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पाक सैनिक अब भी अस्पतालों में, दुख बांटने पहुंचे आसिम मुनीर और CM मरियम, ऑपरेशन सिंदूर ने तोड़ी सैन्य कमर

नई दिल्ली भारत के ऑपरेशन सिंदूर का ऐसा असर हुआ है कि एक हफ्ते बाद भी पाक सैनिक अस्पतालों में भर्ती हैं। घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। भारतीय एयरफोर्स की सटीक बमबारी ने न सिर्फ आतंकियों का सफाया किया, पाकिस्तान की सैन्य कमर तोड़ दी—झटका इतना जबरदस्त था कि अब तक घायल अफसर और जवान अस्पतालों में कराह रहे हैं। पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने घायल सैनिकों का हालचाल लेने के लिए अस्पताल का दौरा किया। पाकिस्तान सेना के जवानों को देखने पहुंची मरियम नवाज घायलों के सिर पर हाथ रखकर उन्हें ढाढस बांधते नजर आई। उधर, मुनीर ने भी रावलपिंडी में मीलिट्री अस्पतालों का रुख किया और घायल जवानों से मुलाकात की। इन तस्वीरों ये यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय सेना की सटीक रणनीति ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। साथ ही पाकिस्तान के उन दावों की भी पोल खुल गई कि भारतीय सैनिकों के हमले पाकिस्तान और सैनिकों पर ज्यादा वार नहीं कर पाए। पाक के 40 से ज्यादा जवान अफसर मारे गए भारतीय सेना प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट कर चुकी है कि सेना ने पाकिस्तान की दुर्दशा की है। सेना ने बताया कि हमारा लक्ष्य आतंकी ठिकाने और आतंकवादी ही थे, लेकिन पाकिस्तानी सैनिकों ने इसे अपनी लडा़ई समझा और हम पर हमलों की नाकाम कोशिश की। इसके जवाब में हमारे वीर जवानों ने उनके सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। कई एयरबेस उड़ा दिए और हमले में पाक के 40 से अधिक जवान और अफसर मारे गए। आतंक के खिलाफ कड़ा प्रहार भारतीय सैन्य अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को सटीकता और तत्परता से पूरा किया, जिससे पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ आतंकवादियों के खिलाफ भी सख्त संदेश दिया। पीएम मोदी ने भी 12 मई को राष्ट्र के नाम संबोधन में स्पष्ट किया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने दो टूूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के साथ अब सिर्फ आतंकवाद पर ही बात होगी। साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मुनीर की गीदड़भभकी आसिम मुनीर ने अस्पताल में घायल जवानों से मुलाकात के बाद एक बार फिर गीदड़भभकी दी है। मुनीर ने कहा कि ‘हमारे दुश्मन कभी भी हमें झुका नहीं सकते। हमारी सेना के हौसले बुलंद हैं और हम दुश्मन का सामना करने के लिए हमेशा तैयार हैं।’  

‘पाकिस्तानी लिंक’ वाले मौलाना की ओर से चलाया जा रहा मदरसे पर चला दिया बुलडोजर

अहमदाबाद गुजरात में पुलिस ने एक मौलाना का ‘पाकिस्तानी लिंक’ सामने आने के बाद उसकी ओर से संचालित किए जा रहे मदरसे को बुलडोजर से मिट्टी में मिला दिया है। मौलाना मोहम्मद फजल अब्दुल अजीज शेख की ओर से चलाया जा रहा था। मौलाना के फोन में पाकिस्तानी कनेक्शन वाले कई वॉट्सऐप ग्रुप मिलने के बाद पुलिस ने यह ऐक्शन लिया है। अमरेली के डीएसपी पीआर राठौर ने कहा कि एसडीएम की जांच में पाया गया कि मदरसे के पास दस्तावेज नहीं हैं। संचालक यह बताने में असफल रहे कि यह मदरसे की जमीन उनकी है और निर्माण कानूनी तरीके से किया गया है। मौके पर भारी सुरक्षाबल को तैनात किया गया था। हालांकि, पुलिस को किसी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद गुजरात पुलिस ने अमरेली से संदिग्ध मौलाना को हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान उसका पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया था। उसके फोन में 7 संदिग्ध पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी वॉट्सऐप ग्रुप पाए गए थे। पुलिस मौलाना से पूछताछ करके यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह पाकिस्तान में किन लोगों के संपर्क में था और उसका मकसद क्या था। धारी पुलिस स्टेशन में मौलाना के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मौलाना मूल रूप से अहमदाबाद का रहने वाला है और अमरेली में मदरसा चला रहा था।

जम्‍मू-कश्‍मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में ढेर किया एक आतंकी, दो के फंसे होने की आशंका

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल एक बार फिर एक्शन में आ गए हैं। मंगलवार को आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। लगातार फायरिंग के बाद सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया। यह एनकाउंटर शोपियां के जिनपथेर केलर इलाके में हुआ है। बताया जा रहा है कि मारा गया आतंकी लश्कर-ए-तैयबा का था। वहीं सेना के हाथ बड़ी कामयाबी भी लगी है कि दो आतंकियों को जिंदा पकड़ा गया है। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि दक्षिण कश्मीर के शोपियां में जम्पाथरी इलाके में कुछ आतंकी छिपे हैं। ये आतंकी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। सुरक्षाबलों ने सर्च अभियान चलाया। इसी दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकियों के ठिकाने को चारों तरफ से घिर लिया। आतंकियों को सरेंडर करने को कहा गया। आतंकियों ने की फायरिंग सुरक्षाबलों से घिरे आतंकियों ने फायरिंग करनी शुरू कर दी। इसी दौरान सुरक्षाबलों ने भी जवाबी फायरिंग की। लगातार ताबड़तोड़ गोलीबारी होती रही। आखिरकार एक आतंकी को गोली लगी और वह गिर पड़ा। दो आतंकियों ने इसी दौरान भागने की कोशिश की लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान मिले सामान तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में गोला-बारूद मिला। असलहे मिले हैं और कई गुप्त दस्तावेज भी बरामद हुए है। आतंकी लश्कर ए तैयबा संगठन से जुड़ा है। पकड़े गए दो आतंकियों से पूछताछ के बाद कुछ और खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस ने जारी किए आतंकियों के पोस्टर जारी, 20 लाख का इनाम, कश्मीर में तलाश तेज

श्रीनगर पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले करने वाले गुनहगारों को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है. अब सुरक्षा एजेंसियों ने पहलगाम हत्याकांड के लिए जिम्मेदार तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों के पोस्टर जारी किए हैं. शोपियां जिले के कई इलाकों में पोस्टर लगाए गए हैं. पहलगाम आतंकी हमले में शामिल लोगों की जानकारी देने वाले को 20 लाख का इनाम देने का ऐलान किया गया है. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि हमलावरों के बारे में जानकारी देने वालों की पहचान को गुप्त रखा जाएगा. इससे पहले भी सेना के द्वारा स्केच जारी किया जा चुका है. पर्यटकों को बनाया गया निशाना पिछले महीने पहलगाम के बैसरान घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 17 लोग घायल हो गए हैं. आतंकियों ने टूरिस्ट को निशाना बनाया था. दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में बुधवार सुबह से सेना से लेकर एनआईए, पुलिस और अन्य एजेंसियां एक्टिव किए गए. किस भाषा में बोल रहे थे आतंकी? सूत्रों के अनुसार, बेसरान हमले में शामिल दो स्थानीय आतंकियों की पहचान हुई है. हमले में दो पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल हैं. इन आतंकियों ने 15 से 20 मिनट तक लगातार AK-47 से फायरिंग की. हमला करने वाले दो आतंकी पश्तून भाषा में बात कर रहे थे, जिससे स्पष्ट होता है कि वे पाकिस्तानी नागरिक हैं. दो स्थानीय आतंकियों की पहचान भी हुई है. इनके नाम आदिल अहमद ठाकुर और आशिफ शेख बताए गए हैं. स्थानीय आतंकी भी लश्कर और जैश से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आदिल ठाकुर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा हुआ है और जम्मू-कश्मीर के गुरी, बिजबेहड़ा का रहने वाला है. जबकि आशिफ शेख का कनेक्शन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से है और वो मोंघामा, मीर मोहल्ला (त्राल) का निवासी है. हमले के वक्त एक से दो आतंकियों ने बॉडी कैमरा पहन रखा था और उन्होंने पूरे हमले को रिकॉर्ड किया.  

CBSE बोर्ड कक्षा 12वीं का परिणाम जारी कर दिया गया, इस साल लड़कियों का पास प्रतिशत 91.64 रहा

नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड से सेकेंडरी एवं सीनियर सेकेंडरी एग्जाम में भाग लेने वाले 42 लाख से अधिक स्टूडेंट्स के साथ ही उनके माता-पिता को रिजल्ट जारी होने का बेसब्री से इंतजार है जो खत्म हो गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12th कक्षा का परिणाम आज यानी 13 मई को जारी कर दिया गया है। आपको बता दें कि बोर्ड की ओर से पहले CBSE 12th Result 2025 जारी किया गया है। इसके बाद अब CBSE 10th Result 2025 की घोषणा की जाएगी।केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई)  का 12वीं के रिजल्ट कभी भी घोषित किए जा सकते हैं. इसी बीच सीबीएसई ने 12वीं का पास पर्सेंटेज जारी कर दिया है. बता दें कि एक बार फिर लड़कियों ने बाजी मारी है. 12वीं के बोर्ड एग्जाम में 91.64 प्रतिशत लड़कियां पास हुई हैं तो वहीं 85.70 प्रतिशत लड़के ही 12वीं की परीक्षा में पास हो पाए हैं. पास प्रतिशत में सुधार, 88.39% छात्र हुए सफल इस वर्ष परीक्षा के लिए 17,04,367 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 16,92,794 छात्र परीक्षा में उपस्थित हुए और 14,96,307 उत्तीर्ण घोषित किए गए। परिणामस्वरूप, कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 88.39% रहा, जो कि पिछले वर्ष के 87.98% की तुलना में 0.41% अधिक है। विज्ञापन पास होने के लिए 33% अंक अनिवार्य सीबीएसई नियमों के अनुसार, परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए छात्रों को सभी विषयों में और कुल मिलाकर कम से कम 33% अंक प्राप्त करने होंगे। यह मानदंड हर वर्ष के अनुसार समान रहता है। DigiLocker से भी उपलब्ध है मार्कशीट CBSE ने छात्रों और स्कूलों के लिए DigiLocker एप्लीकेशन के ज़रिए भी परिणाम और डिजिटल मार्कशीट उपलब्ध कराई है। इसके लिए छात्रों को 6 अंकों का एक्सेस कोड स्कूल से प्राप्त कर DigiLocker में लॉग इन करना होगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से कक्षा 12वीं के नतीजे 2025 जारी हो गए हैं. परीक्षा में 88.39 फीसदी स्टूडेंट पास हुए हैं. विद्यार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbseresults.nic.in और results.cbse.nic.in — पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं. इस वर्ष कुल मिलाकर 44 लाख से अधिक छात्रों ने बोर्ड परीक्षाएं दी हैं. कक्षा 10वीं की परीक्षाएं 18 मार्च को समाप्त हुई थीं, जबकि कक्षा 12वीं की अंतिम परीक्षा 4 अप्रैल को आयोजित की गई थी. रिजल्ट जारी होने के बाद अगर कोई छात्र एक या दो विषयों में फेल हो गया है तो उन्हें परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे स्टूडेंट्स रिजल्ट जारी होने के बाद कम्पार्टमेंट एग्जाम में भाग लेकर इसी साल परीक्षा पास कर सकते हैं और अपना साल खराब होने से बचा सकते हैं। CBSE में पास होने के लिए कितने प्रतिशत अंक जरूरीइन वेबसाइट्स पर मिलेगा सीबीएसई बोर्ड का रिजल्ट CBSE ने छात्रों को सूचित किया है कि स्टूडेंट्स अपना स्कोरकार्ड आधिकारिक वेबसाइट्स — cbse.gov.in, cbseresults.nic.in और results.cbse.nic.in — पर जाकर चेक कर सकते हैं. इसके अलावा छात्र अपने डिजिटल मार्कशीट और प्रमाणपत्र को DigiLocker ऐप के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं. बोर्ड छात्रों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS भेजकर DigiLocker लॉगिन आईडी और एक्सेस कोड साझा करेगा, जिससे वे आसानी से लॉगिन कर सकते हैं. इसी के साथ, UMANG ऐप और SMS सेवा के माध्यम से भी छात्र परिणाम प्राप्त कर सकते हैं. स्कोर कार्ड में Relative Grading के अनुसार मिलेंगे ग्रेड एक बड़ी बदलाव की बात करें तो इस बार से बोर्ड ने नई ग्रेडिंग प्रणाली ‘Relative Grading’ लागू की है, जो कि पुराने फिक्स्ड ग्रेडिंग पैटर्न से अलग है. पहले छात्रों को निश्चित अंकों की सीमा के आधार पर ग्रेड मिलते थे (जैसे 91–100 = A1), लेकिन अब छात्रों के ग्रेड उनके सहपाठियों के औसत प्रदर्शन के आधार पर तय किए जाएंगे. इसका उद्देश्य छात्रों पर पड़ने वाले शैक्षणिक दबाव को कम करना और प्रतिस्पर्धा को संतुलित करना है. इन तीन वेबसाइट्स पर चेक करें सीबीएसई बोर्ड 12वीं का रिजल्ट cbse.gov.in cbseresults.nic.in results.cbse.gov.in

‘ब्रह्मोस’ मिसाइल जमीन, हवा और समुद्र से की जा सकती है लॉन्च

   नई दिल्ली भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने नूर खान (चकलाला) में एयरबेस सहित पाकिस्तान के कई प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों और एयरबेसों को निशाना बनाया। सूत्रों का कहना है कि भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल तब किया, जब पाकिस्तान ने अपनी फतह 11 बैलिस्टिक मिसाइलों से नई दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, फतह को हरियाणा के सिरसा के पास एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया था।   सूत्रों ने बताया कि क्रूज मिसाइल का सामरिक उपयोग पाकिस्तान की परमाणु ताकत की छवि को कमजोर करने के लिए किया गया था। यह एक ऐसा मोड़ था, जिसने पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया और सेना प्रमुख असीम मुनीर सहित सैन्य नेतृत्व को कदम पीछे खींचने पर मजबूर किया। एक दिन पहले भारत ने लाहौर में वायु रक्षा प्रणाली पर हमला किया था। इससे पाकिस्तान की कमजोरियां उजागर हो गई थीं कि भारत की मिसाइलें उसके क्षेत्र में बहुत अंदर तक सटीकता से लक्ष्य को भेद सकती हैं। ब्रह्मोस समेत भारत की मिसाइलों ने रफीकी, मुरीदके, नूर खान, रहीम यार खान, सुक्कुर, चुनियन, स्कार्दू, भोलारी, जैकबाबाद में भारी नुकसान पहुंचाया। ‘दागो और फिर भूल जाओ’ का सिद्धांत ब्रह्मोस दो-चरणीय मिसाइल है। इसे रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसका नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा से मिलाकर रखा गया है। यह भारत-रूस साझेदारी का प्रतीक भी है। मिसाइल ठोस ईंधन बूस्टर के साथ लॉन्च होती है जो उड़ान भरने के बाद अलग हो जाता है। इसके बाद तरल ईंधन से चलने वाला रैमजेट इंजन इसे मैक 3 की गति से आगे बढ़ाता है। 10 मीटर की ऊंचाई पर भी हमला कर सकती है मिसाइल यह 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकती है और जमीन से 10 मीटर की ऊंचाई पर भी हमला कर सकती है। इसे दागो और भूल जाओ के सिद्धांत पर डिजाइन किया गया है। एक बार लॉन्च होने के बाद इसे किसी और मार्गदर्शन की जरूरत नहीं होती। मिसाइल का कम रडार सिग्नेचर और उच्च गतिज ऊर्जा के कारण इसे रोकना बेहद कठिन हो जाता है। 290 किमी है मानक रेंज ब्रह्मोस मिसाइलों की मानक मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। हालांकि, हाल ही में 450 किलोमीटर से अधिक और 800 किलोमीटर तक की विस्तारित मारक क्षमता वाले संस्करणों का सफलतापूर्वक परीक्षण भी किया गया है। भविष्य के वेरिएंट का लक्ष्य 1,500 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों पर हमला करना है। 24 वर्ष पहले हुआ था ब्रह्मोस का पहला परीक्षण ब्रह्मोस का पहला परीक्षण 12 जून, 2001 हुआ था। भारतीय नौसेना ने 2005 में आईएनएस राजपूत पर अपना पहली ब्रह्मोस प्रणाली शामिल की थी। भारतीय सेना ने 2007 में अपनी रेजिमेंट के साथ इसे शामिल किया और बाद में वायुसेना ने सुखोई-30एमकेआई विमान से हवाई-लॉन्च वाले संस्करण को शामिल किया। 2025 तक इसके दो संस्करण सेवा में हैं।  

DRDO के वैज्ञानिक ह्यूमनॉइड रोबोट पर काम कर रहे हैं, 2027 तक तैयार होगा जो रक्षा और अन्य क्षेत्रों में क्रांति लाएगा

बेंगलुरु रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक एक ऐसे मानवरोबोट (ह्यूमनॉइड रोबोट) के विकास पर काम कर रहे हैं, जो अग्रिम पंक्ति के सैन्य मिशनों में हिस्सा ले सके. एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि इस रोबोट का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सैनिकों की जान को खतरे में डाले बिना जटिल कार्यों को अंजाम देना है. डीआरडीओ के तहत एक प्रमुख प्रयोगशाला, रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स), इस मशीन को विकसित कर रही है. प्रत्यक्ष मानव निर्देशों के तहत जटिल कार्यों को करने में सक्षम होगी. इस रोबोट को विशेष रूप से ऐसे वातावरण में सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, जहां जोखिम अधिक है. चार साल से चल रहा है प्रोजेक्ट पुणे में सेंटर फॉर सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज फॉर एडवांस्ड रोबोटिक्स के समूह निदेशक एस.ई. तलोले ने बताया कि उनकी टीम पिछले चार साल से इस परियोजना पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि हमने ऊपरी और निचले शरीर के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप विकसित किए हैं. आंतरिक परीक्षणों के दौरान कुछ कार्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया है. यह ह्यूमनॉइड रोबोट जंगल जैसे कठिन इलाकों में भी काम कर सकेगा. हाल ही में पुणे में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन एडवांस्ड लेग्ड रोबोटिक्स में इस रोबोट को प्रदर्शित किया गया था. उन्नत विकास चरण में प्रोजेक्ट वर्तमान में यह प्रोजेक्ट अपने उन्नत विकास चरण में है. टीम का ध्यान रोबोट की ऑपरेटर के निर्देशों को समझने और उन्हें लागू करने की क्षमता को और बेहतर बनाने पर है. इस प्रणाली में तीन मुख्य घटक शामिल हैं:       एक्ट्यूएटर्स: ये मानव मांसपेशियों की तरह गति उत्पन्न करते हैं.       सेंसर: ये आसपास के वातावरण से वास्तविक समय में डेटा एकत्र करते हैं.       नियंत्रण प्रणाली: ये एकत्रित जानकारी का विश्लेषण करके रोबोट के कार्यों को निर्देशित करती हैं. तलोले ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि रोबोट वांछित कार्यों को सुचारू रूप से कर सके. इसके लिए संतुलन, तीव्र डेटा प्रोसेसिंग और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में महारत हासिल करना आवश्यक है. डिज़ाइन टीम का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक किरण अकेला ने बताया कि शोधकर्ता इन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. 2027 तक इस परियोजना को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं. रोबोट की विशेषताएं और क्षमताएं डीआरडीओ के अधिकारियों ने बताया कि दो पैरों (बाइपेडल) और चार पैरों (क्वाड्रुपेडल) वाले रोबोट रक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा, घरेलू सहायता, अंतरिक्ष अन्वेषण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं प्रदान करते हैं. हालांकि, स्वायत्त और कुशल लेग्ड रोबोट बनाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है. वैज्ञानिकों ने बताया कि इस ह्यूमनॉइड रोबोट का ऊपरी हिस्सा हल्के वजन वाले हाथों से सुसज्जित होगा, जिसमें गोलाकार रिवॉल्यूट जोड़ कॉन्फ़िगरेशन होगा. इसमें कुल 24 डिग्री ऑफ फ्रीडम होंगे – प्रत्येक हाथ में 7, ग्रिपर में 4, और सिर में 2. यह रोबोट जटिल स्वायत्त कार्य करने में सक्षम होगा, जैसे:  बंद-लूप ग्रिपिंग के साथ वस्तुओं को पकड़ना.   वस्तुओं को मोड़ना, धक्का देना, खींचना, स्लाइडिंग दरवाजे खोलना, वाल्व खोलना और बाधाओं को पार करना. खतरनाक सामग्रियों जैसे खदानों, विस्फोटकों और तरल पदार्थों को सुरक्षित रूप से संभालना. दोनों हाथ मिलकर सहयोगात्मक रूप से कार्य करेंगे, जिससे खतरनाक सामग्रियों को सुरक्षित रूप से संभाला जा सके. उन्नत तकनीकी विशेषताएं यह रोबोट दिन हो या रात, घर के अंदर हो या बाहर, निर्बाध रूप से काम करेगा. इसमें निम्नलिखित तकनीकी विशेषताएं शामिल होंगी… प्रोप्रियोसेप्टिव और एक्सटेरोसेप्टिव सेंसर: ये रोबोट को अपने शरीर और आसपास के वातावरण के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे.       डेटा फ्यूजन क्षमता: विभिन्न स्रोतों से डेटा को एकीकृत करने की क्षमता.       सामरिक संवेदन: यह रोबोट को जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने में मदद करेगा.       ऑडियो-विजुअल धारणा: यह रोबोट को देखने और सुनने की क्षमता प्रदान करेगा. इसके अलावा, यह ह्यूमनॉइड बाइपेड रोबोट निम्नलिखित विशेषताओं से लैस होगा…     फॉल और पुश रिकवरी: गिरने या धक्का दिए जाने पर स्वयं को संभालने की क्षमता.       वास्तविक समय में मैप जनरेशन: आसपास के क्षेत्र का नक्शा बनाने की क्षमता.       स्वायत्त नेविगेशन और पथ नियोजन: सिमुल्टेनियस लोकलाइजेशन एंड मैपिंग (एसएलएएम) के माध्यम से यह रोबोट जटिल और उच्च जोखिम वाले वातावरण में स्वायत्त रूप से संचालित हो सकेगा. भविष्य की संभावनाएं डीआरडीओ के इस ह्यूमनॉइड रोबोट प्रोजेक्ट से न केवल रक्षा क्षेत्र में क्रांति आएगी, बल्कि यह अन्य क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष अन्वेषण और औद्योगिक अनुप्रयोगों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की उन्नत तकनीक सैनिकों की सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ मानव जीवन को और सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में मदद करेगी.  

अमेरिका नहीं चाहता था कि पाकिस्तान बिखर जाए, कर्ज पर टिकी इकॉनमी, भारत के सामने घुटने टेकने पड़े

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 10 मई की शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया और भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हो गया। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से आई तस्वीरों में जश्न का सा माहौल था, जबकि भारत में जैसे चुप्पी साध ली गई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे अपनी जीत बताते हुए पाकिस्तानी सेना को बधाई तक दे डाली। US-चीन एकमत: पाकिस्तान में मनाई जा रही खुशी समझौते की है या फिर इसलिए कि ट्रंप ने हार से बचा लिया? भारत के लोग इसे किस नजरिए से देखें? यह मसला दो देशों के बीच का था, तो ट्रंप ने इसकी घोषणा क्यों की? क्या इसका संदेश यह नहीं जाता कि ट्रंप हर हाल में पाकिस्तान को बचाना चाह रहे थे। वैसे चीन भी नहीं चाहता था कि भारत-पाकिस्तान टकराव जारी रहे क्योंकि कुछ मामलों में उसकी भी भद्द पिट रही थी, अमेरिका ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। तो क्या पाकिस्तान मसले पर अमेरिका और चीन एकमत थे? ट्रंप की बेचैनी: सिद्धांत रूप से चीन के लिए दक्षिण एशिया में पाकिस्तान का वही महत्व है, जो पश्चिम एशिया में अमेरिका के लिए इस्राइल का। अमेरिका भी पाकिस्तान को इसी नजरिए से देख रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी वजह से ट्रंप इतने बेचैन थे? समझौते के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मालिक ने जो ट्वीट किया, उसके कुछ तो मायने हैं, ‘संघर्ष विराम 10 मई 2025 : हमने भारत के भविष्य को यह पूछने के लिए छोड़ दिया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी हमले (22 अप्रैल को पहलगाम में) के बाद अपनी कार्रवाइयों से भारत ने कोई राजनीतिक या रणनीतिक लाभ हासिल किया या नहीं।’ ऐसा ही कुछ पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने भी अपने ट्वीट की अंतिम पंक्ति में लिखा है, ‘ …हम हर बार घटनाओं पर आधारित प्रतिक्रिया देकर अपने लोगों की जान नहीं गंवा सकते। यह तीसरी बार है, अब आगे कोई और मौका नहीं।’ अनसुनी पुकार: ट्रंप के लिए यह खुशी का अवसर हो सकता है, वह दुनिया को यह संदेश देने में कामयाब हो गए कि अमेरिका अब भी दुनिया का लीडर है। उनके विदेश मंत्री ने इसका भरपूर प्रचार भी कर दिया। अमेरिका मानव हानि से बड़ा आहत दिखा। होना भी चाहिए। लेकिन क्या भारत से अधिक कोई राष्ट्र मानवीय संवेदनाओं से संपन्न है? स्पष्टतया नहीं। 1990 के दशक से ही भारत दुनिया को पाकिस्तान की आतंकी हरकतों का सबूत देता चला आ रहा है, पर किसी ने नहीं सुना। लेकिन, जैसे ही 9/11 की घटना हुई, अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ दी। अमेरिका ने जब काबुल में तबाही फैलाई, तो क्या आम अफगानी नहीं मरा? पाकिस्तान पर मौन: काबुल के बाद अमेरिका ने बगदाद को निशाना बनाया, जिसका कोई औचित्य नहीं था। हां, उसे सद्दाम हुसैन की तरफ से कुछ खतरे दिख रहे होंगे, और उसने बगदाद का ध्वंस कर दिया। दुनिया उस समय मौन थी या तालियां बजा रही थी। दुनिया इस बात पर भी मौन रही कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का एपीसेंटर पाकिस्तान है, और उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ। आतंक की जड़: यह स्थापित हो चुका है कि पाकिस्तान ही एशिया में आतंकवाद की जड़ है। लेकिन, अमेरिका ने अफगान वॉर में उसे सिपहसालार बना लिया था। यह बात तो अमेरिकी सेना के जनरल डेविड पेट्रास ने भी कही थी कि अल-कायदा, पाकिस्तानी तालिबान, अफगान तालिबान, TNSM (तहरीक-ए-नफज-ए-शरीयत-ए-मोहम्मदी) के बीच सिम्बियोटिक रिलेशनशिप है, फिर भी अमेरिका खामोश रहा। दबाव बढ़ रहा था: अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरें बता रही थीं कि पाकिस्तान काफी दबाव में है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा था, ‘भारत ने आतंकी संगठनों पर कार्रवाई कर पाकिस्तान को यह संदेश दिया है कि अब वह ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा है। इमरान खान जेल में हैं, चुनाव विवादित रहे हैं। देश आर्थिक संकट में है…।’ पाकिस्तान में घबराहट: वहां तख्तापलट या मार्शल लॉ लागू होने की आशंकाएं जोर पकड़ रही थीं। टॉप लीडर और वरिष्ठ सैन्य अफसर अपना पैसा विदेश भेजने लगे थे। पाकिस्तान के स्टेट बैंक की जांच में यह बात पता चली। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के ओपन एक्सचेंज मार्केट से डॉलर मिलना मुश्किल होने लगा था। उसके पास 12 दिन का आयात बिल चुकाने भर का विदेशी मुद्रा भंडार ही बचा था। अगर IMF से बेलआउट पैकेज की अगली किस्त न जारी होती, तो पाकिस्तान की आर्थिक गतिविधियां ही ठप पड़ जातीं। अब सवाल है कि जिस IMF में अमेरिकी इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता, वहां भारत के विरोध के बाद भी पाकिस्तान को कर्ज मिल जाना क्या संकेत देता है? बिखरने से बचाया: अमेरिका को अच्छी तरह मालूम था कि कर्ज पर टिकी इकॉनमी की वजह से पाकिस्तान को भारत के सामने घुटने टेकने पड़ेंगे। अमेरिका नहीं चाहता था कि ऐसा हो और पाकिस्तान बिखर जाए। ऐसे तो दक्षिण एशिया में भारत के लिए कोई चुनौती ही नहीं रह जाती। अमेरिका को यह स्वीकार नहीं था। उसे पाकिस्तान को बचाना था और इसका एक ही रास्ता था, समझौता।

पाकिस्तान के पास जितना विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अपने कर्जों को चुकाने के लिए काफी नहीं: मूडीज

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो चुका है। दोनों देशों के बीच हुए इस संघर्ष में पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। बताया जा रहा है कि तीन दिन से कुछ ज्यादा समय तक चली इस लड़ाई में पाकिस्तान को करीब 4 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। यह रकम हाल ही में आईएमएफ से मिले 2.4 बिलियन डॉलर के लोन के मुकाबले कहीं ज्यादा है। ऐसे में पाकिस्तान एक बार फिर से आईएमएफ या किसी दूसरी संस्था से लोन लेने के लिए हाथ फैला सकता है। पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की थी। भारतीय सेना ने पिछले हफ्ते मंगलवार रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इस हमले से पाकिस्तान बौखला गया था और उसने भारतीय सेना और सीमा से सटे आम नागरिकों को निशाना बनाया। भारत ने भी पाकिस्तान के इस हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया और उसके एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था। दोनों देशों के बीच तीन दिन तक संघर्ष चला। शनिवार को सीजफायर हो गया। पाकिस्तान को कितना नुकसान? तीन दिन से कुछ ज्यादा समय चले इस संघर्ष में पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान हुआ है। अमेरिका की एनालिस्ट सहर खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पाकिस्तान मीडिया की एक खबर को शेयर करते हुए एक पोस्ट की है। इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि इस संघर्ष में पाकिस्तान को करीब 4 अरब डॉलर की कीमत चुकानी पड़ी है। सहर खान ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए अपनी पोस्ट में बताया है कि पाकिस्तान को किस चीज में कितना नुकसान हुआ है: मिलिट्री ऑपरेशंस: 25 मिलियन डॉलर प्रतिदिन ड्रोन और मिसाइल ऑपरेशंस: 300 मिलियन डॉलर शेयर मार्केट में गिरावट: 2.5 बिलियन डॉलर पीएसएल सस्पेंड होने से: 10 मिलियन डॉलर एयरस्पेस बंद होने से: 20 मिलियन डॉलर कितना मंजूर हुआ लोन? भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में पाकिस्तान को 2.4 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया है। इस बेलआउट पैकेज में एक मौजूदा कार्यक्रम से 1 अरब डॉलर और 1.4 अरब डॉलर का नया लोन शामिल है। भारत ने आईएमएफ में इस वोटिंग के दौरान भाग नहीं लिया, क्योंकि भारत इस बेलआउट पैकेज के खिलाफ था। पाकिस्तान को आईएमएफ से जितना लोन मिला है, उससे कहीं ज्यादा रकम वह खर्च कर चुका है। भरत नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने सहर खान की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा है, ‘उन्होंने यानी पाकिस्तान ने IMF का लोन जारी होने से पहले ही इसे खर्च कर दिया।’ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी बुरी पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अभी बहुत खराब है। मूडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी पाकिस्तान के पास जितना विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अगले कुछ सालों में अपने कर्जों को चुकाने के लिए काफी नहीं है। पाकिस्तान के पास अभी करीब 15 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। वहीं, भारत के पास 688 अरब डॉलर से भी ज्यादा का भंडार है। पाकिस्तान कई देशों से लोन ले चुका है। साल 1948 से अकेले अमेरिका ने पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर की आर्थिक और सैन्य मदद दी है। अगर कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप को भी मिला लें, तो यह आंकड़ा 55 अरब डॉलर से ज़्यादा हो जाता है।

अमेरिका और चीन के बीच हुई ट्रेड डील, ट्रंप के हाई टैरिफ से मिलेगी राहत

वाशिंगटन अमेरिका और चीन ने हाल ही में एक-दूसरे पर लगाए गए भारी शुल्कों को कम करने का फैसला किया है। दोनों देशों के बीच दो दिनों तक चली उच्च-सतरीय वार्ता के बाद आज (सोमवार को) जिनेवा में एक संयुक्त बयान जारी किया गया है, जिसके अनुसार, अमेरिका और चीन एक-दूसरे के उत्पादों पर अस्थायी रूप से यानी 90 दिनों के लिए टैरिफ कम करने पर सहमत हो गए हैं। ताकि व्यापार तनाव को कम किया जा सके और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को आपसी मतभेद सुलझाने के लिए तीन महीने का वक्त मिल सके। सोमवार को जारी किए गए बयान के अनुसार, अधिकांश चीनी आयातों पर अमेरिका ने 145% टैरिफ को 115 फीसदी घटाकर सिर्फ 30% तक लाने का अस्थाई फैसला किया है।इसमें फेंटेनाइल से जुड़ी दर भी शामिल है। चीन भी अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए 125% टैरिफ को 115 फीसदी तक घटाकर अब 10% तक लाने पर सहमत हुआ है। हालांकि, इस डील में पेच यह है कि यह सिर्फ 90 दिनों के लिए ही है। चर्चा जारी रखने पर भी बनी सहमति अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145 प्रतिशत शुल्क दर को घटाकर 30 प्रतिशत करने पर जबकि चीन ने अमेरिकी वस्तुओं पर अपनी दर को घटाकर 10 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है। ग्रीर और अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने जेनेवा में संवाददाता सम्मेलन में शुल्क कटौती की घोषणा की। दोनों अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने व्यापार मुद्दों पर चर्चा जारी रखने की रुपरेखा तैयार की है। दो दिन की वार्ता के बाद संवाददाता सम्मेलन में बेसेंट ने कहा कि उच्च शुल्क स्तर से दोनों पक्षों के सामान पर पूरी तरह रोक लग गई ऐसा परिणाम कोई भी पक्ष नहीं चाहता। बेसेंट ने कहा, ‘‘ इस सप्ताहांत दोनों प्रतिनिधिमंडलों की आम सहमति यह है कि कोई भी पक्ष अलगाव नहीं चाहता है। इन उच्च उच्च शुल्क से जो हुआ … वह अवरोध के बराबर था। कोई भी पक्ष ऐसा नहीं चाहता। हम व्यापार चाहते हैं। हम अधिक संतुलित व्यापार चाहते हैं। मुझे लगता है कि दोनों पक्ष इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने चीन पर अमेरिकी शुल्क को बढ़ाकर 145 प्रतिशत कर दिया था और चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी आयात पर 125 प्रतिशत का शुल्क लगाया था। इतने अधिक शुल्क का मतलब है कि दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों का बहिष्कार कर रहे हैं जिससे व्यापार बाधित हो रहा है, जो पिछले वर्ष 660 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक था। अमेरिका और चीन की घोषणा से शेयर बाजारों में उछाल आया। हांगकांग के हैंग सेंग सूचकांक में करीब तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई। जर्मनी तथा फ्रांस के बाजार में 0.7 प्रतिशत की तेजी आई।

भारत के हमले से रहीम यार खान एयरबेस का रनवे तहस-नहस, एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित

लाहौर पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान रहीम यार खान एयरबेस अब काम नहीं कर पा रहा है. भारत की ओर से किए गए जवाबी हमले ने इस एयरपोर्ट के रनवे को तहस-नहस कर दिया है. अब पाकिस्तान ने फिलहाल एक सप्ताह के लिए इस एयरबेस को एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित कर दिया है. पाकिस्तान ने इस बाबत नोटम (NOTAM) नोटिस टू एयरमैन जारी किया है. ये नोटिस पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने शनिवार शाम को जारी किया है. ये नोटम 10 मई को पाकिस्तानी समय के अनुसार 4 बजे शाम से प्रभावी हो गए हैं और 18 मई 5 बजे तक प्रभावी रहेगा. यानी कि इतने समय तक रहीम यार खान नूर बेस काम नहीं करेगा. पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि बंद करने का कारण वर्क इन प्रोग्रेस है. लेकिन पाकिस्तान ने शातिराना चालाकी करते हुए ये नहीं बताया है कि वो जंग जैसे इतने अहम समय में अपने सैन्य हवाई अड्डे पर क्या काम कर रहा है. नोटम में कहा गया है कि फिलहाल ये एयरबेस उड़ान के लिए संचालित नहीं होगा. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दक्षिणी भाग में इस महत्वपूर्ण एयरबेस को अस्थायी रूप से बंद करना और बंद करने का समय और इसकी टाइमिंग इस एयरबेस पर भारत की ओर से किए गए तगड़े हमले की पुष्टि करती है. रहीम यार खान एयरबेस, जिसे आधिकारिक तौर पर शेख जायद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Shaikh Zayed International Airport) के नाम से जाना जाता है, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहीम यार खान शहर के पास स्थित है. यह हवाई अड्डा शहर से लगभग 4.6 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है. रहीम यार खान एयरबेस पर हमले का असर रविवार शाम को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक ब्रीफिंग में, भारतीय वायु सेना ने उपग्रह चित्रों से पुष्टि की कि रहीम यार खान वायु सेना अड्डे के रनवे पर भारत ने स्ट्राइक किया था. इस हमले में ये हवाई अड्डा तबाह हो गया था. नोटम के लिए जारी इस मैसेज में लिखा गया है. “RWY NOT AVBL FOR FLT OPERATION WIP” अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अनुसार, NOTAM में कोड ‘WIP’ का उपयोग प्रगति पर चल रहे कार्य को दर्शाता है. अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) के अनुसार, ‘WIP’ हवाई अड्डे की सतह पर किए जा रहे किसी भी कार्य को दर्शाता है. यह देखते हुए कि NOTAM में विशेष रूप से एयरबेस पर रनवे का उल्लेख किया गया है, यह दर्शाता है कि रनवे पर ही प्रगति पर काम चल रहा है. रहीम यार खान एयरबेस में शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है. फ्लाइटराडार24 पर उपलब्ध एयरपोर्ट डेटा के अनुसार, इसका एकमात्र रनवे- रनवे 01/19- बिटुमिनस सरफेस वाला है और इसकी लंबाई 3,000 मीटर या 9,843 फीट है. यूं तो इस एयरपोर्ट को पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी (PCAA) द्वारा संचालित किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग पाकिस्तान वायु सेना (PAF) द्वारा भी सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है. बता दें कि 10 मई को पाकिस्तानी हमले का जवाब देते हुए भारत ने पड़ोसी मुल्क के कई सैन्य एयरपोर्ट को निशाना बनाया. भारत के मिसाइल हमले में रफीकी, मुरीद, चकलाला, सुक्कुर, रहीम खान एयरबेस, चुनियां एयरबेस, नूर खान एयरबेस, सरगोधा एयरबेस को मुख्य रूप से निशाना बनाया. भारत के हमले में रहीम खान एयरबेस को तगड़ा नुकसान पहुंचा था. और इसकी हवाई पट्टी पर बड़ा गड्ढ़ा बन गया था. अब पाकिस्तान इन मलबों को साफ कर रहा है. और गड्ढे की मरम्मत कर रहा है. एयरबेस का मुख्य रनवे जो लगभग 3,000 मीटर लंबा है, पूरी तरह से तबाह हो गया. सैटेलाइट इमेजरी और वीडियो फुटेज में रनवे पर बड़ा गड्ढा दिखाई देता है. रिपोर्ट के अनुसार भारत के हमलों में एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और दो हैंगर तबाह हो गए. रडार यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा, जिससे एयरबेस की संचालन क्षमता अस्थायी रूप से ठप हो गई है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया कि भारत ने इन एयरबेसों पर अपने फाइटर जेट्स से एयर-टू-सरफेस मिसाइलें दागीं. भारत ने रविवार को कहा है कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 100 आतंकी मारे गए हैं. जबकि 40 से 50 पाकिस्तानी जवान और अधिकारी मारे गए हैं.  

भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार, मृत्यु दर 130 से घटकर 93 हुई

नई दिल्ली भारत में मातृ और शिशु मृत्य दर में वर्ष 2014 से 2021 के बीच बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवारण कल्याण मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-16 के दौरान जो मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 130 थी वह 2021 में घटकर 93 रह गई है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है। 2014 में प्रति एक हजार शिशुओं में 39 की मौत होती थी जो अब घटकर 27 रह गई है। यह जानकारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट में दी गई। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 तक कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आठ राज्यों केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), और कर्नाटक (63) ने पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इन राज्यों ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और मातृ देखभाल सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं। नवजात मृत्यु दर में आई कमी नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में 26 से घटकर 2021 में 19 हो गई, जबकि पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 45 से घटकर 31 हो गई। ये संकेतक भारत में नवजात और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण प्रगति के दर्शाते हैं। इसके अलावा, जन्म के समय लिंगानुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया। यह लैंगिक संतुलन में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) भी 2014 में 2.3 से घटकर 2021 में 2.0 पर स्थिर रही, जो जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रगति को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर भारत का बेहतर प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु अनुमान इंटर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की 2000-2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एमएमआर 2020 से 2023 तक 23 अंक कम हुआ। 1990 से 2023 तक भारत में एमएमआर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी केवल 48 प्रतिशत थी। संयुक्त राष्ट्र शिशु मृत्यु अनुमान समूह (यूएन-आईजीएमई) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यू5एमआर में 78 प्रतिशत, एनएमआर में 70 प्रतिशत, और आईएमआर में 71 प्रतिशत की कमी दर्ज की, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 और 2021 में भारत की अतिरिक्त मृत्यु दर 9.3% रही। आयुष्मान भारत को क्रेडिट इस प्रगति का श्रेय सरकार की आयुष्मान भारत को दिया जा सकता है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम है। इसके तहत प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक की वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है। मंत्रालय ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य इकाइयों, जैसे मातृ प्रतीक्षा गृह, मातृ-शिशु स्वास्थ्य विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), और नवजात स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है। गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त संस्थागत प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी, मुफ्त परिवहन, दवाएं, निदान, और पोषण सहायता सुनिश्चित की गई है। वहीं, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 26 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 19 हो गई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 45 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 31 हो गई है। जन्म के समय लिंग अनुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया है। कुल प्रजनन दर 2021 में 2.0 पर स्थिर है, जो 2014 में 2.3 से उल्लेखनीय सुधार है। एसआरएस 2021 रिपोर्ट के अनुसार, देश में केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), कर्नाटक (63)। राज्य पहले ही एमएमआर (2030 तक <=70) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, बारह (12) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही यू5एमआर (2030 तक <=25) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं- केरल (8), दिल्ली (14), तमिलनाडु (14), जम्मू और कश्मीर (16), महाराष्ट्र (16), पश्चिम बंगाल (20), कर्नाटक (21), पंजाब (22), तेलंगाना (22), हिमाचल प्रदेश (23), आंध्र प्रदेश (24) और गुजरात (24)। इसके अलावा, 6 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले ही एनएमआर का एसडीजी लक्ष्य (वर्ष 2030 तक <=12) प्राप्त कर चुके हैं, जिसमें शामिल हैं -केरल (4), दिल्ली (8), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू और कश्मीर (12) और हिमाचल प्रदेश (12)। दरअसल, सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं को गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी देने के लिए एकीकृत किया गया है। यह पूरी तरह से निःशुल्क है। इसमें देखभाल से इनकार करने के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई है। वहीं, आयुष्मान भारत विश्‍व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन पहल है जो प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है, जिससे वित्तीय सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित होती है। केंद्रित सहयोग यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में निःशुल्क परिवहन, दवा, निदान और पोषण सहायता के साथ-साथ सीजेरियन सेक्शन सहित नि:शुल्क संस्थागत प्रसव का अधिकार हो। समावेशी और न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने मातृत्व प्रतीक्षा गृह, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाइयाँ (एचडीयू)/गहन देखभाल इकाइयाँ (आईसीयू) नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयाँ (एनबीएसयू), बीमार नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ (एसएनसीयू), माँ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ, और जन्म दोषों की जाँच के लिए समर्पित कार्यक्रम स्थापित करके स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया है। वहीं, समय से पहले प्रसव के लिए प्रसवपूर्व कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स की व्यवस्‍था, निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव (सीपीएपी) का उपयोग, और सुनने और दृष्टि की जांच के लिए संरचित अनुवर्ती जैसी प्रमुख नैदानिक ​​व्‍यवस्‍थाएं नवजात शिशु के जीवित रहने के परिणामों में सुधार करने में योगदान करती हैं। इन उपायों से सालाना लगभग 300 लाख सुरक्षित गर्भधारण और 260 लाख स्वस्थ जीवित जन्म होते हैं।

उत्तराखंड में फिर लौटे टूरिस्ट, नैनीताल-मसूरी में भीड़-होटल फुल; ट्रैफिक डायवर्ट

देहरादून  पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई थी। केदारनाथ-बदरीनाथ सहित उत्तराखंड के चारों धामों में भी भक्तजनों की संख्या में भी कमी देखी गई थी। लेकिन, भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने लगा है। यूपी के सहारनपुर, मुरादाबाद, मेरठ, मुज्जफरनगर, बिजनौर सहित दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा सहित अन्य पड़ोसी राज्यों से पर्यटक भारी संख्या में उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। उत्तराखंड में नैनीताल, हल्द्वानी, मसूरी, हरिद्वार, ऋषिकेश आदि टूरिस्ट स्पॉटों में पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने लगा है। नैनीताल, मसूरी, हरिद्वार और आसपास क्षेत्रों के पर्यटन कारोबार को राहत मिलने की उम्मीद है। टूरिस्ट स्पॉटों में पर्यटकों की भीड़ देखने को मिली। नैनीताल जू, हिमालयन बॉटनिकल गार्डन, वुडलैंड वाटरफॉल, जीरो प्वाइंट, माल रोड में पर्यटक दिनभर चहलकदमी करते दिखाई दिए। नौकायन का लुत्फ लेने को भी भीड़ उमड़ी। अप्रैल तीसरे सप्ताह से नैनीताल की ओर पर्यटकों का आना कम होने लगा था। मई की शुरुआत में शहर में घटना के बाद होटल, होम स्टे करीब खाली हो गए थे। हालांकि, रविवार को पर्यटकों की संख्या बढ़ने से व्यापारियों ने राहत की सांस ली। सुबह से नौकायन को अच्छी भीड़ रही। जू में दिनभर में 876, बॉटनिकल गार्डन में 300 , वाटरफॉल में 877 पर्यटक आए। वहीं मेट्रोपोल पार्किंग में पर्यटकों के 180 और डीएसए पार्किंग में 270 वाहन पार्क हुए। पर्यटकों की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। पर्यटकों की सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्ट बुद्ध पूर्णिमा स्नान को लेकर पुलिस-प्रशासन भी पूरी तरह से तैयार है। पर्यटकों की भीड़ और हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं सहित चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन प्लान भी बनाया गया है। भारी वाहनों को हाईवे पर नारसेन बॉर्डर पर रोका जा रहा है। हरिद्वार में पार्किंग पूरी तरह से फुल है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक भी डायवर्ट किया नेशनल हाईवे सहित शहर की सड़कों पर अतिरिक्त पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है। सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों के खिलाफ चालानी कार्रवाई भी की जा रही है। सोमवार सुबह से ही हरिद्वार की हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों में आस्था की डुबकी लगाने के लिए तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली है। होटल पूरी तरह पैक-पार्किंग भी फुल उत्तराखंड के कई पर्यटन स्थलों में एडवांस बुकिंग होने शुरू हो गई है। नैनीताल, मसूरी, हरिद्वार आदि शहरों में होटल पूरी तरह से पैक हैं। इसी के साथ ही पार्किंग भी फुल हो गए हैं। टूरिस्टों की भारी भीड़ को देखते हुए होटल कारोबारियों के चेहरे भी खिल उठे हैं। चारधाम यात्रा रूट सहित पर्यटन स्थलों में अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। 24 घंटे में 16 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब निरंतर उमड़ रहा है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बीते 24 घंटों में 16,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया। श्रद्धालु रेल, बस और निजी वाहनों के माध्यम से टनकपुर पहुंच रहे हैं, जिस कारण ककराली गेट से लेकर मुख्य मंदिर तक लगातार भक्तों की आवाजाही बनी हुई है। मंदिर मार्ग भक्ति, श्रद्धा और आस्था के अद्भुत वातावरण से गुंजायमान है। एसडीएम आकाश जोशी ने बताया कि प्रशासन की ओर से यात्रा मार्ग पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। सुरक्षाकर्मी, सीसीटीवी निगरानी, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, शौचालय, महिला सहायता केंद्र, साफ-सफाई इत्यादि सहित सम्पूर्ण मार्ग पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुलिस फोर्स की ओर से मंदिर मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को सतर्कता के साथ लागू किया गया है। भीड़ नियंत्रण, मार्गदर्शन एवं सहायता सेवाओं को पूरी मुस्तैदी से संचालित किया जा रहा है।

युद्ध आखिरी चीज होनी चाहिए, जिसका हमें सहारा लेना चाहिए, यही कारण है कि हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है: नरवणे

पुणे पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Naravane) ने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही जंग को रोकने पर उठ रहे सवालों की निंदा करते हुए कहा कि युद्ध रोमांटिक नहीं है और यह कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है.  पुणे में एक कार्यक्रम में बोलते हुए नरवणे ने कहा, “अगर आदेश दिया गया तो वह युद्ध के लिए तैयार हैं, लेकिन कूटनीति उनकी पहली पसंद होगी. सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों में आघात है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं जिन्होंने गोलाबारी देखी है और रात में आश्रयों की ओर भागना पड़ता है. उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके लिए यह हमेशा के लिए एक दुख हो गया. PTSD (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) नामक एक और बीमारी भी है. जिन लोगों ने भयानक दृश्य देखे हैं, वे 20 साल बाद भी पसीने से तरबतर हो उठते हैं और उन्हें मनोचिकित्सक की ज़रूरत होती है.” ‘यह मेरी पहली पसंद नहीं…’ इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व सेना प्रमुख पहुंचे थे और वहां पर उन्होंने यह स्पीच दी. उन्होंने कहा, “युद्ध रोमांटिक नहीं है, यह आपकी बॉलीवुड फिल्म नहीं है, यह बहुत गंभीर मामला है. युद्ध या हिंसा आखिरी चीज होनी चाहिए, जिसका हमें सहारा लेना चाहिए, यही कारण है कि हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है. हालांकि, नासमझ लोगों द्वारा हम पर युद्ध थोपा जाएगा, लेकिन हमें इसका स्वागत नहीं करना चाहिए.” पूर्व भारतीय सेना प्रमुख ने कहा, “फिर भी, लोग पूछ रहे हैं कि हमने पूरी तरह से युद्ध क्यों नहीं किया. एक सैन्य व्यक्ति के रूप में, अगर आदेश दिया जाता है, तो मैं युद्ध में जाऊंगा, लेकिन यह मेरी पहली पसंद नहीं होगी.” मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि मेरी पहली पसंद कूटनीति होगी, बातचीत के ज़रिए मतभेदों को सुलझाना और सशस्त्र संघर्ष के दौर तक नहीं पहुंचना. हम सभी राष्ट्रीय सुरक्षा में समान हितधारक हैं. हमें न केवल देशों के बीच, बल्कि अपने बीच के मतभेदों को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए, चाहे वे परिवारों में हों या राज्यों, इलाकों और समुदायों के बीच. हिंसा इसका जवाब नहीं है.” पहलगाम आतंकी हमले के प्रतिशोध में भारत ने 7 मई की सुबह पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सात आतंकी ढांचों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया. भारत और पाकिस्तान ने शनिवार को ज़मीन, हवा और समुद्र पर सभी तरह की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए एक समझौते पर पहुंचने का ऐलान किया.  

भारत ने मालदीव को 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल के रोलओवर के लिए वित्तीय सहायता

नई दिल्ली पाकिस्तान से तनाव के बीच भारत ने मालदीव के लिए बड़ा दिल दिखाया है. इसके तहत इंडिया ने 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल को रोलओवर करके मालदीव को बड़ी वित्तीय सहायता की है. गौर करें तो मालदीव सरकार के अनुरोध पर, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मालदीव के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सरकारी ट्रेजरी बिल को एक और वर्ष के लिए सब्सक्राइब किया है. इस तरह से देखें तो मार्च 2019 से, भारत सरकार, एसबीआई द्वारा ऐसे कई ट्रेजरी बिलों की सदस्यता की सुविधा प्रदान कर रही है. इसके साथ ही उन्हें सालाना, ब्याज-मुक्त तरीके से मालदीव सरकार को रोलओवर कर रही है. यह सब भारत की ओर से मालदीव को आपातकालीन वित्तीय सहायता के रूप में सरकार-से-सरकार व्यवस्था के तहत किया गया है. इसकी पुष्टि मालदीव में भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट के जरिए की है. भारत ने 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल के माध्यम से मालदीव को वित्तीय सहायता प्रदान की. इसी को लेकर मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील ने ट्वीट किया, ‘मैं 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल के रोलओवर के माध्यम से मालदीव को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और भारत सरकार के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं. यह समय पर की गई सहायता मालदीव और भारत के बीच मित्रता के घनिष्ठ संबंधों को दर्शाती है और आर्थिक लचीलेपन के लिए राजकोषीय सुधारों को लागू करने के लिए सरकार के चल रहे प्रयासों का समर्थन करेगी.

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