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महाकाल की नगरी उज्जैन में बन रहा महाकाल-संस्कृति वन, लगेंगे 30 हजार पौधे, योग-ध्यान केंद्र होगा तैयार

उज्जैन  PM मोदी की पहल पर गुजरात में स्थापित संस्कृति वन की तर्ज पर उज्जैन में भी एक भव्य महाकाल संस्कृति वन का निर्माण किया जा रहा है। यह वन 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इसे कोठी रोड पर बनाया जा रहा है। इस वन के निर्माण के साथ पर्यावरण और संस्कृति को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि आने वाले लोग न केवल प्रकृति से जुड़ सकें, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध हो सकें। संस्कृति वन का निर्माण महाकाल संस्कृति वन को कुल 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस वन में 30 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें औषधीय पौधों का भी समावेश है। यहां नीम, करंज, बरगद, सिंदूर, बेल, पाम, चंदन, बादाम और कदम जैसे पौधे लगाए गए हैं। यह वन केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के भी प्रतीक बनेगा। इस वन में योग केंद्र भी बनाया जाएगा, जहां लोग ध्यान और योग का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा, अवंतिका नगरी का इतिहास दर्शाने के लिए राजा विक्रमादित्य की सिंहासन बत्तीसी का भी निर्माण किया जा रहा है। यह वन धार्मिक यात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का एक अनूठा केंद्र बनेगा। महाकाल संस्कृति वन में कुल 8 ब्लॉक्स होंगे, जिनका नाम कालिदास वन, शांति वन, जैव विविधता वन, नवग्रह वाटिका, सिंदूर वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका जैसे आकर्षक नामों से रखा जाएगा। विक्रम टीले और सिंहासन बत्तीसी उज्जैन के महाकाल संस्कृति वन में सम्राट विक्रमादित्य की भव्य सिंहासन बत्तीसी का दर्शन भी होगा। विक्रम टीला भी यहां विशेष रूप से सुसज्जित किया जा रहा है, जहां फूलों से सुसज्जित एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अनूठा होगा। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में एक स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपए की लागत से इस सिटी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़के, अंडरग्राउंड लाइटिंग, हॉस्पिटल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे और सड़कों के बीच डिवाइडर जैसी सुविधाएं होंगी। यह स्थायी कुंभ सिटी सिंहस्थ कुम्भ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगी। सिंहस्थ से पहले एलिवेटेड ब्रिज की सौगात सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को दो एलिवेटेड ब्रिज भी मिलेंगे, जिनकी मंजूरी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी है। ये ब्रिज नागपुर की तर्ज पर बनाए जाएंगे और इस सड़क मार्ग को चौड़ा करेंगे, जिससे तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम हो सकेगी। महाकाल संस्कृति वन के अन्य आकर्षण महाकाल संस्कृति वन में सप्त सागरों के आसपास 84 शिवलिंग स्थापित किए जाएंगे, जिनकी परिक्रमा की जा सकेगी। इसके अलावा, यहां फूल घाटी, विद्या वाटिका, कालिदास अरण्य, नक्षत्र वाटिका, और चरक वाटिका जैसे अनेक आकर्षक स्थान होंगे। इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण की 64 कलाओं का भी यहां दर्शन किया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं और सुविधाएं महाकाल संस्कृति वन में कैफेटेरिया, पार्किंग, व्हीलचेयर और ग्रीन शेड जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, वन में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। वन विभाग जल्द ही अहमदाबाद जाकर वहां के संस्कृति वन की स्टडी करेगा, ताकि यहां भी उसी मॉडल पर काम किया जा सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा एक नया रूप  महाकाल संस्कृति वन उज्जैन का एक अद्भुत और अनूठा धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। यह वन न केवल पर्यटकों को धार्मिक अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इस वन के साथ उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को एक नया रूप मिलेगा और यह स्थान तीर्थ यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन जाएगा। उज्जैन का फिर से लौटेगा प्राचीन वैभव, मोहन यादव की इच्छानुसार महाकाल क्षेत्र के सभी गेटों का किया जाएगा जीर्णोद्धार. डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव अब महाकाल की नगरी उज्जैन में लौटने जा रहा है. प्राचीनकाल में बाबा महाकाल की नगरी में प्रवेश द्वार की परंपरा रही है. जिसका जीर्णोद्धार अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में प्रशासन कराने जा रहा है. उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय में उज्जैन में जिस तरह के प्रवेश द्वारा हुआ करते थे, उसी तरह के द्वार फिर से बनाए जाएंगे. जिससे नगर में आने वाले पर्यटक महाकाल नगरी की प्राचीन परंपरा को जान सकेंगे. आइए जानते हैं ये द्वारा कैसे थे और इसका इतिहास क्या था. क्या कहते हैं इतिहास के जानकार? विक्रम विश्वविद्यालय में पुराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं कि “प्राचीन भारत में गोपुरम की परंपरा रही है. यह एक प्रकार का विशाकाय द्वार होता है. इसका अर्थ होता है ‘मंदिर का द्वार’. दक्षिण भारत के मंदिरों में ये आज भी मौजूद है. 2600 साल पहले उज्जैन एक राजधानी के रूप में हुआ करता था. यह 16 महाजनपदों में से एक अवंती महाजनपद की राजधानी थी, जिसके पहले राजा चंद प्रद्योत थे. उन्होंने अपने शासन काल में उज्जैन क्षेत्र में परिखाये और गोपुरम निर्माण करवाए, बाद में अशोक मौर्य जब राज्यपाल बनकर आए तो उन्होंने उनका जीर्णोद्धार करवाया.” राजा भोज ने बनवाया था चौबीस खंबा प्रवेश द्वार डॉ रमण सोलंकी आगे बताते हैं कि “सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में इस परंपरा को आगे बढ़ाया. इसके अलावा परमारों के सम्राट राजा भोज ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई द्वारों का निर्माण कराया. राजा भोज द्वारा बनवाया गया चौबीस खंबा प्रवेश द्वार आज भी मौजूद है. इस पर देवी महामाया और देवी महालया विराजमान हैं. महाकाल के द्वारा का कराया जाएगा जीर्णोद्धार  मुगल शासक अकबर ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दानी गेट, सती गेट, केडी गेट बनवाए. अब मोहन यादव इन द्वारों के जीर्णोद्धार और निर्माण कराने जा रहे हैं. इससे 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव फिर से लौटेगा. इससे यहां आने वाले श्रद्धालु महाकाल नगरी के इस सुनहरे इतिहास को जान सकेंगे और देख सकेंगे.” करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है महाकाल का दरबार दरअसल, विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का धाम लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पूर्व का बताया जाता है. ज्योतिर्लिंग होना मतलब स्वयंभू … Read more

इंदौर में हर घर का होगा डिजिटल पता, एक क्लिक से सारी मुश्किलें होगी हल, वार्ड 82 से इसी महीने होगी शुरुआत

इंदौर प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर के नगर निगम ने एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की है। इसके तहत शहर के हर घर को एक डिजिटल पता मिलेगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंगलवार को सिटी बस कार्यालय के सभागार में एक बैठक आयोजित हुई।  डिजिटलाइजेशन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इंदौर नगर निगम ने अब शहर में हर घर को डिजिटल पता देने की तैयारी कर ली है। अब शहर में हर घर को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान दी जाएगी। मकान के बाहर एक शीट चिपकाई जाएगी। इस पर एक खास क्यूआर कोड होगा। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने पर उस मकान से जुड़ी संपत्ति कर, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, कचरा संग्रहण और अन्य सेवाओं की जानकारी मिलेगी। यह व्यवस्था वार्ड 82 में इस माह के अंत तक शुरू हो जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से निगम के अन्य वार्डों में लागू किया जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पिछले वर्ष के निगम बजट में शहर को डिजिटलाइज करने की बात कही थी। इसके बाद से इस बात की कोशिशें चल रही थीं। डिजिटलाइजेशन के अभियान के तहत निगम शहर में हर भवन के बाहर क्यूआर कोड लगाने जा रहा है। पहले चरण में वार्ड 82 में इसकी शुरुआत होगी। मकान के बाहर क्यूआर कोड लगा होने का फायदा निगम और भवन स्वामी दोनों को मिलेगा। कोई भी व्यक्ति क्यूआर कोड को स्कैन कर यह पता लगा सकेगा कि मकान का संपत्तिकर जमा है या नहीं, कचरा संग्रहण कर नियमित जमा हो रहा है या नही। इसी तरह से उक्त पते पर जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी भी क्यूआर कोड से मिल सकेगी। निगम के राजस्व विभाग के अधिकारियों को क्यूआर कोड स्कैन करते ही भवन की जानकारी मिल जाएगी। उन्हें पुराने रिकार्ड साथ नहीं ले जाने पड़ेंगे। पूरे शहर में लागू करने की कोशिश होगी तेज बैठक के दौरान महापौर ने इंदौर नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस योजना को शीघ्र पूर्ण कर पूरे शहर में लागू किया जाए। इस डिजिटल पहल को डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम मानते हुए महापौर ने कहा कि यह शहरवासियों को पारदर्शी, सुलभ और स्मार्ट सेवाएं प्रदान करेगा। हर घर को मिलेगा डिजिटल पता महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, “हमने जो ऐप तैयार किया है, उसके जरिए हर घर का डिजिटल पता सुनिश्चित किया जाएगा। इससे नागरिकों को नगर निगम से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह मिल सके। पहले प्रयास के रूप में, वार्ड 82 में इस योजना को लागू किया जाएगा और हम इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास करेंगे। महापौर ने यह भी बताया कि एप के माध्यम से नागरिक कचरा संग्रहण के लिए गाड़ी को बुला सकेंगे। एक रिक्वेस्ट भेजने पर निगम की टीम घर पर कचरा उठाने के लिए पहुंच जाएगी। हालांकि, कचरा उठाने के लिए शुल्क तय किया जाएगा, जो अभी निर्धारित नहीं किया गया है। मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे     हमने मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाने की तैयारी कर ली है। इस माह के अंत तक वार्ड 82 से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे शहर में मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। निगम की यह पहल शहरवासियों को पारदर्शी, सुलभ और स्मार्ट सेवा प्रदान करेगी। जल्द ही हम एप के माध्यम से कचरा संग्रहण के लिए गाड़ी बुलाने की शुरुआत भी करेंगे। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर  

Wasteकी ताकत!CBG प्लांट से बदलने वाला है ग्वालियर का भविष्य, रोज़ बनेगा CNG और खाद

ग्वालियर  शहर में कचरे से निजात पाने और स्वच्छ वातावरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नगर निगम ग्वालियर द्वारा प्रस्तावित मध्यप्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा वेस्ट आधारित सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट अब केदारपुर डंपसाइड पर स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट को बनाने की लागत करीब 75 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग 5.5 हेक्टेयर भूमि पर तैयार किया जाएगा। प्रोजेक्ट को मिली स्वीकृति ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार ने बताया कि सरकार से इस परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही इसके निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। यह प्लांट शहर में हर दिन निकलने वाले 350 टन गीले और सूखे कचरे को प्रोसेस करेगा। इसमें से गीले कचरे से बायो सीएनजी गैस और खाद तैयार की जाएगी। प्लांट से प्रतिदिन करीब 9 टन बायो सीएनजी गैस का उत्पादन होगा, जिसका उपयोग नगर निगम के वाहनों में किया जाएगा और साथ ही इसे कमर्शियल रूप से भी बेचा जाएगा। इससे नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। सूखे कचरे के लिए बनेगा अलग प्लांट इसके अतिरिक्त, 277 टन सूखे कचरे के लिए भी अलग प्लांट लगाया जाएगा, जिससे प्लास्टिक और अन्य रीसायक्लिंग योग्य सामग्री का निष्पादन किया जाएगा। इस योजना से न केवल शहर को कचरे के ढेर से छुटकारा मिलेगा, बल्कि स्वच्छता अभियान को भी मजबूती मिलेगी। पहले इस प्लांट को चंदुआखुर्द डंपयार्ड में लगाया जाना था, लेकिन भूमि की कमी और स्थानीय विवादों के चलते स्थान बदलकर केदारपुर किया गया है। यह लैंडफिल्ड साईट अब धीरे-धीरे खाली हो रही है, जिससे यहां प्लांट निर्माण संभव हो सका। 2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट यह परियोजना साल 2027 तक पूरी होने की संभावना है। साथ ही डबरा, दतिया और बमौर जैसे आस-पास के क्षेत्रों से भी कचरा लाकर यहां प्रोसेस किया जाएगा। इस सीबीजी प्लांट की स्थापना ग्वालियर को स्वच्छ और हरित शहर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। शासन से स्वीकृति, जल्द होंगे टेंडर ग्वालियर में मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गोबर आधारित बायो सीएनजी प्लांट लगाया गया था, जिससे ना सिर्फ प्रतिदिन 100 टन गोबर का निष्पादन हो रहा बल्कि इससे बन रही 1 टन बायो सीएनजी निगम का राजस्व भी बढ़ा रही है. अब इंदौर के बाद प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीजी प्लांट भी ग्वालियर में स्थापित होने जा रहा है. ग्वालियर नगर निगम ने इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था और इस पर स्वीकृति भी मिल चुकी है. इस प्लांट में प्रतिदिन शहर से इकट्ठा किया 350 टीपीटी (टन प्रति दिन) सूखा और गीला कचरा से बायो सीएनजी गैस और खाद तैयार की जाएगी.  सूखे कचरे के लिए अलग से होगा एक प्लांट शहर में लगने वाले कचरे के ढेर से निजात पाने के लिए ये अच्छा विकल्प नगर निगम ने तैयार किया है. ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि, ”ये प्लांट सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया है इसके साथ ही एक और प्लांट स्थापित किया जाएगा. जिसके जरिए प्रतिदिन 277 टीपीटी सूखा कचरा भी निष्पादित किया जाएगा. ये एक बहतरीन व्यवस्था होगी जिससे शहर में कचरे के जगह जगह लगने वाले ढेरों से छुटकारा मिलेगा और वातावरण साफ सुथरा होगा.” साढ़े 5 हेक्टेयर में बनेगा प्लांट इस प्लांट को तैयार करने के लिए नगर निगम को अच्छी खासी राशि खर्चनी पड़ेगी. अपर आयुक्त की माने तो इस प्लांट को बनाने में करीब 75 करोड़ रुपये की लागत आएगी. पहले वेस्ट बेस्ड सीबीजी प्लांट को तैयार करने के लिए निगम द्वारा चंदुआखुर्द डंप यार्ड में जमीन प्रस्तावित की गई थी. लेकिन यहां जमीन की कमी और स्थानीय विवादों के चलते बदलने का निर्णय किया गया और अब इसे केदारपुर डंपसाइड पर लगाने का निर्णय लिया गया. ये प्लांट लगभग 5.5 हेक्टेयर जमीन पर स्थापित किया जाएगा. क्योंकि ये लैंडफील्ड साइट अब खाली हो रही है. यहां का कचरा धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है. इसलिए इसी जमीन पर नया सीबीजी प्लांट स्थापित किया जाएगा.  आसपास के क्षेत्रों से भी लाया जाएगा कचरा केदारपुर डंप साइड पर लगने वाले इस प्लांट में हर दिन शहर के कचरे के साथ ही डबरा दतिया और बमौर क्षेत्र से भी कचरा लाया जाएगा. यहां गीला और सूखा कचरा अलग अलग किया जाएगा. गीले कचरे का उपयोग बायो गैस बनाने में होगा. इसके बाद जो वेस्ट मटेरियल बचेगा उससे खाद तैयार की जाएगी. माना जा रहा है की 350 टीपीटी (टन प्रति दिन) कचरे से हर दिन लगभग 9 टन बायो सीएनजी गैस तैयार होगी. जिसे नगर निगम के वाहनों में इस्तेमाल करने के साथ ही कमर्शियल तौर पर बेचा जाएगा. जिससे की नगर निगम को राजस्व भी प्राप्त होगा. साल 2027 तक तैयार होगा प्लांट ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार के मुताबिक, ”यह प्लांट अभी पेपरवर्क स्तर पर है. आने वाले एक या दो हफ़्ते में इसके निर्माण के लिए टेंडर भी जारी होने वाले हैं. आने वाले दो से तीन साल में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा. ऐसे में यह प्लांट इस क्षेत्र में नई उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है.”

भोपाल ननि स्वच्छता समाधान केंद्र के तौर पर एक अनोखा कचरा कैफे शुरू होगा, कचरा कैफे से होगा स्वच्छता समाधान

भोपाल शहरी स्वच्छता के लिए जैविक-अजैविक कचरे का मिस्रित ढेर बड़ी चुनौती बना हुआ है। यह नगर निगम के संसाधनों पर बोझ जैसा है। घरों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग करके देने की प्रवृत्ति विकसित नहीं हो पाई है। ऐसे में भोपाल नगर निगम स्वच्छता समाधान केंद्र के तौर पर एक अनोखा कचरा कैफे शुरू करने जा रहा है। भोपाल के अलग-अलग तीन हिस्सों दस नंबर मार्केट की फुलवारी, बिट्टन मार्केट और बोट क्लब पर इसे बनाया जा रहा है। यहां प्लास्टिक, कागज, इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रानिक कचरे के बदले भोजन या खानपान और दैनिक उपयोग का सामान मिलेगा। अगर कोई इसके बदले नकदी लेना चाहे तो यह कैफे बाजार दर से पांच रुपया अधिक कीमत देकर उसे खरीदेगा। उदाहरण के तौर पर अगर एक किलो प्लास्टिक कचरा बाजार में 15 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है तो कचरा कैफे उसे 20 रुपया प्रति किलोग्राम की दर से खरीदेगा।   कचरा कैफे से होगा स्वच्छता समाधान कचरा कैफे नाम के इस स्वच्छता समाधान केंद्र का संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाएं करेंगी। इस कैफे में आने वाले निराश्रित जरूरतमंद अगर थोड़ा-बहुत कचरा भी लाते हैं, तो उन्हें वहां से छोले-चावल जैसे व्यंजन खाने को मिल जाएंगे। इसके अलावा वे कचरे के बदले कैफे में उपलब्ध खानपान और दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीद सकेंगे। इस पहल से “कमाओ और खाओ” की भावना को भी बल मिलेगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि भोपाल में हर महीने करीब 500 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। इसमें 200 टन तो प्रतिबंधित पन्नियां हैं। इलेक्ट्रानिक कचरा और लोहा, सीसा, कागज का कचरा भी बड़ी मात्रा में कचरे के ढेर के साथ पहुंचता है। कचरा संग्रहण और सेग्रिग्रेशन केंद्रों पर इसे अलग करना बड़ा खर्चीला हो जाता है। कचरा कैफे के जरिये यह कचरा अलग-अलग इकट्ठा होगा और वेंडरों के जरिए आसानी से रिसाइकिल या विनष्टीकरण संयंत्रों तक पहुंचा दिया जाएगा। कैफे में इस तरह की वस्तुएं मिलेंगी इस अनोखे कैफे में पका हुआ भोजन और नाश्ता उपलब्ध होगा। इसके अलावा वहां दाल, चावल, आटा, मोटा अनाज, नमक, तेल, अचार, पापड़, बड़ी, नमकीन, बोतलबंद पानी, टेराकोटा, कपड़े, सजावटी सामान और पर्यावरण अनुकूल वस्तुएं भी उपलब्ध होंगी। इनका उत्पादन भी स्व-सहायता समूह ही करेंगे। मोबाइल एप से भी जुड़ पाएंगे लोग इस पहल से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए कचरा कैफे एक मोबाइल एप भी लांच कर रहा है। इससे जुड़े लोग घर बैठे कचरा बेच सकेंगे। कैफे का आरआरआर (रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल) मोबाइल वैन घर पर जाकर कचरा खरीदेगी। इसके बदले विक्रेता को कूपन दिया जाएगा। यह कूपन कैफे लाकर नकद लिया जा सकेगा, या उतनी कीमत की खरीददारी में प्रयोग हो सकेगा। यह केंद्र केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। यह पर्यावरण के प्रति जन जागरुकता, महिला सशक्तीकरण और रोजगार सृजन का भी माडल बनेगा- अंजीता सभलोक, स्वच्छता एंबेसडर, नगर निगम कचरा कैफे की शुरूआत नगर निगम इस महत्वपूर्ण परियोजना पर काम कर रहा है। कचरा कैफे की शुरूआत इसी महीने 10 नंबर मार्केट के फुलवारी और बोट क्लब पर शुरू करने जा रहे हैं। बिट्टन मार्केट में उसके बाद शुरू होगा। हमे उम्मीद है कि इसके जरिए शहर के लोग कचरे के प्रति अधिक जागरूक होंगे- मालती राय, महापौर नगर निगम भोपाल

जल स्रोतों की सफाई के साथ जन समुदाय ने इनके सरंक्षण की ली शपथ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर  प्रदेश में 30 मार्च से शुरू किये गये जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरचनाओं की साफ-सफाई के साथ जन समुदाय में इनके संरक्षण और जल की बचत करने की शपथ ली। अभियान में जन अभियान परिषद के साथ-साथ अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने आगे बढ़कर इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी की। श्रमदान कर तालाब की साफ-सफाई की गई छिन्दवाडा जिले में सामुहिक जनभागीदारी से जल संरक्षण के कार्य लगातार किये जा रहे हैं। जल चौपाल में ग्रामीणों को पानी की बचत के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह की पहल पर जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक संजय बामने के नेतृत्व में ग्राम पंचायत जम्‍बाकिराडी के दुर्गबाड़ा में ग्राम में निर्मित तालाब की ग्रामीणों ने सफाई की। इसी के साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। विकासखंड बिछुआ के सेक्टर क्रमांक-02 खमरा की इंद्रा कॉलोनी में श्रमदान कर सोखता गड्ढा बनाया गया। ग्रामीणों को वॉटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से जल संरक्षण कार्यक्रम में सोखता गड्ढा का निर्माण के महत्व के बारे में बताया गया। नलकूप खनन पर मिला पर्याप्त मात्रा में पानी राजगढ़़ जिले में सरकारी कॉलोनी में भू-जल सर्वेक्षण का कार्य एवं नलकूप का खनन कराया गया। जिसमें 175 फीट पर पर्याप्त मात्रा में पानी मिला। जिले में इतनी कम गहराई पर पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना मुश्किल काम था। भूजलविद् डॉ. नागर ने वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर रजिस्टिविटी मीटर से भू-जल सर्वेक्षण कर शत-प्रतिशत परिणाम दिए। उनके इस प्रयास पर कलेक्‍टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने भू-जल सर्वेक्षण कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हम जिले में जितने अधिक पानी रिचार्ज के प्रयास करेंगे हमारे सुनहरे भविष्य के लिये उतना ही अच्छा है। जल संरक्षण के लिए बनाए जा रहे डगवेल रिचार्ज सीहोर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में लगातार गतिविधियों आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में ग्राम कराड़िया भील एवं नयापुरा सहित अनेक ग्रामों में डगवेल रिचार्ज का निर्माण कराया जा रहा है जिससे वर्षा के अधिक से अधिक जल का संरक्षण किया जा सके। जिले में आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए दीवार लेखन, जागरूकता रैली, पोस्टर बैनर, रंगोली, ग्राम सभाएं, कलश यात्राएं, शपथ सहित अनेकों गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित खेत, तालाब, अमृत सरोवर, परकोलेशन टैंक, डगवेल, तालाब जीर्णोद्धार, जनभागीदारी के कार्य, कूप एवं बाउंड्री मरम्मत के कार्य किए जा रहे हैं। जिले में समाज की भागीदारी से जल संरचनाओं के निर्माण, भूजल संवर्धन, पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं की साफ सफाई और जीर्णोद्धार किया जा रहा है। पूरन तालाब पर किया गया सामूहिक श्रमदान रायसेन जिले में बारिश के जल को सहेजने के लिए 30 जून तक चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में रायसेन के पूरन तालाब पर सामूहिक श्रमदान और पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री यशवंत मीणा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सविता सेन, कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक श्री पंकज पाण्डे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा सामूहिक श्रमदान कर पूरन तालाब के घाटों की सफाई की गई। इसके बाद घाटों के किनारे पर पौधरोपण किया गया। जल संरक्षण के लिये की गई अनेक गतिविधियां ग्वालियर जिले में जल संरक्षण के लिये ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। जिले में खेत तालाब, डगवैल रीचार्ज, अमृत सरोवर के साथ-साथ नदियों, तालाबों और ऐतिहासिक कुँए, बावड़ियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। नगरीय क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कुँए, बावड़ियों की साफ-सफाई एवं संरक्षण का कार्य हाथ में लिया गया है। ग्वालियर की ऐतिहासिक मुरार नदी के बहाव क्षेत्र से भी बड़ी मात्रा में बाधाओं को दूर करने का कार्य किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में 907 खेत तालाबों का कार्य हाथ में लिया गया। खेत तालाबों का कार्य तेज गति के साथ किया जा रहा है। इसके साथ ही 846 डगवैल रीचार्ज का काम जिले में किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में 8 अमृत सरोवर में कार्य कर लिया गया है। जिले में लगभग 1393 जल संरचनाओं को ठीक करने का कार्य किया जा रहा है। ग्वालियर शहर की 25 ऐतिहासिक बावड़ियों के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मुरार नदी में भी बहाव क्षेत्र को मुक्त करने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में किए गए कार्यों के माध्यम से वर्षा ऋतु में सभी संरचनाओं में जल संरक्षण होगा और भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होगी।  पिपरिया में हुई तालाब की साफ-सफाई कटनी जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जीर्ण-शीर्ण पेयजल स्रोतों और जल संरचनाओं के रखरखाव के लिये व्यापक साफ-सफाई एवं स्वच्छता के कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सामुहिक श्रमदान से मंदिर के नजदीक तालाब और खेत तालाब की साफ-सफाई की गई। श्रमदान के बाद उपस्थित ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई।  

अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस पर 27 जून को रतलाम में होगा ‘एमपी राइज-2025’

भोपाल  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को राज्य की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार मानते हुए 27 जून को अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस पर रतलाम के शहीद स्मारक मैदान में ‘रीजनल इंडस्ट्री, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट कॉन्क्लेव’ – “एमपी राइज-2025’’ का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रदेश में औद्योगिक निवेश, कौशल विकास और स्वरोजगार को एक साथ संवर्धित करने का समग्र मंच प्रस्तुत करेगा। इस समेकित पहल से मध्यप्रदेश में निवेश, कौशल विकास और स्वरोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे और राज्य की आर्थिक प्रगति को स्थाई व समावेशी दिशा मिलेगी। प्रदेश में औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। तीन नए हवाई अड्डों के निर्माण के साथ मध्यप्रदेश अब आठ परिचालन एयरपोर्ट्स वाला राज्य बन गया है। इंदौर मेट्रो सेवा ने यातायात के स्वरूप को बदल दिया है, वहां भोपाल मेट्रो के शीघ्र प्रारंभ से राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और भी सुदृढ़ होगा। फ्लायओवर, औद्योगिक कॉरिडोर तथा राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के विकास से कनेक्टिविटी व्यापक रूप से सुदृढ़ हुई है, जिससे उद्योगों और निवेशकों को बेहतर सुविधा और त्वरित पहुंच सुनिश्चित हो सकी है। एमपी राइज-2025 कॉन्क्लेव में औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन एवं औद्योगिक पार्कों तथा कौशल प्रशिक्षण केंद्रों का लोकार्पण होगा। साथ ही विभागों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि एमओयू के माध्यम से निवेश प्रस्तावों को तेजी से कार्यान्वित करने की दिशा में प्रतिबद्धता व्यक्त करेंगे। इस अवसर पर चयनित युवाओं को जॉब-ऑफर लेटर प्रदान किए जाएंगे तथा महिला उद्यमियों और ग्रामीण स्वरोजगार समूहों को प्रारंभिक पूंजी सहायता वितरित की जाएगी, जिससे वे अपनी व्यवसायिक योजना को तुरंत अमल में ला सकें। कॉन्क्लेव में नवीनतम तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी और हितग्राहियों के साथ संवाद किया जाएगा। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट एवं GI टैग वाले स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी में प्रत्येक जिले के प्रतिष्ठित उत्पाद का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय नवाचार और गुणवत्ता को व्यापक पहचान मिलेगी। वन-टू-वन सत्रों में प्राइवेट सेक्टर, तकनीकी संस्थान एवं वित्तीय समूह मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निवेश व सहयोग के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। रतलाम के बाद एमपी राइज-2025 कॉन्क्लेव छिंदवाड़ा, मुरैना और सतना में भी होगा। कॉन्क्लेव से प्रदेश के प्रत्येक जिले को उसकी विशिष्ट औद्योगिक पहचान के अनुरूप विकास के समान अवसर मिलेंगे।  

उच्च शिक्षा संस्थानों में 5 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए कराया पंजीयन

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत महाविद्यालयों में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में सत्र 2025-26 की प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम चरण में अब तक लगभग 1 लाख 33 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त किया है। इनमें एनसीटीई पाठ्यक्रमों में लगभग 14 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त किया है। स्नातक के लिए लगभग 90 हजार एवं स्नातकोत्तर के लिए लगभग 30 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है। कुल 1 लाख 20 हजार विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अपना प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत पिछले वर्ष सत्र 2024- 25 प्रथम चरण में स्नातक एवं स्नातकोत्तर में 96 हजार विद्यार्थियों एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में लगभग 11 हजार, इस प्रकार कुल 1 लाख 7 हजार विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया था। पिछले वर्ष की तुलना में सभी पाठ्यक्रमों में प्रथम चरण में प्रवेश संख्या में वृद्धि हुई है। द्वितीय चरण के पंजीयन के लिए बुधवार अंतिम तिथि थी, पंजीयन के अंतिम दिन शाम 6 बजे तक लगभग एक लाख विद्यार्थियों ने पंजीयन कर लिया है। इसमें स्नातक में लगभग 55 हजार, स्नातकोत्तर में 23 हजार, एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में लगभग 20 हजार विद्यार्थियों ने द्वितीय चरण में पंजीयन कराया है। अब तक कुल 5 लाख 15 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए पंजीयन कर लिया है। पिछले वर्ष दोनों चरणों में कुल 3 लाख 50 हजार विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। पिछले वर्ष की तुलना में इस सत्र में लगभग 2 लाख अधिक रजिस्ट्रेशन हुए हैं।  

फॉलन आउट हुए अतिथि विद्वानों को शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग में शासकीय महाविद्यालयों में नियमित पदस्थापना और स्थानांतरण से पदपूर्ति होने के फलस्वरूप फॉलन आउट होने वाले अतिथि विद्वानों को पोर्टल पर रिक्त पदों के विरूद्ध विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। आयुक्त उच्च शिक्षा ने उक्त आदेश जारी किए हैं। ऐसे अतिथि विद्वान जो नियमित पदस्थापना/स्थानांतरण से पदपूर्ति होने के फलस्वरूप फॉलन आउट हुये है तथा संबंधित पदों पर कार्य करने के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विनियम 2018 एवं समय-समय पर किये गये संशोधन पर उल्लेखित मापदण्डों के अनुरूप वांछित योग्यता धारक हैं, उनके लिए पोर्टल पर विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा उपलब्ध है। उच्च न्यायालय द्वारा दो प्रकरणों में पारित अंतरिम निर्णय के पालन में नियमित पदस्थापना/स्थानांतरण से पदपूर्ति होने के फलस्वरूप फॉलन आउट हुए ऐसे अतिथि विद्वान जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा संबंधी विनियम 2018 एवं समय-समय पर किये गये संशोधन पर उल्लेखित मापदण्डों के अनुरूप वांछित योग्यता धारक नहीं है, उनके लिए भी पोर्टल पर विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा उपलब्ध है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मैरिट में आने की स्थिति में महाविद्यालय का आवंटन एवं महाविद्यालय में आमंत्रण उपरोक्त न्यायालयीन प्रकरणों में पारित अंतिम निर्णय के अध्याधीन रहेगा।

लव जिहाद के लिए फंडिंग करता था पार्षद, बाणगंगा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया

इंदौर हिंदू युवतियों के शोषण के लिए फंडिंग करने वाले कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी की सरगर्मी से तलाश जारी है। बाणगंगा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। आरोपित के संभावित ठिकानों पर दबिश जारी है।   वार्ड-58 का पार्षद है कादरी बाणगंगा पुलिस के मुताबिक आरोपित अल्ताफ और साहिल की गिरफ्तारी पर अनवर कादरी का नाम सामने आया है जो भिश्ती मोहल्ला का रहने वाला है। कादरी वार्ड-58 का पार्षद है। उसकी पत्नी भी पार्षद रह चुकी है। टीआइ सियाराम सिंह गुर्जर के मुताबिक अनवर को साजिश का आरोपित बनाया है। 3 लाख रुपये की आर्थिक मदद आरोपितों ने बताया कि उसने 3 लाख रुपये की आर्थिक मदद की थी।उसने कहा था कि हिंदू युवतियों से विवाह करो और उन्हें देह व्यापार में धकेलो। टीआइ के अनुसार आरोपित की तलाश की मगर वह घर से फरार हो गया। बुधवार को उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। अनवर के विरुद्ध 19 मामलें दर्ज है। कई गंभीर धाराओं में दर्ज है आरोपी वह पूर्व में मदीना नगर(आजादनगर) में रहता था। पहला अपराध 1997 में संयोगितागंज थाने में मारपीट का दर्ज हुआ है। इसके बाद उसके विरुद्ध संयोगितागंज, सदर बाजार, चंदननगर, महाकाल थाना उज्जैन, खजराना, जूनी इंदौर, सराफा में लूट, हत्या की कोशिश, बलवा, नगर निगम एक्ट सहित कईं गंभीर धाराओं में दर्ज हो चुके है।

यह स्मृति वन दादा गुरु के तप को समर्पित है- मंत्री पटेल

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दादा गुरू जी के निराहार 1705 वें दिन जरारूधाम में स्वागत वंदन किया। दादागुरू ने दमोह के जरारूधाम में वृक्षों एवं भगवान शंकर का पूजन किया। गौ-अभ्यारण जरारूधाम में नर्मदाखंड सेवा संस्थान ने आज दादागुरू के निराहार 1705 दिन होने पर 1705 पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर पशुपालन, डेयरी विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल, विधायक बण्डा वीरेन्द्र सिंह लम्बरदार, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटैल, पूर्व विधायक प्रदुम्न सिंह लोधी, नर्मदाखंड सेवा संस्थान के अध्यक्ष नरेन्द्र बजाज सहित बड़ी संख्या जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पत्रकार और नागरिक मौजूद थे। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि यह एक सुखद संयोग है, मॉ नर्मदा के अनन्य भक्त दादा गुरू को माँ नर्मदा के जल पर 1700 दिन पूरे हो गए, कल 1705 दिन होंगे, उस उपलक्ष्य में स्वयं दादा गुरु दमोह के जरारू धाम पधारे हैं। दादा गुरु के दर्शन हुये, ऐसी दिव्यमूर्ति जो लगभग 5 साल से मॉ नर्मदा के जल पर है और जितना वह तेजी से चलते हैं, जरारूधाम पुण्यभूमि का तप है, इस दौरान यहॉ आये। मंत्री श्री पटेल ने कहा जरारूधाम में प्रतिवर्ष तीन बार पौधरोपण करते है। इस बार निमित्त है दादागुरु के 1705 दिन जल पर हुए हैं, शायद इतिहास में कभी कोई ऐसी प्रतिमूर्ति अभी तक ज्ञात नहीं है, जब उनके 1700 दिन पूर्ण हुए। आज 1705 पौधों का रोपण हो रहा है, यह स्मृति वन दादा गुरु के तप को समर्पित है, जरारुधाम की तपस्थली में तपस्वी पधारे और उनकी स्मृति में हम सब शामिल है, सभी ने पौधों का रोपण किया है, पहले हमने 10,000 पौधे लगाये थे। आज के दिन 1705 पौधे दादा गुरु की तपस्या की स्मृति में उनको समर्पित है इसलिए आज सभी बेटे-बेटियों, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों सबका मैं आभार व्यक्त करता हूँ। दादा गुरू ने कहा जिस प्रकार मठ की शोभा मूर्ति से होती है, वैसे ही हमारे ग्राम, नगर की जीवंतता पेड़-पौधो से है, जैसे मठ में मूर्ति की स्थापना की और पत्थर में हमने भगवान, ईश्वर और परात्मा को पाया, अब वक्त आ गया है, अब पेड़-पौधो में भी भगवान को देखना शुरू कर दो तब ही यह संरक्षित हो पायेगा, तब ही यह सार्थक हो पायेगा। यह पेड़ नही लगाया हमने स्वयं परात्मा की जीवंत मूर्ति को स्थापित किया है। मां नर्मदा के भक्त दादा गुरू ने कहा जरारूधाम को हम सिद्व क्षेत्र और आदि तीर्थ भी हम कह सकते है, जरारूधाम गौ अभ्यारण्य मतलब शक्तियों का प्रत्यक्ष रूप जैसे कि रामचरित्र मानस के सुंदरकांड में जरारू का बहुत अच्छा सूत्र है, जो ईश्वर की शक्ति की सगुण उपासना इसी प्रकार जरारूधाम में शक्ति सगुण है, हमने शक्तियों को प्रत्यक्ष पाया है, जरारूधाम में जल के रूप में भी शक्ति है, यदि कोई वृक्ष की पूजा या प्रणाम भी कर रहा है, तो वह ईश्वर की शक्ति की सगुण उपासना कर रहा है, जरारूधाम तीर्थक्षेत्र में चाहे गौ के रूप में हो या चाहे देवगंगा के रूप में हो यहॉ दो शक्तियॉ प्रत्यक्ष रूप में मिल जायेगी विचरण करते हुए हम इस माटी को भी मॉ के रूप में देखते है, यह माटी, धरा साधारण नही है, यह देवधरा और देवभूमि भी कह सकते है, यहॉ पर आने का और सेवा करने का सौभागय मिल जाये तो समझ लेना सहस्त्र कोटि का यज्ञ हो गया है। पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री श्री लखन पटेल ने कहा मैं जब यहाँ आया तो मुझे लगा कि जरारूधाम तो बिल्कुल बदल गया। हम लोग पहले भी आया करते थे तो पेड़ के नाम पर कुछ भी नहीं था सिर्फ पत्थर ही पत्थर थे और आज सघन जंगल दिख रहा है, यह श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी की सोच और यहाँ के लोगों का समर्पण का परिणाम है, पिछले साल भी हम लोगों ने बहुत सारे पौधे लगाए थे जो बहुत अच्छी स्थिति में हैं और आज जो 1705 पौधे लगाए जा रहे हैं, यह भी आने वाले 2- 3 साल में जंगल में तब्दील हो जायेगे तो सारे फलदार पौधे हैं तो निश्चित रूप से यहाँ लोगों को लाभ मिलेगा।  

विशेष समर कैंप 2025: ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर का समापन

भोपाल तात्या टोपे स्टेडियम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर-2025 “विशेष समर कैंप” का बुधवार को समापन हुआ। इस अवसर पर विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।  खेल संचालक श्री राकेश गुप्ता ने कहा कि शिविर राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए एक सशक्त मंच साबित हुआ है, जहाँ उन्हें केवल खेल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि बौद्धिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास के भी समग्र अवसर प्रदान किए गए। कार्यक्रम में खिलाड़ी, खेल अधिकारी व अभिभावक गण उपस्थित थे। नवाचार से सुसज्जित शिविर: खेल प्रशिक्षण को नया दृष्टिकोण खेल संचालक श्री गुप्ता ने बताया कि पारंपरिक ग्रीष्मकालीन खेल शिविर को इस वर्ष एक नवाचारपूर्ण स्वरूप दिया गया। पहली बार “ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर-2025” को नवीन प्रारूप में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य केवल खेल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व विकास और मानसिक सशक्तिकरण पर भी विशेष बल दिया गया। खेल संचालक श्री गुप्ता ने बताया कि इस शिविर में विद्यार्थियों को व्हॉलीबॉल, जिम्नास्टिक, जूडो, ताईक्वांडो, बॉक्सिंग, कबड्डी, तलवारबाजी, कराते, मल्लखम्ब, टेबल टेनिस, स्केटिंग, कुश्ती, लॉन टेनिस, बैडमिंटन, फुटबॉल, बास्केटबॉल, एरोबिक, स्क्वैश, एथलेटिक्स और शूटिंग (राइफल/पिस्टल) का व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही खिलाड़ियों के लिए योग, ध्यान, नेतृत्व कार्यशालाएं, संवाद सत्र और नैतिक शिक्षा जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं, जो उन्हें एक सशक्त, संतुलित और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में कारगर सिद्ध होंगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को किया गया सम्मानित “ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर-2025” के समापन समारोह में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बालक-बालिकाओं को सम्मानित किया गया। बास्केटबॉल में कुशाल भट्ट व जेसिका जाटव, कराते में वेदांत लखेरा व समायरा शेख, फुटबॉल में नितिन गौर व तनु परिहार, बॉक्सिंग में श्लोक व दीक्षा सेन, कबड्डी में कनिश जोशी व पलक राजपूत, ताइक्वांडों में राकेश शाक्य व अक्षरा वारे, स्केटिंग में आदित्य यादव व हर्षिता कुशवाहा, फेंसिंग में मुकेश साहू व वंशिका पवार, टेबल टेनिस में सुर्यांश ठाकुर व भाव्यश्री, जूडो में बाबा विश्वकर्मा व नंदनी फरकिया, बेडमिंटन में वेदान्य सेन व अन्नया शर्मा, लॉन टेनिस में अमृत भुरतेल व निकिता यादव, मल्लखम्ब में मयंक सेन व दीवा अरूण भारद्वाज, एथलेटिक्स में सत्यम गौर व नंदिनी चौहान, व्हॉलीबॉल में अक्षत पटेल व अंशिका रघुवंशी, कुश्ती में राज प्रजापति व रिषिका यादव, जिम्नास्टिक में मोहक परमार व अदवीका चौहान तथा वेटलिफ्टिंग में विशाल यादव व जया गोस्वामी को पुरस्कृत किया गया। शिविर के लिये 1 लाख से अधिक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शिविर में सहभागिता के लिये प्रदेशभर से 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने MYMP पोर्टल (www.merayuva.mp.gov.in) पर ऑनलाइन पंजीयन किया। पंजीकृत विद्यार्थियों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की गई है, जिसका उपयोग भविष्य में खेल प्रतिभा खोज, अकादमी चयन और अन्य योजनाओं में प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। 

बिजली कंपनियों में नई भर्ती के सफल युवाओं के दस्तावेज परीक्षण 23 जून से

भोपाल  मप्र ऊर्जा विभाग की पूर्व, पश्चिम एवं मध्य तीनों बिजली वितरण कंपनियों और पॉवर मैनेजमेंट कंपनी, ट्रांसमिशन कंपनी, जनरेशन कंपनी के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों के लिए सफल उम्मीदवारों के दस्तावेज परीक्षण 23 जून से होंगे। वर्तमान में कुल 1974 पदों पर सफल युवाओं को सूचना भेज दी गई हैं। इन सफल उम्मीद्वारों को उज्जैन, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सागर इत्यादि रीजनल मुख्यालयों एवं कंपनी मुख्यालयों पर 23 जून से 15 जुलाई तक दी गई तारीख पर दस्तावेज परीक्षण के लिए पहुंचना होगा। बिजली कंपनियों ने ऑन लाइन ली गई परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को निर्धारित रीजनल मुख्यालयों, कंपनी मुख्यालयों पर मूल दस्तावेजों के साथ समय पर उपस्थित होने की अपील की है। दस्तावेजों के परीक्षण के बाद नियुक्ति पत्र एवं पदस्थी के बारे में कार्रवाई की जाना है।  

उमंग कार्यक्रम से 21 लाख छात्र-छात्राओं को मिला फायदा, स्कूल शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से चल रहा है कार्यक्रम

भोपाल  मध्यप्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 21 लाख छात्र-छात्राओं को उमंग कार्यक्रम से फायदा मिला है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में उमंग कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संयुक्त रूप से संचालित कर रहे हैं। उमंग कार्यक्रम शासकीय हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूल में अध्ययनरत किशोर और किशोरियों के जीवन-कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। उमंग कार्यक्रम प्रदेश के 9 हजार 306 शासकीय हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में चल रहा है। इस कार्यक्रम से किशोर-किशोरियों को सामाजिक कुप्रथा बाल विवाह, जेण्डर असमानता, दहेज जैसी बुराइयों के प्रति सजग और संवेदनशील बनाना है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं जैसे आयरन फोलिक टेबलेट, सेनेटरी पैड, स्वास्थ्य जाँच, स्वच्छ एवं सुरक्षित प्रबंधन तकनीक की जानकारी के साथ विद्यालयों को तम्बाखू मुक्त बनाना है। उमंग कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिये 52 राज्य स्तरीय, 427 जिला स्तरीय प्रशिक्षकों को और जिला स्तर पर प्रत्येक स्कूल से 2 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाया जा चुका है। कार्यक्रम में कक्षा-9 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिये उनकी आयु अनुरूप पृथक-पृथक उमंग मॉड्यूल का निर्माण भी किया गया है। मॉड्यूल में यौन उत्पीड़न, कम उम्र में विवाह, घरेलू हिंसा के साथ साइबर सेफ्टी जैसे गंभीर मुद्दों को शामिल किया गया है। उमंग कार्यक्रम के उज्ज्वल मॉड्यूल के अंतर्गत छात्रों में बालिकाओं और महिलाओं के प्रति सम्मान विकसित करने के उद्देश्य से यूएनएफपीए के सहयोग से पोस्टर निर्मित किये गये हैं। यह पोस्टर नारी के प्रति सम्मान की भावना पैदा करने में बहुत ही सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इन मुद्दों को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिये जेण्डर संवेदीकरण पर आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल को भी तैयार किया गया है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अमर नायिका, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर उन्हें आदरपूर्वक श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने मातृभूमि की आजादी के लिए अलख जलाकर तत्कालीन समय में अखंड भारत को जागृत करने का कार्य किया था। शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस के इतिहास में वीरांगना लक्ष्मीबाई का स्वर्णिम अध्याय देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 241 होम-स्टे का किया वर्चुअल लोकार्पण, 16 ग्राम पंचायतों के सरपंच सहित संस्थाओं को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्रामीण पर्यटन आत्मनिर्भरता और आत्म गौरव का प्रभावी माध्यम है। ग्राम स्तर पर पर्यटन गतिविधियों से जहां युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक उन्नति के अवसर उपलब्ध होते हैं, वहीं पर्यटन गतिविधियां, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, तीज-त्योहार-पर्व और खानपान को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सहायक होती हैं। प्रदेश में विकसित हो रहे होम-स्टे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के “अतिथि देवो भव:” के भाव को चरितार्थ करने का माध्यम बन रहे हैं। होम-स्टे संचालनकर्ता और राज्य सरकार का यह प्रयास है कि प्रदेश में आने वाले सभी अतिथि प्रदेश के बारे में सकारात्मक छवि और अच्छी स्मृतियां साथ लेकर जाएं। पर्यटन के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य विभाग आदि समन्वित रूप से इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। भारतीय संस्कृति में तीर्थाटन की परंपरा सदियों से रही है। दुनिया के लोग शौक और आनंद के लिए घर से निकलते हैं, वहां भारत के लोग चारधाम की मोक्ष यात्रा पर निकलते हैं, जहां वे सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए अन्य प्रदेशों की विविध जीवनशैली और परंपराओं से परिचित होते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भारतीय मूल्यों के अनुरूप परस्पर विश्वास की भावना को बढ़ा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल के बावजूद भी देश प्रगति पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण रंग पर्यटन संग राज्य स्तरीय उत्सव को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन के लिए वेबसाइट लॉन्च, प्रदशर्नी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण पर्यटन पर केंद्रित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ग्रामीण रंग पर्यटन संग उत्सव के अंतर्गत विभिन्न जिलों के प्रतिभागियों और संस्थाओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही चाक पर मिट्टी की कलाकृतियां भी बनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन के लिए डेडिकेटेड माइक्रो वेबसाइट लॉन्च की और प्रदेश के विभिन्न गांवों में निर्मित 241 होम-स्टे का वर्चुअल लोकार्पण किया। पर्यटन को बढ़ावा देने हुए एमओयू कार्यक्रम में ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए सिग्निफाइंग और टूरिज्म बोर्ड के बीच 61 गांवों में एलईडी एवं सोलर लाइट्स लगाने के लिए एमओयू का आदान प्रदान किया गया। साथ ही स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी और टूरिज्म बोर्ड के बीच फिल्म निर्माण एवं डिजिटल प्रमोशन के लिए एमओयू और एमपी टूरिज्म बोर्ड एवं एमपीएसईडीसी के बीच एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। टूरिज्म को भी मिलेगा वेलनेस समिट का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही उत्तराखंड की तर्ज पर स्टेट टूरिज्म बोर्ड के माध्यम से पर्यटकों के लिए हेलीकॉप्टर सर्विस शुरू की जाएगी। प्रदेश सरकार ने पर्यटकों के लिए वेलनेस सुविधाएं बढ़ाने के लिए समिट की है। वे यहां आएंगे तो उन्हें वन्य जीव पर्यटन, धार्मिक पर्यटन के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलेंगी। इससे प्रदेश का मेडिकल टूरिज्म बढ़ेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। प्रदेश टूरिज्म बोर्ड अपने दम पर विकास के पथ पर अग्रसर है। टूरिज्म बोर्ड के प्रचार-प्रसार के लिए तैयार की गई फिल्में अद्भुत थीं। नए सिरे से इनके उपयोग के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। मध्यप्रदेश पर्यटन क्षेत्र में भारत ही नहीं दुनिया में शीर्ष स्थान प्राप्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होम-स्टे संचालकों से किया संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होम-स्टे निर्माण में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने वाले नर्मदापुरम, आगर, छतरपुर, निवाड़ी, मुरैना, सीहोर, सीधी और पन्ना सहित 10 जिला कलेक्टरों को सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के 37 जिलों में होम-स्टे निर्मित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाने में सहयोग प्रदान करने के लिए 16 ग्राम पंचायतों के सरपंच और डीएटीसीसी सहित संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छिंदवाड़ा समेत अन्य जिलों के होम-स्टे संचालकों से संवाद भी किया। पर्यटकों की संख्या में हुई 526 प्रतिशत की वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 2020 की तुलना में 2024 में 526 प्रतिशत अधिक पर्यटक आए। ओरछा, खजुराहो के अलावा प्रदेश में कान्हा, पेंच और बांधवगढ़ आने वालों की संख्या बढ़ी है। देश के 5 सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय उद्यानों में यह तीनों स्थान शामिल हैं। देश के राष्ट्रीय उद्यानों में कान्हा को शीर्ष स्थान मिला है। दुनिया में सबसे ज्यादा टाइगर (बाघ) भारत और भारत में सबसे ज्यादा टाइगर मध्यप्रदेश में हैं। यह प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है। प्रदेश में गिद्ध, मगरमच्छ, घड़ियाल सहित कई वन्यप्राणी भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर लगभग 241 होम-स्टे शुरू करना एक अभिनव प्रयास है। बांधवगढ़, कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यानों सहित अन्य जिलों के पर्यटन स्थलों पर होम-स्टे शुरू हो गए हैं। 

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