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योगी सरकार का सख्त निर्देश, राज्य विश्वविद्यालय तय शासनादेश के अनुसार ही लें परीक्षा शुल्क

शासनादेश के विपरीत फीस वसूली पर ऑडिट कराकर कार्रवाई करने की चेतावनी छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए विश्वविद्यालयों को लेने चाहिए निर्णय शिक्षा को सर्वसुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध लखनऊ,  शिक्षा व्यवस्था को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में निर्धारित दरों के अनुसार ही लें। शासनादेश के विपरीत अधिक शुल्क वसूलने वाले विश्वविद्यालयों के ऑडिट कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में लखनऊ विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा शासनादेश के विपरीत फीस लिए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य विश्वविद्यालयों को निर्धारित शासनादेश के अनुसार ही परीक्षा शुल्क लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक परीक्षा शुल्क वसूलता है तो उसकी ऑडिट कराई जा सकती है और उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता, पारदर्शी व छात्र हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने चाहिए। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क की समानता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक, बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे शासनादेशों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए, ताकि संस्थान आत्मनिर्भर बन सकें। बैठक में अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, परीक्षा संचालन से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार विश्वविद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं पर विचार करते हुए आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है, लेकिन शासनादेशों का पालन सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य है। बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश कुमार सिंह, प्रमुख सचिव एम. पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी,  कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो. जय प्रकाश सैनी सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 का मुख्य उद्देश्य है तंबाकू मुक्त पीढ़ी का निर्माण करना

लखनऊ,  तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और युवाओं को तंबाकू के सेवन से दूर रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर देश में पहला स्थान हासिल किया। केंद्र सरकार के टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 के तहत आयोजित ऑनलाइन ‘नो टोबैको प्लेज’ अभियान में वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तर प्रदेश ने पूरे देश में सबसे ज्यादा भागीदारी दर्ज की । इस सूची में उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा दूसरे, राजस्थान तीसरे और दिल्ली चौथे स्थान पर रही। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण के इस अभियान में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशों के सफल क्रियान्वयन का परिणाम है। उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्ष 2024-25 में भी टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 2.0 के दौरान ऑनलाइन ‘नो टोबैको प्लेज’ में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया था। लगातार दूसरे वर्ष यह उपलब्धि राज्य के युवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य विभाग और तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की टीम के संयुक्त प्रयासों से संभव हुई है। टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 की शुरुआत 09 अक्टूबर 2025 से हुई थी। यह राष्ट्रीय अभियान शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उन्हें तंबाकू का उपयोग न करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना और तंबाकू मुक्त पीढ़ी का निर्माण करना है। इस अभियान के तहत स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों का प्रशिक्षण, तंबाकू मुक्त संस्थानों की घोषणा और ऑनलाइन शपथ जैसी कई गतिविधियां आयोजित की गईं। उत्तर प्रदेश में इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाया गया। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी कर ऑनलाइन शपथ ली। इसके अलावा लोगों को तंबाकू की लत छोड़ने में सहायता देने के लिए भी विभिन्न सेवाएं संचालित की गईं। केंद्र सरकार के तंबाकू मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि मील का पत्थर साबित हो रही है।

प्रेरणा कैंटीन से जुड़कर 10 हजार से अधिक महिलाएं बनीं लखपति

2100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन बन रहीं हैं ग्रामीण महिलाओं की तरक्की का आधार जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और विकासखंड कार्यालय के साथ ही पीएचसी-सीएचसी में किया जा रहा संचालन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से आत्मनिर्भर बन रहीं प्रदेश की महिलाएं हर महिला को कैंटीन से औसतन 10 हजार रुपए से अधिक की हो रही मासिक आय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में शुरू की गई प्रेरणा कैंटीन के बड़े सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से शुरू हुई इस योजना से अब तक 10 हजार से अधिक महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित इन कैंटीन से न केवल महिलाओं की आय बढ़ी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मजबूत अवसर भी मिल रहा है। प्रदेश भर में 2100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन का संचालन किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं की तरक्की का मजबूत आधार बन रही हैं। इन कैंटीनों का संचालन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कर रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय के साथ-साथ रोजगार का स्थायी साधन भी मिल रहा है। कर्मचारियों, मरीजों और उनके परिजनों को मिल रहा स्वच्छ और किफायती भोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन, रोजगार के नए अवसर और सरकारी योजनाओं का लाभ देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। प्रेरणा कैंटीन का संचालन जिलाधिकारी कार्यालय, मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, विकासखंड कार्यालय के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले कर्मचारियों, मरीजों और उनके परिजनों को यहां स्वच्छ और किफायती भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इससे जहां लोगों को बेहतर सुविधा मिल रही है, वहीं महिलाओं की आय भी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विशेष अभियान चलाकर स्वास्थ्य केंद्रों पर भी प्रेरणा कैंटीन की स्थापना की गई है। इसी कड़ी में अब तक 832 प्रेरणा कैंटीन पीएचसी और सीएचसी में स्थापित की जा चुकीं हैं। इन कैंटीनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रहीं हैं। महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार प्रेरणा कैंटीन से जुड़ी हर महिला को औसतन करीब 10 हजार रुपये से अधिक की मासिक आय हो रही है। इससे महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आया है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश

यूपी के गोरखपुर और रामपुर जिले में स्थापित हो रही ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं गोरखपुर में टोरेंट पॉवर का 0.5 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट, 9 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता रामपुर में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट, 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के गोरखपुर और रामपुर जनपदों में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यूपी नेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि गोरखपुर में टोरेंट पॉवर द्वारा 0.5 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। यह पायलट प्रोजेक्ट प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के उपयोग और उसके व्यावसायिक विस्तार की संभावनाओं को परखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी तरह रामपुर जिले में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन परियोजना स्थापित की जा रही है। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता लगभग 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पानी की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। इसका उपयोग परिवहन, उद्योग और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इन जनपदों में स्थापित हो रही ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा निवेश बढ़ेगा और आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

बालिका सुरक्षा और सशक्तीकरण को बल, केजीबीवी वार्डनों का विशेष प्रशिक्षण शुरू

प्रतापगढ़, गाजियाबाद तथा अयोध्या में केजीबीवी वार्डनों के लिए शुरू किया गया विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन तथा भारत सरकार के सहयोग से हो रहा आयोजन वार्डनों की भूमिका, दायित्वों और छात्रावास प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर हो रहा मंथन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत बेटियों के लिए सुरक्षित, अनुशासित और प्रेरक आवासीय वातावरण सुनिश्चित करना है उद्देश्य लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बालिका शिक्षा को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में अध्ययनरत बेटियों के लिए सुरक्षित, अनुशासित और प्रेरक आवासीय वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रतापगढ़, गाजियाबाद और अयोध्या में वार्डनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत छात्रावास प्रबंधन, बालिका सुरक्षा और नेतृत्व क्षमता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण एनआईईपीए (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन) तथा भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। वार्डनों की नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल में आएगा निखार प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में वार्डनों की भूमिका, दायित्वों और छात्रावास प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। इस दौरान शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से अंडर सेक्रेटरी रामनिवास ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए अवसर का मंच हैं जो सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आती हैं। ऐसे में वार्डनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे छात्राओं के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और अनुशासित वातावरण सुनिश्चित करने की अग्रिम पंक्ति में होती हैं। यह प्रशिक्षण वार्डनों की नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल और बालिका संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को और सुदृढ़ करेगा। बालिका सुरक्षा, बाल संरक्षण, जीवन कौशल, नेतृत्व विकास का प्रशिक्षण इस अवसर पर एनआईईपीए की ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सांत्वना मिश्रा तथा उनकी टीम भी प्रशिक्षण सत्र में शामिल हुई। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान वार्डनों को बालिका सुरक्षा, बाल संरक्षण, जीवन कौशल, नेतृत्व विकास, परामर्श, मानसिक-सामाजिक सहयोग, छात्रावास प्रबंधन तथा संवेदनशील विद्यालय वातावरण के निर्माण से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक और नीतिगत दृष्टिकोण के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा। 1 अप्रैल तक आयोजित होंगे बैच प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न बैच में आयोजित किया जा रहा है। गाजियाबाद और अयोध्या में प्रथम बैच 9 मार्च से 13 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसके बाद क्रमशः 16 से 20 मार्च, 23 से 27 मार्च तथा 28 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक अन्य बैच आयोजित किए जाएंगे। इसी प्रकार अन्य केंद्रों पर भी चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जनपदों से वार्डन प्रतिभाग कर रही हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार यह प्रशिक्षण केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को बालिका सुरक्षा, संवेदनशीलता और नेतृत्व विकास के सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित करना है। इससे विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को एक सुरक्षित, आत्मविश्वासपूर्ण और प्रेरक वातावरण मिलेगा, जो उनके समग्र व्यक्तित्व के विकास और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगा।

योगी सरकार में डेटा सेंटर पॉलिसी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रही नई मजबूती

डेटा इकॉनामी की नई राजधानी बनने की राह पर उत्तर प्रदेश वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट क्षमता वाले बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य ई-गवर्नेंस, क्लाउड सर्विस और टेक स्टार्टअप्स के लिए अवसरों का विस्तार लखनऊ, उत्तर प्रदेश तेजी से देश की उभरती डेटा इकॉनामी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। योगी सरकार की डेटा सेंटर नीति और हालिया घोषणाओं के चलते प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा लगातार बढ़ रहा है। फरवरी 2026 में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने राज्य में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने और स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन की घोषणा की। इसका उद्देश्य डेटा सेंटर उद्योग के विकास को संस्थागत ढांचा प्रदान करना और निवेश प्रक्रिया को और अधिक तेज करना है। योगी सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट क्षमता वाले 4 से 5 बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग, क्लाउड सेवाओं की मांग और डेटा लोकलाइजेशन की नीति के बीच डेटा सेंटर उद्योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता करीब 900 मेगावाट होगी। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम भी आगे बढ़ चुका है। सरकार की ओर से अब तक 8 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जा चुका है, जिनमें 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 डेटा सेंटर इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 21,342 करोड़ रुपये के निवेश और 644 मेगावाट की क्षमता सुनिश्चित हो चुकी है। यह प्रगति इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश में में डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से गति पकड़ रहा है और बड़ी टेक कंपनियां यहां निवेश को लेकर रुचि दिखा रहीं हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार से केवल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ही मजबूत नहीं होगा, बल्कि इससे आईटी, क्लाउड सेवाओं, नेटवर्किंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके साथ ही यूपी में स्टार्टअप और डिजिटल सेवाओं के लिए भी मजबूत आधार तैयार होगा।  यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कोई डेटा सेंटर स्थापित नहीं था। योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। प्रदेश में नीति आधारित प्रोत्साहन, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश अनुकूल माहौल के कारण डेटा सेंटर मामले में लगातार प्रगति हो रही है, जबकि कई परियोजनाएं निर्माण और प्रस्तावित चरण में हैं। सरकार का मानना है कि डेटा सेंटर क्लस्टर और स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन से निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी। इसके साथ ही प्रदेश को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की डेटा इकॉनामी का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

ओडीओपी योजना से मिला संबल, 10 लाख के ऋण से खड़ा किया डिजिटल लॉक का व्यवसाय

आपदा में अवसर: अलीगढ़ की महिला उद्यमी ने शुरू की डिजिटल लॉक यूनिट कोविड के दौर में शुरू हुआ स्टार्टअप, आज 20 से अधिक लोगों को दे रहा रोजगार लखनऊ,  उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली योगी सरकार की नीतियों से प्रेरित होकर अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कठिन समय को सफलता की नई शुरुआत में बदल दिया। ताला नगरी के नाम से मशहूर अलीगढ़ में उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत एक डिजिटल लॉक यूनिट की स्थापना की। यह यूनिट न केवल लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है, बल्कि कई लोगों के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम भी बन गई है। दरअसल, नीलम ने वर्ष 2019 में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उसी समय देश कोविड महामारी के संकट से जूझ रहा था। आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप थीं। बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया था। ऐसे कठिन समय में नीलम ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के साथ मिलकर एक ऐसा व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचा, जिससे स्थानीय लोगों को उनके ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके। 10 लाख का ऋण मिला तो व्यवसाय का आधार हुआ मजबूत अलीगढ़ पहले से ही ताला उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है। नीलम ने पारंपरिक ताले को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का फैसला किया। इसी सोच के साथ उन्होंने “ओव्लॉक्स इंडिया” के नाम से डिजिटल लॉक बनाने की यूनिट शुरू की। इसकी शुरुआत आसान नहीं थी क्योंकि आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ओडीओपी योजना के तहत उद्योग विभाग के माध्यम से बैंक ऑफ़ बड़ौदा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसमें लगभग ढाई लाख रुपये की सब्सिडी भी प्राप्त हुई। योगी सरकार की इस योजना के सहयोग से उनके सपनों को साकार करने के लिए मजबूत नींव तैयार हो गई। आज उनका यह व्यवसाय 10 करोड़ रुपये के पार जा चुका है। कोविड के दौर में शुरू हुआ, आज 20 से अधिक लोगों को दे रहा रोजगार जब इस यूनिट की शुरुआत हुई थी, तब यहां केवल पांच-छह कर्मचारी काम करते थे। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और आज यहां 20 से 25 लोग काम कर रहे हैं। इस यूनिट से जुड़े कर्मचारी अपने काम के अनुसार हर महीने लगभग 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है, बल्कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। इस यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को असेंबल कर आधुनिक डिजिटल लॉक तैयार किए जाते हैं। इन लॉक को आरएफआईडी कार्ड, मोबाइल फोन और सामान्य चाबी के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। यही आधुनिक तकनीक इन्हें पारंपरिक तालों से अलग बनाती है। कई देशों तक पहुंच रहे नीलम के स्मार्ट लॉक सबसे खास बात यह है कि ओव्लॉक्स इंडिया के डिजिटल लॉक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में सप्लाई किए जा रहे हैं। इससे अलीगढ़ की पारंपरिक ताला उद्योग की पहचान को एक नई तकनीकी दिशा मिल रही है। नीलम का कहना है कि पहले अलीगढ़ में अधिकतर हैंडमेड और की-बेस्ड लॉक बनाए जाते थे। इनमें मजदूरों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी और आय भी सीमित होती थी लेकिन डिजिटल लॉक के इस नए उद्योग ने काम के स्वरूप को बदल दिया है। आज यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर आय मिल रही है और उन्हें गर्व महसूस होता है कि उनके हाथों से बने उत्पाद देश-विदेश तक लोकप्रिय हो रहे हैं। यह कहानी केवल एक व्यवसाय की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जो कठिन परिस्थितियों में भी अवसर तलाशती है। नीलम की यह पहल बताती है कि जब परंपरा और तकनीक साथ मिलती हैं, तो स्थानीय उद्योग भी वैश्विक पहचान बना सकते हैं।

20 लाख घरों तक पहुंचेगी ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर होंगे सृजित

ग्रामीण क्षेत्रों में 8–10 हजार स्थानीय युवाओं को मिलेगा डिजिटल उद्यमी बनने का मौका, 50% महिलाओं को मिलेगा अवसर गांव में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचने से ऑनलाइन व्यवसाय, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के खुलेंगे नए अवसर: सुरेश कुमार खन्ना ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और महिला उद्यमिता को भी मिलेगा बढ़ावा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इसी क्रम में ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और हिंदुजा ग्रुप की सहायक कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच एमओयू साइन किया गया। इस परियोजना के तहत अगले 2–3 वर्षों में 20 लाख से अधिक घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें महिलाओं की लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही परियोजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रोजेक्ट गंगा बदलेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का स्वरूप कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि आज का यह एमओयू उत्तर प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कभी तकनीक के क्षेत्र में पीछे रहने के कारण भारत को विकासशील देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन पिछले एक दशक में देश और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में हुए परिवर्तन ने दुनिया की धारणा बदल दी है। आज सबसे बड़ी आवश्यकता अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की है और यदि रोजगार तकनीक के माध्यम से मिलता है तो वह और अधिक प्रभावी और स्थायी होता है। प्रोजेक्ट गंगा (गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट) के तहत लगभग 20 लाख घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने का लक्ष्य है, जिससे करीब एक करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 8 से 10 हजार युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जाएगा, जबकि महिलाओं की भागीदारी को भी विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। युवाओं को मिलेगा तकनीक आधारित रोजगार वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचने से डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन व्यवसाय, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नए अवसर खुलेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि ब्रॉडबैंड सुविधा गांव-गांव तक पहुंचे और युवाओं को तकनीक आधारित रोजगार मिल सके। युवाओं को डिजिटल उद्यमिता से जोड़ने के लिए सरकार आर्थिक सहयोग भी दे रही है। जनवरी 2024 में शुरू की गई योजना के तहत युवाओं को ₹5 लाख तक का ऋण बिना ब्याज और बिना गारंटी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लाभ अब तक एक लाख से अधिक लोग ले चुके हैं। उन्होंने आग्रह किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी भाषा को भी प्रमुख स्थान दिया जाए, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। वित्त मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दो से तीन वर्षों में प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश में डिजिटल सशक्तिकरण और रोजगार सृजन का बड़ा आधार बनेगा। विकास की दिशा तय कर रहा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि आज के दौर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल हाईवे का महत्व कई मामलों में भौतिक एक्सप्रेसवे से भी अधिक हो गया है, क्योंकि यही विकास की नई दिशा तय कर रहा है। यह एमओयू डिजिटल डिवाइड और संभावित एआई डिवाइड को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसके माध्यम से गांवों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, ओटीटी सेवाएं और हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल सेवाओं, यूट्यूब और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से आय अर्जित करने के नए अवसर बनेंगे, वहीं टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, ई-कॉमर्स और डिजिटल स्किलिंग के क्षेत्र भी तेजी से विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से इस दिशा में प्रयास कर रही थी और अब हिंदुजा ग्रुप के सहयोग से यह पहल साकार हो रही है। विशेष रूप से श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचने से लोगों के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी। एक लाख रोजगार का लक्ष्य हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशन लि. के डायरेक्टर विंसले फर्नांडीज ने कहा कि जिस तरह मां गंगा केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक करोड़ों लोगों के जीवन और रोजगार का आधार भी हैं, जिससे कृषि, उद्योग और पेयजल जैसे कई आयाम जुड़े हैं। इसी सोच के साथ इस पहल को ‘प्रोजेक्ट गंगा’ नाम दिया गया है। परियोजना के दो प्रमुख स्तंभ युवा एवं महिला सशक्तीकरण हैं। इसके तहत प्रदेश में लगभग एक लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। हिंदुजा ग्रुप की सहायक कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के चीफ बिजनेस ऑफिसर सत्य प्रकाश सिंह ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट गंगा’ का उद्देश्य दूर-दराज के अंडर-सर्व्ड और अनसर्व्ड क्षेत्रों तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार हो और रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकें। हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध होने से टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल स्किलिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी। कार्यक्रम में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) के सीईओ मनोज कुमार सिंह, श्रम विभाग के प्रमुख सचिव शन्मुगा सुंदरम, एसटीसी के एसीईओ अक्षत वर्मा, हिंदुजा ग्रुप के प्रतिनिधि डॉ. एस.के. चड्ढा, हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशन लि. के डायरेक्टर विंसले फर्नांडीज और ओआईएल के चीफ बिजनेस ऑफिसर सत्यप्रकाश सिंह तथा परियोजना से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

चैत्र में बढ़ी गर्मी की मार: अलीगढ़ प्रदेश में तीसरा सबसे गर्म शहर, 35° पर भी 37° जैसा अहसास

अलीगढ़ मार्च की शुरुआत के साथ ही अलीगढ़ शहर में गर्मी के तेवर तेज होने लगे हैं। स्थिति यह है कि बीते दो दिन से अलीगढ़ पूरे प्रदेश में तीसरा सबसे गर्म जिला बना हुआ है। रविवार को अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन तेज धूप और मौसम में नमी कम होने के कारण लोगों को 37 डिग्री जैसा तापमान महसूस हुआ। दरअसल पिछले कुछ दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे दोपहर के समय गर्मी का असर ज्यादा महसूस हो रहा है। दोपहर के समय तेज धूप के कारण सड़कों और बाजारों में लोगों की आवाजाही भी कम नजर आई। खासकर दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बीच गर्मी का असर अधिक रहा। लोग धूप से बचने के लिए छाता, गमछा और पानी की बोतल साथ लेकर निकलते दिखाई दिए। झांसी में सबसे ज्यादा गर्मी, दूसरे स्थान पर आगरा मौसम विभाग की जिलेवार रिपोर्ट के अनुसार, बीते 7 मार्च को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में सबसे ज्यादा तापमान झांसी, आगरा और अलीगढ़ में दर्ज किया गया। इन जिलों में क्रमश : 36.6, 36.4 और 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। नई दिल्ली स्थित मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एम राजकुमार बताते हैं कि बुंदेलखंड में ज्यादा गर्मी सामान्य मानी जाती है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कुछ परिस्थितियों में तापमान तेजी से बढ़ जाता है। इसलिए गर्म हो रहा अलीगढ़     प्रो. एम राजकुमार ने बताया कि जब उत्तर भारत से पश्चिमी विक्षोभ गुजर जाता है तो उसके बाद आसमान साफ हो जाता है। बादल और नमी कम होने से सूर्य की सीधी किरणें जमीन को ज्यादा गर्म करती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है। अगर हवा की गति कम हो जाए तो गर्मी ज्यादा महसूस होती है। हवा न चलने पर जमीन की गर्मी आसपास ही बनी रहती है, जिससे तापमान और हीट इंडेक्स दोनों बढ़ जाते हैं।     राजस्थान और बुंदेलखंड की तरफ से आने वाली शुष्क गर्म हवा पश्चिम यूपी के हिस्सों तक पहुंच जाती है। इससे दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा हो सकता है।     अलीगढ़ में कंक्रीट, सड़कें और इमारतें ज्यादा होने से जमीन तेजी से गर्म होती है और गर्मी ज्यादा देर तक बनी रहती है। इसे शहरी हीट आइलैंड प्रभाव कहते हैं। अगले दो दिन में 37 डिग्री पार मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। अगले दो दिन में अलीगढ़ का तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। सर्वाधिक बुधवार को दोपहर के वक्त 37 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर की तेज धूप से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जा रही है।  

सीएम का बच्चों को संदेश: जनता दर्शन में कहा- पढ़ाई पर फोकस करो, सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करो

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याओं को सुना और जल्द से जल्द निराकरण के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने एक बच्चे को चॉकलेट दी और उसकी पढ़ाई के बारे में पूछताछ की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश भर से आए पीड़ितों मुख्यमंत्री ने मुलाकात की और उनका प्रार्थना पत्र लिया और आश्वस्त किया कि सरकार सभी की उचित समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है। निश्चिंत होकर घर जाइए, आपकी समस्याओं का निस्तारण होगा। मुख्यमंत्री ने जनपदों के प्रशासनिक व पुलिस अफसरों को निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण समय सीमा के अंदर सुनिश्चित किया जाए।   ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट दी और उनसे पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। एक बच्चे के पास पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि किताबें पढ़ो। सोशल मीडिया का प्रयोग उतना ही करो, जितनी आवश्यकता है। इसका अत्यधिक प्रयोग घातक है। सीएम ने मोबाइल आदि का प्रयोग भी कम करने की सलाह दी। निवेश और उद्योग विकास में देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान दो उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) व जिला प्रशासन को समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में निवेश का बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार किया गया है। सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम सहित कई पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की हैं। उद्यमियों की परेशानी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निवेश और उद्योग विकास में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।   अवैध कब्जे के मामले पर सीएम हुए सख्त कासगंज से आए पीड़ित ने सीएम के समक्ष पुलिस से जुड़ी शिकायत रखी। पीड़ित ने अपने प्रकरण में कार्रवाई पर देरी की शिकायत की। इस पर सीएम योगी ने पुलिस अधीक्षक को मामले का संज्ञान लेते हुए समस्या के समयबद्ध निराकरण का निर्देश दिया। वहीं एक प्रकरण पारिवारिक विवाद से भी जुड़ा आया। अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायत पर सीएम सख्त हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे मामले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने पीड़ित को आश्वस्त किया कि नियमानुसार तत्काल कार्रवाई होगी।

उद्यमियों को किसी भी स्तर पर परेशानी होती है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर कराएंः सीएम योगी

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश भर से आए पीड़ितों के पास मुख्यमंत्री स्वयं चलकर पहुंचे। उनका प्रार्थना पत्र लिया और आश्वस्त किया कि सरकार सभी की उचित समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है। निश्चिंत होकर घर जाइए, आपकी समस्याओं का निस्तारण होगा। मुख्यमंत्री ने जनपदों के प्रशासनिक व पुलिस अफसरों को निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण समय सीमा के अंदर सुनिश्चित किया जाए। निवेश और उद्योग विकास में देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान दो उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) व जिला प्रशासन को समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में निवेश का बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार किया गया है। सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम सहित कई पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की हैं। उद्यमियों की परेशानी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निवेश और उद्योग विकास में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अवैध कब्जे के मामले पर सीएम हुए सख्त कासगंज से आए पीड़ित ने सीएम के समक्ष पुलिस से जुड़ी शिकायत रखी। पीड़ित ने अपने प्रकरण में कार्रवाई पर देरी की शिकायत की। इस पर सीएम योगी ने पुलिस अधीक्षक को मामले का संज्ञान लेते हुए समस्या के समयबद्ध निराकरण का निर्देश दिया। वहीं एक प्रकरण पारिवारिक विवाद से भी जुड़ा आया। अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायत पर सीएम सख्त हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे मामले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने पीड़ित को आश्वस्त किया कि नियमानुसार तत्काल कार्रवाई होगी। किताबें पढ़ो, सोशल मीडिया का न्यूनतम प्रयोग करो ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट दी और उनसे पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। एक बच्चे के पास पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि किताबें पढ़ो। सोशल मीडिया का प्रयोग उतना ही करो, जितनी आवश्यकता है। इसका अत्यधिक प्रयोग घातक है। सीएम ने मोबाइल आदि का प्रयोग भी कम करने की सलाह दी।

नव वर्ष के अवसर पर राम मंदिर में भव्य कार्यक्रम, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी श्रमिकों का सम्मान

अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी में नव संवत्सर (नव वर्ष) पर ऐतिहासिक आयोजन होने वाला है. समारोह को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हई हैं. राम मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस विशेष समारोह की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु होंगी. वे मंदिर में अनुष्ठान के बाद श्रमिक और कर्मचारियों को सम्मानित भी करेंगी. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति राम मंदिर परिसर में लगभग चार घंटे तक रहेंगी. वे मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र और श्रीराम नाम मंदिर की स्थापना भी करेंगी. विशेष बात ये है कि मंदिर समिति ने पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम के दौरान दर्शन सुचारु रखने की योजना बनाई है. जानकारी के मुताबिक 19 मार्च को सुबह 9 बजे से अनुष्ठानों की शुरुआत होगी. दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक आचार्य अनुष्ठानों को संपन्न कराएंगे. काशी के आचार्य पद्मभूषण पंडित गणेश्वर शास्त्री के नेतृत्व में समस्त अनुष्ठान होंगे. कार्यक्रम की व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही अतिथियों के स्वागत, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग और आवागमन की सुचारु व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. ट्रस्ट के मुताबिक श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ मंदिर के दूसरे तल की धार्मिक गतिविधियों को नई आध्यात्मिक ऊर्जा मिलेगी. यह यंत्र श्रीराम की शक्ति, मर्यादा और राष्ट्र चेतना का प्रतीक माना जाता है. राष्ट्रपति की उपस्थिति से यह आयोजन राष्ट्रीय महत्व का स्वरूप ग्रहण करेगा. हिंदू नववर्ष के शुभारंभ अवसर पर 19 मार्च को प्रस्तावित नव संवत्सर समारोह की तैयारियों को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बैठक भी की थी. जिसमें आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई थी.

यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा यूनिफॉर्म और आयुष्मान कार्ड, सीएम योगी की घोषणा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात दी। डीबीटी के जरिये कुल 38.49 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का वादा भी किया। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी-यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि स्थानांतरित की। उन्होंने मंच पर नेहा दुबे, मानसी साहू, पूनम तिवारी, मनोरमा मिश्रा को साड़ी भेंट की तो सेवा मित्र आकांक्षा (ब्यूटीशियन) और रत्ना भारती को यूनिफॉर्म सौंपी। इसके अलावा बीमा प्रीमियम की 8.90 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्थानांतरित की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा। इसके तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं की मृत्यु होने पर परिजनों को 2 लाख रुपये मिला है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये है। वहीं 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता होने पर 2 लाख रुपये तथा आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये है। इसके अलावा सीएम ने पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी, उमा सिंह और लालावती को मंच पर बुलाकर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। सफल महिला उद्यमियों से किया संवाद सीएम ने कार्यक्रम के दौरान वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर की 600 से अधिक महिलाओं के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद भी किया। वाराणसी की सीता देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से उन्होंने ई-रिक्शा चलाकर और क्षेत्र की 250 महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया। गाजीपुर की प्रमिला देवी ने बताया कि वे प्राथमिक विद्यालय में रसोइया हैं। चंदौली जिले की सोनी कुमारी ने बताया कि वे फूलों की खेती करती हैं और महिला समूहों के माध्यम से क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़कर स्वावलंबन की ओर प्रेरित करती हैं। जौनपुर की दुर्गा मौर्य ने बताया कि उन्होंने वह ड्रोन दीदी के रूप में भी कार्य करती हैं। उद्योग विभाग से ऋण लेकर नमकीन बनाने की फैक्ट्री स्थापित की है, जिससे अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।  

भक्तों के लिए खुशखबरी: 19 मार्च से इस घाट पर भव्य गंगा आरती, मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

वाराणसी श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद काशी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बन गई है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक वाराणसी पहुंच रहे हैं, जिसके चलते दशाश्वमेध, अस्सी और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती में भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी को देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 19 मार्च से ललिता घाट पर भव्य गंगा आरती शुरू करने का निर्णय लिया है। 45 मिनट तक होगी गंगा आरती हिंदू नववर्ष के प्रथम दिन इसका शुभारंभ किया जाएगा। मंदिर न्यास के अनुसार, ललिता घाट पर सात अर्चकों द्वारा प्रतिदिन शाम 6:45 बजे से लगभग 45 मिनट तक गंगा आरती की जाएगी। इस आरती के माध्यम से विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालु गंगा द्वार से ही गंगा आरती के दर्शन कर सकेंगे। इससे पहले सितंबर 2025 में नमो घाट पर भी सात अर्चकों द्वारा गंगा आरती की शुरुआत की गई थी। उसी तर्ज पर अब ललिता घाट पर भी भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को मिलेगी बेहतर सुविधा   काशी विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि यह पहल बाबा विश्वनाथ के भक्तों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से की जा रही है। श्रद्धालु गंगा द्वार की सीढि़यों पर बैठकर आराम से गंगा आरती का दर्शन कर सकेंगे। बाबा विश्वनाथ के दरबार और सामने मां गंगा की आरती का द्दश्य भक्तों को दिव्य आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि काशी में दशाश्वमेध, अस्सी, शीतला और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती में अक्सर भारी भीड़ और ट्रैफिक के कारण कई श्रद्धालु समय पर आरती स्थल तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में 19 मार्च से ललिता घाट पर शुरू होने वाली गंगा आरती श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दबाव को कम करने में सहायक साबित होगी। 

पिता चपरासी, बेटी ने UPSC में 113वीं रैंक प्राप्त कर सफलता की नई मिसाल कायम की

बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मेहनत, संघर्ष और हौसले की नई मिसाल पेश की है. यहां की बेटी ने सिविल सेवा परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल कर न केवल परिवार का बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है. शिखा एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां सुविधाएं बेहद कम और हौसले बहुत बड़े. उनके पिता चपरासी हैं. शिखा का रिजल्ट देखते उनके परिवार वालों के खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।  चपरासी की बेटी बनी अधिकारी  बता दें कि बुलंदशहर में ही एक इंटर कॉलेज में शिखा के पिता चपरासी का काम करते हैं. ऐसे में शिखा का सिविल सेवा परीक्षा पास करना बहुत कठिन था. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कभी किसी तरह की कमी नहीं होने दी. उनकी शुरुआती पढ़ाई बुलंदशहर के गांधी बाल निकेतन कन्या इंटर कॉलेज से हुई है. इसके बाद उन्होंने IP कॉलेज से BSC की परीक्षा पास की।   पहले प्रयास में मिली निराशा  कॉलेज पूरी करने के बाद से शिखा ने दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की. दो साल तैयारी करने के बाद जब उन्होंने पहला अटेम्प्ट दिया तो उन्हें निराशा हाथ लगी. लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 113वीं रैंक हासिल की।  रिजल्ट देख खूब रोए दादा  पोती को UPSC एग्जाम में मिली सफलता की खबर जब शिखा के दादा को लगी तो, वह फूट-फूटकर रोने लगे. वहीं, शिखा के बड़े भाई ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा पास कर बहन ने पूरे परिवार का नाम रोशन कर दिया है. उनके माता-पिता अपनी बेटी के सफलता पर गर्व कर रहे हैं. एक बार निराशा हाथ आने के बाद भी शिखा ने हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करती रहीं। 

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