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ओंकारेश्वर से 75 किलोमीटर लंबी पंचकोशी यात्रा का आयोजन, बड़ी संख्या में पहुंचे हजारों श्रद्धालु

ओंकारेश्वर नर्मदा नदी के तट पर बसे ओंकारेश्वर से 75 किलोमीटर लंबी पंचकोशी यात्रा का आयोजन इस वर्ष देवउठनी एकादशी से एक दिन पहले, आज से शुरू हो रहा है। परंपरागत रूप से हर साल देवउठनी एकादशी से पंचकोशी यात्रा शुरू होती है, लेकिन इस वर्ष तिथियों में बदलाव के कारण यात्रा दशमी को प्रारंभ की जा रही है। इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचे हैं, जिनमें महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। 49 वर्षों से जारी पंचकोशी यात्रा सन 1975 में शुरू हुई पंचकोशी यात्रा का यह 49वां वर्ष है। इसकी शुरुआत मात्र पांच लोगों द्वारा की गई थी, जिसके जनक सनावद निवासी रविंद्र भारती चौरे थे। अब यह यात्रा ओंकारेश्वर से शुरू होकर 75 किलोमीटर की परिक्रमा करते हुए पांच दिनों में संपन्न होती है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन ओंकार पर्वत की परिक्रमा के साथ समाप्त होती है। श्रद्धालुओं का आगमन और सुरक्षा व्यवस्था शनिवार से ही ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। सभी ने नर्मदा स्नान के बाद यात्रा की तैयारियां कीं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए खंडवा और खरगोन जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्य चौराहों, घाटों और यात्रा मार्ग पर पुलिस बल और होमगार्ड के जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस थाने के अनोख सिंधिया ने बताया कि भगवान आदि शंकराचार्य तिराहे से चार पहिया वाहनों का प्रवेश दोपहर 1 बजे से रोक दिया गया था, और वाहनों की पार्किंग कुबेर भंडारी मंदिर पर की जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था नगर परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय गीते ने बताया कि यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश सभी संबंधित विभागों को दिए गए हैं। मंदिर ट्रस्ट के सहायक कार्यपालन अधिकारी अशोक महाजन ने बताया कि घाटों पर श्रद्धालुओं को नर्मदा के जलस्तर की जानकारी लाउडस्पीकर से दी जा रही है। इस दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि को देखते हुए सभी कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है। पूरे मार्ग पर सेवाभाव और सहयोग यात्रा के पूरे मार्ग पर कई गांवों और नगरों में श्रद्धालुओं के लिए पानी, भोजन और विश्राम की सुविधाएं स्थानीय लोगों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही हैं। पंचकोशी यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु नर्मदा स्नान, ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कार्तिक पूर्णिमा के पर्व पर शामिल होने के उद्देश्य से ओंकारेश्वर पहुंचे हैं।

नर्सिंग कॉलेजों में 45 हजार सीटों में से 6 हजार से भी कम पर एडमिशन

भोपाल. सीबीआई और हाई कोर्ट द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति के परीक्षण में भले ही लगभग 175 नर्सिंग कॉलेज मान्यता के योग्य पाए गए हैं, पर सख्ती के चलते कई कॉलेज संचालक हाथ खींच रहे हैं। उन्होंने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया है, मान्यता नवीनीकरण के लिए लगभग 300 आवेदन आए थे, जिनमें 125 के करीब ही मान्यता योग्य बताए जा रहे हैं। सीटों की बात करें तो इन 125 कॉलेजों में जीएनएम (डिप्लोमा पाठ्यक्रम) और बीएससी (नर्सिंग) मिलाकर लगभग छह हजार सीटें ही हैं, जबकि वर्ष 2020 के बाद एक समय ऐसी स्थिति थी कि प्रदेश में 670 नर्सिंग कॉलेजों में 45 हजार तक सीटें थीं। यह कॉलेजों और सीटों की अब तक की सर्वाधिक संख्या रही। सीटें कम होने का बड़ा नुकसान नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश की तैयारी कर रहे युवक-युवतियों का होगा। कोई नया कॉलेज नहीं खोला जाएगा मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के अधिकारियों ने बताया कि एक-दो दिन के भीतर मान्यता जारी होने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने तय किया है वर्ष 2023 की तरह इस वर्ष भी कोई नया कॉलेज नहीं खोला जाएगा, सिर्फ पहले से संचालित कॉलेजों को ही मान्यता दी जाएगी। नवीनीकरण के लिए कॉलेजों से आवेदन मांगे गए थे, जिनके परीक्षण का काम लगभग पूरा हो गया है। मान्यता नवीनीकरण सूची जारी होने के बाद एमपी ऑनलाइन से प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। प्रवेश के लिए कर्मचारी चयन मंडल पहले ही प्रवेश परीक्षा आयोजित कर चुका है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। बंद हो जाएंगे 350 कॉलेज बता दें, लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने नर्सिंग कॉलेजों के संचालन में मापदंड को लेकर हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। कुछ कॉलेजों का फर्जीवाड़ा मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने पकड़ा। हाई कोर्ट ने अपात्र कॉलेजों को बंद करने के निर्देश दिए। इस तरह लगभग 200 कॉलेज बंद हो गए। अभी 485 कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें लगभग 350 बंद हो जाएंगे क्योंकि वे मान्यता के लिए जरूरी सुविधाओं के पैमाने पर खरे नहीं उतर रहे। आगे भी यही स्थिति रही तो प्रदेश की आवश्यकता के अनुसार नर्सिंग कर्मचारी निजी एवं सरकारी अस्पतालों को नहीं मिल पाएंगे।

बाल विवाह कराने या सहयोग करने वालों को होगी जेल , देवउठनी एकादशी पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती

Those who organize or support child marriage will be jailed, administration’s strictness to stop child marriage on Devuthani Ekadashi भोपाल ! प्रदेश सरकार ने आगामी देवउठनी एकादशी पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए कड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इस दिन होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में बाल विवाह के मामलों को रोकने के लिए प्रशासन ने विशेष कदम उठाए हैं। सामूहिक विवाह आयोजकों से यह शपथ पत्र लिया जाएगा कि उनके कार्यक्रमों में किसी भी रूप में बाल विवाह नहीं होगा। प्रशासन ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है और बाल विवाह करने या इसे प्रोत्साहित करने वालों को दो साल तक की सजा का प्रावधान किया है। इसके साथ ही, प्रशासन ने एक जाँच व्यवस्था बनाई है, जिसमें 10 विशेष टीमें तैनात की जाएंगी, जो सामूहिक विवाह कार्यक्रमों पर निगरानी रखेंगी। इन टीमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी बाल विवाह ना हो और सभी विवाह नियमों के तहत ही संपन्न हों।साथ ही, प्रशासन ने आयोजन से जुड़े सभी विभिन्न सेक्टरों को भी निर्देशित किया है। प्रिंटिंग प्रेस, हलवाई, कैटरिंग सेवाएं, बैंड, घोड़ी वाले और ट्रांसपोर्ट सेवा के संचालकों को भी बाल विवाह को रोकने में सहयोग देने के लिए कहा गया है। धर्मगुरु और समाज के प्रमुखों से भी यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस अभियान में प्रशासन का साथ देंगे और समाज में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे। इस कदम से प्रशासन का मुख्य उद्देश्य समाज में बाल विवाह की कुरीति को समाप्त करना है और इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना है।सभी की सक्रिय भागीदारी से उम्मीद की जा रही है कि देवउठनी एकादशी पर आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम सुरक्षित और कानूनी रूप से सही तरीके से संपन्न होंगे, जिससे प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं में कमी आएगी। यहां करें शिकायतबाल विवाह की सूचना चाइल्ड लाइन के दूरभाष नंबर 1098 पर दे सकते हैं। इसके अलावा एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारी, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दे सकते हैं। शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

प्रदेश के स्कूलों में बैगलेस-डे में विभिन्न गतिविधियों के साथ बच्चों का बढ़ाया जायेगा कौशल

भोपाल. प्रदेश में कक्षा-6 से 8 तक पढ़ने वाले बच्चों का समग्र विकास हो, इसके लिये बैगलेस-डे के दिन बच्चों को विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करने का निर्णय स्कूल शिक्षा विभाग ने लिया है। इस दिन बच्चों के बीच पढ़ाई के अलावा विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं व्यावहारिक गतिविधियाँ की जायेंगी। इस संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने जिला शिक्षाधिकारियों और जिला परियोजना समन्वयक को निर्देश जारी किये हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में यह प्रावधान रखा गया है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे 21वीं सदी के कौशल से परिचित हो सकें, इसके लिये कक्षा-6 से 8 तक के स्कूल के बच्चों के लिये प्रत्येक माह में न्यूनतम एक शनिवार को बस्ते-विहीन दिवस का आयोजन हो। इन दिवसों में विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल की जानकारी दी जाये। बैगलेस-डे के लिये शाला के प्राचार्य एवं शिक्षकों को चर्चा कर गतिविधियों का कैलेण्डर तैयार करने के लिये भी कहा गया है। गतिविधियों की जानकारी “एचडी जिओ टैगी फोटोग्रॉफ’’ राज्य शिक्षा केन्द्र के ई-मेल आईडी rsk.curriculum@gmail.com पर भेजने के लिये कहा गया है। बैगलेस-डे का उद्देश्य विद्यार्थियों को सफल, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है। इसी के साथ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, साक्ष्य आधारित सोच और रचनात्मकता का विकास करना है। विद्यार्थियों में संवाद, विचार अभिव्यक्ति, स्वास्थ्य एवं पोषण, खेल सहयोग की भावना एवं नेतृत्व गुण के साथ भारतीय ज्ञान परम्परा और पर्यावरणीय चेतना का विकास करना प्रमुख है। बैगलेस-डे में होने वाली गतिविधियाँ राज्य शिक्षा केन्द्र ने बैगलेस-डे में होने वाली गतिविधियों के संबंध में भी दिशा-निर्देश जारी किये हैं। ऑर्ट और क्रॉफ्ट में बच्चों के बीच में ड्राइंग, पेंटिंग, मिट्टी के खिलौनों का निर्माण, मुखौटे, डॉल-मेकिंग और अनुपयोगी सामग्री से वस्तुओं का निर्माण प्रमुख है। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों के बीच लोकगीत-नृत्य, लघु नाटिका, कविता पाठ, कहानी लेखन गतिविधियाँ की जायें। बच्चों को खेती की आधुनिक पद्धतियों की जानकारी हो सके, इसके लिये पॉलीफॉर्मिंग, ऑर्गेनिक फॉर्मिंग, औषधीय पौधों की जानकारियाँ और खेती में उपयोग होने वाले आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी जाये। साथ ही स्थल भ्रमण भी कराया जाये। बच्चों को ऐतिहासिक स्थलों, लघु उद्योग व्यवसाय, जिनमें मधुमक्खी-पालन, मुर्गी एवं मछली-पालन इत्यादि की जानकारी दी जाये। बच्चों को स्थानीय बैंक, पुलिस थाना, अस्पताल और अनाज मण्डी का भ्रमण कराया जाये। बच्चों को हथकरघा, खिलौने निर्माण जैसी इकाइयों का भ्रमण कराया जाये। इसी के साथ बच्चों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण की जानकारी देने के साथ खेल गतिविधियाँ भी करायी जायें।

रीजनल इन्वेसटर्स समिट नर्मदापुरम में, सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना: मुख्यमंत्री

भोपाल मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम में 7 दिसंबर को रीजनल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जाएगा, जिसमें निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है ताकि उन्हें राज्य से बाहर न जाना पड़े। मुख्यमंत्री आगामी फरवरी में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए विदेश यात्रा पर भी जाएंगे और विदेशी निवेशकों से राज्य में निवेश के अवसरों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री  ने बताया कि इस समिट में आईटी, MSME और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समिट के माध्यम से प्रदेश में बड़े और छोटे उद्योगों की स्थापना की संभावनाओं को विस्तार दिया जाएगा, जिससे न केवल राज्य का आर्थिक विकास होगा बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। फरवरी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी मुख्यमंत्री यादव ने जानकारी दी कि वे फरवरी में मध्यप्रदेश में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए ब्रिटेन और जर्मनी का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान वे विदेशी निवेशकों से मिलकर उन्हें प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्होंने बताया कि यह समिट राज्य में औद्योगिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पूरी कोशिश है कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए राज्य के बाहर न जाना पड़े। इसके लिए राज्य सरकार नए उद्योगों और निवेश की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने में जुटी है। “वन नेशन, वन इलेक्शन”  का समर्थन चुनावों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के “वन नेशन, वन इलेक्शन” के विचार का समर्थन किया और कहा कि बार-बार चुनाव से ध्यान भटकता है। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि भाजपा महाराष्ट्र, झारखंड और मध्यप्रदेश के उपचुनावों में जीत हासिल करेगी। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि वे झारखंड में तीन जनसभाओं को संबोधित करेंगे और वहां से सीधे विजयपुर रवाना होंगे।

मुख्यमंत्री यादव ने सभी मंत्रियों को स्वयं भर्ती की प्रक्रिया को देखने और समय सीमा के भीतर प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कहा

भोपाल प्रदेश में एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जनवरी 2025 से प्रारंभ होगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को स्वयं इस कार्य को देखने और समय सीमा के भीतर प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कहा है तो मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागों से रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। प्रदेश में इस समय लगभग सात लाख नियमित कर्मचारी हैं। रिक्त पदों की पूर्ति नहीं होने के कारण विभाग आउटसोर्स या फिर संविदा कर्मचारियों से काम चला रहे हैं। इससे काम की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने का निर्णय लिया है।   रिक्त पदों की मांगी गई जानकारी मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी विभागों को पत्र जारी कर 2024 में रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा है कि अगस्त 2022 तक किस श्रेणी के कितने पदों की भर्ती की गई। परिणाम इनके जारी हुए या नहीं और चयनित अभ्यर्थियों ने पदभार ग्रहण किया है या नहीं। 31 मार्च 2025 तक कितने पद किस संवर्ग के रिक्त हो जाएंगे।वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजकर भर्ती के लिए कब स्वीकृति ली गई। उधर, भर्ती प्रक्रिया को लेकर मुख्य सचिव राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के अधिकारियों के साथ बैठक भी कर चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार जनवरी से भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर देगी और। लक्ष्य यह है कि वर्ष 2025 के अंत तक नियुक्तियां प्रारंभ हो जाएं। बजट में किया जाएगा प्रविधान वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2025-26 के बजट की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इसमें कर्मचारियों के वेतन-भत्ते के लिए सभी को स्थापना व्यय में प्रविधान करना है। एक लाख पदों पर भर्ती के हिसाब से सभी विभागों को बजट प्रविधान भी करना होगा। अभी लगभग 23 प्रतिशत बजट स्थापना व्यय के लिए रखा जाता है।

डिजिटल अरेस्ट : बेटे को सामूहिक दुष्कर्म में फंसने का डर दिखाकर मांगी 40 हजार रुपये राशि

बुरहानपुर  कसंल्टिंग इंजीनियर्स एसोसिशन के अध्यक्ष प्रमोद गढ़वाल के साथ डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से 40 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने उन्हें शनिवार दोपहर 12 बजे के आसपास वाट्सएप कॉल करके कहा कि हैदराबाद में पढ़ रहा उनका बेटा भव्य गढ़वाल सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फंस गया है, वह थाने से बोल रहा है, यदि अपने बेटे को इस केस से छुड़ाना चाहते हो तो तुरंत 40 हजार रुपये ट्रांसफर करो, अन्यथा भव्य आठ से दस साल के लिए जेल चला जाएगा। हड़बड़ाहट में गढ़वाल ने राशि ट्रांसफर कर दी। इसके पंद्रह मिनट बाद जब दोबारा दूसरे नंबर से ऑडियो कॉल आया और ठगों ने दो लाख रुपये और ट्रांसफर करने के लिए कहा तो गढ़वाल को शक हुआ। उन्होंने पहले अपने बेटे को फोन लगा कर पुष्टि की और तुरंत लालबाग थाने पहुंच कर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार लगातार डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। बावजूद इसके ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस तरह बनाया मानसिक दबाव वाट्सएप काल में ठगों ने पुलिस की वर्दी वाला फोटो लगा रखा था। उन्होंने सामूहिक दुष्कर्म में भव्य सहित तीन युवकों के गिरफ्तार होने की बात कही। साथ ही फोन कॉल के दौरान ही भव्य को आवाज देकर बुलाने का नाटक किया और किसी के रोने की आवाज प्रमोद गढ़वाल को सुनाई। जिससे वे मानसिक रूप से दबाव में आ गए। ठगों ने यह भी कहा कि मीडिया वाले आ चुके हैं, उन्हें भी मैनेज करना पड़ेगा, इसलिए राशि बढ़ गई है। इंजीनियर प्रमोद गढ़वाल ने शहर के नागरिकों से अपील की है, कि उनकी तरह वे डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से होने वाली ठगी का शिकार न हों। अनजान नंबरों से आने वाले काल, वीडियो कॉल न उठाएं। विशेष रूप से प्लस 92 से शुरू होने वाले नंबर न उठाएं। बेटे को डिजिटल अरेस्ट कर इंजीनियर से साइबर ठगी की शिकायत की गई है। जांच की जा रही है। इसे लेकर लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है।     – देवेंद्र पाटीदार, पुलिस अधीक्षक।  

पीडीएस गेहूं और आटा बिक्री पर जोर, सरकार ने दावा किया था कि इस साल गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 113.29 मिलियन टन हुआ

इंदौर गेहूं के दाम बीते दिनों में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। दक्षिण भारत में 3400 रुपये क्विंटल के स्तर को छू लिया है। वहां की मिलों को मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब या हरियाणा से पर्याप्त गेहूं ही नहीं मिल पा रहा है। फिलहाल वे उप्र के गेहूं के भरोसे है। गेहूं के दामों में बीते महीने में अप्रत्याशित तेजी आ चुकी है। इसके पीछे की मुख्य वजह तो त्योहारी सीजन में भी ओपन मार्केट (ओएमएसएस) में सरकार द्वारा गेहूं की बिक्री नहीं करना है। हालांकि असल वजह ये है कि गेहूं के उत्पादन के मामले में सरकार का गणित और आंकलन दोनों फेल हो चुका है। पीडीएस गेहूं और आटा बिक्री पर जोर सरकार ने दावा किया था कि इस साल गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 113.29 मिलियन टन हुआ है। जबकि बाजार की स्थिति देखकर जानकार कह रहे हैं कि असल उत्पादन इससे कहीं नीचे हैं। दूसरी ओर अब सरकार अब भी दामों पर नियंत्रण की बजाय राजनीतिक कदम में जुटी है। सरकार का ध्यान अब भी ओपन मार्केट सेल पर नहीं है। बल्कि चुनावी गणित देखते हुए पीडीएस में गेहूं और आटा बिक्री पर जोर लगा रही है। हालांकि इससे बाजार के दामों पर लंबे समय में कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है। स्थानीय बाजार में डर है कि सरकार ने अब भी बिक्री पर ध्यान नहीं दिया तो आटा-गेहूं की महंगाई और बढ़ेगी। दरअसल मिलों ने बीते महीने में सरकारी बिक्री की उम्मीद में माल नहीं पकड़ा। उनके पास अब स्टाक कम है। किसान के पास भी ज्यादा माल नहीं है।  

प्रदेशवासियों को आंवला नवमी की बधाई : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आंवला नवमी पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा है कि भगवान श्रीहरि विष्णु जी से प्रार्थना है कि सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें, जीवन में सुख, समृद्धि, संपन्नता की वृद्धि हो, और सब पर कृपा बनाए रखें।  

विश्व पटल पर देश को गौरवान्वित कर रहे हैं हमारे वैज्ञानिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भविष्य को आकार देने में विज्ञान की अहम भूमिका है। भारत को विश्व पटल और अंतरिक्ष तक गौरवान्वित कर रहे, देश के वैज्ञानिक और विज्ञान प्रतिभाओं पर हम सभी को गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व विज्ञान दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्व विज्ञान दिवस की जनसामान्य को शांति, मानव-कल्याण और अत्याधुनिक तकनीक से प्रगति के लिए विज्ञान की अनिवार्यता और स्वीकार्यता के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका है।  

हाथी शावक की इलाज के दौरान मृत्यु

भोपाल. उमरिया जिले के बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन परिक्षेत्र पनपथा बफर के बीट खारीबड़ी टोला के कक्ष क्रमांक-आर.एफ.-179 पटपरहा हार में 8 नवम्बर को एक हाथी शावक झुण्ड से बिछड़कर अकेला अस्वस्थ एवं अचेत अवस्था में मिला था। उपचार के दौरान 10 नवम्बर को प्रात: 6:06 बजे शावक की मृत्यु हो गयी। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री एल. कृष्णमूर्ति ने बताया कि वन्य-प्राणी चिकित्सा दल द्वारा मौके पर पहुँचकर शावक का उपचार किया गया। उपचार के बाद हाथी शावक को परिक्षेत्र ताला के रामा हाथी कैम्प लाया गया। चिकित्सीय दल द्वारा कैम्पिंग कर लगातार उपचार किया गया। उपचार के दौरान ही उसकी मृत्यु हो गयी। एस.ओ.पी. के अनुसार पोस्टमार्टम कर वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हाथी शावक के शव का निपटान किया गया।

नुसरत भरूचा ने खुद को दिया नया शॉर्ट नेम ‘कोल’, वजह भी बताई

मुंबई,  एक्ट्रेस नुसरत भरूचा ने खुद को नया नाम ‘कोल’ दिया है। ऐसा उन्होंने क्यों किया है ये भी समझाया है। नुसरत ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह गोवा में एक परफॉरमेंस के लिए मेकअप करवा रही हैं। क्लिप में वह कहती हुई सुनाई दे रही हैं, “मैं रोना चाहती हूं.. मैं 48 घंटों से सोई नहीं हूं और मैं यहां गोवा में हूं और मुझे लगा कि मैं झपकी ले पाऊंगी और तैयार होने से पहले सो पाऊंगी, लेकिन नहीं, अब इवेंट को प्रीपोंड (तय समय से पहले) कर दिया गया है।” उन्होंने कहा, “मुझे अपने कॉल टाइम से 2 घंटे पहले परफॉर्म करना है। इसलिए मैंने खाना भी नहीं खाया है और मैं तैयार हो रही हूं…मैं यह नहीं कर सकती। मैं सोना चाहती हूं।” उन्होंने क्लिप को कैप्शन दिया, “मेरा नया पर्सनल शॉर्ट नेम ‘कोल क्राइंग ऑउट लाउड!!” पिछले सप्ताह, एक्ट्रेस ने दीपावली मनाते हुए एक हेल्थ अपडेट पोस्ट शेयर किया और कहा कि वह अस्वस्थ हैं क्योंकि उन्हें बुखार, शरीर में दर्द और “आंखों में संक्रमण है।” नुसरत ने इंस्टाग्राम पर एक कार सेल्फी शेयर की और बताया कि बीमार होने के बावजूद वह खुद को ‘घसीटकर’ मीटिंग में ले गईं। कैप्शन में लिखा था, “दीपावली के बाद की स्थिति, सर्दी, बुखार, खांसी, शरीर में दर्द और.. कुछ आंखों का संक्रमण! फिर भी किसी तरह खुद को मीटिंग में ले जा रही हूं!” नुसरत के बारे में बात करें तो, 2002 के टेलीविजन शो ‘किट्टी पार्टी’ से एक्टिंग शुरू की। उन्हें 2006 में ‘जय संतोषी मां’ से बॉलीवुड में ब्रेक मिला। वह ‘कल किसने देखा’, ‘ताज महल’, ‘लव सेक्स और धोखा’ जैसी फिल्मों का हिस्सा रही हैं। इसके बाद नुसरत लव रंजन द्वारा लिखित और निर्देशित रोमांटिक कॉमेडी बडी फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ में दिखाई दीं। इस फिल्म में कार्तिक आर्यन, दिव्येंदु शर्मा, रायो एस बखिरता, सोनाली सहगल और इशिता ने एक्टिंग की थी। उन्होंने ‘आकाश वाणी’, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘छलांग’, ‘अजीब दास्तां’, ‘छोरी’, ‘हुड़दंग’, ‘राम सेतु’, ‘सेल्फी’, ‘छत्रपति’ में काम किया है। 39 वर्षीय एक्ट्रेस को आखिरी बार प्रणय मेश्राम द्वारा निर्देशित एक्शन थ्रिलर ‘अकेली’ में देखा गया था। उनकी अगली फिल्म विशाल फुरिया की हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘छोरी 2’ है। फिल्म की शुरुआत वहीं से होती है, जहां 2021 में रिलीज हुई पहली किस्त खत्म हुई थी। हॉरर सीक्वल की कास्ट में अभिनेत्री सोहा अली खान भी शामिल हो गई हैं। ‘छोरी’ मराठी भाषा की 2017 की फिल्म ‘लपाछपी’ की रीमेक थी। इसमें मीता वशिष्ठ, राजेश जैस और सौरभ गोयल भी हैं।  

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन/लोकार्पण

भोपाल. स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को बुनियादी सुविधाएँ आसानी से मिल सकें, इसके लिये राज्य सरकार ने अधोसंरचना से जुड़े कामों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बिजली सुधार के लिये क्षेत्र में कराये जा रहे कार्यों में तेजी लायी जायेगी। मंत्री सिंह आज नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र में विकास कार्यों के भूमि-पूजन और लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने ग्राम पंचायत बम्होरीकला में 38.54 लाख रुपये लागत के सामुदायिक भवन का भूमि-पूजन और ग्राम पंचायत कजरौटा में 7.80 लाख रुपये लागत के आँगनवाड़ी भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बिजली सुधार के लिये 3 सब-स्टेशन बनाने के प्रस्ताव दिये गये हैं। मंत्री सिंह ने कहाकि क्षेत्र के प्रत्येक बड़े गाँव में सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जायेगा। उन्होंने एकीकृत माध्यमिक शाला में फर्नीचर के लिये 2 लाख रुपये, पेयजल व्यवस्था के लिये 50 हजार रुपये और सांस्कृतिक मंच निर्माण के लिये 50 हजार रुपये राशि देने की घोषणा की। इस मौके पर स्थानीय जन-प्रतिनिधि मौजूद थे।

रीवा में तीन ग्रीन एनर्जी प्लांट लगाने के लिए सरलता से मिलेगी पराली : उप मुख्यमंत्री

भोपाल कमिश्नर कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा, सतना और मऊगंज जिलों में बाणसागर बाध की नहरों से सिंचाई के बाद धान और गेंहू का विपुल उत्पादन हो रहा है। ग्रीन एनर्जी प्लांट में धान के पैरे (पराली) से बिजली और जैविक खाद बनायी जायेगी। रीवा जिले में तीन ग्रीन एनर्जी प्लांट लगाने के लिए पराली पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। गुढ़ में प्रस्तावित ग्रीन एनर्जी प्लांट का कार्य तत्काल शुरू करें। इस प्लांट के लिए कच्चा माल पराली और कम उपजाऊ क्षेत्र में नेवियर घास उगाकर आसानी से उपलब्ध हो जायेगा। ग्रीन एनर्जी प्लांट स्थापित होने से किसानों की कम उपजाऊ और परती जमीनों से भी लाखों की आय होगी। कंपनी सर्वे का कार्य शीघ्र पूरा करके वास्तविक निर्माण कार्य शुरू करायें। इस प्लांट की स्थापना से जिले में नरवाई जलाने और पराली के समस्या का भी समाधान होगा। किसान के लिए अब धान के साथ-साथ उसका पैरा भी आमदनी देगा। मऊगंज जिले में प्लांट के लिए एक हजार हेक्टेयर की जमीन उपलब्ध है। जमीन प्राप्त करने तथा प्लांट के लिए 7 दिन में आवेदन करें। गुढ़ में दो और सिरमौर में एक प्लांट लगाने की कार्य योजना को मूर्त रूप दें। बैठक में कलेक्टर मऊगंज ने बताया कि ग्रीन एनर्जी प्लांट के लिए बदवार सीतापुर रोड में एक हजार हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। इसमें से 95 प्रतिशत जमीन निजी भूमि है। किसान अच्छी आय प्राप्त होने पर सरलता से दे देगें। किसानों से अनुबंध के आधार पर जमीनें मिल जायेगी। बैठक में कलेक्टर रीवा श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि तीन प्लांट लगाने के लिए पर्याप्त पराली उपलब्ध है। गेंहू के फसल अवशेष तथा वनों से प्राप्त अनुपयोगी पौधों का भी ग्रीन एनर्जी प्लांट में उपयोग किया जा सकता है। गुढ़ प्लांट को सीधी जिले के धान उत्पादक चुरहट और रामपुर नैकिन क्षेत्र के रीवा से जुड़े हुए गांव से भी पराली मिल जायेगी। कलेक्टर सतना अनुराग वर्मा ने बताया कि नगौद में ग्रीन एनर्जी प्लांट का कार्य जारी है। बैठक में रिलायंस ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट के प्रतिनिधि अशोक खरे तथा विजित झा ने बताया कि हमारी कंपनी रीवा और सतना जिले में दस ग्रीन एनर्जी प्लांट स्थापित करना चाहती है इसके लिए सर्वे किया जा रहा है। इस प्लांट में कच्चे माल के रूप में गेंहू और धान के फसल अवशेष पराली का उपयोग किया जायेगा। एक प्लांट के लिए 22 हजार मैट्रिक टन पराली की आवश्यकता होगी। पराली के साथ परती तथा अनुपयोगी जमीन पर आसानी से उगने वाली नेपियर घास का भी कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जायेगा। ग्रीन एनर्जी प्लांट से कम्प्रेस, बायोगैस, हाइड्रोजन तथा मैथेलान का उत्पादन होगा। साथ ही इससे जैविक खाद का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा। किसानों की पराली को कम्प्रेस करके कच्चा माल के रूप में बनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता होगी। इससे रोजगार का सृजन होगा। किसानों की परती और कम उपजाऊ जमीन भी अच्छा लाभ देगी। किसानों से अनुबंध के आधार पर नेपियर घास की खेती करायी जायेगी। ग्रीन एनर्जी प्लांट ऊर्जा उत्पादन के साथ किसानों की तकदीर भी बदल देगा। बैठक में कमिश्नर बीएस जामोद, डिप्टी कलेक्टर श्रेयस गोखले, उप संचालक पशुपालन डॉ. राजेश मिश्रा, क्षेत्रीय प्रबंधक औद्योगिक विकास निगम यूके तिवारी, परियोजना अधिकारी जिला पंचायत संजय सिंह तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सतत एवं निर्वाध विद्युत आपूर्ति ही हमारा ध्येय: प्रद्युम्न सिंह तोमर

भोपाल. प्रदेश के हर बिजली उपभोक्ता को सतत एवं निर्वाध विद्युत आपूर्ति ही हमारी सरकार का ध्येय है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में हमारा विभाग लगातार उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण भी कर रहा है। इसी का परिणाम है कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल में प्राप्त शिकायतों के निराकरण में ऊर्जा विभाग अव्वल है। प्रदेश के घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को विगत वर्षों की तरह वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये लागू टैरिफ दरों में राहत देने के लिये बिजली कंपनियों को अनुमानित 24 हजार 420 करोड़ 8 लाख रूपये की सब्सिडी देने का निर्णय राज्य शासन द्वारा लिया गया है। यह सब्सिडी अटल गृह ज्योति योजना, अटल कृषि ज्योति योजना, टैरिफ सब्सिडी और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में दी जायेगी। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृहों द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में अब तक का सर्वाधिक 28627 मिलि‍यन यूनिट विद्युत उत्पादन कर नया रिकार्ड बनाया गया है। यह पावर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास का सर्वाधि‍क ताप विद्युत उत्पादन है। ताप विद्युत गृहों द्वारा विभिन्न मापदंडों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया गया। ताप विद्युत गृहों का इस दौरान प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) 60.3 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2019-20 के पश्चात् सर्वाधिक है। वित्तीय वर्ष 23-24 के दौरान 13 थर्मल इकाइयों ने लगातार 100 दिनों एवं अधिक सतत् व निर्बाध विद्युत उत्पादन किया, जिनमें से दो इकाइयों ने 200 दिनों से अधिक समय तक विद्युत उत्पादन किया। राज्य शासन के निर्णयानुसार मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अब उपभोक्ताओं को एक ही परिसर में पृथक-पृथक रहने पर एक से अधिक बिजली कनेक्शन प्रदान करने की सुविधा कुछ शर्तों के आधार पर कराई जा रही है। ऐसे आवेदक जो एक ही परिसर में निवास कर रहे हैं लेकिन अलग-अलग रहते हैं, तो उनके द्वारा अलग बिजली कनेक्शन का आवेदन करने पर उन्हें नवीन कनेक्शन दिया जा रहा है। प्रदेश में बिजली अधोसंरचना का लगातार विकास हो रहा है। वर्तमान में 33 के. वी. लाइंस 61 हजार 162 किलोमीटर हो गई है। 33 के.वी. लाइंस वर्ष 2003 में 29 हजार 70 किलोमीटर, वर्ष 2008 में 33 हजार 913 , वर्ष 2011 में 38 हजार 867, वर्ष 2013 में 41 हजार 528, वर्ष 2014 में 43 हजार 910 और वर्ष 2024 में 61 हजार 162 किलोमीटर हो गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में मार्च 2024 तक 3165 किलोमीटर 11 केव्ही लाइन का विस्तार किया गया है। यह क्रम लगातार जारी है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों के समर्पण, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता ने 210 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट को लगातार 300 दिन तक संचालित करने में सफलता हासिल की है। यह विद्युत यूनिट की स्थापना के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी तरह सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (एसएसटीपीपी खंडवा) के अभियंताओं व कार्मिकों ने एक बार फिर कमाल दिखाते हुए 660 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट नंबर 3 को 200 दिन तक संचालित करने में सफलता हासिल की है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिये अधोसंरचना निर्माण के उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। ट्रांसमिशन व्यवस्था मजबूत करने के लिये वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14 अति उच्चदाब उप केन्द्रों की स्थापना की गई है। साथ ही 26 अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत किये गये हैं। कुल 818.170 सर्किट किलोमीटर अति उच्चदाब लाइन का निर्माण भी किया गया है। यही नहीं 25 अतिरिक्त अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मर की स्थापना एवं 40 अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कर अति उच्चदाब उप केन्द्रों की क्षमता में 4630 एमव्हीए की वृद्धि भी की गई है। किसानों को शीघ्र स्थायी सिंचाई पंप कनेक्शन दिये जाने के उद्देश्य से स्वयं का ट्रांसफार्मर लगाये जाने की योजना लागू की गई है। योजना में किसान स्वयं अथवा समूह में निर्धारित मापदंड के अनुसार ट्रांसफार्मर स्थापित कर सकते हैं। योजना में वर्ष 2023-24 में एक लाख 30 हजार 303 ट्रांसफार्मर स्थापित किये जा चुके हैं। ऊर्जा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना अटल गृह ज्योति योजना में एक करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को और 26 लाख 59 हजार उपभोक्ताओं को अटल कृषि ज्योति योजना में लाभान्वित किया जा रहा है। अटल गृह ज्योति योजना में प्रदेश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ताओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है, जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है। अटल कृषि ज्योति योजना में 10 हार्स पॉवर तक के मीटर रहित स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रूपये प्रति हार्स पॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्स पॉवर से अधिक के मीटर रहित स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रूपये प्रति हार्स पॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से बिजली दी जा रही है। साथ ही 10 हार्स पॉवर तक के मीटरयुक्त स्थाई कृषि पंप कनेक्शन एवं अस्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को भी ऊर्जा प्रभार में रियायत दी गई है। विद्युत संबंधी विषयों के त्वरित निराकरण के लिए विभिन्न विभागों से समन्वय के लिये राज्य स्तरीय विद्युत अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है। समिति उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत उपभोग की प्रवृत्ति में सकारात्मक परिवर्तन करने और प्रभावी राजस्व प्रबंधन में सहयोग करेगी। इसके अतिरिक्त समिति विद्युत उपभोक्ताओं के संबंध में पृथक-पृथक शासकीय विभागों द्वारा संधारित जानकारी एकत्रित करेगी, जिसमें डाटा एनालिसिस के आधार पर सक्षम व समर्थ उपभोक्ताओं की पहचान की जा सकेगी। जिनके द्वारा जानबूझकर विद्युत बकाया का भुगतान नहीं किया जा रहा है अथवा अन्य पद्धतियों से विद्युत बिल अनियमित तरीके से कम किया जा रहा है, की पहचान करेगी। विद्युत चोरी पकडने एवं बकाया राशि की वसूली के दौरान विद्युत कार्मिकों के साथ अभद्र व्यवहार की स्थिति में त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कर सुरक्षा प्रदान करने में सहयोग करेगी। समिति शासकीय विभागों व शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों पर विद्युत कंपनी की बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करेगी। समिति अवैध कॉलोनियों सहित अन्य रहवासी क्षेत्रों में विद्युत चोरी की रोकथाम के लिये जागरूकता अभियान तथा विद्युत अधोसंरचना के विकास के लिये प्रभावी कार्रवाई भी करेगी। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई संबंधी, जले/खराब ट्रांसफार्मरों व विद्युत लाइन अवरोधों एवं गलत देयकों की शिकायतों को दर्ज कर समय-सीमा में निराकरण किया गया। जबलपुर, भोपाल एवं इन्दौर में स्थापित केन्द्रीयकृत 1912 कॉल सेंटर सेवा को सुदृढ़ किया गया है। जनवरी 2019 से मार्च 2024 तक विद्युत प्रदाय संबंधी 1 … Read more

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