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कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को सीएम योगी देंगे वित्तीय सहायता

कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए बड़ी सौगात, सीएम योगी प्रदान करेंगे श्रद्धालुओं को वित्तीय सहायता लोकभवन में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 555 श्रद्धालुओं को वितरित करेंगे एक-एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता लखनऊ कैलाश मानसरोवर तीर्थ के दर्शनार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार मंगलवार को एक बड़ी पहल करने जा रही है। 17 मार्च को लोकभवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 555 श्रद्धालुओं को एक-एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता राशि वितरित करेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश सरकार तीर्थ यात्रियों को प्रोत्साहित करने और उनकी यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से यह सहायता प्रदान कर रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहेंगे। यात्रियों के लिए बड़ी राहत सरकार की यह पहल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशीलता को भी दर्शाती है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह यात्रा कठिन एवं खर्चीली होती है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। प्रदेश सरकार लगातार धार्मिक स्थलों के विकास, तीर्थ यात्राओं को सुविधाजनक बनाने और श्रद्धालुओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में कार्य कर रही है। यह कार्यक्रम उसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के साथ ही अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।  आस्था का सम्मान कैलाश मानसरोवर जैसी कठिन तीर्थ यात्रा को उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्थिक सहायता के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के स्थायी निवासियों के लिए ₹1 लाख तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जो यात्रा पूर्ण करने के बाद आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन के उपरांत सीधे लाभार्थियों के खाते में अंतरित की जाती है। इसके साथ ही, देशभर से आने वाले तीर्थ यात्रियों के ट्रांजिट स्टे की सुविधा के लिए गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण भी कराया गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर ठहराव और सुविधाएं मिल सकें। यह पहल न केवल आस्था का सम्मान है, बल्कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश को और प्रगतिमान बनाने का प्रयास भी है।

मुख्यमंत्री ने 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर पीएम आवास योजना शहरी 2.0 को आगे बढ़ाया

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 के अंतर्गत 90,000 लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से जारी की 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त  पिछली सरकारों में पाले गए माफियाओं ने गरीबों का हक छीना,  जमीनें कब्जाईं, अब उन्हीं जमीनों पर गरीबों के लिए घर बनेंगे: मुख्यमंत्री माफिया से मुक्त जमीनों पर हाईराइज आवास बनाने के निर्देश, गरीबों के साथ-साथ शिक्षकों, वकीलों, डॉक्टरों व पत्रकारों के लिए भी आवास योजना जिन्होंने वर्षों शोषण किया, उसकी भरपाई अब ब्याज सहित करने का समय आ गया: सीएम योगी डबल इंजन सरकार 25 करोड़ जनता को परिवार मानकर योजनाओं का लाभ पहुंचा रही: सीएम सरकार का लक्ष्य केवल मकान देना नहीं, बल्कि गरीबों को सम्मानजनक जीवन देना है: योगी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 के अंतर्गत 90,000 लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रथम किस्त के रूप में 900 करोड़ रुपये की अनुदान राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि जिन्होंने वर्षों तक आम जनता का शोषण किया है, उस शोषण की भरपाई अब ब्याज सहित वापस करने का समय आ गया है। जिन माफियाओं ने गरीबों का हक छीना, जमीनें कब्जाईं, अब उन्हीं जमीनों पर गरीबों के लिए घर बनेंगे। डबल इंजन सरकार की नीति के तहत “25 करोड़ जनता ही परिवार” मानकर बिना भेदभाव हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है, और यही उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ छवि से निकालकर देश का ग्रोथ इंजन बना रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल मकान देना नहीं, बल्कि गरीबों को सम्मानजनक जीवन देना है, जहां घर के साथ शौचालय, बिजली, पानी और सभी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित हों।  62 लाख परिवारों को मिला आवास मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसके पास अपना घर हो। मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है और उसमें अपना पक्का मकान बनाने की क्षमता है। जैसे अन्य जीव शरण के लिए ठौर-ठिकाना बनाते हैं, उसी तरह घर मनुष्य के जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है। इस मूल आवश्यकता को पूरा करने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथों में लिया, जिसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 62 लाख परिवारों को इस योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। अब 25 करोड़ जनता ही हमारा परिवार मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले गरीबों के लिए आवास योजनाएं होने के बावजूद उनका लाभ नहीं मिल पाता था, क्योंकि प्रदेश सरकार में इच्छाशक्ति की कमी थी। जब व्यक्ति स्वार्थ में डूब जाता है तो उसकी संवेदनाएं समाप्त हो जाती हैं और वह केवल अपने परिवार तक सीमित रह जाता है। इसी कारण उस समय की सरकारें भी परिवार और नातेदारों तक सीमित थीं। लेकिन 2017 के बाद डबल इंजन सरकार ने “25 करोड़ प्रदेशवासी ही परिवार हैं” की सोच के साथ काम करते हुए हर जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना अपनी प्राथमिकता बना लिया। हर गरीब के साथ सरकार की संवेदना मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार की संवेदना हर गांव, गरीब, युवा, महिला, किसान और श्रमिक के साथ है। इसी क्रम में 90,000 से अधिक लाभार्थियों को आवास के लिए ₹1 लाख की पहली किस्त दी जा रही है। इसमें सहारनपुर में 10,214 लाभार्थियों को, प्रतापगढ़ में 7,991, शाहजहांपुर में 4,325, फिरोजाबाद में 4,266, प्रयागराज में 3,331, जालौन में 3,174, सीतापुर में 3,078, गोरखपुर में 3,063, बरेली में 3,017, अलीगढ़ में 2,883, बदायूं में 2,712, महाराजगंज में 2,701, मेरठ में 2,626, अमरोहा में 2,175, हरदोई में 1,895, बुलंदशहर में 1,826, कुशीनगर में 1,562, बहराइच में 1,529, आगरा में 1,473, मऊ में 1,470, बांदा में 1,437, बिजनौर में 1,364, गाजियाबाद में 1,209, देवरिया में 1,138 और गोंडा में 1,121 लाभार्थियों को यह पहली किस्त प्रदान की गई है। कुल ₹900 करोड़ से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में भेजी गई है। यह तकनीक के प्रभावी उपयोग का उदाहरण है, जहां बिना किसी बिचौलिए के पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है और सभी के मकान बनने का रास्ता साफ हो रहा है। ‘बीमारू’ से ‘ग्रोथ इंजन’ बना यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि पहले गरीब और वंचित को बिना भेदभाव योजना का लाभ मिले। यही किसी भी कल्याणकारी शासन की पहचान है। इसी दृष्टिकोण के साथ किए गए कार्यों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है। डबल इंजन सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गांव, गरीब, किसान, युवा व महिलाओं के लिए समर्पित प्रयासों के चलते यह संभव हुआ है। साथ ही, बासंतीय नवरात्रि और रामनवमी से पहले गरीबों को आवास मिलना उनके लिए विशेष खुशी का विषय है, जिससे उनके सपनों को नए पंख मिले हैं। आवास के साथ समग्र विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि लाभार्थियों को केवल आवास ही नहीं, बल्कि राशन योजना, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, आयुष्मान भारत के तहत ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा और निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों व दिव्यांगजनों को ₹12,000 वार्षिक पेंशन जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। प्रदेश में 1 करोड़ 6 लाख लोगों को पेंशन दी जा रही है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। 25 करोड़ जनता को परिवार मानने की भावना से बिना भेदभाव दलितों, वंचितों, पिछड़ों, गरीबों और महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है। इससे न केवल जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि लोगों की ऊर्जा और क्षमता से प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है और अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। 75% निर्माण पर अगली किस्त मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न जनपदों में संवाद के दौरान उन्होंने लाभार्थी परिवारों की खुशी को स्वयं देखा। सहारनपुर, फतेहपुर, महाराजगंज, देवरिया, प्रयागराज और गोरखपुर में महिलाओं ने बताया कि पहली किस्त मिलते ही उन्होंने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। सीएम ने कहा कि 75 प्रतिशत कार्य पूरा होते ही लाभार्थी तुरंत अगली किस्त की मांग करें और अधिकारियों द्वारा ₹1 लाख की अगली किस्त तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि निर्माण में तेजी आए। साथ ही, जिलों में नोडल अधिकारी तैनात कर सस्ती और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री … Read more

उत्तर प्रदेश के डेयरी उत्पादों के निर्यात में 10% का अभूतपूर्व उछाल

यूपी के डेयरी उत्पादों के निर्यात में 10% की अभूतपूर्व वृद्धि योगी सरकार की नीतियों का असर, पशुपालन व डेयरी सेक्टर के निर्यात में उल्लेखनीय सुधार 444.10 करोड़ से बढ़कर अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच 489.24 करोड़ रुपये पहुंचा निर्यात डेयरी, अंडे और प्राकृतिक शहद समेत उत्पादों की बढ़ती मांग से निर्यात को मिली गति डेयरी प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों की आय में इजाफा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती लखनऊ पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए योगी सरकार के कदमों का असर निर्यात में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है। उत्तर प्रदेश के डेयरी और संबंधित पशु-आधारित उत्पादों के निर्यात में विगत एक से डेढ़ वर्ष में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार “डेयरी उत्पाद, अंडे, प्राकृतिक शहद और खाद्य उत्पाद” श्रेणी के अंतर्गत आने वाले उत्पादों का निर्यात अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 के दौरान 444.10 करोड़ रुपये था, जो अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच बढ़कर 489.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस प्रकार इस श्रेणी में 10.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो करीब 45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को दर्शाती है। निर्यात को मिल रही नई गति यह श्रेणी केवल डेयरी उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंडे, प्राकृतिक शहद और अन्य खाद्य पशु-आधारित उत्पाद भी शामिल हैं। इन सभी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग ने उत्तर प्रदेश के निर्यात को नई गति दी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, दूध, घी, पनीर, मक्खन, मिल्क पाउडर के साथ-साथ शहद और अंडों की गुणवत्ता में सुधार तथा प्रोसेसिंग सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत हुई है। बेहतर पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल और सप्लाई चेन मैनेजमेंट ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। योगी सरकार की पहल से मिला बढ़ावा सीएम योगी के निर्देश पर राज्य में पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की जा रहीं हैं। डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट्स के विस्तार, कोल्ड चेन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिला है। इसके साथ ही पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु, प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। दुग्ध सहकारी समितियों और निजी डेयरी इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण स्तर पर संग्रहण और विपणन तंत्र मजबूत हुआ है। अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत डेयरी और संबद्ध उत्पादों के निर्यात में आई यह वृद्धि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत है। इससे बड़ी संख्या में जुड़े किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार पर इसी तरह ध्यान दिया जाता रहा, तो उत्तर प्रदेश आने वाले समय में इस श्रेणी के निर्यात में और बड़ी छलांग लगा सकता है।

बीसी सखियों ने किया रिकॉर्ड, 45 हजार करोड़ का वित्तीय लेनदेन और 120 करोड़ का कमीशन

बीसी सखियों ने बनाया रिकॉर्ड, 45 हजार करोड़ का किया वित्तीय लेनदेन, कमीशन में मिले 120 करोड़ योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद ग्रामीण बैंकिंग लेनदेन में पहली बार आई इतनी रफ्तार 50 हजार करोड़ रुपए के वित्तीय लेनदेन की ओर अग्रसर प्रदेश की बीसी सखियां आजीविका मिशन के जरिए एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया लेनदेन में प्रयागराज पहले स्थान पर, बरेली दूसरे और शाहजहांपुर तीसरे नंबर पर लखनऊ योगी सरकार में प्रदेश के गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की मुहिम ने बड़ा असर दिखाया है। बीसी सखी योजना के माध्यम से गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच रहीं हैं और 40 हजार से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहीं हैं। प्रदेश में पहली बार योगी सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण बैंकिंग को इतनी रफ्तार मिली है। बीसी सखियां गांवों में बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में काम करते हुए खातों में पैसे जमा-निकासी, आधार आधारित लेनदेन और सरकारी योजनाओं का भुगतान जैसी सेवाएं लोगों तक पहुंचा रहीं हैं। इससे ग्रामीणों को बैंक जाने की परेशानी कम हुई है और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार का रास्ता भी खुला है। प्रदेश की बीसी सखियां अब तेजी से वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा दे रहीं हैं। यह आंकड़ा जल्द ही 50 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंचने की ओर अग्रसर है। ग्रामीण महिलाएं अब तक लगभग 45 हजार करोड़ रुपए का वित्तीय लेनदेन कर चुकीं हैं। इसके अंतर्गत उन्हें लगभग 120 करोड़ का कमीशन मिला है। कई बीसी सखियां हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक कमीशन भी अर्जित कर रहीं हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। उद्यमिता और बैंकिंग के जरिए अलग पहचान बना रहीं महिलाएं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर आजीविका मिशन के माध्यम से अब तक एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब उद्यमिता, बैंकिंग और विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के जरिए अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। 50 हजार से अधिक बीसी सखियों को प्रशिक्षण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला के अनुसार प्रदेश में अब तक 50,225 बीसी सखियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से करीब 40 हजार महिलाएं सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहीं हैं। बीसी सखियों के जरिए होने वाले लेनदेन में प्रयागराज अव्वल बीसी सखियों के जरिए होने वाले लेनदेन के मामले में प्रयागराज जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है, जहां 1030 बीसी सखियां सक्रिय हैं। इसके बाद बरेली में 890 और शाहजहांपुर में 813 बीसी सखियां कार्य कर रहीं हैं। योजना का दायरा और बढ़ाने की तैयारी बीसी सखी मॉडल ने गांवों में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। आने वाले समय में इस योजना का दायरा और बढ़ाने की तैयारी है, जिससे प्रदेश के और अधिक गांवों में आर्थिक बदलाव की रफ्तार तेज होगी।

सीएम योगी का दिलचस्प संवाद, पीएम आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थियों से जुड़े सहज तरीके से

सीएम योगी का सहज अंदाज, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थियों से किया सीधा संवाद “फोन चेक कर लीजिए, पैसा आ गया होगा” विभिन्न जिलों की महिलाओं से सीधे बातचीत कर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी ली सीएम योगी ने लखनऊ प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थियों को पहली किस्त अंतरित करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई जनपदों की लाभार्थियों के साथ वर्चुअल संवाद भी किया। यह संवाद सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं रहा, बल्कि इसमें सहज शैली के साथ किए गए सरल प्रश्नों के जरिए सीएम योगी ने यह भी सुनिश्चित किया कि योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। फतेहपुर की माया देवी से बातचीत में मुख्यमंत्री ने पूछा, “आज आपके खाते में पहली किस्त आ गई है, आपने फोन देखा?” जब माया देवी ने कहा कि अभी नहीं देखा, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “एक बार चेक कर लीजिए, पैसा आ गया होगा।” इस सहज संवाद ने कार्यक्रम में आत्मीयता का माहौल बना दिया। फतेहपुर की माया देवी ने बताया कि उन्हें राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड का लाभ मिल चुका है और पति मजदूरी कर बच्चों की पढ़ाई करवा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लेने की सलाह देते हुए कहा कि अब आवास, बिजली और पानी की सुविधा भी उन्हें मिलेगी। गोरखपुर की मेनका देवी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें पहले कच्चे मकान में रहना पड़ता था, लेकिन अब आवास मिलने से बड़ी राहत मिली है। उन्हें आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला गैस और पीएम स्वनिधि योजना का लाभ भी मिला है। मुख्यमंत्री ने उनके परिवार के बारे में जानकारी ली और उन्हें नए घर के लिए बधाई दी। प्रयागराज की अर्चना ने बताया कि उन्हें बिजली, गैस और आयुष्मान कार्ड के साथ अब आवास का लाभ भी मिला है। पति मजदूरी करते हैं और वह स्वयं काम कर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करती हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें आवास निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने की सलाह देते हुए कहा कि सभी जन प्रतिनिधि इसमें आपका सहयोग करेंगे। सहारनपुर की सुनीता ने आवास मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि वह जल्द ही अपना घर बनाएंगी। परिवार में पति बिजली का काम करते हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि घर बनने के बाद सभी को गृह प्रवेश पर आमंत्रित करें और योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं। महराजगंज की गुंजा देवी ने बताया कि उन्हें पहली बार आवास का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने उन्हें आयुष्मान कार्ड बनवाने की सलाह दी और बताया कि अब शहरी क्षेत्रों में आवास के लिए अधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे बेहतर मकान बन सके। देवरिया की सरोज देवी ने बताया कि उन्हें उज्ज्वला गैस, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड का भी लाभ मिला है। उन्होंने अपने परिवार में बुजुर्गों और बच्चों की जिम्मेदारी निभाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बुजुर्गों की सेवा करना महत्वपूर्ण है और सरकार हर संभव सहयोग कर रही है। मुख्यमंत्री ने संवाद के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, राशन योजना और पेंशन योजनाओं के माध्यम से सरकार हर गरीब तक सुविधाएं पहुंचा रही है। उन्होंने लाभार्थियों को आवास निर्माण समय से पूरा करने, बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने और सभी योजनाओं का पूरा लाभ उठाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” की प्राथमिकता है कि समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ पहुंचे, जिससे उसका जीवन स्तर सुधरे और वह आत्मनिर्भर बन सके। सीएम से आवास स्वीकृति पत्र पाकर झलकी खुशी प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से 20 लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र प्रदान किए। इस दौरान कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला और जैसे-जैसे लाभार्थियों के नाम पुकारे गए, सभागार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम में सबसे पहले लखनऊ की सीमा को मुख्यमंत्री ने घर का स्वीकृति पत्र प्रदान किया। इसके बाद लखनऊ की रूबी गुप्ता, आराधना श्रीवास्तव व अंजू, सीतापुर की रेनू वर्मा व संजीवनी सिंह, बाराबंकी की शबाना रिजवी, सरिता देवी व पिंकी वर्मा को भी मंच पर बुलाकर आवास स्वीकृति पत्र दिए गए। उन्नाव की मोनिका गौतम व अर्चना देवी को भी इस योजना का लाभ मिला। हरदोई की सोनी, दीप्ति कुमारी व रेनू मिश्रा और रायबरेली की चांदनी भट्ट, रेनू व सुनील कुमार को भी मुख्यमंत्री ने आवास स्वीकृति पत्र सौंपे। कार्यक्रम के दौरान जब लाभार्थी मंच पर पहुंचे तो उनके चेहरों पर अपने घर का सपना पूरा होने की खुशी साफ दिखाई दी। कई लाभार्थियों के साथ उनके बच्चे भी मौजूद थे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने स्नेहपूर्वक दुलारा।

डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट से यूपी बन रहा निवेश का प्रमुख केंद्र: मुख्यमंत्री

ट्रस्ट और टेक्नोलॉजी उत्तर प्रदेश के परिवर्तन के दो प्रमुख आधार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रूल ऑफ लॉ और सुशासन से बदली यूपी की तस्वीर, अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी: मुख्यमंत्री डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट से यूपी बन रहा निवेश का प्रमुख केंद्र: मुख्यमंत्री नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए टाइमलाइन, मॉनिटरिंग और जवाबदेही जरूरी: मुख्यमंत्री  जापान का सिविक सेंस और तकनीकी अनुशासन अनुकरणीय, यूपी में निवेश को लेकर वैश्विक रुचि: मुख्यमंत्री राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के अधिकारियों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संवाद लखनऊ  राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय,रक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित नेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रेटजिक स्टडी कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय सशस्त्र बलों, विभिन्न देशों की सेनाओं तथा भारत सरकार की सिविल सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रस्ट और टेक्नोलॉजी उत्तर प्रदेश के परिवर्तन के दो प्रमुख आधार बने हैं। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है और आज देश में सर्वाधिक हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क उत्तर प्रदेश के पास है, जहां देश के लगभग 55 प्रतिशत एक्सप्रेसवे स्थित हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सुरक्षा एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन सरकार ने रूल ऑफ लॉ स्थापित करते हुए अवैध वसूली और अराजकता पर प्रभावी नियंत्रण किया। बेहतर कानून व्यवस्था के कारण निवेश और विकास को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का तेजी से विकास हो रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई स्थापित है, जो एक एंकर यूनिट के रूप में अनेक छोटे उद्यमों को अवसर प्रदान करेगी। कानपुर नोड में भी बड़े निवेश आए हैं, जबकि हरदोई में ‘बेब्ले स्कॉट’ उत्पादन इकाई है। उन्होंने अधिकारियों को डिफेंस कॉरिडोर का दौरा करने के लिए भी आमंत्रित किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर में देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माणाधीन है, जबकि गंगा एक्सप्रेसवे लगभग पूर्ण होने की अवस्था में है। कानून व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए प्रदेश के हर मंडल में साइबर फोरेंसिक लैब, प्रत्येक जिले में फोरेंसिक मोबाइल वैन तथा 75 साइबर थाने स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि डीबीटी व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। ई-पॉस मशीनों के माध्यम से प्रदेश की लगभग 80 हजार उचित दर की दुकानों पर पारदर्शी तरीके से राशन वितरण सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही एक करोड़ से अधिक निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को प्रतिवर्ष ₹12,000 की पेंशन सीधे उनके खातों में प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं और हाल ही में 90 हजार नए लाभार्थियों को भी इस योजना से जोड़ा गया है।  संवाद के दौरान अधिकारियों ने यह प्रश्न किया कि भारत में अनेक अच्छी नीतियां बनती हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन अक्सर नहीं हो पाता। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, फील्ड विजिट और जवाबदेही तय करने से ही परिणाम प्राप्त होते हैं। अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री से उनकी सिंगापुर और जापान यात्राओं के अनुभव के बारे में भी प्रश्न किया गया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान का सिविक सेंस, स्वच्छता और अनुशासन अत्यंत अनुकरणीय है। वहां ग्रीन एनर्जी, ट्रांसपोर्ट मोबिलिटी और अत्याधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि वहां के उद्योग जगत ने उत्तर प्रदेश में बड़े निवेश की रुचि व्यक्त की है और जल्द ही इन निवेश प्रस्तावों को मूर्त रूप मिलता दिखाई देगा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता कर रहे थे। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय सशस्त्र बलों, विभिन्न देशों की सेनाओं तथा भारत सरकार की सिविल सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इनमें ब्रिगेडियर समीर मेहरोत्रा, श्री परिमल सिन्हा, ब्रिगेडियर विपुल सिंह राजपूत, कमोडोर J.M.B.S.B. जयवीरा (श्रीलंका नौसेना), ब्रिगेडियर भारत भूषण, कर्नल जावख्लानबयार डोंडोगदोरज (मंगोलिया), कमोडोर शरद सिन्सुनवाल, कर्नल इब्राहिम नईम (मालदीव नौसेना), ब्रिगेडियर सूर्यवीर सिंह राजवी, ब्रिगेडियर सुमीत अबरोल, श्री संजय जोसेफ, ब्रिगेडियर मुरली मोहन विरुपसमुद्रम लक्ष्मिसा, कर्नल होवहानेस खानवेल्यान (आर्मेनियन एयर फोर्स), एयर कमोडोर मंटिना सुब्बा राजू, एयर कमोडोर फेलिक्स पैट्रिक पिंटो तथा कर्नल ई.बी. गुस्तावो मोरेइरो मैथियास (ब्राजील) शामिल थे।

राम मंदिर के द्वितीय तल पर होगी राम यंत्र की स्थापना, सात हजार लोगों को किया गया है आमंत्रित

एक और ऐतिहासिक उत्सव की साक्षी बनेगी रामनगरी अयोध्या 19 मार्च को राम मंदिर में राष्ट्रपति करेंगी राम यंत्र की स्थापना राम मंदिर के द्वितीय तल पर होगी राम यंत्र की स्थापना, सात हजार लोगों को किया गया है आमंत्रित लगभग सात हजार लोगों को किया गया है आमंत्रित योगी आदित्यनाथ सरकार ने तैयार की भव्य कार्यक्रम की रूपरेखा दो वर्ष पहले अयोध्या पहुंचा था राम यंत्र अयोध्या  योगी सरकार के नेतृत्व में रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव की साक्षी बनने जा रही है। राम जन्मभूमि मंदिर में 19 मार्च को राम यंत्र की विधिवत स्थापना होने जा रही है, जिसमें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी वर्ष प्रतिपदा के शुभ अवसर पर आयोजित हो रहा है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश सरकार और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस आयोजन को अत्यंत भव्य बनाने की रूपरेखा तैयार की है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने बताया कि राम यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा गया था। वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र देवताओं का निवास माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने की क्षमता रखता है। वर्तमान में इस यंत्र की राजा राम के समक्ष नियमित पूजा-अर्चना चल रही है। 19 मार्च तक यह यंत्र राम मंदिर के दूसरे तल पर पहुंच जाएगा। नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुके हैं, जिनमें दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान आचार्य शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 7000 लोग इस ऐतिहासिक समारोह में मौजूद रहेंगे। इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ऐसे संभ्रात लोग भी मौजूद रहेंगे, जिन्होंने निर्माण कार्यों में महती भूमिका निभाई है। सुबह 11 बजे के बाद पहुंचेगी राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सुबह करीब 11 बजे अयोध्या पहुंचेंगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका स्वागत करेंगे। राष्ट्रपति राम मंदिर परिसर में प्रवेश कर राम यंत्र की पूजा-अर्चना करेंगी। अभिजित मुहूर्त में ठीक 11:55 बजे यंत्र की स्थापना का मुख्य अनुष्ठान संपन्न होगा। राष्ट्रपति मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस पवित्र कार्य में भाग लेंगी। पूजन के बाद राष्ट्रपति प्रसाद ग्रहण करेंगी और भोजन के पश्चात वापस रवाना होंगी।  माता अमृतानंदनमयी अपने एक हजार भक्तों के साथ ट्रेन से पहुंचेंगी अयोध्या कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लगभग 300 संत व विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। केरल की पूज्य माता अमृतानंदनमयी अपने एक हजार भक्तों के साथ ट्रेन से अयोध्या पहुंचेंगी। मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले संभ्रांत व्यक्तियों को भी विशेष निमंत्रण भेजा गया है। इनमें एलएंडटी, टाटा कंपनी के प्रतिनिधि, गुजरात के आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई का परिवार और परिसर के विकास में भूमिका निभाने वाले अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, पत्थर-लकड़ी-संगमरमर की नक्काशी करने वाले, स्तंभों पर मूर्तियां उकेरने वाले, भगवान की प्रतिमा बनाने वाले और वस्त्र तैयार करने वाली फर्मों के लगभग 1800 कार्यकर्ता भी आमंत्रित हैं।  सिर्फ आमंत्रित सिख ही ला सकेंगे कृपाण आयोजन को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। सभी अतिथियों को विशेष पास जारी किए जाएंगे, जिन पर क्यूआर कोड अंकित होगा। मंदिर परिसर में मोबाइल फोन, हथियार या कोई सुरक्षाकर्मी साथ ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल सिख धर्म के अनुयायी ही कृपाण लेकर प्रवेश कर सकेंगे। चूंकि यह चैत्र नवरात्र का पहला दिन है, इसलिए अतिथियों के लिए फलाहारी भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। आम श्रद्धालुओं के लिए रामलला के दर्शन सामान्य रूप से जारी रहेंगे, हालांकि कुछ समय के लिए समय-सारिणी में बदलाव संभव है। मंदिर की सजावट व व्यवस्था पर दिया जा रहा विशेष ध्यान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की है। मंदिर परिसर की साफ-सफाई, सजावट और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले हजारों कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने का भी अवसर प्रदान करेगा। अयोध्या में यह आयोजन पूरे देश के लिए आस्था और गौरव का क्षण साबित होगा।

उत्तर प्रदेश में आठ डाटा सेंटर पार्क से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मिलेगी नई दिशा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में आठ डाटा सेंटर पार्क उत्तर प्रदेश को बढ़ाएंगे आगे नोएडा से वाराणसी तक आठ शहरों में विकसित होंगे डेटा सेंटर पार्क लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव, कई बड़ी कंपनियां दिखा रहीं रुचि 900 मेगावाट बिजली आपूर्ति और नई नीति से डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगा बल लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश को देश का प्रमुख डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी रणनीति के अंतर्गत प्रदेश में 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाने की योजना तैयार की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोद्योगिकी विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सेंटर पार्कों के विकास से उत्तर प्रदेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही आने वाले समय में एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए यह एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार की योजना के अनुसार इन डेटा सेंटर पार्कों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में विकसित किया जाएगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में जमीन की पहचान और आवंटन की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। कुछ कंपनियों को जमीन आवंटित भी की जा चुकी है, जबकि अन्य स्थानों पर भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार करने का काम जारी है। डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रुचि दिखाई है। एचसीएल, अडानी ग्रुप, एनटीटी डेटा, योट्टा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टर्लाइट टेक्नोलॉजीज और सिफी टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां प्रदेश में निवेश की दिशा में आगे आईं हैं। इन कंपनियों की ओर से कुल मिलाकर करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें से कई परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं और कुछ परियोजनाएं निर्माण की दिशा में अग्रसर हो रहीं हैं। डेटा सेंटर के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर बिजली की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने लगभग 900 मेगावाट बिजली की मांग को पूरा करने की योजना बनाई है। इसके लिए नए सब स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा और डेटा सेंटर पार्कों को समर्पित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि डेटा सेंटर संचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर नीति के अंतर्गत कई प्रोत्साहन भी तय किए हैं। इसमें पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क में रियायत, स्टांप ड्यूटी में छूट और बुनियादी ढांचे के विकास में सरकारी सहयोग शामिल है। इसके अलावा निवेशकों को तेज और पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम भी लागू किया गया है। इन 8 डेटा सेंटर पार्कों के विकसित होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे। लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष रोजगार और बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। अनुमान है कि परियोजनाओं के अधिकांश चरण अगले 3 से 5 वर्षों के भीतर पूरे हो जाएंगे।

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2023: विभिन्न विधाओं के कलाकारों को मिलेगा सम्मान

संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कारों की घोषणा, विभिन्न विधाओं के कलाकार होंगे सम्मानित वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2024 तक के अकादमी पुरस्कारों के लिए कलाकारों के नामों की घोषणा अकादमी पुरस्कार के साथ सफदर हाशमी एवं बी.एम.शाह पुरस्कारों के लिए कलाकारों के नामों का हुआ चयन  लखनऊ  राज्य में संगीत, नृत्य, नाटक एवं लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए समर्पित संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से अकादमी पुरस्कारों की घोषणा की गई। इस अवसर पर अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत ने बताया कि संगीत नाटक अकादमी उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने एवं उसके संवर्धन में योगदान देने वाले कलाकारों को अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित करती है। इसी क्रम में अकादमी की ओर से वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2024 तक के चार वर्षों के अकादमी पुरस्कार के साथ नाटक एवं रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलाकारों को बी.एम. शाह पुरस्कार और सफदर हाशमी पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है।    संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से वर्ष 2021 के अकादमी पुरस्कार के लिए शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में पं. दीनानाथ मिश्रा,  लोक गायन के लिए श्रीकांत वैश्य, नक्कारा वादन के लिए कानपुर के प्रभु दयाल और शहनाई वादन के लिए वाराणसी के जवाहर लाल के नामों की घोषणा की गई। इस क्रम में रंगमंच निर्देशन के लिए भूमिकेश्वर सिंह, रंगमंच तकनीकी-प्रकाशन के लिए जगमोहन रावत, नौटंकी निर्देशन के लिए राजकुमार श्रीवास्तव एवं नाट्य लेखन के लिए विजय पंडित को सम्मानित किया जाएगा।  कला उन्नयन के लिए मथुरा के मोहन स्वरूप भाटिया और वाराणसी की माला होम्बल के नामों का चयन किया गया है। जबकि नृत्य विधा में मथुरा,वृदांवन की भरतनाट्यम नृत्यांगना प्रतिभा शर्मा को पुरस्कार दिया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2021 के सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए रीवा के मनोज कुमार मिश्रा एवं बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए दिल्ली के सतीश आनन्द पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है। इसी क्रम में वर्ष 2022 के अकादमी पुरस्कार के लिए शास्त्रीय गायन एवं लोक गायन के लिए मथुरा के आनन्द कुमार मलिक व माधुरी शर्मा, जबकि कथक नृत्य के लिए लखनऊ के पं. अनुज मिश्रा, पखावज वादन के लिए शशिकांत पाठक और तबला वादन के लिए प्रयागराज के पंकज कुमार श्रीवास्तव के नामों की घोषणा की गई है। वहीं गिटार वादन के लिए सुनील पावगी, बांसुरी वादन के लिए मोहन लाल कुंवर, रंगमंच अभिनय के लिए मंजू कौशल तथा रंगमंच तकनीक-कठपुतली के लिए मेराज आलम को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।  नाट्य लेखन,संगीत, नृत्य एवं रंगमंच के लिए वाराणसी के विजय शंकर मिश्रा एवं कला समीक्षा के लिए सीतापुर के पद्मकांत शर्मा को सम्मानित करने की घोषणा की गई है। जबकि वर्ष 2022 के सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए नई दिल्ली के राजेश सिंह एवं बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए भोपाल के कमल जैन के नामों का चयन किया गया है।  संगीत नाटक अकादमी की ओर से वर्ष 2023 के लिए शास्त्रीय गायन की श्रेणी में डॉ. रामशंकर, सुगम गायन के लिए मनोज गुप्ता एवं लोक गायन के लिए राकेश श्रीवास्तव को सम्मानित करने की घोषणा की गई। जबकि कथक नृत्य के लिए लखनऊ की डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव, तबला वादन के लिए अनूप बनर्जी और बांसुरी वादन के लिए चेतन कुमार जोशी के नामों का चयन किया गया है। वहीं नाटक एवं रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिए राजकुमार उपाध्याय, अभिनय के लिए संजय देगलुरकर, लेखन-संगीत एवं नृत्य के लिए उमा त्रिगुणायत, कला उन्नयन के लिए डॉ. ओमेन्द्र कुमार एवं कला समीक्षा के लिए अर्जुनदास केसरी को पुरस्कृत किया जाएगा। वहीं सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए गाजियाबाद के अजय कुमार और बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए गोरखपुर के रविशंकर खरे के नाम का चयन किया गया है।  इसी क्रम में वर्ष 2024 के अकादमी पुरस्कार में शास्त्रीय गायन के लिए रीतेश-रजनीश मिश्रा, सुगम गायन के लिए मुक्ता चटर्जी और लोकगायन (आल्हा) के लिए रामस्थ पाण्डेय को सम्मानित करने की घोषणा की गई है। वहीं लोक नृत्य के लिए सुगम सिंह शेखावत, दुक्कड़ वादन के लिए मंगल प्रसाद, वायलिन वादन के लिए सुखदेव मिश्रा एवं सितार वादन के लिए वाराणसी के राजेश शाह को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। जबकि रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिए सुषमा शर्मा, अभिनय क्षेत्र में रविकांत शुक्ला ‘शिब्बू’, कला उन्नयन के लिए राजेश पंडित एवं कला समीक्षा के लिए शशिप्रभा तिवारी को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2024 के लिए सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए लखनऊ के शुभदीप राहा और बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए भोपाल के संजय मेहता के नामों का चयन किया गया है। अध्यक्ष प्रो. जयंत ने बताया कि अकादमी की ओर से जल्द ही विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर इन सभी कलाकारों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन में सिर्फ दो महीने का समय, मेरठ से प्रयागराज का सफर होगा सरल, कुछ काम बाकी

प्रयागराज  प्रयागराज-मेरठ के बीच 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। रविवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार ने मेरठ में निरीक्षण के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक्सप्रेसवे को शीघ्र ही जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  मेरठ पहुंचे सीईओ ने मंडलायुक्त भानुचंद्र गोस्वामी और डीएम डॉ. वीके सिंह के साथ गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण की प्रगति के साथ ही औद्योगिक गलियारा विस्तार और टोल प्लाजा की तकनीक के बारे में जानकारी ली।  साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा उन्होंने खड़खड़ी टोल प्लाजा पर अशोक के पौधे भी लगाए। सीईओ ने बताया कि तीसरे चरण में केवल एक्सप्रेसवे की साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा है। यह काम भी एक माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। मेरठ जिले में 22 किमी एक्सप्रेसवे अक्तूबर 2025 में ही पूरा हो गया था।    खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार बिजौली के निकट खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार है और इसका परीक्षण भी हो चुका है। छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे का विस्तार कर आठ लेन का किया जा सकेगा। मेरठ से बदायूं तक के प्रथम सेक्टर में 130 किलोमीटर की लंबाई में 129 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। एक्सप्रेसवे पर चार जगह लड़ाकू विमानों के लिए हवाई पट्टियां गंगा एक्सप्रेसवे पर केवल वाहन ही नहीं दौड़ेंगे, बल्कि आपातकाल की स्थिति में लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे पर चार स्थानों पर लड़ाकू विमानों के उतरने के लिए हवाई पट्टियां बनाई जा रही हैं। इनमें से शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किलोमीटर लंबी पट्टी तैयार कर दी गई है।    एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार की सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाएगी। तीसरे चरण के अधूरे काम को तेजी से पूरा किया जा रहा है। सीईओ ने यूपीडा की परियोजना क्रियान्वयन इकाई के परियोजना निदेशक राकेश मोघा और गंगा एक्सप्रेसवे की संचालन एजेंसी आईआरबी के मुख्य प्रबंधक अनूप सिंह से एक्सप्रेसवे की प्रगति की जानकारी जानी। उन्होंने टोल पर बिना बैरियर के वाहनों के प्रवेश को लेकर अपनाई जा रही तकनीक को भी जाना। टोल पर बिना रुके गुजरेंगे वाहन गंगा एक्सप्रेसवे पर बिजौली के निकट खड़खड़ी में बनाए गए टोल प्लाजा पर वाहनों का प्रवेश बिना बैरियर के ही होगी। यह एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके तहत वाहनों को टोल प्रवेश के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। यह जानकारी आईआरबी के मुख्य महाप्रबंधक अनूप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में निकास के दौरान भी इसी प्रकार टोल कट जाएगा। इस नई व्यवस्था से गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी लाइन नहीं लगेगी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार ने निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी हापुड़ और अन्य अधिकारियों के काफिले के साथ गंगा एक्सप्रेसवे का बदायूं तक निरीक्षण करने के लिए निकल गए। औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा मनोज कुमार ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे शीघ्र ही औद्योगिक गलियारा आकार लेता दिखेगा। इसके लिए काफी भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। विदेशी कंपनियां भी इस औद्योगिक गलियारे में अपनी यूनिट स्थापित करने के लिए आ रही हैं। आने वाले समय में यूपी उद्योग प्रदेश बन जाएगा। पूरा देश गंगा एक्सप्रेसवे किनारे बनने वाले औद्योगिक गलियारे की तरफ देखेगा। यह गलियारा प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  

यूपी के इस जिले में जनगणना-2027 के लिए फील्ड ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू, तैयारियां तेज

बाराबंकी  जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने जिले में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। नामित फील्ड ट्रेनरों को दो चरणों में प्रशिक्षण सागर इंस्टीट्यूट में दिया जाएगा। जनगणना से जुड़ी प्रक्रियाओं, प्रपत्रों के उपयोग और डिजिटल व्यवस्था की जानकारी मिलेगी। 110 फील्ड ट्रेनर नामित हो चुके हैं। ज्यादातर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) हैं। प्रस्तावित जनगणना-2027 को जिला प्रशासन से जारी कार्यक्रम में पहला चरण 16 मार्च से 18 मार्च तक और दूसरा चरण 23 मार्च से 25 मार्च 2026 तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। समय सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित है। नामित पर्यवेक्षकों व अन्य कार्मिकों को घर-घर जाकर सर्वेक्षण की प्रक्रिया, निर्धारित प्रपत्रों को सही तरीके से भरने, जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों के संकलन और रिपोर्टिंग की विधि पर विस्तार से मार्गदर्शन किया जाएगा। अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में नामित सभी कार्मिकों को समय से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित विभागों के किसी भी कर्मचारी की अनुपस्थिति न रहे। 16 मार्च से 18 तक फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 19 मार्च से डीआरडीए में समस्त एसडीएम, बीएसए, डीपीआरओ, सूचना अधिकारी शामिल होंगे।  

योगी सरकार ने खाद्य लाइसेंस नियमों में बदलाव किया, कारोबारियों को मिलेगी राहत, 1 अप्रैल से लागू होगी नई व्यवस्था

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को बड़ी राहत देते हुए योगी सरकार ने खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत अब हर साल खाद्य लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य नहीं होगा। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होगी। सरकार ने यह बदलाव खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार का अनुज्ञापन और पंजीकरण) संशोधन विनियम, 2026 के तहत किया है। गजट में प्रकाशन के साथ ही नियम प्रभावी हो चुके हैं और इन्हें एक अप्रैल से लागू किया जाएगा। लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं नए नियमों के अनुसार नगर निगम या स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत ठेले-खोमचे और फेरीवाले अब स्वतः ही भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) में पंजीकृत माने जाएंगे। इससे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा इस व्यवस्था के दायरे में छोटे खुदरा विक्रेता, स्ट्रीट फूड विक्रेता, अस्थायी स्टॉल संचालक, फूड ट्रक संचालक और कुटीर स्तर के खाद्य उद्योग भी शामिल होंगे। जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर अब पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा। हालांकि सभी खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यापारी वार्षिक शुल्क या फूड सेफ्टी अनुपालन से जुड़ा रिटर्न जमा नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस या पंजीकरण स्वतः निलंबित माना जाएगा। निरीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव किया सरकार ने निरीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। अब खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण जोखिम आधारित प्रणाली के तहत किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर थर्ड पार्टी से फूड सेफ्टी ऑडिट भी कराया जा सकेगा। टर्नओवर सीमा में भी बढ़ोतरी व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल के मुताबिक पहले व्यापारी एक से पांच वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस लेते थे। समय पर नवीनीकरण न कराने पर लाइसेंस निरस्त हो जाता था और उन्हें दोबारा जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा नियमों में टर्नओवर की सीमा भी बढ़ा दी गई है। पहले 12 लाख रुपये सालाना टर्नओवर तक के कारोबारियों को पंजीकरण मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई वहीं पहले पांच करोड़ रुपये तक के कारोबारियों को राज्य स्तर से लाइसेंस मिलता था और उससे अधिक टर्नओवर पर केंद्र से लाइसेंस लेना पड़ता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है। हालांकि जिन कारोबारियों के लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता 31 मार्च तक है, उन्हें फिलहाल नवीनीकरण कराना होगा। इसके बाद नए नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे।  

जालोर में योगी का संबोधन: जौहर को आत्मसम्मान का तेज बताया, बंदरों की मिसाल देकर लोभ छोड़ने की सीख

जालोर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जालोर के प्रसिद्ध सिरे मंदिर में रत्नेश्वर महादेव मंदिर की 375वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित महायज्ञ में शिरकत की। कड़े सुरक्षा घेरे और संतों के भारी जमावड़े के बीच योगी का यह दौरा आध्यात्मिक होने के साथ-साथ राजस्थान की वीरता को नमन करने वाला रहा। राजस्थान की परंपरा : ‘जौहर’ केवल बलिदान नहीं, स्वाभिमान है योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राजस्थान की वीरांगनाओं को नमन करते हुए ‘जौहर’ को परंपरा का ‘तेज’ बताया। उन्होंने चित्तौड़गढ़ की महारानी पद्मिनी और जालोर के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह वह शक्ति है जिसने शत्रुओं के सामर्थ्य को भस्म कर दिया। उन्होंने महाराजा मानसिंह द्वारा शिलालेखों के माध्यम से इतिहास सहेजने के कार्य को भी अद्भुत बताया। बंदरों से सीखा ‘साधना’ का पाठ: “लोभ से बचना ही योग है” मंदिर जाते समय ‘बंदरों के चौराहे’ पर योगी ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने लंगूरों को फल और रोटियां खिलाईं और गौर किया कि एक बंदर ने तब तक दूसरी रोटी नहीं ली जब तक उसने पहली खा नहीं ली। सीख : योगी ने कहा कि मनुष्य में ‘संचय’ करने की प्रवृत्ति ही अशांति की जड़ है। अगर इंसान भी बंदरों की तरह लोभ छोड़ दे और केवल जरूरत भर का रखे, तो समाज से अराजकता खत्म हो सकती है। युवाओं को चेतावनी : “स्मार्टफोन और नशा, सोचने की शक्ति के दुश्मन” योगी आदित्यनाथ ने आज के दौर की सबसे बड़ी समस्याओं— नशा और स्मार्टफोन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा: स्मार्टफोन का अधिक उपयोग सोचने की शक्ति को खत्म कर रहा है। लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं और ऑनलाइन गेम्स जीवन बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि भोजन और पूजा के समय फोन को खुद से दूर रखें और परिवार को समय दें। भव्य स्वागत और संतों का सानिध्य मंच पर योगी के साथ तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग समेत राजस्थान भर के बड़े साधु-संत मौजूद रहे। मंदिर समिति ने 5 किलो फूलों का हार पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। करीब 40 मिनट के भाषण में उन्होंने योग और व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। सत्ता और साधना का संगम योगी आदित्यनाथ का यह दौरा धार्मिक कम और ‘संस्कार निर्माण’ का कार्यक्रम अधिक लगा। उन्होंने जालोर के प्राचीन वैभव (सिरे मंदिर की कारीगरी) की तुलना आज के आधुनिक मूल्यों से की और यह संदेश दिया कि तकनीक के युग में भी हमारे मूल्य और परंपराएं ही हमें सुरक्षित रख सकती हैं।

Government Offers Incentives with a 50% Subsidy; Floriculture Forges a New Identity for Farmers

  सरकारी योजनाओं का असर: पारंपरिक खेती छोड़ किसान अपना रहे हैं जरबेरा जैसी उच्च लाभ वाली खेती लखनऊ, योगी सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है जिससे वे अच्छा लाभ कमा रहे हैं। इन योजनाओं के सहयोग से किसान अब आधुनिक और उच्च लाभ वाली खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है बाराबंकी जिले के युवा किसान नीरज पटेल की, जिन्होंने फूलों की खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। उन्हें उत्तर प्रदेश की ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना’ के अंतर्गत लाभ मिला। उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से बदला नीरज का जीवन नीरज पटेल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती को ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। वैसे उनके घर में पारंपरिक खेती ही की जाती है। लेकिन उन्होंने कुछ अलग करने का सोचा और एक दिन वह उद्यान विभाग के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्हें जरबेरा फूलों की खेती के बारे में जानकारी मिली। यह जानकारी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई। उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ जरबेरा की खेती शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना’ का लाभ उठाया। उन्हें इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2018 में 29 लाख 50 हजार का ऋण मिला और कुछ महीने बाद उन्हें 50% की सब्सिडी भी मिली।    राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली नई राह सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन’ और संरक्षित खेती के तहत पॉलीहाउस तकनीक से फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी योजना के अंतर्गत नीरज पटेल ने अपने एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया। पॉलीहाउस लगाने में लगभग 70 से 75 लाख रुपये की लागत आई। सरकार की योजना के अंतर्गत उन्हें ऋण और अनुदान मिला जिससे यह खेती करना उनके लिए काफी आसान हो गया। जरबेरा की खेती से आत्मनिर्भर बने नीरज आज नीरज के पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा पौधे लगे हुए हैं। यह पौधे रोजाना उत्पादन देते हैं और एक बार लगाए जाने के बाद लगभग छह साल तक लगातार उत्पादन देते हैं। अभी नीरज ने 5 अन्य लोगों को रोजगार दिया है, जिससे आसपास के ग्रामीणों को भी आय का नया स्रोत मिला है। आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए पौधों को बूंद-बूंद पानी दिया जाता है। इससे पानी की बचत होती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। यह तकनीक इजरायली पद्धति पर आधारित है, जो खेती को अधिक लाभकारी बनाती है। हर साल 10 लाख रुपये तक की कमाई जरबेरा के फूलों की बाजार में काफी मांग है। शादी-समारोह, सजावट और विभिन्न आयोजनों में इन फूलों का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। इसी कारण नीरज पटेल को अपने फूलों की बिक्री में भी कोई कठिनाई नहीं आती। उन्होंने बताया कि साल भर में सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें लगभग 8 से 10 लाख रुपये की बचत हो जाती है। नीरज की यह पहल केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, वह अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फूलों की आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

योगी सरकार में डिजिटल क्रॉप सर्वे को मिली रफ्तार, खरीफ और रबी दोनों सीजन में बड़े पैमाने पर सर्वे पूरा

किसानों के हित में बड़ा कदम, यूपी में तेजी से आगे बढ़ रहा ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री अभियान के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और कृषि व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। खरीफ और रबी दोनों सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत प्रदेश के राजस्व गांवों में बड़ी संख्या में खेतों और फसलों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है, जिससे फसल से संबंधित सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।   प्रदेश में कुल 1,08,935 राजस्व गांवों में से 95,765 गांवों का जियो रेफरेंसिंग कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके आधार पर खरीफ और रबी दोनों सीजन में लाखों खेतों का डिजिटल सर्वे किया गया है। खरीफ सीजन में 5,37,08,511 से अधिक प्लॉट का सर्वे अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया है, जबकि रबी सीजन में भी 5,56,44,677 से अधिक प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली गति योगी सरकार द्वारा किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी मिशन मोड में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार प्रदेश में पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 2,88,70,495 है। सत्यापन अभियान के बाद 2,31,36,350 से अधिक किसानों का डेटा उपलब्ध हुआ है। इनमें से अब तक 1, 67,01,996 से अधिक पीएम किसान सम्मान योजना के लाभार्थी फार्मर रजिस्ट्री में शामिल हो चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का लगभग 72.19 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त करीब 28, 37,162 वे किसान भी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं जो पीएम किसान सम्मान योजना में शामिल नहीं हैं।    डिजिटल तकनीक से कृषि व्यवस्था होगी मजबूत योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों का सटीक डाटाबेस तैयार होगा, जिससे फसल बीमा, कृषि अनुदान, आपदा राहत और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी।    योगी सरकार के कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता जा रहा है। आने वाले समय में इन पहल के माध्यम से किसानों को योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी तरीके से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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