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जब सीबीआई की टीम ने किडनी तस्करी के आरोपों के तहत मशहूर डॉक्टर के घर छापा, लाखों की नकदी-हीरे और सोना जब्त

बर्दवान बर्दवान शहर में उस वक्त सनसनी फैल गई जब सीबीआई की टीम ने किडनी तस्करी के गंभीर आरोपों के तहत शहर के एक नामचीन चिकित्सक डॉ. तपन कुमार जाना के आवास पर देर रात छापेमारी की। शनिवार रात 11 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई रविवार सुबह तक जारी रही। मीठापुकुर स्थित हातिशाल इलाके में डॉ. जाना के घर पर जब सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम पहुंची, तो उनके साथ स्थानीय बर्दवान थाना पुलिस भी मौजूद थी। छापे के दौरान डॉक्टर घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उनकी पत्नी घर में थीं। तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई ने घर से करीब 24 लाख रुपये नकद, हीरे और सोने के गहने, तथा कीमती रत्न बरामद किए। इसके अलावा जांच एजेंसी ने कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, कई अहम दस्तावेज, और कुछ डिजिटल उपकरण भी ज़ब्त किए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. तपन कुमार जाना का नाम एक अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रैफिकिंग रैकेट से जोड़ा जा रहा है, जिसकी जांच सीबीआई लंबे समय से कर रही है। आशंका है कि इस रैकेट के जरिए देश-विदेश में जरूरतमंद मरीजों को मोटी रकम लेकर अवैध रूप से किडनी उपलब्ध कराई जाती थी। छापेमारी के बाद इलाके में हलचल मच गई है। स्थानीय लोग डॉक्टर जाना को एक प्रतिष्ठित चिकित्सक के रूप में जानते थे, ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की गंभीर कार्रवाई से लोग हैरान हैं। हालांकि अभी तक सीबीआई ने कोई आधिकारिक गिरफ्तारी नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं और उनसे जल्द पूछताछ की जाएगी। फिलहाल, बरामद नकदी और कीमती वस्तुओं की सूची तैयार की जा रही है और इस पूरे मामले में सीबीआई की जांच तेज़ हो चुकी है। यह छापेमारी न केवल डॉक्टर जाना के पेशे पर सवाल उठा रही है, बल्कि पूरे चिकित्सा जगत के लिए भी एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आई है।

शशि थरूर के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क में आतंकवाद से लड़ने के भारतीय संकल्प को दोहराया

न्यूयॉर्क कांग्रेस नेता शशि थरूर के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क में प्रमुख थिंक टैंक, अकादमिक नेताओं और मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी। इस बातचीत में प्रतिनिधिमंडल ने दृढ़ता के साथ भारत के आतंकवाद से लड़ने के संकल्प को रेखांकित किया। इसकी पुष्टि न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर की। वाणिज्य दूतावास के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “शशि थरूर के नेतृत्व में राजनयिक आउटरीच यात्रा के दौरान न्यूयॉर्क पहुंचे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से लड़ने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।” भारतीय प्रतिनिधियों ने “आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता और एकीकृत राष्ट्रीय संकल्प का दृढ़ संदेश दिया और आतंकवाद का मुकाबला करने, इसके नेटवर्क को समाप्त करने और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय तंत्र की वकालत की।” इसके साथ ही भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 9/11 के आतंकवादी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रतिनिधिमंडल के बयान में कहा गया है कि, “एकजुटता के प्रतीक रूप में ‘राष्ट्रीय सितंबर 11 स्मारक और संग्रहालय’ का दौरा किया गया और 9/11 हमलों में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भारत वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से पीड़ितों के साथ एकजुट है। यह यात्रा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत की व्यापक कूटनीतिक वैश्विक पहुंच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद से उत्पन्न जटिल और उभरते खतरों से निपटने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय देशों के बीच आम सहमति बनाना है। शशि थरूर के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में शांभवी चौधरी (लोक जनशक्ति पार्टी), सरफराज अहमद (झारखंड मुक्ति मोर्चा), जीएम हरीश बलयागी (तेलुगु देशम पार्टी), शशांक मणि त्रिपाठी (भाजपा), तेजस्वी सूर्या (भाजपा), भुवनेश्वर के लता (भाजपा), मिलिंद देवरा (शिवसेना) और अमेरिका में पूर्व भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू शामिल हैं।

भीषण तूफान और भारी बारिश ने न केवल जमीनी तबाही मचाई, रोने-बिलखते यात्री पढ़ने लगे कुरान की आयतें

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शनिवार शाम आए भीषण तूफान और भारी बारिश ने न केवल जमीनी तबाही मचाई, बल्कि आसमान में उड़ते एक विमान के यात्रियों को भी दहशत में डाल दिया। कराची से लाहौर आ रही एक निजी विमानन कंपनी की उड़ान FL-842  खराब मौसम के कारण **लाहौर एयरपोर्ट पर लैंड नहीं कर सकी  जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। विमान जब लाहौर के आसमान में तेज़ हवा और बिजली की गर्जन के बीच झूलने लगा, तो घबराए यात्रियों ने कुरान की आयतें पढ़नी शुरू कर दीं। कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिनमें यात्री प्रार्थना करते और रोते हुए दिख रहे हैं। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने हालात को भांपते हुए पायलट को  वापस कराची लौटने का निर्देश  दिया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब पंजाब प्रांत में तेज आंधी और भारी बारिश से 20 लोगों की मौत और 150 से अधिक के घायल होने की पुष्टि सरकार द्वारा की गई है।  लाहौर, झेलम, सियालकोट, मुजफ्फरगढ़ समेत 15 से अधिक शहरों में मकान ढहने, पेड़ गिरने और बिलबोर्ड गिरने से जनहानि हुई। वहीं, इस्लामाबाद और खैबर पख्तूनख्वा में भी ओलावृष्टि और तेज हवा ने फसलों और बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया।

मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में विवाद, पेजेंट में वेश्या जैसा महसूस कराया गया : मिस इंग्लैंड मैगी

हैदराबाद हैदराबाद में जारी मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले कॉम्पटीशन में भाग लेने वाली प्रतिभागियों का लोकल महिलाओं से पैर धुलाने को लेकर बवाल मचा। अभी यह विवाद थमा भी नहीं है कि मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता एक और मामले को लेकर विवादों में आ गई है। मिस इंग्लैंड मिला मैगी ने हैदराबाद में चल रहा पेजेंट छोड़ दिया है। मिला मैगी ने मिस वर्ल्ड के ऑर्गनाइजर्स पर गंभीर आरोप लगाकर वतन यूके लौट गईं हैं। मिस इंग्लैंड मिला मैगी ने इंग्लैंड के अखबार द सन को दिए इंटरव्यू में मिस वर्ल्ड के ऑर्गनाइजर्स पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन पर मिस वर्ल्ड के फाइनेंसर्स से मेलजोल बढ़ाने का दबाव बनाया गया। मैगी ने कहा कि पेजेंट में वेश्या जैसा महसूस कराया गया। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, मिला मैगी ने कहा, “पेजेंट में बड़ी उम्र के आदमियों के साथ समय बिताने और मेलजोल बढ़ाने को कहा गया, क्योंकि वो लोग शो में फाइनेंशियल कॉन्ट्रिब्यूशन कर रहे हैं। सभी कंटेस्टेंट्स पर दिन भर मेकअप करके रहने और हैवी बॉल गाउन पहनने का दबाव बनाया जा रहा था, यहां तक कि ब्रेकफास्ट करते हुए भी। हर टेबल पर 6 गेस्ट और 2 लड़कियों को बैठाया जाता है। लड़कियों से कहा जाता है कि वो गेस्ट को खुश रखें। ये सब देखकर मुझे बहुत गलत लगता है, मैं यहां हंसने-खिलखिलाने और किसी को एंटरटेन करने नहीं आई हूं। मुझे वेश्या जैसा महसूस करवाया जाता है। हम यहां सामजिक मुद्दों पर बात करने आए थे, लेकिन वहां लोग इस बारे में सुनने तक को तैयार नहीं हैं। असहज महसूस करवाने वाली बातें होती हैं। पेजेंट में हिस्सा ले रहीं 109 लड़कियों को ये कहते हुए डांटा गया कि वो बोरिंग हैं। सभी के साथ परफॉर्मिंग मंकी की तरह बर्ताव किया जा रहा है। जो मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मिस वर्ल्ड की CEO ने आरोपों को गलत करार दिया हालांकि हालांकि मिस वर्ल्ड की CEO जूलिया मोर्ले ने ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर मैगी के आरोपों को खारिज कर दिया है। मिस वर्ल्ड 2025 हैदराबाद में जारी है, फिनाले 31 मई को होगा। जूलिया मोर्ले ने कहा कि मिस इंग्लैंड ने मां की तबीयत बिगड़ने पर अचानक मिस वर्ल्ड छोड़ने का फैसला किया है। ऑर्गनाइजेशन ने उनकी स्थिति समझते हुए उनके लौटने का बंदोबस्त करवाया है।स्टेटमेंट में मिला के आरोपों पर भी सफाई दी गई है। इसमें लिखा है, दुर्भाग्य से हमारे सामने आया है कि कुछ UK मीडिया आउटलेट ने झूठी और अपमानजनक खबरें पब्लिश की हैं। ये दावे पूरी तरह गलत हैं। मिला मैगी को रिप्लेस करेंगी मिस इंग्लैंड रनर-अप बता दें कि 24 साल की मिला मैगी 7 मई को हैदराबाद पहुंची थीं। 16 मई को ही मिला मैगी ने पेजेंट बीच में ही छोड़ दिया और यूके लौट गईं। मिस वर्ल्ड के 74 साल के इतिहास में पहली बार है, जब इंग्लैंड को रिप्रेजेंट कर रहीं कंटेस्टेंट को अचानक बदला गया। मिला को मिस इंग्लैंड रनर-अप रिप्लेस किया है।मिला मैगी के जाने पर मिस इंग्लैंड की रनर-अप रहीं चार्लेट ग्रांट ने उन्हें रिप्लेस किया है। जाहिर है कि फिनाले से चंद दिनों पहले हुए इस बदलाव का इंग्लैंड की दावेदारी पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि सब-टाइटल के लिए कॉम्पिटिशन पहले से जारी है।

बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर हुए अटैक में बिछ गईं पाक सैनिकों की लाशें

बलूचिस्तान पाकिस्तान ने जिस आतंकवाद नाम के ‘सांप’ को पाला वह अब उसे ही डस रहा है। आतंकवादियों को पालना अब पूरे पाकिस्तान को पड़ रहा है। दसअसल, पाकिस्तान में एक बार फिर सेना पर बड़ा हमला हुआ है। बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर हुए अटैक में पाक सैनिकों की लाशें बिछ गईं। कराची-क्वेटा हाईवे पर खुजदार के जोरो पॉइंट के पास हुए एक बम धमाके में कम से कम 32 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। खड़ी कार में हुआ विस्फोट कराची-क्वेटा राजमार्ग पर पास विस्फोटक एक खड़ी कार में प्लांट किया गया था। जब सेना की आठ गाड़ियों का काफिला इस कार के पास से गुजरा, तभी विस्फोटक (व्हीकल बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) फट गया। बताया जा रहा है कि तीन गाड़ियां सीधे इसकी चपेट में आईं, जिसमें एक बस भी शामिल थी। उस में पाकिस्तानी सेना के जवान और उनके परिवार के लोग सवार थे। अबतक किसी संगठन ने नहीं ली जिम्मेदारी अब तक किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी गुटों पर शक गहराता जा रहा है। यह इलाका पहले भी सेना और सुरक्षाबलों के काफिलों पर हमलों का गवाह रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला पाकिस्तानी सेना की कमजोर सुरक्षा रणनीति और बलूच विद्रोहियों की बढ़ती ताकत का संकेत है। हमले के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। यह घटना पाकिस्तान की आतंरिक सुरक्षा चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है, खासकर बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहां दशकों से अस्थिरता बनी हुई है। घटना को छुपाने की कोशिश गौरतलब है कि, पाक सेना के अधिकारी अपनी इस सुरक्षा चूक को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। आंतरिक स्रोतों के मुताबिक अधिकारी कथित तौर पर कहानी को बदलने के प्रयास में इस घटना को एक स्कूल बस पर हमले के रूप में दिखा रहे हैं। बता दें कि, पाकिस्तान का दूर-दराज इलाकों से आतंकी घटनाओं की खबरें पहले आना आम बात थी, लेकिन अब ऐसे हमले पाकिस्तान के बड़े शहरों में भी होने लगे हैं। जिसके बाद वहां की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

PM मोदी ने खुद हस्तक्षेप करते हुए बीजेपी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया- वाणी पर रखें संयम, अनावश्यक बयानबाजी से बचें

नई दिल्ली ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर चल रही बयानबाजी ने सियासी गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद हस्तक्षेप करते हुए बीजेपी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपनी वाणी पर संयम रखें और गैरजरूरी बयान देने से बचें। उन्होंने कहा कि कुछ भी, कहीं भी बोलना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। एनडीए के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की हालिया बैठक में पीएम मोदी ने यह संदेश सीधे तौर पर नेताओं को दिया। उनका कहना था कि सेना के पराक्रम और सरकार की रणनीति की आड़ में किसी भी तरह की गैर-जिम्मेदार टिप्पणी न की जाए। एनडीए बैठक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रशंसा, पर नसीहत भी बैठक के दौरान शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक प्रस्ताव रखा, जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारतीयों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला बताया गया। प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की गई और कहा गया कि उन्होंने हमेशा सशस्त्र बलों का समर्थन किया है। साथ ही 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। लेकिन इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि कोई भी नेता इस ऑपरेशन पर अनावश्यक और भड़काऊ बयान न दे। उन्होंने यह बात शायद हरियाणा और मध्यप्रदेश के नेताओं के हालिया बयानों के चलते कही। कौन-कौन से बयान बने विवाद की वजह? हरियाणा के बीजेपी सांसद रामचंद्र जांगड़ा और मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा एवं मंत्री विजय शाह के बयान विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। रामचंद्र जांगड़ा के एक बयान को लेकर आरोप है कि उन्होंने शहीदों और उनकी पत्नियों पर अमर्यादित टिप्पणी की। वहीं जगदीश देवड़ा ने सेना की कार्रवाई को लेकर बयान देकर पार्टी को मुश्किल में डाल दिया। विजय शाह का एक बयान सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हुआ, जिसमें उन्होंने एक शहीद कर्नल की पत्नी पर अनुचित टिप्पणी की थी। कांग्रेस का वार: माफी मांगें प्रधानमंत्री कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और दोषी नेताओं को पार्टी से बाहर करने की मांग की है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखा हमला करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं में शहीदों और सेना के खिलाफ बयानबाजी की होड़ लग गई है। खरगे ने कहा, “मोदी जी कहते हैं कि उनकी रगों में सिंदूर है। अगर ऐसा है तो उन्हें महिलाओं के सम्मान के लिए इन नेताओं को पार्टी से बाहर करना चाहिए।” कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी अब इतनी असंवेदनशील हो चुकी है कि सुरक्षा चूक को नजरअंदाज कर रही है और शहीदों के परिवारों पर उंगली उठा रही है। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व अब तक चुप क्यों हैं? क्या इसे मौन स्वीकृति माना जाए?   पीएम मोदी की चुप्पी अब नहीं चलेगी: विपक्ष विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेतृत्व की चुप्पी, इन विवादित बयानों को अप्रत्यक्ष समर्थन जैसा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का सार्वजनिक रूप से बोलना जरूरी हो गया था। पीएम मोदी का बयान इस दिशा में एक जरूरी पहल है, लेकिन विपक्ष अब भी कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़ा है।  

मुख्यमंत्री संगमा गांव के दौरे पर थे, तो अचानक स्थानीय स्कूल में रूककर बच्चों से बातचीत के दौरान सिखाया गिटार बजाना

मेघालय मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक छात्र को गिटार के कॉर्ड्स सिखाते नजर आ रहे हैं. म्यूजिक में दिलचस्पी रखने वाले संगमा का यह सरल और मानवीय रूप लोगों को बेहद पसंद आ रहा है. वीडियो देखकर लोग उनकी भर-भर के तारीफ कर रहे हैं. मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक छात्र को गिटार के कॉर्ड्स सिखाते नजर आ रहे हैं. म्यूजिक में दिलचस्पी रखने वाले संगमा का यह सरल और मानवीय रूप लोगों को बेहद पसंद आ रहा है. वीडियो देखकर लोग उनकी भर-भर के तारीफ कर रहे हैं. घटना मेघालय के री-भोई जिले के जिरांग विधानसभा क्षेत्र के पाहमजुला गांव की है. मुख्यमंत्री संगमा जब इस गांव के दौरे पर थे, तो उन्होंने अचानक एक स्थानीय स्कूल का रुख किया. वहां बच्चों से बातचीत के दौरान उनकी नजर एक ऐसे छात्र पर पड़ी, जो गिटार बजाने की कोशिश कर रहा था लेकिन कॉर्ड्स को सही तरीके से पकड़ नहीं पा रहा था. ये देखकर मुख्यमंत्री संगमा खुद छात्र के पास पहुंचे और उसकी मदद करने लगे. इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में मुख्यमंत्री संगमा छात्र को गिटार के कॉर्ड्स पकड़ने का तरीका समझाते हुए दिख रहे हैं. उन्होंने कॉर्ड पैटर्न भी डेमो करके बताए और छात्र को सहजता से गाइड किया.   सोशल मीडिया पर हो रही है तारीफ वीडियो शेयर करते हुए संगमा ने लिखा, जिरांग के नोंगस्पुंग-ए गांव में एक छात्र गिटार बजाने की कोशिश कर रहा था, इसलिए मैंने वहां के स्कूल को एक गिटार भेंट किया। वह अभी शुरुआती स्तर पर है, लेकिन मुझे विश्वास है कि जब उनके नए स्कूल भवन का उद्घाटन होगा, तब वह अच्छे से गिटार बजा पाएगा. मुख्यमंत्री संगमा का यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर उन्हें काफी तारीफ भी हो रहा है.लोगों ने मुख्यमंत्री के बारे में कहा ऐसा अपनापन और सहजता बहुत कम नेताओं में देखने को मिलती है. कई लोगों ने लिखा कि संगीत और शिक्षा से जुड़ाव दिखाकर मुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रेरित किया है. वीडियो को हजारों लोगों ने लाइक और शेयर किया. सोशल मीडिया पर ये वीडियो देखकर लोगों ने कहा कैसे एक नेता बच्चों के सपनों को आकार देने में भूमिका निभा सकता है.  

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट-आतंकवाद विरोधी प्रयासों के बीच पाकिस्तान अपने परमाणु जखीरे का आधुनिकीकरण कर रहा

वाशिंगटन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम करते हुए पड़ोसी देश को मुंहतोड़ जवाब दिया है. लेकिन इस जंग में एक बात खुलकर सामने आई है कि पाकिस्तान को पीछे से चीन और तुर्की जैसे देशों का समर्थन हासिल है. अब अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन को भारत अपना प्रमुख सामरिक प्रतिद्वंद्वी मानता है, जबकि पाकिस्तान को एक ऐसी सुरक्षा समस्या के तौर पर देखता है जिसपर काबू पाना जरूरी है. क्षेत्रीय तनाव कायम रहने की आशंका चीन लगातार पाकिस्तान समेत बाकी पड़ोसी देशों में आर्थिक और सैन्य निवेश करके एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. अमेरिकी रिपोर्ट में यह बताया गया कि आने वाले साल में पाकिस्तान की सेना की शीर्ष प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ सीमा पार झड़पें शामिल रहेंगी. भारत के साथ सीमावर्ती तनाव, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां और कश्मीर को लेकर आक्रामक बयानबाजी इस पॉलिसी का हिस्सा हैं. भारत पहले ही कई मौकों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और नियंत्रण रेखा (LoC) पर संघर्ष विराम उल्लंघन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चिंता जता चुका है. सीमा पर भारतीय जवान अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में बताया गया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच राष्ट्रवादी उग्रवादियों के बढ़ते हमले, आतंकवाद विरोधी प्रयासों के बीच पाकिस्तान अपने परमाणु जखीरे का आधुनिकीकरण कर रहा है. पिछले साल के दौरान पाकिस्तान के डेली ऑपरेशन के बावजूद, आतंकवादियों ने 2,500 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी. परमाणु जखीरे को आधुनिक बना रहा पाक पाकिस्तान, भारत को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है और वह भारत की पारंपरिक सैन्य क्षमता का मुकाबला करने के लिए अपने परमाणु हथियारों को विकसित करने के अलावा उनके मॉडर्नाइजेशन की कोशिशें जारी रखेगा. पाकिस्तान अपने परमाणु जखीरे को आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है और अपनी न्यूक्लियर आर्सनल और परमाणु कमान की सुरक्षा को पुख्ता कर रहा है. भारत के खिलाफ पाकिस्तान को चीन की मदद हासिल है और पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन के आर्थिक और सैन्य निवेश का लाभार्थी है. पाकिस्तानी सेना हर साल चीन की पीएलए के साथ कई संयुक्त सैन्य अभ्यास करती है, जिसमें नवंबर 2024 में पूरा होने वाला एक नई एयर एक्सरसाइज भी शामिल है. पाकिस्तान के WMD प्रोग्राम का समर्थन करने वाली विदेशी साजो-सामान और तकनीक मुख्य रूप से चीन के सप्लायर्स से ही मिलती है और कभी-कभी हांगकांग, सिंगापुर, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इसमें मदद करते हैं. पाकिस्तान में चीन का निवेश रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले चीनी श्रमिकों को निशाना बनाकर किए गए आतंकवादी हमले देशों के बीच टकराव का मुद्दा बनकर उभरे हैं. साल 2024 में पाकिस्तान में सात चीनी नागरिक मारे गए थे. पाकिस्तान और ईरान ने सीमा पार आतंकवादी हमलों के जवाब में जनवरी 2024 में दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के क्षेत्र पर एकतरफा हवाई हमले किए जाने के बाद तनाव कम करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकों सहित कई कदम उठाए हैं. सितंबर 2024 में, तालिबान और पाकिस्तानी सीमा बलों के बीच सीमा चौकियों के पास झड़प हुई, जिसमें आठ तालिबान लड़ाके मारे गए. मार्च 2025 में, पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान ने एक-दूसरे के क्षेत्र पर हवाई हमले किए, जिनमें से दोनों ने एक-दूसरे के कथित टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया. सहभागिता बढ़ाने पर भारत का फोकस भारत, चीन के प्रभाव को संतुलित करने और वैश्विक नेतृत्व भूमिका को मजबूत करने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय रक्षा साझेदारियों को प्राथमिकता दे रहा है, जिसके अंतर्गत सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, हथियार बिक्री और सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है. भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में त्रिपक्षीय सहभागिता भी बढ़ाई है. साथ ही ‘क्वाड’, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ASEAN जैसे बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. अक्टूबर 2024 के अंत में, भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में विवादित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दो जगहों से सेना हटाने के लिए एक समझौते पर पहुंचे. इस वापसी से सीमा सीमा को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान तो नहीं हुआ, लेकिन 2020 की घटना के बाद कुछ तनाव जरूर कम हुआ, जब LAC पर झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक मारे गए थे. मेक इन इंडिया की ताकत भारत निश्चित रूप से इस साल भी अपनी ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देगा, ताकि घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त किया जा सके और सप्लाई चेन की चिंताओं को कम किया जा सके. भारत ने 2024 में अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण को जारी रखा. भारत ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि-I प्राइम मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) और अग्नि-V मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) का परीक्षण किया. इसके साथ ही भारत ने अपनी दूसरी परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बी को भी नौसेना में शामिल किया, जिससे उसकी न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूती मिली है.  

‘हार्वर्ड के पास ₹4 अरब से ज्यादा फंड’, ट्रंप के तेवर गरम, मांगी 31% स्टूडेंट्स की डिटेल्स, अमेरिकी कोर्ट की रोक के बाद बोला हमला

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर हमला बोला है. ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में में पढ़ रहे लगभग 31 फीसदी विदेशी छात्रों की डिटेल्स मांगी है. यह तब है जबकि शुक्रवार को एक अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप प्रसाशन के कदम पर अस्थायी रोक लगाई थी. इसके बाद ट्रंप के बयान ने अमेरिका में हायर एजुकेशन और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भी शामिल हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि हार्वर्ड में पढ़ने वाले लगभग 31% छात्र विदेशी हैं और यूनिवर्सिटी इन छात्रों की जानकारी देने में टालमटोल कर रही है. उन्होंने लिखा, “हार्वर्ड यह क्यों नहीं कह रहा है कि उनके लगभग 31% स्टूडेंट्स विदेशी देशों से हैं और फिर भी वे देश, जिनमें से कुछ संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए बिल्कुल भी फ्रेंडली नहीं हैं, वे अपने छात्रों की शिक्षा के लिए कुछ भी भुगतान नहीं करते हैं और न ही वे कभी ऐसा करने का इरादा रखते हैं.” ट्रंप ने आगे लिखा, “हम जानना चाहते हैं कि वे विदेशी छात्र कौन हैं, यह एक उचित अनुरोध है क्योंकि हम हार्वर्ड को अरबों डॉलर देते हैं, लेकिन हार्वर्ड बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहा है. हम उन नामों और देशों को जानना चाहते हैं. हार्वर्ड के पास $52,000,000 (भारतीय रुपयों में चार अरब से ज्यादा फंड) हैं, इसका इस्तेमाल करें और फेडरेल गवर्नमेंट से आपको पैसे देना जारी रखने के लिए कहना बंद करें!” विवाद की शुरुआत: हार्वर्ड पर क्या हैं आरोप? ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) सर्टिफिकेशन को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया. इस सर्टिफिकेशन के बिना, हार्वर्ड नए विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता और वर्तमान में पढ़ रहे लगभग 7,000 विदेशी छात्रों को दूसरी यूनिवर्सिटीज में ट्रांसफर करना होगा, वरना उनका वीजा स्टेटस खतरे में पड़ जाएगा. होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने हार्वर्ड पर “हिंसा, यहूदी-विरोधी भावना, और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समन्वय” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. नोएम ने कहा कि यह एक “चेतावनी” है कि सभी यूनिवर्सिटीज को कानून का पालन करना होगा और यह विदेशी छात्रों को दाखिला देने का “विशेषाधिकार” है, न कि अधिकार. ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड के 2.2 बिलियन डॉलर के संघीय अनुदान और 450 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त फंड को फ्रीज कर दिया है. प्रशासन ने यूनिवर्सिटी से डाइवर्सिटी, इक्विटी, और इन्क्लूजन (DEI) कार्यक्रमों को बंद करने, प्रवेश नीतियों में बदलाव करने, और मध्य पूर्व से संबंधित कुछ शैक्षणिक कार्यक्रमों की ऑडिट करने की मांग की थी, जिसे हार्वर्ड ने ठुकरा दिया. हार्वर्ड का जवाब और कानूनी कदम हार्वर्ड ने इस कदम को “गैरकानूनी” और “प्रतिशोधात्मक” करार देते हुए तुरंत बोस्टन की संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया. यूनिवर्सिटी ने अपनी शिकायत में कहा कि यह फैसला अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन, ड्यू प्रोसेस क्लॉज, और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम का “खुला उल्लंघन” है. हार्वर्ड ने तर्क दिया कि इस कदम से यूनिवर्सिटी और इसके 7,000 से अधिक वीजा धारक छात्रों पर “तत्काल और विनाशकारी प्रभाव” पड़ेगा. हार्वर्ड ने कहा, “सरकार ने एक झटके में हार्वर्ड के छात्र समुदाय का एक-चौथाई हिस्सा, यानी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को, खत्म करने की कोशिश की है, जो यूनिवर्सिटी और इसके मिशन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. बिना अंतरराष्ट्रीय छात्रों के, हार्वर्ड, हार्वर्ड नहीं.” यूनिवर्सिटी ने यह भी बताया कि 2024-2025 सत्र में इसके लगभग 6,800 अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं, जो कुल नामांकन का 27% हैं. ट्रंप के कदम पर कोर्ट ने लगाई अस्थायी रोक शुक्रवार को, बोस्टन की जिला जज एलिसन बरोज ने ट्रंप प्रशासन के फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी, ताकि इस मामले की पूरी सुनवाई हो सके. जज ने कहा कि हार्वर्ड को इस कदम से नुकसान हो सकता है. अगली सुनवाई 27 और 29 मई को निर्धारित की गई है.  

भारत के चारों तरफ फैला रहा सैन्य जाल, चीन सबसे बड़ा खतरा, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में PAK को लेकर भी बड़े दावे

वाशिंगटन अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में एक बार फिर चीन की विस्तारवादी नीति और भारत के लिए उसकी सामरिक चुनौती पर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रक्षा नीति वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने, चीन का सामना करने और भारत की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित रहेगी. भारत, चीन को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता है. जबकि पाकिस्तान को एक सीमित सुरक्षा समस्या के रूप में देखता है जिसे नियंत्रण में रखा जा सकता है. PLA के सैन्य अड्डों की योजना, भारत के लिए खतरे की घंटी रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैन्य ठिकाने बर्मा (म्यांमार), पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में स्थापित करने की योजना पर विचार कर रहा है. यदि ऐसा होता है तो यह भारत के लिए गंभीर सामरिक खतरा बन सकता है क्योंकि ये देश भारत की सीधी समुद्री और थल सीमाओं के निकट हैं. यह ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत चीन हिंद महासागर में अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहता है. अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रयास चीन की वैश्विक सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की मंशा को दर्शाता है और इससे भारत की सुरक्षा स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, मई 2024 के मध्य में भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सीमा पार गोलीबारी और हमलों के बावजूद भारत की रणनीतिक सोच में चीन को प्राथमिक खतरे के रूप में देखा जा रहा है. भारत, चीन के प्रभाव को संतुलित करने और वैश्विक नेतृत्व भूमिका को मजबूत करने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय रक्षा साझेदारियों को प्राथमिकता दे रहा है, जिसके अंतर्गत सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, हथियार बिक्री और सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है. भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में त्रिपक्षीय सहभागिता भी बढ़ाई है और ‘क्वाड’, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ASEAN जैसे बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. चीन से तनाव कम, लेकिन सीमा विवाद बरकरार रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर 2024 के अंत में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के दो विवादित इलाकों से सेनाएं पीछे हटाने पर सहमति बनाई. हालांकि यह कदम सीमावर्ती तनाव को कुछ हद तक कम करता है, लेकिन सीमा विवाद अब भी अनसुलझा है. गौरतलब है कि 2020 में इसी इलाके में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प में जानें गई थीं. PAK के आतंकी ठिकानों पर भारत की मिसाइल कार्रवाई अप्रैल 2024 के अंत में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद से जुड़े ढांचागत ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. इसके बाद 7 से 10 मई के बीच दोनों देशों के बीच कई दौर की मिसाइल, ड्रोन, और ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ (आत्मघाती ड्रोन) से हमले हुए और भारी गोलीबारी भी हुई. 10 मई तक दोनों पक्षों के बीच पूर्ण युद्धविराम पर सहमति बन गई. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान तेजी से अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को आधुनिक बना रहा है और भारत को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है. यह रणनीति पाकिस्तान की सैन्य सोच और सीमा पर उसकी आक्रामकता को दर्शाती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन की आर्थिक और सैन्य उदारता पर निर्भर है. चीन से मिले संसाधनों और तकनीकी सहायता के बल पर पाकिस्तान ना सिर्फ अपने सैन्य ढांचे को मजबूत कर रहा है, बल्कि परमाणु क्षमताओं को भी विस्तार दे रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक, चीन-पाकिस्तान गठजोड़, भारत के लिए सामरिक रूप से दोहरा खतरा पैदा कर रहा है. एक तरफ LAC पर चीन का दबाव और दूसरी तरफ पाकिस्तान की परमाणु और सीमा पार पॉलिसी टेंशन बढ़ा रही है. पाकिस्तानी सेना के फोकस में रहेगा सीमा पार संघर्ष रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले साल में पाकिस्तान की सेना की शीर्ष प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ सीमा पार झड़पें शामिल रहेंगी. भारत के साथ सीमावर्ती तनाव, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां और कश्मीर को लेकर आक्रामक बयानबाजी इसी पॉलिसी का हिस्सा हैं. यह बात खासतौर पर उल्लेखनीय है कि भारत पहले ही कई मौकों पर पाकिस्तानी प्रायोजित आतंकवाद और नियंत्रण रेखा (LoC) पर संघर्ष विराम उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चिंता जता चुका है. रूस के साथ संबंध कायम, लेकिन निर्भरता घटी भारत 2025 तक रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखेगा, क्योंकि वो इन्हें अपने आर्थिक और रक्षा हितों के लिए जरूरी मानता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही मोदी सरकार ने रूस से सैन्य उपकरणों की नई खरीदारी में कटौती की हो, लेकिन रूस निर्मित टैंकों और लड़ाकू विमानों के बड़े भंडार के रख-रखाव के लिए अब भी भारत को रूसी स्पेयर पार्ट्स पर निर्भर रहना पड़ता है. यह सहयोग चीन-रूस के नजदीकी संबंधों के संतुलन के रूप में भी देखा जा रहा है. ‘मेड इन इंडिया’ पर जोर, सैन्य आधुनिकीकरण जारी भारत इस वर्ष भी ‘मेड इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देगा, ताकि घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त किया जा सके और सप्लाई चेन की चिंताओं को कम किया जा सके. भारत ने 2024 में अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण को जारी रखा. भारत ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि-I प्राइम मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) और अग्नि-V मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) का परीक्षण किया. इसके साथ ही भारत ने अपनी दूसरी परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बी को भी नौसेना में शामिल किया, जिससे उसकी परमाणु त्रयी (nuclear triad) को मजबूती मिली.  

दिल्ली में NDA की बैठक से बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए की राजनीतिक रणनीति के संकेत भी साफ

नई दिल्ली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने रविवार को दिल्ली में एकजुटता का प्रदर्शन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 20 राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल हुए. बैठक से तीन अहम राजनीतिक और रणनीतिक संदेश सामने आए. राष्ट्र की सुरक्षा पर निर्णायक कार्रवाई की सराहना, सामाजिक न्याय के लिए जातिगत जनगणना के समर्थन में प्रस्ताव और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर व्यापक मंथन हुआ. इसके साथ ही बैठक से बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए की राजनीतिक रणनीति के संकेत भी साफ तौर पर उभरकर सामने आए हैं. बैठक में ऑपरेशन सिंदूर और जातिगत जनगणना पर बधाई प्रस्ताव लाया गया. शिवसेना नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अभिनंदन प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की और कहा, ऑपरेशन सिंदूर ने आम भारतीयों में आत्मविश्वास और गर्व की नई भावना पैदा की है.   एकनाथ शिंदे ने कहा, हमने यह साबित कर दिया है कि ‘जो हमसे टकराएगा, वह मिट्टी में मिल जाएगा.’ यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि सच्चाई है. ‘Operation Sindoor’ ने सामान्य हिंदुस्तानियों को नया आत्मविश्वास और आत्मसम्मान प्रदान किया है. केंद्र सरकार की पॉलिसी, सेना के शौर्य, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साहस को हम सैल्यूट करते हैं. ‘देश की जनता को पीएम मोदी पर गर्व है’ शिंदे का कहना था कि मोदी जी ने तीन दिन पहले ही कहा था, ‘मोदी की नसों में लहू नहीं, बल्कि गरम सिंदूर बह रहा है’. मोदी जी, देश की 140 करोड़ जनता को आप पर गर्व है. देशवासियों का सौभाग्य है कि हमें आप जैसे साहसी, पराक्रमी और निस्सीम देशभक्त प्रधानमंत्री मिले. हम इस महत्वपूर्ण समय में अद्वितीय और पराक्रमी नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं. विशेष रूप से ऐसी गंभीर सुरक्षा चुनौतियों पर काबू पाने में उन्होंने हमेशा हमारे रक्षा बलों को लगातार समर्थन दिया है. इतिहास ऑपरेशन सिंदूर को उन लोगों को करारा जवाब देने के रूप में याद रखेगा, जिन्होंने भारत की शांतिपूर्ण विकास यात्रा को विवादित करने की गलती की. यह भारत की संप्रभुता और भारतीयों की सुरक्षा को हर चीज से ऊपर रखने की एनडीए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को उजागर करता है. ‘राष्ट्र हित के मामलों में सभी एकजुट हैं’ एकनाथ शिंदे ने आगे कहा, भारत किसी भी आतंकवादी हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा और यह भारत की शर्तों पर किया जाएगा. भारत कभी भी परमाणु ब्लैकमेल स्वीकार नहीं करेगा. भारत आतंकवादियों और उन्हें प्रायोजित करने वाली सरकारों के बीच अंतर नहीं करेगा. आने वाले दिनों में विभिन्न दलों के नेता विभिन्न देशों का दौरा करेंगे और शांति एवं आतंकवाद की बुराई को समाप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता के बारे में बातचीत करेंगे. यह प्रधानमंत्री मोदी जी का एक स्टेट्समैन जैसा दृष्टिकोण है और दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि राष्ट्रीय हित के मामलों में हम सभी एकजुट हैं. शिंदे ने कहा, एनडीए एक सुरक्षित, समृद्ध और एकजुट भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में नए दृढ़-निश्चय के साथ काम करना जारी रखने का संकल्प लेता है. अंत में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की परिषद के आयोजन के लिए मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. बैठक में 18 डिप्टी सीएम भी रहे मौजूद इससे पहले एनडीए की बैठक में शामिल होने पहुंचे पीएम मोदी का बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वागत किया. एकनाथ शिंदे, पवन कल्याण समेत अन्य नेताओं ने वेलकम किया. बैठक में UP के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो शामिल थे. 18 डिप्टी सीएम भी उपस्थित रहे. दो प्रस्तावों पर मुहर एनडीए की अहम बैठक का मकसद सुशासन और विकास की नई योजनाओं के साथ-साथ सियासी भी है. बिहार चुनाव भी एक मुद्दा है. बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए. दो प्रस्ताव भी पास किए गए. बैठक के क्या मायने? पहला प्रस्ताव भारतीय सशस्त्र बलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर बधाई देने के लिए पारित किया गया. दूसरे प्रस्ताव में आगामी जनगणना के दौरान जातिगत आंकड़ों के संकलन के सरकार के फैसले की सराहना की गई. यह कदम खासतौर पर बिहार जैसे राज्य में सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व की मांगों से जोड़कर देखा जा रहा है. बिहार में जाति आधारित राजनीति पर एनडीए विपक्ष को घेरने का मौका नहीं देना चाहता है. जानकारों का मानना है कि यह प्रस्ताव सामाजिक न्याय को लेकर एनडीए के दृष्टिकोण को मजबूती देता है, बल्कि विपक्ष की इस मुद्दे पर मोनोपॉली को चुनौती देता है. बैठक में शामिल रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दे पर अभिनंदन प्रस्ताव आगामी चुनाव को लेकर एनडीए की तैयारियों की ओर इशारा करता है. 2024 में एनडीए-3 के गठन के बाद से ये पहली बड़ी बैठक है.  

केरल में पहुंचने के बाद अब और कई राज्यों में मॉनसून पहुंच गया है, झमाझम बारिश का अलर्ट

मुंबई इस बार देश में मॉनसून की एंट्री समय से पहले ही हो गई है। इससे गर्मी की मार झेल रहे लोगों को काफी राहत मिली है। केरल में पहुंचने के बाद अब और कई राज्यों में मॉनसून पहुंच गया है, जोकि किसी खुशखबरी से कम नहीं है। महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत कई राज्यों में मॉनसून के पहुंचने से झमाझम बारिश शुरू हो गई है। हालांकि, अभी महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मॉनसून के पहुंचने में तीन दिन बाकी हैं। मौसम विभाग ने कहा कि मॉनसून रविवार को अरब सागर, कर्नाटक, पूरे गोवा, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और मिजोरम के कुछ हिस्सों, मणिपुर और नागालैंड के कुछ हिस्सों में पहुंच गया है। आईएमडी ने कहा, ”मॉनसून की उत्तरी सीमा देवगढ़, बेलगावी, हावेरी, मांड्या, धर्मपुरी, चेन्नई, आइजोल, कोहिमा से होकर गुजरती है। मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, मुंबई समेत महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों, बेंगलुरु समेत कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तमिलनाडु के बचे हुए हिस्सों, पश्चिम-मध्य और उत्तरी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों और अगले तीन दिनों में पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।” महाराष्ट्र में, तटीय कोंकण और मुंबई में पिछले दो दिनों से भारी प्री-मॉनसून बारिश हो रही है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने शनिवार को केरल में दस्तक दी, जो 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर इसका सबसे पहले आगमन था, जब यह 23 मई को दक्षिणी राज्य में पहुंचा था। आम तौर पर, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 1 जून तक केरल में अपनी शुरुआत करता है और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर करता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है। यह आमतौर पर 7 जून के आसपास महाराष्ट्र और 11 जून को मुंबई पहुंचता है।  

रूस ने यूक्रेन पर कर दिया अब तक का सबसे बड़ा हमला, हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत, भीषण तबाही

रूस कैदियों की रिहाई के बीच रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने यूक्रेन पर 367 ड्रोन और मिसाइल दाग दिए। इस हमले से यूक्रेन में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। यह युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला बताया जा रहा है। जानकारी के मुकाबले हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है जिसमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। वहीं दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। यूक्रेन ने दावा किया कि उसकी एयर फोर्स ने रूस के 266 ड्रोन और 45 मिसाइलों को मार गिराया। हालांकि नुकसान को पूरी तरह रोका नहीं जा सका। इस हमले में अपार्टमेंट्स और इमारतों को नुकसान हुआ है। कीव का कहना है कि रूस बलिस्टिक मिसाइल से भी हमला करने में चूक नहीं रहा है। जेलेंस्की ने डोनाल्ड ट्रंप को बताया जिम्मेदार दक्षिणी यूक्रेन के मिकोलाइव में रूस के ड्रोन अटैक में एक 77 साल के बुजुर्ग की जान चली गई। इसके अलावा एक अपार्टमेंट बुरी तरह तहस-नहस हो गया। इमारत के चारों पर मलबा पड़ा हुआ है। इस हमले के बाद वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बार फिर अमेरिका को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए डोनाल्ड ट्रंप ही जिम्मेदार हैं। जेलेंस्की ने कहा, अमेरिका और विश्व की चुप्पी व्लादिमीर पुतिन का उत्साहवर्धन कर रही है। रूस यूक्रेन पर आतंकी हमले कर रहा है। क्या यह उसपर प्रतिबंध लगाने के लिए काफी नहीं है? उन्होंने कहा कि बिना दबाव के कुछ भी बदलने वाला नहीं है। वहीं रूस और उसके सहयोगी पश्चिमी देशों में ऐसे ही तबाही मचाते रहेंगे। वहीं रूस ने दावा किया है कि उसने यूक्रेन के 95 ड्रोन मार गिरए हैं। इनमें से 12 को मॉस्को के पास इंटरसेप्ट किया गया। बता दें कि तुर्की में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल के बीच शांति वार्ता हुई थी। दो घंटे से भी कम की इस बातचीत में कोई हल नहीं निकल पाया। यूक्रेन चाहता था कि रूस कम से कम एक महीने के सीजफायर के लिए तैयार हो। इसके बाद बातचीत को आगे बढ़ाया जाए। वहीं रूस सीजफायर के लिए तैयार नहीं था। दोनों देशों के बीच 1000 बंदियों की रिहाई को लेकर डील हुई थी।  

24 घंटे में कोरोना से 2 की मौत, एक्टिव मरीजों की संख्या पहुंची 363, 27 नए केस मिले

नई दिल्ली सिंगापुर-थाइलैंड में तहलका मचाने के बाद कोरोना के नया वैरिएंट एक बार फिर से लोगों को डराने लगा है। देश के कई इलाकों में कोविड-19 (COVID-19) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। वहीं कोरोना अब जानलेवा साबित होने लगा है। देश में कोरोना के नए वैरिएंट से बीते 24 घंटे में 2 मरीजों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक- बेंगलुरु में कोरोना पीड़ित 84 साल के बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया है। इससे पहले ठाणे में 21 साल के युवक की मौत हुई है। देशभर में कोरोना के मामलों में लगातार बढोतरी के बाद केंद्र सरकार ने ए़डवाइजरी जारी की है। वहीं इसे लेकर कई राज्य की सरकारों ने अस्पतालों को अलर्ट कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकार ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी अस्पतालों को सतर्क रहने और कोविड से निपटने की पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। ये पहली बार है जब दिल्ली में लगभग तीन वर्षों के बाद COVID-19 मामले सामने आए हैं। 24 मई (शनिवार) को 27 नए कोरोना केस सामने आए। महाराष्ट्र के ठाणे में 8, राजस्थान-कर्नाटक में 5, उत्तराखंड-हरियाणा में 3-3, मध्य प्रदेश के इंदौर में 2 और यूपी के नोएडा में एक मामला सामने आया है। कुल एक्टिव केसों की संख्या 363 पहुंच गई है। शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने समीक्षा बैठक की। इस बैठक में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (DGHS) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के अधिकारी शामिल हुए।स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कोविड के नए मामले केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों से सामने आए हैं। हालांकि, ज्यादातर केस हल्के (माइल्ड) हैं और मरीज होम आइसोलेशन में ठीक हो रहे हैं। नये वेरिएंट को WHO ने चिंताजनक नहीं माना भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के मुताबिक भारत में कोविड-19 के वेरिएंट NB.1.8.1 का एक और LF.7 प्रकार के चार मामले मिले हैं। चीन और एशिया के बढ़ते मामलों में यही वैरिएंट दिख रहा है। WHO ने इन्हें चिंताजनक नहीं माना है, लेकिन निगरानी में रखे गए वैरिएंट के रूप में कैटेगराइज किया है। दिल्ली में भी अलर्ट राजधानी दिल्ली में कोरोना के 23 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। संक्रमण रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अडवाइरी जारी की है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि कोरोना से किसी तरह की घबराने की बात नहीं है। सरकार स्थिति पर पूरा ध्यान दे रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। कर्नाटक सरकार ने जारी की एडवाइजरी कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा है कि कोविड के नए मामलों को लेकर डर वाली कोई बात नहीं है। इस साल कर्नाटक में कोरोना के कुल 35 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं बीते 15 दिनों में केस तेजी से पाए गए हैं। शनिवार को बेंगलुरु में कोरोना से संक्रमित एक 84 साल के शख्स की मौत हो गई थी। वहीं बेंगलुरु में एक 9 महीने का बच्चा भी कोरोना संक्रमित पाया गया है। जानकारी के मुताबिक बच्चे की हालत स्थिर है। उत्तराखंड में सामने आए दो केस उत्तराखंड में कोरोना के दो मामले सामने आए हैं। मरीजों को ऋषिकेश एम्स में भर्ती करवाया गया है। हालांकि प्रदेश सरकार का कहना है कि कोरोना के मामले बेहद हल्के हैं और किसी तरह के डर की कोई बात नहीं है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि ये मरीज राज्य के बाहर से ही संक्रिमित होकर आए थे। JN.1 वैरिएंट इम्यूनिटी कमजोर करता है​​​​​ JN.1, ओमिक्रॉन के BA2.86 का एक स्ट्रेन है। इसे अगस्त 2023 में पहली बार देखा गया था। दिसंबर 2023 में WHO ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया। इसमें करीब 30 म्यूटेशन्स हैं, जो इम्यूनिटी कमजोर करते हैं। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार JN.1 अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ज्यादा आसानी से फैलता है, लेकिन यह बहुत गंभीर नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में यह सबसे आम वैरिएंट बना हुआ है। JN.1 वैरिएंट के लक्षण कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक रह सकते हैं।

मोहन भागवत ने कहा- भारत के पास शक्तिशाली बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक स्पष्ट और गंभीर आकलन पेश करते हुए कहा कि भारत के पास शक्तिशाली बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब संघ अपनी शताब्दी वर्ष की तैयारी कर रहा है और हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ सफलतापूर्वक ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया है।  विशेष साक्षात्कार में भागवत ने कहा, “हम विश्व व्यापार पर प्रभुत्व जमाने के लिए ताकतवर नहीं बनना चाहते, बल्कि इसलिए कि हर कोई शांतिपूर्ण, स्वस्थ और सशक्त जीवन जी सके। हमारी सीमाओं पर बुराई की ताकतें सक्रिय हैं, इसलिए हमें शक्ति अर्जित करनी ही होगी।” भागवत ने इस बात पर बल दिया कि सुरक्षा केवल सरकार या सेना का कार्य नहीं है, बल्कि समाज से शुरू होती है। उन्होंने हिंदू समाज को आत्मरक्षा के लिए तैयार रहने की सलाह दी, “आपको खुद अपनी रक्षा करनी होगी। दूसरों का इंतजार मत कीजिए। जब हिंदू मजबूती से खड़े होते हैं, तब दुनिया उन्हें गंभीरता से लेती है।” मोहन भागवत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सीमाओं या बैरकों तक सीमित न मानते हुए इसे मानसिक, सांस्कृतिक और पूर्व-सक्रिय बताया। उन्होंने कहा कि जातीय समरसता, पारिवारिक मूल्यों और पारिस्थितिकी के प्रति ज़िम्मेदारी भी सुरक्षा के घटक हैं। उन्होंने कहा कि एक टूटा हुआ समाज अपनी रक्षा कैसे करेगा? युद्ध न हो, इसकी तैयारी करो मोहन भागवत ने कहा, “ऐसी शक्ति हमें प्राप्त हो कि हम वैश्विक स्तर पर अजेय बन जाएं। सच्ची ताकत आंतरिक होती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें दूसरों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। कोई भी ताकत चाहे कई देशों की संयुक्त शक्ति हो, हमें पराजित न कर सके। हम युद्ध की कामना नहीं करते, लेकिन युद्ध न हो इसकी तैयारी करते हैं।” हिंदू अल्पसंख्यकों की चिंता मोहन भागवत ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की बात करते हुए कहा कि अब वे भागने की बजाय लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “इस बार बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचार के खिलाफ जो आक्रोश सामने आया वह अभूतपूर्व है। अब स्थानीय हिंदू भी कह रहे हैं कि हम भागेंगे नहीं, अधिकारों के लिए लड़ेंगे। संघ का यही उद्देश्य है। जहां कहीं भी हिंदू हैं, हम उनके लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के अंतर्गत हर संभव प्रयास करेंगे।”  

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