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डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की फिर अमित शाह से मिलने की तैयारी, शपथ के बाद भी दबाव बनाते रहेंगे

मुंबई एकनाथ शिंदे आखिरी वक्त में डिप्टी सीएम का पद स्वीकार करने और शपथ के लिए तैयार हो गए हैं। लेकिन अब भी उन्होंने दबाव बनाने की रणनीति नहीं छोड़ी है। खबर है कि शपथ समारोह के तुरंत बाद वह होम मिनिस्टर अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इस मीटिंग में एकनाथ शिंदे मांग कर सकते हैं कि उन्हें ही होम मिनिस्ट्री दी जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर शहरी विकास मंत्रालय के अलावा कोई और ताकतवर मिनिस्ट्री उनके दी जाए। शिवसेना के सूत्रों ने जानकारी दी है कि एकनाथ शिंदे शपथ समारोह के बाद अमित शाह से मुलाकात करेंगे। महायुति के दलों के बीच अब तक मंत्रियों की संख्या पर भी डील नहीं हुई है। इसके अलावा मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर भी रस्साकशी जारी है। एक तरफ होम मिनिस्ट्री के लिए शिंदे सेना की दावेदारी है तो वहीं वित्त मंत्रालय के लिए अजित पवार की पार्टी जोर-आजमाइश कर रही है। ऐसे में आखिरी वक्त तक खींचतान में सभी जुटे हैं। एकनाथ शिंदे ने अब आखिरी कोशिश के तहत अमित शाह से मुलाकात की तैयारी की है। एकनाथ शिंदे कई बार दोहरा चुके हैं कि अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी जो कहेंगे, उसे वह स्वीकार करेंगे। यही नहीं अमित शाह से एक मुलाकात में एकनाथ शिंदे को झटका भी लग चुका है। वह जब दिल्ली आए थे तो अमित शाह से मुलाकात में कम से कम शुरुआती 6 महीने के लिए सीएम बनाने की मांग की थी। इसे अमित शाह ने सिरे से खारिज कर दिया था और सीधा जवाब देते हुए कहा था कि यदि आपको बहुमत मिलता तो क्या आप भाजपा की सीएम बनने देते। इस जवाब से एकनाथ शिंदे चुप रह गए थे। आखिरी कोशिश करके देखना चाहते हैं एकनाथ शिंदे फिर भी वह मंत्रालयों के बंटवारे से पहले आखिरी कोशिश कर लेना चाहते हैं। महाराष्ट्र की सरकार के गठन में अमित शाह का अहम रोल रहा है। यही नहीं चुनाव में भी उनकी भूमिका अहम थी। उनके ही करीबी कहे जाने वाले भूपेंद्र यादव इलेक्शन के प्रभारी थे और उनके साथ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी जिम्मेदारी दी गई थी।

फडणवीश की एक बार फिर ताजपोशी पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में, इस बीच कई बड़े नेता भी समारोह में शामिल होंगे.

मुंबई मुंबई के आजाद मैदान में आज देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के नए सीएम के तौर पर शपथ लेंगे. फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. शाम 5.30 बजे उनका शपथ ग्रहण कार्यक्रम होगा, जिसमें बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहेंगे. CM: सिद्धी विनायक मंदिर पहुंचे फडणवीस महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ लेने से पहले देवेंद्र फडणवीस सिद्धि विनायक मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन किए. बता दें कि आज शाम फडणवीस महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं.  फडणवीस की ताजपोशी में शामिल होंगे NDA के कई दिग्गज आज मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह होने वाला है. फडणवीस की ताजपोशी में एनडीए के इन दिग्गजों के शामिल होने की उम्मीद है.     रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह     गृह मंत्री अमित शाह     आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू     यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ     बिहार के सीएम नीतीश कुमार     बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा     केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी     शिवराज सिंह चौहान     वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण     वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल     विदेश मंत्री एस जयशंकर     संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया     बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष, संयुक्त सचिव शिव प्रकाश     राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े पीएम की मौजूदगी में शाम को इस समय होगा शपथ ग्रहण राज्यपाल से मुलाकात के बाद फडणवीस ने कहा कि ‘नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार शाम 5:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगा. मैंने एकनाथ शिंदे से मुलाकात की और उनसे इस सरकार में शामिल होने का अनुरोध किया, क्योंकि यह महायुति कार्यकर्ताओं की इच्छा है.हम महाराष्ट्र की जनता से किए गए वादों को पूरा करेंगे.’ फडणवीस ने कहा, ‘हम तीनों नेता एक हैं. डिप्टी सीएम और सीएम सिर्फ तकनीकी पद हैं. कौन-कौन शपथ लेगा, ये शाम तक बता दिया जाएगा.’ कई बड़े नेता होंगे समारोह में शामिल सूत्रों की मानें तो शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और एनसीपी के अजित पवार नए मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण समारोह को भव्‍य बनाने के लिए कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं. इस समारोह में प्रधानमंत्री के अलावा में एनडीए के कई मुख्यमंत्री और नेताओं के भी शामिल होने की उम्‍मीद है. बता दें क‍ि फडणवीस का शीर्ष पद पर यह तीसरा कार्यकाल होगा. शपथ समारोह से पहले ये बोले शिंदे फडणवीस के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले एकनाथ शिंदे ने कहा कि ‘हमारी सरकार- महायुति सरकार, हम तीनों और हमारी टीम ने पिछले ढाई साल में जो काम किया है, वह उल्लेखनीय है. इसे इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. हमें खुशी है कि हमने इतने बड़े फैसले लिए.’ शिंदे के साथ फडणवीस और एनसीपी प्रमुख अजित पवार भी इस बीच मौजूद थे. उन्‍होंने कहा कि ‘हम सरकार चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. पार्टी की गतिविधियों का प्रबंधन भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले और एनसीपी के सुनील तटकरे करेंगे.’ महायुति गठबंधन चुनाव में शानदार जीत हासिल की 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की, जिसने 288 में से 235 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल की. ​​यह परिणाम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जो 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. जबकि, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को बड़ा झटका लगा, जिसमें कांग्रेस को सिर्फ़ 16 सीटें मिलीं. इसके गठबंधन सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) को सिर्फ 10 सीटें मिलीं. महाराष्ट्र में कौन है संभावित मंत्री बीजेपी की तरफ से देवेंद्र फडणवीस (मुख्यमंत्री), राधाकृष्ण विखे-पाटिल, सुधीर मुनगंटीवार, चंद्रकांत पाटिल, गिरीश महाजन, सुरेश खाडे, रवींद्र चव्हाण, अतुल सावे, मंगल प्रभात लोढ़ा, राहुल नार्वेकर, जयकुमार रावल, चंद्रशेखर बावनकुले, बबनराव लोणीकर, पंकजा मुंडे, देवयानी फरांदे, किसन कथोरे, नितेश राणे, आशीष शेलार, संभाजी निलंगेकर, राहुल कुल.

54 साल की उम्र में देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र जैसे अहम राज्य के सीएम बनने वाले हैं

मुंबई महाराष्ट्र में 2019 में तीन दिन की सरकार चलाने के बाद सत्ता से विदाई के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने खुद को समंदर बताया था। उनका कहना था- मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर न बसा लेना। मैं समंदर हूं, फिर लौट कर आऊंगा। उनकी इस टिप्पणी की खूब चर्चा हुई थी। 2022 में उद्धव ठाकरे की सरकार विदा हुई तो एकनाथ शिंदे को भाजपा नेतृत्व ने सीएम बना दिया। फडणवीस को डिप्टी सीएम के तौर पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन अब भाजपा को जब 132 सीटें अपने दम पर मिली है तो वह सीएम बनने जा रहे हैं। आज शपथ ग्रहण समारोह है और समंदर की इस वापसी का जोरदार जश्न मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं, कैसा होगा यह जश्न… 1. देवेंद्र फडणवीस के साथ एकनाथ शिंदे और अजित पवार डिप्टी के तौर पर शपथ लेंगे। बुधवार को शाम तक एकनाथ शिंदे को मनाने की कोशिशें जारी थीं और अंत में उन्होंने सरकार का हिस्सा बनने पर सहमति दी। 2. अब तक मिली जानकारी के अनुसार देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह में 40 हजार मेहमान होंगे। इनमें 2000 वीआईपी भी होंगे। मुख्य अतिथि के तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। 3. शपथ समारोह शाम को 5:30 बजे आयोजित किया जाएगा। आजाद मैदान में इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। इस कार्यक्रम में एनडीए शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी रहेंगे। 4. एकनाथ शिंदे के सरकार का हिस्सा बनने को लेकर देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि उन्होंने मुलाकात की थी। मैंने एकनाथ शिंदे से कहा था कि आप सरकार का हिस्सा बनें। ऐसा महायुति के सभी लोग चाहते हैं। अब हम मिलकर जनता के वादों को पूरा करेंगे। 5. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 235 सीटों पर महायुति को जीत मिली है। बीते कई चुनावों के बाद पहली बार राज्य में इतनी मजबूत सरकार बनने वाली है। 6. शपथ समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से संतों को भी आमंत्रित किया गया है। 7. आजाद मैदान फिलहाल पूरी तरह सजकर तैयार है। यहां सुरक्षा के लिए 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा एसआरपीएफ, क्विक रेस्पॉन्स टीम आदि भी तैनात हैं। 8. देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने का इतना जोरदार जश्न है कि समर्थकों ने नागपुर समेत तमाम समर्थकों में ‘आपले देवेंद्र भाऊ’ के पोस्टर लगाए हैं। इसका अर्थ है- अपने देवेंद्र भाई। 9. 54 साल की उम्र में देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र जैसे अहम राज्य के सीएम बनने वाले हैं। वह पहली बार 44 साल की आयु में ही मुख्यमंत्री बने थे और पूरे 5 साल शासन चलाया था। 10. पहली बार में ही देवेंद्र फडणवीस ने नितिन गडकरी, विनोद तावड़े जैसे सीनियर नेताओं को पीछे छोड़ते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की थी।

ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में चरणबद्ध फेरबदल अगले साल की शुरुआत से शुरू होने की संभावना, कुछ मंत्रियों का कट सकता है पत्ता

कोलकाता पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल में चरणबद्ध फेरबदल अगले साल की शुरुआत से शुरू होने की संभावना है और यह प्रक्रिया अगले दो से तीन महीनों में पूरी होने की उम्मीद है।तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित फेरबदल मुख्य रूप से उन विभागों पर केंद्रित होगा जो सीधे तौर पर सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव 2026 को ध्यान में रखते हुए इन विभागों के काम को बेहतर बनाना चाहती हैं। इस फेरबदल के कुछ पहलू हो सकते हैं। पहला यह कि कुछ महत्वपूर्ण विभाग, जो सीधे तौर पर सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े हैं, उनका प्रबंधन कुछ मंत्रियों द्वारा किया जा रहा है, जो अन्य विभागों के भी प्रभारी हैं। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि मुख्यमंत्री उन महत्वपूर्ण विभागों के लिए एक-एक मंत्री को समर्पित करने पर विचार कर रही हैं, ताकि वहां कामकाज में सुधार हो सके। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में, कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किए जाने की काफी संभावना है।” फेरबदल का दूसरा हिस्सा कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों को आवश्यकताओं के अनुसार बदलना होगा। उस स्थिति में भी, पार्टी सूत्रों ने कहा कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के मंत्रालय चले जाएंगे और उनकी जगह नए चेहरे आ सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि तीसरा हिस्सा कुछ मौजूदा राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र) को कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत करना होगा। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया, “राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा इस साल अगस्त में शुरू हुई थी। अगर सब कुछ सही दिशा में चला तो अगले साल की शुरुआत से ही यह प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।” हाल ही में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे, जिसमें पार्टी के मामलों, विधायी मामलों और प्रशासनिक मामलों को संभालने वाले व्यक्तियों की पहचान की गई थी। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था कि इन तीनों क्षेत्रों में “पुराने लोगों” को “नए लोगों” से ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की युवा और छात्र शाखा के मौजूदा नेतृत्व के कामकाज की समीक्षा करने का भी संकेत दिया था।  

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, राहुल गांधी को थोड़ा समय निकालकर जाना चाहिए: आचार्य प्रमोद कृष्णम

हापुड़ आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने हापुड़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी के संभल जाने पर प्रतिक्रिया दी। आचार्य प्रमोद कृष्णम से पूछा कि राहुल गांधी के संभल जाने पर इतना पहरा क्यों है। इस पर उन्होंने कहा कि ये तो उत्तर प्रदेश की पुलिस और सरकार बताएगी। संभल में पूरी तरह से शांति है। यूपी की सरकार ने और संभल के प्रशासन ने दंगों पर पूरी तरह से नियंत्रण किया है। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी को थोड़ा समय निकालकर बांग्लादेश भी जाना चाहिए। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। संसद में बांग्लादेश की बात उठानी चाहिए। संभल बिल्कुल शांत है। संभल शांतिपूर्ण तरीके से धीरे-धीरे शांति की राह पर आगे बढ़ रहा है। राहुल गांधी दंगों की आग में घी डालने का काम ना करें। अगर इतना ही जाने का शौक है तो बांग्लादेश जाएं, जहां हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। अगर राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के तौर पर संभल जा रहे हैं तो इसमें क्या परेशानी है। इस पर उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब उत्तर प्रदेश सराकर को देना चाहिए। बता दें कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संभल जा रहे थे, लेकिन उन्हें पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर रोक दिया गया। काफी देर तक पुलिस और उनके बीच तनातनी चली। इसके बाद पुलिस ने उन्हें संभल नहीं जाने दिया। पुलिस के संभल जाने से रोके जाने पर राहुल गांधी ने कहा, “हम संभल जाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, पुलिस हमें मना कर रही है। हमें वहां जाने की इजाजत नहीं दे रही है। एक नेता प्रतिपक्ष होने के नाते यह मेरा अधिकार बनता है कि मैं वहां जाऊं। लेकिन, फिर भी मुझे रोका जा रहा है।” उन्होंने कहा, “मैंने कहा कि मैं अकेला जाने को तैयार हूं। मैं पुलिस के साथ जाने के लिए तैयार हूं। लेकिन, वो तब भी तैयार नहीं हुए और अब वो हमें कह रहे हैं कि कुछ दिनों में अगर हम वापस आएंगे, तो वो हमें जाने देंगे। यह नेता प्रतिपक्ष के अधिकारों और संविधान के खिलाफ है। हम जाकर वहां देखना चाहते हैं कि वहां क्या हुआ है। लेकिन, हमें रोका जा रहा है। हम लोगों से मिलना चाहते हैं। लेकिन, मेरा जो संवैधानिक अधिकार है, वो मुझे नहीं दिया जा रहा है।”  

राघव चड्ढा ने कहा- सरकार ने उड़ान स्कीम में सस्ते हवाई टिकट देने का जो वादा किया था, वह पूरी तरह से भूल गई

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भारतीय वायुयान विधेयक 2024 पर चर्चा के दौरान हवाई यात्रा से जुड़ी समस्याओं को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उड़ान स्कीम में सस्ते हवाई टिकट देने का जो वादा किया था, वह पूरी तरह से भूल गई है। राघव चड्ढा ने कहा, “वादा था कि हवाई चप्पल पहनने वालों को हवाई जहाज में सफर कराएंगे, लेकिन अब स्थिति यह है कि बाटा कंपनी का जूता पहनने वाला भी हवाई टिकट नहीं खरीद पा रहा है।” सस्ती हवाई यात्रा का वादा नहीं हुआ पूरा राघव चड्ढा ने बढ़ते हवाई किरायों का जिक्र किया और इस पर सरकार से ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि हवाई यात्रा के नाम पर आम जनता की जेब कट रही है, और इस पर सरकार को रेग्यूलेशन लागू करना चाहिए। सांसद ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ रूट्स पर यात्रियों से बहुत ज्यादा किराया लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मालदीव की फ्लाइट सस्ती है, लेकिन लक्षद्वीप की फ्लाइट बहुत महंगी है।” राघव चड्ढा ने सरकार से आग्रह किया कि हवाई यात्रा को लक्ज़री के बजाय आम लोगों के लिए सुलभ बनाया जाए।   एयरपोर्ट पर भी बढ़ी महंगाई राघव चड्ढा ने एयरपोर्ट पर खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक कप चाय पर 200-250 रुपए खर्च हो रहे हैं, जबकि पानी की एक बोतल जो बाहर 20 रुपए में मिलती है, एयरपोर्ट पर 100 रुपए में बिकती है। उन्होंने इसे “जहरीली महंगाई” करार दिया। लंबी लाइनें और लेट फ्लाइट्स की समस्या राघव चड्ढा ने एयरपोर्ट पर लंबी-लंबी लाइनों की समस्या को भी उठाया। उन्होंने कहा कि महंगी टिकट के बावजूद यात्रा में कोई गारंटी नहीं है। कई बार यात्रियों का सामान टूट जाता है या खराब हो जाता है, लेकिन इसके लिए एयरलाइंस से कोई जिम्मेदारी नहीं ली जाती। इसके अलावा, छोटे शहरों में फ्लाइट्स कई बार 3 से 4 घंटे लेट हो रही हैं, जिससे यात्रियों को बहुत परेशानी हो रही है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी की कमी राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के आसपास एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी नहीं है, जिससे पर्यटन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से इन सभी समस्याओं का समाधान करने की मांग की और कहा कि यह समय की जरूरत है कि हवाई यात्रा को आम लोगों के लिए सुलभ और किफायती बनाया जाए। इस प्रकार, राघव चड्ढा ने राज्यसभा में हवाई यात्रा के नाम पर होने वाली बढ़ती महंगाई और असुविधाओं पर सरकार का ध्यान खींचा और आम नागरिकों के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग की।

संगठन चुनाव प्रभारियों के अलावा बीजेपी ने तीन जिलों में संगठन चुनाव के लिए एक-एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए

भोपाल इन दिनों बीजेपी के संगठन चुनाव चल रहे हैं। 15 दिसंबर तक मध्यप्रदेश के 1300 मंडलों में मंडल अध्यक्ष और 15 से 31 दिसंबर तक जिला अध्यक्षों के चुनाव होने हैं। संगठन चुनाव को लेकर बीजेपी ने जिला निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किए हैं। संगठन चुनाव प्रभारियों के अलावा बीजेपी ने तीन जिलों में संगठन चुनाव के लिए एक-एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। ये पर्यवेक्षक अपने प्रभार के जिलों में कार्यकर्ताओं और सक्रिय सदस्यों की बैठकें लेकर मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों के लिए नाम निकालेंगे। इन नामों को संगठन तक पहुंचाएंगे। बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में इन पर्यवेक्षकों की बैठक बुलाई गई है। इन नेताओं को इन जिलों का बनाया गया पर्यवेक्षक     ग्वालियर नगर, ग्वालियर ग्रामीण, श्योपुर: सुरेश आर्य (पूर्व संगठन मंत्री )     सागर, दमोह, पन्ना: नरेंद्र बिरथरे (पूर्व विधायक)     शिवपुरी, गुना, अशोनगर: अरुण भीमावद (विधायक)     छतरपुर, टीकमगढ, निवाड़ी: सदानंद गोडबोले (पूर्व मेयर)     सतना, मैहर, रीवा: उमेश शुक्ला (पूर्व विधायक)     मऊगंज, सीधी, सिंगरौली: रामलाल रौतेल (पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री)     शहडोल, अनूपपुर, उमरिया: एससी मोर्चे के महामंत्री नेताम     कटनी, मंडला, डिंडौरी: लता ऐलकर (पूर्व प्रदेशाध्यक्ष महिला मोर्चा)     छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट: अलकेश आर्य (जिलाध्यक्ष बैतूल)     पांढुर्णा, बैतूल, हरदा: जयप्रकाश चतुर्वेदी (पूर्व जिलाध्यक्ष)     भोपाल, रायेसन, नर्मदापुरम: राजेंद्र पांडे (विधायक)     विदेशा, राजगढ, भोपाल ग्रामीण: अभिलाष पांडे (विधायक)     विदिशा, राजगढ़, शाजापुर: लता वानखेडे (सांसद)     उज्जेन नगर, उज्जैन ग्रामीण, आगर: भगवानदास सबनानी (विधायक)     रतलाम मंदसौर, नीमच: सीताराम यादव (सदस्य ओबीसी आयोग)     झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी: सतेंद्र भूषण (पूर्व संगठन मंत्री)     खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर: महेंद्र भटनागर  

बीजेपी को सीएम पोस्ट के बदले देनी पड़ेगी बड़ी कुर्बानी! अजित-शिंदे को देने होंगे ये बड़े मंत्रालय

मुंबई महाराष्ट्र में चुनाव नतीजे सामने आने के के बाद से चला आ रहा राजनीतिक गतिरोध समाप्त हो चुका है। इससे राज्य में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मंगलवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। इस बैठक में नई सरकार के गठन के लिए एक अस्थायी व्यवस्था तय की गई। आपको बता दें कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर को होगा। इससे पहले आज भाजपा विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। फडणवीस और शिंदे ने अस्थायी रूप से विभागों और कैबिनेट में हिस्सेदारी के मुद्दों को टालने का फैसला किया है ताकि गुरुवार को नई सरकार कार्यभार संभाल सके। इन मुद्दों को सरकार बनने के बाद सुलझाया जाएगा। महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा इसपर से सस्पेंस खत्म हो गया है, सर्व सम्मति से देवेंद्र फडणवीस के नाम पर सहमति बन गई है,  कोर कमेटी की बैठक में ये फैसला लिया गया,  देवेंद्र फडणवीस आज दोपहर 3:30 बजे राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। अब तक जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक मुंबई के आजाद मैदान में कल 5 दिसंबर को शपथ समारोह होगा जिसमें देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ कल ही एकनाथ शिंदे और अजीत पवार उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, कल केवल ये तीन ही शपथ होंगी। केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक केंद्रीय पर्यवेक्षकों केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की मौजूदगी में महाराष्ट्र विधानसभा भवन में विधायक दल की बैठक शुरू हो गई है। जानकारी के मुताबिक भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल और सुधीर मुनगांटीवार देवेंद्र फडणवीस के नाम का प्रस्ताव रखेंगे और सभी विधायक नाम पर मुहर लगाएंगे। सुखबीर सिंह बादल पर हमला करने वाले नारायण सिंह चौरा का है लंबा आपराधिक रिकॉर्ड, खालिस्तानी आतंकी और चंडीगढ़ जेल ब्रेक का आरोपी कल 5 दिसंबर को आजाद मैदान में शाम 5 बजे शपथ ग्रहण समारोह निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक पांच दिसंबर यानि कल शाम पांच बजे दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा कई केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री समारोह में हिस्सा लेंगे। तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे देवेंद्र फडणवीस आपको बता दें कि देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वे पहली बार 2014 में मुख्यमंत्री बने थे और उन्होंने पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया था लेकिन 2019 में वे केवल 80 घंटे ही सीएम की कुर्सी पर रहे। अब वे 5 दिसंबर को एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। 30 से अधिक विधायक लेंगे शपथ महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) के 30 से अधिक विधायकों को मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। हालांकि, चुनाव परिणाम घोषित होने के 10 दिन बाद भी महायुति के तीनों सहयोगी दल कैबिनेट में हिस्सेदारी और विभागों के आवंटन को लेकर सहमति नहीं बना सके हैं। एकनाथ शिंदे की मांगें एकनाथ शिंदे शिवसेना के शानदार प्रदर्शन के बावजूद मुख्यमंत्री पद बीजेपी को सौंप चुके हैं। उन्होंने डिप्टी सीएम और गृह मंत्रालय की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने कुछ अन्य प्रमुख विभागों और विधानसभा अध्यक्ष का पद भी मांगा है। हालांकि बीजेपी गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद देने को तैयार नहीं है, लेकिन अन्य विभागों पर बातचीत करने को तैयार है। बातचीत से टूटा गतिरोध सोमवार को बीजेपी नेता गिरीश महाजन ने ठाणे स्थित एकनाथ शिंदे के आवास पर उनसे मुलाकात की। इसके बाद मंगलवार को मुंबई के ‘वर्षा’ निवास पर शिंदे और फडणवीस के बीच करीब 30 मिनट की बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने शपथ ग्रहण में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों की संख्या तय कर ली है। शिवसेना और एनसीपी की मांगें एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने सात कैबिनेट और चार राज्य मंत्री पद, केंद्र में एक कैबिनेट मंत्री और राज्यपाल का पद मांगा है। वहीं, शिवसेना ने गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद मांगा है। वहीं, बीजेपी ने संकेत दिया है कि शिवसेना को 11-12 मंत्री पद और एनसीपी को 9-10 मंत्री पद दिए जा सकते हैं, जबकि बीजेपी 22-23 मंत्री पद अपने पास रखेगी। बीजेपी के सामने चुनौती बीजेपी शिंदे को इस तरह नाराज नहीं करना चाहती जिससे यह लगे कि पार्टी ने शिवसेना को तोड़ने के बाद उन्हें किनारे कर दिया। साथ ही मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में आगामी नगर निगम चुनावों में शिंदे की अहम भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शिंदे अपने समर्थकों और पार्टी में अपनी साख बनाए रखने के लिए गृह मंत्रालय जैसे प्रमुख विभाग की मांग पर अड़े हैं। अजित पवार गुट ने किया बीजेपी का समर्थन  मुंबई में बीजेपी की बैठक से पहले नई सरकार में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी कोटे से कितने-कितने मंत्री होंगे, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. 23 नवंबर 2024 को आए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद महायुति के भीतर नई सरकार में हिस्सेदारी को लेकर काफी बवाल हो रहा है. इसे लेकर देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, अजित पवार कई बार दिल्ली का दौरा भी कर चुके हैं. बताया जा रहा है कि अजित पवार के गुट ने सीएम पद को लेकर बीजेपी का समर्थन किया, जिसके बाद शिवसेना (शिंदे गुट) कमजोर पड़ गई. ऐसे में अब शिवसेना का पूरा फोकस बड़े मंत्रालयों पर है. इस बार महाराष्ट्र चुनाव में महायुति को प्रचंड बहुमत मिली है. बीजेपी महायुति से किसी भी तरह मनमुटाव नहीं चाहने के साथ-साथ यह भी संदेश देना चाहती है कि सीएम पद और मंत्रालयों का बंटवारा अपनी सहमति से हुआ है. हालांकि एकनाथ शिंदे और अजित पवार यह कह चुके हैं कि वे बीजेपी हाईकमान के फैसले के साथ हैं. बीजेपी को देनी होगी कुर्बानियां बताया जा रहा है कि नई सरकार में बीजेपी करीब 22 मंत्रालय का दावा कर रही है. बीजेपी गृह मंत्रालय भी अपने पास रखना चाहती है. वहीं शिवसेना 12 मंत्रालय अपने पास रखना चाहती है. पिछली सरकार में जब … Read more

अजमेर शरीफ दरगाह न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक रहा है : जितेंद्र आव्हाड

मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने मंगलवार को अजमेर शरीफ को लेकर जारी सियासी बहस पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “यह बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है। सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि इस समय देश में जो माहौल बन रहा है। खासकर धार्मिक स्थलों, मंदिरों और मस्जिदों के बीच, वह न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि हमारे समाज की बुनियादी शक्तियों को भी खतरे में डालने वाला है। जब से कुछ लोगों ने सामाज‍िक सौहार्द, परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब को तोड़ने की कोशिश शुरू की है, तब से समाज में गहरा विभाजन पैदा हो गया है। हम जिस देश में रहते हैं, वहां सैकड़ों वर्षों से हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और दूसरे धर्मों के लोग एक साथ रहते आए हैं। हमारी संस्कृति, हमारे रीति-रिवाज, हमारी परंपराएं, यही हमारी असली ताकत हैं। यह ताकत जो हमारे समाज को एक सूत्र में पिरोती है, अब उसे तोड़ा जा रहा है।” उन्होंने कहा, “अजमेर शरीफ दरगाह न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक रहा है। महाराजा नटवर सिंह अपने पोते को लेकर दरगाह पर गए थे, यह बहुत बड़ा संदेश देता है कि हमारे बीच कोई अंतर नहीं है। धर्म चाहे जो हो, सबका आदर करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन अब जो कुछ हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस समय जो धार्मिक स्थलों के सर्वे हो रहे हैं, जैसे कि जामा मस्जिद का सर्वे, यह हमारी परंपराओं को चुनौती देने जैसा है। यह केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे संविधान की भी अवहेलना हो रही है।” उन्होंने कहा, “ धार्मि‍क स्‍थलों के बारे में भारत में 1991 का कानून है, जो मंदिरों और मस्जिदों की संरचना को वैसा ही बनाए रखने की बात करता है, जैसा कि आजादी के समय था। जब तक उस संरचना में कोई बदलाव न हो, तब तक इसे उसी रूप में रखा जाए। यह कानून हमारे संविधान और न्यायालय के आदेश के तहत आया है। फिर भी अगर न्यायालय इस पर फैसला कर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर हमारे संविधान की अवमानना है। हम संविधान की रक्षा करने वाले हैं, न कि उसे कमजोर करने वाले।” उन्होंने कहा, “अब अगर हम राजनीति की बात करें, तो यह साफ है कि इस समय जो भी हो रहा है, वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। क्या समाज को तोड़कर, भाईचारे को कमजोर कर, किसी को क्या मिलेगा? क्या इससे देश की तरक्की होगी? क्या इससे भारत का सम्मान बढ़ेगा? बिलकुल नहीं। इसका केवल एक ही परिणाम होगा – सामाजिक ताना-बाना टूटेगा, और एक दिन वह अपनापन, जो सदियों से चला आ रहा है, खो जाएगा।” उन्होंने कहा, “अगर हम संविधान की बात करें, तो 1947 के बाद से जो स्थिति थी, उसे बदलने का अधिकार किसी को नहीं है। अदालतों ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों की संरचना और उनके बीच की सामूहिकता को किसी भी रूप में तोड़ा नहीं जा सकता। जब 1991 का कानून बना था, तो उसका उद्देश्य था कि धार्मिक स्थलों की संरचना वैसी ही बनी रहे, जैसा पहले था। इस पर अगर कोई सवाल उठाता है, तो वह सिर्फ समाज को नफरत और भेदभाव की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है।” उन्होंने कहा, “आज जो राजनीति चल रही है, वह हमारे संविधान और गंगा-जमुनी तहज़ीब को तोड़ने की दिशा में है। जब अदालतें यह कहती हैं कि जो स्थिति थी, वही बनी रहनी चाहिए, तो फिर इस पर किसी भी प्रकार का विवाद क्यों शुरू करना चाहिए? हम सब जानते हैं कि भारत में एकता और भाईचारे का क्या महत्व है। इस समय जो लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वे केवल राजनीति और स्वार्थ के लिए यह सब कर रहे हैं।”

मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी

मुंबई महाराष्ट्र में महायुति की जीत में बड़ा फैक्टर मानी जा रही लड़की बहन योजना में विस्तार की तैयारी चल रही है। खबर है कि राज्य की नई सरकार अगले साल से रकम बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने ऐसे संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के घोषणापत्र में राशि बढ़ाने की बात कही गई थी, जिसक चलते पार्टी पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए राशि में इजाफा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर वादा पूरा नहीं किया गया, तो इससे पूरे देश में पार्टी की छवि खराब होगी। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने वादा पूरा करना चाहिए।’ रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार हमारी प्यारी बहनों को 2100 रुपये देने में सक्षम है। हम फैसला करेंगे कि इसे जनवरी, जुलाई या फिर अगले महीने से शुरू किया जाए। हम लोगों से किया वादा पूरा करेंगे।’ रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमने बीते साल भाई दूज पर योजना की शुरुआत की थी और हम अगले साळ भाई दूज से राशि बढ़ा देंगे।’ उन्होंने जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री की प्यारी बहनों के खाते में पहले ही पांच किश्तें जमा हो चुकी हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को हुआ था जिसके परिणाम तीन दिन बाद घोषित हुए थे, ‘महायुति’ गठबंधन ने 288 विधानसभा सीट में से 230 सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा 132 सीट के साथ आगे रही जबकि शिवसेना को 57 और राकांपा को 41 सीट मिली थीं। कब तक सरकार का गठन संभव महाराष्ट्र में बड़ी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका है। खबरें हैं कि बुधवार को भाजपा के पर्यवेक्षक विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे। इसके बाद 5 दिसंबर को शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सीएम पद भाजपा के खाते में आने के आसार हैं। जबकि, डिप्टी सीएम शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से बनाए जा सकते हैं।

कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग जाएगी!

मुंबई  पांच साल के सीएम, फिर 72 घंटे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और फिर ढाई साल के डिप्टी सीएम। पिछले 10 साल तक अलग-अलग रोल में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति की राजनीति के हीरो बने रहे। अब पांच दिसंबर को वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में अब पांच साल के मराठा राज के बाद ‘पेशवा’ की ‘पेशवाई’ की चलेगी। बीजेपी ने फडणवीस के नाम को सीएम पद के लिए फाइनल कर लिया है। चार दिसंबर को सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमन और विजय रूपाणी की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण नेता, जो दूसरी बार सीएम बनेंगे मराठा इतिहास में पंतप्रधान यानी ‘पेशवा’ अपने कूटनीति और युद्धनीति के लिए जाने जाते थे। देवेंद्र फडणवीस के प्रशंसक भी उन्हें ‘पेशवा’ और देवा भाऊ ही कहते हैं। देवेंद्र फडणवीस पहले भी दो बार महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं, मगर उनके लिए यह कुर्सी ‘लॉलीपॉप’ की तरह नहीं मिली। हर बार उन्होंने बड़े चैलेंज को स्वीकार किया और हर दांव से पार्टी को जीत दिलाई। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने युवा पार्षद के तौर पर राजनीति में एंट्री ली है, इसलिए वह जनता और कार्यकर्ताओं के नब्ज को पहचानते हैं। देवेंद्र फडणवीस संघ के ‘लाडले’ हैं और शाह-मोदी के प्रिय भी। काबिलियत के कारण ही वह मराठा राजनीति वाले राज्य में दूसरे ब्राह्मण सीएम बने। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण सीएम शिवसेना के नेता मनोहर जोशी थे, मगर वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कांग्रेस-एनसीपी के 15 साल के शासन का किया था अंत 2014 में पहली बार देवेंद्र फडणवीस जब सीएम बने थे, तब उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था। फडणवीस ने विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस-एनसीपी शासन में हुए सिंचाई घोटाले को लेकर आवाज बुलंद की। मोदी लहर के बीच प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र ने चुनाव का ताना-बाना बुना और जीत हासिल की। दूसरी बार भी एंटी इम्कबेंसी को दरकिनार कर गठबंधन के साथ बहुमत हासिल किया, मगर सत्ता हासिल नहीं कर सके। 72 घंटे की सरकार बनाई, तब उन्होंने शरद पवार से बातचीत की थी। जब सरकार गिरी, तब फडणवीस ने विधानसभा में चेतावनी के लहजे में पवार और ठाकरे को एक शेर सुनाया था। ‘मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं…लौटकर आऊंगा।’ ढाई साल बाद ही शिवसेना दो हिस्सों में टूट गई। एनसीपी के दो टुकड़े हो गए। बीजेपी को फडणवीस सत्ता में ले आए। 2024 में एक बार फिर अपनी रणनीति से एंटी इम्कबेंसी की हवा बदल दी। बीजेपी सर्वाधिक 132 सीटें जीती ही, महायुति ने भी इतिहास रच दिया। नरेंद्र मोदी क्यों हुए देवेंद्र फडणवीस के मुरीद ? रिपोर्टस के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में रैली के दौरान नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर बीजेपी के बड़े नेताओं से बातचीत कर रहे थे। वहां नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे और देवेंद्र फडणवीस भी थे। नरेंद्र मोदी ने पूछा कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी? गडकरी और मुंडे 17-18 के आंकड़े तक पहुंच सके। तब देवेंद्र फडणवीस ने 40 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की और यह सच साबित हुई। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान फडणवीस ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राजी किया। यह प्रयोग भी सफल हुआ। 2014 में पहली बार शिवसेना से अलग प्रदेश में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ी और 125 सीटें हासिल कीं। उनकी इस रणनीति का बीजेपी के बड़े नेताओं ने विरोध किया था, मगर फडणवीस की रणनीति कामयाब रही और बीजेपी को महाराष्ट्र की पहली बार सत्ता मिली। उद्धव ठाकरे के घमंड को तोड़ने वाले ‘पेशवा’! यह कहानी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में सुनाई जाती है। सच या झूठ, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उद्धव ठाकरे को बातचीत का निमंत्रण दिया था। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे ने संदेश दिया कि बीजेपी नेता मातोश्री में आकर उनसे चर्चा करे। यह बात बीजेपी को पसंद नहीं आई। तब देवेंद्र फडणवीस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। पहले बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर बड़ी पार्टी बनी। 44 साल की उम्र में जब पहली बार सीएम बने, तब फडणवीस ने पहली बार शिवसेना को गठबंधन का जूनियर पार्टनर बनाया। पांच साल तक सरकार चलाई। दूसरी बार बीजेपी और शिवसेना साथ में उतरी। महायुति को बहुमत मिला, मगर उद्धव ठाकरे सीएम पोस्ट पर अड़ गए। देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के क्षणिक बागी अजित पवार के साथ 80 घंटे के लिए सरकार बनाई, मगर चल नहीं सकी। फडणवीस विपक्ष में बैठे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ढाई साल में ही दो हिस्सों में बंट गई। जब चुनाव में उतरे तो ठाकरे की सेना को 20 पर समेट दिया। धीरे-धीरे देवेंद्र बनते गए मराठा राजनीति के सूरमा देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस जनसंघ और बीजेपी के नेता रहे। नागपुर के गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी भी अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। 22 साल की उम्र में फडणवीस ने नागपुर के पार्षद से राजनीति शुरूआत की, फिर 27 साल की आयु में युवा मेयर बनने का रेकॉर्ड बनाया। 1999 में दक्षिण पश्चिम नागपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार जीतते रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले गोपीनाथ मुंडे के आकस्मिक निधन के बाद नेतृत्व की चर्चा चल रही थी। नितिन गडकरी और एकनाथ खडसे जैसे दिग्गज कतार में थे। चुनाव के दौरान दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र का नारा काफी लोकप्रिय हुआ। देखते ही देखते वह बीजेपी के पोस्टर बॉय बन गए। अपनी बेदाग छवि और लोकप्रियता के कारण आरएसएस ने भी उन्हें नेक्स्ट जेनरेशन के नेता के तौर पर चुना, जिसमें वह खरे साबित हुए। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाकर अपने नेतृत्व क्षमता को भी साबित कर दिया।

पुलिस के साथ कुछ लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए मस्जिद में प्रवेश कर गए, तोड़फोड़ की आशंका हुई और अशांति फैली: रामगोपाल

नई दिल्ली संभल हिंसा का मामला मंगलवार को लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी उठा। समाजवादी पार्टी (सपा) की तरफ से रामगोपाल यादव ने संभल में हुई हिंसा का मुद्दा उठाया और दावा किया कि विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुई ‘चुनावी गड़बड़ियों’ से ध्यान भटकाने के लिए हिंसा को ‘योजनाबद्ध तरीके’ से अंजाम दिया गया। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ कुछ लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए मस्जिद में प्रवेश कर गए। इससे तोड़फोड़ की आशंका हुई और अशांति फैली। रामगोपाल यादव ने शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाया और फिर बाद में उनकी पार्टी के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। रामगोपाल ने कहा कि संभल में 500 साल पुरानी मस्जिद के सर्वे के लिए 19 नवंबर को एक वकील ने मुंसिफ मजिस्ट्रेट के यहां एक आवेदन दिया और दो घंटे के अंदर शांतिमय तरीके से सर्वे भी हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद 24 नवंबर को सुबह छह बजे पूरे संभल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और थोड़ी देर बाद वहां के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, आवेदन देने वाले वकील और कुछ लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए मस्जिद में प्रवेश कर गए। रामगोपाल ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को संदेह हुआ कि वे मस्जिद में तोड़फोड़ करने जा रहे हैं और फिर वहां अशांति फैली। उन्होंने कहा कि पुलिस ने गोली चलाई, पांच लोग मारे गए और 20 से अधिक लोग घायल हुए। सैकड़ों लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। बहुत सारे लोग जेलों में हैं और जिन्हें पकड़ लिया गया उन्हें बुरी तरह मारा गया। उन्होंने कहा कि मेरा और लोगों का यह मानना है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में जो चुनाव हुए थे… उसमें बगल के जिलों में किसी को वोट डालने नहीं दिया गया और जबरदस्ती चुनाव पर कब्जा कर लिया था, उससे ध्यान बंटाने के लिए यह सब योजनाबद्ध तरीके से कराया गया। रामगोपाल अभी बोल ही रहे थे कि सभापति जगदीप धनखड़ ने उन्हें टोकते हुए कहा कि आपसे आशा करता हूं कि आप संयम बरतेंगे। सभापति ने यादव से कहा कि आपने अपनी बात रख दी। इसके बाद उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पी संदोष कुमार का नाम पुकारा। रामगोपाल ने आसन से कहा कि अभी तीन मिनट तो हुए भी नहीं है फिर भी उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। शून्यकाल के दौरान सदस्य को अपनी बात रखने के लिए उन्हें तीन मिनट का समय दिया जाता है। इसके बाद सपा के सदस्य सदन से वाकआउट कर गए।

एनसीपी विधायक के समर्थक बैलेट पेपर से करवा रहे थे ‘चुनाव’, ग्राम पंचायत ने इस मतदान को रद्द करने का फैसला किया गया

सोलापुर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के मरकावाडी गांव में एनसीपी (SP) विधायक के समर्थन में बैलेट पेपर से रीपोलिंग करवाने की योजना बनाई गई थी। मंगलवार को ही यह चुनाव होना था। हालांकि प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए इस मॉक पोल को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया है। इसके बाद ग्रामीणों ने इस मतदान का प्लान कैंसल कर दिया। बताया गया कि पुलिस ने धमकी दी कि इस प्रक्रिया में भाग लेने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। इसके बाद ग्राम पंचायत की बैठक हुई और इस मतदान को रद्द करने का फैसला किया गया। मालशिरस सीट के तहत आने वाले इस गांव के लोगों का कहना था कि यहां ज्यादातर महाविकास अघाड़ी के समर्थक रहते हैं, इसके बावजूद चुनाव आयोग के आंकड़ों में महायुति को ज्यादा वोट हासिल हुए। ऐसे में उन्होंने बैलेट पेपर से अनाधिकारिक चुनाव कराने का फैसला कर लिया था। पुलिस प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए कुछ ग्रामीणों को पहले ही नोटिस भेजा था। इस सीट पर एनसीपी (SP) प्रत्याशी उत्तम जांकर ने ही जीत दर्ज की है। जांकर ने कहा, गांव के लोगों से सलाह के बाद हमने फैसला किया है कि कानूनी तरीके से हम ईवीएम के खिलाफ जंग लड़ेंगे क्योंकि पुलिस हमें यह मतदान नहीं करवाने दे रही है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, यह गतिविधि पूरी तरह से गैरकानूनी है और अगर कोई इस तरह मतदान करवाएगा तो उसपर कार्रवाई होगी। एनसीपी (एसपी) के नवनिर्वाचित विधायक उत्तम जांकर ने ही पहले रीपोलिंग की अपील की थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने सख्ती बरती। गांव में पुलि की तैनाती कर दी गई। कुछ गांव के लोगों का कहना था कि गांव में महाविकास अघाड़ी के वोटर ज्यादा हैं लेकिन ईवीएम गलत आंकड़े दिखा रही है। वहीं बीजेपी समर्थकों ने पहले ही कर दिया था कि वे इस मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। एक ग्रामीण ने कहा, गांव के लोगों ने मॉक रीपोल का प्लान बनाया था। ग्रामीणों का मानना है कि वीवीपैट और ईवीएम मशीन में गड़बड़ी थी। इसीलिए हमने बैलेट पेपर से चुनाव करवाने का फैसला किया था। लेकिन कल सेही 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गांव में आ गए और दबाव देने लगे। 30 लोगों को नोटिस दिया गया कि अगर कल चुनाव हुए तो आपका भविष्य खत्म हो जाएगा और कोर्ट में मुलाकात होगी। 700 लोग के करीब वोटिंग के लिए पहुंच भी गए थे। लेकिन फिर यही निर्णय हुआ कि इसे पोस्टपोन कर दिया जाए और अन्य तरीके से यह लड़ाई लड़ी जाए।

विधानसभा चुनाव के नतीजों के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर महायुति के दलों के बीच सहमति नहीं बनी

मुंबई महाराष्ट्र में सरकार के गठन में हो रही देरी में एकनाथ शिंदे की भूमिका होने से शिवसेना ने इनकार कर दिया है। साथ ही पार्टी ने यह भी कहा है कि शिंदे के सम्मान का ध्यान भारतीय जनता पार्टी को रखना होगा। विधानसभा चुनाव के नतीजों के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर महायुति के दलों के बीच सहमति नहीं बनती दिख रही है। पूर्व राज्य मंत्री दीपक केसरकर ने कहा ‘हमारे नेता ने पहले ही साबित कर दिया है कि शिवसेना का असली प्रतिनिधित्व कौन करता है। अब यह दिल्ली पर निर्भर करता है कि वह कैसे उनका कद बरकरार रखते हैं। हम उस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।’ राज्य में सरकार गठन में हो रही देरी पर किए गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘पांच दिसंबर को शपथ ग्रहण समारोह होना है, लेकिन कई बेबुनियाद अफवाहें फैलाई जा रही हैं। कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर एकनाथ शिंदे की सरकार गठन में हो रही देरी में कोई भूमिका नहीं है। भाजपा की आंतरिक चयन प्रक्रिया उनका मामला है। शिंदे पहले ही बता चुके हैं कि वे उनके द्वारा लिए गए किसी भी फैसले को स्वीकार करेंगे।’ केसरकार ने महायुति के भीतर असंतोष या मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें विपक्ष द्वारा फैलाई गई गलत सूचना बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केसरकर यह भी साफ कर चुके हैं कि मुंबई के आजाद मैदान में होने वाला शपथ ग्रहण कार्यक्रम टाला नहीं जाएगा। इससे पहले भाजपा के महाराष्ट्र प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने 5 दिसंबर को कार्यक्रम होने की बात कही थी। एनसीपी नेता अजित पवार भी जानकारी दे चुके हैं कि सीएम भाजपा से होगा और डिप्टी सीएम एनसीपी और शिवसेना को मिलेंगे। भाजपा ने बढ़ाई रफ्तार महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति का नेतृत्व करने वाली भाजपा ने मुंबई में अपनी विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रूपाणी को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नामित किया, जहां विधायक अपने नेता का चुनाव करेंगे। रूपाणी ने राजकोट में अपने आवास पर कहा, ‘महाराष्ट्र भाजपा विधायक दल की बैठक मंगलवार या बुधवार को होगी। भाजपा विधायकों की उस बैठक में आम राय से एक नेता चुनने का प्रयास किया जाएगा। मैं और सीतारमण जी पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में भाग लेंगे और आलाकमान को एक नेता की घोषणा के लिए एक रिपोर्ट सौंपेंगे, जो मुख्यमंत्री बन सकता है बशर्ते इस तरह के फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि महाराष्ट्र को इस बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिलेगा क्योंकि (निवर्तमान मुख्यमंत्री) एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी के उम्मीदवार (शीर्ष पद के लिए) का समर्थन करेंगे।’ आर्थिक राजधानी में पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार सुबह दक्षिण मुंबई के विधान भवन में होगी।

16 दिसंबर को यह साफ हो जाएगा की निर्मला सप्रे किस पार्टी की विधायक हैं और विधानसभा में कहां बैठेंगी!

सागर  लोकसभा चुनाव के समय चर्चा में आईं कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। निर्मला सप्रे को कांग्रेस ने विधानसभा में अपने साथ बैठाने से मना कर दिया है। वहीं, अभी तक उन्होंने बीजेपी की भी सदस्यता नहीं ली है। ऐसे में उनके सियासी सफर को लेकर अटकलों का दौर जारी है। हालांकि 16 दिसंबर को यह साफ हो जाएगा की निर्मला सप्रे किस पार्टी की विधायक हैं और विधानसभा में कहां बैठेंगी। निर्मला सप्रे को लेकर अब विधानसभा अध्यक्ष को फैसला करना है। विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है। इसके ठीक पहले एमपी में कांग्रेस विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने मीडिया से चर्चा के दौरान निर्मला सप्रे के मामले में स्पष्ट रूख अपनाते हुए कहा था कि उनको इसमें आमंत्रित नहीं किया जाएगा। दरअसल, बीना विधायक निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान राहतगढ़ में सीएम मोहन यादव के मंच पर पहुंच गई थीं। उसके बाद से वे लगातार भाजपा के मंचों पर दिख रही हैं। लेकिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। विधानसभा अध्यक्ष को करना है निर्णय विधायक निर्मला सप्रे पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई करने और उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को लेटर लिखा है। कांग्रेस ने निर्मला सप्रे तीन नोटिस भी दिए, लेकिन उन्होंने किसी भी नोटिस का स्पष्ट जवाब नहीं दिया। विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस की तरफ से शिकायत मिलने के बाद निर्मला सप्रे ने कहा था कि मैंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है। ऐसे में अब माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र के पहले दिन यानी की 16 दिसंबर को उनकी सदस्यता और बैठक व्यवस्था को लेकर फैसला हो सकता है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ काम किया लोकसभा चुनाव के दौरान पाला बदलकर बीना विधायक निर्मला सप्रे भाजपा के साथ खड़ी हो गईं थीं। उन्होंने कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी चंद्रभूषण सिंह (गुड्डू राजा) बुंदेला के खिलाफ काम किया था। कांग्रेस प्रत्याशी को बीना विधानसभा से भी करारी हार मिली थी। इसके बाद से विधायक खुलकर भाजपा के सदस्यता अभियान का हिस्सा बनी। निर्मला सप्रे भाजपा के स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ नजर आ रही हैं। विधायक की सोशल मीडिया पर भाजपा ही भाजपा बीना विधायक निर्मला सप्रे के सोशल मीडिया अकाउंट में भी बीजेपी की फोटो लगी है। उनके ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट पर उनकी डीपी के साथ भाजपा का सिम्बल और बैकग्राउंड में भाजपा के झंडे-बैनर ही नजर आ रहे हैं। उनकी पोस्ट व त्योहारों पर डाले जाने वाले पोस्टर और कार्यक्रमों में पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम डॉ. मोहन यादव सहित भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की फोटो लगाई जा रही है। मामले को हाईकोर्ट लेकर जाएगी कांग्रेस कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बीना विधायक सप्रे को लेकर अपनी स्पष्ट राय जता चुके हैं। बीते दिनों सिंघार ने कहा था कि भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं करती है। उन्होंने यह भी कहा था कि निर्मला सप्रे को लेकर हमें कोई भ्रम नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष को उनकी सदस्यता पर निर्णय करना है।

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