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सत्र के शुरू होते ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बेरोजगार युवाओं के हक में एक बड़ा फैसला किया

हरियाणा हरियाणा विधानसभा का सत्र आज से शुरू हो चुका है। सत्र के शुरू होते ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बेरोजगार युवाओं के हक में एक बड़ा फैसला किया है। सरकार की तरफ से सीईटी पास उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी घोषणा की गई है। सदन में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय द्वारा अभिभाषण दिया गया। राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में बताया कि सीईटी पास करने वाले ऐसे युवा जिन्हें एक साल तक नौकरी नहीं मिली, उन्हें अगले दो साल तक 9 हजार मासिक मानदेय दिया जाएगा। हर महीने मिलेंगे 9000 रुपए ऐसे में सीईटी पास युवाओं के लिए सरकार द्वारा बड़ा निर्णय किया गया है, जो युवा सेट पास कर लेंगे। मगर उन्हें 1 साल में नौकरी नहीं मिली तो अगले 2 साल तक अपनी बुनियादी जरूरत को पूरा करने के लिए उन्हें 9 हजार रुपए का मासिक मानदेय दिया जाएगा। सरकार की इस नई घोषणा के अनुसार, अगर आप सीईटी की परीक्षा पास करते हैं और अगर 1 साल में आपको नौकरी नहीं मिलती है, तो अगले 2 साल तक हर महीने 9000 का मानदेय आपको मिल दिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा की , महंगाई भत्ता 239% से बढ़ाकर 246% हुआ !

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते (Dearness Allowance-DA) में बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह बढ़ोतरी उन केंद्रीय कर्मचारियों और स्वायत्त निकायों (Department of Public Enterprises) के कर्मचारियों के लिए लागू होगी जो 5वें और 6वें वेतन आयोग के अनुसार सैलरी मिल रही है। इस बारे में वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक उद्यम विभाग ने 7 नवंबर 2024 को एक ऑफिस मेमोरेंडर (Office Memorandum) जारी कर दिया है। 6वें वेतन आयोग के तहत DA की नई दरें 6th Pay Commssion के अनुसार सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता मौजूदा 239% से बढ़ाकर 246% कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू होगी। महंगाई भत्ते में सात फीसदी की बढ़ोतरी छठे वेतन आयोग के तहत की गई है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹43,000 है, तो पहले 239% DA के तहत उसे ₹1,02,770 मिलते थे। नई दर 246% के अनुसार अब उसका DA बढ़कर ₹1,05,780 हो जाएगा। यानी सैलरी में सीधे 3,000 रुपये मंथली बढ़ जाएंगे। 5वें वेतन आयोग के तहत DA की नई दरें 5वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन पाने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मौजूदा 443% से बढ़ाकर 455% कर दिया गया है। यह भी 1 जुलाई 2024 से लागू होगा। यानी डीए में सीधे 12 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। 7वें वेतन आयोग के तहत DA की दरें 7वें वेतन आयोग के तहत सैलरी पाने वाले केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (Dearness Relief) को 50% से बढ़ाकर 53% कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू हो चुकी है। महंगाई भत्ते का फायदा महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई की मार से राहत देने के लिए दिया जाता है। यह अर्बन, सेमी अर्बन और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले कर्मचारियों के अनुसार तय होता है। केंद्र सरकार महंगाई भत्ते की दरों को हर साल दो बार रिवाइज करती है—जनवरी और जुलाई में। इस बार के रिवीजन के जरिए 5वें और 6वें वेतन आयोग के तहत सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को डीए में बढ़ोतरी का फायदा मिलेगा।

खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर का करीबी अरश डल्ला कनाडा में गिरफ्तार

कनाडा कनाडा पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर अरशदीप सिंह गिल, जिसे अरश डल्ला के नाम से भी जाना जाता है, को गिरफ्तार किया है। अरश डल्ला को भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने आतंकवादी घोषित किया है, और वह मारे गए खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर का करीबी सहयोगी माना जाता है। अरश डल्ला की गिरफ्तारी से भारत और कनाडा के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों पर और असर पड़ने की संभावना है। डल्ला को कल कनाडा की एक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसके खिलाफ लगे आरोपों पर सुनवाई होगी। अरश डल्ला पर 28 अक्टूबर को ओंटारियो में हुई गोलीबारी से जुड़े मामले में आरोप लगाए गए हैं। इस घटना में उसे “जानबूझकर गोली चलाने” का आरोप लगा है। 29 अक्टूबर को, हल्टन रीजनल पुलिस सेवा (HRPS) ने बताया कि उन्होंने इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था, जो गोलीबारी की घटना के बाद एक अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से एक व्यक्ति को गैर-जानलेवा गोली लगने के बाद इलाज के लिए भर्ती किया गया था और बाद में उसे गुएल्फ़ के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। अरश डल्ला पर भारत में भी कई संगीन आरोप हैं। वह पंजाब में कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है, जिनमें हत्या, फिरौती, और अन्य हिंसक घटनाएँ शामिल हैं। NIA ने उसे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को बढ़ावा देने के आरोप में वांछित अपराधी घोषित किया था। भारत सरकार ने कनाडा से अरश डल्ला और अन्य खालिस्तान समर्थक अपराधियों को वापस सौंपने की मांग की है, ताकि उन पर भारत में कानूनी कार्रवाई की जा सके। अरश डल्ला की गिरफ्तारी से यह भी स्पष्ट होता है कि कनाडा में बसे भारतीय अपराधी और खालिस्तान समर्थक संगठन कानून के दायरे में आने लगे हैं।  

स्कूली छात्राओं में मासिक धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, पीरियड्स के दौरान मिलेगी राहत

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि “स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति” अब आधिकारिक तौर पर लागू हो चुकी है। इस नीति को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2 नवंबर, 2024 को अनुमोदित किया गया था, जो 10 अप्रैल, 2023 को न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसरण में है। नीति का उद्देश्य और मुख्य बिंदु इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य स्कूली छात्राओं में मासिक धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, जो अक्सर उनकी गतिशीलता और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने की क्षमता को प्रभावित करता है। इस नीति के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कियों को मासिक धर्म से संबंधित स्वच्छता सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म के साधनों तक पहुँच मिल सके। यह पहल मासिक धर्म अपशिष्ट के पर्यावरण के अनुकूल निपटान को भी प्रोत्साहित करेगी। कांग्रेस नेता की मुफ्त सैनिटरी पैड वितरण की मांग यह नीति उस जनहित याचिका (पीआईएल) के संदर्भ में भी है, जिसे कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल किया था। इस याचिका में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड वितरित करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ इस मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर को करेगी। केंद्र का विवरण: शौचालय और स्वच्छता किट वितरण केंद्र सरकार ने न्यायालय को बताया कि देश के 97.5% स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध हैं, जिसमें दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी जैसे राज्य 100% अनुपालन की स्थिति में हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर मासिक धर्म स्वच्छता किट के वितरण के लिए भी पहल शुरू की है, ताकि छात्राओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और व्यवहार को प्रोत्साहित किया जा सके।

जालंधर पुलिस ने हाल ही में एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया, युवाओं के भविष्य के लिए उठाया अहम कदम

जालंधर जालंधर पुलिस ने अपनी प्रमुख ‘सहयोग’ पहल के तहत हाल ही में एक व्यापक जागरूकता और स्वच्छता अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य युवा नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक जागरूक समाज में योगदान देने के लिए सशक्त बनाना है। युवा पुलिस ब्रिगेड (YPB) बनाने वाले 18 स्कूलों के 100 से अधिक युवा स्वयंसेवकों के नेतृत्व में, इस अभियान में ‘नशे को न कहें’, यातायात नियमों का पालन, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया, साथ ही जालंधर के पुलिस आयुक्त स्वप्न शर्मा आई.पी.एस के साथ एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया। अभियान के लिए प्रमुख मुद्दे और आवश्यकता नशीले पदार्थों के दुरुपयोग, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण क्षरण की बढ़ती चिंताएं सामुदायिक जागरूकता और कार्रवाई के महत्व को रेखांकित करती हैं, खासकर उन युवाओं के बीच जो स्थायी परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। युवाओं में जिम्मेदारी और नेतृत्व की भावना को बनाए रखने के लिए YPB पहल की शुरुआत की गई, जिससे उन्हें अपने समुदायों को सीधे प्रभावित करने वाले मुद्दों को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इस अभियान का उद्देश्य पुलिस आयुक्त के साथ पारदर्शी चर्चा के माध्यम से युवा नागरिकों के मन में इन मुद्दों के बारे में उठने वाले प्रश्नों और शंकाओं का समाधान करना था, जिससे विश्वास और सहयोग बढ़े।   योजना और क्रियान्वयन कार्यक्रम की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई थी ताकि सामाजिक चुनौतियों के प्रति समग्र दृष्टिकोण प्रदान किया जा सके। दिन की शुरूआत जागरूकता सत्रों से हुई, जहां पुलिस अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने छात्रों को नशीली दवाओं की लत के खतरों, यातायात नियमों का पालन करने के जीवन-रक्षक महत्व और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के बारे में शिक्षित किया। इसके बाद निर्दिष्ट सार्वजनिक क्षेत्रों में सामूहिक सफाई अभियान चलाया गया, जहां छात्रों ने कचरा संग्रहण और सौंदर्यीकरण के प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे ‘स्वच्छ और हरित समाज’ का संदेश फैला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जालंधर के पुलिस आयुक्त के साथ एक संवादात्मक सत्र था, जहां छात्र अपने प्रश्नों और चिंताओं पर खुलकर चर्चा कर सकते थे। इस संवाद का उद्देश्य आत्मविश्वास पैदा करना और पुलिस और युवाओं के बीच की खाई को खत्म करना था, जिससे युवा आवाज़ों के लिए एक सहायक वातावरण तैयार हो सके।

उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे युवक को राहत दी, कहा, प्रेम में एक दूसरे को चूमना स्वभाविक है

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट का कहना है कि प्रेम करने वाले युवक और युवती के बीच गले लगना और चूमना स्वभाविक सी बात है। हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे युवक को राहत दी है। खबर है कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए के तहत जारी आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने का निर्देश दिया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस आनंद वेंकटेश ने कहा, ‘IPC की धारा 354-A(1)(i) के तहत अपराध होने के लिए पुरुष की तरफ से शारीरिक संपर्क बनाना जरूरी है, जिसमें अस्वीकार्य और स्पष्ट यौन गतिविधियां शामिल है। किशोरावस्था में प्रेम प्रसंग में चल रहे दो लोगों के बीच गले लगना या चूमना स्वभाविक है। किसी भी तरह से यह IPC की धारा 354-A(1)(i) के तहत अपराध नहीं हो सकता।’ संथनगणेश की तरफ से एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उन्होंने ऑल वुमन पुलिस स्टेशन की तरफ से उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। यह FIR IPC की धारा 354-A(1)(i) के तहत दर्ज की गई थी। आरोप थे कि शिकायतकर्ता के साथ प्रेम संबंध में रहे याचिकाकर्ता ने उसे 13 नवंबर 2022 को एक जगह पर बुलाया था। आरोप लगाए गए कि जब दोनों बातचीत कर रहे थे, तब याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता को गले लगाया और चूम लिया। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अपने पैरेंट्स को इस बात की जानकारी दी और याचिकाकर्ता से शादी के लिए पूछा। जब याचिकाकर्ता ने शादी से इनकार कर दिया और दूरी बनाने लगा तो उसने शिकायत कर दी, जिसके चलते FIR दर्ज हो गई। कोर्ट ने कहा कि अगर FIR में दर्ज आरोपों को सच मान भी लिया जाए, तो याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। ऐसे में उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

डोनाल्ड ट्रंप कैबिनेट में शामिल होंगे भारतवंशी विवेक रामास्वामी, एलन मस्क के साथ संभालेंगे ये बड़ी जिम्मेदारी

वाशिंगटन अमेरिका की जनता ने डोनाल्ड ट्रंप को देश का अगला राष्ट्रपति चुना है. वह प्रंचड जीत के साथ चुनकर सत्ता में वापसी करने जा रहे हैं. अमेरिका को फिर से महान बनाने का नारा देने वाले ट्रंप की टीम भी लगभग तैयार है. ऐसे में ये कहना बिल्कुल अतिश्योक्ति नहीं होगी कि टीम में उनके सेनापति की भूमिका में अरबपति एलॉन मस्क नजर आने वाले हैं. टेस्ला के सीईओ मस्क ने जिस तरह से अमेरिकी चुनाव में खुलकर ट्रंप का समर्थन किया. देशभर में घूम-घूमकर उनके लिए वोट मांगे और अमेरिका को गर्त से निकालने के लिए ट्रंप को चुनने पर जोर दिया. अब उन्हीं मस्क की अगले साल से ट्रंप की कैबिनेट के कई बड़े फैसलों में बड़ी होने वाली है. लेकिन सवाल यही है कि मस्क पर ट्रंप को इतना यकीन क्यों हैं और वह उनके लिए जरूरी क्यों बन गए हैं? ट्रंप ने मस्क को क्यों चुना? राजनीति में एंट्री से पहले डोनाल्ड ट्रंप हार्डकोर बिजनेसमैन रहे हैं. अमेरिका सहित दुनियाभर में उनका बिजनेस फैला हुआ है. वह जब पहली बार 2016 में राष्ट्रपति बने थे तो लगभग सभी ने कहा था कि एक कारोबारी अमेरिका का राष्ट्रपति बन गया है. ऐसे में ट्रंप को अरबपति कारोबारी एलन मस्क से बहुत उम्मीदें हैं. वह एलॉन से बहुत प्रभावित भी हैं और उन्हें लगता है कि कारोबारी पॉलिटिक्स में अच्छा काम कर सकते हैं. ऐसे में मस्क और ट्रंप के बीच का ये कारोबारी कनेक्शन उनके बॉन्ड को मजबूत करता है. ट्रंप अमेरिकी राजनीति में बदलाव चाहते हैं. यही सोचकर उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशियंसी (DOGE) की कमान एलॉन मस्क को सौंपी है. यह विभाग ब्यूरोक्रेसी को क्लीन करने का काम करेगा. ट्रंप ने इस डिपार्टमेंट को इस समय का द मैनहट्टन प्रोजेक्ट बताते हुए कहा कि इससे चार जुलाई 2026 तक पूरी संघीय ब्यूरोक्रेसी में व्यापक बदलाव आएंगे. उन्होंने कहा कि इस सरकार में धरातल पर काम अधिक होगा और नौकरशाही कम होगी. यह देश की आजादी की 250वीं वर्षगांठ पर अमेरिका के लिए बेशकीमती तोहफा होगा. मुझे यकीन हैं कि एलॉन मस्क और विवेक रामास्वामी इसमें पूरी तरह से कामयाब होंगे. कैसे मस्क ने ट्विटर को घाटे से फायदे का सौदा बनाया? ने जब 2022 में 44 अरब डॉलर में ट्विटर खरीदा था तो सभी ने इसे घाटे का सौदा बताया था. लेकिन मस्क ने बहुत जल्द इसे फायदे के सौदे में तब्दील कर दिया. इसके पीछे कारण था ट्विटर का सीईओ बनने के बाद उनके द्वारा लिए गए बड़े फैसले. मस्क ने ट्विटर खरीदने के बाद ही कंपनी के चार बड़े अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था, जिसमें सीईओ पराग अग्रवाल भी शामिल थे. बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भी छंटनी की गई. मस्क ने कई ब्लॉक अकाउंट अनब्लॉक किए जिनमें ट्रंप का ट्विटर अकाउंट भी शामिल था. इसके साथ ही उन्होंने ब्लू सब्सक्रिप्शन सर्विस भी शुरू की. शुरुआत में कहा जा रहा था कि इस पेड सब्सक्रिप्शन का फॉर्मूला औंधे मुंह गिरेगा. कोई भी यूजर पैसे देकर ब्लूटिक नहीं खरीदेगा. लेकिन पेड़ सब्सक्रिप्शन होने के बावजूद लोगों ने इसे हाथों हाथ लिया. इस तरह मस्क की इस अलकमिस्ट छवि से ट्रंप बहुत प्रभावित हैं. मस्क जो छू लेते हैं उसे सोना बना देते हैं! एलॉन मस्क के बारे में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में एक कहावत मशहूर है कि वह जो भी छू लेते हैं, वह सोना बन जाती है. ट्विटर यानी X की सफलता इसका बड़ा उदाहरण तो है ही. साथ ही इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला और रॉकेट कंपनी स्पेस एक्स जैसी कंपनियों की सफलता भी इसका उदाहरण हैं. इन्हीं कामयाब बिजनेस के दम पर उनकी नेटवर्थ में भारी उछाल आई है. मस्क की नेटवर्थ 314 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. इसी चमत्कार की शायद ट्रंप भी उम्मीद कर रहे हैं. मस्क की AI कंपनी की सफलता ने रचा इतिहास Nvidia के सीईओ जेनसेन हुआंग ने हाल ही में एलॉन मस्क की जमकर तारीफ की थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मस्क एक बेहतरीन लीडर हैं. उन्होंने कहा कि मस्क और उनकी एआई कंपनी xAI ने बेहतरीन काम किया है. जहां तक मुझे पता है, इस दुनिया में सिर्फ एक शख्स है, जो यह कर सकता है. इंजीनियरिंग की समझ से लेकर और बड़े-बड़े सिस्टम के कंस्ट्रक्शन तक एलॉन को हर चीज में विशेषज्ञता हासिल है. उन्होंने कहा कि 100,000 Nvidia जीपीयू के कलस्टर से बना सुपरकंप्यूटर Colossus को मस्क ने बेहद कम समय में तैयार कर दिया. यह पूरा प्रोजेक्ट 122 दिनों में पूरा हुआ. इससे साफ पता चलता है कि मस्क से ट्रंप ही नहीं बल्कि अमेरिका को पूरी उम्मीदें हैं और वह ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट के एजेंडे में बिल्कुल फिट बैठते हैं.  

दोषी-आरोपी है इसलिए घर नहीं गिरा सकते… बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली अपराधियों पर बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुना रहा है। जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ ने अपनी टिप्पणी में कई अहम बातें कही हैं। कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर ऐक्शन कानून नहीं होने का भय दिखाता है। कोर्ट बुलडोजर ऐक्शन पर पूरे देश के लिए गाइडलाइन जारी करेगी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। पिछली सुनवाई में, अदालत ने अपराधों के आरोपियों को निशाना बनाने वाली अवैध विध्वंस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की कार्रवाई का एक भी उदाहरण संविधान की भावना के खिलाफ है। साथ ही इस तरह के मामलों में अखिल भारतीय दिशा-निर्देश बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें ➤कार्यपालिका किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर सकती। केवल आरोप के आधार पर यदि कार्यपालिका किसी व्यक्ति का घर तोड़ती है,तो यह कानून के शासन के बुनियादी सिद्धांत पर प्रहार करेगा। कार्यपालिका न्यायाधीश नहीं बन सकती और न ही किसी आरोपी की संपत्ति को ध्वस्त करने का निर्णय ले सकती है ➤कार्यपालिका द्वारा की गई ज्यादतियों से कानून की कड़ी शक्ति से निपटा जाना चाहिए। हमारे संवैधानिक आदर्श ऐसे किसी भी शक्ति के दुरुपयोग की अनुमति नहीं देते। यह कानून के न्यायालय द्वारा सहन नहीं किया जा सकता। ➤जब किसी विशेष संरचना को अचानक से ध्वस्त करने के लिए चुना जाता है और उसी प्रकार की बाकी संपत्तियों को नहीं छुआ जाता, तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि असली उद्देश्य कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि बिना सुनवाई के दंडित करना था। ➤आवास का अधिकार अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। यदि लोगों को उनके घरों से बेदखल करना पड़े,तो अधिकारियों को यह साबित करना चाहिए कि ध्वस्तीकरण ही एकमात्र उपलब्ध विकल्प है। घर के एक हिस्से को ध्वस्त करने के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए। ➤रात के समय महिलाओं और बच्चों को सड़कों पर घसीटते देखना सुखद दृश्य नहीं है। बिना पूर्व कारण बताओ नोटिस के कोई ध्वस्तीकरण नहीं किया जाना चाहिए, जो या तो स्थानीय नगरपालिका कानूनों में दिए गए समय के अनुसार या सेवा की तारीख से 15 दिनों के भीतर (जो भी बाद में हो) प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह नोटिस पंजीकृत डाक के माध्यम से मालिक को भेजा जाएगा और संरचना के बाहरी हिस्से पर भी चिपकाया जाएगा। नोटिस में अवैध निर्माण की प्रकृति, विशेष उल्लंघन का विवरण और डेमोलेशन के आधार शामिल होने चाहिए। ➤अथॉरिटी को आरोपी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देना होगा। ऐसी बैठक के विवरण को रिकॉर्ड किया जाएगा। प्राधिकारी के अंतिम आदेश में नोटिसधारी के पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए। डेमोलशन की प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्डिंग किया जाएगा। डेमोलेशन रिपोर्ट को एक डिजिटल पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। ➤किसी भी निर्देश के उल्लंघन से अवमानना कार्यवाही शुरू की जाएगी। अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए कि यदि ध्वस्तीकरण को निर्देशों के उल्लंघन में पाया जाता है, तो उन्हें ध्वस्त की गई संपत्ति की पुनर्स्थापना के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अधिकारियों को व्यक्तिगत खर्च पर जवाबदेह ठहराया जाएगा, साथ ही हर्जाने का भुगतान भी करना होगा। मनमाने तरीके से घर नहीं गिरा सकते- सुप्रीम कोर्ट जस्टिस गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने फैसला पढ़ते हुए साफ कहा कि प्रशासन मनमाने ढंग से किसी का घर नहीं गिरा सकते। अगर ऐसा कोई भी अधिकारी किसी का भी घर मनमाने या अपनी मर्जी से गिराता है, तो उसपर कार्यवाई भी होनी चाहिए। पीठ ने आगे कहा कि अगर यह पाया गया कि घर अवैध तरीके से गिराया गया है तो, उसके लिए मुआवजा भी मिलेगा। बिना किसी का पक्ष सुने कार्यवाही न की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राशसन जज नहीं बन सकता। अपराध की सजा पूरे परिवार को नहीं- सुप्रीम कोर्ट बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आप आरोपी के कारण उसके पूरे परिवार को परेशान नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हमारा यह फैसला किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि कार्रवाई के लिए नोटिस डीएम को दी जाए। नोटिस में यह भी बताएं कि यह मकान कैसे अवैध है या कौन सा हिस्सा अवैध है। बेंच ने कहा कि 3 महीने में पोर्टल बनाकर नोटिस साझा किए जाएं। यही नहीं, अवैध निर्माण को गिराने के लिए पहले से बताना जरूरी है। कोर्ट न कहा कि हमने आर्टिकल 142 के तहत फैसला सुनाया है। हमने संविधान के तहत गारंटीकृत अधिकारों पर विचार किया है जो व्यक्तियों को मनमाने राज्य कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करते हैं। कानून का शासन यह सुनिश्चित करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है कि व्यक्तियों को पता हो कि संपत्ति मनमाने ढंग से नहीं ली जाएगी। दोष सिद्ध करने के लिए पहले से फैसला मत लें- जस्टिस गवई बुलडोजर ऐक्शन पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस गवई ने कहा कि घर होना एक ऐसी चाहत है जो कभी नहीं मिटती,हर परिवार का सपना होता है एक घर। उन्होंने आगे कहा कि एक महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या कार्यपालिका को सजा के प्रमुख रूप में आश्रय छीनने की अनुमति दी जानी चाहिए। जस्टिस गवई ने आगे कहा कि कानून का शासन लोकतांत्रिक सरकार की नींव है। मसला आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्षता का है,जो यह कहती है कि कानूनी प्रक्रिया को आरोपी का दोष सिद्ध करने के लिए पहले से ही निर्णय नहीं करना चाहिए।   क्या हो सकता है क्या नहीं?     सिर्फ इसलिए घर नहीं गिराया जा सकता क्योंकि कोई व्यक्ति आरोपी है. राज्य आरोपी या दोषी के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकता.     बुलडोजर एक्शन सामूहिक दंड देने के जैसा है, जिसकी संविधान में अनुमति नहीं है.     निष्पक्ष सुनवाई के बिना किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.     कानून के शासन, कानूनी व्यवस्था में निष्पक्षता पर विचार करना होगा.     कानून का शासन मनमाने विवेक की अनुमति नहीं देता है.     आरोपी और यहां तक ​​कि दोषियों को भी आपराधिक कानून में सुरक्षा … Read more

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने बिगड़ते वायु प्रदूषण के कारण 11 मिलियन बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में चिंता जताई

नई दिल्ली वायु प्रदूषण से भारत नहीं पाकिस्तान की भी हालात खराब है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने बिगड़ते वायु प्रदूषण के कारण पाकिस्तान के पूर्वी पंजाब प्रांत में 11 मिलियन बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में चिंता जताई है। पिछले महीने से, पंजाब के 17 अन्य जिलों के साथ-साथ पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर में जहरीला धुआं छाया हुआ है। हालांकि स्विस ग्रुप IQAir की लाइव रेटिंग के अनुसार, लाहौर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मंगलवार को थोड़ा सुधरकर 1000 अंक के नीचे आ गया, लेकिन अभी भी 856 पर खतरनाक बना हुआ है, जो बहुत ज्यादा है। यूनिसेफ ने दी चेतावनी पाकिस्तान में यूनिसेफ के प्रतिनिधि अब्दुल्ला फादिल ने पंजाब में खतरनाक हवा में सांस लेने वाले लगभग 11 मिलियन बच्चों के गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की चेतावनी दी। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से बिगड़ते वायु प्रदूषण को रोकने और इन बच्चों की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। अब्दुल्ला फादिल ने बयान में कहा, पहले, पाकिस्तान में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 12 प्रतिशत मौतें वायु प्रदूषण के कारण होती थीं।  

डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद सऊदी अरब में जुटे 50 से ज्‍यादा मुस्लिम देशों के नेता

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत चुके हैं। उनका शपथ ग्रहण समारोह 20 जनवरी 2025 को होगा। इसके बाद वह आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति पद की शक्ति हासिल कर पाएंगे। मगर, इससे पहले ही खाड़ी क्षेत्र के इस्लामिक देशों में हलचल तेज हो गई है। खाड़ी में जारी संघर्ष के बीच सोमवार को सऊदी अरब में एक महत्वपूर्ण अरब-इस्लामिक सम्मेलन किया गया। इसमें 50 से ज्यादा देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य एजेंडा सभी इस्लामिक देशों को इजरायल के खिलाफ एकजुट करना था। सऊदी अरब समेत कई देशों ने इजरायल के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की मांग की। ईरान के राष्ट्रपति सम्मेलन में नहीं पहुंचे हालांकि, इस बैठक में शामिल होने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान नहीं पहुंचे। उन्होंने इसकी वजह अपनी व्यस्तता को बताया है। इस सम्मेलन में सभी इस्लामिक देशों ने पहली बार लेबनान, गाजा, फिलिस्तीन में इजरायल की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई है। सभी देशों ने इजरायल के हमलों को तुरंत रोकने की अपील भी की है। सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दो टूक कहा कि फिलिस्तीनियों के जनसंहार की सऊदी अरब निंदा करता है। इजरायल को तुरंत अपनी कार्रवाई रोक देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि फिलीस्तीन स्वतंत्र देश है और उसको इंडिपेंडेंट कंट्री का दर्जा मिलना चाहिए। सभी मुस्लिम देश एकजुट हों- तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन सम्मेलन ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने गाजा में हो रहे ‘नरसंहार’ की बात उठाई। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों को एकजुट होकर जिस तरह से इसकी आलोचना करनी चाहिए, वैसी नहीं की जा रही है। गाजा की वर्तमान दशा इसी का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश पूरी तरह से इजरायल का समर्थन कर रहे हैं। सम्मेलन में 33 सूत्रीय मसौदा पेश करते हुए फिलिस्तीन के प्रति समर्थन जाहिर किया गया है। साथ ही लेबनान, ईरान, इराक और सीरिया की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की गई। सम्मेलन में येरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद के मुद्दा पर भी चर्चा हुई। मुस्लिम नेताओं ने आरोप लगाया कि अल अक्सा मस्जिद की पवित्रता का इजरायल बार-बार उल्लंघन कर रहा है। इसके अलावा, इजरायल-गाजा संघर्ष खत्म करवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से फलस्तीन की समस्याओं का समाधान करने पर भी जोर दिया गया।

पलवल के पास जिला नागरिक अस्पताल के समीप पीएनजी पाइपलाइन फटने से दो दुकानें में लगी आग, एक की मौत

पलवल पलवल के पास जिला नागरिक अस्पताल के समीप पीएनजी पाइपलाइन फटने से दो दुकानें में आग लग गई। हादसे में चाय की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि दुकानों में रखा सामान जलकर राख हो गया। मृतक की पहचान शिव विहार कालोनी निवासी हरी सिंघला के रूप में हुई हरी से चाय की छोटी सी दुकान खोल रखी थी घटना के समय वह गैस चूल्हे पर चाय बना रहते थे। दुकान के आगे से ही पाइप लाइन जा रही है। रिसाव के बाद पाइप लाइन से निकली गैस से तेजी से फैली और गैस चूल्हे की आग से आग धधक उठी। हरी बुरी तरह से झुलस गए। अन्य दुकानदार आग लगने पर वहां से भाग खड़े हुए। मौके पर दमकल विभाग की गाड़ी ने आग बुझा दी।

झुहाई शहर में एक ड्राइवर द्वारा भीड़ को टक्कर मारने के बाद 35 लोगों की मौत, 43 अन्य घायल

बीजिंग चीन के दक्षिणी शहर झुहाई में स्पोर्ट्स सेंटर के बाहर लोगों के समूह को कार ने टक्कर मार दी, जिससे 35 लोगों की मौत हो गई और 43 अन्य घायल हो गए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के झुहाई शहर में कार की टक्कर में घायल हुए लोगों के इलाज के लिए हरसंभव प्रयास करने का वादा किया है। पुलिस का कहना है कि झुहाई शहर में एक ड्राइवर द्वारा भीड़ को टक्कर मारने के बाद 35 लोगों की मौत हो गई और 43 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने सोमवार को बताया कि 62 वर्षीय चालक को हिरासत में लिया गया है। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह हमला था या दुर्घटना। किसी कारण का उल्लेख नहीं किया गया और पुलिस ने कहा कि जांच जारी है। सोमवार रात को हुई इस घटना पर कड़ी सेंसरशिप लगाई जा रही है, क्योंकि झुहाई एयरशो मंगलवार को शुरू हुआ था। पुलिस ने व्यक्ति की पहचान केवल उसके पारिवारिक नाम फैन से की, जो चीनी अधिकारियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रथा के अनुरूप है। पुलिस के बयान में कहा गया है कि वाहन ने सोमवार शाम को “कई” पैदल यात्रियों को टक्कर मार दी।

लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आईटी खर्च 2025 में 160 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा

नई दिल्ली भारत का आईटी खर्च आने वाले समय में तेजी से बढ़ सकता है। मंगलवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आईटी खर्च 2025 में 160 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2024 से 11.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। गार्टनर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एप्लीकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सॉफ्टवेयर मार्केट दोनों के बढ़ने के कारण, भारत में सॉफ्टवेयर खर्च में सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर दर्ज होने का अनुमान है, जो 2025 में 17 प्रतिशत बढ़ जाएगी। गार्टनर के वीपी एनालिस्ट नवीन मिश्रा ने कहा, “2025 में, भारतीय मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) प्रारंभिक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट परियोजनाओं से अलग जनरेटिव एआई (जेनएआई) के लिए बजट आवंटित करना शुरू कर देंगे।” उन्होंने कहा, “जेनएआई पर खर्च बढ़ेगा, लेकिन भारतीय मुख्य सूचना अधिकारियों की इसकी क्षमताओं को लेकर अपेक्षाएं कम हो जाएंगी।” इसके अलावा, भारतीय सीआईओ 2024 की तुलना में 2025 में साइबर सुरक्षा, बिजनेस इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसी टेक्नोलॉजी पर खर्च करने में यकीन रखेंगे। कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट में जेनएआई-इनेबल्ड ऑफरिंग का प्राइस प्रीमियम, ईमेल-ऑथरिंग और एनालिटिक प्लेटफॉर्म सॉफ्टवेयर से जुड़े खर्च को बढ़ाएंगे, जिससे इस सेगमेंट में तेजी आएगी। वर्ष 2025 तक जेनएआई कैपेबिलिटी वाले 50 प्रतिशत से अधिक एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर प्राइस प्रीमियम से जुड़े होंगे। प्राइसिंग ऑप्शन को लेकर भी 2025 तक बढ़ोतरी जारी रहेगी, क्योंकि जेनएआई प्रीमियम को लेकर खरीदार अपनी इच्छा जाहिर कर रहे हैं। वैश्विक सेवा बाजार में खर्च को लेकर सतर्कता, आर्थिक अनिश्चितता और उच्च पूंजीगत लागतों के बावजूद भारत में आईटी सेवाओं का खर्च 2025 में 11.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार “क्लाउड, एप्लिकेशन और परामर्श से जुड़ी सेवाओं में मजबूती आएगी। इसके साथ ही, 2025 (और उसके बाद) में श्रम उत्पादकता को बेहतर करने पर ध्यान रहेगा।” भारत में डेटा सेंटर सिस्टम पर खर्च 2025 में कुल 4.7 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंटीग्रेशन के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर उद्यमों की आवश्यकता से जुड़ा है।

नवंबर में भी उत्तराखंड में पारा सामान्य से चार डिग्री अधिक

देहरादून. प्रदेशभर में वर्षा न होने से मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया जा रहा है, जिससे नवंबर के पहले पखवाड़े में भी सर्दी का एहसास नहीं हो रहा है। दून और ऊधमसिंह नगर का न्यूनतम तापमान सोमवार को सामान्य से चार डिग्री अधिक क्रमश: 16.2 और 16.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मुक्तेश्वर और टिहरी जैसे पहाड़ी क्षेत्रों का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस अधिक बना रहा। इससे इन क्षेत्रों में जितनी ठंड होनी चाहिए, उसका इस बार एहसास नहीं हो रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले चार दिनों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। मैदानी क्षेत्र देहरादून, रुड़की, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में सुबह के समय कुहासा व धुंध छाए रहने की संभावना है। दोपहर को पहाड़ी क्षेत्रों में चटख धूप खिलने का अनुमान है। दून का अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस अधिक 27.8 व न्यूनतम सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक 16.1 रहा। तीन अक्टूबर को लौटा था मानसून, तब से वर्षा नहीं हुई इस बार तीन अक्टूबर को मानसून के उत्तराखंड से विदा होने के बाद अभी तक मैदानी क्षेत्रों में वर्षा नहीं हुई है, जिससे तापमान अब भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार दून समेत मैदानी क्षेत्रों में सुबह कुहासा व धुंध छाने के आसार हैं। अन्य जिलों में मौसम शुष्क बना रह सकता है। तापमान में कहीं-कहीं मामूली गिरावट के आसार हैं। फिलहाल प्रदेश में वर्षा के आसार नहीं हैं। सर्द मौसम आ रहा है, शीत लहर से बचाव को अभी से कर लें तैयारी स्वास्थ्य विभाग की मासिक बैठक में सीएमओ डा. मनोज शर्मा ने कहा कि सर्द मौसम में शीत लहर से बचाव के लिए अस्पतालों में अभी से पर्याप्त इंतजाम कर लें। एसीएमओ डा. राजेश आर्या ने संस्थागत प्रसव बढ़ाने, जननी सुरक्षा योजना का लाभार्थियों को लाभ देने के निर्देश दिए। सोमवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डा. शर्मा ने कहा कि कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए नीतिगत तरीके से कार्य किए जाएं। उन्होंने अधीनस्थों को सभी अस्पतालों का स्थलीय निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए। इससे पूर्व बैठक में परिवार नियोजन की अस्थायी व स्थायी विधियों पर व्यापक चर्चा हुई। एसीएमओ डा. आर्या ने कहा कि टीबी के लक्षण वाले व्यक्तियों के बलगम की जांच को प्राथमिकता से किया जाए। निक्षय मित्र की ओर से टीबी रोगियों को गोद लेकर उन्हें पोषण किट दें। हैपेटाइटिस बी, सी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अस्पताल में पर्याप्त दवाइयां हैं। एचआइवी एड्स की रोकथाम के लिए जांच व इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए। कहा कि सर्दी के मौसम की शुरुआत हो गई है। शीत लहर चलने से पहले ही अस्पतालों के प्रसव कक्ष, इमरजेंसी व वार्डों में हीटर व ब्लोवर लगाएं और कंबलों की व्यवस्था की जाए। जिन अस्पतालों में रैन बसेरा बने हैं, वहां तीमारदारों की सुविधाओं का भी ध्यान रखें। बैठक में एसीएमओ डा. हरेंद्र मलिक, डा. एसपी सिंह के खटीमा नागरिक अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डा. बीपी सिंह, सितारगंज से संदीप कौर, जसपुर के डा. धीरेंद्र गहलोत, बाजपुर के डा. पीडी गुप्ता, काशीपुर के डा. राजीव पुनेठा, रुद्रपुर के चिकित्साधिकारी डा. उदय शंकर आदि थे।

फर्जी कॉल में हो रही बढ़ोतरी, TRAI ने उठाय बड़ा कदम, 1.77 करोड़ Sim Cards को किया बंद

नई दिल्ली सरकारी टेलीकॉम विभाग अब फर्जी कॉल को लेकर अलर्ट मोड़ में नजर आ रहा है। दरअसल विभाग द्वारा हर दिन तकरीबन 1.35 करोड़ फर्जी कॉल्स ब्लॉक किए जा रहे हैं। हालांकि इसके बाबजूद भी साइबर ठग फ्रॉड के नए-नए तरीके निकल रहे हैं। इसी को देखते हुए अब टेलीकॉम विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए 1.77 करोड़ Sim Cards को ब्लॉक कर दिया है। यानी अब ये Sim Cards कॉल या मैसेज नहीं कर सकेंगे। दरअसल विभाग ने जिन सिम कार्ड्स को ब्लॉक किया है। इन नंबरों का उपयोग फर्जी कॉल करने के लिए किया जा रहा था। इन नंबरों से सायबर ठग लोगों को निशाना बना रहे थे। जिसे देखते हुए विभाग द्वारा यह बड़ा कदम उठाया गया है और टेलीकॉम विभाग ने TRAI के साथ मिलकर इन नंबरों को ब्लॉक किया है। 1.35 करोड़ फर्जी कॉल्स को ब्लॉक किया दरअसल पिछले महीने ट्राई ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया था, नए नियमों के मुताबिक अब ऑपरेटरों को खुद ही मार्केटिंग और फर्जी कॉल्स को रोकना होगा। ऐसे में इन नए नियमों से कॉलर की व्हाइटलिस्टिंग की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। वहीं ट्राई के मुताबिक लोगों के द्वारा की गई शिकायतों को देखते हुए विभाग ने लगभग 1.35 करोड़ फर्जी कॉल्स को ब्लॉक किया हैं। इसके साथ ही लगभग 1.77 करोड़ मोबाइल नंबर को बंद कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो महज 5 दिनों में लगभग 7 करोड़ कॉल्स को विभाग द्वारा रोका गया हैं। एक बार फिर टेलीकॉम विभाग ने सख्ती दिखाई वहीं विभाग ने आगे और भी ज्यादा सख्ती करने के संदेश दिए हैं। टेलीकॉम विभाग अब फर्जी कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए कड़ी करवाई कर रहा है। इससे पहले भी विभाग द्वारा लाखों सिम कार्ड ब्लॉक किए गए थे। वहीं अब एक बार फिर विभाग ने सख्ती दिखाई है। दरअसल हाल ही में संचार विभाग ने एक बयान दिया था और कहा था कि ‘बैंकों और पेमेंट वॉलेट की तरफ से लगभग 11 लाख अकाउंट को फ्रीज किया गया है। वहीं आने वाले समय में और भी सिम कार्ड्स को ब्लॉक किए जाएंगे। अभी सिर्फ यह शुरुआत है।’ डेली ब्लॉक हो रहे 1.53 करोड़ फर्जी कॉल दूरसंचार विभाग (DoT) ने अपने आधिकारिक X हैंडल से जानकारी शेयर करते हुए कहा कि 1.35 करोड़ फर्जी कॉल रोज ब्लॉक किए जा रहे हैं। वहीं, फर्जी टेलीमार्केटिंग कॉल करने वाले 1.77 करोड़ मोबाइल नंबर बंद कर दिए हैं। फर्जी कॉल करने में इस्तेमाल किए जाने वाले 14 से 15 लाख मोबाइल फोन को भी ट्रेस किया गया है। दूरसंचार विभाग ने बताया कि यूजर्स की परेशानी को समझते हुए पिछले 5 दिन में डेली 1.35 करोड़ फर्जी कॉल्स ब्लॉक किए गए हैं। इसका मतलब है कि सरकार ने करीब 7 करोड़ कॉल्स को ब्लॉक किया है। इसके अलावा दूरसंचार विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 1.77 करोड़ मोबाइल नंबर बंद किए गए हैं। यही नहीं, दूरसंचार विभाग ने चोरी हो चुके 14 से 15 लाख मोबाइल नंबर को भी बंद कर दिया है। DoT ने बताया कि यह तो बस शुरुआत है। टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में कई तरह के फायदे लेकर आई है लेकिन कई लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। यही कारण है कि टेक्नोलॉजी के लिए रेगुलेटरी सिस्टम को लाया गया है। पहले भी लाखों मोबाइल नंबर हो चुके ब्लॉक पहले भी DoT ने करोड़ों सिम कार्ड को ब्लॉक करने का काम किया है। दूरसंचार विभाग ने लोगों के मोबाइल पर आने वाले फर्जी कॉल्स को रोकने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब यूजर्स को केवल व्हाइटलिस्ट किए गए टेलीमार्केटिंग कॉल्स ही आएंगे। साथ ही, मैसेज में URL या APK लिंक होने पर उसे नेटवर्क लेवल पर ही ब्लॉक कर दिया जाएगा। हालांकि, अगर, मैसेज व्हाइटलिस्टेड है, तो उसे फर्जी कॉल्स नहीं समझा जाएगा।

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