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संक्रांति तक कम से कम आधे राज्यों को नए अध्यक्ष मिल जाएंगे और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा

नई दिल्ली जेपी नड्डा बीते 4 सालों से अधिक समय से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं। उनका कार्यकाल बीते साल ही समाप्त हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें विस्तार मिल गया था। अब इलेक्शन के नतीजे आए भी 6 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा ही हैं। इस बीच पार्टी में संगठन बदलने की कवायद तेज हो गई है और सूत्रों का कहना है कि संक्रांति के बाद भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। इसे लेकर बैठकें शुरू हो चुकी हैं और जल्दी ही किसी नेता के नाम पर मुहर लग सकती है। सूत्रों का कहना है कि भूपेंद्र यादव, अनुराग सिंह ठाकुर, शिवराज सिंह चौहान समेत कई ऐसे नेता हैं, जिन्हें अध्यक्ष बनाने का फैसला हो सकता है। फिलहाल पार्टी 15 जनवरी तक जिला और राज्य के अध्यक्ष बना लेना चाहती है। संक्रांति तक कम से कम आधे राज्यों को नए अध्यक्ष मिल जाएंगे और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। खबर है कि महीने के अंत तक पार्टी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। रविवार को भाजपा ने इस संबंध में मुख्यालय में मीटिंग भी बुलाई थी। इस मीटिंग में संगठन महामंत्री बीएल संतोष के अलावा जेपी नड्डा समेत कई अधिकारी मौजूद थे। इस मीटिंग में संगठन पर्व को लेकर भी चर्चा हुई है। इसके तहत सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि एक फुल प्रूफ व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे पता चल सके कि कौन संगठन से जुड़ रहा है। पार्टी नेताओं के अनुसार यह तैयारी है कि घर-घर जाकर भी सदस्य बनाए जाएं। इससे लोगों तक पहुंच बनाने का एक मौका पार्टी को मिल सकेगा। बता दें कि इसी साल अक्टूबर में भाजपा ने 10 करोड़ सदस्यों का आंकड़ा पार कर लिया था। रविवार को जेपी नड्डा और बीएल संतोष ने संगठन चुनाव का जायजा लिया। एक अधिकारी ने कहा कि यह सफल मीटिंग थी। हमने संगठन के सभी पहलुओं पर विचार किया। इस मीटिंग में यह भी तय हुआ है कि अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती को पूरे वर्ष मनाया जाएगा। साल भर इस अवसर पर अलग-अलग कार्य़क्रम का आयोजन होगा। पूरे साल अटल जी की जयंती को सुशासन वर्ष के तौर पर मनाया जाएगा। फिलहाल पार्टी का जोर इस बात पर है कि संक्रांति तक जिला और राज्यों के अध्यक्ष तय कर लिए जाएं। उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए। बता दें कि आमतौर पर किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत संक्रांति के बाद ही की जाती है। हिंदू धर्म की इस मान्यता का भाजपा की ओर से भी पालन होता रहा है।

आप पार्टी की प्रशासन और कामकाज की तारीफ करते हुए कहा, जो बदलाव केजरीवाल ने किए, वे अद्भुत हैं: आदित्य ठाकरे

मुंबई दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने राष्ट्रीय राजधानी में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रशासन और कामकाज की तारीफ की है। आदित्य ठाकरे यहां भगवान अय्यप्पा के दर्शन करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा, “इस मंदिर में मुझे दर्शन करना बहुत अच्छा लगता है, इसलिये यहां मैं अक्सर आता रहता हूं।” जब मीडिया ने उनसे दिल्ली में मतदाता सूची से छेड़छाड़ के आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने सीधे तौर पर उस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। इसकी बजाय उन्होंने कहा, “अगर आप देखें तो दिल्ली में जो बदलाव अरविंद केजरीवाल ने किया है। वह अद्भुत है। उन्होंने दिल्ली में बहुत काम किया है। वह ऐसे ही विकास करते रहे हैं। हम चाहते हैं कि वह आगे भी ऐसे ही काम करते रहें।” उल्लेखनीय है कि आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा पर नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में पिछले 15 दिन में लगभग पांच हजार मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भाजपा ने 7,500 नए नाम जोड़ने के लिए भी आवेदन दिया है। अरविंद केजरीवाल हमेशा की तरह इस बार भी नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के संदीप दीक्षित से है। वहीं भाजपा ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन प्रवेश वर्मा के मैदान में उतरने की पूरी संभावना है। आप संयोजक ने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा में कुल एक लाख छह हजार मतदाता हैं। भाजपा ने उनमें से पांच प्रतिशत नाम डिलीट करवाने और 7.5 प्रतिशत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन दिया है। इसके बाद फिर चुनाव कराने की जरूरत ही नहीं रहेगी क्योंकि 12 फीसदी से ज्यादा वोट इधर के उधर कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश में “चुनाव के नाम पर खेल” हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने आप पर आरोप लगाते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल यह सवाल उठा रहे हैं कि क्योंकि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम डंके की चोट पर कहते हैं कि आपने दिल्ली में रोहिंग्या और बंगलादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में जोड़े हैं। हर विधानसभा में इनके पास आठ-दस हजार ऐसे मतदाता हैं, और एक हिंदू परिवार के घर में दो या पांच लोग रहते हैं, लेकिन उनके नाम पर 50-50 वोटर आईडी कार्ड हैं।”

संजय सिंह ने दावा किया है कि बीजेपी ने मेरी ही पत्नी का नाम वोटर्स लिस्ट से कटवाने का आवेदन दिया

नई दिल्ली आम आमदी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगा दिया है। उन्होंने दावा किया है कि बीजेपी ने नई दिल्ली विधानसभा सीट से उन्ही की पत्नी का नाम वोटर्स लिस्ट से कटवाने का आवेदन दिया है। उनका दावा है कि ऐसा एक नहीं बल्कि दो-दो बार किया गया है। संजय सिंह ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, पिछले दिनों मैंने राज्यसभा में पूर्वांचली भाई बहनों के वोट काटे जाने का मुद्दा उठाया था। मैंने उन लोगों के नाम पर पढ़कर भी सुनाए थे। इससे बीजेपी इतनी बौखला गई कि उसने सोचा कि पहले संजय सिंह को ही सबक सिखाते हैं। उन्होंने कहा, नई दिल्ली विधानसभा सीट से मेरी पत्नी का वोट कटवाने के लिए आवेदन दिया गया है और ऐसा एक नहीं बल्कि दो बार हुआ है। यानी दो बार आवेदन दिए गए हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को नहीं दी थी दो गज जमीन, इसी को लेकर उनके भाई मनोहर राव कांग्रेस पर भड़के

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद अंत्येष्टि और स्मारक को लेकर राजनीति शुरू हो गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान कर रही है। जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार हुआ था उसी तरह मनमोहन सिंह का भी जहां अंतिम संस्कार हो, वहीं स्मारक बनना चाहिए। इसपर लोगों को पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की याद आ गई कि किस तरह से उन्हें दिल्ली में अंतिम संस्कार नहीं करने दिया गया। यहां तक कि उनके पार्थिव शरीर के लिए कांग्रेस मुख्यालय के दरवाजे भी बंद कर दिए गए। इसी को लेकर पीवी नरसिम्हा राव के भाई मनोहर राव ने कांग्रेस और सोनिया गांधी दोनों को घेरा है। मनोहर राव ने कहा, पीवी नरसिम्हा के लिए सोनिया गांधी भी नहीं पहुंची। कांग्रेस के प्रधानमंत्री का निधन हो गया और वे हैदराबाद भी नहीं आ सके। उन्हें सोचना चाहिए कि पहले खुद को सुधार लें। निगम बोध घाट में किसी का भी अंतिम संस्कार हो सकता है। आप लोगों ने पीवी नरसिम्हा राव की एक प्रतिमा तक नहीं लगाई। इतने साल सत्ता मेंरहकर भी भारत रत्न नहीं दे पाए। आपने पूर्व प्रधानंत्री को क्या सम्मान दिया क्या सम्मान किया। आप बोल रहे हैं कि मनमोहन सिंह का यह नहीं हुआ, वह नहीं हुआ। जो हुआ अच्छा हुआ। उनकी कुछ प्रक्रिया है। वे ट्रस्ट वगैरह बनाकर देंगे। उन्होंने कहा, इतने प्रधानमंत्री मरे लेकिन उन लोगों का नाम ही दिल्ली में नहीं है। मोदी ने प्रधानमंत्रियों को सम्मान दिया और एक ही जगह संग्रहालय बना दिया। इतनी जमीन दी। वहीं मनमोहन सिंह को भी जगह मिलेगी। आप प्रक्रिया तो पूरी करें। कांग्रेस वालों को यह अच्छा है या यह बुरा है। लेकिन हम तो सब देख रहे हैं। मोदी इसपर कुछ नहीं बोल रहे हैं और वह भारत के विकास के लिए काम कर रहे हैं। हमारे भाई कांग्रेस में थे और हम भी कांग्रेस में हैं। मोदी जी ने उन्हें भारत रत्न दिया। मनोहर राव ने कहा, दिल्ली में मनमोहन सिंह को हमने एक कार्यक्रम में बुलाया था। हमने उन्हें पीवी नरसिम्हा राव सम्मान दिया। इन्हें गोल्ड मेडल दिया गया। मनमोहन सिंह के साथ हमारा बहुत नजदीक का रिश्ता था। हमारी बातचीत भी होती थी। हमको उनसे कोई दिक्कत नहीं है। 10 साल उन्होंने काम किया लेकिन उनके हाथ में कुछ नहीं था। वह स्वतंत्र होकर काम नहीं कर पाए। मनमोहन सिंह बहुत पढ़े लिखे शख्स थे। कांग्रेस वालों ने तो मुख्यालय का दरवाजा तक नहीं खोला था। इससे ज्यादा अपमान क्या हो सकता है। जो कुछ हुआ था उसपर मैंने दुख प्रकट किया है। मनोहर राव ने कहा, मनमोहन सिंह के निधन पर मुझे गहरा दुख है। वह 10 साल प्रधानमंत्री थे। उससे पहले पीवी नरसिम्हा राव की कैबिनेट में वित्त मंत्री थे। उस वक्त उन्हें फ्री हैंड देकर वित्त मंत्री बनाया गया था। मनमोहन सिंह जी उस जमाने में उस जमाने में बहुत परिवर्तन लाए थे। उन्होंने हिम्मत से काम किया। प्रधानमंत्री और मनमोहन सिंह जी ने गुरु शिष्य की तरह काम किया। उस जमाने में और आज में जमीन आसमान का फर्क है। आज सब लोग यहां आकर ट्रेड करना और उद्योग लगाना पसंद करते हैं। तब से अब तक कोई नई नीति नहीं आई। बता दें कि 2004 में यूपीए की सरकार के दौरान ही पीवी नरसिम्हा राव का निधन हुआ था। उनका परिवार मांग कर रहा था कि उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करवाया जाए और एक स्मारक बनवाया जाए। उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने परिवार को स्मारक बनवाने का आश्वासन देकर पार्थिव शरीर को हैदराबाद ले जाने को कहा। उनका परिवार मान गया लेकिन 10 साल के शासन के दौरान ना तो उनका स्मारक बना और ना ही भारत रत्न दिया गया। गौर करने वाली बात यह भी थी कि अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनके शव को कांग्रेस मुख्यालय में भी रखने नहीं दिया गया था। जानकारों का कहना है कि गांधी परिवार नहीं चाहता था कि आर्थिक सुधारों का क्रेडिट पीवी नरसिम्हा राव को दिया जाए। इसके अलावा गांधी परिवार यह भी मानता था कि अयोध्या में बाबरी का ढांचा गिराने के पीछे उनकी भी मिलीभगत थी।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही, मेरी ही सीट पर ऑपरेशन लोटस

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर ऑपरेशन लोटस चलाने का आरोप लगाया है। केजरीवाल ने दावा किया है कि केजरीवाल उन्हीं की सीट यानी नई दिल्ली सीट पर 15 दिसंबर से ऑपरेशन लोटस चला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है। मेरे नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में – उनका ‘ऑपरेशन लोटस’ 15 दिसंबर से चल रहा है। इन 15 दिनों में, उन्होंने लगभग 5,000 वोट डिलीट करने और 7,500 वोट जोड़ने के लिए आवेदन दायर किया है। उन्होंने कहा, नई दिल्ली में एक लाख 6 हजार वोट हैं। एक लाख 6 हजार वोट में से अगर 5 फसदी वोट यह डिलीट करवा रहे हैं और साढ़े सात वोट जोड़ रहे हैं तो फिर चुनाव कराने की जरूरत क्या है। यह तो सरेआम बदमाशी हो रही है। केजरीवाल ने दावा किया कि बीजेपी मौजूदा वोटर के नाम डिलीट कर रही है। नई दिल्ली विधानसभा सीट पर 29 अख्टूबर से 14 दिसंबर तक 900 वोट कटवाने के लिए आवेदन आए। 15 दिसंबर से आज तक 5000 वोट डिलीशन के लिए आए।19 दिसंबर को यानी एक दिन में ही डेढ़ हजार वोट डिलीशन के लिए आए। अरविंद केजरीवाल ने कहा, जो लोग वोट काटने का आवेदन कर रहे हैं वह कौन हैं और किसके इशाके पर काम कर रहे हैं। वहीं वोट जोड़ने के मामले में उन्होंने कहा, जब चुनाव आयोग ने दो महीने तक घर-घर जाकर वोट बनाये तो अब 15 दिनों में 10 हजार वोटर कहां से आ गए, जिनके वोट बनवाये जा रहे हैं। BJP बाहर से लोगों को ला रही है, जिनके फर्जी वोट बनवाये जा रहे हैं।

निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार से भड़के राहुल गांधी, मनमोहन सिंह का अपमान किया, केजरीवाल ने भी केंद्र को घेरा

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका यहां निगमबोध घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे मनमोहन सिंह का अपमान करार दिया। इसके अलावा, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इसे परंपरा का उल्लंघन बताया। राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत माता के महान सपूत और सिख समुदाय के पहले प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार आज निगमबोध घाट पर करवाकर वर्तमान सरकार द्वारा उनका सरासर अपमान किया गया है। एक दशक के लिए वह भारत के प्रधानमंत्री रहे, उनके दौर में देश आर्थिक महाशक्ति बना और उनकी नीतियां आज भी देश के गरीब और पिछड़े वर्गों का सहारा हैं। आज तक सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की गरिमा का आदर करते हुए उनके अंतिम संस्कार अधिकृत समाधि स्थलों में किए गए ताकि हर व्यक्ति बिना किसी असुविधा के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दे पाए। डॉ. मनमोहन सिंह हमारे सर्वोच्च सम्मान और समाधि स्थल के हकदार हैं। सरकार को देश के इस महान पुत्र और उनकी गौरवशाली कौम के प्रति आदर दिखाना चाहिए था ।” सिंह के निधन के शोक के बीच उनकी अंत्येष्टि और स्मारक स्थल को लेकर उस वक्त एक विवाद भी खड़ा हुआ जब सरकार ने उनका अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर किए जाने का फैसला किया और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देश के पहले सिख प्रधानमंत्री का जानबूझकर का अपमान किया गया है। कांग्रेस की मांग थी कि उनका अंतिम संस्कार उसी स्थान पर होना चाहिए जहां उनका स्मारक बन सके। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार रात कहा कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए स्थान आवंटित करेगी। इसके अलावा, दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल ने लिखा, “ये खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर किया गया। इसके पूर्व भारत के सभी प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार राजघाट पर किया जाता था। सिख समाज से आने वाले, पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त, 10 वर्ष भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉ मनमोहन सिंह जी के अंतिम संस्कार और समाधि के लिए बीजेपी सरकार 1000 गज़ जमीन भी न दे सकी?” सिंह के निधन के शोक के बीच उनकी अंत्येष्टि और स्मारक स्थल को लेकर उस वक्त एक विवाद भी खड़ा हुआ जब सरकार ने उनका अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर किए जाने का फैसला किया और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देश के पहले सिख प्रधानमंत्री का जानबूझकर का अपमान किया गया है। कांग्रेस की मांग थी कि उनका अंतिम संस्कार उसी स्थान पर होना चाहिए जहां उनका स्मारक बन सके। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार रात कहा कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए स्थान आवंटित करेगी। बता दें कि इससे पहले मनमोहन सिंह की तीन बेटियों में से सबसे बड़ी बेटी उपिंदर सिंह ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। देश तथा दुनिया के कई गणमान्य लोगों, राजनीतिज्ञों और आम लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य हस्तियों ने सिंह को निगमबोध घाट पर श्रद्धांजलि अर्पित की। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने भी निगमबोध घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

मनमोहन सिंह की अंत्येष्टि को लेकर राजनीति शुरू, कांग्रेस की मांग डॉ. मनमोहन सिंह का भी स्मारक बनाया जाए

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अंत्येष्टि को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार का स्थान निगमबोध घाट में तय कर दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा है कि जिस स्थान पर उनका अंतिम संस्कार हो वहीं पर स्मारक भी बनना चाहिए। कांग्रेस के कहना है कि जिस तरह से राजघाट में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार हुआ और उनका स्मारक बनाया गया, उसी तरह डॉ. मनमोहन सिंह का भी स्मारक बनाया जाए। केंद्र का कहना है कि स्मारक के लिए ट्रस्ट बनाया जाएगा और फिर भूमि भी आवंटित की जाएगी। वहीं कांग्रेस के आरोपों के बाद लोग पार्टी के नरसिम्हा राव की याद दिला रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को अपने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को याद करना चाहिए कि किस तरह से उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं करने दिया गया और फिर 10 साल की सरकार के दौरान उनका स्मारक भी नहीं बनवाया गया। पीवी नरसिम्हा राव और कांग्रेस में क्यों आ गई थी खटास पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब ‘1991 हाउ पीवी नरसिम्हा राव मेड हिस्ट्री’ में लिखा कि नरसिम्हा राव ही देश के पहले एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर थे। उन्हे भी नहीं पता था कि वह प्रधानमंत्री बनने वाले थे। राजीव गांधी की हत्या के बाद वह अपना बैग पैक कर हैदराबाद जाने को तैयार थे। लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद ही कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते खराब होने लगे। हालात ऐसे हो गए कि 2004 में उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार भी दिल्ली में नहीं किया जा सका। इसके अलावा कांग्रेस के अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनके शव को कांग्रेस मुख्यालय में भी नहीं रखा गया। उनका शव अंतिम यात्रा के वाहन पर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर ही आधा घंटा इंतजार करता रहा लेकिन मुख्यालय के गेट नहीं खुले। 23 दिसंबर 2004 को नरसिम्हा राव का निधन हुआ था। उस समय यूपीए की सरकार थी और डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे। नरसिम्हा राव ही वह शख्स थे जिन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को डायरेक्ट एंट्री से वित्त मंत्री बना दिया था। उस समय के गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने नरसिम्हा राव के बेटे प्रभाकरा से कहा कि उनका अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया जाए। हालांकि परिवार का कहना है किअन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में ही होना चाहिए क्योंकि उनकी कर्मभूमि दिल्ली ही रही है। नरसिम्हा राव के परिवार से कई बड़े नेताओं ने अपील की कि उनका अंतिम संस्कार हैदारबाद में ही करवाया जाए। जब परिवार नहीं तैयार हुआ तो सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस के दिग्गज प्रणव मुखर्जी 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित उनके आवास पर पहुंचे। डॉ. मनमोहन सिंह ने उनके बेटे से पूछा कि उन्होंने अंत्येष्टि को लेकर क्या सोचा है। जब उन्होंने दिल्ली में अंत्येष्टि करने की इच्छा जताई तो डॉ. सिंह ने सोनिया गांधी से कुछ बात की। कांग्रेसी नेताओं ने आश्वासन दिया कि उनका स्मारक दिल्ली में बनवाया जाएगा। इसके बाद परिवार उनके शव को हैदराबाद ले जाने को तैयार हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए अलग से स्मारक बनाने की मांग पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कड़ी आलोचना की है। शर्मिष्ठा ने कहा कि जब उनके पिता (प्रणब मुखर्जी) का 2020 में निधन हुआ था, तब कांग्रेस नेतृत्व ने न तो कोई शोक सभा आयोजित की और न ही कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक बुलाई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस मामले में उन्हें गुमराह किया था। आपको बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 92 वर्ष की आयु में 27 दिसंबर को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हुआ। खरगे ने प्रधानमंत्री से उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए एक स्मारक बनाने की अपील की थी। शर्मिष्ठा ने बताया कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने उन्हें यह बताया था कि भारत के राष्ट्रपति के लिए शोक सभा का आयोजन नहीं किया जाता है। उन्होंने इसे पूरी तरह बेतुका और निराधार करार दिया और कहा कि वह अपने पिता के डायरी में पढ़ चुकी हैं कि जब पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन का निधन हुआ था, तो कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी और शोक संदेश खुद प्रणब मुखर्जी ने तैयार किया था। इसके अलावा शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सीआर केसवन के एक पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें यह बताया गया था कि कांग्रेस ने पार्टी के अन्य नेताओं को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया क्योंकि वे गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे। इस मुद्दे पर डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे डॉ. संजय बारू की किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ पुस्तक का भी उल्लेख किया गया, जिसमें यह जिक्र किया गया था कि कांग्रेस नेतृत्व ने कभी पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के लिए दिल्ली में कोई स्मारक नहीं बनाया, जिनका 2004 में निधन हो गया था। पुस्तक में यह भी दावा किया गया था कि कांग्रेस ने नरसिम्हा राव के दाह संस्कार को दिल्ली में करने के बजाय हैदराबाद में करने की कोशिश की थी। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर इंतजार करता रहा शव पूर्व पीएम नरसिम्हा राव का शव वाहन सजाया गया। तिरंगे से लिपटी उनके पार्थिव शरीर को तोप गाड़ी में रखा गया और वाहन कांग्रेस मुख्यालय के बाहर रुक गया। आधा घंटा शव वाहन वहीं खड़ा रहा लेकिन कांग्रेस मुख्यालय के गेट नहीं खुले। सोनिया गांधी समेत अन्य नेताओं ने बाहर आकर उन्हें श्रद्धांजलि दे दी। इसके बाद उनका वाहन एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गया। ‘द हाफ लायन’ में विनय सीतापति लिखते हैं कि कांग्रेस और गाँधी परिवार को यह नहीं पसंद था कि आर्थिक सुधारों का क्रेडिट उन्हें दिया जाए। इसके अलावा उनका मानना था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरने के पीछे भी नरसिम्हा राव की मिलीभगत थी। ऐसे में कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं थे। 2004 के बाद 2014 तक यूपीए की सरकार रही लेकिन नरसिम्हा राव का स्मारक दिल्ली में नहीं बनाया गया। बाद में मोदी … Read more

उज्जैन के बीजेपी लोक शक्ति कार्यालय पर इन दिनों शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर गहमा गहमी देखने को मिल रही

उज्जैन मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के संगठन चुनाव चल रहे हैं जिनमें हाई प्रोफाइल सीटों पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन की हाई प्रोफाइल सीट पर शहर और जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में कई नेता शामिल हैं. भारतीय जनता पार्टी के प्रभारी विधायकों द्वारा रायशुमारी चल रही है. धार्मिक नगरी उज्जैन के बीजेपी लोक शक्ति कार्यालय पर इन दिनों शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर गहमा गहमी देखने को मिल रही है. उज्जैन में शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर 24 नाम पर विचार चल रहा है. उज्जैन के नगर निगम के पूर्व सभापति सोनू गहलोत के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी में निर्वाचन प्रक्रिया के तहत शहर और जिला अध्यक्ष का चयन होता है लेकिन यह सब सौहार्दपूर्ण माहौल में रायशुमारी के साथ हो जाता है. इस बार भी भारतीय जनता पार्टी में कई योग्य दावेदार हैं, जिनका चयन चल रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि 31 दिसंबर के पहले ही नए अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा. भाजपा नेता सौदान सिंह के मुताबिक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोगों नेताओं के नाम पर रायशुमारी चल रही है. विधायक भगवान दास सबनानी ने कई नेताओं से बातचीत कर शहर और जिला अध्यक्ष को लेकर नाम की पैनल तैयार की है. उज्जैन में रायशुमारी, भोपाल से लगेगी मुहर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उज्जैन में राय सोमारी का दौर चल रहा है लेकिन आखिरी मुहर भोपाल से ही लगेगी. भोपाल से ही शहर और जिला अध्यक्ष नाम की घोषणा होगी. हालांकि बीजेपी में यह देखने में आता है कि महामंत्री को आगे शहर और अध्यक्ष की कमान मिलती है. इसी तरह के समीकरण उज्जैन में भी देखने को मिल रहा है.

BJP के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक

भोपाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक चल रही है. 15 जनवरी तक बीजेपी की मध्य प्रदेश इकाई को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, लेकिन किसके नाम का ऐलान होगा? इसे लेकर हर कोई अलग-अलग नाम पर चर्चा कर रहा है. मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जिला और शहर अध्यक्ष पद को लेकर नेताओं के बीच रायशुमारी चल रही है. सभी जिला और शहर अध्यक्षों की घोषणा के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चयन होगा. प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में इस बार कई नेताओं के नाम शामिल हैं. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारने वाले कई नेता प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं. इसके अलावा प्रदेश पदाधिकारी के लिए भी कई नामों का जिक्र हो रहा है. हालांकि, अभी आलाकमान का पूरा फोकस शहर और जिला अध्यक्ष पर किया है. शहर, जिला अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश अध्यक्ष का चयन करेंगे. प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा को 4 साल का कार्यकाल मिला है. लोकसभा चुनाव की वजह से पिछले साल होने वाले चुनाव को इस बार संपन्न कराया जा रहा है. प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया के मुताबिक, 15 जनवरी तक नए अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा. उन्होंने बताया कि अभी शहर और जिला अध्यक्ष को लेकर विचार-विमर्श चल रही है. सांसद ही बनते आ रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष, इस बार क्या होगा? अगर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पद की बात की जाए तो लंबे समय से यह देखने में आ रहा है कि सांसदों को ही ये जिम्मेदारी दी जा रही है. इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण जटिया, नंदू चौहान, राकेश सिंह, विष्णु दत्त शर्मा जैसे कई नाम शामिल हैं. इस बार भी यह कोशिश की जा रही है कि किसी सांसद को ही प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान मिले. वर्तमान अध्यक्ष भी दौड़ में शामिल वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी दोबारा कार्यकाल की दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं. उनके कार्यकाल में ही बीजेपी की दो बार सरकार बन चुकी है. जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इसके बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद बीजेपी की सरकार बन गई. इसके पश्चात विधानसभा चुनाव 2023 में भी विष्णु दत्त शर्मा का ही कार्यकाल था, जब बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की.

तमिलनाडु BJP अध्यक्ष ने शर्ट उतारकर खुद को क्यों मारे कोड़े? पूरे राज्य में आक्रोश

मदुरै तमिलनाडु में अन्ना विश्वविद्यालय की एक छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में विपक्षी दलों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने पहले कहा कि वह द्रमुक सरकार के हटने तक चप्पल नहीं पहनेंगे और नंगे पैर ही चलेंगे। इसके बाद आज उन्होंने न्याय की मांग करते हुए खुद को कोड़े से पीटा। आपको बता दें कि भाजपा ने आरोप लगाया है कि आरोपी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) का पदाधिकारी है। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी ने आरोपों को खारिज कर दिया है। इससे पहले अन्नामलाई ने आरोपी की द्रमुक नेताओं के साथ तस्वीरें दिखाते हुए आरोप लगाया कि वह सत्तारूढ़ पार्टी की छात्र शाखा का पदाधिकारी है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े होने के कारण अपराध को अंजाम दिया। उन्होंने कोयंबटूर में संवाददाताओं से कहा कि चूंकि आरोपी द्रमुक से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। पुलिस के मुताबिक, 37 साल के आरोपी पहले से ही कम से कम 10 आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है। आरोपी ज्ञानशेखरन ने पीड़िता को धमकाया था और कहा था कि जब भी वह उसे बुलाए उसे मिलने आना होगा। इस बीच, राष्ट्रीय महिला आयोग ने घटना का संज्ञान लिया और इसकी निंदा की। आयोग ने तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शंकर जीवाल को पत्र लिखकर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 71 लागू करने को कहा, जो बार-बार अपराध करने वालों से निपटने से संबंधित है। इसने कहा, ‘‘आयोग ने पाया है कि आरोपी आदतन अपराधी है और उसने पहले भी इसी तरह के अपराध किए हैं, और वह द्रमुक की सैदाई-पूर्व छात्र शाखा का उप-संगठक है। इसके अलावा, यह आरोप लगाया गया है कि उसके खिलाफ दर्ज सभी मामलों को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।’’

बगैर ठोस सबूत EVM पर सवाल उठाना गलत, युगेंद्र पवार से भी अपील वापसी को कहा, MVA से अलग सुप्रिया सुले के सुर

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाडी (MVA) की करारी हार के बाद कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) लगभग हर दिन ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाकर बीजेपी को घेरती है। हालाँकि, एमवीए में शामिल शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने ईवीएम के मुद्दे पर अपने सहयोगियों से अलग रुख अपनाया है।  वरिष्ठ नेता शरद पवार की बेटी व बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि बिना किसी पुख्ता सबूत के हार के लिए ईवीएम को दोष देना सही नहीं है. एनसीपी (एसपी) नेता सुले ने बुधवार को पुणे में मीडिया से बात करते हुए कहा, जब तक ईवीएम में छेड़छाड़ के ठोस सबूत नहीं मिलते, तब तक ईवीएम को दोष देना गलत है। ईवीएम के खिलाफ कोई भी आरोप तभी उचित हो सकते हैं जब उसके बारे में ठोस और विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध हों। मैं खुद ईवीएम से चार बार चुनाव जीत चुकी हूं। ईवीएम पर सवाल उठाने वालों से असहमती जताते हुए सुप्रिया सुले कहा कि ओडिशा के बीजू जनता दल (बीजेडी) और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे कुछ राजनीतिक दलों ने ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों को साबित करने के लिए डेटा होने का दावा किया है। पुणे के दौरे पर आईं सुप्रिया सुले ने पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने, ‘मुझे लगता है कि जब तक मेरे पास कुछ ठोस सबूत नहीं हैं, तब तक आरोप लगाना मेरे लिए सही नहीं है। मैंने एक ही ईवीएम से चार चुनाव जीती हूं।’ बीजेडी नेता के डेटा पर सवाल हालांकि, बारामती की सांसद ने कहा कि कई लोगों और ओडिशा के बीजू जनता दल (बीजेडी) और आप जैसे राजनीतिक दलों ने ईवीएम में छेड़छाड़ के अपने दावों को साबित करने के लिए डेटा होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि बीजेडी के अमर पटनायक ने मंगलवार को उन्हें लिखे एक पत्र में ईवीएम के इस्तेमाल के विरोध का समर्थन करने के लिए कुछ डेटा शेयर किए, लेकिन इस बारे में विस्तार से नहीं बताया। अरविंद केजरीवाल का जिक्र इसी तरह, खड़कवासला से विधानसभा चुनाव हारने वाले एनसीपी (शरद पवार) उम्मीदवार सचिन दोडके के पास भी ईवीएम के खिलाफ अपने दावे का समर्थन करने के लिए कुछ डेटा है। सुप्रिया सुले ने कहा, आम आदमी पार्टी चीफ अरविंद केजरीवाल ने भी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने पर आपत्ति जताई है। ‘माहौल परेशान करने वाला’ लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, ‘कुल मिलाकर माहौल परेशान करने वाला है। चाहे कोई तकनीकी समस्या हो या मतदाता सूची से जुड़ी कोई बात हो, इन बातों का जवाब बिना चर्चा के नहीं दिया जा सकता।’ उन्होंने कहा, ‘इन सभी आपत्तियों का अध्ययन किया जा रहा है।’ युगेंद्र पवार से कहा, आयोग से वापस लें आवेदन सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्होंने बारामती में अपने चाचा अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले युगेंद्र पवार से वोटों की पुनर्गणना के लिए अपना आवेदन वापस लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, ‘हम पहले से ही कई अन्य जगहों पर इस मामले को उठा रहे हैं। अगर कुछ (हेरफेर से संबंधित) है, तो वह सामने आ जाएगा।’

भाजपा को 2244 करोड़, BRS को मिला कांग्रेस से ज्यादा चंदा, जानें किस पार्टी को मिला कितना डोनेशन

नई दिल्ली राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी शेयर कर की है। ECI द्वारा जारी डाटा के मुताबिक 2023-2024 में BJP को अन्य पार्टियों मुकाबले 2,244 करोड़ का चंदा मिला है। पिछले 10 साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज BJP को पिछले साल के मुताबिक तीन गुना ज्यादा चंदा मिला है। इसके अलावा कांग्रेस को 255 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की बात करें तो उसे भी पिछले साल के मुकाबले तगड़ा मुनाफा हुआ है। पार्टी को पिछले साल 79 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, जबकि इस साल 255 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। चुनाव आयोग ने जारी की है रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध 2023-24 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि इसी ट्रस्ट ने कांग्रेस को 156.4 करोड़ रुपए दिए। 2023-24 में BJP को मिले चंदे का लगभग एक तिहाई और कांग्रेस को मिले चंदे का आधे से ज्यादा हिस्सा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है। इसके अलावा 2022-23 में प्रूडेंट को चंदा देने वालों में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा लिमिटेड, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, आर्सेलर मित्तल ग्रुप और भारती एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। 2023-24 के लिए प्रूडेंट ने अभी अपने चंदा देने वालों की लिस्ट जारी नहीं की है। क्षेत्रीय पार्टियों ने भी दी है चंदे की जानकारी बता दें कि देश की कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने भी अपनी मर्जी से चंदे का हिसाब किताब दिया है और बताया है कि उन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए कितना चंदा मिला है। इनमें बीआरएस भी शामिल है, जिसे बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को 60 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए से 121.5 करोड़ रुपये मिले हैं। जेएमएम ने बॉन्ड के जरिए 11.5 करोड़ रुपये मिलने की घोषणा की है। कांग्रेस पार्टी को ट्रस्टों के जरिए 156 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है। प्रूडेंट ने 2023-24 में BRS और YSRCP को 85 करोड़ रुपये और 62.5 करोड़ रुपये डोनेशन दिया था। आंध्र प्रदेश की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी की बात करें तो टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: – बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह पार्टी को मिले कुल चंदे का लगभग एक-तिहाई है। – कांग्रेस को प्रूडेंट ट्रस्ट से 156.4 करोड़ रुपये मिले, जो उसके कुल चंदे का आधे से अधिक है। – प्रूडेंट ट्रस्ट को 2022-23 में मेघा इंजीनियरिंग, सीरम इंस्टीट्यूट, आर्सेलर मित्तल और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों से चंदा मिला था। 2023-24 के लिए दानदाताओं की सूची अभी जारी नहीं की गई है। क्षेत्रीय दलों की स्थिति: – बीआरएस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। – वाईएसआर कांग्रेस को 121.5 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को 60 करोड़ रुपये और **जेएमएम** को 11.5 करोड़ रुपये का बॉन्ड मिला। – प्रूडेंट ट्रस्ट ने 2023-24 में बीआरएस को 85 करोड़ और वाईएसआर कांग्रेस को 62.5 करोड़ रुपये दिए। – टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बेलगावी में, पोस्टर में लगाया भारत का गलत नक्शा

बेलगावी कर्नाटक के बेलगावी में आज से शुरू हो रही कांग्रेस कार्य समिति के बैठक शुरू होने से पहले ही विवादों में आ गई है, उसकी वजह से इस अधिवेशन के प्रचार के लिए लगाये गये पोस्टर, इन पोस्टर्स में पार्टी के बड़े नेताओं के साथ भारत का जो नक्शा दिखाया गया है उसपर बवाल मच गया है, कांग्रेस द्वारा पोस्टर्स पर उपयोग किये भारत के नक़्शे से आधा कश्मीर और अक्साई चीन गायब है, भाजपा ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और कांग्रेस पर हमला किया है। भाजपा कर्नाटक ने कांग्रेस के इन पोस्टर्स पर पार्टी का ध्यान आकर्षित किया उसके बाद से भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है, भाजपा नेताओं ने इसे शर्मनाक बताते हुए कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति बताया, पार्टी ने कहा कांग्रेस कभी भारत को जोड़ने में विश्वास नहीं रखती ये तो भारत को तोड़ने में विश्वास रखती है इसलिए ये भारत विरोधी ताकतों के साथ खड़ी रहती है। 26 और 27 दिसंबर को कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक   आपको बता दें कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक 26 और 27 दिसंबर को कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित हो रही है। कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत सभी शीर्ष नेता शामिल रहेंगे। पार्टी ने इसके लिए जोरशोर से प्रचार किया है और पोस्टर लगाये है और वही पोस्टर्स विवाद का कारण बन गए हैं। प्रचार के पोस्टर्स में भारत के गलत नक़्शे पर बवाल   कर्नाटक में कांग्रेस ने महात्मा गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित अन्य कई बड़े नेताओं की तस्वीर के साथ पोस्टर्स लगाये हैं लेकिन इनमें भारत का जो नक्शा लगाया है उसमें पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन गायन कर दिया जबकि भारत हमेशा से ही पीओके और अक्साई चीन को भारत का हिस्सा बताता रहा है और वापस लेने के दावा करता रहा है। सुधांशु त्रिवेदी का सवाल,  कहीं इसके पीछे सोरोस कनेक्शन तो नहीं है? कांग्रेस के पोस्टर नजर में आते ही भाजपा हमलावर हो गई है, भाजपा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा आज पूरा देश वीर बाल दिवस मन रहा है दूसरी तरफ एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिससे मन वेदना से भर गया है, बेलगामी में कांग्रेस के अधिवेशन के पोस्टर्स पर भारत का गलत नक्शा दिखाया गया जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन को नक़्शे से गायब कर दिया, इससे साफ होता है कि कांग्रेस की सोच क्या है उन्होंने पिछले कई उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस इससे पहले भी कई बार भारत के नक़्शे के साथ ऐसा ही करती रही है, कांग्रेस हमेशा भारत विरोधी ताकतों के साथ खड़ी रहती है उन्होंने सवाल किया कि ये किसके इशारे पर हो रहा है कहीं इसके पीछे सोरोस कनेक्शन तो नहीं है? ये संयोग नहीं बल्कि वोट बैंक का उद्योग है : पूनावाला भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कांग्रेस ने बेलगावी में अपने नेताओं की तसवीर के साथ भारत का गलत नक्शा दिखाकर भारत की एकता और संप्रभुता के प्रति अनादर दिखाया है इससे साबित होता है कि कांग्रेस भारत जोड़ो या संविधान में विश्वास नहीं रखती बल्कि भारत तोड़ो में विश्वास रखती है, पूनावाला ने आगे कहा , इल्हान उमर से मिलना, 370 का समर्थन करना, जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाना, सोनिया गांधी एक ऐसे संगठन की सह-अध्यक्ष हैं, जो कश्मीर को भारत से अलग करने का समर्थन करता है, ये संयोग नहीं बल्कि वोट बैंक का उद्योग है। कांग्रेस दूसरी मुस्लिम लीग : अमित मालवीय अमित मालवीय ने X पर लिखा- कांग्रेस द्वारा पोस्टर्स से भारत के नक़्शे से पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन को गायब करना यह कोई गलती नहीं हो सकती, यह एक बयान है, यह उनकी तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा है, जो मानता है कि भारतीय मुसलमान भारत की तुलना में पाकिस्तान के प्रति अधिक वफादार हैं… उन्होंने लिखा कांग्रेस नई मुस्लिम लीग है, यह भारत को फिर से तोड़ना चाहता है। आशीष अग्रवाल का तंज – वाकई ये कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक क्षण है मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने X पर लिखा वाकई ये कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक क्षण है, भारत के नक्शे को विखंडित कर देना अक्साई चीन और पीओके को भारत का हिस्सा ना मानना और महात्मा गांधी की फोटो के साथ विकृत भारत का मानचित्र लगाना, ये मानसिकता है सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा की कांग्रेस की, बापू की कांग्रेस ने कभी भारत को खंडित करने का सपना नहीं देखा था, बापू , बाबा साहब और संविधान का अपमान करने वाली कांग्रेस शर्म करो… माफी मांगो..

नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की दखल बढ़ा, संघ की पृष्ठभूमि वाले नेता को ही इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी!

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी में जुट गई है। फरवरी महीने के अंत तक भगवा पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने की संभावना है। फिलहाल सत्तारूढ़ पार्टी बूथ, जिला और विभागीय अध्यक्षों के चुनाव में व्यस्त है। जल्द ही प्रदेश अध्यक्षों का चयन होगा। इस बात की संभावना है कि आधे से अधिक राज्यों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इसके बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जाएगा। इस रेस में कई नाम चल रहे हैं। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि सारी अटकलों पर पानी फिर सकता है। हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा को मिली शानदार जीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। इसे देखते हुए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की दखल बढ़ने की संभावना है। ऐसी चर्चा है कि जेपी नड्डा के एक विवादास्पद बयान के बाद आरएसएस और भाजपा के बीच दूरी बन गई थी। इसका खामियाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ा था। लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजों के बाद आरएसएस और भाजपा के बीच रिश्ते सामान्य होने की बात भी कही जाने लगी है। इन नामों की चर्चा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्रियों मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, धर्मेन्द्र प्रधान और भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े का नाम शामिल है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन नामों पर विचार करना अभी जल्दबाजी हो सकती है। अंतिम निर्णय भले ही पीएम मोदी और अमित शाह लेंगे, लेकिन आरएसएस को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। ऐसे में संघ की पृष्ठभूमि वाले नेता को ही इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी, जो कि भविष्य में दोनों संगठनों की बीच सामंजस्य बनाकर चल सके। बीजेपी एक दलित नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर विचार कर सकती है। अमित शाह के द्वारा संसद में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को लेकर दिए गया बयान के बाद भाजपा फिलहाल बैकफुट पर दिख रही है। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे भी दलित समुदाय से आते हैं। ऐसे में बीजेपी दलित मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे सकती है। ऐसे में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पार्टी महासचिव दुष्यंत गौतम और उत्तर प्रदेश मंत्री बेबी रानी मौर्य के नाम की भी चर्चा होने लगी है।

भाजपा उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर निशाना साधा, कहा-हार देखकर केजरीवाल गाली गलौज पर उतर आए

नई दिल्ली दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा ने बुधवार को आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। कपिल मिश्रा का कहना है कि दिल्ली में हार देखकर केजरीवाल गाली गलौज पर उतर आए। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल की एक्स पर एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेता ने कहा, “डरा हुआ केजरीवाल, नई दिल्ली में हार देखकर गाली गलौज पर उतर आया। केजरीवाल साहिब सिंह वर्मा के बेटे को देशद्रोही कहकर पूरे दिल्ली देहात को गाली दे रहे हैं। अभी तो भाजपा की लिस्ट आई भी नहीं और पूरा केजरीवाल गैंग प्रवेश वर्मा को गालियां दे रहा है।” अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव जीत रही है। वो हमें रोकने की साजिश कर रहे हैं, लेकिन वे कभी कामयाब नहीं होंगे। उन्होंने एक्स पर कई पोस्ट कीं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा के पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा के घर पर महिलाओं को भाजपा पैसे बांट रही है। दिल्ली के पूर्व सीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “ये लोग हर वोटर को 1100 रुपये दे रहे हैं और कह रहे हैं कि उनकी पार्टी को वोट देना। ये आप जरूरतमंदों की मदद कर रहे हो या खुलेआम वोट खरीद रहे हो? आपके पिताजी को आज शर्म आ रही होगी आप जैसे देशद्रोही बेटे पर। उन्होंने कहा कि ये कह रहा है कि उसके घर से कोई महिला खाली हाथ नहीं जाएगी। आज से पूरी दिल्ली की महिलाएं उसके घर जाकर पैसे ले आयें। ये लोग चुनाव नहीं लड़ते, बस बेईमानी करते हैं। इस बार दिल्ली के चुनाव में इनकी एक एक करतूत देश के सामने आएगी। पूरे देश के सामने ये लोग बेनकाब होंगे। उन्होंने आगे कहा, “मैं अभी अपनी नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों से आ रहा हूं। हर जगह लोगों ने बताया कि ये लोग खुले आम वोट खरीद रहे हैं। एक वोट के 1100 दे रहे हैं। लोगों ने कहा कि लोग इनसे पैसे ले लेंगे लेकिन इन्हें वोट नहीं देंगे। दिल्ली की सभी महिलाओं से मेरी प्रार्थना है कि आप रोज इनके घर कल से पैसे लेने जाइए।”  

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