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प्यार में किया अहम फैसला, दो बहनों ने धर्म बदलकर शादी की, नया नाम लेकर पतियों के साथ थाने गईं

नौगांव जिले के नौगांव में प्रेम प्रसंग से जुड़ा एक मामला इन दिनों इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां मुस्लिम समाज की दो चचेरी बहनें और हिंदू समाज के दो चचेरे भाइयों की प्रेम कहानी अब शादी में बदल गई है। करीब एक माह पहले दोनों युवतियां अपने घरों से चली गई थीं, जिसके बाद परिजनों और समाज के लोगों में हड़कंप मच गया था। परिजनों ने युवतियों के अपहरण की आशंका जताते हुए नौगांव थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी।  उस समय मुस्लिम समाज के लोगों ने नौगांव थाने पहुंचकर घेराव किया था और युवतियों की जल्द तलाश की मांग की थी। घटना के कुछ दिनों बाद 13 और 14 फरवरी के आसपास दोनों युवतियों ने अपने साथियों के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया। वीडियो में उन्होंने बताया कि वे अपनी मर्जी से घर से गई हैं और दोनों ने अपने-अपने साथियों से शादी कर ली है। युवतियों ने यह भी कहा कि वे बालिग हैं और किसी दबाव में नहीं हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से वायरल हो गया। अब करीब एक महीने बाद सोमवार 16 मार्च को दोनों जोड़े नौगांव थाने पहुंचे और यहां थाना प्रभारी वाल्मीकि चौबे की मौजूदगी में अपने बयान दर्ज कराए। इस दौरान दोनों पक्षों के परिजन और समाज के लोग भी थाने पहुंचे। युवाओं ने पुलिस को बताया कि उन्होंने नागपुर में आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया है और अब वे पति-पत्नी के रूप में साथ रहना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह विवाह दोनों की सहमति से हुआ है और इस पर किसी तरह का दबाव नहीं है। विवाह के बाद दोनों युवतियों ने हिंदू धर्म अपनाने की बात कही और अपने नए नाम भी रख लिए। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे पिछले 7-8 साल से एक-दूसरे को जानते थे और एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों ने बालिग होने का इंतजार किया और इसके बाद अपनी मर्जी से शादी करने का फैसला लिया। दोनों जोड़ों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है। उनका कहना है कि शादी के बाद उन्हें किसी तरह के खतरे की आशंका है, इसलिए प्रशासन उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराए। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि सुरक्षा की आवश्यकता पाई जाती है तो नियमानुसार सुरक्षा दी जाएगी। जब दोनों युवतियां थाने पहुंचीं तो मुस्लिम समाज के कई लोग भी वहां पहुंचे और उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन युवतियों ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है और अब वे अपने पति के साथ ही रहेंगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद नौगांव क्षेत्र में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। 

मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस की कमी जारी, होटल-रेस्टोरेंट को गैस देने के ऑर्डर का इंतजार, घरेलू सिलेंडर की सप्लाई सुधरी

भोपाल  मध्य प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की कमी से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग अभी भी प्रभावित है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में कमर्शियल गैस की सप्लाई रोक दिए जाने से लगभग 50 हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट सोमवार को गैस के बिना काम करने को मजबूर रहे। भोपाल के भौंरी स्थित ऑयल कंपनी डिपो से कमर्शियल सिलेंडर ट्रकों में लोड किए जा रहे हैं, लेकिन इन्हें होटल और रेस्टोरेंट तक पहुंचाने के आदेश अभी जारी नहीं हुए हैं। जिला फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, पुलिस, सेना और रेलवे कैंटीन जैसे आवश्यक सेवाओं को ही गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया, भौंरी स्थित डिपो से कमर्शियल सिलेंडर के ट्रक लोड हो रहे हैं, लेकिन फिलहाल होटल और रेस्टोरेंट को सिलेंडर देने के आदेश नहीं है। इसलिए सोमवार को अस्पताल, शैक्षणिक संस्थाएं, पुलिस, सेना-रेलवे कैंटिंग को ही सिलेंडर की सप्लाई की गई है। महाराष्ट्र में 70% सप्लाई, एमपी में भी हो एमपी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया, एसोसिएशन को महाराष्ट्र के उपहार गृहों में 70 प्रतिशत रिलीफ यानी, सिलेंडर दिए जाने के आदेश मिले हैं। एमपी में भी ये आदेश आ सकते हैं। फिलहाल सोमवार को कमर्शियल सिलेंडर नहीं दिया गया। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में समस्या बनी रही। यदि इन्हें भी सिलेंडर मिलेंगे तो यह होटल इंडस्ट्री के लिए ‘ऑक्सीजन’ मिलने जैसा रहेगा। पिछले 7 दिन से सप्लाई नहीं होने से भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म हो रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन, डीजल भट्‌ठी के इंतजाम जरूर किए हैं, लेकिन यह बहुत ही खर्चिला है। इसलिए मेन्यू में बदलाव करने की गाइडलाइन जारी की। सिलेंडर की कमी और ग्राहकों की संख्या कम होने के बावजूद प्रदेश के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट से कर्मचारियों को नहीं निकाला गया। प्रदेश के होटल कारोबारियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से कमर्शियल गैस की आपूर्ति बाधित है। इसके कारण भोपाल, इंदौर सहित कई बड़े शहरों में होटल और रेस्टोरेंट का गैस स्टॉक खत्म होने लगा है। मध्य प्रदेश होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी के मुताबिक महाराष्ट्र में होटल उद्योग को लगभग 70 प्रतिशत गैस सप्लाई देने के निर्देश जारी किए गए हैं और उम्मीद है कि इसी तरह का निर्णय मध्य प्रदेश में भी जल्द लिया जाएगा। गैस की कमी के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन चूल्हे और डीजल भट्टियों का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि यह विकल्प काफी महंगा साबित हो रहा है। इसी वजह से कई स्थानों पर होटल संचालकों ने अस्थायी रूप से मेन्यू में बदलाव करने के निर्देश भी जारी किए हैं। बावजूद इसके, होटल उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि अब तक किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला गया है। उधर घरेलू गैस सिलेंडरों की स्थिति में कुछ सुधार देखा गया है। गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार प्रदेश में घरेलू सिलेंडर बुकिंग से जुड़ी लगभग 50 प्रतिशत समस्याएं कम हो गई हैं। भोपाल में ही सोमवार को करीब 12 हजार से अधिक बुकिंग दर्ज की गईं। हालांकि कई उपभोक्ता भविष्य की संभावित कमी को देखते हुए अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे बाजार में घबराहट की स्थिति बनी हुई है। घरेलू गैस बुकिंग की 50% समस्या हुई कम गैस एजेंसी संचालकों की माने तो प्रदेश में घरेलू सिलेंडर की बुकिंग की 50% समस्या खत्म हो गई है। भोपाल में सोमवार को 12 हजार से अधिक बुकिंग आई। हालांकि, पैनिक स्थिति ज्यादा है। यानी, लोग भविष्य में सिलेंडर न मिलने की समस्या आने पर अतिरिक्त सिलेंडर जमा कर रहे हैं। इधर, सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। राजधानी में ही सोमवार को करीब 50 सिलेंडर जब्त किए गए। गैस किल्लत को लेकर प्रदेश में प्रदर्शन का दौर गैस की किल्लत के चलते पूरे प्रदेश में प्रदर्शन का दौर भी जारी है। सोमवार को भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चाय की दुकान लगाई। नाले में पाइप लगाकर उससे निकलने वाली गैस से चाय बनाने की कोशिश की। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए पोस्टर में लिखा था- कृपया मोदी जी की सलाह मानें। रसोई गैस के पीछे न भागें, गंदे नाले की गैस का उपयोग करें। मंदसौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ठेले पर गैस सिलेंडर रखकर रैली निकाली। प्रधानमंत्री के खिलाफ नरेंदर-सरेंडर के नारे लगाए। गैस संकट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पार्टी कार्यकर्ताओं ने अनोखा प्रदर्शन करते हुए नाले की गैस से चाय बनाने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए पोस्टरों में केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। मंदसौर सहित अन्य जिलों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर के साथ रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम लोगों और कारोबारियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद बनी हुई है।

‘रोटी-पराठे से तौबा कीजिए…’, कलेक्टर जयति सिंह का ईंधन बचाने के लिए खाने के मेन्यू में बदलाव का सुझाव

बड़वानी मध्य प्रदेश की बड़वानी कलेक्टर ने जिले के लोगों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की है. कहा कि यह एक अच्छा मौका है, जब हम अपनी ईंधन जरूरतों की समीक्षा कर सकते हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि ज्यादा ईंधन में बनने वाले व्यंजनों की जगह अन्य विकल्प अपनाए जा सकते हैं ताकि कम ईंधन में भी भोजन व्यवस्था चल सके और गैस की बचत हो सके। कलेक्टर ने जिले के नागरिकों से ईंधन की बचत करने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि सभी लोग अपनी ईंधन की आवश्यकता पर एक बार विचार करें. किस तरह हम अपनी ईंधन खपत को कम कर सकते हैं, इस पर सोचने की जरूरत है। आईएएस अफसर ने सुझाव दिया कि लोग अपने खाने के मेन्यू में भी बदलाव कर सकते हैं. खासकर ऐसे व्यंजन जिनमें ज्यादा ईंधन लगता है, उन्हें कुछ समय के लिए कम किया जा सकता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रोटी और पराठे जैसे व्यंजनों की जगह ऐसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं, जिनमें कम ईंधन लगे। कलेक्टर का मानना है कि अगर सभी लोग थोड़ा सहयोग करें तो ईंधन की बचत संभव है. साथ ही इससे गैस की उपलब्धता भी बेहतर तरीके से बनी रह सकती है। IAS जयति सिंह ने कहा, ”मेरा सभी से अनुरोध रहेगा कि यह एक अच्छा मौका है कि आप अपनी ईंधन की आवश्यकता को एक बार देखें. हम अपने मेन्यू में भी परिवर्तन कर सकते हैं. जैसे रोटी और पराठे बनाने में अधिक ईंधन लगता है, उससे शिफ्ट होकर हम अन्य ऐसे विकल्पों पर जा सकते हैं जिनमें कम ईंधन लगे।

MP में मौसम का नया सिस्टम कल से लागू, आंधी-बारिश और गरज-चमक के साथ तेज गर्मी का मुकाबला

भोपाल प्रदेश में बीते कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच अब मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 18 मार्च से एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिसका असर करीब आधे मध्यप्रदेश में नजर आएगा। इस सिस्टम के चलते तीन दिन तक आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर बना रह सकता है।राजधानी भोपाल समेत इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी मौसम बदलेगा। हालांकि इससे पहले मंगलवार तक गर्मी का असर बरकरार रहेगा और दिन में तेज धूप लोगों को परेशान करेगी।मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हो रहा यह सिस्टम 17 मार्च की रात से असर दिखाना शुरू करेगा, जो 18 से 20 मार्च के बीच मध्यप्रदेश में व्यापक प्रभाव डालेगा।  फिलहाल प्रदेश के ऊपर दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक ट्रफ सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन इनका खास असर अभी दिखाई नहीं दे रहा है. इसी वजह से कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।  खंडवा रहा सबसे गर्म शहर प्रदेश में सोमवार को सबसे ज्यादा गर्मी खंडवा में दर्ज की गई. यहां अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. इसके अलावा नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, रायसेन, सिवनी, मंडला, टीकमगढ़, सागर और खजुराहो में भी तापमान 37 डिग्री या उससे ज्यादा दर्ज किया गया।  अगर बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर में 35.8°C, भोपाल में 35.2°C, इंदौर और उज्जैन में करीब 35°C के आसपास तापमान रिकॉर्ड किया गया. वहीं ग्वालियर में अधिकतम तापमान 34.1°C रहा।  वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बदलेगा मौसम मौसम विभाग के मुताबिक आज रात से उत्तर-पश्चिम भारत में एक स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने जा रहा है. इसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा. इसी वजह से 18 मार्च से 20 मार्च के बीच प्रदेश के कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आएगा. कई जगहों पर तेज हवा, गरज-चमक और बारिश होने की संभावना जताई गई है।  18 मार्च को इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने 18 मार्च को ग्वालियर, मुरैना, दतिया, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, छिंदवाड़ा, सिवनी, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।  19 मार्च को इन इलाकों में बदलेगा मौसम 19 मार्च को इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।  20 मार्च को भोपाल-जबलपुर समेत कई शहरों में असर 20 मार्च को भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है।  अप्रैल-मई में चलेगी लू मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अबकी बार अप्रैल और मई में हीट वेव यानी, लू चलेगी। 15 से 20 दिन तक लू चल सकती है। मार्च के दूसरे सप्ताह में नर्मदापुरम में लगातार 3 दिन तक तीव्र लू वाला मौसम रहा। मौसम विभाग ने बताया कि मार्च के आखिरी सप्ताह से लू का असर दिखाई देने लगेगा। मार्च में तीनों मौसम का असर मध्यप्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच सकता है, जबकि रात में 14 से 20 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। नर्मदापुरम में लगातार तीन दिन तक पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। अप्रैल-मई सबसे ज्यादा गर्म रहेंगे मौसम विभाग ने इस साल अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। इन दो महीने के अंदर ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी गर्म रहेंगे। फरवरी में 4 बार ओले-बारिश हुई इस बार फरवरी में मौसम का मिजाज चार बार बदला। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा। बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार दर्ज किया गया भोपाल: 20.0°C इंदौर: 19.0°C जबलपुर: 19.6°C ग्वालियर: 17.1°C उज्जैन: 15.8°C

उज्जैन में विकास की बयार, राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव देंगे सौगातें

राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन को देंगे विकास की सौगातें गीता भवन और विभिन्न विकास कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन उज्जैन राज्यपाल  मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार 17 मार्च को उज्जैन में 77 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले गीता भवन का भूमि-पूजन करेंगे। साथ ही उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा कियान्वित की जा रही नगर विकास योजनाओं एवं सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों के अंतर्गत 662.46 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले विभिन्न निर्माण कार्यों का भी भूमि-पूजन होगा। नगर विकास योजना ग्राम नीमनवासा, धतरावदा एवं लालपुर में 473.32 हैक्टयेर में विकसित की जा रही है, जिसमें लगभग 35 कि.मी. के 24 मी. एवं 30 मी. के सीसी रोड अन्तर्गत सीवर लाईन, वॉटर लाईन, स्थाई अण्डर ग्राउण्ड विद्युतीकरण, स्ट्रीट लाईट आदि विकास कार्य किए जाएंगे। उक्त कार्य में 160.39 करोड़ रुपए की लागत आएगी। विक्रम नगर आरओबी का निर्माण कार्य राशि 30.68 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा हैं, जिसमें विक्रम उद्योगपुरी के पास एमआर 5 से नगर विकास योजना क्रं.- 03,04, 05 & 06, को जोड़ने के लिए किया जा रहा है। आरओबी के निर्माण से रेल्वे लाईन क्रॉसिंग से शहर को जोड़ने का कार्य एवं सिंहस्थ के दौरान मक्सी एवं देवास से आने वाले यातायात को सुगमता प्रदान करेगा। नवीन सिंहस्थ मेला कार्यालय भवन का भूमि-पूजन सिंहस्थ मेला कार्यालय का निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी होगा, जिसकी लागत राशि 29.84 करोड़ रुपए की है। सिंहस्थ के दौरान आवश्यक व्यवस्थाओं के प्रबंधन एवं प्रभावी नियत्रंण के लिए किया जा रहा है। उक्त भवन G+1 होकर निर्मित क्षेत्रफल 63 हजार वर्गफीट होगा। उक्त मेला कार्यालय भवन में एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित होगा।

ऑटो-बाइक हादसे में बाइक चालक घायल, पैर की दो उंगलियों के टूटने का खतरा

ऑटो और बाइक की भिंडत, बाइक चालक को आया गंभीर चोटें पैर की दो उंगली टूटने की आशंका  राजेंद्रग्राम छबिलाल थाना क्षेत्र राजेंद्रग्राम अंतर्गत आने वाली ग्राम बरगी सांधा जो राजेंद्रग्राम बसनिहा से बेनीबारी को जोड़ती है वही बरगी साधा में ऑटो और बाइक की जोरदार भिंडत होने से बाइक चालक प्रवीण कुमार मराबी 23 वर्ष पिता जान सिंह मरावी ग्राम दमगढ़ का रहने वाला बताया जा रहा है।जो अपने निजी काम से बेनीबारी की ओर गए हुए थे और घर लौटते समय राजेंद्रग्राम की ओर से स्कूली बच्चों को लेकर जा रही ऑटो आमने सामने भिड़ने से ऑटो में सवार एक विद्यार्थी बच्चे को भी चोट लगने की जानकारी बताई जा रही है।और घायल व्यक्ति प्रवीण कुमार मरावी को भी गंभीर चोट लगने की आसंका जताई जा रही है,और प्रवीण मरावी को उनके परिजनों के द्वारा अपने निजी वाहन से अस्पताल लाया गया,लेकिन देख भाल करने वाले डॉक्टरों का कोई अता पता नहीं है,जिससे घायल व्यक्ति को सही तरीके से इलाज किया जा सके।वही ड्रेसिंग करने वालों के द्वारा घायल व्यक्ति के पैर में टांका लगाकर,घाव को साफ कर, मलहम पट्टी लगाकर, जिला अस्पताल अनूपपुर ले जाने की सलाह दी गई,और परिजनों का कहना है की हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ डॉक्टरों के द्वारा ना किया जाए जिससे होने वाले बीमारी या एक्सीडेंट से डॉक्टरों के द्वारा छुटकारा दिलाया जा सकता है,अगर वो समय से अस्पताल को निगरानि मे रखकर काम करेंगे तो ,नही फिजूल में मरीज अपने मौत को गले लगाने से किसी को बचाया नहीं जा सकता है।

इंदौर में मेट्रो ट्रेन का अंतिम स्पीड ट्रायल, टीम ने मेट्रो में सवार होकर किया सर्वे

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट के 17 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो के संचालन की राह आसान होती नजर आ रही है। सोमवार को कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS)की टीम ने मेट्रो ट्रेन में सवार होकर कोच की सुरक्षा, स्टेशनों की स्थिति देखी।  ट्रेन को अलग-अलग स्पीड पर चलाकर भी देखा गया। इस दौरान ट्रेक के जिस हिस्से में मोड़ है या ढलान है, वहां पर बारिकी से जांच की गई, ताकि 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के संचालन के दौरान कोई परेशानी न हो। टीम ने रविवार से फाइनल निरीक्षण शुरू किया है और ट्रैक, स्टेशनों और मेट्रो सिस्टम की बारीकी से जांच की गई। रविवार को टीम ट्राली पर दौरा कर रही थी। सोमवार को मेट्रो ट्रेन में सवार होकर सर्वे किया। निरीक्षण के पहले दिन ट्रॉली रन किया गया। निरीक्षण 18 मार्च तक चलेगा। मंगलवार और बुधवार को मेट्रो ट्रेन को 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर ट्रैक की क्षमता और सुरक्षा का परीक्षण किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि तेज रफ्तार में ट्रेन और ट्रैक का प्रदर्शन कैसा रहता है। इसके बाद ही मेट्रो ट्रेन के संचालन की अनुमति मिलेगी। टीम के सर्वे के कारण गांधी नगर से बागड़दा तक छह किलोमीटर के हिस्से में मेट्रो का संचालन बंद कर दिया गया है। 80 रुपये तक होगा किराया मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिलने के बाद मेट्रो रेल कार्पोरेशन किराए का निर्धारण करेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक अधिकतम किराया 80 रुपये तक तक हो सकता है। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक की दूरी 17 किलोमीटर है। अगले माह से मेट्रो का कमर्शियल संचालन हो सकता है। सरकार इसके लिए बड़ा लोकार्पण कार्यक्रम भी रख सकती है। फिलहाल मेट्रो साढ़े छह किलोमीटर हिस्से में संचालित हो रही है, लेकिन उस हिस्से में मेट्रो के लिए यात्री नहीं मिल रहे है।

MP में स्मार्ट मीटर से बिजली बिल में बढ़ोतरी, हर महीने लोड बढ़ने से आएगा तगड़ा झटका

भोपाल   प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही जोर का झटका लगेगा। केंद्र के इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2025 में बिजली बिल का लोड बढ़ाने के लिए स्मार्ट तरीका अपनाया गया है। इसके तहत उपभोक्ता ने यदि स्वीकृत लोड से तीन बार अधिक बिजली खर्च की तो अधिकतम खर्च होने वाली बिजली आधार पर ही लोड स्वतः अपडेट हो जाएगा। इस नए लोड को तय करने के लिए किसी कर्मचारी या आवेदन की जरूरत नहीं होगी। नए लग रहे स्मार्ट मीटर ही यह लोड अपडेट कर देगा। इससे हर माह उपभोक्ताओं की जेबें खाली होंगी। अभी घरेलू उपभोक्ता के टैरिफ में 150 यूनिट तक 129 रुपए का फिक्स्ड चार्ज तय है। इसके बाद प्रति 0.1 किलोवॉट (15 यूनिट) के बाद 28 रुपए तक फिक्स्ड चार्ज बढ़ेगा। संस्थाओं के 10 किलोवॉट स्वीकृत लोड तक अभी 161 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज है। नए टैरिफ में इसे 15% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। यानि बिना किसी सुनवाई, प्रस्ताव उपभोक्ता का बिजली बिल फिक्स्ड चार्ज हर साल चुपके से बढ़ा दिया जाएगा। नए नियम से घरेलू उपभोक्ताओं की जेब कैसे ढीली होंगी, समझें सवाल- मैं घरेलू उपभोक्ता हूं। मेरे घर में 1 किलोवॉट लोड का कनेक्शन है। मुझे कितना फिक्स्ड चार्ज देना होगा? जवाब- यदि आपने 51-150 यूनिट बिजली हर माह खर्च की तो 129 रु. प्रति कनेक्शन देने होंगे। सवाल- यदि मैंने स्वीकृत 1 किलोवॉट लोड कनेक्शन पर 151-300 यूनिट बिजली प्रति माह खर्च कर दी तो क्या होगा ? जवाब- आपको प्रति 0.1 किलोवॉट (15 यूनिट) भार पर 28 रुपए ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देने होंगे। यानी, हर 300 यूनिट बिजली खर्च करने पर 280 रुपए देने होंगे। यह 280 रुपए बेस फिक्स्ड चार्ज 129 के अलावा जुड़ेंगे। यूं कहें आपको हर माह 409 रुपए फिक्स्ड चार्ज देना होगा। सवाल- यदि मैंने 1 किलोवॉट लोड का कनेक्शन लिया और गर्मी में मैंने 2 किलोवॉट बिजली खपत कर ली तब ? जवाब– यदि आपने साल में तीन साल में 2 किलोवॉट बिजली खपत की तो आपका स्वीकृत लोड ऑटोमैटिक दो किलोवॉट हो जाएगा। फिर इसी भार पर आपको फिक्स्ड चार्ज देना होगा। चाजे का ऐसा खेल किसी घरेलू बिजली उपभोक्ता का स्वीकृत लोड दो किलोवॉट है। वह यदि एक साल में तीन बार दो की बजाय 5 किलोवॉट लोड इस्तेमाल करता है तो साल के अंत में लोड ऑटोमैटिक रूप से 5 किलोवॉट हो जाएगा। यानी, जो उपभोक्ता दो किलोवॉट लोड पर प्रति 0.1 किलोवॉट 15 यूनिट 28 रुपए की दर से 72 रुपए देता है। 5 किलोवॉट होने पर उसे 280 रुपए देने होंगे। क्या है फिक्स्ड चार्ज फिक्स्ड चार्ज कनेक्शन के स्वीकृत लोड पर आधारित है। इसे बिजली कंपनी हर माह उपभोक्ताओं से वसूलती है। फिर चाहे वह बिजली का उपयोग करे या न करे। यह यदि स्वीकृत लोड 2 किलोवॉट व फिक्स्ड चार्ज 100 रुपए/किलोवॉट है। इसमें एक माह में एक यूनिट भी बिजली जलाई तो ₹200 फिक्स्ड चार्ज देना पड़ेगा। यानी, लोड बढ़ेगा तो फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ेगा। यह भी जाने मैरिज गार्डन, सामाजिक कार्यक्रमों के लिए अस्थायी कनेक्शन पर 1 किलोवॉट स्वीकृत लोड पर अभी 82 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज है। बड़े संस्थानों में 10 किलोवॉट तक लोड पर 162 रुपए/किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज लगेगा। यानी, कुल फिक्स्ड चार्ज ₹1620 होगा। लोड 10 से 11 किलोवॉट होने पर 281 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज। कुल 1620 के अलावा 281 रुपए/किलोवॉट बढ़ेगा। आयोग इनके अनुसार प्रावधान करेगा- सचिव केंद्रीय नियम तय प्रक्रियाओं से बनाए जाते हैं। पहले सुझाव आपत्ति ली जाती है। यहां नियामक आयोग इनके अनुसार प्रावधान करेगा।- उमाकांत पांडा, सचिव, एमपीइआरसी   

जल है तो कल है, इसे बचाने के लिए बूंद-बूंद पर ध्यान देंगे, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताया संकल्प

तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश प्रदेश में 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान 100 दिवसीय अभियान में जल संरक्षण के होंगे कार्य नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।  

MP में पेंशन भुगतान की प्रक्रिया 1 अप्रैल से बदलेगी, जिला पेंशन कार्यालय होंगे बंद, SBI को सौंपा पूरा जिम्मा, जानिए नई प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार राज्य के लगभग साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पेंशन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करने वाली है। नई व्यवस्था के तहत, अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सीधे अपने उसी खाते में पेंशन आएगी।  राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के मकसद से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र ‘एग्रीगेटर बैंक’ के रूप में नियुक्त किया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगा। बता दें कि एमपी में पेंशन की मौजूदा व्यवस्था में कई समस्याएं हैं इसकी वजह से पेंशन भुगतान की प्रक्रिया में अक्सर देरी होती है। साथ ही तकनीकी बाधाओं की वजह से भी पेंशन मिलने में दिक्कत होती है। सरकार ने जिला पेंशन कार्यालयों को भी बंद करने का फैसला किया है। मौजूदा व्यवस्था की 4 प्रमुख समस्याएं मौजूदा पेंशन प्रणाली कई जटिलताएं और चुनौतियां हैं। इसकी वजह से पेंशनर्स को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमुख रूप से 4 समस्याएं हैं…     बैंक बदलने की मजबूरी: कई मामलों में, पेंशनभोगियों को पेंशन लेने के लिए उन्हीं बैंकों में अकाउंट बनाए रखना पड़ता था, जहां उनका सैलरी अकाउंट था।     तकनीकी असमानता: महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि या वेतनमान में संशोधन जैसी स्थितियों में पेंशन राशि को अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है। यह कार्य सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से किया जाता है, और यह सुविधा केवल 4 प्रमुख बैंकों में ही उपलब्ध है। जिन बैंकों में यह सिस्टम नहीं है, वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लगता है, जिससे पेंशनर्स को एरियर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।     PPO हस्तांतरण में देरी: सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का पेंशन अदायगी आदेश (PPO) संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और समन्वय की कमी के कारण अक्सर सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन शुरू होने में देरी होती है।     वेतनमान फिक्सेशन की त्रुटियां: कर्मचारियों के वेतनमान फिक्सेशन (Pay Fixation) में फिट-मेंट फैक्टर, मूल वेतन या महंगाई भत्ते की गणना में हुई मामूली गलती भी पेंशन प्रक्रिया को रोक देती है, जिसे सुधारने में महीनों लग जाते है। पेंशनर्स का आरोप- कर्मचारी रिश्वत लेते हैं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी इन समस्याओं के अलावा एक और मुद्दे पर ध्यान दिलाते हैं। उनके मुताबिक अभी पेंशन प्रकरणों का काम जिला और संभागीय पेंशन दफ्तरों के पास है। जैसे ही कोई कर्मचारी रिटायर होता है और उसका प्रकरण जब पेंशन कार्यालय में जाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी एक ही प्रकार की कई आपत्तियां लगाते हैं। इन आपत्तियों को वो बार बार लगाकर कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को भेजते हैं। जोशी के मुताबिक वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि रिटायर्ड कर्मचारी उनकी सेवा करें( रिश्वत) और इसके बदले वो उनका पीपीओ जारी करें। मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव होगा     पूरी प्रोसेस को सेंट्रलाइज्ड किया जा रहा है। राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हस्तांतरित करेगी, जिसमें राज्य सरकार का मुख्य खाता है।     SBI एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए, प्रदेश के सभी पेंशनभोगियों के बैंक खातों में पेंशन की राशि वितरित करेगा, चाहे उनका खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो।     अब तक जो क्लेम और कमीशन 11 अलग-अलग बैंकों को मिलता था, वह अब केवल SBI को मिलेगा, क्योंकि पेंशन वितरण का पूरा प्रबंधन और क्लेम भेजने की जिम्मेदारी सिर्फ SBI की होगी। प्रशासनिक स्तर पर बदलाव: बंद होंगे जिला पेंशन कार्यालय इस सुधार प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में स्थित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा। हालांकि, संभागीय मुख्यालयों में स्थित कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया अब भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। इस प्रणाली की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता और सीक्रेसी है। अब किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन का निर्धारण कौन-सा अधिकारी कर रहा है। उदाहरण के लिए, भिंड में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की पेंशन फाइल का निर्धारण जबलपुर में बैठा कोई भी डिप्टी डायरेक्टर कर सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव पर पूरी तरह से रोक लगेगी। SBI ने शुरू की तैयारी, 2 लाख PPO होंगे ट्रांसफर इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए SBI ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में लगभग 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं, और इस साल 22 हजार और कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। SBI ने अन्य 10 बैंकों से 2 लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़े पैमाने के कार्य को पूरा होने में 3 से 4 महीने लगने का अनुमान है।

मरीजों को मिलेगा आधुनिक इलाज, एमजीएम इंदौर में बनेगा अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

 अधोसंरचना विकास कार्यों की वृहद समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में एमजीएम मेडिकल कॉलेज इन्दौर में प्रस्तावित नवीन आधुनिक चिकित्सालय भवन सहित विभिन्न विकास कार्यों पर चर्चा कर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में चिकित्सा अधोसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इन्दौर में प्रस्तावित नवीन आधुनिक चिकित्सालय भवन के निर्माण से बिस्तरों की संख्या में वृद्धि होगी, साथ ही विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों, अत्याधुनिक आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, आधुनिक रेडियोलॉजी एवं प्रयोगशाला सुविधाओं के माध्यम से मरीजों को बेहतर एवं त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रस्तावित अत्याधुनिक आकस्मिक चिकित्सा विभाग इन्दौर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा सिद्ध होगा। साथ ही चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, अध्ययन क्षेत्र तथा प्रशिक्षण विधाओं का भी विकास किया जा रहा है। परिसर में आंतरिक मार्गों के चौड़ीकरण, समुचित पार्किंग व्यवस्था, आधुनिक लॉन्ड्री, सीएसएसडी, सेंट्रल लैब, ब्लड बैंक तथा सीवरेज और ईफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण एवं अधोसंरचना विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, ताकि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकतम लाभ मिल सके। बैठक में आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस, एमडी बीडीसी सिबी चक्रवर्ती सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि नवीन चिकित्सालय भवन को भवन विकास नियमन एवं मानदण्डों के अनुसार उच्च-भवन के रूप में सभी आवश्यक बिल्डिंग सर्विसेस के साथ विकसित किया जाएगा। इसमें कुल लगभग 1450 बिस्तरों की व्यवस्था प्रस्तावित है, जिसमें मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, मातृत्व एवं शिशु, नेत्र, त्वचा, ईएनटी तथा इमरजेंसी मेडिसिन जैसे विभिन्न विभाग शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त 200 बिस्तरीय आईसीयू यूनिट, 16 मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, 2 इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर, आधुनिक रेडियोलॉजी विभाग, सेंट्रल लैब एवं ब्लड बैंक जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित भवन, वर्तमान सुपर स्पेशियलिटी भवन एवं निर्माणाधीन कैंसर चिकित्सालय के मध्य निर्मित किया जाएगा, जिससे सभी चिकित्सा सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। साथ ही 210 बिस्तरीय अत्याधुनिक आकस्मिक चिकित्सा विभाग भी स्थापित किया जाएगा, जो इन्दौर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के रोगियों के लिए और अधिक सुविधाजनक होगा। परियोजना अंतर्गत नर्सिंग महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए 550 बिस्तरीय नवीन छात्रावास, 250 सीट क्षमता का मिनी ऑडिटोरियम, विभिन्न संकायों के अध्ययन क्षेत्र, प्रयोगशालाएँ तथा प्राध्यापकों के कक्ष भी विकसित किए जाएंगे। परिसर में आंतरिक मार्गों का चौड़ीकरण, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, आधुनिक लॉन्ड्री, सीएसएसडी, स्टोर तथा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं ईफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।  

उपभोक्ता गैस बुकिंग के लिये करें डिजिटल माध्यम का प्रयोग : अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती शमी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम के मद्देनजर अधिकारियों को प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने मंत्रालय मे खाद्य विभाग के अधिकारियों तथा ऑयल कंपनियो के प्रतिनिधियों के साथ पेट्रोल, डीजल, पीएनजी, सीएनजी तथा घरेलू गैस की आपूर्ति के संबंध मे समीक्षा की। एसीएस श्रीमती शमी द्वारा सिलेन्डर की वितरण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये गये हैं। ऑयल कंपनियो के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि कंपनियो ने मोबाइल एप, एसएमएस, व्हाट्सएप तथा आईवीआरएस कॉल द्वारा गैस बुकिंग की सुविधा प्रदान की गयी है। उपभोक्ता बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यम का प्रयोग करें तथा अनावश्यक रूप से एजेंसी पर जाने से बचें। ऑयल कंपनियो के प्रतिनिधि द्वारा यह भी बताया गया कि रविवार 15 मार्च को अवकाश के बाद भी तीनों गैस कंपनियों द्वारा लगभग 1,20,000 गैस सिलेन्डर घरेलू उपभोक्ताओं को प्रदान करने के लिए उपलब्ध कराये गए हैं। 1116 स्थानों पर कार्यवाही कर 1825 सिलेंडर जप्त गैस एजेंसियों के संचालन, सिलेंडर वितरण की समयबद्धता और उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की गयी। सभी जिला कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि सूचना-तंत्र सुदृढ़ कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करें। यदि कहीं वितरण व्यवस्था में अनियमितता या विलंब की शिकायत मिलती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए। प्रदेश में एलपीजी की कालाबाजारी तथा जमाखोरी के विरूद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश में 1116 स्थानों पर कार्यवाही कर 1825 सिलेंडर जब्त किये गए तथा 08 प्रकरण में एफआईआर की गयी। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी तथा घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता के सम्बन्ध में ऑयल कंपनियों से समन्वय के लिए राज्य स्तर पर 6 सदस्यीय समिति भी गठित की गयी है, जो प्रदेश में कामर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी करेगी। औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थाओ से आग्रह किया गया है कि वे उपलब्धता अनुसार पीएनजी के कनेक्शन लें। पीएनजी की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और आगे भी जारी रहेगी। ऑयल कंपनी के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री अजय श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, घरेलू पीएनजी तथा सीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही गैस सिलेण्डर का पर्याप्त स्टॉक है। प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेण्डर उपलब्ध हैं। घरेलू उपभोक्ताओं से अपील की गयी है कि विगत अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद पुनः बुकिंग करायें। प्रशासन द्वारा वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह भी दी गयी है। जिन कार्यों में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति जारी है, उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अफवाहों से भ्रमित न हों। देश की रिफायनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सिलेण्डर बुकिंग संबंधित शिकायत / सुझाव हेतु इन टोल फ्री नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है : भारत गैस हेल्पलाइन नंबर – 1800-22-4344 (टोल फ्री) इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर- 1800-2333-555 (टोल फ्री) एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर- 1800-2333-555 (टोल फ्री)

लघु कृषकों को उन्नत खेती के लिए किराये पर उपलब्ध कराये जाएंगे कृषि यंत्र

प्रत्येक विधानसभा में आयोजित होंगे कृषि सम्मेलन डेढ़ साल में प्रदेश का दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर हुआ 12.50 लाख लीटर प्रतिदिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री द्वय श्री जगदीश देवड़ा और श्री राजेन्द्र शुक्ल सहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पवार सहित मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि, एफपीओ के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मध्यप्रदेश के पुराने विधानसभा भवन का पवित्र स्थान है। इस स्थान पर कृषक कल्याण योजनाओं पर केन्द्रित कार्यशाला राज्य सरकार के कृषि क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।उन्हें साकार करने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध कलेक्शन 25 प्रतिशत बढ़ा है। अब प्रदेश में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध कलेक्शन किया जा रहा है। दूध का मूल्य भी 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र में नरवई प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीन उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण के लिए माता यशोदा योजना शुरू करने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्रों की दुकानें खुलेंगी, जिनसे लघु कृषकों को खेती के लिए किराये पर यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करें, इसके लिए कृषि विभाग ने प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपए आवंटित करने का निर्णय किया है। इन प्रयासों से कृषि कल्याण के लिए सकारात्मक वातावरण बनेगा। किसान सौर बिजली उत्पादन की सभी योजनाओं का लाभ उठाएं। लघु-कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए भी कार्य करें। प्रदेश प्रभारी श्री महेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश अब हजार और लाख में नहीं, मिलियन, बिलियन और ट्रिलियन में बात करने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से कृषि में चौथे स्थान पर है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश कई खाद्यान्नों के उत्पादन में देश में, पहले और दूसरे स्थान पर हैं। मध्यप्रदेश चौथे स्थान पर भी रहते हुए देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के किसानों को सस्ती दरों पर बिजली और सिंचाई के लिए पम्प उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 54 लाख हैक्टेयर है। राज्य सरकार ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के सपने को साकार करते हुए सिंचाई का रकबा आगामी वर्षों में 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में दूध एवं डेयरी क्षेत्र में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी के साथ बढ़ी है। इसी प्रकार प्रदेश का बजट वर्ष 2003-24 में 23 हजार था, जो अब 4 लाख 38 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मंत्री सुश्री भूरिया करेंगी अध्यक्षता

भोपाल केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए-कारा), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से दिव्यांग बच्चों के पारिवारिक पुनर्वास और दत्तक-ग्रहण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्य क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन 17 मार्च मंगलवार को भोपाल में किया जाएगा। कार्यशाला की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया करेंगी। यह कार्यशाला सीएआरए के दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान 2025-26 की थीम “विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना” के अनुरूप की जा रही है। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को संस्थागत देखभाल के बजाय पारिवारिक वातावरण, स्नेह, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करना है। मध्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्य शामिल हैं। जिलों की संख्या के लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा क्षेत्र है। कार्यशाला में 170 से अधिक जिलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी अपेक्षित है। अभियान में आयोजित होने वाली यह सबसे व्यापक क्षेत्रीय परामर्श बैठकों में से एक होगी। कार्यशाला में राज्य दत्तक संसाधन एजेंसियों (एसएआरए-सारा), विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरणों, बाल देखभाल संस्थानों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा बाल संरक्षण से जुड़े अन्य प्रमुख हितधारकों की सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम के दौरान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण की राज्यवार स्थिति, उत्कृष्ट प्रथाओं, सफल दत्तक-ग्रहण के प्रेरणादायक अनुभवों और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही समूह चर्चाओं के माध्यम से क्रियान्वयन योग्य और समयबद्ध अनुशंसाएँ तैयार की जाएंगी। चिकित्सा, विधिक, वित्तीय और शिकायत निवारण से जुड़ी चुनौतियों पर भी विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। इस अवसर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सफल दत्तक ग्रहण पर आधारित एक लघु फिल्म की भी लाँचिंग की जाएगी, जो परिवार आधारित देखभाल की परिवर्तनकारी शक्ति को रेखांकित करेगी। परामर्श कार्यशाला से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने, प्रणालीगत कमियों की पहचान करने और नीति स्तर पर ठोस सुझाव तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण और पुनर्वास को अधिक प्रभावी, समावेशी और बाल-केंद्रित बनाया जा सके।  

प्रदेश में 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान] 100 दिवसीय अभियान में जल संरक्षण के होंगे कार्य

म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।  

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