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महाराष्ट्र की कानून व्यवस्था खराब, सिर्फ इस्तीफे से काम नहीं चलेगा: आदित्य ठाकरे

मुंबई महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और अजित पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता धनंजय मुंडे ने पद से इस्तीफा दे दिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी जानकारी दी. धनंजय मुंडे के PA प्रशांत जोशी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास पहुंचकर उन्हें मुंडे का इस्तीफा सौंपा था. फडणवीस ने कहा कि मुंडे ने मुझे अपना इस्तीफा भेजा है. मैंने इसे स्वीकार कर लिया है और इसे राज्यपाल को भेज दिया है. दरअसल सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड में महाराष्ट्र की महायुति सरकार में मंत्री रहे धनंजय मुंडे विवादों में घिर गए थे. एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मीक कराड को बीड जिले में जबरन वसूली का विरोध करने वाले सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मास्टरमाइंड के रूप में नामजद किया था. इससे पहले देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल को पत्र लिखकर कहा था कि धनजंय मुंडे को मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. धनजंय मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मीक कराड और उसके 6 गुर्गों को इस साल जनवरी में महाराष्ट्र पुलिस ने मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट, 1999) के तहत गिरफ्तार किया था. वाल्मीक कराड सरपंच हत्याकांड का मास्टरमाइंड एसआईटी द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, वाल्मीक कराड बीड सरपंच संतोष देशमुख की हत्या का मास्टरमाइंड था. कराड ने बीड में मौजूद एक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Avaada के भूमि अधिग्रहण अधिकारी से दो करोड़ की फिरौती मांगी थी. जब बीड के सरपंच संतोष देशमुख ने कराड और उसके सहयोगियों को कंपनी से जबरन वसूली करने से रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने उनकी हत्या की साजिश रची. एसआईटी ने अदालत के समक्ष सबूत के तौर पर आरोपियों से बरामद फोन कॉल की रिकॉर्डिंग और फॉरेंसिक लैब द्वारा प्रमाणित सीसीटीवी फुटेज पेश किए थे. चार्जशीट में वाल्मीक कराड के बाद सुदर्शन घुले को आरोपी नंबर दो बताया है. वह दस साल से अधिक समय तक बीड और पड़ोसी इलाकों में संगठित अपराध का हिस्सा था. उसके खिलाफ पहले से ही 11 आपराधिक मामले चल रहे हैं. आरोप पत्र में उसे ‘गैंग लीडर’ बताया गया है.  

चीफ मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को BSP से निकाला बाहर, ससुर बने वजह?

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखया है। उन्होंने ट्वीट कर ये जानकारी दी है। मायावती ने कल ही आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाया था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा-“बीएसपी की आल-इण्डिया की बैठक में कल आकाश आनन्द को पार्टी हित से अधिक पार्टी से निष्कासित अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में लगातार बने रहने के कारण नेशनल कोआर्डिनेटर सहित सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, जिसका उसे पश्चताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी.” पूर्व सीएम ने आगे लिखा-“लेकिन इसके विपरीत आकाश ने जो अपनी लम्बी-चौड़ी प्रतिक्रिया दी है वह उसके पछतावे व राजनीतिक मैच्युरिटी का नहीं बल्कि उसके ससुर के ही प्रभाव वाला ज्यादातर स्वार्थी, अहंकारी व गैर-मिशनरी है, जिससे बचने की सलाह मैं पार्टी के ऐसे सभी लोगों को देने के साथ दण्डित भी करती रही हूँ.” उन्होंने लिखा-“अतः परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट के हित में तथा मान्यवर कांशीराम की अनुशासन की परम्परा को निभाते हुए आकाश आनन्द को, उनके ससुर की तरह, पार्टी व मूवमेन्ट के हित, में पार्टी से निष्कासित किया जाता है.” ससुर अशोक सिद्धार्थ को बताया था जिम्मेदार बता दें कि 2 मार्च (रविवार) को लखनऊ में हुई बसपा की राष्ट्रीय स्तर की बैठक के बाद मायावती ने बयान जारी कर कहा था कि पार्टी हित में आकाश आनंद को इसकी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है. इस बयान में कहा गया था कि इस कार्रवाई के लिए पार्टी नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ जिम्मेदार हैं. क्या बोले थे आकाश आनंद वहीं बसपा से सभी जिम्मेदारियों से मुक्त होने पर आकाश आनंद ने एक्स पर पोस्ट कर कहा-“मैं परमपूज्य आदरणीय बहन कु. मायावती का कैडर हूं, और उनके नेतृत्व में मैंने त्याग, निष्ठा और समर्पण के कभी ना भूलने वाले सबक सीखे हैं, ये सब मेरे लिए केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य हैं. आदरणीय बहन जी का हर फैसला मेरे लिए पत्थर की लकीर के समान है, मैं उनके हर फैसले का सम्मान करता हूं उस फैसले के साथ खड़ा हूं. आदरणीय बहन कु. मायावती द्वारा मुझे पार्टी के सभी पदों से मुक्त करने का निर्णय मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भावनात्मक है, लेकिन साथ ही अब एक बड़ी चुनौती भी है, परीक्षा कठिन है और लड़ाई लंबी है. कल आकाश आनंद को दी गई थी चेतावनी मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, “बीएसपी की आल-इण्डिया की बैठक में कल आकाश आनन्द को पार्टी हित से अधिक पार्टी से निष्कासित अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में लगातार बने रहने के कारण नेशनल कोआर्डिनेटर सहित सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, जिसका उसे पश्चताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी.” आकाश आनंद को मायावती ने बताया ‘अहंकारी’ मायावती ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि लेकिन आकाश आनंद की प्रतिक्रिया उम्मीदों के विपरीत रही. उन्होंने एक लम्बी प्रतिक्रिया दी, जिसे मायावती ने अहंकारी और गैर-मिशनरी करार दिया. उन्होंने इसे केवल स्वार्थी रवैया बताया, जो पार्टी की विचारधारा और मिशन से मेल नहीं खाता. अपने पोस्ट में मायावती ने उन सभी पार्टी सदस्यों को भी चेतावनी दी, जो इस तरह के व्यवहार करते हैं. मायावती ने “बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान मूवमेन्ट के महत्व” पर जोर देते हुए ये फैसला लिया. उन्होंने कहा कि यह कदम बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की अनुशासन की परम्परा को निभाने के लिए आवश्यक था.

कांग्रेस नेता ने रोहित को एक खिलाड़ी के तौर पर मोटा कहा और उनकी कप्तानी को ‘बेअसर’ बताया

नई दिल्ली  एक ओर रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम कमाल कर रही है और आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में लगातार 3 मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है तो दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने हिटमैन पर एक विवादित टिप्पणी कर दी है। कांग्रेस नेता ने रोहित को एक खिलाड़ी के तौर पर मोटा कहा और उनकी कप्तानी को ‘बेअसर’ बताया। इसके बाद तमामा क्रिकेट फैंस ने सोशल मीडिया पर शमा की पोस्ट पर कमेंट्स किए हैं। यह विवाद सोशल मीडिया पर शुरू हुआ। शमा मोहम्मद ने लिखा- रोहित शर्मा एक खिलाड़ी के रूप में मोटे हैं। उन्हें वजन कम करने की जरूरत है! और बेशक, भारत का सबसे बेअसर कप्तान। शमा की इस पोस्ट पर फैंस ने रोहित का बचाव किया और उनकी फिटनेस और कप्तानी का समर्थन किया। वहीं कुछ लोगों ने रोहित की फिटनेस पर सवाल भी उठाए। रोहित शर्मा भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक हैं। इस घटना ने भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की फिटनेस और कप्तानी के मानकों पर फिर से बहस छेड़ दी है। हालांकि, एक यूजर ने फिटनेस के मानकों से ऊपर उठने की बात करते हुए कहा- इस बात से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जब भारतीय टीम और उसके कप्तान को फैंस के सपोर्ट की जरूरत है तब एक पार्टी की नेता इस तरह की बॉडी शेमिंग करती हैं। एक निशांत नाम के यूजर ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए लिखा- आप अपने बॉस को देख लीजिए, जो राजनीति के लिए बिलकुल भी उपयुक्त नहीं है और चुनाव हारने का इतिहास बना रहे हैं। रोहित शर्मा ने हमें गौरवान्वित किया है, करते रहेंगे और करते रहेंगे। एक हरीष नाम के यूजर ने लिखा- एक ‘मोटे’ खिलाड़ी के पास राहुल गांधी से अधिक जीतें हैं और एक ‘मोटे’ खिलाड़ी के रूप में वह न केवल अपनी टीम में बल्कि पूरे भारत में आत्मविश्वास जगाने में सक्षम हैं। यह एक पार्टी के प्रतिनिधि की सहनशीलता है जहाa शारीरिक उपस्थिति प्रतिभा से अधिक महत्वपूर्ण है।

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा- हिंदू समाज एक रहेगा, तभी हम सुरक्षित रहेंगे

कोलकाता असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने हिंदू धर्म को खत्म करने की कसम खाई थी, लेकिन हिंदू धर्म खत्म नहीं हुआ, बल्कि औरंगजेब खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि आज मैं ममता बनर्जी और राहुल गांधी से कहना चाहूंगा कि अगर उन्हें लगता है कि वे हिंदू धर्म को खत्म कर सकते हैं, तो मैं उनसे कहना चाहूंगा कि हिंदू धर्म कभी खत्म नहीं होगा। कोलकाता में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हिंदुओं के पतन का कारण खुद हिंदू हैं। हिंदू धर्म कभी खत्म नहीं होगा। सनातन हमेशा से था और आगे भी हमेशा रहेगा। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि हिंदू समाज एक रहेगा, तभी हम सुरक्षित रहेंगे। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम वोट बैंक को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि मुस्लिम कभी भी विकास के आधार पर वोट नहीं देते हैं। मुख्यमंत्री बिस्वा सरमा ने कहा कि हमें यह सोचना चाहिए कि हम अपने जीवन में देश के लिए क्या कर सकते हैं। हमारा जीवन तभी सफल होगा, जब हम अपने राष्ट्र के काम आएंगे। हम न कुछ लेकर आए थे और न कुछ लेकर जाएंगे। अपने परिवार के साथ धर्म का काम करते रहे, यही कोशिश करनी चाहिए। हमें अपने देश के लिए थोड़ा बड़ा सोचना चाहिए। इस दौरान सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आज हमने स्वामी प्रदीप्तानंद को स्वामी विवेकानंद सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। भारत में जब भी हमारे धर्म पर कोई खतरा आया है, लोगों ने धर्म की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने हमेशा धर्म की रक्षा के रास्ते में आने वाली चुनौतियों को स्वीकार किया हे और सनातन धर्म के लिए सब कुछ करने का संकल्प लिया है। ऐसा व्यक्तित्व हमारे लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा है। मुख्यमंत्री सरमा ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छी शिक्षा व्यवस्था से हम पूरे समाज को सुधार सकते हैं। बंगाल की धरती हमें सिखाती है कि हमारी कोई जाति नहीं है, बल्कि हम हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी जी मां भारती के गौरवशाली संतान हैं। स्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किए हैं। उनके दिखाए गए रास्ते पर लोग आज भी चलते हैं, जिस पर चलकर लोगों का जीवन सफल हो जाता है।

आगामी चुनावों के लिए एकजुट हैं कांग्रेस नेता, तस्वीर पोस्ट कर राहुल गांधी बोले

नई दिल्ली  कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि केरल में पार्टी के नेता आगामी उद्देश्यों के मद्देनजर “एकजुट” हैं। गांधी का यह बयान शुक्रवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा केरल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले रणनीति को लेकर चर्चा के लिए ‘इंदिरा भवन’ में दक्षिणी राज्य के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद आया है। बैठक के बाद केरल के नेताओं द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी की तस्वीर पोस्ट करते हुए गांधी ने फेसबुक पर लिखा, “वे एक साथ खड़े हैं, आगे के उद्देश्यों के मद्देनजर एकजुट हैं।” उनकी पोस्ट के साथ हैशटैग “टीम केरल” भी था। यहां कांग्रेस के मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में करीब तीन घंटे तक चली बैठक का मुख्य विषय अनुशासन, एकता और राज्य संगठन को मजबूत करना था। सूत्रों के अनुसार, बैठक में गांधी ने कहा कि नेताओं को राजनीतिक रणनीति के बारे में बहुत सावधान रहना चाहिए और ऐसा कुछ भी नहीं करना या कहना चाहिए जो पार्टी लाइन के अनुरूप न हो। ये नेता हुए बैठक में शामिल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अनुशासन, एकता सुनिश्चित करने और पार्टी की केरल इकाई को मजबूत करने के लिए रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया था। खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, महासचिव और वायनाड से लोकसभा सदस्य प्रियंका गांधी वाद्रा, प्रदेश प्रभारी दीपा दासमुंशी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सुधाकरन, लोकसभा सदस्य शशि थरूर और प्रदेश के कई अन्य वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल थे।  

डीके शिवकुमार का शिंदे से तुलना पर जोरदार पलटवार, कहा- भाजपा के कई विधायक मेरे संपर्क में

बेंगलुरु कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस सरकार में विभाजन की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले अपनी पार्टी को व्यवस्थित करने का काम करना चाहिए। शिवकुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, “भाजपा को पहले अपना घर ठीक करना चाहिए। जैसा कि मेरे कुछ मंत्रियों ने कहा है, कई BJP विधायक हमसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे मंत्री ने यह पहले ही कह दिया है। मैं इस बारे में अधिक नहीं चर्चा करना चाहता। भाजपा टूटे हुए घर की तरह है, जबकि कांग्रेस एकजुट है।” कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा 26 फरवरी को शिवरात्रि उत्सव के दौरान धर्म गुरु जग्गी वासुदेव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा करने के बाद विवाद उत्पन्न हो गया। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस कदम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सद्गुरु और अमिक शाह ने कांग्रेस पर खुलेआम हमला किया था। इसके बाद पार्टी में आंतरिक कलह की अफवाहें फैलने लगीं। विपक्षी भाजपा ने दावा किया कि शिवकुमार कांग्रेस छोड़ सकते हैं और भाजपा की मदद से वैकल्पिक सरकार बना सकते हैं। हालांकि, शिवकुमार ने अपने इस निर्णय को धार्मिक यात्रा बताते हुए राजनीतिक नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा, “सद्गुरु कर्नाटक के हैं और वे कावेरी जल के मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने मुझे व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया था। उनका बड़ा अनुयायी वर्ग है और वे महान काम कर रहे हैं। वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायक और नेता थे, इसलिए मैं वहां गया।” सीएम पद को लेकर तकरार कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद उपमुख्यमंत्री बने डीके शिवकुमार ने बार-बार दिल्ली में पार्टी के नेताओं से यह मांग की है कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए। विधानसभा चुनावों के बाद एक शक्ति-विभाजन समझौता हुआ था। हालांकि, सिद्धारमैया खेमे ने ऐसे समझौतों को नकारते हुए दावा किया है कि वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री के करीब दर्जनों मंत्रियों ने पिछले कुछ हफ्तों में शिवकुमार के दावों पर खुलकर सवाल उठाए हैं। शिवकुमार की तुलना एकनाथ शिंदे से कर्नाटक भाजपा ने शिवकुमार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से तुलना करते हुए यह कयास लगाए कि वे कांग्रेस में विभाजन उत्पन्न कर सकते हैं। विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा, “कांग्रेस में कई नेता एकनाथ शिंदे की तरह हो सकते हैं। डीके शिवकुमार उनमें से एक हो सकते हैं।” कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने भी कांग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह बढ़ने की बात कही। हालांकि, शिवकुमार ने इन सभी राजनीतिक अफवाहों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है।

पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकती है भाजपा, रेस में दक्षिण से दो महिला नेताओं के नाम

अमरावती कौन बनेगा बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष? इस सवाल का जवाब मार्च महीने में मिल जाने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान होने की उम्मीद जताई जा रही है। बीजेपी ने अभी कुल 36 प्रदेश अध्यक्षों में 12 के नाम तय किए हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय प्रमुख की नियुक्ति के लिए आधे प्रदेश अध्यक्ष बने जरूरी हैं। बीजेपी के ‘मिशन साउथ’ की चर्चा के बीच आश्चर्यजनक तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में दो और नाम शामिल हुए हैं। ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है कि वाकई में बीजेपी सबको चौंकाने जा रही है। ये दोनों नाम महिला नेताओं के हैं। इनमें आंध्र प्रदेश से आने वाली डी पुरंदेश्वरी का नाम शामिल है। उन्हें बीजेपी में दक्षिण का ‘सुषमा स्वराज’ कहा जाता है। दूसरा नाम वनथी श्रीनिवासन है। ज्यादा संभावना डी पुरंदेश्वरी को लेकर है। दक्षिण से अब कुल पांच नाम डी पुरंदेश्वरी और वनथी श्रीनिवासन के नामों की चर्चा से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर राजस्थान की पूर्व सीएम वंसुधरा राजे का नाम भी चल चुका है। वनथी श्रीनिवासन अभी बीजेपी के राष्ट्रीय महिला मोर्चा की प्रमुख हैं। वह काेयंबटूर से विधायक हैं। पिछले दिनों दक्षिण से तीन बीजेपी नेताओं के नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए सुर्खियों में आए थे। इनमें कोयला मंत्री जी किशन रेड्‌डी, गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार और कर्नाटक से आने वाले केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी का नाम शामिल था। इन नेताओं के नाम के पीछे हवाला दिया गया था कि बीजेपी अब दक्षिण की तरफ आक्रामक तरीके से रुख करना चाहती है। ऐसे में दक्षिण को तवज्जो मिल सकती है। अभी तक कुल 11 राष्ट्रीय अध्यक्षों में तीन दक्षिण से आए हैं। इनमें बंगारू लक्ष्मण, जे कृष्णमूर्ति और वेंकैया नायडू का नाम शामिल है। क्या महिला को मिलेगी सर्वोच्च कुर्सी? बीजेपी की स्थापना से लेकर अभी तक कोई भी महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनी है। लेकिन इस बीच इस पद के लिए भाजपा की ओर से पहली बार किसी महिला का नाम भी अंतिम पैनल में रखने की बात सामने आ रही है। इसमें सबसे प्रमुख नाम केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और दक्षिण की सुषमा स्वराज कही जाने वाली डी पुरंदेश्वरी का है। डी पुरंदेश्वरी साल 2014 में बीजेपी में आई थी। वह समय आंध्र प्रदेश भाजपा की अध्यक्ष भी हैं। बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष 50 से 70 की आयु वर्ग से होगा। बीजेपी ने देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की है। प्रयागराज महाकुंभ खत्म होने के बाद अब अगले हफ्ते नाम के ऐलान की संभावना है। क्या विनोद तावड़े मारेंगे बाजी? पहले हरियाणा फिर महाराष्ट्र और इसके बाद दिल्ली जीतने के बाद बीजेपी अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश में जुटी है। दक्षिण के पांच नामों के साथ उत्तर से भी पहले कई नामों की चर्चा सामने आई थी, लेकिन इस सब के बीच पार्टी महासचिव विनोद तावड़े का भी है। उन्हें बीजेपी शीर्ष नेतृत्व का विश्वासपात्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि वह मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में अकेले ऐसे नेता हैं। जो प्रमोद महाजन शैली के नेता हैं। जिससे मतलब है कि वह किसी को भी अपने साथ लाने में सक्षम हैं। उनको विषम परिस्थिति में उचित कदम उठाने में सक्षम माना जाता है। बीजेपी ने दिल्ली में जिस तरह से प्रवेश वर्मा के दौड़ में आगे होने के बाद शालीमार से विधायक रेखा गुप्ता को राजधानी की कमान सौंपी और सीएम बनाया। उसके बाद से राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है।

जिन्होंने धोखा देकर कांग्रेस को छोड़ा और भाजपा में भाग गए उनके लिए दरवाजे बंद :हरीश चौधरी

भोपाल  मध्यप्रदेश में पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए कांग्रेस विधायकों के बिकने का जिन्न एक बार फिर बाहर निकला है। इस बार किसी और ने नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के कांग्रेस प्रभारी ने यह राग छेड़ा है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा कि- जो बिक गए वो चले गए। यह बात कांग्रेस प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कही है। वे विदिशा जिले में कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में बोल रहे थे। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि- जो डर गए वो चले गए, जो बिक गए वो चले गए। जो मजबूत हैं वो कांग्रेस में डटे हुए हैं। कांग्रेस में कमी नहीं है, कांग्रेस में मजबूत कार्यकर्ता हैं। बता दें कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार को कांग्रेस के ही विधायकों ने बीजेपी में शामिल होकर गिरा दिया था। उस समय कांग्रेस विधायकों के करोड़ों रुपए में बिकने की सियासी चर्चा गर्म थी। वहीं विधानसभा और लोकसभा चुनाव के पहले कई पूर्व मंत्री और विधायकों ने कांग्रेस को गुड बाय कह बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसी के चलते विधानसभा में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिल सकी और लोकसभा में खाता भी नहीं खुल पाया। कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है।

नड्डा के बाद कौन संभालेगा BJP की कमान?होली से पहले बीजेपी को मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष!

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 15 मार्च तक अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है. राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है और यह राज्य इकाइयों में पार्टी के चुनाव के बाद होगा.राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है और यह जनवरी में पूरा हो जाना चाहिए था. हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव और लंबित राज्य इकाई चुनावों ने जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के चुनाव में देरी हो रही है. भाजपा के संविधान के अनुसार, आधे राज्यों में चुनाव से पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया जा सकता है. अब तक भाजपा ने 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से 12 में चुनाव पूरे कर लिए हैं. अभी तक 12 राज्यों में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया गया है. यूपी प्रदेश अध्यक्ष का जल्द होगा ऐलान बीजेपी 2 से 3 दिन में यूपी के जिलाध्यक्षों की घोषणा करेगी. उसके बाद यूपी के बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव होगा. एक हफ्ते से दस दिन में यूपी बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा. बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक यह ऐलान अगले दो हफ्ते के भीतर हो सकता है। पार्टी के संगठनात्मक चुनाव 12 राज्यों में पूरे हो चुके हैं और माना जा रहा है कि अध्यक्ष का नाम 15 मार्च से पहले घोषित किया जा सकता है। उसके बाद हिन्दू कैलेंडर के अनुसार अशुभ अवधि शुरू हो जाती है। चुनाव वाले राज्यों पर बीजेपी की नजर बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम आधे राज्यों में संगठनात्मक चुनाव होना जरूरी है। इससे पहले, बूथ, मंडल और जिला स्तर पर चुनाव होते हैं। अभी 36 राज्यों में से सिर्फ 12 में ही चुनाव पूरे हुए हैं। इसलिए कम से कम 6 और राज्यों में चुनाव कराने की जरूरत है। बीजेपी उन राज्यों में इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जैसे तमिलनाडु, बंगाल, असम और गुजरात। बिहार में कोई बदलाव नहीं होगा, जहां इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं। किन बातों पर है पार्टी का फोकस? बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार का चयन कई बातों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सबसे जरूरी है कि उम्मीदवार को सभी का समर्थन हासिल हो, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी शामिल है। साथ ही उम्मीदवार को संगठनात्मक मूल्यों से ओतप्रोत होना चाहिए। पार्टी जातिगत समीकरण, उत्तर-दक्षिण भाषा विवाद, परिसीमन और सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में अपने जनाधार को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी को झटका लगा था, जिससे उसे सदन में पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया था। जेपी नड्डा ने 2019 से संभाली है जिम्मेदारी जेपी नड्डा ने 2019 में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पार्टी की जिम्मेदारी संभाली थी। जनवरी 2020 में, उन्हें सर्वसम्मति से बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया और उन्होंने वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पदभार ग्रहण किया। लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनका कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। सरकार में शामिल होने के साथ, पार्टी उनके उत्तराधिकारी के लिए संभावित उम्मीदवारों की तलाश कर रही है। लेकिन यह प्रक्रिया धीमी रही है, क्योंकि नेता इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने की उम्मीद कर रहे हैं। कई नामों पर चर्चा हो रही है, लेकिन पार्टी किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है। जेपी नड्डा को पहली बार 17 जून, 2019 को पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया था और वे 20 जनवरी, 2020 तक इस पद पर बने रहे. 20 जनवरी, 2020 को उन्हें पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना गया और तब से वे इस पद पर हैं. जेपी नड्डा के नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है. इसी तरह से लोकसभा चुनाव में भी जीत हासिल कर पार्टी फिर से सत्ता में वापसी की है. अटल बिहारी वाजपेयी 1980 से 1986 तक भाजपा के पहले अध्यक्ष थे. लाल कृष्ण आडवाणी कई कार्यकालों तक इस पद पर रहे.

सीएम ममता पश्चिम बंगाल की राजनीति में नमक हराम का ज्वलंत उदाहरण हैं: अधीर रंजन चौधरी

मुर्शिदाबाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता का कहना है कि सीएम ममता पश्चिम बंगाल की राजनीति में नमक हराम का ज्वलंत उदाहरण हैं। अधीर रंजन चौधरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस की कृपा से 2011 में पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार बनी जिसे ‘नमक हराम’ कहते हैं। कोई ऐसा व्यक्ति जो निजी लाभ के लिए किसी स्थिति का फायदा उठाता है, लेकिन बाद में उन लोगों को छोड़ देता है जिन्होंने उनकी मदद की थी। इसे हम ‘नमक हराम गिरी’ कहते हैं। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि मैं ये बात गलत भाषा में नहीं कर रहा हूं; मैं ये बात शुद्ध भाषा में कह रहा हूं। ममता बनर्जी बंगाली राजनीति में ‘नमक हराम’ का एक ज्वलंत उदाहरण हैं। 2011 में सोनिया गांधी की मंजूरी और प्रणब मुखर्जी जैसे बड़े व्यक्ति के समर्थन के बिना, वह सत्ता में नहीं आ सकती थीं। कांग्रेस ने उन्हें वह सीट दी जो वह चाहती थीं क्योंकि हम उन्हें सत्ता में लाना चाहते थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ‘नमक हराम’ की राजनीति करती हैं।” बता दें कि अधीर रंजन चौधरी सीएम ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था कि मुझे सीएम ममता पर भरोसा नहीं है। वह गठबंधन छोड़कर भागी थीं। उन्होंने गठबंधन तोड़ा था। अब कांग्रेस सत्ता में आ रही है, इसलिए ममता ने लाइन लगाना शुरू कर दिया है।

यह मेरा निजी विश्वास और आस्था का सवाल है कि मैं ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल हुआ: डीके शिवकुमार

कर्नाटक कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं के बीच काफी खींचतान की खबरें हैं। वहीं जब महाशिवरात्रि के मौके पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल हुए और सद्गुरु जग्गी वासुदेव से मुलाकात की तो तहलका ही मच गया। कांग्रेस के कई नेताओं ने उनके इस कदम की आलोचना की और नाराजगी जाहिर की। वहीं शिवकुमार ने कहा है कि यह उनका व्यक्तिगत मामला था और वह सद्गुरु के आमंत्रण पर गए थे। शिवकुमार ने कहा, यह मेरा निजी विश्वास और आस्था का सवाल है कि मैं ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल हुआ। मैं इस मामले में सोशल मीडिया पर जवाब नहीं दे सकता। वहीं मेरे इस कदम का स्वागत करने की कोई जरूरत नहीं है। यह शुद्ध रूप से मेरी व्यक्तिगत आस्थ का सवाल है। सद्गुरु ने व्यक्तिगत तौर पर मुझे मैसूर के इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया था। वहीं कांग्रेस के सचिव पीवी मोहन ने कहा कि उनकी इस तरह की हरकतों से पार्टी को नुकसान होगा। डीके शिवकुमार ने कहा, मैं जन्म से हिंदू हूं और मरते दम तक हिंदू ही रहूंगा। उन्होंने कहा, मैं अकसर नोनाविनाकरे मठ जाता हूं। मेरी जहां भी आस्था होती है वहां जाता हूं। उन्होंने कहा कि 99 फीसदी ब्राह्मण मुझे मेरे विधानसभा क्षेत्र में वोट देते हैं। मैं सिद्धातों की राजनीति करता हूं, जाति की नहीं। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ गलत अफवाह उड़ाई जा रही है कि मैं बीजेपी के करीब जा रहा हूं। यह मेरे खिलाफ केवल साजिश है। कोयंबटूर दौरे के बारे में शिवकुमार के पोस्ट का एक स्क्रीनशॉट साझा करते हुए मोहन ने लिखा, ‘धर्मनिरपेक्ष पार्टी के अध्यक्ष होने के बावजूद एक ऐसे व्यक्ति के निमंत्रण के लिए धन्यवाद देना जो देश की उम्मीद आरजी (राहुल गांधी) का मखौल उड़ाता है और जिसके आख्यान आरएसएस के अनुरूप हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं को गुमराह करता है, पार्टी का विकास समझौते के बजाय दृढ़ विश्वास से सुनिश्चित होता है। अन्यथा, आधार को क्षति पहुंचती है।’ शिवकुमार ने बुधवार को कहा था, ‘मैं हिंदू हूं। मैं हिंदू पैदा हुआ हूं और हिंदू के रूप में ही मरूंगा, लेकिन मैं सभी धर्मों से प्यार करता हूं और उनका सम्मान करता हूं।’ बुधवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान कोयंबटूर दौरे के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा था, ‘हमारे कांग्रेस अध्यक्ष का नाम मल्लिकार्जुन खरगे है। मल्लिकार्जुन कौन हैं? यह शिव ही हैं। क्या उन्हें अपना नाम बदलना चाहिए?’ हालांकि, शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि वह नहीं चाहते कि भाजपा या कांग्रेस इसका स्वागत करे और न ही उन्हें उनके बारे में बोलने की कोई जरूरत है। महाशिवरात्रि के दौरान ईशा फाउंडेशन में उनके दौरे को लेकर उठे विवाद के बारे में उन्होंने कहा, ‘हजारों लोग इसका विरोध करें, मुझे अपनी आस्था पर पूरा भरोसा है।’ उनके अनुसार, सद्गुरु ‘मिट्टी बचाओ’ अभियान के तहत कावेरी को बचाने के लिए लड़ रहे हैं और उन्होंने राज्य में बहुत अच्छा काम किया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि वह इस कार्यक्रम में इसलिए शामिल हुए क्योंकि सद्गुरु व्यक्तिगत रूप से उनके घर आए थे और उन्हें महाशिवरात्रि में शामिल होने के लिए सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया था।

प्रदेश अध्यक्ष की लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा, वीडी शर्मा को रिपीट करने की कम है संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई गुप्त बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। यह बैठक भोपाल स्टेट हैंगर पर हुई। चर्चा है कि मार्च के पहले हफ्ते में मध्य प्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। इसके लिए आधे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना जरूरी है। वीडी शर्मा के वापस आने का चांस कम वीडी शर्मा को संसद की याचिका समिति में जगह मिलने से उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की संभावना कम हो गई है। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पार्टी ने शर्मा को यह पद देकर उन्हें अध्यक्ष पद से दूर रखने का संकेत दे दिया है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने की लिस्ट में ये भी आगे अब लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय के अलावा फग्गन सिंह कुलस्ते, सुमेर सिंह सोलंकी, हिमाद्री सिंह, दुर्गादास उइके, हेमंत खंडेलवाल, अर्चना चिटनिस, रामेश्वर शर्मा और आलोक शर्मा जैसे कई नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। अंतिम चरण में है तलाश मध्यप्रदेश बीजेपी में नए कप्तान की तलाश अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। कई दिनों से टल रहे इस चुनाव को लेकर अब तेजी आ गई है। इसका सबसे बड़ा कारण केंद्रीय मंत्री अमित शाह और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई एक गुप्त बैठक है। यह बैठक भोपाल के स्टेट हैंगर पर हुई, जहां शाह ने विजयवर्गीय को फ़ोन करके बुलाया था। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मंथन हुआ है। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सबसे ज्यादा चर्चा में नरोत्तम मिश्रा इस गुप्त बैठक के बाद से ही पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है। सूत्रों की मानें तो विजयवर्गीय ने शाह के सामने नरोत्तम मिश्रा के नाम का प्रस्ताव रखा है। ऐसी भी खबरें हैं कि पार्टी कैलाश विजयवर्गीय को भी यह मौका दे सकती है। मार्च के पहले हफ्ते तक प्रदेश बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी होना है चुनाव बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। देश के लगभग 12 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव हो चुके हैं। अभी भी 6 राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इन्हीं चुनावों के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। देश में कुल 18 राज्य हैं, जहां बीजेपी की सरकार है या फिर प्रमुख विपक्षी दल है। इसलिए 9 राज्यों में चुनाव पूरा होना अनिवार्य है।

AAP की हार से बढ़ गई ममता की टेंशन, बोली 2026 में बंगाल में खेला होगा और जोरदार होगा

 कोलकाता अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि 2026 में बंगाल में फिर से खेला होगा और ज़ोरदार होगा. ममता बनर्जी कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थीं. दरअसल 2021 में हुए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के दौरान ममता बनर्जी ने ही ‘खेला होबे’ का नारा दिया था. उसके बाद से ही ये नारा देशभर में चर्चित हो गया था. बीजेपी (BJP) के आक्रामक कैंपेन के बावजूद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी. बीजेपी पर निशाना टीएमसी के चुनावी प्रबंधन का काम देख रही आईपैक कंपनी का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ‘यह प्रशांत किशोर की आईपैक नहीं है, उनकी नई पार्टी है. आप सभी को आईपैक को समझना होगा और सहयोग करना होगा, वे नई टीम हैं. भाजपा के पास 50 एजेंसियां ​​हैं, हम एक रख सकते हैं.’ ममता बनर्जी ने कहा, ‘भाजपा ने एक कंपनी भेजी है जिसमें प्रतिभाशाली लोग हैं. वे डेटा ऑपरेटर के पास जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में हरियाणा, राजस्थान के लोगों के नाम डाल रहे हैं. यह ऑनलाइन किया जा रहा है. भाजपा नहीं चाहती कि बंगाल में उसकी संस्कृति बरकरार रहे.’ ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि हम महाराष्ट्र नहीं हैं, हम चुनाव आयोग के सामने धरना दे सकते हैं. चुनाव आयोग पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ‘इसी तरह उन्होंने महाराष्ट्र और दिल्ली को हराया, लेकिन हमने उनकी चाल पकड़ ली है. अगर मैं 26 दिनों तक धरने पर बैठ सकती हूं, तो मैं चुनाव आयोग के सामने भी धरने पर बैठ सकती हूं ताकि उसकी विश्वनीयता वापस पहले जैसी हो जाए.’. भाजपा पर हमला, संगठन में बदलाव के संकेत टीएमसी का यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के जरिए तृणमूल को घेरने की कोशिश कर रही है। हालांकि, टीएमसी का दावा है कि जनता का भरोसा अब भी पार्टी के साथ है। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी पार्टी संगठन को पुनर्गठित करने का संदेश दे सकती हैं। लंबे समय से पार्टी के अंदर कॉर्पोरेट मानसिकता के खिलाफ नाराजगी रही है, जिसे दूर करने के लिए ममता बनर्जी चुनावी रणनीति के लिए बाहरी एजेंसियों पर कम और पार्टी कार्यकर्ताओं पर अधिक भरोसा करना चाहती हैं। जनसंपर्क अभियान पर रहेगा जोर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि टीएमसी नेतृत्व का मुख्य फोकस जमीनी कार्यकर्ताओं को अधिक प्रभावी बनाना होगा। ममता बनर्जी पहले ही इस बात पर जोर दे चुकी हैं कि राज्य सरकार की योजनाओं और सेवाओं का लाभ सही तरीके से जनता तक पहुंचे। राज्यभर में डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था सम्मेलन में जिलों से आए नेताओं की मौजूदगी रहेगी, जबकि जो नेता सभा में शामिल नहीं हो पाएंगे, उनके लिए पूरी बैठक ऑनलाइन प्रसारित की जाएगी। पार्टी चाहती है कि ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचे। टीएमसी का मिशन 2026 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल एक बार फिर अपनी रणनीति को धार देने में जुट गई है। यह सम्मेलन पार्टी के लिए आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

पश्चिमी बांग्लादेश में विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द, ईद पर 2 दिनों की लीव; भड़की भाजपा

कोलकाता कोलकाता नगर निगम ने एक आदेश जारी कर विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द कर दी और ईद की एक दिन की छुट्टी बढ़ाकर दो दिन कर दी. निगर निगम के इस आदेश पर जमकर बवाल हुआ. कोलकाता नगर निगम का ये आदेश हिंदी मीडियम स्कूलों के लिए था. बवाल इतना बढ़ा कि कोलकाता नगर निगम (KMC) ने इस आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद कोलकाता नगर निगम ने इस आदेश को जारी करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि ये अनजाने में हुई टाइपिंग मिस्टेक (Typographical mistakes) थी. 25 फरवरी को जारी इस नोटिस पर केएमसी के शिक्षा विभाग के मुख्य प्रबंधक के नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं. बता दें कि विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी 17 सितंबर को दी जाती है. कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी आदेश में साफ साफ लिखा गया था कि 17 सितंबर 2025 को विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी नहीं रहेगी क्योंकि इस छुट्टी के बदले ईद उल फितर की छुट्टी बढ़ा दी गई है. इस आदेश के अनुसार राज्य में ईद उल फितर की छुट्टी 31 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को घोषित की गई थी. KMC का पुराना आदेश. छुट्टियों में बदलाव के पहले के ज्ञापन की आलोचना करते हुए विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया कि यह राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए तुष्टिकरण का एक उदाहरण है. मीडिया को दिए गए नोट में म्यूनिसिपल कमीश्नर ने कहा कि ये आदेश सक्षम प्राधिकारी की सहमति लिए बिना जारी किए गए थे. कोलकाता नगर निगम अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई कर रहा है. विवाद के बाद रद्द किया गया आदेश कोलकाता नगर निगम का कहना है कि चूंकि ये आदेश बिना परमिशन के जारी किए गए थे. इसलिए इस आदेश को रद्द कर दिया गया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि अब छुट्टियों की नई लिस्ट जारी की जाएगी. मीडिया नोट में कहा गया है, “राज्य सरकार की छुट्टियों की सूची को मौजूदा मानदंडों के अनुसार बनाए रखते हुए एक संशोधित और सटीक आदेश आने वाले समय में जारी करेगी.” बीजेपी का कहना है कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया तभी KMC को इस आदेश को रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा. बंगाल बीजेपी के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने पत्रकारों को कहा कि, “यह विश्वास करने योग्य नहीं है कि नगर निगम अधिकारी विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रोकने और ईद-उल-फितर की छुट्टी बढ़ाने के निर्णय से अनभिज्ञ थे.” उन्होंने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दक्षिण कोलकाता के एक कॉलेज में पुलिस सुरक्षा के साथ सरस्वती पूजा आयोजित की गई थी. कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम पर हमला बता दें कि TMC नेता फिरहाद हकीम कोलकाता नगर निगम के मेयर हैं. बीजेपी इस मामले को इसलिए भी उठा रही है. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा विभाग के चीफ मैनेजर को ऐसा आदेश जारी करने के लिए किससे हुकुम मिला, क्योंकि बंगाल का कोई भी अधिकारी अपने दम पर ऐसा आदेश नहीं जारी कर सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोलकाता नगर निगम का प्रशासन फिरहाद हकीम के हाथों में है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और आधुनिक सुहरावर्दी फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम के स्कूलों में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मिलने वाली छुट्टी को खत्म करने का आदेश दिया है – जो हिंदुओं, विशेष रूप से प्रमुख ओबीसी के लिए बहुत महत्व का अवसर है – और इसकी जगह इसे ईद-उल-फितर के लिए आवंटित कर दिया है, जिससे छुट्टी एक दिन से बढ़कर दो दिन हो गई है. महाकुंभ को ‘मत्युकुंभ’ कहने पर विवाद इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी महाकुंभ को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर एक विवाद पैदा कर दिया था. ‘मृत्युकुंभ’ से जुड़ा ये विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने 18 फरवरी 2025 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर संबोधित किया था. ममता ने आरोप लगाया था कि आयोजन में वीआईपी लोगों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि गरीब और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि महाकुंभ अब अपनी मूल भावना खो चुका है और ‘मृत्युकुंभ’ में बदल गया है.  

जब वोट लेना होगा तो गंगा भी जाएंगे, मंदिर भी जाएंगे, कोट पर जनेऊ भी पहनेंगे: रामेश्वर शर्मा

भोपाल  कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रयागराज महाकुंभ में नहीं जाने पर भोपाल के बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने उनकी जाति को लेकर सियासी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि- राहुल गांधी असली हिंदू नहीं हैं, असली गांधी भी नहीं हैं। वे यहीं तक नहीं रूके उन्होंने सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा गांधी को भी नकली गांधी परिवार बताया है। कहा यह असली हिंदू परिवार ही नहीं है, यह चुनावी हिंदू हैं, इसलिए सनातनियों, हिंदुस्तान के हिंदू इनसे सावधान रहना। जब वोट लेना होगा तो गंगा भी जाएंगे, मंदिर भी जाएंगे, कोट पर जनेऊ भी पहनेंगे। ये नकली हिन्दू राम मंदिर भी नहीं गए। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि- प्रयागराज पावन धरती है हिंदुस्तान का परम सौभाग्य है। यहां गंगा, जमुना मां सरस्वती का संगम का पावन तट है। युगों युगों से इसका लाभ भारतवर्ष के लोग लेते आए हैं। जो-जो सौभाग्यशाली थे वह सब गंगा के तट पर गए और महाकुंभ में जाकर गंगा स्नान किया। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि, प्रयागराज पावन धरती है हिंदुस्तान का परम सौभाग्य है। यहां गंगा, जमुना मां सरस्वती का संगम का पावन तट है। युगों-युगों से इसका लाभ भारतवर्ष के लोग लेते आए हैं। जो-जो सौभाग्यशाली थे वह सब गंगा के तट पर गए और महाकुंभ में जाकर गंगा स्नान किया। बता दें कि राहुल ने कहा था कि बीजेपी और RSS असली हिंदू नहीं हैं। वे लक्ष्मी और दुर्गा का अपमान करते हैं। इस पर पलटवार करते हुए शर्मा ने जारी बयान में कहा- राहुल गांधी जी, आप भी हिंदू नहीं हैं। आपके पूर्वज भी हिंदू नहीं थे। हमें खुद को हिंदू कहने में शर्मिंदगी का अहसास नहीं होता। जब नेहरू प्रधानमंत्री थे, तभी देश का विभाजन हुआ था। हजारों हिंदुओं की मौत हुई थी। आपको तो शुक्रगुजार होना चाहिए कि आरएसएस अस्तित्व में आया। बीजेपी विधायक ने आगे कहा कि राहुल गांधी की मां (सोनिया गांधी) ईसाई हैं। उनके बहनोई भी ईसाई हैं। लगता नहीं है कि राहुल गांधी में हिंदू खून है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस के कारण ही आप (कांग्रेस) देश नहीं बेच पाए। बीजेपी डंके की चोट पर हिंदुओं की बात और काम करती है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं होते तो अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं होता। कश्मीर में धारा 370 नहीं हटती। शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि आपके (राहुल गांधी) पुरखों ने मठ और मंदिर तुड़वाए। उनके शासनकाल में पाकिस्तान के नारे लगवाए गए। कांग्रेस ने किया पलटवार राहुल गांधी पर बीजेपी के आरोप पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया का कहना है कि बीजेपी के कितने नेता महाकुंभ गए बीजेपी इसकी लिस्ट जारी करे। कितने मंत्री गए कितने विधायक गए। बेरोजगारी जैसे असल मुद्दों से भटकाने के लिए बीजेपी इस तरह की बयानबाजी कर रही है।

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