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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की पांच दिन की यात्रा पर जाएंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बार फिर विदेश यात्रा प्रस्तावित है. वे 5 दिन में 3 देशों की यात्रा करेंगे. पीएम मोदी सबसे पहले साइप्रस जाएंगे. वहां दो दिन (15-16 जून) विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. उसके बाद कनाडा पहुंचेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देंगे. कनाडा में भी पीएम मोदी की दो दिन (16-17 जून) की यात्रा है. पीएम मोदी 18 जून को क्रोएशिया जाएंगे और 19 जून को भारत लौट आएंगे. जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी 15 से 19 जून तक विदेश यात्रा पर रहेंगे और साइप्रस गणराज्य, कनाडा और क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा करेंगे. यह दौरा तीन देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और यूरोपीय संघ और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को और ज्यादा सक्रिय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की पांच दिन की यात्रा पर जाएंगे। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी आज साइप्रस की आधिकारिक यात्रा पर जायेंगे। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की दो दशक में साइप्रस की यह पहली यात्रा होगी।  निकोसिया में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस के साथ वार्ता करेंगे और लिमासोल में व्यापार जगत के नेताओं को संबोधित करेंगे। इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने और भूमध्यसागरीय क्षेत्र और यूरोपीय संघ के साथ भारत की भागीदारी को मजबूत करने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को मज़बूती मिलेगी।  साइप्रस यात्रा: दो दशक बाद भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 15-16 जून को साइप्रस की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे. यह पिछले दो दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की साइप्रस की पहली यात्रा होगी. निकोसिया में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और लिमासोल में व्यापार जगत के नेताओं को संबोधित करेंगे. यह यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का संदेश देगी और मेडिटेरेनियन क्षेत्र और यूरोपीय संघ के साथ भारत की साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में सहयोग बढ़ाएगी. कनाडा यात्रा: PM मोदी छठी बार G-7 समिट में होंगे शामिल यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनाडा पहुंचेंगे. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर पीएम मोदी 16-17 जून को कनानास्किस में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री मोदी लगातार छठी बार G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी G-7 देशों, आमंत्रित आउटरीच देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार, विशेषकर AI-ऊर्जा संबंध, और क्वांटम तकनीक से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे. प्रधानमंत्री इस दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे. क्रोएशिया यात्रा: भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे. क्रोएशिया गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रे प्लेंकोविच के निमंत्रण पर भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी. प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष प्लेंकोविच के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलानोविच से भेंट करेंगे. यह यात्रा भारत की यूरोपीय संघ के साझेदार देशों के साथ संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगी. यात्रा के दूसरे चरण में, श्री मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 16 जून को कनाडा जाएंगे। यह दौरा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर हो रहा है। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री जी-7 देशों के नेताओं, अन्य आमंत्रित आउटरीच देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), सहित महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। श्री मोदी शिखर सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।     यात्रा के अंतिम चरण में, प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली यात्रा होगी, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। प्रधानमंत्री मोदी क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और क्रोएशिया के राष्ट्रपति ज़ोरान मिलनोविच से मुलाकात करेंगे। क्रोएशिया की यात्रा यूरोपीय संघ में भागीदारों के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगी। क्रोएशिया यात्रा: 18 जून यात्रा के अंतिम चरण में, पीएम मोदी 18 जून को क्रोएशिया पहुंचेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगी। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में पीएम मोदी उनके साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और राष्ट्रपति जोरान मिलानोविच से भी मुलाकात करेंगे। क्रोएशिया की यात्रा भारत के यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। क्रोएशिया, अपनी समुद्री सुविधाओं और एड्रियाटिक सागर पर बंदरगाहों के कारण, IMEC परियोजनाओं के लिए आकर्षक है। यह यात्रा व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी। सरकारी बयान के अनुसार, पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान भारत और क्रोएशिया के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। भारत और क्रोएशिया के बीच पारंपरिक रूप से सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग और लोगों से लोगों के संपर्क में वृद्धि हुई है।  

ईरान-इज़राइल तनाव पर जताई चिंता, दोनों देश ‘संयम और समझदारी’ से लें काम: पोप लियो

ईरान पोप लियो 14वें (Pope Leo XIV) ने ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई है और दोनों देशों से संयम और समझदारी से काम लेने की अपील की है। यह उनकी पांच हफ्ते के कार्यकाल के दौरान शांति के लिए अब तक की सबसे सशक्त अपील मानी जा रही है। सेंट पीटर्स बेसिलिका (St. Peter’s Basilica) में आयोजित एक जुबली समारोह में बोलते हुए पोप लियो ने कहा, “इतने नाजुक समय में, मैं ज़िम्मेदारी और विवेक की ओर लौटने की अपील करता हूं।” उन्होंने कहा कि इस संकट के समय दुनिया को परमाणु हथियारों की धमकी से मुक्त एक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने की ज़रूरत है और इसके लिए सभी देशों को ‘सम्मानजनक संवाद’ और ‘ईमानदार प्रयास’ करने होंगे।   पोप ने ज़ोर देते हुए कहा कि “एक स्थायी शांति केवल न्याय, भाईचारे और साझा भलाई की बुनियाद पर ही बन सकती है। कोई भी देश किसी अन्य के अस्तित्व को कभी भी खतरे में नहीं डालना चाहिए।” पोप लियो ने सभी देशों से शांति की दिशा में पहल करने, मेल-मिलाप के रास्ते तलाशने और सभी लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने वाले समाधान खोजने की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। इस अपील से कुछ ही घंटे पहले इज़राइल ने ईरान के कुछ प्रमुख रक्षा केंद्रों पर ताजा हवाई हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी ईरान में एक मिसाइल साइट पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई। वहीं, ईरान ने भी प्रतिक्रिया में मिसाइलें दागीं, जिसमें इज़राइल के रिशोन लेज़ियन शहर के निवासी 73 वर्षीय  यिसराएल अलोनी की मौत हो गई। ईरान की पुलिस ने यज़्द प्रांत में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिन पर इज़राइल के लिए जासूसी करने का आरोप है। पोप लियो की यह अपील ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। उनकी इस शांति की पुकार को दुनियाभर में एक नैतिक आह्वान के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान के हमले को इस्राइल के खिलाफ एक कड़ा संदेश बताया-हम इस्राइल को आसानी से बचकर नहीं निकलने देंगे

ईरान ईरान ने हाल ही में इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है, जिसमें उसने इस्राइल के रक्षा मंत्रालय को भी निशाना बनाने की बात की है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस हमले को इस्राइल के खिलाफ एक कड़ा संदेश बताया और कहा कि “हम इस्राइल को इस अपराध से आसानी से बचकर नहीं निकलने देंगे”। इस हमले के बाद, इस्राइल ने ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसने ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया। इजरायल ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ नाम दिया है। इस हमले में कई ईरानी सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो गई। इसके बाद, ईरान ने इस्राइल के प्रमुख शहरों, जैसे तेल अवीव और यरुशलम, पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया, जिससे नागरिकों की मौतें और व्यापक नुकसान हुआ। ईरान ने इस जवाबी हमले को ‘ऑपरेशन ट्रू प्रमिस 3’ नाम दिया। इस संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र ने ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र में हुए नुकसान की पुष्टि की है, और इस्राइल के हमले जारी रहने की संभावना जताई है। अमेरिका ने शुरू में इन हमलों से खुद को अलग किया था, लेकिन बाद में इस्राइल के समर्थन में बयान दिए हैं। इस स्थिति ने एक पूर्ण पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को जन्म दिया है। इस संघर्ष में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है, और स्थिति में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।   बढ़ते तनावों के बीच एयर इंडिया ने भी किया ट्वीट वहीं एयर इंडिया ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि ईरान में मौजूदा स्थिति के कारण पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में एयरस्पेस बंद कर दिया गया है। इससे प्रभावित होकर, एयर इंडिया ने अपने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ रूट्स पर अपनी उड़ानों को वैकल्पिक दिनों में संचालित करने का निर्णय लिया है। एयर इंडिया ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी उड़ानों की स्थिति के लिए एयर इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त करें। साथ ही, किसी भी सहायता के लिए एयर इंडिया के कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।  

मणिपुर में सुरक्षाबलों की संयुक्त कार्रवाई: 328 हथियार और युद्ध जैसी सामग्री बरामद

मणिपुर  मणिपुर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), सेना और असम राइफल्स की संयुक्त टीमों ने 13-14 जून की दरम्यानी रात को राज्य के पांच घाटी जिलों में खुफिया सूचना के आधार पर तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान में 328 हथियार, विस्फोटक और युद्ध जैसी सामग्री बरामद की गई, जो राज्य में हिंसा और अशांति को रोकने के प्रयासों में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। बरामद किए गए हथियारों में 151 एसएलआर राइफल, 65 इंसास राइफल, 73 अन्य प्रकार की राइफल, पांच कार्बाइन बंदूकें, दो एमपी-5 बंदूकें और युद्ध जैसी अन्य सामग्री शामिल हैं। इसके अलावा, विस्फोटक और अन्य युद्ध सामग्री भी बरामद की गई है। सुरक्षाबलों की संयुक्त कार्रवाई मणिपुर पुलिस के एडीजीपी, लहरी दोरजी लहाटू ने बताया कि यह अभियान हिंसा को रोकने और अशांत राज्य में स्थिरता बहाल करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की यह संयुक्त कार्रवाई राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।   पहले किए गए अभियान इससे पहले, भारतीय सेना और असम राइफल्स ने 26 मई से 5 जून के बीच मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के साथ मिलकर पहाड़ी और घाटी जिलों में खुफिया-आधारित अभियान चलाए थे। इन अभियानों के परिणामस्वरूप पहाड़ी और घाटी-आधारित समूहों के 23 कैडरों को पकड़ा गया और 40 हथियार, नौ इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी), ग्रेनेड, गोला-बारूद और युद्ध जैसी सामग्री बरामद की गई।

G-7 से पहले भारत और कनाडा के बीच करीब दो साल से चले आ रहे तनाव के बाद अब दोनों देशों ने बड़ा कदम उठाया

नई दिल्ली  भारत और कनाडा के बीच करीब दो साल से चले आ रहे तनाव के बाद अब दोनों देशों ने रिश्तों को फिर से सामान्य करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों सरकारें अब एक नई व्यवस्था बनाने जा रही हैं जिसके तहत वे  आतंकवाद, अंतर्राष्ट्रीय अपराध और उग्रवादी गतिविधियों  से जुड़ी खुफिया जानकारियां आपस में साझा करेंगी। यह समझौता दोनों देशों की जांच एजेंसियों और कानून प्रवर्तन विभागों  को जोड़ेगा, ताकि सीमा पार के अपराधों और आतंकी गतिविधियों पर मिलकर काम किया जा सके। यह जानकारी उन अधिकारियों ने दी है जो इस वार्ता से जुड़े हैं लेकिन उन्होंने अपनी पहचान गोपनीय रखी क्योंकि बातचीत अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई है। इस समझौते में कनाडा की ओर से बाह्य न्यायिक हत्याओं की जांच पर भी जोर रहेगा, खासकर वर्ष 2023 में हुए हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से, जिसे कनाडा ने भारत से जोड़ा था। भारत ने इन आरोपों को ‘बेतुका और निराधार’ बताया था और कनाडा पर खालिस्तानी तत्वों को पनाह देने का आरोप लगाया था। गौरतलब है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की आगामी G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात होनी है। इस बैठक को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का एक अहम मौका माना जा रहा है। हालांकि, 12 जून को एयर इंडिया विमान हादसे और ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते पीएम मोदी की यात्रा योजना में बदलाव संभव है।   साल 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो  ने सरे, ब्रिटिश कोलंबिया में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए सार्वजनिक रूप से भारत को जिम्मेदार ठहराया था, जिससे रिश्तों में भारी दरार आई। दोनों देशों ने एक-दूसरे के  राजनयिकों को निष्कासित  किया, वीजा सेवाएं सीमित कर दीं और संपर्क न्यूनतम कर दिए थे।हालांकि,  दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने आपसी सहयोग जारी रखा और अब दोनों सरकारें इसे औपचारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मार्क कार्नी द्वारा पीएम मोदी को G-7 सम्मेलन में आमंत्रित करना भी कनाडा की विदेश नीति में बदलाव और संबंधों में सुधार की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

श्रद्धालु जब भी जम्मू से आएं, सुबह सुरक्षाबलों की निगरानी में निकलने वाले काफिले में ही आएं: LG मनोज सिन्हा

श्रीनगर बैसरन,पहलगाम नरसंहार के बाद सावधानी के आधार पर बंद किए विभिन्न पर्यटनस्थलों को अब एक बार फिर पर्यटकों के लिए चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा है। यह जानकारी शनिवार को स्वयं उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पहलगाम में दी। उन्होंने बताया कि कश्मीर प्रांत में और जम्मू प्रांत में आठ-आठ पर्यटनस्थलों खोल दिया गया है,अन्य भी जल्द ही पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे। उन्होंने इस अवसर पर देश विदेश से श्रद्धालुओं केा बड़ी संख्या में श्री अमरेश्वर धाम की तीर्थयात्रा में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि श्रद्धालु जब भी जम्मू से आएं, सुबह सुरक्षाबलों की निगरानी में निकलने वाले काफिले में ही आएं। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित बैसरन में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय घोड़ेवाले की हत्या कर दी थी। इसके बाद प्रशासन ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 50 से ज्यादा पर्यटनस्थलों और पार्कों को आम लोगों के लिए विशेषकर पर्यटकों के लिए बंद कर दिया था। विभिन्न सामाजिक,व्यापारिक और राजनीतक संगठन इन पार्कों को खोले जाने की लगातार मांग कर रहे थे। प्रदेश प्रशासन ने इन पार्काें को खोलने के लिए एक समिति का भी गठन किया है।   उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज पहलगाम में नुनवन आधार शिविर, आपदा प्रबंधन केंद्र और यात्री निवासी का जायजा लेने के अलावा यात्रा मार्ग के सुरक्षा बंदोबस्त का भी जायजा लिया। उन्होंने तीन जुलाई से शुरु हो रही श्री अमरेश्वर धाम जिसे श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा के नाम से भी पुकारा जाता है, की तीर्थयात्रा से जुड़ी सभी तैयारियों को अगले 10 दिन में पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि काेई भी कार्य शेष नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संबधित अधिकारियों से एक बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में 22 अप्रैल के नृशंस आतंकी हमले के बाद बंद किए गए पर्यटनस्थलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जम्मू और कश्मीर दोनों प्रांतों के मंडलायुक्तों और पुलिस महानिरीक्षकों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद, पर्यटन स्थलों को चरणबद्ध तरीके से आम पर्यटकों के लिए फिर से खोलने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि अनंतनाग जिले में पहलगाम, बेताब घाटी, पहलगाम बाजार क्षेत्र में स्थानीय पार्क, वेरीनाग गार्डन, कोकरनाग गार्डन और अच्छाबल गार्डन जैसे स्थलों को फिर से खोल दिया गया है। श्रीनगर में बादामवारी पार्क, नगीन झील के पास डक पार्क और दरगाह हजरतबल के पास तकदीर पार्क को भी जनता के लिए सुलभ बना दिया गया है।जम्मू संभाग में पर्यटक स्थल सरथल, बग्गर, देवी पिंडी, सिहाड़ बाबा झरना, सुल्ला पार्क, गुल डंडा, जय घाटी, पंचैरी भी पर्यटकों के लिए खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति की समीक्षा करते हुए,अन्य पर्यटनस्थलो को भी जल्द खोल दिया जाएगा। हाल ही में शुरू की गई वंदे भारत ट्रेन सेवा के प्रति लोगों के उत्साह का जिक्र करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि रेलवे अधिकारियों ने मुझे बताया कि अगले दस दिनों के लिए बुकिंग पहले ही फुल हो चुकी है। लोग जबरदस्त दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जो बढ़ते आत्मविश्वास और सामान्य स्थिति को दर्शाता है। वादी में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार यहां आधिकारिक बैठकों और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के दौरों का भी आयोजन कर रही है, जिससे आम लोगों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। देश विदेश से कश्मीर आने वाले पर्यटकों और श्री अमरेश्वर धाम की आगामी तीर्थयात्रा की सुरक्षा से जुडे़ सवाल के जवाब में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि यहां हालात पूरी तरह सामान्य हैं, सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त है। सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने श्री अमरनाथ जी की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह लोगों की यात्रा है।सभी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं, सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त है। ज्यादा से ज्यादा संख्या में श्रद्धालुओं केा बाबा अमरनाथ की यात्रा में भाग लेन आना चाहिए। एक अनुरोध है,जम्मू से जब भी श्रद्धालु श्री अमरनाथ जी की यात्रा के लिए प्रस्थान करें तो सुबह रवाना होने वाले काफिले के साथ ही प्रस्थान करें। काफिले के साथ सुरक्षाबल तैनात रहते हैं। इससे यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने में मदद मिलती है।

दुर्घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति की गठित, दुर्घटना के पीछे के कारणों का लगाएगी पता: नागरिक उड्डयन मंत्रालय

नई दिल्ली  भारत सरकार ने एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 की दुर्घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे जा रही थी, जो 12 जून को उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक व्यक्ति ही जीवित बचा। दुर्घटना में 241 लोगों की जान चली गई, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़े हवाई दुर्घटनाओं में से एक है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि समिति दुर्घटना के पीछे के कारणों का पता लगाएगी और जांचेगी कि क्या गलत हुआ। समिति मौजूदा सुरक्षा नियमों की समीक्षा भी करेगी और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नए तरीके सुझाएगी। समिति विभिन्न एजेंसियों द्वारा चल रही अन्य जांचों की जगह नहीं लेगी, बल्कि नीतियों और सुरक्षा दिशानिर्देशों को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस उच्च स्तरीय टीम का नेतृत्व केंद्रीय गृह सचिव करेंगे। इसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारतीय वायु सेना, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। गुजरात सरकार, अहमदाबाद पुलिस, आपदा प्रतिक्रिया प्राधिकरण और फोरेंसिक साइंस के विशेषज्ञ भी इस टीम का हिस्सा होंगे। जरूरत पड़ने पर पैनल में अतिरिक्त विमानन विशेषज्ञ, कानूनी सलाहकार या जांचकर्ता शामिल किए जा सकते हैं। समिति के पास उड़ान डेटा, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग, विमान रखरखाव लॉग, एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) लॉग और गवाहों के बयान जैसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तक पहुंच होगी। यह समिति दुर्घटना स्थल का दौरा भी करेगी और इसमें शामिल लोगों से बात करेगी, जिसमें क्रू मेंबर्स, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और रेस्क्यू टीम शामिल हैं। अगर दुर्घटना में अंतरराष्ट्रीय तत्व शामिल पाए जाते हैं तो समिति विदेशी एजेंसियों और विमान निर्माताओं के साथ कॉर्डिनेट करेगी। समूह को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। दुर्घटना के मूल कारण का पता लगाने के अलावा, समिति यह भी समीक्षा करेगी कि बचाव अभियान कैसे चलाए गए और आपातकाल के दौरान विभिन्न एजेंसियों ने कैसे कॉर्डिनेट किया। समिति ऐसी घटनाओं के दौरान प्रशिक्षण, संचार और केंद्रीय तथा राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका में सुधार के सुझाव देगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हवाई दुर्घटनाओं के प्रति भारत की प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।

कंपनी ने ईरान का एयरस्पेस बंद होने के कारण कई उड़ानों के मार्ग में परिवर्तन किया : एयर इंडिया

नई दिल्ली  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, भारत की दो प्रमुख एयरलाइनों, एयर इंडिया और इंडिगो, ने ईरान के एयरस्पेस के बंद होने के कारण उड़ानों में देरी और रूट बदले जाने को लेकर पब्लिक एडवाइजरी जारी की है। एयर इंडिया ने शनिवार को कहा कि कंपनी ने ईरान का एयरस्पेस बंद होने के कारण कई उड़ानों के मार्ग में परिवर्तन किया है। एयरलाइन ने घोषणा की कि यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसकी कुछ उड़ानें अब लंबे, वैकल्पिक मार्गों पर संचालित हो रही हैं। एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक अपडेट साझा किया, जिसमें कहा गया, “ईरान और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में उभरती स्थिति के कारण हवाई क्षेत्र के बंद होने और हमारे यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए हमारी कुछ उड़ानें वैकल्पिक विस्तारित मार्गों पर चल रही हैं। हम हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण अपने यात्रियों को होने वाली किसी भी असुविधा को कम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम दोहराना चाहेंगे कि एयर इंडिया में, हमारे यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।” यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब क्षेत्रीय तनाव की एक सीरीज के बाद ईरान और आस-पास के क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र बंद है। इस स्थिति ने कई अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है जो आमतौर पर ईरान से गुजरते हैं। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने भी एक्स के माध्यम से एक बयान जारी कर यात्रियों को संभावित व्यवधानों के बारे में चेतावनी दी है। एयरलाइन ने अपनी एडवाइजरी में कहा, “ईरान और उसके आस-पास के इलाकों में हवाई क्षेत्र अभी भी उपलब्ध नहीं है। कुछ उड़ान मार्गों को एडजस्ट करने की आवश्यकता हो सकती है, जिससे यात्रा की अवधि बढ़ सकती है या देरी हो सकती है।” इंडिगो ने सभी यात्रियों को सलाह दी है कि वे हवाई अड्डे पर जाने से पहले कंपनी की वेबसाइट या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपने फ्लाइट स्टेटस की जांच करें। एयरलाइन ने आश्वासन दिया कि उसकी कस्टमर सर्विस टीम इन देरी से प्रभावित यात्रियों की सक्रिय रूप से सहायता कर रही है। दोनों एयरलाइनें वैकल्पिक हवाई गलियारों के माध्यम से प्रभावित उड़ानों को फिर से रूट करने के लिए काम कर रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप उड़ान का समय लंबा हो सकता है। परिणामस्वरूप, यूरोप, खाड़ी और मध्य एशिया से आने-जाने वाली कई सेवाएं 30 मिनट से लेकर कई घंटों तक की देरी का सामना कर रही हैं।

इजरायल-ईरान के बीच युद्ध बढ़ाएगा डीजल और पेट्रोल के दाम? भारत पर क्या होगा असर

इजरायल गाजा में हमास के खिलाफ लंबे समय से युद्ध लड़ने के बाद इजरायल ने अचानक ईरान पर बड़ा हमला कर दिया। इस हमले में ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों के साथ टॉप सैन्य अधिकारी भी मारे गए। इस तनाव की वजह पश्चिमी एशियाई देशों में तेल की सप्लाई प्रभावित होने की भी आशंका है। शनिवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 6 डॉलर बढ़कर अब तक के सबसे ऊंची कीमत 78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं इजरायल पर ईरान का पलटवार और भी चिंता की वजह बन गया है। जानकारों का कहना है कि तनाव बढ़ने से आने वाले समय में काफी अस्थिरता होगी। ऐसे में व्यापार और बाजार प्रभावित होंगे। जानकारों का कहना है कि तेल का निर्यात प्रभावित होने की वजह से तेल और गेस की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में एक एक्सपर्ट ने कहा, सवाल यही पैदा होता है कि इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से क्या निर्यात प्रभावित होगा। पिछली बार भी जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा था तो कीमतें बढ़ी थीं। हालांकि मामला सुलझने के बाद फिर से सप्लाई शुरू हो गई और कीमतें स्थिर हो गईं। भारत पर क्या प्रभाव जानकारों का कहना है कि भारत ईरान से सीधा ज्यादा तेल नहीं खरीदता है। फिर भी भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है। भारत के लिए चिंता की बात हौरमज की जल संधि है। यह उत्तर में ईरान और दक्षिण में अरब से लगी है। यहां से दुनिया का 20 फीसदी एलएनजी व्यापार होता है। ऐसे में यह चोक पॉइंट साबित हो सकता है। अगर इस रास्ते में कोई भी बाधा आती है तो इराक, सऊदी अरब और यूएई से होने वाली तेल की सप्लाई बाधित होगी। ईरान पहले भी इस रूट को ब्लॉक करने की धमकी दे चुका है। अगर ऐसा होता है तो भारत को आयात करने में मुश्किल आएगी और पेट्रोल-डीजल समीत अन्य फ्यूल की कीमतों में इजाफा हो सकता है। अब तेल और गैस की कीमतों पर लंबे समय के लिए प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान और इजरायल के बीच तनाव लंबा खिंचता है या फिर टकराव कम हो जाता है। वहीं ओपेक देशों ने पिछली ही जुलाई में ऐलान किया था कि वे तेल की सप्लाई बढ़ाएंगे। ऐसे में ईरान से सप्लाई कम होने पर भी दुनिया पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। बात भारत की हो तो यहां की ऑइल मार्केट में अच्छी ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन है। ऐसे में हाल में भारत पर कोई असर दिखाई नहीं देगा।  

एयर इंडिया विमान दुर्घटना का खर लगातार जारी है, अब तक 270 लोगों की हो चुकी मौत

अहमदाबाद एयर इंडिया विमान दुर्घटना के बाद अब तक कुल 270 शव अहमदाबाद सिविल अस्पताल में लाए गए हैं। अस्पताल के चिकित्सकों ने शनिवार को बताया कि अहमदाबाद फायर ब्रिगेड एवं इमरजेंसी सर्विस (एएफईएस) ने विमान दुर्घटनास्थल से पिछले 24 घंटों में एक शव और कुछ मानव शरीर के अंग बरामद किए हैं। अधिकारियों ने पहले मरने वालों की संख्या 265 बताई थी। बृहस्पतिवार दोपहर अहमदाबाद से 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (एआई 171) विमान सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही क्षण बाद मेघाणी नगर में एक मेडिकल हॉस्टल और उसके कैंटीन परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। बीजे मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धवल गामेती ने पीटीआई-भाषा से कहा कि विमान दुर्घटनास्थल से अब तक लगभग 270 शव सिविल अस्पताल लाए गए हैं।डीएनए नमूनों का मिलान करके शवों की शिनाख्त की प्रक्रिया अभी जारी है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव रिश्तेदारों को सौंप दिए जाएंगे। अतिरिक्त मुख्य अग्निशमन अधिकारी जयेश खड़िया ने कहा कि दुर्घटनास्थल पर जारी जांच में फोरेंसिक और विमानन विशेषज्ञों की मदद कर रहे हमारे अग्निशमन कर्मियों को शुक्रवार को कैंटीन के मलबे से कुछ शव मिले, जबकि आज सुबह एक शव मिला। एयर इंडिया विमान दुर्घटना स्थल पर केंद्रीय और राज्य सरकार की एजेंसियों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की एक टीम भी तैनात की गई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एनएसजी टीम को राहत कार्यों में अन्य एजेंसियों की सहायता के लिए तैनात किया गया है। दुर्घटनास्थल पर हॉस्टल की इमारत में एनएसजी कमांडो देखे गए, जहां दुर्घटना के बाद विमान का पिछला हिस्सा फंस गया था। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी), नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए), अहमदाबाद अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस जैसी एजेंसियां ​​जांच में शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि एनआईए के अधिकारियों ने शुक्रवार को घटनास्थल का दौरा किया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दिल्ली में कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। मंत्रालय ने कहा कि समिति भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और उनसे निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगी और तीन महीने में अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करेगी। इस बीच, एआईबी दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुए छात्रावासों को जांच के लिए खाली करा रहा है। बी जे मेडिकल कॉलेज की डीन मीनाक्षी पारीख ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एआईआईबी) जांच करना (विमान दुर्घटना की) चाहता है। इसके लिए छात्रावास खाली कराए जा रहे हैं। हमने वहां रहने वाले स्नातकोत्तर छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है।  

अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में अब दरार, क्षेत्रीय संतुलन खतरे में

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में वैश्विक मंच पर ‘शांति पुरुष’ बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था। लेकिन उनके इस मिशन को उनके करीबी सहयोगी इजरायल और उससे पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने तगड़ा झटका दिया है। इजरायल ने ट्रंप की सलाह को नजरअंदाज कर ईरान पर सैन्य हमला किया, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराकर ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों को चुनौती दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजरायल से ईरान पर हमला न करने की अपील की थी। ट्रंप ने कहा था कि उनका लक्ष्य “शांति स्थापित करना” है। लेकिन इसी अपील के कुछ घंटों बाद, ट्रंप के करीबी दोस्त इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भीषण हमले की घोषणा कर दी। यह हमला ट्रंप के उस उद्देश्य को एक और झटका है, जिसमें वह खुद को “शांति पुरुष” बता रहे थे। इससे पहले, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप की यूक्रेन में युद्धविराम की अपील को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही, इजरायल ने गाजा पट्टी में भी एक और बड़ा सैन्य अभियान जारी रखा है। यहां भी ट्रंप प्रशासन की देखरेख में हुआ संघर्षविराम अब टूट चुका है। ओमान में बातचीत से पहले हमला ट्रंप के मित्र और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ यूक्रेन-रूस, इजरायल-गाजा और इजरायल-ईरान इन तीनों संकटों में मध्यस्थता कर रहे हैं। वह रविवार को ओमान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करने वाले थे। ऐसे में इजरायल का हमला न केवल चौंकाने वाला प्रतीत हो रहा है, बल्कि अमेरिकी कूटनीति को भी कमजोर करता है। हालांकि ट्रंप ने बाद में खुद को इजरायल से पूरी तरह अलग नहीं किया। कुछ सूत्रों ने कहा कि अमेरिका के सार्वजनिक बयानों का उद्देश्य ईरान को चौंकाना था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान ने उनकी शर्तें मानने से इनकार कर दिया और हमला 60-दिवसीय अल्टीमेटम के एक दिन बाद हुआ, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसके बावजूद विटकॉफ की बातचीत क्यों तय थी। ट्रंप बोले: “मैं नहीं चाहता कि वो हमला करें” इजरायली हमले से पहले ट्रंप ने कहा था, “मैं नहीं चाहता कि वो अंदर जाएं, क्योंकि इससे सब कुछ बिगड़ जाएगा।” लेकिन नेतन्याहू ईरान की सरकार को इजरायल के लिए अस्तित्वगत खतरा बताते हैं और पहले भी ईरान के हवाई रक्षा तंत्र पर हमले कर चुके हैं। अमेरिका-इजरायल के रुख में दरार पूर्व पेंटागन अधिकारी और वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ फेलो डैना स्ट्रौल ने कहा, “हम स्पष्ट रूप से देख रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में अब एक मोड़ आ गया है।” उन्होंने कहा कि ये हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कुछ समय के लिए बाधित करेंगे, लेकिन सवाल यह है कि अमेरिका और इजरायल अब एक साथ मिलकर आगे क्या करेंगे। स्ट्रौल ने यह भी कहा कि ट्रंप और इजरायल के बीच पहले से ही मतभेद उभर रहे थे, खासकर जब ट्रंप ने सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटा दिए थे और पूर्व इस्लामी लड़ाका अहमद अल-शराआ को सत्ता में आने के बाद स्वीकार कर लिया। क्षेत्रीय संतुलन खतरे में पिछले महीने कतर में ट्रंप ने कहा था कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ समझौता जल्द होगा और “परमाणु धूल” का खतरा नहीं रहेगा। लेकिन अब इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने हालात पलट दिए हैं। सीटो संस्थान के रक्षा नीति निदेशक जस्टिन लोगन ने कहा कि इजरायली हमला अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों को “नष्ट कर देगा” और ट्रंप को अमेरिका की सैन्य भागीदारी से अलग रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “इजरायल को अपनी विदेश नीति चुनने का अधिकार है, लेकिन उसे उसकी कीमत भी खुद चुकानी चाहिए।” पुतिन का यूक्रेन युद्धविराम पर इनकार दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप की शांति पहल को करारा जवाब दिया था। ट्रंप ने यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने के लिए 30 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए उन्होंने पुतिन के साथ कई दौर की बातचीत की, जिसमें घिरे हुए यूक्रेनी सैनिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल था। हालांकि, पुतिन ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने कहा कि वह यूक्रेन के साथ सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी शर्तें वही रहेंगी, जिनमें यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़ना होगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा कि रूस किसी दबाव में नहीं आएगा। भारत ने भी किया था खारिज डोनाल्ड ट्रंप की ‘शांति पुरुष’ बनने की कोशिशों को भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर उनके हालिया विवादित दावों ने भी झटका दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी और दोनों देशों ने इसे स्वीकार किया था। हालांकि, भारत ने तुरंत इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। ट्रंप ने यहां तक दावा किया कि उन्होंने व्यापार का हवाला देकर भारत-पाकिस्तान की लड़ाई रुकवा दी। भारत ने इस दावे को भी खारिज किया है। ट्रंप की कूटनीति पर सवाल ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में बार-बार दावा किया था कि वह वैश्विक युद्धों को खत्म कर शांति स्थापित करेंगे। लेकिन इजरायल और रूस के ताजा कदमों ने उनकी इस छवि को धक्का पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की ‘शांति पुरुष’ की छवि तब तक अधूरी रहेगी, जब तक उनके सहयोगी उनकी सलाह को गंभीरता से नहीं लेंगे। ट्रंप और पुतिन की शख्सियत में समानता है, लेकिन पुतिन अपनी रणनीति पर अडिग हैं। इजरायल भी अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे ट्रंप की कूटनीति कमजोर पड़ रही है। अमेरिकी राजनीति में विभाजन ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद इजरायल के साथ खुलकर खड़े हैं। सीनेटर टॉम कॉटन ने कहा, “अमेरिका को इजरायल का पूरा समर्थन करना चाहिए और अगर ईरान अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाता है तो उसकी सरकार को गिरा देना चाहिए।” वहीं ट्रंप के डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वियों ने इजरायली हमले की आलोचना की है। सीनेट सशस्त्र बल समिति के शीर्ष डेमोक्रेट जैक रीड ने कहा, “ईरान पर इजरायल का … Read more

विमान ने पेरिस-दिल्ली-अहमदाबाद तक बिना किसी दिक्कत के भरी थी उड़ान, हादसे पर सरकार

अहमदाबाद अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे पर सरकार ने शनिवार को बताया कि प्लेन ने पेरिस-दिल्ली और फिर दिल्ली से अहमदाबाद के बीच बिना किसी दिक्कत के उड़ान भरी थी। 12 जून को करीब दो बजे से पहले सरकार को हादसे की सूचना मिली। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि क्रैश होने से पहले विमान के पायलट ने दोपहर 1.39 पर मेडे की कॉल दी, यानी कि पूरी तरह से इमरजेंसी है। मेडे का सिग्नल किसी भी विमान के लिए सबसे गंभीर इमरजेंसी सिग्नल होता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा, “पिछले दो दिन बहुत मुश्किल भरे रहे हैं। अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास हुई दुर्घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले सभी परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है… मैं व्यक्तिगत रूप से घटनास्थल पर गया था, ताकि देख सकूं कि क्या किया जाना चाहिए, क्या सहायता प्रदान की जानी चाहिए और यही गुजरात सरकार का रवैया था। भारत सरकार और मंत्रालय के अन्य लोगों का भी यही रवैया था। जब हम घटनास्थल पर पहुंचे, तो हमने देखा कि सभी संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया टीमें जमीन पर काम कर रही थीं, जो भी संभव हो, बचाव करने की कोशिश कर रही थीं, आग को कम करने और मलबे को हटाने की कोशिश कर रही थीं, ताकि शवों को जल्द से जल्द अस्पताल भेजा जा सके।” उन्होंने आगे कहा कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो, जिसे विशेष रूप से विमानों के आसपास होने वाली घटनाओं, दुर्घटनाओं की जांच करने के लिए बनाया गया था, को तुरंत सक्रिय किया गया। AAIB के माध्यम से हो रही तकनीकी जांच से एक महत्वपूर्ण अपडेट कल शाम 5 बजे के आसपास घटनास्थल से ब्लैक बॉक्स की बरामदगी है, AAIB टीम का मानना ​​है कि ब्लैक बॉक्स की यह डिकोडिंग गहराई से जानकारी देने वाली है। दुर्घटना की प्रक्रिया के दौरान या दुर्घटना से पहले के क्षणों में वास्तव में क्या हुआ होगा, इसकी जानकारी मिल सकेगी। हम इस बात का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि AAIB द्वारा पूरी जांच के बाद क्या परिणाम या रिपोर्ट सामने आएगी।” वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा, “12 जून को दोपहर करीब 2 बजे हमें सूचना मिली कि अहमदाबाद से गैटविक लंदन जा रहा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। हमें तुरंत एटीसी अहमदाबाद के जरिए इस बारे में विस्तृत जानकारी मिली। यह एआईसी 171 था और इसमें कुल 242 लोग सवार थे, जिसमें 230 यात्री, 2 पायलट और 10 क्रू मेंबर शामिल थे। इस विमान ने दोपहर 1:39 बजे उड़ान भरी और कुछ ही सेकंड में करीब 650 फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर यह गिरने लगा, यानी इसकी ऊंचाई कम होने लगी।” उन्होंने बताया, ‘’दोपहर 1:39 बजे पायलट ने अहमदाबाद एटीसी को सूचना दी कि यह MayDay है, यानी पूरी तरह से इमरजेंसी है। एटीसी के मुताबिक, जब उसने विमान से संपर्क करने की कोशिश की तो उसे कोई जवाब नहीं मिला। ठीक एक मिनट बाद यह विमान मेधानीनगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जो एयरपोर्ट से करीब 2 किमी की दूरी पर स्थित है। विमान के कैप्टन सुमित सभरवाल थे और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव सुंदर थे। जहां तक ​​विमान के पूरे इतिहास की बात है, इस दुर्घटना से पहले विमान ने पेरिस-दिल्ली-अहमदाबाद सेक्टर को बिना किसी दुर्घटना के पूरा कर लिया था। दुर्घटना के कारण दोपहर 2:30 बजे रनवे को बंद कर दिया गया और सभी प्रोटोकॉल पूरे करने के बाद शाम 5 बजे से अहमदाबाद के रनवे को सीमित उड़ानों के लिए खोल दिया गया।”  

अहमदाबाद विमान हादसा:मरने वालों का आंकड़ा हुआ 275 , NSG ने आज प्‍लेन के टेल से शव बरामद किया

अहमदाबाद अहमदाबाद में प्लेन क्रैश वाली जगह से शनिवार को एक और शव बरामद हुआ है। आज जब बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल से मलबा हटाया जा रहा था, तब विमान की टेल में फंसा हुआ था, जिसे नीचे उतारा। बाद में इसका पोस्टमॉर्टम हुआ है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह शव एयर होस्टेस का हो सकता है। उधर, आज भी मारे गए लोगों की DNA सैंपलिंग का काम जारी है। सिविल अस्पताल के बाहर परिजन की भीड़ है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम है। पोस्टमॉर्टम यूनिट के आसपास बाहरी लोगों की एंट्री बंद है। दिव्य भास्कर के मुताबिक, सिविल अस्पताल में अब तक 270 से ज्यादा शवों का पोस्टमॉर्टम हो चुका है। इसके अलावा, 230 लोगों की DNA सैंपलिंग की जा चुकी है। 8 शवों की शिनाख्त हो गई है। पायलट का आखिरी मैसेज सामने आया अहमदाबाद प्लेन क्रैश मामले में विमान के पायलट सुमित सभरवाल का एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) को भेजा गया आखिरी मैसेज सामने आया है। 4-5 सेकेंड के संदेश में सुमित कह रहे हैं, ‘मेडे, मेडे, मेडे… थ्रस्ट नहीं मिल रहा। पावर कम हो रही है, प्लेन उठ नहीं रहा। नहीं बचेंगे।’ फ्लाइट नंबर 171 को बंद करेगी एअर इंडिया एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने विमान हादसे के बाद फ्लाइट नंबर 171 को बंद करने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, आमतौर पर किसी घातक विमान हादसे के बाद एयरलाइंस उस फ्लाइट नंबर का इस्तेमाल बंद कर देती हैं। 17 जून से अहमदाबाद-लंदन गैटविक रूट की फ्लाइट AI 171 की जगह AI 159 के नंबर से चलेगी। शुक्रवार से ही बुकिंग सिस्टम में जरूरी बदलाव कर दिए गए हैं। मनीषा थापा तो नहीं, प्लेन के पिछले हिस्से में चिपकी मिली एक एयर होस्टेस की बॉडी अहमदाबाद विमान दुर्घटना मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. प्‍लेन के पिछले हिस्‍से यानी टेल से एक एयर होस्‍टेस का शव बरामद किया गया है. बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज के मेस में फंसे विमान के हिस्‍से से यह शव निकाला गया है. NSG की टीम विमान के मलबे की तलाशी में जुटी थी, जब यह बॉडी मिली. बताया जा रहा है कि एनएसजी की टीम को यह बॉडी विमान के उस हिस्‍से से मिली है, जहां तक पहुंचना काफी मुश्किल था. अब डीएनए जांच से ही यह तय हो सकेगा कि यह शव मनीषा थापा का है किया फिर किसी और एयर होस्‍टेस का. बता दें कि विमान के मलबे की तलाशी अभी भी की जा रही है, ताकि हादसे का कोई भी पहलू छूट न सके. कौन हैं मनीषा थापा मनीषा का परिवार पटना में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी) बटालियन मुख्यालय से बमुश्किल 500 मीटर की दूरी पर जगदेव पथ पर श्यामा अपार्टमेंट के पास रहता है. मनीषा के दो चाचा गुड्डू बहादुर थापा और बबलू थापा बीएसएपी में हवलदार हैं. उन्‍होंने बताया कि उन्हें दोपहर करीब 2 बजे उसकी सहेली से फोन पर इस दुखद घटना की जानकारी मिली. मनीषा के पिता राजू थापा बीएसएपी के सदस्य हैं और वर्तमान में बिहार के बेगूसराय जिले में तैनात हैं, जबकि उनकी मां लक्ष्मी थापा हाउसवाइफ हैं. मनीषा का छोटा भाई अमित थापा पटना स्थित एक कॉलेज से पढ़ाई कर रहा है. यह चौंकाने वाली खबर मिलने के बाद मनीषा की मां की हालत खराब हो गई है. लक्ष्मी को सांत्वना देने के लिए उसके पास बैठे एक पारिवारिक सदस्य ने बताया कि जबसे उन्‍हें इस घटना के बारे में पता चला है, तब से वह डॉक्टर की निगरानी में हैं. विमान हादसे में केबिन क्रू मनीषा की गई जान… पटना के कॉलेज में नम हुईं साथियों की आंखें  अहमदाबाद में गुरुवार दोपहर 1:39 बजे हुए एअर इंडिया विमान हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया. इस दर्दनाक घटना में कुल 265 लोगों की जान चली गई, जिनमें 12 क्रू मेंबर भी शामिल थे. इन्हीं में से एक थीं पटना की मनीषा थापा, जो बतौर क्रू मेंबर उस फ्लाइट में ड्यूटी निभा रही थीं. मनीषा थापा की असमय मौत की खबर मिलते ही पटना में शोक की लहर दौड़ गई. उनका कॉलेज, जहां से उन्होंने पढ़ाई की थी, गमगीन माहौल में डूब गया. कॉलेज में शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रिंसिपल फादर मार्टिन पोरिस और कॉलेज के स्टाफ व छात्रों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. प्रिंसिपल ने कहा कि मनीषा एक होनहार और अनुशासित छात्रा थीं. आखिरी बार मनीषा से उनकी मुलाकात एक साल पहले पटना एअरपोर्ट पर हुई थी, जब वह अपने प्रोफेशनल करियर में आगे बढ़ चुकी थीं. कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी मनीषा की यादों को साझा किया.  मनीषा की एक दोस्त ने बताया कि मनीषा पढ़ाई में अव्वल होने के साथ-साथ एक शानदार डांसर भी थीं. उनका सपना था कि वे आसमान में उड़ान भरें और देश-विदेश घूमें. मनीषा की मौत के साथ ही पटना ने अपनी एक होनहार बेटी को खो दिया. मनीषा की मुस्कुराती तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों के साथ वायरल हो रही हैं. बता दें कि अहमदाबाद में एअर इंडिया की फ्लाइट उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही मेघानीनगर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई. विमान पहले बी.जे. मेडिकल कॉलेज की मेस बिल्डिंग से टकराया और फिर अतुल्यम हॉस्टल से टकराने के बाद आग के गोले में तब्दील हो गया. आसपास का इलाका मलबे, धुएं और चीख-पुकार से भर गया. हादसे के बाद शवों की पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो गया. शवों को उनके घर तक पहुंचाने का प्रयास अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए लोगों के पार्थिव शरीर को उनके घर तक पहुंचाने के लिए खासतौर पर एंबुलेंस का इंतजाम किया गया है. जानकारी के अनुसार, हर एक मृतक शख्स के लिए एक एंबुलेंस अलॉट की गई है. हर एंबुलेंस में ड्राइवर के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ भी तैनात हैं. जैसे ही ब्लड सैंपल की रिपोर्ट आएगी और शवों की डीएनए रिपोर्ट से उसका मिलान होगा, ये एंबुलेंस शवों को लेकर उनके घरों के लिए तुरंत रवाना हो जाएगी. प्लेन हादसे में अब तक 275 की मौत विमान में क्रू और पैसेंजर (कुल 242) 241 मौतें (एक यात्री की जान बच गई।) बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल 34 मौतें (5 डॉक्टर+ 31 स्टाफ और वहां मौजूद अन्य लोग)

अहमदाबाद प्लेन क्रैश: 7 दिन पहले ही लंदन जाने वाले थे विजय रुपाणी, फिर क्यों चुन ली थी 12 जून की तारीख?

अहमदाबाद गुजरात के दो बार मुख्यमंत्री रहे विजय रुपाणी की गुरुवार को अहमदाबाद में एयर इंडिया में विमान हादसे में निधन हो गया। वह अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। बताया जा रहा है कि उनका प्लान एक हफ्ते पहले ही लंदन जाने का था लेकिन फिर चुनाव प्रचार के चलते उन्हें थोड़े दिनों के लिए प्लान टालना पड़ा। जानकारी के मुताबिक विजय रुपाणी पहले 5 जून को अपनी बेटी से मिलने लंदन जाने वाले थे। उनके साथ उनकी पत्नी भी जाने वाली थी। लेकिन रुपाणी को जो पंजाब प्रभारी भी है, लुधियाना पश्चिम उपचुनाव के प्रचार अभियान के कारण अपनी दौरा टालना पड़ा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य पार्टी प्रमुख सुनील जाखड़ ने बताया कि 5 जून को उनकी पत्नी तो लंदन चली गईं लेकिन वह रह गए और फिर उन्होंने 12 जून की तारीख तय की लेकिन उनका वो सफर कभी पूरा हो ही नहीं पाया। 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जाने वाला विमान टेकऑफ के कुछ मिनटों बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विजय रुपाणी भी इसी फ्लाइट में मौजूद थे जिसमें अन्य यात्रियों के साथ उनकी भी दर्दनाक मौत हो गई। विजय रुपाणी के भाई ने क्या कहा? गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के रिश्ते के भाई विपुल को अपने भाई की मौत के बारे में दिन में बाद में उनके एक पारिवारिक सदस्य द्वारा सोशल मीडिया ग्रुप पर की गई पोस्ट से पता चला। विपुल ने शुक्रवार को बताया, मैंने एक अभिभावक खो दिया, जो मेरे और कोलकाता में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हर अच्छे-बुरे समय में खड़ा रहा। दिवंगत भाजपा नेता के बड़े भाई उम्मेद रुपाणी सहित रुपाणी परिवार के लगभग 25 सदस्य पीढ़ियों से कोलकाता और निकटवर्ती हावड़ा के विभिन्न हिस्सों में रहते आए हैं, जबकि विजय रुपाणी पढ़ाई के लिए राजकोट चले गए और गुजरात में बस गए। दिवंगत नेता को अपना बड़ा भाई बताते हुए विपुल ने पिछले साल एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए उनकी कोलकाता यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा, पिछली बार वह (विजय) कोलकाता एक साल पहले आए थे, जब वह अपने बड़े भाई उम्मेद के साथ हाजरा में उनके घर पर रुके थे, जहां मैं रहता हूं, उससे ज़्यादा दूर नहीं। हमने खूब बातें कीं और साथ में खूब मौज-मस्ती की। उस समय वह गुजरात के राजनीतिक नेता नहीं थे, लेकिन वह सभी को अपना करीबी रिश्तेदार मानते थे।  

शुभांशु शुक्ला कब भरेंगे अंतरिक्ष की उड़ान, ISRO ने बताई नई तारीख

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के पायलट और इसरो के नए नवेले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अब 19 जून 2025 को अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे। Ax-04 मिशन की लॉन्चिंग की नई तारीख की आधिकारिक पुष्टि की गई है। इसे पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसे फ्लोरिडा स्थित NASA के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। आपको बता दें कि यह Axiom Space, SpaceX और ISRO का संयुक्त मिशन है। इसके साथ ही शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करने वाले भारत के चुनिंदा अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हो जाएंगे। लिक्विड ऑक्सीजन लीक की समस्या हल पिछले हफ्ते, 10 जून 2025 को Axiom-4 मिशन की शुरुआत टल गई थी, क्योंकि फाल्कन 9 रॉकेट में लिक्विड ऑक्सीजन लीक मिला था. यह लीक रॉकेट के बूस्टर में पाया गया था, जिससे लॉन्च को रोकना पड़ा. ISRO, Axiom Space और SpaceX के विशेषज्ञों ने मिलकर इस समस्या को सुलझाया.  बैठक में बताया गया कि लीक की मरम्मत पूरी हो गई है. रॉकेट के बूस्टर को फिर से जांचा गया और अब यह सुरक्षित है. ISRO के चेयरमैन ने इस फैसले की तारीफ की और कहा कि सुरक्षा पहले है. इसके बाद, टीम ने मिशन को फिर से शुरू करने की योजना बनाई. Zvezda सर्विस मॉड्यूल की जांच दूसरी ओर, Axiom Space ने NASA के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर Zvezda सर्विस मॉड्यूल में एक दबाव की असामान्यता (pressure anomaly) की जांच शुरू की है. यह मॉड्यूल रूस का हिस्सा है. हाल ही में इसकी मरम्मत की गई थी.  इससे पहले Falcon 9 रॉकेट में लिक्विड ऑक्सीजन लीकेज की समस्या सामने आई थी, जिसे SpaceX के इंजीनियरों ने अब पूरी तरह ठीक कर दिया है। इसरो, Axiom Space और SpaceX के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में तकनीकी पहलुओं की समीक्षा के बाद मिशन को हरी झंडी दी गई। अंतरिक्ष में भारत के प्रयोग इस मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला भारत द्वारा डिजाइन किए गए सात वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे और NASA के साथ संयुक्त शोध में भी भाग लेंगे। यह भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन कार्यक्रम के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। Axiom Space और NASA फिलहाल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के Zvezda सर्विस मॉड्यूल में सामने आई दबाव असमान्यता (pressure anomaly) की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि यह समस्या Ax-04 मिशन से संबंधित नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। Ax-04 मिशन Axiom Space की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वे दुनिया का पहला कॉमर्सियल अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। Axiom Space ने कहा कि वे NASA के साथ मिलकर इस समस्या का हल निकाल रहे हैं. यह जांच मिशन की सुरक्षा के लिए जरूरी है. अभी तक कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन सावधानी बरती जा रही है. Ax-04 मिशन की नई तारीख: 19 जून 2025 Axiom Space ने अब Ax-04 मिशन के लिए नई लॉन्च तारीख 19 जून 2025 तय की है. यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला सहित चार लोगों को ISS पर ले जाएगा. लॉन्च फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से होगा.  फाल्कन 9 रॉकेट और ड्रैगन अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल होगा. मिशन में वैज्ञानिक प्रयोग और अंतरिक्ष में मानव जीवन का अध्ययन शामिल है. शुभांशु शुक्ला भारत के पहले गगनयात्री होंगे, जो इस मिशन के जरिए अंतरिक्ष में जाएंगे. हाल की चुनौतियां और सफलता इससे पहले, Ax-04 मिशन की शुरुआत कई बार टली. मई 2025 में खराब मौसम और जून में लिक्विड ऑक्सीजन लीक के कारण देरी हुई. लेकिन अब टीम का कहना है कि सारी समस्याएं हल हो गई हैं. SpaceX ने कहा कि वे रेंज की उपलब्धता के बाद नई तारीख की पुष्टि करेंगे. ISRO ने भी इस मिशन में तकनीकी सहायता दी है, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए गर्व की बात है.

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