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स्टेट असेंबली, स्थानीय निकाय चुनावों में भी 36 भारतीय अमेरिकी प्रत्याशी, आजमा रहे भाग्य

वाशिंगटन अमेरिका के चुनाव मैदान में नौ भारतवंशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वे अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से पांच पुन: निर्वाचित होने की दौड़ में हैं, जबकि इनके समेत छह के जीतने की संभावना जताई जा रही है। कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा भारतीय प्रत्याशी तीन पहली बार अमेरिकी संसद पहुंचने की होड़ में हैं। इनके अलावा अमेरिका के स्टेट असेंबली और स्थानीय निकाय चुनावों में भी 36 भारतीय अमेरिकी हिस्सा ले रहे हैं। कैलिफोर्निया प्रांत में सबसे ज्यादा भारतवंशी चुनाव लड़ रहे हैं। 38 वर्षीय सुहास सुब्रमण्यन वर्जीनिया और ईस्ट कोस्ट से चुनाव लड़ रहे हैं। अगर वह निर्वाचित होते हैं तो यहां से जीत दर्ज करने वाले पहले भारतवंशी बन सकते हैं। यह डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ है। वर्जीनिया के स्टेट असेंबली सीनेटर सुहास सुहास अभी वर्जीनिया की स्टेट असेंबली के सीनेटर हैं। पेशे से चिकित्सक डॉ. एमी बेरा 2013 से कैलिफोर्निया के छठे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे वरिष्ठ भारतीय अमेरिकी सांसद हैं। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलता है, तो 59 वर्षीय बेरा को वरिष्ठ पद मिलना तय है। प्रमिला जयपाल का फिर चुना जाना तय 2017 से वाशिंगटन स्टेट के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाली 59 वर्षीय सांसद प्रमिला जयपाल डेमोक्रेटिक पार्टी में एक प्रभावशाली नेता के तौर पर उभरी हैं। उनका फिर से चुना जाना तय माना जा रहा है। 2017 से इलिनोइस के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे राजा कृष्णमूर्ति, 2017 से ही कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे रो खन्ना और 2023 से मिशिगन के 13वें डिस्टि्रक्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे 69 वर्षीय श्री थानेदार भी भारतीय अमेरिकी हैं। तीनों ही राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी के गढ़ माने जाते हैं और इनकी भी जीत तय मानी जा रही है। एरिजोना की स्टेट असेंबली में 2018, 2020 और 2022 में तीन बार जीत दर्ज करने वाले डॉ. अमीश शाह राज्य के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव मैदान में हैं। वह सात बार चुनाव जीत चुके रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डेविड श्वेइकर्ट को चुनौती दे रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े डॉ. प्रशांत रेड्डी कंसास के तीसरे कांग्रेसनल डिस्टि्रक्ट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका यहां से तीन बार डेमोक्रेटिक सांसद रहे शैरिस डेविड्स से मुकाबला है। जबकि डॉ. राकेश मोहन न्यूजर्सी से चुनाव मैदान में हैं। वह रिपब्लिकन पार्टी से हैं। रेड्डी और मोहन के चुनाव जीतने की संभावना काफी कम है।

भारतीय-कनाडाई ने किया विरोध प्रदर्शन, पुलिस ने उनके एकत्र होने को गैरकानूनी घोषित कर दिया, खालिस्तानियों नरमी बरती

कनाडा खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने में भारत सरकार के शामिल होने के आरोपों के कारण भारत-कनाडा संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं। हाल ही में कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिनमें खालिस्तान समर्थकों की कार्रवाइयों में तेजी आई है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो  की तरह कनाडा की पुलिस भी खालिस्तानियों को लेकर नरमी  बरत रही  है। ग्रेटर टोरंटो एरिया में एक हिंदू मंदिर पर हमले के खिलाफ हजारों भारतीय-कनाडाई लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने उनके एकत्र होने को “गैरकानूनी” घोषित कर दिया और प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए दंगा रोधी उपकरणों से लैस सशस्त्र कर्मियों को तैनात कर दिया। कनाडा पुलिस ने हिंदुओं के विरोध प्रदर्शनों को अवैध बताते हुए एक विवादास्पद फरमान जारी किया है। पुलिस का दावा है कि इन प्रदर्शनों के दौरान कुछ व्यक्तियों के पास हथियार देखे गए, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई है। कनाडा की पुलिस की  खालिस्तान समर्थकों के प्रति दिखाई गई नरमी से यह स्पष्ट हो रहा है कि वह हिंदू समुदाय के प्रति अधिक सख्त और खालिस्तान समर्थकों के प्रति अधिक सहानुभूति दिखा रही है। ब्रैम्पटन के एक हिंदू मंदिर पर खालिस्तान समर्थकों द्वारा हमले के बाद, स्थिति और गंभीर हो गई है। इस घटना में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से एक की पहचान विकास (23 वर्ष) और अमृतपाल सिंह (31 वर्ष) के रूप में की गई है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस के समक्ष पेश किया जाएगा। वहीं, प्रदर्शन के दौरान खालिस्तानियों के समर्थन में शामिल हुए एक पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। PM मोदी की प्रतिक्रिया पिछले कुछ वर्षों में कनाडा में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ी हैं। सितंबर 2022 से अब तक, कनाडा के विभिन्न स्थानों पर बीएपीएस मंदिर को चार बार खालिस्तान समर्थक तत्वों के द्वारा निशाना बनाया जा चुका है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा में हिंदू मंदिर पर किए गए हमले की निंदा की है। उन्होंने इसे एक गंभीर घटना बताया और कहा कि इस तरह की राजनयिक गतिविधियों का उद्देश्य भारतीय राजनयिकों को डराना है। पहले भी हो चुके खालिस्तान समर्थकों के हमले यह पहली बार नहीं है जब खालिस्तान समर्थकों ने कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हमले किए हैं। पिछले साल जुलाई में, अल्बर्टा प्रांत के एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी, जिसमें मंदिर की दीवारों पर हिंदू विरोधी नारे और चित्र उकेरे गए थे। उदाहरण के लिए, 23 जुलाई 2024 को एडमॉन्टन में बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों को रंग-रोगन कर “हिंदू आतंकवादी” जैसे शब्द लिखे गए थे। कनाडा में लगभग 20 से अधिक हिंदू मंदिरों को विभिन्न तरीकों से निशाना बनाया गया है। कनाडा की कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब तक इन घटनाओं के पीछे के आरोपियों की पहचान नहीं कर सकी हैं। इस स्थिति ने न केवल स्थानीय हिंदू समुदाय में डर और असुरक्षा की भावना पैदा की है, बल्कि भारत- कनाडा के रिश्तों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है। 

दक्षिण कोरिया की सेना ने पुष्टि की, उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर में छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को लॉन्च किया

सियोल उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर में छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को लॉन्च किया है। दक्षिण कोरिया की सेना ने मंगलवार को एक बयान में इसकी पुष्टि की है। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) ने कहा कि उसने पश्चिमी प्रांत नॉर्थ ह्वांगहे के सारीवोन क्षेत्र में सुबह करीब 7:30 बजे लॉन्च का पता लगाया है। इन मिसाइलों ने समुद्र में गिरने से पहले लगभग 400 किलोमीटर की दूरी तय की। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के एक अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि उत्तर कोरिया के लेटेस्ट लॉन्च में उसके केएन-25 सुपर लार्ज 600 मिलीमीटर मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर शामिल थे। ऐसा माना जाता है कि यह हथियार दक्षिण कोरिया में कहीं भी हमला करने में सक्षम है। हालांकि, अधिकारी ने दागी गई मिसाइलों की संख्या बताने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जानकारी जुटाई जा रही है। दरअसल, यह मिसाइल लॉन्च उस समय किया गया है, जब अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे हैं। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुकाबला है। इस बीच, दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हथियार परीक्षण कर सकता है, ताकि वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके और अपनी परमाणु क्षमताओं का प्रदर्शन कर बाहरी ध्यान आकर्षित कर सके। उत्तर कोरिया ने गुरुवार को पूर्वी सागर में ह्वासोंग-19 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का लॉन्च किया था। इसके बाद पांच दिन के बाद उत्तर कोरिया ने फिर से छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।

किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट कर संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों की आधिकारिक तौर पर जानकारी दी

नई दिल्ली संसद का शीतकालीन सत्र इस बार 25 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र के 20 दिसंबर तक चलने की संभावना है। संविधान दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर 26 नवंबर, 2024 को संविधान सदन (संसद के पुराने भवन) के सेंट्रल हॉल में एक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को एक्स पर पोस्ट कर, संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों की आधिकारिक तौर पर जानकारी दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर बताया, “भारत सरकार की सिफारिश पर, माननीय राष्ट्रपति ने 25 नवंबर से 20 दिसंबर, 2024 तक शीतकालीन सत्र, 2024 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है (संसदीय कार्य के एजेंडे और आवश्यकता के अनुसार)।” किरेन रिजिजू ने संविधान दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी देते हुए आगे बताया, “26 नवंबर, 2024 (संविधान दिवस) को संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में कार्यक्रम मनाया जाएगा।” बताया जा रहा है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मोदी सरकार अपने दो महत्वपूर्ण एजेंडे ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक- 2024’ को संसद से पारित करवाने का प्रयास कर सकती है। इन दोनों ही विधेयकों पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार ऐतराज जाहिर कर रहे हैं। ऐसे में संसद के शीतकालीन सत्र का भी हंगामेदार रहना तय माना जा रहा है। संसद सत्र पर महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव के नतीजों का भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। दोनों राज्यों में नतीजों की घोषणा 23 नवंबर को होगी और संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि अगर भाजपा इन दोनों राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है तो संसद में विपक्षी दलों के तीखे विरोध के बावजूद वह अपने एजेंडे को लागू करने के लिए आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का 235 वर्षों का इतिहास कई दिलचस्प तथ्यों से भरा, 15 उपराष्ट्रपति बने राष्ट्रपति

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का 235 वर्षों का इतिहास कई दिलचस्प तथ्यों से भरा है। इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से कमला हैरिस की दावेदारी ने इस चुनाव को बेहद खास बना दिया है। अगर वह चुनाव जीततीं तो कई नए एतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के 235 वर्षों के इतिहास में कभी कोई महिला विजेता नहीं बन सकी। अधिकांश इतिहासकार और लेखक मानते हैं कि विक्टोरिया वुडहुल 1872 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली महिला थीं। हालांकि कुछ लोग इस दावे पर सवाल भी उठाते हैं। आखिरी बार 2016 में हिलेरी क्लिंटन पद के काफी नजदीक पहुंच कर भी हार गई। उन्हें ट्रंप से करीब 28 लाख अधिक पापुलर वोट मिले लेकिन चुनाव ट्रंप ने जीता क्योंकि उन्होंने इलेक्टोरल कॉलेज का बहुमत प्राप्त कर लिया। इस बार कमला हैरिस अगर चुनाव जीतती हैं तो वह पहली महिला राष्ट्रपति होने का गौरव हासिल कर सकती हैं। इसके अलावा वह दूसरी ब्लैक शख्स और पहली ब्लैक महिला होंगी जो इस पद पर बैठेंगी। साथ वह पहली एशियन अमेरिकन और भारतीय अमेरिकन होंगी जो व्हाइट हाउस में पहुंचेंगी। अब तक पंद्रह राष्ट्रपति ऐसे रहे हैं जो कि उपराष्ट्रपति के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इनमें से छह – जॉन एडम्स (1796), थॉमस जेफरसन (1800), मार्टिन वैन ब्यूरन (1836), रिचर्ड निक्सन (1968), जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (1988), और जो बिडेन (2020) – ने चुनाव जीतने के बाद अपना पहला कार्यकाल शुरू किया। जबकि बाकी नौ ने, अपने पूर्ववर्ती की कार्यकाल के दौरान मृत्यु या इस्तीफे के बाद (उत्तराधिकार नियमों के अनुसार) प्रेसिडेंट के रूप में अपना पहला कार्यकाल शुरू किया। इनमें से थियोडोर रूजवेल्ट, केल्विन कूलिज, हैरी एस. ट्रूमैन और लिंडन बी. जॉनसन बाद में राष्ट्रपति चुने गए, जबकि जॉन टायलर, मिलार्ड फिलमोर, एंड्रयू जॉनसन, चेस्टर ए. आर्थर और गेराल्ड फोर्ड नहीं चुने गए। अगर कमला हैरिस चुनाव जीतती हैं तो वह 16वीं उपराष्ट्रपति होंगी जो राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगी। फिलहाल अधिकांश सर्वों में कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कांटे की टक्कर बताई गई है। तमना पर्यवेक्षकों की राय यही बताती है कि चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।

आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी, इस बीच एक आतंकवादी को मर गिराया

बांदीपुरा उत्तरी कश्मीर के बांदीपुरा जिले के केट्सन इलाके में मंगलवार को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हो रही है। इस दौरान एक आतंकवादी के मारे जाने की सूचना मिली है। जानकारी के अनुसार एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि बांदीपुरा के केट्सन जंगल में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। इसके बाद मुठभेड़ दौरान सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया है। फिलहाल मुठभेड़ अभी भी जारी है। बता दें कि पिछले सप्ताह की शुरुआत में पन्नार में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई थी, जिसके बाद आतंकवादी भागने में सफल रहे थे।

केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने खनन मामले की जांच कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को धमकाया, केस दर्ज

बेंगलूरो केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी पर पुलिसकर्मी को धमकाने के आरोप लगे हैं। खबर है कि इसे लेकर पुलिस ने उनके खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया है। आरोप हैं कि उन्होंने उनके खिलाफ खनन मामले की जांच कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को धमकाया है। फिलहाल, इस मामले में जांच चल रही है। पुलिस महानिरीक्षक एम चंद्रशेखर की शिकायत के आधार पर सोमवार को मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुमारस्वामी ने एक सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के लिए उसे धमकाया था। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह एक खनन मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल का नेतृत्व कर रहे थे, जिसमें कुमारस्वामी आरोपी हैं। कुमारस्वामी के खिलाफ जांच इन आरोपों से संबंधित है कि उन्होंने 2006 से 2008 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कानून का उल्लंघन करते हुए बेल्लारी जिले में ‘श्री साई वेंकटेश्वर मिनरल्स’ (एसएसवीएम) को 550 एकड़ के खनन पट्टे की अवैध रूप से मंजूरी दी थी। चंद्रशेखर ने संजय नगर पुलिस थाने में दर्ज अपनी शिकायत में कहा, “एसआईटी (विशेष जांच दल) ने जांच रिपोर्ट तैयार करने और आरोपी (कुमारस्वामी) पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत और सामग्री मिलने के बाद, कर्नाटक के राज्यपाल से 21 नवंबर 2023 को पत्र लिख कर कुमारस्वामी पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी।’’

MUDA की ओर से जमीन आवंटन करने संबंधी मामले को CBI को स्थानांतरित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया

कर्नाटक कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और अन्य को नोटिस जारी किया। सूचना का अधिकार (RTI) कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की ओर से दायर रिट याचिका पर यह ऐक्शन लिया गया। इसमें मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) की ओर से जमीन आवंटन करने संबंधी मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को स्थानांतरित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती बीएम, उनके रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी, भारत संघ, राज्य सरकार, सीबीआई और लोकायुक्त को भी नोटिस जारी किया। साथ ही, लोकायुक्त को मामले में अब तक की गई जांच को रिकॉर्ड में पेश करने का निर्देश दिया। अदालत अब मामले में अगली सुनवाई 26 नवंबर को करेगी। इस बीच, लोकायुक्त पुलिस ने मामले में आरोपी संख्या एक सिद्धारमैया को 6 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। सिद्धारमैया की पत्नी से भी हुई थी पूछताछ लोकायुक्त पुलिस ने 25 अक्टूबर को सिद्धारमैया की पत्नी से पूछताछ की थी, जो इस मामले में आरोपी संख्या 2 हैं। मुख्यमंत्री एमयूडीए की ओर से उनकी पत्नी को 14 स्थलों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे हैं। सिद्धारमैया, उनकी पत्नी, स्वामी और देवराजू (जिनसे स्वामी ने जमीन खरीदकर पार्वती को उपहार में दी थी) और अन्य का नाम प्राथमिकी में शामिल है। मैसुरु स्थित लोकायुक्त पुलिस की ओर से 27 सितंबर को यह शिकायत दर्ज कराई थी। स्वामी और देवराजू ने लोकायुक्त पुलिस के समक्ष भी गवाही दी है।

हनुमान मंदिर में नवग्रह की मूर्तियों से तोड़फोड़, फूटा लोगों का गुस्सा, पुलिस मौके पर पहुंची किया केस दर्ज, मामले की जांच शुरू

तेलंगाना तेलंगाना में शमशाबाद के एयरपोर्ट कॉलोनी में हनुमान मंदिर में नवग्रह की मूर्तियों को अज्ञात बदमाशों ने खंडित कर दिया। यह घटना मंगलवार सुबह करीब 6 बजे सामने आई, जब मंदिर के पुजारी और भक्त मंदिर पहुंचे। यहां आने पर उन्हें घटना के बारे में पता चला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। इसके बाद स्थानीय निवासी मंदिर में एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। स्थानीय लोगों के हंगामे को देखते हुए पुलिस ने मंदिर के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की। शमशाबाद के डीसीपी बी राजेश ने कहा, ‘एयरपोर्ट कॉलोनी में हनुमान मंदिर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है। इसे देखते हुए हमने अपनी अपराध टीम को तैनात कर दिया है। स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची हुई है। यहां के लोगों का कहना है कि एक अज्ञात व्यक्ति यहां आया था। उसी ने मंदिर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। हमने उसे हिरासत में ले लिया है। क्षतिग्रस्त संपत्ति की बहाली को लेकर मंदिर समिति के सदस्यों से बात चल रही है।’ ‘वोट बैंक को खुश करने में लगी कांग्रेस’ भाजपा की तेलंगाना इकाई की ओर से घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। एक्स पर पोस्ट करके कहा गया, ‘एक और दुखद दिन। कांग्रेस शासन के तहत तेलंगाना में एक और पवित्र हिंदू मंदिर को अपवित्र किया गया है। कांग्रेस सरकार अपने वोट बैंक को खुश करना चाहती है और इसने आंखें मूंद ली हैं। जिन लोगों ने ऐसी घटनाओं में हमारे पवित्र मंदिरों को अपवित्र किया, उन लोगों को दंडित करने से इनकार कर दिया गया। नफरत से भरे इन हमलावरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे में वे और भी अधिक ‘आजादी’ से ऐसे कामों को अंजाम दे रहे हैं।’

फिल्ममेकर अलीशान जाफरी ने लॉरेंस बिश्नोई की तस्वीरों वाली टी-शर्ट बेचने पर इन प्लेटफॉर्म्स को आड़े हाथों लिया

नई दिल्ली गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की फोटो छपी टी-शर्ट बेचना कुछ वेबसाइट्स को महंगा पड़ गया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर विरोध का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्ममेकर अलीशान जाफरी ने लॉरेंस बिश्नोई की तस्वीरों वाली टी-शर्ट बेचने पर इन प्लेटफॉर्म्स को आड़े हाथों लिया। इसके बाद इन टी-शर्ट्स को यहां से हटा लिया गया है। जाफरी ने लिखा था यह भारत का लेटेस्ट ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण है। साथ ही उन्होंने इन टी-शर्ट्स की फोटोज भी लगाई थी। बता दें कि लॉरेंस बिश्नोई अपनी क्रिमिनल ऐक्टिविटीज को लेकर चर्चा में है। वह खुद तो अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है, लेकिन बिश्नोई गैंग जगह-जगह अपराध को अंजाम दे रहा है। हाल ही में एनसीपी विधायक बाबा सिद्दिकी मर्डर केस में भी बिश्नोई गैंग का नाम आया है। कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लॉरेंस बिश्नोई की तस्वीर लगी टी-शर्ट्स बिक्री के लिए उपलब्ध थीं। इनकी कीमत रिटेल में करीब 168 रुपए रखी गई थी। अपराध को बढ़ावा देने के चलते यह टी-शर्ट्स तो लोगों के निशाने पर आई हैं। इससे भी अधिक चिंता की बात इनके जरिए बच्चों को लुभाने की कोशिश थी। इसको लेकर फिल्ममेकर आलीशान जाफरी ने एक्स पर पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा कि लोग सचमुच ऑनलाइन गैंगस्टर माल बेच रहे हैं। उन्होंने आगे लिखा कि एक ऐसे समय में जबकि एनआई और पुलिस युवाओं को अपराध के रास्ते पर जाने से रोक रहे हैं। सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर्स गैंगस्टर का कंटेंट प्रमोट करके और उन्हें ग्लोरीफाई करके पैसे कमा रहे हैं। इन टी-शर्ट्स पर लॉरेंस बिश्नोई की फोटो होने के साथ गैंगस्टर लिखा हुआ था। आलीशान ने लिखा है कि सिर्फ बिश्नोई ही नहीं, बल्कि दुलराभ कश्यप जैसे गैंगस्टर्स को भी प्रमोट किया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि बात सिर्फ मीशो तक नहीं है। बहुत सारी वेबसाइट्स और पेजेज हैं, जहां इस तरह से अपराध को ग्लोरीफाई किया जा रहा है। आलीशान ने एक्स पर कुछ और भी पोस्ट्स की हैं जिन पर बंदूकें बेचने का भी जिक्र है। इसके मुताबिक कई फेसबुक पेजेज पर ऑनलाइन बंदूक बेचने का धंधा चलाया जा रहा है। गौरतलब है कि लॉरेंस बिश्नोई का नाम सलमान खान के घर गोली चलाने के मामले में भी आ चुका है। इसके अलावा कई अन्य केसेज में उसका और उसके गैंग का नाम आया है। बिश्नोई गैंग के नाम पर कई धमकियां भी दी जा चुकी हैं। इनमें सबसे ताजा धमकी मंगलवार को आई है। इसमें सलमान खान से पांच करोड़ रुपए मांगे गए हैं और दावा किया गया है कि यह धमकी लॉरेंस बिश्नोई के भाई की तरफ से दी गई है।

न्यायपालिका की आजादी का मतलब हमेशा सरकार के खिलाफ फैसला देना नहीं: जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

नई दिल्ली देश के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने न्याय व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं होता कि हमेशा सरकार के खिलाफ ही फैसले दिए जाएं। सीजेआई ने लोगों से न्यायधीशों के फैसलों पर विश्वास रखने की अपील की। साथ ही, इसे लेकर जोर दिया कि न्यायिक व्यवस्था का निष्पक्ष रहना बहुत जरूरी है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान चंद्रचूड़ ने कहा, ‘मैंने जब इलेक्टोरल बॉन्ड के मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ फैसला दिया तो उसे निष्पक्ष माना गया था। यानी कि, जब आप इलेक्टोरल बॉन्ड्स के मामले में फैसला देते हैं तो पूरी तरह आजाद होते हैं, अगर कोई फैसला सरकार के पक्ष में चला जाए तो फिर आप आजाद नहीं रहते। मुझे लगता है कि स्वतंत्रता की यह परिभाषा नहीं है।’ मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार दिया था। साथ ही, इसे बंद करने का भी आदेश दिया। इस योजना के तहत राजनीतिक पार्टियों को फंडिंग मिलने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की पीठ ने इस योजना को ही खारिज कर दिया। सीजेआई ने प्रधानमंत्री के उनके आवास पर आने के बारे में कहा, ‘प्रधानमंत्री गणपति पूजा के लिए मेरे घर आए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि सामाजिक स्तर पर न्यायपालिका और कार्यपालिका से जुड़े व्यक्तियों के बीच निरंतर बैठकें होती हैं। हम राष्ट्रपति भवन में, गणतंत्र दिवस आदि पर मिलते हैं।’ राम मंदिर विवाद पर फैसले को लेकर क्या कहा अयोध्या राम मंदिर विवाद के समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना करने संबंधी सीजेआई के बयान पर काफी हंगामा हुआ था। उन्होंने खुद को सभी धर्मों का सम्मान करने वाला आस्थावान व्यक्ति बताया। सीजेआई ने कहा, ‘यह सोशल मीडिया की समस्या है। आपको उस पृष्ठभूमि के बारे में भी बताना चाहिए, जिसके तहत मैंने वह बात कही थी।’ उन्होंने वह बयान अभिनंदन समारोह के दौरान खेड़ तालुका में अपने पैतृक गांव कन्हेरसर के निवासियों को संबोधित करते हुए दिया था। CJI ने कहा था कि उन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना की थी। चंद्रचूड़ ने कहा था कि अगर किसी के अंदर आस्था हो तो भगवान रास्ता निकाल देगा। उन्होंने कहा, ‘अक्सर हमारे सामने मामले आते हैं लेकिन हम किसी समाधान पर नहीं पहुंच पाते। ऐसा ही कुछ अयोध्या के दौरान हुआ जो तीन महीने तक मेरे सामने था। मैं भगवान के सामने बैठा और उनसे कहा कि उन्हें कोई समाधान ढूंढना होगा।’

बेंगलुरु लगे पोस्टर में औरंगजेब की तस्वीर लिखा ‘सुल्तान-ए-हिंद फाउंडर ऑफ अखंड भारत’ बताया गया

 बेंगलुरु बेंगलुरु में कुछ शरारती तत्वों ने सड़क पर क्रूर मुगल शासक औरंगजेब के पोस्टर लगा दिए. औरंगजेब की तस्वीर के साथ लिखा था- ‘अखंड भारत का असली संस्थापक’. बेलगावी में लगे इन पोस्टर्स की वजह से इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया. स्थानीय विरोध के बीच पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बैनर को हटा दिया है. स्थानीय लोगों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग बेलगावी के शाहूनगर इलाके में रविवार रात उपद्रवियों द्वारा औरंगजेब के पोस्टर लगाए जाने के बाद तनाव फैल गया. इससे लोगों में आक्रोश है. स्थानीय निवासियों ने बैनर को उकसाने की कोशिश के रूप में देखते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की. पोस्टर में औरंगजेब की तस्वीर के साथ उसे ‘सुल्तान-ए-हिंद फाउंडर ऑफ अखंड भारत’ बताया गया है. सोशल मीडिया पर शेयर की भड़काऊ पोस्ट फिलहाल पुलिस ने पोस्टर को हटा दिया है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है. हालांकि, बाद में दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट शेयर करते हुए सवाल उठाया कि औरंगजेब का पोस्टर क्यों हटा दिया गया, जबकि वीर सावरकर का पोस्टर लगा रहा. उन्होंने धमकी दी कि वे अपने पोस्टर का हटाया जाना बर्दाश्त नहीं करेंगे. अधिकारियों पर अब ऑनलाइन भड़काऊ बयान देने वालों और सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव है. ‘सब कुछ कंट्रोल में है’ डीसीपी लॉ एंड ऑर्डर, बेलगावी ने कहा, ‘3 नवंबर को औरंगजेब का जन्मदिन था. कुछ लोगों ने बिना अनुमति के सार्वजनिक संपत्ति पर उसके पोस्टर लगा दिए. कॉर्पोरेशन ने उन्हें हटा दिया है. हमने एक पुलिस रिपोर्ट (पीआर) दर्ज की है और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए काम कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी एक कैंपेन चलाया जा रहा है और सब कुछ नियंत्रण में है.’  

IPS संजय वर्मा कौन? महाराष्ट्र के नए DGP, जानें उनके बारे में

मुंबई महाराष्ट्र के वरिष्ठ IPS अधिकारी संजय वर्मा को प्रदेश पुलिस का नया डीजीपी बनाया गया है. आईपीएस संजय वर्मा को केंद्रीय चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के नए पुलिस महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया है. महाराष्ट्र चुनाव 2024 से एक पखवाड़े पहले चुनाव आयोग ने राज्य कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले की शिकायत मिलने के बाद पिछली डीजीपी रश्मि शुक्ला के तबादले का आदेश दिया था. डीजीपी रश्मि शुक्ला को हटाए जाने के बाद ईसीआई ने राज्य सरकार से महाराष्ट्र कैडर के तीन सबसे वरिष्ठ आईपीएस के नाम मांगे थे, जिनमें वर्मा एक हैं. अन्य दो वरिष्ठ अधिकारी संजीव कुमार सिंघल और उनके बैचमेट रितेश कुमार इस रेस में शामिल थे. इससे पहले चुनाव आयोग ने कांग्रेस पार्टी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी रश्मि शुक्ला को हटा दिया था। जिसके बाद मुंबई के पुलिस कमिश्नर विवेक फनसालकर को महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी अतिरिक्त तौर पर सौंपी गई थी। बता दें कि महाराष्ट्र में 20 नवंबर को चुनाव होने हैं। रश्मि शुक्ला प्रदेश की पहली महिला डीजीपी थीं। जिनके खिलाफ कांग्रेस समेत कई दलों ने चुनाव आयोग को शिकायत दी थी।

गढ़शंकर के मैरिज पैलेस में लगी भयानक आग

पंजाब पंजाब में एक मैरिज पैलेस में आग लगने की बड़ी खबर सामने आई है। आग इतनी भयानक थी कि दूर-दूर तक इसकी लपटें उठती दिखाई दी। यह आग गढ़शंकर के मैरिज पैलेस में लगी है जोक काफी मशहूर है। गढ़शंकर के इस पैलेस का नाम Grand Manor जहां आग लगने से पूरा पंडाल जलकर राख हो गया। आग की उठती लपटें देख तुरन्त राहगीर पैलेस में पहुंचे और अंदर पड़े सामान को बचाने की कोशिश की गई। गनीमत रही इस दौरान कोई जानी नुकसान नहीं हुआ और न ही इस दौरान कोई शादी का समारोह चल रहा था। बताया जा रहा है कि हादसे वाली जगह पर कोई सिलेंडर नहीं था लेकिन फिर धमाके सुने गए। इस दौरान सजावट का पूरा सामन भी जल कर राख हो गया। आग लगने की कारण अभी तक पता नहीं चला है।

हरियाणा का हिसार सबसे प्रदूषित; 4 जिलों में रेड जोन

हिसार दीपावली के बाद से लगातार प्रदेश की हवा खराब होती जा रही है। दीपावली पर हुई आतिशबाजी से निकला धुआं अब वातावरण में भयंकर रूप से घुल गया है और यह स्मॉग का कारण बन गया है। प्रदेश के कई शहरों पर स्मॉग की चादर छाईं हुई है। सोमवार को कुछ शहरों में स्मॉग का असर काफी देखने को मिला। 14 जिलों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 200 के पार पहुंच गया है। यहीं नहीं चार जिले रेड जोन में चले गए हैं, जिनमें एक्यूआई 300 के पार है। त्योहारों पर जमकर हुई थी आतिशबाजी इनमें हिसार, फतेहाबाद, गुरुग्राम और चरखी दादरी शामिल है। हिसार जिले का एक्यूआई 379 पहुंच गया है, जो दिल्ली (एक्यूआई 381) से महज दो अंक ही कम है। पराली जलाने के जीरो केस मिले हैं। अचानक जीरो केस मिलना भी हैरान कर देने वाली बात है। इससे पहले कभी 19 तो कभी 20 से 30 केस मिल रहे थे। इसकी आड़ में त्योहार पर तीन से चार दिनों तक लगातार आतिशबाजी इतनी हुई कि जिस पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं रहा। सांस रोगियों के लिए मुसीबत बना स्मॉग वातावरण पूरी तरह से प्रदूषित हो गया और स्मॉग का स्तर कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। रविवार के अपेक्षा सोमवार को शहरों में स्माग का असर ज्यादा देखने को मिला। कुछ ऐसा ही हाल हिसार में रहा। स्मॉग ज्यादा होने से दृश्यता कम हो गई है और सड़कों पर भी हादसे होने की आशंका हो गई है। रात्रि को ठंड में स्माग का असर ज्यादा दिखा। यह स्मॉग सांस व दमा रोगियों के लिए भी मुसीबत बन गया है। जहां पराली कम जलीं एक्यूआई सबसे ज्यादा जिन इलाकों में पराली कम जली या जीरो केस है, वहां का एक्यूआई सबसे ज्यादा है। जैसे गुरुग्राम व चरखी दादरी जिले में पराली जलाने के जीरो केस है और हिसार में 23 केस है। मगर इनका एक्यूआई सबसे अधिक है। इनके अपेक्षा फतेहाबाद में पराली अधिक जली पर एक्यूआई में प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा से मांगा हलफनामा इस बार दीपावली पर दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण रहने पर चिंता और नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस आयुक्त से पटाखों पर प्रतिबंध का आदेश लागू करने के लिए किए गए उपायों पर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार और पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह में हलफनामा दाखिल कर बताएं कि पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने के लिए क्या उपाय किए गए और यह भी बताएं कि अगले वर्ष पटाखों पर प्रतिबंध का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम प्रस्तावित हैं। सुप्रीम कोर्ट मामले पर 14 नवंबर को फिर सुनवाई करेगा। ये निर्देश सोमवार को जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस अगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण के मामले में सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकार से भी अक्टूबर महीने के अंतिम 10 दिनों में पराली जलाए जाने के मामले पर हलफनामा मांगा है। दिल्ली सरकार से भी उनकी सीमा में जलाई पराली की रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट की टिप्पणी थी कि दीपावली ही नहीं, बल्कि चुनाव और शादियों में भी पटाखों पर प्रतिबंध होना चाहिए। लाहौर में एक्यूआई 1,194 पहुंचा, भारत को ठहराया जिम्मेदार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मंत्रियों ने लाहौर में धुंध के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए सोमवार को भारत को दोषी ठहराया है। मंत्रियों ने कहा कि भारत से आने वाली हवा के कारण प्रांत की राजधानी लाहौर की स्थिति बिगड़ी है। लाहौर में शनिवार और रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्रमश: 1,067 और 1,073 दर्ज किया गया। रविवार दोपहर तक एक्यूआई 1,194 तक पहुंच गया था। इससे हजारों बच्चों और बुजुर्गों को बीमार कर दिया है।

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