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आईआईएम की ओर से नतीजो का एलान जनवरी के दूसरे सप्ताह में हो सकता है

नई दिल्ली कॉमन एडमिशन टेस्ट रिजल्ट की घोषणा जनवरी के सेकेंड वीक में जारी कर सकता है। आईआईएम की ओर से नतीजो का एलान आधिकारिक वेबसाइट https://iimcat.ac.in पर किया जाएंगा। रिजल्ट से परीक्षार्थियों के लिए उत्तरकुंजी जारी होनी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैट आंसर-की दिसंबर के पहले सप्ताह में जारी हो सकती है। हालांकि, एग्जाम की आंसर-की रिलीज होने के संबंध में आधिकारिक कोई सूचना नहीं जारी हुई है, इसलिए परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे पोर्टल पर लेटेस्ट अपडेट प्राप्त करने के लिए नजर बनाएं रखें। 24 नवंबर को आयोजित हुई थी कैट परीक्षा इंडियन इंस्ट्टीयूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता की ओर से कैट परीक्षा का आयोजन 24 नवंबर, 2024 को किया गया था। यह एग्जाम देश के 170 शहरों में किया गया था। अब परीक्षार्थियों को उत्तरकुंजी और रिस्पॉस शीट रिलीज होने का इंतजार है, जो जल्द ही जारी हो सकती है। उत्तरकुंजी जारी होने के बाद कैंडिडेट्स अपने क्वैश्चचन की जांच कर सकेंगे। साथ ही अगर किसी प्रश्न पर कोई आपत्ति है तो ऑब्जेक्शन उठा सकेंगे। उत्तरकुंजी पर आपत्तियां एकत्र करने के बाद संस्थान की ओर से फाइनल आंसर-की और नतीजो का एलान किया जाएगा। रिजल्ट जनवरी के दूसरे सप्ताह में घोषित होने की संभावना है फिलहाल संस्थान ने नतीजे की कोई डेट अभी तक नहीं जारी की है। सबसे पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक पोर्टल iimcat.ac.in पर जाना होगा। अब, होमपेज पर उपलब्ध कैट एग्जाम आंसर-की पीडीएफ लिंक पर क्लिक करें।अब उत्तर कुंजी पीडीएफ पेज पर जाएं। लॉगिन क्रेडेंशियल सबमिट करें। अब कैट उत्तर कुंजी 2024 पीडीएफ आपकी स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी। इसे डाउनलोड करें और भविष्य की आवश्यकता के लिए उसकी हार्ड कॉपी अपने पास रखें। बता दें कि कैट परीक्षा के माध्यम से कैंडिडेट्स देश के विभिन्न इंडियन इंस्ट्टीयूट ऑफ मैनेजमेंस्ट (IIM) संस्थानों में प्रवेश पा सकेंगे। इस एग्जाम के लिए आवेदन फॉर्म 1 अगस्त, 2024 से स्वीकार करना शुरू हुए थे। वहीं, 20  सितंबर, 2024 तक परीक्षा के लिए आवेदन कर पाएंगे। वहीं, 24 नवंबर को एग्जाम कंडक्ट कराया गया था। इसके बाद अब उम्मीदवार उत्तरकुंजी की राह देख रहे हैं।  इस एग्जाम से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा।

टीचिंग में बनाना है करियर तो 12वीं के बाद करें ये कोर्स, सुनहरा होगा भविष्य

देशभर में रिजल्ट बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट जारी होने का दौर शुरू हो चुका है। इसी के चलते 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने जा रहे ऐसे स्टूडेंट्स जो आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की सोच रहे हैं या टीचर बनना चाहते हैं उनके लिए अभी से दरवाजे खुल जाएंगे। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद ही बहुत से ऐसे कोर्स उपलब्ध हैं जिनमें आप प्रवेश लेकर इस क्षेत्र में अपने करियर का निर्माण कर सकते हैं। इसके लिए आपको ग्रेजुएशन डिग्री हासिल करने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि इन कोर्स के साथ आपको टीचिंग योग्यता के साथ ही ग्रेजुएशन डिग्री की मान्यता प्राप्त हो जाएगी। ये हैं कोर्स अगर आप बारहवीं उत्तीर्ण कर चुके हैं और शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो आप बीएलएड/डीएलएड/बीए बीएड/बीएससी बीएड कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इन सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसमें बीएलएड/बीए बीएड/बीएससी बीएड सभी चार वर्षीय जबकि डीएलएड दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। कैसे होता है प्रवेश बीएलएड/बीए बीएड/बीएससी बीएड में प्रवेश के लिए राज्यों की ओर से प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इन इंटीग्रेटेड कोर्सेज में दाखिले के लिए अब देश भर में एक परीक्षा आयोजित करने का भी प्रावधान है। इसके अलावा डीएलएड पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कई राज्यों में प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है वहीं कहीं-कहीं मेरिट के आधार पर भी प्रवेश दिया जाता है। आपको बता दें कि बीएड करने वाले अभ्यर्थी छठी से आठवीं कक्षा तक में पढ़ाने के लिए पात्रता प्राप्त करते हैं। इसी प्रकार बीएलएड डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवार 6 साल से बड़े और 12 साल से कम उम्र के बच्चों को पढ़ाने के लिए योग्यता प्राप्त कर लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशनुसार डीएलएड वाले अभ्यर्थी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने के योग्य होते हैं।  

वन्यजीव हमलों में होने वाली मौतों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ाकर 25 लाख रुपये हुई

भोपाल वन्यजीव हमलों में होने वाली मौतों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी है। पहले यह राशि सिर्फ 8 लाख रुपये थी। नई व्यवस्था में पीड़ित परिवार को तुरंत 10 लाख रुपये मिलेंगे और बाकी 15 लाख रुपये की FD बनाई जाएगी। यह कदम मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया है। मध्य प्रदेश का मुआवजा अब महाराष्ट्र के बराबर हो गया है। दो किश्तों में जाएगी राशि यह महत्वपूर्ण बदलाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद आया है। वन विभाग इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। इससे पहले, वन्यजीव हमले में मौत पर मिलने वाला मुआवजा महाराष्ट्र के मुकाबले काफी कम था। अब बढ़ी हुई राशि से पीड़ित परिवारों को कुछ आर्थिक राहत मिल सकेगी। यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त 10 लाख रुपये की तत्काल दी जाएगी। बाकी 15 लाख रुपये की FD की जाएगी। इस FD में से 10 लाख रुपये 5 साल बाद और 5 लाख रुपये 10 साल बाद मिलेंगे। यह राशि मृतक के वारिसों को ब्याज समेत मिलेगी। हर साल आते हैं 40 मामले वर्तमान में, वन विभाग के पास हर साल वन्यजीव हमलों में मौत के लगभग 40 मामले आते हैं। इसके लिए करीब 3 करोड़ रुपये का बजट रखा जाता है। नया प्रस्ताव कैबिनेट में पेश होने के बाद इस बजट में भी इजाफा होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र में भी इसी तरह की व्यवस्था है, जहां वन्यजीव हमले में मौत पर 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। मध्य प्रदेश में अभी तक मौत पर 8 लाख, इलाज पर खर्च की गई राशि और स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये दिए जाते थे। वहीं, छत्तीसगढ़ में 6 लाख, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में 5-5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। हैरान करने वाले हैं आंकड़े मध्य प्रदेश में बाघ, तेंदुए जैसे मांसाहारी जानवरों का रिहायशी इलाकों में आना बढ़ रहा है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। पिछले पांच सालों में वन्यजीव हमलों में 292 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2023-24 में अक्टूबर तक वन्यजीव हमलों में मौत, घायल होने और पशुओं के नुकसान के मामलों में 15 करोड़ 3 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। यह आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। एमपी से सटे प्रदेशों में भी अलग है राशि मध्य प्रदेश से सटे राज्यों में मुआवजा राशि अलग-अलग है। छत्तीसगढ़ में जनहानि पर 6 लाख रुपये मिलते हैं, लेकिन स्थायी अपंगता पर कोई मुआवजा नहीं है। उत्तर प्रदेश में जनहानि पर 5 लाख और स्थायी अपंगता पर 4 लाख रुपये मिलते हैं। राजस्थान में जनहानि पर 5 लाख और स्थायी अपंगता पर 3 लाख रुपये मिलते हैं। गुजरात में जनहानि पर 5 लाख और स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये मिलते हैं। महाराष्ट्र में जनहानि पर 25 लाख और स्थायी अपंगता पर 7.5 लाख रुपये मिलते हैं।

मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हो रहा अवैध कारोबार

Illegal cutting of teak wood from Madhya Pradesh is taking place in Nagpur, Rajasthan, Andhra Pradesh and Telangana. भोपाल। जंगल महकमे मुख्यालय सर्किल और वनमंडलों में कई पद रिक्त पड़े हैं। खासकर सर्किल और वनमंडलों डीएफओ से लेकर डिप्टी रेंजर्स के पास खाली है। मैदानी अवल की बात करें तो वन विभाग में वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए 25000 के लगभग अमला स्वीकृत है. इनमें से 1900 खाली पड़े हैं. स्वीकृति अमले से 8% फॉरेस्ट गार्ड डीएफओ और पीएफ कार्यालय बाबू गिरी का काम कर रहे हैं तो 4% फॉरेस्ट गार्ड रसूखदार प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अफसरों के कार्यालयों और उनके बंगले पर दरबान दरबान बने हुए हैं. यह स्थिति भोपाल से लेकर 16 सर्किल और 65 वन मंडलों में बनी हुई है। इसका फायदा लकड़ी माफिया से लेकर अतिक्रमण माफिया तक उठा रहे हैं। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में अवैध कारोबार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार टिंबर माफिया प्रदेश में सागौन की अवैध कटाई कर 100 करोड़ रूपया से अधिक का कारोबार करता है। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल और उज्जैन वन वृत में सबसे अधिक लकड़ी की अवैध कटाई हो रही है। धार वन मंडल में 40 घनमीटर सागवान की लकड़ी जप्त और देवास वन मंडल में हुई अवैध कटाई इस बात की गवाह है कि प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध कटाई हो रही है। लकड़ी की अवैध कटाई और अन्य राज्यों में तस्करी की शिकायत नागपुर टिंबर संगठन के अलावा मध्य प्रदेश के टिंबर संगठन ने बकायदा पीसीसीएफ संरक्षण को की है। इस शिकायत की पुष्टि वन विभाग में अवैध कटाई से संबंधित दर्ज अपराधिक प्रकरण भी करते हैं। इस संबंध में छिंदवाड़ा सर्कल में एक समीक्षा बैठक भी हो चुकी है। इस समीक्षा बैठक में वन वृत और वन मण्डलों में पदस्थ आईएफएस अधिकारियों के साथ-साथ टिंबर संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में दिलचस्प पहलू यह रही कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदार अधिकारी टिंबर संगठन के पदाधिकारी से प्रमाण मांगते नजर आ रहे थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा में तो अवैध कटाई और तस्करी से संबंधित समीक्षा हुई किंतु मुख्यालय स्तर पर पूर्णकालिक पीसीसीएफ संरक्षण नहीं होने की वजह से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। टिंबर संगठन के पदाधिकारी के शिकायत की पुष्टि वन विभाग के अधिकृत आंकड़े भी कर रहें है। विभाग के अधिकृत आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जबलपुर वन वृत में कुल दर्ज अपराधी प्रकरण 3445 में से 3129 प्रकरण केवल अवैध कटाई से संबंधित हैं। इसी प्रकार छिंदवाड़ा वन वृत्त में दर्ज प्रकरण की संख्या 2302 है तो अवैध कटाई के प्रकरण 2206 दर्ज किए गए हैं। उज्जैन वन वृत 1201 प्रकरण अवैध कटाई से संबंधित हैं। विदिशा वन मंडल के लटेरी और उसके आसपास क्षेत्र में आज भी अवैध कटाई के सिलसिला जारी है। अपर मुख्य सचिव अशोक अग्रवाल ने कलेक्टर एसपी के साथ बैठक की परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। लटेरी में आज भी रेंजर के पद खाली पड़े हैं। मुख्यालय और राज्य शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया। सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण संरक्षण शाखा से एकत्रित आकड़ों के मुताबिक वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण दर्ज हो रहे है। पिछले तीन सालों में जंगलों की सुरक्षा में आधा दर्जन वनकर्मियों को अपनी जान तक गंवाने पड़े है। यही नहीं, विदिशा, रायसेन, गुना, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, नरसिंहपुर, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह, बुरहानपुर, वन मंडलों में 2 दर्जन से अधिक वन कर्मचारियों पर माफिया प्राणघातक हमला कर चुके हैं। सीआरपीसी की धारा 197 के तहत वन कर्मियों को प्रोटेक्शन दिया गया है कि गोलीबारी की घटना में तब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी जब तक राजपत्रित ऑफिसर की जांच रिपोर्ट न जाए। बुरहानपुर के बाद लटेरी गोलीकांड में वन कर्मियों पर बिना जांच के आईपीसी की धारा 302 और 307 के तहत एफआईआर दर्ज कर दी गई। धार में कछुआ गति से 40 घन मीटर की जांच वन मंडल धार में आरा मशीन मनावर से जब्त 40 घन मीटर अवैध सागवान के मामले में जांच कछुआ गति से चल रही है। बताया जाता है कि जांच में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बचाने का प्रयास चल रहा है। 3 सप्ताह बाद भी वन विभाग की टीम या पता लगाने में असफल रही कि 40 घन मीटर सागवान चटपट धार में कहां से आई ? वन विभाग यह भी पता नहीं लगा सकी कि 2 साल से चल रहे गोरख धंधे में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का इदरीशखान से सांठ-गांठ है। धार वन विभाग की बड़ी कार्यवाही के बाद यह सवाल उठने लगा है कि इतनी बड़ी मात्रा में सागवान इमारती लकड़ी कहां से काट कर आ रही थी? अवैध कटाई और उसके अवैध खरीद-फरोख्त के गोरख धंधे में वन विभाग के कौन-कौन अधिकारी -कर्मचारी शामिल थे? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तीन दिन पहले ही फॉरेस्ट के कर्मचारियों ने निरीक्षण किया था और सब कुछ ओके पाया था। मनावर एसडीओ और कुक्षी के प्रभारी रेंजर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पीएम जन-मन योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूहों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समाज के सबसे कमजोर आय वर्ग के लोगों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई पीएम जन-मन योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक के भारियाढाना गांव की श्रीमती प्रमिला पति संजय भारती को इस योजना का भरपूर लाभ मिला है। प्रमिला मध्यप्रदेश की विशेष पिछड़ी भारिया जनजाति से हैं। वे अपने परिवार के साथ बड़ी विपरीत परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रही थीं। परिवार में पांच सदस्य हैं। दिहाड़ी मजदूरी ही उनके परिवार का मुख्य आय स्रोत था और न्यूनतम आय में उनका जीवन बेहद कठिन था। श्रीमती प्रमिला भारती और उनके परिवार को इसी योजना से कई लाभ मिल रहे हैं, जिनसे उनका जीवन अब बेहद खुशहाल हो गया है। परिवार के पास आधार कार्ड, समग्र आईडी, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों सहित जन-धन बैंक खाता भी है। इनकी मदद से उन्हें शासन की सभी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। योजना के तहत सबसे पहले उन्हें एक पक्का मकान मिला। पहले उनके पुराने (मिट्टी और बांस से बने) कच्चे मकान में बारिश में पानी टपकता था और दीवारें भी अत्यंत कमजोर थीं। बारिश भीगते हुए और सर्दी कंपकपाते हुए बीतती थी। पक्की छत वाले मकान के रूप में अब उनके परिवार को एक स्थायी, मजबूत और सुरक्षित आवास मिल गया है। पहले चूल्हे पर लकड़ी जलाकर धुंए में खाना पकाने से उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं होती थीं। लेकिन उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। अब वे साफ-सुथरे वातावरण में भोजन बनाती हैं और गैस सिलेंडर रिफिल के लिए उन्हें सब्सिडी भी मिलती है। परिवार के सभी सदस्यों के जाति प्रमाण पत्र बन जाने से प्रमिला को अपने बच्चों की शिक्षा में भी उन्हें भरपूर मदद मिल रही है। एमपीटास पोर्टल पर प्रोफाइल बनने के बाद दोनों बच्चों को एसटी छात्रवृत्ति का लाभ मिला। इससे उनके शिक्षा संबंधी खर्चों का भार भी कम हुआ। पीएम जन-धन योजना से परिवार का बैंक खाते खोलने से उन्हें भारिया पोषण आहार योजना के तहत हर महीने पोषण आहार के लिए राशि सीधे खाते में मिल रही है। साथ ही आयुष्मान कार्ड मिलने से उनके परिवार को अब पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा भी मिल गई है। पीएम जन-मन योजना के कारण श्रीमती प्रमिला भारती और उनके परिवार को वे सभी सुविधाएं मिल रही हैं, जिनकी उन्हें लंबे समय से आस थी। शासकीय योजनाओं का सीधा और समग्र लाभ मिलने से उनका जीवन स्तर बेहतर हो गया है। श्रीमती प्रमिला भारती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस परिवर्तन के लिए धन्यवाद देती हैं। वे कहतीं हैं “पी.एम. जन-मन ने हमारी सारी समस्याएं दूर कर दी हैं। आज मेरा पूरा परिवार खुशहाल और सुरक्षित जीवन जी रहा है।”

माफी औकाफ की जमीन पर बाउण्ड्रीवॉल सहित अन्य अतिक्रमण ध्वस्त कराए 100 करोड़ रूपए बाजार मूल्य की है यह जमीन

ग्वालियर ग्वालियर शहर के बीचों बीच तारागंज कोटा लश्कर स्थित रामजानकी मंदिर ट्रस्ट की लगभग पौने नौ बीघा सरकारी जमीन को जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। राज्य शासन के निर्देशों के पालन में मंदिरों से जुड़ी सरकारी जमीन (माफी औकाफ) को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जिले में चलाई जा रही विशेष मुहिम के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस बड़ी कार्रवाई में मुक्त कराई गई सरकारी जमीन की कीमत लगभग 100 करोड़ रूपए आंकी गई है। जिला प्रशासन, नगर निगम एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने इस जमीन को घेरने के लिये अवैध रूप से बनाई गई बाउण्ड्रीवॉल एवं अन्य अतिक्रमण जेसीबी मशीन एवं नगर निगम के मदाखलत दस्ते की मदद से ध्वस्त कराए। कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने रामजानकी मंदिर ट्रस्ट की जमीन के निरीक्षण दौरान मंदिर से जुड़ी माफीं औकाफ की जमीन पर अतिक्रमण करने के लिये अवैध रूप से बनाई गई बाउंड्रीवॉल सामने आई थी। कलेक्टर ने बाउंड्रीवॉल बनाने वाले के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इस परिपालन में गत शनिवार को यह कार्रवाई की गई है। इस जमीन पर मनोहर लाल भल्ला द्वारा बाउण्ड्रीवॉल बनाकर प्लॉट बेचने की तैयारी की जा रही थी। जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर न केवल बेशकीमती सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया, बल्कि बहुत से भोले भाले लोगों को प्लॉट की जालसाजी में फँसने से बचाया है।  

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए ई-खसरा परियोजना शुरू, ₹30 में ले पाएंगे खसरा-खतौनी की प्रमाणित प्रति

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें अपनी जमीन के रिकॉर्ड आसानी से और कम कीमत पर मिलेंगे। मोहन सरकार ने ई-खसरा परियोजना शुरू की है, जिसके तहत किसान सिर्फ 30 रुपये में खसरा-खतौनी की प्रमाणित कॉपी प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई है। राष्ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ई-खसरा परियोजना की शुरुआत हुई है। इस परियोजना का लक्ष्य जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना और किसानों तक आसानी से पहुंचाना है। इससे जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। अब किसानों को केवल 30 रुपये प्रति पन्ने पर खसरा, खतौनी और नक्शे की प्रमाणित प्रति मिलेगी। नहीं रहेगी हेराफेरी की आशंका खसरा और खतौनी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इनमें जमीन और खेती से जुड़ी सारी जानकारी होती है। पहले किसानों को केवल खसरा-खतौनी की फोटोकॉपी मिलती थी, जिसमें कई बार हेराफेरी की आशंका रहती थी। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। कई बार तो किसानों के साथ धोखाधड़ी भी हो जाती थी। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें खसरा-खतौनी में बदलाव करके किसानों को ठगा गया है। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के आने से ऐसी गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। किसानों को अब प्रमाणित दस्तावेज मिलेंगे, जिससे उन्हें सुरक्षा मिलेगी। सभी तहसीलों में आईटी सेंटर की व्यवस्था ई-खसरा परियोजना के तहत, प्रदेश की सभी तहसीलों में आईटी सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर्स में एक निजी कंपनी काम कर रही है, जिसे सरकार ने यह जिम्मेदारी सौंपी है। किसान इन सेंटर्स में जाकर आसानी से अपने जमीन के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर सकते हैं। खसरा (B-1) और नक्शे की कॉपी के लिए 30 रुपये प्रति पन्ना देना होगा। यह व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी है और इससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। इस लिए यह व्यवस्था किसानों के हित में बताई जा रही है। यहां देख सकते हैं विवरण सरकार ने किसानों के लिए एक और सुविधा भी उपलब्ध कराई है। यदि कोई किसान पैसे खर्च नहीं करना चाहता है, तो वह अपने खेत का विवरण मुफ्त में देख सकता है। इसके लिए उसे mpbhulekh.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा। यहां से वह अपने खाते की जानकारी, खेत का नक्शा और अन्य जरूरी विवरण देख सकता है। इससे किसानों को अपने खेत और फसल पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।

धीरेंद्र शास्त्री ने बांग्लादेश के हिंदुओं से कहा यदि वे चुप रहेंगे, तो कोई उनकी मदद नहीं कर सकेगा,सड़कों पर उतरें और एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं

छतरपुर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा का बुधवार को 7 वा  दिन है। यह यात्रा आज झांसी के मऊरानीपुर से घुघसी गांव तक पहुंचे । पदयात्रा में शामिल लोगों में उत्साह बना हुआ है। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। जिनमें संभल हिंसा, बांग्लादेश में हिंदुओं के हालात और मुस्लिम आबादी का मुद्दा शामिल है। धीरेंद्र शास्त्री ने बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के हिंदुओं को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हम अपने लिए नहीं लड़ रहे। बल्कि तुम्हारे भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर तुम नहीं जागोगे। तो तुम्हारे मंदिर एक-एक कर मस्जिदों में बदल दिए जाएंगे।” बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार की खबरें सामने आई हैं। इस बीच, चटगांव इस्कॉन पुंडरीक धाम के अध्यक्ष चिन्मय कृष्णन दास, जिन्हें चिन्मय प्रभु के नाम से जाना जाता है, को ढाका पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चिन्मय प्रभु ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई थी। शुक्रवार को उन्होंने रंगपुर में एक विरोध रैली को संबोधित किया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि उनकी रैली में देश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया। इस मामले पर धीरेंद्र शास्त्री ने बांग्लादेश के हिंदुओं से अपील करते हुए कहा कि यदि वे चुप रहेंगे, तो कोई उनकी मदद नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश के हिंदू सड़कों पर उतरें और एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं। अपनी संस्कृति और अपने रक्षकों की रक्षा करें। यदि वे ऐसा नहीं करेंगे, तो उनके मंदिर खत्म हो जाएंगे, और उनकी बहन-बेटियां या तो मारी जाएंगी या जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाएगा। भारत के हिंदुओं को भी इस बात को समझना होगा कि यह लड़ाई सबके भविष्य के लिए है।”  

मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश में कमजोर जनजातीय समूह परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी

भोपाल केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है। केंद्र ने ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान’ (पीएम-जनमन) के तहत इन परिवारों को सौगात दी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने  ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हवाले से कहा- नरेन्द्र मोदी सरकार का ध्यान समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचने पर है। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि पीएम-जनमन योजना के तहत लक्ष्य (4.9 लाख घर) मार्च 2026 तक हासिल किया जाना है। केंद्र ने पीएम-जनमन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश राज्‍य में 297.18 कि.मी लंबाई की 76 सड़कों की स्‍वीकृति भी प्रदान की है। इन 76 सड़कों की अनुमानित लागत 275.07 करोड़ रुपये है, जिसमें से केंद्रीय अंश 163.39 करोड़ रुपये एवं राज्य अंश 111.68 करोड़ रुपये है। प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर 2023 में पीएम-जनमन पहल की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य कमजोर जनजातीय परिवारों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है, जिसमें सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण के साथ-साथ बेहतर सड़क, दूरसंचार संपर्क और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना शामिल है।

मोबाइल, रील की लत पारिवारिक रिश्तों पर पड़ रही है भारी, पत्नी रील बनाने में रहती है बिजी, तलाक के लिए कुटुंब न्यायालय में पहुंचे 2000 से अधिक मामले

भोपाल  इंटरनेट मीडिया पर रील्स बनाने का शौक अब नशा बनता जा रहा है। यह नशा लोगों के दांपत्य जीवन में जहर घोल रहा है। कई मामलों तो यह तलाक की भी प्रमुख वजह बन रहा है। भोपाल के कुटुंब न्यायालय में पिछले साढ़े 10 महीनों में जो केस आए हैं, उनमें से अधिकतर में पारिवारिक बिखराव की यह चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। न्यायालय के आंकड़े बताते हैं कि एक जनवरी से 20 नवंबर तक विवाह विच्छेद के तीन हजार 349 मामले आए हैं। उनमें से दो हजार नौ मामलों में मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया पर रील्स बनाने के नशे को तलाक का आधार बताया गया है। यह संख्या कुल मामलों का 60 प्रतिशत है। कुटुंब न्यायालय में इस तरह की शिकायतों के आधार पर तलाक का आवेदन देने वाले दंपती को समझाने की कोशिश हो रही है, लेकिन यह तरीका अधिकांश मामलों में काम नहीं कर रहा है। इस साल ऐसे मामलों में से केवल 938 मामले ऐसे आए, जिनमें पति-पत्नी के बीच समझौता कराया जा सका। इस तरह बढ़ रही है कलह केस – 1 शादी के दो साल बाद एक पत्नी ने तलाक का आवेदन दिया। आरोप था कि उसके पति बैंक में पदस्थ हैं, लेकिन उसे खर्च के लिए पैसा नहीं देते हैं। उसे रील भी नहीं बनाने देते हैं और कहीं घुमाने भी नहीं ले जाते हैं। काउंसलिंग में पति ने कहा कि उसकी पत्नी प्राइवेट कंपनी में एग्जीक्यूटिव के पद पर है। वह रील बनाती है। टोका तो इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर मुझे ही ब्लाक कर दिया। मामले की काउंसलिंग चल रही है। केस – 2 एक सरकारी अधिकारी पति ने शिकायत की है कि उसकी पत्नी रील के जूनून में इस कदर खो जाती है कि बच्चे की देखभाल नहीं करती। घर का हर काम प्रभावित हो रहा है। यहां तक कि मुझे भी हमेशा तैयार रहने के लिए कहती है, ताकि उसके साथ वीडियो बनाने में उसका साथ दे सकूं। इससे बच्चे का स्कूल में परफार्मेंस खराब हो रहा है। मामले में किसी तरह समझौता कराया गया। केस – 3 सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत पति ने तलाक मांगा। आरोप है कि पत्नी लगातार रील बनाने में व्यस्त रहती है। पूरा समय वीडियो शूट करने और इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने में ही बीत रहा है। उसके फालोअर्स भी बढ़ रहे हैं। हर रील में अलग दिखने के लिए वह रोज खरीदारी कर रही है। इस पर पत्नी का कहना है कि पति के पास बाहर घूमाने का समय नहीं है, वह केवल टाइम पास के लिए यह करती है। केस – 4 शादी के पांच साल बाद एक दंपती के बीच तलाक का मामला आया। पत्नी का कहना था कि पति घुमाने नहीं ले जाते हैं। कहते हैं कि टूरिंग जाब में हूं, बाहर भटक-भटककर थक गया हूं। वे खुद बाहर घूमते हैं और रील बनाते हैं। बीते दिनों जब उनके रील्स स्क्राल कर रही थी तो एक रील के बैकग्राउंड में पति अपनी सहकर्मी के साथ कुछ खाते और मस्ती करते नजर आए। उसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ। मामले में काउंसलिंग जारी है।

मध्य प्रदेश सरकार 5000 करोड़ रुपए का नया कर्ज ई-ऑक्शन के जरिए स्टॉक गिरवी रखकर लिया जाएगा

भोपाल  पिछले एक वर्ष में 49000 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है. नए कर्ज को मिलाकर एक वर्ष मोहन सरकार कुल 54,000 करोड़ का कर्ज ले चुकी है, जिस पर अब विपक्षी पार्टियों से सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. मध्य प्रदेश सरकार 5000 करोड़ रुपए का नया कर्ज ई-ऑक्शन के जरिए स्टॉक गिरवी रखकर लिया जाएगा. सरकार 26 नवंबर को 5000 करोड़ कर्ज की राशि दो चरणों में क्रमशः 2500-2500 रुपए में लेगी. सूचना के मुताबिक यह राशि 27 नवंबर को सरकार के खाते में पहुंच जाएगी.    गौरतलब है मध्य प्रदेश सरकार एक साल में 54000 करोड़ रुपए कर्ज लेने पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल उठाए है. कांग्रेस के पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने कहा कि सरकार किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ कर रही, लाडली बहनों को 3000 देने का वादा था उन्हें भी नहीं दिया जा रहा. सरकार विकास की बात करती हैं लेकिन विकास हो कहां रहा है. एक साल में पांच बार 5000 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी सरकार अगर पिछले 11 महीनों में नजर डालें, तो मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कुल 49,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. सरकार का कहना है कि धनराशि राज्य की विकास योजनाओं व अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई. हालांकि इससे जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता गया है, जो बढ़कर करीब 4 लाख करोड़ हो चुका है. पिछली बार अक्टूबर में दो किश्तों में लिया था 5000 करोड़ रुपए मध्य प्रदेश सरकार चौथी बार 5000 करोड़ रुपए का कर्ज RBI से 2500-2500 करोड़ रुपए के दो किश्तों में लेगी. 5000 करोड़ रुपए का कर्ज सरकार 11 और 19 साल के लिए लेगी. सरकार यह कर्ज प्रदेश में चल रहे विकास कार्य और अन्य योजनाओं को गति देने के लिए सरकार ले रही है.  पिछले 11 महीनों में मोहन सरकार कुल 49,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. सरकार का कहना है कि धनराशि राज्य की विकास योजनाओं व अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई. हालांकि इससे जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता गया है, जो बढ़कर करीब 4 लाख करोड़ हो चुका है.  साल में 54, 000 करोड़ का कर्ज ले चुकी है मध्य प्रदेश सरकार उल्लेखनीय है अगस्त और सितंबर के महीने में सरकार द्वारा लिए जाने वाले कर्ज का आंकड़ा 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था. अगस्त महीने में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया था, फिर 31 मार्च 2024 को खत्म हुए वित्त वर्ष में 3,75,578 करोड़ का कर्ज लिया था.अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक सरकार ने 44 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया था. मध्य प्रदेश सरकार पर है करीब 4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज     अगस्त 2024 के शुरुआत में मध्य प्रदेश सरकार ने 2500-2500 करोड़ रुपए का कर्ज दो किश्तों में मध्य प्रदेश सरकार ने     5000 करोड़ का कर्ज लिया था. यह कर्ज भी 11 साल और 21 साल की अवधि के लिए लिया गया था.     22 अगस्त 2024 को 2500-2500 करोड़ रुपए के दो किश्तों में 5 हज़ार रुपए का कर्ज 14 और 21 साल की अवधि के लिए फिर लिया गया…     24 सितंबर को 2500-2500 करोड़ रुपए का कुल 5 हज़ार करोड़ का कर्ज सरकार ने लिया,यह कर्ज 12 साल और 19 साल की अवधि के लिए लिया गया.     अक्टूबर माह में सरकार ने आरबीआई से दो किश्तों में क्रमशः 2500-25000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था.

रतलाम में दरगाह पर चला मध्य प्रदेश प्रशासन का बुलडोजर : फोरलेन बनने का रास्ता हुआ साफ

Madhya Pradesh administration’s bulldozer runs on Dargah रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक बन रहे फोरलेन बनाने का रास्ता साफ हो गया है। पहलवान बाबा की दरगाह का हिस्सा हटाने पर कोर्ट ने 13 दिन पहले जो स्टे दिया था, उसे मंगलवार को खारिज कर दिया। तहसीलदार का कहना है कि स्टे के कारण दरगाह के आसपास फोरलेन का काम रुक गया था। अब फिर से काम शुरू किया गया है। साथ ही अतिक्रमण भी हटाया जा रहा है। वहीं दरगाह कमेटी के पक्ष से जानकारी मिली कि जुड़े कि हम हाई कोर्ट में याचिका लगाएंगे। इसके साथ ही सामने रणजीत हनुमान मंदिर का भी अतिक्रमण हटाया गया विवाद की बनी थी स्थिति जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक 4.12 किमी लंबे फोरलेन का काम चल रहा है। इसमें पहलवान बाबा की दरगाह का कुछ हिस्सा अतिक्रमण में आ रहा है। इसको लेकर विवाद की स्थिति बनी तो प्रशासन ने दरगाह से जुड़े लोगों के साथ बैठक कर मामले का हल निकाला था। फिर भी कुछ लोग कोर्ट पहुंच गए और बताया कि पहलवान बाबा की दरगाह को अवैध कार्रवाई कर नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। 13 नवंबर को तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड रतलाम अतुल श्रीवास्तव की कोर्ट में प्रशासन की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई नहीं पहुंचा तो कोर्ट ने एकपक्षीय फैसला दे दिया। इसमें कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने (स्टे) का आदेश जारी किया था। 14 नवंबर को सरकारी अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने एकपक्षीय स्टे निरस्त करने का आवेदन दिया था। मंगलवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 13 नवंबर को स्टे दे आदेश निरस्त कर दिया। तहसीलदार के फैसले को कोर्ट ने माना सही तहसीलदार ने बताया कि अगस्त में तहसील कोर्ट ने फैसला देते हुए दरगाह के कुछ हिस्से के अतिक्रमण को हटाने का कहा था। इसमें बताया था कि डोसीगांव की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, इसे हटाया जाए। 5 दिन में नहीं हटाया तो प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस फैसले को दरगाह कमेटी से जुड़े पक्ष ने छिपाया और अतिक्रमण हटाने से रोकने पर स्टे के लिए कोर्ट पहुंच गए। कोर्ट में जब तहसीलदार के इस फैसले को पेश किया तो कोर्ट ने उसे सही माना। साथ ही कहा कि तहसील कोर्ट से मिले फैसले के खिलाफ दूसरे पक्ष को एसडीएम कोर्ट में अपील करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। दरगाह कमेटी से जुड़े पक्ष से मिली जानकारी में बताया कि हमारे पक्ष को तहसील कोर्ट से नोटिस मिला था। लेकिन फैसले के बारे में जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने यह कहते हुए स्टे खारिज किया है कि हमें तहसील कोर्ट के फैसले को लेकर एसडीएम कोर्ट में अपील करनी थी। अब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में याचिका लगाएंगे। फिर से शुरू होगा काम प्रशासन के अनुसार दरगाह बनाने के लिए पॉइंट एक (.1) आरा जमीन यानी 10 बाय 10 स्क्वायर फीट की जमीन अलॉट हुई थी। पीडब्ल्यूडी के अनुसार दरगाह के सामने फोरलेन बनाने के लिए 14 से 16 मीटर जगह मिल रही है। जबकि 21 मीटर की जगह चाहिए। बाकी जगह पर अतिक्रमण किया गया है। दरगाह के लिए डिवाइडर की डिजाइन बदलना भी तय 10 नवंबर को प्रशासन ने दरगाह से जुड़े लोगों के साथ बैठक की थी। इसमें तय किया था कि दरगाह फोरलेन पर बनने वाले डिवाइडर के बीच रह जाएगी। डिवाइडर की डिजाइन बदलना भी तय किया गया था। पूरे फोरलेन पर 6 फीट चौड़ा डिवाइडर बनाया जाएगा जो दरगाह के यहां 12 फीट चौड़ा हो जाएगा। वहीं मौके पर एसडीएम अनिल भाना और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री अनुराग सिंह और एसडीओ बीके राय का कहना है कि रोड बनाने का काम जल्द शुरू करेंगे। दरगाह का अतिक्रमण हटाने पर दिया गया स्टे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब इस हिस्से में फोरलेन का रुका हुआ काम जल्द शुरू किया जाएगा।

बमोरी के पन्हेटी गांव में वनभूमि पर कब्जे को लेकर भील और बंजारा समुदाय के बीच विवाद, 12 घरों में लगाई आग

गुना जिले के फतेहगढ़ थानाक्षेत्र के पन्हेटी गांव में भील समुदाय के लोगों ने बंजारा समाज के घरों में आग लगा दी। इस आगजनी में 12 घरों के साथ टपरे, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, राशन, सर्दी के कपड़े भी खाक हो गए। घटना के समय ग्रामीण खेतों में मजदूरी के लिए गए थे अन्यथा माल के साथ जनहानि भी हो सकती थी। इधर, सूचना पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। फिलहाल हालात नाजुक बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार बमोरी तहसील के पन्हेटी गांव में वनभूमि पर कब्जे को लेकर भील और बंजारा समुदाय के बीच विवाद चला आ रहा है। दीपावली के दिन भी दोनों समुदाय आमने-सामने हुए थे, जिसमें दोनों पक्ष से दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। गलसिंह भील का इंदौर और कल्लू बंजारा का भोपाल में इलाज चल रहा था। लेकिन सोमवार रात गलसिंह भील की इंदौर में मौत हो गई। इससे गुस्साए भील समुदाय के 30-35 लोगों ने मंगलवार सुबह लगभग 11 बजे बंजारा समाज के घरों व टपरों में आग लगा दी। इससे दो ट्रैक्टर, पांच बाइक, राशन, सर्दी के कपड़े और खलिहान में रखी फसल जलकर खाक हो गई। इतना ही नहीं, पानी के बोरों को भी पूर दिया गया।   इधर, सूचना पर फतेहगढ़ थाना की पुलिस गांव पहुंची, तो घुसने नहीं दिया और पुलिस वाहनों पर पथराव कर दिया। इससे वापस लौटना पड़ा। इसके बाद जिला मुख्यालय के अलावा आसपास के थानों से बड़ी संख्या में पुलिस बल गांव में तैनात किया गया है। लेकिन भील समुदाय के लोगों का गांव के मंदिर पर एकत्रित होने से हालात फिलहाल नाजुक बने हुए हैं, जिसके चलते पुलिस भी तैयारी में है। पुलिस के पहुंचने से पहले लगा दी थी घरों में आग एसडीओपी विवेक अष्ठाना ने बताया कि दिवाली के दिन बंजारा और भील समुदाय में वनभूमि पर कब्जे को लेकर आमने-सामने हुए थे। इस दौरान पुलिस ने आठ नामजद और अज्ञात के खिलाफ क्रास मामला दर्ज किया था। सोमवार रात उक्त मारपीट में घायल और इंदौर में उपचाररत गलसिंह भील की मौत हो गई। इस सूचना पर मंगलवार को पन्हेटी गांव में आसपास के थानों का बल गांव में पहुंचाया था, लेकिन उससे पहले भील समुदाय के करीब 30-35 लोगों ने बंजारा समाज के 12 घरों में आग लगा दी। इस दौरान बंजारा समाज के लोग खेतों में मजदूरी को गए थे। फिलहाल गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। जिन घरों में नुकसान हुआ है, उनकी तरफ से रिपोर्ट कराने पर मामला पंजीबद्ध कर विवेचना करेंगे। वनभूमि पर कब्जे को लेकर बंजारा और भील समुदाय के बीच विवाद है। पिछले दिनों दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसमें घायल गलसिंह भील की बीती रात इंदौर में मृत्यु हो गई। इसके बाद भील समुदाय ने मंगलवार सुबह बंजारा समाज के घरों और सामान को आग लगा दी। फिलहाल दमकल बुलाकर आग पर काबू पा लिया गया है।शिवानी पांडे, एसडीएम गुना-बमोरी

आश्रम की सेविका ने मिलाया चोरों से हाथ, चोरों ने बड़ी ही चालाकी से 22 लाख रुपए के माल पर हाथ साफ कर दिया

उज्जैन उज्जैन के आश्रम में काम करने वाली एक सेविका ने दो चोरों से हाथ मिला लिया और आश्रम की सारी गुप्त बातें चोरों को बता दी. इसके बाद चोरों ने बड़ी ही चालाकी से 22 लाख रुपए के माल पर हाथ साफ कर दिया. हालांकि उज्जैन की महाकाल थाना पुलिस ने इंदौर के दोनों चोरों को सेविका के साथ गिरफ्तार कर पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया है. उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि महाकाल थाना क्षेत्र में उजाड़ खेड़ा इलाके में चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है. दोनों आरोपियों ने आश्रम में चोरी की वारदात को अंजाम दिया था.   योग माया आश्रम में हुई चोरी  योग माया आश्रम में हुई चोरी की वारदात के मामले में पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्य खंगाले तो बड़े ही रहस्य में ढंग से खुलासा हुआ. इस मामले में आश्रम में काम करने वाली सेविका कुसुम को हिरासत में लिया गया. उसने बताया कि वह मूल रूप से इंदौर की रहने वाली है और उसके संपर्क में महेंद्र सिंह पिता देवी सिंह पवार निवासी सर्वहारा नगर इंदौर और फेजल पिता शकील खान निवासी अजय बाग कॉलोनी इंदौर आए. दोनों के माध्यम से उसने चोरी की वारदात को अंजाम दिलवाया. पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है.   मोबाइल से खुल गया पूरा राज  दोनों आरोपी चोरी की वारदात के दौरान एक मोबाइल फोन भी चुरा कर ले गए थे. चोरी के मोबाइल से पुलिस ने दोनों आरोपियों को खोज निकाला. सेविका कुसुम को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी गया 22 लाख का माल भी बरामद किया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आश्रम से चोरी गए कुछ माल की रिपोर्ट आश्रम संचालिका दर्ज नहीं कराई थी. बावजूद इसके पुलिस ने पूरा माल बरामद कर लिया.   इंदौर की जेल में हुई थी दोनों बदमाशों की दोस्ती  पुलिस ने बताया कि महेंद्र पवार और फैजल का पुराना अपराधी रिकॉर्ड है. दोनों ही जेल में बंद रह चुके हैं. दोनों ही आरोपी की जेल में पहचान हुई थी जिसके बाद उन्होंने चोरी की वारदात को अंजाम देने का प्लान बनाया. इसके बाद दोनों ने जेल से बाहर आकर चोरी की वारदातें करना शुरू कर दी. दोनों का ही अपराधी की रिकॉर्ड मिलने के बाद पुलिस और भी वारदातों के बारे में पूछताछ कर रही है.

अपने लिए तो सब जीते हैं, जो दूसरों के लिए जिए वही महापुरुष है – उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि डॉ. हरीसिंह गौर ने भारत के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज, जब पूरा देश संविधान दिवस मना रहा है, ऐसे समय में डॉ. गौर की भव्य प्रतिमा का अनावरण करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा, “अपने लिए तो सब जीते हैं, लेकिन जो दूसरों के लिए जिए, वही सच्चे अर्थों में महापुरुष होता है।” डॉ. गौर का जीवन अत्यंत प्रेरणादायक है। वे ज्ञान, कर्म और भक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति विश्वविद्यालय की स्थापना में लगा दी, जिसका लाभ न केवल बुंदेलखंड बल्कि पूरे देश को मिल रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा, “सागर में भगवान के बाद यदि किसी की पूजा होती है तो वह डॉ. हरीसिंह गौर की।” उन्होंने समाज को शिक्षा के माध्यम से प्रकाश प्रदान किया। उनका जीवन और योगदान सदा आदर और सम्मान के योग्य है। उप मुख्यमंत्री ने सागर के शनि मंदिर चौराहे पर डॉ. हरीसिंह गौर की प्रतिमा का अनावरण किया। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर को भारत रत्न से सम्मानित करने के लिए जनमानस और प्रबुद्धजनों की मंशानुरूप जन-अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉ. गौर की मूर्ति उनकी संघर्षशीलता और जनकल्याण के योगदान के प्रति सम्मान का प्रकटीकरण है। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय कभी पूरे भारत में चौथे स्थान पर था और आज भी अपनी प्रतिष्ठा को बनाए हुए है। सांसद श्रीमती लता वानखेड़े, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता, विधायक श्री प्रदीप लारिया, स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

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