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मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, मैं भी पीड़ा महसूस कर रहा हूं, और मैं भी धोखेबाज लोगों का काम करने के पक्ष में नहीं हूं

मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी से जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के यादव-मुसलमान वाले बयान पर अब बेगूसराय से सांसद और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने समर्थन करते हुए कहा कि मैं भी पीड़ा महसूस कर रहा हूं। और मैं भी धोखेबाज लोगों का काम करने के पक्ष में नहीं हूं। दरअसल सीतामढ़ी में आभार सभा को संबोधित करते हुए देवेश ठाकुर ने कहा था कि उन्होने यादव और मुसलमान के बहुत सारे काम किए लेकिन इन लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया। अगर ये मेरे पास आएंगे तो उनका स्वागत है, उनको चाय-मिठाई तो दूंगा लेकिन उनके काम नहीं करूंगा। वहीं इस मामले पर गिरिराज सिंह ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार जब योजना देने में किसी से भेदभाव नहीं करती। वहीं, लोग भी योजनाओं का लाभ लेते समय भेदभाव नहीं करते हैं तो उन्हें वोट देने में भी अपनी संकीर्ण मानसिकता को छोड़ना चाहिए। गिरिराज ने कहा कि देश को तोड़ने की साजिश हो रही है। कट्टरपंथी मिशन मोड में काम कर रहे हैं। उन्हें देश के विकास से कुछ लेना देना नहीं है। ये लोग इस्लामिक स्टेट के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। लोस चुनाव के परिणाम से कई बातें साफ हो गई हैं। हिंदू समाज को एकजुट होकर अपने अस्तत्वि को बचाने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने सीतामढ़ी के जदयू सांसद देवेशचंद्र ठाकुर के बयान को सही बताते हुए कहा कि उनका दर्द जुबान पर आ गया है। कुछ दिन में कई लोगों की पीड़ा सामने आने वाली है। माई समीकरण की चर्चा करते हुए कहा कि यादव तो भटक गए हैं। उनको कुछ दिन बाद पता चलेगा कि किस गठजोड़ का साथ दे रहे हैं। गिरिराज ने कहा, जहां तक मुस्लिम समाज का सवाल है तो मैं भी इनका काम करने के पक्ष में नहीं हूं। एनडीए सरकार किसी से भेदभाव नहीं करती है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून के सवाल पर कहा कि यह देश की मांग है। इसके लिए वह लगातार आवाज उठाते रहे हैं। राजद, कांग्रेस व कम्युनस्टि पार्टी की नीयत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वे जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। संविधान बदलने व आरक्षण जैसे मामले चुनाव में उठाकर वोट ठगने का काम किया है। मंत्री ने कहा कि जल्द ही वे किशनगंज से सनातन हिंदू जागरण यात्रा निकालने जा रहे हैं। मौके पर प्रवीण चंद्र किशोर, शांति स्वरूप शर्मा, मनीष कुमार, डॉ. अशोक शर्मा, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार, शंभू कुमार, अधिवक्ता राजीव कुमार आदि थे। ये बातें गिरिराज सिंह ने भाजपा नेता देवांशु किशोर के घर मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं।

देशभर में NEET की परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर माहौल गर्म, बीजेपी के नेता ने प्रियंका गांधी पर तीखा हमला बोला

नई दिल्ली देशभर में NEET की परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर माहौल गर्म है। इस बीच बीजेपी के नेता शहजाद जय हिंद ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दरअसल प्रियंका ने कुछ दिनों पहले जिस NEET-UG अभ्यर्थी के वीडियो को समर्थन करते हुए पोस्ट किया था, वह दावा फर्जी साबित हो गया है। फटे हुए OMR आंसर की के दावे को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी पाया है। कोर्ट ने कहा है कि अभ्यर्थी ने नकली दस्तावेज दिखाए थे। इससे NTA को अभ्यर्थी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की इजाजत भी मिल गई है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “क्या प्रियंका वाड्रा पर इस तरह के झूठ को साझा करने और उसे बढ़ावा देने के लिए मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए? क्या मीडिया उनसे कोई बुनियादी सवाल भी पूछेगा? क्या मीडिया उनसे पूछेगा कि वह इस तरह के झूठ का इस्तेमाल कर अराजकता क्यों फैला रही थीं?” गौरतलब है कि लखनऊ की NEET अभ्यर्थी आयुषी पटेल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि NTA ने उन्हें ईमेल के माध्यम से सूचित किया कि फटी हुई ओएमआर शीट के कारण उनका परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस दावे को सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए शेयर किया। इस वीडियो से NEET-UG 2024 में गड़बड़ी की खबरों के बीच हलचल मच गई। वायरल सोशल मीडिया पोस्ट को प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी शेयर किया था। प्रियंका ने लिखा था, “NEET जैसी परीक्षाओं में लाखों बच्चे मेहनत से तैयारी करते हैं और अपनी जिंदगी के सबसे कीमती पल इस तैयारी में लगाते हैं। पूरा परिवार इस प्रयास में अपनी श्रद्धा और शक्ति डालता है। लेकिन साल दर साल इन परीक्षाओं में पेपर लीक, रिजल्ट से जुड़ी गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। हम अपने युवा साथियों के सपनों को यूँ बिखरते हुए नहीं देख सकते। उनकी मेहनत के साथ सिस्टम द्वारा किया जा रहा ये अन्याय रुकना चाहिए। सरकार को गंभीरता से इन गड़बड़ियों को सुधारने के लिए कदम उठाने होंगे।” आयुषी पटेल ने अपनी ओएमआर शीट का मैन्युअल मूल्यांकन करने की मांग की थी और NTA की कार्यप्रणाली की जांच करने का आग्रह किया था। साथ ही एडमिशन काउंसलिंग को रोकने की भी मांग की थी। कोर्ट में राजेश सिंह की अगुवाई वाली बेंच ने 12 जून को NTA को अभ्यर्थी के मूल रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया। जवाब में एनटीए के उप निदेशक संदीप शर्मा ने मूल ओएमआर शीट और एक हलफनामा प्रस्तुत किया। दस्तावेजों की जांच करने पर, अदालत ने फैसला किया कि याचिकाकर्ता ने अपने दावों को झूठे सबूतों पर तैयार किया था। NTA ने NEET याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की दावा फर्जी साबित होने के बाद एनटीए ने याचिकाकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। अदालत ने स्थिति पर खेद व्यक्त किया और कानूनी रूप से आगे बढ़ने के लिए एनटीए के विशेषाधिकार की पुष्टि की थी। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने के लिए अदालत से अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने तुरंत मंजूरी दे दी। जवाब में, NTA ने अदालत को सूचित किया कि उन्होंने याचिकाकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला पहले ही कर लिया है। 5 मई को 4,750 केंद्रों पर करीब 24 लाख छात्रों के लिए आयोजित की गई नीट परीक्षा कथित पेपर लीक और विवादास्पद ग्रेस मार्क्स के कारण जांच के घेरे में है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह 1,500 से अधिक छात्रों को दिए गए ग्रेस मार्क्स को रद्द कर देगा और दोबारा परीक्षा करवाने के लिए तैयार है। हालाँकि, देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच की मांग की जा रही है और पूरी तरह से दोबारा परीक्षा की मांग भी की जा रही है।  

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने कांग्रेस में वापसी की इच्छा प्रकट की

The festival of Janmashtami will be celebrated with enthusiasm, government issued guidelines

नई दिल्ली देश पूर्व राष्ट्रपति और दिग्गज कांग्रेसी रहे दिवंगत प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने कांग्रेस में वापसी की अपनी इच्छा प्रकट की है। इसके लिए उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की कार्य संस्कृति पर भी सवाल उठाया है। आपको बता दें कि  उन्होंने 2021 में कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए टीएमसी जॉइन कर ली थी। उन्होंने टीएमसी छोड़ने और कांग्रेस में वापसी की इच्छा प्रकट करते हुए कहा, “टीएमसी की कार्य संस्कृति कांग्रेस से बिल्कुल मेल नहीं खाती है। मैंने सोचा कि अब बहुत हो गया। दिल्ली आने के बाद मैंने कांग्रेस आलाकमान से समय मांगा है।” उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस आलाकमान मुझे तुरंत शामिल होने के लिए कहते हैं तो मैं शामिल हो जाऊंगा। मैं पूरी तरह से स्वतंत्र हूं और कांग्रेस पार्टी में अपना योगदान देने के लिए तैयार हूं।” अभिजीत मुखर्जी ने कहा,”2019 में मैं जिन कारणों से चुनाव हार गया, उनके बारे में जानता हूं। मैं खुलकर इसके बारे में नहीं कह पाऊंगा। आलाकमान भी इसके बारे में जानते हैं। 2.5 साल तक मैंने कांग्रेस द्वारा मुझे जो भी काम दिया गया उसे पूरा किया। लेकिन पार्टी ने मुझे पर्याप्त काम नहीं दिया। चाहे इसके जो भी कारण रहे हों।” आपको बता दें कि उन्होंने 2019 में कांग्रेस के सिंबल पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। प्रणब दा के बेटे ने आगे कहा, ”मुझे धीरे-धीरे एक खास व्यक्ति और एक खास समूह द्वारा हाशिए पर डाल दिया गया। इसी दौरान ममता दीदी ने मुझे बुलाया। मैंने उनसे मिलने का समय मांगा था। उन्होंने मुझे टीएमसी शामिल होने का प्रस्ताव दिया। पार्टी में शामिल होने के बाद मुझे ऐसा कोई काम नहीं मिला। उनकी कार्य संस्कृति ने मुझे निराश नहीं किया, लेकिन कांग्रेस के साथ बिल्कुल भी मेल नहीं खाती है।” टीएमसी की कार्य संस्कृति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने सोचा कि अब बहुत हो गया। इसलिए दिल्ली वापस आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुझसे अप्रत्यक्ष रूप से पूछा कि मैं चुप क्यों हूं। उन्होंने मुझे सक्रिय होने के लिए कहा। मैंने वरिष्ठ हाईकमान से समय मांगा, शायद मैं एक या दो दिन में उनसे मिल सकूं। अगर वे मुझे तुरंत शामिल होने के लिए कहते हैं, तो मैं कांग्रेस में शामिल हो जाऊंगा।”  

किरण चौधरी बेटी श्रुति के साथ आज बीजेपी में शामिल होंगी

नई दिल्ली हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. एमएलए किरण चौधरी और उनकी पूर्व सांसद बेटी श्रुति चौधरी ने पार्टी छोड़ दी है. दोनों आज यानी बुधवार को दिल्ली में बीजेपी जॉइन करेंगी.  किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति बीजेपी में शामिल, कल छोड़ी थी कांग्रेसइसे लेकर राज्य की सियासत भी गरमा गई है. हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा से लेकर पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह का बयान आया है.  किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति बीजेपी में शामिल, कल छोड़ी थी कांग्रेस हरियाणा में इसी साल अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसे लेकर राजनीतिक दल तैयारियों में लगे हैं. राज्य में अभी बीजेपी की सरकार है और नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री हैं. चुनाव से ठीक पहले किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति चौधरी के कांग्रेस छोड़ने से पार्टी को बड़ा नुकसान माना जा रहा है. मां-बेटी लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण से पार्टी हाईकमान से नाराज चल रहीं थीं. इस संबंध में कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा, टिकट वितरण सही ना होना किरण चौधरी की सोच है. सही टिकट वितरण हुआ था, इसलिए कांग्रेस की 5 सीटें आईं. पूरे देश में इंडिया ब्लॉक के वोट शेयर को देखा जाए तो हरियाणा के अंदर कांग्रेस का वोट प्रतिशत बहुत ज्यादा है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी हाफ हो गई है. विधानसभा चुनाव में पूरी साफ हो जाएगी. महेंद्रगढ़ से सशक्त उम्मीदवार थीं श्रुति चौधरी पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने कहा, श्रुति चौधरी पहले सांसद भी रही हैं और महेंद्रगढ़ भिवानी सीट से सशक्त उम्मीदवार थीं, इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन पार्टी का अपना फैसला होता है. पार्टी ने जो फैसला लिया होगा, वो सारे हालात देखकर लिया होगा. अब चुनाव के नतीजे आ चुके हैं तो उन बातों को छोड़ कर विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी चाहिए. बृजेंद्र का कहना था कि टिकट वितरण को लेकर एक लंबी प्रोसेस होती है. पहले स्क्रीनिंग कमेटी बैठती है. ऊपर नाम भेजे जाते हैं. फिर CEC के पास नाम आते हैं. उसके बाद टिकटों का निर्धारण होता है. टिकट तो एक को मिलता है. दावेदार कई लोग होते हैं.  बृजेंद्र बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे. हरियाणा कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष थीं श्रुति बता दें कि किरण चौधरी और श्रुति चौधरी दोनों ने मंगलवार को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना अलग-अलग इस्तीफा भेजा है. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा पर परोक्ष रूप से हमला किया और आरोप लगाया कि पार्टी की स्टेट यूनिट को एक निजी जागीर के रूप में चलाया जा रहा है. श्रुति चौधरी इस समय हरियाणा कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष भी थीं. जबकि किरण चौधरी भिवानी जिले के तोशाम से मौजूदा विधायक हैं. उन्होंने बताया कि वो और पूर्व सांसद श्रुति चौधरी दोनों बुधवार को दिल्ली में भाजपा में शामिल होंगी. चौधरी बंसी लाल की बहू हैं किरण किरण चौधरी, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल की बहू हैं और उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा की कट्टर प्रतिद्वंद्वी माना जाता है. हालांकि, हुड्डा के नेतृत्व वाले कांग्रेस शासन के दौरान किरण मंत्री भी रह चुकी हैं. हरियाणा की राजनीति में मां-बेटी का अच्छा खासा दखल है. राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. माना जा रहा है कि मां-बेटी के बीजेपी में आने से पार्टी को इसका लाभ मिल सकता है. हरियाणा में कांग्रेस को निजी जागीर बना दिया है खड़गे को लिखे अपने इस्तीफे में 69 वर्षीय किरण चौधरी ने लिखा है कि हरियाणा कांग्रेस को व्यक्तिगत जागीर के रूप में चलाया जा रहा है, जिसमें मेरी जैसी ईमानदार आवाजों के लिए कोई जगह नहीं है, जिन्हें बहुत सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से दबाया, अपमानित किया गया और उनके खिलाफ साजिश रची गई, जिससे काफी बाधा उत्पन्न हुई. अब आगे बढ़ने का समय आ गया है… श्रुति चौधरी ने स्पष्ट रूप से हुड्डा के संदर्भ में आरोप लगाया कि स्टेट यूनिट एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसने अपने स्वार्थ के लिए पार्टी के हित से समझौता किया है, इसलिए अब मेरे लिए आगे बढ़ने का समय आ गया है. श्रुति ने कहा कि वो उन लोगों की एक लंबी कतार से आती हैं जिन्हें निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करने का सौभाग्य मिला है और मैंने निःस्वार्थ भाव से सेवा की.  श्रुति को टिकट नहीं दिए जाने से नाराज थीं किरण समझा जाता है कि किरण चौधरी हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से श्रुति चौधरी को टिकट नहीं दिए जाने के साथ-साथ राज्य में पार्टी द्वारा टिकट वितरण से नाराज चल रहीं थीं. 12 जून को कांग्रेस महासचिव और सिरसा से सांसद कुमारी शैलजा ने भी हुड्डा पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया था और कहा था कि अगर आलाकमान को सही जानकारी दी गई होती और स्वयं की राजनीति नहीं की गई होती तो हरियाणा में पार्टी सभी सीटें जीत सकती थी.  आठ सीटों पर चुनावी मैदान में उतरे थे हुड्डा के करीबी कांग्रेस ने हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में से 9 पर चुनाव लड़ा था. जबकि कुरुक्षेत्र सीट पर इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दल आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन दिया. हालांकि AAP चुनाव हार गई और कांग्रेस ने बीजेपी से पांच सीटें छीन लीं. हरियाणा की राजनीति में हुड्डा की एक और प्रतिद्वंद्वी माने जाने वालीं कुमारी शैलजा ने सिरसा सीट पर जीत हासिल की है. जबकि राज्य की आठ अन्य सीटों पर जो उम्मीदवार उतारे गए थे, वे हुड्डा के करीबी माने जाते हैं. श्रुति को राज्यसभा भेज सकती है बीजेपी भिवानी-महेंद्रगढ़ से श्रुति पहले सांसद रह चुकी हैं. कांग्रेस ने मौजूदा विधायक और हुड्डा के वफादार राव दान सिंह को टिकट दिया था, जो बीजेपी के मौजूदा सांसद धर्मबीर सिंह से हार गए. ऐसी अटकलें हैं कि श्रुति राज्यसभा सीट के लिए बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों में से एक हो सकती हैं. हाल ही में रोहतक लोकसभा सीट से कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा की जीत के बाद प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट खाली होने जा रही है. हालांकि, किरण ने कहा कि वो और उनकी बेटी दोनों बिना शर्त … Read more

सीएम सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर पहली बार लड़ेंगी चुनाव, डबल MA हैं कमलेश ठाकुर

शिमला हिमाचल प्रदेश में 10 जुलाई को तीन विधानसभा सीटों (नालागढ़, देहरा और सुजानपुर) पर उपचुनाव होने हैं। जहां भाजपा ने तीन निर्दलीय उम्मीदवारों को उन्हीं की सीट से प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने भी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। चुनाव में खास बात यह है कि इस बार देहरा विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर (Kamlesh Thakur) भी चुनाव लड़ेंगी। आज उनके नाम का एलान हो गया है। डबल MA हैं कमलेश ठाकुर कमलेश ठाकुर का जन्म सन् 1970 में हुआ था। उन्होंने इंग्लिश और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की हुई है। उनके पिता जी का नाम विचित्र सिंह व माता का नाम रोशनी देवी है। साल 1998 में उनकी शादी सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ हुई थी। जो मौजूद समय में हिमाचल के मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस ने कमलेश पर क्यों खेला दांव?     देखें तो कमलेश का मायका जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र नलसूहा में है। लेकिन खास बात है कि यह गांव प्रशासनिक दृष्टि से देहरा उपमंडल के अंतर्गत आता है। ये कारण हो सकता है कि कांग्रेस ने कमलेश पर दांव खेला।     वहीं सर्वेक्षणों में कमलेश का नाम भी सबसे आगे रहा है। ये वजह रही कि कांग्रेस हाईकमान ने इस बार कमलेश पर विश्वास जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा।     पिछले विधानसभा उपचुनाव में जनता ने दल-बदल की राजनीति को खारिज किया। ऐसे में संभावना है कि कांग्रेस को इसका फायदा मिले।     देहरा सीट कांग्रेस के लिए टेढी खीर है, ऐसे में कमलेश ठाकुर का इस सीट से खड़े होना सीएम सुक्खू के प्रभाव को जाहिर करेगा।     लाहौल स्पीति से अनुराधा राणा ने जीत हासिल की थी। यह प्रयोग कांग्रेस देहरा में भी करना चाहती है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली यह एनडीए सरकार बहुत ही नाजुक : राहुल गांधी

The team of Sushma Mahila Jan Kalyan and Bal Vikas Shikshan Samiti ASJK reached

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली यह एनडीए सरकार बहुत ही नाजुक है। उन्होंने कहा है कि अपने तीसरे कार्यकाल में एनडीए की सरकार अस्तित्व के लिए संघर्ष कर सकती है। लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद अपने पहले साक्षात्कार में, राहुल गांधी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि 4 जून के फैसले के बाद भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आया है। राहुल गांधी ने कहा, “संख्या इतनी कम है कि उनकी स्थिति बहुत नाजुक हैं, और थोड़ी सी भी गड़बड़ी सरकार को गिरा सकती है… सहयोगियों को दूसरी तरफ मुड़ना पड़ सकता है।” रायबरेली और वायनाड दोनों लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने वाले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष गांधी ने कहा, “यह विचार कि आप नफरत फैला सकते हैं, आप गुस्सा फैला सकते हैं और आप इसका लाभ उठा सकते हैं – भारतीय लोगों ने इस चुनाव में इसे खारिज कर दिया है।” राहुल गांधी ने कहा, “यही कारण है कि गठबंधन संघर्ष करेगा,” उन्होंने कहा कि “क्योंकि 2014 और 2019 में नरेंद्र मोदी के लिए जिन चीज़ों ने काम किया वह काम नहीं कर रहा है।”  लोकसभा चुनाव के नतीजों में विपक्ष के इंडिया ब्लॉक ने एग्जिट पोल की भविष्यवाणी से काफी बेहतर प्रदर्शन किया और 543 में से 234 सीटें हासिल कीं। जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 293 सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों ने राहुल गांधी को भारतीय राजनीति में फिर से सबसे आगे ला दिया है। अनुमान है कि उन्हें लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है। नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली लेकिन पिछले दो लोकसभा चुनाव की तरह इस बार बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकी। सरकार बनाने के लिए उसे अपने एनडीए के साथियों पर निर्भर होना पड़ा है। वायनाड सीट खाली करेंगे राहुल, प्रियंका लड़ेंगी उपचुनाव सोमवार को राहुल गांधी ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश में रायबरेली लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार बरकरार रखेंगे और केरल में वायनाड सीट खाली करेंगे, जहां से उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा चुनावी मैदान में उतरेंगी। इस मुद्दे पर अटकलों को खत्म करते हुए कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके आवास पर चर्चा के बाद दोनों सीटों पर निर्णय की घोषणा की। बैठक में खड़गे और राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थे। अगर प्रियंका गांधी वाड्रा यह चुनाव जीतती हैं तो वह पहली बार सांसद के तौर पर संसद में प्रवेश करेंगी। यह भी पहली बार होगा कि गांधी परिवार के तीन सदस्य – सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका – एक साथ संसद में होंगे।  

ठीक एक साल पहले बालासोर ओडिशा में और एक साल बाद पश्चिम बंगाल में ट्रेन हादसा होता है और सरकार सोती रही: सुप्रिया श्रीनेत

नई दिल्ली मुझे लगता है कि देश में शायद ही कोई ऐसा हो, जिसका रेल से जुड़ाव ना हो। हम सब लोग मध्‍यम वर्ग से आते हैं, निम्‍न मध्‍यम वर्ग से आते हैं और रेल से जुड़ी हुई बड़ी मधुर स्‍मृतियां हैं और रेल से ही कहीं ना कहीं आवागमन सबने, किसी ना किसी टाईम पर जरूर किया है। क्‍योंकि रेल सिर्फ पटरियों पर दौड़ने वाली ट्रेनें नहीं हैं, दनदनाती हुई ट्रेनें नहीं हैं। रेल इस देश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है, रेल हिन्‍दुस्‍तान की जीवन रेखा है और सबसे बड़ी बात है कि आवागमन का सबसे सस्‍ता, इकोनॉमिकल साधन है, एटलीस्‍ट हुआ करता था और उसी के कारण मध्‍यम वर्ग, निम्‍न मध्‍यम वर्ग, गरीब व्‍यक्ति रेल की यात्रा को प्रेफर करता है। आज तक जब आप रेल में बैठते थे टिकट लेकर, तो कहीं ना कहीं यह विश्‍वास रहता था कि अपने गंतव्‍य तक पहुंच जाएंगे। बड़े सारे स्‍टेशन आते थे, उसमें पूड़ी सब्‍जी खाई जाती थी, कहीं पर चाय पी जाती थी, कहीं पकौड़ी-समोसे खाए जाते थे और एक यह विश्‍वास था कि गंतव्‍य तक पहुंच जाएंगे, लेकिन आज जब रेल यात्री बैठता है, तो उसके मन में शंका रहती है कि गंतव्‍य तक वो पहुंचेगा या उसकी अर्थी और लाश पहुंचेगी, यह कीर्तिमान नरेंद्र मोदी ने और उनकी सरकार ने स्‍थापित किया है। मैं यहां पर आपको दो तस्‍वीरें दिखाना चाहती हूं। यह तस्‍वीर ठीक एक साल पहले इसी महीने जून की है, 02 जून, 2023 को ओडिशा के बालासोर में भीषण ट्रेन हादसा हुआ था, करीब-करीब 300 लोगों की मौत हुई थी और 900 से ज्‍यादा लोग घायल हुए थे। पश्चिम बंगाल में कल फिर एक ट्रेन हादसा हुआ। पटरी पर कंचनजंगा एक्‍सप्रेस थी, उसको पीछे से मालगाड़ी ने आकर मारा, 15 लोगों की मौत और अभी तक 40 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। ठीक एक साल पहले बालासोर ओडिशा में और एक साल बाद पश्चिम बंगाल में ट्रेन हादसा होता है। क्‍या बदला है एक साल में? आज पूछना पड़ेगा ना कि एक साल में क्‍या बदला है। लगातार ट्रेन हादसे हो रहे हैं और मैं एक सरकारी आंकड़ा आपके साथ साझा कर देती हूं। 1,117 ट्रेन दुर्घटनाएं 2014 से 2023 तक और जान-बूझकर 2023 तक का ही आंकड़ा दे रही हूं। 31 मार्च 2023, क्‍योंकि यह हमारे आंकड़े नहीं हैं, आपके आंकड़े नहीं हैं, यह भारत सरकार के आंकड़े हैं। 1,117 ऐसी रेल दुर्घटनाएं हुईं हैं, जहां पर जान और माल का नुकसान हुआ है, यह सरकारी आंकड़ा है। असल आंकड़ा इससे बहुत ज्‍यादा है। मतलब हर महीने 11 ट्रेन हादसे हुए हैं, हर तीन दिन पर एक ट्रेन हादसा हो रहा है और उसमें जान और माल की क्षति हो रही है। तो क्‍या बदला एक साल में? इतना बड़ा बालासोर का ट्रेन हादसा हुआ, हम सबने लाशों का अंबार देखा, परिवारों को उजड़ते हुए देखा, छोटे-छोटे बच्‍चों को बिलखते हुए देखा। क्‍या बदला एक साल में? बालासोर से पश्चिम बंगाल, क्‍या बदला? क्‍या बदला 2014 से 2024 में? मैं एक सूची पढ़ देती हूं, आपको दिखा दिया है, लेकिन एक छोटी सी सूची है। 2014 में गोरखधाम एक्‍सप्रेस डीरेल हो जाती है, 25 लोगों की मौत हो जाती है। इंदौर-पटना एक्‍सप्रेस का हादसा होता है, 150 लोगों की मौत होती है। कैफियत एक्‍सप्रेस में 70 लोग घायल हो जाते हैं। पुरी-उत्‍कल एक्‍सप्रेस में 30 लोगों की मौत हो जाती है। बीकानेर-गुवाहाटी एक्‍सप्रेस में 36 से ज्‍यादा लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं, 10 लोगों की मौत होती है। बालासोर, मैंने आपको बताया लगभग 300 लोगों की मौत और 900 से ज्‍यादा लोग घायल और कल 15 लोगों की मौत और 40 लोग घायल और मैंने यह सिर्फ कुछ आंकड़े बताए हैं, 1,117 ऐसे हादसे हुए हैं। तो जिम्‍मेदारी किसकी है? जवाबदेही किसकी है? इस देश में हमने वो भी मंत्री देखे हैं, अगर उनके डिपार्टमेंट में, अगर रेल मंत्री रहते हुए ऐसे हादसे हुए हैं, तो उन्‍होंने अपने पद से नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए इस्‍तीफा दिया है। फिर वो लाल बहादुर शास्‍त्री हों, नीतीश कुमार रहे हों, माधवराव सिंधिया रहे हों, ममता बनर्जी रही हों, मधु दंडवते रहे हों, जॉर्ज फर्नांडिस रहे हों, सब लोगों ने नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए इस्‍तीफा दिया है, लेकिन आज हिंदुस्‍तान का रेल मंत्री, रील मंत्री बना हुआ है। नैतिक जिम्‍मेदारी छोड़ दीजिए, आज भी हादसे के वक्‍त रील कैसे अच्‍छी बनेगी, उस पर चर्चा हो रही है। बालासोर के वक्‍त अश्‍विनी वैष्‍णव वहां पर आए, डाईव कर रहे थे, ट्रेन के नीचे घुसकर झांक रहे थे, दो-चार टेसू बहा रहे थे। क्या किया आपने रेल को सुरक्षित करने के लिए? आप कल पहुंचते वहां पर, आप रेल मंत्री हैं, आप गाड़ी से भी जा सकते थे, लेकिन वीडियो ज्यादा बेहतर तब आएगा, जब आप जूम-जूम-जूम करके मोटरसाइकिल से जाएंगे। अच्छा वीडियो आ गया सामने, रील बना ली आपने, अब आप बताइए आपने एक साल से इस देश में रेल को सुरक्षित करने के लिए क्या काम किया? उस रेल को सुरक्षित करने के लिए जिसमें इस देश का युवा, जिसमें किसान, जिसमें मजदूर, जिसमें मध्यम वर्ग अपने परिवारों के साथ चलता है, उसको सुरक्षित करने का क्या काम किया? लोगों के मन की आशंका है कि भैया हम पहुंचेंगे या हमारी लाश पहुंचेगी, उसको दूर करने का क्या काम किया?

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले विवादों में आ गए, जपा ने बताया नवाबी मानसिकता, पटोले ने दी सफाई

महाराष्ट्र महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले विवादों में आ गए हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर उनका एक विडियो वायरल हो रहा है जिसमें पटोले पार्टी कार्यकर्तोओं से पैर धुलवाते नजर आ रहे हैं। भाजपा ने इस विडियो को लेकर कांग्रेस के ऊपर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर यह नवाबी मानसिकता नहीं तो और क्या है। यह घटना सोमवार को हुई जब पटोले अकोला जिले के वाडेगांव में एक समारोह में गए हुए थे। यहां पर उन्होंने संत गजानन महाराज के दर्शन किए, दर्शन को जाते समय पटोले को कीचड़ से चलना पड़ा। दर्शन करके वापस आते समय एक कार्यकर्ता  कार में बैठे पटोले के पैर धोते हुए नजर आया। जल्दी इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। भाजपा की मुंबई ईकाई के एक्स हैंडल से यह विडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया कि यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज के समय में भी कांग्रेस के नेता लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं को बेइज्जत करते हैं। यह शर्म की बात है कि नाना पटोले ने अपने कार्यकर्ता से अपने पैर धुलवाए, क्या यही कांग्रेस की संस्कृति है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस घटना को कांग्रेस की ‘नवाबी शहजादा’ वाली मानसिकता बताया और कहा कि कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को गुलामों की तरह प्रयोग करती है। सोचिए कि आज जब यह सत्ता में नहीं है, तब जनता के साथ इस तरीके से पेश आते हैं अगर यह सत्ता में आ गए तो क्या-क्या करेंगे। शहजाद ने कहा कि इस घटना पर कांग्रेस पार्टी और नाना पटोले को माफी मांगनी चाहिए। इस घटना पर सफाई देते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मैं कल की घटना को लेकर कुछ भी छिपा नहीं रहा हूं, वह (कार्यकर्ता) केवल मेरे पैरों पर पानी डाल रहा था। सरकार ने एक योजना चलाई है, हर घर में नल, हर घर में जल, इस कारण वहां कोई भी नल बाहर नहीं था, नहीं तो मैं उसी नल के पानी से अपने पैर धोता।  

भाकपा के प्रदेश सचिव ने कहा- प्रियंका गांधी को वॉकओवर नहीं देगी कम्युनिस्ट पार्टी उतारेगी उमीदवार

TI's luxurious hotel demolished by bulldozer, major action taken by forest department

नई दिल्ली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने मंगलवार को कहा कि वह वायनाड लोकसभा उपचुनाव में प्रियंका गांधी वाद्रा के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारेगी। भाकपा के प्रदेश सचिव बिनॉय विश्वम ने संवाददाताओं से कहा कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) में शामिल भाकपा के पास वायनाड लोकसभा सीट है और उसका उम्मीदवार उपचुनाव में चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा, “इसमें संदेह क्या है? भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और वाम लोकतान्त्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अनुकूल हो। हम निश्चित रुप से वहां अपना उम्मीदवार उतारेंगे।” प्रियंका गांधी वाद्रा की उम्मीदवारी के बारे में पूछे जाने पर बिनॉय विश्वम ने कहा कि कांग्रेस को किसी भी क्षेत्र में अपना उम्मीदवार चुनने की पूरी स्वतंत्रता है। वाम नेता ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी की योजना वायनाड सीट खाली करने की थी, तो उन्हें राहुल गांधी जैसे एक प्रमुख नेता को दक्षिण में लाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता एनी राजा ने हाल में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में वायनाड सीट से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि राहुल गांधी ने यह सीट 364422 मतों से जीती थी। उन्हें कुल 647445 वोट मिले थे। वहीं दूसरे नंबर पर रहीं एनी राजा को मात्र 283023 वोट मिले थे और उन्हें 364422 मतों से हार का सामना करना पड़ा था। वायनाड से तीसरे नंबर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन रहे थे जिन्हें 141045 वोट मिले। नयी दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व की एक बैठक के बाद कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को कहा कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट बरकरार रखेंगे और वायनाड सीट खाली करेंगे। उन्होंने कहा कि वायनाथ से राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाद्रा चुनाव लड़ेंगी। राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में वायनाड और रायबरेली दोनों सीट पर जीत हासिल की थी। उन्हें चार जून को आए लोकसभा चुनाव के नतीजों के 14 दिनों के अंदर एक सीट खाली करनी थी।  

बंगाल में हिंसा का जायजा लेने पहुंचे भाजपा नेताओं को कार्यकर्ताओं ने ही घेरा, कहा- किसी ने परवाह नहीं की…

Only 4 days left for Independence Day and the districts of the state did not get minister in-charge? Why so

कोलकाता पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का जायजा लेने पहुंचे भाजपा के केंद्रीय नेताओं को अपने ही कार्यकर्ताओं का विरोध झेलना पड़ा। भाजपा की 4 सदस्यीय केंद्रीय टीम जब दक्षिण 24 परगना जिले के अम्ताला पहुंची तो वहां पार्टी के ही लोगों ने घेर लिया और विरोध करने लगे। इन लोगों का कहना था कि हमें टीएमसी के लोगों ने बुरी तरह पीटा और घर छोड़कर भागना पड़ गया। इतनी हिंसा के बाद भी पार्टी के नेताओं ने हमारी परवाह नहीं की और कोई हाल पूछने भी नहीं आया। पार्टी सूत्रों ने कहा कि इन लोगों का कहना था कि हमें हिंसा के चलते विस्थापित होना पड़ा है। इससे पहले सोमवार को भाजपा नेताओं की टीम कूचबिहार गई थी, जहां हिंसा पीड़ित पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी। भाजपा ने जिन नेताओं को हालात का जायजा लेने के लिए बंगाल भेजा है, उनमें वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद, बिप्लब देब, राज्यसभा सांसद बृजलाल और कविता पाटीदार शामिल हैं। यह टीम उन पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल रही है, जिन्हें हिंसा के चलते बेघर होना पड़ा है। टीएमसी के लोगों पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव के बाद भाजपा के लोगों पर हमला बोल दिया। कूचबिहार, दक्षिण 24 परगना समेत कई जिलों में हिंसा की घटनाएं हुई हैं। त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब देब ने कहा कि चुनाव के बाद हिंसा करना टीएमसी की आदत पड़ गई है। टीएमसी वाले जितना जल्दी अपना रवैया बदल लेंगे, उनके लिए उतना ही अच्छा होगा। वहीं टीएमसी ने भाजपा के कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर कहा कि इससे दिखता है कि उनके बीच आपस में ही जंग है। किस तरह भाजपा के कार्यकर्ताओं में असंतोष है। उन्होंने चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये सब बातें गलत हैं। भाजपा तो अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है।  

भाकपा नेता एनी राजा ने कहा- कांग्रेस तय करे कि उसका ‘सबसे बड़ा दुश्मन’ कौन है

CM Hemant Soren's emotional post with photo on his birthday, '…that is the prisoner's mark'

नई दिल्ली राहुल गांधी द्वारा वायनाड सीट खाली करने के बाद वहां से प्रियंका गांधी वाद्रा को पार्टी उम्मीदवार बनाए जाने पर भाकपा नेता एनी राजा ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस नेताओं को यह तय करने की जरूरत है कि उनकी सबसे बड़ी दुश्मन सांप्रदायिक-फासीवादी ताकतें हैं या वामपंथी पार्टियां। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली एनी राजा ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी पर फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। वायनाड सीट से प्रियंका चुनाव लड़ेंगी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को कहा कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट अपने पास रखेंगे और वायनाड सीट छोड़ देंगे, जहां से उनकी बहन प्रियंका चुनाव लड़ेंगी। इस कदम के बारे में पूछे जाने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “यह कांग्रेस पार्टी का फैसला है। हम उनके फैसले का सम्मान करते हैं। यह अच्छी बात है कि यूडीएफ ने महिला उम्मीदवार की घोषणा की है। संसद में महिलाओं की संख्या कम होती जा रही है। सभी राजनीतिक दलों को इस बारे में चिंता करने की जरूरत है।” एनी राजा ने कहा, “यूडीएफ ने महिला उम्मीदवार घोषित किया है, मैं इसका स्वागत करती हूं। लेकिन यह सवाल मैंने तब भी उठाया था जब राहुल गांधी चुनाव लड़े थे, मैं आज प्रियंका गांधी से पूरे सम्मान के साथ यह सवाल पूछ रही हूं। आपके और आपकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा दुश्मन कौन है? सांप्रदायिक-फासीवादी ताकतें या वामपंथी पार्टियां?” एनी राजा ने कहा कि हालांकि लोकसभा में राजग का संख्या बल कम हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सांप्रदायिक-फासीवादी ताकतें कमजोर हो गई हैं। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा की हर पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा है उन्होंने कहा, “वाम लोकतांत्रिक मोर्चा की हर पार्टी विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) का हिस्सा है, मैं यह कह सकती हूं कि वह (प्रियंका गांधी) भी ‘इंडिया’ गठबंधन की नेता हैं। नेता खुद गठबंधन की एक पार्टी के खिलाफ लड़ रही हैं।” केरल में एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं। वहीं, कांग्रेस और वामपंथी दल विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का हिस्सा हैं। एनी राजा ने कहा, “जहां तक ​​कांग्रेस पार्टी का सवाल है, कांग्रेस पार्टी की नेता प्रियंका का सवाल है, तो आप अपनी पार्टी और इस देश के लोगों के सबसे बड़े दुश्मन के रूप में किस ताकत को देखते हैं… क्या यह फासीवादी ताकतें हैं या वामपंथी पार्टियां हैं?” उन्होंने हालांकि कहा कि इस कदम से ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की एकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और भाकपा सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए प्रतिबद्ध है।

जगन मोहन रेड्डी पर टीडीपी ने लगाए एक के बाद एक हमले बोले और गंभीर आरोप, करवाया रुशिकोंडा हिल्स पर ‘महल’ का निर्माण

हैदराबाद आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख चद्रंबाबू नायडू ने वाईएसआरसीपी के जगन मोहन रेड्डी पर एक के बाद एक हमले बोले और गंभीर आरोप लगाए। अब विशाखापत्तनम की पहाड़ी पर स्थित महलनुमा घर जनता के सामने आ गया है, जिसके बाद टीडीपी पूर्व मुख्यमंत्री जगन पर और हमलावर हो गई है। टीडीपी ने आरोप लगाया है कि रुशिकोंडा हिल पर स्थित यह भव्य संपत्ति जगन मोहन रेड्डी के लिए एक कैम्प कार्यालय के रूप में बनाई गई थी। टीडीपी विधायक गंटा श्रीनिवास राव ने बीते दिनों एनडीए प्रतिनिधिमंडल और मीडियाकर्मियों के साथ समुद्र तट के ऊपर स्थित भव्य ‘महल’ का पहला दौरा किया। इस दौरान वहां मौजूद लोग महलनुमा घर को देखकर हैरान रह गए। इस प्रॉपर्टी को आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा रुशिकोंडा हिल्स पर बनाया गया है और मई 2021 में केंद्र सरकार द्वारा CRZ की मंजूरी भी ली गई थी। टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश ने कहा है कि जगन रेड्डी ने इस प्रॉपर्टी को अपने कैंप कार्यालय की तरह इस्तेमाल किया और राज्य सरकार के खजाने से 500 करोड़ रुपये की लागत से इसको बनाया गया है। रुशिकोंडा महल 9.88 एकड़ में फैला हुआ है और यह समुद्र के सामने इलाके में बना हुआ है। गंटा श्रीनिवास राव का कहना है कि पिछली सरकार ने इसे गुप्त रूप से बनवाया था, जिसमें शानदार सुविधाओं, चमचमाते झूमर, बाथटब और अन्य कामों पर सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किया गया था। राव ने इसकी इराक के तानाशाह रहे सद्दाम हुसैन और जनार्दन रेड्डी द्वारा बनवाए गए महलों से की। उन्होंने तर्क दिया कि महल में समीक्षा और बैठकों के लिए डिजाइन किया गया एक बड़ा सम्मेलन कमरा भी शामिल है, जोकि वास्तव में पर्यटक संपत्तियों की विशेषता नहीं है। टीडीपी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस निर्माण को काफी गोपनीय रखा गया था और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी के समर्थकों को ठेके दिए गए। टीडीपी नेता ने कहा कि रुशिकोंडा में पर्यटन के लिए ग्रीन रिसॉर्ट्स, जिनसे सालाना 8 करोड़ रुपये तक की आय होती थी, को महल के लिए ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अदालतों को गुमराह किया। उन्होंने दावा किया कि शुरू में राज्य सरकार ने इसे स्टार होटल, फिर सीएम कैंप ऑफिस और बाद में पर्यटन प्रोजेक्ट बताया। इस प्रोजेक्ट को 15 महीने की समय सीमा के साथ 91 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक स्टार होटल के रूप में लॉन्च किया गया था। टीडीपी ने आरोप लगाया है कि 95 करोड़ रुपये सिर्फ जमीन को समतल करने पर और 21 करोड़ रुपये आसपास के इलाकों को सुंदर बनाने पर खर्च किए गए। निर्माण दूर से नहीं दिखाई दे, इसके लिए 20 फीट से ऊंची बैरिकेडिंग लगाई गई थी।  

कांग्रेस को बताया गांधी-नेहरू परिवार का ‘टूल’- प्रियंका की वायनाड से उम्मीदवारी पर भाजपा हमलावर

तिरुवनंतपुरम राहुल गांधी ने अपनी जीती हुई दोनों सीटों में से वायनाड को छोड़ दिया है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने प्रेस कांफ्रेंस करके यह जानकारी दी और इसके साथ ही उन्होंने उपचुनाव के लिए वायनाड से प्रियंका गांधी को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया। कांग्रेस के इस फैसले के बाद भाजपा हमलावर हो गई है। भाजपा की केरल ईकाई के अध्यक्ष के. सुरेन्द्रन और वरिष्ठ नेता वी. मुरलीधरन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस ने यह फैसला लेकर वायनाड की जनता के साथ धोखा किया है। बिना किसी संदेह के अब यह साबित हो गया है कि कांग्रेस केवल गांधी-नेहरू परिवार का निजी टूल है, जो केवल एक परिवार के फायदे के लिए काम करता है। अब हो सकता है कि कांग्रेस पलक्कण विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने दामाद राबर्ट वाड्रा को उम्मीदवार बना दे। मीडिया से बात करते हुए मुरलीधरन ने कहा कि राहुल गांधी ने वायनाड की जनता के साथ धोखा किया है, उन्होंने रायबरेली से अपने चुनाव लड़ने के फैसले को तब तक उजागर नहीं किया जब तक वायनाड में चुनाव नहीं हो गया। यह जनता के साथ धोखा है। मैं वायनाड की जनता से अनुरोध करूंगा कि ऐसे धोखेबाजों को अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करके जवाब दें। भाजपा के विरोध के बीच कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत किया है, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. डी. सतीशन ने कहा कि विपक्ष बेमतलब की राजनीति कर रहा है। केवल वायनाड ही नहीं बल्कि पूरे केरल की जनता दिल से उनका सम्मान करती है। जहां तक दो सीटों पर लड़ने की बात है तो पीएम मोदी भी दो सीटों पर लड़ चुके हैं, इसमें कुछ भी नया नहीं है। राहुल गांधी को राजनैतिक कारणों से उत्तर की सीट रायबरेली रखनी पड़ी, तो उन्होंने अपनी बहन को यहां भेजा है। प्रियंका गांधी अपने भाई से भी ज्यादा वोटों से यहां से जीतेंगी।  

ओम बिड़ला का लोकसभा अध्यक्ष बनना लगभग तय फाइनल, सस्पेंस हुआ समाप्त

नई दिल्ली 18 वीं लोकसभा में अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रहे सस्पेंस और कयासों का पटाक्षेप हो गया लगता है।विश्वस्त सूत्रों के अनुसार ओम बिरला का फिर से लोकसभा अध्यक्ष बनना लगभग तय हो गाया है। बताया जा रहा है कि ओम बिरला फिर से लोकसभा अध्यक्ष बनेंगे और एनडीए के सहयोगी दलों टीडीपी और जेडीयू में से किसी एक के को लोकसभा उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। आगामी 24 जून से शुरू होने वाले नई लोकसभा के पहले सत्र में 26 जून को नए लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव किया जाना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा के सोमवार रात को ओम बिरला के निवास पर पहुंचना और देर रात्रि तक बैठक होना इस ओर संकेत कर रहा है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरण रिजूजू ने भी ओम बिरला से मुलाकात की है।वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जी 7 की बैठक के बाद इटली से लोटने के बाद से ही नए लोकसभा अध्यक्ष को लेकर हलचल तेज हो गई है तथा मेल मिलाप एवं बैठकों का सिलसिला चल रहा है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एन डी ए के सहयोगी दलों के साथ इस मामले में आम सहमति बनाने की जिम्मेदारी दी है। इधर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के दलों ने परम्परा का हवाला देते हुए उपाध्यक्ष का पद प्रतिपक्ष को देने की मांग रखी है और ऐसा नही होने पर अध्यक्ष पद के लिए भी स्वयं का उम्मीदवार उतार कर चुनाव करवाने की बात कही है। कुछ मीडिया ग्रुप आंध्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दग्गुबती पुरंदेश्वरी का नाम भी लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए चला रहे है। वे दक्षिण के दिग्गज नेता एन टी रामाराव की पुत्री तथा टीडीपी नेता एवं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू की साली है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों भाजपा से ही बनाना तर्क संगत नहीं एलजी रहा है। उधर कुछ मीडिया खबरों में ओम बिरला को भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की खबरे भी आ रही है। वर्तमान अध्यक्ष जे पी नड्डा का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है लेकिन किसी संवैधानिक पद पर रहे नेता को पुनः अध्यक्ष बनाने अथवा केबिनेट मंत्री बनाने के उदाहरण तो मिलते है लेकिन पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का उदाहरण नही मिलता। अब तक कांग्रेस के नीलम संजीव रेड्डी और बलराम जाखड़ के दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बनाने का इतिहास अवश्य रह है। वैसे ओम बिरला विगत बीस वर्षों में ऐसे पहले लोकसभा अध्यक्ष है जोकि पुनः चुनाव जीत कर आए है,अन्यथा कई स्पीकर रिपीट नही हुए है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राजस्थान के कोटा लोकसभा सीट से 41,139 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की है। इसके साथ ही ओम बिरला ने एक मिथक को तोड़ दिया है तथा दो दशक के बाद दोबारा चुनाव जीतने वाले लोकसभा अध्यक्ष बन गए हैं। 1999 के बाद कोई भी लोकसभा अध्यक्ष दोबारा चुनाव जीतकर सदन में नहीं पहुंचा था. बिरला ने इस बार जीत की हैट्रिक लगाई है। लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित होने वाले अंतिम लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा थे, जो 1996 से 1998 तक 11वीं लोकसभा के पीठासीन अधिकारी थे। उस समय कांग्रेस के सदस्य रहे संगमा 1998 के लोकसभा चुनाव में मेघालय के तुरा से दोबारा निर्वाचित हुए थे। इसके बाद जीएमसी बालयोगी अक्टूबर 1999 में जब देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी. तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता जीएमसी बालयोगी को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया. 3 मार्च, 2002 को एक हेलिकॉप्टर हादसे में उनका निधन हो गया। जीएमसी बालयोगी के निधन के बाद अटल वाजपेयी की सरकार में शिवसेना नेता मनोहर जोशी को स्पीकर चुना गया, लेकिन जब 2004 में लोकसभा सभा के चुनाव हुए तो, जोशी मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से अपना चुनाव हार गए. इसके कारण भी वो संसद नहीं पहुंच पाए। साल 2004 में यूपीए की सरकार बनी. इसमें डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने. इस बार सीपीएम के नेता सोमनाथ चटर्जी को लोकसभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. लोकसभा अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया और 2009 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। 2009 में मीरा कुमार को लोकसभा की स्पीकर बनीं, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वो संसद नहीं पहुंच सकीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला. इंदौर लोकसभा सीट से लगातार 8 बार चुनाव जीतने वाली सुमित्रा महाजन को स्पीकर बनाया गया, लेकिन, 2019 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट ही नहीं दिया. ओम बिरला के नाम एक और भी रिकॉर्ड दर्ज हो गया है, जिसके टूटने की हाल-फिलहाल कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. ये रिकार्ड है उनके द्वारा संसद के पुराने और नये भवन में लोकसभा की अध्यक्षता करने का. सत्रहवीं लोकसभा में उनके अध्यक्ष रहने के दौरान दिसंबर 2023 में लोकसभा से बड़ी संख्या में सांसदों को निलंबित किए जाने के कारण भी उनका कार्यकाल सुर्खियों में रहा था. इस दौरान ही 2023 में नई संसद का उद्घाटन हुआ और नए लोकसभा कक्ष में बिरला ने अध्यक्ष के रूप में लोकसभा की कार्यवाही का संचालन किया.l। बिरला को पर्दे के पीछे रहकर संगठन के लिए काम करने वाला नेता माना जाता है. भाजपा की युवा शाखा के लिए उन्होंने सालों साल काम किया और इस दौरान भाजपा के आम कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेताओं के संपर्क में आए. इनमें तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं. यही कारण है कि शाह व मोदी ने जून 2019 में सबको चौंकाते हुए लोकसभा अध्यक्ष के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया। लोकसभा अध्यक्ष पद पर पहुंचने वाले बिरला राजस्थान मूल के पहले राजनेता हैं. इससे पहले बलराम जाखड़ 1980 से 1989 तक इस पद पर रहे, जो 1980 में पहले फिरोजपुर और बाद में 1984 में राजस्थान के सीकर से सांसद थे. राजनीतिक जानकारों के अनुसार बिरला छात्र जीवन से ही संघ से जुड़ गए. इसके बाद वह भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े रहे और जिला व राज्य स्तर पर उसकी अगुवाई की. बिरला ने 2003 में विधानसभा चुनाव में कोटा दक्षिण सीट पर कांग्रेस के दिग्गज शांति धारीवाल को हराकर … Read more

कांग्रेस के एक विधायक विवादों में घिर गए, जब बकरीद की बधाई देते हुए गाय की ग्राफिक तस्वीर उसमें शामिल कर दी

Amarkantak of Madhya Pradesh is surrounded by beautiful hills and temples

तेलंगाना तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक विधायक तब विवादों में घिर गए, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर बकरीद की बधाई देते हुए गाय की ग्राफिक तस्वीर उसमें शामिल कर दी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस विधायक की इस हरकत पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस विधायक कुंबम अनिल कुमार रेड्डी ने बाद में “अनजाने में हुई गलती” के लिए माफी मांगी। हालांकि पोस्ट को सभी संबंधित सोशल मीडिया मंचों से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि पोस्टर में बकरी की छवि थी और इसे अब सोशल मीडिया मंच से हटा दिया गया है। भाजपा विधायक राजा सिंह ने रेड्डी द्वारा बकरीद की शुभकामनाओं में गाय की तस्वीर इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार जहां भी बनती है, वहां हिंदुओं का अपमान किया जाता है। अनिल कुमार रेड्डी ने बाद में एक वीडियो जारी कर कहा कि वह ‘राम भक्त’ हैं और उन्होंने हमेशा परंपराओं का पालन किया है। उन्होंने कहा कि गलती का पता चलते ही पोस्टर हटा दिया गया। उन्होंने कहा, “अगर किसी को ठेस पहुंची है तो हम इसके लिए माफी मांगते हैं। मैं राम भक्त हूं।” दूसरी तरफ,  तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने बकरीद (ईद-उल-अज़हा) त्योहार के अवसर पर मुस्लिम समुदाय को शुभकामनाएं दीं। रेवंत रेड्डी ने ईद पर एक संदेश में कहा कि बलिदान का यह त्योहार इब्राहिम की अपने बेटे की बलि देने की तैयारी की कहानी की याद दिलाता है जिसने सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति समर्पण और भक्ति के गहन कार्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बकरीद का त्योहार अटूट श्रद्धा और त्याग को दर्शाता है। यह त्यौहार जीवन में आने वाली समस्याओं से न डरने और ईश्वर में आस्था रखकर धर्मनिष्ठ जीवन जीने का महान संदेश भी देता है। रेवंत रेड्डी ने कहा कि बकरीद वह त्योहार है जो दान का संदेश भी देता है।  

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