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नशे की गिरफ्त से मुक्त हों बंदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम, अब जेल में खुलेगा ‘नशा मुक्ति केंद्र’

भोपाल बंदियों को नशे की कैद से छुटकारा दिलाने के लिए प्रदेश की जेलों में नशा मुक्ति केंद्र बनाए जाएंगे। इस सिलसिले में भारत सरकार ने प्रत्येक केंद्र के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। जेल मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि पहले केंद्रीय जेलों में यह व्यवस्था प्रारंभ की जाएगी। बाद में जिला जेलों में भी नशा मुक्ति केंद्र शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे। जेल अधिकारियों के मुताबिक अपराधों की बड़ी वजह नशा होता है, इसलिए कैदियों को नशे से दूर करने की कोशिश की जा रही है, जिससे वह जेल से बाहर आने पर फिर नशे की गिरफ्त में न आने पाएं। इन नशा मुक्ति केंद्रों में मुख्य रूप से काउंसलिंग के माध्यम से बंदियों को समझाकर नशे से छुटकारा दिलाया जाएगा। सामाजिक न्याय विभाग जेलों में यह केंद्र बनाएगा। मनोचिकित्सक रहेंगे तैनात इन केंद्रों में सबसे मुख्य मनोचिकित्सकों की उपस्थित रहेगी। दरअसल, नशे की लत वाले बंदियों को जेल आने के बाद नशे की चीजें नहीं मिलतीं। नशा छूटने की वजह से उन्हें कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं होने लगती हैं। इन्हें ‘विड्राल सिम्पटम्स’ कहा जाता है। इसमें अनिद्रा, चिंता, भूख नहीं लगना और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। मनोचिकित्सक ऐसे बंदियों को उपचार देंगे। इतना होगा स्टाफ हर एक केंद्र में एक परियोजना समन्वयक, एक मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, काउंसलर और अकाउंटेंट के पद होंगे। इसका प्रस्ताव लगभग एक वर्ष से शासन के पास लंबित था, पर एक जनवरी 2025 से सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह अधिनियम लागू होने के बाद यह केंद्र भी जल्दी प्रारंभ करने की तैयारी है। केंद्र के लिए मानव संसाधन की भर्ती सामाजिक न्याय विभाग कर रहा है। प्रदेश में कहां-कहां केंद्रीय जेल मप्र में फिलहाल 11 केंद्रीय कारागार हैं। ये कारागार भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना, सागर, नरसिंहपुर, बड़वानी और नर्मदापुरम जिलों में स्थित हैं।

अब मप्र में ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप चलाने की तैयारी, शिकारियों पर कसेगा शिकंजा

भोपाल वन्य प्राणी प्रबंधन-संरक्षण में असफल रहने, बाघ और 10 हाथियों की मौत से हुई किरकिरी के बाद अब मध्य प्रदेश में ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप चलाया जाएगा। यह एक दिसंबर से अगले साल 31 जनवरी तक चलेगा। इसमें उन स्थानों पर दिन और रात में गश्त होगी, जो शिकार के मामले में संवेदनशील हैं। वन मुख्यालय से लेकर वन क्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारी इसमें जुटेंगे। इस ऑपरेशन के तहत गश्ती के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्यप्राणी फंसा हुआ पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्यप्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी और अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाएगा। आरोपित का पता लगाकर तत्काल कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाएगा। वन भूमि या वन्यप्राणी विचरित क्षेत्र से जाने वाली विद्युत लाइन के नीचे और आसपास विद्युतकर्मियों के साथ मिलकर गश्त की जाएगी। यदि किसी वन या कृषि क्षेत्र में शिकार के लिए फंदा लगा हुआ पाया जाता है तो उसे हटाया जाएगा। शिकार पर नजर रखने के लिए 15 डाग स्क्वायड दस्ते लेकर गश्त की जाएगी। मैटल डिटेक्टर उपकरण का भी उपयोग होगा। गश्त के दौरान वन-राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की बागड, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी। गश्त के दौरान संबंधित ग्राम, नगर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपितों की जानकारी लेकर उसे वन परिक्षेत्र में की आरोपित निगरानी पंजी में भी दर्ज किया जाएगा। शीत ऋतु में बढ़ जाती हैं शिकार की घटनाएं शिकार की घटनाएं मुख्यत: शीत ऋतु में अधिक संख्या में घटित होती हैं। इसलिए अगले दो माह ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप चलाया जाएगा। इसके पहले वन विभाग फंदा लगाकर शिकार को लेकर प्रदेश भर में अलर्ट जारी कर चुका है। वहीं फंदा, विद्युत करंट, खटका (लेग होल्ड ट्रैप) जैसे साधनों का उपयोग कर वर्ष 2014 से 2024 तक 885 वन्यजीवों का शिकार किया गया। जिससे 311 जंगली सूअर, 116 नीलगाय, 91 तेंदुए, 77 चीतल, 48 सांभर, 36 भालू, 35 बाघ एवं 17 मोर आदि सहित अन्य वन्यप्राणियों की मृत्यु हुई है। ये करेंगे गश्त प्रदेश में सात टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वनमंडल एवं 11 परियोजना मंडल हैं। वनमंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल इकाई में सघन गश्त दिन व रात्रि में की जाएगी। न्यूनतम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ, दो दिन वनमंडल अधिकारी, उप वनमंडल अधिकारी, एक दिन क्षेत्र संचालक, मुख्य वन संरक्षक अनिवार्य रूप से गश्त करेंगे।

डिजिटल अरेस्ट कर कारोबारी से ठगे 10 लाख, फर्जी एफआइआर के नाम पर डराया

10 lakh rupees were cheated from businessman by digital arrest, threatened in the name of fake FIR रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा में डेढ़ महीने के अंदर आनलाइन स्टोर कारोबारी को दूसरी बार ठगने का मामला सामने आया है। शिकायत पर समान थाना पुलिस ने शनिवार देर शाम प्रकरण दर्ज किया। फर्जी FIR की दर्ज10 नवंबर को हुई घटना में कारोबारी को ठगों ने सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक फर्जी एफआइआर के नाम पर डरा-धमकाकर डिजिटल अरेस्ट रखा और 10 लाख 73 हजार रुपये विभिन्न खातों में जमा करा लिए। पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह के अनुसार नेहरू नगर निवासी नितिन वर्मा से ठगों ने 19 अक्टूबर को आनलाइन कार्य के लिए 50 हजार रुपये ठग लिए थे।

भारत दर्शन : अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक पहुंचने का सम्पूर्ण मार्गदर्शन

Bharat Darshan: Complete guide to reach Ayodhya Shri Ram Janmabhoomi Temple भोपाल ! अयोध्या उत्तर प्रदेश में स्थित, भारतीय इतिहास और धार्मिक मान्यताओं का अभिन्न अंग है। यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में जानी जाती है, जो पूरे भारत और दुनिया भर के लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, इसकी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध, हर भक्त के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। आइए जानते हैं कि भोपाल सहित मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से अयोध्या तक कैसे पहुंचा जा सकता है। भोपाल से अयोध्या तक की यात्रा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से अयोध्या पहुंचने के लिए तीन मुख्य साधन उपलब्ध हैं: रेल, सड़क, और हवाई मार्ग। रेल मार्ग: भोपाल से अयोध्या तक ट्रेन यात्रा सबसे लोकप्रिय और किफायती विकल्प है।मुख्य रेलवे स्टेशन: अयोध्या कैंट और फैजाबाद जंक्शन। प्रमुख ट्रेनें: साकेत एक्सप्रेस (भोपाल से फैजाबाद)।गोंडा एक्सप्रेस (भोपाल से अयोध्या के पास)।अन्य ट्रेनें लखनऊ होते हुए उपलब्ध हैं।समय: 12-15 घंटे।किराया: ₹400-₹1500 (स्लीपर से एसी क्लास)। सड़क मार्ग: भोपाल से अयोध्या सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। बसें और निजी वाहन द्वारा यात्रा करना सुविधाजनक है।मार्ग: भोपाल → झांसी → कानपुर → लखनऊ → अयोध्या।समय: 16-18 घंटे।बस किराया: ₹1000-₹2000।निजी वाहन से यात्रा करना चाहें तो यह यात्रा दर्शनीय स्थलों के साथ रोमांचक बन सकती है। हवाई मार्ग: भोपाल से अयोध्या के लिए सीधी उड़ान नहीं है, लेकिन लखनऊ तक फ्लाइट लेकर वहां से अयोध्या पहुंच सकते हैं।हवाई अड्डा: लखनऊ (चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा)।भोपाल से लखनऊ फ्लाइट: 1.5 घंटे।लखनऊ से अयोध्या: टैक्सी/बस द्वारा 140 किमी (2-3 घंटे)।किराया: ₹4000-₹8000। मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों से यात्रा मार्गदर्शन उत्तर प्रदेश:उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर जैसे लखनऊ, वाराणसी, और गोरखपुर से अयोध्या आसानी से पहुंचा जा सकता है।लखनऊ से अयोध्या: 140 किमी। टैक्सी और बसें 2-3 घंटे में पहुंचा देती हैं।वाराणसी से अयोध्या: 200 किमी, ट्रेन/बस द्वारा 4-5 घंटे। राजस्थान:जयपुर, कोटा और उदयपुर से अयोध्या के लिए ट्रेन और बसें उपलब्ध हैं। महाराष्ट्र:मुंबई और पुणे से ट्रेनें और फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़:रायपुर और बिलासपुर से ट्रेन और बसें आसानी से उपलब्ध हैं। गुजरात:अहमदाबाद और सूरत से लखनऊ होकर अयोध्या पहुंचा जा सकता है। अयोध्या में प्रमुख आकर्षण यात्रा के लिए उपयोगी सुझाव अयोध्या एक ऐसा शहर है, जो आध्यात्मिकता, भक्ति, और भारतीय इतिहास का प्रतीक है। भोपाल और आसपास के राज्यों से अयोध्या की यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से भी अद्वितीय है। चाहे आप रेल, सड़क, या हवाई मार्ग से जाएं, यह तीर्थ यात्रा आपको अनमोल अनुभव प्रदान करेगी। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन हर व्यक्ति के जीवन का एक यादगार हिस्सा बन सकते हैं। जय श्री राम!

बस स्टैंड पर फटा गैस सिलेंडर, हुआ ब्लास्ट, करीब 20 लोग झुलसे, 12 साल के बच्चे की हालत गंभीर

छतरपुर छतरपुर जिले के बिजावर बसस्टैंड पर रविवार दोपहर में एक पेटीज के ठेले पर अचानक छोटा गैस सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। सिलेंडर ब्लास्ट होने के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई। लोग यहां वहां भागते नजर आए। हादसे में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। किसी के चेहरे पर असर हुआ है तो किसी के सीने और हाथों की स्किन जल गई। 12 साल के बच्चे की हालत गंभीर घटना की जानकारी लगते ही बिजावर विधायक राजेश बबलू शुक्ला मौके पर पहुंचे और प्रशासन को घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलते ही कलेक्टर पार्थ जैसवाल और एडीएम अरविंद नागदवे सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और घायलों को दो एंबुलेंसों से बिजावर अस्पताल और छतरपुर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां घायलों को प्राथमिक उपचार दे दिया गया है। घायलों में एक 12 साल के बच्चे की हालत गंभीर बताई गई है। हादसे में यह लोग हुए घायल रविवार को हाट बाजार भी लगा हुआ था। इस कारण बाजार में भीड़ थी। ठेले पर रखे सिलेंडर में लीकेज होने से ब्लास्ट हो गया। ठेले के आस-पास खड़े करीब 20 लोग वह घालय हो गए हैं। कोई तीन फीसदी, कोई पांच फीसदी तो कोई 15 फीसदी से ज्यादा जल गया है। जिसका इलाज कराया जा रहा है। सिलेंडर ब्लास्ट होने की घटना में राधे नामदेव, मीना अहिरवार, क्रिस, अंकित, नरेंद्र राजपूत, प्रिंस, प्रीतम, नीलम कुशवाह, बालकिशन, दिनेश, जमुना, गुड्डी, आशीष शर्मा, यश साहू, नारायण साहू सहित करीब 20 से ज्यादा लोग सिलेंडर ब्लास्ट की घटना में घायल हुए हैं। अधिकारियों की निगरानी पर सवाल शहर सहित जिलेभर में घरेलु सिलेंडर दुकानों में उपयोग किए जा रहे हैं। जिनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। नगर कस्बों के अलावा छतरपुर शहर में बसस्टैंड और रेलवे स्टेशन सहित अस्पताल के आसपास ठेलों और दुकानों पर घरेलु गैसे सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से होता रहता है। जिनके खिलाफ फूड विभाग व अन्य अधिकारी कार्रवाई तक नहीं करते।

सुष्मिता सेन इरादों को अमल में लाने में रखती हैं विश्वास

मुंबई, अभिनेत्री सुष्मिता सेन, जिन्हें आखिरी बार स्ट्रीमिंग क्राइम-थ्रिलर सीरीज ‘आर्या’ सीजन 3 में देखा गया था, इरादों को अमल में लाने में विश्वास रखती हैं।अभिनेत्री ने शनिवार को अपने इंस्टाग्राम पर एक नोट शेयर किया। उन्होंने लिखा, “एक इंच आगे बढ़ने एक मील के सपने देखने से बेहतर है।” उन्होंने कैप्शन में एक नोट भी लिखा, जिसमें उन्होंने सपनों को भी शक्तिशाली बताया लेकिन उन्होंने सपनों को क्रियान्वित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, “यह आश्चर्यजनक है कि किसी भी चीज को हासिल करने की यात्रा कितनी सरल हो सकती है। इरादा एक शक्तिशाली उपकरण है, यह दिशा देने में मदद करता है लेकिन बिना गति के यह एक बेकार उपकरण है। इंच दर इंच हम मील तय करते हैं।” इससे पहले अभिनेत्री अपने दांत के दर्द का इलाज कराने के लिए एक दंत चिकित्सक के पास गई थी। जब वह दंत चिकित्सक के क्लिनिक के बाहर क्लिक की गई, क्लिनिक के बाहर खड़े पैपराजी से बातचीत की, तो यह स्पष्ट था कि उन्हें स्थानीय एनेस्थीसिया की भारी खुराक दी गई थी, क्योंकि उसकी बोली लड़खड़ा रही थी। दर्द में होने के बावजूद, अभिनेत्री ने अपनी खास गर्मजोशी और करुणा के साथ पैपराजी का अभिवादन किया। काम के मोर्चे पर सुष्मिता को आखिरी बार अंतर्राष्ट्रीय एमी नामांकित सीरीज ‘आर्या’ में देखा गया था, जिसमें वह मुख्य भूमिका निभा रही हैं। उन्हें स्ट्रीमिंग बायोग्राफिकल ड्रामा ‘ताली: बजाऊंगी नहीं, बजाऊंगी’ में भी देखा गया था, जिसमें उन्होंने ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट श्रीगौरी सावंत की भूमिका निभाई थी। रवि जाधव द्वारा निर्देशित यह सीरीज मुंबई की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट गौरी सावंत के जीवन और संघर्ष के महत्वपूर्ण क्षणों को कवर करती है।

ग्वालियर सेंट्रल जेल की बढ़ी चिंता! सेंट्रल जेल से दो बंदी पैरोल पर बाहर जाने के बाद वापस नहीं लौटे, फरार बंदियों की तलाश शुरू

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की सेंट्रल जेल से बंदियों के फरार होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में दो बंदी जो हत्या जैसे गंभीर अपराधों में सजा काट रहे थे, पैरोल पर बाहर जाने के बाद वापस नहीं लौटे और फरार हो गए। जेल प्रशासन ने इस मामले में पुलिस से शिकायत की है और फरार बंदियों की तलाश शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला? ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधिकारियों ने बहोड़ापुर थाना पुलिस से शिकायत की है कि दो बंदी पैरोल पर बाहर गए थे, लेकिन वे अपनी तय तारीख पर जेल नहीं लौटे। जेल प्रशासन ने बताया कि ग्वालियर जिले के भितरवार निवासी कमलेश पुत्र पन्नालाल बाथम हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में सजा काट रहा था। पैरोल पर बाहर जाने के बाद वह निर्धारित तारीख पर वापस नहीं लौटा। वहीं जेल प्रशासन ने जब कमलेश के वापस न लौटने की जानकारी दी, तो पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, कमलेश के खिलाफ बहोड़ापुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और अब उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है। बंदियों की तलाश जारी ग्वालियर सेंट्रल जेल से फरार इन बंदियों के खिलाफ पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं। जेल प्रबंधन और पुलिस का कहना है कि फरार बंदियों की तलाश के लिए विशेष टीम बनाई गई है और जल्दी ही उन्हें पकड़ लिया जाएगा। अंत में बता दें कि ग्वालियर जेल से फरार होने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे जेल सुरक्षा और पैरोल प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस अब इन मामलों को गंभीरता से ले रही है और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।  

नल-जल योजना में अब नई गड़बड़ी सामने आई, पाइप लिया नहीं और ठेकेदारों को कर दिया भुगतान

ग्वालियर नल जल योजना से जनता को पानी मिले न मिले ठेकेदार और अफसरों की चांदी होना तय है। इस योजना में अब नई गड़बड़ी सामने आई है। जिसमें माल का भुगतान तो हो गया, लेकिन माल विभाग ने लिया ही नहीं। यही नहीं बाद में इसी माल को खुर्द-बुर्द भी कर दिया गया। फर्जी सीपेट सर्टिफिकेट के मामले में फंसी मुरैना की दोनों फर्मों ने भी ऐसा ही किया है। मुख्य अभियंता कार्यालय ने जब जांच कराई तो इनकी साइट पर ही पाइप रखे मिले हैं। जिसके फोटो भी अफसरों को मिल चुके हैं। इसके बाद इस संबंध में सभी कार्यपालन यंत्रियों को पत्र भी जारी किया गया है। दरअसल मुरैना में मां हरसिद्धी कंस्ट्रक्शन कंपनी और मैसर्स मीरा धाकड़ फर्म ने फर्जी सीपेट रिपोर्ट लगाकर भुगतान प्राप्त किया था। इस मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। इधर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता आरएलएस मौर्य ने इस प्रकार के फर्जीवाड़े की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। जिसने स्पाट से फोटो लेकर भेज दिए हैं। जिससे पता चला कि विभाग द्वारा भुगतान करने के बाद भी पाइप अब तक दोनों फर्मों की साइट पर ही रखे हुए हैं। विभाग ने जब पड़ताल की तो पता चला कि इस प्रकार की स्थिति केवल मुरैना ही नहीं बल्कि कई अन्य जिलों में भी है। जहां भुगतान करने के बाद भी सामान को ग्रामीण पीएचई के अफसरों ने अपनी कस्टडी में नहीं लिया है। ये मिली शिकायतें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय को शिकायत मिली है कि ठेकेदारों के द्वारा योजनाओं के तहत खरीदे गए पाइपों का 60 प्रतिशत भुगतान प्राप्त किया गया है। इसके बाद पाइप विभाग की संपत्ति हो जाती है, लेकिन ठेकेदार इन पाइपों को अपने पास ही रखते हैं। इसमें यह भी शामिल है कि भुगतान प्राप्त करने के बाद ठेकेदार इस सामग्री को वहां से खुर्द-बुर्द कर देते हैं। इसके बाद ही गोपनीय रूप से पड़ताल कराई गई थी कि कहां पर उपयंत्रियों के रिकार्ड में सामग्री नहीं है। पता चला कि इस प्रकार की स्थिति अंचल के कई जिलों में है। यह है नियम: बताया जाता है कि नल जल योजना में जो भी सामान खरीदा जाता है, उसका 60 प्रतिशत भुगतान ग्रामीण पीएचई विभाग द्वारा किया जाता है। इसके बाद यह सामान विभाग को अपनी कस्टडी में ही रखना होता है। जबकि जांच में सामने आया कि ठेकेदारों ने विभाग से भुगतान ले लिया और पाइप व अन्य सामान भी अपने पास ही रखे रहे। अब क्या: मुख्य अभियंता कार्यालय ने जिन ठेकेदारों के द्वारा पाइप खरीदने के बाद भुगतान प्राप्त कर लिया गया है, ऐसे सभी पाइपों की मात्रा योजनावार एमएएस अकाउंट में संबंधित उपयंत्री से मंगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इस योजना में पाइप की खरीदी और कस्टडी से लेकर तमाम जानकारी भी कार्यालय में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। मुरैना की जिन फर्माें ने फर्जी सीपेट सर्टिफिकेट लगाए हैं, उन्हाेंने भुगतान ताे प्राप्त किया, लेकिन पाइप अब भी साइट पर ही रखे हुए हैं। इसी प्रकार की शिकायत अन्य जिलाें में भी मिली है। जब विभाग राशि का भुगतान कर चुका है ताे संपत्ति विभाग के पास हाेना चाहिए। इस मामले में हमने पूरी जानकारी सभी कार्यपालन यंत्रियाें से मंगाई है। इस प्रकार की गड़बड़ी में जाे भी दाेषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरएलएस मौर्य, मुख्य अभियंता लाेक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

पूजा हेगड़े ने सूर्या 44 के बारे में रोमांचक जानकारी दी

  मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री पूजा हेगड़े ने अपनी आने वाली फ़िल्म सूर्या 44 के बारे में रोमांचक जानकारी दी है। पूजा हेगड़े जल्द ही कुछ बेहतरीन प्रोजेक्ट्स के साथ धमाल मचाने के लिए तैयार हैं और प्रशंसक यह देखने के लिए बेताब हैं कि उनके पास क्या है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर आस्क मी एनीथिंग सेशन के दौरान, पूजा हेगड़े ने अपने फॉलोअर्स को अपनी बहुप्रतीक्षित पैन-इंडिया फिल्म, सूर्या 44 के बारे में एक झलक दिखाई। जब एक प्रशंसक ने अपडेट के लिए पूछा, तो पूजा ने ऐसा जवाब दिया जिसने सभी को उत्सुक कर दिया। उन्होंने कहा, “यदि कार्तिक सुब्बाराज को कोई प्रेम कहानी लिखनी पड़े, तो वह कैसी होगी? वह सूर्या 44 होगी।” दिलचस्प लग रहा है, है न? कार्तिक सुब्बाराज की सिग्नेचर स्टोरीटेलिंग और सूर्या की मुख्य भूमिका के साथ, यह पहले से ही काफी चर्चा बटोर रही है! एक अन्य प्रशंसक ने पूछा कि पूजा आगे किस तरह की फ़िल्में करना चाहती हैं। उनका जवाब? वह जीवन के उतार-चढ़ाव वाली कहानियाँ, आने वाले समय के नाटक, रोमांटिक कॉमेडी और रिश्तों पर आधारित फ़िल्में करना पसंद करेंगी। सूर्या 44 के अलावा, पूजा एक्शन से भरपूर देवा और बहुप्रतीक्षित थलपति 69 पर भी काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 नवंबर को उज्जैन में शासकीय मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए पूजन करेंगे

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में लंबे समय से शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग उठ रही थी, लेकिन यह इंतजार अब खत्म होने वाला है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 नवंबर को उज्जैन में शासकीय मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए पूजन करेंगे. यह कॉलेज सिंहस्थ के पहले शुरू हो जाएगा. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि भूमि पूजन कार्यक्रम में शहर की जनता, युवा, विद्यार्थी और विभिन्न वर्गों को सम्मिलित करने के प्रयास किए जा रहे है. सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र भेजे गए हैं. साथ ही शहर के प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से संदेश का प्रसारण करवाया जाएगा. हो रही हैं ये तैयारियां इसके अलावा भूमि पूजन कार्यक्रम के पहले विभिन्न संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी. साथ ही नर्सिंग महाविद्यालय और स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा. आगामी 20 नंवबर को बाइक रैली के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है. बता दें मेडिकल कॉलेज खोले जाने को लेकर उज्जैन को लंबे समय से आश्वासन मिल रहा था, लेकिन मेडिकल कॉलेज की सौगात नहीं मिल पा रही थी.मेडिकल कॉलेज की घोषणा होने के बाद भूमि को लेकर प्रश्न चिन्ह लग गया था. ऐसे में अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि सिंहस्थ 2028 के पहले मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएगा. वर्तमान में उज्जैन में एक निजी मेडिकल कॉलेज है. मिलेंगी ये सुविधाएं इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार की ओर से 592.33 करोड़ रूपए दिए गए हैं. इसमें 600 बेड की आधुनिक बिल्डिंग जिसमें जी 13 मंजिल होंगी. यह सभी मॉडर्न उपकरणों से लैस होगी. मेडिकल से संबंधित सभी आवश्यक सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा रोगियों का इलाज किया जाएगा. इसमें टेली मेडिसिन की सुविधा से अंतर्राष्ट्रीय डॉक्टरों की सुविधा भी मिल सकेगी. आपात स्थिति में भी विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेगी. शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण जिला चिकित्सालय परिसर और राजे परिसर के पुराने भवनों को तोड़कर किया जाए‌गा. महाविद्यालय में 150 सीटों का 9 मंजिला कॉलेज भवन, 605 बिस्तरों का 10 मंजिला चिकित्सालय भवन के साथ संख्या राजे परिसर में बालक और बालिका छात्रावास, नर्स छात्रावास और रेसिडेंट डॉक्टर्स के लिए छात्रावास और तीन 13 मंजिला भवन और दो 10 मंजिला भवन का निर्माण किया जाना है.

नक्सलियों ने पुलिस पार्टी पर किया हमला, एक जवान घायल

बालाघाट जिले के रूपझर थाना के पुलिस चौकी सोनगुड्डा के तहत कुंदुल जंगल में 17 नवंबर रविवार को 11 से 12 बजे के बीच पुलिस सर्चिंग पार्टी व नक्सलियों के बीच आपसी हुई मुठभेड़ में हाकफोर्स का एक आरक्षक शिवकुमार शर्मा घायल हो गया है। जिसे प्राथमिक उपचार दिए जाने के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए महाराष्ट्र राज्य के गोंदिया रेफर किया गया हैं। स्पेशल ऑपरेशन के दौरान हमला जानकारी के अनुसार, हाकफोर्स की टीमों के द्वारा नक्सल विरोधी अभियान के तहत रविवार को सूचना के आधार पर स्पेशल आपरेशन चलाया जा रहा था। स्पेशल ऑपरेशन के दौरान पुलिस पार्टी हाकफोर्स एसओजी उकवा पर कुंदुल पहाड़ी जंगल क्षेत्र में जवानों का आमना सामना 12 से 15 सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों से हुआ। नक्सलियों ने पुलिस को देखकर फायरिंग की। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों पर जवाबी फायरिंग की। पुलिस व नक्सली मुठभेड़ में हाकफोर्स के आरक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई से नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग गए। घटना पर थाना रूपझर में नक्सलियों के विरूद्ध विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। मौके से भागे हुए नक्सलियों की धरपकड़ के लिए भारी सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है। मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए पुलिस अधीक्षक नगेंद्र सिंह ने बताया कि आरक्षक का बेहतर उपचार किया जा रहा है और चिकित्सकों से भी चर्चा की जा रही है, जल्द ही आरक्षक की रिकवरी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि 12 से 15 नक्सलियों ने अचानक ही सर्चिंग पार्टी पर हमला कर दिया था। बताया जा रहा है कि पुलिस की 10 पार्टियां नक्सलियों को तलाशने के लिए जंगल में सर्चिंग में जुट गई है।

किसना डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी ने भोपाल में अपना तीसरा एक्सक्लूसिव शोरूम लॉन्च किया

भोपाल, किसना डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी ने भोपाल के अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर मार्केट में अपने तीसरे एक्सक्लूसिव शोरूम का भव्य उद्घाटन किया। यह किसना का मध्य प्रदेश में 7वां और भारत में 55वां एक्सक्लूसिव शोरूम है। इस कार्यक्रम में हरि कृष्णा ग्रुप के संस्थापक और प्रबंध निदेशक श्री घनश्याम ढोलकिया और किसना डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी के निदेशक श्री पराग शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे साथ ही ,मालती राय महापौर भोपाल , कृष्णा गौर राज्यमंत्री भोपाल, रामेश्वर शर्मा विधायक भोपाल मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित रहें । भव्य उद्घाटन के उपलक्ष्य में, किसना डायमंड ज्वेलरी के मेकिंग चार्जेज पर 100% तक की छूट और गोल्ड ज्वेलरी पर 20% तक की छूट की पेशकश कर रहा है। इसके साथ ही किसना के #अबकी_बार_आपके_लिए “शॉप एंड विन ए कार” अभियान के तहत ग्राहकों को 100 से अधिक कार जीतने का मौका मिलेगा। ग्राहक ₹20,000 या उससे अधिक की डायमंड, प्लेटिनम या सोलिटेयर ज्वेलरी और ₹50,000 या उससे अधिक की गोल्ड ज्वेलरी खरीदकर इस अभियान में भाग ले सकते हैं। हरि कृष्णा ग्रुप के संस्थापक और प्रबंध निदेशक, श्री घनश्याम ढोलकिया ने इस मौके पर कहा: “भोपाल ने हमारे शानदार कलेक्शन्स को खूब सराहा है, और इस विस्तारित शोरूम के साथ शहर में अपने ग्राहकों के पास आना हमारे लिए गर्व की बात है। यह विस्तार हमारे विजन ‘हर घर किसना’ के अनुरूप है, जिसमें हम भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते ज्वेलरी ब्रांड बनने का लक्ष्य रखते हैं।” किसना डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी के निदेशक, श्री पराग शाह ने कहा: “हम अपने 55वें शोरूम तक पहुंचने पर गर्व महसूस कर रहे हैं और उपभोक्ताओं को बेहतरीन ज्वेलरी और उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भोपाल में नया शोरूम किसना की भारत में बढ़ती उपस्थिति का प्रमाण है।” फ्रेंचाइजी पार्टनर, श्री सुमित अग्रवाल ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा: “भोपाल में इस एक्सक्लूसिव शोरूम के माध्यम से, हम शहर के निवासियों को किसना की शानदार डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी कलेक्शन के साथ गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करेंगे।” किसना ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए इस लॉन्च इवेंट के तहत वृक्षारोपण अभियान, रक्तदान शिविर, और जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण का आयोजन भी किया।

होम्बले फिल्म्स ने जारी किया ‘महावतार नरसिम्हा’ का पोस्टर

मुंबई, होम्बले फिल्म्स ने फ़िल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ का पोस्टर रिलीज़ कर दिया है। होम्बले फिल्म्स ने ग्रामीण भारत की कहानी पर आधारित सुपरहिट फिल्म कंतारा पेश की थी। एक ऐसी कहानी जिसने सभी के दिलों को छू लिया। अब, सभी के इंतजार को खत्म करते हुए मेकर्स ने अपने नए मेगा प्रोजेक्ट महावतार नरसिम्हा का मोशन पोस्टर जारी कर दिया है, जो एक एनिमेशन फिल्म होने वाली है। अपने सोशल मीडिया पर होम्बेल फिल्म्स ने एक दिलचस्प मोशन पोस्टर के साथ अपने नेक्स्ट प्रोजेक्ट की घोषणा की है। साथ ही कैप्शन में लिखा है:”जब आस्था को चुनौती दी जाती है, तो वे प्रकट होते हैं।अंधकार और अराजकता से त्रस्त दुनिया में… किंवदंती, अर्ध-मानव, अर्ध-सिंह अवतार-भगवान विष्णु के सबसे शक्तिशाली अवतार के प्रकट होने के साक्षी बनें। अच्छाई और बुराई के बीच महाकाव्य युद्ध का 3डी में अनुभव करें।जल्द ही आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में आ रहा है! निर्माता विजय किरागंदूर ने कहा, “महावतार नरसिंह का हिस्सा बनकर हमें बहुत गर्व है। इस एनिमेटेड फिल्म को बहुत दिल, आस्था और मूल्यों के साथ बनाया गया है, जिन पर हम दृढ़ता से विश्वास करते हैं। हमें लगता है कि यह एक महत्वपूर्ण कहानी है जिसे साझा किया जाना चाहिए। हिंदू शास्त्र विशाल हैं और अद्भुत कहानियों से भरे हुए हैं। हम भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह की कहानी को एनीमेशन के माध्यम से लाने के लिए सम्मानित हैं। ये वो कहानियाँ हैं जो भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं, और हमारा मानना है कि हर किसी को इनसे जुड़ने का मौका मिलना चाहिए।”

अक्षय कुमार को लेकर फिल्म बनायेंगे अजय देवगन!

मुंबई, बॉलीवुड के सिंघम स्टार अजय देवगन, खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार को लेकर फिल्म बनाने जा रहे हैं।अजय देवगन और अक्षय कुमार ने हाल ही में प्रदर्शित फिल्म ‘सिंघम अगेन’ में साथ में काम किया है। अजय देवगन और अक्षय कुमार एक नई फिल्म पर काम करने के लिए तैयार हैं। अजय देवगन इस फिल्म का निर्देशन करेंगे, जबकि अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में होंगे। अजय देवगन ने अक्षय कुमार के साथ अपनी अगली फिल्म की घोषणा की है। अजय देवगन ने बताया कि यह कुछ ऐसा है जिसकी हम बाद में घोषणा करने वाले थे लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बेहतरीन मंच है। हम पहले से ही एक साथ एक फिल्म पर चर्चा कर रहे हैं, जिसका मैं निर्देशन कर रहा हूं और अक्षय इसमें मुख्य कलाकार हैं। इस बारे में अभी ज्यादा कुछ बताना जल्दबाजी होगी। अजय देवगन ने बतौर निर्देशक फिल्म ‘आई यू मी और हम’, ‘शिवाय’,’रनवे 34′ ,’भोला’ बनायी है।

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव स्वस्थ नागरिकों से ही सुदृढ़ होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विचार को साकार करने के लिए राज्य सरकार हर नागरिक को सुलभ और उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस दिशा में 21 नवंबर को एक और इतिहास रचने की ओर प्रदेश अग्रसर है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन करेंगे, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नए आयाम प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से पूर्ण किया जायेगा। इससे उज्जैन और आसपास के जिलों के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में केवल 5 शासकीय मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 17 हो चुके हैं। प्रदेश में एम.बी.बी.एस. सीटें भी 720 से बढ़कर 2,575 हो गई हैं। श्योपुर, सिंगरौली, मंडला और राजगढ़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ छतरपुर, दमोह और बुधनी में स्ववित्तीय अनुदान से मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही 12 अन्य जिलों में सार्वजनिक जनभागीदारी नीति के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से एम.बी.बी.एस. सीटों में 2,000 से अधिक की वृद्धि होगी। भोपाल और ग्वालियर में अस्पताल की बेड कैपेसिटी को 2,500 तक बढ़ाने के साथ-साथ इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में सुपरस्पेशलिटी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबलपुर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन और इंदौर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई जैसी योजनाएं प्रदेश को चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणी बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 14 मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 24 शासकीय नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जो जल्द ही 37 हो जाएंगे। प्रदेश में 250 पैरामेडिकल कॉलेजों में लगभग 25,000 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही, मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, ताकि ये जिला अस्पतालों के समान उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें। इसके साथ ही इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के मानकों के अनुरूप 30,000 से अधिक चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सकीय पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिकों से ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण संभव है। 592 करोड़ रुपये की लागत से होगा मेडिकल कॉलेज का निर्माण उज्जैन मेडिकल कॉलेज 14.97 एकड़ भूमि पर निर्मित किया जाएगा। निर्माण क्षेत्र 1 लाख 42 हज़ार 34 वर्ग मीटर प्रावधानित है। इसकी कुल लागत 592.3 करोड़ रुपए है। इसमें फायर सेफ्टी के लिए आधुनिक तकनीकों, ऊर्जा दक्षता के लिए एलईडी लाइटिंग, सौर ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल एचवीएसी सिस्टम का उपयोग किया गया है। वर्षा जल संग्रहण और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी प्रावधान किया गया है। मेडिकल कॉलेज में फुट ओवर ब्रिज, ग्रंथालय भवन, सर्विस ब्लॉक, एमजीपीएस ब्लॉक और ईएसएस ब्लॉक की सुविधा शामिल हैं। 550 बिस्तरों वाला आधुनिक शिक्षण अस्पताल उज्जैन मेडिकल कॉलेज शिक्षण अस्पताल की क्षमता 550 बेड की है। अस्पताल में 24×7 आपातकालीन सेवाओं, फार्मेसी, रेडियोलॉजी (CT, MRI, X-RAY, फ्लोरोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड), जनरल एवं सुपर स्पेशलिटी ओपीडी जैसी सेवाओं से सुसज्जित है। अस्पताल में 550 आई.पी.डी. बिस्तर, ICU और CCU के लिए 70 बिस्तर, 11 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 1 कैथ लैब और 2 एंडोस्कोपी यूनिट उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परमाणु चिकित्सा विभाग और 2 रेडियोथेरेपी बंकर (ब्रैकीथेरेपी और सीटी सिम्युलेटर) जैसी उन्नत सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। डॉक्टरों, स्टाफ और जनता के लिए कैफेटेरिया की व्यवस्था भी है। निर्माण कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा किया जायेगा। 100 एम.बी.बी.एस. सीट की प्रवेश क्षमता उज्जैन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की प्रवेश क्षमता 100 प्रावधानित है। मेडिकल कॉलेज में 4 अत्याधुनिक लेक्चर थियेटर (प्रत्येक की क्षमता 180) और 2 परीक्षा हॉल (प्रत्येक की क्षमता 250) रहेगी। सेंट्रल लाइब्रेरी, शिक्षण और फैकल्टी क्षेत्र, प्रयोगशाला और कौशल प्रशिक्षण केंद्र के साथ प्रशासनिक भवन, सामान्य कक्ष और मनोरंजन सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। 380 नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधा का प्रावधान है। इसमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र, डायनिंग हॉल और किचन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यूजी और इंटर्न छात्र एवं छात्राओं के लिए छात्रावास उज्जैन मेडिकल कॉलेज में छात्रों के लिए 329 यूजी और 70 इंटर्न तथा छात्राओं के लिए 286 अंडरग्रेजुएट और 58 इंटर्न की क्षमता वाला छात्रावास रहेगा। इनमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र और डायनिंग सुविधाएं रहेंगी। 145 विद्यार्थियों की क्षमता वाला आरडीएच छात्रावास जिम, डायनिंग हॉल और स्टिल्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं से युक्त रहेगा।  

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