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9 साल में दीं 9 लाख नौकरियां, 2.19 लाख पुलिस भर्तियों से मजबूत हुआ तंत्र: मुख्यमंत्री

आज प्रदेश में न कोई भय है, न तनाव, न अराजकता और न ही दंगों का खतरा: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा, 9 वर्षों में राज्य में बदल गई कानून-व्यवस्था की तस्वीर  शांतिपूर्ण तरीके से मनाए जा रहे त्योहार, नवरात्रि व रमजान में अब नहीं कोई तनाव: सीएम 9 साल में दीं 9 लाख नौकरियां, 2.19 लाख पुलिस भर्तियों से मजबूत हुआ तंत्र: मुख्यमंत्री 60,244 पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग अब प्रदेश में ही, कमिश्नरेट सिस्टम और साइबर थानों से आधुनिक हुई पुलिसिंग: सीएम योगी 2017 के बाद पीएसी को मिला पुनर्जीवन, महिला बटालियनों से बढ़ी ताकत: मुख्यमंत्री लखनऊ  ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था में हुए उल्लेखनीय सुधार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। पहले जहां त्योहारों के दौरान भय, तनाव, दंगे और कर्फ्यू का माहौल बन जाता था, वहीं अब नवरात्रि और रमजान जैसे महत्वपूर्ण पर्व एक साथ पूरी शालीनता और सौहार्द के साथ मनाए जा रहे हैं। अलविदा की नमाज और ईद जैसे अवसर भी पूरी शांति से संपन्न हो रहे हैं और कहीं कोई हलचल या अव्यवस्था देखने को नहीं मिलती। यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, जहां लोग निर्भय होकर अपने धार्मिक स्थलों पर जा रहे हैं और सुरक्षा का वास्तविक अहसास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बदलाव केवल माहौल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की नीयत, नीति और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। अब लोग नए साल या अन्य आयोजनों पर भी धार्मिक स्थलों की ओर जा रहे हैं, जो सामाजिक विश्वास और सुरक्षा के मजबूत माहौल को दर्शाता है। आज प्रदेश में न कोई भय है, न तनाव, न अराजकता और न ही दंगों का खतरा, यह सब सुदृढ़ कानून-व्यवस्था के कारण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश में भर्तियां नहीं होती थीं, क्योंकि सरकार की नीयत साफ नहीं थी और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता था। लेकिन पिछले 9 वर्षों में इस स्थिति को पूरी तरह बदला गया है। सरकार ने 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं, जिनमें 2 लाख 19 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती शामिल है। यह अपने आप में एक बड़ा परिवर्तन है, जिसने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया है। सीएम योगी ने कहा कि पुलिस भर्ती के साथ-साथ प्रशिक्षण क्षमता को भी अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया गया है। उन्होंने 2017 के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय 30 हजार पुलिस भर्ती के लिए केवल 3 हजार प्रशिक्षण क्षमता उपलब्ध थी। तब केंद्र सरकार के सहयोग से मिलिट्री, पैरामिलिट्री और अन्य राज्यों के प्रशिक्षण केंद्रों का उपयोग करना पड़ा था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और वर्ष 2025 में भर्ती किए गए 60,244 पुलिसकर्मियों को प्रदेश के भीतर ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन भर्तियों में अनिवार्य रूप से 20 प्रतिशत महिलाओं को शामिल किया गया है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नवनियुक्त पुलिसकर्मी प्रशिक्षण पूर्ण कर नवरात्रि के तुरंत बाद फील्ड में उतरेंगे और प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगे। इससे कानून-व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी और जनता में सुरक्षा का विश्वास और बढ़ेगा। सीएम ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग समेत अन्य संस्थानों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते थे और समय पर भर्ती नहीं हो पाती थी। लेकिन अब इन व्यवस्थाओं को सुधारते हुए पारदर्शी और समयबद्ध प्रणाली लागू की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पुलिस को आधुनिक व सक्षम बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। प्रदेश में कई फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL), स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है, साथ ही स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) का गठन किया गया है। पिछली सरकारों के दौरान उपेक्षित पड़ी पीएसी की 34 कंपनियों को पुनर्जीवित किया गया है, जिससे प्रदेश की सुरक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है। पहली बार उत्तर प्रदेश पीएसी में तीन महिला बटालियनों का गठन किया गया है, जिनका नामकरण वीरांगना ऊदा देवी पासी, वीरांगना झलकारी बाई और वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर किया गया है। इन बटालियनों में संबंधित वीरांगनाओं की अश्वारोही प्रतिमाएं भी स्थापित की जा रही हैं, जो नारी शक्ति और परंपरा के सम्मान का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस सुधार के तहत कमिश्नरेट प्रणाली को सात जनपदों में लागू किया गया है, जिससे शहरी क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था और अधिक प्रभावी हुई है। इसके साथ ही प्रदेश के हर जिले में साइबर थाने स्थापित किए गए हैं और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है, जिससे डिजिटल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एसडीआरएफ (SDRF) को भी सशक्त किया गया है और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है, जिससे अपराध नियंत्रण और निगरानी प्रणाली को मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी प्रयासों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश देश में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का एक मजबूत मॉडल बनकर उभरा है, जहां नागरिकों का विश्वास सरकार और प्रशासन पर लगातार बढ़ रहा है।

CM का दावा, डबल इंजन सरकार ने 9 साल में सुशासन और विकास का नया मानक स्थापित किया

डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में सुरक्षा, विकास, रोजगार और सुशासन का नया मॉडल स्थापित किया: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास और सतत समृद्धि के 9 वर्ष पूर्ण होने पर “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री ने विगत 9 वर्षों में बदले उत्तर प्रदेश की तस्वीर के साथ गिनाईं सरकार की उपलब्धियां यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की नीतियों, पार्टी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम, जनप्रतिनिधियों की सेवा भावना और जनता जनार्दन के सहयोग का परिणाम: मुख्यमंत्री संवाद के माध्यम से न सिर्फ 9 वर्षों की उपलब्धियों को साझा किया जाएगा, बल्कि भावी विकास का विजन भी तय किया जाएगा: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास और सतत समृद्धि के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन व उनकी विजनरी नेतृत्व क्षमता के तहत बीते 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में जो परिवर्तन हुआ है, वह डबल इंजन सरकार की नीतियों, पार्टी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम, जनप्रतिनिधियों की सेवा भावना और जनता जनार्दन के सहयोग का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को इन 9 वर्षों की उपलब्धियों के लिए हृदय से बधाई देते हुए कहा कि यह परिवर्तन 25 करोड़ प्रदेशवासियों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक है। 2017 के पहले था पहचान का संकट मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 9 वर्षों की यात्रा को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि 2017 से पहले प्रदेश की स्थिति क्या थी। उत्तर प्रदेश जैसे असीम संभावनाओं वाले राज्य को पहचान के संकट का सामना करना पड़ रहा था। दुनिया की सबसे उर्वर भूमि और प्रचुर जल संसाधनों के बावजूद किसान आत्महत्या के लिए मजबूर था। प्रदेश का कारीगर, जो अपनी कला के लिए प्रसिद्ध था, वह उद्यमी बनने के बजाय श्रमिक बनकर पलायन करने को विवश था। युवाओं के सामने पहचान और रोजगार का संकट था, भर्ती प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार और वसूली से प्रभावित थीं। कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी थी कि न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी, और न ही आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करता था। प्रदेश में विकास के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं था, जिसके कारण युवा वर्ग निराश होकर या तो पलायन करता था या संघर्ष में उलझा रहता था।  9 वर्षों में यूपी को मिली नई पहचान सीएम योगी ने कहा कि आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। पिछले 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, रोजगार, किसानों के कल्याण, महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबों के उत्थान के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए हैं। कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से दलितों, वंचितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुंचाने का काम किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सेवा क्षेत्रों में सुधार करते हुए सुशासन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। साथ ही प्रदेश की आस्था, संस्कृति व परंपराओं को सम्मान देते हुए उन्हें नई पहचान दिलाने के प्रयास भी लगातार जारी हैं, जिससे उत्तर प्रदेश आज एक नई पहचान के साथ देश और दुनिया में उभर रहा है। संवाद के माध्यम से 9 वर्षों की उपलब्धियों को करेंगे साझा मुख्यमंत्री ने बताया कि इन उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 9 विषयों पर आधारित 9 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जो बसंत नवरात्रि से प्रारंभ हो रहा है। इसका उद्देश्य है कि यह जन-चर्चा का विषय बने और समाज के सभी वर्ग, युवा, किसान, श्रमिक, महिलाएं और गरीब इसमें सहभागी बनें। संवाद के माध्यम से न केवल बीते 9 वर्षों की उपलब्धियों को साझा किया जाएगा, बल्कि आने वाले समय के लिए विकास का विजन भी तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 9 एक शुभ अंक है, जो पूर्णता का प्रतीक है, और यह कार्यक्रम भी उसी पूर्णता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 9 वर्ष में 9 लाख करोड़ का बजट किया प्रस्तुत मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 9 लाख 12 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जो उत्तर प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास को नई गति देगा। यह बजट प्रदेश को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उत्तर प्रदेश आज सुरक्षा, सुशासन और विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है और यह परिवर्तन आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक रूप में दिखाई देगा।

आंगनबाड़ी केंद्रों में पुष्टाहार वितरण में चेहरा पहचान प्रणाली से हुई प्रगति

चेहरा पहचान प्रणाली से आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार वितरण में बड़ी प्रगति फरवरी में लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों तक एफआरएस से पहुंचा पुष्टाहार डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी, फर्जीवाड़े पर रोक लगने से उचित लाभार्थियों को फायदा  लखनऊ  प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार के वितरण को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लागू की गई चेहरा पहचान प्रणाली यानी एफआरएस के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। फरवरी में प्रदेश के लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों को इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के दिशा निर्देशों के तहत प्रदेश में एफआरएस प्रणाली से ही पुष्टाहार वितरण को मान्यता दी गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही एफआरएस से पुष्टाहार वितरण का शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। योगी सरकार में न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ है कि पोषण का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे1 फरवरी में 81 प्रतिशत तक पहुंचे एफआरएस लाभार्थी प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार के लगभग 1 करोड़ लाभार्थी हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने डिजिटल व्यवस्था को तेजी से अपनाते हुए फरवरी में करीब 81 प्रतिशत लाभार्थियों तक पुष्टाहार पहुंचाया। इस तरह फरवरी में लगभग 81 लाख लाभार्थियों को फेस रिकॉग्निशन प्रणाली के माध्यम से पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। विभाग के अनुसार यह उपलब्धि पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का संकेत है। किशोरियों तक भी पहुंच रहा पोषण प्रदेश सरकार पोषण योजनाओं के दायरे को लगातार व्यापक बना रही है। इसी क्रम में आठ जनपदों में किशोरियों को भी अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान माह में भी एफआरएस प्रणाली के माध्यम से वितरण की प्रगति संतोषजनक है और उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने में लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रतिशत फरवरी की तुलना में और बेहतर होगा। डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित व्यवस्था से पोषण योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी बनता दिखाई दे रहा है।

मायावती का बड़ा हमला: बोलीं- सपा-कांग्रेस दलित विरोधी, चुनाव नजदीक आते ही बदलता है रवैया

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन पर “दलित विरोधी” राजनीति में लिप्त होने और बसपा संस्थापक कांशीराम की विरासत का चुनावी लाभ के लिए लाभ उठाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, सपा और कांग्रेस दलित वोट के स्वार्थ में एक “सोची-समझी रणनीति” के तहत कांशीराम की जयंती मना रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर यह कहते हुए निशाना साधा कि कांग्रेस पार्टी केन्द्र में अपनी सरकार रहने के दौरान कांशीराम को ‘भारतरत्न’ की उपाधि नहीं दी और अब दूसरी पार्टी की सरकार से देने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा, ”यह हास्यास्पद नहीं है तो क्या है?” मायावती ने दावा किया कि सपा और कांग्रेस ने शुरू से ही, बसपा को ख़त्म करने में लगी रहीं, जिस पार्टी की स्थापना कांशीराम ने की थी। उन्होंने कहा कि उसे कांशीराम की ‘एकमात्र उत्तराधिकारी” व बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जीते-जी कोई हिला नहीं सकता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टियों पर कांशीराम के जीते जी उनकी उपेक्षा करने और अब उनकी विरासत का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांशीराम के सम्मान में तत्कालीन बसपा सरकार द्वारा किये गये कार्यों को भी तत्कालीन सपा सरकार द्वारा ”अधिकांशः बदल दिया गया। यह है इन पार्टियों का इनके प्रति दोग़ला चाल व चरित्र।” मायावती ने प्रतिद्वंद्वी दलों के समर्थकों को चुप रहने की सलाह देते हुए कांशीराम की पुस्तक उल्लेख किया और कहा कि ”ऐसे लोगों से दूरी बनाने के लिए ही कांशीराम जी ने ‘चमचा युग’ के नाम से अंग्रेज़ी में एक किताब भी लिखी है।” कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग की थी और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था।  

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अब तक कराई जा चुकी पांच लाख बेटियों की शादी

1.75 लाख से अधिक बेटियों को मिली सरकारी नौकरी  मुख्यमंत्री ने महिला कल्याण के कार्यों को भी गिनाया  मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अब तक कराई जा चुकी पांच लाख बेटियों की शादी  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के महिला कल्याण के कार्यों को भी गिनाया। बताया कि प्रदेश में 9 लाख से अधिक सरकारी भर्ती हुईं। इसमें 1.75 लाख से अधिक बेटियों की भर्ती की गई। स्वयंसेवी समूह की 1.10 करोड़ से अधिक महिलाएं प्रदेश में आजीविका दीदी के रूप में उद्यमी बनकर कार्य कर रहीं हैं। इस बार के बजट में महिला उद्मयी स्कीम के अंतर्गत अलग से पैसे की व्यवस्था की गई है। पीएम के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना (जन्म से स्नातक तक) 25 हजार का पैकेज, बेटी की शादी के लिए एक लाख रुपये की सहायता सामूहिक विवाह योजना में दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत अब तक पांच लाख बेटियों की शादी संपन्न कराई जा चुकी है।  जल्द ही पेंशन में वृद्धि करेगी कैबिनेट सीएम ने निराश्रित महिला, वृद्ध व दिव्यांगजन पेंशन की भी चर्चा करते हुए बताया कि 1.06 करोड़ से अधिक परिवारों को प्रदेश सरकार 12 हजार रुपये वार्षिक पेंशन उपलब्ध करा रही है। इनके कल्याण के लिए कैबिनेट जल्द ही इसमें वृद्धि का भी निर्णय लेगा। सरकार स्नातक व परास्नातक की मेधावी बेटियों को स्कूटी भी उपलब्ध कराएगी। बेटी की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति का कार्यक्रम भी चल रहा है। उप्र के प्रतिभावान युवाओं के लिए नौकरी, रोजगार व स्वरोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। एमएसएमई में तीन करोड़ से अधिक रोजगार, बड़े निवेश के माध्यम से 65 लाख से अधिक नौकरियां उपलब्ध कराईं। सीएम युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत अब तक 1.30 लाख से अधिक नए उद्यमी उत्तर प्रदेश में बने हैं। सरकार दो करोड़ से अधिक नौजवानों को टैबलेट देगी, इसमें से 50 लाख युवाओं को टैबलेट दिया जा चुका है, शेष को भी जल्द ही उपलब्ध होगा।

विश्व बैंक की यह पहल उत्तर प्रदेश को पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास प्राप्त करने में मजबूती प्रदान करेगी

वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से विश्व बैंक और यूपी सरकार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम को लगभग 300 मिलियन डॉलर की मदद प्रदान करेगा विश्व बैंक विश्व बैंक की यह पहल उत्तर प्रदेश को पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास प्राप्त करने में मजबूती प्रदान करेगी लखनऊ उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से विश्व बैंक, भारत सरकार और प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम (यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम) को 299.66  मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान करेगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए एकीकृत समाधानों को बढ़ावा देना है, जिसका लाभ यूपी के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को ध्यान में रखते हुए विश्व बैंक के साथ इस एमओयू को साइन किया गया। एमओयू पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से स्वच्छ वायु प्रबंधन प्राधिकरण की सीईओ एवं वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव बी. चंद्रकला,  भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव जूही मुखर्जी और विश्व बैंक की ओर से भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। आर्थिक विकास, उत्पादकता और पर्यावरणीय संतुलन एक-दूसरे के पूरक हैं। इस कार्यक्रम से समृद्धि केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि स्वच्छ आकाश, स्वस्थ नागरिकों और सतत एवं स्थायी पर्यावरण से मापी जाएगी। विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी का कहना है कि यह कार्यक्रम प्रदेश में परिवहन और एमएसएमई क्षेत्रों में लगभग 150 मिलियन डॉलर की निजी पूंजी का लाभ प्रदान करेगा। साथ ही इलेक्ट्रिक बसों और तीन-पहिया वाहनों में निवेश, उद्योगों में उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के प्रयोग से फर्मों की उत्पादकता में सुधार करने में मदद करेगा।  यह कार्यक्रम प्रदेश के 3.9 मिलियन घरों को स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा, 700 से अधिक ईंट भट्ठों को संसाधन-कुशल प्रौद्योगिकी को अपनाने में सहायता प्रदान करेगा। साथ ही किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कुशल उर्वरक के प्रयोग को प्रेरित करेगा। यह कार्यक्रम विश्व बैंक के इंडो-गंगा मैदान और हिमालयी तलहटी क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसकी परिपक्वता अवधि 10 वर्ष है। विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास की दिशा में भी मजबूती प्रदान करेगी।

अंबेडकरनगर में ड्रग फैक्ट्री पर छापा, 20 करोड़ का मेफेड्रोन किया गया बरामद

अंबेडकरनगर/अहमदाबाद  गुजरात एटीएस ने ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर (Ambedkar Nagar) जिले में चल रही अवैध मेफेड्रोन (MD) फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है. इस ऑपरेशन में करीब 20 करोड़ रुपये की ड्रग्स और केमिकल जब्त किए गए हैं. कार्रवाई के दौरान खेत में छिपाकर बनाई गई फैक्ट्री से 6 किलो मेफेड्रोन, 50 किलो लिक्विड मेफेड्रोन और भारी मात्रा में कच्चा माल बरामद हुआ है. इस मामले में दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले गुजरात में तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी. इस तरह अब तक कुल पांच आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ चुके हैं. एटीएस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है. इस पूरे मामले की शुरुआत 1 मार्च को मिली एक खुफिया सूचना से हुई थी. गुजरात एटीएस के डिप्टी एसपी एसएल चौधरी को सूचना मिली थी कि अहमदाबाद में ड्रग्स की सप्लाई हो रही है. इसके आधार पर गोमतीपुर इलाके से शफात अहमद फारूकी को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से 4.6 ग्राम एमडी बरामद की गई थी. शुरुआती पूछताछ में उसने ड्रग्स सप्लाई करने वाले दो अन्य लोगों के नाम बताए. इसके बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया गया. पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नेटवर्क को ट्रेस करना शुरू किया. यहीं से यूपी कनेक्शन सामने आया. शफात की निशानदेही पर एटीएस ने अहमदाबाद के दाणीलीमड़ा इलाके में रहने वाले सोहेल मिर्जा और फरहान पठान को गिरफ्तार किया. सोहेल के पास से 300 ग्राम एमडी बरामद हुई. तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह ड्रग्स उन्हें उत्तर प्रदेश से मिल रही थी. इससे जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई. एटीएस को यह भी पता चला कि असली सप्लायर यूपी में बैठे हैं. इसके बाद टीम ने पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि सोहेल को 300 ग्राम एमडी यूपी के पंकज और कपिल ने सप्लाई की थी. ये दोनों आरोपी खुद ड्रग्स बनाते थे और फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजते थे. गुजरात एटीएस ने ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए दोनों का लोकेशन ट्रेस किया. लोकेशन उत्तर प्रदेश के आंबेडकरनगर जिले में मिली. इसके बाद अहमदाबाद से एटीएस की टीम यूपी के लिए रवाना हुई. स्थानीय पुलिस से भी संपर्क किया गया. संयुक्त ऑपरेशन की योजना बनाकर रेड की तैयारी की गई. ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा एटीएस की टीम ने आंबेडकरनगर पुलिस के साथ मिलकर रामपुर करई इलाके में एक खेत में छापा मारा. यहां एक टीन शेड बनाया गया था, जो बाहर से देखने पर पोल्ट्री फार्म जैसा लगता था. लेकिन अंदर मेफेड्रोन बनाने की फैक्ट्री चल रही थी. इसी जगह से पंकज और कपिल को गिरफ्तार किया गया. दोनों पिछले करीब चार महीने से यहां ड्रग्स बना रहे थे. फैक्ट्री को बेहद गुप्त तरीके से तैयार किया गया था ताकि किसी को शक न हो. यह पूरा ऑपरेशन बेहद योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था. रेड के दौरान एटीएस को बड़ी सफलता मिली. मौके से 6 किलो मेफेड्रोन, 50 किलो लिक्विड मेफेड्रोन, 88 किलो 2-ब्रोमो-4 मिथाइल प्रोपियोफेनोन और 200 किलो केमिकल बरामद किया गया. इन सभी की बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है. जांच में यह भी सामने आया कि बरामद 88 किलो केमिकल से करीब 25 किलो और एमडी बनाई जा सकती थी. यानी यह फैक्ट्री बड़े स्तर पर ड्रग्स उत्पादन कर रही थी. एटीएस ने पूरे सामान को जब्त कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों में कपिल (31) और पंकज (30) शामिल हैं. कपिल 12वीं पास है जबकि पंकज 10वीं तक पढ़ा है. दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं और पिछले चार महीने से ड्रग्स का कारोबार कर रहे थे. गुजरात एटीएस उन्हें यूपी से अहमदाबाद लेकर गई है. कोर्ट में पेश करने के बाद 12 दिन का रिमांड हासिल किया गया है. रिमांड के दौरान उनसे नेटवर्क, सप्लाई चेन और अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जाएगी. पुलिस को उम्मीद है कि इससे बड़े नेटवर्क का खुलासा होगा. अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन का डेटा खंगाला जा रहा है. इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ड्रग्स की सप्लाई देश के किन-किन हिस्सों में की गई. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इन्हें ड्रग्स बनाने की तकनीक और कच्चा माल कहां से मिला. एटीएस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा.

बुंदेलखंड-विंध्य से लेकर पूरे यूपी तक, जल जीवन मिशन 2.0 से बढ़ेगी पहुंच और भरोसा

हर घर नल से जल को नई रफ्तार, यूपी और केंद्र के बीच जल जीवन मिशन 2.0 पर समझौता ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूती, जल जीवन मिशन 2.0 के साथ शुरू हुआ नया चरण अब योजना से आगे स्थायित्व पर फोकस, जल जीवन मिशन 2.0 से बदलेगा ग्रामीण जल प्रबंधन बुंदेलखंड-विंध्य से लेकर पूरे यूपी तक, जल जीवन मिशन 2.0 से बढ़ेगी पहुंच और भरोसा पेयजल योजनाओं में अब ज्यादा गति, पारदर्शिता और परिणाम दिखेंगे: मुख्यमंत्री लखनऊ  प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में बुधवार को एक अहम पहल हुई। जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के तहत केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मिशन के अगले चरण की औपचारिक शुरुआत है, जिसे हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली है। यह एमओयू केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘हर घर नल से जल’ के लक्ष्य को जमीन पर उतारने की दिशा में यह समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे जलापूर्ति योजनाओं को और बेहतर योजना, समयबद्धता और परिणामों के साथ लागू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इसका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल के रूप में मिलेगा। उन्होंने इसे केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय का उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अंतिम व्यक्ति तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का संकल्प अब तेजी से साकार हो रहा है। प्रदेश में पेयजल व्यवस्था में आए बदलाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले जहां सीमित गांवों तक ही पाइप पेयजल की सुविधा थी, वहीं आज हजारों गांवों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। जिन क्षेत्रों में कभी दूषित पानी के कारण गंभीर बीमारियां आम थीं, वहां अब हालात तेजी से सुधरे हैं। विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी समस्या पर नियंत्रण में स्वच्छता और पेयजल योजनाओं की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में बड़ी संख्या में गांवों में जलापूर्ति के साथ-साथ अनुरक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जो योजना शुरुआत में सीमित क्षेत्रों तक थी, उसे अब उन सभी गांवों तक विस्तारित किया गया है जहां पाइप पेयजल की सुविधा नहीं थी। बुंदेलखंड और विंध्य जैसे क्षेत्रों में, जहां कभी पानी की गंभीर किल्लत थी, आज घर-घर नल से जल पहुंच रहा है। केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने इस मौके पर कहा कि जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि सभी परियोजनाएं टिकाऊ और दीर्घकालिक उपयोग को ध्यान में रखकर लागू की जाएं। यह समझौता न केवल पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ग्रामीण जीवन स्तर, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी सकारात्मक असर डालेगा। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता भी रही।

सीएम योगी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को ₹1 लाख की मदद दी

कैलाश मानसरोवर की यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को सीएम योगी ने प्रदान की ₹1-1 लाख की सहायता राशि तीर्थ यात्राओं से मजबूत हो रहा ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने कहा, तीर्थ यात्राएं सिर्फ आस्था नहीं, समाज व राष्ट्र को जोड़ने का माध्यम, तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं का किया जा रहा विस्तार काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर बढ़ती भीड़ चुनौती भी और अवसर भी: सीएम योगी धार्मिक पर्यटन से विकास और रोजगार को बढ़ावा, महाकुंभ बना आस्था के साथ आर्थिक मजबूती का बड़ा उदाहरण: मुख्यमंत्री महाकुंभ में श्रद्धालुओं ने अफवाहों को नकारा, आस्था को रखा सर्वोपरि: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को ₹1-1 लाख की सहायता राशि वितरित करते हुए आस्था, संस्कृति और विकास के समन्वय का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजनों में उमड़ी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था न केवल भारत की सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देती है। इसी दृष्टि के साथ सरकार तीर्थ यात्राओं को सुविधाजनक, सुरक्षित और व्यापक बनाकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत कर रही है। तीर्थ यात्रा आस्था के साथ एकता व संस्कारों की परंपरा कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिनाइयों, चुनौतियों और विषम प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच इस यात्रा को पूर्ण करना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है। भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम रही है। पूर्वकाल में लोग अपने परिश्रम से अर्जित संसाधनों का उपयोग यात्रा व सेवा में करते थे, जिससे उन्हें पुण्य के साथ-साथ समाज को समझने की नई दृष्टि मिलती थी। भारत के धर्मस्थलों की स्थापना के पीछे भी यही भावना रही है। आदि शंकराचार्य द्वारा चारों दिशाओं में पीठों की स्थापना इस सांस्कृतिक एकता का प्रमाण है, जब अलग-अलग शासन व्यवस्थाओं के बावजूद भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में स्थापित था। आज भी यह परंपरा जीवित है और आवश्यक है कि धार्मिक यात्राओं में श्रद्धा को सर्वोपरि रखते हुए उनकी पवित्रता व गरिमा को बनाए रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन मूल्यों से प्रेरित होती रहें। बढ़ती आस्था के बीच तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2017-18 में गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण कराया गया, जो यात्रा का पहला पड़ाव है और जहां विदेश मंत्रालय की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होती हैं। बदलते समय के साथ तीर्थ यात्राओं का स्वरूप भी बदला है। अब श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2025 में प्रदेश में करीब 164 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जिनमें 66 करोड़ केवल प्रयागराज महाकुंभ में पहुंचे। काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या एक ओर चुनौती है तो दूसरी ओर अवसर भी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार आवागमन, ठहरने और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लगातार सुदृढ़ कर रही है। कैलाश यात्रा और तीर्थ स्थलों पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश में होने के कारण वहां की भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियां बनी रहती हैं, ऐसे में भारत सरकार और प्रदेश सरकार देश के भीतर ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकती हैं, जबकि आगे की यात्रा में अन्य देशों के सहयोग की आवश्यकता होती है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालु अपनी आस्था के बल पर भगवान शिव के दर्शन के लिए यह यात्रा पूर्ण करते हैं। सीएम योगी ने बताया कि डबल इंजन सरकार का फोकस धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को आगे बढ़ाते हुए विकास व रोजगार के अवसर सृजित करना है। पिछले आठ-नौ वर्षों में अयोध्या, काशी, प्रयागराज, चित्रकूट, विंध्याचल, नैमिषारण्य और मथुरा-वृंदावन सहित कई तीर्थस्थलों पर व्यापक विकास कार्य किए गए हैं। साथ ही, यात्रियों द्वारा बताई गई मेडिकल और अन्य सुविधाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर गाजियाबाद में अतिरिक्त व्यवस्थाएं विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार का यह भी जोर है कि निर्मित सुविध…

यूपी बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू: 3 चरणों में होगी कॉपी जांच, रिजल्ट डेट को लेकर बड़ा अपडेट

लखनऊ यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा की कॉपियों की चेकिंग आज 18 मार्च से राज्य के 250 केंद्रों पर शुरू होगी। 2.5 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए आज से 1.5 लाख से अधिक परीक्षकों ने काम शुरू किया है। हाईस्कूल उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में 4300 अंकेक्षक, 8550 डीएचई व 83800 परीक्षक लगाए गए हैं। यूपी बोर्ड इंटर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में 2590 अंकेक्षक, 5300 डीएचई व 48990 परीक्षक लगे हैं। उत्तरपुस्तिकाओं की पूरी गंभीरता से त्रिस्तरीय जांच की जाएगी। यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों की अंकेक्षण में ड्यूटी लगाई है ताकि किसी प्रकार की लापरवाही न रह जाए। बोर्ड की कॉपियों का पहले परीक्षक मूल्यांकन करते हैं और उसके बाद उप मुख्य नियंत्रक या डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) रैंडम 45 या 50 कॉपियों में से कम से कम पांच कॉपियों की जांच करते हैं कि कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई। 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करेंगे तीसरे चरण में डीएचई के अधीन जांची जांची गई कुल कॉपियों में से 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करते हैं। अंकेक्षण का नियम तो है लेकिन मूल्यांकन केंद्रों पर उसका गंभीरता से पालन नहीं होता। पिछले साल तक मूल्यांकन केंद्र स्तर पर ही अंकेक्षकों की नियुक्ति कर ली जाती थी लेकिन हकीकत में खानापूरी ही होती थी। कई केंद्रों पर अनुभवहीन शिक्षकों को भी अंकेक्षण की जिम्मेदारी सौंप दी जाती थी जो परीक्षक या डीएचई की कमियां इंगित तक नहीं कर पाते थे। इसकी शिकायत मिलने पर यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार अपने स्तर से अंकेक्षकों की नियुक्ति की है। 31 मार्च तक मूल्यांकन पूरा हो, रिजल्ट अप्रैल अंत तक दस परीक्षक पर एक डीएचई और दो डीएचई पर एक अंकेक्षक की व्यवस्था की गई है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देशित किया है कि अंकेक्षक प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट उप-नियंत्रक और जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपेंगे। अंकेक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह गया। सचिव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक और मूल्यांकन केंद्र के उपनियंत्रक (प्रधानाचार्य) को पत्र लिखा है कि कार्यभार को देखते हुए एक मूल्यांकन केन्द्र पर एक से अधिक अंकेक्षकों की तैनाती की जाएगी। 31 मार्च तक मूल्यांकन पूरा किया जाना है। अप्रैल अंत तक रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। ओवरराइटिंग या कटिंग को रिजेक्ट कर देगा कंप्यूटर बोर्ड अधिकारियों ने बताया है कि इस बार बोर्ड ने शिक्षकों को चेतावनी दी है कि वे यह पक्का करें कि वे सही नंबर ही डाल रहे हैं, क्योंकि कंप्यूटर सिस्टम किसी भी ऐसी एंट्री को रिजेक्ट कर देगा जिसमें ओवरराइटिंग या कटिंग दिखेगी। इस बात को फिर से दोहराया गया है, क्योंकि बोर्ड का दावा है कि पहले भी कई छात्रों ने रीचेकिंग के लिए अप्लाई किया था और पाया कि आंसर शीट पर दिए गए नंबर और सिस्टम में अपडेट किए गए नंबर अलग-अलग थे। शिक्षकों की लापरवाही पर लगाम यह सुनिश्चित करने के लिए कि मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई गलती न हो, यूपी बोर्ड रैंडम तरीके से जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं को चुनेगा ताकि यह पक्का हो सके कि विषय विशेषज्ञों द्वारा गणना में कोई चूक न हुई हो। यदि दोबारा जांच के बाद भी गलतियां पाई जाती हैं, तो जिस शिक्षक ने संबंधित उत्तर पुस्तिका को जांचा था, उसे बोर्ड के नियमों और ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त उत्तरपुस्तिकाओं के गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पहली बार सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त किए हैं। इनमें प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक व वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं, जो 15 प्रतिशत कॉपियों का रेंडम परीक्षण करेंगे। परिषद सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह निर्णय मूल्यांकन को त्रुटिरहित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली की साख बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। प्रधानाचार्यों की ड्यूटी लगाने पर जताया रोष प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में प्रधानाचार्यों की ड्यूटी को लेकर प्रदेशभर में असंतोष व्याप्त है। राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा), उत्तर प्रदेश शासन को ज्ञापन भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय और प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने बताया कि परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली एवं मेरठ की ओर से प्रधानाचार्यों को उनके पद की गरिमा के विपरीत अंकेक्षण कार्य में लगाया गया है। इससे प्रदेश के हाईस्कूलों के प्रधानाचार्यों में व्यापक रोष है।

योगी आदित्यनाथ ने किया मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय का निरीक्षण, सुधार के दिए निर्देश

नवरात्र के पहले दिन बागपत में बेटियों का होगा सम्मान, ‘नन्ही कली’ को मिलेगी पहचान 19 मार्च को होगा कार्यक्रम, छह बार की बॉक्सिंग विश्व चैंपियन मैरी कॉम करेंगी बेटियों को सम्मानित गांव की महिलाओं की बनाई रिसाइकिल प्लास्टिक की गुड़िया, योगी सरकार के अभियान को मिलेगी रफ्तार महिला कारीगरों की गुड़िया से लड़कियों को सशक्तीकरण व प्रेरणा देना पहल का उद्देश्य लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की मंशा के अनुरूप नवरात्र के पहले दिन बागपत में बेटियों के सम्मान और सशक्तीकरण का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिलेगा। छह बार की बॉक्सिंग विश्व चैंपियन मैरीकॉम ‘नन्ही कली’ कार्यक्रम में शामिल होकर बेटियों को सम्मानित करेंगी। गांव की महिलाओं द्वारा रिसाइकिल प्लास्टिक से तैयार की गई गुड़िया ‘नन्ही कली’ इस पहल का केंद्र है। इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण, महिला आत्मनिर्भरता और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे योगी सरकार के अभियानों को नई मजबूती मिलेगी। नवरात्र में नारी शक्ति का सम्मान, योगी सरकार के विजन को बल नवरात्र को नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाने की तैयारी है। ऐसे में ‘नन्ही कली’ पहल सीधे तौर पर बेटियों के सम्मान और सशक्तीकरण से जुड़ रही है। यह कार्यक्रम सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और मिशन शक्ति अभियान को और मजबूती देगा। प्लास्टिक से बनी गुड़िया, पर्यावरण को भी राहत बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि इस गुड़िया की खासियत है कि इसमें रुई या स्पंज की जगह बेकार प्लास्टिक बोतलों से बने बारीक फाइबर का उपयोग किया गया है। यह न सिर्फ प्लास्टिक कचरे की समस्या का समाधान है, बल्कि ‘कचरे से कंचन’ की सोच को भी साकार करता है। गांव की महिलाओं की आत्मनिर्भरता की कहानी ‘नन्ही कली’ गुड़िया ग्रामीण महिलाओं द्वारा कपड़ों के टुकड़ों और पुनर्चक्रित सामग्री से तैयार की जा रही है। यह पहल महिलाओं को रोजगार देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। साथ ही, यह ‘वोकल फॉर लोकल’ को भी मजबूत करती है। मैरी कॉम देंगी बेटियों को नई प्रेरणा कार्यक्रम में मैरी कॉम की मौजूदगी युवाओं और खासकर बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा बनेंगी। वह बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेंगी। जीरो वेस्ट विजन से बन रही बागपत की नई पहचान जिलाधिकारी अस्मिता लाल के ‘जीरो वेस्ट’ विजन के तहत शुरू हुई यह पहल अब बागपत को नई पहचान दिलाने की ओर बढ़ रही है। ‘नन्ही कली’ केवल एक खिलौना नहीं, बल्कि पर्यावरण, संस्कृति और महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बन चुकी है।

BJP नेता की हत्या के मुख्य आरोपी को गोरखपुर में किया गिरफ्तार, गोली के बाद चाकुओं से वार

गोरखपुर गोरखपुर में पूर्व पार्षद और भाजपा नेता राजकुमार चौहान के हत्यारों को पुलिस ने महज़ कुछ ही घंटों में ढूंढ लिया है. पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने भतीजे से हुई लड़ाई का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की थी. मॉर्निंग वॉक पर निकले राजकुमार चौहान को आरोपियों ने पहले गोली मारी और फिर चाकू से गोद डाला. यह घटना मंगलवार सुबह 5 बजे के आसपास हुई. जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी। राजकुमार के भतीजे से हुई लड़ाई से क्षुब्ध होकर 18 वर्षीय राज चौहान ने अपने दोस्त विपिन यादव के साथ मिलकर चाचा राजकुमार चौहान की बेरहमी से हत्या कर दी. पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजकुमार के शरीर पर कुल 11 जगह घाव मिले हैं. हत्याकांड को लेकर राजकुमार के परिवार ने 8 लोगों को नामजद किया था. लेकिन पुलिस का कहना है कि घटना के पीछे गिरफ्तार दो आरोपियों की ही संलिप्तता पाई गई है। प्रशासन करेगा बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों ने सच उगल दिया. वहीं भाजपा नेता की मौत के बाद गोरखपुर जिला प्रशासन ने उदारता दिखाते हुए परिवार की मदद को आगे हाथ बढ़ाया है. जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि मृतक के परिवार ने सुरक्षा की मांग थी. जिसे तत्काल मुहैया कराया गया है. कुछ आर्थिक मदद की बात की गई थी, जिसे प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। मृतक की दो छोटी बेटी और एक बेटे की पढ़ाई की व्यवस्था भी कराई जाएगी. साथ ही कोई योग्य परिवार का सदस्य जो नौकरी करना चाहता हो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी।

योगी आदित्यनाथ ने किया मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय का निरीक्षण, सुधार के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय का किया निरीक्षण  31 मई तक पूरा करें विश्वविद्यालय का निर्माणः मुख्यमंत्री ऐसा पाठ्यक्रम चलाएं, जो मीरजापुर-सोनभद्र समेत आसपास के युवाओं के लिए रोजगारपरक, नवाचार व कौशलयुक्त होः मुख्यमंत्री   सीएम योगी ने विश्वविद्यालय परिसर में लगाया मौलिश्री का पौधा, वर्षाकाल में वन विभाग के साथ वृहद पौधरोपण अभियान चलाने का निर्देश  लखनऊ/मीरजापुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने परिसर में मौलिश्री का पौधा रोपित किया और विश्वविद्यालय के अकादमिक व प्रशासनिक ब्लॉक का निरीक्षण भी किया। मुख्यमंत्री ने 31 मई तक विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा करने, विश्वविद्यालय के अंदर सड़कों का निर्माण करने और परिसर में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को निर्देशित किया कि गुणवत्ता और समयबद्धता का हर हाल में पालन होना चाहिए।  ऐसा पाठ्यक्रम चलाएं, जो युवाओं को कौशल विकास के साथ ही रोजगार से भी जोड़े मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि यहां ऐसा पाठ्यक्रम चलाएं, जो युवाओं को कौशल विकास के साथ ही रोजगार से भी जोड़े। इसका लाभ मीरजापुर, सोनभद्र समेत आसपास के युवाओं को प्राप्त हो। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए अधियाचन भेजा है। मुख्यमंत्री ने शासन स्तर से इस पर कार्यवाही का निर्देश दिया।  निर्माण कार्य में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं  मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के अकादमिक व प्रशासनिक ब्लॉक का निरीक्षण किया। निर्माण कार्यों का अवलोकन करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसी को समयबद्धता व गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर है। हमारी सरकार ने मां विंध्यवासिनी के नाम पर मीरजापुर के युवाओं के लिए विश्वविद्यालय देकर बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा किया है। इसके निर्माण में हीलाहवाली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  वर्षाकाल में वन विभाग से समन्वय स्थापित कर वृहद पौधरोपण अभियान चलाएं  मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रांगण में मौलिश्री का पौधा रोपा और विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि आगामी वर्षाकाल में वन विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए बड़ी संख्या में पौधे प्राप्त करें। शिक्षकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों को साथ लेकर विश्वविद्यालय परिसर व आसपास के क्षेत्रों में वृहद पौधरोपण अभियान चलाएं। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हरियाली बढ़ाने को कहा। मुख्यमंत्री के आगमन पर कुलपति प्रो. शोभा गौड़ ने पुष्पगुच्छ व स्मृति चिह्न देकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, मड़िहान विधायक रमाशंकर पटेल, प्रमुख सचिव (उच्च शिक्षा) महेंद्र अग्रवाल, आयुक्त राजेश प्रकाश, जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, वित्त अधिकारी गिरीश कुमार, कुलसचिव श्री राम नारायण, परीक्षा नियंत्रक महेंद्र कुमार, डिप्टी रजिस्ट्रार सुनील कुमार सरोज आदि मौजूद रहे।

योगी सरकार का सशक्त मॉडल: टैक्स से जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य स्पष्ट

उत्तर प्रदेश की नई वित्तीय नीति: जनता के काम में सीधे खर्च हो रहा पैसा योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय कहां से पैसा आया और कहां खर्च हुआ, अब सब कुछ है स्पष्ट गो कल्याण, सड़क, खेती और विरासत को मिल रहा सीधा लाभ लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में एक स्पष्ट और व्यावहारिक बदलाव किया है। अब टैक्स को केवल राजस्व इकट्ठा करने का माध्यम नहीं माना जा रहा, बल्कि उसे सीधे किसी खास उद्देश्य से जोड़कर खर्च किया जा रहा है। सरल शब्दों में समझें तो कौन सा पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, यह अब स्पष्ट दिख रहा है। यह मॉडल इसलिए खास है क्योंकि आम नागरिक अब आसानी से समझ सकता है कि उसका दिया हुआ टैक्स किस काम में लग रहा है। इस पूरी नीति का सीधा मतलब है कि टैक्स अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विकास का साधन बन चुका है। उत्तर प्रदेश ने दिखाया है कि अगर योजना स्पष्ट हो, तो हर रुपये का सही उपयोग करके समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति तीनों को एक साथ मजबूत किया जा सकता है। गो कल्याण सेस: छोटा टैक्स, बड़ा असर राज्य सरकार ने आबकारी से जुड़े राजस्व पर 0.5% का गो कल्याण सेस लगाया है। यह टैक्स शराब की बिक्री से जुड़ा है। आम उपभोक्ता पर इसका बहुत कम असर पड़ता है, लेकिन पूरे राज्य से यह मिलकर सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाता है। इस पैसे को सीधे आवारा गोवंश की देखभाल में खर्च किया जाता है। प्रदेश में बने गोवंश आश्रय स्थल में हजारों पशुओं को रहने, खाने और इलाज की सुविधा मिल रही है। दरअसल, कृषि में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण किसानों की पशुओं पर निर्भरता कम हुई है, जिससे आवारा पशुओं की समस्या बढ़ी। अब इस सेस के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार किया गया है। हर सेक्टर का पैसा उसी सेक्टर में लग रहा उत्तर प्रदेश ने एक और स्पष्ट नीति अपनाई है और वो ये कि जिस सेक्टर से राजस्व आता है, उसी सेक्टर के विकास में उसका उपयोग किया जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें: 1. रियल एस्टेट: धार्मिक और पर्यटन विकास संपत्ति की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी का उपयोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट में किया जा रहा है। इससे पर्यटन बढ़ रहा है, रोजगार मिल रहा है और विरासत सुरक्षित हो रही है। 2. खनन: सिंचाई और पानी की व्यवस्था खनन से मिलने वाला पैसा गांवों में सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने में लगाया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। 3. एक्सप्रेसवे: गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिलने वाला टोल छोटी सड़कों (फीडर रोड) के निर्माण में खर्च हो रहा है, जिससे दूर-दराज के गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं। 4. मंडी शुल्क: किसानों की सुरक्षा मंडी से मिलने वाली फीस का उपयोग फसल सुरक्षा और किसान योजनाओं में किया जा रहा है। अब टैक्स का उपयोग साफ दिख रहा इस नई नीति की सबसे बड़ी ताकत है, स्पष्टता। अब लोगों को साफ दिखता है कि शराब की बिक्री से मिला पैसा गो कल्याण में लग रहा है। टोल टैक्स का पैसा सड़क और कनेक्टिविटी में, प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा धार्मिक और पर्यटन विकास में निवेश हो रहा है। इससे सरकार पर भरोसा बढ़ता है, क्योंकि टैक्स अब “कहां गया” का सवाल नहीं, बल्कि “यहीं लगा” का जवाब देता है। तेजी से विकास की मजबूत तैयारी उत्तर प्रदेश का लक्ष्य है 2029-30 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार लगातार सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और खेती, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। राज्य के बजट में पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी तीनों में तेजी आ रही है। दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है। मतलब साफ है कि जो राज्य जिस क्षेत्र में मजबूत है, वह उसी से मिलने वाले टैक्स को उसी क्षेत्र के विकास में लगा सकता है। जैसे, जहां पर्यटन ज्यादा है, वहां पर्यटन से मिलने वाले टैक्स को पर्यटन सुविधाएं बेहतर करने में खर्च किया जा सकता है। औद्योगिक राज्यों में उद्योगों से जुड़े शुल्क को पर्यावरण सुधार पर लगाया जा सकता है। वहीं कृषि प्रधान राज्यों में मंडी से मिलने वाली फीस को खेती और किसानों को मजबूत बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, हर राज्य अपनी जरूरत और स्थिति के अनुसार टैक्स को विकास से जोड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है।

यमुना एक्सप्रेसवे पर बढ़ेगा निवेश, तीन कंपनियों को आवंटित की गई ज़मीन

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बड़े निवेश की रफ्तार तेज, तीन कंपनियों को भूमि आवंटन योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, तीनों कंपनियों से आएगा 3,400 करोड़ रुपये से अधिक निवेश ट्रैक्टर, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट लगेंगी, सृजित होंगे 5,700 से ज्यादा रोजगार के अवसर लखनऊ/नोएडा  उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में तीन बड़ी कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है। यह आवंटन इन्वेस्ट यूपी की संस्तुति पर किया गया है, जिससे प्रदेश में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। इन परियोजनाओं से कुल 3,400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आएगा और लगभग 5,700 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। एस्कॉर्ट्स कुबोटा से मिलेगा बड़ा निवेश और रोजगार एस्कॉर्ट्स कुबोटा लि. (M/s Escorts Kubota Limited) को सेक्टर-10 में 154 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट निर्माण इकाई स्थापित करेगी। इस परियोजना में लगभग 2,029 करोड़ रुपये का निवेश होगा और करीब 4,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह यूनिट प्रदेश में कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई मजबूती देगी। सीएनएच इंडस्ट्रियल से कृषि मशीनरी सेक्टर को बढ़ावा सीएनएच इंडस्ट्रियल इंडिया प्रा लि (M/s CNH Industrial India Pvt. Ltd.) को सेक्टर-8डी में 100 एकड़ भूमि दी गई है। कंपनी यहां ट्रैक्टर निर्माण यूनिट स्थापित करेगी, जिसमें 1,219.81 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस प्रोजेक्ट से लगभग 1,200 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह निवेश उत्तर प्रदेश को कृषि मशीनरी निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेगा। सन ऑर्गेनिक से फूड प्रोसेसिंग सेक्टर मजबूत सन ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज प्रा लि (M/s Sun Organic Industries Pvt. Ltd.) को सेक्टर-8डी में 30,000 वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट लगाएगी। इस परियोजना में करीब 225.16 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 569 लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे। योगी सरकार की नीतियों से बढ़ा निवेश का भरोसा प्रदेश में बढ़ते निवेश को योगी सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों, सिंगल विंडो सिस्टम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का परिणाम माना जा रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र तेजी से एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है, जहां बड़ी कंपनियां निवेश के लिए आगे आ रही हैं। इन सभी परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे प्रदेश के समग्र विकास को बल मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाना है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में हो रहा यह निवेश उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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