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पुलिस की बड़ी कार्रवाई , 10 लाख से अधिक कैश के साथ 18 जुआरियों और 20 मोबाइल जब्त

दुर्ग  पुलगांव थाना अंतर्गत अंजोरा चौकी क्षेत्र में पुलिस ने आज जुआ खेलने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. महमरा गांव में पृथ्वी पैलेस के पीछे जुआ खेल रहे 18 लोगों को पुलिस ने धर दबोचा है और जुआरियों से 10.82 लाख रु नकदी रकम समेत ताश के पत्ते और 20 मोबाईल जब्त कर लिए हैं. जानकारी के मुताबिक, आज (16 जून 2025) को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जुआरियों का समूह पृथ्वी पैलेस बाउण्ड्रीवाल के पीछे 52 पत्ती ताश से बड़ी राशियों का जुआ खेल रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस की टीम रवाना हुई और मौके पर पहुंचकर घेराबंदी कर जुआ खेलते 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने जुआ की रकम, ताश के पत्ते और आरोपियों के मोबाईल जब्त कर जुआरियों के खिलाफ जुआं प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 3 (2).5 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. गिरफ्तार आरोपियों के नाम: 1. दिनेश जोशी उम्र 29 साल,  नंदनी रोड भिलाई थाना छावनी 2. हर्षित जैन उम्र 26 साल साकिन महावीर नगर थाना दुर्ग 3. साहिल हरनखेडे  25 साल साकिन  राजीव नगर थाना दुर्ग 4. गोपी सोनकर  28 साल साकिन शिव पारा  थाना दुर्ग 5. संदीप सिह 29 वर्ष साकिन  ऋषभ ग्रीन सिटी थाना पुलगॉव 6. भवीन जैन उम्र 33 साल साकिन  ब्राम्हण पारा थाना दुर्ग 7. पप्पू साहू 38 साल साकिन  राजीव नगर दुर्ग 8. नीलम कुमार 26 साल सदर बाजार दुर्ग . 9. चंदन सोनवानी 29 साल मठपारा थाना दुर्ग 10. टेकेश्वर देवांगन  उम्र 27 साल उरला थाना मोहनगर 11. नरेश जैन  40 साल  ऋषभ ग्रीन सिटी थाना पुलगांव 12. हर्ष देवांगन  उम्र 28 साल साकिन नया पारा रोड दुर्ग 13. भुनेश्वर चंद्राकर उम्र 31 साल साकिन कर्मचारी नगर थाना मोहननगर 14. हेमलाल ढीमर  उम्र 26 साल रुआबांधा थाना भिलाईनगर 15. खुशाल सरवैया उम्र 31 साल तकियापारा दुर्ग 16. मनय जैन उम्र 31 साल साकिन गांधी चौक दुर्ग 17. विनोद गोवानी  उम्र 40 साल साकिन सिंधी कालोनी दुर्ग 18. भूपेन्द्र गुप्ता  30 साल साकिनशंकर नगर दुर्ग.

कई बार शिकायत के बाद भी प्रशासन नहीं ली सुध, स्कूल के किचन शेड पर गिरा पीपल का पेड़, टला बड़ा हादसा

बलौदाबाजार  बलौदाबाजार के गणेशशंकर बाजपेई विद्यालय में एक बड़ा हादसा टल गया। बीती रात तेज बारिश और आंधी के कारण स्कूल परिसर में स्थित एक पुराना पीपल का पेड़ अचानक किचन शेड पर गिर गया, जिससे शेड पूरी तरह धराशायी हो गया। गनीमत रही कि यह घटना रात में हुई, वरना यदि यह हादसा स्कूल समय के दौरान होता, तो किचन में काम करने वाली रसोइयों और भोजन लेने आए बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती थी। जानकारी के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने वर्ष 2023 से ही पीपल के झुकते हिस्से को हटाने के लिए शिक्षा विभाग, वन विभाग और नगरपालिका को कई बार लिखित शिकायतें भेजी थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्कूल की प्राचार्य अरविंदर कौर ने बताया कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद किसी अधिकारी ने गंभीरता नहीं दिखाई। अब जब पेड़ गिर गया है, तब भी मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा है। बच्चों की भोजन व्यवस्था प्रभावित स्कूल में भोजन बनाने वाली रसोइया ने बताया कि अब किचन शेड पूरी तरह टूट चुका है, जिससे मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों के लिए खाना बनाना मुश्किल हो गया है। शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि “कहीं भी बनाओ, लेकिन बच्चों को खाना मिलना चाहिए”, जो कि व्यवहारिक रूप से न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि असुरक्षित भी है। जनप्रतिनिधियों के बीच पौधरोपण, लेकिन समस्या जस की तस गौरतलब है कि नए सत्र की शुरुआत के अवसर पर स्कूलों में बच्चों का तिलक कर स्वागत किया गया, खीर-पूड़ी बांटी गई और जनप्रतिनिधियों के साथ पौधरोपण भी हुआ। लेकिन इन्हीं आयोजनों के बीच सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे प्रशासन की अनदेखी का शिकार होते नजर आए। स्कूल प्रबंधन और रसोइयों की मांग है कि पेड़ के बाकी हिस्से को तुरंत हटाया जाए और किचन शेड का पुनर्निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और भोजन व्यवस्था बाधित न हो और कोई अप्रिय घटना भविष्य में न हो। यह घटना एक बार फिर से सरकारी तंत्र की लापरवाही और सिस्टम की सुस्ती को उजागर करती है, जिसमें समस्या की जानकारी समय रहते होने के बावजूद कार्रवाई तब होती है जब हादसा टल जाता है या घटित हो जाता है।

शिक्षकों की राशन वितरण कार्य में लगाई गई ड्यूटी, शिक्षक संघ ने विरोध में खोला मोर्चा

बलरामपुर  शिक्षा विभाग और प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है. जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को राशन वितरण के कार्य में नियुक्त कर दिया गया है, जिससे शिक्षण व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है, इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई छोड़कर अब शिक्षक सरकारी योजनाओं के वितरण में व्यस्त रहेंगे. सूत्रों के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) वाड्रफनगर द्वारा जारी आदेश के तहत शिक्षकों की ड्यूटी राशन वितरण केंद्रों में लगाई गई है, जिसके विरोध में अब शिक्षक संघ ने भी मोर्चा खोल दिया है. शिक्षक नेताओं का कहना है कि प्रशासन का यह कदम पूरी तरह से अनुचित और शिक्षण कार्य के प्रति घोर लापरवाही दर्शाता है. शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने इसे लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर विरोध दर्ज कराया है. उनका कहना है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा. इस मुद्दे पर जब एसडीएम नीर निधि नांदेहा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि, “यह आदेश पहले जारी किया गया था लेकिन अब उसे संशोधित कर लिया गया है. शिक्षकों को राशन वितरण कार्य से मुक्त कर दिया गया है.” हालांकि, जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगी थी, उन्हें अभी तक संशोधित आदेश की प्रतिलिपि नहीं मिली है, जिसके कारण वे अब भी असमंजस की स्थिति में हैं. राशन वितरण में शिक्षकों की ड्यूटी लगने से न केवल कक्षाएं प्रभावित होंगी, बल्कि मध्याह्न भोजन, परीक्षा मूल्यांकन, नामांकन अभियान जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा.

सीएम साय से बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने सौजन्य भेंट किया है. सीएम साय ने राजीव शुक्ला का कोसा वस्त्र और बेल मेटल से निर्मित स्मृति चिन्ह भेंटकर आत्मीय स्वागत किया. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में क्रिकेट सहित अन्य खेलों को बढ़ावा देने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई. इस अवसर पर सीएम साय ने छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना के विस्तार और खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अवसर दिलाने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है. सीसीपीएल (छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग) का समापन में शामिल होने के लिए राज्यसभा सांसद और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला रायपुर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कहा था -हम लगातार क्रिकेट को बढ़ावा दे रहे हैं. लगातार काम कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ को 2 इंटरनेशनल क्रिकेट मैच की सौगात मिली है.

शराब के नशे में तेज रफ्तार कार सवार युवक ने दो बाइक सवारों को मारी टक्कर, युवती समेत चार की मौत

गौरेला पेंड्रा मरवाही पेंड्रा में देर रात भीषण सड़क हादसा हुआ है। जिसमें तेज रफ्तार शराब के नशे में कार सवार युवक ने दो बाइक सवारों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में एक युवती सहित चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। वहीं कार चालक को भी मामूली चोट आई है। जिनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है। जिले में एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला है। जिसमें एक कार चालक नशे की हालत में दो अलग-अलग बाइक सवारों को जोरदार टक्कर मारी है। जिसमें चार लोगो की मौत हो गई। यह भीषण सड़क हादसा बीती रात पेंड्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत दुबटिया मझगवां मुख्यमार्ग पर सेवरा गांव के पास हुआ है। घटना उस समय हुई जब दो बाइक सवार धनपुर की ओर से पेंड्रा की तरफ आ रहे थे। उसी दौरान एक तेज रफ्तार कार सवार मरवाही निवासी स्नेहिल गुप्ता जो शराब के नशे में था। सामने से बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों बाइक में सवार तीन युवकों की तो मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक युवती को तत्काल इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद बिलासपुर रिफर कर दिया गया। लेकिन रास्ते में ही युवती ने भी दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार मृतक गंगा राम उर्फ सागर का कल जन्मदिन था और वह अपने दोस्त को धनपुर छोड़ने के बाद गर्लफ्रेंड सोनू केवट के साथ वापस घर गिरारी आ रहा था और पल्सर बाइक पर था। उसी दौरान कार ने उसे टक्कर मारी जबकि दूसरा बाइक सवार दो युवक जो बरघाट गांव के रहने वाले भूपेंद्र मराबी और रामावतार सिंह दोनों दशगात्र के कार्यक्रम में शामिल महोरा गांव गए हुए थे और कार्यक्रम के बाद अपने घर बरघाट आने को आईस्मार्ट बाइक से वापस घर आ रहे थे। उसे भी इसी कार चालक ने टक्कर मारी। कार की टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए। कार ने दूसरे साइड में चल रहे दोनों बाइक सवारों को चपेट में लिया और दोनों ही बाइक कार से 20 मीटर तो 50 मीटर दूर जा गिरी। फिलहाल, पुलिस मामले में मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरु कर दी है। वहीं मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी की मानें तो पूरे मामले में कार चालक के खिलाफ गम्भीर धाराओं में अपराध दर्ज कर मामले की जांच की जाएगी। वहीं घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

भरथरी गायिका सुरुज बाई खांडे की जयंती पर सुरुज उत्सव का आयोजन सम्पन्न हुआ

रायपुर/जगदलपुर  प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय भरथरी गायिका सुरुज बाई खांडे की जयंती के अवसर पर 12 जून को बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स हाल में सुरुज उत्सव का आयोजन सम्पन्न हुआ जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उल्लेखनीय कार्य कर बस्तर छत्तीसगढ़ का नाम रौशन करने वालो को सुरुज सम्मान 2025 प्रदान किया गया। सुरुज उत्सव में शिवकुमार नाग द्वारा बस्तर वंदना गीत, मोहरी वाले ग्रुप द्वारा दंतेश्वरी पाड़ की प्रस्तुति के साथ ही आयोजन स्थल में चित्रकार द्वय खेमदास वैष्णव व सुभाष पांडेय द्वारा बस्तर लोकचित्र की प्रदर्शनी लगाई गई। मेघ प्रकाश शेरपा की किताब ईरुम मांड का द्वंद व प्रेम का विमोचन भी सुरुज उत्सव के मंच से किया गया जिसमें लेखक द्वारा बस्तर के अपने अनुभव को लिखा गया है। कार्यक्रम में मंच संचालन अफजल अली ने किया व भरथरी लोक गीत कलाकार हिमानी वासनिक ने भरथरी गायन की बेहतरीन प्रस्तुति दी । सुरुज ट्रस्ट की दीप्ति ओग्रे ने सुरुज उत्सव के विषय में बताया की बिलासपुर, रायपुर संभाग के बाद इस वर्ष बस्तर संभाग के लोगो को सुरुज सम्मान देने को योजना बनी। सुरुज ट्रस्ट द्वारा सुरुज बाई खांडे के जयंती व पुण्यतिथि के अवसर पर हर साल हम कार्यक्रम आयोजित कर रहे है जिसके माध्यम से भरथरी गायन का भी प्रचार कर रहे है ताकि भरथरी गायन विधा से लोग जुड़े और भरथरी गायन विधा फिर राष्ट्रीय,अंतर्राष्ट्रीय तक पहुचे।सुरुज ट्रस्ट से जुड़े शकील रिजवी ने बताया कि सुरुज उत्सव के माध्यम से हम कलाकारों को स्थानीय से राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय मंच दिलाने के लिए प्रयासरत है, सुरुज सम्मान समारोह में विभिन्न प्रस्तुतियां उसका एक हिस्सा है और हम अन्य विभिन्न कार्यक्रमो के माध्यम से बस्तर के कलाकारों के विभिन्न विधाओं को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाने के लिए कार्यरत है।  सुरुज उत्सव में मुख्य अतिथि एस. करीमुद्दीन, कार्यक्रम में अध्यक्षता खेमदास वैष्णव ने की व विशिष्ट अतिथि डॉ. जयमती कश्यप व अनिल लुंकड़ के करकमलों से सम्मानित होने वाले विभूतियों में  पत्रकारिता: विकास तिवारी, गायत्री आचार्य,  साहित्य: श्रीमती खुदैजा खान, विक्रम सोनी,  समाज सेवा: प्रकाश ठक्कर,  महिला आर्थिक उन्नयन: रजिया शेख,  अभिनय: मोहन सोनी, खुशबू सोढ़ी,  लोक गायन: शिव कुमार नाग, पिलादास कोर्राम, वादन: जयप्रकाश,  पर्यटन: उर्मिला नाग, मानसिंह भघेल,  सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर: कविता कश्यप, अस्तु नाग चित्रकला: सुरभि वर्मा, जगदीश तिवारी, चित्र विचित्र ग्रुप, मोहरी वाले ग्रुप,  सुरक्षा बल: सैनिक करन राय व मंच संचालन: अफज़ल अली,  घड़वा शिल्प: महेश सागर, उर्मिला सागर थे।  

मोदी सरकार के 11 साल पूरे: राजेश मूणत ने रायपुर पश्चिम में जनसभा को किया संबोधित

मोदी सरकार के 11 साल पूरे: राजेश मूणत ने रायपुर पश्चिम में जनसभा को किया संबोधित रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक भव्य जनसभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश मूणत ने शिरकत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजेश मूणत ने कहा कि “यह नरेंद्र मोदी पर जनता के अटूट विश्वास का ही परिणाम है कि केंद्र में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आई है। पिछले 11 वर्षों में भारत ने न केवल आर्थिक क्षेत्र में बल्कि वैश्विक सामरिक मंचों पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।” उन्होंने कहा कि आज देश की साख वैश्विक मंचों पर पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। आतंकवाद, भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर लगाम कसते हुए सरकार ने गरीबों, किसानों और युवाओं के लिए कई ऐतिहासिक योजनाएं शुरू की हैं। इस अवसर पर स्थानीय भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भारत की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे लोगों ने सराहा। कार्यक्रम के अंत में राजेश मूणत ने जनता का आभार प्रकट करते हुए कहा कि “जनता के सहयोग से ही यह 11 वर्षों की यात्रा संभव हो सकी है और यह विश्वास भाजपा को आगे और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।”

मुख्यमंत्री ने 38 हजार श्रमिकों के खातों में ऑनलाइन अंतरित किए 19.71 करोड़ की सहायता राशि

रायपुर : श्रमिक परिवारों के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए समर्पित है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री के हाथों 31 मेधावी श्रमिक बच्चों को मिली 2-2 लाख की प्रोत्साहन राशि मुख्यमंत्री ने 38 हजार श्रमिकों के खातों में ऑनलाइन अंतरित किए 19.71 करोड़ की सहायता राशि रायपुर  “हम श्रमिक परिवारों के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। आपका स्नेह और सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हम सब मिलकर एक विकसित, समृद्ध और सशक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करेंगे।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत कक्षा दसवीं और बारहवीं के टॉप 10 में स्थान पाने वाले पंजीकृत श्रमिकों के 31 मेधावी बच्चों को दो-दो लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत राज्य के 38 हजार 200 निर्माण श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत 19.71 करोड़ रूपए से ज्यादा की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।            मुख्यमंत्री ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम हासिल करने वाले श्रमवीरों के मेधावी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सरकार श्रमिक परिवारों की आवश्यकताओं को भली-भांति समझती है और उनके समग्र कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज श्रमिक परिवार का बच्चा विदेश जाकर पढ़ना चाहे तो उसके लिए भी 50 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान श्रम विभाग द्वारा किया गया है। साय ने कहा कि हम नवाचार के साथ कदमताल करते हुए ऐसी नीतियां बना रहे हैं, जिनसे प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिले। प्रदेश की आकर्षक उद्योग नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार को प्राप्त हो चुके हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साय ने श्रम मंत्रालय में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि श्रमिकों से मेरा विशेष लगाव है और श्रमिकों के हित में कार्य करना हमेशा संतुष्टि देता है।           मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में दो वर्षों तक श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी और उनके नेतृत्व में श्रम राज्यमंत्री के रूप में श्रमिकों के पेंशन सुधार की दिशा में हमने कई ऐतिहासिक कदम उठाए और न्यूनतम पेंशन की राशि सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्रमिकों को लेकर संवेदनशील है और उनके निर्देश पर ही श्रमिकों के प्रोविडेंट फंड (PF) में वर्षों से पड़ी लगभग 27 हजार करोड़ रुपए की अन्क्लेम्ड राशि का उपयोग उनके हित में करने का बड़ा निर्णय भी इस दौरान हमने लिया था। राज्यमंत्री के रूप में यूनिवर्सल पीएफ नंबर की शुरुआत हमारी सरकार ने की, जिससे श्रमिकों द्वारा बार-बार पीएफ राशि क्लेम करने की समस्या दूर हुई।            मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी से आग्रह करते हुए कहा कि श्रम विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी अन्य ज़रूरतमंदों तक अवश्य पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक श्रमिक इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने श्रमिकों के लिए गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही प्रदेश में संचालित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।           उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश चहुंमुखी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन डेढ़ वर्षों में “मोदी की गारंटी” के तहत सभी वादों को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 38 हजार 2 सौ श्रमिकों को 19.71 करोड़ रुपये एवं प्रवीण्य सूची में चयनित 31 विद्यार्थियों को 62 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। देवांगन ने बताया कि शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत 17 जिलों के 46 केन्द्रों में श्रमिकों को 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और भविष्य में इसे सभी उद्योग प्रधान जिलों में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग सुविधा प्रारंभ करने की जानकारी भी दी।  श्रम मंत्री ने कहा कि नई उद्योग नीति के तहत उद्योगों की स्थापना के लिए नियमों को सरल बनाया गया है , जिससे निवेश बढ़ा है एवं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।         छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के साथ प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। मण्डल के माध्यम से प्रदेश में 31 जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें नोनी सशक्तिकरण, महतारी जतन, श्रमिक सियान सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मण्डल प्रदेश के 29.47 लाख पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है। श्रमिक अपना पंजीकरण श्रमेव जयते ऐप, लोक सेवा केन्द्र या श्रम कार्यालय में करवा सकते हैं। नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना ने बदली मजदूर परिवार के बच्चों की ज़िंदगी       कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सामने मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से लाभान्वित बच्चों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए आभार व्यक्त किया। सभी बच्चों ने कहा कि वे मजदूर और गरीब परिवारों से हैं, लेकिन इस योजना ने उन्हें पढ़ाई का अवसर दिया। यह योजना श्रमिक परिवारों के सपनों को नई उड़ान दे रही है। सूरजपुर जिले के भैयाथान के हीरा सिंह ने बताया कि आईआईआईटी से बी टेक की पढ़ाई पूरी कर अब जूनियर डेटा साइंस डेवलपर बन चुके हैं। इस योजना से उन्हें 4.10 लाख रुपए की सहायता मिली, जिससे उनकी पढ़ाई पूरी हो पाई थी। इसी तरह बी.टेक अंतिम वर्ष के छात्र अमलेंद्र पैंकरा ने बताया कि उनका परिवार मजदूरी कर जीवन यापन करता है और इस योजना की मदद से कॉलेज की फीस भर पा रहे हैं।  एक अन्य छात्र दीपक पैंकरा ने … Read more

10,372 स्कूलों का एकीकरण, शिक्षकों का व्यापक युक्तियुक्तकरण, छात्रों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा

रायपुर  राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और सार्थक पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुरूप मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में यह दूरगामी सुधार, वास्तव में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और लंबे समय से चली आ रही शैक्षिक विसंगतियों के समाधान का कारगर प्रयास है। युक्तियुक्तकरण से पहले, छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण अंचल की शालाओं में शिक्षकों की कमी, नगरीय इलाकों और उसके समीप की शालाओं में जरूरत से ज्यादा शिक्षकों की पदस्थपना के कारण शिक्षा प्रभावित हो रही थी और इसका असर बच्चों के परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा था।  राज्य के लगभग 212 प्राथमिक शालाएं और 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं पूरी तरह से शिक्षक विहीन थीं, जबकि 6,872 प्राथमिक शालाएं और 255 पूर्व माध्यमिक शालाएं केवल एक शिक्षक के साथ संचालित हो रही थीं। इसके अतिरिक्त 211 शालाएं ऐसी थीं जहाँ छात्र संख्या शून्य थी, लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। इसके अलावा, 166 शालाओं को समायोजित किया गया, इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की 133 शालाएं शामिल थीं, जिनकी दर्ज संख्या 10 से कम थी और दूरी 1 किमी से कम थी, तथा शहरी क्षेत्रों की 33 शालाएं थीं, जिनकी दर्ज संख्या 30 से कम थी और दूरी 500 मीटर से कम थी। इन चुनौतियों के बावजूद, छत्तीसगढ़ का छात्र-अध्यापक अनुपात (पीटीआर) राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय रूप से बेहतर था, प्राथमिक शालाओं के लिए पीटीआर-20 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 29 है और पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए पीटीआर-18 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 38 है। हालांकि, वितरण असमान था। राज्य में लगभग 17,000 प्राथमिक शालाएं और लगभग 4,479 पूर्व माध्यमिक शालाएं थीं, जिनका पीटीआर-20 से कम था। अकेले शहरी क्षेत्रों में 527 ऐसे विद्यालय थे, जिनका पीटीआर-10 से कम था, जिनमें 15 या उससे अधिक शिक्षकों वाली 08 प्राथमिक शालाएं, 10-15 शिक्षकों वाली 61 शालाएं और 6-9 शिक्षकों वाली 749 प्राथमिक शालाएं थीं, ये आंकड़े बेहतर संसाधन आवंटन की जरूरत को दर्शाते हैं। इस पहल का मुख्य बिंदु एक ही परिसर में संचालित लगभग 10 हजार 372 शालाओं का एकीकरण था, जिनमें प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल थे। इस विलय से कई लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें शाला त्यागी छात्रों की संख्या में कमी और छात्रों को बार-बार स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता का समाप्त होना शामिल है। यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, छोटी कक्षाओं के छात्रों को बड़ी कक्षाओं के छात्रों का सहयोग प्राप्त होने, और कंप्यूटर, विज्ञान प्रयोगशाला, खेल-कूद तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से शैक्षणिक समझ और अभिरुचि में वृद्धि के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होगा। इस दृष्टिकोण से प्रशासनिक व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। विद्यालयों के समायोजन के साथ-साथ, जिला, संभाग और राज्य स्तर पर काउंसलिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण शिक्षक युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया भी की गई। इस प्रक्रिया के तहत जिला स्तर पर लगभग 13 हजार 793 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। संभाग स्तर पर 863 का और राज्य स्तर पर 105 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। युक्तियुक्तकरण अभियान के प्रारंभिक परिणाम अत्यधिक आशाजनक हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा विभाग का कहना है कि कोई भी विद्यालय बंद नहीं किया जा रहा है और कोई भी शिक्षक पद समाप्त नहीं हो रहा है। इसके बजाय ध्यान बेहतर अधोसंरचना वाले विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित करने पर है।  युक्तियुक्तकरण के पश्चात राज्य में शिक्षक विहीन विद्यालयों की संख्या शून्य हो गई है। एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में प्रभावशाली 80 प्रतिशत की कमी आई है अब लगभग 1,200 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। एक ही परिसर में स्थित 10,372 विद्यलायों का एकीकरण और 166 ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों का समायोजन पूरा हो चुका है। इससे लगभग 89 प्रतिशत विद्यार्थियों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। छात्रों को अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध होंगे और विद्यालय की समय सारिणी एवं अन्य गतिविधियों में अधिक एकरूपता रहेगी। इस पहल का उद्देश्य उपचारात्मक शिक्षण द्वारा छात्रों की समझ को बेहतर बनाना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करके, छत्तीसगढ़ न केवल वर्तमान कमियों को दूर कर रहा है, बल्कि एक ऐसे भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रख रहा है। जहाँ प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे समग्र विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। युक्तियुक्तकरण का यह कदम एक अधिक कुशल, न्यायसंगत और प्रभावी शैक्षिक वातावरण बनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए मिली बड़ी सौगात, डबल इंजन की सरकार में लोगों का हो रहा सर्वांगीण विकास : केंद्रीय राज्यमंत्री

रायपुर : केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 39 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों का किया भूमिपूजन उप मुख्यमंत्री साव ने अतिरिक्त 10 करोड़ रुपए देने की घोषणा की बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए मिली बड़ी सौगात, डबल इंजन की सरकार में लोगों का हो रहा सर्वांगीण विकास : केंद्रीय राज्यमंत्री सभी वर्ग का हो रहा विकास, यही है विष्णु का सुशासन : उप मुख्यमंत्री रायपुर केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्यमंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने आज सरकंडा खेल परिसर में  आयोजित समारोह में बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 39 करोड़ 04 लाख रुपए से अधिक लागत के 20 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। उप मुख्यमंत्री साव ने इन कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपए की राशि अतिरिक्त देने की भी घोषणा की। इनमें इन प्रमुख रूप से कोनी मंगला में 24 करोड़ 27 लाख की लागत से लोधीपारा सरकंडा कोनी मार्ग के अरपा नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य और पौंसरा में पांच करोड़ 18 लाख की लागत से सेलर पौंसरा मार्ग में खारुन नदी पर उच्च स्तरीय पुल, सामुदायिक भवन सहित अन्य  निर्माण कार्य शामिल है। समारोह की अध्यक्षता स्थानीय विधायक सुशांत शुक्ला ने की।       केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्यमंत्री तोखन साहू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि  राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी की हर एक गारंटी को पूरा करने के लिए वचनबद्ध है। हमारी सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में लोगों की बेहतरी के लिए लगातार योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिससे लोगों का जीवन स्तर तेजी से सुधर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोगों को मुफ्त अनाज मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर गरीब के मकान का सपना साकार किया है। किसानों को सम्मान दिया। आयुष्मान कार्ड के जरिए लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है। ऑपरेशन सिंदूर से आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दिया है।        उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हर काम साय साय गति से पूर्ण हो रहे हैं । यह विष्णु का ही सुशासन है कि जनता को लगातार विकास कार्यों की सौगात दी जा रही है। सबका विकास हो रहा है यही तो विष्णु का सुशासन है।  महतारी वंदन योजना के तहत एक हजार रुपए हर महीना दे रहे हैं।  महिलाएं सोची भी नहीं थी की राशि मिलेगी , लेकिन उनका सपना हमारी सरकार ने पूरा किया। एक तरफ जहां मोदी जी मुफ्त में चावल लोगों को दे रहे हैं वहीं विष्णु देव साय की सरकार महिलाओं को नगद सहायता कर रही हैं।  ऑपरेशन सिंदूर के तहत हमारी सेना ने महिलाओं का सम्मान बढ़ाया है। डबल इंजन की सरकार में विकास कार्यो ने रफ्तार पकड़ी है। उन्होंने कहा कि अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाया और विष्णु देव साय की सरकार इसे विकसित स्वरूप में गढ़ने का काम कर रही है। राज्य में गांव गरीबों किसानों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो रहा है। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र तेज गति से विकास कर रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर है जब करोड़ों के विकास कार्यों की सौगात क्षेत्रवासियों को मिली है।        विधायक सुशांत शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि सुशासन के संकल्प की प्रतिपूर्ति कैसी होती है यह राज्य में हुए विकास कार्यों को देखकर पता चलता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग का समान विकास हो रहा है। बेलतरा विधान सभा क्षेत्र में भी विकास की धारा बह रही है। यह श्रृंखला निरंतर जारी रहेगी। हमारी सरकार की कथनी और करनी एक है। मोदी की गारंटी के रूप में हमने जो वादा किया था उसे पूरा किया है। उन्होंने सहयोग के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्यमंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, नगर निगम के सभापति विनोद सोनी, जनपद पंचायत बिल्हा के अध्यक्ष राम कुमार कौशिक, कलेक्टर संजय अग्रवाल, नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार, सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल, दीपक सिंह ठाकुर सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी, बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सौरभ सक्सेना और मीडिया प्रभारी प्रणव शर्मा ने किया।

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग सीजन 2 के समापन समारोह में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज यहां नवा रायपुर के शहीद वीरनारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग सीजन 2 के समापन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग की विजेता टीमों को विनर्स कप सौंपा। बारिश की वजह से सीसीपीएल का फाइनल मैच नहीं खेला जा सका। फाइनल में पहुंची दोनों टीमों रायपुर राइनोस और राजनांदगांव पैंथर्स को संयुक्त विजेता घोषित किया गया।  छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग सीजन 2 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है कि सीसीपीएल जैसे क्रिकेट टूर्नामेंट का यहां शानदार आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ में हम सभी खेलों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग के माध्यम से राज्य के प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ियों को खेलने का बेहतरीन मौका मिला है। इस आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ बधाई का पात्र है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बारिश की वजह फाइनल मैच नहीं खेला जा सका। रायपुर राइनोस और राजनांदगांव पैंथर्स टीमों को संयुक्त विजेता घोषित किया है। मैं दोनों टीमों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ और सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। यह बहुत खुशी की बात है कि मौसम खराब होने के बाद भी बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी स्टेडियम में मौजूद हैं। मैं आशा करता हूँ कि छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ इसी तरह आगे भी छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग का आयोजन करता रहेगा।  उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग सीजन 2 का आयोजन 6 जून से 15 जून तक किया गया। इसमें रायपुर राइनोस, राजनांदगांव पैंथर्स, रायगढ़ लायन्स, बस्तर बाइसन्स, बिलासपुर बुल्स और सरगुजा टाईगर्स टीमों ने हिस्सा लिया।  मुख्यमंत्री के हाथों से रायपुर राइनोस और राजनांदगांव पैंथर्स टीम के कप्तान अमनदीप खरे और अजय मंडल ने विनर्स कप ग्रहण किया।  इस अवसर पर खेल मंत्री टंकराम वर्मा, राज्यसभा सांसद और बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, विधायक गुरु खुशवंत साहेब, बलदेव सिंह भाटिया, प्रभतेज सिंह भाटिया सहित छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी उपस्थित थे।

कोरोना से मरीज की मौत का पहला मामला, प्रोटोकॉल के तहत उनकी अंत्‍येष्टि कन्‍हारपुरी स्थित मुक्तिधाम में की गई

राजनांदगांव शहर के कोरोना संक्रमित 86 वर्षीय बुजुर्ग की एमएमआई अस्‍पताल रायपुर में मौत हो गई है। यह प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत का यह पहला मामला है। रविवार को स्‍वास्‍थ्‍य विभाग और निगम अमले की मौजूदगी में प्रोटोकॉल के तहत उनकी अंत्‍येष्टि कन्‍हारपुरी स्थित मुक्तिधाम में की गई। इस दौरान परिवार के सात लोग ही मौजूद थे। शव को अस्‍पताल से सीधे मुक्तिधाम लाया गया था। परिजनों ने बताया कि सांस लेने में दिक्‍कत के चलते बुजुर्ग को 14 जून को ही रायपुर स्थित निजी अस्‍पताल में दाखिल किया गया था, जिसके कुछ ही घंटों बाद उनकी मौत हो गई। अस्‍पताल प्रबंधन ने उनके कारोना संक्रमित होने की जानकारी दी थी।   परिवार के सदस्यों का हुआ कोरोना टेस्ट मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी डॉ नेतराम नवरतन ने मौत की पुष्टि करते बताया कि परिवार ने प्रोटोकॉल के तहत ही बुजुर्ग की अंत्येष्टि की। सोमवार को कांटेक्‍ट ट्रेसिंग की जाएगी। परिजनों के सैंपल लेकर उन्‍हें कोविड-19 की जांच के लिए भेजा जाएगा। नतीजे आने तक परिवार होम क्‍वारंटीन है। बुजुर्ग की कोरोना से मौत की जानकारी परिजनों ने खुद सोशल मीडिया के माध्‍यम से जारी की। उन्‍होंने सुनिश्चित किया कि इस संबंध में लोगों को जागरुक किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने 38 हजार श्रमिकों के खातों में ऑनलाइन अंतरित किए 19.71 करोड़ की सहायता राशि

रायपुर “हम श्रमिक परिवारों के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। आपका स्नेह और सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हम सब मिलकर एक विकसित, समृद्ध और सशक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करेंगे।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत कक्षा दसवीं और बारहवीं के टॉप 10 में स्थान पाने वाले पंजीकृत श्रमिकों के 31 मेधावी बच्चों को दो-दो लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत राज्य के 38 हजार 200 निर्माण श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत 19.71 करोड़ रूपए से ज्यादा की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।           मुख्यमंत्री ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम हासिल करने वाले श्रमवीरों के मेधावी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सरकार श्रमिक परिवारों की आवश्यकताओं को भली-भांति समझती है और उनके समग्र कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज श्रमिक परिवार का बच्चा विदेश जाकर पढ़ना चाहे तो उसके लिए भी 50 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान श्रम विभाग द्वारा किया गया है। श्री साय ने कहा कि हम नवाचार के साथ कदमताल करते हुए ऐसी नीतियां बना रहे हैं, जिनसे प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिले। प्रदेश की आकर्षक उद्योग नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार को प्राप्त हो चुके हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। श्री साय ने श्रम मंत्रालय में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि श्रमिकों से मेरा विशेष लगाव है और श्रमिकों के हित में कार्य करना हमेशा संतुष्टि देता है।          मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में दो वर्षों तक श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी और उनके नेतृत्व में श्रम राज्यमंत्री के रूप में श्रमिकों के पेंशन सुधार की दिशा में हमने कई ऐतिहासिक कदम उठाए और न्यूनतम पेंशन की राशि सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्रमिकों को लेकर संवेदनशील है और उनके निर्देश पर ही श्रमिकों के प्रोविडेंट फंड (PF) में वर्षों से पड़ी लगभग 27 हजार करोड़ रुपए की अन्क्लेम्ड राशि का उपयोग उनके हित में करने का बड़ा निर्णय भी इस दौरान हमने लिया था। राज्यमंत्री के रूप में यूनिवर्सल पीएफ नंबर की शुरुआत हमारी सरकार ने की, जिससे श्रमिकों द्वारा बार-बार पीएफ राशि क्लेम करने की समस्या दूर हुई।           मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी से आग्रह करते हुए कहा कि श्रम विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी अन्य ज़रूरतमंदों तक अवश्य पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक श्रमिक इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने श्रमिकों के लिए गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही प्रदेश में संचालित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।           उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश चहुंमुखी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन डेढ़ वर्षों में “मोदी की गारंटी” के तहत सभी वादों को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 38 हजार 2 सौ श्रमिकों को 19.71 करोड़ रुपये एवं प्रवीण्य सूची में चयनित 31 विद्यार्थियों को 62 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। श्री देवांगन ने बताया कि शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत 17 जिलों के 46 केन्द्रों में श्रमिकों को 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और भविष्य में इसे सभी उद्योग प्रधान जिलों में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग सुविधा प्रारंभ करने की जानकारी भी दी। श्रम मंत्री ने कहा कि नई उद्योग नीति के तहत उद्योगों की स्थापना के लिए नियमों को सरल बनाया गया है , जिससे निवेश बढ़ा है एवं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।         छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के साथ प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। मण्डल के माध्यम से प्रदेश में 31 जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें नोनी सशक्तिकरण, महतारी जतन, श्रमिक सियान सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मण्डल प्रदेश के 29.47 लाख पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है। श्रमिक अपना पंजीकरण श्रमेव जयते ऐप, लोक सेवा केन्द्र या श्रम कार्यालय में करवा सकते हैं। नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना ने बदली मजदूर परिवार के बच्चों की ज़िंदगी       कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सामने मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से लाभान्वित बच्चों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए आभार व्यक्त किया। सभी बच्चों ने कहा कि वे मजदूर और गरीब परिवारों से हैं, लेकिन इस योजना ने उन्हें पढ़ाई का अवसर दिया। यह योजना श्रमिक परिवारों के सपनों को नई उड़ान दे रही है। सूरजपुर जिले के भैयाथान के हीरा सिंह ने बताया कि आईआईआईटी से बी टेक की पढ़ाई पूरी कर अब जूनियर डेटा साइंस डेवलपर बन चुके हैं। इस योजना से उन्हें 4.10 लाख रुपए की सहायता मिली, जिससे उनकी पढ़ाई पूरी हो पाई थी। इसी तरह बी.टेक अंतिम वर्ष के छात्र अमलेंद्र पैंकरा ने बताया कि उनका परिवार मजदूरी कर जीवन यापन करता है और इस योजना की मदद से कॉलेज की फीस भर पा रहे हैं। एक अन्य छात्र दीपक पैंकरा ने सूरजपुर के छोटे से गांव से आईआईआईटी, रायपुर में एडमिशन तक के अपने संघर्ष भरे सफर को साझा किया। दीपक ने बताया कि योजना के माध्यम से अपने बीटेक की पढ़ाई की फीस भर रहे हैं और योजना से उन्हें लगभग 4 लाख रुपए की सहायता प्राप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी श्रमवीरों के बच्चों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं … Read more

10,372 स्कूलों का एकीकरण, शिक्षकों का व्यापक युक्तियुक्तकरण

 छात्रों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा रायपुर राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और सार्थक पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में यह दूरगामी सुधार, वास्तव में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और लंबे समय से चली आ रही शैक्षिक विसंगतियों के समाधान का कारगर प्रयास है। युक्तियुक्तकरण से पहले, छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण अंचल की शालाओं में शिक्षकों की कमी, नगरीय इलाकों और उसके समीप की शालाओं में जरूरत से ज्यादा शिक्षकों की पदस्थपना के कारण शिक्षा प्रभावित हो रही थी और इसका असर बच्चों के परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा था। राज्य के लगभग 212 प्राथमिक शालाएं और 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं पूरी तरह से शिक्षक विहीन थीं, जबकि 6,872 प्राथमिक शालाएं और 255 पूर्व माध्यमिक शालाएं केवल एक शिक्षक के साथ संचालित हो रही थीं। इसके अतिरिक्त 211 शालाएं ऐसी थीं जहाँ छात्र संख्या शून्य थी, लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। इसके अलावा, 166 शालाओं को समायोजित किया गया, इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की 133 शालाएं शामिल थीं, जिनकी दर्ज संख्या 10 से कम थी और दूरी 1 किमी से कम थी, तथा शहरी क्षेत्रों की 33 शालाएं थीं, जिनकी दर्ज संख्या 30 से कम थी और दूरी 500 मीटर से कम थी। इन चुनौतियों के बावजूद, छत्तीसगढ़ का छात्र-अध्यापक अनुपात (पीटीआर) राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय रूप से बेहतर था, प्राथमिक शालाओं के लिए पीटीआर-20 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 29 है और पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए पीटीआर-18 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 38 है। हालांकि, वितरण असमान था। राज्य में लगभग 17,000 प्राथमिक शालाएं और लगभग 4,479 पूर्व माध्यमिक शालाएं थीं, जिनका पीटीआर-20 से कम था। अकेले शहरी क्षेत्रों में 527 ऐसे विद्यालय थे, जिनका पीटीआर-10 से कम था, जिनमें 15 या उससे अधिक शिक्षकों वाली 08 प्राथमिक शालाएं, 10-15 शिक्षकों वाली 61 शालाएं और 6-9 शिक्षकों वाली 749 प्राथमिक शालाएं थीं, ये आंकड़े बेहतर संसाधन आवंटन की जरूरत को दर्शाते हैं। इस पहल का मुख्य बिंदु एक ही परिसर में संचालित लगभग 10 हजार 372 शालाओं का एकीकरण था, जिनमें प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल थे। इस विलय से कई लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें शाला त्यागी छात्रों की संख्या में कमी और छात्रों को बार-बार स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता का समाप्त होना शामिल है। यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, छोटी कक्षाओं के छात्रों को बड़ी कक्षाओं के छात्रों का सहयोग प्राप्त होने, और कंप्यूटर, विज्ञान प्रयोगशाला, खेल-कूद तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से शैक्षणिक समझ और अभिरुचि में वृद्धि के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होगा। इस दृष्टिकोण से प्रशासनिक व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। विद्यालयों के समायोजन के साथ-साथ, जिला, संभाग और राज्य स्तर पर काउंसलिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण शिक्षक युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया भी की गई। इस प्रक्रिया के तहत जिला स्तर पर लगभग 13 हजार 793 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। संभाग स्तर पर 863 का और राज्य स्तर पर 105 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। युक्तियुक्तकरण अभियान के प्रारंभिक परिणाम अत्यधिक आशाजनक हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा विभाग का कहना है कि कोई भी विद्यालय बंद नहीं किया जा रहा है और कोई भी शिक्षक पद समाप्त नहीं हो रहा है। इसके बजाय ध्यान बेहतर अधोसंरचना वाले विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित करने पर है। युक्तियुक्तकरण के पश्चात राज्य में शिक्षक विहीन विद्यालयों की संख्या शून्य हो गई है। एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में प्रभावशाली 80 प्रतिशत की कमी आई है अब लगभग 1,200 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। एक ही परिसर में स्थित 10,372 विद्यलायों का एकीकरण और 166 ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों का समायोजन पूरा हो चुका है। इससे लगभग 89 प्रतिशत विद्यार्थियों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। छात्रों को अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध होंगे और विद्यालय की समय सारिणी एवं अन्य गतिविधियों में अधिक एकरूपता रहेगी। इस पहल का उद्देश्य उपचारात्मक शिक्षण द्वारा छात्रों की समझ को बेहतर बनाना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करके, छत्तीसगढ़ न केवल वर्तमान कमियों को दूर कर रहा है, बल्कि एक ऐसे भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रख रहा है। जहाँ प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे समग्र विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। युक्तियुक्तकरण का यह कदम एक अधिक कुशल, न्यायसंगत और प्रभावी शैक्षिक वातावरण बनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

बीते लगभग ढाई माह में हुआ 10 बार आंदोलन-कंपनी का लक्ष्य 85 फीसदी से भी कम

कोरबा, चालू वित्त वर्ष के पहली तिमाही में उम्मीद के अनुरूप उत्पादन से लक्ष्य को हासिल करने में भू-विस्थापितों का आंदोलन बाधा बन रही है। बीते लगभग ढाई माह में 10 से अधिक बार अब तक आंदोलन हो चुका है, इस दौरान कोयला खनन, माइंस विस्तार का काम रोका गया। अब पहली तिमाही की 18 दिन की अवधि ही शेष रह गई है। एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट गेवरा, दीपका व कुसमुंडा की कोल कंपनी के कुल उत्पादन में सर्वाधिक भागीदारी रहती है। इन्हीं खदानों में भू-विस्थापितों का खदान बंदी आंदोलन भी हुआ है। कोयला खदान विस्तार के लिए जटराज की अधिग्रहित जमीन पर खनन कार्य के दौरान पिछले महीने कुसमुंडा खदान से प्रभावित भू-विस्थापितों के विरोध से प्रभावित हुआ। एसईसीएल कोरबा एरिया की अंबिका माइंस से कोयला उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह माइंस प्रभावित ग्राम करतली के भू-विस्थापितों द्वारा बार-बार मिट्टी हटाने का काम बंद करा देना माना जा रहा है। कोयला खदानों के भीतर भी खनन कार्य को भू-विस्थापितों ने प्रभावित किया। बीते 16 अप्रैल को गेवरा, दीपका व कुसमुंडा खदान में ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति ने खनन व परिवहन कार्य को रोक दिया था। 22 अप्रैल को भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने किसान सभा के समर्थन से कुसमुंडा खदान में खदान बंदी आंदोलन से नौकरी के पुराने लंबित प्रकरणों के निपटारे की मांग करी थी। 19 मई को नराईबोध के भू-विस्थापितों ने पार्षद अमिला पटेल के नेतृत्व में एसईसीएल गेवरा खदान का खनन व परिवहन का कार्य प्रभावित किया। इसी महीने कुसमुंडा खदान में भू-विस्थापितों के खनन व परिवहन का काम रोकने पर पुलिस ने 3 महिला सहित 7 भू-विस्थापितों को गिरफ्तार किया था। वित्त वर्ष 2025-26 में 12 जून तक एसईसीएल को 41.31 मिलियन टन कोल प्रोडक्शन का लक्ष्य दिया गया था। मगर कोल कंपनी का लक्ष्य का 85 फीसदी से भी कम कोयला उत्पादन हुआ है। मानसून सीजन ने अभी तक दस्तक नहीं दी है। इसके बावजूद एसईसीएल अभी के लक्ष्य से कम खनन किया है। बारिश में खुली खदानों का उत्पादन प्रभावित जरूर होता है। भू-विस्थापतों का खदान बंदी आंदोलन खनन कार्य में बाधा बनी है। अभी तक का कुल उत्पादन 33.21 मिलियन टन है।  

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