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“मैं इतना बड़ा सेक्युलर नेता हूं, फिर भी मुझसे गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए कांग्रेस ने संपर्क तक नहीं किया” – एचडी देवेगौड़ा

“मैं इतना बड़ा सेक्युलर नेता हूं, फिर भी मुझसे गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए कांग्रेस ने संपर्क तक नहीं किया” – जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवेगौड़ा ने कहा

महाराष्ट्र: सतारा में भिड़े दो समुदाय के लोग, पथराव और आगजनी में 4 घायल; इंटरनेट सेवा बंद

महाराष्ट्र: सतारा में भिड़े दो समुदाय के लोग, पथराव और आगजनी में 4 घायल; इंटरनेट सेवा बंद

विधायक आलोक चतुर्वेदी ने किया 2 हजार मजदूरों को सम्मानित !!

विधायक आलोक चतुर्वेदी ने किया 2 हजार मजदूरों को सम्मानित !! सम्मान पाकर खुश हुए मजदूर, कहां आज जिस तरह चाचा ने मजदूरों को सम्मान दिया है उसी तरह मजदूर भी पज्जन चाचा के साथ है !!

भाजपा विधायक सुशील इंदू तिवारी के कथित भ्रष्टाचार की फाईल लेकर उनके सगे भाई राजेन्द्र तिवारी पहुंचे भोपाल

भाजपा विधायक सुशील इंदू तिवारी के कथित भ्रष्टाचार की फाईल लेकर उनके सगे भाई राजेन्द्र तिवारी पहुंचे भोपाल मप्र पनागर के भाजपा विधायक सुशील इंदू तिवारी के कथित भ्रष्टाचार की फाईल लेकर उनके सगे भाई राजेन्द्र तिवारी पहुंचे भोपाल !

सिंधिया समर्थकों के पैरों तले खिसकती जमीन।

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ अन्य छोटे बड़े दलों के नेता अपनी अपनी दावेदारी पेश करने में जुटे हुए हैं इस चुनाव को लेकर शहर में चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। यदि इन चर्चाओं पर गौर किया जाए तो शहर के उन बड़े नेताओं के पैरों तले से जमीन खिसकती नजर आ रही है। जो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं और अपने महाराज का साथ निभाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि अपनी-अपनी विधायकी भी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इनमें से कुछ नेता तो उपचुनाव में ही अपनी सीट हारने के बाद कहीं के नहीं रहे। और जो चुनाव जीत भी गए उनका वर्तमान चुनाव से पहले ही बुरा हाल है। सबसे पहले बात करते हैं ग्वालियर पूर्व विधानसभा की, जो की सबसे हॉट सीट मानी जाती है क्योंकि दोनों केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया इसी विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं। यहां से दो बार हारने के बाद वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे मुन्नालाल गोयल की। जो सिंधिया समर्थक होने के चलते उनके पीछे-पीछे कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए और 2020 के उपचुनाव में भाजपा छोड़ कांग्रेस में पहुंचे सतीश सिंह सिकरवार से चुनाव हारकर विधायकी भी गवां बैठे। मुन्नालाल गोयल वैश्य वर्ग से आते हैं और इनके विधानसभा क्षेत्र में वैश्य समाज का वोट बड़ी तादाद में है लेकिन चर्चा तो यह भी है कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्टी से भितरघात करने के कारण अपने समाज का भी पूर्ण समर्थन नहीं मिला। सिंधिया समर्थक होने के चलते राज्यमंत्री दर्जा मिला तो सोचा चलो अगला चुनाव लड़ेंगे। जिसके लिए लगातार क्षेत्र की जनता से जुड़ने का प्रयास करते रहे लेकिन आगामी चुनाव से पहले ही चर्चा जोरों पर है कि इसबार टिकिट मिलना मुश्किल है। यदि महाराज के प्रयासों से टिकिट मिल भी गया तो क्या इन्हें जनता स्वीकार करेगी या फिर एक बार कांग्रेस पर विस्वास जताएगी। अब देखना यह है कि यदि टिकिट नहीं मिला तो नेताजी क्या करेंगे। किसी दूसरी पार्टी का दामन थाम कर चुनाव मैदान में उतरेंगे या फिर घर बैठकर अपनी गलती पर पछताएंगे। यहां पार्टी बदलने की बात कहना इसलिए जरूरी है क्योंकि मुन्नालाल गोयल अपना पहला चुनाव जनतादल के झंडे के नीचे लड़कर पार्षद बने। जिसके बाद समाजवादी पार्टी का झण्डा उठाया और फिर कांग्रेस में पहुंचे बाद में कांग्रेस की सरकार गिराकर भाजपा में शामिल हो गए। इनके लिए पार्टी बदलना कोई नई बात नहीं है। अब बात करते हैं ग्वालियर विधानसभा की जहां से वर्तमान में सिंधिया खेमे के ही प्रधुमन सिंह तोमर विधायक हैं और शिवराज सरकार में मंत्री हैं। कुछ महीने की कमलनाथ सरकार को गिराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ अहम भूमिका निभाने वाले प्रधुमन सिंह तोमर कट्टर सिंधिया समर्थक बताये जाते हैं। भाजपा में आने के बाद प्रधुमन सिंह तोमर उपचुनाव में अपनी सीट बचाने में सफल रहे और शिवराज सरकार में मंत्री भी बने लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में इनके क्षेत्र की जनता में इनके प्रति बहुत ज्यादा नाराजगी नजर आ रही है। जिसकी एक बड़ी वजह है क्षेत्र में विकास के नाम पर हुई बेतहाशा तोड़-फोड़ और हजीरा चौराहे की वर्षों पुरानी सब्जीमंडी को प्रसाशन द्वारा जबरन खाली कराकर मंडी को दूसरी जगह स्थानांतरित करना। यहां गौरतलब है कि इस विधानसभा क्षेत्र में गरीब वर्ग का वोटर बड़ी तादाद में है जो सब्जी, फल या खान-पान का कारोबार मंडी परिसर में ओर सड़कों के किनारे हाँथठेलो पर करता है। अब प्रशासन इनके ठेले जबरन इंटक मैदान में लगवाता है। जहां इनका कारोबार ठीक से नहीं चलता जिसके चलते यह वर्ग आर्थिक रूप से परेशान है। जबकि मंत्री जी जब 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे तब ठेला कारोबारियों से वादा किया था कि सब्जीमंडी नहीं हटेगी। इलाके में बेबजह तोड़फोड़ नहीं होगी लेकिन कांग्रेस छोड़ने और 2020 के उपचुनाव में जीतकर भाजपा सरकार में मंत्री बनने के बाद जनता से किया वादा भूल गए। अब जनता तो नाराज होगी ना और जनता तो चुनाव में ही नेता का हिसाब बराबर करती है। इसके साथ ही इस विधानसभा क्षेत्र में दूसरा बड़ा वर्ग क्षत्रीय (राजपूत) समाज का है और प्रधुमन सिंह तोमर खुद इसी वर्ग से हैं। कुछ सामाजिक और कुछ राजनीतिक व विकास कार्यों को लेकर मंत्री जी से अपने ही समाज की नाराजगी भी बड़े नुकसान की वजह बनती दिखाई दे रही है। जिस तरीके से क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है उसके हिसाब से तो मंत्री जी मामला खटाई में नजर आ रहा है। जब चर्चा ग्वालियर में सिंधिया गुट की हो और डबरा विधानसभा की बात न कि जाए तो बहुत नाइंसाफी होगी। चलो आपको यहां की चर्चाओं से भी अवगत कराते हैं। यहां से यह विधानसभा सीट भी जिले की हॉट सीट मानी जाती है क्योंकि यह प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का गृह नगर है लेकिन कांग्रेस के अभेद्य किले के रूप में इस विधानसभा को देखा जाता है। 2008 में अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व होने के बाद से यह सीट कांग्रेस के कब्जे में है। डबरा विधानसभा सीट से 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में इमरती देवी ने चुनाव जीता था। इमरती देवी जो ज्योतिरादित्य सिंधिया की कट्टर समर्थक हैं, 2020 में सिधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद इमरती भी भाजपा में शामिल हो गईं थी। 2020 में डबरा सीट पर कराए गए उपचुनाव में इमरती देवी को कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे के हाथों हार का सामना करना पड़ा लेकिन महाराज की कृपापात्र होने के चलते चुनाव हारने के बाद भी मंत्री दर्जा प्राप्त हो गया। ऐसे में इस बार भी विधानसभा चुनाव में इमरती देवी और सुरेश राजे के बीच ही चुनावी मुकाबला होने के आसार हैं। सिंधिया की करीबी होने के चलते इमरती देवी का टिकट लगभग तय माना जा रहा है लेकिन क्या इमारती देवी अपने क्षेत्र के वोटरों को अपने पक्ष में ला पाएंगी या फिर यहां पूर्व की तरह कांग्रेस का ही झंडा बुलंद होगा। खैर जो भी चर्चायें हैं वह तो टिकिट बंटने ओर चुनाव होने तक चलती … Read more

घोषणा तो हो गई लेकिन हितग्राहियों की शिकायत है कि सावन बीत जाने के बावजूद उन्हें नहीं मिला 450 में गैस सिलिंडर

मध्यप्रदेश में चुनाव में घोषणाओं के ऐलान पर ऐलान हो रहे है शिवराज सरकार ने पहले तो सावन में 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने की बात कही, लेकिन अब नया घोषणा सामने आयी. जिसके तहत अब पूरे साल में लाडली बहनों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर मिलेगा. गैस कंपनियों को सब्सिडी के पैसे सरकार की ओर दिया जाएगा. घोषणा तो हो गई लेकिन हितग्राहियों की शिकायत है कि सावन बीत जाने के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिला. दूसरी तरफ गैस एजेंसी के कर्मचारी भी असमंजस में हैं. एक हकीकत ये भी है कि राज्य में कई बहनें तो ऐसी हैं जिन्हें अभी तक उज्जवला का लाभ ही नहीं मिला.

राजस्व विभाग ने नायब तहसीलदार को राजपत्रित अधिकारी द्वितीय श्रेणी घोषित किया, आदेश जारी

राजस्व विभाग ने नायब तहसीलदार को राजपत्रित अधिकारी द्वितीय श्रेणी घोषित किया, आदेश जारी मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग ने नायब तहसीलदार को राजपत्रित अधिकारी द्वितीय श्रेणी घोषित कर दिया है। नायब तहसीलदार से तहसीलदार के पद पर प्रमोशन का रास्ता भी खुल गया है।

नर्मदापुरम के पूर्व विधायक गिरिजा शंकर शर्मा और टीकमगढ़ जिले के कई बीजेपी नेता अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए।

नर्मदापुरम के पूर्व विधायक गिरिजा शंकर शर्मा और टीकमगढ़ जिले के कई बीजेपी नेता अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए। नर्मदापुरम जिले से दो बार विधायक रहे गिरिजा शंकर शर्मा शर्मा ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की । कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चैहान की झूठ बोलने की मशीन दो गुनी रफ्तार से चल रही है।

न तुम जानो न हम

मध्य प्रदेश, भोपाल. भारतीय जनता पार्टी ने कुछ सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित होने के बाद बाकी सीटों के लिए नेताओं की उम्मीदें और प्रयास भी बढ़े हैं, लेकिन मामला केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में होने से प्रदेश के प्रमुख नेता भी किसी को कुछ अस्वासन नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में कुछ नेताओं ने पार्टी भी छोड़ी है और कुछ दूसरे विकल्पों की तरफ देख रहे हैं।

कटनी, नगर निगम में वाहन खरीदी में हुए भ्रष्टाचार का मामला दिन प्रतिदिन तूल पकड़ रहा है

पूर्व में नगर निगम अध्यक्ष द्वारा पत्र दिए जाने के बाद अब नगर निगम नेता प्रतिपक्ष ने उक्त सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने और आगामी परिषद की बैठक में चर्चा कराने को लेकर नियम 17 मध्यप्रदेश नगर पालिका (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया) नियम 2005 के अन्तर्गत नगर निगम अध्यक्ष को पत्र लिखा है नेता प्रतिपक्ष रागिनी मनोज गुप्ता ने बताया कि इन दिनों नगर निगम में भ्रष्टाचार हावी है पूर्व में महापौर द्वारा भी सड़क और नाली निर्माण में भ्रष्टाचार को लेकर पत्र लिखा जा चुका है और एल ई डी लाइट में भ्रष्टाचार की बात भी सामने आ चुकी है इन दिनों नगर निगम में कमीशनबाजी के खेल के चलते नगर निगम भ्रष्टाचारियों का अड्डा बन गया है स्ट्रीट लाइट के लिए किए गए टेंडर में भी ठेकेदार द्वारा घटिया लाइट प्रदान की गई है जो कि वार्डो में लगते ही बंद होने की शिकायते आने लगी है और निविदा में अधिरोपित शर्तों के बाद भी ठेकेदार द्वारा एल ई डी लाइट बदलकर नहीं दी जा रही है और शहर में अंधकार मचा हुआ है सड़क और नाली के निर्माण में 25 प्रतिशत से भी कम राशि में ठेकेदारों द्वारा टेंडर लिया जा रहा है और वार्डो में गुणवत्ता विहीन काम करके और कार्यों की नाप जोख में भ्रष्टाचार कर जनता की टैक्स की गाढ़ी कमाई में चूना लगाया जा रहा है इसी प्रकार नगर निगम द्वारा कचरा संग्रहण करने वाली एम एस डब्ल्यू कम्पनी को भी भ्रष्टाचार में सहयोग किया जा रहा है नियम विपरीत उक्त कम्पनी को जनता से स्वच्छता शुल्क वसूलकर दिया जा रहा है और अब वाहन भी खरीदकर दिए जा रहे है जबकि वाहन खरीदी करने और बदलने का उत्तरदयित्व एम एस डब्ल्यू कम्पनी का है वाहन खरीदी में हुए भ्रष्टचार की जांच करने और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए नेता प्रतिपक्ष द्वारा पत्र लिखा गया है और मांग करते हुए कहा है कि यदि महापौर द्वारा उक्त पत्र को ग्राहय कर निगम परिषद में जानकारी प्रदान नहीं की गई और चर्चा नहीं कराई जाती है तो इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्षद दल जनता की अदालत में जाकर दोषियों को जनता के सामने लाने का काम करेगी

इलेक्शन कमिशन ऑफ़ इंडिया ने EVM को लेकर सुप्रीम कोर्ट को दिया अस्वासन

इलेक्शन कमिशन ऑफ़ इंडिया ने EVM को लेकर सुप्रीम कोर्ट को दिया अस्वासन इलेक्शन कमिशन ऑफ़ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि EVMs को हैक नहीं किया जा सकता और नहीं खिलवाड़ किया जा सकता है। 450 पेजों के एक अफिडेविट में, चुनाव आयोग ने कहा कि EVMs “पूरी तरह से एकल मशीनें हैं जिनमें एक बार के लिए प्रोग्राम किए जाने वाले चिप्स हैं।”

राजनीतिक सौहार्द धूमिल, 3 साल से नहीं भरा गया विधानसभा उपाध्यक्ष का पद

राजनीतिक सौहार्द धूमिल, 3 साल से नहीं भरा गया विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भोपाल. प्रदेश की राजनीति में ऐसा पहली बार हुआ जब विधानसभा उपाध्यक्ष का पद 3 साल से भरा नहीं जा सका। ऐसा सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक सौहार्द नहीं होने की वजह से हुआ। अब यह भरा भी नहीं जायेगा, क्योंकि अगले माह विधानसभा आम चुनाव की आचार संहिता लग जायेगी। वर्ष 1956 में मप्र के गठन के बाद से विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को न देने की आम परम्परा थी। हालांकि नर्मदा प्रसाद श्रीवास्तव पहली बार विरोधी दल की ओर से वर्ष 1962 में उपाध्यक्ष चुने गये। वर्ष 1964 में भी वे पुनः उपाध्यक्ष बने, परन्तु इसके बाद 3 मार्च 1990 तक किसी विपक्षी विधायक को उपाध्यक्ष का पद नहीं दिया गया। पटवा ने विधानसभा उपाध्यक्ष के पद विपक्ष को सौंपा था भाजपा के कद्दावार नेताओं का हमेशा राजनीतिक सुचिता का दावा करते रहे हैं। इसी कड़ी में 90 के दशक में मप्र में भाजपा की सरकार के आने पर पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा ने राजनैतिक सौहार्द्र दिखाते हुये विधानसभा का उपाध्यक्ष पद विपक्षी दल कांग्रेस को सौंपा तथा कांग्रेस विधायक श्रीनिवास तिवारी 23 मार्च 1990 से 15 दिसम्बर 1992 तक उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद कांग्रेस की सरकार आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी राजनैतिक सौहार्द्र की इस परिपाटी को आगे बढ़ाया और उनके दस साल के कार्यकाल में विपक्षी दल भाजपा के भेरुलाल पाटीदार 28 दिसम्बर 1993 से 1 दिसम्बर 1998 तक और ईश्वरदास बनाया गया है। रोहाणी 11 फरवरी 1999 से 5 दिसम्बर 2003 तक उपाध्यक्ष रहे। तत्पश्चात पुनः भाजपा की तीन बार सरकार आने पर विपक्षी दल कांग्रेस के क्रमशः हजारीलाल रघुवंशी 18 दिसम्बर 2003 से 11 दिसम्बर 2008 तक, हरवंश सिंह 13 जनवरी 2009 से 14 मई 2013 तक तथा राजेन्द्र कुमार सिंह 10 जनवरी 2014 से 13 दिसम्बर 2018 तक उपाध्यक्ष रहे। कमलनाथ के आने पर टूटी परंपरा 2018 में कांग्रेस सत्ता में लौटी। लंबे समय से संसदीय कार्य का अनुभव उठाने वाले रखने वाले कमलनाथ मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस की सरकार आने पर यह राजनैतिक सौहार्द्र टूट गया। तत्कालीन सीएम कमलनाथ के पन्द्रह मह के कार्यकाल में उनकी ही पार्टी की हिना कांवरे 10 जनवरी 2019 से 24 मार्च 2020 तक उपाध्यक्ष रहीं। परन्तु इसके बाद भाजपा की सरकार के आने बाद पक्ष या विपक्ष से किसी को भी अब तक उपाध्यक्ष नहीं बनाया।

आशीष खरें हो सकते है पवई विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार

आशीष खरें हो सकते है पवई विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार पन्ना जिले की जनपद पंचायत शाहनगर के अध्यक्ष आशीष खरें पवई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते है आशीष खरें जनपद पंचायत शाहनगर के अध्यक्ष है पवई विधानसभा क्षेत्र में प्रशासन एवं सरकार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है, जनपद पंचायत शाहनगर के अध्यक्ष आशीष खरे क्षेत्रीय संघर्ष समिति पवई विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से प्रबल दावेदार माने जा रहे है,

गठबंधन की ओट में सनातन धर्म पर चोट।

ग्वालियर। कांग्रेस पार्टी द्वारा क्षेत्रीय घटक दलों को साथ लेकर बनाये गए I.N.D.I.A गठबंधन का असली चेहरा सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रमुख विरोधी के रूप में खुलकर उजागर हो रहा है। ऐसा लगता है जैसे देश मे विपक्षी राजनीतिक दलों के द्वारा सनातन धर्म को लेकर खुद को सबसे बड़ा सनातन संस्कृति का विरोधी दिखाने की एक होड़ सी लगी हुई है। कांग्रेस एवं सहयोगी विपक्षी दलों द्वारा लगातार सनातन धर्म एवं संस्कृति को लेकर जिस तरह की अमर्यादित, अनर्गल एवं धर्म विरोधी और अपमानजनक भाषा का उपयोग करते हुए सनातन धर्म का अपमान किया जा रहा है। वह इस I.N.D.I.A गठबंधन को ही पतन की ओर ले जाता दिखाई दे रहा है। जहाँ एक ओर कांग्रेस विपक्षी दलों को साथ लेकर बनाए गए I.N.D.I.A गठबंधन के भरोसे भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए हुंकार भर रही है। वहीं गठबंधन के द्वारा लगातार सनातन धर्म पर तीखे प्रहार कर समस्त सनातनियों को अपमानित कर रही है। अभी हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री स्टॉलिन के बेटे एवं कर्नाटक सरकार में खेल मंत्री उदय निधी स्टॉलिन ने जिस तरह सनातन धर्म की तुलना कॉरोना वायरस और डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियों से करते हुए सनातन धर्म को समाप्त करने की बात कही गई है। वह बहुत ही गंभीर एवं चिंताजनक है। इसके भी दो कदम आगे आकर कर्नाटक सरकार के ही एक ओर मंत्री जी परमेश्वर द्वारा सनातन हिन्दू धर्म का अपमान करते हुए यहां तक कह दिया कि जैन और बौद्ध धर्म का उदय भारत में हुआ है और ईसाई और इस्लाम धर्म बाहर से भारत में आये हैं लेकिन हिन्दू धर्म का कहीं कोई इतिहास नहीं मिलता है। जबकि इसके पूर्व गठबंधन के प्रमुख घटक दल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी कभी सनातनियों के प्रमुख धार्मिक ग्रंथ श्री राम चरित मानस का खुले आम अपमान किया तो कभी अयोध्या में राम मंदिर, काशी के विश्वनाथ मंदिर, उत्तराखंड के प्रमुख केदारनाथ सहित तमाम हिंदु मंदिरों को बौद्धमठ तोड़कर बनाया जाना बताकर एक नया विवाद खड़ा करते हुए देश की शांति और धार्मिक सदभावना को तोड़ने का प्रयास किया। इतना ही नहीं खुद कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी द्वारा कई वार हिन्दू धर्म को लेकर विवादित बयान दिए गए हैं। अपने आप को जनेऊधारी ब्राह्ममण बताने वाले राहुल गांधी तो यहाँ तक कह चुके हैं कि हिन्दू मंदिरों में लोग लड़कियां छेड़ने जाते हैं। इस तरह के एक नहीं कई बयान हैं। जिनमें कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे सहित कई नेताओं द्वारा हिन्दू धर्म के ऊपर कुठाराघात किया गया है। यहाँ गौरतलब है कि कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े नेताओं को सिद्ध सनातन हिंदु धर्म और भारत देश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों को अपमानित करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि जिस तरह लगातार सनातन धर्म एवं संस्कृति का अपमान किया जा रहा है। इस अपमान से आक्रोशित होकर यदि सनातनियों ने एकजुटता दिखाई तो भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल करने का सपना देख रहे कांग्रेसनीत I.N.D.I.A गठबंधन के दिग्गज नेताओं को अपनी-अपनी सीटों को बचाने के लाले न पड़ जाएं और भाजपा विहीन भारत का स्वपन कहीं कांग्रेस सहित विपक्ष विहीन भारत में तब्दील न हो जाए।

“हम लोग हे राम वाले हैं, जय श्रीराम वाले नहीं, जय श्रीराम वाले दंगा-हत्या कराते हैं”- RJD के नेता जगदानंद सिंह

“हम लोग हे राम वाले हैं, जय श्रीराम वाले नहीं, जय श्रीराम वाले दंगा-हत्या कराते हैं”- RJD के नेता जगदानंद सिंह RJD के नेता जगदानंद सिंह का विवादित बयान

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