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सिंहस्थ-2028 के लिए एम.पी. ट्रांसको के कार्यों की समय सीमा तय, एक साल पहले होंगे पूरे: ऊर्जा मंत्री तोमर

सिंहस्थ-2028 के लिये एम.पी. ट्रांसको के कार्य एक वर्ष पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य, हो रही है नियमित मॉनिटरिंग : ऊर्जा मंत्री  तोमर उज्जैन ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक सिंहस्थ-2028 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी उज्जैन क्षेत्र में अपनी पारेषण (ट्रांसमिशन) प्रणाली को सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना पर तेजी से कार्य कर रही है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि कंपनी के प्रबंध संचालक  सुनील तिवारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सिंहस्थ-2028 से संबंधित सभी कार्य आयोजन तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व पूर्ण कर लिए जाएं। इससे पारेषण तंत्र की स्थिरता, विश्वसनीयता एवं आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त परीक्षण एवं सुधार का समय मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इन निर्देशों के परिपालन में प्रबंध संचालक  सुनील तिवारी स्वयं कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें तथा सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करें। चिंतामन सबस्टेशन का निर्माण कार्य प्रारंभ सिंहस्थ अवधि में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में 132 के.व्ही. चिंतामन सबस्टेशन के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।इसके अलावा उज्जैन- चंद्रावती गंज एवं  देपालपुर- चिंतामन 132 के वी ट्रांसमिशन लाइन का “लाइन इन लाइन आउट”कार्य भी प्रगति पर है।  इसके साथ ही त्रिवेणी विहार क्षेत्र से संबंधित विद्युत अवसंरचना कार्य भी तेजी से प्रगति पर हैं, जिससे स्थानीय लोड प्रबंधन में सुधार होगा। शंकरपुर सब स्टेशन में क्षमता वृद्धि उज्जैन क्षेत्र के 220 के.व्ही. शंकरपुर सबस्टेशन में पूर्व में स्थापित 20 एम.व्ही.ए. क्षमता के ट्रांसफार्मर को अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जा चुका है। इस उन्नयन से क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा संभावित अतिरिक्त मांग को सहजता से पूरा किया जा सकेगा। 400 के.व्ही. ताजपुर सब स्टेशन का विस्तार उज्जैन स्थित 400 के.व्ही. ताजपुर सबस्टेशन में 132 के.व्ही. नेटवर्क के विस्तार की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा तथा 33 के.व्ही. के चार नए फीडर विकसित किए जाएंगे। इससे सिंहस्थ-2028 के दौरान विद्युत वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़, संतुलित एवं भरोसेमंद बन सकेगी। मिलेगी निर्बाध बिजली ऊर्जा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी परियोजनाओं के समयबद्ध पूर्ण होने से सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

एमपी में ट्रांसजेंडर के लिए बड़ा फैसला, पहचान देने से पहले होगी सख्त जांच

भोपाल  मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के संबंध में बड़ा फैसला लिया गया है। जेंडर बदलने से पहले अब कलेक्टर को इसकी सूचना देनी होगी। मेडिकल जांच के बाद ही ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन आइडी देगा। स्वयं के शपथ पत्र पर ट्रांसजेंडर व्यक्ति अब पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। अभी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ट्रांसजेंडर अधिकारों का संरक्षण संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया है। ये लागू होगा तो पुलिस व प्रशासन को जिले में अलग से ट्रांसजेंडर सेल का गठन करना होगा, जो ट्रांसजेंडर Transgender के साथ होने वाले अपराधों की निगरानी करेगी। अब ट्रांसजेंडर को जिला प्रशासन से अपना पहचान पत्र बनवाना जरूरी होगा। जिलास्तर पर इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं करना होगी। जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाने के लिए प्रमाण पत्र अब अनिवार्य कर दिया गया है। भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि जिले में ट्रांसजेंडर समेत सभी श्रेणी के व्यक्तियों को लेकर प्रशासन संवेदनशील है। नियमों के अनुसार व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी। हाल में मतदाता सूची के वृहद गहन पुनरीक्षण में जिले में 72 ट्रांसजेंडर मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए। जांच के बाद ही आइडी देगी सरकार ट्रांसजेंडर Transgender व्यक्ति खुद के शपथ पत्र पर जिला मजिस्ट्रेट से पहचान पत्र नहीं ले पाएगा। जिले में एक मेडिकल बोर्ड का गठन होगा। सीएमएचओ की अध्यक्षता वाली ये समिति जिला मजिस्ट्रेट को सिफारिश करेगी। इसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी होगा। यदि कोई व्यक्ति जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाता है, तो उसके लिए संशोधित प्रमाण पत्र प्राप्त करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही मध्यप्रदेश में ट्रांसजेंडर के लिए सरकार पुलिस भर्ती में अवसर देने की व्यवस्था कर रही है। एमपी पुलिस में कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर के पदों पर ऐसे उम्मीदवारों का कलेक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। राज्य सरकार ने किन्नर बोर्ड का गठन किया है, जो ट्रांसजेंडर समुदाय को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और डेटाबेस रखने का काम करता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य बीमा की पहल भी की जा रही है। किन्नर कल्याण बोर्ड के माध्यम से नौकरियों के साथ ही कल्याण योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।

भोपाल में 96 अवैध निर्माणों पर कार्रवाई, केरवा-कलियासोत में स्कूल और रेस्टोरेंट बने थे ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में

भोपाल  शहर की खूबसूरती और पर्यावरण की जान माने जाने वाले केरवा और कलियासोत जलाशय अब अपने पुराने स्वरूप में लौटेंगे। राज्य सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया है कि इन जलाशयों के आसपास के ग्रीन बेल्ट में बड़े पैमाने पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। भोपाल विकास योजना 2005 के प्रावधानों को ताक पर रखकर यहां जो निर्माण हुए थे, अब उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद अब जमीन का सीमांकन शुरू हो गया है। क्या-क्या बना है ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ में? सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कुल 96 निर्माणों को अवैध पाया गया है। इनमें से 84 सरकारी जमीन पर हैं और 12 निजी जमीन पर, जो ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। FTL के 33 मीटर में बड़ा खतरा जलाशयों के फुल टैंक लेवल (FTL) से 33 मीटर के दायरे को सबसे संवेदनशील माना जाता है। केरवा जलाशय के इस दायरे में 16 पक्के निर्माण पाए गए हैं। इनमें से 2 सरकारी जमीन पर हैं, जिन्हें हटाने के आदेश राजस्व कोर्ट ने दे दिए हैं। बाकी 14 निजी जमीन पर हैं, जिन पर अब राजस्व विभाग नियमों के तहत कार्रवाई करने की तैयारी में है। मंत्रालय में हुई बैठक में साफ कर दिया गया है कि भोपाल विकास योजना 2005 के क्लॉज 2.57 का कड़ाई से पालन होगा। 150 हेक्टेयर की यह जमीन केवल प्रकृति के लिए सुरक्षित रहेगी, यहां किसी भी निजी स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं है। अब बनेगा बॉटनिकल गार्डन सरकार की योजना यहां 150 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशाल बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क बनाने की है। इसके लिए टीएंडसीपी विभाग ने मैप तैयार कर लिया है। खसरा रिकॉर्ड को मास्टर प्लान के मैप पर सुपरइम्पोज कर दिया गया है, जिससे अब एक-एक इंच जमीन का हिसाब साफ हो गया है। कलेक्टर भोपाल को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व विभाग के जरिए इस पूरी जमीन को जल्द से जल्द बाउंड्री बनाकर सुरक्षित करें। अब तक क्या हुआ? 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में निर्णायक बैठक हुई। इसके बाद 28 फरवरी 2026 को 69 में से 28 अवैध निर्माणों को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया। जबकि बाकी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली वारंट जारी हो चुके हैं। क्यों जरूरी है यह कार्रवाई? केरवा और कलियासोत न केवल भोपाल के जल स्तर को बनाए रखते हैं, बल्कि यह क्षेत्र बाघों और अन्य वन्यजीवों का कॉरिडोर भी है। पिछले कुछ वर्षों में यहां होटल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउस की बाढ़ आ गई थी, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा था। एनजीटी में दायर एक याचिका के बाद अब यह पूरा मामला कोर्ट की सीधी निगरानी में है।

सुभाषिनी विद्या मंदिर ससुंद्रा,से तीन विद्यार्थियों का नवोदय विद्यालय प्रभात पट्टन में हुआ चयन ।

Three students from Subhashini Vidya Mandir, Susundra were selected in Navodaya Vidyalaya Prabhat Patan. हरिप्रसाद गोहेआमला। ब्लॉक मुख्यालय आमला अंतर्गत आने वाले ससुंद्रा ग्राम में स्थित सुभाषिनी विद्या मंदिर ससुंद्रा,से तीन विद्यार्थियों का इस वर्ष भी नवोदय विद्यालय प्रभात पट्टन में चयन हुआ है । वर्ष 2026 में विद्यालय से नवोदय विद्यालय के लिए चयनित बच्चों में उमंग पिता धर्मराज उघड़े,विधि पिता भोजराज उघड़े, पायल पिता सुनील कुमरे का नाम शामिल है। चयनित तीनों बच्चों का चयन छठवीं प्राचार्य श्री मनीष माथनकर ने बताया कि वर्ष 2014 से लगातार हर वर्ष विद्यालय से नवोदय विद्यालय में बच्चों का चयन होते आ रहा है।सभी बच्चों का चयन कक्षा 6 के लिए हुआ है। अभी तक कुल 27 बच्चों का चयन हो चुका है। उन्होंने बताया कि संस्था के श्री कमलेश माथनकर शिक्षक के कुशल मार्गदर्शन एवं सभी शिक्षकों की कड़ी मेहनत से यह परिणाम प्राप्त हो रहा है। प्राचार्य माथनकर ने चयनित बच्चों को शुभकामनाएं प्रेषित कर उनके उज्वल भविष्य की कामना की है ।

ड्रोन सखी बनीं आगर की रीना, आधुनिक खेती में महिलाओं की बदलती भूमिका

आधुनिक खेती में महिलाओं का बढ़ता कदम, आगर की रीना बनीं ड्रोन सखी ड्रोन तकनीक से बदली तस्वीर भोपाल आधुनिक तकनीक अब ग्रामीण भारत की महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की नई उड़ान दे रही है। आगर जिले के ग्राम थडोदा की रीना चंदेल इसका प्रेरक उदाहरण हैं। आजीविका मिशन और नाफेड के सहयोग से प्राप्त ड्रोन संचालन प्रशिक्षण ने रीना को न केवल नई पहचान दी, बल्कि उन्हें गांव-गांव में आधुनिक खेती की अग्रदूत बना दिया है। अब रीना ड्रोन तकनीक के माध्यम से किसानों के खेतों में स्प्रे कर रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रीना ने जिले में किसानों के खेतों तक ड्रोन तकनीक पहुंचाने का काम शुरू किया। वह स्वयं ड्रोन का संचालन करती हैं और खेतों में कीटनाशक व पोषक तत्वों का स्प्रे करती हैं। खरीफ सीजन में रीना ने 42 किसानों की लगभग 121 एकड़ जमीन पर ड्रोन के माध्यम से स्प्रे किया और प्रति एकड़ 500 रुपये की दर से सेवा प्रदान की। वहीं रबी सीजन में उन्होंने 56 किसानों की लगभग 156 एकड़ जमीन पर ड्रोन स्प्रे कर आधुनिक कृषि पद्धति को बढ़ावा दिया। रीना की सक्रियता और मेहनत को देखते हुए कृषि विभाग ने उन्हें “कृषि सखी” की जिम्मेदारी भी सौंपी है। जिला स्तरीय प्रशिक्षण के बाद वह समूह की महिलाओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रही हैं। इस कार्य के लिए उन्हें विभाग की ओर से प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय भी दिया जा रहा है। रीना चंदेल की कहानी यह दर्शाती है कि यदि अवसर और प्रशिक्षण मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी तकनीक के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती हैं। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग से उन्होंने न केवल अपनी आय का स्रोत बढ़ाया है, बल्कि किसानों को भी समय और श्रम की बचत के साथ बेहतर खेती की दिशा दिखाई है। आज रीना अपने गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी यह सफलता बताती है कि बदलते समय में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आधुनिक तकनीक को अपनाकर गांव और खेती दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  

चैत्र नवरात्र के अवसर पर आमला में होगा सीताराम कीर्तन ।

Sitaram Kirtan will be held in Amla on the occasion of Chaitra Navratri. हरिप्रसाद गोहे आमला ! चैत्र नवरात्रि एवं श्री रामनवमी के पावन अवसर पर इस वर्ष भी आमला नगर में सीताराम कीर्तन का आयोजन आयोजित किया जा रहा है। उक्त आयोजन इस वर्ष अपने 42 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जो क्षेत्र में आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए लक्ष्मण शेषराव चौकीकर ने बताया हवाई पट्टी के पास स्थित मनोकामना नाथ नागेश्वर शिव मंदिर में सीताराम नाम का कीर्तन दिनांक 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से प्रारंभ होकर 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) तक चलेगा। समापन के दिन दोपहर में पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम संपन्न होगा। इस धार्मिक आयोजन का मार्गदर्शन साकेतवासी महामंडलेश्वर श्री 1008 स्वामी श्री रघुवरदास जी महाराज चतुर्भुजी भगवान मंदिर, अयोध्या निवासी के सानिध्य में किया जा रहा है। पिछले 41 वर्षों से निरंतर हो रहे इस आयोजन में क्षेत्र के श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग मिलता रहा है।आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने परिवार एवं इष्टमित्रों के साथ उपस्थित होकर कीर्तन में सहभागिता करें और पुण्य लाभ प्राप्त करें।

मध्यप्रदेश में टैक्स वृद्धि की संभावना, 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं दरें

भोपाल  भोपालवासियों पर टैक्स वृद्धि की मार पड़ सकती है। 23 मार्च को नगर निगम का बजट आएगा, जिसमें वाटर-सीवेज और प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी की संभावना है। बताया जा रहा है कि योजना आयोग ने आमदनी बढ़ाने के लिए हर साल टैक्स बढ़ाने की सलाह दी है। लिहाजा नगर निगम के वाटर टैक्स और सीवेज चार्ज में बढ़ोतरी हो सकती है। बजट राशि एवं अनुदान राशियों पर चर्चा के लिए महापौर परिषद ने इसे पारित कर दिया है। अब नगर परिषद की बैठक में बहुमत के आधार पर फैसला होगा। आने वाले समय में शहर की जनता की जेब पर कर का बोझ बढऩे वाला है। नगर निगम विभागीय वर्ष 2026-27 के लिए 23 मार्च को बजट प्रस्तुत करने जा रहा है। निगम प्रबंधन योजना आयोग की अनुशंसा को आधार बनाकर इस बजट में भी प्रॉपर्टी, वाटर और सीवेज जैसे मदों में टैक्स में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की तैयारी में है। हालांकि इस प्रस्ताव पर ज्यादातर पार्षद और एमआइसी सदस्य राजी नहीं हैं। निगम का तर्क है, योजना आयोग आय बढ़ाने हर साल बजट में टैक्स बढ़ाने की सलाह दी है। भोपाल में बीते वर्ष ही प्रॉपर्टी टैक्स में 10 प्रतिशत वाटर टैक्स एवं सीवेज चार्ज में 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। निगम ने विभागीय वर्ष 2025-26 के लिए 3611 करोड़ 79 लाख रुपए का बजट का बजट पेश किया था। सबसे महंगा-सबसे सस्ता टैक्स परिक्षेत्र क्रमांक 1 से 7 में तय होने वाले संपत्ति के वार्षिक भाड़ा मूल्य के आधार पर अरेरा कॉलोनी-एमपी नगर में सबसे महंगा व बैरसिया के अररिया में सबसे सस्ता प्रॉपर्टी टैक्स है। दरें सामान रहेंगी। विकास निधि: निगम के सभी जनप्रतिनिधियों की विकास निधि दोगुनी हो चुकी है। इसमें वृद्धि नहीं होगी। महापौर 10 करोड़, निगम अध्यक्ष 5 करोड़, महापौर परिषद सदस्य 1 करोड़, वार्ड नियोजन 50 लाख, जोन अध्यक्ष 10 लाख सालाना खर्च कर सकेंगे। इस बार नगर निगम द्वारा बजट में खर्च कम करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही उलझनों से बचने के लिए बजट में मदों को घटा दिया गया है। कई विभागों के खर्च कम किए गए हैं और उनकी सीमा भी तय कर दी गई है। पहले जनसंपर्क प्रकोष्ठ के बजट की सीमा निर्धारित नहीं थी पर अब यह प्रावधान खत्म कर दिया है।

ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल में नई प्रणाली लागू, पुराने तरीके में हुआ बदलाव

इंदौर  ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण (Driving License Renewal) प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए परिवहन विभाग ने फेसलेस सुविधा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फेस वेरिफिकेशन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। अब 15 वर्ष की वैधता पूरी होने के बाद लाइसेंस रिन्यू कराने वाले आवेदकों को अपने चेहरे का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। फर्जीवाड़ों पर लगेगी रोक नई व्यवस्था के तहत एआई सॉफ्टवेयर पुराने ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज फोटो और वर्तमान आवेदक के चेहरे का मिलान करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 15 वर्ष पहले जिस व्यक्ति ने लाइसेंस बनवाया था, वही अब नवीनीकरण के लिए आवेदन कर रहा है। इस कदम से फर्जीवाड़े और गलत पहचान के मामलों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से तैयार इस सॉफ्टवेयर को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसकी शुरुआत भोपाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से की जाएगी। प्रदेश में 70 लाख ड्राइविंग लाइसेंस मध्य प्रदेश में वर्तमान में लगभग 70 लाख ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद हैं और हर वर्ष करीब 6 लाख नए लाइसेंस बनाए जाते हैं। आने वाले समय में बड़ी संख्या में नवीनीकरण के प्रकरण सामने आएंगे, जिससे पुराने फोटो के आधार पर सही व्यक्ति की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी लिए ये कदम उठाया जा रहा है।  साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है। एआई आधारित फेस वेरिफिकेशन लागू होने से लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय बनेगी, साथ ही प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी। ये है रिन्यूअल का ऑनलाइन प्रोसेस (Online Process) -सबसे पहले परिवहन पोर्टल की वेबसाइट पर जाएं। अब यहां पर “Driving License Related Services” चुनें। -अब यहां पर ड्रॉप-डाउन से ‘Madhya Pradesh’ चुनें। -आवेदन करें: ‘Apply for DL Renewal’ पर क्लिक करें। -विवरण भरें: अपना डीएल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। -दस्तावेज अपलोड: फॉर्म-9 (आवेदन पत्र), फॉर्म-1A (चिकित्सा प्रमाण पत्र – 40+ आयु के लिए), पुराना लाइसेंस अपलोड करें। -फीस भुगतान: रिन्यूअल फीस ऑनलाइन जमा करें। -अपॉइंटमेंट: आरटीओ में दस्तावेज सत्यापन के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें।-इसके बाद आपको अपॉइंटमेंट मिल जाएगा।  

एमपी का संपत्ति कार्ड वितरण में बड़ा कमाल, 43,014 गांवों में सर्वे कर 54.18 लाख लोगों को मिला लैंड रिकॉर्ड

भोपाल  स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति कार्ड (प्रॉपर्टी कार्ड ) वितरित करने के मामले में मध्य प्रदेश ने देश के कई बड़े और प्रमुख राज्यों को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। लोकसभा में छत्तीसगढ़ से सांसद विजय बघेल के सवाल के जवाब में जो जानकारी दी गई। उसके मुताबिक एमपी ने गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पछाड़कर डिजिटल लैंड रिकॉर्ड बनाने और लोगों तक पहुंचाने में रिकॉर्ड बनाया है। 54 लाख से ज्यादा ग्रामीणों को मिला उनका ‘मालिकाना हक’ दस्तावेज के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक कुल 43,014 गांवों को इस योजना के लिए अधिसूचित किया गया था और इन सभी 43,014 गांवों में ड्रोन सर्वे का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। एमपी के 39,813 गांवों के लिए कुल 65,76,707 संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं । इनमें से 54,18,319 संपत्ति कार्ड ग्रामीणों को वितरित किए जा चुके हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है। जानिए क्या है संपत्ति कार्ड स्वामित्व योजना के तहत दिया जाने वाला संपत्ति कार्ड ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए उनकी संपत्ति का एक आधिकारिक और कानूनी ‘अधिकार अभिलेख’ (Record of Rights) है । पहले ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के पास मालिकाना हक के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते थे, जिसे अब ड्रोन सर्वे और आधुनिक मैपिंग तकनीक के जरिए सरकार द्वारा प्रमाणित किया जा रहा है । संपत्ति कार्ड से होने वाले प्रमुख फायदे विवादों का समाधान ड्रोन सर्वे और ‘निरंतर परिचालन संदर्भ स्टेशनों’ (CORS) तकनीक से गांव के आबादी क्षेत्रों के अत्यधिक सटीक नक्शे तैयार किए जाते हैं । इससे संपत्ति की सीमाएं स्पष्ट हो जाती हैं, जिससे वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद समाप्त हो रहे हैं । बैंकों से लोन की सुविधा इस आधिकारिक कार्ड के आधार पर ग्रामीण अब अपनी संपत्ति पर बैंकों से आसानी से ऋण (Loan) प्राप्त कर सकते हैं, जो पहले बिना वैध दस्तावेजों के संभव नहीं था । संपत्ति की खरीद-बिक्री में आसानी कानूनी रिकॉर्ड होने से संपत्ति की खरीद और बिक्री की प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हो गई है। महिला सशक्तिकरण मध्य प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहाँ महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का हक दिलाने के लिए संपत्ति कार्ड में ‘सह-स्वामित्व’ (Co-ownership) का विशेष प्रावधान किया गया है । पारदर्शी प्रक्रिया संपत्ति कार्ड जारी करने से पहले दोनों पक्षों की सहमति और जमीनी सत्यापन किया जाता है, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना नगण्य हो जाती है । जानिए किन बड़े राज्यों को मध्य प्रदेश ने पछाड़ा?     महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में 37,85,481 कार्ड वितरित किए गए हैं, जबकि मध्य प्रदेश 54,18,319 कार्डों के साथ बहुत आगे है।     राजस्थान: राजस्थान में अब तक 14,43,423 कार्ड ही वितरित हो पाए हैं, जो मध्य प्रदेश की तुलना में लगभग एक-चौथाई ही है।     गुजरात: देश के विकसित राज्यों में शुमार गुजरात में 12,32,223 कार्ड वितरित हुए हैं, जिसे मध्य प्रदेश ने काफी पीछे छोड़ दिया है।     कर्नाटक: दक्षिण भारत के इस बड़े राज्य में केवल 3,36,779 कार्ड वितरित किए गए हैं।     हरियाणा: यहां 25,15,646 कार्ड वितरित हुए हैं।     छत्तीसगढ़: पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में अभी वितरण की प्रक्रिया काफी धीमी है, जहां मात्र 92,545 कार्ड वितरित किए गए हैं।

मध्य प्रदेश की महिलाएं बनीं लखपति दीदी, पिछले साल के मुकाबले 4 स्थानों की उन्नति

भोपाल  मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 22,77,814 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक आय अर्जित कर रही हैं। इसी के साथ मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा ‘लखपति दीदी’ वाली सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पहले राज्य इस सूची में आठवें स्थान पर था। यह जानकारी संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जोड़ने की सुविधा और बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे सालाना न्यूनतम ₹1 लाख की आय हासिल कर सकें। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 अगस्त 2023 को इस योजना की घोषणा की थी। शुरुआत में इसका लक्ष्य 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया। ड्रोन तकनीक से बढ़ी कमाई मध्य प्रदेश ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने में भी बढ़त दिखाई है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत राज्य को 34 ड्रोन मिले हैं, जिससे यह देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य के 89 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये महिलाएं अब खेतों में ड्रोन के जरिए तरल उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। ड्रोन वितरण के मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वहीं, ड्रोन ट्रेनिंग के मामले में भी राज्य शीर्ष पांच में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और वित्तीय सहायता का यह संयोजन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में अहम भूमिका निभा रहा है। मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत भी देती है। बड़ी संख्या में महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। नमो ड्रोन दीदी को सरकार ने दिए 34 ड्रोन आधुनिक खेती और तकनीक के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश की महिलाएं पीछे नहीं हैं। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत मध्य प्रदेश को 34 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे देश में तीसरे स्थान (आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बाद) पर खड़ा करता है। एमपी के 89 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं ने ड्रोन से संबंधित प्रमाणित तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे वे अब खेतों में लिक्विड फर्टिलाइजर (तरल उर्वरकों) और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन के जरिए कर रहीं हैं। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत हरेक महिला सदस्य को कम से कम चार कृषि ऋतुओं या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर सालाना 1 लाख रुपये की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है । 2023 में पीएम ने किया था योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले की प्राचीर से ‘लखपति दीदी’ योजना की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य शुरुआती चरण में 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था (बाद में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया)। कैसे काम करती है योजना इस पहल के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, बाजार लिंकेज, कौशल विकास प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है । इसमें ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी सहायक योजनाएं भी शामिल हैं, जो महिलाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आय बढ़ाने में मदद करती हैं। नमो ड्रोन दीदी: राज्यों में ड्रोन वितरण (Top 5) (योजना के तहत दिए गए 500 ड्रोनों के आधार पर) टॉप – 5 राज्य (जहां सबसे ज्यादा ड्रोन दिए गए)     आंध्र प्रदेश: 96     कर्नाटक: 82     तेलंगाना: 72     मध्य प्रदेश: 34     उत्तर प्रदेश: 32 नमो ड्रोन दीदी को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाले टॉप – 5 राज्य     कर्नाटक: 145     उत्तर प्रदेश: 128     आंध्र प्रदेश: 108     हरियाणा: 102     मध्य प्रदेश: 89 (इन राज्यों में महिला लाभार्थियों/ SHG को ड्रोन चलाने का सर्टिफिकेट मिला)

जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाने में स्थानीय निकायों की भूमिका अहम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकाय हों सक्रिय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रम संवत और नव वर्ष त्योहारों पर दी बधाई मं‍त्रि-परिषद की बैठक के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में आगामी 19 मार्च से राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान प्रारंभ हो रहा है। प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान का यह तीसरा वर्ष है। कुओं, बावड़ियों, नदियों के पुनरुद्धार के अभियान से सभी वर्गों को जोड़ने के लिए नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकाय सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले महत्वपूर्ण विषयों पर मंत्रीगण को जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए। समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाए। युवाओं को विशेष भागीदारी का अवसर दिया जाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है। गत वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए। भू-जल संवर्धन के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य भी प्रारंभ किया गया। नदियों की निर्मलता के लिए प्रदेश की 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण जल स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई। लगभग 145 नदियों के उद्गम क्षेत्र में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजना भी प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि जन भागीदारी से इस अभियान को सफल बनाया जाएगा। जल महोत्सव की गतिविधियों को सफल बनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल महोत्सव की गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। आगामी 22 मार्च तक जल महोत्सव के तहत विभिन्न कार्य हो रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भी जल संरक्षण कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘हर घर जल’ के लिए मध्यप्रदेश के हित में नई दिल्ली में हुआ महत्वपूर्ण करारनामा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय के साथ नई दिल्ली में आज एक महत्वपूर्ण करारनामा हुआ है, जिसके अंतर्गत पेयजल योजना के लिए पाइप लाइन बिछाने और हर व्यक्ति तक जल पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान 2 राज्यों का चयन हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए प्रतिष्ठा की बात है। इस अवसर पर प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उईके मंगलवार को नई दिल्ली में उपस्थित थीं। स्वच्छ जल प्रदाय के लिए वर्ष 2028 तक जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने और जल जीवन मिशन 2.0 पुनर्गठित कर लागू करने की स्वीकृति दी गई है,जिसका लाभ मध्यप्रदेश को मिलेगा और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाओं को सशक्त टिकाऊ बनाने में सहयोग मिलेगा। किसान कल्याण वर्ष में विभागों की गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण वर्ष-2026 में 17 विभाग के सहयोग से वर्ष भर होने वाली विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किसानों के हित में अभिनव पहल की जा रही है। कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार बहु आयामी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री का 4-लेन निर्माण स्वीकृति के लिए माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय कैबिनेट द्वारा हाल ही में 3839 करोड़ रुपए की लागत से एनएच 752 डी पर बदनावर पेटलावद थांदला टिमरवानी सेक्शन में 4-लेन निर्माण की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से यह स्वीकृति अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ प्रदेश के अनेक जिलों को मिलेगा। इंदौर पीथमपुर उज्जैन देवास के औद्योगिक इलाकों तक पहुंच को सुगम बनाया जा सकेगा। धार और झाबुआ जनजातीय बहुल जिलों के आर्थिक विकास में भी सहयोग मिलेगा। भावांतर योजना में सरसों को जोड़े जाने से किसानों को मिलेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना में सरसों को शामिल करने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि 7 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को सरकार 1500 करोड. रुपए की राशि भावांतर योजना में दे चुकी है। अब सरसों उत्पादक किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने किसानों के हित में सबसे पहले सफलतापूर्वक भावांतर जैसी महत्वपूर्ण योजना लागू की है। सर्वाइकल कैंसर को रोकेगी वैक्सीन, मध्यप्रदेश में चल रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से 14 वर्ष और उससे अधिक उम्र की बेटियों को बचाने के लिए टीका लगाने का अभियान प्रदेश में चल रहा है। सर्वाइकल कैंसर से बेटियों को बचाने के लिए निःशुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और इससे हमारी बेटियां आजीवन सुरक्षित जीवन जिएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों से कहा कि वे अपने प्रभार के जिलों में इस महत्वपूर्ण अभियान की सतत समीक्षा करें। विक्रम संवत् वर्षारंभ की बधाइयां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी 19 मार्च को गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत वर्ष आरंभ होने की सभी मंत्रीगण को बधाई दी और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय नववर्ष के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम भी हो रहे हैं निश्चित ही इनसे जन-जन जुड़ता है। यह अवसर हमारे लिए महत्वपूर्ण है।  

इंदौर में खुले हवा पर टैक्स, निगम वसूलेगा MOS टैक्स, 4000 तक की अतिरिक्त लागत हो सकती है

इंदौर मकान बनाते समय व्यक्ति भूखंड के कुछ हिस्से को इसलिए खाली छोड़ता है ताकि उस रास्ते घर में हवा-पानी आ सके, लेकिन अब नगर निगम ने इसी खाली रास्ते (मार्जिनल ओपन स्पेस) (एमओएस) पर कर लगाने की तैयारी कर ली है। अगर ऐसा हुआ तो संपत्तिधारकों पर 500 रुपये से लेकर चार हजार रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। इधर कांग्रेस ने इस प्रस्तावित कर का विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को कांग्रेस पार्षदों ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने मांग की कि एमओएस कर को रोका ए। ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेस आमजन के समर्थन में सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस ने प्रदर्शन करते हुए निगमायुक्त को ज्ञापन सौंपा और कर को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस ने निगमायुक्त को सौंपा ज्ञापन नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और इंदौर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ निगमायुक्त कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए कांग्रेस ने मांग रखी कि, मकानों में छोड़े गए खुले स्थान (एमओएस) पर टैक्स लगाने का फैसला सरासर गलत है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। निगम इस टैक्स की वसूली को नहीं रोकेगा तो कांग्रेस आमजन के साथ सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगी। गांधीवादी तरीके से विरोध की तैयारी उन्होंने कहा कि, निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जहां भी इस खुले स्थान के टैक्स को वसूलने के लिए जाएंगे, कांग्रेसी वहां पहुंचकर उनका विरोध करेंगे। हमारा विरोध पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण रहेगा। नगर निगम के माध्यम से हर मकान के खुले स्थान पर संपत्ति कर लगाना मनमानी है। ऐसी मनमानी का कांग्रेस हर स्तर पर विरोध करेगी। ज्ञापन देने वालों में पार्षद दीपू यादव, सीमा सोलंकी, सेफू वर्मा , सोनीला मिमरोट, राजू भदोरिया, अमित पटेल, सुदामा चौधरी, राजेश चौकसे आदि शामिल थे। वर्ष 2020 में मिली थी अनुमति राज्य शासन ने वर्ष 2020 में स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एमओएस टैक्स की अनुमति दी थी। हालांकि पिछले पांच वर्ष से इसे लागू नहीं किया जा सका।  

इंदौर मेट्रो की स्पीड की जांच में सीएमआरएस का अहम टेस्ट, 80 की स्पीड पर चार बार ब्रेक टेस्ट

इंदौर  सुपर कॉरिडोर से लेकर रेडिसन तक  80 की स्पीड से मेट्रो दौड़ी। चार बार मेट्रो को दौड़ाकर ब्रेक स्पीड टेस्ट किया गया। इसमें मेट्रो को 80 की स्पीड पर पहुंचाने के बाद रोक कर जांच की गई। दरअसल यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन  मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। 80 की स्पीड में चेक हुए ब्रेक शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। 17 किमी पर संचालन जल्द होगा शुरू सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा। स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का जायजा सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन मंगलवार को मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। रात के अंधेरे में मेट्रो का ट्रायल बना आकर्षण शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। रात्रि में मेट्रो को वायडक्ट पर चलता देखकर विजय नगर और एमआर-10 क्षेत्र में रहने और गुजरने वाले रुककर देखने लगे। एनओसी मिलते ही शुरू होगा 17 किमी पर संचालन सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा।  

MP के ग्वालियर शहर के विस्तार की योजना, 600 करोड़ खर्च कर 3 दिशाओं में बढ़ेगी सीमा

ग्वालियर  ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए ) ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने विकास का रोडमैप तैयार कर लिया है। मंगलवार को संभागीय आयुक्त मनोज खत्री की अध्यक्षता में आयोजित संचालक मण्डल की बैठक में 241 करोड़ का बजट पेश किया गया। बजट का फोकस शहर के बाहरी इलाकों को मास्टर प्लान- 2035 के अनुसार मुख्य शहर से जोडऩे और नई आवासीय योजनाओं को विकसित करने पर है। खास बात यह है कि प्राधिकरण ने रुद्रपुरा और बड़ागांव के रूप में दो नई बड़ी योजनाओं को हरी झंडी दे दी है, जिससे आने वाले समय में शहर का दायरा और बढ़ेगा। वहीं पूर्व में स्वीकृत 363 करोड़ से एयरपोर्ट कॉरिडोर को हरी झंडी मिलने से इस तरफ के 15 गांवों में नए आवासीय शहर बस सकेंगे। झांसी बायपास और मुरैना रोड की ओर शहर का दबाव शिफ्ट होगा। शहर का विस्तार, तीन दिशाओं में खुलेंगे विकास के द्वार ग्वालियर अब अपनी पुरानी सीमाओं को तोड़कर बाहर की ओर बढ़ रहा है। जीडीए ने नए आवासीय क्षेत्रों के लिए तीन प्रमुख रूट्स को चिन्हित किए हैं, जहाँ आने वाले समय में टाउनशिप और सरकारी आवासीय योजनाएं नजर आएंगी:     मुरैना रोड (उत्तर दिशा): इस रूट पर पुरानी छावनी, खिरियाभाग, बदनापुरा व अन्य क्षेत्रों को नए आवासीय हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां औद्योगिक और आवासीय विकास का संगम दिखेगा। 2. झांसी बायपास (दक्षिण दिशा): शहर का सबसे प्रीमियम विस्तार इसी ओर हो रहा है। वीरपुरा, खरियामोदी, रमौआ, गणेशपुरा और बन्हारपुरा क्षेत्रों में मास्टर प्लान के तहत नई कॉलोनियां विकसित होंगी।     डबरा रोड (दक्षिणपूर्व दिशा): तुरारी, बागौर और भाटखेड़ी क्षेत्रों को नए रिहायशी जोन के रूप में मंजूरी मिली है। यहाँ की कनेक्टिविटी मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़कों से सीधे बायपास से होगी। एक साल बाद बैठक, दो नई नगर विकास योजनाओं को स्वीकृति     टीडीएस-07 (रुद्रपुरा): एयरपोर्ट से साडा लिंक रोड के पास 165.40 हेक्टेयर में विकसित होने वाली इस योजना पर 238 करोड़ खर्च होंगे, जबकि इससे 366 करोड़ के मुनाफे का अनुमान है।     टीडीएस-08 (बड़ागांव): मुरैना-झांसी बायपास को जोडऩे वाली इस योजना में 164.33 हेक्टेयर जमीन विकसित होगी। 181 करोड़ की लागत के मुकाबले 374 करोड़ के लाभ की उम्मीद है। दोनों योजनाओं के लिए प्लानिंग और बिल्डिंग टीमें तैनात कर दी गई हैं। मेला प्राधिकरण और अनुकंपा नियुक्ति व्यापार मेला: ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे शहर की व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी। हेल्थ सेक्टर: शताब्दीपुरम फेज-2 और यातायात नगर योजना में हेल्थ सेंटर और हेल्थ ब्लॉक के निर्माण को हरी झंडी मिली। इन सड़कों से सुधरेगी शहर की ‘रफ्तार’ मास्टर प्लान-2035 के तहत प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण को बजट में जगह मिली है : भाटखेड़ी-रमौआ मार्ग: ग्राम भाटखेड़ी से ग्राम रमौआ तक विकास कार्य। ललियापुरा अंडरपास: झांसी रोड से ब्लू लोटस कॉलोनी तक नई सड़क का निर्माण। झांसी बायपास कनेक्टिविटी: सिरोल तिराहे से झांसी बायपास तक 30 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण। एयरपोर्ट-साड़ा कोरिडोर: टीडीएस-04 योजना के तहत इस लिंक कोरिडोर के विकास कार्यों के लिए 363.66 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। ये पहले से स्वीकृत है। एयरपोर्ट-साडा लिंक कॉरिडोर को मंजूरी के लाभ ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यटन को नई गति देने के लिए नगर विकास योजना टीडीएस-04 (एयरपोर्ट साडा लिंक कॉरिडोर) भविष्य के लिए बेहतर योजना है। फायदा: यह कॉरिडोर शहर के मुख्य हिस्सों को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ेगा, जिससे वीआइपी मूवमेंट और आम यात्रियों के समय की भारी बचत होगी। सड़कों का जाल: मास्टर ह्रश्वलान 2035 के तहत सिरोल तिराहे से झांसी बायपास और भाटखेड़ी से रामिया तक 30 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कुछ स्थानों पर 60 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण पर भी मुहर लगी है, जो लिंक रोड की तर्ज पर शहर के बाहरी ट्रैफिक को नियंत्रित करेंगी। शताब्दीपुरम फेज-4: अब जमीन के बदले प्लॉट नहीं जीडीए की योजनाओं में अब तक ‘आपसी सहमति’ से जमीन के बदले भूखंड देने की जो परंपरा चली आ रही थी, उस पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विशेष रूप से शताब्दीपुरम योजना फेज-4 के तहत अब तक किसानों या जमीन मालिकों को उनकी जमीन के बदले विकसित भूखंड दे दिए जाते थे। मंगलवार को हुई बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब ऐसी किसी भी फाइल पर स्थानीय स्तर पर निर्णय नहीं होगा। अब जमीन के बदले मुआवजे या भूखंड के सभी प्रस्ताव ‘राज्य शासन’ को भेजे जाएंगे।   

आयुष मंत्री परमार ने बैतूल जिला आयुष विंग का किया निरीक्षण, दिए आवश्यक निर्देश

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को बैतूल में जिला चिकित्सालय जिला आयुष विंग का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंत्री  परमार ने पंचकर्म, शिरोधारा सहित विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों का अवलोकन किया। आयुष मंत्री  परमार ने सिकल सेल यूनिट के साथ आयुर्वेद एवं होम्योपैथी दवाओं के वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को दवाओं का वितरण सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने कहा कि आयुष औषधियों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जाए तथा आवश्यकता अनुसार समय पर मांग प्रस्तावित की जाए। निरीक्षण के दौरान मंत्री  परमार ने आयुष विंग में साफ-सफाई एवं सुव्यवस्थित संचालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने कहा कि जिले में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को दृढ़ता से स्थापित करते हुए, उनका प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इस अवसर पर मुलताई विधायक  चंद्रशेखर देशमुख, घोड़ाडोंगरी विधायक मती गंगाबाई उईके तथा जिला आयुष अधिकारी  योगेश चौकीकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

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