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अब नहीं सोना पड़ेगा बेंच पर, जेपी अस्पताल में बनेगा रैन बसेरा.

A Renbaseara will be built in J P Hospital. प्रस्ताव तैयार, परिसर में मंदिर के पास की जगह तय भोपाल। जेपी अस्पताल शहर का तीसरा सरकारी अस्पताल है, जहां रैन बसरे की सुविधा होगी। अब तक हमीदिया अस्पताल व एम्स में दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना जेपी में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन के ही रुकने की अनुमति होती है। जिसके कारण रात में कई परिजन फर्श व बेंच पर सोते नजर आते हैं। ठंड के मौसम इसके चलते वे भी बीमार हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रैन बसेरा बनाने का फैसला लिया गया है। परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर के रैन बसेरा बनाना तय किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। नई व्यवस्था का परिजनों को ठंड से बचाने के लिए अलाव जलाया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा। जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में रूकने वाले परिजनों की सुविधा के लिए रैन बसेरा बनाया जाएगा। जमीन का चयन कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही रैन बसेरा तैयार किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला हैं अजेय, हर बार चुनाव जीते और मंत्री भी बने।

The Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh is Rajendra Shukla; he is invincible in every election and has also become a minister each time. मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री जबकि राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा के साथ उप मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। In Madhya Pradesh, Dr. Mohan Yadav is the Chief Minister, while Rajendra Shukla and Jagdish Devda will assume the positions of Deputy Chief Ministers. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का नाम आखिरकार फाइनल हो गया है। बीजेपी ने डॉ. मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री के लिए चुनकर एक बार फिर सबको चौंका दिया है। उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। वहीं राजेन्द्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर उप मुख्यमंत्री पद पर बैठाया गया है। राजेंद्र शुक्ला मध्यप्रदेश के रीवा से विधायक हैं और विंध्य के कद्दावर नेता के तौर पर उन्हें जाना जाता है। राजेंद्र शुक्ला लगातार चुनाव जीतकर चार बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। विंध्य के बड़े नेता हैं अजेय विधायक राजेंद्र शुक्ला रीवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र शुक्ला को विंध्य क्षेत्र से ब्राह्मण समाज के बड़े चैहरे और कद्दावर नेता के तौर पर जाना जाता है। अपने चुनावी कैरियर में वह 2003 से लेकर अब तक अजेय रहे हैं। खास बात है कि वह ऐसे विधायक हैं जिन्हें हर बार चुनाव जीतने पर मंत्री पंद मिला है। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर उमा भारती की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद बाबूलाल गौर सरकार में भी उन्हें मंत्री पद मिला। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में भी वह राज्य में कैबिनेट मंत्री रहे। बता दें कि वह अब तक लगातार चार बार मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2003 से लेकर अब तक राजेंद्र शुक्ला लगातार रीवा से चुनाव जीतते आए हैं। छात्र नेता के रूप में शुरू हुआ राजनैतिक जीवन मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले राजेंद्र शुक्ला ब्राह्मण समाज से आते हैं। उनकी ब्राह्मण वोटर्स पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। पेशे से इंजीनियर राजेंद्र शुक्ला का जन्म वर्ष 1964 को रीवा में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1986 से छात्र नेता के तौर पर राजनैतिक जीवन की शुरुआत कर दी थी। वर्ष 1986 में राजेंद्र शुक्ला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे। राजेंद्र शुक्ला ने वर्ष 1998 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन वह कांग्रेस के पुष्पराज सिंह से 1394 वोटों से हार गए। वर्ष 2003 में रीवा सीट से एक बार फिर बीजेपी ने राजेंद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है, इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पराज हराकर पहली मध्य प्रदेश विधानसभा में अपनी जगह बनाई। इससे पहले रीवा सीट से पुष्पराज सिंह ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। राजेंद्र शुक्ला ने साल 2003 में रीवा से जीत दर्ज कर उनके विजय रथ पर ब्रेक लगा दिया। इसके बाद उन्होंने यहां से साल 2003 के अलावा साल 2008, 2013, 2018 और 2023 विधानसभा चुनाव में जीत दर्जी की है कैबिनेट मंत्री से लेकर उप मुख्यमंत्री तक का सफर वर्ष 2003 में पहली बार रिकॉर्ड वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने वाले राजेंद्र शुक्ला को आवास और पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया। वर्ष 2008 में वह रीवा विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार जीते। और इस बार उन्हें ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री बनाकर मंत्रीपरिषद में शामिल किया गया। वर्ष 2013 की बात करें तो मध्य प्रदेश की 14वीं विधानसभा में चुनाव जीतकर आने वाले राजेंद्र शुक्ला को उद्योग नीति और निवेश संवर्धन मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने जनसंपर्क विभाग भी संभाला।बता दें कि वर्ष 2018 में भी राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक चुने गए थे लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी जो की अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी और वर्ष 2020 में यह सरकार गिर गई। जिसके बाद एक बार फिर भाजपा सत्ता में आई। इस बार भी राजेंद्र शुक्ला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री के दायित्व के साथ एक बार फिर यानी कुल चौथी बार शिवराज मंत्रिमंडल में जगह मिली। इसके साथ ही वर्तमान में पांचवी बार चुनाव जीतकर मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं विधायक सरकार राजेंद्र शुक्ला राजेंद्र शुक्ला की X (ट्विटर) प्रोफाइल देखें तो पता चलता है कि वह  सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं हैं। उन्हें 65000 से ज्यादा लोग X पर फॉलो करते हैं। इसके साथ ही विधायक राजेंद्र शुक्ला फेसबुक पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। यहां भी उनके फॉलोवर बहुत बड़ी तादाद में हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा बने उप मुख्यमंत्री।

संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में आठ दिन से मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। सभी अनुमानों को धता बताते हुए डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए सीएम चुने गए हैं। राजधानी भोपाल के भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में तीनों पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई भाजपा के विधायक दल की पहली बैठक में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया गया। श्री यादव उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम का भी ऐलान किया गया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा को 163 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला है। कांग्रेस को 66 सीटें और 1 सीट भारतीय आदिवासी पार्टी को मिली है। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम का ऐलान मध्य प्रदेश में आज विधायक दल की बैठक में दल का नेता चुना गया। इस बैठक के बाद मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री उज्जैन दक्षिण से निर्वाचित विधायक डॉ. मोहन यादव को बनाया गया है। यहां गौरतलब है कि बीजेपी ने इस बार का विधानसभा चुनाव अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बिना ही लड़ा था। जिसके कारण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को लेकर तमामबात अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री पद की रेस में थे कई नाम, 9 दिन तक चला मंथन एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रिय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। उज्जैन के दक्षिण सीट से मोहन यादव ने जीत हासिल की है। बता दें कि मोहन यादव शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। ये लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर उज्जैन दक्षिण सीट पर कब्जा किया है। बता दें कि बीजेपी ने 9 दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के भोपाल दफ्तर में नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री के नाम पर मोहर लगा दी। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश को भी मिले दो उप मुख्यमंत्री राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होने के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार का काम काज संभालने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम की भी घोषणा की गई है। घोषणा के अनुसार विधायक राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ सीट से विधायक हैं। वह एससी वर्ग से आते हैं वहीं ब्राह्मण वर्ग से आने वाले राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और विंध्य क्षेत्र का बड़ा ब्राह्मण चेहरा होकर कद्दावर नेता माने जाते हैं। 2013 में पहली बार बने विधायक, शिवराज सरकार में रहे उच्च शिक्षा मंत्री 58 साल के डॉक्टर मोहन यादव पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। साल 2013 में वह पहली बार उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद साल 2018 में वह एक भार फिर दक्षिण उज्जैन की सीट से विधायक चुने गए थे। साल 2023 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस के चेतन प्रेमनारायण यादव को 12941 वोटों से हराकरलगातार तीसरी बार विजयश्री प्राप्त की है। विधायक दल की बैठक में हरियाणा के सीएम और मध्य प्रदेश के पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया जबकि श्री यादव के नाम का प्रस्ताव वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखा था।

साल 2024 में इन चमत्कारिक पेड़-पौधों को लाएं घर, आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

In the year 2024, bringing these miraculous plants to your home will strengthen your financial situation. वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में लगाई हर चीज में कुछ ना कुछ प्रभाव पड़ता है। यह नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही हो सकता है। अपने घर और दफ्तर में भूलकर भी कुछ ऐसा न लेकर आएं, जिससे नकारात्मक प्रभाव पड़े। वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में लगाई हर चीज में कुछ ना कुछ प्रभाव पड़ता है। यह नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही हो सकता है। अपने घर और दफ्तर में भूलकर भी कुछ ऐसा न लेकर आएं, जिससे नकारात्मक प्रभाव पड़े। यह आपके आर्थिक, मानसिक और शारीरिक विकास के गलत हो सकता है। वास्तु शास्त्र में कुछ पेड़-पौधे ऐसे बताए गए हैं, जिनको लगाने से आर्थिक विकास में सहायता मिलती है। साल 2024 आने वाला है। आप नए साल के मौके पर इन पेड़-पौधों को अपने घर पर लगाने के लिए ला सकते हैं। रातरानी का पौधा,आप घर में पौधा लगाने के बारे में सोच रहे हैं तो रातरानी का पौधा अच्छा रहेगा। रातरानी के फूल खुशबू देते हैं, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है। यह आपको शांति देता है। ज्योतिष की माने तो परिवार में प्रेम को बढ़ावा मिलता है। चंपा का पौधा,चंपा के पौधे में हल्के-पीले रंग के फूल निकलते हैं। यह घर में बेहद अच्छे लगते हैं। इसके होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं होती है। घर के सदस्यों की सेहत पर सकारात्मक असर रहता है। चमेली का पौधा ,चमेली के पौधे में खूबसूरत फूल निकलते हैं, जिसमें अच्छी महक आती है। वास्तु शास्त्र की माने तो चमेली का पौधा घर में लगाना शुभ होता है। परिवार के सदस्यों में आत्मविश्वास पैदा होता है। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज, क्‍या आज घोषित होगा मप्र का मुख्‍यमंत्री या आलाकमान करेगा तय.

Excitement is high before the BJP legislative party meeting; will Madhya Pradesh’s Chief Minister be announced today, or will a consensus be reached. आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। Today, a meeting of the BJP legislative party has been called in the capital. There is a flurry of activity ahead of the Madhya Pradesh BJP legislative party meeting. भोपाल। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की शानदार जीत के बाद अब मुख्‍यमंत्री चुनने की बारी है। इसके लिए आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। दिल्ली: मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के चयन पर राज्य के लिए भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्मण ने कहा, “आज शाम विधायक दल की बैठक होगी। मनोहर लाल खट्टर की 3 सदस्यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि क्‍या आज घोषित होगा मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री या बैठक के बाद आलाकमान इस बारे में कोई निर्णय लेगा।केंद्रीय पर्यवेक्षक ये बोले हालांकि भोपाल पहुंंचने से पहले भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्‍मण ने एएनआइ से कहा है कि 3 सदस्‍यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक पार्टी के कार्यालय में दोपहर बाद होनी है। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डा के लक्ष्‍मण और भाजपा की राष्‍ट्रीय सचिव आशा लकड़ा भोपाल पहुंच चुकी हैं। मप्र भाजपा अध्‍यक्ष वीडी शर्मा ने विमानतल पर पर्यवेक्षकों का स्‍वागत किया। वीडी शर्मा ने कही ये बात भोपाल आगमन के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान से मिलने सीएम हाउस पहुंचे। वहीं मीडिया से बातचीत में वीडी शर्मा ने कहा कि हम राज्‍य के लिए मुख्‍यमंत्री चुनेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों के पहुंचने का सिलसिला आरंभ हो गया है। बैठक से पहले विधायकों को किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से रोका गया है। 3 दिसंबर से ही चल रही अटकलें उल्‍लेखनीय है कि 3 दिसंबर को मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के साथ ही मध्‍य प्रदेश में मुख्‍यमंत्री पद के लिए चर्चाओं का दौर आरंभ हो गया था।चल रही ये अटकलें , मप्र के मुख्‍यमंत्री के नाम को लेकर अनेक अटकलों का दौर जारी है। इनमें श‍िवराज सिंह चौहान के साथ ही नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, विष्‍णुदत्‍त शर्मा और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का नाम प्रमुख है। इसके साथ ही भूपेंद्र सिंह, राकेश सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी का नाम भी सामने आया है।

विधान सभा में प्रचंड बहुमत के बाद भी भाजपा को लोक सभा में खतरा.

Despite a sweeping majority in the legislative assembly, BJP faces a threat in the Lok Sabha. प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भले ही भाजपा को अविश्वसनीय प्रचंड जीत मिली है, लेकिन इसके बाद भी खतरे की घंटी भी बजी है। दरअसल इस जीत के बाद भी दस लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस को भाजपा की अपेक्षा अधिक मत मिले हैं, जिसकी वजह से भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि इन दस में से नौ पर अभी भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में इन सीटों पर भाजपा को अगले साल के शुरुआती महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को अतिरिक्त मेहनत करने की चुनौती मिल गई है। दरअसल मई माह में लोकसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। भाजपा के लिए छिंदवाड़ा सीट तो पहले से ही चुनौती बनी हुई थी , ऐसे में उसके सामने नौ नई सीटों की भी चुनौती दिखना शुरु हो गई है। हालांकि इसी तरह के कुछ आसार बीते विधानसभा चुनाव में भी बने थे , लेकिन लोकसभा परिणाम भाजपा के पक्ष में ही आए थे। इसको देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार भी कुछ इसी तरह के परिणाम आ सकते हैं। दरअसल इस बार अगर विधानसभा चुनाव के परिणामों पर नज़र डालें तो , प्रदेश की 10 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस जीती है। इनमें छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सभी सातों विधानसभा सीटें भी शामिल हैं। इन सीटों पर पिछले चुनाव में भी कांग्रेस को ही जीत मिली थी। इसी तरह मुरैना की पांच, भिंड की चार, ग्वालियर की चार, टीकमगढ़ की तीन, मंडला की पांच, बालाघाट की चार, रतलाम की चार, धार की पांच और खरगोन लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से पांच पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। अहम बात यह है कि इसके बाद भी प्रदेश की पांच लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जिनके परिणाम बताते हैं कि वे भाजपा के लिए बेहद सुरक्षित हैं। इसकी वजह है, इन सीटों की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को ही जीत मिली है और वह भी बड़े अंतर से। इनमें खजुराहो, होशंगाबाद, देवास, इंदौर और खंडवा लोकसभा की सीटें शामिल हैं। इनके अलावा सागर, दमोह, रीवा, सीधी, जबलपुर, विदिशा और मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में केवल एक-एक विधानसभा सीट पर ही भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इस हिसाब से देखें तो यह सीटें भी भाजपा के लिए पूरी तरह से अनुकूल हैं। दरअसल गुना में बामोरी और अशोकनगर सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है , जबकि शेष सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। इसी तरह सागर में एक बीना पर कांग्रेस, दमोह में एक मलहरा पर कांग्रेस, सतना में दो सीट सतना और अमरपाटन पर कांग्रेस, रीवा में एक सेमरिया सीट पर कांग्रेस, सीधी में एक चुरहट पर कांग्रेस, शहडोल में एक पुष्पराजगढ़ पर कांग्रेस, जबलपुर में एक जबलपुर पूर्व पर कांग्रेस, विदिशा में एक सिलवानी पर कांग्रेस, भोपाल में दो भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य पर कांग्रेस, राजगढ़ में दो राघोगढ़, सुसनेर पर कांग्रेस, उज्जैन में दो महिदपुर, तराना पर कांग्रेस, मंदसौर में एक मंदसौर पर कांग्रेस, बैतूल में दो सीटें टिमरनी और हरदा पर कांग्रेस विजयी हुई है। वहीं शेष सीटों पर भाजपा जीती है।यह हैं चुनौती वाली सीटों का गणितजिन सीटों पर चुनौती दिख रही है उनमें लोकसभा सीट मुरैना भी शामिल है। इस सीट के तहत आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच पर कांग्रेस को जीत मिल है। इन सीटों में श्योपुर, विजयपुर, जौरा, मुरैना और अम्बाह है, जबकि भाजपा को सबलगढ़, सुमावली और दिमनी में जीत मिली है। इस सीट पर मिले मतों को देखें तो कांग्रेस को 5,00666 और भाजपा को 4,11601 मत मिले। इसी तरह से लोकसभा सीट भिंड की बत की जाए तो इस सीट के तहत आने वाली आठ विस सीटों में से चार पर कांग्रेस व चार पर भाजपा को जीत मिली है। इनमें अटेर, गोहद, भांडेर और दतिया में कांग्रेस, तो सेवड़ा, भिंड, लहार और मेहगांव में भाजपा को जीत मिली है। इस सीट पर भी मतों के मामले में कांग्रेस आगे रही है। कांग्रेस को 532146 और भाजपा को 525252 वोट मिले हैं। लोकसभा सीट पर भी भिंड की ही तरह कांग्रेस ने ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर पूर्व, डबरा, पोहरी पर जो भाजपा ने ग्वालियर, करैरा, ग्वालियर दक्षिण और भितरवार पर जीत दर्ज की है। इसी तरह से कांग्रेस को 700861 और भाजपा को 677611 वोट मिले हैं। लोकसभा सीट टीकमगढ़ में तीन सीटों पर कांग्रेस जीती है। इनमें टीकमगढ़, पृथ्वीपुर और खरगापुर शामिल है, जबकि भाजपा को जतारा, निवाड़ी,महाराजपुर, छतरपुर और बिजावरमें जीत मिली है। मतों की बात की जाए तो कांग्रेस को 531464 और भाजपा को 606817 मत मिले हैं। इसी तरह से मंडला लोक सभा सीट पर कांग्रेस को डिंडोरी, बिछिया, निवास, कैवलारी, लखनादौन सीटों पर , जबकि भाजपा को शहपुरा, मंडला, गोटेगांव में जीत मिली है। इसी तरह से कांग्रेस को 740509 और भाजपा को 628529 मत मिले हैं। लोकसभा सीट बालाघाट के तहत आने वाली आठ विस सीटों में से कांग्रेस को चार बैहर, परसवाड़ा, बालाघाट, वारासिवनी में जबकि भाजपा को लांजी, कटंगी, बरघाट और सिवनी सीट पर जीत मिली है। इस सीट के तहत आने वाली विस सीटों पर कांग्रेस को 735122 और भाजपा को 649037 मत मिले हैं।

केपी सिंह की हार की खुशी में बुजुर्ग ने कराया मुंडन.

In the joy of K.P. Singh’s victory, the elderly person got a head shave. –शिवपुरी के एक व्यक्ति का अनोखा प्रण कांग्रेस नेता केपी सिंह की हार के बाद बुजुर्ग ने मुंडवाया सिर संवाददाता शिवपुरी शिवपुरी! शिवपुरी जिले के पिछोर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति को कांग्रेस नेता केपी सिंह की हार का इंतजार था। 15 साल से वह इस हार का इंतजार कर रहे थे और जब कांग्रेस नेता केपी सिंह हारे तो उन्होंने अपना यह प्रण अपना सिर मुंडवाकर पूरा किया। शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा के एक बुजुर्ग ने पिछोर विधायक केपी सिंह कक्काजू के हारने पर अपना सिर मुंडवा लेने का प्रढ 15 साल पहले लिया था। 15 साल पहले लिए गए इस प्रण के बाद जब केपी सिंह शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में कूदे और इस विधानसभा क्षेत्र से उन्हें 40 हजार से अधिक मतों से हार मिली तो इसके बाद पिछोर के रहने वाले इस व्यक्ति ने अपना सिर मुंडवा लिया। आरोप- केपी सिंह ने मार दिया था चांटा और फाड़ दिया था आवेदन- शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा क्षेत्र के जराय गांव के रहने वाले बुजुर्ग गोविन्द सिंह लोधी ने बताया कि साल 2008 की बात है जब मेरे भाई कि एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी और मृतक भाई की सम्पत्ति को एक औरत ने अपने नाम करवा लिया था जिसकी फरियाद लेकर मैं पिछोर विधायक केपीसिंह के पास अपनी दरख़ास लेकर डाक बंगला पर पहुंचा जहाँ विधायक ने पूछा कि कहाँ से आया है जब मैंने बताया कि गोविन्द हूँ ज़राय से तो विधायक ने मेरा आवेदन फाड़ते हुए मुझे चाँटा जड़ दिया और भगा दिया था जिसके बाद मैंने उसी दिन प्रण किया था कि विधायक केपीसिंह जिस दिन हारेगा उस दिन ही यह अति का अन्त होगा। अब 2008 से अभी तक मुझे 15 वर्ष तक इंतजार करना पड़ा जिसके बाद मेरा सपना पूरा हुआ तो मैंने अपने दाढ़ी, मूंछ सहित सिर का मुंडन करवाया है अब मेरे दिल को शांति है। छह बार से जीतते आ रहे थे केपी को इस बार मिली हार- केपी सिंह कक्काजू पिछोर विधानसभा से लगातार 6 बार से विधायक रहे हैं और इस बार वह शिवपुरी विधानसभा से चुनाव लड़े थे लेकिन सातवीं बार लड़े चुनाव में उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इधर एक बुजुर्ग उनकी हार का इंतज़ार कर रहा था जिसके प्रण को पूरा होने में 15 साल लग गए। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी केपी सिंह को भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन 40 हजार से अधिक मतों से हराया है।

भोपाल स्टेशन पर बनी 6 करोड़ की बिल्डिंग में यात्रियों को नहीं मिल रही सुविधाएं.

The building worth 60 million at Bhopal station lacks facilities for passengers  तीन साल पहले बनी थी बिल्डिंग, न फूड कोर्ट, न ही पैसेंजर लाउंज भोपाल। भोपाल स्टेशन पर करीब साढ़े तीन साल पहले करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से सेंकड एंट्री पर प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर नई बिल्डिंग बनाई थी। उस समय बिल्डिंग में यात्रियों को पैसेंजर लाउंज, फूड कोर्ट और बजट होटल जैसी शुरू होनी थी, ताकि सफर के दौरान यात्रियों को राहत मिल सके। लेकिन अभी तक यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिल सकी। तो वहीं रानीकमलापति स्टेशन पर आए दिन यात्रियों को कई नई सुविधा दी जा रही है।  उल्लेखनीय है कि स्टेशन बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर वीआईपी लाउंज, फर्स्ट फ्लोर पर फूड कोर्ट और सेकंड फ्लोर पर बजट होटल के लिए रेलवे और आईआरसीटीसी के बीच करीब 8 साल पहले अनुबंध हुआ था। लेकिन अब आईआरसीटीसी पीछे हट गया। इसके बाद पिछले साल फिर से आईआरसीटीसी के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। जिसके बाद सहमति बन गई थी। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका। इस वजह से यह सब सुविधा यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। तो वहीं भोपाल रेल मंडल के अधिकारी इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहे है।  आईआरसीटीसी ने पीछे खींचे हाथ  रेल सूत्रों के अनुसार आईआरसीटीसी द्वारा इस बिल्डिंग का उपयोग इसलिए नहीं किया जा रहा है कि यहां यात्रियों की संख्या कम है। यहां पर सिर्फ 8 से 10 ट्रेनें रुकती हैं। प्लेटफॉर्म नंबर 1 की ओर ज्यादा ट्रेनें रुकने से वहां यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है, इसलिए उन्हें ज्यादा फायदा नहीं होगा। इस बिल्डिंग को आईआरसीटीसी नहीं ले रहा है। तो वहीं आईआरसीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें जितनी जगह की जरूरत थी रेलवे उससे ज्यादा जगह देना चाहता है। इसलिए मामला अटका हुआ है। उधर, रेल अधिकारियों का कहना है कि छह नंबर की नई बिल्डिंग पर यात्रियों को सुविधा को बढ़ाया गया है। आने वाले दिनों में ओर सुविधा बढ़ाई जाएगी। इस दिशा में नए तरीके से योजना पर काम चल रहा है। 132 ट्रेनें भोपाल स्टेशन पर रोजाना रुकती हैं। सबसे ज्यादा 46 ट्रेनें प्लेटफॉर्म-1 की ओर रुकती हैंसबसे कम 08 से10 ट्रेनें प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर रुकती हैं।

नये वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री फिर रोकी.

Registration of the three floors sold in the new government building has been halted again. उदित नारायणभोपाल। राजधानी के तुलसी नगर में बने नये वन भवन के तीन फ्लोर को बेचे जाने के बाद इसकी रजिस्ट्री एक बार फिर रुक गई है। दरअसल इस भवन के तीन फ्लोर कर्मकार कल्याण मंडल, इलेक्ट्रानिक विकास निगम एवं स्टेट माईनिंग कारपोरेशन को करीब 60 करोड़ रुपये में बेचे गये थे ताकि वन भवन को बनाने में लगी भारी भरकम लागत 182 करोड़ रुपये की कुछ भरपाई हो सके। लेकिन 8 अगस्त 2023 को जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उक्त नये भवन का लोकार्पण किया था तब उन्होंने घोषणा कर दी थी कि अगर नवीन वन भवन में जगह की कमी पड़ती है तो पूरा परिसर वन भवन को दे दिया जायेगा। दरअसल सीएम को बताया गया था कि जगह की कमी होने से वन विभाग का जैव विविधता बोर्ड, राज्य बांस मिशन एवं इको पर्यटन बोर्ड नये वन भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है। इसी कारण से सीएम ने उक्त घोषणा कर दी थी। लेकिन सीएम की यह घोषणा तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह ने सीएम घोषणा पोर्टल पर दर्ज नहीं होने दी। इस पर लोक परिसम्पत्ति विभाग जिसने उक्त तीनों फ्लोर की नीलामी कराई थी, ने वन विभाग को पत्र लिख कर कहा है कि वह वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री करा दे। वन विभाग ने भी वन बल प्रमुख को रजिस्ट्री कराने के लिये पत्र भेज दिया। लेकिन वन बल प्रमुख रमेश गुप्ता ने इनकी रजिस्ट्री यह कहकर रुकवा दी है कि वे उच्च स्तर पर बातचीत कर इन बेचे गये तीन फ्लोर को वापस वन मुख्यालय को दिलवायेंगे। नई सरकार के गठन होने पर यह उच्च स्तरीय बातचीत हो सकेगी।

युवाओं में अब इस बीमारी का खतरा, लगातार हो रहे शिकार.

The danger of this illness is now looming over the youth, becoming a continuous threat. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एकाकीपन को गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा घोषित किया है। जिसकी मृत्यु दर प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने के बराबर है। आंकड़ों के अनुसार विश्व में 5 से 15 प्रतिशत किशोर अकेले हैं। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मनोचिकित्सक केंद्र में रोजाना टेलीमानस पर 20 से 40 युवाओं के कॉल आ रहे हैं, जो एकाकीपन का शिकार है। इसमें ज्यादातर आईआईटी, नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले व घर से दूर रहने वाले युवा शामिल है। वहीं बुजुर्गों की ओपीडी में हर सप्ताह 30 मरीज आ रहे हैं। जिनमें 8 से 10 केस एकाकीपन से जुड़े हैं। एंग्जाइटी, डिप्रेशन और तनावमनोचिकित्सक डॉ. ललित बत्रा बताते हैं कि इंसान भावनाओं को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करता है। परिवार में उसकी यह जरूरतें पूरी हो जाती है। अकेलेपन से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, तनाव जैसी समस्याएं पनपने लगती है। स्कूल-कॉलेज में बच्चों के बीच एक समूह बने, जिसमें वे अपने मन की बात साझा कर सकें। ये हैं दूर करने के उपायदिनचर्या को ठीक रखने का प्रयास करें।सोने और उठने का समय निर्धारित करें।मेडिटेशन और योगा करें।स्वयं को सामाजिक संवाद में शामिल करें।दोस्तों और परिजनों के साथ समय बिताए और मन की बात साझा करें।

बागियों का कमाल: भाजपा- कांग्रेस को गंवाना पड़ गईं कई विधानसभा सीटें.

Several assembly seats were lost by both the BJP and Congress. – पार्टी में बगावत के बावजूद कई सीटें जीती भाजपा – कांग्रेस को दोनों दलों के बागियों से हुआ नुकसान -अरविंद, गोविंद, लक्ष्मण, एनपी, चौधरी जैसे दिग्गज हारे   *उदित नारायण*  भोपाल। हर बार की तरह विधानसभा के इस चुनाव में भी भाजपा-कांग्रेस को बागियों के कारण कई सीटें गंवाना पड़ गईं। खास बात यह कि भाजपा के पक्ष में ऐसी आंधी चली कि वह वे सीटें भी जीत गई, जहां उसके मजबूत बागी मैदान में थे। इसके विपरीत कांग्रेस को अपनी पार्टी के साथ भाजपा के बागियों से भी नुकसान हुआ। चार सीटें ही ऐसी थीं जहां भाजपा को पार्टी के से बगावत कर मैदान में उतरे प्रत्याशियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा। बगावत की वजह से अरविंद भदौरिया, डॉ गोविंद सिंह, लक्ष्मण िसंह, एनपी प्रजापति और चौधरी राकेश सिंह जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा।अटेर सहित चार जगह हुआ भाजपा को नुकसानभाजपा को जहां पार्टी के बागियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा, उनमें अटेर, टीकमगढ़, मुरैना और महिदपुर शामिल हैं। अटेर में पार्टी के बागी मुन्ना सिंह भदौरिया के मैदान में होने के कारण प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया हार गए। टीकमगढ़ में केके श्रीवास्तव ने निर्दलीय लड़कर भाजपा के राकेश गिरि को हरवा दिया। अटेर में कांग्रेस के हेमंत कटारे और टीकमगढ़ में यादवेंद्र सिंह चुनाव जीत गए। इसी प्रकार मुरैना में पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने अपने बेटे राकेश को चुनाव लड़ा दिया। उन्होंने 37 हजार से ज्यादा वोट लेकर भाजपा को हरा दिया और कांग्रेस के दिनेश गुर्जर चुनाव जीत गए।  महिदपुर में भाजपा के प्रताप सिंह बगावत कर चुनाव लड़ रहे थे। वे 20 हजार से ज्यादा वोट ले गए और भाजपा के बहादुर सिंह 290 वोट के अंतर से चुनाव हार गए।बगावत के बावजूद यहां जीत गई भाजपाप्रदेश की आधा दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा में बगावत हुई। मजबूत नेता मैदान में उतर गए, फिर भी भाजपा ने सीट में कब्जा किया। इनमें सुमावली, भिंड, लहार, चाचौड़ा और होशंगाबाद जैसी सीटें शामिल हैं। सुमावली में भाजपा के बागी कुलदीप सिंह सिकरवार के मैदान में होने के बावजूद भाजपा जीत गई और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई। भिंड में संजीव सिंह की बगावत के बावजूद भाजपा जीती और कांग्रेस के चौधरी राकेश सिंह चुनाव हार गए। लहार में भाजपा के बागी रसाल सिंह ने बगावत की फिर भी भाजपा जीती और नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह को हार का सामना करना पड़ा।  चाचौड़ा में भाजपा की पूर्व विधायक ममता मीणा आप से चुनाव लड़ गईं फिर भी भाजपा जीती और कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह हार गए। होशंगाबाद में भगवती चौरे भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ गए लेकिन यहां भाजपा ही जीती और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई।कांग्रेस के बागियों के कारण पार्टी की हुई हार कांग्रेस में भी बागियों ने कई जगह कमाल दिखाए। भाजपा से फर्क यह है कि बागियों के होने के कारण कांग्रेस सिर्फ हारी, उसे एक भी सीट में जीत नसीब नहीं हुई। गोटेगांव में कांग्रेस ने शेखर चौधरी काे टिकट देकर काट दिया था। वे नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ गए। उन्हें 47 हजार से ज्यादा वोट मिले और कांग्रेस के एनपी प्रजापति बुरी तरह हारे।  देपालपुर में कांग्रेस के बागी राजेंद्र चौधरी लगभग 38 हजार वोट ले गए और कांग्रेस विधायक विशाल पटेल 13 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए। बड़नगर में भी कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को टिकट देकर काट दिया था। वे निर्दलीय चुनाव लड़कर 31 हजार से ज्यादा वोट ले गए और कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा। आलोट में प्रेमचंद गुड्डू बगावत कर मैदान में थे। उन्हें 37 हजार से ज्यादा वोट मिले और विधायक मनोज चावला को पराजय का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार महू में अंतर सिंह दरबार बगावत कर निर्दलीय लड़े तो कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर पहुंच गए और भाजपा की ऊषा ठाकुर बड़े अंतर से चुनाव जीत गईं।

दिल्ली मे सरकार बनाने की गहमागहमी के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा के साथ रात भोपाल पहुंचे प्रहलाद पटेल.

Amidst intense efforts to form a government in Delhi, Pralhad Patel arrived in Bhopal with BJP State President B.D. Sharma late at night. *उदित नारायण* नई दिल्ली।तीन राज्यों मे मिली बम्पर जीत के बाद से ही भाजपा मे नई सरकार के गठन को लेकर बैठकों एवं मंथनों का दौर जारी हैँ मध्यप्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ मे मुख्यमंत्री पद के कई नाम चर्चा मे हैँ, एक तरफ जहाँ शिवराज भोपाल मे बैठकर सियासी गुणागणित लगा रहे हैँ वही देर रात प्रहलाद पटेल राज्य इकाई के प्रमुख बी डी शर्मा के साथ भोपाल पहुचे, दरअसल, मध्‍य प्रदेश की नरसिंहपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक प्रहलाद सिंह पटेल चुनाव परिणाम आने के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे। पटेल के साथ बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष वी‍डी शर्मा भी थे, दोनों एक साथ दिल्‍ली से भोपाल आए। इसके बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि क्‍या प्रहलाद सिंह पटेल ही प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री होंगे। प्रहलाद पटेल का नाम मुख्‍यमंत्री चहरे में सबसे आगे चल रहा है। पटले ने दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है। वहीं, भोपाल आने के पहले प्रहलाद पटेल वरिष्‍ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का आशीर्वाद लेने भी पहुंचे थे। वही इंदौर-1 विधानसभा से नवनिर्वाचित विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री को लेकर कहा कि सीएम के नाम की घोषणा रविवार तक हो जाएगी, साथ ही प्रदेश में बीजेपी की बड़ी जीत के लिए श्रेय शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं को देने से इंकार कर दिया ,*ग्‍वालियर में तोमर के समर्थन के ग्‍वालियर में तोमर के पोस्‍टर लगे *वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।पोस्‍टर लगे* वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।

मध्यप्रदेश: चुनावी हार-जीत से जुड़े अजब-गजब कारनामे

भोपाल ! किसी ने चेहरा काला किया तो कोई दंडवत कर पहुंचा मंदिर; कोई सिर मुंडवाकर बोला-संकल्प पूरा हुआ ,किसी ने सिर मुंडवा लिया तो किसी ने चेहरे पर कालिख पोत ली , किसी ने शर्त के एक लाख रुपए जीतकर गोशाला में दान कर दिए, कोई 300 किलोमीटर बाइक से ही भोपाल के लिए निकल पड़ा, कुछ महिलाएं तो बिना चप्पल-जूते के 70 किलोमीटर दूर शनि मंदिर दर्शन करने गईं। दृश्य – 1 ग्वालियरः नेता का मुंह काला न हो, इसलिए अपना ही कर लिया दतिया के भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने चुनाव से पहले दावा किया था, ‘प्रदेश में भाजपा को 60 सीटें भी नहीं मिलेंगी। ऐसा हुआ तो मैं अपना मुंह काला करा लूंगा।’ भाजपा ने दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया। नतीजों के बाद इसका वीडियो फिर चर्चा में आ गया। इसके बाद बरैया को घेरने की कोशिशें भी शुरू हो गईं। ऐसे में ग्वालियर ग्रामीण किसान कांग्रेस के महामंत्री योगेश दंडोतिया बरैया के समर्थन में उतर आए। दंडोतिया ने बुधवार को ग्वालियर में बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। मीडिया के सामने ही उन्होंने जेब से स्याही निकाली और अपने चेहरे पर पोत ली। उन्होंने कहा, ‘फूल सिंह बरैया को मुंह काला नहीं करने दूंगा। इसके लिए मैंने अपना मुंह काला किया है।’ यह भी बता दें कि बरैया भी गुरुवार को भोपाल पहुंचकर अपना वचन पूरा करने के लिए मुंह काला करेंगे। दृश्य – 2 रतलामः यह विधायक तो बाइक से भोपाल के लिए निकल पड़े बात रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट की है। यहां से चुनाव जीतकर भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार विधायक बने हैं। चुनाव जीतने के तीन दिन बाद बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम शिवराज सिंह चौहान और पुलिस को टैग किया। लिखा, ‘मैं कमलेश डोडियार, विधायक बनने के बाद बाइक से शपथ ग्रहण के पूर्व होने वाली कागजी कार्रवाई पूरी करने भोपाल के लिए निकल चुका हूं। मेरी सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं ताकि कोई अनहोनी न हो।’ उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए मदद भी मांगी। कहा- ‘मैं चुनाव में जुगाड़ के सहारे चला हूं। मैं मजदूर वर्ग से आता हूं और काफी गरीब हूं। भोपाल जाने के लिए मैंने दोस्तों को फोन किया था, लेकिन सहायता न मिल पाने पर बाइक से ही भोपाल निकल गया हूं। यदि कोई शुभचिंतक मेरी मदद कर सकते हों तो फोर व्हीलर उपलब्ध करा दें, जिससे मैं समय पर विधानसभा पहुंचकर कागजी कार्रवाई पूरी कर सकूं। मैं किसी से डरता नहीं हूं, जो भी मेरी हत्या करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, वो बर्बाद हो जाएगा।’ सैलाना से भोपाल करीब 330 किलोमीटर है। डोडियार बाइक से भोपाल पहुंच भी गए हैं। उन्होंने 12 हजार रुपए उधार लेकर चुनाव लड़ा था। इसे चुकाने के लिए नोतरा (आदिवासी समाज में आर्थिक मदद की प्रथा) का सहारा लिया। दृश्य – 3 भिंड: नेता प्रतिपक्ष की हार पर 10 साल बाद कराया मुंडन भिंड जिले के लहार विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं मुन्ना विश्वकर्मा। 62 साल के मुन्ना पिछले 10 साल से साधु वेश में ही थे। दाढ़ी बढ़ी हुई, सिर के बाल भी बढ़ा लिए। वे अलग-अलग मंदिरों में समय बिताते रहे। बुधवार को उन्होंने अचानक नाई की दुकान पर पहुंचकर बाल कटवाए। शेविंग भी बनवा ली। लोगों ने पूछा तो असलियत सामने आई। पता चला – कांग्रेस लीडर व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के चुनाव हारने की खुशी में उन्होंने ऐसा किया है। दरअसल, 10 साल पहले लहार बस स्टैंड के पास बने मुन्नालाल के मकान को नगर पालिका ने अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया था। मुन्नालाल ने तत्कालीन विधायक डॉ. गोविंद सिंह पर बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने संकल्प लिया था- ‘जब तक डॉ. गोविंद सिंह विधायक रहेंगे, तब तक बाल नहीं कटवाऊंगा। दाढ़ी भी नहीं बनवाऊंगा।’ दृश्य – 4 श्योपुर: कीचड़ वाली सड़क पर दंडवत कर पहुंचे मंदिर श्योपुर में मातासूला गांव के रहने वाले किसान रामराज मीणा बुधवार को एक किलोमीटर दूर स्थित हनुमान मंदिर तक दंडवत करते पहुंचे। लोगों ने जब कारण पूछा तो सुनकर हैरान रह गए। मीणा ने बताया कि श्योपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक बाबूलाल जंडेल की जीत के लिए क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर में मन्नत मांगी थी। अब इसे पूरा कर रहे हैं। बड़ी बात ये कि सड़क पर कीचड़ के बाद भी वे कहीं रुके नहीं। रामराज मीणा अब गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर मानपुर इलाके के क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर तक दंडवत परिक्रमा लगाएंगे। इस मौके पर मंदिर में कार्यक्रम भी किया जाएगा। दृश्य -5 सीधी: अपने नेता की जीत की खुशी में 5 साल बाद मुंडन बात 2018 विधानसभा चुनाव की है। सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल चुनाव हार गए थे। इसके बाद उनके समर्थक संजय सिंह ने संकल्प लिया- ‘जब तक अजय सिंह राहुल चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच जाते, बाल नहीं कटवाऊंगा। दाढ़ी भी नहीं बनवाऊंगा।’ आखिरकार 2023 में संजय सिंह के संकल्प की जीत हुई। अजय सिंह राहुल चुनाव जीत गए। इसके बाद बुधवार को वे अपने नेता अजय सिंह राहुल के घर पहुंचे। संजय ने उनके सामने ही मुंडन करवाया और दाढ़ी भी बनवाई। दृश्य – 6 छिंदवाड़ा: शर्त जीतने पर मिले एक लाख रुपए गोशाला में दान किए 21 नवंबर की बात है। छिंदवाड़ा में व्यापारी राम मोहन साहू और कमलनाथ समर्थक प्रकाश साहू के बीच शर्त लगी कि अगर भाजपा प्रत्याशी बंटी विवेक साहू चुनाव जीतते हैं तो राम मोहन 10 लाख रुपए देंगे। अगर कमलनाथ जीतते हैं तो प्रकाश साहू एक लाख रुपए देंगे। शर्त की वजह से दोनों प्रदेशभर में चर्चा में भी रहे। दोनों ने ही अपने-अपने कैंडिडेट की जीत का दावा किया। नतीजे आए तो कमलनाथ ने जीत दर्ज की। आखिरकार, शर्त के मुताबिक मंगलवार को प्रकाश साहू ने राममोहन को एक लाख रुपए दिए। हालांकि, राम मोहन ने यह राशि गोशाला के लिए नगर निगम को दान कर दी।

मध्य प्रदेश सियासत में अकेले खड़े होने का साहस, बिसात कहीं और है… पांसे कहीं शतरंज यहां से खेल रहे हैं सीएम शिवराज ?

*उदित नारायण* भोपाल।मध्य प्रदेश में 18 सालों की राजनीति में परिपक्वता, स्थिरता, सोच और समझ के शिखर पर जा पहुंचे सीएम शिवराज सिंह चौहान इस बार बेहद ही अनोखे अंदाज में अपनी कुर्सी पर आई चुनौती का जवाब न केवल प्रतिद्वंद्वियों को दे रहे हैं, बल्कि नेतृत्व तक भी अपनी सहजता और सामर्थ्य को पहुंचा रहे है । मध्य प्रदेश के नेतृत्व को बदलने का मन बना चुके नेतृत्व की मंशा को भांपते शिवराज ने जनमानस को अपनी मुट्ठी में कैद करने के लिए भावुकता के ऐसे-ऐसे तीर छोड़े थे कि प्रदेशभर की जनता को लगा कि उनका खैरख्वाह उन्हें छोडक़र जा रहा है । इसी भावुकता को लूटते शिवराज ने प्रदेश की जनता के भरपूर वोट बटोरकर पार्टी को ऐतिहासिक विजय दिलाते हुए नेतृत्व को भी वही संदेश और सवाल पहुंचा दिया, जो उन्होंने जनता से कहा था कि मैं नहीं रहूंगा तो क्या होगा ? मैं चला जाऊंगा तो बहुत याद आऊंगा, यह संदेश पहले जनता के लिए थे । अब नेतृत्व के लिए नजर आ रहे हैं। अपनी शतरंज का दूसरा पांसा फेंकते शिवराज ने कल फिर एक साथ दो तीर छोड़े। पहला यह कि मैं न मुख्यमंत्री पद का दावेदार था और न हूं, पार्टी का कार्यकर्त्ता हूँ और प्रधानमंत्री की 2024 की जीत की माला मे 29 कमल पुष्प लगाने हेतु कार्य करने मैं छिंदवाड़ा जाऊंगा, पिछली बार हारी लोकसभा सीट भी दिलवाऊंगा । शिवराज का यह बयान जहां मोदी के प्रति निष्ठा का संदेश है, वहीं इस बात का भी संदेश है कि मुझे नजरअंदाज करना आसान नहीं , वो भोपाल बैठकर दिल्ली मे चल रहे सियासी रंगमंच का आनंद लेते हुए उन्होंने बेफिक्री जताते हुए दो दिन पहले परिवार के साथ रेस्टोरेंट में भोजन किया और ऐलान भी किया कि मैं दिल्ली नहीं जाऊंगा और हकीकत यह है कि शिवराज दिल्ली इसलिए नहीं जा रहे हैं, क्योंकि उनकी बिसात कहीं और जमी है… गोटियां कहीं और फिट हैं और शतरंज वो यहां से खेल रहे हैं। सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, सहजता का संदेश… सत्ता की अनदेखी…मोदी के प्रति आस्था की भावना का प्रदर्शन और दावेदारों से दूरी एक साथ चले गए वो मोहरे हैं, जिसमें शतरंज की बिसात में उनकी शह और विरोधियों की मात होगी ।

बहुचर्चित सरपंच मर्डर कांड का आरोपी PF कमिश्नर गिरफ्तार.

The accused in the high-profile Sarpanch murder case, Commissioner of PF, has been arrested. ग्वालियर। इंदौर के PF कमिश्नर मुकेश रावत गिरफ्तारमुंबई एयरपोर्ट से हुई गिरफ़्तारी मुंबई पुलिस के ACP डा. मनोज शर्मा की मदद से पकड़ा सरपंच विक्रम रावत के मर्डर का आरोपी है PF कमिश्नरग्वालियर पुलिस ने आरोपी पर 10 हज़ार का घोषित किया था इनाम 9 अक्टूबर को ग्वालियर में हुआ था विक्रम रावत हत्या कांड शार्प शूटरों ने फायरिंग कर की थी विक्रम की हत्या

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