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Budget :फ्लाईओवर से जाम होगा कम! जबलपुर पश्चिम में 300 करोड़ में बनेगा, त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक सुविधा

जबलपुर  यातायात को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक और फ्लाईओवर निर्माण की योजना बनाई जा रही है। गढ़ा त्रिपुरी चौक से मेडिकल के बीच बनने वाले इस फ्लाईओवर का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है। दो किलोमीटर लंबा होगा फ्लाईओवर प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई लगभग दो किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से बायपास, मेडिकल कॉलेज, तिलवारा और धनवंतरी नगर की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों की अत्यधिक संख्या के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। आवासीय और चिकित्सा क्षेत्रों को जोड़ता है मार्ग त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक का हिस्सा आवासीय, शैक्षणिक क्षेत्रों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को जोड़ता है। यहां निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं की आवाजाही अधिक रहती है। सीमित सड़क चौड़ाई और अवैध कब्जों के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई लेग बनाने पर भी विचार इस फ्लाईओवर को बहुउपयोगी बनाने के लिए इसके कई लेग तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इससे आसपास के विभिन्न क्षेत्रों को सीधे जोड़ा जा सकेगा और मुख्य मार्ग के साथ वैकल्पिक मार्गों पर भी ट्रैफिक का बेहतर वितरण संभव होगा। 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत प्रस्तावित फ्लाईओवर की अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। तकनीकी सर्वेक्षण और डिजाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि इसी विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर पहले से मौजूद है। साथ ही सगड़ा में रेलवे लाइन के ऊपर फ्लाईओवर निर्माणाधीन है और बंदरिया तिराहे पर भी फ्लाईओवर प्रस्तावित है।  

हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी, पेंडिंग मामलों की संख्या 4,80,592; समाधान में 40 साल लग सकते हैं

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि न्यायाधीशों की मौजूदा संख्या 42 से बढ़कर 75 या 85 नहीं होती है, तो साढ़े चार लाख 80 हजार से अधिक लंबित प्रकरणों का बैकलाग खत्म करने में पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है। एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण इस संबंध में एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी लंबित मामलों के बढ़ने का प्रमुख कारण है। ऐसे में हाई कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति और उनके समाधान पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत राज्य का यह दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाए। लेकिन यदि न्याय मिलने में दशकों का समय लगे, तो यह संवैधानिक प्रावधान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। वर्तमान स्थिति इसी ओर संकेत करती है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 11 जजों की कमी, बढ़ते मामलों से बढ़ेगी मुश्किल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की बात करें तो यहां 53 स्वीकृत पदों के मुकाबले फिलहाल केवल 42 न्यायाधीश कार्यरत हैं। यानी 11 पद रिक्त, जो कुल स्वीकृत संख्या का करीब 20.75 प्रतिशत है। यह आंकड़ा इसलिए और चिंताजनक हो जाता है, क्योंकि मध्य प्रदेश पहले से ही लंबित मामलों के मामले में देश के बड़े राज्यों में शामिल है। हाईकोर्ट में जजों की यह कमी न केवल मामलों की सुनवाई को धीमा करती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों के भरोसे को भी कमजोर करती है। वकीलों और सामाजिक संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि जजों की कमी के कारण नियमित सुनवाई संभव नहीं हो पाती और तारीख पर तारीख न्याय व्यवस्था की पहचान बनती जा रही है। केंद्र सरकार ने संसद को यह भी बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्ति और पदों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकार और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 1639 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें से 803 जज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जो कुल कार्यरत संख्या का 48.99 प्रतिशत है। वहीं, करीब 51 प्रतिशत न्यायिक अधिकारी अन्य वर्गों से हैं। हालांकि, सरकार ने संसद में जिला-वार रिक्त पदों का कोई अलग-अलग ब्योरा पेश नहीं किया। इससे यह साफ हो जाता है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निचली अदालतों पर बढ़ते बोझ के बावजूद, जजों की वास्तविक कमी का जिला स्तर पर कोई सार्वजनिक और पारदर्शी आकलन सामने नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि अगर जिला-वार आंकड़े सामने आएं, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आ सकती है। देशभर की स्थिति: कई हाईकोर्ट में हालात बेहद गंभीर अगर देशभर की तस्वीर पर नजर डालें, तो हालात केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में 94 स्वीकृत पदों में से 14 पद खाली हैं, यानी करीब 14.9 प्रतिशत। दिल्ली हाईकोर्ट में 60 में से 16 पद (26.6 प्रतिशत) और मद्रास हाईकोर्ट में 75 में से 22 पद (29.3 प्रतिशत) रिक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी 34 स्वीकृत पदों में से एक पद खाली है, जो भले ही प्रतिशत में कम लगे, लेकिन शीर्ष अदालत में हर एक जज की भूमिका बेहद अहम होती है। इलाहाबाद, कलकत्ता और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा संकट आंकड़ों के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी सबसे ज्यादा है। यहां 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 पद खाली हैं, यानी 31.25 प्रतिशत। कलकत्ता हाईकोर्ट की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 72 में से 29 पद रिक्त हैं, जो 40.3 प्रतिशत बैठता है। वहीं जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट में हालात बेहद चिंताजनक बताए गए हैं, जहां 44 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में न्यायपालिका संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है। मध्य प्रदेश की निचली अदालतों में वर्गवार प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों का वर्गवार विवरण भी संसद में पेश किया गया। इसके अनुसार:     अनुसूचित जाति (SC): 263 जज – लगभग 16.05%     अनुसूचित जनजाति (ST): 232 जज – लगभग 14.15%     अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 308 जज – लगभग 18.79%     अन्य वर्ग: 836 जज – लगभग 51.01% कुल मिलाकर 1639 कार्यरत न्यायिक अधिकारियों में से लगभग आधे SC, ST और OBC वर्ग से हैं। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पद ही पर्याप्त नहीं हैं, तो प्रतिनिधित्व के ये आंकड़े न्यायिक बोझ को कितना कम कर पा रहे हैं। भोपाल के एडवोकेट सुनील आदिवासी ने द मूकनायक से बातचीत में न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अदालतों में जजों की कमी तो पहले से ही एक बड़ी समस्या है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दलित और आदिवासी वर्ग से आने वाले जज केवल नाम मात्र के बराबर रह गए हैं। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय की जिस अवधारणा की बात संविधान करता है, वह तब तक अधूरी रहेगी, जब तक न्याय देने वाली व्यवस्था में ही वंचित तबकों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती। एडवोकेट सुनील आदिवासी ने आगे कहा कि जब न्यायपालिका में दलित-आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित होता है, तो इसका असर फैसलों की संवेदनशीलता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते जजों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व पर ध्यान नहीं दिया गया, तो न्यायपालिका से आम जनता का भरोसा कमजोर होना तय है। न्याय में देरी और न्याय से वंचित? विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की कमी सीधे-सीधे न्याय में देरी से जुड़ी हुई है। जब एक-एक जज पर हजारों मामलों का बोझ हो, तो त्वरित और प्रभावी न्याय की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक रिक्त पदों को भरने में हो रही देरी पर … Read more

धार्मिक आस्था और आधुनिक अधोसंरचना का अद्भुत संगम — भैरव मंदिर, गूढ़ (रीवा) का भव्य लोकार्पण

A wonderful confluence of religious faith and modern infrastructure – Grand inauguration of Bhairav Temple, Gudh (Rewa) जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता  जबलपुर। धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वास्तुकला के सुंदर समन्वय का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आज गूढ़ स्थित भैरव मंदिर परिसर का भव्य लोकार्पण माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। यह अवसर न केवल क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण रहा, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था के नए केंद्र की स्थापना का ऐतिहासिक दिन भी बना। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह मंदिर परिसर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने इसे प्रदेश की धार्मिक पर्यटन संभावनाओं को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। परंपरा और आधुनिकता का संतुलित स्वरूप मंदिर परिसर की संपूर्ण वास्तु संकल्पना प्रसिद्ध आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव द्वारा तैयार की गई है। उनके डिज़ाइन में पारंपरिक मंदिर वास्तुकला की गरिमा और आधुनिक सुविधाओं का उत्कृष्ट संतुलन देखने को मिलता है। भव्य शिल्पकला, विस्तृत प्रांगण, सुव्यवस्थित मार्ग, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्था और सौंदर्यपूर्ण प्रकाश व्यवस्था इस परिसर को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। आर्किटेक्ट श्रीवास्तव ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक एवं सामाजिक केंद्र विकसित करना था जहाँ लोग शांति, संस्कृति और सामुदायिक जुड़ाव का अनुभव कर सकें। आस्था से सामाजिक समरसता तक भैरव मंदिर परिसर आने वाले समय में धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक आयोजनों, आध्यात्मिक प्रवचनों तथा सामुदायिक कार्यक्रमों का प्रमुख स्थल बनने की दिशा में अग्रसर है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम बताया। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्थल यह नव-निर्मित परिसर केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रेरक प्रतीक सिद्ध होगा। भव्यता, आध्यात्मिकता और आधुनिक दृष्टिकोण का यह संगम रीवा जिले को धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान देने जा रहा है।

देवी लोक की उड़ान, पार्किंग में दलदल का पड़ाव: नलखेड़ा में विकास बनाम कीचड़

Flight to the Divine, Parking Lot to the Swamp: Development vs. Mud in Nalkheda संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा । इन दिनों “देवी लोक” निर्माण की चर्चाएं आसमान छू रही हैं। योजनाओं की फाइलें इतनी ऊंची उड़ान भर रही हैं कि लगता है जल्द ही शहर अंतरिक्ष पर्यटन की सूची में शामिल हो जाएगा। लेकिन ज़मीन पर उतरते ही हकीकत ऐसी फिसलन भरी है कि हर बारिश के बाद पार्किंग स्थल कुश्ती का अखाड़ा बन जाता है, जहां गाड़ियां नहीं, संतुलन गिरता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही पार्किंग क्षेत्र का रंग “मिट्टी ब्राउन” हो जाता है और जूते-चप्पल “कीचड़ संस्करण 2.0” में अपग्रेड हो जाते हैं। श्रद्धालु और आम नागरिक दोनों ही मजबूरन इस दलदली रास्ते से गुजरते हैं, मानो देवी लोक से पहले “कीचड़ लोक” की परीक्षा देनी अनिवार्य हो।नगर के एक दुकानदार ने व्यंग्य करते हुए कहा,“देवी लोक बने या न बने, पार्किंग में कीचड़ का स्थायी स्मारक पहले तैयार हो गया है।”वहीं एक राहगीर का कहना है कि विकास की बातें सुनकर उम्मीद जगती है, लेकिन हर बारिश के बाद वही पुराना दृश्य देखकर लगता है कि योजनाएं शायद बादलों के साथ उड़ जाती हैंऔर ज़मीन तक पहुंचते-पहुंचते गल जाती हैं।नगरवासियों की मांग है कि देवी लोक जैसी बड़ी परियोजना से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। कम से कम इतना तो हो कि बारिश में पार्किंग तालाब न बने और शहरवासियों को कीचड़ में “आस्था के साथ स्लिप टेस्ट” न देना पड़े।अब देखना यह है कि प्रशासन पहले देवी लोक की तस्वीर बनाएगा या पार्किंग से कीचड़ की तस्वीर हटाएगा। फिलहाल नलखेड़ा में विकास की चर्चा और कीचड़ की मौजूदगी साथ-साथ चल रही है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पोस्टर में चमक और ज़मीन पर फिसलन।

बाबूलाल वरकडे भगत (कान्हावाडी) को पद्मश्री पुरस्कार देने की मांग को लेकर अजाक्स संगठन आमला ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौपा ज्ञापन।

Ajax organization Amla submitted a memorandum to the SDM in the name of the President demanding Padmashree award for Babulal Varkade Bhagat (Kanhawadi). हरिप्रसाद गोहे आमला। आज दिनांक 30/01/2026 को अजाक्स जिला कार्यकारिणी बैतूल के आव्हान पर  बाबूलाल वरकडे भगत (कान्हावाडी) को पद्मश्री पुरस्कार देने की मांग को लेकर अजाक्स संगठन आमला ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम आमला को ज्ञापन सौपा, सौपे गए ज्ञापन में निवेदन किया गया है कि बैतूल जिले के विकासखंड घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत कान्हावाड़ी में जन्मे वैद्य बाबूलाल वरकडे जी का जन्म ग्राम कान्हावाड़ी में दिनांक 01/10/1938 को हुआ है आप वैद्य के रूप में विगत कई वर्षों से क्षेत्र में निरंतर जन सेवा और संपूर्ण भारत के लोगों को कैंसर की बीमारी या अन्य बीमारी से पीड़ित मरीजों का इलाज लगातार कर रहे हैं आयुर्वेद( जड़ी बूटियां) के द्वारा  बीमारियां दूर कर रहे हैं साथ ही सभी मरीजों को निशुल्क सेवा दे रहे हैं। अतः राष्ट्रपति से अजाक्स संघ निवेदन करता है कि भविष्य में बाबूलाल वरकडे भगत को पद्मश्री पुरस्कार दिया जावे ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से अजाक्स तहसील अध्यक्ष आमला राजाराम नागले, अजाक्स ब्लॉक अध्यक्ष आमला श्रीमती रेखा धुर्वे, अजाक्स जिला उपाध्यक्ष बैतूल रामानंद बेले, अजाक्स जिला संयुक्तसचिव बैतूल देवानंद धुर्वे अजाक्स तहसील उपाध्यक्ष शिवप्रसाद गुजरे, श्रीमती रिंदों उइके,अजाक्स ब्लॉक उपाध्यक्ष दिनेश सोनारे,श्रीमती सरिता चौकीकर,अजाक्स तहसील महासचिव हरिदास पाटिल, रमेश ब्राह्मने, जगदीश निरापुरे, बालाराम मर्सकोले अजाक्स तहसील सचिव हरिदास बड़ोदे, श्रीमती रेखा नागले अजाक्स ब्लॉक कोषाध्यक्ष दवतसिंग धुर्वे, अजाक्स कार्यकारिणी सदस्य दिलीप कुमार दवंडे, श्रीमती मोनिका मर्सकोले सहित भारी संख्या में अजाक्स संगठन के सदस्यगण उपस्थित रहे ।

माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) से आमला पहुंचे पर्वतारोही प्रताप बिसंदरे।

Mountaineer Pratap Bisandre reached Amla from Mount Kilimanjaro (Tanzania). हरिप्रसाद गोहे  आमला । अफ्रीका महाद्वीप के माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) पर सफलतापूर्वक आरोहण करने के पश्चात, आज अपने गृहक्षेत्र आमला वापस लौटे प्रताप बिसंदरे। इस अवसर पर रेलवे स्टेशन आमला पर उनके स्वागत हेतु जिला पिट्टू एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज सोनी, व्यापारी संघ अध्यक्ष संजय साहू, आमला विकास समिति उपाध्यक्ष शेख हफीज, समाजसेवक चन्द्रशेखर पंड़ोले सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।बताया गया पर्वतारोही प्रताप बिसंदरे ने माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) जो अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी है और इसकी ऊंचाई 5,895 मीटर (19,340 फीट) है, इसे दुनिया का सबसे ऊंचा अकेला खड़ा पहाड़ कहा जाता है पर पर्वतारोहण कर 26 जनवरी 2026 को प्रातः 8:34 बजे (तंजानिया समयानुसार) सफलतापूर्वक आरोहण कर राष्ट्रध्वज तिरंगा लहराया था। पर्वतारोही प्रताप बिसंद्रे का जन्म, तहसील आमला के ग्राम बड़गांव में हुआ। इनके पिता रामचरण बिसंद्रे जी और परिवार, ग्राम बडगांव में ही निवास करता है। प्रताप जी ने पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स 2021 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से ‘A’ ग्रेड में किया, इसके बाद वर्ष 2023 में पर्वतारोहण का एडवांस कोर्स भी नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से पूरा किया । कोर्स के दौरान भी उत्तराखंड में स्थित पर्वत माछाधार और हुर्रा टॉप जिनकी ऊंचाई 16000 फीट है उनको भी कोर्स ग्रुप के साथ सफलता पूर्वक आरोहण किया। इन्होंने 15 अगस्त 2023 को माउंट यूनाम ऊँचाई 20049 फीट (6111 मी०) की चोटी पर सफलतापूर्वक आरोहण किया। पुनः 15 अगस्त 2024 को माउंट यूनाम ऊँचाई 20049 फीट (6111 मी०) की चोटी पर दूसरी बार आरोहण किया। 27 अगस्त 2024 को कांग यात्से–2 की चोटी ऊँचाई 20505 फीट (6250मी०) पर आरोहण किया।  30 अगस्त 2024 को कांग यात्से–1 की चोटी ऊँचाई 21000 फीट (6400 मी०) पर आरोहण‌ करने में सफलता प्राप्त की है।

केंद्रीय जेल जबलपुर की झांकी “गुडिया” बनी जेल सुधार की संवेदनशील मिसाल

The tableau of Central Jail Jabalpur, “Gudiya”, became a sensitive example of prison reform. जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता/ कैमरामैन  अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर । केंद्रीय जेल जबलपुर द्वारा प्रस्तुत झांकी “गुडिया” ने जेल सुधार और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा है। यह झांकी केंद्रीय जेल जबलपुर के बंदियों के अथक परिश्रम से तैयार की गई है, जो समाज को यह संदेश देती है कि सुधार की राह ही वास्तविक परिवर्तन की कुंजी है। मासूम “गुडिया” की कहानी से खुलता है सच झांकी में एक छोटी बच्ची “गुडिया” की कहानी के माध्यम से उन बच्चों की स्थिति को दर्शाया गया है, जो अपने माता या पिता के साथ जेल में रहने को मजबूर होते हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक दंडात्मक जेल व्यवस्था के चलते 6 वर्ष तक के निर्दोष बच्चों को भी जेल के कठिन वातावरण में रहना पड़ता था। सुधारात्मक सोच से बदली बच्चों की दुनिया झांकी में यह भी दर्शाया गया है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जेलों में सुधारात्मक विचारधारा अपनाए जाने के बाद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। अब जेल परिसरों में बच्चों के लिए बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ का मजबूत संदेश “गुडिया” झांकी बेटे और बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने का संदेश देती है और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है। यह समाज में समानता और जागरूकता को बढ़ावा देने वाली झांकी है। नारी सशक्तिकरण और बंदियों की भावनाएँ भी दिखीं झांकी में महिला कमांडो के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को दर्शाया गया है। वहीं जेल में सजा काट रहे बंदियों द्वारा जनजातीय गौरव दिवस जैसे अवसरों पर अपनी रिहाई की आशा को नृत्य के माध्यम से व्यक्त करते हुए दिखाया गया है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। समाज के लिए एक मजबूत संदेश कुल मिलाकर, केंद्रीय जेल जबलपुर की झांकी “गुडिया” यह साबित करती है कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, संवेदना और मानवता का केंद्र भी बन सकती है।

खेतों से मुफ्त बटोर रहे गन्ने की पत्तियां,भूमि को नहीं मिल पाएगी जैविक खाद ।

Sugarcane leaves are being collected for free from the fields, the land will not be able to get organic manure. हरिप्रसाद गोहेआमला/बैतूल ! एक तरफ सरकार खेतों में नरवाई जलाने पर पाबंदी लगाकर किसानों को फसल के अवशेष से जैविक खाद बनाने और भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले में एक कंपनी के द्वारा किसानों के खेतों से गन्ने की सूखी पत्तियां बटोरने का काम किया जा रहा है। इससे खेतों में सूखी पत्तियां ही शेष नहीं रहती हैं जिससे न तो जैविक खाद बन पाएगी और न ही जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। हद तो यह है कि कृषि विभाग का अमला इसकी जानकारी होने के बाद भी आंखे बंद किए बैठा नजर आ रहा है। उन्नत किसानों की मानें तो किसान गन्ने की सूखी पत्तियों को मल्चर की मदद से बारीक कर मिट्टी में मिला देते थे जिससे वह सड़ने के बाद जैविक खाद में बदल जाती थी और किसानों को फसलों से बेहतर पैदावार मिल जाती थी। अब निजी कंपनी के द्वारा किसानों को मुफ्त में खेत साफ कर देने का लालच दिखाकर गन्ने की पत्तियों को बटोरकर बंडल बनाने का काम किया जा रहा है।कंपनी के द्वारा जिले के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर यह कार्य प्रारंभ किया गया है और जगह-जगह गन्ने की पत्तियों के बंडल जमा कर रखे गए हैं।बारूद का काम कर रहे इन बंडलों में आग लगने की घटनाएं भी होने लगी हैं। गत दिवस मुलताई तहसील के ग्राम साईंखेड़ा में राहुल साहू के खेत में तथा गोलू मांकोड़े के घर के समीप रखे सूखी पत्तियों के बंडल में आग लग गई। घटना को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है और भविष्य में बड़ी अनहोनी की आशंका जताई है। बताया जा रहा है गन्ने का कचरा एक कंपनी द्वारा स्टाक किया गया था। हैरानी की बात यह रही कि घटना के बाद कंपनी का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि आसपास के घरों और खेतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बन गया था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि कोई कंपनी गांव या निजी भूमि पर ज्वलनशील कचरा या डस्ट रखती है, तो उसकी सुरक्षा, निगरानी और नियमित निरीक्षण की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की हो। शुगर मिल के प्रयास से सुधर रहीं जमीनें:जिले में गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शुगर मिलों के प्रबंधन की ओर से अनुदान पर गन्ने की सूखी पत्तियों को मल्चिंग करने वाले उपकरण दिलाए गए हैं। इनसे किसान और युवाओं को नया राेजगार भी मिल रहा है वहीं किसानों को खेतों में आग लगाने की बजाय मल्चिंग कराने पर शुगर मिलों के द्वारा किराए में 50 प्रतिशत की छूट भी दी जाती है। इसका ही नतीजा है कि पिछले करीब पांच वर्ष से जिले के गन्ना उत्पादक किसान कटाई के बाद गन्ने के खेतों में अवशेषों को अाग के हवाले न करते हुए मल्चिंग कर जैविक खाद के लिए बिखरा रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता, नमी संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। जागरूक किसानों का कहना है कि निजी कंपनियों के द्वारा गन्ने की सूखी पत्ती का संग्रह किया जाना न केवल किसानों के हितों के विरुद्ध है, बल्कि शासन द्वारा प्रोत्साहित सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को भी सीधी क्षति पहुंचा रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरता, जैविक कार्बन स्तर और जल संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों व एजेंसियों की गतिविधियों की तत्काल जांच कराई जाए, बिना वैधानिक अनुमति फसल अवशेष संग्रह पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए और किसानों को क्षति पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए आवश्यक प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएं। गन्ने की पत्ती से एक हेक्टेयर में बनती है पांच टन जैविक खाद:जिले में जैविक खेती कर गन्ने की फसल लगाने वाले किसानों का मानना है कि एक हेक्टेयर खेत से 7.5-10 टन सूखे पत्ते उपलब्ध होते हैं। इन्हें मल्चिंग कर खेत की मिट्टी में मिलाने से 5 टन के करीब जैविक खाद प्राप्त होता है।इससे फसल में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है और पैदावार भी बढ़ती है।

आमला : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में गंदगी का अंबार।

Amla: Piles of garbage in State Bank of India ATM. हरिप्रसाद गोहेआमला। नगर के जनपद चौक के करीब रतेड़ा रोड़ पर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में साफ सफाई के आभाव में कचरा और गंदगी बढ़ती जा रही है। जो सरकार के स्वच्छता अभियान पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।स्थानीय नागरिकों ने बताया की नगर के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र में स्थापित, इस एकमात्र एटीएम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा अन्य बैंक के उपभोक्ता एटीएम सुविधा का लाभ लेते हैं लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधन की लापरवाही से यहां कई दिनों से साफ़ सफाई नहीं हो पाई है जो बैंक खाताधारकों में आक्रोश का कारण बनते जा रही है। इन्होंने क्या कहाबैंक ने नागरिकों की सुविधा के लिए एटीएम लगवाया है, नागरिकों को साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए। आपने जानकारी दी है तो हम भी अपने स्तर से समस्या समाधान की कोशिश करेंगे।समीर चंदेल,शाखा प्रबंधक,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आमला ।

फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर प्रशासन का शिकंजा, जबलपुर में हाई-लेवल जांच शुरू

Administration cracks down on fake caste certificates, high-level investigation begins in Jabalpur विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तवभोपाल।सहकारिता विभाग मुख्यालय के स्थापना कक्ष में तरह-तरह की हैरत अंग्रेज मामले सामने आ रहे हैं स्थापना अधीक्षक संजीव गुप्ता द्वारा स्वयं की विवादित फाइल को घुमा दिया गया है जबकि सौरभ राजपूत के प्रकरण में पूर्व पंजीयक के आदेश की अवहेलना की जा रही है इसी कड़ी में एक और मामला सामने आया है जो जबलपुर का है जबलपुर उपयुक्त कार्यालय में यह साबित हो चुका है कि सीनियर कोऑपरेटिव इंस्पेक्टर हेमलता डोंगर का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है जिसके आधार पर वह वर्षों से नौकरी कर रही हैं संबंधित जांच विभाग द्वारा अनेक बार स्थापना कक्षा सहकारिता को इस बारे में जानकारी दी गई किंतु ना तो संजीव गुप्ता ने विभागीय जांच करवाई और ना ही फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे व्यक्ति पर निलंबन की कार्यवाही की स्थापना कक्षा की इस कार्य प्रणाली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं सूत्रों के अनुसार संजीव गुप्ता भ्रष्टाचार में इतना दबंग हो चुका है कि वह तय करता है की स्थापना कक्ष में कौन अधिकारी काम करेगा।वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करके किस फाइल को समक्ष रखना है किसे नहीं यह खेल कब तक रुकेगा यह देखने लायक होगा। संभावित सुर्खियां:

लाइफ केरियर स्कूल में ,स्ट्रेस मैनेजमेंट विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन।

A one-day workshop on the topic of stress management was organised at Life Career School. हरिप्रसाद गोहेआमला। आमला नगर का पहला प्राइवेट सी.बी.एस.ई. स्कूल – लाइफ केरियर सीनियर सेकेण्डरी सी.बी.एस.ई. स्कूल में केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निर्देशानुसार टीचर्स कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम – ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। आयोजित कार्यक्रम में बेतूल जिले के 6 स्कूलों के 60 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया। इस मौके परमास्टर ट्रेनर और प्राचार्य अनिल अहिरवार ने हास्य, चार्ट, ड्राइंग एवं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को स्कूल में कक्षा के माहौल, शिक्षक एवं छात्र के मध्य सामंजस्य तथा पालक व शिक्षक के बीच सामंजस्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। उन्होंने कहा कि कक्षा का वातावरण दबाव रहित एवं आनंदमय होना चाहिए, इसके लिए आवश्यक है कि स्वयं शिक्षक खुश हों क्योंकि जो स्वयं खुश होगा वही दूसरों को भी खुश रख सकता है।वहीं ट्रेनर श्रीमती सुनिता भटनागर ने शिक्षकों की अलग-अलग टोली बनाकर नाट्य मंचन के माध्यम से स्ट्रेस को कम करने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी तथा स्ट्रेस के विभिन्न प्रकार से शिक्षकों को अवगत कराया। एडवोकेट शाहिद बेग ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सी.बी.एस.ई. के शिक्षक क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत शिक्षकों में आधुनिक शिक्षण विधियों से अपडेट करना, उनकी पढ़ाने की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों में कौशल, रचनात्मकता व आत्मविश्वास विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

गूगल करेगा म.प्र. में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश

Google to invest in IT, ITES and data centres in Madhya Pradesh गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट संजय गुप्ता के साथ दावोस में मंगलवार को मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने बैठक कर राज्य में आईटी, आईटीईएस सेक्टर और मौजूदा प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। गुप्ता ने मध्यप्रदेश में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश की रूचि दिखाई। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला सहित अधिकारी उपस्थित रहे। गूगल की ओर से राज्य में जेमिनी एआई (Gemini AI) के माध्यम से कृषि एवं शिक्षा क्षेत्रों में नवाचार और डिजिटल समाधान लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए। बैठक में राज्य शासन द्वारा आईटी एवं डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए पर्याप्त एवं सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु हरित ऊर्जा आधारित नीति तैयार करने की योजना से अवगत कराया गया। साथ ही, गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने की मध्यप्रदेश की क्षमता, अनुकूल नीतिगत ढांचा और सहयोगी दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया गया। गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट श्री संजय गुप्ता ने आईटी अवसंरचना, डिजिटल नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से मध्यप्रदेश को एक उभरते तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग दिए जाने पर सहमति व्यक्त की।

रतेड़ा कला में 2026 आनंद उत्सव का हुआ आयोजन।

Anand Utsav 2026 was organised in Rateda Kala. हरिप्रसाद गोहेआमला। आमला ब्लाक अंतर्गत आने वाली रतेड़ाकला ग्राम पंचायत में कलस्टर स्तरीय आनंद उत्सव 2026 का आयोजन आयोजित किया गया, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत रतेड़ाकला सरपंच महोदया श्रीमती पार्वती ज्ञानसिंह धुर्वे और विशिष्ट अतिथि ग्राम पंचायत लादी सरपंच राजू कुमार सिलु उपस्थित थे। आयोजित कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत और लोक नृत्य की प्रस्तुति दी।वहीं खेलकूद प्रतियोगिताओं में ओपन चम्मच दौड़, बाधा दौड़ और कबड्डी प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें ओपन कबड्डी प्रतियोगिता में 11 स्टार क्लब खारीमाल की टीम विजेता रही। विजेता टीम और खिलाड़ियों को नगद राशि और उपहार देकर पुरस्कृत किया गया।इस अवसर पर मुख्य रूप से प्राचार्य शासकीय हाई स्कूल रतेड़ाकला श्रीमती उषा सूर्यवंशी, प्राचार्य शासकीय हाई स्कूल खारीमाल शैलेंद्र सूर्यवंशी ग्राम पंचायत रतेड़ा कला राजकुमार नागले, सचिव ग्राम पंचायत लादी शिवराम साहू तथा माध्यमिक शाला लादी माध्यमिक शाला खारीमाल माध्यमिक शाला परसोड़ी शासकीय हाई स्कूल खारीमाल एवं शासकीय हाई स्कूल रतेड़ाकला से शिक्षक गण व ग्राम पंचायत लादी एवं ग्राम पंचायत रतेड़ाकला से भारी संख्या में गणमान्य नागरिकगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे कार्यक्रम का सफल संचालन शासकीय हाई स्कूल खारीमाल के शिक्षक राजाराम नागले ने किया कार्यक्रम के अंत में आभार ग्राम पंचायत सचिव राजकुमार नागले के द्वारा किया गया।

भोपाल में एक्यमानस मित्र द्वारा डिमेंशिया जागरूकता की महत्वपूर्ण पहल

A significant dementia awareness initiative by Akymanas Mitra in Bhopal भोपाल ! एक्यमानस मित्र द्वारा आयोजित डिमेंशिया अवेयरनेस गेट-टुगेदर में 30–35 लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जहाँ डिमेंशिया जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर संवाद हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझना और समाज में इसकी जागरूकता बढ़ाना था, जहाँ अब भी जानकारी और संरचित सहायता की कमी महसूस की जाती है।सत्र के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि डिमेंशिया केवल याददाश्त से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क से संबंधित एक जटिल स्थिति है, जो व्यक्ति के व्यवहार, भावनाओं और रोज़मर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करती है। उम्र बढ़ने के साथ सही समझ, लाइफस्टाइल में बदलाव और भावनात्मक सहयोग की अहम भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट इशिता सचान ने डिमेंशिया के मानसिक और संज्ञानात्मक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया, जिससे प्रतिभागियों को इसके प्रभाव और संकेतों को पहचानने में स्पष्टता मिली। एक्यमानस मित्र के संस्थापक दीपक भंडारी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह अपनी माता के डिमेंशिया से जूझने के अनुभव ने उन्हें इस पहल की शुरुआत के लिए प्रेरित किया। उनकी कहानी ने कार्यक्रम को एक मानवीय और भावनात्मक जुड़ाव प्रदान किया।कार्यक्रम में आयोजित एक इंटरएक्टिव मेमोरी चैलेंज के माध्यम से प्रतिभागियों को यह अनुभव कराया गया कि स्मृति कैसे कार्य करती है और डिमेंशिया में उसमें किस प्रकार के बदलाव आते हैं।यह आयोजन सफल रहा क्योंकि इसमें डिमेंशिया पर खुली चर्चा हुई—एक ऐसा विषय जिस पर अक्सर बात नहीं की जाती। इस तरह की पहलें वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और सहयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।एक्यमानस मित्र, जो एक समर्पित मेमोरी केयर और डे-केयर सेंटर है, आगे भी डिमेंशिया जागरूकता अभियानों और संज्ञानात्मक आकलन (assessment) कार्यक्रमों का आयोजन करेगा, जिससे लोग अपनी मानसिक स्थिति को समझ सकें और समय रहते सही मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

आमला के प्रताप बिसंदरे, अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) में लहरायेंगे तिरंगा।

Pratap Bisandre of Amla will hoist the tricolor at Mount Kilimanjaro (Tanzania) in Africa. हरिप्रसाद गोहे  आमला। प्रसिद्ध पर्वतारोही प्रताप बिसंदरे, माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) जो अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी है और इसकी ऊंचाई 5,895 मीटर (19,340 फीट) है, इसे दुनिया का सबसे ऊंचा अकेला खड़ा पहाड़ कहा जाता है पर पर्वतारोहण कर 26 जनवरी को लहरायेंगे तिरंगा ध्वज। आज आमला से अफ्रीका के लिए रवाना होने से पूर्व पर्वतारोही प्रताप बिसंदरे का जिले के खेल संघों के प्रतिनिधि के रूप में बैतूल जिला पिट्टू एसोसिएशन के अध्यक्ष – नीरज सोनी, उपाध्यक्ष – नरेश भावसार, कोषाध्यक्ष – हरिभाऊ झरबड़े के द्वारा प्रमुख समाजसेवियों की उपस्थिति में सम्मान किया गया।गौरतलब हो कि पर्वतारोही प्रताप बिसंद्रे का जन्म, तहसील आमला के ग्राम बड़गांव में हुआ। इनके पिता रामचरण बिसंद्रे जी और परिवार, ग्राम बडगांव में ही निवास करता है। प्रताप जी ने पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स 2021 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से ‘A’ ग्रेड में किया, इसके बाद वर्ष 2023 में पर्वतारोहण का एडवांस कोर्स भी नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से पूरा किया । कोर्स के दौरान भी उत्तराखंड में स्थित पर्वत माछाधार और हुर्रा टॉप जिनकी ऊंचाई 16000 फीट है उनको भी कोर्स ग्रुप के साथ सफलता पूर्वक आरोहण किया। इन्होंने 15 अगस्त 2023 को माउंट यूनाम ऊँचाई 20049 फीट (6111 मी०) की चोटी पर सफलतापूर्वक आरोहण किया। पुनः 15 अगस्त 2024 को माउंट यूनाम ऊँचाई 20049 फीट (6111 मी०) की चोटी पर दूसरी बार आरोहण किया। 27 अगस्त 2024 को कांग यात्से–2 की चोटी ऊँचाई 20505 फीट (6250मी०) पर आरोहण किया।  30 अगस्त 2024 को कांग यात्से–1 की चोटी ऊँचाई 21000 फीट (6400 मी०) पर आरोहण‌ करने में सफलता प्राप्त की। अब वर्ष 2026 में पर्वतारोही प्रताप बिसंदरे, माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) पर 21 जनवरी से 28 जनवरी के मध्य पर्वतारोहण करेंगे तथा अपनी मातृभूमि को गौरवान्वित करेंगे।

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