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MP : कैश कांड में सिंधिया समर्थक नेताओं का नाम आने के बाद बीजेपी में हड़कंप

भोपाल। मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान कैश के लेनदेन को लेकर हो रहे खुलासों में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के नाम तो शामिल हैं ही, लेकिन सीबीडीटी की रिपोर्ट में सिंधिया समर्थक उन नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं जो पहले कांग्रेस में थे लेकिन फिर बीजेपी में शामिल हो गए। इतना ही नहीं कुछ नाम तो ऐसे हैं जो अभी शिवराज सरकार में मंत्री हैं या फिर बीजेपी से विधायक हैं। कैशकांड में कांग्रेस पर हमलावर हो रही बीजेपी आखिर इनको लेकर क्या स्टैंड अपना रही है? इस खुलासे से बीजेपी खेमे में हड़कंप है. इस सिलसिले में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि कमलनाथ के काले और गोरखधंधों की वजह से ही उन नेताओं ने कांग्रेस छोड़ी थी। इस मामले में कोई भी लिप्त क्यों न हो कानून – अपना काम करेगा। वीडी शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास रहा है भ्रष्टाचार का। दिग्विजयसिंह तो पहले से कहते रहे हैं कि चुनाव मैनेजमेंट से जीते जाते हैं। दिग्विजयसिंह ने धनबल बाहुबल से चुनाव जीतने की कोशिश की। कमलनाथ इस पूरे खेल के कर्ताधर्ता थे उन पर भी एफआईआर होनी चाहिए। कांग्रेस से बीजेपी में गए इन नेताओं के नाम सामने आए सीबीडीटी की रिपोर्ट में कुछ ऐसे नेताओं के नाम भी हैं जो पहले कांग्रेस में थे, लेकिन अब बीजेपी में आ चुके हैं। इनमें राहुल लोधी, नारायण पटेल, बिसाहूलाल सिंह, रक्षा सिरोनिया, प्रद्युमन सिंह तोमर, राजवर्धन दत्तिगांव, गिर्राज दंडोतिया, कमलेश जाटव, रणवीर जाटव, एदल सिंह कंसाना, सुमित्रा कासदेकर, प्रद्युम्न लोधी के नाम शामिल हैं। इनके साथ ही बीएसपी के दोनों विधायक और एसपी के एक विधायक के नाम भी शामिल हैं। कांग्रेस का पलटवार आयकर की रिपोर्ट में कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आने पर दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधा है। दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। आयोग ने उन अफसरों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए हैं, जिनका चुनाव करवाए जाने से कोई लेना-देना नहीं रहा। भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर आदेश देने का अधिकार चुनाव आयोग को नहीं है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि हर तरह की जांच के लिए कांग्रेस नेता तैयार हैं।  

अमित शाह बोले- पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर, हम लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे

बीरभूम। पश्चिम बंगाल के अपने दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीरभूम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने राज्य की टीएमसी सरकार को निशाने पर लेते हुए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा पर हुए हमले का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हम हिंसा का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगे. आने वाले चुनाव में इस सरकार को हराकर दिखाएंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम सीमा पर है. तीन सौ से ज्यादा बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है. इसकी जांच में एक इंच भी प्रोग्रेस दिखाई नहीं पड़ता है. अमित शाह ने कहा, “लोकतंत्र में सभी को अपनी आवाज उठाने का हक होना चाहिए. जनता तक अपनी बात पहुंचाने का हक होना चाहिए. जो शासन में होते हैं उनकी ये जिम्मेदारी होती है कि वो ये सुनिश्चि करें कि सभी राजनीतिक दल अपनी बात जनता तक पहुंचा पाएं.” केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, “मैं मानता हूं कि भारत के सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पर ये हमला केवल भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पर हमला नहीं है, बंगाल में जो लोकतंत्र की व्यवस्था है उस पर हमला है. इसकी पूरी जिम्मेदारी तृणमूल कांग्रेस की सरकार की है. सत्ता का अहंकार जब सिर पर चढ़ जाता है तब इस प्रकार की घटनाएं आकार लेती हैं.” अमित शाह ने कहा, “मैं टीएमसी के सभी नेताओं को बताना चाहता हूं कि किसी गलतफहमी में मत रहिए कि इस तरह के हमले से भारतीय जनता पार्टी की गति रुकेगी और वह अपने कदम पीछे ले लेगी. जितना हिंसा का वातावरण बनेगा, बीजेपी बंगाल में खुद को मजबूत करने के लिए मेहनत करेगी. हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता. हिंसा का जवाब हम लोकतांत्रिक तरीकों से देंगे. आने वाले चुनाव में इस सरकार को हराकर दिखाएंगे.” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमला होने के बाद राज्य की मुखिया की ओर से जो प्रतिक्रिया आनी चाहिए थी, वो प्रतिक्रिया भी नहीं आई. ये चिंता की बात है. टीएमसी नेताओं के बयान इसका समर्थन करने वाले मालूम हुए. ममता सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यहां भ्रष्टाचार भी चरम सीमा पर है. साइक्लोन के राहत का जो पैसा भारत सरकार भेजती है, उसमें भी भ्रष्टाचार हुआ. कोरोना काल में पीएम नरेंद्र मोदी ने जो भोजन भेजा उसकी बोरियां की बोरियां गायब हो गईं. गरीब लोग भूखे रहे. इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

किसान आंदोलन में 20 वीं मौत, बठिंडा में 22 साल के किसान ने जहर खाकर जान दी

नई दिल्ली। किसान आंदोलन में एक और सुसाइड की खबर सामने आई है। बठिंडा में 22 साल के किसान गुरलाभ सिंह ने रविवार को खुदकुशी कर ली। वह दो दिन पहले ही कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन से लौटा था। इससे पहले, 16 नवंबर को 65 साल के संत बाबा राम सिंह ने खुदकुशी कर ली थी। उन्होंने गुरुमुखी में लिखे सुसाइड नोट में कहा था कि यह जुल्म के खिलाफ एक आवाज है। बठिंडा के कस्बा रामपुरा फूल के दयालपुरा में रहने वाला गुरलाभ 18 दिसंबर को ही अपने वापस आया था। वह हरियाणा के बहादुरगढ़ से सटे दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर धरने में शामिल था। उसने रविवार को जहर की गोलियां खाकर जान दे दी। शुरुआती जांच में पता चला है कि गुरलाभ सिंह छोटे स्तर का किसान था और उस पर करीब 6 लाख रुपए का कर्ज था। दिल्ली में कड़ाके की सर्दी के बावजूद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान राजधानी के बॉर्डर पर डटे हुए हैं। रविवार को बॉर्डर पर जमे प्रदर्शनकारी। दिल्ली में कड़ाके की सर्दी के बावजूद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान राजधानी के बॉर्डर पर डटे हुए हैं। रविवार को बॉर्डर पर जमे प्रदर्शनकारी। संत राम सिंह ने कोंडली बॉर्डर पर सुसाइड किया था संत राम सिंह ने कोंडली बॉर्डर पर खुदकुशी की थी। लोग उन्हें पानीपत के पॉर्क अस्पताल लेकर गये थे। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। बाबा राम सिंह करनाल के सिंघरा गांव के रहने वाले थे। वे सिंघरा के ही गुरुद्वारा साहिब नानकसर के ग्रंथी थे। उनके अनुयाइयों की तादाद लाखों में बताई जा रही है। संत राम सिंह ने किसान आंदोलन के समर्थन में 16 नवंबर को खुदकुशी की थी, सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा था- यह जुल्म के खिलाफ आवाज है। संत राम सिंह ने किसान आंदोलन के समर्थन में 16 नवंबर को खुदकुशी की थी, सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा था- यह जुल्म के खिलाफ आवाज है। आंदोलन के दौरान अब तक 20 से ज्यादा किसानों की मौत कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान दिल्ली बॉर्डर पर पिछले 25 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड में भी उनका प्रदर्शन जारी है। आंदोलन के दौरान अब तक अलग-अलग वजहों से 20 से ज्यादा किसानों की माैत हो चुकी है।

MP : सांसद प्रज्ञा की तबीयत बिगड़ी:सांस लेने में तकलीफ; AIIMS दिल्ली में भर्ती

भोपाल। राजधानी भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की तबीयत शुक्रवार को रात में अचानक बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में आ रही दिक्कत के कारण एम्स नई दिल्ली में भर्ती कराया गया है। उनमें कोरोना संक्रमण से मिलते जुलते लक्षण भी पाए गए थे। शुक्रवार की रात राजधानी दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती किया गया है। इस वजह से सांसद शनिवार को मुंबई की एक स्पेशल एनआईए कोर्ट में पेश नहीं हो पाईं। यह एक महीने में दूसरा मौका है, जब प्रज्ञा अदालत में तारीख पर पेश नहीं हुईं। राहत वाली बात ये रही कि उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। प्रज्ञा ठाकुर को फिलहाल एम्स के प्राइवेट वार्ड में रखा गया है। वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी रख रही है। वहीं एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। आज एम्स प्रज्ञा ठाकुर का हेल्थ बुलेटिन जारी करेगा, जिसमें स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी। एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रज्ञा ठाकुर को सांस लेने में शुक्रवार रात करीब 10 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। तब उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। सांसद का ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ था। बताया जा रहा है कि दवा देने के बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और अब उनकी हालत स्थिर है। पल्मोनरी व कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। एम्स में उनकी कई तरह की जांच भी गई हैं। बीमार होने के कारण एनआईए कोर्ट में नहीं पेश हो पाईं मालेगांव में 2008 में हुए बम धमाकों के मामले में आरोपी भोपाल से BJP सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर शनिवार को मुंबई के एक स्पेशल एनआईए कोर्ट में पेश नहीं हुईं। यह एक महीने में दूसरा मौका है, जब प्रज्ञा अदालत में तारीख पर पेश नहीं हुईं। ठाकुर के वकील ने कहा कि उन्हें शुक्रवार को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिसकी वजह से वह अदालत नहीं पहुंच सकीं। अदालत में पांच आरोपी मौजूद थे। न्यायाधीश पीआर शित्रे ने दो अन्य आरोपियों की गैर मौजूदगी पर नाखुशी जाहिर की। अदालत ने इसके बाद सभी सातों आरोपियों को 4 जनवरी को पेश होने का निर्देश दिया। सांसद की तरफ से पेश वकील जेपी मिश्रा ने कहा, ‘दिल्ली के एम्स में ठाकुर का अप्रैल से ही इलाज चल रहा है। वह वहां जांच के लिए गईं थीं और उनकी मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टरों के निर्देश पर शुक्रवार को उन्हें भर्ती होना पड़ा।’ ठाकुर के अलावा एक अन्य आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी भी व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर अदालत में पेश नहीं हुआ। अगली पेशी में कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगी सांसद सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के पीआरओ संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि उनका लंबे समय से एम्स में इलाज चल रहा है। रूटीन चेकअप के लिए सांसद दिल्ली एम्स गई थी, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें एडमिट होने की सलाह दी। डॉक्टरों के सुझाव पर सांसद महोदय दिल्ली एम्स में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। स्वास्थ्य कारणों के चलते वह पेशी पर नहीं जा सकीं। लेकिन कोर्ट की अगली तारीख पर वह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखेंगी।

गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में तृणमूल के बागी शुभेंदु के साथ 10 विधायक भाजपा में आए

कोलकाता। दो दिन के बंगाल दौरे पर गए अमित शाह शनिवार को मिदनापुर पहुंचे। यहां उनकी रैली के दौरान TMC छोड़ चुके और ममता के खास रहे पूर्व मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा का दामन थाम लिया। सांसद सुनील मंडल, पूर्व सांसद दशरथ तिर्की और 10 MLA ने भी भाजपा जॉइन की है। इनमें 5 विधायक तृणमूल कांग्रेस के हैं। इस पर शाह ने कहा कि चुनाव आते-आते दीदी (ममता बनर्जी) अकेली रह जाएंगी। शुभेंदु अधिकारी विधायकी छोड़ चुके हैं, हालांकि उनका इस्तीफा अब तक मंजूर नहीं हुआ है। अपने भाषण में शाह ने ममता बनर्जी को ही निशाने पर रखा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस महान भूमि को प्रणाम करता हूं, जहां शिक्षा शास्त्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर और शहीद खुदीराम बोस का जन्म हुआ। 18 साल का लड़का हाथ में गीता लेकर हंसते-हंसते फांसी पर झूल गया। उनकी शहादत के बाद लोगों में खुदीराम की धोती पहनने की होड़ लग गई थी। दूसरी पार्टियों के अच्छे लोग भाजपा से जुड़े शाह ने कहा कि शुभेंदु की अगुआई में आज सभी अच्छे लोग भाजपा से जुड़े हैं। दीदी कहती हैं कि भाजपा दलबदल कराती हैं। दीदी जब कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में आई थीं, वो क्या था। चुनाव आते-आते तृणमूल खाली हो जाएगी। जो हमारे साथ आ रहे हैं, वो मां-माटी-मानुष के नारे के साथ निकले थे। आपको 10 करोड़ बंगालियों का भविष्य नहीं दिखता। मैं बंगाल के किसानों को पूछना चाहता हूं कि मोदीजी जो 6 हजार रुपये दे रहे हैं, वो आपको क्यों नहीं मिल रहा। मोदी जी लोगों को आयुष्मान भारत योजना दे रहे हैं, ममता के रहते लोगों को ये नहीं मिल पाएगा। जब तक आप तृणमूल को उखाड़कर नहीं फेंक देते, 6 हजार नहीं मिलेंगे। मोदी जी जो भेजना चाहते हैं, वो लोगों को नहीं मिल रहा। ममता पर निशाना, सोनार बांग्ला बनाने का वादा अमित शाह ने कहा कि ममता दीदी, इस बार चुनाव परिणाम आएं तो देख लेना भाजपा 200 से ज्यादा सीटें जीतेगी। बंगाल में टोल बाजी बढ़ गई। गुंडों को शरण दी जा रही है। मोदी जी ने जो अम्फान तूफान आने के बाद जो पैसे भेजे, वो गुंडों के पास चले गए। हमने अनाज भेजा, वो ममता के कार्यकर्ताओं के हिस्से में चला गया। हाल ही में हमारे पार्टी अध्यक्ष नड्डा जी की गाड़ी पर पथराव किया गया। दीदी, जितनी हिंसा करोगी, भाजपा कार्यकर्ता उतना तेज जवाब देगा। दीदी, पूरा बंगाल आपको हटाने के लिए खड़ा हुआ है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि बंगाल के मजदूरों, किसानों, युवाओं की समस्याओं का समाधान मोदी जी सरकार ही कर सकती है। आपने तीन दशक कांग्रेस को मौका दिया। कम्युनिस्टों को 27 साल दिए। ममता को 10 साल दिए। हमें एक मौका दीजिए, बंगाल को सोनार बांग्ला बना देंगे। ये विधायक भाजपा में शामिल हुए तापसी मंडल, अशोक डिंडा, सुदीप मुखर्जी, सैकत पांजा, शीलभद्र दत्ता, दिपाली बिस्वास, शुक्र मुंडा, श्यांपदा मुखर्जी, बिस्वजीत कुंडू और बानाश्री मैती।   उन्होंने कहा कि ये संयोग ही है कि आज ही के दिन राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को भी फांसी हुई थी। युवाओं से कहना चाहता हूं कि देश के लिए मरने का मौका तो नहीं मिला, पर देश के लिए जीने का मौका जरूर मिला। खुदीराम बोस के सिद्धांतों पर चलकर हम भविष्य के काम करेंगे। खुदीराम बोस जितने बंगाल के थे, उतने भारत के लिए थे। बिस्मिल जितने यूपी के थे, उतने भारत के थे। बंगाल में जैसी ओछी राजनीति देखी जा रही है, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई। शाह के साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और कैलाश विजयवर्गीय मौजूद हैं। शहीद खुदीराम को यहां दी गई थी फांसी, चिता स्थल पर बना दिया था टॉयलेट भास्कर एक्सप्लेनर:बिहार के बाद अब बंगाल पर नजर: जानिए किस तरह दीदी के लिए खतरा बन गई है भाजपा इस दौरे में अमित शाह बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति का खाका खींचेंगे।पश्चिम बंगाल के चुनाव में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कोरोना संक्रमित होने के बाद यहां का चुनावी मोर्चा खुद अमित शाह ने संभाला है। ममता से तनातनी और चुनाव के कारण दौरा अहम इस समय केंद्र और ममता सरकार के संबंध अच्छे नहीं चल रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला, भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले और राज्य के अधिकारियों से जवाब-तलब के कारण यह तल्खी ज्यादा बढ़ गई है। इसी बीच अमित शाह का दौरा अहम हो जाता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा हर महीने पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे। यहां अगले साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। पहले नड्डा अक्टूबर में एक दिन के लिए उत्तरी बंगाल गए थे। कुछ दिन पहले ही वे दो दिन के दौरे पर पहुंचे थे।

MP : गंभीर आरोप… शिवराज के करीबी अफसर ने दो बार गुजरात के सीएम को 5-5 करोड़ रुपए भेजे

भोपाल। पूर्व मुख्मयंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्मयंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी अफसर नीरज वशिष्ठ पर गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की रिपोर्ट में अफसरों के साथ कांग्रेस नेताओं के नाम उजागर होने के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सबसे करीबी अफसर नीरज वशिष्ठ ही पैसों का लेन-देन का काम देखते हैं। 2013 में आयकर ने छापे मारे थे, जिसमें कम्प्यूटर की जांच में यह जानकारी मिली थी कि 12 और 29 नवंबर 2013 को नीरज वशिष्ठ ने गुजरात के मुख्यमंत्री को 5-5 करोड़ रुपए दिए। ऐसी कई एंट्री आयकर विभाग को मिली थीं। दिग्विजय ने कहा कि उस समय डायरी और कम्प्यूटर से मिली जानकारी के आधार पर नीरज वरिष्ठ के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीरज वरिष्ठ प्रथम श्रेणी के अफसर हैं। प्रथम श्रेणी के अफसर पूर्व मुख्यमंत्री का ओएसडी नहीं बनाया जा सकता, लेकिन शिवराज सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से कह कर नियमों के खिलाफ वशिष्ठ की पोस्टिंग कराई थी। दिग्विजय ने आरोप लगाया कि सीबीडीटी की रिपोर्ट में जिन अफसरों के नाम हैं, वे ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच कर रहे थे। शिवराज सरकार के तीसरे कार्यकाल में 1 हजार करोड़ का घोटाला हुआ। जिसने यह घोटाला पकड़ा, वे सीएम के प्रमुख सचिव हैं। यदि पांच साल मौका मिलता, तो शिवराज सरकार के कई मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई हाेती। इससे बचने के लिए बीजेपी ने कमलनाथ सरकार को गिराया था। कमलनाथ सरकार के दौरान लोकसभा और विधानसभा चुनावों में काले धन के इस्तेमाल के मामले में पड़े इनकम टैक्स रेड के दस्तावेजों में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के नाम सामने आने के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में हड़कंप मच गया है। मामले में सफाई पेश करने के लिए एमपी कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। पीसी को दिग्विजय सिंह ने संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ जीतू पटवारी और अरुण यादव भी मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जो जांच करानी है, करा लें, कांग्रेस का कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है। हम जमीन से अदालत तक लड़ाई लड़ेंगे। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय ने सांवेर की बैठक में कहा था कि कमलनाथ सरकार को गिराना जरूरी था, वरना हम बर्बाद हो जाते। उन्होंने कुछ दिन पहले ही स्वीकार किया था कि कमलनाथ की सरकार प्रधानमंत्री मोदी ने गिराई। उन्होंने ने कहा कि सीबीडीटी और आयकर विभाग ने गोपनीयता भंग की है। जानबूझकर लिस्ट लीक की गई है। इसकी जांच होना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने मीडिया को 5-5 करोड़ रुपए बैंक खाते से ट्रांसफर किए जाने के दस्तावेजी सबूत भी दिए हैं।

कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की बैठक, निशाने पर सुरजेवाला

नई दिल्ली। दिल्ली में देर रात कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की बैठक हुई है. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में कांग्रेस के असंतुष्ट ग्रुप G-23 के नेता शामिल हुए हैं. ये सभी नेता रणदीप सुरजेवाला की प्रेस कॉन्फ्रेंस से नाराज हैं. इन नेताओं का कहना है कि अगर सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं तो मीटिंग की जरूरत ही क्यों है? बता दें कि 18 दिसंबर को रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि असंतुष्ट नेताओं की मुख्य मांग कांग्रेस का पूर्णकालिक अध्यक्ष चुनने की थी. अब जनवरी के अंत तक या फरवरी में चुनाव होने वाला है. इसी के साथ ही असंतुष्ट नेताओं की मांग पूरी हो गई है. कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी जल्द ही नए पार्टी अध्यक्ष का चुनाव करने की प्रक्रिया शुरू करेगी. कांग्रेस के इलेक्टोरल कॉलेज, AICC के सदस्य, कांग्रेस कार्यकर्ता और सदस्य चुनेंगे कि सबसे उपयुक्त कौन है. लेकिन मेरे समेत 99.9 फीसदी लोग चाहते हैं कि राहुल गांधी को ही पार्टी का अध्यक्ष चुना जाए.

बीजेपी करेंगे ज्वाइन, तृणमूल छोड़ने पर शुभेंदु को Z सुरक्षा और बुलेटप्रूफ गाड़ी

कोलकाता। ममता बनर्जी की तृणमूल से इस्तीफे के एक दिन बाद ही शुभेंदु अधिकारी को केंद्र से Z कैटेगरी की सुरक्षा मिलने का फैसला हो गया। गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से चर्चा के बाद शुभेंदु को बंगाल में Z सिक्योरिटी देने का फैसला लिया गया है। उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी भी मिलेगी। बंगाल के बाहर उन्हें Y+ सिक्योरिटी कवर मिलेगा। इधर, प. बंगाल विधानसभा के स्पीकर ने अधिकारी का इस्तीफा मंजूर करने से इनकार किया है। विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी ने कहा- मैंने शुभेंदु का इस्तीफा मंजूर नहीं किया। उनका इस्तीफा संविधान और विधानसभा के नियमों के मुताबिक नहीं भेजा गया है। उन्होंने निजी तौर पर मुझे इस्तीफा नहीं सौंपा। मुझे नहीं मालूम कि उनका इस्तीफा सही है या नहीं और उन्होंने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है या नहीं। जब तक मुझे इस बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल जाती, उनका इस्तीफा मंजूर करना संभव नहीं है। 1-2 दिन में भाजपा जॉइन कर सकते हैं ममता के करीबी रहे शुभेंदु ने बुधवार को विधायकी और गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। वे पूर्वी मिदनापुर की नंदीग्राम सीट से विधायक थे। पिछले कुछ समय से पार्टी की लीडरशिप से दूरी बनाए हुए थे। शुभेंदु का जाना पार्टी के साथ ममता के लिए भी झटका है। 19 दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह बंगाल दौरे पर जाएंगे। ऐसी अटकलें हैं कि इसी दौरान शुभेंदु भाजपा जॉइन कर सकते हैं। शुभेंदु के परिवार का 80 से ज्यादा सीटों पर असर शुभेंदु अधिकारी मिदनापुर जिले के बड़े नेता माने जाते हैं। उनका परिवार कई सालों से सियासत में है। शुभेंदु के पिता कांग्रेस से विधायक और सांसद रह चुके हैं। वे UPA सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री थे और अभी तृणमूल सांसद हैं। शुभेंदु खुद लगातार विधायक और सांसद का चुनाव जीतते आ रहे हैं। पहली बार उन्होंने 2006 में विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 2009 में लोकसभा चुनाव जीते। 2014 में भी अपनी सीट पर कब्जा जमाया। 2016 में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर परिवहन मंत्री बने। शुभेंदु के एक भाई सांसद और दूसरे नगरपालिका अध्यक्ष हैं। इस परिवार का 6 जिलों की 80 से ज्यादा सीटों पर असर है।

MP : सत्ता का दम्भ, आम आदमी पर बंदिशें, बीजेपी की किसान सम्मेलन में उमड़े हजारों

इंदौर। शहर में बुधवार को कोरोना मरीजों का आंकड़ा 50,332 पर पहुंच गया। कोराना पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने आम लोगों पर तमाम पाबंदियां लागू कर रखी हैं। इनमें शादी समारोह में कितने लोग शामिल होंगे कि सूचना थाने पर देने से लेकर बाजार बंद होने का समय, रात का कर्फ्यू, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग तक पर पाबंदियां शामिल है। इसके विपरीत दशहरा मैदान पर हुए भाजपा के किसान सम्मेलन पर किसी तरह की पाबंदी नजर नहीं आई। 22 नवंबर को जारी कलेक्टर के आदेश के अनुसार सभी प्रकार के धरना, प्रदर्शन और रैलियों पर रोक है, उसके बाद भी न सिर्फ इस आयोजन की अनुमति दी गई, बल्कि उसमें कोरोना प्रोटोकाॅल के उल्लंघन पर किसी तरह की कार्रवाई भी नहीं की गई। सम्मेलन में हजारों की भीड़ थी, लेकिन न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया, न ही मास्क का। यहां तक कि मंच पर बैठे नेताओं में से भी ज्यादातर ने मास्क उतार रखे थे। भाजपा ने घोषणा की है कि वह कृषि सुधार कानूनों के समर्थन में प्रदेश से एक लाख ट्रेक्टर पर 4 लाख किसानों को दिल्ली लेकर जाएगी। अब कांग्रेस विरोध में सम्मेलन करेगी भाजपा के सम्मेलन के बाद कांग्रेस नेता कृषि बिल के विरोध में किसान सम्मेलन करने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने सम्मेलन की मंजूरी देने पर आपत्ति लेते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण से लोग परेशान हैं। ऐसे में बीच शहर में भीड़ एकत्र करने की अनुमति प्रशासन ने कैसे दे दी? अब कांग्रेस भी किसान सम्मेलन कर कृषि बिल का विरोध करेगी।

कमलनाथ की मुश्किल बढ़ी, मप्र कैडर के तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में दर्ज होगा मामला

भोपाल। चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के मप्र कैडर में पदस्थ तीन अधिकारियों के समेत उन सभी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं जिन पर 2019 के आम चुनाव के दौरान कालाधन ले जाने के आरोप लगे थे। आयकर विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के परिजनों और उनके सहयोगियों के यहां मारे गए छापों के बाद आरोप लगाए गए थे। आयोग ने केंद्रीय मुख्य सचिव से भी इन अधिकारियों के खिलाफ उपयुक्त विभागीय कार्रवाई करने को कहा है। मप्र के मुख्य सचिव से भी इसी तरह की कार्रवाई करने को कहा गया है। आयकर विभाग ने छापों में पाया था कि 2019 के आम चुनाव में भारी मात्रा में नकदी का इस्तेमाल किया गया था। इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग की शीर्ष संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चुनाव आयोग को भेजी थी। आयोग ने कहा कि उसने इस रिपोर्ट के सभी पहलुओं पर विचार विमर्श के बाद ही यह निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग से जारी बयान के मुताबिक सीबीडीटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि इन की अधिकारियों की एक राष्ट्रीय पार्टी की ओर से कुछ लोगों तक पहुंचाने में भूमिका रही है। आयोग ने अपने बयान में किसी पार्टी का नाम नहीं लिया है। लेकिन यह बिलकुल स्पष्ट है कि यह बोर्ड का इशारा कांग्रेस पार्टी की ओर है। चुनाव आयोग ने मप्र के सीईओ को 28 अक्टूबर 2020 को ही यह रिपोर्ट भेज दी थी। इसमें सीईओ को निर्देश दिए गए थे कि वह तीन अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराए। 4 अफसरों पर हैं आरोप सुशोभन बैनर्जी, संजय माने और वी मधु कुमार आईपीएस अधिकारी हैं जबकि अरुण मिश्रा मप्र राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। यह था मामला आयकर विभाग दिल्ली की इंवेस्टिगेशन विंग ने 2019 में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़, सलाहकार राजेंद्र मिगलानी, मोजेर बियर कंपनी के मालिक भांजे रतुल पुरी और एक अन्य कारोबारी अश्विन शर्मा के 52 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे। 8 अप्रैल को आयकर विभाग ने 14.6 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी बरामद की थी। इसके साथ बड़े पैमाने पर डायरियां और कंप्यूटर फाइल जब्त की थीं। इनमें सैकड़ों करोड़ रुपए के लेनदेन के हिसाब थे। बाद में आयकर विभाग ने बताया था कि दस्तावेजों में यह प्रमाण मिले हैं कि 20 करोड़ रुपए की राशि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के दिल्ली स्थित मुख्यालय भेजा गया। इन छापों में कुल 281 करोड़ रुपए के लेनदेन के पुख्ता प्रमाण मिले थे। यह पैसा विभिन्न कारोबारियों, राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों से एकत्र किया गया था। यह 20 करोड़ रुपए की नकदी हवाला के माध्यम से तुगलक रोड स्थित एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के मुख्यालय को भेजी गई थी। भेजी गई राशि 20 करोड़ से बढ़कर 106 करोड़ निकली आयकर विभाग की जांच में यह सामने आया था कि कांग्रेस पार्टी के दिल्ली स्थित मुख्यालय को 20 करोड़ नहीं, बल्कि 106 करोड़ रुपए भेजे गए थे। इसके अतिरिक्त विकास ढिंगरा नामक व्यक्ति के खाते में 72 करोड़ रुपए भेजे गए। आयकर विभाग की यह जांच विकास ढींगरा नामक व्यक्ति पर भी केंद्रित रही। जिसमें पाया गया है कि ढींगरा अप्रैल 2019 को ही विदेशी चला गया था। इसके बाद अब तक नहीं लौटाा। हालांकि विभाग का दावा है कि वह इस रकम के लेनदेन का सीधे लाभार्थी नहीं है। वह केवल रकम एक जगह से दूसरी जगह भेजने का माध्यम भर है। दिल्ली के अकाउंटेंट ललित चलानी के तार कमलनाथ के करीबियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 7 अप्रैल 2019 को आयकर ने छापे मारे थे, उनमें मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी 5 लाेग शामिल थे ।जिसमें बड़े पैमाने पर पैसों के लेनदेन के सबूत मिले थे। इसके बाद इकट्ठा किए गए सबूत और रिपोर्ट सीबीआई को भेज दिए गए थे। आयकर विभाग ने चुनाव आयोग को जो साक्ष्य और जांच रिपोर्ट सौंपी, उसमें लोकसभा चुनाव के दौरान 11 उम्मीदवारों को कथित तौर पर भारी रकम ट्रांसफर किए जाने का आरोप है। यह जानकारी दिल्ली के एक शख्स ललित कुमार चेलानी के कम्प्यूटर से मिली थी। चेलानी एक अकाउंटेंट हैं, जो कमलनाथ के करीबी आरके मिगलानी के साथ काम कर चुके हैं। चलानी के खाते से ही ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी को रकम का भुगतान करने के सबूत आयकर को मिले थे। चलानी के जरिए 2 उम्मीदवारों मिली थी रकम सूत्रों के मुताबिक 11 लोकसभा उम्मीदवारों को चलानी के माध्यम से रकम मिली थी। हालांकि भुगतान से जुड़ी रसीदें सिर्फ दो उम्मीदवारों सतना से राजाराम प्रजापति और बालाघाट से मधु भगत के मामले में मिली थी। अन्य जिन उम्मीदवारों को फंड मिलने का आरोप है, वे हैं- मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, मंडला से कमल मांडवी, शहडोल से प्रमिला सिंह, सीधी से अजय सिंह, भिंड से देवाशीष जरारिया, होशंगाबाद से शैलेंद्र सिंह दीवान, खजुराहो से कविता सिंह, भोपाल से दिग्विजय सिंह और दमोह से प्रताप सिंह लोधी।

कैलाश विजयवर्गीय बोले- किसी को बताना मत, कमलनाथ सरकार गिराने में मोदी जी का था अहम रोल

इंदौर। इंदौर में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है. किसान सम्मेलन में अपने भाषण के दौरान विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार गिराने में अगर किसी की महत्वपूर्ण भूमिका थी तो वो नरेंद्र मोदी की थी. दरअसल, किसान आंदोलन और कृषि कानून पर छिड़ी बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अलग-अलग शहरों में किसान सम्मेलन का आयोजन किया था. इंदौर में किसान सम्मेलन की ज़िम्मेदारी कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा को दी गयी थी. क्या बोले विजयवर्गीय? इसी में अपने भाषण के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि ‘जब तक कमलनाथ जी की सरकार थी, एक दिन चैन से सोने नहीं दिया. अगर भाजपा का कोई कार्यकर्ता था कमलनाथ जी को सपने में भी जो दिखाई देता था वो नरोत्तम मिश्रा जी थे. तालियां बजाकर नरोत्तम मिश्रा जी का स्वागत करें. ये पर्दे के पीछे की बात कर रहा हूं आप किसी को बताना मत, मैंने आज तक किसी को नहीं बताई, पहली बार इस मंच पर बता रहा हूं कि कमलनाथ जी की सरकार गिराने में यदि महत्वपूर्ण भूमिका किसी की थी तो नरेंद्र मोदी जी की थी धर्मेंद्र प्रधान जी की नहीं थी. पर किसी को बताना मत ये बात, आज तक मैने किसी को नहीं बताई.’ बीजेपी की सफाई हालांकि, इस पूरे मसले पर एमपी के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ‘कैलाश विजयवर्गीय ने हास्य विनोद में बयान दिया था. मैं स्वयं वहां मौजूद था. उनका अंदाज वही था और उनके बयान को हास्य विनोद में लेना चाहिए’ हमारे आरोपों की हुई पुष्टि- कांग्रेस कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारे आरोपों की पुष्टि खुद कैलाश विजयवर्गीय ने कर दी. कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि ‘भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने किसान सम्मेलन के मंच से कांग्रेस के उन तमाम आरोपों की पुष्टि कर दी है कि प्रदेश की लोकप्रिय, जनादेश वाली कमलनाथ सरकार को बीच समय में नरेंद्र मोदी जी के इशारे पर गिराया गया है.’ उन्होंने आगे कहा कि ‘भाजपा शुरू से ही झूठ कहती आई है कि कांग्रेस की सरकार गिराने में उसका कोई योगदान नहीं है, कांग्रेस के अंदरूनी संघर्ष के कारण प्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरी है लेकिन आज कैलाश विजयवर्गीय की स्वीकारोक्ति से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस के आरोप पूरी तरह से सही हैं और भाजपा झूठ बोल रही थी एवं चुनी हुई कांग्रेस की सरकारों को असंवैधानिक तरीक़े से गिराने में देश के सर्वोच्च पद पर बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही हाथ है.’

केजरीवाल ने विधानसभा में कृषि कानून की कॉपी फाड़ दी, कहा- अंग्रेजों से बदतर न बने सरकार

नई दिल्ली . दिल्ली विधानसभा में नए कृषि कानून पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान केजरीवाल ने कृषि कानून की कॉपी फाड़ी दी. उन्होंने कहा कि सरकार और कितनी जान लेगी? अब तक 20 से ज्यादा किसान इस आंदोलन में शहीद हो चुके हैं. एक-एक किसान भगत सिंह बनकर आंदोलन में बैठा है. अंग्रेजों से बदतर न बने सरकार. सीएम ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने बरेली में रैली की और तीनों बिलों के फायदे समझाने लगे कि तुम्हारी जमीन नहीं जाएगी, मंडी बंद नहीं होगी. भाजपा वाले बताएं इस कानून से फायदा क्या है? भाजपा वालों को एक लाइन रटवा दी गई है कि किसान देश में कहीं भी फसल बेच सकता है. हवा में बात करने से क्या होगा? किसानों को नहीं भाजपाइयों को भ्रमित किया गया है, भाजपाइयों को अफीम खिला दी गई है. कोरोना काल में क्यों ऑर्डिनेंस पास किया? अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हमारे वकील ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताया है. कोरोना काल में क्यों ऑर्डिनेंस पास किया? पहली बार राज्यसभा में बिना वोटिंग के 3 कानून को कैसे पास कर दिया गया? ये कानून भाजपा के चुनाव के फंडिंग के लिए बने हैं. जय जवान, जय किसान के नारे लगे बता दें कि कृषि कानून को लेकर दिल्ली विधानसभा में गुरुवार को एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया था. सत्र की शुरुआत होने पर मंत्री कैलाश गहलोत ने एक संकल्प पत्र पेश किया, जिसमें तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की बात कही गई. इसके बाद हर वक्ता को बोलने के लिए पांच मिनट का वक्त दिया गया. इस दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक महेंद्र गोयल, सोमनाथ भारती ने सदन में कृषि कानून की कॉपी को फाड़ा. उन्होंने इस दौरान जय जवान, जय किसान के नारे लगाए और कहा कि जो कानून किसानों के खिलाफ है, हमें उसे स्वीकार नहीं करेंगे.

गृहमंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे से पहले टीएमसी विधायकों बागी तेवर, सीएम ममता की नींद उड़ी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ नंदीग्राम के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है, वहीं कुछ अन्य विधायकों और एक लोकसभा सांसद ने भी गृहमंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे से पहले बागी तेवर दिखाकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दीं। इनमें से ज्यादातर नेता दक्षिण बंगाल के हैं, जहां बीजेपी का प्रदर्शन लोकसभा चुनाव में ठीक नहीं रहा था। उत्तर बंगाल में बीजेपी ने स्वीप किया था और उसे 7 में से छह सीटों पर जीत मिली थी। ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुए जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर बंगाल में रैलियां करने में जुटी थीं। एक के बाद एक कई टीएमसी नेता पार्टी और नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जाहिर कर रहे हैं। बर्दवान पूर्व लोकसभा सीट से दो बार के सांसद सुनील मंडल ने पार्टी में सुधार की जरूरत बताते हुए प्रशांत किशोर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। 2014 में मंडल की जीत से पहले यह सीट मार्क्सवादियों के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक था । पार्टी में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी कंपनी आई-पैक की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए मंडल ने कहा, ”क्या यह स्वीकार्य है कि हम में से जिन लोगों ने लोगों के बीच जमीन पर काम किया और कार्यकर्ता के रूप में का करते हुए यहां तक पहुंचे, आई-पैक के पेड कर्मचारियों से निर्देश लें कि कहां और कैसे प्रदर्शन करना है?” मंडल ने कहा, ”बंगाल के लोग संवेदनशील और बुद्धिमान हैं। प्रदर्शन ही वोट नहीं दिला सकते हैं।” पूर्व बर्दवान में मंडल के समर्थन में कई पोस्टर देखे जा सकते हैं। अटकलें हैं कि अधिकारी और कुछ अन्य असंतुष्ट विधायक उनसे मुलाकात कर सकते हैं।” 24 परगना जिले में डायमंड हार्बर से विधायक दीपक हलधर, पूर्व बर्दवान जिले के कलना से विधायक बिश्वजीत कुंडु, पश्चिमी बर्दवान जिले के पंडाबेश्वर से विधायक जितेंद्र तिवारी ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी की है। तिवारी ने बुधवार सुबह एक रैली में कहा, ”जहां तक बंगाल में पब्लिक सपोर्ट की बात है, ममता बनर्जी के बाद जो नाम आता है वह है शुभेंदु अधिकारी।” एक अन्य घटनाक्रम में वन मंत्री राजीब बनर्जी के समर्थकों ने पूर्वी मिदनापुर सहित कई जिलों में प्रदर्शन किए हैं। मंत्री ने मंगलवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कई बड़ी बातें कही थीं। उधर पार्टी में मची भगदड़ के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कूच बिहार में एक रैली में कहा, ”लोग हर दिन अपना चरित्र नहीं बदल सकते हैं। आप हर दिन कपड़े बदल सकते हैं लेकिन विचारधारा नहीं। क्या आप लोगों, आम आदमी का मुझ में विश्वास है? जो लोग शुरुआत से पार्टी के साथ हैं, अब भी हैं। कुछ लोग जो बाद में आए, वे हमें छोड़ रहे हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।” बता दें, कूच बिहार साउथ सीट से टीएमसी के विधायक मिहिर गोस्वामी पिछले महीने ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

MP : BJP अध्यक्ष वीडी शर्मा बोले, अवॉर्ड वापसी करने वालों से छीन लो अवॉर्ड्स

रीवा। किसानों को समझाने के लिए बीजेपी एमपी के विभिन्न जिलों में किसान सम्मेलन कर रही है। एमपी बीजेपी के अध्यक्ष वीडी शर्मा रीवा में किसान सम्मेलन के दौरान भड़क गए हैं। किसानों के समर्थन में कई लोग अपने अवॉर्ड लौट रहे हैं। उसी को लेकर वीडी शर्मा ने कहा है कि उनसे अवॉर्ड्स छीन लो। रीवा किसान सम्मेलन में सीएम शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम रीवा शहर के एनसीसी ग्राउंड में आयोजित किया गया था। किसानों को संबोधित करते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ने कहा कि ये वहीं लोग हैं जो मोदी जैसे देश भक्त को रोकने के लिए अवॉर्ड वापसी कर रहे हैं। अवॉर्ड वापसी का किसानों के आंदोलन से क्या संबंध हैं। ये लौटाने वाले लोगों का खेती और किसान से क्या संबंध है। छीन लें अवॉर्ड्स वीडी शर्मा ने कहा कि मैं देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि ऐसे देश घातक लोगों से अवॉर्ड्स छीन लेना चाहिए। इनसे कहना चाहिए कि तुम अवॉर्ड वापस करो। ये लोग देश के अंदर गलत व्यवस्था लाना चाहते हैं।

सीएम शिवराज के बयान से सिंधिया समर्थकों को लगा झटका

भोपाल. शिवराज कैबिनेट की बैठक से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक बयान ने निगम मंडलों में नियुक्ति की बाट जो रहे नेताओं को तगड़ा झटका दिया है. मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की बैठक से पहले अपने मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब निगम मंडलों को भी संबंधित विभाग के मंत्री संभालेंगे.अब तक अधिकारी निगम मंडल का काम देखते थे. लेकिन मेरा मानना है कि मंत्री ही निगम मंडल का प्रभार देखें. यह काम पॉलिटिकल लीडरशिप से ही होने चाहिए. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस फैसले के मायने अब ये निकाले जा रहे हैं कि फिलहाल निगम मंडलों में नियुक्तियां नहीं होंगी. मंत्री ही इनका काम देखेंगे. लिहाजा अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिरकार सिंधिया समर्थक उन नेताओं का एडजस्टमेंट कैसे होगा जो चुनाव हार गए हैं और बीजेपी के उन नेताओं का क्या होगा जिन्होंने उपचुनाव के दौरान राजनीतिक कुर्बानी दी थी. सकते में दावेदार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान के बाद निगम मंडलों के दावेदार नेताओं में खलबली मची हुई है. यह माना जा रहा था कि सिंधिया समर्थक जो तीन मंत्री उपचुनाव हारे हैं उनमें से इमरती देवी और गिर्राज दंडोतिया को निगम मंडलों में एडजस्ट किया जा सकता है. वहीं बीजेपी के वह नेता भी निगम मंडलों में नियुक्त किए जा सकते हैं जो उपचुनाव के दौरान नाराज माने जा रहे थे, लेकिन अब हाल फिलहाल निगम मंडलों में नियुक्ति के संकेत दिखाई नहीं पड़ रहे.

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