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सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन के लिए 2 केंद्र की मिली केंद्र’ की मंजूरी

भोपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद-275(1) के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के तहत विशेष विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिये शत-प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जाती है। यह राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के जरिये राज्य सरकारों को सीधे आवंटित की जाती है। सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन (Root Out) के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 275(1) के तहत प्रदेश में 2 उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (Centre Of Competence For Sickle Cell Disease) या कहें ‘सिकल सेल रोग के लिए सक्षमता केंद्र’ को मंजूरी दी गई है। भोपाल में सिकल सेल रोग के लिये पहला सक्षमता केन्द्र आईसीएमआर के भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, भोपाल में जनजातीय अनुसंधान संस्थान के सहयोग से स्थापित यह केंद्र ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के दूरदर्शी लक्ष्य के साथ स्थापित यह अत्याधुनिक सुविधा, सिकल सेल के रोगियों को आधुनिक निदान, उन्नत उपचार और समग्र पुनर्वास सेवाओं सहित व्यापक देखभाल प्रदान करती है। यहां विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम के साथ यह केंद्र न केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि प्रभावित व्यक्तियों, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के भीतर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सुरक्षित पुनर्वास पर भी जोर देता है। इस केन्द्र के जरिये सभी सिकल सेल मरीजों के लिए एक स्वस्थ, उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने की लक्ष्यपूर्ति के मिशन को बल मिलेगा। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इसके लिये करीब 2 करोड़ रूपये मंजूर किये हैं। दूसरा इंदौर में स्थापित हो रहा है महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, इंदौर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग एवं अत्याधुनिक मॉडल ब्लड सेंटर को सिकल सेल उन्मूलन मिशन- 2047 के तहत उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (सक्षमता केंद्र) के रूप में मंजूरी मिली है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई है। इस परियोजना के तहत यहां गुणवत्तापूर्ण इलाज किया जायेगा। इस सेंटर में चिन्हित किए गए रोगियों में आधुनिक मशीनों से पुनः रोग की पुष्टि करना (फाइनल डायग्नोसिस बनाना), रोग की गंभीरता एवं प्रकार का पता लगाने के अलावा सिकल सेल रोग के रोगियों की उच्च स्तरीय एवं आधुनिक उपचार एक ही छत के नीचे प्रदान की जायेंगी। इसी प्रकार सिकल सेल एनीमिया के पेशेंट को विश्वस्तरीय, लुकोरिड्यूस्ड नेट टेस्टेड, रेडिएट रक्त एवं उसके घटक प्रदान करना। डे केयर सेंटर्स को सुसज्जित करना ताकि जिन रोगियों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन होना है उन्हें सुरक्षित एवं सरल तरीके से रक्त और उसके घटक प्रदान किया जा सके। स्वैच्छिक रक्तदान शिवरों का आयोजन करना जिससे रक्त और इसके घटकों की आपूर्ति बनी रहे। जीवन रक्षक पद्धति के रूप में बहुत गंभीर मरीजों में एफरेंस तकनीकी से रेड सेल एक्सचेंज करना। प्रसवपूर्व मामले में कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) की मदद से गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे में सिकल सेल रोग का पता लगाना, मॉलिक्यूलर प्रयोगशाला की स्थापना, नवजात शिशु में सिकल सेल का शीघ्र पता लगाना, सिकल सेल रोग के बारे में जनसाधारण, खासकर जनजातीय क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाना, सिकल सेल से पीड़ित रोगियों में बोनमैरो ट्रांसप्लांट एवं जीन थेरेपी की संभावनाओं का पता लगाना एवं उन्हें इस हेतु तैयारियां करना सहित सिकल सेल के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण भी दिये जायेंगे। इस केन्द्र से इंदौर के समीपस्थ अलीराजपुर, धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास आदि जिलों के मरीजों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 1 करोड़ 91 लाख रुपये राशि आवंटित की है। यहां के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के परिसर में पहले से ही बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिसमें नवीनीकरण और अन्य आवश्यक कार्य पूर्ण हो चुके हैं। अन्य आवश्यक उपकरणों के लिए शॉर्ट टेंडर जारी किया गया है। टेक्नीशियन और चिकित्सा कर्मचारियों के लिए ओरिएंटेशन का पहला भाग पूरा हो चुका है। यहां सिकल सेल कंसोर्टियम की स्थापना भी कर ली गई है और सभी विभागों से सम्पर्क स्थापित कर सिकल सेल रोग के रोगियों का उच्च स्तरीय इलाज देना भी शुरू कर दिया है। 100 होम-स्टे को मिली मंजूरी अनुच्छेद-275(1) के तहत ही केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को जनजातियों के आजीविका विकास से जुड़ी विशेष परियोजनाओं के लिये सहायता दी जाती है। इसके तहत प्रदेश में 100 जनजातीय ग्रामों में होम स्टे विकास के लिये केन्द्र सरकार द्वारा राशि आवंटित की गई है। इन 100 जनजातीय ग्रामों में प्रत्येक ग्राम में 5 लाख रूपये की लागत से होम-स्टे निर्माण के लिये जरूरी राशि जनजातीय कार्य विभाग को प्राप्त हो गई है। होम-स्टे के लिये शत-प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा वहन की जा रही है। 8 वन्या रेडियो स्टेशन के विकास के लिये मिली राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 275(1) के तहत प्रदेश में 8 वन्या रेडियो स्टेशन्स के सुदृढ़ीकरण के लिये भी विकास राशि प्रदान की गई है। इससे प्रदेश की सभी जनजातीयों की क्षेत्रीय बोली (Local Dialect) के विकास एवं संवर्द्धन में मदद मिलेगी। ये वन्या रेडियो स्टेशन जनजातियों की क्षेत्रीय बोली में ही संचालित किये जायेंगे। “वन्या संस्थान” जनजातीय कार्य विभाग के अधीन एक प्रकाशन प्रतिष्ठान है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश के जनजाति समुदायों की संस्कृति, जीवनशैली और कलाओं का विभिन्न माध्यमों से अभिलेखीकरण, प्रकाशन और प्रसारण करना है। इसी श्रृंखला में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना के पालन में जनजातीय क्षेत्रों में सामुदायिक रेडियो केन्द्रों का संचालन किया जायेगा। इससे विभिन्न जनजातीय समुदाय को अपने-अपने जिलों में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी उनकी ही बोली में प्रदान की जायेगी। वन्या संस्थान द्वारा 8 सामुदायिक रेडियो केन्द्रों नालछा जिला-धार, भाबरा जिला-अलीराजपुर, मेघनगर जिला झाबुआ, बिजौरी जिला-छिन्दवाड़ा, चांड़ा जिला डिण्डौरी, खालवा जिला-खण्डवा, चिचौली जिला-बैतूल एवं सेसईपुरा जिला श्योपुर कला में लगभग 13 वर्षों से संचालित किये जा रहे हैं। इन केन्द्रों में विभिन्न विभागों से प्राप्त विज्ञापन, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का समुचित प्रचार-प्रसार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि संबंधी विभिन्न जन-उपयोगी कार्यक्रमों का प्रसारण स्थानीय बोलियों गोंडी. भीली, बैगानी, कोरकू एवं सहरिया में स्थानीय जनजातीय कलाकारों को आमंत्रित कर कार्यक्रम तैयार किये जाते हैं, जिससे भाग लेने वाले जनजातीय कलाकारों को मानदेय/पारिश्रमिक भी दिया जाता है। इन वन्या रेडियो केन्द्रों का अब सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। शासकीय भवन होने के कारण इनकी मरम्मत … Read more

प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने बड़े स्तर पर शहरी क्षेत्र के पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने की शुरुआत

भोपाल प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत महंगी कॉलोनियों में पात्र हितग्राही सस्ते मकान खरीद सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार ने रिडीमेबल हाउसिंग वाउचर का विकल्प दिया है। इसके तहत राज्य को संबंधित हितग्राही के बदले की राशि बिल्डर को चुकानी होगी। शेष राशि का भुगतान हितग्राही को करना होगा। इस तरह महंगी कॉलोनी में सस्ते मकान के लिए पात्र हो जाएंगे।  असल में केंद्र और राज्य के बीच मेमोरेंडम एग्रीमेंट (एमओए) साइन हुए हैं। जिसमें एमपी ने केंद्र की उक्त रिफार्म शर्त को मानने की सहमति दे दी है। इसके अलावा केंद्र द्वारा बताए कई और सुधारों को मध्य प्रदेश ने मानने की सहमति दे दी है, जिसके आधार पर भोपाल, इंदौर समेत अन्य शहरों में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 गति पकड़ेगी। असल में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने बड़े स्तर पर शहरी क्षेत्र के पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने की शुरुआत की है। राज्यों से कहा है कि यदि वे अपने राज्य की जनता को रियायती आवास उपलब्ध कराना चाहते हैं तो जरूरी सुधार का पालन करना होगा। जिसमें सबसे बड़ी शर्त मास्टर प्लान के दायरे में रहकर उक्त आवास बनाने की शर्त शामिल है। केंद्र ने शहरों को झुग्गी मुक्त बनाकर उन्हें व्यवस्थित विकास के दायरे में लाया जा सके। इसके लिए राज्य को शहरों में अलग-अलग जोन चिह्नित करने होंगे, वहां उक्त योजना के तहत काम होंगे और हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इन पर सहमति परियोजनाओं को मास्टर प्लान में शामिल करना होगा। पात्र हितग्राहियों को वैधानिक शुल्क में अधिकतम छूट देनी होगी। स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क में छूट को जारी रखना होगा। परियोजनाओं में हरित क्षेत्र के दायरे को बढ़ाना होगा। निर्माण संबंधी अनुमतियां आवेदन के 60 दिन में। 5 प्रतिशत आवास ईडब्ल्यूएस, एलआइजी बनाने की शर्तों का पालन। आवास खरीदने, निर्माण करने वाले भूमिहीन हितग्राहियों को पट्टा भूमि के दस्तावेज देने होंगे।

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन बोर्ड बनाने और वक्फ बोर्ड की जांच की मांग

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री 21 नवंबर से 29 नवंबर तक 165 किलोमीटर लंबी पदयात्रा के लिए निकल रहे हैं। सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा बागेश्वर धाम से रामराजा सरकार की नगरी ओरछा तक जाएगी। इस दौरान बाबा बागेश्वर अपने चिर-परिचित अंदाज में बातें करते नजर आए। उन्होंने हिंदुओं को एक करने की बात कही। मंदिरों ने हर समाज का पुजारी होने, सनातन बोर्ड गठित करने जैसी बातें भी कही। उन्होंने यात्रा के दौरान फूलमाला और खड़ाऊ नहीं पहनने का संकल्प भी लिया। गौरतलब है कि शहर के पन्ना रोड पर स्थित निजी होटल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए महाराजश्री ने कहा कि विभिन्न पंथों में बटे सनातन हिन्दुओं को कट्टर हिन्दू बनाने के लिए यह एकता यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि हम मिशन और विजन लेकर चल रहे हैं। सब हिन्दू जात-पात का भेद खत्म करें यही हमारा यात्रा का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राष्ट्र ध्वज और धर्मध्वज दोनों का बराबर सम्मान है। उन्होंने राष्ट्रगान के साथ पदयात्रा शुरू करने की बात कही। बाबा की खरी-खरी पत्रकारों से चर्चा करते हुए बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस सनातन यात्रा सब धर्मों के लोग हो शामिल हो सकते हैं। इसके लिए हम किसी को न्यौता देने नहीं जा रहे। क्योंकि जब धर्मयुद्ध होता है तो बुलाया नहीं जाता, जिसका जमीर जिंदा होता है, वो खुद आता है। दूसरे धर्मों के लोगों के शामिल होने की बात पर शास्त्री ने कहा कि उनको लगता है कि हम कार्य अच्छा कर रहे हैं तो उनको भी भागीदारी करना चाहिए, क्योंकि देश तो उनका भी है। क्योंकि इस देश में रहने वाले इस्लामी और ईसाई समाज के लोग पहले हिंदू ही थे, बाद में वह कन्वर्ट हो गए। किसी भी धर्म के लोगों को यात्रा के लिए पीले चावल नहीं देंगे। बाबा ने अपने अंदाज में कहा कि आओ तो वेलकम, जाओ तो भीड़ कम…। सनातन बोर्ड बने बागेश्वर बाबा ने कहा कि हम भारत का हाल बांग्लादेश जैसा नहीं होने देंगे। हम हिंदुओं को जगाएंगे। शास्त्री ने वक्फ बोर्ड पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2005 तक तक बोर्ड के पास महज कुछ हजार एकड़ जमीन थी, आज साढ़े आठ लाख एकड़ जमीन हो गई। फिर भी हिंदू चुप बैठा है, हिंदू कायर बना बैठा है। सोया हुआ हिंदू है। कौन सोया हुआ हिंदू है, जो 500 सालों से रामजी के मंदिर के लिए कोर्ट में लड़ रहा था। वो भी वोट देते हैं, हम भी वोट देते हैं। या तो सनातन बोर्ड बनाइए या वक्फ बोर्फ हटाइए। पदयात्रा में नहीं पहनेंगे फूलमाला पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के माध्यम से आम जनमानस को अवगत कराना चाहा है कि किसी भी पदयात्रा में फूलमाला का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम अपनी हिंदुओं को जगाने की यात्रा निकाल रहे हैं न कि कोई शोभायात्रा, अगर फूलमाला में ढंक जाएंगे तो हमारी बात कौन सुनेगा। उन्होंने कहा कि सभी सनातनप्रेमी फूलमाला में पैसे खर्च करने के बजाय अन्य संसाधनों में लगाएं। जितनी भी उनकी यात्राएं होंगी उन सभी में फूलमाला का त्याग रहेगा। छोटे बच्चे, वृद्ध और बीमार लोगों को यात्रा से दूर रहने का आग्रह किया गया। महाराजश्री ने कहा कि हमें स्वागत नहीं हमें सभी हिन्दुओं को एकजुट करने की भिक्षा दें। सभी यात्रियों से थाली, लोटा और एक गर्म लोयी साथ लेकर चलने का भी उन्होंने आग्रह किया। रामराजा सरकार को ध्वज चढ़ाकर होगा यात्रा का विराम महाराजश्री ने कहा कि यह पदयात्रा 29 नवंबर को रामराजा सरकार के चरणों में पहुंचेगी और यहीं यात्रा का विराम होगा। रामराजा सरकार को यात्रा के माध्यम से पहुंचकर ध्वज समर्पित करना है ताकि यह धर्मध्वजा लहराती रहे। उन्होंने बताया कि जगद्गुरु तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य जी भगवां ध्वज दिखाकर यात्रा प्रारंभ करेंगे। इस यात्रा में मलूक पीठाधीश्वर पूज्य राजेन्द्र दास महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास महाराज, इन्द्रेश जी महाराज, सुदामा कुटी के सुतीक्ष्ण दास जी, संजीव कृष्ण ठाकुर, अनुरुद्धाचार्य महाराज, जगतगुरु बल्लभाचार्य महाराज, गोरीलाल कुंज के महंत पूज्य किशोर दास महाराज शामिल होंगे। वहीं फिल्म, संगीत सहित अन्य  क्षेत्रों से भी लोगों के शामिल होने की सूचनाएं हैं।

मध्यप्रदेश: 10 हाथियों के मरने की वजह आई सामने, मिलेट का फंगी कनेक्शन

Madhya Pradesh: Reason for death of 10 elephants revealed, understand the fungal connection of millet भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले महीने 10 हाथियों की मौत का कारण कोदो में फफूंद संक्रमण बताया जा रहा है। हैदराबाद के ICRISAT के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी राज्य सरकार को दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तीन तरह के फंगस मिले ICRISAT ने शुरुआती जांच में कोदो के नमूनों में तीन तरह के फफूंद – एस्परजिलस फ्लेवस, एस्परजिलस पैरासिटिकस और पेनिसिलियम साइक्लोपियम की मौजूदगी की पुष्टि की है। इन फफूंदों से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड नामक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जिसके सेवन से हाथियों की मौत होने की आशंका है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने पुष्टि की है कि हाथियों द्वारा खाए गए कोदो में ये फफूंद मौजूद थे। घटना की जांच के लिए, एमपी के अधिकारियों ने ICRISAT सहित पूरे भारत में 10 प्रयोगशालाओं में नमूने भेजे थे। ICRISAT, हैदराबाद स्थित एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो विशेष रूप से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने में माहिर हैं। बरेली से आ गई है रिपोर्ट बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने भी अपनी विषाक्तता परीक्षा रिपोर्ट में पुष्टि की है कि कोदो में फफूंद विषाक्त पदार्थों, विशेष रूप से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड के कारण हाथियों की मौत हुई। जहर की नहीं हुई थी पुष्टि हाथियों के लीवर, किडनी, तिल्ली और आंतों सहित विभिन्न अंगों के नमूने विश्लेषण के लिए IVRI भेजे गए थे। परीक्षणों में साइनाइड, भारी धातुओं, या ऑर्गनोफॉस्फेट या पाइरेथ्रोइड जैसे सामान्य कीटनाशकों का कोई निशान नहीं पाया गया। हालांकि, सभी नमूनों में साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड पाया गया, जिसकी सांद्रता 100 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) से अधिक थी। सात एकड़ में कोदो की खेती हाथियों ने जिस कोदो की फसल को खाया था वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर थी। असामान्य फफूंद वृद्धि के संकेतों के बावजूद, जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उस क्षेत्र में कीटनाशकों का उपयोग किया गया था। स्थानीय किसानों ने भी ऐसे किसी भी रसायन के उपयोग से इनकार किया है। हाथियों की मौत 29 अक्टूबर, 2024 को शुरू हुई थी। शुरुआत में फफूंद संक्रमण पर ही संदेह जताया गया था। अधिकारी अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि फंगस की पूरी सीमा और क्षेत्र के वन्यजीवों पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

स्कूल जा रही छात्राओं को देख पशुपालन मंत्री ने रोका काफिला, पूछा- पैदल क्यों जा रही हो? छात्राएं बोली…

Seeing the girl students going to school, the Animal Husbandry Minister stopped the convoy and asked – Why are you going on foot? The girls said… पैदल स्कूल जा रहीं छात्राओं को देखकर पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने अपना काफिला रोककर पूछा कि पैदल क्यों जा रही हो। छात्राओं ने जवाब दिया कि साइकिलें नहीं मिलीं। यह जवाब सुनकर मंत्री पटेल ने छात्राओं को साइकिल देने की बात कही और अन्य समस्यायों भी जानी। इस बातचीत का वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।एक छात्रा दीपा लोधी ने बताया कि जब वह कक्षा 9वीं में पढ़ती थी। उस दौरान लॉकडाउन लग गया, तभी से साइकिल नहीं मिलीं। छात्रा ने बताया कि गांव में सड़क नहीं है, खेत से होकर जाना पड़ता है। मंत्री पटेल ने पूछा कि कितनी सहेलियों को जरूरत है। दीपा ने कहा 20 से 25 छात्राओं को चाहिए। मंत्री ने छात्रा दीपा से पांच छात्राओं के नाम लिखकर देने को कहा और वहां से चले गए। बता दें शासन द्वारा उपलब्ध कराईं साइकिलें स्कूल परिसरों में पड़ी-पड़ी धूल खा रही हैं। वितरण न होने से साइकिलों पर अब जंग लगने लगी है। पथरिया ब्लॉक की बात करें तो यहां 1200 से अधिक साइकिलें किंद्रहो स्कूल परिसर में रखी हैं। वितरण में देरी होने के कारण इनमें जंग लगती जा रही है। कई छात्र-छात्राएं पैदल स्कूल जाने को मजबूर हैं। इसकी हकीकत स्थानीय विधायक व मंत्री लखन पटेल ने खुद महसूस की। दरअसल मंत्री पटेल पथरिया विधानसभा अंतर्गत खजरी गांव के दौरे पर थे। कई जगह रुक कर उन्होंने लोगों से जानकारी भी ली। 5 महीने पहले आ चुकी है साइकिलपथरिया ब्लॉक के 48 स्कूलों के लिए 5 महीने पहले साइकिल आ चुकी हैं। कक्षा 8 वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को यह दी जाना है, लेकिन अब जंग लगने से खराब होने लगी हैं। इस संबंध में पथरिया विधायक और पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा साइकिलों का वितरण क्यों नहीं हुआ है, यह मालूम कराता हूं, लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रदेश में निवेश के लिये यूके-जर्मनी की 6 दिवसीय विदेश यात्रा

  भोपाल मध्यप्रदेश को औद्योगिक हब बनाने के संकल्प को लेकर आगे बढ़ रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 24 से 30 नवंबर तक यूके और जर्मनी प्रवास पर रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह विदेश दौरा मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के साथ मुंबई, बैंगलुरु, कोयंबटूर और कोलकाता में 4 रोड-शो की अभूतपूर्व सफलता के बाद, यह दौरा अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने का एक अभूतपूर्व प्रयास है। उद्योग वर्ष 2025 के प्रदेश में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. यादव 6 दिवसीय इस विदेश यात्रा में यूके के लंदन, बर्मिंघम तथा जर्मनी के म्यूनिख और स्टटगार्ट का दौरा करेंगे। इन स्थानों पर वे प्रदेश में निवेश और औद्योगिक सहयोग के अवसरों को बढ़ाने के लिये औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों और उद्योगपतियों से चर्चा करेंगे। विश्व पटल पर म.प्र. को पहचान दिलाएगी यह यात्रा मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह रणनीतिक विदेश यात्रा मध्यप्रदेश के लिए निवेश आकर्षित कर राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने तथा विश्व पटल पर उद्योग के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभायेगी। यह यात्रा मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा राज्य में निवेशकों का भरोसा मजबूत करेगी और औद्योगिक विकास को गति प्रदान करेगी।मुख्यमंत्री का यह विदेश दौरा मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को सुदृढ़ करेगा और औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगा, जिससे प्रदेश में एक समृद्ध औद्योगिक वातावरण का निर्माण संभव हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 नवम्बर को भोपाल से मुम्बई होते हुए लंदन के लिये प्रस्थान करेंगे तथा रात 8 बजे लंदन पहुँचेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 25 नवम्बर को वेस्टमिंस्टर स्थित ब्रिटिश संसद का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किंग्स क्रॉस और पुनर्विकास स्थलों दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लंदन में “फ्रेंड्स ऑफ़ मध्यप्रदेश’’ प्रवासी भारतीयों द्वारा आयोजित रात्रि-भोज कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसमे 400 से अधिक प्रवासी भारतीय सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 26 नवम्बर को ब्रेकफास्ट पर उद्योगपतियों एवं भारत के उच्चायुक्त श्री विक्रम के दोरईस्वामी से संवाद करेंगे। इसके बाद इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश, इंटरैक्टिव सेशन में लगभग 120 प्रतिभागियों से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लंच ब्रेक के बाद राउण्ड टेबल मीटिंग्स में इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं ऑटो, एजुकेशन, रिन्युएबल एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर्स में निवेश पर चर्चा करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 27 नवंबर को वारविक यूनिवर्सिटी का भ्रमण करेंगे इसके बाद वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप के डीन, फैकल्टी मेम्बर्स और शोधार्थियों से संवाद करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव बर्मिंघम हवाई अड्डे से जर्मनी के लिए प्रस्थान कर रात 8:20 बजे म्यूनिख पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जर्मनी दौरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 दिवसीय यूके के दौरे के बाद 28 और 29 नवंबर को जर्मनी प्रवास पर रहेंगे। यात्रा के दौरान म्यूनिख और स्टटगार्ट में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ.यादव 28 नवंबर को सुबह बवेरिया राज्य सरकार के नेताओं और म्यूनिख में कौंसुल जनरल ऑफ इंडिया से चर्चा करेंगे। इसके बाद डॉ. यादव SFC Energy का भ्रमण करेंगे। वे बेयरलोचर ग्रुप द्वारा आयोजित लंच में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश, इंटरैक्टिव सेशन में शामिल होंगे, जिसमें कौंसुल जनरल ऑफ इंडिया, सीआईआई और इन्वेस्ट इंडिया, इंडो जर्मन चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। इसमें लगभग 80 प्रतिनिधियों से मध्यप्रदेश में निवेश संबंधी चर्चा होगी। डॉ. यादव इन्टरैक्टिव सेशन के बाद उद्योग प्रतिनिधियों से वन-टू-वन मीटिंग में भी निवेश संबंधी चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “फ्रेंड्स आफॅ एमपी” के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे, जिसमे लगभग 100 प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव कौंसुल जनरल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित रात्रि भोज में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 29 नवम्बर को स्टटगार्ट स्थित LAPP Group की फैक्ट्री का दौरा करेंगे और अधिकारियों से निवेश संबंधी चर्चा करेंगे। उद्योग प्रतिनिधियों से “इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटिज इन मध्यप्रदेश’’ विषय पर राउंडटेबल मीटिंग होगी, जिसमें लगभग 20 प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्टटगार्ट के स्टेट म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री का भ्रमण भी करेंगे। यह म्यूजियम जर्मनी का एक प्रमुख प्राकृतिक ऐतिहासिक म्यूजियम है, जिसमें प्राचीन जीवाश्म और डायनासोर के अवशेषों का विशाल संग्रह है। म्यूजियम की स्थापना 1791 में हुई थी, इसमें 11 मिलियन से अधिक वस्तुएं संग्रहित है। यह जर्मनी का सबसे बड़ा म्यूजियम है। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव फ्रैंकफर्ट के लिए रवाना होंगे। वे फ्रैंकफर्ट से रात 8 बजे नई दिल्ली के लिये रवाना होंगे।

झाबुआ जिले के 80 से अधिक शिक्षक मन की बात और प्रमुख भाषणों का कर रहे हैं भीली बोली में अनुवाद

भोपाल केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा ‘एआई बेस्ड ट्रांसलेशन टूल’ तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जनजातीय बोलियों में द्वि-भाषी शब्दकोश और त्रि-भाषी प्रवीणता मॉड्यूल तैयार कर नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुभाषी शिक्षा (एमएलई) लक्ष्य के तहत कक्षा 1, 2 और 3 के विद्यार्थियों के लिए जनजातीय भाषाओं व बोलियों में प्राइमर तैयार करना है। जनजातीय लोक परम्पराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न जनजातियों की लोककथाओं और इनका दस्तावेजीकरण करना भी इस नवाचार का प्रमुख लक्ष्य है। इस दिशा में प्रदेश के झाबुआ जिले में अत्यंत ही सराहनीय कार्य हो रहा है। यहां जिले के 80 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा विभिन्न प्रमुख गतिविधियों एवं संभाषणों का लगातार भीली बोली में अनुवाद का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य में अब तक इन शिक्षक-‍शिक्षिकाओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 62 एपिसोड का भीली बोली में अनुवाद किया जा चुका है। इनके द्वारा राष्ट्रपति के पिछले 12 वर्ष के संभाषणों एवं प्रधानमंत्री के गत 10 वर्ष के संभाषणों का अनुवाद किया जा चुका है। इसके अलावा कक्षा 1 से 5 तक की हिंदी विषय की पाठ्य पुस्तकों, कक्षा 3 से 5 तक पर्यावरण विषय की किताबों और आईआईटी, नई दिल्ली से प्राप्त 60 हजार से अधिक वाक्यों का भीली बोली में अनुवाद किया जा चुका है। यह कार्य निरंतर जारी है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर अनुवादकों का हुआ सम्मान गत 15 नवम्बर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस (भगवान बिरसा मुंडा जयंती) के पावन अवसर पर झाबुआ जिला मुख्यालय में आयोजित जिला स्तरीय मुख्य समारोह में भीली बोली में अनुवाद में संलग्न सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया और कलेक्टर झाबुआ सुनेहा मीना द्वारा भीली बोली में अनुवादकों का आत्मीय सम्मान कर इनकी कार्य की मुक्त कंठ से सराहना की गई। मंत्री सुभूरिया ने कहा कि इन अनुवादकों के सहयोग से हमारे प्रमुख दस्तावेज और भाषण अब हमेशा के लिये भीली बोली में उपलब्ध हो गये हैं। हमारे बच्चे और शिक्षक अध्ययन-अध्यापन कार्य में इस स्थानीय बोली में उपलब्ध साहित्य का उपयोग कर बेहतर तरीके से विषय को समझ सकेंगे और आगे बढ़ सकेंगे।

20 नवम्बर को “7वां प्राकृतिक चिकित्सा दिवस” का कार्यक्रम

भोपाल भोपाल स्थित शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय चिकित्सालय के “स्वास्थ्य कल्याण केंद्र” में “7वां प्राकृतिक चिकित्सा दिवस” कार्यक्रम का 20 नवम्बर को प्रातः 10:30 बजे होगा। यह कार्यक्रम केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित विषय “प्राकृतिक चिकित्सा से समग्र स्वास्थ्य” पर आधारित होगा। इसमें “आदर्श पुरोधा” एवं “प्रतिमान योद्धा” नामक दो सम्मान भी दिए जाएंगे। यह सम्मान प्राकृतिक जीवन के आदर्शो पर 90 वर्ष के ऊपर आयु के स्वस्थ सैनिकों को दिए जाएंगे। कार्यक्रम में सलाहकार केंद्रीय आयुष मंत्रालय श्री अशोक वार्ष्णेय एवं आयुक्त आयुष श्रीमति उमा माहेश्वरी आर सहित विभिन्न विषय विशेषज्ञ एवं चिकित्सक उपस्थित रहेंगे। केंद्रीय आयुष मंत्रालय अन्तर्गत केंद्रीय योग प्राकृतिक चिकित्सा अनुसन्धान परिषद नई दिल्ली एवं शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय चिकित्सालय भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में संचालित “स्वास्थ्य कल्याण केंद्र” के स्थापना के 8 वर्ष पूर्ण होकर, यह केंद्र अपनी स्थापना से नवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह “स्वास्थ्य कल्याण केंद्र” राज्य सरकार का आयुष एकीकृत सेवा केंद्र है। “स्वास्थ्य कल्याण केंद्र” में प्रतिदिन बड़ी संख्या में होम्योपैथिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा हितग्रहियों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जाता है। संस्थान प्रमुख डॉ. एस. के. मिश्रा ने बताया कि स्थानीय होम्योपैथी चिकित्सालय में प्राकृतिक चिकित्सा के साथ मिलकर “स्वास्थ्य कल्याण केंद्र” संचालित किया जा रहा है, इसमें पिछले 8 वर्षों में लगभग एक लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. अनुपम मिश्रा ने बताया कि प्राकृतिक आहार एवं उपवास, शरीर को शोधित एवं स्वास्थ्य रखने के श्रेष्ठ उपाय हैं। “स्वास्थ्य कल्याण केंद्र”, सर्वसमावेशी स्वास्थ्य का सुविधा का देश भर में अनुपम उदाहरण है।  

शासकीय सेवकों को 30 जून अथवा 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त के बाद आगामी तिथि पर वेतन वृद्धि स्वीकृत संबंधी आदेश जारी

भोपाल राज्य शासन ने शासकीय सेवकों न्यायालयीन निर्णयों के आधार पर30 जून अथवा 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त के पश्चात आगामी तिथि पर वेतन वृद्धि स्वीकृत संबंधी आदेश जारी कर दिया है। इसमें सेवा निवृत्त हुए शासकीय सेवकों को 1 जुलाई अथवा 1 जनवरी की स्थिति में उनकी पात्रता के अनुसार काल्पनिक वेतन वृद्धि स्वीकृत की जाकर पेंशन के निर्धारण एवं पुनरीक्षण हेतु स्वीकृत आदेश जारी करने के संबंध में प्रशासकीय विभाग को अधिकृत किया गया है।

पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के लिए बिजली वितरण के माकूल प्रबंध

भोपाल पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के लिए बिजली वितरण के माकूल प्रबंध किये गये हैं। यहां पर बिजली वितरण कंपनी की टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहती हैं, ताकि तकनीकी कठिनाई आने पर कुछ मिनटों में ही मौके पर पहुंचकर सुधार कार्य किया जा सके। यहां पर अति उच्चदाव एवं पैंथर लाइनों से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के इंदौर ग्रामीण वृत्त के अधीक्षण यंत्री डॉ. डीएन शर्मा ने बताया कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र एवं समीपी इलाकों के लिए कुवरसी 400 केवी, सेक्टर 1 के 220 केवी, सेक्टर 3 के 220 केवी, घाटा बिल्लौद 132 केवी, बेटमा 1432 केवी, नेट्रिप 132 अति उच्चदाब विद्युत केंद्रों से सप्लाई व्यवस्था है। पीथमपुर क्षेत्र के उच्च दाब के 1600 और निम्न दाब के 1500 उद्योगों के लिए वितरण केंद्रों एवं उच्चदाब की कुल 7 टीमें कार्यरत हैं, जो 33 केवी के 32 विशेषीकृत फीडरों पर मैंटेनेंस एवं अन्य जरूरी कार्यों को देखती है। वितरण केंद्र, उच्च दाब, त्वरित कार्य सेवा सभी टीमें आपसी सामंजस्य बनाकर औद्योगिक क्षेत्र के उपभोक्ताओं को कम से कम समय में सेवाएं देती हैं। इसी से यहां का औसत बिजली वितरण समय 23 घंटे 55 मिनट के करीब है। पीथमपुर क्षेत्र में चार लाइनें पैंथर श्रेणी की हैं, इससे उच्च शक्ति की बिजली कम लॉस के साथ उद्योगों तक पहुंच रही है। इस क्षेत्र के 5 उद्योगों के परिसर तक 132 केवी की अति उच्चदाब बिजली लाइनें हैं, इस अति उच्चदाब की बिजली से ही यहां आपूर्ति हो रही है।  

तालाबों एवं बावडियों के जीर्णोद्धार की बनाएं कार्य-योजना : मंत्री श्री पटेल

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायतों में रिजल्ट ओरिएंटेड काम किए जाएं। सभी तालाबों एवं बावडियों का जीर्णोद्वार करें। इसके लिये पंचायत बार कार्य-योजना बनाए चरणबद्ध तरीके से काम करें। पौध-रोपण के बाद उनका सर्वाइवल रेट अधिक रहे, इस पर भी कार्य किया जाए। मंत्री श्री पटेल ने सोमवार को मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास के विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक में निर्देश दिये। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मनरेगा में गत 15 नवंबर की स्थिति में जिन जनपद पंचायतों में श्रम सामग्री का अनुपात सही होगा, उनमें ग्रेवल रोड, खेत तालाब तथा अन्य नये कार्य प्रारंभ करने की मंजूरी जारी की जा रही है। यह राशि 1 से 3 करोड़ रूपये तक स्वीकृत की जाएगी। उन्होंने कहा कि जैन मुनियों के प्रवास मार्ग चिन्हित कर प्रमुख मार्गों पर उनके रुकने के लिए समुचित व्यवस्था की जाये। शासकीय भूमि पर समुचित पौध-रोपण किये जायें। समीक्षा में मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायतों में खेत सड़क एवं सुदूर सड़क योजना में सड़कों की मांग एक बार में ही चिन्हित कर ली जाये, जिससे स्वीकृति के लिए निर्णय लिया जा सके। उन्होंने निर्देशित किया कि स्कूल शिक्षा विभाग के तहत स्कूलों की बाउंड्रीवॉल निर्माण में मनरेगा कन्वर्जेंस रेट भी तय किया जाए। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मनरेगा में किए जा रहे पौध-रोपण को बाउंड्रीवॉल से सुरक्षित किया जाए। पौधे जल-स्त्रोतों के निकट ही लगाये जाये कि ये पौधे सुरक्षित भी रहें। हम सबको इसके लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने नर्मदा नदी के किनारों पर सघन पौध-रोपण करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायतों की जनपद स्तर पर क्लस्टर मीटिंग नियमित रूप से होना चाहिए। बैठकों में ग्राम विकास की कार्ययोजना तय की जानी चाहिए। उन्होंने विभाग के पदस्थ इंजीनियर्स की प्रापर ट्रेनिंग कराने के निर्देश भी दिए। मंत्री श्री पटेल ने निर्देश दिये कि विश्राम घाट शेड के साथ बाउंड्री वॉल का निर्माण भी किया जाए एवं परिसर में पौध-रोपण भी किया जाए। उन्होंने बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए अनुमति प्राप्त करने का पत्र केन्द्र सरकार को भेजने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वच्छता परिसरों के निर्माण के लिए साइट सिलेक्शन उचित तरीके से किया जाए एवं उनके मेंटेनेंस पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। ग्रेवल रोड के निर्माण में यदि आवश्यक हो, तो पुलिया के निर्माण के लिए राशि अलग से स्वीकृत की जाए। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि खेत-तालाब योजना से किसान भाई विशेष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं, अत: खेत तालाबों की स्वीकृति पर विशेष जोर दिया जाए। ऐसे खेत जहां बजरी या मिट्टी होने के कारण इस योजना में तालाब का निर्माण होने में कठिनाई हो रही है, वहां पर महाराष्ट्र राज्य की तरह नवाचारी प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को विस्तृत अध्ययन कर फीजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री पटेल ने बांस के उपयोग को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि बांस से बनी बाउंड्रीवॉल प्राकृतिक रूप से मजबूत और सुंदर होती है। उन्होंने पौध-रोपण क्षेत्र की बाउंड्रीवॉल पर बांस रोपण करने पर जोर दिया। उन्होंने पंचायत भवन विहीन ग्राम पंचायतों में पंचायत एवं सामुदायिक भवन बनाने के कार्य की भी समीक्षा की। विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरणों में प्रावधानों पर स्पष्ट रूप से विचार करने के लिए निर्देश दिये। पंचायतों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से मिलकर स्पष्ट कार्य योजना भी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने का कि विधानसभा के लंबित मामलों का निराकरण समय-सीमा में किये जाए। बैठक में विभागीय प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकारण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दीपक आर्य, आयुक्त मनरेगा श्री अवि प्रसाद सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

पराली में मौजूद फायबर पशुओं को अत्यंत प्रिय, कृषि की परम्परागत शैली से नरवाई जलाने की घटनाओं में आयी कमी

भोपाल धान, गेंहू मक्का सहित अन्य खाद्य फसलों की कटाई के बाद शेष बचा हिस्सा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता रहा है। क्योंकि खेतों में अवशेष के रूप में इस हिस्से में किसान आग लगा देता है और इससे इंसानी बस्तियों, परिवेश और वातावरण प्रदूषित होता जाता है। हाल ही में कृषि अभियांत्रिकी विभाग भोपाल द्वारा नरवाई जलाने की घटनाओं का सेटेलाइट डेटा जारी किया गया है। इसमें मध्यप्रदेश में 15 सितंबर से 14 नवम्बर के बीच कुल 8917 घटनाएं दर्ज की गई हैं। गत बीते 3 दिनों की बात करें, तो बालाघाट में 15 नवम्बर को नरवाई जलाने की सिर्फ एक घटना दर्ज हुई है। वहीं, श्योपुर में 489, जबलपुर में 275 घटनाएं हुई है। इसी तरह ग्वालियर, नर्मदापुरम्, सतना, दतिया जैसे जिलों में इस तरह की करीब 150 घटनायें रिकार्ड हुई है। यह डेटा इस वर्ष का पूरे देश मे सबसे अधिक है। यह पंजाब व हरियाणा जैसे कृषि में अग्रणी प्रदेशो से भी अधिक है। मध्यप्रदेश में नरवाई जलाने की घटनाएं सबसे कम मात्रा में दर्ज हुई हैं। बालाघाट जिले में कृषि की परम्परागत शैली से ऐसी घटनाएं बिल्कुल नगण्य सी है। जिले के उप संचालक कृषि श्री राजेश खोब्रागड़े बताते हैं कि बालाघाट में नरवाई (पराली) जलाने के मामले में यहां के किसान बेहद सजग हैं। यहां किसान धान का उपयोग तो अपने लिए करते ही है, जबकि धान कटाई के बाद शेष बचे हिस्से (खूंट या खूंटी) को पशुओं के भोजन के रूप में खेतों में ही रहने देते हैं और कुछ हिस्सा काटकर पशुओं के लिए पुंजनी या पुंजना या कहें रोल बनाकर सुरक्षित रख लेते हैं। यहां परम्परागत रूप से खेती-किसानी का प्रबंधन बेहतर स्वरूप से दिखाई देता है। जिले में 15 सितंबर से 16 नवम्बर तक 6 घटनाएं पराली जलने की रिकॉर्ड हुई है। जिले में किसान हार्वेस्टर से कटाई के बावजूद एक फीट तक धान काटता है और रियर से कटाई करने पर भी कुछ हिस्सा शेष रखते है। यहां किसान धान का शेष भाग मुख्य रूप से पशुओं के लिए संरक्षित करते हैं और पूरे साल भर इसे पशुओं के चारे के रूप में उपयोग में लाते हैं। खरीफ में ढाई लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में हुई धान की फसल बालाघाट जिले में खरीफ की फसल में मुख्य रूप से धान का रकबा अधिक है। यहां इस वर्ष 2 लाख 60 हजार हेक्टेयर में धान उगाई गई। बालाघाट प्रदेश का एकमात्र जिला है, जो रबी सीजन में भी धान की फसल उगाता है। यहां रबी में करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की जाती है। जिले में खरीफ धान की 60 से 70 प्रतिशत कटाई रिपर से हुई है, जबकि हाथों से मात्र 10 से 20 प्रतिशत। नरवाई (पराली) का उपयोग जिले के किसान नरवाई (पराली) या पैरा का उपयोग सदियों से विभिन्न तरीकों से करते आ रहे है। यहां पराली को पशुओं के चारे के रूप में, खाद बनाने के लिए, ऊर्जा उत्पादन के लिए, कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए, मिट्टी की दीवार बनाने में और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। पराली पशुओं को पसंद क्यूं आती है? पराली पशुओं के लिए एक स्वादिष्ट और पोषक चारा है। बालाघाट जिले में पशुओं के भोजन का एक बड़ा हिस्सा धान की पराली ही है। यह जब यह ताज़ा-ताज़ा और हरी होती है, तो यह पशुओं को बड़ी पसंद आती है। पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं। पराली में उच्च कोटि का फाइबर, समुचित मात्रा में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं, जो पशुओं के शारीरिक विकास के लिए बड़े ही जरूरी होते हैं। बालाघाट 11 लाख से अधिक पशुओं वाले जिले में शामिल पराली बालाघाट के पशुओं का मुख्य भोजन है। इससे स्पष्ट है कि यहां धान के शेष बचे भाग का उपयोग प्रमुखता से पशुओं द्वारा ही किया जाता है। 20वीं पशु-संगणना (2018-19) के अनुसार बालाघाट जिले में करीब 11 लाख 27 हजार 416 पशु हैं। बालाघाट प्रदेश के सबसे अधिक पशुपालन (लाईव-स्टॉक) वाले 10 जिलो में से एक है।  

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएँ: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएँ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए अंतर्विभागीय समन्वय आवश्यक है। ताकि तेज गति से स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तारित किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों और अंतर्विभागीय समन्वय विषयों की समीक्षा की। अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग संजय दुबे, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य संदीप यादव और आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने संजीवनी क्लीनिक में रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियुक्तियाँ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं को सशक्त करने के लिए प्रक्रिया को तेज गति से पूर्ण किया जाए। नवीन गठित ज़िलों में जिला चिकित्सालयों के लिए चिकित्सकीय और पैरामेडिकल पदों की पूर्ति की प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की । उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि सभी आवश्यक प्रस्ताव मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को शीघ्र भेजे जाएँ, ताकि रिक्त पद जल्द भरे जा सकें और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो। शासकीय मेडिकल कॉलेजों में पे-प्रोटेक्शन के विषय पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और आईपीएचएस मानक अनुसार रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति के लिए विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।  

श्री अन्न उत्सव फूल फेस्टिवल के माध्यम से मोटे अनाज के व्यंजनों को प्रोत्साहित करें : मंत्री श्रीमती संपतिया उइके

मंडला जिले में लगातार दो वर्षों से फूड फेस्टिवल का सफल आयोजन हो रहा है इस अवसर पर प्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मोटे अनाज को प्रोत्साहित करने का काम किया है। जिससे मोटे अनाज के उत्पादन के लिए किसानों को प्रेरित किया जा सके। उन्होंने कहा कि श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल के अंतर्गत मोटे अनाज से बने पकवानों, मिठाई सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का प्रदर्शन किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा श्री अन्न उत्सव को बढ़ावा देने के लिए अच्छे व्यंजन बनाने पर पुरूस्कृत भी किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंडला जिले में कोदो-कुटकी के उत्पादन को भी बढ़ावा देने को कहा है। जिससे मोटे अनाज और कोदो-कुटकी का उत्पादन करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल में कोदो-कुटकी, रागी, बाजरा, उड़द, सागा सहित मोटे अनाज के पकवान बनाए गए हैं। ये पकवान अत्यधिक स्वादिष्ट और लाभदायक है। उन्होंने शहर के सभी नागरिकों से अपील की कि श्री अन्न उत्सव फूल फेस्टिवल में आकर स्टॉलों के मिष्ठानों और पकवानों का आनंद लें। मंत्री श्रीमती संपतिया उइके शुक्रवार को बैगा-बैगी चौक मंडला में आयोजित श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल का शुभारंभ किया। जिला प्रशासन के द्वारा मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिलेट फूड फेस्टिवल मास्टर शेफ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर फूड फेस्टिवल पारंपरिक हस्तशिल्प की प्रदर्शनी मेहंदी, टेटू, पोट्रेट, स्कैचिंग, हस्ताक्षर केपिंग, झाकी, पम्पलेट, बैनर के माध्यम से योजनाओं एवं उत्पादों का प्रदर्शन और वित्तीय साक्षरता आधारित जनजाति जागरूकता का कार्यक्रम संपन्न हुआ। आयोजित श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल में विभिन्न प्रकार के पकवानों, व्यंजन, मिठाई, खीर, पुड़ी, कोदो-कुटकी, आचार, रायता, मेवा-मिष्ठान सहित विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए। मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, नगरपालिका अध्यक्ष श्री विनोद कछवाहा, कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा, जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति (संचार एवं संकर्म) श्री शैलेष मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री रजत सकलेचा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री श्रेयांश कूमट, अपर कलेक्टर श्री राजेन्द्र कुमार सिंह, अपर कलेक्टर श्री अरविंद कुमार, सहायक कलेक्टर आकिप खान, एसडीएम मंडला श्रीमती सोनल सिडाम, एसडीएम बिछिया श्रीमती सोनाली देव, डिप्टी कलेक्टर श्रीमती क्षमा सराफ, मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री गजानंद नाफड़े सहित जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, पत्रकार, नागरिकगणों ने आयोजित श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल का अवलोकन किया। सभी ने श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल में व्यंजन और पकवानों का भी स्वाद चखा। श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल में स्थानीय दुकानदारों और महिला स्वसहायता समूहों के द्वारा स्टॉल लगाकर व्यंजनों का विक्रय किया।      मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने श्री अन्न उत्सव फूड फेस्टिवल के अवसर पर बनाए गए पकवान, व्यंजन, खीर, पुड़ी, कोदो-कुटकी, आचार, रायता, मेवा, मिठाई सहित विभिन्न प्रकार के मिष्ठानों की प्रशंसा की। इस अवसर पर मास्टर शेफ प्रतियोगिता अंतर्गत विजेताओं को पुरूस्कृत किया गया। मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने सुश्री सारा तनवीर को प्रथम स्थान, सुश्री मलगाम सिस्टर को द्वितीय स्थान और सुश्री साक्षी बिरानी को तृतीय स्थान से पुरूस्कृत किया। आयोजित कार्यक्रम का संचालन श्री अखिलेश उपाध्याय ने किया।

मध्यप्रदेश बनेगा देश का लॉजिस्टिक्स हब : उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने मध्यप्रदेश के समग्र विकास के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में हो रहे कार्यों को अभूतपूर्व बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य नीति आयोग द्वारा भी विकास के लिये सतत नवाचार किये जा रहे है। नीति आयोग एक नवीन पहल कर प्रदेश को लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने नीति आयोग को इसके लिये की जा रही वर्कशॉप के लिये बधाई और शुभकामनाएँ दी। सोमवार को नीति आयोग ने आवश्यक रणनीति तैयार करने के लिये एक कार्यशाला की। कार्यशाला का विषय “मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स हब: चुनौतियाँ और समाधान” था। कार्यशाला में बताया गया कि मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिये एकीकृत रणनीति बनेगी। मल्टी-मॉडल परिवहन के लिए बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाया जाएगा। इंदौर में राज्य का पहला मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, एमएलएलपी स्थापित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की कार्यशाला में राज्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने, नीति-निर्माण में सुधार के लिए विचार-विमर्श किया गया। इसमें लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला में केंद्रीय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, नीति विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण लॉजिस्टिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि, राज्य को लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कुशल इनलैंड कंटेनर डिपो, वेयरहाउसिंग सुविधाओं, मल्टी-मॉडल परिवहन और एमएसएमई की आवश्यकताओं को पूरा करने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस नीति संवाद का उद्देश्य इन चुनौतियों का समाधान खोजना और आधुनिक, टिकाऊ और किफायती लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करना था। मुख्य कार्यपपालक अधिकारी राज्य नीति आयोग श्री ऋषि गर्ग ने कहा कि यह संवाद सरकारी विभागों, हितधारकों और निजी क्षेत्र के लिए विचारों और समस्याओं को साझा करने का एक प्रभावी मंच है। इसके माध्यम से बेहतर नीतियाँ और कार्य योजनाएँ तैयार की जा सकेंगी। श्री संजीव खन्ना मुख्य परिचालन अधिकारी, पतंजलि फूड्स ने कहा कि इस तरह के संवाद और आयोजन उद्योगों और निवेशकों में सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करते हैं। इससे राज्य में कुशल और किफायती लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित होगा। श्री संजीव पाटिल मुख्य परिचालन अधिकारी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स ने मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएलएलपी) की अवधारणा पर जोर दिया और बताया कि इंदौर में राज्य का पहला एमएलएलपी स्थापित किया जा रहा है। अन्य पार्क भी पाइपलाइन में हैं। श्री अभिषेक अग्रवाल वरिष्ठ विशेषज्ञ नीति आयोग ने मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए एकीकृत रणनीति और मल्टी-मॉडल परिवहन के लिए बुनियादी ढांचे और सेवाओं के विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री राकेश कुमार मीना निदेशक डीपीआईआईटी, भारत सरकार ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केंद्र सरकार का उद्देश्य एक तकनीकी रूप से सक्षम, सस्ता, और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तैयार करना है। नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी 2022, पीएम गतिशक्ति और ULIP जैसी डिजिटल पहल इस दिशा में क्रांतिकारी कदम हैं। श्री प्रमोद राजेंद्रन पार्टनरशिप मैनेजर स्मार्ट फ्रेट सेंटर, इंडिया चैप्टर ने ग्रीन लॉजिस्टिक्स और शून्य उत्सर्जन ट्रकों के उपयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। श्री अभ्युदय झा सीनियर मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग ने मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इंडस्ट्री डेलीगेट्स श्री मुकेश पंजवानी, हर्ष एक्सप्रेस श्री संजीव कुमार मुदालियर, सी एशिया से उपस्थित रहे। इन विषयो पर हुई चर्चा कार्यशाला में औद्योगिक परिप्रेक्ष्य: एमएसएमई, परिवहन और वेयरहाउसिंग में सुधार के उपाय, डिजिटल एवं ग्रीन लॉजिस्टिक्स: डिजिटल प्लेटफॉर्म और शून्य उत्सर्जन आधारित समाधान, नीति निर्माण और क्रियान्वयन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहन और लॉजिस्टिक्स नीति के निर्माण पर चर्चा हुई। श्रीमती पूर्णिमा शर्मा प्रशासनिक अधिकारी मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।  

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