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मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग के कर्मियों को सौंपी वाहनों की चाबी

रायपुर : सड़क परिवहन और यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने परिवहन सुरक्षा बेड़े में शामिल 48 वाहनों को झंडी दिखाकर किया रवाना मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग के कर्मियों को सौंपी वाहनों की चाबी रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि हमारी सरकार सड़क परिवहन और यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। परिवहन और यातायात सुरक्षा में लगे उड़नदस्ता दल को 48 नवीन वाहनों की तैनाती से दुर्घटनाओं में निश्चित रूप से कमी आएगी, यातायात सुग़म होगा और लोगों में ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। साय आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने इस मौके पर परिवहन विभाग के निरीक्षकों को इन वाहनों की चाबी सौंपी।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश सरकार सड़क यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। नवीन शासकीय वाहनों की मदद से परिवहन उड़नदस्ता दल नियमों का उल्लंघन करने वालों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उड़नदस्ता दल की कार्यक्षमता में वृद्धि, सड़क दुर्घटनाओं में कमी, सुरक्षा मानकों का बेहतर क्रियान्वयन और यातायात व्यवस्था में सुधार व अनुशासन बनाए रखने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी परिवहन दस्ते की निगरानी और पहुंच सुनिश्चित होगी।  ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील मुख्यमंत्री साय ने हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने और ट्रैफिक नियमों का पालन कर दूसरों के जीवन की रक्षा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही हम एक सुरक्षित, संयमित और संवेदनशील सड़क परिवेश का निर्माण कर सकते हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने लोगों से नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने की अपील भी की।      इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सचिव सह परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर सहित परिवहन विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

कोरोना के नए वैरिएंट से राज्य में पहली मौत, इन जिलों में सबसे ज्यादा आ रहे हैं केस, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

रायपुर छत्तीसगढ़ में कोविड अब जानलेवा होता जा रहा है। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं, राज्य में कोरोना वायरस से मौत का पहला मामला सामने आया है। राजनांदगांव की 86 वर्षीय बुजुर्ग की राजधानी रायपुर के एक अस्पताल में कोविड-19 संक्रमण से मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग और निगम अमले की मौजूदगी में कोविड प्रोटोकॉल के तहत कन्हारपुरी स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के 7 लोग रहे मौजूद जब कोविड संक्रमण व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया तो इस दौरान परिवार के सिर्फ सात लोग ही मौजूद रहे। इस मामले के बाद परिवार के सभी सदस्यों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जाएगी और उनके सैंपल कोविड-19 जांच के लिए भेजे जाएंगे। 14 जून को हुए थे भर्ती राजनांदगांव की 86 वर्षीय बुजुर्ग को सांस लेने में तकलीफ के चलते 14 जून को रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने जानकारी दी थी कि वह कोरोना से संक्रमित थीं। परिवार के सदस्यों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे। इसके साथ ही सभी को होम क्वारंटीन कर दिया गया है। परिवार के सदस्यों ने खुद सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी दी है कि वह होम क्वारंटीन हैं। जांच रिपोर्ट में पेशेंट कोविड पॉजिटिव आया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ओवरऑल अब तक प्रदेश में कोविड के 118 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 42 पिछले पांच दिनों में मिले हैं। सोमवार को दस नए मरीज मिले हैं। इनमें रायपुर के 3, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2 और सरगुजा-महासमुंद से एक-एक मरीज शामिल हैं। 24 मई को पहला मरीज मिला, 23 दिन में आंकड़ा 100 पार हालांकि एक्टिव मरीजों की संख्या 51 है, वहीं 66 रिकवर हो चुके हैं। इनमें 41 होम आइसोलेशन में हैं। 9 ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, वहीं 1 मरीज ICU में है। प्रदेश में 24 मई को प्रदेश में पहला कोविड पेशेंट रायपुर में मिला था। 23 दिन में आंकड़ा सैकड़ा का अंक पार गया है। इस लिहाज से प्रदेश में रोज 5 मरीज मिल रहे हैं। अगले दस दिन में 50 और नए मरीज मिल सकते हैं अच्छी बात ये है कि 3 मरीज रोज ठीक भी हो रहे हैं। कुछ और डेप्थ कैलकुलेशन करें तो जो डिजिट सामने आते हैं उसके मुताबिक कोविड की डेली ग्रोथ रेट 23.1% है, वहीं रिकवरी रेट 56.41% है। यानी रिकवरी रेट +33% हैं। इस लिहाज से अगले 10 दिनों का प्रोजेक्शन सेट करें तो प्रदेश में कोविड मरीजों की संख्या 167 हो जाएगी। लेकिन इनमें 96 रिकवर भी हो चुके होंगे। कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं छत्तीसगढ़ में कोविड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलो के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। इसके साथ ही तैयारियों को लेकर मॉक ड्रिल भी की थी। राज्य में कोविड में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले राजधानी रायपुर और बिलासपुर में आ रहे हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि राहत की बात ये है कि मरीज जल्दी से रिकवर हो रहे हैं। 6 मई को सबसे ज्यादा मरीज सामने आए इस महीने कोविड के सबसे ज्यादा मरीज बीते शुक्रवार यानी 6 मई को मिले थे। एक ही दिन में रायपुर में 11, बिलासपुर में 5 और बालोद में 1 मरीज के साथ कुल 17 मरीज मिले थे। नया वैरिएंट आने के बाद से ये एक दिन में सबसे बड़ा आंकड़ा था। सैंपल कलेक्शन से लेकर कोविड मरीज के इलाज तक की ट्रेनिंग स्टाफ को दी जा रही है। साथ ही इमरजेंसी सिचुएशन से निपटने के लिए मॉकड्रिल भी कराई गई है। ओवर ऑल बात करें तो प्रदेश में अब तक रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, बालोद, बस्तर, सरगुजा महासमंद और बेमेतरा समेत कुल 9 जिलों में कोविड के पेशेंट मिल चुके हैं। होम क्वारंटाइन में ठीक हो रहे मरीज मेकाहारा के डॉ. आर के पांडा के मुताबिक, ज्यादातर मरीज होम क्वारंटाइन में ही ठीक हो जा रहे हैं, लेकिन उन मरीजों को ज्यादा खतरा है, जिन्हें पहले से दूसरी या एक से ज्यादा बीमारियां हैं। खासकर डायबिटीज पेशेंट और चेन स्मोकर्स नए वैरिएंट के चपेट में जल्दी आ सकते हैं। देशभर में कोविड से 108 मौतें वहीं, अगर देशभर की बात करें तो 9 राज्यों को छोड़कर बाकी स्टेट्स में कोविड का नया वैरिएंट JN.1 फैल चुका है। अभी 7 हजार 264 मरीज रिकवर एक्टिव केस हैं। वहीं 13 हजार 604 से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं। जबकि 108 मौतें हो चुकी हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि नया वैरिएंट पहले की तुलना में कम खतरनाक हैं, फैटेलिटी रेट सिर्फ 2% है। ऑक्सीजन प्लांट्स बंद, बिगड़ सकती व्यवस्था रायपुर में कोविड के बढ़ते केस के बीच सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन प्लांट को लेकर दिखती है। लास्ट कोविड वेव के दौरान पीएम केयर फंड से सरकारी अस्पताल DKS, आयुर्वेदिक कॉलेज और अंबेडकर अस्पताल में अपना ऑक्सीजन प्लांट खड़ा किया गया था, जिससे मरीजों को वक्त पर सप्लाई मिल सके। अस्पताल परिसर में लगे ये ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े हैं। DKS में बीते 2 सालों में अस्पताल ने ऑक्सीजन सिलेंडर पर करीब 3.84 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। हर महीने करीब 16 लाख रुपए का बिल सिर्फ सिलेंडर खरीदने में जा रहा है।

जिन्दल स्टील एंड पावर को कृषि प्रोत्साहन व बुजुर्ग कल्याण के लिए ग्रीनटेक अवार्ड

रायपुर जाने-माने उद्योगपति और कुरुक्षेत्र से सांसद श्री नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिन्दल स्टील एंड पावर को “कृषि प्रोत्साहन” और “वरिष्ठ नागरिक कल्याण” के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए ग्रीनटेक अवार्ड-2025 से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हुए सामाजिक कार्यों के मूल्यांकन के बाद 14 जून को नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मान समारोह में कंपनी को उपरोक्त दोनों ही क्षेत्रों में सराहनीय योगदान के लिए ये दोनों सम्मान प्रदान किये गए, जो श्रीमती शालू जिन्दल के नेतृत्व वाले जिन्दल फाउंडेशन के माध्यम से समाज में व्यापक और सकारात्मक बदलाव लाने के जेएसपी के व्यापक दृष्टिकोण का परिचायक है। जिन्दल फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती शालू जिन्दल ने इस अवसर पर कहा,”इन दोनों ग्रीनटेक पुरस्कारों को पाकर हम गौरवान्वित हैं। यह सम्मान हमें पंक्ति के आखिरी व्यक्ति तक विकास की लौ पहुंचाने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। चाहे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक उपलब्ध कराना हो या बुजुर्गों के लिए गौरव और सम्मान का वातावरण तैयार करना, हमारे सभी प्रयास सेवा भावना से प्रेरित हैं। यह पुरस्कार मैं अपनी टीम और उन जुझारू समुदायों को समर्पित करती हूं, जिनके साथ हम निरंतर काम कर रहे हैं।” दोनों क्षेत्रों में मिले सम्मान के लिए उन्होंने निर्णायक मंडल का भी आभार व्यक्त किया। “कृषि प्रोत्साहन” के लिए मिला पुरस्कार इस बात की पहचान है कि जिन्दल फाउंडेशन ने गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में किसानों को आगे बढ़ाने के लिए अच्छा काम किया है। फाउंडेशन ने अब तक 25,000 से अधिक किसानों को जैविक खेती, पानी की बचत वाली सिंचाई, खेती के नए उपकरणों के प्रयोग और मिट्टी की अच्छी सेहत बनाए रखने की ट्रेनिंग दी है। इससे किसानों की फसल का उत्पादन बढ़ा, आमदनी बढ़ी और साथ ही साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला।  हाल ही में, अंगुल जिले में किसानों के लिए मोबाइल सॉइल टेस्टिंग लैब की शुरुआत श्रीमती शालू जिन्दल ने की, जो श्री नवीन जिन्दल के दृष्टिकोण पर आधारित प्राकृतिक खेती के मिशन का अगला चरण है। जिन्दल फाउंडेशन की वाटरशेड विकास परियोजना और बाड़ी कार्यक्रम की तो अनेक राष्ट्रीय मंचों पर सराहना की गई है।  “वरिष्ठ नागरिक कल्याण” के लिए मिला ये पुरस्कार इस बात का सबूत है कि जिन्दल स्टील एंड पावर बुजुर्गों के मान-सम्मान और उनकी देखभाल को अपना दायित्व मानती है। जिन्दल फाउंडेशन की मोबाइल हेल्थ क्लिनिक, डे-केयर सेंटर, घर-घर जाकर दी जा रही स्वास्थ्य सेवाएं और मानसिक सेहत के लिए परामर्श जैसे कार्यक्रम विशेष रूप से गांवों में रहने वाले हजारों बुजुर्गों के लिए लाभकारी साबित हुए हैं। इन पहलों से बुजुर्गों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सामाजिक जुड़ाव में सुधार हुआ है। फाउंडेशन जरूरतमंद बुजुर्गों के पोषण और देखभाल के लिए विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी कर रहा है और शीघ्र ही “जिन्दल अपना घर” के नाम से एक आधुनिक सुविधा-संपन्न वृद्धाश्रम की स्थापना करने जा रहा है, जहां वरिष्ठ नागरिक गरिमापूर्ण और स्वस्थ जीवन जी सकेंगे। इन दो ग्रीनटेक पुरस्कारों के माध्यम से जेएसपी और जिन्दल फाउंडेशन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि इनोवेशन और समावेशन को साथ लेकर चलने वाली उनकी सोच, भारत में सामाजिक परिवर्तन की एक प्रेरक शक्ति है।

दंतेवाड़ा में नक्सल प्रभावित 50 मैदान विकसित करेगा सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन

दंतेवाड़ा  मास्टर ब्लास्टर के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर ने बस्तर के बच्चों और खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा फैसला किया है. सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में 50 खेल के मैदान विकसित करेगा. नक्सलवाद का दशकों से दंश झेल रहा दंतेवाड़ा तेजी से अपनी सुंदरता और प्रतिभा के लिए जाना जाने लगा है. दिग्गज क्रिकेटर रहे सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की ओर से स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर एक अनूठी पहल पर काम कर रहा है. योजना के तहत अबतक 20 से ज्यादा खेल के मैदानों को विकसित किया जा चुका है. कुल 50 खेल के मैदान सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की मदद से विकसित किए जाने हैं. सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन: दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि “इस परियोजना के तहत सामुदायिक भागीदारी से अब तक जिले में कम से कम 20 खेल के मैदान विकसित किए गए हैं और अक्टूबर तक बाकि का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा”. 50 खेल के मैदान डेवलप होंगे  मानदेशी फाउंडेशन: बस्तर के मानदेशी फाउंडेशन के सहयोग से सचिन तेंदुलकर दंतेवाड़ा के 50 खेल मैदानों का कायकल्प करा रहे हैं. सचिन तेंदुलकर की इस पहल से इलाके के युवाओं की न सिर्फ खेल में रुचि बढे़गी बल्कि उनका मानसिक और शारीरिक विकास भी होगा. समाज की मुख्यधारा से भटके युवाओं को खेल से जोड़ा जाएगा और इससे नक्सलवाद के खात्मे में मदद मिलेगी. खेल न सिर्फ जीवन को अनुशासित बनाता बल्कि प्रतिस्पर्धा के जरिए हमें बहेतर लक्ष्य की ओर भी ले जाता है. नए खेल मैदानों के बनने से यहां के युवाओं की खेल में रुचि बढेगी और वो राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का भी लोहा मनवाएंगे.     दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार में खेल का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन में फुटबॉल, खो खो, कबड्डी के साथ साथ जंगल जिम (जिसे क्लाइम्बिंग फ्रेम भी कहा जाता)जैसे स्पोर्टस भी होंगे. खेल मैदानों का निर्माण फाउंडेशन स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कर रही है. कोई बाहरी ठेकेदार इसका निर्माण नहीं कर रहे हैं. छिंदनार में बना यह मैदान सैम्पल मैदान है. जिसमें 50 गांवों के 100 युवाओं को ट्रेनिंग दी गई है. जिसके बाद दूसरे भाग में 50 गांवों के लोग अपने क्षेत्र में जाकर अपने लिए मैदान बनाएंगे. निर्माण कार्य के लिए फाउंडेशन और जिला प्रशासन पूरी निर्माण सामग्री और काम के लिए लोगों की व्यवस्था करेगी: दिव्या सिन्हा, मानदेशी फाउंडेशन की सदस्य     मैं बड़े गुडरे पोटाकेबिन से ट्रेनिंग लेने के लिए छिंदनार पहुंचा था. सबसे पहले मैदान का मेजरमेंट लिया गया. फिर खेल के अनुसार उसमें जगहों का चयन किया गया. उसमें निर्माण कार्य किया गया. प्रशिक्षण को लेकर बहुत अच्छा लगा. सभी स्कूलों के मैदान में खेल की सुविधा होनी चाहिए.बच्चे खेल मैदान का भरपूर इस्तेमाल करें. अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाएं. अपने स्कूल में इस तरह का मैदान बनाने के लिए प्रशिक्षण लेने से हमें बड़ा फायदा हुआ है. वापस जाकर जल्द ही इसका निर्माण कराया जाएगा.खिलाड़ी मन से खेलेगा तो निश्चित ही आगे बढ़ेगा: वीरेंद्र कुमार कवासी, स्थानीय छात्र     तेंदुलकर फाउंडेशन जिले में मैदान बना रही है. जिसमें प्राइमरी और मिडिल स्कूलों का चयन किया गया है. ज़िले में कई खेल मैदान हैं लेकिन तकनीकी रूप से इसका निर्माण नहीं कराया गया था. मैदान की कमेटी प्रशिक्षित भी नहीं होती थी. छिंदनार गांव में एक साथ 10 से 12 खेलों के मैदान तैयार किया गया है. जिसमें खोखो, कबड्डी, बॉलीबॉल, गोला फेंक, तवा फेंक, रनिंग ट्रैक, लांग जम्प, हाई जम्प और योगा ट्रैक भी बनाया गया है. इस तरह ज़िले में 50 मैदान बनाया जा रहा है. निश्चित तौर पर प्राथमिक स्तर से बच्चों की प्रतिभा निखरकर सामने आएगी. बच्चे खेल के माध्यम से बस्तर की छवि दूर करके नाम रोशन करेंगे: जितेंद्र चौहान, बीआरसी नक्सलगढ़ के युवाओं को मिलेगी सपनों की उड़ान: इस योजना से विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के बच्चों को लाभ होगा. यहां के बच्चे जो अब तक संसाधनों की कमी के कारण अपनी प्रतिभा को सही दिशा नहीं दे पा रहे थे. यह खेल मैदान उन्हें न केवल अपने सपनों को उड़ान देने का मौका देंगे, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी दिलाएंगे. दंतेवाड़ा में बन रहे ये 50 खेल मैदान महज़ ज़मीन के टुकड़े नहीं, बल्कि सपनों की पगडंडी हैं. यूं तो बस्तर में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. अब उम्मीद जताई जा रही है कि बस्तर से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलेंगे. दंतेवाड़ा का नाम सुनते ही ज़हन में एक तस्वीर उभरती है. घने जंगल, आदिवासी जीवन और नक्सली गतिविधियों की छाया. लेकिन अब इस तस्वीर में बदलाव लाने जा रही है. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर की प्रेरणा और मानदेशी फाउंडेशन की साझेदारी से बस्तर के गांवों में 50 खेल मैदानों का निर्माण हो रहा है. जो बच्चों और युवाओं के लिए एक नई दिशा तय करेगी. बस्तर ओलंपिक 2024: पिछले साल राज्य सरकार ने दंतेवाड़ा और छह अन्य जिलों वाले बस्तर क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए बस्तर ओलंपिक 2024 का आयोजन किया था. बस्तर ओलंपिक 2024 में 10 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. अलग अलग खेलों में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया. बस्तर ओलंपिक में सरेंडर नक्सलियों ने भी हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. बस्तर ओलंपिक के समापन समारोह में खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल होने पहुंचे थे. बस्तर ओलंपिक के मंच से ही केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा था कि अगली बार जब में बस्तर ओलंपिक के आयोजन में आउंगा आउंगा तो यहां नक्सलवाद का खात्मा हो चुका होगा. दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी ने दिया धन्यवाद: विधायक चैतराम अटामी ने कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा में खेल के मैदानों को निखारने का काम कर रहा है. विधायक ने कहा कि हमें खुशी होगी कि सचिन तेंदुलकर मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए भी दंतेवाड़ा आएं. विधायक ने कहा कि खेल के मैदान होने से नक्सलवाद पर भी लगाम लगेगी और प्रतिभावान बच्चों को नया मुकाम और पहचान भी मिल पाएगा.

दुर्ग में एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 54 लाख 90 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया

भिलाई  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के नेवई थाना क्षेत्र में एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 54 लाख 90 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. खुद को CBI अधिकारी बताकर ठगों ने महिला और उसके परिवार को एक महीने तक डरा-धमकाकर बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली. पीड़िता नम्रता चंद्राकर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 29 अप्रैल से 29 मई 2025 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर उसके बुजुर्ग पिता को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने की धमकी दी गई. आरोपियों ने कहा कि उनके बैंक खाते से दो करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. इस डर से महिला ने अपनी संपत्ति की जानकारी भी दे दी और 54.90 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए. 54 लाख 90 हजार रुपये की ठगी पुलिस जांच में आरोपियों के मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जानकारी निकाली गई. सभी आरोपी लखनऊ के रहने वाले निकले. दुर्ग पुलिस की टीम ने लखनऊ पहुंचकर दीपक गुप्ता, राजेश विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार और शुभम श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया. इनमें से राजेश ने यूनियन बैंक का खाता उपलब्ध कराया था, जिसमें ठगी की रकम जमा हुई. महिला को आरोपियों ने किया डिजिटल अरेस्ट पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल और आधार कार्ड जब्त कर लिए हैं. चारों को रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ की जा रही है. पुलिस अन्य आरोपियों की भी तलाश में जुटी है.  

राजधानी रायपुर में पकड़े गए 10 और बांग्लादेशी; जेल नहीं, घर भेजने की तैयारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के रायपुर में पुलिस ने राजधानी रायपुर में अवैध रूप से रह रहे 10 बांग्लादेशी नागरिकों को दबोचा है। इसमें महिला, पुरुष और नाबालिग शामिल हैं। सभी फिलहाल थाने में बिठाया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस को टिकरापारा इलाके के अलग-अलग जगह पर बांग्लादेशी रहने की सूचना मिली थी।   इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर तीन परिवारों से पूछताछ की। जब उनसे पहचान संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। कड़ाई से पूछताछ करने पर उन्होंने बांग्लादेशी होने की बात कबूल कर ली। टिकरापारा पुलिस ने तीनों दंपतियों समेत कुल 10 लोगों को हिरासत में लिया है।  15-20 साल से रह रहे थे सभी के रायपुर में 15-20 सालों से रह रहे हैं। पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि बनवा लिए हैं। सभी से पूछताछ चल रही है। उनके मोबाइल के कॉल डिटेल निकाले जा रहे हैं। उनके लोकल कॉन्टेक्ट का पता लगाया जा रहा है। 10 सालों से रायपुर में निवासरत हिरासत में लिए गए तीनों परिवार दावड़ा कालोनी और धरमनगर इलाके में किराये के मकानों में रह रहे थे। ये लोग पिछले 10 सालों से भी अधिक समय से रायपुर में निवास कर रहे थे और शहर में अंडे का ठेला लगाने या दिहाड़ी मजदूरी जैसे छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा कर रहे थे। पुलिस अब इन सभी के दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। आसपास के लोग पुलिस को दे रहे सूचना हाल ही में धरमनगर में एक दंपती और उनकी बेटी के बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इसके बाद से ही स्थानीय लोग भी अपने आसपास रहने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की सूचना पुलिस को दे रहे हैं। वहीं, हिरासत में लिए गए संदिग्धों में दो नाबालिग भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये सभी कथित तौर पर बांग्लादेश से कोलकाता के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और फिर अपने किसी परिचित की मदद से रायपुर पहुंचे थे। पुलिस अब उन मददगारों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने इन लोगों को यहां रहने में सहायता की। एसएसपी डा. लाल उम्मेद सिंह ने बताया कि पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है और जल्द ही इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा किया जाएगा। एजेंट की तलाश पुलिस ने कुछ दिन पहले भी एक बांग्लादेशी दंपती मोहम्द दिलावर और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया था। उनसे पूछताछ में खुलासा हुआ है कि एजेंट के जरिए वह रायपुर पहुंचे थे। इस मामले में भी इसी एजेंट की भूमिका बताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल, मुंबई, नागपुर होते हुए रायपुर पहुंचने के लिए कई एजेंट सक्रिय हैं। पिछले कुछ सालों में रायपुर शहर के अलग-अलग हिस्से में बड़ी संख्या में बांग्लादेश और अन्य देशों से भी लोग पहुंचे हैं। वे अवैध रूप से रह रहे हैं। जांच चल रही है एएसपी पश्चिम दौलत राम पोर्ते ने बताया कि संदिग्ध बांग्लादेशी को हिरासत में लिया गया है उनसे पूछताछ की जा रही है। उनसे मिले दस्तावेज की जांच की जा रही है। इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में भी पता लगाया जा रहा है। मामले का जल्द खुलासा करेंगे।

CG में स्कूलों की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगी, आदेश जारी

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया है। शिक्षा सत्र 2025-26 की शुरुआत 16 जून से हो चुकी है, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी के चलते छात्रों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 17 जून से 21 जून 2025 तक प्रदेश की सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय स्कूलों की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगी। इसके बाद 23 जून 2025 से विद्यालयों में सामान्य समयानुसार कक्षाएं संचालित की जाएंगी। अभिभावकों से की गई अपील यह आदेश राज्यपाल के नाम से अतिरिक्त सचिव आर. पी. वर्मा द्वारा जारी किया गया है और सभी जिला कलेक्टर, संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण और अन्य संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी भेजी गई है। छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे निर्देशों का पालन करते हुए समय पर विद्यालय पहुंचे और गर्मी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें। 447 सरकारी स्कूलों को मिले शिक्षक सरकार ने कुछ दिन पहले ही राज्य के कुल 453 शिक्षक विहीन स्कूलों में से 447 स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती कर दी है। शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना से एक नई उम्मीद जगी है। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत शिक्षक विहीन 357 प्राथमिक स्कूल और 30 माध्यमिक स्कूल में नियमित शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई। सुकमा जिले के चार और बीजापुर जिले के दो हाई स्कूलों को छोड़ भी दें, तो राज्य में प्राथमिक स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल तक अब शिक्षक विहीन नहीं हैं।  

विष्णु सरकार का एक्शन : रेत माफियाओं पर पूरे राज्य में पुलिस एवं प्रशासन का कड़ा प्रहार, 400 ट्रैक्टर रेत जब्त, बिलासपुर में 85 जगहों पर रेड

रायपुर/ बिलासपुर छत्तीसगढ़ में रेत माफिया की गुंडागर्दी की खबरों के बाद राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई है। बिलासपुर, धमतरी में जिला प्रशासन की ओर से अवैध रेत खनन और भंडारण के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन ने रेत माफियाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की। एक ही दिन में प्रशासन की 70 टीम ने अलग-अलग 85 जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान जेसीबी, पोकलेन, हाईवा और ट्रैक्टर समेत 52 गाड़ियां जब्त की। साथ ही अवैध रेत भंडारण जब्त कर कई केस भी दर्ज किए गए। रेत माफियों पर अंकुश लगाने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस व जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। पूरे जिलेभर में आज सुबह से लेकर शाम तक कार्रवाई करते हुए रेत खोदाई के लिए काम में लाने वाले पोकलैंड के अबलावा परिवहन के लिए ट्रैक्टर व अन्य भारी वाहनों की जब्ती बनाई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 50 से अधिक ट्रैक्टर हाईवा पोकलैंड एवं जेसीबी जब्त किया है। बता दें कि बारिश के मौसम में रेत की ब्लैक मार्केटिंग करने माफियाओं ने अलग-अलग जगह पर 600 ट्रैक्टर से अधिक रेत डंप कर रखा था। इसे भी जब्त बना लिया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के निर्देश और राज्य शासन की कड़ाई का आज जिले में असर दिखाई दिया। बिलासपुर पुलिस और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने रेत माफियाओं पर अंकुश लगाते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई की। पुलिस और माइनिंग की टीम की कार्रवाई से जिले में माफियाओं के बीच हड़कंप मचा रहा। बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं बिलासपुर के एसएसपी रजनेश सिंह के द्वारा आज सुबह जिले के एसडीएम , एसडीओपी , सीएसपी, तहसीलदार, नायब तहसीलदारी, थाना प्रभारी, खनिज विभाग के अधिकारी, एवं उनके साथ पर्याप्त कार्यपालिक अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों की 60 से 70 अलग-अलग टीम में बनाकर , विभिन्न 80-85 स्थानों पर छापेमार कार्यवाही की गई। उक्त कार्यवाही में लगभग 12 से 13 स्थानों पर अलग-अलग तकरीबन 600 ट्रैक्टर अवैध रेत डंप की हुई पाई गई, जिन्हें जब्त तक किया गया। मशीनों व वाहनों की बनाई जब्ती 3 पोकलैंड , 2 जेसीबी,13 हाईवा, 34 ट्रैक्टर सहित ,कुल 50 से अधिक वाहनों को जप्त किया गया एवं 40 से 50 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई। बिलासपुर पुलिस द्वारा इसमें खनिज विभाग के साथ मिलकर कड़ी से कड़ी वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। अवैध रेत उत्खनन एवं रेत माफियाओं के खिलाफ बिलासपुर पुलिस प्रशासन का यह प्रहार लगातार जारी रहेगा। बिलासपुर में खनिज टास्क फोर्स की आपात बैठक बुलाई हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी रेत माफियाओं और प्रशासन के बीच सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं। इसे लेकर राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई है। जिसके बाद बिलासपुर में कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने रविवार को जिला खनिज टास्क फोर्स की आपात बैठक बुलाई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर FIR दर्ज की जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कार्रवाई बेखौफ होकर की जाए। सुबह निकली 70 टीम, दिन भर चली कार्रवाई बिलासपुर में सोमवार सुबह एसडीएम, एसडीओपी, सीएसपी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी और खनिज विभाग के अधिकारियों की 70 टीमों को रवाना किया गया। इस दौरान टीम में शामिल अफसर और 100 से अधिक पुलिस जवानों ने जिले के 85 जगहों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में 13 स्थानों पर डंप हजारों घनमीटर रेत जब्त की गई। इसके अलावा 3 पोकलेन, 2 जेसीबी, 13 हाइवा और 34 ट्रैक्टर सहित कुल 52 वाहन पकड़े गए। 40 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जिनके वाहन जब्त किए गए हैं, उनके खिलाफ जुर्माने की सूची तैयार की जा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पहुंची टीम सोमवार को हुई कार्रवाई के दौरान टास्क फोर्स की टीम शहर के सिविल लाइन से सरकंडा, कोनी, कोटा, मस्तूरी, हिर्री, बिल्हा, पचपेड़ी और तखतपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों तक पहुंची। जहां, रेत घाटों पर हो रहे अवैध उत्खनन और परिवहन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की। इस कार्रवाई के दौरान अवैध रेत भंडारण को जब्त किया गया है। बताया जा रहा है कि हजारों घनमीटर रेत जब्त किया गया है, जिसका आकलन किया जा रहा है। धमतरी में 200 ट्रैक्टर रेत जब्त धमतरी जिले में भी रेत खदान और भंडारण स्थलों पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। एसडीएम पीयूष तिवारी की टीम ने देर रात छापेमारी की। टीम में नायब तहसीलदार और पुलिस भी शामिल थी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आदेश के बाद 15 जून से रेत खदानें बंद हैं। इसके बावजूद रेत माफिया अवैध खनन कर रहे थे। प्रशासन ने 2 जगहों पर कार्रवाई की। लीलर गांव में करीब 200 ट्रैक्टर और भरारी गांव में भी 200 ट्रैक्टर रेत का अवैध भंडारण मिला। टीम ने लीलर और भरारी में तीन चैन माउंटेन, एक जेसीबी और तीन हाईवा वाहन जब्त किए। छापेमारी के समय खदान में अवैध खनन चल रहा था। रेत निकालकर भंडारण भी किया जा रहा था। एसडीएम तिवारी ने बताया कि सभी वाहनों को जब्त कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन अन्य जगहों पर भी छापेमारी कर सकता है। जिला कलेक्टर के आदेश के बावजूद रेत माफिया अवैध गतिविधियां कर रहे थे। जांजगीर-चांपा जिले में रेत उत्खनन पर प्रतिबंध केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आदेश के बाद जांजगीर-चांपा जिले में नदियों से रेत उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर ने जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में यह निर्णय लिया। बैठक में पुलिस, खनिज, वन और परिवहन विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से रेत उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अवैध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वर्षा ऋतु के दौरान खनिज के अवैध कारोबार को रोकने के लिए टास्क फोर्स को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों को भार क्षमता से अधिक खनिज परिवहन पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कोयला और डस्ट ढोने वाले वाहनों को तिरपाल से ढंकना अनिवार्य होगा। गिट्टी खदानों के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग को निर्देशित किया गया है। जिले में महानदी और हसदेव नदी के 5 रेत घाट वैध रूप से संचालित हैं। कई अन्य घाटों में … Read more

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में कैम्पा के अंतर्गत संचालित कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ कैम्पा की गवर्निंग बॉडी की तृतीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि कैम्पा मद का समुचित उपयोग नियमानुसार किया जाए। उन्होंने बैठक में कैम्पा के अंतर्गत संचालित कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। हमारे प्रदेश में भरपूर वन संपदा उपलब्ध है। देश में भौगोलिक क्षेत्रफल के अनुसार छत्तीसगढ़ का स्थान दसवां है, जबकि वन क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य तीसरे पायदान पर है। वनों के संरक्षण एवं संवर्धन में कैम्पा मद की राशि की महत्वपूर्ण भूमिका है, अतः इसका उपयोग आवश्यकतानुरूप प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कैम्पा मद के अंतर्गत विगत वर्षों में किए गए वन विकास, वन सुरक्षा, वन्यप्राणी संरक्षण तथा अधोसंरचना विकास से संबंधित कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (कैम्पा) द्वारा गवर्निंग बॉडी के समक्ष अब तक की प्रगति तथा कैम्पा मद से संपादित महत्वपूर्ण कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में बताया गया कि कैम्पा मद के अंतर्गत वन क्षेत्रों में वृक्षारोपण, वनग्रामों का पुनर्स्थापन, भू-जल संरक्षण, देवगुड़ियों का संरक्षण, वन मार्गों का उन्नयन, पुलिया एवं रपटा निर्माण, चारागाह विकास, नर्सरियों की स्थापना, हाईटेक बेरियरों का निर्माण, नदी तट वृक्षारोपण, फ्रंटलाइन स्टाफ हेतु आवासीय भवन, अग्नि सुरक्षा तथा वन्यप्राणी प्रबंधन जैसे कार्यों का क्रियान्वयन किया गया है। छत्तीसगढ़ कैम्पा की गवर्निंग बॉडी को अवगत कराया गया कि वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक राज्य के ब्याज धारित लोक खाता ‘छत्तीसगढ़ प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि’ में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली से कुल 7297.55 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई है, जिसमें से विगत छह वर्षों में 4010.43 करोड़ रुपए का उपयोग किया गया है। कैम्पा मद की वार्षिक कार्य योजना (एपीओ) 2025-26 के लिए राज्य कैम्पा द्वारा भारत सरकार के राष्ट्रीय कैम्पा को 694.18 करोड़ रुपए की योजना प्रस्तावित की गई है, जिसके विरुद्ध अब तक 433.69 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।  बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती निहारिका बारीक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजू एस., सचिव आवास एवं पर्यावरण विभाग अंकित आनंद, सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। 1538

खाद-बीज की क्वालिटी को लेकर किसानों को करें जागरूक: मंत्री नेताम

रायपुर : किसानों को संवेदनशीलता के साथ सहूलियतें दी जाएं: मंत्री राम विचार नेताम मंत्री राम विचार नेताम समितियों में खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण और किसानों की मांग के अनुरूप वितरण किया जाए खाद-बीज की क्वालिटी को लेकर किसानों को करें जागरूक  अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता पर होगी कड़ी कार्रवाई सुगंधित धान की खेती को दिया जाए बढ़ावा मसालों, फूल और फलों की खेती को बढ़ावा देने का प्रयास करें आमदनी बढ़ाने फसल चक्र परिवर्तन के लिए किसानों को करें प्रोत्साहित कृषि मंत्री ने विभागीय काम-काज की समीक्षा की रायपुर   कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री रामविचार नेताम ने आज छत्तीसगढ़ नवा रायपुर अटल नगर स्थित न्यू सर्किट हाउस में प्रदेशभर के कृषि अधिकारियों की मैराथन बैठक लेकर विभागीय काम-काज की समीक्षा की। मंत्री नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। हमारी सरकार की प्राथमिकता किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही उन्हें ज्यादा से ज्यादा सहूलियतें देना है। उन्होंने कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को उनकी मांग के अनुरूप प्रमाणित खाद-बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित हों। उन्होंने समिति केन्द्रों में पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज के भण्डारण और वितरण भी सुनिश्चित करने के ही किसानों को उनकी मांग के आधार पर उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। मंत्री नेताम ने बैठक में कहा कि राज्य के अलग-अलग स्थानों से नकली खाद-बीज की शिकायतें मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि खाद-बीज की क्वालिटी और प्रमाणिकता को लेकर किसानों को जागरूक करें। मंत्री नेताम ने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता का मामला पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री नेताम ने उद्यानिकी विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य में मसाला, फूल और फलों की खेती की काफी संभावनाएं हैं। अतः किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जिलेवार वहां के वातावरण के अनुरूप अधिक उत्पादकता वाली उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए। उन्होंने प्रदेश में सुगन्धित धान की खेती को बढ़ावा दिया जाए और इसे छत्तीसगढ़ के ब्रांड के रूप में विकसित किया जाए। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि खरीफ सीजन 2025 के लिए कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारी की जा रही है। खरीफ के लिए खाद-बीज का पर्याप्त भण्डारण कराए जाने के साथ ही किसानों को इसका तेजी से वितरण भी किया जा रहा है। खरीफ सीजन 2025 के लिए रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य 14 लाख 62 हजार मेट्रिक टन निर्धारित किया गया है,  जिसमें राज्य स्तर पर सरकारी क्षेत्र में 9.49 लाख मीट्रिक टन तथा निजी क्षेत्र में 5.13 लाख मीट्रिक टन है। इसमें 7 लाख 12 हजार यूरिया, डीएपी 3.10 लाख, एनपीके 1.80 लाख, पोटाश 60 हजार एवं सुपर फास्फेट 2 लाख मीट्रिक टन शामिल है। लक्ष्य के विरूद्ध 10.67 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद का भण्डारण कर किसानों को 5.23 लाख मीट्रिक टन खाद का वितरण किया जा चुका है।  मंत्री नेताम ने कहा कि उर्वरक कंपनियों से विभिन्न प्रकार की खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग सतत् संपर्क एवं समन्वय करें, ताकि राज्य की डिमांड अनुरूप उर्वरकों की रैक निर्धारित सेड्यूल के अनुरूप उपलब्ध हो सके। आज की स्थिति में यूरिया 4.96 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 1.13 लाख मीट्रिक टन, एनपीके 1.60 लाख मीट्रिक टन, पोटाश 72 हजार 879 एवं सुपर फास्फेट 2.26 लाख मीट्रिक टन का भण्डारण हो चुका है, जिसमें से यूरिया 2.52 लाख, डीएपी 74 हजार 575, एनपीके 86 हजार 280, पोटाश 31 हजार 152 एवं सुपर फास्फेट 79 हजार 408 मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया गया है। खरीफ सीजन की विभिन्न फसलों के लिए 4 लाख 95 हजार 58 क्विंटल बीज की डिमांड को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा 4 लाख 29 हजार 535 क्विंटल बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई हैै। समितियों के माध्यम से किसानों को अब तक 2 लाख 62 हजार 232 क्विंटल बीज का वितरण किया जा चुका है। राज्य में खाद एवं बीज का भण्डारण एवं उठाव की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कृषि मंत्री नेताम ने केन्द्र और राज्य पोषित योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान निधि योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को योजना से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने छुटे हुए किसानों का केव्हायसी पूरी सजगता के साथ कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सुशासन तिहार के तहत पात्र आवेदन पर संवेदनशीलता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, स्वायल हेल्थ योजना आदि की भी प्रगति की समीक्षा की और इन योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। मंत्री नेताम ने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप चिन्हांकित क्षेत्रों में पामआयल की खेती, बांस की खेती, फूलों की खेती, फलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में विशेषकर मिलेट्स फसलों के रकबा में बढ़ोत्तरी के लिए किसानों को जागरूक करने पर बल दिया। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव श्रीमती शहला निगार, कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, उद्यानिकी विभाग के संचालक एस. जगदीशन राव, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेन्द्र सवन्नी सहित विभाग के सभी संभागों और जिलों के अधिकारी उपस्थित थे।

17 जून को मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में मंत्री टंक राम वर्मा लेंगे विभागीय समीक्षा बैठक

रायपुर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा 17 जून को सुबह 11 बजे मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में विभागीय कार्याे की समीक्षा करेंगे. इस महत्वपूर्ण बैठक में राजस्व, आपदा प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, नक्शा निरीक्षण और अन्य विभागीय कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी. बैठक में विशेष रूप से ई-गवर्नेंस के अंतर्गत डिजिटल क्राप सर्वे और जीआईएस कार्यों की प्रगति,राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का विश्लेषण और समयबद्ध निस्तारण,भू-अर्जन मामलों की जांच एवं शिकायतों की स्थिति,प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम हेतु उपकरणों और निधियों के उपयोग की समीक्षा की जाएगी. इसी तरह सर्वे-रिसर्वे, नक्शा, परियोजना और WINDS योजना की प्रगति की रिपोर्ट के साथ-साथ मानसून से पहले आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा और NDRF के फायर सेफ्टी सिस्टम के आधुनिकीकरण की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी. बैठक में नवपदस्थ नायब तहसीलदारों, भू-अभिलेख अधिकारियों तथा अन्य राजस्व अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रियाओं की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी.

रायपुर : मुख्यमंत्री साय से छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के पदाधिकारियों ने की सौजन्य मुलाकात,ओलम्पिक दिवस आयोजन हेतु किया आमंत्रित

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की और साय को 23 जून को ओलम्पिक दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।  इस अवसर पर  छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, प्रदेश वालीबॉल संघ अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ उपाध्यक्ष सुनील रामदास एवं संयुक्त सचिव प्रशांत रघुवंशी उपस्थित थे। इस दौरान छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी गई। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष है।

बिना विलंब शुल्क के ईग्नू में ऑनलाइन मोड में प्रवेश का सुनहरा मौका, अंतिम तिथि 15 जुलाई

रायपुर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, (इग्नू) नई दिल्ली द्वारा जुलाई 2025 के लिए ऑनलाइन मोड में प्रवेश के लिए नामांकन बिना विलंब शुल्क के साथ अंतिम तिथि 15 जुलाई 2025 है। नामांकन के लिए स्नातक-स्नातकोत्तर व पी.जी. डिप्लोमा सर्टिफिकेट कार्यक्रम एवं अवेयरनेस प्रोग्राम भी उपलब्ध है जिसके लिए निर्देशन वेबसाइट पर उपलब्ध है। इच्छुक शिक्षार्थी अध्ययन केंद्र में उपलब्धता के आधार पर विषय का चुनाव कर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए अध्ययन केंद्र-1509 शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जगदलपुर से संपर्क कर सकते हैं। शिक्षार्थियों को मुद्रित सामाग्री न लेने पर कार्यक्रम शुल्क में 15 प्रतिशत की छूट दी गई है जो ऑनलाइन सामग्री के आधार पर पढ़ाई कर सकेंगे। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए बीए, बीकॉम और बीएससी (सभी सामान्य) में निःशुल्क नामांकन का प्रावधान है। इच्छुक आवेदक ऑनलाइन मोड में नए प्रवेश के लिए पोर्टल पर जा कर इग्नू के लिंक https://ignouadmission.samarth.edu.in/ पद पर प्रवेश के लिए नामांकन 15 जुलाई 2025 तक कर सकते हैं।

कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में 18 जून को बीजेपी विधायक दल की बैठक

रायपुर  भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक आगामी 18 जून 2025 को दोपहर 12 बजे रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित की जाएगी। बैठक को लेकर सभी विधायकों को सूचना जारी कर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे। इनमें अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रांत संगठन मंत्री पवन साय शामिल हैं। इस बैठक में आगामी मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की जा सकती है। इसके साथ ही विधायकों के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की समीक्षा की जा सकती है।

नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही स्कूलों के संचालन समय में किया बदलाव

रायपुर  छत्तीसगढ़ में 16 जून यानी आज से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। इस बीच शाला प्रवेशोत्सव के पहले ही दिन राज्य सरकार ने बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी स्कूलों के संचालन समय में बदलाव किया गया है। अब क्या होगी स्कूलों की नई टाइमिंग? बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि 17 जून से 21 जून 2025 तक प्रदेश की सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों में कक्षाएं सुबह 7 बजे से 11 बजे तक ही लगेंगी। हालांकि मानसून के आगमन के बाद या परिस्थितियों में बदलाव के अनुसार, समय में पुनः संशोधन किया जा सकता है। आमतौर पर सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे या 3 बजे तक ज्यादा संभावना है। गौरतलब है कि नया शिक्षा सत्र 16 जून 2025 से शुरू हो चुका है, लेकिन गर्मी की तीव्रता को देखते हुए विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर न पड़े, इसलिए अस्थायी रूप से स्कूलों के समय में यह बदलाव किया गया है। 23 जून 2025 से सभी स्कूलों की कक्षाएं पहले की तरह सामान्य समय पर संचालित की जाएंगी। छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे इस अस्थायी व्यवस्था के अनुसार स्कूल पहुंचने की तैयारी करें।

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