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जनसुनवाई में बताई समस्या के हल होने पर रामपुराकला के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुच कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर का किया सम्मान

जनसुनवाई में बताई समस्या के हल होने पर रामपुराकला के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुच कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर का किया सम्मान जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याएं,कई प्रतिनिधि मंडलो से की मुलाकात  आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा जिला अंतर्गत पिछली जनसुनवाई में ग्राम रामपुराकला के ग्रामीणों,महिलाओं ने बड़ी संख्या में विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में अपने ग्राम में गम्भीर जल संकट की शिकायत की थी,तभी विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने पीएचई को निर्देशित किया । विधायक के निर्देश पर ग्राम में बोर लगा जिसमे 2 इंची पानी निकला, ग्रामीणों में खुशी छा गई । समस्या के निदान होने पर आज रामपुराकला के ग्रामीण जनसुनवाई में पहुचे ओर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर का ग्राम की ओर से साफा बांध कर स्वागत सम्मान कर आभार व्यक्त किया । प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा एक सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । आज जनसुनवाई में कई विभागों के जैसे आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा। विधायक कार्यालय से जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में प्रशासनिक स्थानांतरण निरस्त कराने,पुलिस विभाग से सम्बन्धित आवेदन,नवीन बोर में मोटर पंप स्थापित कराने,आयुष्मान कार्ड प्राप्त होने वाले लाभ सम्बन्धित आवेदन, आर्थिक सहायता प्रदान करने, आवास की तीसरी किस्त प्रदान कराने,खेत सड़क पहुंच मार्ग निर्माण,नवीन विद्युत कनेक्शन कराने,दुकान में आगजनी होने पर सहायता राशि दिलाने,सड़क निर्माण कराने,ई रिक्शा हेतु आवेदन पत्र पर्याप्त हुए । वही आज ग्रामीण क्षेत्रो के कई प्रतिनिधि मंडलो ने भी विधायक से भेंट की । सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ग्वालियर की लाड़ली बहनाओं ने सौंपा बधाई पत्र

ग्वालियर ग्वालियर की लाड़ली बहनाओं ने ग्वालियर विमानतल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद पत्र भेंट करते हुए कहा कि लाड़ली बहना योजना के माध्यम से आपकी बहनों को बहुत संबल मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रात्रि लगभग 10 बजे दिल्ली से विमान द्वारा ग्वालियर पधारे। विमानतल पर ग्वालियर की लाड़ली बहनाओं ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में लाड़ली बहनाओं के माध्यम से जो महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है, उसकी प्रशंसा की और मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद भी प्रकट किया। इस मौके पर उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर, भाजपा जिला अध्यक्ष शहर जयप्रकाश राजौरिया व ग्रामीण अध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत व पूर्व मंत्री रामनिवास रावत सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने मुख्यमंत्री को ग्वालियर में लाड़ली बहना योजना के क्रियान्वयन के संबंध में बारे में जानकारी दी।  

मंत्री चौहान ने “लैब टू लैंड” को मजबूत करने की घोषणा, वैज्ञानिकों को अब सप्ताह में तीन दिन खेतों में जाना होगा

नई दिल्ली   केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “लैब टू लैंड” पहल को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिकों को अब सप्ताह में तीन दिन अनिवार्य रूप से खेतों में जाकर किसानों के साथ संवाद करना होगा. यह कदम किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने और वैज्ञानिक अनुसंधान को खेतों तक पहुंचने के लिए उठाया गया है. इसके साथ ही, कृषि मंत्री ने स्वयं भी सप्ताह में दो दिन किसानों के बीच जाने की प्रतिबद्धता जताई. उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे निश्चित समय के लिए खेतों में जाएं और किसानों की चुनौतियों का जमीनी स्तर पर आकलन करें. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ये बात कही. उन्होंने कहा की “असली काम खेतों में ही होता है. यदि वैज्ञानिक और अधिकारी केवल प्रयोगशालाओं या कार्यालयों में बैठे रहेंगे, तो हम किसानों की वास्तविक जरूरतों को नहीं समझ पाएंगे. ज्ञान, अनुसंधान और क्षमता के बीच जो अंतर है, उसे हमें पाटना होगा.” यह बयान उन्होंने हाल ही में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के तहत किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद को बढ़ावा देने के संदर्भ में दिया. इस अभियान के तहत, 29 मई से 12 जून 2025 तक देश भर में 2170 वैज्ञानिक टीमों ने 65,000 से अधिक गांवों में 1.08 करोड़ किसानों से मुलाकात की. इस दौरान किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य, और जलवायु-अनुकूल खेती के बारे में जानकारी दी गई. चौहान ने इस अभियान को “लैब टू लैंड” दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर खेतों तक ले जाना है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) वैज्ञानिकों को अब नियमित रूप से किसानों के खेतों में जाना होगा ताकि वे स्थानीय मिट्टी, जलवायु, और फसलों की जरूरतों के आधार पर अनुकूलित सलाह दे सकें. चौहान ने जोर देकर कहा कि यह पहल न केवल किसानों की उत्पादकता बढ़ाएगी, बल्कि वैज्ञानिकों को भी किसानों की व्यावहारिक चुनौतियों से अवगत कराएगी. चौहान ने खुद के बारे में भी बोलते हुए कहा कि वह स्वयं सप्ताह में दो दिन खेतों में बिताएंगे. उन्होंने हाल ही में दिल्ली, पंजाब, गुजरात, और उत्तराखंड जैसे राज्यों में किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना. पिछले दिनों दिल्ली के तीगीपुर गांव में एक “किसान चौपाल” में भी उन्होंने कहा,था कि “किसानों की मेहनत और उत्पादन को समझने के लिए हमें उनके बीच जाना होगा. केवल मंत्रालय में बैठकर स्थिति का सही आकलन नहीं हो सकता.” मंत्री ने कृषि मंत्रालय के अधिकारियों को भी खेतों में जाने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि नीतियां अब कार्यालयों में नहीं, बल्कि खेतों से निकलेंगी. यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाएं और नीतियां किसानों की वास्तविक जरूरतों पर आधारित हों. चौहान ने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच निरंतर संवाद को “विकसित भारत 2047” के लिए आवश्यक बताया. उन्होंने कहा कि, “हमारा मंत्र है ‘एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम’. वैज्ञानिक, अधिकारी, और किसान मिलकर भारत को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे.

सीएनजी गाड़ियों के बाद अब इंदौर नगर निगम 100 इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदेगा

इंदौर इंदौर नगर निगम के द्वारा शहरभर से कचरा समेटने के लिए 900 से ज्यादा गाड़ियों का संचालन किया जाता है, जिनमें से कई पुरानी डीजल गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों पर हर माह करीब 4 करोड़ रुपये का डीजल खर्च होता है। हाल ही में नगर निगम ने सीएनजी गाड़ियां भी खरीदी थीं, लेकिन इनकी लागत भी अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं रही। इसके चलते अब नगर निगम ने बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीदारी की योजना बनाई है। बार बार खराब हो रही डीजल गाड़ियां नगर निगम द्वारा शहर के 85 वार्डों में कचरा उठाने के लिए रोज़ाना बड़ी संख्या में हल्ला गाड़ियां दौड़ाई जाती हैं। इसके साथ-साथ बड़े वाहनों के जरिए बल्क में कचरा भी उठाया जाता है। हालांकि, इनमें से अधिकांश पुरानी डीजल गाड़ियां बार-बार खराब हो जाती हैं, जिससे निगम को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ता है। सीएनजी गाड़ियों के रिजल्ट भी अच्छे नहीं रहे सीएनजी गाड़ियां खरीदी जाने के बाद भी खर्च कम नहीं हुआ और इनकी कार्यक्षमता भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसी कारण निगम ने एक माह पहले 100 इलेक्ट्रिक हल्ला गाड़ियां खरीदी थीं, जिनका संचालन अब विभिन्न वार्डों में कचरा उठाने के लिए किया जा रहा है। इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कार्यक्षमता बेहतर रही है और अब इन्हें धीरे-धीरे डीजल गाड़ियों की जगह दी जा रही है। इसके साथ-साथ इन गाड़ियों के लिए चार्जिंग स्टेशन और वर्कशॉप विभाग में तैयार किए जा रहे हैं। 4 करोड़ रुपए का खर्च डीजल और सीएनजी पर आ रहा नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि हर महीने 4 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च डीजल और सीएनजी पर आता है, जिसे कम करने के लिए अब सौ और इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदी जाएंगी। इन नई गाड़ियों के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं और पुरानी खटारा गाड़ियों को नीलाम करने की भी योजना है।  

बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही पारितोषिक योजना, अब तक पांच उपभोक्ताओं के खाते में पहुंचाई राशि

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही पारितोषिक योजना के तहत बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने पर प्रकरण बनाने एवं राशि वसूली होने पर सूचनाकर्ता को दी जाने वाली 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि में से योजना के संशोधित प्रावधान के अनुसार पांच प्रतिशत राशि का भुगतान संबंधित सूचनाकर्ता को सूचना सही पाए जाने पर जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश के तुरंत बाद किया जाएगा। शेष पांच प्रतिशत राशि का भुगतान पूर्ण वसूली उपरांत किया जा रहा है। इसी क्रम में एक अप्रैल 2025 से अब तक 5 सफल सूचनाकर्ताओं को 11,500 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में जमा कराए गए हैं। साथ ही जांच एवं वसूली की कार्यवाही करने वाले संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि का भुगतान उनके मासिक वेतन में जोड़कर किया गया है।  कंपनी द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया प्रारंभ होने के पूर्व कुल 63 प्रकरणों में पूर्ण राशि का भुगतान प्राप्त होने पर 7 सफल सूचनाकर्ताओं को उनके खाते में 2 लाख 18 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है। कंपनी में कार्यरत नियमित कर्मचारी/ संविदा/ आउटसोर्स कर्मचारी को भी सूचनाकर्ता के रूप में शामिल किया गया है, परंतु उसे सूचना सही पाए जाने एवं जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश की पूर्ण वसूली होने पर एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि विभिन्न परिसरों की जांच एवं जांच के उपरांत बनाये गये पंचनामा के आधार पर आरोपी के विरूद्ध निकाली गयी राशि की वसूली में सभी कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कंपनी ने विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ जांच एवं वसूली के कार्य में सम्मिलित बाह्य स्त्रोत कर्मचारियों को भी पारितोषिक योजना के तहत दी जाने वाली 2.5 (ढाई) प्रतिशत प्रोत्साहन राशि को सभी संबंधितों को समान रूप में दिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि पारितोषिक योजना की पूरी जानकारी जैसे बिलिंग, भुगतान से संबंधित गतिविधियां पूरी तरह से गोपनीय और ऑनलाइन है। अब सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल पर गुप्त रूप से दिए गए प्रारूप में बैंक खाता, पहचान क्र. (आधार अथवा पेन ) देना अनिवार्य है। योजना के अंतर्गत सूचनाकर्ता के संबंध में जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखते हुए, कंपनी मुख्यालय से प्रोत्साहन की राशि सीधे संबंधित सूचनाकर्ता के बैंक के खाते में हस्तांतरित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय, वृत्त स्तर के अधिकारियों को जो शिकायतें प्राप्त होती है, उन शिकायतों पर तत्परता से कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने के लिये कंपनी मुख्यालय के द्वारा सतत रूप से निगरानी भी रखी जा रही है। पोर्टल अथवा उपाय ऐप पर देनी होगी सूचना कंपनी द्वारा योजना में सूचनाकर्ता को निर्धारित शर्तों के अधीन पारितोषिक देने का प्रावधान है। इस राशि की अधिकतम सीमा नहीं है। वर्तमान में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से ऑनलाइन किया गया है तथा कंपनी वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर informer scheme लिंक पर क्लिक करके, सूचनाकर्ता के द्वारा गुप्त सूचना दर्ज की जा सकती है।  उपाय ऐप के माध्यम से भी बिजली चोरी की सूचना दी जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा समस्त नागरिकों के साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाये।  

सभी बांधो के गेट्स का मेंटीनेंस कर उन्हें क्रियाशील स्थिति में रखा जाए: मंत्री सिलावट

विभागीय अधिकारी बांधों का निरीक्षण कर वर्षा पूर्व सुधार कार्य पूर्ण करें- मंत्री सिलावट बाढ़ नियंत्रण कक्ष में 24 घंटे कार्य सुनिश्चित करें : जल संसाधन मंत्री सिलावट सभी बांधो के गेट्स का मेंटीनेंस कर उन्हें क्रियाशील स्थिति में रखा जाए: मंत्री सिलावट विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक संपन्न भोपाल  जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने निर्देश दिए हैं कि विभागीय अधिकारी वर्षा से पूर्व सभी बांधों का निरीक्षण करें एवं वर्षा से पहले ही आवश्यकतानुसार सुधार कार्य कर लिए जाएं। सभी बांधो के गेट्स का मेंटीनेंस कर उन्हें क्रियाशील स्थिति में रखा जाए। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा आदि उपस्थित थे। क्षेत्रीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मिलित हुए। बैठक में आगामी मानसून पूर्व तैयारियों एवं विभाग द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम की समीक्षा की गई। प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा द्वारा वर्षा ऋतु से पूर्व बांधों की सुरक्षा और संभावित आपदा स्थितियों से निपटने संबंधी विभागीय योजना एवं विभाग द्वारा किए गए जल संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी गई। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर 24 घंटे क्रियाशील किया जाए। निरीक्षण दल गठित कर नियमित मॉनीटरिंग हो और वर्षा काल के दौरान कोई भी अधिकारी बगैर सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय न छोड़े। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि वर्षा काल में जब भी डैम से पानी छोड़ने की स्थिति बने जिले के सभी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं को अग्रिम सूचना दे दी जाए। जिन स्थानों पर पानी छोड़ा जा रहा है वहां जन सामान्य को पर्याप्त समय पूर्व पानी छोड़ने की सूचना अनिवार्य रूप से दी जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि विभागीय मैन्युअल के अनुसार वर्षा पूर्व निरीक्षण प्रतिवेदन विभागीय पोर्टल पर दर्ज किए जाएं और भारत सरकार द्वारा लागू डैम सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत चिन्हित राज्यों के बांधों से संबंधित प्रतिवेदन भी समय पर भारत सरकार के पोर्टल पर दर्ज किए जाएं। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि विभाग द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम को आगामी 14 दिनों में पूर्ण गति से क्रियान्वित किया जाए और कार्यक्रम की समाप्ति के 3 दिवस पश्चात विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। सिलावट ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वर्षा पूर्व अधिकतम कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जून को अत्याधुनिक तारामंडल का करेंगे लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव योग दिवस 21 जून को “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परम्परा” पर उज्जैन में राष्ट्रीय कार्यशाला का करेंगे शुभांरभ उज्जैन स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला में आयोजित होगी कार्यशाला अत्याधुनिक तारामंडल का करेंगे लोकार्पण उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 21 जून को “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला, उज्जैन में करेंगे। कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे। इस दौरान अनेक शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें योग शिविर, शून्य छाया अवलोकन, साइंस शो, स्टेम वर्कशॉप, व्याख्यान एवं परिचर्चा प्रमुख हैं। कार्यशाला भारतीय खगोलशास्त्र की परंपरा और उसकी वैज्ञानिक प्रासंगिकता पर केंद्रित होगी। विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यशाला में खगोल विज्ञान के साथ-साथ भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा। कार्यशाला का आयोजन म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, भोपाल, विज्ञान भारती, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी भोपाल एवं वीर भारत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पद्मडॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से शून्य छाया अवलोकन करेंगे। साथ ही आचार्य वराहमिहिर न्यास एवं अवादा फाउंडेशन द्वारा निर्मित अत्याधुनिक तारामंडल का लोकार्पण भी करेंगे। इस दौरान तारामंडल-शो का प्रदर्शन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वेधशाला स्थित ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन-सत्र को संबोधित करेंगे। परिचर्चा सत्र में खगोल विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा अवादा फाउण्डेशन के आर्थिक सहयोग एवं डीप स्काई प्लेनेटेरियम, कोलकाता के तकनीकी सहयोग से आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा ग्राम डोंगला में अत्याधुनिक डिजीटल तारामंडल की स्थापना की गई हैं। तारामण्डल की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण अंचल के आमजन एवं स्कूली बच्चों में खगोल विज्ञान संबंधी जानकारी एवं प्राकृतिक घटनाओं संबंधी जिज्ञासा शांत करना है। इस तारामण्डल में 8 मीटर व्यास के एफ.आर.पी. डोम में ई-विजन 4 के डिजीटल प्रोजेक्टर एवं डिजीटल साउण्ड सिस्टम लगाया गया हैं। इस वातानुकूलित गोलाकार तारामण्डल में 55 लोग एक साथ बैठकर आकाशीय रंगमंच की हैरतअंगेज और जिज्ञाशावर्धक ब्रह्मांड में होने वाली घटनाओं का रोमांचक अनुभव एवं आनन्द ले सकेंगे। इस तारामण्डल की लागत लगभग 1.6 करोड़ रूपयें हैं। वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला : मध्य भारत में खगोल विज्ञान अनुसंधान का अग्रणी केंद्र उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील स्थित ऐतिहासिक ग्राम डोंगला से कर्क रेखा गुजरती है। प्राचीन काल से ही खगोल और ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा ग्राम डोंगला में वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना, भूमि चयन से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष योगदान रहा है। इस वेधशाला की स्थापना में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बैंगलोर और आर्यभट्ट प्रशिक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। वेधशाला में 5 मीटर डोम में स्थापित 20 इंच का आधुनिक टेलीस्कोप अनुसंधान और खगोल वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। यह सुविधा प्रदेश और देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन और अनुसंधान का मंच प्रदान कर रही है। यहाँ खगोल विज्ञान पर आधारित विंटर स्कूल का आयोजन होता है और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” योजना के अंतर्गत अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी इस वेधशाला का भ्रमण कर रहे हैं। हाल ही में इस टेलीस्कोप को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर के सहयोग से ऑटोमेशन की सुविधा प्रदान की गई है। यह नई शिक्षा नीति और राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप एक ऐतिहासिक पहल है। इससे सुदूर अंचलों के विद्यार्थी भी ऑनलाइन माध्यम से वेधशाला से जुड़ सकेंगे। डोंगला में ही स्थापित पद्मडॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, जो प्राचीन खगोलीय यंत्रों पर केन्द्रित है, इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान के समन्वय के रूप में डोंगला को “डोंगला मीन टाइम (DMT)” की अवधारणा के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह प्रयास एक ऐतिहासिक पहल है। देश के वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद होंगे शामिल कार्यशाला में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, भारतीय ज्ञान प्रणाली भारत सरकार नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. गंटी एस. मूर्ति, राष्ट्रीय नवप्रर्वतन प्रतिष्ठान गांधीनगर के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रजेश पांडे, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एन. पी. शुक्ला, डेक्कन विश्वविद्यालय पुणे के पूर्व कुलपति एवं सीएसआईआर भटनागर फेलो, सीसीएमबी हैदराबाद डॉ. वसंत शिंदे, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन के अध्यक्ष हेमंत भवालकर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, अवादा फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती रितु पटवारी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक सहित अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद शामिल होंगे।  

महाकाल की नगरी उज्जैन में बन रहा महाकाल-संस्कृति वन, लगेंगे 30 हजार पौधे, योग-ध्यान केंद्र होगा तैयार

उज्जैन  PM मोदी की पहल पर गुजरात में स्थापित संस्कृति वन की तर्ज पर उज्जैन में भी एक भव्य महाकाल संस्कृति वन का निर्माण किया जा रहा है। यह वन 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इसे कोठी रोड पर बनाया जा रहा है। इस वन के निर्माण के साथ पर्यावरण और संस्कृति को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि आने वाले लोग न केवल प्रकृति से जुड़ सकें, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध हो सकें। संस्कृति वन का निर्माण महाकाल संस्कृति वन को कुल 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस वन में 30 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें औषधीय पौधों का भी समावेश है। यहां नीम, करंज, बरगद, सिंदूर, बेल, पाम, चंदन, बादाम और कदम जैसे पौधे लगाए गए हैं। यह वन केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के भी प्रतीक बनेगा। इस वन में योग केंद्र भी बनाया जाएगा, जहां लोग ध्यान और योग का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा, अवंतिका नगरी का इतिहास दर्शाने के लिए राजा विक्रमादित्य की सिंहासन बत्तीसी का भी निर्माण किया जा रहा है। यह वन धार्मिक यात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का एक अनूठा केंद्र बनेगा। महाकाल संस्कृति वन में कुल 8 ब्लॉक्स होंगे, जिनका नाम कालिदास वन, शांति वन, जैव विविधता वन, नवग्रह वाटिका, सिंदूर वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका जैसे आकर्षक नामों से रखा जाएगा। विक्रम टीले और सिंहासन बत्तीसी उज्जैन के महाकाल संस्कृति वन में सम्राट विक्रमादित्य की भव्य सिंहासन बत्तीसी का दर्शन भी होगा। विक्रम टीला भी यहां विशेष रूप से सुसज्जित किया जा रहा है, जहां फूलों से सुसज्जित एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अनूठा होगा। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में एक स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपए की लागत से इस सिटी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़के, अंडरग्राउंड लाइटिंग, हॉस्पिटल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे और सड़कों के बीच डिवाइडर जैसी सुविधाएं होंगी। यह स्थायी कुंभ सिटी सिंहस्थ कुम्भ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगी। सिंहस्थ से पहले एलिवेटेड ब्रिज की सौगात सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को दो एलिवेटेड ब्रिज भी मिलेंगे, जिनकी मंजूरी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी है। ये ब्रिज नागपुर की तर्ज पर बनाए जाएंगे और इस सड़क मार्ग को चौड़ा करेंगे, जिससे तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम हो सकेगी। महाकाल संस्कृति वन के अन्य आकर्षण महाकाल संस्कृति वन में सप्त सागरों के आसपास 84 शिवलिंग स्थापित किए जाएंगे, जिनकी परिक्रमा की जा सकेगी। इसके अलावा, यहां फूल घाटी, विद्या वाटिका, कालिदास अरण्य, नक्षत्र वाटिका, और चरक वाटिका जैसे अनेक आकर्षक स्थान होंगे। इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण की 64 कलाओं का भी यहां दर्शन किया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं और सुविधाएं महाकाल संस्कृति वन में कैफेटेरिया, पार्किंग, व्हीलचेयर और ग्रीन शेड जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, वन में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। वन विभाग जल्द ही अहमदाबाद जाकर वहां के संस्कृति वन की स्टडी करेगा, ताकि यहां भी उसी मॉडल पर काम किया जा सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा एक नया रूप  महाकाल संस्कृति वन उज्जैन का एक अद्भुत और अनूठा धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। यह वन न केवल पर्यटकों को धार्मिक अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इस वन के साथ उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को एक नया रूप मिलेगा और यह स्थान तीर्थ यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन जाएगा। उज्जैन का फिर से लौटेगा प्राचीन वैभव, मोहन यादव की इच्छानुसार महाकाल क्षेत्र के सभी गेटों का किया जाएगा जीर्णोद्धार. डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव अब महाकाल की नगरी उज्जैन में लौटने जा रहा है. प्राचीनकाल में बाबा महाकाल की नगरी में प्रवेश द्वार की परंपरा रही है. जिसका जीर्णोद्धार अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में प्रशासन कराने जा रहा है. उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय में उज्जैन में जिस तरह के प्रवेश द्वारा हुआ करते थे, उसी तरह के द्वार फिर से बनाए जाएंगे. जिससे नगर में आने वाले पर्यटक महाकाल नगरी की प्राचीन परंपरा को जान सकेंगे. आइए जानते हैं ये द्वारा कैसे थे और इसका इतिहास क्या था. क्या कहते हैं इतिहास के जानकार? विक्रम विश्वविद्यालय में पुराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं कि “प्राचीन भारत में गोपुरम की परंपरा रही है. यह एक प्रकार का विशाकाय द्वार होता है. इसका अर्थ होता है ‘मंदिर का द्वार’. दक्षिण भारत के मंदिरों में ये आज भी मौजूद है. 2600 साल पहले उज्जैन एक राजधानी के रूप में हुआ करता था. यह 16 महाजनपदों में से एक अवंती महाजनपद की राजधानी थी, जिसके पहले राजा चंद प्रद्योत थे. उन्होंने अपने शासन काल में उज्जैन क्षेत्र में परिखाये और गोपुरम निर्माण करवाए, बाद में अशोक मौर्य जब राज्यपाल बनकर आए तो उन्होंने उनका जीर्णोद्धार करवाया.” राजा भोज ने बनवाया था चौबीस खंबा प्रवेश द्वार डॉ रमण सोलंकी आगे बताते हैं कि “सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में इस परंपरा को आगे बढ़ाया. इसके अलावा परमारों के सम्राट राजा भोज ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई द्वारों का निर्माण कराया. राजा भोज द्वारा बनवाया गया चौबीस खंबा प्रवेश द्वार आज भी मौजूद है. इस पर देवी महामाया और देवी महालया विराजमान हैं. महाकाल के द्वारा का कराया जाएगा जीर्णोद्धार  मुगल शासक अकबर ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दानी गेट, सती गेट, केडी गेट बनवाए. अब मोहन यादव इन द्वारों के जीर्णोद्धार और निर्माण कराने जा रहे हैं. इससे 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव फिर से लौटेगा. इससे यहां आने वाले श्रद्धालु महाकाल नगरी के इस सुनहरे इतिहास को जान सकेंगे और देख सकेंगे.” करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है महाकाल का दरबार दरअसल, विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का धाम लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पूर्व का बताया जाता है. ज्योतिर्लिंग होना मतलब स्वयंभू … Read more

इंदौर में हर घर का होगा डिजिटल पता, एक क्लिक से सारी मुश्किलें होगी हल, वार्ड 82 से इसी महीने होगी शुरुआत

इंदौर प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर के नगर निगम ने एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की है। इसके तहत शहर के हर घर को एक डिजिटल पता मिलेगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंगलवार को सिटी बस कार्यालय के सभागार में एक बैठक आयोजित हुई।  डिजिटलाइजेशन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इंदौर नगर निगम ने अब शहर में हर घर को डिजिटल पता देने की तैयारी कर ली है। अब शहर में हर घर को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान दी जाएगी। मकान के बाहर एक शीट चिपकाई जाएगी। इस पर एक खास क्यूआर कोड होगा। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने पर उस मकान से जुड़ी संपत्ति कर, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, कचरा संग्रहण और अन्य सेवाओं की जानकारी मिलेगी। यह व्यवस्था वार्ड 82 में इस माह के अंत तक शुरू हो जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से निगम के अन्य वार्डों में लागू किया जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पिछले वर्ष के निगम बजट में शहर को डिजिटलाइज करने की बात कही थी। इसके बाद से इस बात की कोशिशें चल रही थीं। डिजिटलाइजेशन के अभियान के तहत निगम शहर में हर भवन के बाहर क्यूआर कोड लगाने जा रहा है। पहले चरण में वार्ड 82 में इसकी शुरुआत होगी। मकान के बाहर क्यूआर कोड लगा होने का फायदा निगम और भवन स्वामी दोनों को मिलेगा। कोई भी व्यक्ति क्यूआर कोड को स्कैन कर यह पता लगा सकेगा कि मकान का संपत्तिकर जमा है या नहीं, कचरा संग्रहण कर नियमित जमा हो रहा है या नही। इसी तरह से उक्त पते पर जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी भी क्यूआर कोड से मिल सकेगी। निगम के राजस्व विभाग के अधिकारियों को क्यूआर कोड स्कैन करते ही भवन की जानकारी मिल जाएगी। उन्हें पुराने रिकार्ड साथ नहीं ले जाने पड़ेंगे। पूरे शहर में लागू करने की कोशिश होगी तेज बैठक के दौरान महापौर ने इंदौर नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस योजना को शीघ्र पूर्ण कर पूरे शहर में लागू किया जाए। इस डिजिटल पहल को डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम मानते हुए महापौर ने कहा कि यह शहरवासियों को पारदर्शी, सुलभ और स्मार्ट सेवाएं प्रदान करेगा। हर घर को मिलेगा डिजिटल पता महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, “हमने जो ऐप तैयार किया है, उसके जरिए हर घर का डिजिटल पता सुनिश्चित किया जाएगा। इससे नागरिकों को नगर निगम से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह मिल सके। पहले प्रयास के रूप में, वार्ड 82 में इस योजना को लागू किया जाएगा और हम इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास करेंगे। महापौर ने यह भी बताया कि एप के माध्यम से नागरिक कचरा संग्रहण के लिए गाड़ी को बुला सकेंगे। एक रिक्वेस्ट भेजने पर निगम की टीम घर पर कचरा उठाने के लिए पहुंच जाएगी। हालांकि, कचरा उठाने के लिए शुल्क तय किया जाएगा, जो अभी निर्धारित नहीं किया गया है। मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे     हमने मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाने की तैयारी कर ली है। इस माह के अंत तक वार्ड 82 से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे शहर में मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। निगम की यह पहल शहरवासियों को पारदर्शी, सुलभ और स्मार्ट सेवा प्रदान करेगी। जल्द ही हम एप के माध्यम से कचरा संग्रहण के लिए गाड़ी बुलाने की शुरुआत भी करेंगे। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर  

Wasteकी ताकत!CBG प्लांट से बदलने वाला है ग्वालियर का भविष्य, रोज़ बनेगा CNG और खाद

ग्वालियर  शहर में कचरे से निजात पाने और स्वच्छ वातावरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नगर निगम ग्वालियर द्वारा प्रस्तावित मध्यप्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा वेस्ट आधारित सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट अब केदारपुर डंपसाइड पर स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट को बनाने की लागत करीब 75 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग 5.5 हेक्टेयर भूमि पर तैयार किया जाएगा। प्रोजेक्ट को मिली स्वीकृति ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार ने बताया कि सरकार से इस परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही इसके निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। यह प्लांट शहर में हर दिन निकलने वाले 350 टन गीले और सूखे कचरे को प्रोसेस करेगा। इसमें से गीले कचरे से बायो सीएनजी गैस और खाद तैयार की जाएगी। प्लांट से प्रतिदिन करीब 9 टन बायो सीएनजी गैस का उत्पादन होगा, जिसका उपयोग नगर निगम के वाहनों में किया जाएगा और साथ ही इसे कमर्शियल रूप से भी बेचा जाएगा। इससे नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। सूखे कचरे के लिए बनेगा अलग प्लांट इसके अतिरिक्त, 277 टन सूखे कचरे के लिए भी अलग प्लांट लगाया जाएगा, जिससे प्लास्टिक और अन्य रीसायक्लिंग योग्य सामग्री का निष्पादन किया जाएगा। इस योजना से न केवल शहर को कचरे के ढेर से छुटकारा मिलेगा, बल्कि स्वच्छता अभियान को भी मजबूती मिलेगी। पहले इस प्लांट को चंदुआखुर्द डंपयार्ड में लगाया जाना था, लेकिन भूमि की कमी और स्थानीय विवादों के चलते स्थान बदलकर केदारपुर किया गया है। यह लैंडफिल्ड साईट अब धीरे-धीरे खाली हो रही है, जिससे यहां प्लांट निर्माण संभव हो सका। 2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट यह परियोजना साल 2027 तक पूरी होने की संभावना है। साथ ही डबरा, दतिया और बमौर जैसे आस-पास के क्षेत्रों से भी कचरा लाकर यहां प्रोसेस किया जाएगा। इस सीबीजी प्लांट की स्थापना ग्वालियर को स्वच्छ और हरित शहर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। शासन से स्वीकृति, जल्द होंगे टेंडर ग्वालियर में मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गोबर आधारित बायो सीएनजी प्लांट लगाया गया था, जिससे ना सिर्फ प्रतिदिन 100 टन गोबर का निष्पादन हो रहा बल्कि इससे बन रही 1 टन बायो सीएनजी निगम का राजस्व भी बढ़ा रही है. अब इंदौर के बाद प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीजी प्लांट भी ग्वालियर में स्थापित होने जा रहा है. ग्वालियर नगर निगम ने इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था और इस पर स्वीकृति भी मिल चुकी है. इस प्लांट में प्रतिदिन शहर से इकट्ठा किया 350 टीपीटी (टन प्रति दिन) सूखा और गीला कचरा से बायो सीएनजी गैस और खाद तैयार की जाएगी.  सूखे कचरे के लिए अलग से होगा एक प्लांट शहर में लगने वाले कचरे के ढेर से निजात पाने के लिए ये अच्छा विकल्प नगर निगम ने तैयार किया है. ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि, ”ये प्लांट सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया है इसके साथ ही एक और प्लांट स्थापित किया जाएगा. जिसके जरिए प्रतिदिन 277 टीपीटी सूखा कचरा भी निष्पादित किया जाएगा. ये एक बहतरीन व्यवस्था होगी जिससे शहर में कचरे के जगह जगह लगने वाले ढेरों से छुटकारा मिलेगा और वातावरण साफ सुथरा होगा.” साढ़े 5 हेक्टेयर में बनेगा प्लांट इस प्लांट को तैयार करने के लिए नगर निगम को अच्छी खासी राशि खर्चनी पड़ेगी. अपर आयुक्त की माने तो इस प्लांट को बनाने में करीब 75 करोड़ रुपये की लागत आएगी. पहले वेस्ट बेस्ड सीबीजी प्लांट को तैयार करने के लिए निगम द्वारा चंदुआखुर्द डंप यार्ड में जमीन प्रस्तावित की गई थी. लेकिन यहां जमीन की कमी और स्थानीय विवादों के चलते बदलने का निर्णय किया गया और अब इसे केदारपुर डंपसाइड पर लगाने का निर्णय लिया गया. ये प्लांट लगभग 5.5 हेक्टेयर जमीन पर स्थापित किया जाएगा. क्योंकि ये लैंडफील्ड साइट अब खाली हो रही है. यहां का कचरा धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है. इसलिए इसी जमीन पर नया सीबीजी प्लांट स्थापित किया जाएगा.  आसपास के क्षेत्रों से भी लाया जाएगा कचरा केदारपुर डंप साइड पर लगने वाले इस प्लांट में हर दिन शहर के कचरे के साथ ही डबरा दतिया और बमौर क्षेत्र से भी कचरा लाया जाएगा. यहां गीला और सूखा कचरा अलग अलग किया जाएगा. गीले कचरे का उपयोग बायो गैस बनाने में होगा. इसके बाद जो वेस्ट मटेरियल बचेगा उससे खाद तैयार की जाएगी. माना जा रहा है की 350 टीपीटी (टन प्रति दिन) कचरे से हर दिन लगभग 9 टन बायो सीएनजी गैस तैयार होगी. जिसे नगर निगम के वाहनों में इस्तेमाल करने के साथ ही कमर्शियल तौर पर बेचा जाएगा. जिससे की नगर निगम को राजस्व भी प्राप्त होगा. साल 2027 तक तैयार होगा प्लांट ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार के मुताबिक, ”यह प्लांट अभी पेपरवर्क स्तर पर है. आने वाले एक या दो हफ़्ते में इसके निर्माण के लिए टेंडर भी जारी होने वाले हैं. आने वाले दो से तीन साल में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा. ऐसे में यह प्लांट इस क्षेत्र में नई उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है.”

भोपाल ननि स्वच्छता समाधान केंद्र के तौर पर एक अनोखा कचरा कैफे शुरू होगा, कचरा कैफे से होगा स्वच्छता समाधान

भोपाल शहरी स्वच्छता के लिए जैविक-अजैविक कचरे का मिस्रित ढेर बड़ी चुनौती बना हुआ है। यह नगर निगम के संसाधनों पर बोझ जैसा है। घरों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग करके देने की प्रवृत्ति विकसित नहीं हो पाई है। ऐसे में भोपाल नगर निगम स्वच्छता समाधान केंद्र के तौर पर एक अनोखा कचरा कैफे शुरू करने जा रहा है। भोपाल के अलग-अलग तीन हिस्सों दस नंबर मार्केट की फुलवारी, बिट्टन मार्केट और बोट क्लब पर इसे बनाया जा रहा है। यहां प्लास्टिक, कागज, इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रानिक कचरे के बदले भोजन या खानपान और दैनिक उपयोग का सामान मिलेगा। अगर कोई इसके बदले नकदी लेना चाहे तो यह कैफे बाजार दर से पांच रुपया अधिक कीमत देकर उसे खरीदेगा। उदाहरण के तौर पर अगर एक किलो प्लास्टिक कचरा बाजार में 15 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है तो कचरा कैफे उसे 20 रुपया प्रति किलोग्राम की दर से खरीदेगा।   कचरा कैफे से होगा स्वच्छता समाधान कचरा कैफे नाम के इस स्वच्छता समाधान केंद्र का संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाएं करेंगी। इस कैफे में आने वाले निराश्रित जरूरतमंद अगर थोड़ा-बहुत कचरा भी लाते हैं, तो उन्हें वहां से छोले-चावल जैसे व्यंजन खाने को मिल जाएंगे। इसके अलावा वे कचरे के बदले कैफे में उपलब्ध खानपान और दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीद सकेंगे। इस पहल से “कमाओ और खाओ” की भावना को भी बल मिलेगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि भोपाल में हर महीने करीब 500 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। इसमें 200 टन तो प्रतिबंधित पन्नियां हैं। इलेक्ट्रानिक कचरा और लोहा, सीसा, कागज का कचरा भी बड़ी मात्रा में कचरे के ढेर के साथ पहुंचता है। कचरा संग्रहण और सेग्रिग्रेशन केंद्रों पर इसे अलग करना बड़ा खर्चीला हो जाता है। कचरा कैफे के जरिये यह कचरा अलग-अलग इकट्ठा होगा और वेंडरों के जरिए आसानी से रिसाइकिल या विनष्टीकरण संयंत्रों तक पहुंचा दिया जाएगा। कैफे में इस तरह की वस्तुएं मिलेंगी इस अनोखे कैफे में पका हुआ भोजन और नाश्ता उपलब्ध होगा। इसके अलावा वहां दाल, चावल, आटा, मोटा अनाज, नमक, तेल, अचार, पापड़, बड़ी, नमकीन, बोतलबंद पानी, टेराकोटा, कपड़े, सजावटी सामान और पर्यावरण अनुकूल वस्तुएं भी उपलब्ध होंगी। इनका उत्पादन भी स्व-सहायता समूह ही करेंगे। मोबाइल एप से भी जुड़ पाएंगे लोग इस पहल से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए कचरा कैफे एक मोबाइल एप भी लांच कर रहा है। इससे जुड़े लोग घर बैठे कचरा बेच सकेंगे। कैफे का आरआरआर (रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल) मोबाइल वैन घर पर जाकर कचरा खरीदेगी। इसके बदले विक्रेता को कूपन दिया जाएगा। यह कूपन कैफे लाकर नकद लिया जा सकेगा, या उतनी कीमत की खरीददारी में प्रयोग हो सकेगा। यह केंद्र केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। यह पर्यावरण के प्रति जन जागरुकता, महिला सशक्तीकरण और रोजगार सृजन का भी माडल बनेगा- अंजीता सभलोक, स्वच्छता एंबेसडर, नगर निगम कचरा कैफे की शुरूआत नगर निगम इस महत्वपूर्ण परियोजना पर काम कर रहा है। कचरा कैफे की शुरूआत इसी महीने 10 नंबर मार्केट के फुलवारी और बोट क्लब पर शुरू करने जा रहे हैं। बिट्टन मार्केट में उसके बाद शुरू होगा। हमे उम्मीद है कि इसके जरिए शहर के लोग कचरे के प्रति अधिक जागरूक होंगे- मालती राय, महापौर नगर निगम भोपाल

जल स्रोतों की सफाई के साथ जन समुदाय ने इनके सरंक्षण की ली शपथ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर  प्रदेश में 30 मार्च से शुरू किये गये जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरचनाओं की साफ-सफाई के साथ जन समुदाय में इनके संरक्षण और जल की बचत करने की शपथ ली। अभियान में जन अभियान परिषद के साथ-साथ अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने आगे बढ़कर इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी की। श्रमदान कर तालाब की साफ-सफाई की गई छिन्दवाडा जिले में सामुहिक जनभागीदारी से जल संरक्षण के कार्य लगातार किये जा रहे हैं। जल चौपाल में ग्रामीणों को पानी की बचत के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह की पहल पर जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक संजय बामने के नेतृत्व में ग्राम पंचायत जम्‍बाकिराडी के दुर्गबाड़ा में ग्राम में निर्मित तालाब की ग्रामीणों ने सफाई की। इसी के साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। विकासखंड बिछुआ के सेक्टर क्रमांक-02 खमरा की इंद्रा कॉलोनी में श्रमदान कर सोखता गड्ढा बनाया गया। ग्रामीणों को वॉटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से जल संरक्षण कार्यक्रम में सोखता गड्ढा का निर्माण के महत्व के बारे में बताया गया। नलकूप खनन पर मिला पर्याप्त मात्रा में पानी राजगढ़़ जिले में सरकारी कॉलोनी में भू-जल सर्वेक्षण का कार्य एवं नलकूप का खनन कराया गया। जिसमें 175 फीट पर पर्याप्त मात्रा में पानी मिला। जिले में इतनी कम गहराई पर पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना मुश्किल काम था। भूजलविद् डॉ. नागर ने वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर रजिस्टिविटी मीटर से भू-जल सर्वेक्षण कर शत-प्रतिशत परिणाम दिए। उनके इस प्रयास पर कलेक्‍टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने भू-जल सर्वेक्षण कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हम जिले में जितने अधिक पानी रिचार्ज के प्रयास करेंगे हमारे सुनहरे भविष्य के लिये उतना ही अच्छा है। जल संरक्षण के लिए बनाए जा रहे डगवेल रिचार्ज सीहोर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में लगातार गतिविधियों आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में ग्राम कराड़िया भील एवं नयापुरा सहित अनेक ग्रामों में डगवेल रिचार्ज का निर्माण कराया जा रहा है जिससे वर्षा के अधिक से अधिक जल का संरक्षण किया जा सके। जिले में आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए दीवार लेखन, जागरूकता रैली, पोस्टर बैनर, रंगोली, ग्राम सभाएं, कलश यात्राएं, शपथ सहित अनेकों गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित खेत, तालाब, अमृत सरोवर, परकोलेशन टैंक, डगवेल, तालाब जीर्णोद्धार, जनभागीदारी के कार्य, कूप एवं बाउंड्री मरम्मत के कार्य किए जा रहे हैं। जिले में समाज की भागीदारी से जल संरचनाओं के निर्माण, भूजल संवर्धन, पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं की साफ सफाई और जीर्णोद्धार किया जा रहा है। पूरन तालाब पर किया गया सामूहिक श्रमदान रायसेन जिले में बारिश के जल को सहेजने के लिए 30 जून तक चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में रायसेन के पूरन तालाब पर सामूहिक श्रमदान और पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री यशवंत मीणा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सविता सेन, कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक श्री पंकज पाण्डे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा सामूहिक श्रमदान कर पूरन तालाब के घाटों की सफाई की गई। इसके बाद घाटों के किनारे पर पौधरोपण किया गया। जल संरक्षण के लिये की गई अनेक गतिविधियां ग्वालियर जिले में जल संरक्षण के लिये ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। जिले में खेत तालाब, डगवैल रीचार्ज, अमृत सरोवर के साथ-साथ नदियों, तालाबों और ऐतिहासिक कुँए, बावड़ियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। नगरीय क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कुँए, बावड़ियों की साफ-सफाई एवं संरक्षण का कार्य हाथ में लिया गया है। ग्वालियर की ऐतिहासिक मुरार नदी के बहाव क्षेत्र से भी बड़ी मात्रा में बाधाओं को दूर करने का कार्य किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में 907 खेत तालाबों का कार्य हाथ में लिया गया। खेत तालाबों का कार्य तेज गति के साथ किया जा रहा है। इसके साथ ही 846 डगवैल रीचार्ज का काम जिले में किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में 8 अमृत सरोवर में कार्य कर लिया गया है। जिले में लगभग 1393 जल संरचनाओं को ठीक करने का कार्य किया जा रहा है। ग्वालियर शहर की 25 ऐतिहासिक बावड़ियों के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मुरार नदी में भी बहाव क्षेत्र को मुक्त करने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में किए गए कार्यों के माध्यम से वर्षा ऋतु में सभी संरचनाओं में जल संरक्षण होगा और भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होगी।  पिपरिया में हुई तालाब की साफ-सफाई कटनी जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जीर्ण-शीर्ण पेयजल स्रोतों और जल संरचनाओं के रखरखाव के लिये व्यापक साफ-सफाई एवं स्वच्छता के कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सामुहिक श्रमदान से मंदिर के नजदीक तालाब और खेत तालाब की साफ-सफाई की गई। श्रमदान के बाद उपस्थित ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई।  

अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस पर 27 जून को रतलाम में होगा ‘एमपी राइज-2025’

भोपाल  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को राज्य की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार मानते हुए 27 जून को अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस पर रतलाम के शहीद स्मारक मैदान में ‘रीजनल इंडस्ट्री, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट कॉन्क्लेव’ – “एमपी राइज-2025’’ का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रदेश में औद्योगिक निवेश, कौशल विकास और स्वरोजगार को एक साथ संवर्धित करने का समग्र मंच प्रस्तुत करेगा। इस समेकित पहल से मध्यप्रदेश में निवेश, कौशल विकास और स्वरोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे और राज्य की आर्थिक प्रगति को स्थाई व समावेशी दिशा मिलेगी। प्रदेश में औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। तीन नए हवाई अड्डों के निर्माण के साथ मध्यप्रदेश अब आठ परिचालन एयरपोर्ट्स वाला राज्य बन गया है। इंदौर मेट्रो सेवा ने यातायात के स्वरूप को बदल दिया है, वहां भोपाल मेट्रो के शीघ्र प्रारंभ से राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और भी सुदृढ़ होगा। फ्लायओवर, औद्योगिक कॉरिडोर तथा राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के विकास से कनेक्टिविटी व्यापक रूप से सुदृढ़ हुई है, जिससे उद्योगों और निवेशकों को बेहतर सुविधा और त्वरित पहुंच सुनिश्चित हो सकी है। एमपी राइज-2025 कॉन्क्लेव में औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन एवं औद्योगिक पार्कों तथा कौशल प्रशिक्षण केंद्रों का लोकार्पण होगा। साथ ही विभागों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि एमओयू के माध्यम से निवेश प्रस्तावों को तेजी से कार्यान्वित करने की दिशा में प्रतिबद्धता व्यक्त करेंगे। इस अवसर पर चयनित युवाओं को जॉब-ऑफर लेटर प्रदान किए जाएंगे तथा महिला उद्यमियों और ग्रामीण स्वरोजगार समूहों को प्रारंभिक पूंजी सहायता वितरित की जाएगी, जिससे वे अपनी व्यवसायिक योजना को तुरंत अमल में ला सकें। कॉन्क्लेव में नवीनतम तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी और हितग्राहियों के साथ संवाद किया जाएगा। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट एवं GI टैग वाले स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी में प्रत्येक जिले के प्रतिष्ठित उत्पाद का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय नवाचार और गुणवत्ता को व्यापक पहचान मिलेगी। वन-टू-वन सत्रों में प्राइवेट सेक्टर, तकनीकी संस्थान एवं वित्तीय समूह मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निवेश व सहयोग के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। रतलाम के बाद एमपी राइज-2025 कॉन्क्लेव छिंदवाड़ा, मुरैना और सतना में भी होगा। कॉन्क्लेव से प्रदेश के प्रत्येक जिले को उसकी विशिष्ट औद्योगिक पहचान के अनुरूप विकास के समान अवसर मिलेंगे।  

उच्च शिक्षा संस्थानों में 5 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए कराया पंजीयन

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत महाविद्यालयों में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में सत्र 2025-26 की प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम चरण में अब तक लगभग 1 लाख 33 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त किया है। इनमें एनसीटीई पाठ्यक्रमों में लगभग 14 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त किया है। स्नातक के लिए लगभग 90 हजार एवं स्नातकोत्तर के लिए लगभग 30 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है। कुल 1 लाख 20 हजार विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अपना प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत पिछले वर्ष सत्र 2024- 25 प्रथम चरण में स्नातक एवं स्नातकोत्तर में 96 हजार विद्यार्थियों एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में लगभग 11 हजार, इस प्रकार कुल 1 लाख 7 हजार विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया था। पिछले वर्ष की तुलना में सभी पाठ्यक्रमों में प्रथम चरण में प्रवेश संख्या में वृद्धि हुई है। द्वितीय चरण के पंजीयन के लिए बुधवार अंतिम तिथि थी, पंजीयन के अंतिम दिन शाम 6 बजे तक लगभग एक लाख विद्यार्थियों ने पंजीयन कर लिया है। इसमें स्नातक में लगभग 55 हजार, स्नातकोत्तर में 23 हजार, एवं एनसीटीई पाठ्यक्रमों में लगभग 20 हजार विद्यार्थियों ने द्वितीय चरण में पंजीयन कराया है। अब तक कुल 5 लाख 15 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए पंजीयन कर लिया है। पिछले वर्ष दोनों चरणों में कुल 3 लाख 50 हजार विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। पिछले वर्ष की तुलना में इस सत्र में लगभग 2 लाख अधिक रजिस्ट्रेशन हुए हैं।  

फॉलन आउट हुए अतिथि विद्वानों को शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग में शासकीय महाविद्यालयों में नियमित पदस्थापना और स्थानांतरण से पदपूर्ति होने के फलस्वरूप फॉलन आउट होने वाले अतिथि विद्वानों को पोर्टल पर रिक्त पदों के विरूद्ध विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। आयुक्त उच्च शिक्षा ने उक्त आदेश जारी किए हैं। ऐसे अतिथि विद्वान जो नियमित पदस्थापना/स्थानांतरण से पदपूर्ति होने के फलस्वरूप फॉलन आउट हुये है तथा संबंधित पदों पर कार्य करने के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विनियम 2018 एवं समय-समय पर किये गये संशोधन पर उल्लेखित मापदण्डों के अनुरूप वांछित योग्यता धारक हैं, उनके लिए पोर्टल पर विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा उपलब्ध है। उच्च न्यायालय द्वारा दो प्रकरणों में पारित अंतरिम निर्णय के पालन में नियमित पदस्थापना/स्थानांतरण से पदपूर्ति होने के फलस्वरूप फॉलन आउट हुए ऐसे अतिथि विद्वान जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा संबंधी विनियम 2018 एवं समय-समय पर किये गये संशोधन पर उल्लेखित मापदण्डों के अनुरूप वांछित योग्यता धारक नहीं है, उनके लिए भी पोर्टल पर विकल्प प्रस्तुत करने की सुविधा उपलब्ध है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मैरिट में आने की स्थिति में महाविद्यालय का आवंटन एवं महाविद्यालय में आमंत्रण उपरोक्त न्यायालयीन प्रकरणों में पारित अंतिम निर्णय के अध्याधीन रहेगा।

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