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योगेश्वर के बयान के बाद बजरंग ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी, दोनों के बीच छिड़ी जुबानी जंग

यमुनानगर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी द्वारा बजरंग पूनिया पर चार साल का बैन लगाने के बाद से ही हरियाणा की राजनीति में उबाल आया हुआ है। कांग्रेस के नेता इसे भाजपा की चाल बता चुके है। वहीं भाजपा ने इस मामले में राजनीति नहीं करने की सलाह सभी को दी है। उनका कहना है कि नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी के अपने कानून है। वह उसी हिसाब से फैसले लेती है। अब इस कड़ी में पहलवान व भाजपा नेता योगेश्वर दत्त भी कूद पड़े है। उन्होंने बजरंग पूनिया को सलाह देते हुए कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखे। खेल में राजनीति न करें। योगेश्वर ने कहा कि अब बजरंग राजनीति में आ गए है। अब उनको राजनीति ही करनी चाहिए खेल को इससे दूर रखना चाहिए। गौरतलब है कि बजरंग पूनिया नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी द्वारा खुद पर चार साल क बैन लगाने के पीछे भाजपा सरकार की सरकार की साजिश बताया।   वहीं योगेश्वर के बयान के बाद बजरंग ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने योगेश्वर दत्त को जवाब दिया कि राजनीति करेंगे तो अपने दम पर करेंगे, न कि बहन-बेटियों को आगे लाकर राजनीति करेंगे। आपको बता दें कि पहलवान बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ने 6 सितंबर को कांग्रेस जॉइन की थी। जिसके बाद कांग्रेस ने बजरंग को अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था। जबकि विनेश फोगाट को जुलाना से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट दिया था। इस समय विनेश फोगाट जुलाना से विधायक है।  करीब 10 दिन पहले नाडा ने डोप टेस्ट का सैंपल नहीं देने पर बजरंग पूनिया पर चार का बैन लगा दिया था। इसके जवाब में बजरंग ने पहले कहा कि बैन गलत तरीके से लगा है। इतना बैन तो ताकतवर स्टेरॉयड लेने वाले पर लगता है। बजरंग ने कहा कि यह बैन व्यक्तिगत द्वेष और राजनीतिक साजिश का परिणाम है।

INDIA गठबंधन की लीडरशिप पर ममता बनर्जी ने ठोका दावा, भाजपा ने कहा- राहुल गांधी पर किसी को नहीं भरोसा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने INDIA गठबंधन और राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाया है। भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “INDIA गठबंधन का कोई भी नेता राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के नेतृत्व पर भरोसा नहीं करता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति है। उन्होंने कहा, “कभी अखिलेश यादव कहते हैं कि वह नेता हैं, कभी ममता बनर्जी कहती हैं कि वह नेता हैं और कभी स्टालिन कहते हैं। लेकिन सभी एक स्वर में कहते हैं कि राहुल गांधी नेता नहीं हैं।” भंडारी ने आगे कहा कि भाजपा राहुल गांधी को ‘बालक बुद्धि’ नहीं कहती, बल्कि यह INDIA गठबंधन के नेता ही हैं जो इस तरह के विचार रखते हैं। ममता बनर्जी का बयान यह बयान ममता बनर्जी की टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने गठबंधन के भीतर नेतृत्व की स्पष्टता पर जोर दिया। ममता बनर्जी ने कहा था कि INDIA गठबंधन को एक समन्वित और सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता है, जो चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर काम कर सके। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने इंडिया गठबंधन का गठन किया था। अब इसे प्रबंधित करना मोर्चे का नेतृत्व करने वालों पर निर्भर है। अगर वे यह नहीं कर सकते तो मैं क्या कर सकती हूं? मैं बस यही कहूंगी कि सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है।’’ यह पूछे जाने पर कि एक मजबूत भाजपा विरोधी ताकत के रूप में अपनी साख को देखते हुए वह गठबंधन का प्रभार क्यों नहीं ले रही हैं, ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘यदि अवसर दिया गया तो मैं इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करूंगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं बंगाल से बाहर नहीं जाना चाहती, लेकिन मैं इसे यहां से संचालित कर सकती हूं।’’ आपको बता दें कि प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी को ‘राजनीतिक फ्लेयर’ बताते हुए कहा कि उनका नेतृत्व गठबंधन के भीतर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “INDIA गठबंधन राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर एकमत नहीं है। यह स्पष्ट दिखता है।” राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर भाजपा के इस तंज ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। गठबंधन के नेता भले ही सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन भाजपा का दावा है कि भीतरखाने असहमति की स्थिति बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि INDIA गठबंधन इस आलोचना का कैसे जवाब देता है और क्या वह नेतृत्व को लेकर स्पष्टता प्रदान कर पाएगा।

अजित पवार को ‘बेनामी संपत्ति’ मामले में बड़ी राहत, आयकर विभाग लौटाएगा 1 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी

मुंबई महाराष्ट्र में नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही उपमुख्यमंत्री और एनसीपी चीफ अजित पवार को बड़ी राहत मिली है। आयकर विभाग ट्राइब्यूनल ने पवार की 1 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मुक्त कर दी है। 7 अक्टूबर 2021 में छापेमारी के बाद आयकर विभाग ने इस संपत्ति को जब्त कर लिया था। इसमें उनकी पत्नी सुनेत्रा और बेटे पार्थ की संपत्ति शामिल हैं। उस समय वह शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का हिस्सा थे। ट्राइब्यूनल ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, आयकर विभाग कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर पाया है जिससे पता चले कि इन संपत्तियों के मामले में बेनामी लेनदेन किया गया। बैंकिंग सिस्टम के जरिए ही सारे लेनदेन हुए थे। आयकर विभाग ने अजित पवार की जिन संपत्तियों को जब्त किया था उसमें दिल्ली का एक फ्लैट, सतारा की शुगर फैक्ट्री और गोवा का रिजोर्ट शामिल था। पवार की तरफ से पेश हुए वकील प्रशांत पाटिल ने कहा कि पवार परिवार ने इन संपत्तियों को लेकर कोई गड़बड़ी नहीं की है और उनके खिलाफ लगे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि वैध माध्यम के जरिए ही सारा लेनदेन किया गया था। आयकर विभाग भी ऐसा कोई सबूत नहीं दे पाया है जिससे पवार परिवार और बेनामी लेनदेन के बीच कोई कनेक्शन मिले। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि 5 नवंबर 2024 को आयकर विभाग ने कहा था कि ट्राइब्यूनल अपने आदेश पर एक बार फिर विचार करे। हालांकि ट्राइब्यूनल ने आयकर विभाग की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। आपको बताते चलें के विधानसभा चुनाव से पहले अजित पवार ने जो हलफनामा दिया था उसके मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 124 करोड़ की है। उन्होंने बताया था कि उनके पास 14.12 लाख कैश और अकाउंट में 6.81 लाख रुपये जमा है। इसके अलावा उनके पास टोयोटा कैमरी, होंडा सीआरवी और 3 ट्रेलर ट्रैक्टर हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी केपास 10 लाख की गाड़ी है।

बाबरी विध्वंस के समर्थन में उद्धव सेना, सपा पार्टी विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी से करेगी किनारा

मुंबई समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी ने शनिवार को घोषणा करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी ने महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) से अलग होने का निर्णय लिया है। उन्होंने शिवसेना (UBT) पर “हिंदुत्व एजेंडा” अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि इसी के चलते सपा ने इस गठबंधन से अपनी साझेदारी पर पुनर्विचार करने का फैसला किया। बता दें कि अबू आजमी सपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हैं। आजमी ने आरोप लगाया कि महाविकास आघाड़ी में सीट बंटवारे और चुनाव प्रचार के दौरान कोई तालमेल नहीं था। उन्होंने कहा, “विधानसभा चुनाव में हार के बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से आंतरिक बैठक में कहा कि वे हिंदुत्व एजेंडा को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाएं।” इसके अलावा, अबू आजमी ने 6 दिसंबर को शिवसेना (UBT) द्वारा सोशल मीडिया पर बाबरी मस्जिद विध्वंस के पक्ष में पोस्ट किए गए संदेश को लेकर गहरी नाराजगी जताई। अबू आजमी ने कहा, “शिवसेना (उबाठा) द्वारा बाबरी मस्जिद को ढहाए जाने के लिए लोगों को बधाई देते हुए एक अखबार में विज्ञापन दिया गया था। उनके (उद्धव ठाकरे के) सहयोगी ने भी मस्जिद को ढहाये जाने की सराहना करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है।” आजमी ने कहा, “हम एमवीए छोड़ रहे हैं। मैं (समाजवादी पार्टी अध्यक्ष) अखिलेश सिंह यादव से बात कर रहा हूं।” शिवसेना (उबाठा) के विधान पार्षद मिलिंद नार्वेकर ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना पर पोस्ट किया था, जिसके जवाब में सपा ने यह कदम उठाया। नार्वेकर ने मस्जिद ढहाए जाने की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसके साथ ही शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का कथन लिखा, “मुझे उन लोगों पर गर्व है जिन्होंने यह किया।” शिवसेना (उबाठा) सचिव ने पोस्ट में उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और खुद की तस्वीरें भी पोस्ट कीं। आजमी ने कहा, “अगर एमवीए में कोई भी ऐसी भाषा बोलता है, तो भाजपा और उनके बीच क्या अंतर है? हमें उनके साथ क्यों रहना चाहिए?” गौरतलब है कि महाविकास आघाड़ी गठबंधन में शिवसेना (UBT), शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP), और कांग्रेस प्रमुख दल हैं। समाजवादी पार्टी ने 2019 में गठबंधन का हिस्सा बनने का फैसला किया था, लेकिन अबू आजमी के इस बयान से गठबंधन में दरार स्पष्ट हो गई है। महाराष्ट्र विधानसभा में समाजवादी पार्टी के दो विधायक हैं। MVA दलों की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उद्धव गुट के विधायकों ने विधानसभा में नहीं ली शपथ, आदित्य ठाकरे बोले- EVM के रिजल्ट स्वीकार नहीं

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा के तीन दिन के सत्र में शनिवार को नए विधायकों ने शपथ ली। प्रोटेम स्पीकर कालिदास कोलंबकर ने उन्हें शपथ दिलाई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने भी महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर कालिदास कोलंबकर ने तीनों नेताओं को विधायक के रूप में शपथ दिलाई। हालांकि इस दौरान शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के विधायकों ने शपथ लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने ईवीएम पर शक जताया है। शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के जीते हुए विधायकों ने शपथ नहीं ली। उन्होंने कहा कि हमने फैसला किया है कि हमारे (शिवसेना यूबीटी) जीते हुए विधायक शपथ नहीं लेंगे। विधानसभा में हम लोगों ने इसका बायकॉट किया है। शिवाजी की प्रतिमा पर लगाए नारे आदित्य ठाकरे ने कहा कि अगर यह लोगों का जनादेश होता तो लोग खुश होते और जश्न मनाते, लेकिन लोगों ने कहीं भी इस जीत का जश्न नहीं मनाया। हमें ईवीएम पर संदेह है। आदित्य ठाकरे अपनी पार्टी के सभी विधायकों समेत विधानसभा पहुंचे। यहां वे सभी छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास पहुंचे। उन्होंने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और फूल चढाए। शिवाजी की जयकारे लगाए और फिर सदन के अंदर शपथ न लेने की बात फिर दोहराई। अजित पवार बोले- ईवीएम को दोष देने का कोई मतलब नहीं वहीं उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने विपक्ष के ईवीएम विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,  ‘ईवीएम पर कोई भी आपत्ति अनुचित है. ईवीएम को दोष देने का कोई मतलब नहीं है. जब एमवीए को लोकसभा में 31 सांसद मिले थे, तब उन्होंने ईवीएम को दोष नहीं दिया था. उन्हें विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए विपक्ष को शपथ लेनी होती है. वे कल तक शपथ ले सकते हैं. ऐसा लगता है कि वे इस तरह के विरोध के माध्यम से अपनी मौजूदा ताकत दिखाना चाहते हैं.’ 5 दिसंबर को बनी नई सरकार 5 दिसंबर को नई सरकार ने शपथ ली, जिसमें देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने, जबकि एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में 40,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिसमें लगभग 2,000 वीवीआईपी शामिल थे। पीएम मोदी और भाजपा के शीर्ष नेता अमित शाह, जेपी नड्डा और राजनाथ सिंह उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस बड़े अवसर पर 19 राज्यों के मुख्यमंत्री भी पहुंचे थे। विपक्षी महा विकास अघाड़ी के नेता उद्धव ठाकरे और शरद पवार भी इस भव्य समारोह में शामिल हुए। मुकेश अंबानी जैसे उद्योगपति, फिल्मी सितारे और धार्मिक नेता भी आजाद मैदान में मौजूद थे।

भाजपा और आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा- ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को कर रहीं बर्बाद

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वो प्रदेश को बर्बादी की राह पर धकेल रही हैं। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने एक आंकड़ा भी साझा किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पोस्ट में कहा, “अगर मुख्यमंत्रियों के लिए ‘हॉल ऑफ शेम’ हो तो सबसे शीर्ष पर ममता बनर्जी का नाम आएगा।” भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल से जुड़े कुछ चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल भारत में लगभग 67 फीसद केरोसिन की खपत करता है और यह स्थिति एलपीजी के पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद बनी हुई है।” उन्होंने सवाल उठाया, “क्या कारण हो सकता है? गरीबी, कालाबाजारी या बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी, सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए वोट बैंक के रूप में दोगुना हो रहे हैं?” उन्होंने आगे कहा, “कारण चाहे जो भी हो। लेकिन, इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता है कि ममता बनर्जी अपने पीछे एक बर्बाद राज्य छोड़ रही हैं।” उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद समिक भट्टाचार्य ने राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी से इस मुद्दे को लेकर सवाल पूछे थे। अमित मालवीय ने इसी को आधार बनाकर अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर प्रतिक्रिया दी। दरअसल, भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य ने सवाल किया था कि क्या पश्चिम बंगाल देश में सबसे अधिक मात्रा में केरोसिन की खपत करता है? क्या मंत्रालय को पश्चिम बंगाल में केरोसिन के दुरुपयोग और कालाबाजारी की जानकारी है? क्या सरकार ने इस दावे का संज्ञान लिया है कि केरोसिन का सेवन बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा किया जाता है? इस तरह के दुरुपयोग को रोकने और इच्छित लाभार्थियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और वितरण में सुधार के लिए क्या उपाय लागू किए जा रहे हैं और ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में केरोसिन निर्भरता को कम करने के लिए वैकल्पिक, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने वाली पहल क्या हैं? इन सभी सवालों के जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री मंत्री सुरेश गोपी ने लिखित जवाब दिया था । जिसमें उन्होंने विस्तारपूर्वक भाजपा सांसद के सभी सवालों का जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “भारत सरकार खाना पकाने के उद्देश्य से तिमाही आधार पर पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को “सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिट्टी के तेल का आवंटन करती है। वर्ष 2023-24 के दौरान विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पीडीएस एसकेओ का आवंटन अनुबंध में दिया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “वर्ष 2023-24 के दौरान, पश्चिम बंगाल राज्य को 7,04,016 केएल पीडीएस एसकेओ आवंटित किया गया था, जो देश भर के राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को किए गए 10,60,524 केएल के कुल आवंटन का 66.38 फीसदी है। भारत सरकार ने समय-समय पर संशोधित केरोसिन (उपयोग पर प्रतिबंध और अधिकतम कीमत का निर्धारण) आदेश 1993 जारी किया है, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत केरोसिन की बिक्री केवल खाना पकाने और रोशनी के प्रयोजनों के लिए पात्र उपभोक्ताओं तक सीमित कर दी गई है। कीमत सरकार या सरकारी तेल कंपनियों द्वारा तय की जाती है। पीडीएस नेटवर्क के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर पीडीएस केरोसिन का वितरण पश्चिम बंगाल राज्य सहित संबंधित राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है।”  

देश के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश हो रही, यह अत्यंत गंभीर मुद्दा है, इसे रोकने में असमर्थ अमित शाह को बाहर करें मोदी: कांग्रेस

नई दिल्ली कांग्रेस ने कहा है कि सरकार कहती है कि देश के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश हो रही है तो यह अत्यंत गंभीर मुद्दा है और ऐसी साजिश करने वालों का पर्दाफाश करने में असमर्थ रहे देश के गृहमंत्री अमित शाह को पद से हटा देना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पूरे देश में साम्प्रदायिकता, हिंसा और नफरत का जहर घोला जा रहा है- ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ जैसे नारे दिए जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक और मणिपुर से महाराष्ट्र तक यात्राएं निकाली, जिसका उद्देश्य मोहब्बत से भारत को जोड़ना था। उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति जो मजदूर, किसान, मोची, बढ़ई, ड्राइवर जैसे तमाम वर्गों के जीवन से जुड़े संघर्षों को समझकर उसका समाधान ढूंढता है, एक व्यक्ति जो दलितों, पिछड़ों, महिलाओं की आवाज उठाता है, उनके हक की लड़ाई लड़ता है, उस व्यक्ति को ये लोग देशद्रोही कहते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि भाजपा-आरएसएस देश का सबसे बड़ा टुकड़े-टुकड़े गैंग है। राहुल जी हमेशा जनता के मुद्दों को उठाते रहे हैं और आगे भी उठाएंगे। वे आपकी धमकियों और आरोपों से डरने वाले नहीं हैं।” प्रवक्ता ने कहा, “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईएसआई को रेड कार्पेट बिछाकर देश में बुलाते हैं, और वही आईएसआई पुलवामा का सारा ठीकरा हमारे देश पर फोड़ देता है, तब आपने उन्हें देशद्रोही नहीं कहा। जब मोदी विदेश जाकर कहते हैं कि पिछले जन्म में कोई पाप किए होंगे, तभी भारत में पैदा हुए हैं, तब उन्हें देशद्रोही नहीं कहा जाता। जब श्री मोदी बिन बुलाए बिरयानी खाने पाकिस्तान चले जाते हैं, तब उन्हें देशद्रोही नहीं कहा जाता। जब श्री मोदी चीन को क्लीन चिट दे देते हैं, तब ये देशद्रोह की कैटेगरी में नहीं आता। आज देश की जनता ऐसा दोहरा चरित्र रखने वाले भाजपा के लोगों पर हंस रही है।” उन्होंने कहा, “ जब देश का अन्नदाता कहता है- हम काले कानून बर्दाश्त नहीं करेंगे, हम आंदोलन करेंगे तो भाजपा के लिए ये अंतरराष्ट्रीय साजिश और फंडिंग का हिस्सा हो जाता है। जब सोनम वांगचुक अपने साथियों के साथ लद्दाख से आते हैं, अपनी मांग रखते हैं, तो वह अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा हो जाते हैं। मणिपुर डेढ़ साल से जल रहा है, लेकिन नरेंद्र मोदी वहां नहीं जाते क्योंकि वो भी अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है। अगर श्री मोदी से महंगाई, बेरोजगारी पर सवाल पूछ लिया जाए तो आप देशद्रोही हैं। युवा रोजगार मांग लें तो उनको लाठी मारी जाएगी, क्योंकि वो भी साजिश का हिस्सा हैं। अगर देश में इतनी अंतरराष्ट्रीय साजिश हो रही है तो आप गृहमंत्री अमित शाह की छुट्टी क्यों नहीं करते हैं। क्या नरेंद्र मोदी सरकार इतनी कमजोर है, जिसके खिलाफ कोई भी अंतरराष्ट्रीय साजिश होती रहती है। इस देश में किसी ने अंतरराष्ट्रीय साजिश रची है तो वो गौतम अडानी है, जिस पर रिश्वतखोरी, हेरा-फेरी का आरोप लगा है और जिसने भारत की छवि को धूमिल करने का काम किया है।” प्रवक्ता ने कहा, “भाजपा वाले कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने का काम कर रही है।लेकिन सच्चाई यह है कि अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने का काम भाजपा के लोग करते हैं। देश में जब नोटबंदी, गलत जीएसटी लागू की गई तो पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी ने नरेंद्र मोदी को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि अगर आप नोटबंदी के साथ आगे बढ़ेंगे तो जीडीपी गिरेगी, तब श्री मोदी ने उनका मजाक उड़ाया था, लेकिन आज देश के सामने पूरी सच्चाई है।”  

बीना विधायक निर्मला सप्रे की मुश्किल बढ़ी, कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के लिए 9 दिसंबर तारीख की निर्धारित

 सागर  सागर जिले के बीना की कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी पर खतरा मंडराने लगा है. निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाई गई याचिका हाई कोर्ट ने स्वीकार कर ली है. इंदौर हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के लिए 9 दिसंबर तारीख निर्धारित की गई है. उल्लेखनीय है कि सागर जिले के बीना की एकमात्र कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे को विधानसभा की सदस्यता से बर्खास्त करने के लिए कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र सौंपा था. इस पत्र में उल्लेख किया गया था कि लोकसभा चुनाव के पहले निर्मला सप्रे में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है, इसलिए उन्हें विधानसभा की सदस्यता से निष्कासित किया जाए. इसी मुद्दे को लेकर अभी तक फैसला नहीं हुआ है. मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से फैसला नहीं लिए जाने पर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.  हाई कोर्ट की ओर से उनकी याचिका स्वीकार कर ली गई है. अब 9 दिसंबर को सुनवाई होना है. जानिए क्या है पूरा मामला कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे विधानसभा चुनाव के बाद अचानक बीजेपी के मंच पर दिखाई दीं. उन्हें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीजेपी की पट्टिका भी पहनाया. यह पूरा घटनाक्रम लोकसभा चुनाव के पहले घटित हुआ. हालांकि निर्मला सप्रे की ओर से दूसरी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बावजूद अभी तक विधानसभा से इस्तीफा नहीं दिया गया है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित में यह पत्र दिया है कि उन्होंने बीजेपी ज्वाइन नहीं किया, जबकि उनका कांग्रेस से मोह भंग हो चुका है. अब कांग्रेस उनकी सदस्यता समाप्त करना चाहती है. बीजेपी ने भी किनारा किया और कांग्रेस भी विरोध में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के मुताबिक निर्मला सप्रे लिखित में दिया है कि उन्होंने बीजेपी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण नहीं की है. यदि वे बीजेपी में आना चाहे तो उनका स्वागत है. दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि निर्मला सप्रे को बीजेपी की ओर से आने वाले समय में बीना से चुनाव लड़ना चाहिए. उन्होंने भाजपा ज्वाइन की है लेकिन अब निर्मल सप्रे अपनी बात से मुकर रही है. हाई कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है उसमें सबूत के तौर पर कांग्रेस ने वीडियो फोटो और समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई ख़बरों को आधार बनाकर निर्मला सप्रे की विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की गुहार लगाई है. याचिका पर 9 दिसंबर को पहली सुनवाई होना है. यदि दल बदल कानून के तहत सदस्यता समाप्त होने का फैसला सामने आता है तो बीना में उपचुनाव होना तय है.

शिवसेना यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे ने किया एलान, हम मे से कोई 1 ही बचेगा, अभी BMC चुनाव बाकी

नई दिल्ली बात जुलाई 30 की है, शिवसेना यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे ने ऐलान कर दिया था कि अब राजनीति में वह या देवेंद्र फडणवीस रहेंगे। इसके बाद जब 23 नवंबर को चुनाव के नतीजों का ऐलान हुआ, तो 90 से ज्यादा सीटों पर मैदान में उतरी शिवसेना यूबीटी 20 सीटों पर सिमट गई। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 132 पर जीत हासिल की और महायुति की सरकार भी बना ली। अब चर्चाएं BMC यानी बृह्नमुंबई चुनाव को लेकर शुरू हो गई हैं। उद्धव ने क्या कहा था उद्धव ठाकरे ने कहा था, ‘अनिल देशमुख ने अब खुलासा कर दिया है कि कैसे फडणवीस ने मुझे और आदित्य को जेल में डालने की साजिश की थी। मैंने सब कुछ सहन किया, लेकिन मजबूती के साथ खड़ा रहा। तो अब राजनीति में या तो मैं या वह रहेंगे। आज मेरे पास कोई पार्टी, चिह्न या पैसा नहीं है, लेकिन मैं भाजपा को चुनौती दै रहा हूं, क्योंकि मेरे पास शिवसैनिकों की ताकत है।’ विधानसभा चुनाव में क्या हुआ विधानसभा चुनाव मुख्य रूप से MVA यानी महाविकास अघाड़ी और महायुति के बीच था। MVA में शिवसेना यूबीटी, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी थे। जबकि, महायुति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी थे। राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से 230 महायुति के खाते में आईं थी। जबकि, शिवसेना यूबीटी 20, कांग्रेस 16 और सीनियर नेता शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी एसपी महज 10 सीटों पर ही जीत सकी थी। अब BMC चुनाव की तैयारी कई छोटे राज्यों के सालाना बजट से ज्यादा वाली BMC में चुनाव होने हैं। शहर के 36 विधानसभा क्षेत्रों वाली मुंबई में 227 वार्ड को चुना जाना है। हालांकि, अब तक चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि 2025 की शुरुआत में चुनाव हो सकते हैं। हाल ही में उद्धव ने पार्टी नेताओं और पूर्व पार्षदों के साथ बैठक की थी। पिछले BMC चुनाव के नतीजे इससे पहले BMC का चुनाव साल 2017 में हुआ। तब अविभाजित शिवसेना सबसे 84 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। वहीं, भाजपा के खाते में 82 सीटें आई थीं। कांग्रेस घटकर 31 सीटों पर आ गई थी और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को 7 सीटें मिली थीं। क्या अकेले लड़ेगी शिवसेना यूबीटी MVA की करारी हार के बाद चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि उद्धव गठबंधन से दूरी बना सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई पार्टी नेता शिवसेना यूबीटी को अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ने की सलाह दे रहे हैं। जबकि, उद्धव, संजय राउत और आदित्य ठाकरे समेत कई बड़े नाम गठबंधन बनाए रखने के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

राज्यसभा में जोरदार हंगामा, कांग्रेस सांसद की सीट से मिलीं नोटों की गड्डियां, अभिषेक मनु सिंघवी की सफाई

नई दिल्ली  राज्यसभा (Rajya Sabha) में कांग्रेस (Congress) के बेंच (bench) पर नोटों की गड्डी ( bundle of notes) मिलने पर सदन में जबरदस्त हंगामा हो रहा है. सभापति (Chairman) ने खुद ये बात सदन में कही है. उन्होंने कहा है कि ये गंभीर मामला (serious matter) है और इसकी जांच हो रही है. दरअसल, शुक्रवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जानकारी दी,’कल (गुरुवार) सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने हमें जानकारी दी कि सीट नंबर 222 से कैश मिला है. यह सीट तेलंगाना से सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को अलॉट की गई है. इस मामले में नियमों के मुताबिक जांच होनी चाहिए और यह हो भी रही है.’ सभापति ने जैसे ही नोट मिलने की बात कही, विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,’जब तक मामले की जांच चल रही है और सब कुछ स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक आपको (सभापति) उनका (अभिषेक मनु सिंघवी) नाम नहीं बोलना था.’ खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने हंगामा किया. इस पर खड़गे ने कहा कि ऐसा चिल्लर काम करके ही देश को बदनाम किया जा रहा है. आप (सभापति) किसी खास का नाम और सीट के बारे में कैसे कह सकते हैं?’ खड़गे के आरोपों पर सभापति ने कहा कि उन्होंने यह बताया है कि किस सीट पर मिला है और यह किसे अलॉट की गई है. आज (6 दिसंबर) सभापति जगदीप धनखड़ ने संसद की कार्यवाही के दौरान कहा कि एक दिन पहले संसद से 500 रुपए के 100 नोटों की गड्डी मिली. जिस सीट (222) पर नोटों का बंडल मिला, वह कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के नाम पर अलॉट है. अब इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सफाई आ गई है. सिंघवी ने कहा,’पहली बार ऐसा सुनने में आया! मैं जब भी राज्यसभा जाता हूं तो एक 500 रुपये का नोट साथ लेकर जाता हूं. मैं कल दोपहर 12.57 बजे घर के अंदर पहुंचा और 1 बजे सदन चालू हुआ. फिर मैं 1.30 बजे तक कैंटीन में सांसद अयोध्या रामी रेड्डी के साथ बैठा और फिर संसद से चला गया!’ दरअसल, शुक्रवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जानकारी दी,’कल (गुरुवार) सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने हमें जानकारी दी कि सीट नंबर 222 से कैश मिला है. यह सीट तेलंगाना से सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को अलॉट की गई है. इस मामले में नियमों के मुताबिक जांच होनी चाहिए और यह हो भी रही है.’ खड़गे ने नाम लेने पर जताई आपत्ति राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने जैसे ही नोट मिलने की बात कही, विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,’जब तक मामले की जांच चल रही है और सब कुछ स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक आपको (सभापति) उनका (अभिषेक मनु सिंघवी) नाम नहीं बोलना था.’ खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने हंगामा किया. इस पर खड़गे ने कहा कि ऐसा चिल्लर काम करके ही देश को बदनाम किया जा रहा है. आप (सभापति) किसी खास का नाम और सीट के बारे में कैसे कह सकते हैं?’ खड़गे के आरोपों पर सभापति ने कहा कि उन्होंने यह बताया है कि किस सीट पर मिला है और यह किसे अलॉट की गई है. दोनों पक्षों को करनी चाहिए निंदा: नड्डा बीजेपी चीफ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा,’यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मुद्दा है. यह सदन की गरिमा पर कुठाराघात है. मुझे विश्वास है कि सही जांच होगी. मुझे उम्मीद थी कि हमारे विपक्ष के नेता भी विस्तृत जांच की मांग करेंगे. विपक्ष को हमेशा सद्बुद्धि रखनी चाहिए. स्वस्थ मन और स्वस्थ भावना के साथ विवरण सामने आना चाहिए. दोनों पक्षों को इसकी निंदा करनी चाहिए.’

मंत्री विजयवर्गीय ने दिग्विजय सिंह पर जमकर निशाना साधा बोले – अब भेष बदलकर अयोध्या जाएं और रामलला से अपने कुकर्मों की मांफी मांगे

सागर  मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर चर्चाओं में है। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को घेरते हुए तीखा कटाक्ष किया है। विजयवर्गीय ने बयान देते हुए कहा कि दिग्विजय अब भेष बदलकर अयोध्या जाएं और रामलला से अपने कुकर्मों की मांफी मांगे। मंत्री कैलाश ने कहा कि वे हमसे अयोध्या में मंदिर निर्माण की तारीख पूछते थे। हमने निर्माण की तारीख से लेकर प्राण प्रतिष्ठा की तारीख भी बताई है। दरअसल एमपी के नगरीय आवास एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सागर जिले के दौरे पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के त्रिदेव सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने मंच से अपनी बात रखने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर जमकर निशाना साधा। तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चल रहे हमारे आंदोलन पर दिग्विजय हमेशा सवाल उठाते थे। दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा कि जब हम नारा लगाते थे कि रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे… तो दिग्विजय सिंह हम पर कटाक्ष करते थे। और कहते थे कि… लेकिन तारीख नही बताएंगे। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हमने मंदिर भूमिपूजन की तारीख बताई, प्राण-प्रतिष्ठा की तारीख भी बताई और अब तो मंदिर भी बन गया और रामलला विराजमान भी हो गए। भेष बदलकर अयोध्या जाएं- कैलाश विजयवर्गीय विजयवर्गीय ने आगे कहा कि अब तो दिग्विजय भेष बदल कर अयोध्या जाए और अपने कुकर्मों की भगवान श्री राम से माफी मांगे। हमारे रामजी बड़े दयालु है, वो आपको माफ कर देंगे। गोविंद राजपूत ने कहा विजयवर्गीय मेरे बड़े भाई सागर के पद्माकर सभागार में हितग्राही सम्मेलन और बीजेपी कार्यकर्ता सम्मान समारोह एक साथ आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिग्गी राजा पर निशाना साधते हुए करारा प्रहार किया। वहीं मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि जब हम अलग-अलग पार्टियों में थे, उस दौरान भी मैं कैलाश जी का सम्मान करता था, वे हमेशा मेरे बड़े भाई रहे हैं। कार्यक्रम के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री नरयावली विधानसभा क्षेत्र के मकरोनिया पहुंचे। जहां उन्होंने खेल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गोविंद राजपूत, विधायक शैलेंद्र जैन और प्रदीप लारिया ने मौजूद रहे।

कांग्रेस नेता भानु चिब स्वागत में धक्कामुक्की मामले में अमित पटेल के निलंबन पर रोक

इंदौर इंदौर एयरपोर्ट पर यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु उदय चिब के सामने कार्यकर्ताओं में मारपीट के मामले में पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अमित पटेल के निलंबन पर रोक लगा दी गई है। इस मामले की गहनता से जांच कर कमेटी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर निलंबन करने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बता दें की पिछले दिनों यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मितेन्द्र सिंह ने पत्र जारी कर पटेल को यूथ कांग्रेस से निलंबित किया था। कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस निलंबन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह सहित अन्य नेता भी सहमत नहीं थे। क्योंकि किसी भी वीडियो में पटेल द्वारा मारपीट करने का कोई सबूत नहीं मिला थ। यह बात भी उठी कि इंदौर में कांग्रेस पिछड़ रही है। खासकर इंदौर विधानसभा-दो में। वहां अमित की पत्नी पार्षद हैं। ऐसे में उनके निलंबन से गलत संदेश जाएगा। पटेल खाती समाज से हैं और जीतू पटवारी से जुड़े हुए भी हैं। मितेन्द्र यादव ने बिना किसी को विश्वास में लिए, अपने स्तर पर यह फैसला लिया है। कार्रवाई पर अमित पटेल ने कहा- मैं तो उन्हें बचा रहा था मामले में इंदौर युवा कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अमित पटेल की सदस्यता सस्पेंड कर दी गई थी। अमित पटेल का कहना है, ‘जिस कांग्रेस नेता के साथ मारपीट हुई है, मैं तो खुद उन्हें बचाता हुआ वीडियो में नजर आ रहा हूं। वे देवास के नेता हैं और मेरे अच्छे दोस्त हैं। हो सकता है कि कुछ दूसरे लोगों को बचाने के लिए ये पत्र जारी किया गया हो। मैं एनएसयूआई, युवा कांग्रेस और कांग्रेस में किसी पद पर नहीं हूं। मेरी पत्नी पार्षद हैं। बस मैं पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता हूं। इंदौर शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष की दावेदारी जरूर कर रहा हूं।’ इंदौर एयरपोर्ट पर हुए घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा     26 नवंबर को इंदौर एयरपोर्ट पर आए यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को शाजापुर में मशाल यात्रा में शामिल होने जाना था।     एमपी यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष मितेंद्र सिंह और पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े चिब को अपनी-अपनी कार में बैठाना चाहते थे।     चिब, वानखेड़े की कार में बैठे। वानखेड़े दिल्ली से चिब के साथ ही इंदौर आए थे।     यूथ कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि प्रोटोकॉल के तहत चिब को अध्यक्ष मितेन्द्र दर्शन सिंह की कार में जाना था।     इसी बात पर वानखेड़े और सिंह गुट में विवाद हुआ।     एमपी यूथ कांग्रेस में सचिव विश्वजीत सिंह चौहान ने अमित पटेल के समर्थक को चांटा मार दिया था।     इसके बाद पटेल के समर्थकों ने चिब की कार के साथ चल रहे विश्वजीत चौहान के साथ मारपीट कर दी थी।

BJP सांसद ने उठाया विदेशी साजिश से पर्दा, संसद में गूंजा OCCRP मुद्दा, विपक्ष पर देते नहीं बना जवाब!

नई दिल्ली संसद के शीतकालीन सत्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने OCCRP रिपोर्ट का मुद्दा उठाया है. उन्होंने इसके पीछे की विदेशी साजिश से भी पर्दा उठाया है. MP सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जब भी संसद का सत्र चल रहा होता है. उसी समय विदेशों में कोई ना कोई रिपोर्ट सामने आ जा जाती है. ये केवल भारत की छवि खराब करने की कोशिश है. बता दें कि OCCRP का मतलब ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट है. यह खोजी पत्रकारों का एक ग्लोबल नेटवर्क है, जिसकी हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है. ‘भारत की व्यवस्था पर हो रहा आक्रमण’ बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सदन में कहा कि, ‘जब से भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक उभरती हुई आर्थिक, सामरिक, और कूटनीतिक शक्ति बनकर उभरा है और जब से भारत को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा गया है कि विदेश की बहुत सी ऐसी गतिविधिया हैं. जो भारत की व्यवस्था के आर्थिक, नैतिक, सामाजिक पर आक्रमण कर रही हैं. इस संदर्भ में हाल ही में एक जानकारी सामने आई है, जिसे हम कह सकते हैं कि ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट. इसके खोजी पत्रकारों की रिपोर्टिंग के आधार पर एक फ्रेंच पब्लिकेशन ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.’ ‘ये भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश’ उन्होंने आगे कहा, ‘इस रिपोर्ट के अनुसार कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट को विदेशी सरकारों की फंडिंग है और उसका फोकस भारत पर भी है. विदेशी फंडिंग के साथ-साथ ओसीसीआरपी का संबंध जॉर्स सोरेस के साथ भी है. विगत तीन वर्षों से ये क्या सिर्फ संयोग है कि जिस समय भारत की संसद का सत्र चलता है, उसी समय कोई रिपोर्ट सामने आ जाती है.’ उन्होंने कहा कि इस तरह कि रिपोर्ट्स के जरिए से लगातार भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है.’ कब-कब आईं कौन-कौन सी रिपोर्ट्स सुधांशु त्रिवेदी ने इस बात भी जोर दिया है कि बीते तीन सालों से ये एक ट्रेंड बन गया है कि जब भी देश में संसद चल रही होती है तभी विदेश में एक रिपोर्ट आ जाती हैं, जिनमें भारत को लेकर कुछ न कुछ अनर्गल दावे किए होते हैं. उन्होंने कहा, ‘पूर्व में भारत के किसानों को लेकर रिपोर्ट सामने आई, तब भी संसद सत्र चल रहा था और इसी तरह पेगासस और हिंडनबर्ग रिपोर्ट भी लगभग उसी समय सामने आईं, जब भारत की संसद का सत्र या तो चल रहा था या शुरू होने वाला था.’ उन्होंने सवाल खड़ा किया है क्या ये महज संयोग है. विपक्ष पर देते नहीं बना जवाब! OCCRP मसले पर विपक्ष पर कोई ठोस जवाब नहीं था, उसके सांसद सदन में जोरदार हंगामा मचाने लगे. इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने OCCRP मसले को बहुत ही गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर इस पर चर्चा करनी चाहिए. साथ ही उन्होेंने कहा कि हम किसी भी डिपस्टेट को अपने लोकतंत्र को डिफंक्शन करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं. सदन को एकजुट होकर इस तरह की ताकतों से मुकाबला करना चाहिए, क्योंकि वे देश की अखंडता के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकती हैं.

संभल में हिंसा मामले में शामिल सभी दोषियों को सजा मिलनी चाहिए: सांसद रवि किशन

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा पर अभिनेता-सांसद रवि किशन ने कहा है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा पर दोषियों के खिलाफ प्रशासन ने एक कड़ा फैसला लिया है। अब सभी आरोपियों के सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाए जाएंगे। इस मुद्दे पर आईएएनएस से बात करते हुए सांसद रवि किशन ने कहा, ”दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। जो भी समाज में दंगा कर रहा है, जो कोई भी ऐसी स्थिति पैदा कर रहा है कि किसी की मौत हो जाए, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। ऐसे लोग पूरे देश में कहीं भी हो बख्शे नहीं जाने चाहिए।” इससे पहले अपने बोलने के खास अंदाज के लिए मशहूर अभिनेता-सांसद रवि किशन ने बुधवार को अपने भोजपुरी अंदाज से लोकसभा में सभी को चौंका दिया। रेलवे संशोधन विधेयक, 2024 पर चर्चा के दौरान जब पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने गोरखपुर सांसद रवि किशन से अपनी बात जल्द खत्म करने का आग्रह किया तो रवि किशन ने कहा, “भैया, एतना उपलब्धि है, थोड़ा टाइम लगी।” अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनते हुए रवि किशन ने कहा, “हम लोगों ने इतना काम किया है कि इतने कम समय में हम इसे कैसे गिनवाएंगे। इसके लिए हमें दो से तीन घंटे का समय दीजिए।” सांसद की यह बात सुनकर स्पीकर जगदंबिका पाल ने भी हंसते हुए कहा, “गागर में सागर भरि दिहल।”

मैं आज बहुत कॉन्फिडेंस के साथ कह सकता हूं कि 2025 में केजरीवाल का एक फाइनल चैप्टर लिखा जाएगा: राजीव चंद्रशेखर

नई दिल्ली पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर एक प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं और उनको वेटिकन सिटी जाना है। जहां केरल से फादर जॉर्ज कूवाकड को कार्डिनल बनाया जा रहा है, इसको लेकर कार्यक्रम में उन्हें हिस्सा लेना है। इसको लेकर राजीव चंद्रशेखर ने खुलकर अपनी राय रखी और साथ ही उन्होंने वक्फ संशोधन बिल, पंजाब में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के साथ ही अरविंद केजरीवाल की राजनीति पर भी बात की। राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रतिनिधिमंडल को वेटिकन सिटी भेज रहे हैं। यह हम सभी देशवासियों के लिए एक गर्व का मौका है। 7 तारीख को वहां पर, केरल से फादर जॉर्ज कूवाकड हैं, जो फादर क्रिश्चियन कम्युनिटी से हैं, उनको कार्डिनल बनाया जा रहा है, होलनेस पॉप के हाथ ऑइंटमेंट होगा। यह सब हम देशवासियों के लिए और ईसाई समुदाय के लिए गर्व का मौका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक डेलिगेशन भेज रहे हैं ताकि हम सब वहां पर जाकर उनको शुभकामनाएं दें और होलनेस पॉप से आशीर्वाद लेकर आएं। उस डेलिगेशन का नेतृत्व जॉर्ज कुरियन कर रहे हैं, जो हमारे मंत्री अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री हैं और इस डेलिगेशन के साथ जाने का मुझे भी मौका दिया गया है। मैं बहुत खुश हूं। मेरे साथ अनूप एंथोनी, अनिल एंटोनी, सतनाम संधू कांग्रेस के नेता, कोडिकुन्नील सुरेश भी इस डेलिगेशन में शामिल होंगे। हम सब वहां पर जाकर फादर जॉर्ज कूवाकड को शुभकामनाएं देंगे और उनके ऑडीमेंट सेरेमनी में भाग लेंगे। वक्फ बोर्ड पर जेपीसी की बैठक को लेकर राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि मैं जेपीसी पर कुछ नहीं कहूंगा। वक्फ बोर्ड के बारे में लोगों में जो एक तरह से एक पॉपुलर ओपिनियन बन गया है कि हमारे देश में जब संविधान का कानून चलता है, संविधान के बारे में विश्वास करते हैं। उस देश में वक्फ जैसा एक्ट होना नहीं चाहिए या होता है तो उसमें बहुत अमेंडमेंट होना चाहिए ताकि उसमें बहुत अकाउंटेबिलिटी रहे। वक्फ को लेकर दोहरे मापदंड का जो सिस्टम है, वो हम आगे ना चलाएं। पंजाब में सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले को लेकर राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि 2008 में अरविंद केजरीवाल की राजनीति शुरू हुई थी। मैं आज बहुत कॉन्फिडेंस के साथ कह सकता हूं कि 2025 में उनका एक फाइनल चैप्टर लिखा जाएगा। उन्होंने इतना झूठ बोला और लोगों को भड़काया है। आप पंजाब में देख रहे हैं कि उनकी सरकार ने घुसपैठियों, आतंकियों को इनकरेज किया है। वहां बिना किसी डर के सुखबीर सिंह बादल जैसे बड़े नेता पर जानलेवा हमला वह कर रहे हैं। मैं मानता हूं कि ‘अरविंद केजरीवाल गवर्नेंस’ आज देश की सुरक्षा में, राजकीय सुरक्षा में विफल है। लोग जानते हैं कि उन्होंने जो एक तरह की नई राजनीति का जो दावा किया था, जिसमें वह साफ-सुथरी राजनीति की बात कर रहे थे, उसका पूरी तरह से खुलासा हो गया है। दिल्ली विधानसभा के आगामी चुनाव में लोग अपने वोट के जरिए उनको जवाब देंगे कि ऐसी राजनीति हम चाहते नहीं हैं। ऐसी राजनीति की उम्मीद राहुल गांधी से हम करते हैं। अरविंद केजरीवाल से हमने यह उम्मीद नहीं किया था। अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी में कोई फर्क नहीं है।

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