंचाएगी स्मार्ट मीटर के फायदे

भोपाल   राज्य शासन के निर्देश पर पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी इंदौर सहित सभी 15 जिलों में 9 से 23 फरवरी तक स्मार्ट मीटर पखवाड़ा मनाएगी। इस दौरान उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे, त्रुटिरहित व त्वरित बिजली बिल सेवा, ऊर्जस ऐप पर स्मार्ट मीटर की लाइव जानकारी, गैर घरेलू उपभोक्ताओं को पॉवर फैक्टर की छूट, सौर ऊर्जा गणना के लिए स्मार्ट मीटर से मीटर राशि की बचत और दिन में बिजली खपत के लिए टीओडी गणना इत्यादि लाभों को बताया जाएगा। स्मार्ट मीटर के फायदे बताए जाएंगे उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के साथ ही लगाए गए चेक मीटर संबंधित रिपोर्ट की जानकारी दी जाएगी, जिसमें दोनों ही मीटरों में खपत का स्तर समान दर्ज हुआ है। पखवाड़े के दौरान पश्चिम क्षेत्र कंपनी की ओर से शिविर, कार्यशालाएं, शिकायत निवारण, तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष सत्र, प्रदर्शनी इत्यादि के आयोजन होंगे। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य आम लोगों को स्मार्ट मीटर के फायदे बताने, भ्रम दूर करने एवं उपभोक्ताओं बिजली की संतुष्टि को लेकर रचनात्मक प्रयास है। 1500 करोड़ की छूट मिलेगी बिजली वितरण कंपनी औद्योगिक, उच्चदाब उपभोक्ताओं को नियमानुसार प्रति माह, प्रति बिल निर्धारित छूट (रिबेट) प्रदान कर रही है। पिछले बारह माह के दौरान नए कनेक्शनों पर छूट, कैप्टिव छूट, इंक्रीमेंटल छूट, टीओडी छूट, पॉवर फैक्टर छूट, सब्सिडी, प्रॉम्प्ट पैमेंट, ग्रीन फील्ड छूट मिलाकर कुल 1500 करोड़ रुपए की छूट प्रदान की गई है ताकि उद्योगों को गति मिले, रोजगार, विकास के अवसर में पर्याप्त वृद्धि हो।

पीएमएफएमई योजना के तहत प्रदेश के युवा बना रहे हैं उद्योग और स्थापित कर रहे हैं अपनी पहचान

पीएमएफएमई योजना प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन एवं ईच्छाशक्ति युवाओं के सपने साकार करने में सहायक भोपाल  केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी  अभिषेक जायसवाल ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की है। यह प्रदेश के युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता एवं वित्तीय सहयोग के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें। यूनिट स्थापना से मिली नई पहचान बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी अभिषेक जायसवाल एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर बीएससी तथा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। शुरू से ही कृषि से जुड़े परिवार से होने के कारण अभिषेक की कृषि से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में रूचि थी। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना द्वारा अभिषेक ने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना कर मात्र 4 माह में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पीएमएफएमई योजना से मिला संबल अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत करने का निर्णय लिया। योजना में उन्होंने बैंक से प्राप्त सहायता राशि के माध्यम से माह अक्टूबर 2025 में डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की। इस यूनिट में मुख्य रूप से प्याज, केला के डिहाइड्रेट उत्पादों को तैयार करते हैं। क्या है डिहाइड्रेट यूनिट डिहाइड्रेशन यूनिट एक ऐसी प्रसंस्करण इकाई है, जिसमें फल एवं सब्जियों जैसे प्याज, केला, हल्दी तथा पत्तेदार सब्जियों से कम तापमान पर नमी हटाकर उन्हें सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और उन्हें फ्लेक्स, चिप्स अथवा पाउडर के रूप में उपयोग योग्य बनाती है। डिहाइड्रेशन के कारण उत्पाद लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे भंडारण एवं परिवहन आसान और कम खर्चीला हो जाता है। सही तकनीक से सुखाने पर उत्पाद का रंग, स्वाद एवं पोषण तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं। प्रक्रिया अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि यूनिट में प्याज को डिहाइड्रेट करने के लिए पहले उसका छिलका हटाकर अच्छे से साफ कर कटर मशीन से 1 एमएम स्लाइस बनाए जाते हैं। इन स्लाइसों को क्रेट में भरकर इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर में निर्धारित तापमान पर लगभग 10 घंटे रखा जाता है, जिससे डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार होता है। पाउडर बनाने के लिए स्लाइस को पल्वराइज़र मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है और वाइब्रो फिल्टर से छाना जाता है। वहीं केले को डिहाइड्रेट करने के लिए करीबन 60 डिग्री तापमान पर लगभग 8 घंटे तक ड्रायर में रखा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, मैथी एवं अन्य उत्पादों के लिए भी लगभग समान प्रक्रिया अपनाई जाती है। रोजगार के अवसर भी हुए सृजित यूनिट में वर्तमान में 5 से 6 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल अभिषेक का व्यवसाय आगे बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। मांग और बिक्री से बढ़ रही आय अभिषेक जायसवाल यूनिट में प्रतिमाह लगभग 5-6 क्विंटल उत्पादन की बिक्री कर लेते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 से 60 हजार रुपये शुद्ध आय प्रति माह का मुनाफा हो जाता है। अभिषेक जायसवाल बताते है कि, उत्पादों की पैकेजिंग 30 एवं 50 किलो के पैकेट्स में की जाती है। इसके लिए पैकिंग बैग में सामग्री भरकर पैकेजिंग मशीन से सील कर ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। ग्राहकों द्वारा इन डिहाइड्रेट उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। नियमित ग्राहक के साथ-साथ मांग अनुसार पैकेट्स भी तैयार किए जाते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने की तैयारी अभिषेक के उत्पादों की बिक्री बुरहानपुर जिले के साथ-साथ इंदौर, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी हो रही है। आने वाले समय में वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी विक्रय करने की तैयारी कर रहे हैं। योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से सही मार्गदर्शन, योजना का लाभ और ईच्छाशक्ति के बल पर युवा न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे है।  

एमपी ट्रांसको में कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित

एमपी ट्रांसको में स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भोपाल मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के आष्टा 132 केवी सबस्टेशन, सतवास में क्लस्टर (कन्नौद, खातेगांव एवं सतवास उपकेंद्र) के अंतर्गत कार्यरत सभी नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर कार्यपालन अभियंता  योगेन्द्र चहार के विशेष प्रयासों से आयोजित किया गया। शिविर में सतवास के मेडिकल ऑफिसर डॉ. राहुल ने कर्मचारियों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) सहित प्राथमिक चिकित्सा से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की। उन्होंने सीपीआर देने की परिस्थितियों, उसकी सही विधि एवं इसके व्यावहारिक महत्व को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़ी इस उपयोगी जानकारी से सभी उपस्थित कर्मचारी लाभान्वित हुए। एमपी ट्रांसको की सतत मुहिम के अंतर्गत आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना।  

बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का ब्याह, कन्या विवाह महोत्सव में नेपाल की युवती भी बनेगी दुल्हन

खजुराहो  छतरपुर के बागेश्वर धाम में हर वर्ष की तरह इस साल भी बहुत ही शानदार कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है. इस बार का महोत्सव काफी खास होने वाला है, क्योंकि यह महोत्सव सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है. नेपाल की भी एक बेटी की शादी धाम में होगी.  इस मौके पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री दी. खजुराहो के बागेश्वर धाम में 300 जोड़ों की शादी की तैयारियां जोरों पर हैं। समारोह 12 से 15 फरवरी तक तीन दिनों तक चलेगा। हर दिन अलग-अलग रस्में होंगी। आने वाले मेहमानों की खातिरदारी भी की जाएगी। दहेज में सभी जोड़ों को 90 लाख की FD, सोने-चांदी समेत गृहस्थी का सामान दी जयेगा।  बागेश्वर धाम में सातवीं बार आयोजन हो रहा है। इस बार 13 राज्यों से 1500 से अधिक आवेदन मिले। 60 जिलों की 600 सदस्यीय टीम ने एक महीने तक सर्वे किया। 300 जोड़ों को शादी के लिए बुलाया गया। इसमें एक जोड़ा नेपाल का भी है। 30,000 रुपये की जॉइंट एफडी बाबा बागेश्वर ने सभी ससुराल वालों को सलाह दी कि वे अपनी बहुओं को अपनी बेटियों जैसा मानें और यह पक्का करें कि किसी भी तरह की कोई शिकायत न हो. उन्होंने कुछ समधियों को बुलाया, उनके साथ मज़ाक किया और उनके चेहरों पर गुलाल लगाया. उन्होंने ऐलान किया कि इस बार दूल्हा और दुल्हन के नाम पर 30,000 रुपये की जॉइंट फिक्स्ड डिपॉज़िट खोली जाएगी. यह फिक्स्ड डिपॉज़िट पांच साल से पहले नहीं तोड़ी जा सकती. उन्होंने बताया कि शादियों के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी रही. सर्वे टीम ने 500 से ज़्यादा लड़कियों में से 300  लड़कियों को चुना, जिसमें उन लड़कियों को प्राथमिकता दी गई जो बहुत गरीब, अनाथ या बेसहारा थीं. धीरेंद्र शास्त्री बोले– ये अब बालाजी की बेटियां आयोजन को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि “ये अब बालाजी की बेटियां हो गई हैं। इनका विवाह धूमधाम से किया जाएगा। देशभर के संत, महात्मा, राजपीठ, व्यास पीठ के लोगों के सानिध्य में बेटियां विवाह बंधन में बंधेंगी। उन्होंने बताया कि सर्वे टीम ने 600 से अधिक अति निर्धन, अनाथ, मातृहीन और पितृहीन बेटियों का चयन किया था। इनमें से वर्तमान संसाधनों को देखते हुए 300 बेटियों को विवाह के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि पात्र बेटियों की संख्या अधिक थी, लेकिन बागेश्वर धाम की वर्तमान सामर्थ्य के अनुसार ही चयन किया गया है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के ऑफिस में इन दिनों खासी हलचल है। कर्मचारी देर रात तक काम में व्यस्त हैं। सभी की टेबल पर शादी के निमंत्रण कार्ड का ढेर है। ये निमंत्रण पत्र VVIP मेहमानों को भेजे जाने हैं। बीच-बीच में इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे कमल अवस्थी कार्ड उठाकर चेक कर ले रहे हैं। वो इसलिए कि नाम और पता सही है या नहीं। उसे वे अपने आईपैड में दर्ज लिस्ट से भी मिलान कर रहे हैं। कोशिश है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। दूसरी तरफ भंडार में दूल्हा-दुल्हन को दिए जाने वाले उपहार के ढेर लगे हैं। सेवादार सावधानी से पैकेट बना रहे हैं। कमल अवस्थी कहते हैं कि सभी अरेंजमेंट पूरे हो गए हैं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ दिन पहले ही हर जोड़े को बुलाकर उन्हें कपड़े और बाकी सामान दे दिया है। सभी को 13 फरवरी की सुबह 8 बजे बुलाया है। लगन मंडप तैयार किए जा रहे हैं। भोजन पंडाल अलग-अलग होंगे। तैयारियां तो पूरी हैं, फिर भी बहुत काम बाकी है। उस दिन पूरे बागेश्वर धाम को सजाया जाएगा। कमल अवस्थी ने नेपाल की रहने वाली अस्मिता सुनार से फोन पर हमारी बात कराई। अस्मिता भी नेपाल के युवक ये यहां सात फेरे लेने वाली हैं। इसके अलावा, मध्यप्रदेश की दो लड़कियाें से भी बात की। नेपाल की अस्मिता बोली- चार साल में आया नंबर अस्मिता ने फोन पर बताया कि परिवार की माली हालत कभी ठीक नहीं रही। मां दिल्ली में घर-घर जाकर बर्तन साफ करती हैं। पिता यहीं मजदूरी करते हैं। भाई केरल में मजदूरी करता है। एक बार मेरी तबीयत खराब हुई। पहले यहां फिर दिल्ली में डॉक्टर्स को दिखाया। फायदा नहीं हो रहा था। डॉक्टर बोलते थे कि दिमाग खराब है, पागल हो गई हूं। लोगों से सुना, तो बागेश्वरधाम पहुंचे। अब मैं एकदम ठीक हूं। बालाजी भगवान ने मुझे ठीक कर दिया। हमने यूट्यूब पर बागेश्वर धाम में हो रही शादियों के बारे में देखा था। मां पिछले चार साल से यहां मेरी शादी के लिए आवेदन कर रही थी, लेकिन इस बार नंबर लगा है। खुशी है कि मुझे गुरुजी से मिलने का मौका मिलेगा। अब मेरी शादी मेज बहादुर से हो रही है, वो मेरे ही देश के कंचनपुर के रहने वाले हैं। उनके परिवार की हालत भी हमारे जैसे ही हैं। पढ़ाई के दौरान हमारी मुलाकात हुई थी। मैं और उनकी बहन साथ पढ़ते थे। एक बार हम माउंटेन घूमने गए। वहां बात हुई। धीरे-धीरे प्यार हो गया। फिर हम लोगों ने अपने-अपने घर बताया, तो घरवाले बोले- इतना पैसा नहीं है कि अभी शादी कर दें। इसके बाद मां चार साल तक लगातार आवेदन करती रहीं। इस बार नंबर आ गया। फोन पर मिली सूचना, शादी के लिए चुना गया विदिशा जिले की गंजबासौदा के लाल पठार इलाके में रहने वाली सपना अहिरवार के पिता नहीं हैं। मां बीमार रहती हैं और भाई छोटा है। घर में दो वक्त खाने के लिए भी जद्दोजहद करनी होती है। सपना कहती हैं- बीमार मां को हमेशा मेरी शादी की चिंता रहती थी। जब बागेश्वर धाम में होने वाली सामूहिक विवाह समारोह के बारे में पता चला, तो मन में आस सी जागी। पहले भी यहां आ चुकी हूं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने परिवार की मदद की। उन्हें अपने पिता जैसा मानती हूं। आवेदन के बाद यहां से घर पहुंचे थे। कुछ दिन बाद फोन पर सूचना मिली कि मुझे यहां शादी के लिए चुना गया है। उन्होंने शादी का लहंगा, सैंडल और होने वाले पति को शेरवानी, पगड़ी, जूते और माला दी है। उस दिन कपड़े पहनकर यहां आना है। गरीब हूं, पर आज इसका अहसास नहीं हो रहा है। बागेश्वरधाम से शादी होना सपने की तरह बागेश्वरधाम … Read more

संदीपनी विद्यालय घुघरी का मामला अतिथि शिक्षक की ‘अमर्यादित’ टिप्पणी पर हंगामा

मंडला.  जिले के शासकीय सांदीपनी विद्यालय घुघरी में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पदस्थ एक अतिथि शिक्षक पर कक्षा 10वीं की छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार और अपमानजनक टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना से आक्रोशित छात्राओं ने विद्यालय के प्राचार्य को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।  *क्या है पूरा मामला   प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय में पदस्त अतिथि शिक्षक बिजेंद्र झारिया पर आरोप है कि उन्होंने कक्षा 10वीं की छात्राओं के प्रति अत्यंत अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। शिकायत पत्र में छात्रा ने उल्लेख किया है कि शिक्षक ने पूरी कक्षा के सामने उसे जलील किया, जिससे उसकी गरिमा को गहरी ठेस पहुँची है। इस शिकायत का समर्थन कक्षा की अन्य छात्राओं ने भी अपने हस्ताक्षर करके किया है।  अधिकारियों का रुख: “हटाया जाएगा आरोपी शिक्षक”  इस संवेदनशील मामले पर सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता ने संज्ञान लेते हुए कहा कि, “मुझे इस संबंध में पहले जानकारी नहीं थी, लेकिन अब प्राचार्य के माध्यम से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। ऐसे आरोपी अतिथि शिक्षक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और उन्हें तत्काल प्रभाव से विद्यालय से हटाया जाएगा।”  राजनीतिक आक्रोश: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी”  मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं शिक्षा समिति अध्यक्ष श्री कमलेश तेकाम ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा मैंने पूर्व में ही अधिकारियों को ऐसे शिक्षकों को हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन क्षेत्रीय संयोजक मंडला विष्णु सिंगोर जैसे लोगों की लापरवाही के कारण इन्हें संरक्षण मिल रहा है। बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार करने वालों को शह देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि इस शिक्षक को तुरंत नहीं हटाया गया, तो हम स्वयं आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।” छात्राओं में डर और आक्रोश छात्राओं का कहना है कि स्कूल में सुरक्षित महसूस करना उनका अधिकार है, लेकिन शिक्षक के इस प्रकार के व्यवहार से वे मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी जल्दी और कितनी ठोस कार्रवाई करता है एवं आरोपी अतिथि शिक्षक को कब तक हटाएगी  इनका कहना है कि मैने ऐसी मैडम बात की है कि ऐसे आरोपी शिक्षक को जल्द से जल्द हटाया जावे जो शिक्षा को शर्मसार कर रहे हैं

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिले स्विस संसद सदस्य

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में स्विट्जरलैंड की संसद (नेशनल काउंसिल) के सदस्य  निक्लाउस सैमुअल गुगर ने सौजन्य भेंट की।  गुगर ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से औद्योगिक विकास, ऊर्जा संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  नीरज मंडलोई, प्रबंध संचालक एमपीआईडीसी  चंद्रमौली शुक्ला सहित औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्विस संसद के सदस्य  गुगर ने स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा दक्षता के लिए डिजिटल समाधान के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक ऑटोमेशन और सतत् प्रौद्योगिकी में स्विस विशेषज्ञता का विशेष लाभ उठा सकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु शासन, औद्योगिक संक्रमण पर नीति आदान-प्रदान के लिए स्विस संसदीय प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश आमंत्रित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर स्विस संसद सदस्य  गुगर ने मध्यप्रदेश के जलवायु और स्थिरता पहलों में स्विस निजी क्षेत्र की संभावित भागीदारी और यहां के युवाओं के लिए नवीकरणीय ऊर्जा एवं उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) में तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग/समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी पर शोध के लिए स्विस विश्वविद्यालयों के साथ संयुक्त पहल की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।  गुगर ने कहा कि स्विस नागरिकों के लिए मध्यप्रदेश को एक विरासत एवं इको टूरिज्म गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जाए, इससे लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रमों की योजना बनाई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने  गुगर के सुझावों की सराहना कर हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस में हुई थी भेंट उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से गत माह दावोस में हुए वर्ल्ड इकॉनामिक फोरम में स्विस संसद सदस्य  गुगर ने सौजन्य भेंट की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से भारत से अपने संबंधों, नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग, पर्यावरण-संरक्षण और जनजातीय कल्याण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की थी। चर्चा के दौरान ग्रामीण ईको पर्यटन, मिलेट्स के प्रमोशन और मध्यप्रदेश-स्विट्जरलैंड के बीच भावी सहयोग की सभी संभावनाओं और अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया था।  

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